Atharva Veda
6
अध्याय 6 / 20

Kanda 6

काण्ड 6

453 श्लोकभाग 7/8 · श्लोक 123.1–141.3

पूर्ण अध्याय पाठ69 श्लोक

अध्याय 6

श्लोक 123.1

सौमनसम्।१-५ भृगुः।विश्वे देवाः।त्रिष्टुप्, ३ द्विपदा साम्म्यनुष्टुप्, ४ एकावसाना द्विपदा प्राजापत्या भुरिगनुष्टु।ए॒तं स॑धस्थाः॒ परि॑ वो ददामि॒ यं शे॑व॒धिमा॒वहा॑ज्जा॒तवे॑दाः ।अ॒न्वा॒ग॒न्ता यज॑मानः स्व॒स्ति तं स्म॑ जानीत पर॒मे व्योऽमन्

saumanasam| 1-5 bhṛguḥ| viśve devāḥ| triṣṭup, 3 dvipadā sāmmyanuṣṭup, 4 ekāvasānā dvipadā prājāpatyā bhuriganuṣṭu| etaṃ sadhasthāḥ pari vo dadāmi yaṃ śevadhimāvahājjātavedāḥ | anvāgantā yajamānaḥ svasti taṃ sma jānīta parame vyo'man

हिन्दी अर्थ

तम् = पिज्च ्रवयवे (तुदादिः), इन रोगो के किसीभौ प्रवपव को, ग्र॑श को वेदाहं तस्य॑ मेषं चीपुद्रररमिचक्षणम् ॥२॥ (बलास) है बलक्षयकारी रोग खासी तथा श्वास रोग (ते) तेरे ो दो विकार (कक्षे) कोख अर्थात् बाहूमूल ॥ ( ५ ह रर (शु भ दो अण्डोंमे (भ्रपधितौ) ्राश्चित रहते है, (तस्य) उस विकार की (भेषजम्) ओषध को (अहम्, पेद) ग जानता ह, बह है यो अङ्कयो यः कर्यो यो अश्ष्योविसरप॑कः।

English

God! An Omen from the sky

अध्याय 6

श्लोक 123.2

जा॒नी॒त स्मै॑नं पर॒मे व्योऽम॒न् देवाः॒ सध॑स्था वि॒द लो॒कमत्र॑ ।अ॒न्वा॒ग॒न्ता यज॑मानः स्व॒स्तीऽष्टापू॒र्तं स्म॑ कृणुता॒विर॑स्मै

jānīta smainaṃ parame vyo'man devāḥ sadhasthā vida lokamatra | anvāgantā yajamānaḥ svastī'ṣṭāpūrtaṃ sma kṛṇutāvirasmai

हिन्दी अर्थ

का° ६। अनु १३। पू० १२७ शथवंवेद-माष्य २२१ करते ष प्रेरणो (तुदादिः ) । विसल्पकम् = विसपकम्, रलयोरभेदः। दायक तथा कल्याणकारी दिनो वाला (रसात् इति) हो जाय, इसलिये । इस धरूमकेप्रकटदहो जाने के पश्चातु ही शेष रूप सूयं प्रादि प्रकट होते

English

From the high firmament, yea, out of heaven a water-drop with dew on me hath fallen. I, Agni! share the merit of the pious, with vigour, milk, and hymns and sacrifices. If from a tree that fruit hath fallen downward if, aught from air that is vāyu.

अध्याय 6

श्लोक 123.3

देवाः॒ पित॑रः॒ पित॑रो॒ देवाः॑ ।यो अस्मि॒ सो अ॑स्मि

devāḥ pitaraḥ pitaro devāḥ | yo asmi so asmi

हिन्दी अर्थ

के दबानेपरमी प्रकटहो जाता है। अतः यह यौगाम्पासमें प्रङ्खनही। जिस योगाभ्यासी को “धूम प्रकृटहो जाता है मानो उसके लिये भद्र दिन २३२ मयववेद-भाष्य कां० ६1 अनु° १३17. १२८ ॥ (भद्राहम् ) सुखदायक प्रौर कल्याणकारी दिन हौ (नः) हमारे लिये ' लिये (सायम्) सायकालमे । (भद्राम्) मद्रदिन हो (नः) हमारे लिये ॥ यो नो भद्रादषकरः सायं नक्तपथो द्विव ।

English

Where it hath touched my body or my garment, thence may the Waters drive Destruction backward.

अध्याय 6

श्लोक 123.4

स प॑चामि॒ स द॑दामि॒ ।स य॑जे॒ स द॒त्तान्मा यू॑षम्

sa pacāmi sa dadāmi | sa yaje sa dattānmā yūṣam

हिन्दी अर्थ

(नक्षत्रराज) टे खद्योतो के राजा (शकवृम) शक्तिशानी घूम ! (यः) से सुखदायक तथा कल्पाणकारी दिन, है शकघूम ! तु हमरे लिये कर् । आष्या- , आध्यात्मिक चन्द्रमा है शशी" ° उप० २।११) । के लि भाकृतिक शक्तियों द्वारा सुल प्रदान करा. तकता है (योग ३।४४; ४८ ४६)।

English

It is a fragrant ointment, happy fortune, sheen all of gold, yea, purified from blemish. Spread over us are all purifications. Death and Malignity shall not subdue us. Glorification of a war-chariot

अध्याय 6

श्लोक 123.5

नाके॑ राज॑न् प्रति॑ तिष्ठ॒ तत्रै॒तत् प्रति॑ तिष्ठतु ।वि॒द्धि पू॒र्तस्य॑ नो राज॒न्त्स दे॑व सु॒मना॑ भव

nāke rājan prati tiṣṭha tatraitat prati tiṣṭhatu | viddhi pūrtasya no rājantsa deva sumanā bhava

हिन्दी अर्थ

कां० ६। अनु० १३। सू° १२६ अयववेद-भाष्य २३३ जिस तूने (नः) हमारे लिये (सायम्, नक्तम्, अथो दिवा) सायंकाल, रात्री २३४ अथववेद-भाष्य का०६। अनु १३० । सू० १३० होते है । शौशम बहुमूल्य वृक्ष होता है। श्रतः शीकशमरूपी रश्व की है, (तेन) उसद्रा(मा) मभ(ममिनप्)एेद्वयं वाला (कृण्)कर,(अरातयः

English

Mayst thou, O Tree, be firm indeed in body, our friend that furthers us, a goodly hero. Put forth thy strength, compact with thongs of leather, and let thy rider win all spoils of

अध्याय 6

श्लोक 124.1

निर्ऋत्यपस्तरणम्।१-३ अथर्वा।दिव्या आपः।त्रिष्टुप्।दि॒वो नु मां बृ॑ह॒तो अ॒न्तरि॑क्षाद॒पां स्तो॒को अ॒भ्यऽपप्तद् रसे॑न ।समि॑न्द्रि॒येण॒ पय॑सा॒हम॑ग्ने॒ छन्दो॑भिर्य॒ज्ञैः सु॒कृतां॑ कृ॒तेन॑

nirṛtyapastaraṇam| 1-3 atharvā| divyā āpaḥ| triṣṭup| divo nu māṃ bṛhato antarikṣādapāṃ stoko abhya'paptad rasena | samindriyeṇa payasāhamagne chandobhiryajñaiḥ sukṛtāṃ kṛtena

हिन्दी अर्थ

रेरे, तथा (यः) जो (पुनः सरः) (त सरण करता हूना प्राताहै, जो (वृक्षेषु) वृक्षो मे (आहितः) स्थित होता है, (तेन) उस द्वारा (मा). मृं (मगिनम्) रवय वाला (कृणु) कर, (अप द्रान्तु अरातयः) अथे पूवं यह मर्ह्पी मगदहै, नानाविध फल । ये रेश्वयरूष ह, ओर बार- वार सरण करते हए प्रतिवषं वृक्षों पर भतिदहैँ। वंके पदचात् भ्रातेरहै, अतः इनके आने कौ गतिको सरणकरनाकहाहै। सरण है शनैःशनैः प्राणने +“ घा” धारणपोषणयोः जिस द्वारा प्राणकाश्रीर मेघारण कां० ६। मअनु० १३। मू० १३० प्रयवंवेद-माष्य २३५

English

battle. Its mighty strength was borrowed from the heaven and earth: its conquering force was brought from sovrans of the wood.

अध्याय 6

श्लोक 124.2

यदि॑ वृ॒क्षाद॒भ्यप॑प्त॒त् फलं॒ तद् यद्य॒न्तरि॑क्षा॒त् स उ॑ वा॒युरे॒व।यत्रास्पृ॑क्षत् त॒न्वो॒३यच्च॒ वास॑स॒ आपो॑ नुदन्तु॒ निरृ॑तिं परा॒चैः

yadi vṛkṣādabhyapaptat phalaṃ tad yadyantarikṣāt sa u vāyureva| yatrāspṛkṣat tanvo3yacca vāsasa āpo nudantu nirṛtiṃ parācaiḥ

हिन्दी अर्थ

देवाः प्रहिणुत स्मरमपो मामनु शोचतु ॥१॥ शरीर रथ पय विजय पाने वालोको सम्बन्धिनी, (अप्सरसाम्) सूपवती के कारण पति रुष्ट होकर गृह ल्यागकर चला गयादहै, तव पर्नीके उदुगारोंका वणेन इन तीन सूक्तं मे कियागप्राहै। वेदिक पत्तियां अपने कारणवश् पत्ति वियौगमें पत्तिके वापिस जनेकी कामना करतो रहती ह! दूपवती होती हूरईदमभी पर पुरुष को कामना नहीं करती, देवाः प्रहिणुत स्मरमसौ मामनु शोचतु ॥२॥

English

Honour with sacrifice the Car like Indra’s bolt, the Car girt round with straps, the vigour of the floods.

अध्याय 6

श्लोक 124.3

अ॒भ्यञ्ज॑नं सुर॒भि सा समृ॑द्धि॒र्हिर॑ण्यं॒ वर्च॒स्तदु॑ पू॒त्रिम॑मे॒व।सर्वा॑ प॒वित्रा॒ वित॒ताध्य॒स्मत् तन्मा ता॑री॒न्निरृ॑ति॒र्मो अरा॑तिः

abhyañjanaṃ surabhi sā samṛddhirhiraṇyaṃ varcastadu pūtrimameva| sarvā pavitrā vitatādhyasmat tanmā tārīnnirṛtirmo arātiḥ

हिन्दी अर्थ

(असौ) ताकि वह् (माम् भनु) मेरा भ्रनुस्मरण करके (शोचतु) श'का- १ सूक्तम देवाः = मतः, मानसून वाग्रुएं आदि (सूक्त १३०।४) । कवि वियोगी पति-पत्नी को ग्पाकरुलित कर उत में सांमनस्य पैदाकरदेतेर्है। देवाः का २३६ मधर्ववेद-माप्य का० ९। अन्° १३। सू० १३

English

Thou bolt of Indra, vanguard of the Maruts, close knit to Varuna and child of Mitra, As such, accepting gifts which here we offer, receive, O godlike

अध्याय 6

श्लोक 125.1

वीरस्य रथः।१-३ अथर्वा।वनस्पतिः।त्रिष्टुप्, २ जगती।वन॑स्पते वी॒ड्वऽङ्गो॒ हि भू॒या अ॒स्मत्स॑खा प्र॒तर॑णः सु॒वीरः॑ ।गोभिः॒ संन॑द्धो असि वी॒डय॑स्वास्था॒ता ते॑ जयतु॒ जेत्वा॑नि

vīrasya rathaḥ| 1-3 atharvā| vanaspatiḥ| triṣṭup, 2 jagatī| vanaspate vīḍva'ṅgo hi bhūyā asmatsakhā prataraṇaḥ suvīraḥ | gobhiḥ saṃnaddho asi vīḍayasvāsthātā te jayatu jetvāni

हिन्दी अर्थ

देवाः महिणत स्मरमसौ मामनु शोचतु ॥२॥ मन्तमेंहै। पत्नी नहीं चाहती कि स्मर का उद्रेक उसमे हौ ताकि वह पति कास्मरण करे। इसमे वह॒ अपनी पराजय समती है। इसलिये वह (उन्मादय) पति को उन्मत्त कर, ताकि (असौ) वह पति (माम्) मेरा (भ्रनु) अनुस्मरण करके (शोचतु) शोकाग्रस्त हो जाय । कविसम्प्रदायानुसार वर्षा ऋतु स्मरोटीपिका है । अतः विरहिता पत्नी मरुतः को सम्बोधित करती है, पति के वापिस लौट श्राने के लिए।

English

Chariot, these oblations. Glorification of the war drum

अध्याय 6

श्लोक 125.2

दि॒वस्पृ॑थि॒व्याः पर्योज॒ उद्भृ॑तं॒ वन॒स्पति॑भ्यः॒ पर्याभृ॑तं॒ सहः॑ ।अ॒पामो॒ज्मानं॒ परि॒ गोभि॒रावृ॑त॒मिन्द्र॑स्य॒ वज्रं॑ ह॒विषा॒ रथं॑ यज

divaspṛthivyāḥ paryoja udbhṛtaṃ vanaspatibhyaḥ paryābhṛtaṃ sahaḥ | apāmojmānaṃ pari gobhirāvṛtamindrasya vajraṃ haviṣā rathaṃ yaja

हिन्दी अर्थ

देवाः प्र हिणुत स्मरमसौ मामनु शोचतु ॥१५ (शीषतः) है पति ! मेरे सिरमे (आध्यः) चिन्ताओं को (नि का ६। श्रनु० १३ सु० १३२ अथवेवेद-भाष्य २३७ के ्रधोमाग में (नि) नितरां चिन्ताएं पराप्त कराती हूं । (देवाः शोचतु)

English

Send forth thy voice aloud through earth and heaven, and let the world in all its breadth regard thee. O Drum, accordant with the Gods and Indra, drive thou afar, yea, very far, our foemen.

अध्याय 6

श्लोक 125.3

इन्द्र॒स्यौजो॑ म॒रुता॒मनी॑कं मि॒त्रस्य॒ गर्भो॒ वरु॑णस्य॒ नाभिः॑ ।स इ॒मां नो॑ ह॒व्यदा॑तिं जुषा॒णो देव॑ रथ॒ प्रति॑ ह॒व्या गृभाय

indrasyaujo marutāmanīkaṃ mitrasya garbho varuṇasya nābhiḥ | sa imāṃ no havyadātiṃ juṣāṇo deva ratha prati havyā gṛbhāya

हिन्दी अर्थ

स्मरोदीषन की याचनाद्वारा स्मरोद्रेक कर पति को वापिसभाजाने मे बाधित करतो है । तिरामि=“तिरः मत इति प्राप्तस्य" (निरुक्त देवाः प्रहिणुत स्म्रमसो मामनु शोचतु ॥२॥ कुल, मति वालाहोजा, ग्राकूते) है पतिनिष्ठ संकल्प (इदम्) इस (यत्) जो (त्रियोजनम्) तीन योजनो मे परिमित दुर देश में (धावसि) तु' चला गया है, (पञ्च योजनम्) या पांच योजनो में परिमित दूरदेश मे, मथवा (आरिवनम्) भ्रव घ्रारा प्रापणीय दुर देशमेतु चला गयारहै, तो भी (ततः) वहं से (त्वम्) है पति ! तुः (पृनःआ श्रधसि) फिर वापस

English

Thunder out strength and fill us full of vigour, yea, thunder forth and drive away misfortunes. Drive hence, O Drum, drive thou away mischances. Thou art the fist of Indra, show thy

अध्याय 6

श्लोक 126.1

दुन्दुभिः।१-३ अथर्वा।दुन्दुभिः।भुरिक् त्रिष्टुप्, ३ पुरोबृहतीगर्भा त्रिष्टुप्।उप॑ श्वासय पृथि॒वीमु॒त द्यां पु॑रु॒त्रा ते॑ वन्वतां॒ विष्ठि॑तं जग॑त्।स दु॑न्दुभे स॒जूरिन्द्रे॑ण दे॒वैर्दू॒राद् दवी॑यो॒ अप॑ सेध॒ शत्रू॑न्

dundubhiḥ| 1-3 atharvā| dundubhiḥ| bhurik triṣṭup, 3 purobṛhatīgarbhā triṣṭup| upa śvāsaya pṛthivīmuta dyāṃ purutrā te vanvatāṃ viṣṭhitaṃ jagat| sa dundubhe sajūrindreṇa devairdūrād davīyo apa sedha śatrūn

हिन्दी अर्थ

पञ्च योजन == ४० या ४५ मील । धावसि चला गया हैया दौड़ गयाहै। हारा (तपासि) मँ पत्नी परन्तापक्रारो करती हूं यह् जन साधारण जल नहीं, श्रपितु शारीरिक जल है,--रक्तं रूपी जन। वह निज संतापके श्लासनके लिये पत्नी के पास लौट अए। वरुणा रक्त रूपौ जल कामी प्रधिपतिहै, मौर विरह मे इस जल द्वारा संतापितत करना

English

firmness. Conquer those yonder and let these be victors. Let the Drum speak aloud as battle’s signal. Let our men, winged with horses, fly together. Let our car- warriors, Indra! be triumphant.

अध्याय 6

श्लोक 126.2

आ क्र॑न्दय॒ बल॒मोजो॑ न॒ आ धा॑ अ॒भि ष्ट॑न दुरि॒ता बाध॑मानः ।अप॑ सेध दुन्दुभे दु॒च्छुना॑मि॒त इन्द्र॑स्य मु॒ष्टिर॑सि वी॒डय॑स्व

ā krandaya balamojo na ā dhā abhi ṣṭana duritā bādhamānaḥ | apa sedha dundubhe ducchunāmita indrasya muṣṭirasi vīḍayasva

हिन्दी अर्थ

गृहस्थ धमं को श्रङ्गीभुत स्वाभाविक भावना है 1. ततं तपामि वरूणस्य धर्मणा ॥२॥ (विवे देवाः) संसार के प्रन्य॒“मादक-तत्व' जो कि जीवन के घटक (दिवादिः) । ये हैव णक्तियां है । जिसका प्रतिधादन कोडा आदि दाय + दे । शभ्सु अन्तः" दारा शारीरिक जल भी अभिप्रेत हो सकते रहै । यथा- जधरतरेद-माष्पर कार ६। बनु° १३। भू, १३२.

English

A charm to banish various diseases Of abscess, of decline, of inflammation of the eyes. O Plant,

अध्याय 6

श्लोक 126.3

प्रामूं ज॑या॒भी॒३मे ज॑यन्तु केतु॒मद् दु॑न्दुभिर्वा॑वदीतु ।समश्व॑पर्णाः पतन्तु नो॒ नरो॒ऽस्माक॑मिन्द्र र॒थिनो॑ जयन्तु

prāmūṃ jayābhī3me jayantu ketumad dundubhirvāvadītu | samaśvaparṇāḥ patantu no naro'smākamindra rathino jayantu

हिन्दी अर्थ

का ६।.श्रनु° १३।. सूर १३२ अयवंवेद-भाष्य ---- जीवात्मा कौ चेतनता शरीर को चेत्न सा बनाए रखती है, जीवा. त्माजव शरोरका त्याग कर देताहैतो क्षरीर में चेत्तनता भी नहीं रहती । शरीर को चेतनता की सत्ता, शरीरम स्मर की भी सत्ता होती है । शेष पूर्ववत मन्त्र (१) सञ्चार करती हँ । शेषशपूववत् मन्द्र()। प्राण है बाह्रकीवायु का नासिक द्वारा फफ ओर शरीर में प्रवेश। तयाप्रपानदहैशशरीर से उसका श्रपगत होना। प्रपानद्वारा शरीरके मल के निकल जाने से शरीर की शुद्धि होती रहती.है। इस द्ष्टिसे गुदादवाराः वायु भौ ग्रपगत हुई्पेटको शुद्ध करतीहै १ १८ इ8 वायु कोभी अपान

English

Of penetrating pain, thou Herb, let not a particle remain. Those nerves of thine, Consumption! which stand closely hidden in thy groin 97

अध्याय 6

श्लोक 127.1

यक्ष्मनाशनम्।१-३ भृग्वङ्गिराः।यक्ष्मनाशनम्, वनस्पतिः।अनुष्टुप्, ३ त्र्यवसाना षट्-पदा जगती।वि॒द्र॒धस्य॑ ब॒लास॑स्य॒ लोहि॑तस्य वनस्पते ।वि॒सल्प॑कस्योषधे॒ मोच्छि॑षः पिशि॒तं च॒न

yakṣmanāśanam| 1-3 bhṛgvaṅgirāḥ| yakṣmanāśanam, vanaspatiḥ| anuṣṭup, 3 tryavasānā ṣaṭ-padā jagatī| vidradhasya balāsasya lohitasya vanaspate | visalpakasyoṣadhe mocchiṣaḥ piśitaṃ cana

हिन्दी अर्थ

मुक्त १३०. १३१, १३२ मँ किसो ठेतिह्।सिक वृत्त का कथन नही, स्थित हो जाती है, उसी का कथन इन सूक्तोमे हुजाहै। २४० श्रथववेद-माष्य कां ६। अनु° १३ । सु° १३१. (यः देवः) जिस प्राचार्य देवने (इमाम् मेखलाम्) इस मेखला को (आबबन्ध) हमसे पूवेकेब्रह्मतरारियों को बान्धा, (यः) जिसने (सं ननाह) वतमान में सन्द किया, तयग्रार किया, भौर (यः) जिसने (उ)

English

I know the balm for that disease: the magic cure is Sipudru. We draw from thee piercing pain that penetrates and racks thy limbs,

अध्याय 6

श्लोक 127.2

यौ ते॑ बलास॒ तिष्ठ॑तः॒ कक्षे॑ मु॒ष्कावप॑श्रितौ ।वेदा॒हं तस्य॑ भेष॒जं ची॒पुद्रु॑रभि॒चक्ष॑णम्

yau te balāsa tiṣṭhataḥ kakṣe muṣkāvapaśritau | vedāhaṃ tasya bheṣajaṃ cīpudrurabhicakṣaṇam

हिन्दी अर्थ

ही (नः) हमारे साय (युयोज) उसे संयुक्त किया; (यस्य) गौरजिस (इच्छात्) चाहे, (सःउ) वहं दही (नः) हमें (विमुञ्चात्) मेखलासे कौशिक सूत्र ५७।१ मौ उपनयन कर्मभे सूक्तका विनियोग किथाहै। स मेखले ; 1 ( प्रभिहुतः) ब्रह्माचारी के प्रति गर षु 9 (अहूता ) । ।

English

That pierces ears, that pierces eyes, the abscess, and the heart’s disease. Downward and far away from thee we banish that unknown. decline. A charm for fair weather

अध्याय 6

श्लोक 127.3

यो अङ्ग्यो॒ यः कर्ण्यो॒ यो अ॒क्ष्योर्वि॒सल्प॑कः ।वि वृ॑हामो वि॒सल्प॑कं विद्र॒धं हृ॑दयाम॒यम्।परा॒ तमज्ञा॑तं॒ यक्ष्म॑मध॒राञ्चं॑ सुवामसि

yo aṅgyo yaḥ karṇyo yo akṣyorvisalpakaḥ | vi vṛhāmo visalpakaṃ vidradhaṃ hṛdayāmayam| parā tamajñātaṃ yakṣmamadharāñcaṃ suvāmasi

हिन्दी अर्थ

तू (मेवलं) है मेखना । (व्रीरघ्नी) वौरोको प्राप्त होने वाली (भष) हो । ¦ का०६। अनु० १३। सू° १३३- अथवेपेद-भाष्य २४१ प्याय करते रहै, इसमें वाधक हैब्रह्मचयेका विप्लुत होना। मेखला का म हं, (अहम्) वह॒ र्म (यमाय) यम-नियमों के पालन के लिये, (भूतात्) पयदशंक मानता है। मृत्यु है परमेश्वर, यया “स एव म॒युः

English

What time the heavenly bodies chose the Weather Prophet as their King, They brought him favouring weather, and, Let this be his do- main, they said.

अध्याय 6

श्लोक 128.1

राजा १-४ अङ्गिराः।सोमः, शकधूमः।अनुष्टुप्।श॒क॒धूमं॒ नक्ष॑त्राणि॒ यद् राजा॑न॒मकु॑र्वत ।भ॒द्रा॒हम॑स्मै॒ प्राय॑च्छन्नि॒दं रा॒ष्ट्रमसा॒दिति॑

rājā 1-4 aṅgirāḥ| somaḥ, śakadhūmaḥ| anuṣṭup| śakadhūmaṃ nakṣatrāṇi yad rājānamakurvata | bhadrāhamasmai prāyacchannidaṃ rāṣṭramasāditi

हिन्दी अर्थ

१. देखो धचिकेता ओर मृत्यु का संवाद ( कठ-उपनिषद् ) । रेभ्रे भ्रथवेवेद-माष्य कां० ६। श्रनु° १३. सूर १३३ इसलिये मन्त्र मे “पुरषम्” पद पठित है । श्रद्धाय दृदिता तपसोऽधिं जाता स्वस छ्ौणां भूटदरता वभूव । (बभूव) हुई है । (सा) वहतु (मेखले) है मेखला (नः) हमारे लिये या हम मेँ (मतिम्) मननशक्ति का (ब्राघहि) ञाधान कर, (मेवाम्) मेधा

English

May we have weather fair at noon, May we have weather fair at eve, Fair weather when the morning breaks, fair weather when the night is come. Fair weather to the day and night, and to the stars and sun and moon.

अध्याय 6

श्लोक 128.2

भ॒द्रा॒हं नो॑ म॒ध्यंदि॑ने भद्रा॒हं सा॒यम॑स्तु नः ।भ॒द्रा॒हं नो॒ अह्नां॑ प्रा॒ता रात्री॑ भद्रा॒हम॑स्तु नः

bhadrāhaṃ no madhyaṃdine bhadrāhaṃ sāyamastu naḥ | bhadrāhaṃ no ahnāṃ prātā rātrī bhadrāhamastu naḥ

हिन्दी अर्थ

ग्रात्मिक बल का (नः)हमारे लिये याहममें (षेहि) आधान कर। मेखला मानो दुहिता के सच्श ब्रहाचारियों की कामनाश्रों को पूरं कर सकती है; दुहिता नदह प्रपूरणे (श्रदादिः)। मेखला ऋषियों कौ स्वसा ऋषियों को श्नोरसरण करने वासी । भूतकृताम् “मध्यपदलोपी समास", (याम् त्वा) जिस तुको (पूते) पूवेकाल के, (भूतकृतः) सत्स्वरूप परमेडवर द्वारा निदिष्ट कतव्य का पालन करने वाले (षयः) ऋषियों

English

Give favourable weather thou, King, Weather Prophet, unto us. Be worship ever paid to thee, O Weather Prophet, King of

अध्याय 6

श्लोक 128.3

अ॒हो॒रा॒त्राभ्यां॒ नक्ष॑त्रेभ्यः सूर्याचन्द्र॒मसा॑भ्याम्।भ॒द्रा॒हम॒स्मभ्यं॑ राज॒न्छक॑धूम॒ त्वं कृ॑धि

ahorātrābhyāṃ nakṣatrebhyaḥ sūryācandramasābhyām| bhadrāhamasmabhyaṃ rājanchakadhūma tvaṃ kṛdhi

हिन्दी अर्थ

का० ६। अनु० १३। सू० १३४ भयवेवेद-भाष्य २४३ (मेखले) दे मेवल। ! (माम्) मुभे (परिष्वजस्व) कटिमागके चारों ओर् भरालिद्कित कर, (दोर्वाधुल्वाय) मेरी दीधे श्रायु के लिये। पूरके ऋषयः --पूर्वं सृष्टि के क्षि, या मुभे पूवंकालः के ऋषि,। सूचित करतो है । वरह्मवधंसे शरीर बलवान् ओर नीरोग होकर दीर्घायु वाला होत! है । मेखला = तडाग, कटिबन्वं । ।

English

Star s, Who gavest us oo weather in the evening and by night and day! A charm for success and happiness

अध्याय 6

श्लोक 128.4

यो नो॑ भद्रा॒हमक॑रः सा॒यं नक्त॒मथो॒ दिवा॑ ।तस्मै॑ ते नक्षत्रराज॒ शक॑धूम॒ सदा॒ नमः॑

yo no bhadrāhamakaraḥ sāyaṃ naktamatho divā | tasmai te nakṣatrarāja śakadhūma sadā namaḥ

हिन्दी अर्थ

वासनाओं से वविध्यत, ग्रत एव विषय जाल वाली प्रशुद्धि, विनातपके चित्त-भिश्र नहीं डो सक्ती, इसलिये.तप का कथनत कियादहै। वहु तप वहीं तकं करना चाहिए जहां तक कि चित्त की प्रसन्नता बनी रहे ।'", इशारे द्वायाभो पिज प्रसिपरायको प्रकाशितन करना।. प्राकरारमोौन = (ग्रीवाः) श्रु की ग्रीवाकी अस्थियों को (शृणोतु ३: ,०९ मौर रक्तस्नात नादो को (प्र शृणातु) काट है, वु) ५ , (उष्णिहः) नाम (निधं ३।१०) 1 चाहिए । ऋतम् सत्य-

English

With fortune of the Sisu tree—with Indra as my friend to aid I give myself a happy fate. Fly and begone, Malignities!

अध्याय 6

श्लोक 129.1

भगप्राप्तिः १-३ अथर्वाङ्गिराः।भगः।अनुष्टुप्।भगे॑न मा शांश॒पेन॑ सा॒कमिन्द्रे॑ण मे॒दिना॑ ।कृ॒णोमि॑ भ॒गिनं॒ माप॑ द्रा॒न्त्वरा॑तयः

bhagaprāptiḥ 1-3 atharvāṅgirāḥ| bhagaḥ| anuṣṭup| bhagena mā śāṃśapena sākamindreṇa medinā | kṛṇomi bhaginaṃ māpa drāntvarātayaḥ

हिन्दी अर्थ

नीच यह शत्र राजा (गूढः) पृथिवी से ठका हमा, (उत्) ऊपर (सुपतु मा) सपण न करे) (वचं । माराहुग्रा (भ्रव) पृथिवी के नीचे (शयाम् त (न (हतः) (यः) जो (जिनाति) हमारी वयोहानि करता है छ श्र (इत्) ही या अवदय (जहि) मार । (वच) है व (वम्) त् (जिनतः) वयोहानि करने वाले के (सीमन्तम्) सिरके मध्यदेश को ९ ञ्चम्) नौचे की मोर शुका कर (भनु पातय) तदनुसार गिरा दे, (ष का० ६। अनु० १३। सु० १३५ भथवेवेड-भाष्य २४५

English

That splendour and felicity wherewith thou hast excelled the trees Give me therewith a happy fate. Fly and begone, Malignities Blind fortune, with reverted leaves that is deposited in trees—

अध्याय 6

श्लोक 129.2

येन॑ वृ॒क्षाँ अ॒भ्यभ॑वो॒ भगे॑न॒ वर्च॑सा स॒ह।तेन॑ मा भ॒गिनं॑ कृ॒ण्वप॑ द्रा॒न्त्वरा॑तयः

yena vṛkṣā~ abhyabhavo bhagena varcasā saha| tena mā bhaginaṃ kṛṇvapa drāntvarātayaḥ

हिन्दी अर्थ

मन्घ मेँ पुरुषविधि में शलु का वर्णन हुमा है, पुरुषविध क। अभिप्राय आरोपित करना । इस विधि को वेदों में प्रायः अपनायाहै। तथा देखो नहीं चो सकते, वे काल्पनिक ही हँ । इसी प्रकार काम, क्रोध, मोह रादि नाएं । इन वासनाओं को पीने का श्रभिप्राय है.इन वासनाभों का भो नियन््रण करना्नष्ट करना। एन वासनाश्रों के नष्टहौो जाने पर इन वासनाओं के विषय (गीता) । निराहारस्य इन्द्रियों द्वारा विषयों का सेवन न करने वाले के

English

Give me therewith a happy fate. Fly and begone, Malignities. A woman’s love-charm

अध्याय 6

श्लोक 129.3

यो अ॒न्धो यः पु॑नःस॒रो भगो॑ वृ॒क्षेष्वाहि॑तः ।तेन॑ मा भ॒गिनं॑ कृ॒ण्वप॑ द्रा॒न्त्वरा॑तयः

yo andho yaḥ punaḥsaro bhago vṛkṣeṣvāhitaḥ | tena mā bhaginaṃ kṛṇvapa drāntvarātayaḥ

हिन्दी अर्थ

रहती हँ, जिन का विनिवतंन केवल आध्यात्मिक उपायों द्वागाही होता है । स पिबः पिवतेः कतरि ““शः'--पिबादेशः । २४४ अयवेवेद-भाष्य का० ६। अनु° १३। सू० १३४ जीर रक्तस्नात नाडियोंको (प्र शृणातु) काट दे, (इव) जेते (शचीपतिः) वणन, श्रधवा कवितां वका ही वर्णन जानन) चाहिए । ऋतम् सत्य-

English

This is the Apsarases’ love-spell, the conquering, resistless ones’. Send the spell forth, ye Deities! Let him consume with love of me. I pray, may he remember me, think of me, loving and beloved.

अध्याय 6

श्लोक 130.1

स्मरः।१-४ अथर्वाङ्गिराः।स्मरः।अनुष्टुप्, १ विराट् पुरस्ताद्बृहती।र॒थ॒जितां॑ राथजिते॒यीना॑मप्स॒रसा॑म॒यं स्म॒रः ।देवाः॒ प्र हि॑णुत स्म॒रम॒सौ मामनु॑ शोचतु

smaraḥ| 1-4 atharvāṅgirāḥ| smaraḥ| anuṣṭup, 1 virāṭ purastādbṛhatī| rathajitāṃ rāthajiteyīnāmapsarasāmayaṃ smaraḥ | devāḥ pra hiṇuta smaramasau māmanu śocatu

हिन्दी अर्थ

नीच यह शत्र राजा (गूढः) पृथिवी से ठका हुभ्र, (पृथिव्याः) पृथिवी से (उत्) उपर (सूपत् मा) सपंण न करे । (व्रण) व्दारा (हतः) माराहृम्रा (भ्रव) पृथिवी के नीचे (शयाम् शेताम्) सोया पड़े । (यः) जो (जिनाति) हमारी वयोहानि करता है (तम्) उसे (प्रन्विच्च) त द्ड, (यः) जो (जिनाति) हृमारो वयोहानि करता है (तम्) उसको (इत्) ही या अवश्य (जहि) मार । (वच) है वच्रधारी ! (वम्) तु ञ्चम्) नीचे की मोर रुका कर (भ्रनु पातय) तदनुसारगिरादे। का०६। अनु० १३। सू० १३५ भथववेद-भाष्य २५५ मन्ध में पुरुषविषि में शतु का वणन हृभा है, पुरुषविषि का अभिप्राय

English

Send forth the spell, ye Deities! Let him consume with love of me. That he may think of me, that I may never, never think of him,.

अध्याय 6

श्लोक 130.2

अ॒सौ मे॑ स्मरता॒दिति॑ प्रि॒यो मे॑ स्मरता॒दिति॑ ।देवाः॒ प्र हि॑णुत स्म॒रम॒सौ मामनु॑ शोचतु

asau me smaratāditi priyo me smaratāditi | devāḥ pra hiṇuta smaramasau māmanu śocatu

हिन्दी अर्थ

भारोपितत करना । इस विधि को वेदों में प्रायः अपनाया है। तथा देखो नहीं हो सकते, वे काल्पनिक ही हं । इस प्रकार काम, क्रोध, मोह श्रादि हम (ग्रमुम्) उसे मी (सं पिबामः) सम्यक् रूपमे या मिलकर पी जाते नाएं । इन वासनाओं को पीने का अभिप्राय है.इन वासनाभों का भो नियन्त्रण करना,नष्ट करना! इन वासनभ्रों के नष्ट हो जाने पर इन वासनाओं के विषय

English

Send forth the spell, ye Deities! Let him consume with love of me. Madden him, Maruts, madden him. Madden him, madden him, O Air.

अध्याय 6

श्लोक 130.3

यथा॒ मम॒ स्मरा॑द॒सौ नामुष्या॒हं क॒दा च॒न।देवाः॒ प्र हि॑णुत स्म॒रम॒सौ मामनु॑ शोचतु

yathā mama smarādasau nāmuṣyāhaṃ kadā cana| devāḥ pra hiṇuta smaramasau māmanu śocatu

हिन्दी अर्थ

(गीता) । निराहारस्य = इन्द्रियों द्वारा विषयों का सेवन न करने वाले के रहती है, जिन का विनिवतंन केवल आध्यात्मिक उपायों दइागही होता है । स पिबः पिवतेः कतरि “शः -पिबादेशः । ९४६ अथवदेद-भाष्य काण ६। मनु° १३ । सू° १३६ कां० ९: अनु° १३) सू० १३७ अथवत्रेद-भाष्य 2४७ यद गिरति तं लिगाधि तय रंगिरं “ „4 (1 कथनरोताङ, श्रोषधिके नामं का निद नीं दौता। गणघर्मो के नुसार ए ५ , . त्रोपनिकाज्ञान करनाहोलाह । प्रथा "देवी" रा श्रोषधिके नाम

English

Madden him, Agni, madden him. Let him consume with love of me. A woman’s love-charm

अध्याय 6

श्लोक 130.4

उन्मा॑दयत मरुत॒ उद॑न्तरिक्ष मादय ।अग्न॒ उन्मा॑दया॒ त्वम॒सौ मामनु॑ शोचतु

unmādayata maruta udantarikṣa mādaya | agna unmādayā tvamasau māmanu śocatu

हिन्दी अर्थ

ख्पमेंया मिलकर निगलजतेदहैँ। , , . अदनामि, पिवामि, जिरामिद्धारा मोजनकेखाने के प्रकारं का वर्णन हुमा है । “श्रह्नामि'” खानाहै चबाना प्रौर “गिरासि' है गले. द्वारा पेट ये ग्रन्न पहुंचाता, ओर इमफे लिये ““पित्रामि” है जल पौना। कामादि को खाना, पीना, निगलना, निरुक्त प्रदशित ''पौरुषविधि"" दवारा उपपन्न । यमते केशोंऽवुप्यते समूलो यच वृश्चत ! (ते) तेरा (यः) जो (केशः) केश, (श्रव पदति) टूट कर नोचे गिर जाताहै, (यःच) ओौरजो (समूलः) जड़ समेत (वुदचते) कट जाता है, (इदम्) इसे गौर (तम्) उसे (विदवभेषज्या) केशां केस रोगोंकी

English

Down upon thee, from head to foot, I draw the pangs of long- ing love. Send forth the charm, ye Deities! Let him consume with love of me. Assent to this, O Heavenly Grace! Celestial Purpose, guide it well!

अध्याय 6

श्लोक 131.1

स्मरः।१-३ अथर्वाङ्गिराः।स्मरः।अनुष्टुप्।नि शी॑र्ष॒तो नि प॑त्त॒त आ॒ध्यो॒३ नि ति॑रामि ते ।देवाः प्र हि॑णुत स्म॒रम॒सौ मामनु॑ शोचतु

smaraḥ| 1-3 atharvāṅgirāḥ| smaraḥ| anuṣṭup| ni śīrṣato ni pattata ādhyo3 ni tirāmi te | devāḥ pra hiṇuta smaramasau māmanu śocatu

हिन्दी अर्थ

चायं नैकहाहै कि “शान्तौषवीं" 'लमोम्'" दा । "्राभि।पजञ्चासि' इरा “विश्वभेषजी"" वीरुध के रस द्वारा केशों को सींचने का कथन हुजादटै (१-३) । मथर्वा (केशवधनकामः) वौतहव्थः । मनुष्टुम् 8 ध (केशवधनीम्) केशो कौ बद्ने वली (याम्) जिष ्रोषधि कौ २ एकावसाना द्विपदा सस्नी ब्रहती तास्वा नितिन केभ्यो दृंहणाय खनामसि ॥९॥

English

Send forth the charm, ye Deities! Let him consume with love of me. If thou shouldst run three leagues away, five leagues, a horse’s daily stage,

अध्याय 6

श्लोक 131.2

अनु॑म॒तेऽन्वि॒दं म॑न्य॒स्वाकू॑ते॒ समि॒दं नमः॑ ।देवाः॒ प्र हि॑णुत स्म॒रम॒सौ मामनु॑ शोचतु

anumate'nvidaṃ manyasvākūte samidaṃ namaḥ | devāḥ pra hiṇuta smaramasau māmanu śocatu

हिन्दी अर्थ

गुणों वाली पृथिवी में (जाता शर्ि). परवा हुई है, (नितत्नि). है नित्यं कालि सापोंके (गृहेभ्यः) घरों प्र्थातु जङ्गलो से, भी वनो में रहते हँ । उदारहूदय परोपकारी वानप्रस्थी केशवर्धनी ओषधि । को कन्याश्नो के केश रोगके निवारण के जिये खोद रखते है, मौर परोष- कारो संन्यासी जब प्रचाराय गृहस्थो के घरोमेजाति हतो उस श्रोषधि

English

Thence thou shalt come to me again and be the father of our sons. The same 98

अध्याय 6

श्लोक 131.3

यद् धाव॑सि त्रियोज॒नं प॑ञ्चयोज॒नमाश्वि॑नम्।तत॒स्त्वं पुन॒राय॑सि पु॒त्राणां॑ नो असः पि॒ता

yad dhāvasi triyojanaṃ pañcayojanamāśvinam| tatastvaṃ punarāyasi putrāṇāṃ no asaḥ pitā

हिन्दी अर्थ

को कन्याश्रों मे बांट देते ह। भपितस्य-- म सित (खेत), कानारसाप।. हे । कन्याभोंके यदि केशनहो, वे गजञ्जी सकता । अतः केशवधंनी भोषधि को खोद कर, उसका संग्रह कर रखना, शरोर उसका वितरण करना सौमाजिक अत्युपकार है। वानप्रस्थियों के लिये यज्ञ करने को विधिहै,. संन्यासो वीतहृभ्य हीते है, हवियों से विगत होते केशा नडा ईव वर्धन्तां शीष्णंस्तं भसिताः परि ॥२॥ (केशाः) जौ केश (अमीगुना) प्रङ्गुलियो दवारा (मेधाः) मापते योग (मेयाः) मापने योग्यहो गए) (ते) तेरे (शीष्णेः परि) सिरके चारों ओर (श्रसिताः) कालि केश (नडाः इव) नड की तरह (वधन्ताम्) बढ़ । न्काला सांप (मन्त्र र), मौर ्रसिताः काले केश ।

English

The Philter, burning with the pangs of yearning love, which Gods have poured within the bosom of the floods,

अध्याय 6

श्लोक 132.1

स्मरः।१-५ अथर्वाङ्गिराः।स्मरः।अनुष्टुप्, १ त्रिपदा अनुष्टुप्, २,४,५ बृहती, ३ भुरिक्।यं दे॒वाः स्म॒रमसि॑ञ्चन्न॒प्स्व१न्तः शोशु॑चानं स॒हाध्या।तं ते॑ तपामि॒ वरु॑णस्य॒ धर्म॑णा

smaraḥ| 1-5 atharvāṅgirāḥ| smaraḥ| anuṣṭup, 1 tripadā anuṣṭup, 2,4,5 bṛhatī, 3 bhurik| yaṃ devāḥ smaramasiñcannapsva1ntaḥ śośucānaṃ sahādhyā| taṃ te tapāmi varuṇasya dharmaṇā

हिन्दी अर्थ

केशा नडा ईव वधरन्तां शौर्प्णस्तं असिताः परि ,३॥ (भ्रोषधे) है प्रोषधि ! (मूलम्) केशोंकीजडको (रह्) तु दढ कर, नडा ह्व परि), म्रथं, मन्त्र (र) की तरह + भथर्वतरेद-भाष्य कां० ६। प्रनु° १२३ सु० १३७ का० ६। श्रनु० १३। सू° १३८ अथर्वतेद-भाष्य २४६

English

That spell for thee I heat by Varuna’s decree. The charm which, burning with the pangs of love, the General Gods have poured within the bosom of the floods,

अध्याय 6

श्लोक 132.2

यं विश्वे॑ दे॒वाः स्म॒रमसि॑ञ्चन्न॒प्स्व१न्तः शोशु॑चानं स॒हाध्या।तं ते॑ तपामि॒ वरु॑णस्य॒ धर्म॑णा

yaṃ viśve devāḥ smaramasiñcannapsva1ntaḥ śośucānaṃ sahādhyā| taṃ te tapāmi varuṇasya dharmaṇā

हिन्दी अर्थ

ओष्रधि शोघ्र प्रभावकरिणी है जौकरि एकही दिनम सफलता दे सक्ती दे । भोपर है स्तियो के सिर का आभरूषण । व्यभिचारी पुरुष के क्लीव हो जाने पर उसे गोपथ पहना दिया जाय ताकि सर्वसाधारण को यह् जोषि व्य कानाश कर देतह । वोयं ॐ नाशहोनेसे पौष शक्ति वाला पुरुष क्लीब हौ जाता है। कोवं कृष्योपृशिनपयों कुरी स्णिं कृषि । व्यधिचारी को (क्लौवम्) नपु सक (कृधि) कर दे, (अथो) ओर (ओपनिनम्) योपश वाला, -(कुरोरिणम्) कुरोरुक्त (कृधि) करदे, इसके (उने अण्डयौ) दोनों अण्डोंके भीतरी भायों को ( भिनत्तु) तोड दे ।

English

That spell for thee I heat by Varuna’s decree. The Philter, burning with the pangs of longing, which Indrāni hath effused within the waters’

अध्याय 6

श्लोक 132.3

यमि॑न्द्रा॒णी स्म॒रमसि॑ञ्चद॒प्स्व॑१न्तः शोशु॑चानं स॒हाध्या।तं ते॑ तपामि॒ वरु॑णस्य॒ धर्म॑णा

yamindrāṇī smaramasiñcadapsva1ntaḥ śośucānaṃ sahādhyā| taṃ te tapāmi varuṇasya dharmaṇā

हिन्दी अर्थ

ओपश ओर कुरीर स्व्रियोके आभुषणरहैँ। व्यभिचारी के दोनों सम्राट् (यनु ८।३७) । भण्डमेदन राजाज्ञा के विना नहीं हना चाहे, २५० अथववेद-भाष्य कां० ६। अनु १२३। सु° १३८ (भकरम्) मेने कर दियाहै, (अरस) है वीयंरस विहन ! (त्वा) तुचे (अरसम्) दस रस से विहीन (अक्षरम्) मैने कर दिया । (भस्य)

English

depth, That spell for thee I heat by Varuna’s decree. The charm, aglow with longing, which Indra and Agni have effused within the bosom of the

अध्याय 6

श्लोक 132.4

यमि॑न्द्रा॒ग्नी स्म॒रमसि॑ञ्चताम॒प्स्व॑१न्तः शोशु॑चानं स॒हाध्या।तं ते॑ तपामि॒ वरु॑णस्य॒ धर्म॑णा

yamindrāgnī smaramasiñcatāmapsva1ntaḥ śośucānaṃ sahādhyā| taṃ te tapāmi varuṇasya dharmaṇā

हिन्दी अर्थ

(निदध्मसि) हम स्थापित करते हँ । ये तं नाडयो देव करते ययो स्तिष॑ति दरष्ण्यम् । (ते) तेरो (ये) जो (देवकृते) परमेश्वर तिमित (नाड्यौ) दो नाड्यां हे, (ते) तेरी (ते) उन दोनों का, (शम्यया) शम्या काम वाली शम्याकील संलगन (ते) तेरी (ते) उन दो नाडयो का (भिनच्धि) मै भेदनकरताहूं।

English

floods, That spell for thee I heat by Varuna’s decree.

अध्याय 6

श्लोक 132.5

यं मि॒त्रावरु॑णौ स्म॒रमसि॑ञ्चताम॒प्स्व॑१न्तः शोशु॑चानं स॒हाध्या।तं ते॑ तपामि॒ वरु॑णस्य॒ धर्म॑णा

yaṃ mitrāvaruṇau smaramasiñcatāmapsva1ntaḥ śośucānaṃ sahādhyā| taṃ te tapāmi varuṇasya dharmaṇā

हिन्दी अर्थ

शमी वृक्ष के काष्ठ द्वारा निमित, मथवा भोगवासना को शान्त करदेन स्पष्टीकरण मन्त्र (५) में हुआ दहै। का० ६। भ्रनु० १३। सू० १३६ अथववेद -भष्य २५१ संलग्न (ते शेपः) तेरी प्रजननेन्िय का (भिनयि) मै भेदन करताहूं

English

The charm aglow with longing which Mitra and Varuna have poured within the bosom of the floods, That spell for thee I heat by Varuna’s decree.

अध्याय 6

श्लोक 133.1

मेखलाबन्धनम्।१-५ अगस्त्यः।मेखला।१ भुरिक् २, ५ अनुष्टुप्, ३ त्रिष्टुप्, ४ जगती।य इ॒मां दे॒वो मेख॑लामाब॒बन्ध॒ यः सं॑न॒नाह॒ य उ॑ नो यु॒योज॑ ।यस्य॑ दे॒वस्य॑ प्र॒शिषा॒ चरा॑मः॒ स पा॒रमि॑च्छा॒त् स स उ॑ नो॒ वि मु॑ञ्चात्

mekhalābandhanam| 1-5 agastyaḥ| mekhalā| 1 bhurik 2, 5 anuṣṭup, 3 triṣṭup, 4 jagatī| ya imāṃ devo mekhalāmābabandha yaḥ saṃnanāha ya u no yuyoja | yasya devasya praśiṣā carāmaḥ sa pāramicchāt sa sa u no vi muñcāt

हिन्दी अर्थ

स्युसितिका रुरोहिथ सुमगंकरणी मम॑ । हे पारमेश्वरी माता ! (न्यस्तिका) तु नितरां काम, क्रोध, लोभ, मोह आदिको फँकदेतोहै, उन्हँ निरस्त कर देती है, (रुरोहिथ) तु हदय मे आरोहण क्रिय हृर्ईहै, (मम, सुभगंकरणी) मेरे सौभाग्यो को उप्पघ्च करने वालीदहै। (तव) तेरे (प्रतानाः) ऊपरको ओर विस्तार है, (सहस्रपर्ण्या) हजारों का पालन करने वाली (तया) उस माता द्वारा (ते) है पत्ती ! तेरे (हदयम्) हृद्य को (शोषयामि) मेँ पति, सांसा- रिफ विषय भोगों के लिये सूखा देता हू । मेए्वर माता भी है, वह् उपासक के कामादि को, मातुस्नेह वाली होकर, लौर प्रजापतिः । वेद मे "तिक्तः दिवः" द्वारा ३ चुलोक कहै हं । एक दृरयमान, तथा दो इस दु्यमान चुलोक से ऊपर के दुलोक ।

English

A glorification of the sacred girdle By the direction of that God we journey, he will seek means to save and he will free us;

अध्याय 6

श्लोक 133.2

आहु॑तास्य॒भिहु॑त॒ ऋषी॑णाम॒स्यायु॑धम्।पूर्वा॑ व्र॒तस्य॑ प्राश्न॒ती वी॑र॒घ्नी भ॑व मेखले

āhutāsyabhihuta ṛṣīṇāmasyāyudham| pūrvā vratasya prāśnatī vīraghnī bhava mekhale

हिन्दी अर्थ

द्वारा सूचित किया हौ । यह् विषय अनुखन्धान योग्य है। २५२ भ्रयर्वतेद-भाष्य कां५ ६। अनु० १३ । सु° १३९ बुरकरदेती हँ । सदा हूदयवासिनी है। दलोक मे उसके विस्तार सक्डों ह, युलोक से नीचे की भोर उसके विस्तार ३१ हैँ। बुध, चक्र, पति के सौभाग्यो को पैदाकर ची है । सौभाग्यद षड्विध, एेएयर्य, धमं,

English

The God who hath engirt us with this Girdle, he who hath fast- ened it, and made us ready. Thou, weapon of the Rishis, art adored and served with sacrifice. First tasting of the votive milk, Zone, be a hero-slayer thou!

अध्याय 6

श्लोक 133.3

मृ॒त्योर॒हं ब्र॑ह्मचा॒री यदस्मि॑ नि॒र्याच॑न् भू॒तात् पुरु॑षं य॒माय॑ ।तम॒हं ब्रह्म॑णा॒ तप॑सा॒ श्रमे॑णा॒नयै॑नं॒ मेख॑लया सिनामि

mṛtyorahaṃ brahmacārī yadasmi niryācan bhūtāt puruṣaṃ yamāya | tamahaṃ brahmaṇā tapasā śrameṇānayainaṃ mekhalayā sināmi

हिन्दी अर्थ

को ओर लाना चाहतादहै, ओर हजारो का पालन करने वानी माता के दाराः पत्नी के हृदय को सूखा देत। है, विषयः भोगों के लिये प्रमरस् से , रित करदेता है । पर्णी=प पालनपूरणयोः (जुद्राव्यादिः) । (मयि) मेरे सम्बन्धमें भी (ते) तेरा (हदय, शुष्यतु) हदय प्रम रस की षट से सूख जाय, (अथो) तथा (आस्यम्) मूख भो (रुष्यतु) रसीलो वाते करने कौ दष्टिसे सुख जाय ! (जथो) मौर (कामेन) काम- वासना को दृष्टिसे (माम्) मृ्षको (निशुष्य') नितरां सुखा कर, (अथी) तदनन्तर (शुष्कास्या) रसीली वातो से रहित हुई (चर) गृहकायोमेतु (ब्र) है भरण-पोषण करने वालो ! (कल्याणि) है कल्याण करे

English

As I am now Death’s Brahmachāri claiming out of the living world a man for Yama, So with Austerity and Prayer and Fervour I bind this Girdle round the man before me.

अध्याय 6

श्लोक 133.4

श्र॒द्धाया॑ दुहि॒ता तप॒सोऽधि॑ जा॒ता स्वस॒ ऋषी॑णां भूत॒कृतां॑ ब॒भूव॑ ।सा नो॑ मेखले म॒तिमा धे॑हि मे॒धामथो॑ नो धेहि॒ तप॑ इन्द्रि॒यं च॑

śraddhāyā duhitā tapaso'dhi jātā svasa ṛṣīṇāṃ bhūtakṛtāṃ babhūva | sā no mekhale matimā dhehi medhāmatho no dhehi tapa indriyaṃ ca

हिन्दी अर्थ

चाहती है, (सथृष्पला) सम्यक् रूपमे कामादि का दहन कर है गति कर । (अमूम् च) उसमेरी पत्नोको, (माम् च) मौर मञ्च पिको (सं हरयो को “एक” करदे, या समान भावनाओं वाते करदे । कां० ६। अनु० १६ सू १४० अ्रथववेद-माष्य ।

English

She hath become, Faith’s daughter, sprung from Fervour, the sister of the world-creating Rishis; As such, O Girdle, give us thought and wisdom, give us religious zeal and mental vigour.

अध्याय 6

श्लोक 133.5

यां त्वा॒ पूर्वे॑ भूत॒कृत॒ ऋष॑यः परिबेधि॒रे।सा त्वं परि॑ ष्वजस्व॒ मां दी॑र्घायु॒त्वाय॑ मेखले

yāṃ tvā pūrve bhūtakṛta ṛṣayaḥ paribedhire| sā tvaṃ pari ṣvajasva māṃ dīrghāyutvāya mekhale

हिन्दी अर्थ

न रप्र शा (मेना ुज्करस्या चर् ॥ ८) (यथा) जेसे (उद्यम्) जलको (अप्पृषः) न पिये पिपासु पर (आस्यम्) मुख (अप युध्यति) सू जता (षरा, एवम्) दषो भकार (कामेन) कामवाकषना का दुष्ट स (माम्) भूल ५६६, क निगुय) नितरां सुखा कर, (अथा) तदनन्तर पयुष्कास्या) दुध छद तरालो हुई तु (चर) जघ पति की कापरशमना सुख गई पर पत्नीने निज वेराग्य- ्नावना मे इश्च वाना का सूचा हिया, उष उने दहत् र दिया, तव म्बन्धो वच नहं बोलती ओर परे दनः धृदहुनोवेत मात्रके लिये गृह मे टकडों मे करके (पुनः) फिर, तदनन्तर (सदनात) अवते-भापका समा हित अर्थात शान्त कर लेता द. (एव) इत प्रका (वो्रपवति) है शक्ति

English

Thou whom primeval Rishis girt about them, they who made the world, As such do thou encircle me, O Girdle, for long days of life.

अध्याय 6

श्लोक 134.1

शत्रुनाशनम्।१-३ शक्रः।वज्रः।१ परानुष्टुप् त्रिष्टुप्, २ अनुष्टुप्, ३ भुरिक् त्रिपदा गायत्री।अ॒यं वज्र॑स्तर्पयतामृ॒तस्यावा॑स्य रा॒ष्ट्रमप॑ हन्तु जीवि॒तम्।शृ॒णातु॑ ग्री॒वाः प्र शृ॑णातू॒ष्णिहा॑ वृ॒त्रस्ये॑व॒ शची॒पतिः॑

śatrunāśanam| 1-3 śakraḥ| vajraḥ| 1 parānuṣṭup triṣṭup, 2 anuṣṭup, 3 bhurik tripadā gāyatrī| ayaṃ vajrastarpayatāmṛtasyāvāsya rāṣṭramapa hantu jīvitam| śṛṇātu grīvāḥ pra śṛṇātūṣṇihā vṛtrasyeva śacīpatiḥ

हिन्दी अर्थ

१, छिदिर् द्वैषीकरणे 1:7६ :) । , ४ भथवेवेद-भाष्य का०६। अनु १३। मू १४० । । (अवरूढौ) उपर के हनु मे अवाङ्धुख होकर उलन्न हरर, (च) भौर. त्सतः) खाने की इच्छा करते, (तौ दन्तौ) उनदो दान्तो को,

English

A priest’s prayer for power to punish wrong-doers This Thunderbolt shall take its fill of Order, scare life away and overthrow the kingdom. Tear necks in pieces. rend napes asunder, even as the Lord of

अध्याय 6

श्लोक 134.2

अध॑रोऽधर॒ उत्त॑रेभ्यो गू॒ढः पृ॑थि॒व्या मोत् सृपत्।वज्रे॒णाव॑हतः शयाम्

adharo'dhara uttarebhyo gūḍhaḥ pṛthivyā mot sṛpat| vajreṇāvahataḥ śayām

हिन्दी अर्थ

।काटना सामनेकेदो दान्तो द्वारा होता है ओर प्रथमोतन्न ऊपर पराणि-पशुपक्षियो को काटकरखाने केलिए नहीं दिये, अपितु , मन्त्र (२) में कथित वस्तुओं को काट करखानेके लिये परमेश्वर ने दिये है । दन्तारोहण के काल में शिश पीडा अनुभव करते मौर रूण हो जाते है र 0 से प्राथनारहैकि वह इस काल को शिशु के लिये सुखकारी जौँ ाभो, (म्रथो) मौर (माषम्) माषको, ( अथो) भौर (तिलम्) तिल को खाओ । (दन्तौ) है दो दान्तो ! (रत्नधेयाय) रमणीय फल को धारण करने के लिये, (वाम्) तुम दो के लिये, (एषः, भागः; )यह् भाग (निहितः)

English

Might the neck of Vritra. Down, down beneath the conquerors, let him not rise, concealed in earth, but lie down smitten with the bolt.

अध्याय 6

श्लोक 134.3

यो जि॒नाति॒ तमन्वि॑च्छ यो जि॒नाति॒ तमिज्ज॑हि ।जि॒न॒तो व॑ज्र॒ त्वं सी॒मन्त॑म॒न्वञ्च॒मनु॑ पातय

yo jināti tamanviccha yo jināti tamijjahi | jinato vajra tvaṃ sīmantamanvañcamanu pātaya

हिन्दी अर्थ

(सयुजौ) साथ साय लगे हृए, (स्योनौ) सुखकर, (सुमङ्गलौ) उत्तम. मङ्ञलकारी (दन्तौ) दो दान्त (उपहतौ) मानो उत्सुकता पूवक बुलाए गए हैं । (दन्तौ) हेदो दान्तो ! (वाम्) तुमदोका ( घोरम्) करर-कममं कां०६। अनु° १३। ति १४१ अथववेद-भाष्य २५५

English

Seek out the fierce oppressor, yea, strike only the oppressor dead. p. a265 Down on the fierce oppressor’s head strike at full length, O Thunderbolt!

अध्याय 6

श्लोक 135.1

बलप्राप्तिः।१-३ शुक्रः।वज्रः।अनुष्टुप्।यद॒श्नामि॒ बलं॑ कुर्व इ॒त्थं वज्र॒मा द॑दे ।स्क॒न्धान॒मुष्य॑ शा॒तय॑न् वृ॒त्रस्ये॑व॒ शची॒पतिः॑

balaprāptiḥ| 1-3 śukraḥ| vajraḥ| anuṣṭup| yadaśnāmi balaṃ kurva itthaṃ vajramā dade | skandhānamuṣya śātayan vṛtrasyeva śacīpatiḥ

हिन्दी अर्थ

प्राणियों की (मा हिसिष्टम्) हिसा न करो । पिता उत्सुकता पूर्वक करते रहते है, इसलिये मानो माता-पितानेइन दा दान्तो का स्वय आह्वान किया दहै । (वायुः) वागुसमान शोधक अधिकारी (एनाः) इन प्रजाओं को (समा- (अधि) अधिकार पूवक (ब्रवत्) जीवनमागं का उपदेश ॥ दे. कथन करे, की चिकित्सा अर्थात् रोगापनयन करे । वायु सदा गति करती है, भौर निजगति द्वारा शुद्ध करतो रहती है भरतः शुद्धिकर्ता अधिकारीको वायु कहादहै । तष्टा सूय. जौ किं मेधों

English

A priest’s fulmination against an enemy Whate’er I eat I turn to strength, and thus I grasp the Thunder- bolt,

अध्याय 6

श्लोक 135.2

यत् पिबा॑मि॒ सं पि॑बामि समु॒द्र इ॑व संपि॒बः ।प्रा॒णान॒मुष्य॑ सं॒पाय॒ सं पि॑बामो अ॒मुं व॒यम्

yat pibāmi saṃ pibāmi samudra iva saṃpibaḥ | prāṇānamuṣya saṃpāya saṃ pibāmo amuṃ vayam

हिन्दी अर्थ

मे “चिकित्सतु" पद का प्रयोग हृभा है । चिकिततु = कित निवासे रोगाप इसके साथो भो, शासन कमं मे. मनुष्प हनि चाहे, अतः वायु भादि के अथं तदनुरूप किये है । हे वैच ! (लोहितेन स्वरधितिना) सुवर्ण के, लोहे के, या लाल ताम्बर के शस्त्र द्वारा (कणयोः) दोन कानों का (मिथुनम्) वेध (कृधि) कर ।

English

Rending the shoulders of that man as Indra shattered Vritra’s neck. I drink together what I drink, even as the sea that swallows all. Drinking the life-breath of that man, we drink that man and swallow him.

अध्याय 6

श्लोक 135.3

यद् गिरा॑मि॒ सं गि॑रामि समु॒द्र इ॑व संगि॒रः ।प्रा॒णान॒मुष्य॑ सं॒गीर्य॒ सं गि॑रामो अ॒मुं व॒यम्

yad girāmi saṃ girāmi samudra iva saṃgiraḥ | prāṇānamuṣya saṃgīrya saṃ girāmo amuṃ vayam

हिन्दी अर्थ

सख्या द्वारा (बहु) वहुसख्यक हो । वेध बाल-दालिका दोनो का हाना चाद्ये । कर्णवेध मै नानासेग निवृत्त हो जते.है। वाल ओर वालिकाके कानके किस-किक्त स्यान में वेध करना नाद्ये इत दरुणल वयहौ जान सक्त । कर्णवेध तोसरेया पांचवे वधं होने का विधान है कणेवेध के सम्बन्ध भरं विशेष ज्ञान के क्षत्रिय, ओौर हैष्य, (उत) कणेवेध करते रहे है, 'एवा=-एवम्) दसी प्रकार (सहसरपोपःय) कणवध देव पद बाणीं को गुचित करता । ब्राह्मणों कौ “"मुदेवाः"' तथा “भुयुराः” कहते है, अर्थात् कृधिवी के देव । अतुराः के दो अर्थं हँ,(१) भषु है, ओौरकणवेध द्वारा नानाविध रोगोंके निवर्तन दवाय शरीर पुष्टि सम्भव है, तब ".सहु्तपोषाय"' पद सार्थक ही है ।

English

Whate’er I eat I swallow up, even as the sea that swallows all. Swallowing that man’s vital breath, we swallow him completely up.

अध्याय 6

श्लोक 136.1

केशदृंहणम्।१-३ वीतहव्यः।नितत्नि वनस्पतिः।अनुष्टुप् २ एकावसाना द्विपदा साम्नी बृहती।दे॒वी दे॒व्यामधि॑ जा॒ता पृ॑थि॒व्याम॑स्योषधे ।तां त्वा॑ नितत्नि॒ केशे॑भ्यो॒ दृंह॑णाय खनामसि

keśadṛṃhaṇam| 1-3 vītahavyaḥ| nitatni vanaspatiḥ| anuṣṭup 2 ekāvasānā dvipadā sāmnī bṛhatī| devī devyāmadhi jātā pṛthivyāmasyoṣadhe | tāṃ tvā nitatni keśebhyo dṛṃhaṇāya khanāmasi

हिन्दी अर्थ

अथववेद-भाष्य कां० ६। अनु? १३ । सू० १४१ ४५ उत्पादन काबीजमभीदहै,कारणमभीदहै। कां० ६। मनु० १३। सु? १४२ अथववेद-भाष्य २५७ उन्छयस्व वहुरभव स्वेन म्टसा यव ।

English

A charm to promote the growth of hair Born from the bosom of wide Earth the Goddess, godlike Plant, art thou:

अध्याय 6

श्लोक 136.2

दृंह॑ प्र॒त्नान् ज॒नयाजा॑तान् जा॒तानु॒ वर्षी॑यसस्कृधि

dṛṃha pratnān janayājātān jātānu varṣīyasaskṛdhi

हिन्दी अर्थ

देव तथा सुनने वाला कहा है, मौर उस फै प्रति बोलने अर्थात् कथन करने काभो निर्देश हुआ है. इसमे प्रतोत होता है कि “यव' "चेतन" है, न कि जड "जीं" । सायणाचायंनेमोरएपतादही मान कर व्याख्याकोहै। यथा उत्पत्ति होतो है तब जौँ के साथ मिट, जल आदि का मिघ्रग होताहै, मौर जौँ के तिज तत्तां का अमिश्रण अर्यात् उषते अलग होकर अंकुर मेष्वर है । इसलिये उसे “यत कहाहै। तथा परमेश्वर संसार के पष्यति नो सक्ताय, केवलाघो भवति केवलादी ॥ (ऋ० ११७।६) । तभा “भुञ्जते २, मेघीय दिन्य वखपात यवधान्प फा तो वध करता है, तुञ्च परमेए्वर ख्व

English

So we, Nitatnī! dig thee up to strengthen and fix fast the hair. Make the old firm, make new hair spring, lengthen what has already grown.

अध्याय 6

श्लोक 136.3

यस्ते॒ केशो॑ऽव॒पद्य॑ते॒ समू॑लो॒ यश्च॑ वृ॒श्चते॑ ।इ॒दं तं वि॒श्वभे॑षज्या॒भि षि॑ञ्चामि वी॒रुधा॑

yaste keśo'vapadyate samūlo yaśca vṛścate | idaṃ taṃ viśvabheṣajyābhi ṣiñcāmi vīrudhā

हिन्दी अर्थ

पाज्नाणि= पा ष्टन् (उणा० ४।१६०)। पा पाने, पा रक्षणे । जो केवल मपनी ही रक्षा के लिये खाते-पीते हं । पात्राणि पातुणि। अ शृण्वन्तं यवं देवं यत्रं खाऽच्छावद।-सि। तथा अमिश्रण करने वाले, (यत्र) जिस किसी हृदये प्रकट होने वाले, (त्वा देवम्) तुक्ष देव को (अन्छा वदामसि) अभिमृष होकर हेम कहूष है भकाश वाला हमा (एषि) तु हो, तथा (समुद्रः इव) समूद्र फी तेश्तं परमेष्वेर सब की वाति को सृनता है, यथां द्री निष यभ्मन्- येते राजा तद् वेद व रुणस्तृतीयः'” (भथर्वं० २।१६।३ ) अ्थात्ं दो बैठकर जो मन्ध्रणा करते हँ राजा वरुण उसे जानता है. तीसरा हो कर । तथां

English

Thy hair where it is falling off, and with the roots is torn away, I wet and sprinkle with the Plant, the remedy for all disease. A charm to promote the growth of hair

अध्याय 6

श्लोक 137.1

केशवर्धनम्।१-३ वीतहव्यः।वनस्पतिः।अनुष्टुप्।यां ज॒मद॑ग्नि॒रख॑नद् दुहि॒त्रे के॑श॒वर्ध॑नीम्।तां वी॒तह॑व्य॒ आभ॑र॒दसि॑तस्य गृ॒हेभ्यः॑

keśavardhanam| 1-3 vītahavyaḥ| vanaspatiḥ| anuṣṭup| yāṃ jamadagnirakhanad duhitre keśavardhanīm| tāṃ vītahavya ābharadasitasya gṛhebhyaḥ

हिन्दी अर्थ

मौर सव सम्पतियोकौदृष्टिसेमक्षीणदहै! हे परमेश्वर ! (ते) तैर (उपसदः) उपासक । अक्षिताः) क्षीण नहः काग करने वाले (अक्षिताः) क्षीणनहों दो उपसदः “उप सदः" भथ ति उपासकः “उप +आसंकाः” (आसं उपवेशने, अदादिः) । पृणन्तः=पृ पासे (करयादिः) । अत्तार; परमेश्वर (१) जसे यौः परकाश की दृष्टिते क्षीण, वैसे है परमेश्वर तु हमरे

English

The Plant which Jamadagni dug to make his daughter’s locks. grow long, This same hath Vitahavya brought to us from Asita’s abode.

अध्याय 6

श्लोक 137.2

अ॒भीशु॑ना॒ मेया॑ आसन् व्या॒मेना॑नु॒मेयाः॑ ।केशा॑ न॒डा इ॑व वर्धन्तां शी॒र्ष्णस्ते॑ असि॒ताः परि॑

abhīśunā meyā āsan vyāmenānumeyāḥ | keśā naḍā iva vardhantāṃ śīrṣṇaste asitāḥ pari

हिन्दी अर्थ

अपबेवेद-भाष्य कां०६। अनु ११। ° १४९ .. का० ६। अनु० १३। सू० १४२ अ.वेद-माभ्य अन्न' है भोर अक्नाद' है । उपासक उसके भद्ररूप का भोग करते है, उस के आनन्द रसकापानकरसेहै, यह् परनहो भन्नमोग है । प्रलथ कावमें परमेश्वर जगत् का मानो प्राणन करता है। अतः बह अन्नादहै। ववा यव =कृष्यत्न जौ । पूणिवीर्मे वोप गयायव्ं का बोज अंकरुसि हो कर उत्थान करता है, निजं तेजया महिफाके करण बदुषंख्पक यव जोकः प्रदानः करताहै। यतर इतना पेदादहो जतादहै कि कुसूल, कोष्ठ दिको दइतनाभरदेतादहै कि यवके दवाकके कारण ये पाक्त फटने सगते ै(मूणोदि), कविता में वणेन । दम्य अशनिः = इद्र का वज्रपात ।

English

They might be measured with a rein, meted with both extended arms. Let the black locks spring thick and strong and grow like reeds upon thy head. Strengthen the roots, prolong the points, lengthen the middle part, O Plant.

अध्याय 6

श्लोक 137.3

दृंह॑ मूल॒माग्रं॑ यच्छ॒ वि मध्यं॑ यामयौषधे ।केशा॑ न॒डा इ॑व वर्धन्तां शी॒र्ष्णस्ते॑ असि॒ताः परि॑

dṛṃha mūlamāgraṃ yaccha vi madhyaṃ yāmayauṣadhe | keśā naḍā iva vardhantāṃ śīrṣṇaste asitāḥ pari

हिन्दी अर्थ

(२). यजुर्वेद ५।२६ मे मी “यव का प्रयोग अष्पात्मिकः अयं मे हुआः है ॥ ह, पृथक् करने वाला है, पृथक् करहमसेः देष को, पृथक् कर अरातीः अर्थात अदन भावनार्भो को, कंजूसी कफो ॥ दोषः वाः (अरातीः). शवुरमो को (यवव). दुर कर" (दयानन्व) ॥ तथाः “यवानां अदे, जो कि पृक्त के प्रव मर्व. मेः एकवाश्यताः केः उपपादक है ॥ एता ते शेषः संहसायमरको न ङ ससं कं कृणोतु ।१॥ (यथा) जेसे (असितः) सीमारहित च.ल।क, (वणान् अनु) परमेश्वर

English

Let the black locks spring thick and strong and grow like reeds upon thy head. A woman’s imprecation on her unfaithful lover

अध्याय 6

श्लोक 138.1

क्लबत्वम्।१-५ अथर्वा।वनस्पतिः।अनुष्टुप्, ३ पथ्यापङ्क्तिः।त्वं वी॒रुधां॒ श्रेष्ठ॑तमाभिश्रु॒तास्यो॑षधे ।इ॒मं मे॑ अ॒द्य पुरु॑षं क्ली॒बमो॑प॒शिनं॑ कृधि

klabatvam| 1-5 atharvā| vanaspatiḥ| anuṣṭup, 3 pathyāpaṅktiḥ| tvaṃ vīrudhāṃ śreṣṭhatamābhiśrutāsyoṣadhe | imaṃ me adya puruṣaṃ klībamopaśinaṃ kṛdhi

हिन्दी अर्थ

शरीरावयवो का (कृण्वन्) निर्माण करता हुआ, (असुरस्य मायया) करता दहै, (एवा) हसी, प्रकार (अयम्) यह (अकः) सूये सदुश प्रताप वाला अङ्ग को, (समू, सम्, अकम्) परस्पर संगत (कृणोतु) करे । च.लोक असीम दहै, सीमारदित है, बन्धन. रहित है, फलता घाता है

English

O Plant, thy fame is spread abroad as best of all the herbs that grow. Unman for me to-day this man that he may wear the horn of hair. Make him a eunuch with a horn, set thou the crest upon his- head.

अध्याय 6

श्लोक 138.2

क्ली॒बं कृ॑ध्योप॒शिन॒मथो॑ कुरी॒रिणं॑ कृधि ।अथा॒स्येन्द्रो॒ ग्राव॑भ्यामु॒भे भि॑नत्त्वा॒ण्ड्यौऽ

klībaṃ kṛdhyopaśinamatho kurīriṇaṃ kṛdhi | athāsyendro grāvabhyāmubhe bhinattvāṇḍyau'

हिन्दी अर्थ

, फलता जा रहा है । फलता-फेलता एतना फल जायगा कि परस्पर के ध शाकषेणसे रहित हो कर ध्वत्तहो जायगा, प्रलय हो जामी । संसम- (२) यलोक के नएतारा आदि जोकि “मैलक्सीज" से निमित होते रहते है, ये चयुलोकके बपूषिषू्परै, ओौर दयूलोवसूपी महाणशरीर के शरीरावयव सूप का५९। अनु ७। सू० ७२ अयवबेद-पाष्य परिशिष्ट) २६१ जैसे गव्वारा या ब्रैलूत । (यावत् ) जितने परिणाम वाला (परस्वतः)

English

Let Indra with two pressing-stones deprive him of his manly strength. I have unmanned thee, eunuch! yea, impotent! made thee- impotent, and robbed thee,

अध्याय 6

श्लोक 138.3

क्लीब॑ क्ली॒बं त्वा॑करं॒ वध्रे॒ वध्रिं॑ त्वाकर॒मर॑सार॒सं त्वा॑करम्।कु॒रीर॑मस्य शी॒र्षणि॒ कुम्बं॑ चाधि॒निद॑ध्मसि

klība klībaṃ tvākaraṃ vadhre vadhriṃ tvākaramarasārasaṃ tvākaram| kurīramasya śīrṣaṇi kumbaṃ cādhinidadhmasi

हिन्दी अर्थ

बणविकार, गणेनाश द्वारा परस्वतः= पारावत्तः 1 अगीनम् = जितने अंग वाला, परिमाण वःल परस्वान् आद का परे अर्थात् दूरके द्युलोक में स्थित है। (२) कपोत == कवूतर, ?9€011, ५०५९ । कपोत को पारावत भौ फरते ई! सण्डल। चिन के उर को रेक को संख्या ५-६ मंसो ॐ नीक समाप्ति.

English

weakling! of thy strength. Upon his head we set the horn, we set the branching ornament. Duas tuas venas, a Diis factas, in quibus stat vigor virilis, paxillo ligneo in testiculis ob istam

अध्याय 6

श्लोक 138.4

ये ते॑ ना॒ड्यौऽदे॒वकृ॑ते॒ ययो॒स्तिष्ठ॑ति॒ वृष्ण्य॑म्।ते ते॑ भिनद्मि॒ शम्य॑या॒मुष्या॒ अधि॑ मु॒ष्कयोः॑

ye te nāḍyau'devakṛte yayostiṣṭhati vṛṣṇyam| te te bhinadmi śamyayāmuṣyā adhi muṣkayoḥ

हिन्दी अर्थ

, गादिभम् =गदभमण्डलः , गदभ-तारा रविम मे स्थित है । रिमा्ं सविमा्योमेः गदभतारा कीः स्थिक्ति है + यथा "रविमा्ंः ९8865 तणप्ौ, ताः ए१ फल ऽका स्वाहा, अनिलः, "दभ" स्याति, चित्रा गदेभ-ता ताः का प्रदेशः ग दभ-मण्डलः हैः, चित्र मेः गादभ-मण्डल को नही ३ करै नीचे दर्यो है । यहु आ्विन-मण्डल हैः चोटः (६ दिया गया चि; 700 ततप 45 माजा " सेः कवा गयाहैः मौर चिोकौ ग्याख्या भीः इसी पुस्तक के अनुसारः कीः

English

mulierem tibi findo. Ut mulieres mattam (tegetem) facturae arundinem lapide findunt, sic fascinum tuum cum

अध्याय 6

श्लोक 138.5

यथा॑ न॒डं क॒शिपु॑ने॒ स्त्रियो॑ भि॒न्दन्त्यश्म॑ना ।ए॒वा भि॑नद्मि ते॒ शेपो॒ऽमुष्या॒ अधि॑ मु॒ष्कयोः॑

yathā naḍaṃ kaśipune striyo bhindantyaśmanā | evā bhinadmi te śepo'muṣyā adhi muṣkayoḥ

हिन्दी अर्थ

मति, चप्रापी । अतिदूरता केः कार्ण; अल्पता देः. जसे करि. सूर्यः मरतिमहाः परिमाण वाला होताः हुः भो, जगभग १०.करोड़ मीलौं कीदूुरता के. कारण स्थालो-परिमाणवाल। प्रतीत ह्येत है । रामलाल करं द्स्ट दारो परकोरिते वां प्र॑सासितिं प्रीणि प्न्य ४. ते्तिरोय-से हिता.पद्पाठेः- ५०्वधं से दुलभ ग्रन्थ क पूनः प्रकाशनं, ३०-००, १८-१६ कोण्डं २५-००, बीसंवां कृाणड २५.००

English

testiculis ob istam mulierem findo. A woman’s love-charm Thou hast grown up, a source of joy to bless me with pros- perity.

अध्याय 6

श्लोक 139.1

सौभाग्यवर्धनम्।१-५ अथर्वा।वनस्पतिः।अनुष्टुप्, १ त्र्यवसाना षट् पदा विराड् जगती।न्य॒स्ति॒का रु॑रोहिथ सुभगं॒कर॑णी॒ मम॑ ।श॒तं तव॑ प्रता॒नास्त्रय॑स्त्रिंशन्निता॒नाः ॥ तया॑ सहस्रप॒र्ण्या हृद॑यं शोषयामि ते

saubhāgyavardhanam| 1-5 atharvā| vanaspatiḥ| anuṣṭup, 1 tryavasānā ṣaṭ padā virāḍ jagatī| nyastikā rurohitha subhagaṃkaraṇī mama | śataṃ tava pratānāstrayastriṃśannitānāḥ || tayā sahasraparṇyā hṛdayaṃ śoṣayāmi te

हिन्दी अर्थ

६. ऋण्वेशाविभाष्यं भूमिकां -पंऽ युधिष्ठिरे मीमांसक द्वारां संपादितं एवं शतशः टिप्पशि्यो से युक्त । साधौरर जिह्द ३०.०७, पूरे केप की कै ग्रन्थकार दारां विये उत्तर । ४०.००५ १०. वेदिकं सिद्धोत-मी्मासा- पण युधिष्ठिरं मीमांसकं लिखित वेद. विरचित सेस्कृतटीकां सहित । ठीके! कां धूरो पाठ प्रथं बार द्यावा मयां है । विद्छृत भूमिका शरोर भनेक परिशिष्टो से युक्त । १०००० डा० विजयपाल जी विद्यावारिचि। उत्तम संस्करण ३५-०० साधारण

English

A hundred are thy tendrils, three-and-thirty thy descending shoots. With this that bears a thousand leaves I dry thy heart and wither it.

अध्याय 6

श्लोक 139.2

शुष्य॑तु॒ मयि॑ ते॒ हृद॑य॒मथो॑ शुष्यत्वा॒स्यऽम्।अथो॒ नि शु॑ष्य॒ मां कामे॒नाथो॒ शुष्का॑स्या चर

śuṣyatu mayi te hṛdayamatho śuṣyatvāsya'm| atho ni śuṣya māṃ kāmenātho śuṣkāsyā cara

हिन्दी अर्थ

१३ वेदिक-साहित्य-सोदामिनी -स्व° श्री पं० वागीश्वर वेदालंकार, ॥ १४. ऋग्वेव को ऋष्संखया यूविष्ठिर मोमांसक । ५-०० १५. वेद-भुति-आम्नाय सज्ञा मोमांसा , संस्कृ त -हिन्दी)--यु°मी ° २-५० ॥ १६. वदिक-छन्दोमीमांसा -यु° मौ । नया संस्करण २५-० १७. वेदिक-स्वर-मीमांसा -यु- मी नया संस्करण २०-०० १८. वंदिक वाडःमय में प्रयुक्त विविध स्वराकन-परकार -यु° मौ°।

English

Let thy heart wither for my love and let thy month be dry for me. Parch and dry up with longing, go with lips that love of me hath dried. Drive us together, tawny! fair! a go-between who wakens love.

अध्याय 6

श्लोक 139.3

सं॒वन॑नी समुष्प॒ला बभ्रु॒ कल्या॑णि॒ सं नु॑द ।अमूं च॒ मां च॒ सं नु॑द समा॒नं हृद॑यं कृधि

saṃvananī samuṣpalā babhru kalyāṇi saṃ nuda | amūṃ ca māṃ ca saṃ nuda samānaṃ hṛdayaṃ kṛdhi

हिन्दी अर्थ

१९. वेदो का महच्च तथा उनके प्रचार के उपाय, वेवाथं की विषिक प्रक्रियां को एतिहासिक मीमांसा -(पस्कृन-हिन्दो) यु° मी०। ८.०७ २०. देवापि मौर शन्तनु के आख्यान का वास्तविक स्वरूप - लेखक-- श्री पं० धर्मदेवनी निरुक्ताचा््रं २८. ऋग्देद-परिचय - श्रो पं विदवनायजौी वि्लामातेण्ड । ऋग्वेद २९. वेविक-पौयुष धारा -लेखक -श्री देवेन्द्र कुमार जी कपूर चने गीतां से युक्त । उत्तम जित्द १५-००, साधारण १०-०५।

English

Drive us together, him and me, and give us both one heart and mind. Even as his mouth is parched who finds no water for his burn- ing thirst,

अध्याय 6

श्लोक 139.4

यथो॑द॒कमप॑पुषोऽप॒शुष्य॑त्या॒स्यऽम्।ए॒वा नि शु॑ष्य॒ मां कामे॒नाथो॒ शुष्का॑स्या चर

yathodakamapapuṣo'paśuṣyatyāsya'm| evā ni śuṣya māṃ kāmenātho śuṣkāsyā cara

हिन्दी अर्थ

लेषक- श्री वेद्य रामगोपाल नजो शास्त्री । १२-०५ ९३१. उर-ज्योति-डा० बासुदेवशरण भग्रवाल लिखित देदविषयक ३२. वेदो को प्रामाणिकता -डा० श्रीनिवास शास्त्री । १-१ २४. बोधायन-भोत-सृत्रम्-(दशंपुणंमास प्रकरण) -मवस्वाभी तथा

English

So parch and burn with longing, go with lips that love of me hath dried. Even as the Mungoose bites and rends and then restores the wounded snake, So do thou, Mighty one, restore the fracture of our severed love.

अध्याय 6

श्लोक 139.5

यथा॑ नकु॒लो वि॒च्छिद्य॑ सं॒दधा॒त्यहिं॒ पुनः॑ ।ए॒वा काम॑स्य॒ विच्छि॑न्नं॒ सं धे॑हि वीर्यावति

yathā nakulo vicchidya saṃdadhātyahiṃ punaḥ | evā kāmasya vicchinnaṃ saṃ dhehi vīryāvati

हिन्दी अर्थ

३५. बोघायन-धोत-सूत्रम्- (बाघान-प्रकरण)- सुबोधिनी वुत्ति सहित ३६. दशपुणंमास-पद्ति -पं भीमसेन कृत, भाषां सहित । पर हमने इसे प्रथम बारदछापाहै, २५-०० का आधर, उनका विकास, परिवर्तन, पञुयज्ञ आदि म्रनेक विषयोंकी णियां, १२ परिशिष्ट । मूल्य लागतमात्र २०-००, रानसंस्करण २५-००, सस्ता संस्करण ६-००, अच्छा कागज सजित्द १२-००।

English

A blessing on a child’s first two teeth 100

अध्याय 6

श्लोक 140.1

सुमङ्गलौ दन्तौ।१-३ अथर्वा।ब्रह्मणस्पतिः, दन्ताः।(अनुष्टुप् १) १ उरोबृहती, २ उपरिष्टाज्ज्योतिष्मती त्रिषटुप्, ३ आस्तारपङ्क्तिः।यौ व्या॒घ्रवव॑रूढौ जिघ॑त्सतः पि॒तरं॑ मा॒तरं॑ च ।यौ दन्तौ ब्रह्मणस्पते शि॒वौ कृ॑णु जातवेदः

sumaṅgalau dantau| 1-3 atharvā| brahmaṇaspatiḥ, dantāḥ| (anuṣṭup 1) 1 urobṛhatī, 2 upariṣṭājjyotiṣmatī triṣaṭup, 3 āstārapaṅktiḥ| yau vyāghravavarūḍhau jighatsataḥ pitaraṃ mātaraṃ ca | yau dantau brahmaṇaspate śivau kṛṇu jātavedaḥ

हिन्दी अर्थ

मूल मराठी मे लिखे गये ग्रन्थ का हिन्दी-भ्नुवाद। हसी का गुजराती भ्रनुवाद संशोधित संस्कार-विधि का प्राधार बना। सोमयाग चातुर्य श्नौर वाजपेय भादि यागो का वेशं है । “(दोनो मागः के मस्र कौ पदाथं तया भावाथं व्याख्या संहित ¶ यु मीरगे दरण बोंदिं विचि वृहद् हवन के भन्ो सहित ।

English

Two tigers have grown up who long to eat the mother and the sire: Soothe, Brāhmanaspati, and thou, O Jātavedas, both these teeth. Let rice and barley be your food, eat also beans and sesamum.

अध्याय 6

श्लोक 140.2

व्री॒हिम॑त्तं॒ यव॑मत्त॒मथो॒ माष॒मथो॒ तिल॑म्।ए॒ष वां॑ भा॒गो निहि॑तो रत्न॒धेया॑य दन्तौ॒ मा हिं॑सिष्टं पि॒तरं॑ मा॒तरं॑ च

vrīhimattaṃ yavamattamatho māṣamatho tilam| eṣa vāṃ bhāgo nihito ratnadheyāya dantau mā hiṃsiṣṭaṃ pitaraṃ mātaraṃ ca

हिन्दी अर्थ

५५. निरत ध्लोकदालतिकम् - केरलदेशीय नीलकण्ठ गरं विरचित मे ताडपत्र पर लिखित दुलेभ प्रतिके भ्राघारं फेतिह्य दिया गया है (संस्छृत)) उत्तम कागज बुद्ध छपाई तथा सुन्दर जिल्द सहित । ५ १२५-०० ५८. धातुपाठ -- घात्वादिसूची सहित, शुद्ध संस्करण 1;: ,. , ५१

English

This is the share allotted you, to be your portion, ye two Teeth. Harm not your mother and your sire.

अध्याय 6

श्लोक 140.3

उप॑हूतौ स॒युजौ॑ स्यो॒नौ दन्तौ॑ सुम॒ङ्गलौ॑ ।अ॒न्यत्र॑ वां घो॒रं त॒न्वः॑१ परै॑तु दन्तौ॒ मा हिं॑सिष्टं पि॒तरं॑ मा॒तरं॑ च

upahūtau sayujau syonau dantau sumaṅgalau | anyatra vāṃ ghoraṃ tanvaḥ1 paraitu dantau mā hiṃsiṣṭaṃ pitaraṃ mātaraṃ ca

हिन्दी अर्थ

1 वामो कृत । पाणिनीय धातुपाठ की सवम ्रदादत्त जिननासु वहन भागं १५९. दसय कय -- युधिष्ठिरं सीमं ् इ अग्रजो अनुवाद है। गरग्रजौ भाषा ,के.माध्यम्न से पाणिरीय कर ! प्रवेशः करने. -वालौ.े-लियेः यह् ग्राधिकारिक पुस्तक है। कागज: आर छपाई सुन्दर । सजि २४ 1 ८ उणाविक्ोयः--ऋःषिदधानन्द करत व्याख्या तथापं० यु° मौ० कृत

English

Both fellow teeth have been invoked, gentle and bringing happi- ness. Else whither let the fierceness of your nature turn away, O Teeth! Harm not your mother or your sire.

अध्याय 6

श्लोक 141.1

गोकर्णयोर्लक्ष्यकरणम्।१-३ विश्वामित्रः।अश्विनौ।अनुष्टुप्।वा॒युरे॑नाः स॒माक॑र॒त् त्वष्टा॒ पोषा॑य ध्रियताम्।इन्द्र॑ आभ्यो॒ अधि॑ ब्रवद् रु॒द्रो भू॒म्ने चि॑कित्सतु

gokarṇayorlakṣyakaraṇam| 1-3 viśvāmitraḥ| aśvinau| anuṣṭup| vāyurenāḥ samākarat tvaṣṭā poṣāya dhriyatām| indra ābhyo adhi bravad rudro bhūmne cikitsatu

हिन्दी अर्थ

सतरत उपराद्घात एवं सूव्रसूची शन्दसूची श्रादि के सहित) । ५० ० ९७. दवम् पुरूषकारवात्तिकोपेतम्- लोलागुकमूनि कृत । .. १२-०० ध ४ रटे शब्दसूपों काज्ञान करनेवाली ३-५० स स्कृत-धातु-कोष- पाणिनीय घातुभ्रों का हिन्दी मे भरथंनिदंश्च छपाई, उत्तम कागज, बहिया जिहर सहित । ॑ १०.०५

English

A blessing on cattle Vayu collected these: to find their sustenance be Tvashtar’s care:

अध्याय 6

श्लोक 141.2

लोहि॑तेन॒ स्वधि॑तिना मिथु॒नं कर्ण॑योः कृधि ।अक॑र्ताम॒श्विना॒ लक्ष्म॒ तद॑स्तु प्र॒जया॑ ब॒हु

lohitena svadhitinā mithunaṃ karṇayoḥ kṛdhi | akartāmaśvinā lakṣma tadastu prajayā bahu

हिन्दी अर्थ

विषय परपू्णं महत्त्वपूरं भूमिका पौ ५०-०० ग्रग्रजी व्याख्या सहित । ईश८ २-००, केनो ° २-००, फकटो० ४-०० करमे वाला टार्धनिक ग्रन्थं । ४०.०७ ८०. अनासक्तियोग -लेखक- धो पं०गश्नाथ पथिक । तया संस्करण ।

English

May Indra bless and comfort them, and Rudra look that they increase. Take thou the iron axe and make a pair by marks upon their ears. This sign the Asvins have impressed: let these increase and multiply.

अध्याय 6

श्लोक 141.3

यथा॑ च॒क्रुर्दे॑वासु॒रा यथा॑ मनु॒ष्याऽउ॒त।ए॒वा स॑हस्रपो॒षाय॑ कृणु॒तं लक्ष्मा॑श्विना

yathā cakrurdevāsurā yathā manuṣyā'uta| evā sahasrapoṣāya kṛṇutaṃ lakṣmāśvinā

हिन्दी अर्थ

पद पर नियुक्त तथा सन् १९४२ मेँ वहां से सेवामुक्त हुए। अनुसन्धान- सन् १९२३-२४ मे परोपकारिणी सभा अजमेर में। सन् हि १९५६ ५,७ आर्य सावदेशिक वाटिका मे साथ ही ' वैदिक अनुसन्धान ' त्रैमासिक हि पत्रिका का सम्पादन भी। अन्य लेखन- ९. सामवेद का आध्यात्मिक भाष्य, रहने के कारण आपको ४ स्वर्णपदक ओर एक रजतपदक प्राप्त हुआ। १- धो जयदयाल कपुर, हैदरानाद ००१-०० सके अतिरिक्त कु भौर महानुभावो कौ मौ सहायता ह्मे प्राप्त हुई है, जिसे हमने काण्ड ४-५ के प्रकादनमे लगा दिया है।

English

Even as Gods and Asuras, even as mortal men have done, Do ye, that these may multiply in thousands, Asvins! make the mark.

स्रोत: bhavykhatri/DharmicData · प्राप्त 3/6/2026

शास्त्रीय प्रामाणिकता एवं पारदर्शकताSources & Interpretation

स्रोत, संस्करण एवं व्याख्या वर्गीकरण

धर्म ग्रंथ पर मूल शास्त्र, पारंपरिक भाष्य और आधुनिक व्याख्या को पूर्णतः पृथक रखा जाता है ताकि पाठक को किसी भी व्याख्या के शास्त्र होने का भ्रम न हो।

सामग्री वर्गीकरण संकेत (Epistemic Content Labels)

6 स्तरिय प्रमाण व्यवस्था
मूल पाठOriginal text

अपौरुषेय / प्रामाणिक शास्त्र (Primary Canonical Scripture)

मूल संस्कृत, प्राकृत अथवा अवधी श्लोक/मंत्र। यह सर्वोच्च प्रमाण (प्रस्थान) है। इस पाठ में किसी भी आधुनिक व्याख्याकार का हस्तक्षेप नहीं है।

शाब्दिक अनुवादLiteral translation

पदार्थ व अन्वय (Direct Grammatical & Word-for-Word Meaning)

व्याकरणसम्मत प्रत्यक्ष शब्दार्थ (अन्वय)। बिना किसी दार्शनिक संप्रदाय के पूर्वाग्रह के, संस्कृत शब्दों का सटीक भाषांतर।

पारंपरिक भाष्यTraditional commentary

आचार्य परंपरा व टीका (Classical Lineage Commentary)

प्राचीन आचार्य परंपरा (यथा शंकराचार्य, रामानुजाचार्य, मध्वाचार्य, श्रीधर स्वामी) द्वारा विरचित शास्त्रीय भाष्य व टीकाएं।

सरल व्याख्याSimple explanation

भावार्थ व सुबोध प्रबोधन (Accessible Pedagogical Exposition)

आधुनिक जिज्ञासुओं के लिए सरल भाषा में भावार्थ। यह मूल मंत्र नहीं, बल्कि पाठ को सुगम बनाने हेतु संपादकीय व्याख्या है।

आधुनिक चिंतनModern reflection

समसामयिक विमर्श व अनुप्रयोग (Contemporary Application & Analysis)

दार्शनिक, मनोवैज्ञानिक व वैज्ञानिक समरूपताओं पर आधुनिक चिंतन। यह मूल शास्त्र का अंग नहीं है और इसे शास्त्रोक्त सिद्धांत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

शोध टिप्पणीResearch note

पांडुलिपि एवं ऐतिहासिक शोध (Critical Apparatus & Manuscript Research)

पांडुलिपि विविधताएं, पाठ-भेद (variant readings), छंद रचना, और ऐतिहासिक व तुलनात्मक भाषावैज्ञानिक शोध। यह शास्त्र का मूल संदेश बदलने हेतु नहीं, बल्कि पाठ की प्रामाणिकता परखने के लिए है।