Atharva Veda
6
अध्याय 6 / 20

Kanda 6

काण्ड 6

453 श्लोकभाग 5/8 · श्लोक 82.1–103.3

पूर्ण अध्याय पाठ68 श्लोक

अध्याय 6

श्लोक 82.1

जायाकामना।१-३ भगः।इन्द्रः।अनुष्टुप्।आ॒गच्छ॑त॒ आग॑तस्य॒ नाम॑ गृह्णाम्याय॒तः ।इन्द्र॑स्य वृत्र॒घ्नो व॑न्वे वास॒वस्य॑ श॒तक्र॑तोः

jāyākāmanā| 1-3 bhagaḥ| indraḥ| anuṣṭup| āgacchata āgatasya nāma gṛhṇāmyāyataḥ | indrasya vṛtraghno vanve vāsavasya śatakratoḥ

हिन्दी अर्थ

"राज्यकर' का प्रबन्ध करता है। तथा राष्ट का सेनानायक (यजु° १७। का० ६ ?अनु० । सु° ८८ अथवेवेद-भाष्य १५५ (घ्र.वा) घ्व है (यौः) चूलोक, (घरवा) घ्रूब है (पुथिवो) पृथिवो गतिमान् है। (घूवाषः) धक रहै (दमे पवंताः) ये पवेत, ( घ्व) घ्व द (अयय्) यह् (विशाम् राजा) प्रजाओंका राजा। धरुवं ते राजा वरुणौ धवं देवो बृहस्पर्तिः

English

Let Varana the heavenly tree here present keep disease away. The Gods have driven off Decline that entered and possessed this man.

अध्याय 6

श्लोक 82.2

येन॑ सू॒र्यां सा॑वि॒त्रीम॒श्विनो॒हतुः॑ प॒था।तेन॒ माम॑ब्रवी॒द् भगो॑ जा॒यामा व॑हता॒दिति॑

yena sūryāṃ sāvitrīmaśvinohatuḥ pathā| tena māmabravīd bhago jāyāmā vahatāditi

हिन्दी अर्थ

को (अधरान् पादयस्व) अपने नीचे कर । (सर्वाः दिशः) सब दिशाओं के १५६ अथवेवेद-माष्य . कां० ६ 1 अनु० ९ । सू° ८६ कर चलनेवाली हों, (ध्रवायते) स्थिररूप मं विद्यमान तेरे लिये (श्ट) के कारण (ते) तेरे (हादिम्) हृदयवर्ती चित्त को (शोचयामसि) हम

English

We with the speech of Indra and of Mitra and of Varuna. We with the speech of all the Gods will drive Decline away from thee. Even as Vritra checked and stayed these waters flowing every way,

अध्याय 6

श्लोक 82.3

यस्ते॑ऽङ्कु॒शो व॑सु॒दानो॑ बृ॒हन्नि॑न्द्र हिर॒ण्ययः॑ ।तेना॑ जनीय॒ते जा॒यां मह्यं॑ धेहि शचीपते

yaste'ṅkuśo vasudāno bṛhannindra hiraṇyayaḥ | tenā janīyate jāyāṃ mahyaṃ dhehi śacīpate

हिन्दी अर्थ

मन्त मे कारणवश कुपित-पत्नी के प्रति कथन हणा है। उसे कहा करते के कारण प्रायशित्तस्पमे दुःखित करते है, ताकि इस प्रकोप का तीनकौ व्याख्या मे सायणानुसार सम्बोधन जायापरक है, यथा--हे (उद्गौथ तथा वेद्ुटमाधव; ऋ° १०।७१।१ ) । कां ६। अनु० ६। सू० ६० अथववेद-भाष्य १५७

English

With Agni, God of all mankind. I check and banish thy Decline. A glorification of a newly consecrated King

अध्याय 6

श्लोक 83.1

भैषज्यम्।१-४ भगः।२ सूर्यः, चन्द्रमाः, २ रोहिणी, ३ रामायणी।अनुष्टुप्, ४ एकावसाना द्विपदा निचृदार्च्यनुष्टुप्।अप॑चितः॒ प्र प॑तत सुप॒र्णो व॑स॒तेरि॑व ।सूर्यः॑ कृ॒णोतु॑ भेष॒जं च॒न्द्रमा॒ वोऽपो॑च्छतु

bhaiṣajyam| 1-4 bhagaḥ| 2 sūryaḥ, candramāḥ, 2 rohiṇī, 3 rāmāyaṇī| anuṣṭup, 4 ekāvasānā dvipadā nicṛdārcyanuṣṭup| apacitaḥ pra patata suparṇo vasateriva | sūryaḥ kṛṇotu bheṣajaṃ candramā vo'pocchatu

हिन्दी अर्थ

हे पत्नी ! (ते) तेरे (हादिम्) हूदयगत चित्त को (शोचयामसि) हम शोकयुक्त करते है, (ते) तेरे (मनः) संकत्पविकत्पात्मक मनः को (शोचयामसि) हम शोकयुक्त करते हैँ । (धूमः) धुआं (इव) जसे (वायुम्) वायु के (सघ्रयङ्) साथ शति करता है वसे (ते) तेरा (मनः) मन (माम् एव) मेरा हो (अनु एतु) अनुगमन करे। मच त्वा मि्ावरणो महयं देवी सरस्वती । करे। तथा शानसम्पत्न वेदवाणी भी ज्ञान प्रदान कर हम दोनों को पर- स्पस् सम्बद्ध करे । हे वाण विद्ध ! (वै) तैरे (अङ्खभ्यः) अङ्गो के लिये, (च) ओर

English

This is the Lord of Indra, this the Lord of Heaven, the Lord of Earth, The Lord of all existing things: the one and only Lord be thou,

अध्याय 6

श्लोक 83.2

एन्येका॒ श्येन्येका॑ कृ॒ष्णैका॒ रोहि॑णी॒ द्वे।सर्वा॑सामग्रभं॒ नामावी॑रघ्नी॒रपे॑तन

enyekā śyenyekā kṛṣṇaikā rohiṇī dve| sarvāsāmagrabhaṃ nāmāvīraghnīrapetana

हिन्दी अर्थ

१५८ अथववेवेद-भाष्य रका० ६। अनु० । सूु० ९० रथाय) लदयके लिये, (खरः) श्र ने (याम्, इषुम्) (४ है, (ताम्) उसे (इदम) यह (अद्य) भाज या इस समय रुलाता है, "“सोदयतेर्वा'' ( निक्त रुद्रहै परमेश्वर जो ४ दिद के दषु अर्थात् वाण ह (तासाम्, सर्वासाम्; उन सब नाडयो के (विषाणि) विषों को (वयम्) हम (निर् ह्वधामससि) बाहर कर देते है । ।

English

The Sea is regent of the floods, Agni is ruler of the land, The Moon is regent of the stars: the one and only Lord be thou.

अध्याय 6

श्लोक 83.3

अ॒सूति॑का रामाय॒ण्यऽप॒चित् प्र प॑तिष्यति ।ग्लरि॒तः प्र प॑तिष्यति॒ स ग॑लु॒न्तो न॑शिष्यति

asūtikā rāmāyaṇya'pacit pra patiṣyati | glaritaḥ pra patiṣyati sa galunto naśiṣyati

हिन्दी अर्थ

रोग अङ्खोमे विष फला देते । ध्रमनिथां है लाल रक्त-को-ताडियां, जिन में स्पन्दन होता रहता है । नम॑ से .रदरास्य॑ते नमः प्रतिहिताय । (सद्र) है रलाने वाने परमेश्वर ! (अस्यते) न्रोगषटपौ इषु फंकते हए (ते) तञ (नमः) नमस्कार हो, (्रतह्गाय) धनुष पर ठ । लिये (नमः)नमः टा । ( विसुञ्यमानाये) छाड़ जात हए ईषु केलि १ नमः हो, (विपक्तिताये लक्ष्य पर गिरे इषु के लिये (नमः ) नमः हो, नमस्कार किया है, रोष तौन पादौ म इषुल्प-रोग। ‡ प्रति नमः कदा है । दन तान पादो रौपकौ तीन अवस्यापु निर्दिष्ट को ५८ रोग का पवल्प, मध्यरूप, तथा रोग का आविर्भाव । इनत तोन भवस्थाओंमेरोगरे अपा- करण के उपाय का वणन "नम." द्रा किथाहै। अवस्थाओंमें

English

Thou art the King of Asuras, the crown and summit of man- kind: Thou art the partner of the Gods: the one and only Lord be thou. A benediction addressed to a newly elected King

अध्याय 6

श्लोक 83.4

वी॒हि स्वामाहु॑तिं जुषा॒णो मन॑सा॒ स्वाहा॒ मन॑सा॒ यदि॒दं जु॒होमि॑

vīhi svāmāhutiṃ juṣāṇo manasā svāhā manasā yadidaṃ juhomi

हिन्दी अर्थ

दोष से रोगोत्यन्न होत अतः जनन पर निपन्रण का कथन तीन पारदो स्कार करवेसे रोगों का शमन नही हाता । इस ल सूक्त ६९१ सँ नाना आष के योगों का वणेन भी हुआ है । ० ६। अनु० ९) ०९१ अथववेद-भाष्य १५९ साथ (षडचंगेभिः) तया षड्-मौषधों के योगों के साथ ¦ अच पुः) कृषि दारा पदा किया है । (तेन) इस दोनों योगों से युक्त यव द्वारा, है रुग्ण हे रोगिन् ! (ते तन्वः) तेरे शरीरके (रपः) पाप तथां तज्जन्य रोगको (अपाचनम्) हटने वाला करके (अपव्यये) पृथक् करदेता हूं

English

Here art thou: I have chosen thee. Stand stedfast and immov- able. Let all the clans desire thee: let not thy kingdom fall away.

अध्याय 6

श्लोक 84.1

निर्ऋतिमोचनम्।१-४ भगः।निर्ऋतिः।१ भुरिग्जगती, २ त्रिपदार्षी बृहती, ३ जगती, ४ भुरिक् त्रिष्टुप् (जगती) यस्या॑स्त आ॒सनि॑ घो॒रे जु॒होम्ये॒षां ब॒द्धाना॑मव॒सर्ज॑नाय॒ कम्।भूमि॒रिति॑ त्वाभि॒प्रम॑न्वते॒ जना॒ निरृ॑ति॒रिति॑ त्वा॒हं परि॑ वेद स॒र्वतः॑

nirṛtimocanam| 1-4 bhagaḥ|nirṛtiḥ| 1 bhurigjagatī, 2 tripadārṣī bṛhatī, 3 jagatī, 4 bhurik triṣṭup (jagatī) yasyāsta āsani ghore juhomyeṣāṃ baddhānāmavasarjanāya kam| bhūmiriti tvābhipramanvate janā nirṛtiriti tvāhaṃ pari veda sarvataḥ

हिन्दी अर्थ

कृषि द्वारा कहा है । यव ओौर ब्रोहि दानों भोज्यान्न होते हए, ओौषधरूपं वाले कहा है । अवलासौ - अरवल (बलाभाव) + असौ ( असु क्षेपणे भिधीयते" (गोता १६।१) । इस क्षेमे भी कृषि कर्म हो रहा है, क्म॑- रहे है । यमनियमादिन् योगाङ्गं बैल, तथा ५ ज्ञानेन्धियां मौर छटा मन ये षट् भीव॑लहँ। इसो लिये इन छः के विषयों फो गोचर कहते हैँ जिन मे कि गौएं विचरतीर्है। मौ -वैल । भोजन तोयोमी को भी चाहिए जिस करा कथन “यव"' शब्द द्वारा हुआ है । “यव” सात्विकं ओर पौस्टिक

English

Be even here: fall not away: be like a mountain unremoved. Stand stedfast here like Indra’s self, and hold the kingship in the grasp. This man hath Indra stablished, made secure by constant sacri- fice.

अध्याय 6

श्लोक 84.2

भूते॑ ह॒विष्म॑ती भवै॒ष ते॑ भा॒गो यो अ॒स्मासु॑ ।मु॒ञ्चेमान॒मूनेन॑सः॒ स्वाहा॑

bhūte haviṣmatī bhavaiṣa te bhāgo yo asmāsu | muñcemānamūnenasaḥ svāhā

हिन्दी अर्थ

मे “रपः” कहा है । “रपः रिप्रमिति पापनामनी" (निरक्त ४।३ २१) । १६० अययेवेद भाष्य कां० ६॥ अनु० । सू ९ नोचे की ओर शुक कर (ददे) दुही जाती है, (ते) तेरा (रषः) पाप भौ (न्यक् भवनु) नीचे को ओर से पृथक् हौ जाए) उपरि भाग के पापों समेत नीचै की इन्द्रिय के पापों को पृथक् करने का (आपः) जल (दद् वै!उ) दी निश्चय से (भेषजीः चिकित्सक है, ओषध है, (आपः) जल ( समो वचातनीः) रोग ओर रोगजनक अमीवा” नामक रोग कीटाणु के विनाशक हैं । (आपः) जल (विश्वस्य ) सव रोग समूह के (भेषजीः) चिकित्सक ह्, भौषध है, (ताः) वे जल (ति) तेरी

English

Soma, and Brāhmanaspati here present bless and comfort him! A benediction addressed to a newly elected King

अध्याय 6

श्लोक 84.3

ए॒वो ष्व॑१स्मन्नि॑रृतेऽने॒हा त्वम॑य॒स्मया॒न् वि चृ॑ता बन्धपा॒शान्।य॒मो मह्यं॒ पुन॒रित् त्वां द॑दाति॒ तस्मै॑ य॒माय॒ नमो॑ अस्तु मृ॒त्यवे॑

evo ṣva1smannirṛte'nehā tvamayasmayān vi cṛtā bandhapāśān| yamo mahyaṃ punarit tvāṃ dadāti tasmai yamāya namo astu mṛtyave

हिन्दी अर्थ

(भेषजम् ¦ चिकित्सा या भौषध (कृण्वन्तु) करे । ""जलविकित्ा" का वणेन है । तथा देखो (अथवं पुरुवुतः सिन्धुसृत्याय जाताः घ्व अवाचीः पुरुषे तिरश्ची; ।। “को अस्मिन्नापो व्यदधात् विपूवृतः अर्थात् सिराओं के कृष्णरक्त, षत शरोर

English

Firm is the sky, firm is the earth, and firm is all this living world; Firm are these mountains on their base, and stedfast is this King of men. Stedfast may Varuna the King, stedfast the God Brihaspati,

अध्याय 6

श्लोक 84.4

अ॒य॒स्मये॑ द्रुप॒दे बे॑धिष इ॒हाभिहि॑तो मृ॒त्युभि॒र्ये स॒हस्र॑म्।य॒मेन॒ त्वं पि॒तृभिः॑ संविदा॒न उ॑त्त॒मं नाक॒मधि॑ रोहये॒मम्

ayasmaye drupade bedhiṣa ihābhihito mṛtyubhirye sahasram| yamena tvaṃ pitṛbhiḥ saṃvidāna uttamaṃ nākamadhi rohayemam

हिन्दी अर्थ

जसे-जसे खान-पान सात्त्विक हो रष्वास में शुद्ध वायु. का सेवन बढता जाता ने रोगों के निरोध तथा शमन करनेकीण के लिये ““रक्तरूपी'' आपः का यहां कथन किया है । ता जाता, ओर प्राणायाम तथा श्वास ह, वैसे-वेसे रक्त रूपी “आपः ' क्ति बढ़ती जाती है, यह दशनि । कः ५ ४. वाले अश्व ! (वातरंहाः) ज्ञा गायुके वेग वाला एना व युज्यमानः) जता जाता हृजा तयम्यार किया जातः १ ५५. युदभ॒मि मे जा, (विश्ववेदसः) समग्र युद्ध विद्या के

English

Stedfast may Indra stedfast, too, may Agni keep thy stedfast reign. Firm, never to be shaken, crush thy foemen, under thy feet lay those who strive against thee.

अध्याय 6

श्लोक 85.1

यक्ष्मनाशनम्।१-३ अथर्वा।वनस्पतिः।अनुष्टुप्।व॒र॒णो वा॑रयाता अ॒यं दे॒वो वन॒स्पतिः॑ ।यक्ष्मो॒ यो अ॒स्मिन्नावि॑ष्ट॒स्तमु॑ दे॒वा अ॑वीवरन्

yakṣmanāśanam| 1-3 atharvā| vanaspatiḥ| anuṣṭup| varaṇo vārayātā ayaṃ devo vanaspatiḥ | yakṣmo yo asminnāviṣṭastamu devā avīvaran

हिन्दी अर्थ

0 रा त्यार करे, (त्वष्टा) कारोगर-परमेश्वर (त) ते छ ५ वाजिन्” पद जात्येकषचन मे है । युद्ध मुमि ् ५९८ याप्त संख्याम चाहिय, एक अश्व विजय केसेदे त द ४ (ते) तेरी (गृहा) हृदय गृहा में (यः जवः श स्थापित हुमा है, (उत) तथा (यः) जो (परेत्तः) परमे- (व ता रै, (वाजिन्) है वेग वाले अश्व ! (तेन) उस (बलन

English

One-minded, true to thee be all the regions: faithful to thee, the firm, be this assembly! A man’s love charm This strength that Soma hath bestowed, the head of her who gladdeneth,—

अध्याय 6

श्लोक 85.2

इन्द्र॑स्य॒ वच॑सा व॒यं मि॒त्रस्य॒ वरु॑णस्य च ।दे॒वानां॒ सर्वे॑षां वा॒चा यक्ष्मं॑ ते वारयामहे

indrasya vacasā vayaṃ mitrasya varuṇasya ca | devānāṃ sarveṣāṃ vācā yakṣmaṃ te vārayāmahe

हिन्दी अर्थ

, (समने) ओर संग्राम मे (पारयिष्णुः) पार करने वाला हो । चि १६२ म॒यवेवेद-माष्य; काँ ¶1.अनु°. .१.चु° ९९ को 1 तन् को (नयन्ती) युदधममि मेले जाती हुई + धारण के लिये(अह्व.तः) अकुटिल हुआ (देवः) द्युतिमान् सूय ध ५ (महः) महान् सौर मण्डल के (धरुणाय)

English

With that which thence hath been produced we make thy spirit sorrowful. We make thy spirit sorrowful, we fill thy mind with pain and grief.

अध्याय 6

श्लोक 85.3

यथा॑ वृ॒त्र इ॒मा आप॑स्त॒स्तम्भ॑ वि॒श्वधा॑ य॒तीः ।ए॒वा ते॑ अ॒ग्निना॒ यक्ष्मं॑ वैश्वान॒रेण॑ वारये

yathā vṛtra imā āpastastambha viśvadhā yatīḥ | evā te agninā yakṣmaṃ vaiśvānareṇa vāraye

हिन्दी अर्थ

(अघमारः) व्यक्तिकेपापके अनुसार मृत्यु का निर्णय देने वाला, (नि- फंकने वाला (नीलशिष्ण्डः) नीलो ज्वाला देने वला, (देवजनाः) ये देवजन हैँ । युद्ध मे (सेनया) सेनाः के साथ ये देवजन भी (उत्तस्थिवांसः) उठते, है, (ते) वे देवजन , (अस्माकम्) हमारे (वीरन्) वीरो को (परि- मन्त्रमें मूख्य खूप मे देवजनो का वर्णन है मौर सेना का वणेन गौणहै। लिये जाते हँ उन के अपराधो के अनुसार दण्ड का निश्चय तो अघमा अधिकारी करता है, ओौर जो निश्चित. किये दण्ड को क्रियात्मक रूप देता है वह् “मृत्यु संज्ञक अधिकारीहे, वध्र" है, सेनिकों को भरण-पोषण

English

As smoke accompanies the wind, so let thy fancy follow me. May Varuna and Mitra, may Sarasvati the Goddess, May the centre of the earth, and both her limits bring thee close to me.

अध्याय 6

श्लोक 86.1

वृषकामना।१-३ अथर्वा।एकवृषः।अनुष्टुप्।वृषेन्द्र॑स्य॒ वृषा॑ दि॒वो वृषा॑ पृथि॒व्या अ॒यम्।वृषा॒ विश्व॑स्य भू॒तस्य॒ त्वमे॑कवृ॒षो भ॑व

vṛṣakāmanā| 1-3 atharvā| ekavṛṣaḥ| anuṣṭup| vṛṣendrasya vṛṣā divo vṛṣā pṛthivyā ayam| vṛṣā viśvasya bhūtasya tvamekavṛṣo bhava

हिन्दी अर्थ

““तामसास्त्र“ को शत्रु परः फकने वाला अधिकारी, भसु क्षेपणे; “नीलशि- खण्ड" है सूर्यं को नीलो. शिखा, ज्वालाखूपा? सौर रश्मियोंका देने वाला मधिकारी “नीलां शिखां ददातीति सूर्य को नीलो रप्र, शत्रुः दल पर फकने से शत्रुदल जला दिया जाता है। सूयं की शुक्ल रर्मि सति प्रकार की रश्मियों का समूदरूप होती है। ये सप्तविध रष्मियां वर्षा-ऋतु में ५; । अथववेद-भाष्य का० ६ अनु १० । सू° ६३ रष्मियोमे एक ओरता लोहित र्म होती है, दूसरी मर नील (णंगृल), बौर इन दोनों के मध्य मे शेष ५ रक्िमियां । “असौ या सेना मरुतः परेषामस्मानभ्येत्योज सा स्पधमाना । विष्ट हो कर भिथः हनन करती रहे । स्वकोय सेना भी इसी अन्धकार मे शतु सेनाके साय युद्ध कररही है) अतः हमारे सेनाधिकारी धमवश कहीं निज सैनिकों का भी वध न कर दे, इस लिये “अस्माकं परि वृजन्तु वीरान्" द्वारा उन्हँ सचेत किया गया है । मन्परमं "मरुतः" है मारनेमें

English

A charm to cure a poisoned man The shaft that Rudra hath shot forth against thy members and thy heart,

अध्याय 6

श्लोक 86.2

स॒मु॒द्र ई॑शे स्र॒वता॑म॒ग्निः पृ॑थि॒व्या व॒शी।च॒न्द्रमा॒ नक्ष॑त्राणामीशे॒ त्वमे॑कवृ॒षो भ॑व

samudra īśe sravatāmagniḥ pṛthivyā vaśī| candramā nakṣatrāṇāmīśe tvamekavṛṣo bhava

हिन्दी अर्थ

के लिये, (उतत) तथा (भवाय राज्ञे) सुखसम्पत्ति के उत्पादक राजा के (नमः कृणोमि) भँ नमस्कार करता ह, वे (मनसा) मननपूवक (होमः) संनिकों को आत्माहृतियों द्वारा (हरसा) शबृहारी (घृतेन) वीर्यशक्तदवारा क°६। अनु० १० । सु० ९३ अथवेवेद-भाष्य १६५

English

Here do we draw from thee to-day, and turn it hence to every side. From all the hundred vessels spread throughout the members of thy frame. 89

अध्याय 6

श्लोक 86.3

स॒म्राड॒स्यसु॑राणां क॒कुन्म॑नु॒ष्याऽणाम्।दे॒वाना॑मर्ध॒भाग॑सि॒ त्वमे॑कवृ॒षो भ॑व

samrāḍasyasurāṇāṃ kakunmanuṣyā'ṇām| devānāmardhabhāgasi tvamekavṛṣo bhava

हिन्दी अर्थ

(विश्वे देवाः) है राष्ट के सब दिव्य अधिकारियो! तथा (विश्व- वेदसः) सब वेदों के वेत्ता (मरुतः) ऋत्विजो ! (नः) हम प्रजाजनों को, (अघविषाभ्यः) घातक विषवाली प्रजाओों दारा किये गए (वधात्) चुना गया राजा, जो कि (पूतदक्षाः) पविश्र गौर वृद्धिकारकंर्हैः वे सब सदश सुखवुष्टिप्रद परमेश्वर कौ (सुमतौ) सुमति मे, अनुकूल मति में मघ।वषामभ्यः - घातक विषधारी प्रनाओं से सुरक्षा । मरूतः ऋतिवि- दारा प्रजाओं को पवित्र विचार-आचारवान् करते हं ।

English

From all those vessels and canals we call the poisonous matter forth. Worship to thee, the archer, and O Rudra, to thy levelled shaft!

अध्याय 6

श्लोक 87.1

राज्ञः संवरणम्।१-३ अथर्वा।ध्रुवः।अनुष्टुप्।आ त्वा॑हार्षम॒न्तर॑भूर्ध्रु॒वस्ति॒ष्ठावि॑चाचलत्।विश॑स्त्वा॒ सर्वा॑ वाञ्छन्तु॒ मा त्वद् रा॒ष्ट्रमधि॑ भ्रशत्

rājñaḥ saṃvaraṇam| 1-3 atharvā| dhruvaḥ| anuṣṭup| ā tvāhārṣamantarabhūrdhruvastiṣṭhāvicācalat| viśastvā sarvā vāñchantu mā tvad rāṣṭramadhi bhraśat

हिन्दी अर्थ

कारकः; दक्ष वृद्धौ (भ्वादिः) । ध घृतेन = रेतः कृत्वाज्यं देवाः पुरुषमाविशन् (अयवं० ११।०८।२९) । (१) अयवं० ५।२२।१ ममी पृतदकषाः विशेषण है वरुणः का । यथा "वरुणः । मघरविषाः= अघम् "माहृन्ति' + विषम्; जो किं घातक विषवाली है पूतदक्षः । जैसे (द्यावापृथिवी) द्यौः मौर पृथिवी (जोते) पट म ताने-वानेके

English

Yea, worship to thine arrow when it left the bow, and when it fell! A charm against disease They made this barley ready with a team of eight, a team of six.

अध्याय 6

श्लोक 87.2

इ॒हैवैधि॒ माप॑ च्योष्ठाः॒ पर्व॑त इ॒वावि॑चाचलत्।इन्द्र॑ इवे॒ह ध्रु॒वस्ति॑ष्ठे॒ह रा॒ष्ट्रमु॑ धारय

ihaivaidhi māpa cyoṣṭhāḥ parvata ivāvicācalat| indra iveha dhruvastiṣṭheha rāṣṭramu dhāraya

हिन्दी अर्थ

(वः) तुम्हारे (मनांसि) मनो को (सं नमामसि) परस्पर कै प्रति हम ॥ ॥ क प्रति नत करते है कलक है, (आकूतीः) संकल्पो को । ( 1 शक्त ९५ (चित्तेभिः) चित्तो के साथ (एत) आओ । (मम) मेरे (वरेषु) वशो! ॥/ १ यथा “द्यौरहं पृथिवी त्वम् । ताविह संभवाव प्रजामाजनयावदहै 1" । (वः) तुम्हारे (हृदयानि) हृदयो को (कृणोमि) म कृरता हु, (मम) मेरे । (यातम्, अनु व्राः) मागं के अनुसार मागेवाले हुए (एत) मामो, अर्थात् ममानुगामी बनो । ं

English

With this I drive to westward, far away, thy bodily disease. Vita breathes downward from above, and downward Sūrya sends his heat:

अध्याय 6

श्लोक 87.3

इन्द्र॑ ए॒तम॑दीधरत् ध्रु॒वं ध्रु॒वेण॑ ह॒विषा॑ ।तस्मै॒ सोमो॒ अधि॑ ब्रवद॒यं च॒ ब्रह्म॑ण॒स्पतिः॑

indra etamadīdharat dhruvaṃ dhruveṇa haviṣā | tasmai somo adhi bravadayaṃ ca brahmaṇaspatiḥ

हिन्दी अर्थ

॑ हं = इधर-उधर भटङ्ने नहीं देता । यहं कथन सभापति का है सभासदौं २ सूरत ६४ में कथन, राष्ट्र के राजाद्रारा हुमा है, जिसे कि वरण कहते हैँ । आत मे च्ावंपृथिवी ओतां देवी सरंस्वतो । = (नौः) नौका (दिवि) युलोक मे (अचरत्) चली है, (तत्र) उस कान

English

Downward is drawn the milch-cow’s milk: so downward go thy malady! The Waters verily bring health, the Waters drive disease away. The Waters cure all malady: may they bring medicine for thee.

अध्याय 6

श्लोक 88.1

ध्रुवो राजा।१-३ अथर्वा।ध्रुवः।अनुष्टुप्, ३ त्रिष्टुप्।ध्रु॒वा द्यौर्ध्रु॒वा पृ॑थि॒वी ध्रु॒वं विश्व॑मि॒दं जग॑त्।ध्रु॒वासः॒ पर्व॑ता इ॒मे ध्रु॒वो राजा॑ वि॒शाम॒यम्

dhruvo rājā| 1-3 atharvā| dhruvaḥ| anuṣṭup, 3 triṣṭup| dhruvā dyaurdhruvā pṛthivī dhruvaṃ viśvamidaṃ jagat| dhruvāsaḥ parvatā ime dhruvo rājā viśāmayam

हिन्दी अर्थ

फुल को (कुष्ठम्) कू5 रूप (अवन्वत) याचितं किया । है , युलोकस्थ नौकाके तारागण हिरण्यस्षवृश चमकते है, ओर उन कौ रमयां रस्वी रूप है जिन द्वारा तारागण परस्पर बन्धे एर मौर नौका के नौकाषूप को बनाए हृए ह । रात्ोकाल में द्युलोक मे यह् नौका “विशेष समथ” मे दुष्टिगोचर होतो है, नौका काल में कुष्ठ या कषठ पुत्व का संग्रह करना चाहिए । नौः अचरत् पृथिवी निज धुरी पर पश्चिम से पूर्वं को आर श्रमण २९५०।१८६) करती है, अतः य-लोक ूर्व-से-पश्चिम की भर गति करता प्रतीत हता है । नौकां भी बुलोकस्थ है, अतः वभा युलोक रूपो-समृद्र मे पूर्व-से-पश्चिम.की ओर चलतो हई अचरत् प्रतीत होती है ।

English

A charm to strengthen and inspirit a war-horse Be fleet as wind, Strong Steed, when thou art harnessed; go forth as swift as thought at

अध्याय 6

श्लोक 88.2

ध्रु॒वं ते॒ राजा॒ वरु॑णो ध्रु॒वं दे॒वो बृह॒स्पतिः॑ ।ध्रु॒वं त॒ इन्द्र॑श्चा॒ग्निश्च॑ रा॒ष्ट्रं धा॑रयतां ध्रु॒वम्

dhruvaṃ te rājā varuṇo dhruvaṃ devo bṛhaspatiḥ | dhruvaṃ ta indraścāgniśca rāṣṭraṃ dhārayatāṃ dhruvam

हिन्दी अर्थ

(गोषधीनाम्) ओषध्यो का (गभः) गर्भरूप (असि) तु है, (उत) (इमम्) इस रोगी को (अगदम्) रोगरहित (कृधि) तु कर। प्रकरण की दुष्टिसे कष्ठ-जषध का वणेन प्रतीत होता है । का०६; अनु° १०॥। सू० ६६ अयवेपरेद-भाष्प १९६

English

lndra’s sending. Let the possessors of all wealth, the Maruts, yoke thee, and Tvashtar in thy feet lay swiftness.

अध्याय 6

श्लोक 88.3

ध्रु॒वोऽच्यु॑तः॒ प्र मृ॑णीहि॒ शत्रू॑न्छत्रूय॒तोऽध॑रान् पादयस्व ।सर्वा॒ दिशः॒ संम॑नसः स॒ध्रीची॑र्ध्रु॒वाय॑ ते॒ समि॑तिः कल्पतामि॒ह

dhruvo'cyutaḥ pra mṛṇīhi śatrūnchatrūyato'dharān pādayasva | sarvā diśaḥ saṃmanasaḥ sadhrīcīrdhruvāya te samitiḥ kalpatāmiha

हिन्दी अर्थ

(सोमराज्ञोः) सोम-मौषधी जिन मे राजा है, (वह्लीः)जो बहुत भधात प्रयुक्त की जाती (वाः) वे (नः) हमे (अदसः) पाप से (मुञ्चन्तु) शरीर में लगभग सौ १०७ मम॑स्थल ह अतः मर्मस्थलों कौ दुष्ट से लगभग सौ में ओषधियों को विभक्त शिया है । बृहस्पतिप्रसूताः = उत्पन्न पाप से, (अथो) तथा (वरुण्यात् ) ,जलोदर रोग से, (उत) भी। शपथ च्ूढो होती है। यह भी रोगरूप दहै, सत्यवादी शपथ नहीं करता । वरुण का अरथहै मेष । अतः वरुण्य है जलोध रोग, अर्थात् जलोदर । पड्वोश =है पादो मे प्रविष्ट रोग, शलीपद्, 21601120112.813 देव ह दन्दियां । किल्विष है प्राप, जोकि निश्चय से विषरूप होता है, किल-

English

That speed, that lies concealed in thee, O Charger, speed granted to the hawk or wind that wandered,

अध्याय 6

श्लोक 89.1

प्रीतिसंजननम्।१-३ अथर्वा।(रुद्रः,) १ सोमः, २ वातः, ३ मित्रावरुणौ।अनुष्टुप्।इ॒दं यत् प्रे॒ण्यः शिरो॑ द॒त्तं सोमे॑न॒ वृष्ण्य॑म्।ततः॒ परि॒ प्रजा॑तेन॒ हार्दिं॑ ते शोचयामसि

prītisaṃjananam| 1-3 atharvā| (rudraḥ,) 1 somaḥ, 2 vātaḥ, 3 mitrāvaruṇau| anuṣṭup| idaṃ yat preṇyaḥ śiro dattaṃ somena vṛṣṇyam| tataḥ pari prajātena hārdiṃ te śocayāmasi

हिन्दी अर्थ

। १. जैसे गर्भस्थ शिघ्यु, माताङे गमं से, पोषण तषा गुण प्रहण करता है, वपे २२ 18 कष्ठ मे मानो सब मौषघों की पुष्टियां तथा गुण दिद्यामान द । ६ १७० अथववेद-भाष्य काण ६। भनु० १० । सुऽ ९७। (उपारिम) हम ने उपगत करिया है, प्राप्त किया है, (तानि नः) उन हमारे (हक कं० ६। गनु° १० । मु० ९ थवेवेद-भाष्य £ पवित्र करे, उन का संश्नोधन करे ।

English

Therewith, Strong Steed, saving in shock of battle endowed with might by might win thou the contest. Bearing thy body, Charger, may thy body run blessing us and winning thee protection.

अध्याय 6

श्लोक 89.2

शो॒चया॑मसि ते॒ हार्दिं॑ शो॒चया॑मसि ते॒ मनः॑ ।वातं॑ धू॒म इ॑व स॒ध्र्य॑१ङ्मामे॒वान्वे॑तु ते॒ मनः॑

śocayāmasi te hārdiṃ śocayāmasi te manaḥ | vātaṃ dhūma iva sadhrya1ṅmāmevānvetu te manaḥ

हिन्दी अर्थ

सोम जिनका राजा है वे सेकड़ों ओषधियां अभिप्रेत द (मन्त्र १) । भवकारो हो, (सोमः) सेनाध्यक्ष (अभिभः - ५ ) (अभिभूः) पराभवकारी हो, (इन्रः) वाले हम (इदम्) इख (हविः) आत्माषटूति को (विधेम) समपित करे । पराभवकारी हो । (अहम्) यै वरुण-राजा (विश्वाः ¦ पृतनाः) शत्रू की सब सेनामों का (यथा अभि असानि) जिस ५१ परा- दी जाती है, इसी प्रकार युद्धारम्भ करने से पूरव, सामूहिक क्प मे, ,

English

May he, unswerving, to uphold the mighty, stablish his lustre as a God in heaven. A prayer for protection from poison

अध्याय 6

श्लोक 89.3

मह्यं॑ त्वा मि॒त्रावरु॑णौ॒ मह्यं॑ दे॒वी सर॑स्वती ।मह्यं॑ त्वा॒ मध्यं॒ भूम्या॑ उ॒भावन्तौ॒ सम॑स्यताम्

mahyaṃ tvā mitrāvaruṇau mahyaṃ devī sarasvatī | mahyaṃ tvā madhyaṃ bhūmyā ubhāvantau samasyatām

हिन्दी अर्थ

युदाग्नि मेँ आत्माहुतियां देने के दृढ संकल्प कयि जाते है । (विपश्चिता = विपस्विनौ) है मेधावी (मित्रावसणा- मित्रावरुणौ) सीचा करो । (नि्ऋ तिम्) कृष्ट को (पराचैः) पराडमुख करने के उपायों दारा ( दूरम्) दूर (बधेथाम्) हटाया करो, (कृतं चित्) हम प्रजा हारा

English

Yama, Death direly fatal, the Destroyer, with his black crest, Sarva the tawny archer, And all the Gods uprisen with their army, may these on every side avoid our heroes.

अध्याय 6

श्लोक 90.1

इषुनिष्कासनम्।१-३ अथर्वा।रुद्रः।अनुष्टुप्, ३ आर्षी भुरिगुष्णिक्।यां ते॑ रु॒द्र इषु॒मास्य॒दङ्गे॑भ्यो॒ हृद॑याय च ।इ॒दं ताम॒द्य त्वद् व॒यं विषू॑चीं॒ वि वृ॑हामसि

iṣuniṣkāsanam| 1-3 atharvā| rudraḥ| anuṣṭup, 3 ārṣī bhuriguṣṇik| yāṃ te rudra iṣumāsyadaṅgebhyo hṛdayāya ca | idaṃ tāmadya tvad vayaṃ viṣūcīṃ vi vṛhāmasi

हिन्दी अर्थ

(कृतम् एनः) द्वि गए एक भी पापसे मुक्ति को अभिलाषा प्रकट की करके जीतते हुए, (गोजितम्) शत्रू की पृथिवो को जीत लेने वाले, (वः जोतते हए, ओर १ (मोजसा) बल द्वारा (प्रमृणन्तम्) शतु सैनिकों को होमो, ओर (सखायः) मित्रभूत सेनिकों ! (अनु) इसके अनुसार (सं रभध्वम्) मिलकर युद्धारम्भ करो। (दृनब्रः) सम्राट् (जयाति) विजयीहोया विजयी होता है (षरा

English

With mind, burnt offerings, butter, and libation, to royal Bhava and the archer Sarva, To these the worshipful I pay my worship: may they turn else- where things with deadly

अध्याय 6

श्लोक 90.2

यास्ते॑ श॒तं ध॒मन॒योऽङ्गा॒न्यनु॒ विष्ठि॑ताः ।तासां॑ ते॒ सर्वा॑सां व॒यं निर्वि॒षाणि॑ ह्वयामसि

yāste śataṃ dhamanayo'ṅgānyanu viṣṭhitāḥ | tāsāṃ te sarvāsāṃ vayaṃ nirviṣāṇi hvayāmasi

हिन्दी अर्थ

जयाते न) पराजितन ट, या पयजित नहीं होता, (अधिराजः) वहं याजाधिराज (राजु) राजाभों पर (राजयातै) राज्यकरे या करता है। र् -माष्य करां ६। अनु० १०।सु० € वादन योग्य है, (उपसद्यः) सेवनीय है न । ए वा अय राजा जयाति'“(सायण) इस प्रा विकल्प मे सायण

English

venom. Save us, All-Gods and all-possessing Maruts, from murderous stroke and things that slay with poison.

अध्याय 6

श्लोक 90.3

नम॑स्ते रु॒द्रास्य॑ते॒ नमः॒ प्रति॑हितायै ।नमो॑ विसृ॒ज्यमा॑नायै॒ नमो॒ निप॑तितायै

namaste rudrāsyate namaḥ pratihitāyai | namo visṛjyamānāyai namo nipatitāyai

हिन्दी अर्थ

राजा” (यजु ° ८।३७) की भावना के अनुकूल है । । ध । क ४ (त्वम्) तु (जधि राजः राजाधिराज है, (श्रव- 2 न ध इः त् (जनानाम्) सब जनों का (अभि- ९ भुः) है, सव जनोंमे उक्कृष्ट है । (त्वम्) तु ५: क ! (उत) ४ आओौरत् उदीच्याः दिशः) उत्तर की दिशाके वसः असि) शतुजों का हनन करने वाला है। (यत्र) जितस ओर 4 ध जलप्रवाह (यन्ति) जाते, प्रवाहित होते है (तत्) 9 १ ) तेरा (जितम्) जतादहूभा है, (हव्यः) हमद्वारा आहूत को वर्षा करता हुआ, (दक्षिणतः) दक्षिण प्रदेश से (एषि) तू भाताहै। का० ६१ अनु० १० ।सु० ३६ अथर्ववेद-भाष्य १७३

English

Pure is the might of Varuna, Agni, Soma. May Vāta’s and Parjanya’s favour bless us.

अध्याय 6

श्लोक 91.1

यक्ष्मनाशनम्।१-३ भृग्वङ्गिराः।यक्ष्मनाशनम्, ३ आपः।अनुष्टुप्।इ॒मं यव॑मष्टायो॒गैः ष॑ड्यो॒गेभि॑रचर्कृषुः ।तेना॑ ते त॒न्वो॒३रपो॑ ऽपा॒चीन॒मप॑ व्यये

yakṣmanāśanam| 1-3 bhṛgvaṅgirāḥ| yakṣmanāśanam, 3 āpaḥ| anuṣṭup| imaṃ yavamaṣṭāyogaiḥ ṣaḍyogebhiracarkṛṣuḥ | tenā te tanvo3rapo 'pācīnamapa vyaye

हिन्दी अर्थ

दारा कियाहै पृथिकी की नदियों के प्रवाह प्रायः पश्चिमं तथा मे मेष पश्चिम तथा दक्षिण के समुद्रौ से ही उत्ते ह। या दत्त कहु दिया जाता है । इसी अभिप्राय को दुष्टिगत कर कहा है कि कहा है । यथा “इन््रन्र मनुष्या हैः प

English

A charm to reconcile a King’s discontented people We bend your minds in union, bend in harmony your hopes and plans: You there, who turn to sundered ways, we bend and bow in unison.

अध्याय 6

श्लोक 91.2

न्य॑१ग्वातो॑ वाति॒ न्यऽक् तपति॑ सूर्यः॑ ।नी॒चीन॑म॒घ्न्या दु॑हे॒ न्यऽग् भवतु ते॒ रपः॑

nya1gvāto vāti nya'k tapati sūryaḥ | nīcīnamaghnyā duhe nya'g bhavatu te rapaḥ

हिन्दी अर्थ

क मन्धो प्रकट होता है मदुष्यान अथवा मचु्वाः है मनुष्य (अंहूरणात्) हनन हीने से (पुरा ) पूवं ही (स्वा) तुक्षे (मभि हुवे) स्वाभि- “मनुष्याः” पाठ संगत नहीं प्रतीत हुआ, अतः उस ने मनुष्याः का अर्थं कियाद १७४ अथवेवेद-भाष्य कां० ६। अनु० १०। सू० ६९ मानम्) बहुत नामों वाने अधवा नाना शत्रुम को नत करने वाते को, तथा (एकजम् ) अकेले ही जगत् पेदा करने वाले को (ल्ुयामि) यै आह्वान

English

I with my spirit make your spirits captive: these with their thoughts follow my thought and wishes.

अध्याय 6

श्लोक 91.3

आप॒ इद् वा उ॑ भेष॒जीरापो॑ अमीव॒चात॑नीः ।आपो॑ विश्व॑स्य भेष॒जीस्तास्ते॑ कृण्वन्तु भेष॒जम्

āpa id vā u bheṣajīrāpo amīvacātanīḥ | āpo viśvasya bheṣajīstāste kṛṇvantu bheṣajam

हिन्दी अर्थ

आदि द्वारा निज हनन को अनुभव करता हुआ उपासक, जगत् ॐ कर्ता आ ठ्न +र । एकजम् = अथवा “एकेन प्रकरृतिष्पेण कारणेन जनयतीति" यो अग्र सेन्यो व॒धो जिघांसन् न उगीरते। (अद्य) माज (यः) जौ (सेन्यः वधः) आसुरी सेना! का वधकारी आयुध, (नः व मारी हत्या चाहता हूभा (उदीरते) उठा है,

English

I make your hearts submissive to mine order closely attending go where I precede you. I have invoked both Heaven and Earth, invoked divine Sarasvati,

अध्याय 6

श्लोक 92.1

वाजी।१-३ अथर्वा।इन्द्रः, वाजी।त्रिष्टुप्, १ जगती।वात॑रम्हा भव वाजिन् यु॒ज्यमा॑न॒ इन्द्र॑स्य याहि प्रस॒वे मनो॑जवाः ।यु॒ञ्जन्तु॑ त्वा म॒रुतो॑ वि॒श्ववे॑दस॒ आ ते॒ त्वष्टा॑ प॒त्सु ज॒वं द॑धातु

vājī| 1-3 atharvā| indraḥ, vājī| triṣṭup, 1 jagatī| vātaramhā bhava vājin yujyamāna indrasya yāhi prasave manojavāḥ | yuñjantu tvā maruto viśvavedasa ā te tvaṣṭā patsu javaṃ dadhātu

हिन्दी अर्थ

(समन्तम् )भपने सब ओर (परिदद्मः) हम षेरेके स्परे धारित करते है। अद्य = उपासक जिस दिन आसुरी सेना ते पूर्णतया व्यथित ह्। गया, वह दिन । मन्त्र मे समूहोपासना का वर्णन है । बाहू = व ५ मौर वल को (समन्तम्) अपने सब ओर (परिदद्मः) हम घरेकेरूपमेधारित करते (नः ) हमारी (त्रायताम्) वे पालना करं । अतः (देव) है देव ! (सवितः) है प्रेरक , (सोम) है सौम्य स्वभाव वले (राजन्) सव के राजा परमेश्वर ! (मा) मुक्ष को (सुमनसम्) न या शोभनमन वाला (कृणु) कर (स्वस्तये) कल्याण के

English

Indra and Agni have I called: Sarasvati, so may we thrive! 90

अध्याय 6

श्लोक 92.2

ज॒वस्ते॑ अर्व॒न् निहि॑तो॒ गुहा॒ यः श्ये॒ने वात॑ उ॒त योऽच॑र॒त् परी॑त्तः ।तेन॒ त्वं वा॑जि॒न् बल॑वा॒न् बले॑ना॒जिं ज॑य॒ सम॑ने पारयि॒ष्णुः

javaste arvan nihito guhā yaḥ śyene vāta uta yo'carat parīttaḥ | tena tvaṃ vājin balavān balenājiṃ jaya samane pārayiṣṇuḥ

हिन्दी अर्थ

१. काम क्रोष लोम आदि सब हारा आक्रमण । कां० ६। अनु° १० । सु १०० अथयववेद-भाष्य १७५ सामूहिक उपासना मेँ बैठ कर, प्रत्येक उपासक, परमेश्वर से पालना को याचना करता है जिस से कि आसुरी भार्वो द्वारा वह् व्यायतनहो। आसुरी भावों से कारा पा कर उपासक प्रखन्नचित्त हो जाता है, तथा शुभ मन वाना हो जाताहै, गौरः कल्याण भागे का पथिक हो जाता है । (देवाः अदुः) देवो ने दिया है, (सूरेः अदात्) सूयं ने दिया है, (चोः अदात्) चुलोक ने दिया है, (पृथिवी अदात्) पृथिवी ने दियाहै, तिखः सरस्वतीः) तीन सरस्वतियों ने (सचित्ताः) एकचित्त हो कर (अदुः) दिया है (विषदूषणम्) विषनिगरक ओषध ।

English

A charm to remove disease In the third heaven above us stands the Asvattha tree, the seat of Gods. There the Gods gained the Kushtha plant, embodiment of end- less life.

अध्याय 6

श्लोक 92.3

त॒नूष्टे॑ वाजिन् त॒न्वं॑१ नय॑न्ती वा॒मम॒स्मभ्यं॒ धाव॑तु॒ शर्म॒ तुभ्य॑म्।अह्रु॑तो म॒हो ध॒रुणा॑य दे॒वो दि॒वीऽव ज्योतिः॒ स्वमा मि॑मीयात्

tanūṣṭe vājin tanvaṃ1 nayantī vāmamasmabhyaṃ dhāvatu śarma tubhyam| ahruto maho dharuṇāya devo divī'va jyotiḥ svamā mimīyāt

हिन्दी अर्थ

देवाः = साध्याः, ऋषयश्च । यथा “तेन देवाऽ्जयजन्त साध्याऽचछष यषएच ये” (यजु ३१।९) । साध्याः है योगसाधनाओं से सम्पन्न योगी भी। इन की हन शक्तियों को विदूषण-ओषध कहा है । हस्त स्पशं द्वारा ये महानुभाव रोगी मे शक्ति का संचार कर उसके रोगका निवारण फर सकते है । हस्तस्थं चिकित्सा के लिये देखो (अयववे° ३।११।२० ८); इनी शक्तियों के प्रयोगोंको विषदूषण आदि मँ उपयुक्त करनेका तिस्रः सरस्वतीः = सायणाचायं के अनुसार ये तीन श््रयी" कूपार, रूप में विषदूषण के उपायों का ज्ञान देती दहै ।

English

There moved through heaven a golden ship, a ship with cordage wrought of gold. There Gods obtained the Kushtha plant, the flower of immor- tality.

अध्याय 6

श्लोक 93.1

स्वस्त्ययनम्।१-३ शन्तातिः।रुद्रः, १ यमो, मृत्युः, शर्वः, २ भवः, शर्वः ३ विश्वे देवाः, मरुतः, अग्नीषोमौ, वरुणः, वातपर्जन्यौ।त्रिष्टुप्।य॒मो मृ॒त्युर॑घमा॒रो नि॑रृ॒थो ब॒भ्रुः श॒र्वोऽस्ता॒ नील॑शिखण्डः ।दे॒व॒ज॒नाः सेन॑योत्तस्थि॒वांस॒स्ते अ॒स्माकं॒ परि॑ वृञ्जन्तु वी॒रान्

svastyayanam| 1-3 śantātiḥ| rudraḥ, 1 yamo, mṛtyuḥ, śarvaḥ, 2 bhavaḥ, śarvaḥ 3 viśve devāḥ, marutaḥ, agnīṣomau, varuṇaḥ, vātaparjanyau| triṣṭup| yamo mṛtyuraghamāro nirṛtho babhruḥ śarvo'stā nīlaśikhaṇḍaḥ | devajanāḥ senayottasthivāṃsaste asmākaṃ pari vṛñjantu vīrān

हिन्दी अर्थ

- फां० ६। अनु० १० । सु° १०१ अथववेद-माष्य १७७ 1 १७६ अथरवेवेद-भाप्य कां० ६1 अनु० १० सू० १०० पाथिवतत्व के मेल से (सम्भूता) तु उत्प्नहुईद है, (सा) उस तूने मिष्टो के प्रलेप द्वारा भी विषदूषण किया जा सकता. है । ॥ कविता के शब्दों मे भाव छिपा हृ है । असुर है विनाशक 1 उप- न = ५ 1 पग 2 ॥ प हि समान है । अतः इन मे जनक-जन्य भाव है । देव ह दिव्यगुणौ, भौर उप-

English

Thou art the infant of the plants, the infant of the Snowy Hills: The germ of every thing that is: free this my friend from his disease. A prayer for deliverance from sin and sorrow

अध्याय 6

श्लोक 93.2

मन॑सा॒ होमै॒र्हर॑सा घृ॒तेन॑ श॒र्वायास्त्र॑ उ॒त राज्ञे॑ भ॒वाय॑ ।न॒म॒स्येऽभ्यो॒ नम॑ एभ्यः कृणोम्य॒न्यत्रा॒स्मद॒घवि॑षा नयन्तु

manasā homairharasā ghṛtena śarvāyāstra uta rājñe bhavāya | namasye'bhyo nama ebhyaḥ kṛṇomyanyatrāsmadaghaviṣā nayantu

हिन्दी अर्थ

पृथिवी -पृथिवी तो ओौषधों का भण्डार है, जिसःद्वारा समग्र रोगौ का उपचार हो रहा है । विच्छ, भिड, साप आदिने जहां काटा है वहां दूषित कर दो, विङृत कर दो, विष क विषत्व को नष्ट करदो । ॥ अ. । शक्तिशःली वृषभ के सदश एक्तिशाली बन, (वधंस्व) र शरीर से वदृ, (योषितम्) प्रोति करनेवालो पत्नौ को (इत्) ही (जहि) जाया कर । ) प्र(मशक्ति का सञ्चय शरीर में कर। (२) मौर

English

The many plants of hundred shapes and forms that Soma rules as King, p. a245 Commanded by Brihaspati, deliver us from grief and woe!

अध्याय 6

श्लोक 93.3

त्राय॑ध्वं नो अ॒घवि॑षाभ्यो व॒धाद् विश्वे॑ देवा मरुतो विश्ववेदसः ।अ॒ग्नीषोमा॒ वरु॑णः पू॒तद॑क्षा वातापर्ज॒न्ययोः॑ सुम॒तौ स्या॑म

trāyadhvaṃ no aghaviṣābhyo vadhād viśve devā maruto viśvavedasaḥ | agnīṣomā varuṇaḥ pūtadakṣā vātāparjanyayoḥ sumatau syāma

हिन्दी अर्थ

को नष्ट किया जा सकताहै। जसे दीमक का मूखरक्त उदक काष्ठ (वस प्राणने, अ 714: एाक्तिशाली बेल के सदुश शक्तिशाली बन । (३) अपनी शारीरिक, मानः ¦ को फला । (५) परन्तु परिवार फलाने से पूवं यह देख ले कि तेरी उसके विषत्व को नष्ट करदेताहै। -. व जो है या नहीं । (६) यदि राणां द । ; प्रजनन इन्द्रिय परिवार फलान योग्य भभो हृरद है या नहीं । (६) यदि. हे उपजीका ! (असुराणाम्) असुरो की (दुदिता) बेटी (असि) तु" च ।

English

Let them release me from the curse and from the noose of Varupa, Free me from Yama’s fetter, and from every sin against the

अध्याय 6

श्लोक 94.1

सांमनस्यम्।१-३ अथर्वाङ्गिराः।सरस्वती।अनुष्टुप्, २ विराड्-जगती।सं वो॒ मनां॑सि॒ सं व्र॒ता समाकू॑तीर्नमामसि ।अ॒मी ये विव्र॑ता॒ स्थन॒ तान् वः॒ सं न॑मयामसि

sāṃmanasyam| 1-3 atharvāṅgirāḥ| sarasvatī| anuṣṭup, 2 virāḍ-jagatī| saṃ vo manāṃsi saṃ vratā samākūtīrnamāmasi | amī ye vivratā sthana tān vaḥ saṃ namayāmasi

हिन्दी अर्थ

है, (सा) वह तू (देनानाम्) देवों कीः(स्वसा) बहिन (भसि) है । (दिवः. - २२३ को सम्बोधित क्रिया । दोमरोँ को “उपजा: कहा । उपजोकाः= पृथिव्याः) द्युलोक के ताप गौर प्रकाश, तथा जलतत्व से, तथा पृथिवी के १७८ भथववेद-माष्यङः का० ६ । अनु० १० । सू० १०१ ३८।२; ३६।४) । योषित् =जुषी प्रीतिसेवनयोः (तुदादिः) ज प्रोति करे ओर सेव्रा करे वह पत्नी (उणा० १।९७) । जहि हन हिसागत्योः, गत्यथ मभिग्रत है । जहि =गच्छ (सायण) )

English

Gods! From every fault in look, in word, in spirit that we, awake or sleeping, have committed,

अध्याय 6

श्लोक 94.2

अ॒हं गृ॑भ्णामि॒ मन॑सा॒ मनां॑सि॒ मम॑ चि॒त्तमनु॑ चि॒त्तेभि॒रेत॑ ।मम॒ वशे॑षु॒ हृद॑यानि वः कृणोमि॒ मम॑ या॒तमनु॑वर्त्मान॒ एत॑

ahaṃ gṛbhṇāmi manasā manāṃsi mama cittamanu cittebhireta | mama vaśeṣu hṛdayāni vaḥ kṛṇomi mama yātamanuvartmāna eta

हिन्दी अर्थ

येन) जिस उदेश्य से (कृशम्) निर्बल को (वाजयन्ति) वाजीकरण दारा सवन करते ह, ओर (येन) जिस उदेश्य .से (आतुरम्) रोगातं को (हिन्वन्ति) प्रीणित करते है, पोषित करते ह, (तेन) उस उटेण्य से (पसः) जनन-इन्द्रिय को (धनुः इव) धनुष् के सदृश (भा तानय) विस्ता- रिति करदे, या तान दे। परति यदि रोगवश इन्दियरोगी हो जाय, ओौर उसको इन्द्रिय आनु- त्पादन ओौर गृहस्थ धमे का पालन, नकि कामवासनासे प्रेरित भोग।

English

May Soma, with his godlike nature, cleanse us. A prayer for the success and prosperity of a King The sacrifice is victor, Agni victor, victorious is Soma, Indra conquers:

अध्याय 6

श्लोक 94.3

ओते॑ मे॒ द्यावा॑पृथि॒वी ओता॑ दे॒वी सर॑स्वती ।ओतौ॑ म॒ इन्द्र॑श्चा॒ग्निश्च॒र्ध्यास्मे॒दं स॑रस्वति

ote me dyāvāpṛthivī otā devī sarasvatī | otau ma indraścāgniścardhyāsmedaṃ sarasvati

हिन्दी अर्थ

को (आतनोमि) पू्णंतया विस्तारित करता हं, (धन्वनि अधि) धनुष् पर जसे (रोदितम्) हरिणी की ओर, वेते तु (क्रमस्व) पत्नी की भोर पय रोग का केवल वणेन गौर उसकी निवृत्ति का कथनमाच्र हमा है । डाक्टयी की पुस्तकोमे भी एसे विषयों का वणेन पाया जातादहै, भौर पढ़ायाभौ कृ?० ६ । अनु १० । सू० १०२ अथवेवेद-भाष्य १७६ (अष्िविना अश्विनौ) है दो अश्वियो ! (यथा) जैसे (अयम्) यह (वाहः) रथवाहक अश्व (समेति) रथ मे जृतने के लिये सम्यक् प्रकार से, अर्थात् विना प्रतिरोध केमा जातादहै, (च) मौर मागे पर (सम् वतेते) सम्यक् प्रकारसे वतेता है, चलता है, (एवा) इसी प्रकार हे पत्नौ (ते मनः) तेरा मन (माम् अभि) मञ्च पति के अभिमू (समेतु)

English

So will we bring oblation unto Agni, this sacrifice that I may win all battles. Praise to you, Mitra-Varupa, hymn-singers! Here swell with meath dominion blest with

अध्याय 6

श्लोक 95.1

कुष्ठौषधिः।१-३ भृग्वङ्गिराः।वनस्पतिः।अनुष्टुप्।अ॒श्व॒त्थो दे॑व॒सद॑नस्तृ॒तीय॑स्यामि॒तो दि॒वि।तत्रा॒मृत॑स्य॒ चक्ष॑णं दे॒वाः कुष्ठ॑मवन्वत

kuṣṭhauṣadhiḥ| 1-3 bhṛgvaṅgirāḥ| vanaspatiḥ| anuṣṭup| aśvattho devasadanastṛtīyasyāmito divi| tatrāmṛtasya cakṣaṇaṃ devāḥ kuṣṭhamavanvata

हिन्दी अर्थ

बाहः है अश्व । इसलिये अश्विनौ को सम्बोधित किया प्रतीत होता स्वाभिमुख करने का अभिलाषो है । हे रुष्ट पत्नौ ! (ते मनः) तेरे मन को (अहम्) मँ पति (आ विदामि) लिपट जाताहै वेद (द मनः) तेरा मन (मयि) मुज्न मै (वेष्टताम्)

English

children. Far into distant regions drive Destruction, and even from committed sin absolve us. In this strong hero be ye glad and joyful: cleave ye to him even as ye cleave to Indra.

अध्याय 6

श्लोक 95.2

हि॒र॒ण्ययी॒ नौर॑चर॒द्धिर॑ण्यबन्धना दि॒वि।तत्रा॒मृत॑स्य॒ पुष्पं॑ दे॒वाः कुष्ठ॑मवन्वत

hiraṇyayī nauracaraddhiraṇyabandhanā divi| tatrāmṛtasya puṣpaṃ devāḥ kuṣṭhamavanvata

हिन्दी अर्थ

इस का अथं है अश्वके पुष्ठके साथ संलग्न होकर रथम जुती अश्वा घोड़ी । साथ-खथ जुते होने कै कारण राजाएव शषएवा को भोग के लिये देन्ययुक्त कर देता है । 'आखिदामि' खिद हैन्ये (दिवादिः, रुधादिः), मौर अश्वा भोगाथं, राजा के अनुकूल हो जतो है। यही अवस्था पति, पत्नी १८० अयववंवेद-भाष्य का० ६ ! मनु° १०। सु० १०२ (आञ्जनस्य) शरीर से शोभा वाला तथा तेरी कामना वाला, (मदु (नलदस्य) तुज्ञे भाषण देने वाला अर्थात् तेरे साथ बोल रहा, (तुरः) तेरी " मै ह, उस मेरे (हस्ताभ्याम्) निज हाथों हारा (अनुरोधनम्) तेरी कामना

English

Victorious, kine-winner, thunder-wielder, who quells a host and with his might destroys it. Praise of Indra

अध्याय 6

श्लोक 95.3

गर्भो॑ अ॒स्योष॑धीनां॒ गर्भो॑ हि॒मव॑तामु॒त।गर्भो॒ विश्व॑स्य भू॒तस्ये॒मं मे॑ अग॒दं कृ॑धि

garbho asyoṣadhīnāṃ garbho himavatāmuta| garbho viśvasya bhūtasyemaṃ me agadaṃ kṛdhi

हिन्दी अर्थ

का (उद्भरे) मँ उद्धार करता ह, उसे पूणं करता हूं । संदानं वो बृहस्पतिः संदानं सविता कर् । (वः) है शत्रुम ! तुम्हारा (संदानम्) बन्धन न करौ बड.सेना का पति (करत्) करे, (संदानम्) बन्धन (स न (संदानम्) वन्धनं करं । युद्धम परास्त हृए फात्रओं का बन्धन, विजयी त का कोर ५ अधिकारी निज आज्ञा हारा कर सकता है। मा क ४ अश्वा रोदियो के तथा रथारोहिमों के अश्वो के । संदानम् = “सपू

English

Indra be victor, never to be vanquished, to reign among the Kings as sovran ruler! Here be thou meet for praise and supplication, to be revered and waited on and worshipped.

अध्याय 6

श्लोक 96.1

चिकित्सा।१-३ भृग्वङ्गिराः।वनस्पतिः, ३ सोमः।अनुष्टुप्, ३ त्रिपाद्विराण्नाम गायत्री।या ओष॑धयः॒ सोम॑राज्ञीर्ब॒ह्वीः श॒तवि॑चक्षणाः ।बृह॒स्पति॑प्रसूता॒स्ता नो॑ मुञ्च॒न्त्वंह॑सः

cikitsā| 1-3 bhṛgvaṅgirāḥ| vanaspatiḥ, 3 somaḥ| anuṣṭup, 3 tripādvirāṇnāma gāyatrī| yā oṣadhayaḥ somarājñīrbahvīḥ śatavicakṣaṇāḥ | bṛhaspatiprasūtāstā no muñcantvaṃhasaḥ

हिन्दी अर्थ

शत्र सेना के उत्कृष्ट अधिकारियों को । १ संदयामि) मे सेनाध्यक्ष बान्धता हु, ( अवमान्) नीचे के ध, १८२ अथवेवेद-भाष्य कां० ६। अनु° ११। सू० १०४ से मुक्त कर सक्ता है । पयेहाः =परि (पूर्णतया) +भ (अट् लुडि) +-हा अमी ये युधंमायरिति केतन कृत्वान कत्रः । (ममी) वे (ये) जो (केतुन् कृत्वा) षण्डे लेकर, (अनोकशः) संघूप । 8170178 वारा (अमित्रान्) शत्रुओं को (आ दचुामसि) हम विजेता बन्ध रेते हैँ । (च) भौर (एषाम्) इन अमिश्रं के (ये) जो

English

Thou fain for glory, an imperial ruler, hast won dominion over men, O Indra, Of these celestial tribes be thou the sovran: long-lasting be thy sway and undecaying!

अध्याय 6

श्लोक 96.2

मु॒ञ्चन्तु॑ मा शप॒थ्या॒३दथो॑ वरु॒ण्याऽदु॒त।अथो॑ य॒मस्य॒ पड्वी॑शाद् विश्व॑स्माद् देवकिल्बि॒षात्

muñcantu mā śapathyā3datho varuṇyā'duta| atho yamasya paḍvīśād viśvasmād devakilbiṣāt

हिन्दी अर्थ

(समच्छिदन्) हमने काट दिया है गले काट कर उनके ए्वास-परश्वासों युदधस्थल में शतुभो को पकड़ कर उन के सामथिकं बन्धन कर दिये हे । अघुना =लक्षणा द्वारा असुना का अर्थ है अमुमता, प्राणवेता, बलवता १, बन्धीकृत कर धिया है, जेल मे बन्द कर दिया है ।

English

Thou governest the north and eastern regions, Indra! fiend- slayer! thou destroycst foemen. Thou hast won all, far as the rivers wander. Bull, called to help, on our right hand thou goest. A prayer for protection in battle

अध्याय 6

श्लोक 96.3

यच्चक्षु॑षा॒ मन॑सा॒ यच्च॑ वा॒चोपा॑रि॒म जाग्र॑तो॒ यत् स्व॒पन्तः॑ ।सोम॒स्तानि॑ स्व॒धया॑ नः पुनातु

yaccakṣuṣā manasā yacca vācopārima jāgrato yat svapantaḥ | somastāni svadhayā naḥ punātu

हिन्दी अर्थ

। कां० ६ । अनु० १९१। सू० १०५ अथवेवेद-भाष्य १८३ इ््यादानंपकरं तपसेन्द्रंण संचितम् । इदम्) इस (आदानम्) आदान-पाश अर्थात् शतु को पकड़े के यह आदान-पाश है जाल । यथा, अथव ० ८।८।५।८,१२; १०।१।३०)। होकर, इसी प्रकार (सोमः) सेनाध्यक्ष (च) भौर (राजा) राष्टूपति वरुण नामक राजा भी (मेदिनो) स्नेही होकर, (एनान्) इन शतुभों को

English

Indra, before affliction comes, I call thee from the wide expanse. The mighty guardian, born alone, wearer of many names, I call.

अध्याय 6

श्लोक 97.1

अभिभूर्वीरः -३ अथर्वा।१,३ देवाः, २ मित्रावरुणौ।१ त्रिष्टुप्, २ जगती, ३ भुरिक्।अ॒भि॒भूर्य॒ज्ञो अ॑भि॒भूर॒ग्निर॑भि॒भूः सोमो॑ अभि॒भूरिन्द्रः॑ ।अ॒भ्य॑हं विश्वाः॒ पृत॑ना॒ यथासा॑न्ये॒वा वि॑धेमा॒ग्निहो॑त्रा इ॒दं ह॒विः

abhibhūrvīraḥ -3 atharvā| 1,3 devāḥ, 2 mitrāvaruṇau| 1 triṣṭup, 2 jagatī, 3 bhurik| abhibhūryajño abhibhūragnirabhibhūḥ somo abhibhūrindraḥ | abhyahaṃ viśvāḥ pṛtanā yathāsānyevā vidhemāgnihotrā idaṃ haviḥ

हिन्दी अर्थ

हृदय होकर बन्द करने के दण्ड का प्रयोग करं, विद्वेष भावना से नहीं। ¶ “जग्रणी्भेवति" (निसक्त ७।४।१४) । सोमः=सेनाध्यक्ष (यजु ० १७।४०। (१-३) । उर्मोखमः। कासा । अनुष्टुम् । १. जस र्मे बम्द कर्ने का दष्ट ।

English

Whatever deadly missile launched to-day flies forth to slaughter us. We take both arms of Indra to encompass us on every side. We draw about us both the arms of Indra, our deliverer. May they protect us thoroughly.

अध्याय 6

श्लोक 97.2

स्व॒धास्तु॑ मित्रावरुणा विपश्चिता प्र॒जाव॑त् क्ष॒त्रं मधु॑ने॒ह पि॑न्वतम्।बाधे॑थां दू॒रं निरृ॑तिं परा॒चैः कृ॒तं चि॒देनः॒ प्र मु॑मुक्तम॒स्मत्

svadhāstu mitrāvaruṇā vipaścitā prajāvat kṣatraṃ madhuneha pinvatam| bādhethāṃ dūraṃ nirṛtiṃ parācaiḥ kṛtaṃ cidenaḥ pra mumuktamasmat

हिन्दी अर्थ

१८४ अथववेद-भाष्यं का० ६। अनु° ११। सु० १०५ यथा तनो मनस्केतैः प॑रापतंत्याभुमत् । (यथा) जैसे (आगमत्) वेगयुक्त (मनः) मन, (मनस्केतंः); निज मानसिक ज्ञानों द्वारा (परापतति) दूर के प्रदेशों तक गति करता है, गति कर, पहुंच । पत =पत्लु गतौ (भ्वादिः) । प्रतीत होता । “कासा'' का अथं “शासन व्यवस्था ' भौ सम्भव है जोकि सक्त मे अधिक समन्वित होता है । “कासा = कसि गतिशासनयोः, कस लाग् है, वैते उप दूर कौ उच्वेदिशामें भी शासन-न्यवस्या लागू होनी चाहिय जहां तक कि मनुष्य पहुंच सकता है ओौर मन की वास्तविक गति या पहुंच सम्भव है । ताकि मनुष्यों में वहां तक पहुंच कर भी युद्धन हो सके, यह् मन्ध का अभिप्राय है। वतंमान काल के 1 अ)

English

O Savitar, thou God, O royal Soma, make thou me pious- minded for my welfare. 91

अध्याय 6

श्लोक 97.3

इ॒मं वी॒रमनु॑ हर्षध्वमु॒ग्रमिन्द्रं॑ सखायो॒ अनु॒ सं र॑भध्वम्।ग्रा॒म॒जितं॑ गो॒जितं॒ वज्र॑बाहुं॒ जय॑न्त॒मज्म॑ प्रमृ॒णन्त॒मोज॑सा

imaṃ vīramanu harṣadhvamugramindraṃ sakhāyo anu saṃ rabhadhvam| grāmajitaṃ gojitaṃ vajrabāhuṃ jayantamajma pramṛṇantamojasā

हिन्दी अर्थ

पवा त्वं कसे प्र पतं पृथिव्या अचु संवतम् ॥२॥ (यथा) जैसे (सु संशितः) उत्तम-साधित (वाणः) शब्द ( आशुमत्) शीघ्र (परा पतति) दर कै प्रदेशों तक गति करता टै, पंच जाता है, (एव - एवम्, इस प्रकार (कासे) पृथिवी की (संवतम्) संप्रोप्ति कौ (अनु) अनुकूलता तक (प्रपत) गति पहुंच जाती है, जैसे कि टैलीफोन तथा रेडियो ओर टेलीविजन द्वारा वतं- कां ६.1 .अनुर १११ सू १४३ सष्रतेवेद-भाष्य १८१

English

A charm against poison The Gods and Sūrya gave the gift, the Earth and Heaven best- owed the boon. The three Sarasvatis in full accord bestowed the antidote.

अध्याय 6

श्लोक 98.1

अजरं क्षत्रम्।१-३ अथर्वाः।इन्द्रः।त्रिष्टुप्, २ बृहतीगर्भास्तारपङ्क्तिः।इन्द्रो॑ जयाति॒ न परा॑ जयाता अधिरा॒जो राज॑सु राजयातै ।च॒र्कृत्य॒ ईड्यो॒ वन्द्य॑श्चोप॒सद्यो॑ नम॒स्योऽभवे॒ह

ajaraṃ kṣatram| 1-3 atharvāḥ| indraḥ| triṣṭup, 2 bṛhatīgarbhāstārapaṅktiḥ| indro jayāti na parā jayātā adhirājo rājasu rājayātai | carkṛtya īḍyo vandyaścopasadyo namasyo'bhaveha

हिन्दी अर्थ

पृथिवी पर, जहां तक पृथिवी कृःम्यक्-पराप्ति' है लागू करना चाहिए । से (परापतन्ति) दुर के प्रदेशों तक गति करती दह, (एवा = एवम्) इसी (प्र पत) शीघ्रता सेः पहुंच, वहां, तक गति कर । . सूक्त मे, पृथिवी की उध्वैदिशा मे, समूदों से घिरी पृथिवी पर, तथा हे शाला ! (ते) तेरे (गायने) भाने के मागे मे, (परायणे) भौर जाने के मागे मे (पृष्पिणीः) फलो से पुष्पित (दूर्वाः) घास (रोहम्तु) उगें, (तश्र) वहां अथात् शालामें (वा) या तो (उत्सः) फुभआरा (जायताम्) हो, (वा) या -(पुण्डरीकवान्) कमलो से युक्त (हदः) तालाब । शाला (मन्त ३) आने गौर जाने के मागं अलग-भलग होने चाहिए,

English

That water, Upajīkās! which Gods poured for you on thirsty land, With that same water sent by Gods, drive ye away this poison here. p. a247

अध्याय 6

श्लोक 98.2

त्वमि॑न्द्राधिरा॒जः श्र॑व॒स्युस्त्वं भू॑र॒भिभू॑ति॒र्जना॑नाम्।त्वं दैवी॒र्विश॑ इ॒मा वि रा॒जायु॑ष्मत् क्ष॒त्रम॒जरं॑ ते अस्तु

tvamindrādhirājaḥ śravasyustvaṃ bhūrabhibhūtirjanānām| tvaṃ daivīrviśa imā vi rājāyuṣmat kṣatramajaraṃ te astu

हिन्दी अर्थ

१. पृथिवी सबमोरसे समृदोसे धिरी हदे, इन समदो के भीतर पृथिवी वलि को “एकराट्” तथा “जन राट्" कषत हैँ । १८४ अथर्ववेद-भाष्यं का०६। अनु० ११। सू० १५५ यथा तनो मनस्केतेः प॑रापत॑त्याशुमत् ।

English

The daughter of the Asuras art thou, and sister of the Gods. Thou who hast sprung from heaven and earth hast robbed the poison of its power. A charm to promote virile vigour

अध्याय 6

श्लोक 98.3

प्राच्या॑ दि॒शस्त्वमि॑न्द्रासि॒ राजो॒तोदी॑च्या दि॒शो वृ॑त्रहन्छत्रु॒होऽसि ।यत्र॒ यन्ति॑ स्रो॒त्यास्तज्जि॒तं ते॑ दक्षिण॒तो वृ॑ष॒भ ए॑षि॒ हव्यः॑

prācyā diśastvamindrāsi rājotodīcyā diśo vṛtrahanchatruho'si | yatra yanti srotyāstajjitaṃ te dakṣiṇato vṛṣabha eṣi havyaḥ

हिन्दी अर्थ

(यथा) जसे (आशुमत्) वेगयुक्त (मनः) मन, (मनस्केतेः); निज मानसिक ज्ञानो द्वारा (परापतति) दूर के प्रदेशों तके गति करतादहै, गति कर, पहुंच । पत -पत्लु गतौ (भ्वादिः) । मन्व में "कासा" का वर्णन है "कासा" का प्रसिद्ध अथं है “खासी; प्रतीत होता । “कासा'" का अथे “शासन व्यवस्था! भौ सम्भवदहै जोकि लाग् है, वेते उस दर को उध्वेदिशामें भी शासनव्यवस्था लागू होनी चाहर जहां तक कि मनुष्य पहुंच सकता है मौर मन की वास्तविक गति या पहूंच सम्भव है । ताकि मनुष्यों मेँ वहां तक पहुंच कर भी गृद्धन हो सके, यह मन्व का अभिप्राय है। वतमान काल के “ऽवा” को (यथा) जैसे (सु संशितः) उत्तम-साधित (वाणः) शब्द (आशुम्) शीघ्र (परा पतति) दर कै प्रदेशों तक गति करता है, पंच जाता है, (एव

English

Taurum age, palpita, incresce et teipsum extende: per totum membrum increscat penis: hoc tu caede feminam.

अध्याय 6

श्लोक 99.1

संग्रामजयः।१-३ अथर्वा।इन्द्रः, सोमः, सविता च।अनुष्टुप्, ३ भुरिग्बृहती (सौम्या सावित्री)।अ॒भि त्वे॑न्द्र॒ वरि॑मतः पु॒रा त्वां॑हूर॒णाद्धु॑वे ।ह्वया॑म्यु॒ग्रं चे॒त्तारं॑ पु॒रुणा॑मानमेक॒जम्

saṃgrāmajayaḥ| 1-3 atharvā| indraḥ, somaḥ, savitā ca| anuṣṭup, 3 bhurigbṛhatī (saumyā sāvitrī)| abhi tvendra varimataḥ purā tvāṃhūraṇāddhuve | hvayāmyugraṃ cettāraṃ puruṇāmānamekajam

हिन्दी अर्थ

पृथिवी की (संवतम्) संप्रप्ति की (अनु) अनुकूलतां तक (प्र पत) गति पच जाती है, जैसे कि टेलीफोन तथा रेडियो गौर टेलीविजन द्वारा वतं- कां ६.1. अनुर ११॥ सु? १४३ भषववेद-भाष्य 4; : से (परापतन्ति) दुर के प्रदेशों तक गति करती ह, (एवा = एवम्) इसी

English

Quo debilem stimulant, quo aegrum excitant (homines), hoc, O Brahmanaspatis, hujus penem in arcus modum extende. Velut nervum in arcu ego tuum fascinum extendo. Aggredere

अध्याय 6

श्लोक 99.2

यो अ॒द्य सेन्यो॑ व॒धो जिघां॑सन् न उ॒दीर॑ते ।इन्द्र॑स्य॒ तत्र॑ बा॒हू स॑म॒न्तं परि॑ दद्मः

yo adya senyo vadho jighāṃsan na udīrate | indrasya tatra bāhū samantaṃ pari dadmaḥ

हिन्दी अर्थ

(प्र पत ) शीघ्रता से. पहुंच, वदां तक गति कूर । . सूक्त मे, पृथिवी कीः उष्वंदिशा मे, समूद्रों से घिरी पृथिवी पर, तथा हे शाला ! (ते) तेरे (मायने) जाने के मागमे, (परायणे) मौर जाने के मागं में (पुष्पिणीः) फुलोंसे पुष्पितं (दूर्वाः) धास (रोहसम्तु) उगे, हो, (वा) या - (पुण्डरीकवान्) कमलो से युक्त (हदः) तालाब ।

English

(mulierem) semper indefessus velut cervus damam. A man’s love charm

अध्याय 6

श्लोक 99.3

परि॑ दद्म॒ इन्द्र॑स्य बा॒हू स॑म॒न्तं त्रा॒तुस्त्राय॑तां नः ।देव॑ सवितः॒ सोम॑ राजन्त्सु॒मन॑सं मा कृणु स्व॒स्तये॑

pari dadma indrasya bāhū samantaṃ trātustrāyatāṃ naḥ | deva savitaḥ soma rājantsumanasaṃ mā kṛṇu svastaye

हिन्दी अर्थ

शाला (मन्त्र ३) आने भौर जाने के मागे अलग-अलग होने चाहिए, ताकि एक मागं द्वारा शालामे आ सके, ओौर दुसरे मागंद्रारा शाला से १. पृथिषीसव्र गौरे समु से धिरी हई ह इन समुद के मीतर पृथिवी पृथिवी षले को “एकराट्” तथा “जन राद्” कहते है ।

English

Even as this ox, O Asvins, steps and turns together with his mate, So let thy fancy turn itself, come nearer, and unite with me. I, as the shaft-horse draws the mare beside him, draw thee to myself.

अध्याय 6

श्लोक 100.1

विषदूषणम्।१-३ गरुत्मान्।वनस्पतिः।अनुष्टुप्।दे॒वा अ॑दुः॒ सूर्यो॑ अदाद् द्यौर॑दात् पृथि॒व्यऽदात्।ति॒स्रः सर॑स्वतिरदुः॒ सचि॑त्ता विष॒दूष॑णम्

viṣadūṣaṇam| 1-3 garutmān| vanaspatiḥ| anuṣṭup| devā aduḥ sūryo adād dyauradāt pṛthivya'dāt| tisraḥ sarasvatiraduḥ sacittā viṣadūṣaṇam

हिन्दी अर्थ

१८६ अथवेवेद-भाष्य का० ६। भनु० ११। मूु १०७ शाला के समीप (१) या तो (इदम्) षह (पाम्) जल का समुद्र॒ की (निवेशनम्) स्थिति हो; (३) या (नः) हमारे (गृहाः) धर (दस्य तालाब के (मध्ये) मध्यमे हों । (मुखा = मृखानि) घरों मं मूख (पराचीना पराचीनानि) परस्पर पराक्मुख (कृधि) है गृहस्थी तू कर । कियाहै। मूखानि का अभिप्राय है खिडकिथां भौर दरवाजे । ये परस्पर पराङ्मुख होने चाहिए, विरोधी दिशाओं मे अर्थात् मामने-सामनै को दिशाभौं में होने चाहिए । निवेशनम् अथवा सामुद्रिक जल का पृथ्वीम (शाते) -हे शाला ! (त्वा) तु्ञे (हिमस्य) बफं के (कशयुणा) गभ

English

Like grass that storm and wind have rent, so be thy mind at- tached to me! Swiftly from Bhaga’s hands I bear away a love-compelling charm

अध्याय 6

श्लोक 100.2

यद् वो॑ दे॒वा उ॑पजीका॒ आसि॑ञ्च॒न् धन्व॑न्युद॒कम्।तेन॑ दे॒वप्र॑सूतेने॒दं दू॑षयता वि॒षम्

yad vo devā upajīkā āsiñcan dhanvanyudakam| tena devaprasūtenedaṃ dūṣayatā viṣam

हिन्दी अर्थ

ठै, (नः) हमारे लिये (हि) निश्चय से (शीतहदा ) ठण्ड तालाब के सदृश तदथं बफं जमा सकना वक्ञानिकता का सूचक है । (विएवजित् ) है विष्वविजयी परमेश्वर ! (रायमाणाये ) निज पालक शविति के प्रति (मा) मूक्षे (परिदेहि) प्रदान कर, सुपुदं कर, समपित कर ।

English

Of ointment and of sugar-cane, of Spikenard and the Kushtha plant. A charm to check the approach of a hostile army Brihaspati and Savitar prepare a rope to bind you fast!

अध्याय 6

श्लोक 100.3

असु॑राणां दुहि॒तासि॒ सा दे॒वाना॑मसि॒ स्वसा॑ ।दि॒वस्पृ॑थि॒व्याः संभू॑ता॒ सा च॑कर्थार॒सं वि॒षम्

asurāṇāṃ duhitāsi sā devānāmasi svasā | divaspṛthivyāḥ saṃbhūtā sā cakarthārasaṃ viṣam

हिन्दी अर्थ

का० ६1 अनु° ११। सु° १०७ अथ्ववेद-भाष्य १८७ नादि सम्पत्ति है उस की (रक्ष रक्षा कर। परमेश्वर को नाना शक्तियां है, न्यायानृकूल कर्मफल देने की, तथा धन-अन्न आदिके हो जाने पर मनुष्य परिपालितं होकर प्रायः निज पालक परमेश्वरं को भूल जाते है, उस से पराङ्मुख हो जाते ह। विप्रवजित् के भाधीन ही रखे, उससे विमुख न होने दे।

English

Let Bhaga, Mitra, Aryaman, and both the Asvins make the bond. I bind together all of them, the first, the last, the middlemost.

अध्याय 6

श्लोक 101.1

वाजीकरणम्।१-३ अथर्वाङ्गिराः।ब्रह्मणसपतिः।अनुष्टुप्।आ वृ॑षायस्व श्वसि॒हि वर्ध॑स्व प्र॒थय॑स्व च ।य॒था॒ङ्गं व॑र्धतां॒ शेप॒स्तेन॑ यो॒षित॒मिज्ज॑हि

vājīkaraṇam| 1-3 atharvāṅgirāḥ| brahmaṇasapatiḥ| anuṣṭup| ā vṛṣāyasva śvasihi vardhasva prathayasva ca | yathāṅgaṃ vardhatāṃ śepastena yoṣitamijjahi

हिन्दी अर्थ

शक्ति के प्रति (मा) मस्ते (परिदेहि) प्रदान कर, सुधुदं कद, समपित कर । चलने का अभिलाषो दहै) मन्वमे यहु भी दर्शायाहै कि कल्याण भामं मोर गृहुस्थ-जीवन मे विरोध नहीं । सन्तानो, पशुगों, तथा घन सम्पत की कियादहै, गौर उसकी शक्तियों को त्रायमाण तथा कल्याणी पदों द्वारा प्रति समपित कर दे, गौर कल्याण मार्ग पर चलता हुआ सवेविद् परभे- एवर के प्रति अपने-आप को समर्पित कर दे।

English

Indra hath girded these with cord: bind them together, Agni, thou! Those yonder who approach to fight, with banners raised along their ranks, Indra hath girded these with cord: bind them together, Agni, thou!

अध्याय 6

श्लोक 101.2

येन॑ कृ॒षं वा॒जय॑न्ति॒ येन॑ हि॒न्वन्त्यातु॑रम्।तेना॒स्य ब्र॑ह्मणस्पते॒ धनु॑रि॒वा ता॑नया॒ पसः॑

yena kṛṣaṃ vājayanti yena hinvantyāturam| tenāsya brahmaṇaspate dhanurivā tānayā pasaḥ

हिन्दी अर्थ

उपादेया है, त् (गोभिः अश्वः) गौजों भौर अश्वोंके साथ (भआा गहि) मेघा है धारणाशक्ति । जो गुरमुख से सुना ओर स्वयं पठा उसे यह् सात्विक काल दहै । गृहस्य जीवनके लिये गभो ओर अश्वोकाभो उभा्जन करना आवश्यक है । अथयववेद-भाष्य कां० ६। अनु० ११ सु०श्०्व का०६। भनु ११। सू० १०८ अथववेद-भाष्य १८९

English

The same We bind our foemen with a bond that binds them close and holds them fast.

अध्याय 6

श्लोक 101.3

आहं त॑नोमि ते॒ पसो॒ अधि॒ ज्यामि॑व॒ धन्व॑नि ।क्रम॒स्वर्श॑ इव रो॒हित॒मन॑वग्लायता॒ सदा॑

āhaṃ tanomi te paso adhi jyāmiva dhanvani | kramasvarśa iva rohitamanavaglāyatā sadā

हिन्दी अर्थ

भरता ब्रह्मचारिभिर्देवानाम्से हुवे ॥२॥ ज्ताम् = जवति गतिकर्मा (निघं० २।१४), तथा जूतिः गतिः (याम् मेधाम्) जिस मेधा को (ऋभवः) ऋशरलोग (विदुः) जानते है, (याम् मेधाम्) जिस मेधा को (असुराः) असुर (विदुः) जानते ह मेधा को (मयि) मृन्ञ म (मावेणयामसि) हम प्रविष्ट करते ह

English

Their breath and respiration I dissever, and their lives from life. This bond, made keen by Indra, I have formed with heat of holy zeal. Securely bind our enemies, O Agni, who are standing here.

अध्याय 6

श्लोक 102.1

अभिसांमनस्यम्।१-३ जमदग्निः।अश्विनौ।अनुष्टुप्।यथा॒यं वा॒हो अ॑श्विना स॒मैति॒ सं च॒ वर्त॑ते ।ए॒वा माम॒भि ते॒ मनः॑ स॒मैतु॒ सं च॑ वर्तताम्

abhisāṃmanasyam| 1-3 jamadagniḥ| aśvinau| anuṣṭup| yathāyaṃ vāho aśvinā samaiti saṃ ca vartate | evā māmabhi te manaḥ samaitu saṃ ca vartatām

हिन्दी अर्थ

समूह में बेठ मेधार्थी ह (आवेशयामसि); उन में से प्रत्येक (मयि) मेधागेशन का इच्छक है । ऋभवः --शित्पी लोग, तथा सत्यानुष्ठान को (भूतङ्ृतः) सत्यकर्मो के करने वाले (ऋषयः) ऋषि, तथा (मेधा- विनः) मेधावाले प्रजञानी; (याम् मेधाम्) जिस मेधा को (विदुः) जानते है अथवेवेद-भाष्य कां ६। अनु° ११। सु° १०९. तदेवाग्निस्तदादित्यः” (यजु०।३२१)।

English

Indra and Agni bind them fast, Soma the King, and both the Friends!

अध्याय 6

श्लोक 102.2

आहं खि॑दामि ते॒ मनो॑ राजा॒श्वः पृ॒ष्ट्यामि॑व ।रे॒ष्मच्छि॑न्नं॒ यथा॒ तृणं॒ मयि॑ ते वेष्टतां॒ मनः॑

āhaṃ khidāmi te mano rājāśvaḥ pṛṣṭyāmiva | reṣmacchinnaṃ yathā tṛṇaṃ mayi te veṣṭatāṃ manaḥ

हिन्दी अर्थ

(मेधाम्) मेधा को (सायम्) सायंकाल मे, (मेधाम्) मेधा को (प्रात) आस-पास, (मेधाम्) मेषा को (सुयंस्य) (आवेशयामहे ) !हम चित्त मे आविष्ट करते ह, स्थापित करते है । तां देवाः सम॑करयन्नियं जीवितया अलप ॥१॥

English

May Indra, girt by Maruts, make a bond to bind our enemies. A charm to cure cough 92

अध्याय 6

श्लोक 102.3

आञ्ज॑नस्य म॒दुघ॑स्य॒ कुष्ठ॑स्य॒ नल॑दस्य च ।तु॒रो भग॑स्य॒ हस्ता॑भ्यामनु॒रोध॑न॒मुद् भ॑रे

āñjanasya madughasya kuṣṭhasya naladasya ca | turo bhagasya hastābhyāmanurodhanamud bhare

हिन्दी अर्थ

के विक्षेप अर्थात् हिलते-जुलते रहने की, (उत) तथा (अतिविद्धभेषजी ) वाण आदि द्वारा गहरा वेध हो जाने की.मौषध है । (देवाः) दिष्यगुणी (हयम्) यहं (जी वितवे) जीने के लिये (अलम्) पर्याप्त है। जीवितवे = तुमर्थे “तवे” प्रत्ययः । जीवित रखने के लिये । सम् अक- कां० ६1 अनु ११। सू० ११० अथवेवेद-भाष्य १६१ वह (पूरुषः) पुरुष (न रिष्याति) न हसित हो !

English

Rapidly as the fancy flies forth with conceptions of the mind. So following the fancy’s flight, O Cough, flee rapidly away.

अध्याय 6

श्लोक 103.1

शत्रुनाशनम्।१-३ उच्छोचनः।इन्द्राग्नी, १ बृहस्पतिः, सविता, मित्रोः, अर्यमा, भगः,अश्विनौ, २-३ इन्द्रः, अग्निः।अनुष्टुप्।सं॒दानं॑ वो॒ बृह॒स्पतिः॑ सं॒दानं॑ सवि॒ता क॑रत्।सं॒दानं॑ मि॒त्रो अ॑र्य॒मा सं॒दानं॒ भगो॑ अ॒श्विना॑

śatrunāśanam| 1-3 ucchocanaḥ|indrāgnī, 1 bṛhaspatiḥ, savitā, mitroḥ, aryamā, bhagaḥ,aśvinau, 2-3 indraḥ, agniḥ| anuṣṭup| saṃdānaṃ vo bṛhaspatiḥ saṃdānaṃ savitā karat| saṃdānaṃ mitro aryamā saṃdānaṃ bhago aśvinā

हिन्दी अर्थ

पिप्पल्यः = बहुवचन द्वारा पिप्यली के नाना भेद सूचित कयि है। आयतीः “जनन स्थान से आती हृद" द्वारा पिप्पलियों के ताजापन को सूचित किया है । पुरानी पिप्पली की अपेक्षया ताजी पिप्पली गुणाधिकं है ! हसित होना = विनष्ट होना, मरना । क्षवपन्) उत्तम बीज को उत्तम विधसेबोया। मन्व भे पिप्पली के षिकमं फा वर्णेन है । बलवान् मजदूर तो भूमि को घोदते ह, ओर मूमिस्वामी बीज बोते ह । उदवपन् = उद् + डवपु बीज-

English

Rapidly as an arrow flies away with keenly-sharpened point, So swiftly flee away, O Cough, over the region of the earth! Rapidly as the beams of light, the rays of Sūrya, fly away,

अध्याय 6

श्लोक 103.2

सं प॑र॒मान्त्सम॑व॒मानथो॒ सं द्या॑मि मध्य॒मान्।इन्द्र॒स्तान् पर्य॑हा॒र्दाम्ना॒ तान॑ग्ने॒ सं द्या॒ त्वम्

saṃ paramāntsamavamānatho saṃ dyāmi madhyamān| indrastān paryahārdāmnā tānagne saṃ dyā tvam

हिन्दी अर्थ

(हि) निश्चय से अग्निः, परमेश्वर (अध्वरेषु) हिसारहित आं- चै विद्यमान है ( (सनात् ज) शौर सनातन काल का (नव्यः च) तथा भभिचवकाल का (होता) दाता है। (सत्सि) तू हमारे हृदयो में स्थित ११२ अथवैवेद-भाष्य का० ६। भनु ११। सू०११० उ इति" (निरुक्त १।३।६) । अथवा “कम्” सुखस्वरूप परमेश्वर “डच”

English

So, Cough! fly rapidly away over the current of the sea! A charm to protect a house from fire

अध्याय 6

श्लोक 103.3

अ॒मी ये युध॑मा॒यन्ति॑ के॒तून् कृ॒त्वानी॑क॒शः ।इन्द्र॒स्तान् पर्य॑हा॒र्दाम्न॒ तान॑ग्ने॒ सं द्या॒ त्वम्

amī ye yudhamāyanti ketūn kṛtvānīkaśaḥ | indrastān paryahārdāmna tānagne saṃ dyā tvam

हिन्दी अर्थ

यज देवपूजासंगतिकरणदानेषु (भ्वादिः) । (मूल 'हंणात्) मूल पुरूष कौ हिप्ता से (परि पाहि) है परमेश्वर ! मन्त किजेठका हनन क्रिादहै। उतने पृत्र पदा हुभा है1 उसकी सुरक्षा ““ज्येष्ठा-नक्षत्र' किया जा सके

English

Let flowery Dūrvā grass grow up about thine exit and approach. There let a spring of water rise, or lake with blooming lotuses. This is the place where waters meet, here is the gathering of the flood.

स्रोत: bhavykhatri/DharmicData · प्राप्त 3/6/2026

शास्त्रीय प्रामाणिकता एवं पारदर्शकताSources & Interpretation

स्रोत, संस्करण एवं व्याख्या वर्गीकरण

धर्म ग्रंथ पर मूल शास्त्र, पारंपरिक भाष्य और आधुनिक व्याख्या को पूर्णतः पृथक रखा जाता है ताकि पाठक को किसी भी व्याख्या के शास्त्र होने का भ्रम न हो।

सामग्री वर्गीकरण संकेत (Epistemic Content Labels)

6 स्तरिय प्रमाण व्यवस्था
मूल पाठOriginal text

अपौरुषेय / प्रामाणिक शास्त्र (Primary Canonical Scripture)

मूल संस्कृत, प्राकृत अथवा अवधी श्लोक/मंत्र। यह सर्वोच्च प्रमाण (प्रस्थान) है। इस पाठ में किसी भी आधुनिक व्याख्याकार का हस्तक्षेप नहीं है।

शाब्दिक अनुवादLiteral translation

पदार्थ व अन्वय (Direct Grammatical & Word-for-Word Meaning)

व्याकरणसम्मत प्रत्यक्ष शब्दार्थ (अन्वय)। बिना किसी दार्शनिक संप्रदाय के पूर्वाग्रह के, संस्कृत शब्दों का सटीक भाषांतर।

पारंपरिक भाष्यTraditional commentary

आचार्य परंपरा व टीका (Classical Lineage Commentary)

प्राचीन आचार्य परंपरा (यथा शंकराचार्य, रामानुजाचार्य, मध्वाचार्य, श्रीधर स्वामी) द्वारा विरचित शास्त्रीय भाष्य व टीकाएं।

सरल व्याख्याSimple explanation

भावार्थ व सुबोध प्रबोधन (Accessible Pedagogical Exposition)

आधुनिक जिज्ञासुओं के लिए सरल भाषा में भावार्थ। यह मूल मंत्र नहीं, बल्कि पाठ को सुगम बनाने हेतु संपादकीय व्याख्या है।

आधुनिक चिंतनModern reflection

समसामयिक विमर्श व अनुप्रयोग (Contemporary Application & Analysis)

दार्शनिक, मनोवैज्ञानिक व वैज्ञानिक समरूपताओं पर आधुनिक चिंतन। यह मूल शास्त्र का अंग नहीं है और इसे शास्त्रोक्त सिद्धांत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

शोध टिप्पणीResearch note

पांडुलिपि एवं ऐतिहासिक शोध (Critical Apparatus & Manuscript Research)

पांडुलिपि विविधताएं, पाठ-भेद (variant readings), छंद रचना, और ऐतिहासिक व तुलनात्मक भाषावैज्ञानिक शोध। यह शास्त्र का मूल संदेश बदलने हेतु नहीं, बल्कि पाठ की प्रामाणिकता परखने के लिए है।