Atharva Veda
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अध्याय 5 / 20

Kanda 5

काण्ड 5

376 श्लोकभाग 2/6 · श्लोक 7.1–13.11

पूर्ण अध्याय पाठ68 श्लोक

अध्याय 5

श्लोक 7.1

अरातिनाशनम्।१-१० अथर्वा।बहुदैवत्यम्, १-३, ६-१० अरातयः, ४-५ सरस्वती।अनुष्टुप्, १ विराड्गर्भा प्रस्तारपङ्क्तिः, ४ पथ्याबृहती, ६ प्रस्तारपङ्क्तिः।आ नो॑ भर॒ मा परि॑ ष्ठा अराते॒ मा नो॑ रक्षी॒र्दक्षि॑णां नी॒यमा॑नाम्।नमो॑ वी॒र्त्साया॒ अस॑मृद्धये॒ नमो॑ अ॒स्त्वरा॑तये

arātināśanam| 1-10 atharvā| bahudaivatyam, 1-3, 6-10 arātayaḥ, 4-5 sarasvatī| anuṣṭup, 1 virāḍgarbhā prastārapaṅktiḥ, 4 pathyābṛhatī, 6 prastārapaṅktiḥ| ā no bhara mā pari ṣṭhā arāte mā no rakṣīrdakṣiṇāṃ nīyamānām| namo vīrtsāyā asamṛddhaye namo astvarātaye

हिन्दी अर्थ

वंक (यः तथा ज) अघायु हमें (अभिदास्ात्) उपक्षीण करता है, (तान्) द्वार (अमेनीन्) मेनिरहिति (कृणु) कर, एतदर्थं (स्वाहा) हम अपने-आापको पुरुषविध” कल्पित कर किया गया है । अपुरुषों को “पुरुषविधः कल्पित ॑ कर उनका वर्णन वेदों रँ प्रायः होता है । देषो, निरुक्त (७।२। कविता में यह शैली स्वीक्रत है । (७।२।९, ७) ।

English

Issuing from the horse’s blood away she glided to the trees. Become a winged water-brook, and come to us, Arundhatī!

अध्याय 5

श्लोक 7.2

यम॑राते पुरोध॒त्से पुरु॑षं परिरा॒पिण॑म्।नम॑स्ते॒ तस्मै॑ कृण्मो॒ मा व॒निं व्य॑थयी॒र्मम॑

yamarāte purodhatse puruṣaṃ parirāpiṇam| namaste tasmai kṛṇmo mā vaniṃ vyathayīrmama

हिन्दी अर्थ

(१-१०) अथर्वा । बहूदेवता (१-३, ६-१०) अरातयः; (राते) है अदानभावना ! (नः) हमे (जा भर) तू आहर, त्याग (नीयमानम्) ली जाती हई (दक्षिणाम्) दक्षिणा को (नः) हमारे लिए (मा) न (रक्षीः) सुरक्षित कर । (वीत्सय) दानवीरता का उपक्षय करने- देनेवाली अदानभावना के लिए (नमः) वज्रप्रहार हो, (अरातये) अदान भावना के लिए (नमः) वज्रप्रहार (अस्तु) हो । अराति अर्थात् अरा दाने; अदानभावना। आभर=-आहर,

English

Disclosed his deepest nearest revelations, womb of the non- existent and existent. None have attained to those of old, those who wrought holy acts for you,

अध्याय 5

श्लोक 7.3

प्र णो॑ व॒निर्दे॒वकृ॑ता॒ दिवा॒ नक्तं॑ च कल्पताम्।अरा॑तिमनु॒प्रेमो॑ व॒यं नमो॑ अ॒स्त्वरा॑तये

pra ṇo vanirdevakṛtā divā naktaṃ ca kalpatām| arātimanupremo vayaṃ namo astvarātaye

हिन्दी अर्थ

को, अपने लिएहीन रख ले, अपितु उसका दान भी करते रहँ । वीत्स्यिं = दानवीरता का (तसु उपक्षये, दिवादिः) उपक्षय करनेवाली, तथा सामाजिक समृद्धिन होने देनेवाली के लिए वज्रपात हयो । नमः वज्रनाम (निघं० २।२०) । प्रजा मे यदि दानभावनान हौ तो सामाजिक वृद्धि नहीं प्रेरणाओं कौ विनाशिका के लिए । यमर॑राते पुरोधत्से पुरुषं परिरापिण॑म् या प्रलाप करनेवाले (यम्, पुरुषम्) जिस पुरुष को (पुरोधत्से) निज अगुजा- रूपमेत्रु धारित करती है, (ते) तरे (तस्मे) उस पुरूष के लिए (नमः)

English

Let them not harm our heroes here. Therefore I set before you this. Sweet-tongued, exhaustless, they have sent their voices down together in heaven’s vault that

अध्याय 5

श्लोक 7.4

सर॑स्वती॒मनु॑मतिं॒ भगं॒ यन्तो॑ हवामहे ।वाचं॑ जु॒ष्टां मधु॑मतीमवादिषं दे॒वानां॑ दे॒वहू॑तिषु

sarasvatīmanumatiṃ bhagaṃ yanto havāmahe | vācaṃ juṣṭāṃ madhumatīmavādiṣaṃ devānāṃ devahūtiṣu

हिन्दी अर्थ

व्यथयीः) न तु व्यथित कर, न व्यथा पहुंचा । जौ व्यक्ति अदानभावना का प्रचार करता है उसकेलिए सामाजिक दण्ड है, वच्प्रहार, यतः अदानभावना सामाजिक उन्नति की विरोधी- मावनाहै । सामाजिकं उन्नति के लिए प्रत्येक सामाजिक मनुष्य को “वनिः” होना चाहिए, संविभक्ता होना चाहिए, निज आमदनी का सम्यक्-विभाग कर, निदिचत भाग दानरूप मेँ देना चाहिए । वनिः “वन षण” संभक्तौ, मरणो व॒निर्हैवकृता दिवा नक्तं च क्पताम् ।

English

pours a thousand streams. 56

अध्याय 5

श्लोक 7.5

यं याचा॑म्य॒हं वा॒चा सर॑स्वत्या मनो॒युजा॑ ।श्र॒द्धा तम॒द्य वि॑न्दतु द॒त्ता सोमे॑न ब॒भ्रुणा॑

yaṃ yācāmyahaṃ vācā sarasvatyā manoyujā | śraddhā tamadya vindatu dattā somena babhruṇā

हिन्दी अर्थ

(नः वनिः) हमारा संविभाग (देवकृता) राष्ट के दानी राजद्वारा किया गया है, वहु संविभाग (दिवा नक्तं च) दिन भौर रात में (प्रकल्प- ताम्) सामध्येवाला हो । (वयम्) हम (अरातिम्) अदान भावना का (अनु प्र इमः) निरन्तर पीछा करते ्है। (अरातये) अदानभावना के लिए अनुप्रेमः-हम पीछा करते ह, उसका पीछा कर उसे भगादेतेरहै, देवो दानाद्वा (निरुक्त ७।४।१५) । वाचं जुष्टां मधुमती मवादिपं देवानाँ देवदूतिषु ॥४।॥

English

His wildly-restless warders never close an eye: in every place the snarers stand to bind men fast.

अध्याय 5

श्लोक 7.6

मा व॒निं मा वाचं॑ नो॒ वीर्त्सी॑रु॒भावि॑न्द्रा॒ग्नी आ भ॑रतां नो॒ वसू॑नि ।सर्वे॑ नो अ॒द्य दित्स॒न्तोऽरा॑तिं॒ प्रति॑ हर्यत

mā vaniṃ mā vācaṃ no vīrtsīrubhāvindrāgnī ā bharatāṃ no vasūni | sarve no adya ditsanto'rātiṃ prati haryata

हिन्दी अर्थ

(यन्तः) रणष्टरमें निरीक्षणाथं जाते हुए हम राष्टाधिकारी, परस्पर अनुकूल मति का, (भगम्) षडविध भग का (हवामहे) आह्वान करते रहै, प्रसार करते हैँ । देवानाम्, देवहूतिषु) दिव्य अधिकारियोंके अनुकूल भावना तथा भगों की सत्ता आवश्यक है । सरस्वती सरो विज्ञानं अ्थत्ति मानुष-वाकः दवारा (अहम्) मै याचक (यम्, याचामि) जिससे

English

Speed forward, conquering all foes, to win the spoil, Thou comest on thy haters with a surging sea. Thy name is

अध्याय 5

श्लोक 7.7

प॒रोऽपे॑ह्यसमृद्धे॒ वि ते॑ हे॒तिं न॑यामसि ।वेद॑ त्वा॒हं नि॒मीव॑न्तीं नितु॒दन्ती॑मराते

paro'pehyasamṛddhe vi te hetiṃ nayāmasi | veda tvāhaṃ nimīvantīṃ nitudantīmarāte

हिन्दी अर्थ

मनोय॒जा"” द्रारा यह सूचित कियाहै कि मेरी याचना विचारपूवंक वाक् द्वारा हृई रै, क्योंकि मै भावर्यकता स वाधित होता हुजा याचना करता हं, क्रिसी लोभ-लालन्र के कारण नहीं। सौमेन पु प्रसवे; षू प्रेरणे (मा) न (नः) हमारी (वनिम्) याचनाको, (मा) न (वाचम्) कराएं । (अद्य) जाज (नः) हमारे (सवं) सव (दित्सन्तः) दान देनेकी इच्छावाले तुम (अरातिम्) अदानभावनाको प्रति हयत) प्रगत करो, अभिप्राय यह कि दाता हमारी याचना तथा तत्सम्बन्धी वाणी

English

Fragile. The thirteenth month is Indra’s home. Through this now hast thou sent thy gifts. All hail!

अध्याय 5

श्लोक 7.8

उ॒त न॒ग्ना बोभु॑वती स्वप्न॒या स॑चसे॒ जन॑म्।अरा॑ते चि॒त्तं वीर्त्स॒न्त्याकू॑तिं॒ पुरु॑षस्य च

uta nagnā bobhuvatī svapnayā sacase janam| arāte cittaṃ vīrtsantyākūtiṃ puruṣasya ca

हिन्दी अर्थ

धन प्रदान करे । प्रति हयेत प्रति +-हयं गतौ (भ्वादिः), विरोधमें दूर वेदं त्वाहं निमीवंन्तीं नितदन्तींपराते ॥७ (अराते) है अदानभावना ! (परः, अप, इहि) तु परेहो जा, हमसे है, विनय-सम्पन्तन करते हँ । (निमीवन्तीम्) नितरां हिसा करनेवाली कौ,

English

With sharpened arms and missiles, kind and friendly, be gracious unto us, Soma and Rudra! Through this hast thou been left in want. All hail!

अध्याय 5

श्लोक 7.9

या म॑ह॒ती म॒होन्मा॑ना॒ विश्वा॒ आशा॑ व्यान॒शे।तस्यै॑ हिरण्यके॒श्यै निरृ॑त्या अकरं॒ नमः॑

yā mahatī mahonmānā viśvā āśā vyānaśe| tasyai hiraṇyakeśyai nirṛtyā akaraṃ namaḥ

हिन्दी अर्थ

अदान-भावना अदानी को तो समृद्ध करती है, परन्तु समाज ओर उत नग्ना बोभुवती स्वप्नया संचसे जन॑म् । हे अदानभावना ! तू (पुरुषस्य) पुरुप कै (वित्तम्) चित्त को (च) ओर अदानभावना के होते निधन, वस्त्रों से रहित होकर नग्न हौ जाते है, मानो अदानभावना नग्न होकर इनमें प्रकट हृदं है । एेसे व्यक्तियों को स्वप्न भी निज निधनता के होते रहते दँ । निर्धनता के कारण इनके चित तथा संकल्प भी क्षीण हो जाते रहै, (तसु उपक्षये, दिवादिः) 1 भदानभावना करी वीरता हट में प्रकट होती है, वीरता, दृदता, हठ ।

English

With sharpened arms and missiles, kind and friendly, be gracious unto us, Soma and Rudra! Through this hast thou committed faults. All hail!

अध्याय 5

श्लोक 7.10

हिर॑ण्यवर्णा सु॒भगा॒ हिर॑ण्यकशिपुर्म॒ही।तस्यै॒ हिर॑ण्यद्राप॒येऽरा॑त्या अकरं॒ नमः॑

hiraṇyavarṇā subhagā hiraṇyakaśipurmahī| tasyai hiraṇyadrāpaye'rātyā akaraṃ namaḥ

हिन्दी अर्थ

दन्दरिपोवाला होता हआ, तथा (सवेपूरुषः) सब पुरुषोवाला होता हृभा (सर्वतनूः) सब अवयरवोँवाली तनूवाला, (सहं तैन) उस सवके साथ होता हआ (यत् मे अस्ति) जो कुर किमेरादहै। “सर्वे'' कहा है, यथा “'सर्वं समाप्नोषि ततोऽसि सर्वः'' (गीता ११।४०) । करनेवाले पापवृत्रो के प्रहारोंसे जीवात्माकौो आवृत करनेकां निदण हुमा है । व्मं ओर वरूथम वृर् आवरणे (चुरादिः) काप्रयोगहुजादहै।

English

A prayer for protection and prosperity Eastward at first the prayer was generated: Vena disclosed bright flashes from the summit,

अध्याय 5

श्लोक 8.1

शत्रुनाशनम्।१-९ अथर्वा।नानादैवत्यं, १,२ अग्निः, ३ विश्वे देवाः, ४-९ इन्द्रः।अनुष्टुप्, २ त्र्यवसाना षट्-पदा जगती, ३-४ भुरिक्पथ्यापङ्क्तिः, ६ आस्तारपङ्क्तिः, ७ द्व्युष्णिग्गर्भा पथ्यापङ्क्तिः, ९ त्र्यवसाना षट्-पदा युष्णिग्गर्भा जगती।वै॒क॒ङ्क॒तेने॒ध्मेन॑ दे॒वेभ्य॒ आज्यं॑ वह ।अग्ने॒ ताँ इ॒ह मा॑दय॒ सर्व॑ आ य॑न्तु मे॒ हव॑म्

śatrunāśanam| 1-9 atharvā| nānādaivatyaṃ, 1,2 agniḥ, 3 viśve devāḥ, 4-9 indraḥ| anuṣṭup, 2 tryavasānā ṣaṭ-padā jagatī, 3-4 bhurikpathyāpaṅktiḥ, 6 āstārapaṅktiḥ, 7 dvyuṣṇiggarbhā pathyāpaṅktiḥ, 9 tryavasānā ṣaṭ-padā yuṣṇiggarbhā jagatī| vaikaṅkatenedhmena devebhya ājyaṃ vaha | agne tā~ iha mādaya sarva ā yantu me havam

हिन्दी अर्थ

तस्थै हिरण्यकरेश्ये निरतया अकरं नम॑ः ॥९॥ हे, (तस्ये) उस (हिरण्यकेश्यै) सृवणभरूषण हारा विश्ुषित केशोंवाली, स्वयं धनी हो जाता है, जौर उसकी पत्नी सिर के सुवर्णाभूषणों द्वारा भी विभूषित हौ जाती है, परन्तु अदानभावना समाज के लिए कष्टापत्तिरूप हो जाती है ) निति कृच्छापत्तिः (निरुक्त २।२।८) । तस्मै दिर्यद्रापयेऽरात्या अकरं नम॑ः ॥१०॥

English

With sharpened arms and missiles, kind and friendly, be gracious unto us, Soma and Rudra! Free us from trouble, free us from dishonour, accept our wor- ship, give us life immortal.

अध्याय 5

श्लोक 8.2

इन्द्रा या॑हि मे॒ हव॑मि॒दं क॑रिष्यामि॒ तच्छृ॑णु ।इ॒म ऐ॒न्द्रा अ॑तिस॒रा आकू॑तिं॒ सं न॑मन्तु मे ।तेभिः॑ शकेम वी॒र्यं१ जात॑वेद॒स्तनू॑वशिन्

indrā yāhi me havamidaṃ kariṣyāmi tacchṛṇu | ima aindrā atisarā ākūtiṃ saṃ namantu me | tebhiḥ śakema vīryaṃ1 jātavedastanūvaśin

हिन्दी अर्थ

१५) से ष बड़ तक्रिये- मसनद -वाली अदानभावना है । (हिरण्य- जदानभावना के लिए (नमः) व्प्रहार (अकरम्) मने करिया है। र 8४ मन्त्र ६ के सदुश है। अदानभावनावाले धनिक का मुख ध ५ "ठ तथा प्रसन्नता के कारण हिरण्यसदुश चमकने लगत। ह ५ कं । नक्काशीवाले हो जते है, परन्तु अदानभावना जब व्यापिनी हो जाती है तव सामाजिक उन्नति नहीं होनी, एेसी अराति अथात् अदान- भावना का विनाश प्रत्येक साम।जिकत्पक्ितिको करना चाहिए ।

English

O missile of the eye, missile of spirit, thou missile of devotion and of fervour! Thou art the weapon shot against the weapon. Let those be weaponless who sin against us.

अध्याय 5

श्लोक 8.3

यद॒साव॒मुतो॑ देवा अदे॒वः संश्चिकी॑र्षति ।मा तस्या॒ग्निर्ह॒व्यं वा॑क्षी॒द्धवं॑ दे॒वा अ॑स्य॒ मोप॑ गु॒र्ममै॒व हव॒मेत॑न

yadasāvamuto devā adevaḥ saṃścikīrṣati | mā tasyāgnirhavyaṃ vākṣīddhavaṃ devā asya mopa gurmamaiva havametana

हिन्दी अर्थ

(१-६) अथर्वा । नानादेवताः, १, २ अग्निः; ३ विश्वेदेवाः; ४-€ शद्रः । वेकङ्कतैनेध्मेन॑ देवेम्य आञयं वह । मे (मादय) हित कर, प्रसन्न कर, ताकि (सर्वे) वे सव (मे) मेरे (हवम्) आह्धान पर (आ यन्तु) मेरी सहायता के लिए आ जाएं अर्थात् बृहती सेना का पति कहते हँ (यजुः० १७।४०) । सूक्त युद्धपरक है ।

English

Make with thy weapon weaponless, O Agni, all wicked men who deal with us as foemen with eye, with thought, with spirit, or intention.

अध्याय 5

श्लोक 8.4

अति॑ धावतातिसरा॒ इन्द्र॑स्य॒ वच॑सा हत ।अविं॒ वृक॑ इव मथ्नीत॒ स वो॒ जीव॒न्मा मो॑चि प्रा॒णम॒स्यापि॑ नह्यत

ati dhāvatātisarā indrasya vacasā hata | aviṃ vṛka iva mathnīta sa vo jīvanmā moci prāṇamasyāpi nahyata

हिन्दी अर्थ

प्रसन्न होकर मुख्य सेनापति की सहायता करे । १. “यो । मृवनानि वस्ते (भथर्वं ° १३।३।१), जिस परमेश्वर ने वस्तरषूप म मुवनीं कौ बोदनी को ओढा हुमा ह । दरापि त= वस्त, उत्तरीयवस्त्र । २. अरातिः--अ--रा (दाने) तिः । जो सामाजिक उन्नति के लिए दाम नही देता वहू समाज का विघातक है, अतः अराति का अथं शत्रू भी है। इन्द्रा याहि मे हव॑मिदं करिष्यामि तच्छंण ।

English

Thou art the house of Indra. I betake me to thee, I enter thee with all my cattle, With all my people and with all my body, with all my soul, with mine entire possessions.

अध्याय 5

श्लोक 8.5

यम॒मी पु॑रोदधि॒रे ब्र॒ह्माण॒मप॑भूतये ।इन्द्र॒ स ते॑ अधस्प॒दं तं प्रत्य॑स्यामि मृ॒त्यवे॑

yamamī purodadhire brahmāṇamapabhūtaye | indra sa te adhaspadaṃ taṃ pratyasyāmi mṛtyave

हिन्दी अर्थ

तेभिः शक्रेम वीय जातवेदस्तनैधरिन् ॥२॥ सहायताके लिए तू आ, (इदम्) इस पृदधको (करिष्यामि) मै करूगा, (तत्) उस सम्बन्ध मे (शृणु) मेरी माँग को सुन, कि (इमे) वेजो उपे सफल करें (तेभिः) उन सैनिकों द्वारा (वीर्यम्) वीरता (शकेम) हम कर सकं, (जातवेदः) है जानी ! तथा (तनूवशिन्) साम्राज्य-तन् को यद सावमृतों देवा अदेवः सैश्चिकीषति । मा तस्याननिरव्यं ताक्ीदवं देवा अस्य मोप॑ गुममेव हवमेतन ॥३॥

English

Thou art the guard of Indra. I betake me to thee, etc. Thou art the shield of Indra. I betake me to thee, etc.

अध्याय 5

श्लोक 8.6

यदि॑ प्रे॒युर्देव॑पु॒रा ब्रह्म॒ वर्मा॑णि चक्रि॒रे।त॒नू॒पानं॑ परि॒पाणं॑ कृण्वा॒ना यदु॑पोचि॒रे सर्वं॒ तद॑र॒सं कृ॑धि

yadi preyurdevapurā brahma varmāṇi cakrire| tanūpānaṃ paripāṇaṃ kṛṇvānā yadupocire sarvaṃ tadarasaṃ kṛdhi

हिन्दी अर्थ

(देवाः) है साम्राज्य के दिव्य मधिकारियो ! (अदेवः) यदि कोर्ट अदिव्य अधिकारी, (अमुतः) उस अपने अधिकार-पद से (संचिकीषति) इसके साह्वान पर (मा) न (उपगः) इसकं पास जाओ, (मम, एव) मुञ्ज मुख्य सेनापति के ही (हवम्) जाह्वान पर (एतन) आओ । (अत्िसराः) है शीघ्रगामी सैनिको ! (मति धावत) खूब दोड़ो, (दन्दस्य) सम्राट् के (वचसा) कथन या अदेश के अनुसारं (हत)

English

Indra’s protection art thou. I betake me to thee, I enter thee with all my cattle. With all my people and with all my body, with all my soul, with mine entire possessions.

अध्याय 5

श्लोक 8.7

यान॒साव॑तिस॒रांश्च॒कार॑ कृ॒णव॑च्च॒ यान्।त्वं तानि॑न्द्र वृत्रहन् प्र॒तीचः॒ पुन॒रा कृ॑धि॒ यथा॒मुं तृ॒णहां॒ जन॑म्

yānasāvatisarāṃścakāra kṛṇavacca yān| tvaṃ tānindra vṛtrahan pratīcaḥ punarā kṛdhi yathāmuṃ tṛṇahāṃ janam

हिन्दी अर्थ

२०२ अबनंयेटर्भाष्म काण्ड ५। अनु° २। सक्त ८) । नाभी को मार हानो । (वृकः) भैडिया (इव) जैसे (अविम्) भर फो, वस तुम (मध्नीत) अदेवाधिकारी को मथ डालो, (मा मोचि) (नह्यत) बाधदो नासिका तथा मुख पर पटरी बधिदो, ताकि (सः) वह (वः) 4. अदेवाधिकारी (माजौवन्) न जीवित रहे । । न का वचन मादेशसूप ही होता है । (नह्यत = णह्

English

A charm to deprecate Arāti or Malignity Bring thou to us, bar not the way, Arāti! Stay not the guerdon that is being brought us.

अध्याय 5

श्लोक 8.8

यथेन्द्र॑ उ॒द्वाच॑नं ल॒ब्ध्वा च॒क्रे अ॑धस्प॒दम्।कृ॒ण्वे॒३ऽहमध॑रां॒स्तथा॒मूञ्छ॑श्व॒तीभ्यः॒ समा॑भ्यः

yathendra udvācanaṃ labdhvā cakre adhaspadam| kṛṇve3'hamadharāṃstathāmūñchaśvatībhyaḥ samābhyaḥ

हिन्दी अर्थ

(अमी) उन्हों अदेव ओर अदेव के साथियों ने (अपभूतये,) (प्रति) तेरी ओर (अस्यासि) मँ मख्य सेनापति फक देता ह । यदि भयु्देवपुरा व्रह्म षमींणि चक्रि (यदि) यदि वे अर्थात् अदेव ओर उसके साथी (देवपुरा)

English

Homage be paid to Failure, to Misfortune, and Malignity. The man whom thou preferrest, O Arāti, he who prates to us—

अध्याय 5

श्लोक 8.9

अत्रै॑नानिन्द्र वृत्रहन्नु॒ग्रो मर्म॑णि विध्य ।अत्रै॒वैना॑न॒भि ति॒ष्ठेन्द्र मे॒द्य॑१हं तव॑ ।अनु॑ त्वे॒न्द्रा र॑भामहे॒ स्याम॑ सुम॒तौ तव॑

atrainānindra vṛtrahannugro marmaṇi vidhya | atraivainānabhi tiṣṭhendra medya1haṃ tava | anu tvendrā rabhāmahe syāma sumatau tava

हिन्दी अर्थ

था है, दस प्रकार (तनूपानम्, परिपाणम्) निज शरीररक्षा ओर मन्व ५ तु सूखा दे, नीरस करदे, निर्वीयं करदे। यानसानंतिसराण्चकरारं कृणवच्च यान् । दुगंति । लवा हमारी भूति अर्थात् सम्पत्ति या वैभव का विनाश । २. फेंकने से विरोधी ब्रह्या के प्रति घृणा सूचित कौ गई हे। ॑

English

This man of thine, we reverence. Baffle not thou my heart’s desire, May our desire which Gods have roused fulfil itself by day and night.

अध्याय 5

श्लोक 9.1

आत्मा १-८ ब्रह्म।वास्तोष्पतिः, आत्मा।१,५ दैवी बृहती, २, ६ दैवी त्रिष्टुप्, ३, ४ दैवी जगती, ७ विराडुष्णिग्बृहतीगर्भा पञ्चपदा जगती, ८ पुरस्कृतित्रिष्टुब्बृहतीगर्भा चतुष्पदा त्र्यवसाना जगती।दि॒वे स्वाहा॑

ātmā 1-8 brahma| vāstoṣpatiḥ, ātmā| 1,5 daivī bṛhatī, 2, 6 daivī triṣṭup, 3, 4 daivī jagatī, 7 virāḍuṣṇigbṛhatīgarbhā pañcapadā jagatī, 8 puraskṛtitriṣṭubbṛhatīgarbhā catuṣpadā tryavasānā jagatī| dive svāhā

हिन्दी अर्थ

सैनिकों को (चकार) एकवित कर चृका है, (च, कृणवत्) जौर एकत्रित पूर्णतया कर है. वापस लौटादे, (यथा ) जिस प्रकार कि (अमुम्) उस (जनम्) अदेव जन को (तुणहाम्) मै मुख्य सेनापति हसित करू, साम्राज्य पर घेरा डाला हृभा है, अतः उन सैनिकों को पराडमूखी करने को कहा है मौर सदेव को पकड़ लिया है, मृत्युदण्ड के लिए । तले अर्थात् निज पादसेवक (चकर) किया है, (तथा) उसी समय (अहम्) मै मुख्य सेनापति (अमून्) उन शत्रुसेनिकों कौ ( अधरान्) सधोगतिवाले,

English

We seek to win Arāti: to Arāti be our homage paid. We, suppliant, call on Bhaga, on Sarasvati, Anumati,

अध्याय 5

श्लोक 9.2

पृ॒थि॒व्यै स्वाहा॑

pṛthivyai svāhā

हिन्दी अर्थ

अनं सेन्द्रा र॑भामहे स्याम सुमतो तवं ॥९॥ (वृत्रहन् इनदर) घेरा डालनेवालो का हनन कर नेवाले है सज्राट् । तेरी आज्ञानुसार ही (आरभामहे ) हम सन युद्धारम्भ करते है, (तव) तेरी (सुमतौ) सुमति में ही (स्याम ) हम सैनिक आदि हौ, रह । (वित्रे स्वाहा) चुलोक के लिए जाहुति हौ । ( पृथिन्ये स्वाहा) परथिवी

English

Pleasant words have I spoken, sweet as honey is, at invocations of the Gods. The portion that I crave with speech intelligent and full of power,

अध्याय 5

श्लोक 9.3

अ॒न्तरि॑क्षाय॒ स्वाहा॑

antarikṣāya svāhā

हिन्दी अर्थ

को “विदवकायिक" स्वरूप में लीन करना चाहता है मन्त ७ । वह् पहले पृथिवी मेँ निज पाथिव स्वरूप को लीन करता हे, वह पुथिवी को दिव् मे निज कारण-देहको लीन करताहै, दिव् को निज कारण-देह् वह् समक्ता है । यह् है आरोह-करम, नीचे से ऊपर की ओर आरोहण करना । त्रिविध-देह को त्रिविध-लोको म लीन करना अभिप्रेत है । है, अर्थात् "्टीक कहा है", इतना हीरहै। निसक्त मे भी कहाहै कि

English

May faith, presented with the gift of tawny Soma, find to-day. Do not thou make our words or wishes fruitless. Let the twain

अध्याय 5

श्लोक 9.4

अ॒न्तरि॑क्षाय॒ स्वाहा॑

antarikṣāya svāhā

हिन्दी अर्थ

प्रकरण मे दशयि है, (निरुक्त ७।६।२३) । आरोह प्रत्यवरोह, यथा “रोहात् प्रत्यवरो चिकीर्षितः" (७।६।२३) 1, । । । प्राणः) प्राणदहै, सूर्यः, मे, चक्षुः) सूये, मेरी चक्षु है, (वातः ) वायु , शरीरम्) पृथिवी शरीर है । (अहम् अस्तृतः नाम म व । को (दावापृथिवीभ्याम् ) यलोक ओर पृथिवीलौक के लिए, (गोपीथाय) मं (निदधे) निधिरूप करता हूं । ४

English

Indra Agni, bring us treasures. All, fain to-day to give us gifts, welcome Arāti with your love.

अध्याय 5

श्लोक 9.5

दि॒वेस्वाहा॑

divesvāhā

हिन्दी अर्थ

हआ है । मन्म वक्ताने निज विर्वकाथिकस्वरूप का कथन कियाहै। भारोहक्रम से निज को पृथिवी, अन्तरिक्ष ओर दिव्में विलीन । विश्वरूप होकर विशृद्ध हौ गया है तदनन्तर वह पूनः निन अल्पकं यि शरीर मे अवतीणं कर, निज को आत्मा" के रूप मे अवध्य" जानकर, देता है । अस्ततः=अ +-“'स्तृणाति वधकर्मा” (निषं ° २।१६ ) । उत्कृष्ट कर लिया है, (उत् बलम्) बल उत् आयुः) आयु को मैने उक्कृष्ट कर 1 को , कर लिया है, (उत् कृतम्) किये व 1 यलोक ! तथा (आयुष्पतनी) पत्नी की तरह भायु == जीवन त

English

Misfortune! go thou far away: we turn thy harmful dart aside. I know thee well, Arāti! as oppressor, one who penetrates.

अध्याय 5

श्लोक 9.6

पृ॒थि॒व्यै स्वाहा॑

pṛthivyai svāhā

हिन्दी अर्थ

२०६ भयवेवेदभाष्य काण्ड ५। अनु० २। सूक्त १० कायरूप समन्न लियादहै ओौर निज जायु ओर वल आदि को उत्कृष्ट कर लिथाहै, वह् निजरक्षा के लिए अपने-आापको द्युलोक ओौर पृथिवी के प्रति सुपुदं कर देता है, ओर निजरक्षा की चिन्तासे उपरतहो जाता, वह् पथिवीमे होरहीहै वसेमेरी भी रक्षा होती रहेगी । स्वधा अन्ननाम अर्थात् जीवन को बढ़ती है अन्नादि हारा, वैसे पृथिवी अन्न ओौरपेय

English

Oft, coming as a naked girl thou hauntest people in their sleep, Baffling the thought, Arāti! and the firm intention of a man.

अध्याय 5

श्लोक 9.7

सूर्यो॑ मे॒ चक्षु॒र्वातः॑ प्रा॒णो॒३न्तरि॑क्षमा॒त्मा पृ॑थि॒वी शरी॑रम्।अ॒स्तृ॒तो नामा॒हम॒य म॑स्मि॒ स आ॒त्मानं॒ नि द॑धे॒ द्यावा॑पृथि॒वीभ्यां॑ गोपी॒थाय॑

sūryo me cakṣurvātaḥ prāṇo3ntarikṣamātmā pṛthivī śarīram| astṛto nāmāhamaya masmi sa ātmānaṃ ni dadhe dyāvāpṛthivībhyāṃ gopīthāya

हिन्दी अर्थ

आदि प्रदान द्वारा हम सबकी आयु को, जीवन को, बढ़ती है । है ब्रह्म ! (अदमवर्म) पत्थर के सदृश सुदृढ कवच, (मे) मेरे लिए, (असि) तु है, (यः) जो (अघायुः) हत्यारूपी-पापकमे चाहता हभ, (प्राच्याः दिशः) पूवं की दिशासे, (माअभिदासात्) मेरा उपक्षय'करे,

English

To her the mighty vast in size, who penetrates all points of space, To her mine homage have I paid, Nirriti with her golden hair.

अध्याय 5

श्लोक 9.8

उदायु॒रुद् बल॒मुत् कृ॒तमुत् कृ॒त्यामुन्म॑नी॒षामुदि॑न्द्रि॒यम्।आयु॑ष्कृ॒दायु॑ष्पत्नी॒ स्वधा॑वन्तौ गो॒पा मे॑ स्तं गोपा॒यतं॑ मा ।आ॒त्म॒सदौ॑ मे स्तं॒ मा॑ हिंसिष्टम्

udāyurud balamut kṛtamut kṛtyāmunmanīṣāmudindriyam| āyuṣkṛdāyuṣpatnī svadhāvantau gopā me staṃ gopāyataṃ mā | ātmasadau me staṃ mā hiṃsiṣṭam

हिन्दी अर्थ

आभ्यन्तर कवच दहै, मनकी कवचहै (मन्व ८) । अवायु हैँ देन्धिपिक विषय, जोकि बाहर की दिशाओं पे मन पर प्रहारकरते है, परन्तु मनप्र् ,, चद्ी ब्रह्मकवच के कारण ये विषय मन पर प्रहार नहीं कर सकते, वे कवच । १. अभिप्राय यह है कि असंयमित विषयभोग, पापकम हँ जोकि शारीरिक, मानसिक सतत उसको ध्यानमें रखने से, एेद्द्रियिक विषय बाह्य दिशाओं से मनपर प्रहार नहीं कर सकते । अवायुः=अघमिति पापनाम “आहन्तीति लिए (असि) तू है । (यः) जो मघायु (मा) मेरा (दक्षिणायाः दिशः) दक्षिण दिशा से उपक्षय करे-णेष पूववत् ।

English

Auspicious, with her golden hue, pillowed on gold, the mighty one To this Arāti clad in robes of gold mine homage have I paid.

अध्याय 5

श्लोक 10.1

आत्मरक्षा १-८ ब्रह्म।वास्तोष्पतिः।१-६ यवमध्या त्रिपदा गायत्री, ७ यवमध्या ककुप्, ८ पुरोधृतिद्व्यनुष्टुब्गर्भा पराष्टिस्त्र्यवसाना चतुष्पदातिजगती।अ॒श्म॒व॒र्म मे॑ऽसि॒ यो मा॒ प्राच्या॑ दि॒शोऽघा॒युर॑भि॒दासा॑त्।ए॒तत् स ऋ॑च्छात्

ātmarakṣā 1-8 brahma| vāstoṣpatiḥ| 1-6 yavamadhyā tripadā gāyatrī, 7 yavamadhyā kakup, 8 purodhṛtidvyanuṣṭubgarbhā parāṣṭistryavasānā catuṣpadātijagatī| aśmavarma me'si yo mā prācyā diśo'ghāyurabhidāsāt| etat sa ṛcchāt

हिन्दी अर्थ

ह् बरह्म ! (अर्मवमं) पत्थर के सदृश सुदृढ कवचे, (भ) मेरे लिए (असि)त्है। (यः) जो अघायु (मा) मेरा (प्रतीच्याः दिशः) परिचिम की दिशा से उपक्षय करे'णेष पूववत् । लिए, (असि) तु है । (यः) जो अघायु (मा) भेरा (उदीच्या दिशः) उत्तर की दिशा से उपक्षय करे शेष पूर्ववत् । हे ब्रह्म ! (अङमवर्म) पत्थर के सदुण सुदृढ कवच, (मे) मेरे दिशः) नीचे कौ दिशा से उपक्षय करे "शेष पूववत् ।

English

A charm for the discomfiture and destruction of hostile priests 57

अध्याय 5

श्लोक 10.2

अ॒श्म॒व॒र्म मे॑ऽसि॒ यो मा॒ दक्षि॑णाया दि॒शोऽघा॒युर॑भि॒दासा॑त्।ए॒तत् स ऋ॑च्छात्

aśmavarma me'si yo mā dakṣiṇāyā diśo'ghāyurabhidāsāt| etat sa ṛcchāt

हिन्दी अर्थ

हे ब्रह्म ! (अशमवमे) पत्थर के सदृश सुदृढ कवच, (मे) मेरे दिशः) ऊध्व की दिशा से उपक्षय करे. -णेष पूववत् । । हे ब्रह्म ! (अशष्मवभे) पत्थर के सदृश सुदृढ कवच, (भे, मेरे २०८ अधवेवेदभाष्य काण्ड ५। अनु° २। सूक्त १५

English

With fuel of Vikankata bring molten butter to the Gods. O Agni, make them joyful here: let them all come unto my call.

अध्याय 5

श्लोक 10.3

अ॒श्म॒व॒र्म मे॑ऽसि॒ यो मा॑ प्र॒तीच्या॑ दि॒शोऽघा॒युर॑भि॒दासा॑त्।ए॒तत् स ऋ॑च्छात्

aśmavarma me'si yo mā pratīcyā diśo'ghāyurabhidāsāt| etat sa ṛcchāt

हिन्दी अर्थ

लिए, (असि) तु है, (यः) जो (अघायुः) अघायु (दिशाम्) दिशाओं के वहता मन उप ह्ये मातरिश्वना प्राणापानौ । वेदवाणी द्वारा (वाचम्) वाणी का (उप ह्वयामहे) हम निज समीप आह्वान बृहद् -ब्रह्मरूपी-कवच के कारणे विषयों का प्रहार मन परनहीं हुमा, अतः मन पवित्र हौ गया द्वै । मनोयुजा = विज्ञानमयी वेदवाणी मनन- युक्ता है, मननयोग्या है, मननमयी है, उस वाणी के उच्चारणसे हमारी वाणीभौ मननमयीहो जातो है, यही सरस्वती से निज वाणी का अह्वान

English

O Indra, come unto my call, This will I do. So hear it thou. Let these exertions for the sake of Indra guide my wish aright.

अध्याय 5

श्लोक 10.4

अ॒श्म॒व॒र्म मे॑ऽसि॒ यो मोदी॑च्या दि॒शोऽघा॒युर॑भि॒दासा॑त्।ए॒तत् स ऋ॑च्छात्

aśmavarma me'si yo modīcyā diśo'ghāyurabhidāsāt| etat sa ṛcchāt

हिन्दी अर्थ

शरीर ओर शरीरायवव स्वतः पवित्र हो जाते है । व्यक्ति तब अपनेको “सवंत: पवित्र" समञ्लने लगता है । वालातू (इह) दस जीवन मे, (महे) महान् (असुराय) प्रज्ञावान् वरुण के से सम्पन्न होनैवाले (वरुण) वरुण ! (पुरिनम्) नाना वर्णोवाली पृथिवी को मननः-पर्वके (अचिकित्सीः) जगत् मे निवास किया है ।

English

Therewith, O Jātavedas, Lord of Bodies! may we win us strength. Whatever plot from yonder, O ye Gods, that godless man would frame,

अध्याय 5

श्लोक 10.5

अ॒श्म॒व॒र्म मे॑ऽसि॒ यो मा॑ ध्रु॒वाया॑ दि॒शोऽघा॒युर॑भि॒दासा॑त्।ए॒तत् स ऋ॑च्छात्

aśmavarma me'si yo mā dhruvāyā diśo'ghāyurabhidāsāt| etat sa ṛcchāt

हिन्दी अर्थ

बोला । वरुण है श्रेष्ठ परमेदवर जो कि पापों से निवारित करता है (अथरवं० ४। १६। १-६) । परमेरुवर के प्रति वोलना मानुषी वाणी दवारा सम्भव नहीं । ने कृपापूवेक निज स्वरूप तेरे प्रति प्रकट कर दियादहे। तव निज मात्माम प्रकट हए वरुण के साथ तूने आत्मिक संवाद किया है, वाचि क संवाद नहीं । की उपासना को है, इस ध्यानयनजञ पर दक्षिणारूप में उसे पृदिन प्राप्त हुई है। ५ ते कर आमा, यदि जगत् में निवास न कष ती जगत् की स्थिति कंसेहोसवं,

English

Let not the Gods come to his call, nor Agni bear his offering up. Come, ye, come hither to my call.

अध्याय 5

श्लोक 10.6

अ॒श्म॒व॒र्म मे॑ऽसि॒ यो मो॒र्ध्वाया॒ दि॒शोऽघा॒युर॑भि॒दासा॑त्।ए॒तत् स ऋ॑च्छात्

aśmavarma me'si yo mordhvāyā diśo'ghāyurabhidāsāt| etat sa ṛcchāt

हिन्दी अर्थ

काण्ड ५। अनु° ३। सूक्त ११ अथरवंवेदमाष्य २११ ; 1 (धरिष्ये) जिसे कि मै भविष्य मेँ धारण करूंगा । , 1 । अनागत घटनाओं के वणेन आदि से अतिगम्भीर, दुर्ञेयहै। म अथर्वा एसे २१० अपवैषेवभाष्य काण्ड ५। जनु० ३। सूक्त ११ न कामेन पुनमघो भवामि द च॑ कं पृश्चिमेतामपाने।

English

Run, ye Fxertions, farther on By Indra’s order smite and slay. As a wolf worrieth a sheep, so let not him escape from you while life remains. Stop fast his

अध्याय 5

श्लोक 10.7

अ॒श्म॒व॒र्म मे॑ऽसि॒ यो मा॑ दि॒शाम॑न्तर्दे॒शेभ्यो॑ऽघा॒युर॑भि॒दासा॑त्।ए॒तत् स ऋ॑च्छात्

aśmavarma me'si yo mā diśāmantardeśebhyo'ghāyurabhidāsāt| etat sa ṛcchāt

हिन्दी अर्थ

असि) जातवेदा नामवाला हुभाहै। तर जातवेदाः == जातप्रज्ञानः, तथा जातधनः (निरुक्त ७।५।१६) । जात + मंमीरः कार्येन सत्यं जातेन =, कवि नहीं, ओर (न) न (मेधया) मेधा से (धीरतरः) अधिक बुद्धिमान भधर्वाद्राराही अधवेवेद काआविमवि हता हो, ओर अधर्वा्रिषि तथा अथववेद ॥

English

breath. The Brāhman whom those yonder have appointed priest, for injury,

अध्याय 5

श्लोक 10.8

बृ॒ह॒ता मन॒ उप॑ ह्वये मात॒रिश्व॑ना प्राणापा॒नौ।सूर्या॒च्चक्षु॑र॒न्तरि॑क्षा॒च्छ्रोत्रं॑ पृथि॒व्याः शरी॑रम्।सर॑स्वत्या॒ वाच॒मुप॑ ह्वयामहे मनो॒युजा॑

bṛhatā mana upa hvaye mātariśvanā prāṇāpānau| sūryāccakṣurantarikṣācchrotraṃ pṛthivyāḥ śarīram| sarasvatyā vācamupa hvayāmahe manoyujā

हिन्दी अर्थ

जनिमा) सव उत्पन्न भुवनो को (वेत्थ) जानतादहै कि (अमुर) है अमर! ¦ (यजुः ३।३) । अग्नि सवं दाहकं है । महायोगी अध्वा मी सवंपापदाहक होने से ¦ अगनिरूप है । महायोगी का निष्पाप होना स्वतः सिद्ध है । (हि (एना रजसः) इस रञ्जक-दयुलोक से (परः) परे (अन्यत्) ओर (कि । मस्ति) क्या है ? तथा (एना परेण) इस परलोक से (अवरम्) इधर (किम्) क्याहै? इसेभीतु जानताहै। . ११. अयर्वेवेदभाष्य काण्ड ५। अनु० ३। सूक्त १

English

He, Indra! is beneath thy feet. I cast him to the God of Death. If they have issued forth, strongholds of Gods, and made their shield of prayer,

अध्याय 5

श्लोक 11.1

संपत्कर्म।१-११ अथर्वा।वरुणः (प्रश्नोत्तरम्)।त्रिष्टुप्, १ भुरिक्, ३ पङ्क्तिः, ६ पञ्चपदा अतिशक्वरी, ११ त्र्यवसाना षट्-पदा अत्यष्टिः।क॒थं म॒हे असु॑रायाब्रवीरि॒ह क॒थं पि॒त्रे हर॑ये त्वे॒षनृ॑म्णः ।पृश्निं॑ वरुण॒ दक्षि॑णां ददा॒वान् पुन॑र्मघ॒ त्वं मन॑साचिकित्सीः

saṃpatkarma| 1-11 atharvā| varuṇaḥ (praśnottaram)| triṣṭup, 1 bhurik, 3 paṅktiḥ, 6 pañcapadā atiśakvarī, 11 tryavasānā ṣaṭ-padā atyaṣṭiḥ| kathaṃ mahe asurāyābravīriha kathaṃ pitre haraye tveṣanṛmṇaḥ | pṛśniṃ varuṇa dakṣiṇāṃ dadāvān punarmagha tvaṃ manasācikitsīḥ

हिन्दी अर्थ

(एना रजसः) इस रञ्जकं द्युलोक से (परः) परे (एकम्) एक भौर की बोर भौ (दु्णशम्) दुषाप्य (परः) परात् पर (अस्ति) बह ही एक- तत्त्व है । (वरुण) है वरण करनेवाले या वरणयोग्य परमेश्वर ! (ते) तेरे तिरस्कृत व चनोंवाले (भवन्तु) ह, (दासाः) उपक्षयकारी ये (नीचैः) नीचे की भूमि पर (उप सपन्तु) सपण करते रहँ । अधोवचसः == अधस्कृतवचसः, ॥ प्रतीत होता है । इस प्रकार इस पाठ में द्विः पठित ' एना" पद सार्थक हो

English

Gaining protection for their lives, protection round about, make all their instigation powerless.

अध्याय 5

श्लोक 11.2

न कामे॑न॒ पुन॑र्मघो भवामि॒ सं च॑क्षे॒ कं पृश्नि॑मे॒तामुपा॑जे ।केन॒ नु त्वम॑थर्व॑न् काव्ये॑न॒ केन॑ जा॒तेना॑सि जा॒तवे॑दाः

na kāmena punarmagho bhavāmi saṃ cakṣe kaṃ pṛśnimetāmupāje | kena nu tvamatharvan kāvyena kena jātenāsi jātavedāḥ

हिन्दी अर्थ

कामना की पूति के लिए नहीं (मन्त्र २), भपितु प्रजा के सृख के लिए है, का होते रहना--यह तो वरुण नियमसेहीहोताहै। मा दूत्=माभूः। कर, इसलिए (जरितः) है स्तोता ! (ते) तुके (पूनः) बार-बार (पृरिनम्) भूमि (ददामि) ्मैदेता हं । (विश्वासु मानुषीषु दिक्षु, अन्तः मनुष्यों से बसी हू सव दिशाभों के भीतर (शचीभिः) वेदवाणियों द्वारा (मे) मेरे प्रजाजन मूङ्ञे निधन न कट इसलिएहै मेरे स्तोतुवगं या अथर्वा तुच मै वरुण प्रत्येकं सृष्टिकाल मे धनधान्यं से भरी भरमिको बार-बार देता हं, परन्तु देता हूं उनके सूख के लिए जोकि मेरे स्तोतार, ताकि मेरे सदुश वे, घन को पराथ देकर, उनके सुख को बहा । इस निमित्त है मेरे

English

Even so for all the coming years I cast those men beneath my feet. Here, Indra Vritra-slayer, in thy strength pierce thou their vital. parts.

अध्याय 5

श्लोक 11.3

स॒त्यम॒हं ग॑भी॒रः काव्ये॑न स॒त्यं जा॒तेना॑स्मि जा॒तवे॑दाः ।न मे॑ दा॒सो नार्यो॑ महि॒त्वा व्र॒तं मी॑माय॒ यद॒हं ध॑रि॒ष्ये

satyamahaṃ gabhīraḥ kāvyena satyaṃ jātenāsmi jātavedāḥ | na me dāso nāryo mahitvā vrataṃ mīmāya yadahaṃ dhariṣye

हिन्दी अर्थ

वसी मानुषी प्रजाभौं मे आया कर, उनमें स्तोत्रं का प्रसार करने के लिए। समूह । मन्त्रद्वारा वहणने निज निधनता का अपहार किया दहै । हए (आ यन्तु) भए । (नू) निश्चय से (मे) मुञ्चे (देहि) दे, (यत्) जिसे कि (मे) मृक्ने (दत्तः असि) तूने अभी तक नहीं दिया, (युज्यः) योग्य (सप्तपदः) सात पदोंवाला (मे) मेरा (सखा असि) सखातुहै। २१४ अथर्ववेवमाष्य रकीण्ड ५। अनु० २। सूवतत १ ॥

English

Here, even here, attack them, O Indra. Thine own dear friend am I. Indra, we closely cling to thee. May we be in thy favouring grace.

अध्याय 5

श्लोक 11.4

न त्वद॒न्यः क॒वित॑रो॒ न मे॒धया॒ धीर॑तरो वरुण स्वधावन्।त्वं ता विश्वा॒ भुव॑नानि वेत्थ॒ स चि॒न्नु त्वज्जनो॑ मा॒यी बि॑भाय

na tvadanyaḥ kavitaro na medhayā dhīrataro varuṇa svadhāvan| tvaṃ tā viśvā bhuvanāni vettha sa cinnu tvajjano māyī bibhāya

हिन्दी अर्थ

करता है । अथर्वा वरुणसे कहता रै क्रित तो मेरा योग्य सखाटहै, सखा भी क्या अपने सखा से निज स्वरूप को चछिपाये रखता है । सप्तपदः सखा जिसके साथ भौ मिलकर सात पग चला जाए वह भी सखा वन जाता है, अथवा जिसके साथ सात पद अर्थात् शब्द भी बोल लिये जाए वह॒ भी सखा मे बाते हुई है, अतः तु मेरा सखा रै, अतः तु मृज्ञे निजस्वरूप का दर्शन दे । समानौ वरन्धबरुण समा जा वेदाहं तद्यन्नविषा समा जा (नौ) हम दोनों की (बन्धुः) बन्धुता (समा) एक-सद्श है (वरुण) हे वरुण ! ओर हम दोनों कौ (जा) उत्पत्ति भी (समा) एक सदश हैः; (अहम्) मँ (वेद) जानता हं (तत्) उसे (यत्) जोकि (नौ) हम दनो की (एषा जा) यह् उत्पत्ति (समा) एक-सदृश है । (ददामि) अतः मै देता ह

English

A prayer to Heaven and Earth for protection and assistance All hail to Heaven!

अध्याय 5

श्लोक 11.5

त्वं ह्य॑१ङ्ग व॑रुण स्वधाव॒न् विश्वा॒ वेत्थ॒ जनि॑म सुप्रणीते ।किं रज॑स ए॒ना प॒रो अ॒न्यद॑स्त्ये॒ना किं परे॒णाव॑रममुर

tvaṃ hya1ṅga varuṇa svadhāvan viśvā vettha janima supraṇīte | kiṃ rajasa enā paro anyadastyenā kiṃ pareṇāvaramamura

हिन्दी अर्थ

ओर वरुण में बन्धृता एक-सदुश है । अथर्वा वरुण का सखाहै ओर वरुण अथर्बाकासखादहै। सखित्वभावमें दोनों समान, एक-सदुश हैँ (मन्व €, १०) । इन दोनों की उत्पत्ति भी समा है, समान है, एक-सदश है । दोनों ,, हृदयवासी है, दोनों कौ स्वरूपाभिव्यक्ति हृदय में होती है । अथर्वा, वरुण को ¦ अभी तक वरूण ने नहीं दिया था अदत्त, जिसे कि वरुण ने अब अथर्वा , कोदेदियाहै ददामि इसप्रकार वरुणने निज सखित्व को सार्थक युज्यः=-अथवा इसका अभिप्राय है “नुता हुमा” । संसार-शकट के

English

All hail to Earth! All hail to Air!

अध्याय 5

श्लोक 11.6

एकं॒ रज॑स ए॒ना प॒रो अ॒न्यद॑स्त्ये॒ना प॒र एके॑न दु॒र्णशं॑ चिद॒र्वाक्।तत् ते॑ वि॒द्वान् वरु॑ण॒ प्र ब्र॑वीम्य॒धोव॑चसः प॒णयो॑ भवन्तु नी॒चैर्दा॒सा उप॑ सर्पन्तु॒ भूमि॑म्

ekaṃ rajasa enā paro anyadastyenā para ekena durṇaśaṃ cidarvāk| tat te vidvān varuṇa pra bravīmyadhovacasaḥ paṇayo bhavantu nīcairdāsā upa sarpantu bhūmim

हिन्दी अर्थ

वहन में वरूण ओर अथर्वा जीवात्मा साथ-साथ जते हृए है, वरुण कतु- रूपमे संसार का वहनकररहाहै, अथर्वा भोक्तुरूप मेँ । जीवात्माएेन । हों तो वरुण किसके लिए संसार को रचे भौर उसका वहन करे ? । देवो देवायं गृणते वयोधा विप्रो विप्राय स्तुवते समधा: । (देवः) वरुण-देव (गृणते) स्तुति करनेवाले (देवाय) अथर्वादेव के लिए (वयोधाः) तू अन्न धारण करता है, उसे बन्न प्रदान करताहै, (विप्रः) मेधावी वरुण (स्तुवते) स्तुति करनेवाले (विप्राय) मेधावी अथर्वा के लिए (सुमेधाः) उत्तम मेधावाला उत्तम विचार वाला हो जाताहै। , वरुण) है

English

All hail to Air! All hail to Heaven!

अध्याय 5

श्लोक 11.7

त्वं ह्य१ङ्ग व॑रुण॒ ब्रवी॑षि॒ पुन॑र्मघेष्वव॒द्यानि॒ भूरि॑ ।मो षु प॒णींर॒भ्ये॒३ताव॑तो भू॒न्मा त्वा॑ वोचन्नरा॒धसं॒ जना॑सः

tvaṃ hya1ṅga varuṇa bravīṣi punarmagheṣvavadyāni bhūri | mo ṣu paṇīṃrabhye3tāvato bhūnmā tvā vocannarādhasaṃ janāsaḥ

हिन्दी अर्थ

धन (कृणुहि) प्रदान कर, (सखा) मित्र (नः) हमारा (असि) तु है, (च) मौर (परमम् परमः, बन्धुः) परमबन्धू भो है । अथर्वा सम्भवतः वेदाविर्भाव कालम, अथववेद का ऋषि अथर्वा (अथवं १०।७।२०) मेँ भी अथर्ववेद के आविभवि का कर्ता मथर्वा अभिप्रेत प्रतीत होता है । अथर्वा है "निरुढवित्तवृ्तिक महायोगी”, अतः इसे उपयुक्त जानकर परमेश्वर ने इस द्वारा अथववेद प्रकट किया है । विप्रः मेधाविनाम होने से पितारहै। राधः कृणुहि अथर्ववेद के सुप्रशस्त ज्ञान रूपी धन का

English

All hail to Eartht! Mine eye is Sīirya and my breath is Vāta, Air is my soul and

अध्याय 5

श्लोक 11.8

मा मा॑ वोचन्नरा॒धसं॒ जना॑सः॒ पुन॑स्ते॒ पृश्निं॑ जरितर्ददामि ।स्तो॒त्रं मे॒ विश्व॒मा या॑हि॒ शची॑भिर॒न्तर्विश्वा॑सु॒ मानु॑षीषु दि॒क्षु

mā mā vocannarādhasaṃ janāsaḥ punaste pṛśniṃ jaritardadāmi | stotraṃ me viśvamā yāhi śacībhirantarviśvāsu mānuṣīṣu dikṣu

हिन्दी अर्थ

३. राधः घननाम (निघं० २।१०) । चार वेदों का आविर्भाव चार ऋषियों द्वारा हुआ समिद्धो अश्र मनुषो रोणे देवो देवान प॑जसि जातवेदः । (मनुषः) मनुष्य के (दुरोणे) हदय-गृह मँ (अद्य) आज (समिद्धः) उपासक-देवों को (यजसि) स्वरूप दशेन देता दहै । (आच वहु) उपासक

English

Prithivī my body. I verily who never have been conquered give up my life toe

अध्याय 5

श्लोक 11.9

आ ते॑ स्तोत्राण्युद्य॑तानि यन्त्व॒न्तर्विश्वा॑सु॒ मानु॑षीषु दि॒क्षु।दे॒हि नु मे॒ यन्मे॒ अद॑त्तो॒ असि॒ युज्यो॑ मे स॒प्तप॑दः॒ सखा॑सि

ā te stotrāṇyudyatāni yantvantarviśvāsu mānuṣīṣu dikṣu| dehi nu me yanme adatto asi yujyo me saptapadaḥ sakhāsi

हिन्दी अर्थ

देव, चेतन प्रतीत हो रहा है । इसलिए दुरोणे" का अथं "हृदय-गृह" किया है । परमेश्वर हदयवासी है ओर वहाँ ही वह प्रदीप्त होता है, “ज्योतिरूपः मे चमकता दहै । दूतः टुदु उपतापे (स्वादिः) काम आदिका उपतापी । घर को यज्ञणालामेदहीहोतारहै मौर दशन हूदय-गृहमे। कोन गिरने देनेवाले ! इस में शवित देनेवाले ! , (ऋतस्य पथः) सत्य सामवेद प्रकट हुमा । छन्दःपूतिके लिप ‹रवि' पद पठ्तिहै। यज्ञो के साथ तीन वेदों का सम्बन्ध मनु ने माना रहै, अतः अथर्ववेद का कथन नहीं किया । अथववेद में प्रायः सांसारिक व्यवहारो का वर्णन हुजा है । इसमे अथववेद मे कहा भी है । यथा,--

English

Heaven and Earth for keeping. Exalt my life, my strength, my deed and action; increase my understanding and my vigour.

अध्याय 5

श्लोक 11.10

स॒मा नौ॒ बन्धु॑र्वरुण स॒मा जा वेदा॒हं तद् यन्ना॑वे॒षा स॒मा जा।ददा॑मि॒ तद् यत् ते अद॑त्तो॒ अस्मि॒ युज्य॑स्ते स॒प्तप॑दः॒ सखा॑स्मि

samā nau bandhurvaruṇa samā jā vedāhaṃ tad yannāveṣā samā jā| dadāmi tad yat te adatto asmi yujyaste saptapadaḥ sakhāsmi

हिन्दी अर्थ

योगी वरुण से प्रार्थना करता है कि व्यवहारी बणिये भी तुमसे उच्चगति देना । धन को ही सर्वस्व जाननेवाले उच्चगति के अधिकारी नहीं। (ह्यङ्ग वरुण) है वरुण ! (त्वम् हि) तूही (पुनमेषेषु) पुनः-पूनः स्थिति (ब्रवीषि) कहता है, परन्तु (एतावतः पणीन्) इन पणियों के (मभि) प्रति (मो षु भर्) तु पूर्णरूप से कठोर नहीं हुमा है, ताकि (जनासः)

English

Exertions which that man hath made, Exertions which he yet will make Turn them, O Indra, back again, O Vritra-slayer, back again on him that they may kill that

अध्याय 5

श्लोक 11.11

दे॒वो दे॒वाय॑ गृण॒ते व॑यो॒धा विप्रो॒ विप्रा॑य स्तुव॒ते सु॑मे॒धाः ।अजी॑जनो॒ हि व॑रुण स्वधाव॒न्नथ॑र्वाणं पि॒तरं॑ दे॒वब॑न्धुम्।तस्मा॑ उ॒ राधः॑ कृणुहि सुप्रश॒स्तं सखा॑ नो असि पर॒मं च॒ बन्धुः॑

devo devāya gṛṇate vayodhā vipro viprāya stuvate sumedhāḥ | ajījano hi varuṇa svadhāvannatharvāṇaṃ pitaraṃ devabandhum| tasmā u rādhaḥ kṛṇuhi supraśastaṃ sakhā no asi paramaṃ ca bandhuḥ

हिन्दी अर्थ

'परात्-परः' कहा ह । वह परमदवर नीचे कौ भोर मी दर-सै-दूर तक व्याप्त है, है, बुद्धि द्वारा यह जाना नहीं जा सकता । वह दर-से-दूर टै, वह् समीप-से-समीप है । वह इस ब्रह्माण्ड के भीतर है जौर इसके बाहर मी है (यजुः० ४०।५) । । धन के लोलुप बार-बार निन्दनीय कर्मो कौ कर, निज स्वार्थके लिए धनसंग्रह करते रहते हैँ, अतः ये निन्दनीय कर्मोवले होतेह, तोभी तु इन्हे व्यापार में धन प्रदान करता रहता है, ताकिये तुद निधन न कहं

English

man. As Indra, having seized him, set his foot upon Udvāchana,

अध्याय 5

श्लोक 12.1

ऋतस्य यज्ञः।१-११ अङ्गिराः।जातवेदाः।त्रिष्टुप्, ३ पङ्क्तिः।समि॑द्धो अ॒द्य मनु॑षो दुरो॒णे दे॒वो दे॒वान् य॑जसि जातवेदः ।आ च॒ वह॑ मित्रमहश्चिकि॒त्वान्त्वं दू॒तः क॒विर॑सि॒ प्रचे॑ताः

ṛtasya yajñaḥ| 1-11 aṅgirāḥ| jātavedāḥ| triṣṭup, 3 paṅktiḥ| samiddho adya manuṣo duroṇe devo devān yajasi jātavedaḥ | ā ca vaha mitramahaścikitvāntvaṃ dūtaḥ kavirasi pracetāḥ

हिन्दी अर्थ

जिन्वसि ।॥ (अथवं० ११।५।१६) ! इस मन्त्र में अथवेवेदोपदिष्ट ओषधयो का. व्यावहारिक विषयों का निर्देश नहीं हुमा । दस वर्णन द्वारा यहं भी सूचित होता रहित यज्ञ का (कृणुहि) सम्पादन कर । (निघं० १।११) । मध्वा=माधर्यं के साथ । मधुर वाणी स्वादु होती है

English

Be ye my powerful keepers, watch and guard me, ye mistresses of life and life’s creators! Dwell ye within me, and forbear to harm me.

अध्याय 5

श्लोक 12.2

तनू॑नपात् प॒थ ऋ॒तस्य॒ याना॒न् मध्वा॑ सम॒ञ्जन्त्स्व॑दया सुजिह्व ।मन्मा॑नि धी॒भिरु॒त य॒ज्ञमृ॒न्धन् दे॑व॒त्रा च॑ कृणुह्यध्व॒रं नः

tanūnapāt patha ṛtasya yānān madhvā samañjantsvadayā sujihva | manmāni dhībhiruta yajñamṛndhan devatrā ca kṛṇuhyadhvaraṃ naḥ

हिन्दी अर्थ

(प्रदिशा) निर्देशानुसार (अस्याः) इस (पृथिव्याः) वेदि = भूमि के ओर उसका अग्रमाग करक (वितरं वरीयः) बहुत विस्तार में (व्यु प्रथते) विशेषतया फलाद जाती है, (देवेभ्यः) जो यजमान ऋत्विक् भादि देवों के भ ¦ मिध्ितवर्णं है जोकि नक्ताने धारण किया हु है। योनिः गृहनाम व्य । साथ-साथ दिन" का भी उपलक्षक है। उषा है दिन का प्रारम्भिक काल । ('

English

May he encounter it! Thou art my wall of stone against the sinner who fights against me from the western quarter.

अध्याय 5

श्लोक 12.3

आ॒जुह्वा॑न॒ ईड्यो॒ बन्द्य॒श्चा या॑ह्यग्ने॒ वसु॑भिः स॒जोषाः॑ ।त्वं दे॒वाना॑मसि यह्व॒ होता॒ स ए॑नान् यक्षीषि॒तो यजी॑यान्

ājuhvāna īḍyo bandyaścā yāhyagne vasubhiḥ sajoṣāḥ | tvaṃ devānāmasi yahva hotā sa enān yakṣīṣito yajīyān

हिन्दी अर्थ

(अदादिः) । ऋ तमी 'उपाके' पदसाथेक हो सकता है । उपाके = उपगते, परस्पर कौ समीपत (व्यचस्वतीः) विस्तारयुवत (पतिभ्यः) पतियों के लिए (जनयः इव ) लगाए जां । (बृहतीः) परिमाण मँ बड़े, (विशवमिन्वाः) विश्व अर्थात् सबके लिए आ-जा सकने योग्य (देवीः द्वारः) है दिव्य दरवाजो ! (देवेभ्यः) यजमान, ऋत्विक् आदि दिव्य पुरुषों के लिए (सुप्रायणाः) सुगमतासे प्रयाण तथा भायान के लिए (भवत) तुम होमो । ८।२।१०); यज्ञशाला या गृह् के दरवाजों का वर्णन हुजा दहै ।

English

May he encounter it! 58

अध्याय 5

श्लोक 12.4

प्रा॒चीनं॑ ब॒र्हिः प्र॒दिशा॑ पृथि॒व्या वस्तो॑र॒स्या वृ॑ज्यते॒ अग्रे॒ अह्ना॑म्।व्युऽप्रथते वित॒रं वरी॑यो दे॒वेभ्यो॒ अदि॑तये स्यो॒नम्

prācīnaṃ barhiḥ pradiśā pṛthivyā vastorasyā vṛjyate agre ahnām| vyu'prathate vitaraṃ varīyo devebhyo aditaye syonam

हिन्दी अर्थ

हेसती हुई, (यजते) अग्निहोत्ररूपी यज्ञसम्पादन करती हृरई, (उपाके) एक , दूसरे के साथ भिलकर गति करतौ हु्द (उषासानक्ते) उषा ओर रात्रि । (योनौ) आकाशरूपी गृह् में (नि सदताम्) स्थित हौं । (बृहती) महाकाय, . समाप्ति के होते ही उसके साथ दिन की उपगति हौ जाती है । देव्या होतारा पथमा सुवाचा मिमाना यत्नं मनुंपौ मजध्ये (विदथेषु) यज्ञो मे (कारू) यन्न करनेवाले दौ स्तोताओं (यजमान मौर करते हुए, (प्रचोदयन्तौ), प्रेरित कर रहे हैँ । 19

English

Thou art my wall of stone against the sinner who fights against me from northern quarter. May he encounter it!

अध्याय 5

श्लोक 12.5

व्यच॑स्वतीरुर्वि॒या वि श्र॑यन्तां॒ पति॑भ्यो॒ न जन॑यः॒ शुम्भ॑मानाः ।देवी॑र्द्वारो बृहतीर्विश्वमिन्वा दे॒वेभ्यो॑ भवत सुप्राय॒णाः

vyacasvatīrurviyā vi śrayantāṃ patibhyo na janayaḥ śumbhamānāḥ | devīrdvāro bṛhatīrviśvaminvā devebhyo bhavata suprāyaṇāḥ

हिन्दी अर्थ

ओौर रात्रि कालके देवताओं सूयं ओर चन्द्रमाका कथन हुआदह। यज्ञँ विषेष परिस्थितियों मे होता है, मानोये दो अग्निहोत्र ओौर दशं-पौण- २२० भथर्ववेदमाष्य काण्ड ५। अनु०° ३। सूक्त १२ मास के कालोंका निदेश करते हुए स्तोताओं को प्रेरित कर रहै हँ । विदथेषु न= विदथः यज्ञः(निघरं० ३।१७) । कारः स्तोत॒नाम (निघं० ३।१६) । ज्योतिः

English

Thou art my wall of stone against the sinner who fights against me from the stedfast region. May he encounter it!

अध्याय 5

श्लोक 12.6

आ सुष्वय॑न्ती यज॒ते उ॒पाके॑ उ॒षासा॒नक्ता॑ सदतां॒ नि योनौ॑ ।दि॒व्ये योष॑णे बृह॒ती सु॑रु॒क्मे अधि॒ श्रियं॑ शुक्र॒पिशं॒ दधा॑ने

ā suṣvayantī yajate upāke uṣāsānaktā sadatāṃ ni yonau | divye yoṣaṇe bṛhatī surukme adhi śriyaṃ śukrapiśaṃ dadhāne

हिन्दी अर्थ

(भारती) भरण-पोषण करनेवाले सूयं की प्रभा (नः यज्ञम्) हमारे देवीः) तीनों देविर्यां (इदम्, स्योनम्) इस सुखदायक (बहिः) कुशा पर सम्पादन होता है । आ सदन्ताम्--आङः षद पद्यथं (चुरादिः) । (यः) जिसने (जनित्री) प्राणियों कौ उत्पादिका (इमे द्यावापृथिवी) इन दयौः तथा पृथिवी को, (भुवनानि विश्वा विश्वानि) तथा सब भुवनो को, (रूपः) विविध रूपों द्वारा (अपिशत्) रूपित किया है, (तम्) उस

English

Thou art my wall of stone against the sinner who fights against Lme from the lofty region!

अध्याय 5

श्लोक 12.7

दैव्या॒ होता॑रा प्रथ॒मा सुवाचा॒ मिमा॑ना य॒ज्ञं मनु॑षो॒ यज॑ध्यै ।प्र॒चो॒दय॑न्ता वि॒दथे॑षु का॒रू प्रा॒चीनं॒ ज्योतिः॑ प्र॒दिशा॑ दि॒शन्ता॑

daivyā hotārā prathamā suvācā mimānā yajñaṃ manuṣo yajadhyai | pracodayantā vidatheṣu kārū prācīnaṃ jyotiḥ pradiśā diśantā

हिन्दी अर्थ

सु'कालोपन होकर उसकी विसर्गे हं छन्दसरूप । (होतः) है यज्ञ करनेवाले यजमान ! तू (इह) इस यज्ञ मेँ (यक्षि) पूज, उसका संग कर, तथा उसके प्रति आत्मसमपेण कर । कारीगर देव है परमेर्वर । निज रचे चिन्न मे यथोचित रूप भरना, कारीगर चिच्रकारदही कर सकता करता हभा उसे तथा (ऋतुथा) ऋत्वनुसार (हवीषि) यज्ञिय हवियों को (उपावसृज) तैयार कर । (वनस्पतिः) वनस्पति, (शमिता) पाचक तथा (देवः अग्निः) योतमान अग्नि (मधुना घतेन) मधुर घृत दारा (हव्यम्) वनस्पति से ईधन मिलता है, शमिता अर्थात् पाचकं शाक-भाजी कोकाटताहै ओर द्योतमान अग्नि हव्य को पकातीदहू। दस सूक्त के विनियोग में “कौशिकसूत्र ४५।१६' के अनुसारवशा गोकौ वपाकोचार

English

May he encounter it! Thou art my wall of stone against the sinner who from points intermediate fights against me.

अध्याय 5

श्लोक 12.8

आ नो॑ यज्ञं भार॑ती॒ तूय॑मे॒त्विडा॑ मनु॒ष्वदि॒ह चे॒तय॑न्ती ।ति॒स्रो दे॒वीर्ब॒र्हिरेदं स्यो॒नं सर॑स्वतीः॒ स्वप॑सः सदन्ताम्

ā no yajñaṃ bhāratī tūyametviḍā manuṣvadiha cetayantī | tisro devīrbarhiredaṃ syonaṃ sarasvatīḥ svapasaḥ sadantām

हिन्दी अर्थ

(निघं० २।१६) को दष्टिमे रखकर यहु श्रष्ट अधं कल्पित कया । शाक-भाजी काकाटनाभीतोउसकादामनकरतादहीदहै। २. हविः पद "पाथः तथा हवींषि दोनों का सूचक ह (मन्त्र १० । पाथः “अन्नमपि पाथः उच्यते, पानादेव"' (निरुक्त ६।२।९) , तथा (निरुक्त ८।३।१७ । हवि; पद ० आदि मानुष-देव, तथा वायु आदि दिन्य-तत््व (अदन्तु) भक्षण होतुः ह दाने (जुहोत्यादिः) । अभिनि “होता' है, दाता है अग्नि मँ "पायः" की आहूतियां देकर, यज्ञशेष का भक्षण ऋत्विक्, यजमान तथा पत्नी आदि करते, मानोअग्निने खानेके लिए उन यज्ञशेष दिया है ।

English

May he encounter it! With Brihat I invoke the mind, with Mātarisvan both the breaths,

अध्याय 5

श्लोक 12.9

य इ॒मे द्यावा॑पृथि॒वी जनि॑त्री रू॒पैरपिं॑श॒द् भुव॑नानि॒ विश्वा॑ ।तम॒द्य हो॑तरिषि॒तो यजी॑यान् दे॒वं त्वष्टा॑रमि॒हय॑क्षि वि॒द्वान्

ya ime dyāvāpṛthivī janitrī rūpairapiṃśad bhuvanāni viśvā | tamadya hotariṣito yajīyān devaṃ tvaṣṭāramihayakṣi vidvān

हिन्दी अर्थ

वायु आदि दिव्य-तत््वों कौ दियेहैं। वाचि. वेदमें वाक् ओर जिह्धा पद है, जिन्हें कि वाक् कहा, इन सात जिह्वाओं में आहृतियां दीजातीर्हँ (१-११) गरुत्मा । तक्षकः देवता । जगती; २ आस्तारपं कतिः; (दिवः कविः) दिव्यया द्युलोक के कवि (वरुणः) वरुण परमेइवर

English

The eye from Sūrya, and the ear from Air, the body from the Earth.

अध्याय 5

श्लोक 12.10

उ॒पाव॑सृज॒ त्मन्या॑ सम॒ञ्जन् दे॒वानां॒ पाथ॑ ऋतु॒था ह॒वींषि॑ ।वन॒स्पतिः॑ शमि॒ता दे॒वो अ॒ग्निः स्वद॑न्तु ह॒व्यं मधु॑ना घृ॒तेन॑

upāvasṛja tmanyā samañjan devānāṃ pātha ṛtuthā havīṃṣi | vanaspatiḥ śamitā devo agniḥ svadantu havyaṃ madhunā ghṛtena

हिन्दी अर्थ

तवं देवानामसि यह होता स एनान यक्षीषितो यजीयान ॥३॥ आहूति देता हुआ तू है, (ईडचः) स्तुति कै योग्य (च) ओर (वन्द्यः) मभि- साथ (जा याहि) आ, हममे प्रकटहौजा। (सजोषाः) तू उपासको के साथ देवों का (होता) आह्वान-कर्ता है । (सः) वहतु (एनान्) इन उपासको को (यक्षि) अपने-साथ संगत कर । (इषितः ) उपासकीं द्वारा प्रेरित हमा

English

A prayer to the presiding deities of the four quarters for protection Thou art my wall of stone against the sinner who fights against me from the eastern quarter.

अध्याय 5

श्लोक 12.11

स॒द्यो जा॒तो व्यऽमिमीत य॒ज्ञम॒ग्निर्दे॒वाना॑मभवत् पुरो॒गाः ।अ॒स्य होतुः॑ प्र॒शिष्यृ॒तस्य॑ वा॒चि स्वाहा॑कृतं ह॒विर॑दन्तु दे॒वाः

sadyo jāto vya'mimīta yajñamagnirdevānāmabhavat purogāḥ | asya hotuḥ praśiṣyṛtasya vāci svāhākṛtaṃ haviradantu devāḥ

हिन्दी अर्थ

परमेश्वर उपासक-देवों क पापों का दहन कर उन्हें पवित्र करता मौर पवित्र हुओं की आत्माओं मे निज की आहुति देता है । पवित्रं कौ जाता है । प्रकट हुभा परमेश्वर उपासको को 1 प्रदान करता, ओर उनके साथ प्रेम करताहै। एेसी अवस्थामें परमेश्वर स्वयं उपासको को निज समीप आहृत करता है भौर निज संगतिमेंले-लेता हैः मौर उनके उवासना-यज्ञों को सफल करता है । आजुह्वानः: जा ह+ रलः शानच् । सजोषाः. स । जुषी प्रीतिसेवनयोः (तुदादिः) । यक्षि यज हुई, प्रसन्नता से हसती हँ । उषा निज प्रकाणरूपी हास कर रही है, नक्ता . मानो रात्रि मे चमक्तेतारागणों के रूपमेहास कररहीदहै। उषाने मानो निज सिर पर सूर्यरूपी चमकता आभूषण धारण किया हुमा है, ओर नक्ता । ते चाँदरूपी आभूषण । उपा ने णक अर्थात् शुक्ल वणं धारण किया हुमा अन्धकार तथा ताराओं छौ शुध्र चमक भौर धन्बोंवाले चाँद कौ चमक

English

May he encounter it! Thou art my wall of stone against the sinner who fights against me from the southern quarter.

अध्याय 5

श्लोक 13.1

सर्पविषनाशनम्।१-११ गरुत्मान्।तक्षकः।जगती, २ आस्तारपङ्क्तिः, ४,७,८ अनुष्टप्, ५ त्रिष्टुप्, ६ पथ्यापङ्क्तिः. ९ भुरिक्, १०,११ निचृद्गायत्री।द॒दिर्हि मह्यं॒ वरु॑णो दि॒वः क॒विर्वचो॑भिरु॒ग्रैर्नि रि॑णामि ते वि॒षम्।खा॒तमखा॑तमु॒त स॒क्तम॑ग्रभ॒मिरे॑व॒ धन्व॒न् नि ज॑जास ते वि॒षम्

sarpaviṣanāśanam| 1-11 garutmān| takṣakaḥ| jagatī, 2 āstārapaṅktiḥ, 4,7,8 anuṣṭap, 5 triṣṭup, 6 pathyāpaṅktiḥ. 9 bhurik, 10,11 nicṛdgāyatrī| dadirhi mahyaṃ varuṇo divaḥ kavirvacobhirugrairni riṇāmi te viṣam| khātamakhātamuta saktamagrabhamireva dhanvan ni jajāsa te viṣam

हिन्दी अर्थ

मै नष्ट करता हूं । (खातम्) सपंके दिं द्वारा तेरामांस विदीणे होकर जो विष तेरी रक्तनाडियों मे गड गयादहै, चला गया, (अखातम्) जो गडा नहीं अपितु मांस में रह गया, (उत सक्तम्) तथाजो त्वचाको ही आ है, उस सबको (अग्रभम्) मेने पकड लियादहै, आगे नहीं बदुे दिया, (ते) तैरा (विषम्) विष (निजजास) नितरां मुक्तो गयाहै, चट दययलोक का रचयिता परमेश्वर कवि (यजु० ४०।८) । वरुणः (अथवं° को अपगत कर देनेवाला, सुखा देवाला (चिषम्) विषदहै, (ते तत्) तेरे उस विष को (एतासु) इन नादियों मेँ (अग्रभम्) मैने पकड लियारहै, के मध्यभाग तक, (उत) तथा (अवमम्) नीचैके भाग--टांगों तक फल जानेवाले (रसम्) विषरस को (गृह्णामि) मै पकड लेता हूं, (ते) तेरा विषरस (आत् उ) तदनन्तर (नेशत्) नष्ट हो जाए, (भियसा) जेसेकि व्यवितत भय के कारण नष्ट हो जातादहै।

English

We, with Sarasvati who suits the mind, call Speech to come to us. A dialogue between Atharvan and Varuna

अध्याय 5

श्लोक 13.2

यत् ते॒ अपो॑दकं वि॒षं तत् त॑ ए॒तास्व॑ग्रभम्।गृ॒ह्णामि॑ ते मध्य॒ममु॑त्त॒मं रस॑मु॒ताव॒मं भि॒यसा॑ नेश॒दादु॑ ते

yat te apodakaṃ viṣaṃ tat ta etāsvagrabham| gṛhṇāmi te madhyamamuttamaṃ rasamutāvamaṃ bhiyasā neśadādu te

हिन्दी अर्थ

(पर्ने) है नानावणेवाले, चिततकबरे , (कौरात) है कंरात!, । । 0 (उपतृण्य) है ज्ञाडिया मँ रहुनेवालि । (बभ्रो) है भूरे वर्णवाले ! (असिताः) तथा है काले सापो ! (मे) मेरे कथन को (जा शृणुत) सनौ, (अलीकाः) इस स्थानसे तुम सव निवारित ही जाओ । (मे) मेरे (सख्युः) सखा के अथवा विषप्रसार से निवृत्त हौ जाओ,

English

Now by what lore, by what inherent nature, knowest thou all things that exist, Atharvan? Truly I am profound in wisdom, truly I know by nature all existing creatures.

अध्याय 5

श्लोक 13.3

वृषा॑ मे॒ रवो॒ नभ॑सा॒ न त॑न्य॒तुरु॒ग्रेण॑ ते॒ वच॑सा बाध॒ आदु॑ ते ।अ॒हं तम॑स्य॒ नृभि॑रग्रभं॒ रसं॒ तम॑स इव॒ ज्योति॒रुदे॑तु॒ सूर्यः॑

vṛṣā me ravo nabhasā na tanyaturugreṇa te vacasā bādha ādu te | ahaṃ tamasya nṛbhiragrabhaṃ rasaṃ tamasa iva jyotirudetu sūryaḥ

हिन्दी अर्थ

आ्रस्यान निवासी के (असितस्य, काने सापके (च). ओर (अपोदकस्य) उदक के स्थानम रह्नेवाल क (वश्नोः) भूरे रंगवाले साप के, (सात्रासाहस्य) तथाः वस्तुतः काटने भ साहसवले सांपके, अवमुज्वामि) मै छृडा देता हं, (इव) जंसेकि को अदवों से विमुक्त कर दमा जाता ह । ३।१०), जोकि वास्तव में साहसपूवेक आक्रमण कर देता हे।

English

No Dāsa by his greatness, not an Arya, may violate the law that I will stablish.

अध्याय 5

श्लोक 13.4

चक्षु॑षा ते॒ चक्षु॑र्हन्मि वि॒षेण॑ हन्मि ते वि॒षम्।अहे॑ म्रि॒यस्व॒ मा जी॑वीः प्र॒त्यग॒भ्येऽतु त्वा वि॒षम्

cakṣuṣā te cakṣurhanmi viṣeṇa hanmi te viṣam| ahe mriyasva mā jīvīḥ pratyagabhye'tu tvā viṣam

हिन्दी अर्थ

विद व॑; सेतो बः्वस्साः कि करिष्यथ ॥७।। (आलिगी च) सर्वत्र गति करनेवाला चुस्त (पिता ) पितादहै, (च) हा (वः) तुम्हारा (बन्धू) जौ बन्धुसमूह है, (अरसा ) तुम वे सब विष- रससे रहित हो गयेहो, यह (विद्म) हम जानते है तुम अब (किम्) क्या (करिष्यथ) करोगे ? इनिठनौ, अष्टा०५।२।११५) । पिता पद पुंलिङ्गौ है, अतः आलिगी पदभी पुंलिद्धी ही होना चाहिए । विलिगी' पद स्त्रीलिद्धीदहै माता का विशेषण है । आलिगी, विलिगी आदि विषरहित सप ह, जिनका विष विषेला नहीं

English

None, self-dependent Varuna! existeth wiser than thou or sager by his wisdom. Thou knowest well all these created beings: even the man of wondrous powers fears thee.

अध्याय 5

श्लोक 13.5

कैरा॑त पृश्न॒ उप॑तृण्य॒ बभ्र॒ आ मे॑ शृणु॒तासि॑ता॒ अली॑काः ।मा मे॒ सख्युः॑ स्ता॒मान॒मपि॑ ष्ठाताश्रा॒वय॑न्तो॒ नि वि॒षे र॑मध्वम्

kairāta pṛśna upatṛṇya babhra ā me śṛṇutāsitā alīkāḥ | mā me sakhyuḥ stāmānamapi ṣṭhātāśrāvayanto ni viṣe ramadhvam

हिन्दी अर्थ

उरुगूलाया दुहिता जाता दास्यिकेन्या । की (दुहिता जाता) दुहिता उत्पन्न हुई है, जोकि (असिक्न्या) काली सपिणी की (दासी) दासीवत् परिचरिका या उपक्षयकारिणी हुई है। रस-रहित हृभा है, नीरस हो गया है, या सव गय है । विषके सूखजानेसे उसका प्रवेश सापि द्वारा शरीर मे नहीं होता । भथवा अरस-विषरहित । याः काए्चेमाः खैनित्िमास्तासामर सतं विषम् ॥९॥

English

O self-dependent Varuna, wise director, thou knowest verily all generations. What is, unerring one! beyond this region? What more remote than that which is most

अध्याय 5

श्लोक 13.6

अ॒सि॒तस्य॑ तैमा॒तस्य॑ ब॒भ्रोरपो॑दकस्य च ।सा॒त्रा॒सा॒हस्या॒हं म॒न्योरव॒ ज्यामि॑व॒ धन्व॑नो॒ वि मु॑ञ्चामि॒ रथाँ॑ इव

asitasya taimātasya babhrorapodakasya ca | sātrāsāhasyāhaṃ manyorava jyāmiva dhanvano vi muñcāmi rathā~ iva

हिन्दी अर्थ

२२६ अथववेदमाष्य काण्ड ५। अनु° २ । सूक्त १। (कर्णा) कानोवाली (रवावित्) सेही (गिरः) पवेत से ( चरन्तिका) नीचे विचरती हुई (तद् अत्रवीत्) वह बोलौ कि (याः काः च जो कोई (इना ) ये (खनित्रिमाः) खनियों मे रहनेवाली सपिणिर्यां है इवा वित् =इवाविध् ? कुत्तं को बीरंधनेवाली । सेही के शरीर परः काटि होते है । कुत्ता यदि सेही पर आक्रमण करताहै तो सेही काटिंद्वार उसे बंध देती है । मन्त्र का अभिप्राय अनुसंधेय है । (इवावरित्ः) जोकि आशु चलनेवाले मेघ को प्राप्तहै, (गिरेः) मेवसे (अवचरन्तिका।) नीचे भूमि कौ ओर गति करनेवाली वषरधिारा (तत् अश्रवीत् ) यह बोली कि (याः काः च दमाः) जौ कोई ये(खनित्रिमाः) खनियों मे रहनेवाली धपिणियां हैँ, (तासाम् ) उन सबका (विषम्) विष (अरसतमम्) अत्यन्त नीरस होता है! गिरेः -- गिरिः मेवनाम (निक्त १।१०) । भव =

English

distant? One thing there is beyond this air, and something beyond that one, most hard to reach,

अध्याय 5

श्लोक 13.7

आलि॑गी च॒ विलि॑गी च पि॒ता च॑ माता॒ च॑ ।वि॒द्म वः॑ स॒र्वतो॒ ब॑न्ध्वर॑साः॒ किं क॑रिष्यथ

āligī ca viligī ca pitā ca mātā ca | vidma vaḥ sarvato bandhvarasāḥ kiṃ kariṣyatha

हिन्दी अर्थ

भूमि की खनियों मे जल भर जाताहै ओर जलीय प्रदेशो मं रहनेवाली सपिणियों के विष नीरसप्रायहो जाते हैँ । यह अथं सृक्षावमात्रदहै। हे विषः (ताबृवम्) तु कर्म॑शवितप्रद तथा वृद्धिकारक है १. 'ष्दासपत्नीरहिगोपाः' (ऋ १।३२।११) मन्त्र में “अपां बिलमपिहितं यदासीषु अर्थात् दरार कै बन्द करने आर "तद्ववार" दारा उसके विवृत करने काकथनं

English

remotest. I, Varuna, who know, to thee declare it. Let churls be mighty in the lower regions. Let Dāsas

अध्याय 5

श्लोक 13.8

उ॒रु॒गूला॑या दुहि॒ता जा॒ता दा॒स्यसि॑क्न्या ।प्र॒तङ्कं॑ द॒द्रुषी॑णां॒ सर्वा॑सामर॒सं वि॒षम्

urugūlāyā duhitā jātā dāsyasiknyā | prataṅkaṃ dadruṣīṇāṃ sarvāsāmarasaṃ viṣam

हिन्दी अर्थ

वटनेवाले मेध मे ( वित्-विद्) विद्यमान वर्षाधारा का कथन हु है । मँ वर्णन हुआ है । ताबुवम् = तु" गतिव्द्धिहिसासु (अदादिः) + उ (ओणा- दिक, णित्) + वद्धि भौ" को आव्; व (मतुबथं)। वकार की बकार (सायण) । अलाबु है कड़वा तुम्बा । उसमे जल डालकर जव जल कडवा हो जाए, या कड्वे तूम्बेके रसको, पिलानेसे सम्भवतः विष अरसहो जाता हो । यह् परीक्षणीय रहै । अभिप्राय यह कि स्प॑का विष प्रशंसनीय नहीं है। यह घातक है । परन्तु स्पे-विष के, प्रशंसनीयरूप द्वारा, रोगजनित विष को नीरस

English

sink into the earth beneath them. Many reproaches, Varuna, dost thou utter against the misers. who revoke their presents.

अध्याय 5

श्लोक 13.9

क॒र्णा श्वा॒वित् तद॑ब्रवीद् गि॒रेर॑वचरन्ति॒का।याः काश्चे॒माः ख॑नि॒त्रिमा॒स्तासा॑मर॒सत॑मं वि॒ष॑म्

karṇā śvāvit tadabravīd gireravacarantikā| yāḥ kāścemāḥ khanitrimāstāsāmarasatamaṃ viṣam

हिन्दी अर्थ

रूप मे .सशक्त' करके, नाना रोगों दारा जन्य विषों का विनाशो सकता है । एतदर्थं देखो लेकेसिस 1.68 तथा क्रोटलस होराइडस (नवाण प्रणा१४ आदि सर्पविषों के प्रयोग । (मेटिरया मेंडिका, द्वारा २२८ अयर्वेवेदमाष्य काण्ड ५। अनु° ३। सक्त (सूकरः) सरअर ने (नसा) यूथनी हारा (त्वा) तुक्षे (अखनत्) खों । चाना चाहनेवाले को (दिप्स) नुकसान पहचान चाह भौर (कृत्याकृतम्). हिल-सेना संग्रह करनेवाले का (जदि) हनन कर । ॥ कती छेदने (तुदादिः; रुधादिः) । क्या कौ "पृतनाः' कहा है (मन्त्र ८), पृतनाः = नाना सेनां । मन्त्र मे ओषधि का नाम नहीं दिया, केवल यह दर्णाया है कि ओषधि करां भौर कंसे प्राप्त हो सकती है । गरुड ओर सूअबं के व्यवहारो के जाननेवाले ओषधि के विज्ञ हो सकते हैँ । ओषधि के उपचार द्वारा, सेनासंग्रह करनेवाले राचाका, हनन कहा है, ताकि उसके मर जानै

English

Be not thou added to that crowd of niggards: let not men call thee an illiberal giver. Let not men call me an illiberal giver. I give thee back the brindled cow, O singer.

अध्याय 5

श्लोक 13.10

ता॒बुवं॒ न ता॒बुवं॒ न घेत् त्वम॑सि ता॒बुव॑म्।ता॒बुवे॑नार॒सं वि॒षम्

tābuvaṃ na tābuvaṃ na ghet tvamasi tābuvam| tābuvenārasaṃ viṣam

हिन्दी अर्थ

(मे) मेरी (रवः) आवाज (वृषा) प्रबल है, मतः सुखवर्षौ है; (नभसा नभसः) मेघ से (तन्यतुः न) मेषगजेन के सदृश (उग्रेण वचसा) निज उग्रवचन द्वारा (ते) तेरे विषरस को (बाध) मेँ उसके फलने मे बाधा विषरस को (नृभिः) अन्य विषचिकित्सक मनुष्यों के सहयोग द्वारा (अग्रभम्) भने पकड़ लिया है, फलने नहीं दिया । (सूरयः) सूर्यं ज॑से (तमसः) रात्रि के अन्धकारसे उदितं होतादहै, वैसे विपजन्य मृछान्धकार से (हन्मि) मै हनन करता हूं, (विषेण) विष द्वारा (ते विषम्) तेरे विषका (हन्मि) मै हनन करता हूँ (अहे) है सपे ! (च्रियस्व) तूमरना, (मा १, अथवा तेरा विष उदक-रदित हो जाए, द्रवरूप न रहै ताकि काटते समयतू सूखे

English

How, terrible in might, hast thou here spoken to the great God, how to the gold-hued Father! Thy mind watched, greedy Varuna! to recover the brindled cow thou hadst bestowed as

अध्याय 5

श्लोक 13.11

त॒स्तुवं॒ न त॒स्तुवं॒ न घेत् त्वम॑सि त॒स्तुव॑म्।त॒स्तुवे॑नार॒सं वि॒षम्

tastuvaṃ na tastuvaṃ na ghet tvamasi tastuvam| tastuvenārasaṃ viṣam

हिन्दी अर्थ

विष कासंचारन कर सके । अपोदकम् = ५2161168. (-ह्िटनी) । २२४ अथर्वेवेदभाष्य काण्ड ५ अनु० ३। सूक्त ११ मे डाली गई दृष्टि सांपको कू काल तक अन्धा कर देती है, तब सप देख नहीं सकता ओर मार दिया जाता है । मन्त्र में ८4010 18८" क्रिया अभिघ्राय है । ण्णभातका अभिप्राय है अपने विष द्वारा अपने विष ॥

English

guerdon. Not through desire do I revoke my present: I bring this brind- led cow to contemplate her.

स्रोत: bhavykhatri/DharmicData · प्राप्त 3/6/2026

शास्त्रीय प्रामाणिकता एवं पारदर्शकताSources & Interpretation

स्रोत, संस्करण एवं व्याख्या वर्गीकरण

धर्म ग्रंथ पर मूल शास्त्र, पारंपरिक भाष्य और आधुनिक व्याख्या को पूर्णतः पृथक रखा जाता है ताकि पाठक को किसी भी व्याख्या के शास्त्र होने का भ्रम न हो।

सामग्री वर्गीकरण संकेत (Epistemic Content Labels)

6 स्तरिय प्रमाण व्यवस्था
मूल पाठOriginal text

अपौरुषेय / प्रामाणिक शास्त्र (Primary Canonical Scripture)

मूल संस्कृत, प्राकृत अथवा अवधी श्लोक/मंत्र। यह सर्वोच्च प्रमाण (प्रस्थान) है। इस पाठ में किसी भी आधुनिक व्याख्याकार का हस्तक्षेप नहीं है।

शाब्दिक अनुवादLiteral translation

पदार्थ व अन्वय (Direct Grammatical & Word-for-Word Meaning)

व्याकरणसम्मत प्रत्यक्ष शब्दार्थ (अन्वय)। बिना किसी दार्शनिक संप्रदाय के पूर्वाग्रह के, संस्कृत शब्दों का सटीक भाषांतर।

पारंपरिक भाष्यTraditional commentary

आचार्य परंपरा व टीका (Classical Lineage Commentary)

प्राचीन आचार्य परंपरा (यथा शंकराचार्य, रामानुजाचार्य, मध्वाचार्य, श्रीधर स्वामी) द्वारा विरचित शास्त्रीय भाष्य व टीकाएं।

सरल व्याख्याSimple explanation

भावार्थ व सुबोध प्रबोधन (Accessible Pedagogical Exposition)

आधुनिक जिज्ञासुओं के लिए सरल भाषा में भावार्थ। यह मूल मंत्र नहीं, बल्कि पाठ को सुगम बनाने हेतु संपादकीय व्याख्या है।

आधुनिक चिंतनModern reflection

समसामयिक विमर्श व अनुप्रयोग (Contemporary Application & Analysis)

दार्शनिक, मनोवैज्ञानिक व वैज्ञानिक समरूपताओं पर आधुनिक चिंतन। यह मूल शास्त्र का अंग नहीं है और इसे शास्त्रोक्त सिद्धांत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

शोध टिप्पणीResearch note

पांडुलिपि एवं ऐतिहासिक शोध (Critical Apparatus & Manuscript Research)

पांडुलिपि विविधताएं, पाठ-भेद (variant readings), छंद रचना, और ऐतिहासिक व तुलनात्मक भाषावैज्ञानिक शोध। यह शास्त्र का मूल संदेश बदलने हेतु नहीं, बल्कि पाठ की प्रामाणिकता परखने के लिए है।