Atharva Veda
4
अध्याय 4 / 20

Kanda 4

काण्ड 4

331 श्लोकभाग 5/6 · श्लोक 30.1–37.12

पूर्ण अध्याय पाठ67 श्लोक

अध्याय 4

श्लोक 30.1

राष्ट्रदेवी ।१- ८ अथर्वा।सर्वरूपा सर्वात्मिका सर्वदेवमयी वाक्।त्रिष्टुप्, ६ जगती।अ॒हं रु॒द्रेभि॒र्वसु॑भिश्चराम्य॒हमा॑दि॒त्यैरु॒त वि॒श्वदे॑वैः ।अ॒हं मि॒त्रावरु॑णो॒भा बि॑भर्म्य॒हमि॑न्द्रा॒ग्नी अ॒हम॒श्विनो॒भा

rāṣṭradevī | 1- 8 atharvā| sarvarūpā sarvātmikā sarvadevamayī vāk| triṣṭup, 6 jagatī| ahaṃ rudrebhirvasubhiścarāmyahamādityairuta viśvadevaiḥ | ahaṃ mitrāvaruṇobhā bibharmyahamindrāgnī ahamaśvinobhā

हिन्दी अर्थ

क्रोध ! (क्त्वो सह) निज कमं के साथ, (नः) हमारा (मेदी) स्नेह करने- वाला (एधि) तरु हो जा, (पुरुहृत) है बहुत सैनिकों द्वारा आहृत ! (महा- धनस्य ) जिसमे महाधन कौ उपलब्धि होती है उस संग्राम के (संसृजि) सजंन मे, अर्थात् उसकी उपस्थिति हो जाने पर । सायक सायः अन्तकारी कर्म॑, “षो” अन्तकमंणि (दिवादिः ) क मन्व ६, (समाकृतम्) तथा उसके राष्ट मे पूवेतः एकत्रित किया धन, (उभयम्) यह द्विविध धन, (वरुणः च मन्युः) वरुण राजा जोर बोधयुक्त प्रदान कर दे; (पराजितासः, शत्रवः) पराजित हुए शत्रू ( हृदयेषु) हदयो मे (भिथः) भयो को (दधानाः) धारण करते हूए (अप ) संग्रामभूमि से अपगत होकर (निलयन्ताम्) निलीन हो जाए, छप जाए । त युद्ध में प्राप्त धन प्रजाजनों में बाट देना चाहिए, या राजकोष में जमा करना चाहिए । वरुणः = प्रजा द्वारा वरा हुजा, चुना हृ, रष्टरका

English

I load with wealth the zealous sacrificer who pours the juice and offers his oblation. On the world’s summit I bring forth the Father: my home is in the waters, in the ocean.

अध्याय 4

श्लोक 30.2

अ॒हं राष्ट्री॑ सं॒गम॑नी॒ वसू॑नां चिकि॒तुषी॑ प्रथ॒मा य॒ज्ञिया॑नाम्।तां मा॑ दे॒वा व्य॑दधुः पुरु॒त्रा भूरि॑स्थात्रां॒ भूर्या॑वे॒शय॑न्तः

ahaṃ rāṣṭrī saṃgamanī vasūnāṃ cikituṣī prathamā yajñiyānām| tāṃ mā devā vyadadhuḥ purutrā bhūristhātrāṃ bhūryāveśayantaḥ

हिन्दी अर्थ

(मन्यो) है बोधयुक्त क्रोध 1 (यः) जो पुरूष (ते) तेरी (अविधत्) सेवा करता है (वचर ! सायक ) है वरूप ! तथा शत्नुओं के लिए (ओजः) ओज को (आनुषक्) निरन्तर (पुष्यति) परिपृष्ट करता है । हम (दासम्, आर्य॑म्) दास ओर आयं का (साह्याम) पराभव करे ।

English

Thence I extend o’er all existing creatures, and touch even yonder heaven with my forehead. 48 I breathe a strong breath like the wind and tempest, the while I hold together all existence.

अध्याय 4

श्लोक 30.3

अ॒हमे॒व स्व॒यमि॒दं व॑दामि॒ जुष्टं॑ दे॒वाना॑मुत मानु॑षाणाम्।यं का॒मये॒ तन्त॑मु॒ग्रं कृ॑णोमि॒ तं ब्र॒ह्माणं॒ तमृषिं॒ तं सु॑मे॒धाम्

ahameva svayamidaṃ vadāmi juṣṭaṃ devānāmuta mānuṣāṇām| yaṃ kāmaye tantamugraṃ kṛṇomi taṃ brahmāṇaṃ tamṛṣiṃ taṃ sumedhām

हिन्दी अर्थ

आक्रमण करताहै, यहु जानकर कि अमूक आयं राजा मेरे राष्ट्को हथियाना चाहता है । अविधत् = विधेम परिचरणकर्मा (निषं° ३।५) । ही स्तुति करती है, उसका गुणगान करती है, (तपसा) ताप अर्थात् जोश २।१०) । तथा जातवेदाः == “जातवित्तौ वा जातधनः । जातविचो वा जातप्रजञानः" १२४ अथवैवेदभाष्य कं्डं ४। अनु° ७ । सूक्तं ३२ , के साथ (सजोषाः) प्रीतिवाले (मन्यो) है मन्यु ! (नः पाहि) हमारी पालना

English

Beyond this wide earth and beyond the heavens I have become so mighty in my grandeur. A hymn to Manyu or Wrath

अध्याय 4

श्लोक 30.4

मया॒ सोऽन्न॑मत्ति॒ यो वि॒पश्य॑ति॒ यः प्रा॒णति॒ य ईं शृ॒णोत्यु॒क्तम्।अ॒म॒न्तवो॒ मां त उप॑ क्षियन्ति श्रु॒धि श्रु॑त श्रु॒द्धेयं॑ ते वदामि

mayā so'nnamatti yo vipaśyati yaḥ prāṇati ya īṃ śṛṇotyuktam| amantavo māṃ ta upa kṣiyanti śrudhi śruta śruddheyaṃ te vadāmi

हिन्दी अर्थ

होता देवानाम् बाह्लाता अग्निः। सजोषाः ==जुषी प्रीतिसेवनयोः सूचित किया है । सैनिकों ओर अधिकारियों के मनं में यदि मन्यु की उग्रता न होतो युद्धम सफलता नहीं हो सकती । इस प्रकार युद्धमें मन्युहो (मन्यो) है मन्यु ! (अभीहि) अभिमुख जा; (तवस तवीयान्) तू

English

Borne on with thee, O Manyu girt by Maruts, let our brave men, impetuous, bursting forward, March on, like flames of fire in form, exulting, with pointed arrows, sharpening their weapons.

अध्याय 4

श्लोक 30.5

अ॒हं रु॒द्राय॒ धनु॒रा त॑नोमि ब्रह्म॒द्विषे॒ शर॑वे॒ हन्त॒वा उ॑ ।अ॒हं जना॑य स॒मदं॑ कृणोम्य॒हं॑ द्यावा॑पृथि॒वी आ वि॑वेश

ahaṃ rudrāya dhanurā tanomi brahmadviṣe śarave hantavā u | ahaṃ janāya samadaṃ kṛṇomyahaṃ dyāvāpṛthivī ā viveśa

हिन्दी अर्थ

रूपी सहयोगी के साथ (शत्रून् वि जहि) शत्रुओं का त विह्नन कर, विनाश कर; (अमित्रहा) अमित्रो का हनन करनेवाला, (वृत्रहा) हमारे राष्ट पर घेरा डालनेवाले का हनन करनेवाला (च दस्युहा) ओर उपक्षयकारी का हनन करनेवालातू है, (विश्वा वसूनि) शत्रुके सब्र धनों का (आभर) आहरण कर (त्वम्) तू (नः) हमारे लिए । रूप मन्यु को विजेता कहा है । युद्ध में इन्द्रादि का अपलाप किया है, निरसन किया है । इस प्रकार युद्ध में मन्यु को प्रधानता दी है। तवसः= करोधरूप, (अभिमातिषाहः) अभिमानियों का पराभव करनेवाला; (विर्व- को सहनेवाला, (सहीयान्) अति सहनशील है, (अस्मासु) हम अधिकारियों

English

Flashing like fire, be thou, O conquering Manyu, invoked, O victor, as our army’s leader. Slay thou our foes, distribute their possession: show forth thy vigour, scatter those who hate

अध्याय 4

श्लोक 30.6

अ॒हं सोम॑माह॒नसं॑ बिभर्म्य॒हं त्वष्टा॑रमु॒त पू॒षणं॒ भग॑म्।अ॒हं द॑धामि॒ द्रवि॑णा ह॒विष्म॑ते सुप्रा॒व्या॒३ यज॑मानाय सुन्व॒ते

ahaṃ somamāhanasaṃ bibharmyahaṃ tvaṣṭāramuta pūṣaṇaṃ bhagam| ahaṃ dadhāmi draviṇā haviṣmate suprāvyā3 yajamānāya sunvate

हिन्दी अर्थ

या प्रजाजनाों में, तथा (पृतनासु) हमारी सेनाभों में (भोजः) ओज (धेहि) चुरादिः) । विश्वचर्षणिः = “चषेणयः मनुष्यनाम'' (निघं० ३।३), विश्वे (तुदादिः); यह् वह् शक्ति है जिसे जानकर शतु ऋजुमागगामी होकर आक्रमण का साहस नहीं करता । ऋजुमागं सत्यमागं होता है “तयोयत् सत्यं

English

us. O Manyu, overcome those who assail us. On! breaking, slaying, crushing down the foemen. They have not hindered thine impetuous vigour: mighty! sole born! reduce them to

अध्याय 4

श्लोक 30.7

अ॒हं सु॑वे पि॒तर॑मस्य मू॒र्धन् मम॒ योनि॑र॒प्स्व॑१न्तः स॑मु॒द्रे।ततो॒ वि ति॑ष्ठे॒ भुव॑नानि॒ विश्वो॒तामूं द्यां व॒र्ष्मणोप॑ स्पृशामि

ahaṃ suve pitaramasya mūrdhan mama yonirapsva1ntaḥ samudre| tato vi tiṣṭhe bhuvanāni viśvotāmūṃ dyāṃ varṣmaṇopa spṛśāmi

हिन्दी अर्थ

बनाने के लिए मन्यु का प्रयोग करना चाहिए, स्वाथसाधन के लिए नहीं । कारक के (क्रत्वा)कममं से (अभागः सन् = भागरहितः सन्) भागरहित (अप) युद्ध से अपगत होकर (परेतः) परागत (अस्मि) म हआ हु; (मन्यो) (जिहीड) कद्ध या अनादृत किया है, (बलदावा) तु बलदाताहै, (स्वा तनूः) तेरी अपनी तन्, तेरा जो निज स्वरूप है (नः एदि) उस निजस्वरूप मे अचेतन हमा राष्टरवल्चित हौ जाता है । परेतः ==परागतः, पराजितः।

English

subjection. Alone of many thou art worshipped, Manyu: sharpen the spirit of each clan for combat.

अध्याय 4

श्लोक 30.8

अ॒हमे॒व वात॑ इव॒ प्र वा॑म्या॒रभ॑माणा॒ भुव॑नानि॒ विश्वा॑ ।प॒रो दि॒वा प॒र ए॒ना पृ॑थि॒व्यौताव॑ती महि॒म्ना सं ब॑भूव

ahameva vāta iva pra vāmyārabhamāṇā bhuvanāni viśvā | paro divā para enā pṛthivyautāvatī mahimnā saṃ babhūva

हिन्दी अर्थ

क्ध्यतिकर्मा (निषं ० २।१३; २।१२); हेड अनादरे (भ्वादिः) । बलदावा = (सहुरे) है सहनशील या पराभवकारी (विङवदावन्) तथा हे कृतियों को जाननेवाला, या जनानेवाला । अचेतन मन्यु को चेतनासम्पन्न मानकर

English

With thee to aid, O thou of perfect splendour, we raise the glorious battle-shout for conquest. Unyielding, bringing victory like Indra, O Manyu be thou here our sovran ruler. To thy dear name. O victor, we sing praises: we know the spring from which thou art come

अध्याय 4

श्लोक 31.1

सेनानिरीक्षणम्।१-७ ब्रह्म स्कन्दः।मन्युः।त्रिष्टुप्, २, ४ भुरिक्, ५-७ जगती।त्वया॑ मन्यो स॒रथ॑मारु॒जन्तो हर्ष॑माणा हृषि॒तासो॑ मरुत्वन्।ति॒ग्मेष॑व॒ आयु॑धा सं॒शिशा॑ना॒ उप॒ प्र य॑न्तु॒ नरो॑ अ॒ग्निरू॑पाः

senānirīkṣaṇam| 1-7 brahma skandaḥ| manyuḥ| triṣṭup, 2, 4 bhurik, 5-7 jagatī| tvayā manyo sarathamārujanto harṣamāṇā hṛṣitāso marutvan| tigmeṣava āyudhā saṃśiśānā upa pra yantu naro agnirūpāḥ

हिन्दी अर्थ

१२६ अथवेवेदभाष्य काण्ड ४। अनु० ७ । सूक्त ३३ । ओर हु (नः उप) हमारे समीप (एहि) आया कर; (विन्) है शतर- । वजेक आयुध याबलको धारण करनेवाले (मन्यो) मन्यु ! (नः अभि) हमारे अभिमुख (आववृत्स्व) लौट आया कर, (दस्यून् हनाव) ताकि हम दोनों मिलकर भविष्यमेंभी उपक्षयकारियों का हनन कर पा (उत) । ।

English

hither. Twin-borne with power, destructive bolt of thunder the highest conquering might is thine,

अध्याय 4

श्लोक 31.2

अ॒ग्निरि॑व मन्यो त्विषि॒तः स॑हस्व सेना॒नीर्नः॑ सहुरे हू॒त ए॑धि ।ह॒त्वाय॒ शत्रू॒न् वि भ॑जस्व॒ वेद॒ ओजो॒ मिमा॑नो॒ वि मृधो॑ नुदस्व

agniriva manyo tviṣitaḥ sahasva senānīrnaḥ sahure hūta edhi | hatvāya śatrūn vi bhajasva veda ojo mimāno vi mṛdho nudasva

हिन्दी अर्थ

अपना जान म तेरा अपना हूं, यह् जान ।'' है मन्यु ! (अभिप्रेहि) हमारे अभिमुख गमन कर, आ, (नः) (वृत्राणि) राष्ट का आवरण करनेवाले, घेरा डालनेवाने शन्रूमो का (जद्धनाव) हम दोनों हनन करे; (ते) है मन्यु तेरे लिए (धरुणम् ) पोषक,

English

subduer! Be friendly to us in thy spirit, Manyu! O much-invoked, in shock of mighty battle! For spoil let Varuna and Manyu give us the wealth of both sides gathered and collected;

अध्याय 4

श्लोक 31.3

सह॑स्व मन्यो अ॒भिमा॑तिम॒स्मै रु॒जन् मृ॒णन् प्र॑मृ॒णन् प्रेहि॒ शत्रू॑न्।उ॒ग्रं ते॒ पाजो॑ न॒न्वा रु॑रुध्रे व॒शी वशं॑ नयासा एकज॒ त्वम्

sahasva manyo abhimātimasmai rujan mṛṇan pramṛṇan prehi śatrūn| ugraṃ te pājo nanvā rurudhre vaśī vaśaṃ nayāsā ekaja tvam

हिन्दी अर्थ

(पिबाव) सोमपान करें । दक्षिणतः युद्ध मेँ दाहिना हाथ कार्यकारी होता है मन्यु को सेनापति ने अपना दाहिना हाथ माना है। मान्य व्यक्ति को दाहिनी ओर रखना, यह शिष्टाचार भी है--यह भी उपदिष्ट किया है। युद्ध से पूवं सोमरस का सेवन करना ओर शुभकार्यारम्भ में यज्ञ करना, इसकी सूचना (अप शोशुचत्) तेरी कृपा से अपगत हो जाय, ओर तैरी शोचि हमे पवित्र पापरहित मागे द्वारा रयि का उपार्जन करना उसकी पवित्रता है । णोशुचत् पूजन, सत्संग, तथा उसके प्रति दान या आत्मसमर्पण करते है, ताकि (अघम्, अप) पाप को अपगत करके (नः शोशुचत्) तुञ्च अग्नि कौ शोचि

English

And let our enemies with stricken spirits, o’er-whelmed with. terror, sling away defeated. A hymn to Manyu

अध्याय 4

श्लोक 31.4

एको॑ बहू॒नाम॑सि मन्य ईडि॒ता विशं॑विशं यु॒द्धाय॒ सं शि॑शाधि ।अकृ॑त्तरु॒क् त्वया॑ यु॒जा व॒यं द्यु॒मन्तं॒ घोषं॑ विज॒याय॑ कृण्मसि

eko bahūnāmasi manya īḍitā viśaṃviśaṃ yuddhāya saṃ śiśādhi | akṛttaruk tvayā yujā vayaṃ dyumantaṃ ghoṣaṃ vijayāya kṛṇmasi

हिन्दी अर्थ

क्षेत्र है शरी र-“इदं शरीरं कौन्तेय ्षेमित्यभिधीयते ( गीता १३।१ / ॥ शरीर में कर्म-बीज बोये जाते है, अतः शरीरक्षेत्र है। इसमें उत्तम कम- बीज बोये जाने चाह, तब यह शरीरक्षेत्र क्षेत्र होतादहै। यजामहै = शरीर द्वारा परमेशवर का यजन करना चाहिए । भर यदू मन्दिष्ट एषां भरास्माकासश्च सुरयः।

English

He who hath reverenced thee, Manyu, destructive bolt! breeds. for himself forthwith all conquering energy. Arya and Dāsa will we conquer with thine aid, with thee the conqueror, with conquest

अध्याय 4

श्लोक 31.5

वि॒जे॒ष॒कृदिन्द्र॑ इवानवब्र॒वो॒३ऽस्माकं॑ मन्यो अधि॒पा भ॑वे॒ह।प्रि॒यं ते॒ नाम॑ सहुरे गृणीमसि वि॒द्मा तमुत्सं॒ यत॑ आब॒भूथ॑

vijeṣakṛdindra ivānavabravo3'smākaṃ manyo adhipā bhaveha| priyaṃ te nāma sahure gṛṇīmasi vidmā tamutsaṃ yata ābabhūtha

हिन्दी अर्थ

प्रकृष्ट है, इसलिए (अघम्) पाप को (अप) ५४० करके (नः शोशुचत्) मक अग्नि की शोचियातु अग्नि-परमेश्वर हमे पवित्र करता है । । होना चादिए, ओौर समाज के प्रेरक विद्वानों को भी कत्याणमार्गी होना चाहिए, तब हम सबको परमेदवर पवित्र कर टै । परमेरवर अग्निहै, अग्निवत् दाहक गुणवाला है । वहं हम सके पापों को दग्ध कर हमें पवित्र कर देता है । भन्दिष्ठः= भदि कल्याणे सुखे च (भ्वादिः) । सूरयः = । प्रजाजन भी कल्याणमार्गी हो जाते है । (ते) तेरी प्रजा बन जते हैँ तव (अप नः शोशुचत् अघम्) पाप को अपगत करके तुक्च अग्निक णौचियातु अग्नि-परमेशवर हमें पवित्र करता है ।

English

conquest-sped. Manyu was Indra, yea, the God was Manyu; Manyu was Hotar

अध्याय 4

श्लोक 31.6

आभू॑त्या सह॒जा व॑ज्र सायक॒ सहो॑ बिभर्षि सहभूत॒ उत्त॑रम्।क्रत्वा॑ नो मन्यो स॒ह मे॒द्येऽधि महाध॒नस्य पुरुहूत सं॒सृजि॑

ābhūtyā sahajā vajra sāyaka saho bibharṣi sahabhūta uttaram| kratvā no manyo saha medye'dhi mahādhanasya puruhūta saṃsṛji

हिन्दी अर्थ

निज स्वामी या राजा मानकर, उसकी प्रेरणानुसार जीवनचर्या करते है, तव वस्तुतः परमेडव राग्नि उनके अघो को दश्ध कर उनको पवित्र कर देता है, अतः (अपन शोशुचत् अघम्) परमेर्वरागिनि पापों को अपगत करके, दग्ध करके, उसकी शोचि या स्वयं परमेर्वरागनि हमें पवित्र कर देती है । को जानकर, कहीं भी पाप नहीं करता, ओर पापसे अपगत होकर पवित्र

English

Varuna, Jātavedas. The tribes of human lineage worship Manyu. Accordant, with thy fervour, Manyu! guard us. Come hither, Manyu, mightier than the mighty: smite, with thy fervour, for ally, our foemen.

अध्याय 4

श्लोक 31.7

संसृ॑ष्टं धन॑मु॒भयं॑ स॒माकृ॑तम॒स्मभ्यं॑ धत्तां॒ वरु॑णश्च म॒न्युः ।भियो॒ दधा॑ना॒ हॄदये॑षु॒ शत्र॑वः॒ परा॑जितासो अप॒ नि ल॑यन्ताम्

saṃsṛṣṭaṃ dhanamubhayaṃ samākṛtamasmabhyaṃ dhattāṃ varuṇaśca manyuḥ | bhiyo dadhānā hṝdayeṣu śatravaḥ parājitāso apa ni layantām

हिन्दी अर्थ

(विश्वतोमूख) है सब मुखोंवाले परमेव राग्नि ! (त्वम्) तू करके, उसकी शोचि या परमेदवराग्नि हमें पविध्र कर देती है । परमेरवर विदवतोमुख है, परमेश्वर की सत्ता को पवित्र जानकर, उसकी प्रत्येक रचना द्वारा उपासक, उसके सदपदेशों को मानो सुनता है, अतः प्रत्येक रचना को मूख कहा है । इन सदुपदेशों को सुननेवालों के पाप दग्ध हो जाते है, भौर वे पवित्र हो जाते हँ। परिभूः =परि+भ सत्तायाम् अथरवेवेदभाष्य काण्ड ४। अनु° ७ । सूक्त ३३

English

Slayer of foes, of Vritra, and of Dasyu, bring thou to us all kinds of wealth and treasure. For thou art, Manyu, of surpassing vigour, fierce, queller of the foe, and self-existent,

अध्याय 4

श्लोक 32.1

सेनासंयोजनम्।१-७ ब्रह्म स्कन्दः।मन्युः।त्रिष्टुप्, १ जगती।यस्ते॑ म॒न्योऽवि॑धद् वज्र सायक॒ सह॒ ओजः॒ पुष्य॑ति॒ विश्व॑मानु॒षक्।सा॒ह्याम॒ दास॒मार्यं॒ त्वया॑ यु॒जा व॒यं सह॑स्कृतेन॒ सह॑सा॒ सह॑स्वता

senāsaṃyojanam| 1-7 brahma skandaḥ| manyuḥ| triṣṭup, 1 jagatī| yaste manyo'vidhad vajra sāyaka saha ojaḥ puṣyati viśvamānuṣak| sāhyāma dāsamāryaṃ tvayā yujā vayaṃ sahaskṛtena sahasā sahasvatā

हिन्दी अर्थ

(विश्वतोमुख) है सव्र ओर मुखोवालि परमेर्वराग्नि ! (नः) हमें (द्विषः) देष-नद से अति (पारय) पार कर, (नावा इव ) जसेकि नौका द्रारा नदीयासमृद्रको पार कियाजातादहै। (जपनः शोशुचत् अघम्) के करनेसे छट जाताहै, ओर पवित्र विचारोंवाला हो जाता है । एतदयं (सः) वह तू है पस्मेरवराग्नि (नः) हमे (नावा) नौका द्वारा

English

Shared by all men, victorious, subduer: vouchsafe to us superior strength in battles. I have departed still without a portion, wise God! according to thy will, the mighty. I, feeble man, was wroth with thee, O Manyu. Come in thy proper form and give us vigour.

अध्याय 4

श्लोक 32.2

म॒न्युरिन्द्रो॑ म॒न्युरे॒वास॑ दे॒वो म॒न्युर्होता॒ वरु॑णो जा॒तवे॑दाः ।म॒न्युर्विश॑ ईडते॒ मानु॑षी॒र्याः पा॒हि नो॑ मन्यो॒ तप॑सा स॒जोषाः॑

manyurindro manyurevāsa devo manyurhotā varuṇo jātavedāḥ | manyurviśa īḍate mānuṣīryāḥ pāhi no manyo tapasā sajoṣāḥ

हिन्दी अर्थ

पष लेट् लकार, सिप् । “सिव् बहुलं लेटि (अष्टा० ३।१।३४)। वननीय या सुन्दरस्वरूप परमेश्वर का वणेन करनेवाला सामवेद, (पक्षौ ) से (जातः) प्रादुर्भूत हुआ है, या होता है। वाली है, अतः यह परिमाण में बडे ऋग्वेदरूपा है । ऋग्वेद ज्ञानप्रधान वेद

English

Come hither, I am all thine own: advancing, turn thou to me, victorious, all-bestowing. Come to me, Manyu, wielder of the thunder: bethink thee of thy friend, and slay the Dasyus.

अध्याय 4

श्लोक 32.3

अ॒भीऽहि मन्यो त॒वस॒स्तवी॑या॒न् तप॑सा यु॒जा वि ज॑हि॒ शत्रू॑न्।अ॒मि॒त्र॒हा वृ॑त्र॒हा द॑स्यु॒हा च॒ विश्वा॒ वसू॒न्या भ॑रा॒ त्वं नः॑

abhī'hi manyo tavasastavīyān tapasā yujā vi jahi śatrūn| amitrahā vṛtrahā dasyuhā ca viśvā vasūnyā bharā tvaṃ naḥ

हिन्दी अर्थ

गृहस्थी वैक छन्दो के सदुपदेशों के अनुसार जीवन व्यतीत करता हुमा योग साधननौँद्वारा पक्षी के सदृश दुलोक को भी अतिक्रान्त कर संचार कर सकता है । यह संचार आकाशगमन रूपी विभूति है (योग ० विभूतिपाद ४२) नैषां शिश्नं भ ठंहति जातवेदाः स्व लोके वहु स्रणमेपाम् ॥२॥ (पूताः) आचारं से पवित्र ह, (पवनेन) प्रवाहित तथा पवित्र वागुद्वारा (शाः) शरीर से शुद्ध है । (शुचयः) विचारों हवाराशुचिर्हैः वेही

English

Approach, and on our right hand hold thy station, then let us slay a multitude of foemen. The best of meath I offer to support thee: may we be first to drink thereof in quiet. A prayer to Agni for protection and prosperity

अध्याय 4

श्लोक 32.4

त्वं हि म॑न्यो अ॒भिभू॑त्योजाः स्वयं॒भूर्भामो॑ अभिमातिषा॒हः ।वि॒श्वच॑र्षणिः॒ सहु॑रिः॒ सही॑यान॒स्मास्वोजः॒ पृत॑नासु धेहि

tvaṃ hi manyo abhibhūtyojāḥ svayaṃbhūrbhāmo abhimātiṣāhaḥ | viśvacarṣaṇiḥ sahuriḥ sahīyānasmāsvojaḥ pṛtanāsu dhehi

हिन्दी अर्थ

कै पडचात् पत्नी पतिलोक अर्थात् पतिगृह मेँ जाती दहै, न कि मृतपति के भगिनी, चाची, ताई, बेटी, बहुए आदि । इन सबके होते हए, तपसे प्रादुर्भूत केसाथही गृहस्थ धमं का व्यवहार करतादहै ओर दुराचारी नहीं होता । नहीं करता, शिद्न का निर्वरयं हो जाना, तथा अन्य घृणित रोगों द्वारा रूण

English

Chasing our pain with splendid light, O Agni, shine thou wealth on us. His lustre flash our pain away.

अध्याय 4

श्लोक 32.5

अ॒भा॒गः सन्नप॒ परे॑तो अस्मि॒ तव॒ क्रत्वा॑ तवि॒षस्य॑ प्रचेतः ।तं त्वा॑ मन्यो अक्र॒तुर्जि॑हीडा॒हं स्वा त॒नूर्ब॑ल॒दावा॑ न॒ एहि॑

abhāgaḥ sannapa pareto asmi tava kratvā taviṣasya pracetaḥ | taṃ tvā manyo akraturjihīḍāhaṃ svā tanūrbaladāvā na ehi

हिन्दी अर्थ

कोशः हृदय । हृदय है स्वग, जिसमे कि ब्रह्मका निवासदहै, स्थितिहै (ये) जो (विष्टारिणम्) विस्तारवाले (ओदनम्) ओदन को (पचन्ति) पकाते है, (एनान्) इनको (कदा चन) कभी भी (अविः) वृत्ति परिपाकौ (यमे) यम-नियमों में (आस्ते) वास करता है, (देवान्) दिन्य- गरणोवाले सत्पुरुषो के (उप) समीप (याति) जाता है, उनका सत्संग करता

English

For goodly fields, for pleasant homes, for wealth we sacrifice to thee. His lustre flash our pain away!

अध्याय 4

श्लोक 32.6

अ॒यं ते॑ अ॒स्म्युप॑ न॒ एह्य॒र्वाङ् प्र॑तीची॒नः स॑हुरे विश्वदावन्।मन्यो॑ वज्रिन्न॒भि न॒ आ व॑वृत्स्व॒ हना॑व॒ दस्यूं॑रुत बो॑ध्या॒पेः

ayaṃ te asmyupa na ehyarvāṅ pratīcīnaḥ sahure viśvadāvan| manyo vajrinnabhi na ā vavṛtsva hanāva dasyūṃruta bodhyāpeḥ

हिन्दी अर्थ

वालों के (सम्) साथ (मदते) मोद-प्रमोद प्राप्त करतादहै। है वेदवाक्, वेदवाणी 1 विष्टारी ओदन, यथा-- अहं पचाम्यहुं ददामि ममेदं कमन् करुणेऽधि जाया । “मै पकाता हू, ्मैदेता हूं, मेरेदही करुणामय कमं में मेरी जाया है।

English

Best praiser of all these be he, and foremost be our noble chiefs. His lustre flash our pain away!

अध्याय 4

श्लोक 32.7

अ॒भि प्रेहि॑ दक्षिण॒तो भ॑वा॒ नोऽधा॑ वृ॒त्राणि॑ जङ्घनाव॒ भूरि॑ ।जु॒होमि॑ ते ध॒रुणं॒ मध्वो॒ अग्र॑मु॒भावु॑पां॒शु प्र॑थ॒मा पि॑बाव

abhi prehi dakṣiṇato bhavā no'dhā vṛtrāṇi jaṅghanāva bhūri | juhomi te dharuṇaṃ madhvo agramubhāvupāṃśu prathamā pibāva

हिन्दी अर्थ

(वयः) जीवन को (अन्वारभेथाम्) तुम पति-पत्नी आरम्भ करो " यहु है विस्तारवाला ओदन, जिस द्वारा कि समग्र भूलोक को निज कौमार-पुत्र जानकर पति-पत्नी पालते ह इसी प्रकार गृहस्थी को पञ्चमहायज्ञ भी करने होतेह, जो पठनेवाले, पितर माता-पिता आदि, वृद्धज्ञानी, ओर परमयोगियों की सेवा । (सत्यारथप्रकाश, घतुथं समुल्लास से उद्ृत) ।

English

So that thy worshipper and we, thine, Agni! in our sons may live. His lustre flash our pain away! As ever conquering Agni’s beams of splendour go to every side,

अध्याय 4

श्लोक 33.1

पाप-नाशनम् १-८ ब्रह्म।पाप्मनाशनोऽग्निः।गायत्री।अप॑ नः॒ शोशु॑चद॒घमग्ने॑ शुशु॒ग्ध्या र॒यिम्।अप॑ नः॒ शोशु॑चद॒घम्

pāpa-nāśanam 1-8 brahma| pāpmanāśano'gniḥ| gāyatrī| apa naḥ śośucadaghamagne śuśugdhyā rayim| apa naḥ śośucadagham

हिन्दी अर्थ

“कुत्तो, पतितो, इवपाकियों, पापरोगियों, कौओं, कृमियों को पका परमेरवर (एनान्) इनको (रेतः न परिमृष्णाति) वीयं से वच्नचित नहीं , होकर (रथयाने) रथ द्वारा जाने योग्य भूलोक मेँ (ईयते) संचार करता है, याति" द्वारा गृहस्थी के सद्गणों का कथन हुमा है । उन सद्गुणोवाला

English

His lustre flash our pain away. To every side thy face is turned, thou art triumphant everywhere.

अध्याय 4

श्लोक 33.2

सु॒क्षे॒त्रि॒या सु॑गातु॒या व॑सू॒या च॑ यजामहे ।अप॑ नः॒ शोशु॑चद॒घम्

sukṣetriyā sugātuyā vasūyā ca yajāmahe | apa naḥ śośucadagham

हिन्दी अर्थ

अतः वह् वीयंवान् ही बना रहता है । रथयाने ईयते =-इसकी व्याख्या में शभरूलोके' (सायण) । इस द्वारा । आकाशगमन' विभति प्राप्त कर (विभूतिपाद, ४२), दुलोक ओर उससे भी परे के लोकों मे निवास करनेवालों के साथ सशरीर संगति प्राप्त करता

English

His lustre flash our pain away! O thou whose face looks every way, bear off our foes as in a ship. His lustre flash our pain away!

अध्याय 4

श्लोक 33.3

प्र यद् भन्दि॑ष्ठ एषां॒ प्रास्माका॑सश्च सू॒रयः॑ ।अप॑ नः॒ शोशु॑चद॒घम्

pra yad bhandiṣṭha eṣāṃ prāsmākāsaśca sūrayaḥ | apa naḥ śośucadagham

हिन्दी अर्थ

है, इसमे उसे कोई बाधा उपस्थित नहीं होती, जंसेकि अन्तरिक्ष में उड़ने वाले पक्षियों को बाधा नहीं होती । एतदर्थं देखें यजुवद (१७।६७) ऋषि दयानन्द पृथिवी से अतिरिक्त लोक-लोकान्तरों मे भी मनुष्योंका निवास मानते हँ (सत्या्थप्रकाश, समुल्लास ८) ।

English

As in a ship across the flood, transport us to felicity. His lustre flash our pain away Glorification of the Vishtāri sacrifice

अध्याय 4

श्लोक 33.4

प्र यत् ते॑ अग्ने सू॒रयो॒ जाये॑महि॒ प्र ते॑ व॒यम्।अप॑ नः॒ शोशु॑चद॒घम्

pra yat te agne sūrayo jāyemahi pra te vayam| apa naḥ śośucadagham

हिन्दी अर्थ

उव्वट तथा महीधर भाष्य भी इस विचार को अपने ढंग से परिपुष्ट आण्डीकं कुमुदं सं त॑नोति विसं शाकं शफको म॒लाली ओदन को (पक्वा) पकाकर, (दिवम्) द्युलोक मे, पाक करनेवाला

English

The head of this is prayer, its back the Brihat, Odanas’s belly is the Vāmadevya; Its face reality, its sides the metre, Vishtāri sacrifice produced from fervour. Boneless, cleansed, purified by him who cleanseth, they go res- plendent to the world of

अध्याय 4

श्लोक 33.5

प्र यद॒ग्नेः सह॑स्वतो वि॒श्वतो॒ यन्ति॑ भा॒नवः॑ ।अप॑ नः॒ शोशु॑चद॒घम्

pra yadagneḥ sahasvato viśvato yanti bhānavaḥ | apa naḥ śośucadagham

हिन्दी अर्थ

करतिवाले गोल (कुमुदम्) कमल डोडे का (सं तनोति) सम्यक्-विस्तार करता है, (शफकः) वृक्षों की जडो को वैदा करनेवाला, ओर (मूलाली, विततः == वि + तनु विस्तारे +क्तः । बहिष्टः=वह प्रापणे + खिलता है (आप्टे) । शालूकम् शाला उच समवाये, चकार को ककार, वर्णविकार द्वारा । शफकः-- शफ (वृक्षों की जड़; आप्टे) + कर ड पिन्वमानाः = पिवि सेचने च (भ्वादिः) । पृष्करिणी =कमलह्द तथा कमल पौधा (आष्ट) । पुष्करम् =नीमकमल (आप्टे) ।

English

splendour. Fire burneth not their organ of enjoyment: much pleasure have they in the world of Svarga.

अध्याय 4

श्लोक 33.6

त्वं हि वि॑श्वतोमुख वि॒श्वतः॑ परि॒भूरसि॑ ।अप॑ नः॒ शोशु॑चद॒घम्

tvaṃ hi viśvatomukha viśvataḥ paribhūrasi | apa naḥ śośucadagham

हिन्दी अर्थ

यृतहंदा मर्धुकूलाः सुरोदकाः क्षीरेण पणां उदकेन दध्ना । १३ अथर्वेवेदभाष्यं काण्ड ४। अनु० ७। सूक्त ३४ (घृतह्ठदाः) घृत के तालाव-सद्ण महाकाय मटक (मधघुक्लाः) मधु हारा कूलो अर्थात् किनारों तक भरे मटके, (सुरोदकः ) आयुर्वेदिक अरिष्टं तथा आसवोवाले महाकाय मट्के, तथा (क्षीरेण) दूध द्वारा, (उदकेन) उदक द्वारा, (दध्ना) दधि द्वारा (पूर्णाः) भरपूर मटके, (एताः)

English

Never doth want or evil fortune visit those who prepare oblation called Vishtāri. He goes unto the Gods, he dwells with Yama, he joys among Gandharvas meet for Soma.

अध्याय 4

श्लोक 33.7

द्विषो॑ नो विश्वतोमु॒खाति॑ ना॒वेव॑ पारय ।अप॑ नः॒ शोशु॑चद॒घम्

dviṣo no viśvatomukhāti nāveva pāraya | apa naḥ śośucadagham

हिन्दी अर्थ

सुरोदकाः = सुरा उदकनाम (निघं० १।१२), अर्थात् सन्धान-विधि आदिवाला उदके । पुष्करिणी" हैँ कमलोवाली भूमियां मधुमक्िखर्यां कमलो के फूलों से मधु अर्थात् शहद का संग्रह करती है, कमलो के फूलो से संगृहीत मधु अधिक गुणकारी प्रतीत होता है । (ददामि) म परमेद्वर देता हूँ है गृहस्थी ! तुजे (क्षीरेण) दूध द्रारा, बहुवचनान्त इन तीनों को, एकविध मानकर, इन्हुं चतुथं कुम्भ कहा है ।

English

Yama robs not of generative vigour the men who dress oblation called Vishtāri. Borne on his car, a charioteer, he travels: endowed with wings he soars beyond the heavens.

अध्याय 4

श्लोक 33.8

स नः॒ सिन्धु॑मिव ना॒वाति॑ पर्ष स्व॒स्तये॑ ।अप॑ नः॒ शोशु॑चद॒घम्

sa naḥ sindhumiva nāvāti parṣa svastaye | apa naḥ śośucadagham

हिन्दी अर्थ

(नि दधे) म निधिषूप मेँ स्थापित करता हु; (स्वधया) निज धारणशक्ति द्वारा (पिन्वमानः) सवका धारण करनेवाला, (सः) वह ओदन-नामक मने निजप्रकाश प्रदान करता रहे । (विदवरूपा) विर्व को रूप देनेवाली, (कामदुघा) कामनाओं का दोहन करनेवाली परमेश्वर -माता (धेनुः) दुधार- गौ के सदृश (मे अस्तु) मेरे लिए हो। । ३४ की एकविषयता का प्रदशेन किया है । सूक्त ३५ मे ओदन दारा परमेश्वर ही अभिप्रेत है, इसके लिए सूक्त ३५ कौ व्याख्या देखो, भौर विशेषरूप मेँ

English

Strongest is this, performed, of sacrifices: he hath reached heaven who hath prepared Vishtāri. The oval-fruited lotus spreads his fibre: there bloom the nelo- phar and water-lilies.

अध्याय 4

श्लोक 34.1

ब्रह्मौदनम्।१-८ अथर्वा।ब्रह्मौदनं।त्रिष्टुप्, ४ उत्तमा भुरिक्, ५ व्यवसाना सप्तपदा …………, ब्रह्मा॑स्य शी॒र्षं बृ॒हद॑स्य पृ॒ष्ठं वा॑मदे॒व्यमु॒दर॑मोद॒नस्य॑ ।छन्दां॑सि प॒क्षौ मुख॑मस्य स॒त्यं वि॑ष्टा॒री जा॒तस्तप॒सोऽधि॑ य॒ज्ञः

brahmaudanam| 1-8 atharvā| brahmaudanaṃ| triṣṭup, 4 uttamā bhurik, 5 vyavasānā saptapadā …………, brahmāsya śīrṣaṃ bṛhadasya pṛṣṭhaṃ vāmadevyamudaramodanasya | chandāṃsi pakṣau mukhamasya satyaṃ viṣṭārī jātastapaso'dhi yajñaḥ

हिन्दी अर्थ

ही ब्राहानिधि को सुरक्षित रख सकते है इस भाव को दर्शने के लिए ऽपचत्), तथापि ओदन पद के समान होने से ओदनत्वरूप मे समानविषयता दोनों सक्तो मे विद्यमान है । यो लोकान विधुंतिर्नाभिरेषा् तेनौदनेनाति तराणि मृत्युम् ।१॥ जिस ओदन-परमेश्वर को, (तपसा) तपस्या द्वारा (अपचत्) निज जीवन

English

Abundant with their overflow of sweetness, these streams shall reach thee in the world of Svarga, whole lakes with lotus- blossom shall approach thee.

अध्याय 4

श्लोक 34.2

अ॒न॒स्थाः पू॒ताः पव॑नेन शु॒द्धाः शुच॑यः॒ शुचि॒मपि॑ यन्ति लो॒कम्।नैषां शि॒श्नं प्र द॑हति जा॒तवे॑दाः स्व॒र्गे लो॒के ब॒हु स्त्रैण॑मेषाम्

anasthāḥ pūtāḥ pavanena śuddhāḥ śucayaḥ śucimapi yanti lokam| naiṣāṃ śiśnaṃ pra dahati jātavedāḥ svarge loke bahu straiṇameṣām

हिन्दी अर्थ

१२६ अधर्ववेदमाष्य काण्ड ४। अनु० ७ । सूक्त ६५ मे परिपक्व किया, तथा (यः) जो ओदन (लोकानाम्) लोकलोकान्तरों का (विधृतिः) विशेषेण धारक है, (न भभिरेषात्) वह मेरे लिए नष्टनहो, (तेन ओदनेन) उस भोदन हारा (मृत्युम् अति) मृत्यु का अतिक्रमण कर, (तरामि) मै तैर जाऊ भवसागर को (विधृतिः=-अथवा जो पृथक्-पृथक् वर्तमान लोकों का धारक है!

English

Full lakes of butter with their banks of honey, flowing with wine, and milk and curds and water Abundant with their overflow of sweetness, these streams shall reach thee in the world of

अध्याय 4

श्लोक 34.3

वि॒ष्टा॒रिण॑मोद॒नं ये पच॑न्ति॒ नैना॒नव॑र्तिः सचते क॒दा च॒न।आस्ते॑ य॒म उप॑ याति दे॒वान्त्सं ग॑न्ध॒र्वैर्मदते सो॒म्येभिः॑

viṣṭāriṇamodanaṃ ye pacanti nainānavartiḥ sacate kadā cana| āste yama upa yāti devāntsaṃ gandharvairmadate somyebhiḥ

हिन्दी अर्थ

किया परमेव रौदन नष्ट नहीं होता । अथवा प्राना कौ गई है कि तपरचर्या न हो जाय । यद्यपि गृह-परिपक्व ओदन भी मृत्यु से बचाता है, दीधं जीवन मृत्यु कौ (अति अतरन्) तैर जति है, (यम्) जिस ओदन को (तपसा) जिस जोदन को (पपाच) जीवन मे परिपक्व करता है, (तेन ओदनेन) उस ओदम द्वारा (मृत्युम्) मृत्यु को (अति तराणि) जै तैर जाङं।

English

Svarga, whole lakes with lotus- blossom shall approach thee. I give four pitchers, in four several places, filled to the brim with milk and curds and water.

अध्याय 4

श्लोक 34.4

वि॒ष्टा॒रिण॑मोद॒नं ये पच॑न्ति॒ नैना॑न् य॒मः परि॑ मुष्णाति॒ रेतः॑ ।र॒थी ह॑ भू॒त्वा र॑थ॒यान॑ ईयते प॒क्षी ह॑ भू॒त्वाति॒ दिवः॒ समे॑ति

viṣṭāriṇamodanaṃ ye pacanti nainān yamaḥ pari muṣṇāti retaḥ | rathī ha bhūtvā rathayāna īyate pakṣī ha bhūtvāti divaḥ sameti

हिन्दी अर्थ

तेरने के कारण, मृत्यु है भवसागर । (विद्वभोजसम्, पृथिवीम्) सबको भोजन देनेवाली, या सबका पालन करनेवाली पृथिवी को (यः) जिस ओदनने (दाधार) धारण किया उदक हारा (आपणात्) स्वेत्र भरपुर किया है; (यः) जिस मोदन ने (ऊर्वः)

English

Abundant with their overflow of sweetness, these streams shall reach thee in the world of Svarga, whole lakes with lotus- blossom shall approach thee. I part this Odana among the Brāhmans, Vishtāri, conquering worlds and reaching heaven.

अध्याय 4

श्लोक 34.5

ष॒ य॒ज्ञानां॒ वित॑तो॒ वहि॑ष्ठो विष्टा॒रिणं॑ प॒क्त्वा दि॒वमा विवे॑श ।आ॒ण्डीकं॑ कुमु॑दं॒ सं त॑नोति॒ बिसं॑ शा॒लूकं॒ शफ॑को मुला॒ली।ए॒तास्त्वा॒ धारा॒ उप॑ यन्तु॒ सर्वाः॑ स्व॒र्गे लो॒के मधु॑म॒त् पिन्व॑माना॒ उप॑ त्वा तिष्ठन्तु पुष्क॒रिणीः॒ सम॑न्ताः

ṣa yajñānāṃ vitato vahiṣṭho viṣṭāriṇaṃ paktvā divamā viveśa | āṇḍīkaṃ kumudaṃ saṃ tanoti bisaṃ śālūkaṃ śaphako mulālī| etāstvā dhārā upa yantu sarvāḥ svarge loke madhumat pinvamānā upa tvā tiṣṭhantu puṣkariṇīḥ samantāḥ

हिन्दी अर्थ

अतितराणि, मे मृ्युको तैर जाड। क भोजसम् == मृज पालनाभ्यवहारयोः (रुधादिः) । रसेन = रसः (यस्मात्) जिस ओदन से (त्रिशत् अराः) तीस अरोंवाले (मासाः निमिता) मास निर्मित हए ह, (यस्मात्) जिस ओदन से (द्वादशारः ) १२ की परिक्रमा करते हए (अहोरात्राः) दिन ओर रात (यम्) जिस ओदन को (न आपुः) नहीं प्राप्त हुई, (तेन ओदनेन अति तराणि मृत्युम्) उस ओदन द्वारा मृत्यु कोम तैर जाऊ।

English

Let me not lose it: swelling by its nature, be it my perfect Cow to grant all wishes! Magnification of the Odana or oblation of milk and rice

अध्याय 4

श्लोक 34.6

घृ॒तह्र॑दा॒ मधु॑कूलाः॒ सुरो॑दकाः क्षी॒रेण॑ पू॒र्णा उ॑द॒केन॑ द॒ध्ना।ए॒तास्त्वा॒ धारा॒ उप॑ यन्तु॒ सर्वाः॑ स्व॒र्गे लो॒के मधु॑म॒त् पिन्व॑माना॒ उप॑ त्वा तिष्ठन्तु पुष्क॒रिणीः॒ सम॑न्ताः

ghṛtahradā madhukūlāḥ surodakāḥ kṣīreṇa pūrṇā udakena dadhnā| etāstvā dhārā upa yantu sarvāḥ svarge loke madhumat pinvamānā upa tvā tiṣṭhantu puṣkariṇīḥ samantāḥ

हिन्दी अर्थ

अराः अराः तथा “परियन्तः' द्वारा कालचक्रं को सुषित किया संवत्सर के १२ मास दशयि ह । राशिचक्रमें १२ राशियां हतीरहैः प्रत्येक राशिमें सूर्यं के एक-एक मास वास द्वारा १२ मास होते रहै। परथिवी आदि लोक (घृतवन्तः) घृतवाने हुए , (क्षरन्ति) क्षरित होते है;

English

Odana which Prajāpati, the firstborn of Order, dressed with fervour for the Brāhman, which guards the worlds from breaking atIthe centre,—I with this Odana will conquer Mrityu.

अध्याय 4

श्लोक 34.7

च॒तुरः॑ कु॒म्भांश्च॑तु॒र्धा द॑दामि क्षी॒रेण॑ पू॒र्नाँ उ॑द॒केन॑ द॒ध्ना।ए॒तास्त्वा॒ धारा॒ उप॑ यन्तु॒ सर्वाः॑ स्व॒र्गे लो॒के मधु॑म॒त् पिन्व॑माना॒ उप॑ त्वा तिष्ठन्तु पुष्क॒रिणीः॒ सम॑न्ताः

caturaḥ kumbhāṃścaturdhā dadāmi kṣīreṇa pūrnā~ udakena dadhnā| etāstvā dhārā upa yantu sarvāḥ svarge loke madhumat pinvamānā upa tvā tiṣṭhantu puṣkariṇīḥ samantāḥ

हिन्दी अर्थ

है वे मानो घृत रहै, घृत के सदुश पृष्टिदायिका हैँ । सब प्रदिशा, यलोक के धथरववेवेदभाष्य काण्ड ४। भनु ° ७ । सूक्त ३१ . हआ, (यः) जो (गायत्याः) गायत्री" मन्त्र का (अधिपतिः बभूव), अधि- वाले (वेदाः निहिताः) वेद निहित है, (तेन ओदनेन अति तराणि मृत्युम्) उस मोदन द्वारा रमै मृत्यु को भवसागर को तैर जाञॐ।

English

Whereby the World-Creators vanquished Mrityu, that which they found by fervour, toil and trouble,

अध्याय 4

श्लोक 34.8

इ॒ममो॑द॒नं नि द॑धे ब्राह्म॒णेषु॑ विष्टा॒रिणं॑ लोक॒जितं॑ स्व॒र्ग॑म्।स मे॒ मा क्षे॑ष्ट स्व॒धया॒ पिन्व॑मानो वि॒श्वरू॑पा धे॒नुः का॑म॒दुघा॑ मे अस्तु

imamodanaṃ ni dadhe brāhmaṇeṣu viṣṭāriṇaṃ lokajitaṃ svargam| sa me mā kṣeṣṭa svadhayā pinvamāno viśvarūpā dhenuḥ kāmadughā me astu

हिन्दी अर्थ

स्वलीन ध्यानियों के लिए अन्नरूप है, परमेदवर मे लीन हए ध्यानी परमे- वरीय आनन्दरस का पान करके तृप्त रहते है, इसलिए परमेश्वर को अघ बाधे दविषन्तं देवपीयुं सपत्ना ये मेऽपरते म॑वन्तु जो असुर हैँ (ते) वे (अप भवन्तु) अपगत हो जाएँ ( विर्वजितम्) विश्व-

English

That which prayer first made ready for the Brāhman,—I with this Odana will conquer Mrityu. 50 That which upholds the Earth, the all-sustainer, that which hath filled air’s middle realm with

अध्याय 4

श्लोक 35.1

मृत्युसंतरणम्।१-७ प्रजापतिः।अतिमृत्युः।त्रिष्टुप्, ३ भुरिग्जगती।बयमो॑द॒नं प्र॑थम॒जा ऋ॒तस्य॑ प्र॒जाप॑ति॒स्तप॑सा ब्र॒ह्मणेऽप॑चत्।यो लो॒कानां॒ विधृ॑ति॒र्नाभि॒रेषा॒त् तेनौ॑द॒नेनाति॑ तराणि मृ॒त्युम्

mṛtyusaṃtaraṇam| 1-7 prajāpatiḥ| atimṛtyuḥ| triṣṭup, 3 bhurigjagatī| bayamodanaṃ prathamajā ṛtasya prajāpatistapasā brahmaṇe'pacat| yo lokānāṃ vidhṛtirnābhireṣāt tenaudanenāti tarāṇi mṛtyum

हिन्दी अर्थ

श्रत् सत्यनाम (निषं० ३।१०) धा (धारणे) । घीमदि । धियो यो नः प्रचोदयात्" (यजुः० ३।३१५; २२।९; ३०।२) । इसद्रारा जप्य गायत्री कौ विशेष महिमा सूचित होती है । ( सत्यौजाः ) सत्य के स्थापन मे भोजवाला, (वेशवानरः) त नारियों का हितकारी, (वृषा) तथा उनपर सुखवर्षा ६५१ ध ४

English

moisture, Which, raised on high in grandeur, stablished heaven,—I with this Odana will conquer

अध्याय 4

श्लोक 35.2

येनात॑रन् भूत॒कृतोऽति॑ मृ॒त्युं यम॒न्ववि॑द॒न् तप॑सा॒ श्रमे॑ण ।यं प॒पाच॑ ब्र॒ह्मणे॒ ब्रह्म॒ पूर्वं॒ तेनौ॑द॒नेनाति॑ तराणि मृ॒त्युम्

yenātaran bhūtakṛto'ti mṛtyuṃ yamanvavidan tapasā śrameṇa | yaṃ papāca brahmaṇe brahma pūrvaṃ tenaudanenāti tarāṇi mṛtyum

हिन्दी अर्थ

(नः) हमे (दुरस्यात्) दुष्ट जानकर ५ ध 1 ष दम्भ अर्थात् छल-कपट का व्यवहार क 1 हमे तियात्) शत्रू जानकर हमारे साथ शतु क ह र ष तो सर्वोपिकारी है, सबका सुख चाहता है त ध भी जो अन्यदेशीय राजा उसकी प्रजा केसाथ वृरा ० उ देने की स्वीकृति प्रदान करे। राजा स्वय प्र ५ भ र करने की स्वीकृति प्रदान करता ट परदहन तो 41 ह (५ । सत्यीजाः-यथा “सत्यं कृणुहि चित्तमेषाम् ' ( ० र

English

Mrityu. From which the months with thirty spokes were moulded, from which the twelve-spoked year was formed and fashioned.

अध्याय 4

श्लोक 35.3

यो दा॒धार॑ पृथि॒वीं वि॒श्वभो॑जसं॒ यो अ॒न्तरि॑क्ष॒मापृ॑णा॒द् रसे॑न ।यो अस्त॑भ्ना॒द् दिव॑मू॒र्ध्वो म॑हि॒म्ना तेनौ॑द॒नेनाति॑ तराणि मृ॒त्युम्

yo dādhāra pṛthivīṃ viśvabhojasaṃ yo antarikṣamāpṛṇād rasena | yo astabhnād divamūrdhvo mahimnā tenaudanenāti tarāṇi mṛtyum

हिन्दी अर्थ

करे, दम्भ करे, शत्रुता करे (लेटि आड् आगम ) । नौ व ष शत्र, (अदिप्सतः नः) दम्भ न करना चाहते हए ५ हुए क) (दिप्सत्) दम्भ करना प 1 (व भ करना चाहते हुए या ¢ 1 1 चाहता है या करे, (तम्) उन दोन (८ त नर-नारियों का हित करनेवाले (अग्नेः) राष्टराग्रणी पर = (दयोः) दो द॑ष्टाओं मे (अपि दधामि) पिहित करताहू १४० भथर्ववेदमाध्य काण्ड ४। अनुं° = सूक्तं ३६

English

Which circling day and night have ne’er o’ertaken,—I with this Odana will conquer Mrityu.

अध्याय 4

श्लोक 35.4

यस्मा॒न्मासा॒ निर्मि॑तास्त्रिं॒शद॑राः संवत्स॒रो यस्मा॒न्निर्मि॑तो॒ द्वाद॑शारः ।अ॒हो॒रा॒त्रा यं प॑रि॒यन्तो॒ नापुस्तेनौ॑दनेनाति॑ तराणि मृ॒त्युम्

yasmānmāsā nirmitāstriṃśadarāḥ saṃvatsaro yasmānnirmito dvādaśāraḥ | ahorātrā yaṃ pariyanto nāpustenaudanenāti tarāṇi mṛtyum

हिन्दी अर्थ

(सहसा) साहसपूरवैक या बल द्वारा (सहे) मै सेनापति पराभव करता हुं । सहः बलनाम (निघं० ३।६) । सहै अभिभवामि (सायण), पराभव करता हूं । कव्यादः =-शननुसं निक । युद्ध मे हत्या करना, मानुषमांस

English

Which hath become breath-giver, life-bestower; to which the worlds flow full of oil and fatness, To whom belong all the refulgent regions,—I with this Odana will conquer Mrityu.

अध्याय 4

श्लोक 35.5

यः प्रा॑ण॒दः प्रा॑ण॒दवा॑न् ब॒भूव॒ यस्मै॑ लो॒का घृ॒तव॑न्तः॒ क्षर॑न्ति ।ज्योति॑ष्मतीः प्र॒दिशो॒ यस्य॒ सर्वा॒स्तेनौ॑द॒नेनाति॑ तराणि मृ॒त्युम्

yaḥ prāṇadaḥ prāṇadavān babhūva yasmai lokā ghṛtavantaḥ kṣaranti | jyotiṣmatīḥ pradiśo yasya sarvāstenaudanenāti tarāṇi mṛtyum

हिन्दी अर्थ

सहे पिशाचान्त्सहसेषां द्रविणं ददे । पिशाचान्) मांसभक्षकों का (सहसा सहे) मँ बल द्वारा पराभव दुरस्यतः) सबसे दुव्यंवहार करना चाहते हृए को (हन्मि) मँ मार देता हू । है । अथवा युद्ध में सेनिक हिसकों को पिशाच ओर क्रव्याद कहा है ।

English

From which, matured, sprang Amrit into being, which hath become Gāyatris lord and ruler, In which the perfect Vedas have been treasured,—I with this

अध्याय 4

श्लोक 35.6

यस्मा॑त् प॒क्वाद॒मृतं॑ संब॒भूव॒ यो गा॑य॒त्र्या अधि॑पतिर्ब॒भूव॑ ।यस्मि॒न् वेदा॒ निहि॑ता वि॒श्वरू॑पा॒स्तेनौ॑द॒नेनाति॑ तराणि मृ॒त्युम्

yasmāt pakvādamṛtaṃ saṃbabhūva yo gāyatryā adhipatirbabhūva | yasmin vedā nihitā viśvarūpāstenaudanenāti tarāṇi mṛtyum

हिन्दी अर्थ

(ये) जो हमारे (देवाः) विजिगीषु सैनिक तथा सेनाधिकारी (सूर्यंण) सूर्यं के साथ (जवम्) निज वेगको (मिमते) मापते है, तुलना करते ह (ये) जो महात्माजन (नदीषु) नदियों के तटे पर या नदियों के संगमो पर, (परवंतेषु) बौर पवतो मे निवास करते है, उन्हे; (तेन) उस १- अमावास्या के रात्रिकाल में अधेरा होने से, शत्रुदल को, छिपे-छिपे खोज का स्व- वसर मिल जाता है । मुगयन्ते = मृग अन्वेषणे (चुरादिः ), भन्वेषण खोज करना,

English

Odana will conquer Mrityu, I drive away the hostile God-despiser: far off be those who are mine adversaries, I dress Brahmaudana that winneth all things. May the Gods hear me who believe and trust

अध्याय 4

श्लोक 35.7

अव॑ बाधे द्वि॒षन्तं॑ देवपी॒युं स॒पत्ना॒ ये मेऽप॒ ते भ॑वन्तु ।ब्र॒ह्मौ॒द॒नं वि॑श्व॒जितं॑ पचामि शृ॒ण्वन्तु॑ मे श्र॒द्दधा॑नस्य दे॒वाः

ava bādhe dviṣantaṃ devapīyuṃ sapatnā ye me'pa te bhavantu | brahmaudanaṃ viśvajitaṃ pacāmi śṛṇvantu me śraddadhānasya devāḥ

हिन्दी अर्थ

जोकि इन्दं उपहास कराने में प्रयोजक बनेरहैः उनके होतेभीमे त कहता हूँ किर्मेतो (तैः पशुभिः) उन नर-पणुओं के साथ (सं विदे) संवेदन न जनम् मिमते--जो पदति अतिशीघ्र वेगवालेर्है, या सूयं के अथवा सूर्यं को रदिमयों के समान अत्तिवेगवाले है, शीघ्रगामी विमानों द्वारा । के प्रधानमन्त्री तथा सेनापतिः; प्रकरणानुसार । अरणेभिः जिनके साथ हमारी बोलचाल नहीं, अ+रण (शब्दे, भ्वादिः) । हासन्ते-= हासयन्ति ध हासयन्ति, उपहास कराने के कारण बनते हँ । शत्रु राजाके दृष्कृत्य हँ

English

them. A charm against fiends, human enemies, and other pests

अध्याय 4

श्लोक 36.1

सत्यौजा अग्निः।१-१० चातनः।सत्यौजा अग्निः।अनुष्टुप्, ९ भुरिक्।तान्त्स॒त्यौजाः॒ प्र द॑हत्व॒ग्निर्वै॑श्वान॒रोवृषा॑ ।यो नो॑ दुर॒स्याद् दिप्सा॒च्चाथो॒ यो नो॑ अराति॒यात्

satyaujā agniḥ| 1-10 cātanaḥ| satyaujā agniḥ| anuṣṭup, 9 bhurik| tāntsatyaujāḥ pra dahatvagnirvaiśvānarovṛṣā | yo no durasyād dipsāccātho yo no arātiyāt

हिन्दी अर्थ

क्रीडा-विजिमीषा-व्यवहार'' आदि (दिवादिः) । होता है, (दव) जैसे (सिहं दष्ट्वा) सिह को देखकर (रवानः) कुत्ते छिपने का समय नहीं पाते वैसे (ते) वे पिशाच मृञ्ञे देखकर (न्यञ्चनम्) छिपने के स्थान को (न विन्दन्ते) नहीं पाते । तं पिशाचाः पिशाच अमानुष-जाति के नही, अपितु वे मांस-भक्षक मनुष्य ही है व्याघ्र गौओंको मारकर खा जाताहै, अतः गोस्वामियों का लहै, ओर अरः प्रबल है । इसलि शाम

English

Endowed with true strength, let the Bull, Agni Vaisvānara, burn them up. Him who would pain and injure us, him who would treat us as a foe. Him who, unharmed, would injure us, and him who, harmed, would do us harm,

अध्याय 4

श्लोक 36.2

यो नो॒ दिप्स॒ददि॑प्सतो॒ दिप्स॑तो॒ यश्च॒ दिप्स॑ति ।वै॒श्वा॒न॒रस्य॒ दंष्ट्र॑योर॒ग्नेरपि॑ दधामि॒ तम्

yo no dipsadadipsato dipsato yaśca dipsati | vaiśvānarasya daṃṣṭrayoragnerapi dadhāmi tam

हिन्दी अर्थ

येमां क्रोधयन्ति लपिता हस्तिनं मशका इव (ये) जौ (लपिताः) बकवासी (मा) मुञ्च सेनाध्यक्ष को (करोधयन्ति) निज व्यवहारो द्वारा करद्धकरतेहैः (इव) जेसेकि (मशकाः) मच्छर सडक पर सोये हुए क्षुद्र कड की तरह ।

English

Flesh-eaters, others who would harm,—all these I overcome with might. I conquer the Pisāchas with my power, and take their wealth away. All who would injure us I slay. Let mine intention have success.

अध्याय 4

श्लोक 36.3

य आ॑ग॒रे मृ॒गय॑न्ते प्रतिक्रो॒शेऽमावा॒स्ये।क्र॒व्यादो॑ अ॒न्यान् दिप्स॑तः॒ सर्वां॒स्तान्त्सह॑सा सहे

ya āgare mṛgayante pratikrośe'māvāsye| kravyādo anyān dipsataḥ sarvāṃstāntsahasā sahe

हिन्दी अर्थ

"लपिताः'' है, वै घुं की आवाजे कानों मेँ करते ह सेनाध्यक्ष को करद करता है, (सः) वह (उ) निर्वय से (पाशात्) पाशसे । (न मुच्यते नहीं मुक्त होता, रस्सियो से वाध दिया जाता है । १४२ मथर्ववेदभाष्य काण्ड ४। अनु० ८ । सूक्त ६६ (ओषधे) है जोषधि ! (पूवम्) पूरवैकाल से, अर्थात् अनादिकालसे

English

With Gods who flee with him, and match their rapid motion with the Sun, I with those animals who dwell in rivers and on hills am found.

अध्याय 4

श्लोक 36.4

सहे॑ पिशा॒चान्त्सह॑सैषां॒ द्रवि॑णं ददे ।सर्वा॑न् दुरस्य॒तो ह॑न्मि॒ सं म॒ आकू॑तिरृद्यताम्

sahe piśācāntsahasaiṣāṃ draviṇaṃ dade | sarvān durasyato hanmi saṃ ma ākūtirṛdyatām

हिन्दी अर्थ

रोग-कीटाणुजों ल्प का (जघ्नुः) हनन किया, (त्वया) तुज्ञ दारा (कश्यपः) रोगपरीक्षक ने (जघान) उनका हनन किया, (त्वया) तुक्च र (कण्वः) कण समान क्षुद्र रोग-कीटाणुओं को जाननेवाले मेधावी ने, मेधाविनाम (निघं० ३।१५) 1 अगस्त्यः = रोग-कीटाणुके कारण शरीरमें रोग कीटाणओं का (चातयामहे) नाश करते ह; (अशुद्धि) है अजशुद्खी

English

I trouble the Pisāchas as the tiger plagues men rich in kine. They, even as dogs when they have seen a lion, find no hiding- place. Naught with Pisāchas can I do, with thieves, with roamers of the wood.

अध्याय 4

श्लोक 36.5

ये दे॒वास्तेन॒ हास॑न्ते॒ सूर्ये॑ण मिमते ज॒वम्।न॒दीषु॒ पर्व॑तेषु॒ ये सं तैः प॒शुभि॑र्विदे

ye devāstena hāsante sūryeṇa mimate javam| nadīṣu parvateṣu ye saṃ taiḥ paśubhirvide

हिन्दी अर्थ

अप्सरसः अप्सु सारिण्यः; मादा रोग-कीटाणु । जलो मे सरण करनेवाले मलेरिया तथा हैजे के मादा रोग कोटाणु । गन्धर्वान् “= ञ अर्वा (अवं हिसायाम्, भ्वादिः) नर रोग-कोटाणु । गन्धेन नाशय=-अज- अथवा नर-मादा दोनों प्रकार के रोग-कीटाणुओं को नष्ट करना । १४४ अथर्वेवेदभाष्य काण्ड ४। अनु° ८ । सूक्त ३७ (अप्सरसः) है अप् अर्थात् जलों मेँ सरण करनेवाले मादा-कीटाणुभ ! (तत्) उस जलप्राय' स्थान को (परेत) हमसे पराङ्मुख होकर तुम चले ।

English

Pisāchas flee and vanish from each village as I enter it. Into whatever village this mine awful power penetrates,

अध्याय 4

श्लोक 36.6

तप॑नो अस्मि पिशा॒चानां॑ व्या॒घ्रो गोम॑तामिव ।श्वानः॑ सिं॒हमि॑व दृ॒ष्ट्वा ते न वि॑न्दन्ते॒ न्यञ्च॑नम्

tapano asmi piśācānāṃ vyāghro gomatāmiva | śvānaḥ siṃhamiva dṛṣṭvā te na vindante nyañcanam

हिन्दी अर्थ

गन्ध रोग-कीटाणुओं का विनाशके है। प्रतिबुद्धा अभूतन तुम जाने पहिचान हो गये हो, अतः तुम्हारा विनाश समीप है-यह अभिप्रायहै। पीला आदि ओषधिर्या सुगन्धवाली हैँ । परेत परा + इत । अरवत्थ आदि महाकाय वृक्ष तथा मयूर हैँ (तत्) उस स्थान में (परा इत) सरण करनेवाले मादा-कीटाणुओ । (प्रतिबुद्धाः अभूतन) तुम जाने-पहिचाने

English

Thence the Pisāchas flee away, and plot no further mischief there. Those who enrage me with their prate, as flies torment an elephant, I deem unhappy creatures, like small insects troublesome to man.

अध्याय 4

श्लोक 36.7

न पि॑शा॒चैः सं श॑क्नोमि॒ न स्ते॒नैर्न व॑न॒र्गुभिः॑ ।पि॒शा॒चास्तस्मा॑न्नश्यन्ति॒ यम॒हं ग्राम॑मावि॒शे

na piśācaiḥ saṃ śaknomi na stenairna vanargubhiḥ | piśācāstasmānnaśyanti yamahaṃ grāmamāviśe

हिन्दी अर्थ

गिरकर, तथा मृत्यु के पश्चात् प्राणियों के शरीर गल-सड़कर रोगकीटाणृभों को पदा करते रहते है, अतः मादा-कोटाणृभओं के स्थानर्है। मादा इसलिए कि मादा-कीटाणुही मादा ओर नर दोनो प्रकारके कीटाणुओं कोपेदा करते हैँ । अभूतन = तनप् प्रत्यय । १. जलप्राय स्थानों में मलेरिया भौर हैजे के रोग-कीटाणु पनपते हैँ । (२) “"गृल्गुल्वा- उत) हरे ओर रवेत वर्णोवाते पप्रेह्भाः) सूले है (यत्र

English

Destruction seize upon the man, as with a cord they hold a horse, The fool who is enraged with me! He is not rescued from the noose.

अध्याय 4

श्लोक 36.8

यं ग्राम॑मावि॒शत॑ इ॒दमु॒ग्रं सहो॒ मम॑ ।पि॒शा॒चास्तस्मा॑न्नश्यन्ति॒ न पा॒पमुप॑ जानते

yaṃ grāmamāviśata idamugraṃ saho mama | piśācāstasmānnaśyanti na pāpamupa jānate

हिन्दी अर्थ

(आघाटः) संघट् मेँ वतमान (ककंयेः) कडकड़ शब्द करनेवाले ज्लींगुर' (सम् वदन्ति) परस्पर मिलकर संवाद या शोर-गुल करते है, (तत् परेता- मानो परस्पर भाषण करते हए षींगर, "संवदन्ति" । अजशुङ्गय राटकी ती्ष्णशुङ्गी व्यु षतु ।।६॥

English

A charm against Gandharvas and Apsarases With thee, O Plant, in olden time Atharvans smote and slew the fiends. Kasyapa smote with thee, with thee did Kanava and Agastya smite.

अध्याय 4

श्लोक 36.9

ये मा॑ क्रो॒धय॑न्ति लपि॒ता ह॒स्तिनं॑ म॒शका॑ इव ।तान॒हं म॑न्ये॒ दुर्हि॑ता॒न् जने॒ अल्प॑शयूनिव

ye mā krodhayanti lapitā hastinaṃ maśakā iva | tānahaṃ manye durhitān jane alpaśayūniva

हिन्दी अर्थ

(व्यषतु) रोग के कीटाणुओं का हिसन करे । अराटिका नाम है ओषधि का। शेष दो नाम, अराटिकाके भिनद्मि मृष्कावपिं यामि शपः ।५॥ (आनृत्यतः) घूम-घूमकर नाचते हुए (शिखण्डिनः) मयूरो के सदृश

English

With thee we scare and drive away Gandharvas and Apsarases. O Ajasringi, chase the fiends. Cause all to vanish with thy smell.

अध्याय 4

श्लोक 36.10

अ॒भि तं निरृ॑तिर्धत्ता॒मश्व॑मिवाश्वाभि॒धान्या॑ ।म॒ल्वो यो मह्यं॒ क्रुध्य॑ति॒ स उ॒ पाशा॒न्नमु॑च्यते

abhi taṃ nirṛtirdhattāmaśvamivāśvābhidhānyā | malvo yo mahyaṃ krudhyati sa u pāśānnamucyate

हिन्दी अर्थ

(न) न (पिशाचैः) मांस-भक्षकों के साथ (सम् शक्नोमि) मेँ सन्धि कर सकता हं, (न स्तेनैः) न चोरों के साथ, (न वनर्गृभिः) न वनम छिपे (आविशे) प्रवेश पाता हूँ (तस्मात्) उस ग्रामसे (पिशाचाः) पिशाच आदि ¦ जानते) जानते तक नहीं पापकर्म का करना तो सम्भव ही नहीं । प्रत्येक ग्रामको पाप तथा पापियोंसे रहित कर देना, वैदिकं सदाचार का उदेश्य है, केवल नागरिक सदाचार पर्याप्त नहीं । ।

English

I lay between the doubled fangs of Agni, of Vaisvānara. Those who, what time the moon is dark, hunt with loud cry and answering shout,

अध्याय 4

श्लोक 37.1

कृमिनाशनम्।१२ बादरायणिः।अजशृङ्गी, १ अप्सरसः, १-२, ६-१० औषधी अजशृङ्गी, ३-५ अप्सरसः, ७-१२ गन्धर्वाप्सरसः।अनुष्टुप्, ३ त्र्यवसाना षट् पदा त्रिष्टुप्, ५ प्रस्तारपङ्क्तिः, ७ परोष्णिक्, ११ षट् पदा जगती, १२ निचृत्।त्वया॒ पूर्व॒मथ॑र्वाणो ज॒घ्नू रक्षां॑स्योषधे ।त्वया॑ जघान क॒श्यप॒स्त्वया॒ कण्वो॑ अ॒गस्त्यः॑

kṛmināśanam| 12 bādarāyaṇiḥ| ajaśṛṅgī, 1 apsarasaḥ, 1-2, 6-10 auṣadhī ajaśṛṅgī, 3-5 apsarasaḥ, 7-12 gandharvāpsarasaḥ| anuṣṭup, 3 tryavasānā ṣaṭ padā triṣṭup, 5 prastārapaṅktiḥ, 7 paroṣṇik, 11 ṣaṭ padā jagatī, 12 nicṛt| tvayā pūrvamatharvāṇo jaghnū rakṣāṃsyoṣadhe | tvayā jaghāna kaśyapastvayā kaṇvo agastyaḥ

हिन्दी अर्थ

नाचते हए, (अप्सरापतेःः) जल मेँ सरण करनेवाले मादा रोग-कोटाण के १. सम्भवतः भींगुर ऋग्वेदोक्त 'चिच्चिक' द । यथा “वृषारवाय वदते यदुपावति दिदाओं मे व्यापी गज॑न। इस गर्जन को उपलक्ष्य करके मानो जल-याचन के लिए "चिच्विक' चि-चि आवारं करता है । अवति == अव याचने (स्वादिः) चि-चि आवाज सम्भवतः गुरो का संवदन ठै, संवाद करना है।

English

Let the Apsarases, puffed away, go to the river, to the ford,— Guggulū, Pīlā, Naladi, Aukshagandhi, Pramandini. 51

अध्याय 4

श्लोक 37.2

त्वया॑ व॒यम॑प्स॒रसो॑ गन्ध॒र्वांस्चा॑तयामहे ।अज॑शृ॒ङ्ग्यज॒ रक्षः॒ सर्वा॑न् ग॒न्धेन॑ नाशय

tvayā vayamapsaraso gandharvāṃscātayāmahe | ajaśṛṅgyaja rakṣaḥ sarvān gandhena nāśaya

हिन्दी अर्थ

उनमें निजविष का संचार कर देते । इसी प्रकार अवकोको खाते हुए जल १. अपि यामि --अमियामि, अभियान है आक्रमण करना । जोकि दवा ओर कपि के सदृ योगी होकर, कुमारकारूप धारण कर, स्त्रियोंका

English

Wearing the tuft of hair, I take all manhood and virility. With those dread hundred iron spears, the darts of Indra, let it pierce. The Blyxa-fed Gandharvas, those who bring no sacrificial gift.

अध्याय 4

श्लोक 37.3

न॒दीं य॑न्त्वप्स॒रसो॒ऽपां ता॒रम॑वश्व॒सम्।गु॒ल्गु॒लूः पीला॑ नल॒द्यौ॒३क्षग॑न्धिः प्रमन्द॒नी।तत् परे॑ताप्सरसः॒ प्रति॑बुद्धा अभूतन

nadīṃ yantvapsaraso'pāṃ tāramavaśvasam| gulgulūḥ pīlā naladyau3kṣagandhiḥ pramandanī| tat paretāpsarasaḥ pratibuddhā abhūtana

हिन्दी अर्थ

संभोग करता है, जिसे कि विनाश का दण्ड दिया है, राजव्यवस्थानुसार । को विकृत करदेतेर्है, ओर रोगों को फलाते हँ । इनका विनाशसम्राट् के ताभिैविरदान गन्धर्वान॑वकादान स्यु पतु ॥९॥ वकादान॑भिशोचानप्सु ज्योतय मापकान ।

English

With those dread hundred golden spears, the darts of Indra, let it pierce. The Blyxa-fed Gandharvas, those who bring no sacrificial gift.

अध्याय 4

श्लोक 37.4

यत्रा॑श्व॒त्था न्य॒ग्रोधा॑ महावृ॒क्षाः शि॑ख॒ण्डिनः॑ ।तत् परे॑ताप्सरसः॒ प्रति॑बुद्धा अभूतन

yatrāśvatthā nyagrodhā mahāvṛkṣāḥ śikhaṇḍinaḥ | tat paretāpsarasaḥ pratibuddhā abhūtana

हिन्दी अर्थ

सूयं की ज्योति द्वारा जला दे; (ओषधे) है ओषधि ! (सर्वान्) सब (पिशाचान्) मांसभक्षकों को (प्र मृणीहि) मार डाल, (च) ओर (सहस्व) जलस्थ ही रोग-कीटाणुभओं को समाप्त कर देना । (२) ओषधि के प्रयोग दवारा या उसके सुगन्धित धूम द्वारा उन्हँ मार देना । रोग-कोटाणु, रोग पदा कर रोगीके मांस को सुखा देतह, उसे कमजोर कर देते ह, इसलिषए मांसयाचक, अतः मांसभक्षकः; मांसयाचना भक्षणके लिएही होती है।'

English

O Plant, be thou victorious, crush the Pisāchas, one and all, Blyxa-fed, shining in the floods, illumining the selfish ones. Youthful, completely decked with hair, one monkey-like, one like a dog,—

अध्याय 4

श्लोक 37.5

यत्र॑ वः प्रे॒ङ्खा हरि॑ता॒ अर्जु॑ना उ॒त यत्रा॑घा॒ताः क॑र्क॒र्यः सं॒वद॑न्ति ।तत् परे॑ताप्सरसः॒ प्रति॑बुद्धा अभूतन

yatra vaḥ preṅkhā haritā arjunā uta yatrāghātāḥ karkaryaḥ saṃvadanti | tat paretāpsarasaḥ pratibuddhā abhūtana

हिन्दी अर्थ

एवेवेकः कपिरिवेक॑ः कुमारः संवकेशकः । (र्वा इव) कुत्ते के सदृश (एकः) एक, (कपिः इव) कपि के सदृश ¦ एकः) एक, (कुमारः) कुत्सित कामवाला युवा-कुमार, (सर्वकेशकः) जो १४८ अथवेदभाष्य काण्ड ४। बनु० ८। सूक्त ३७ बरह्मणा) शक्ति-प्रदाता परमेदवर की सहायता द्वारा (इतः नाशयामसि)

English

So the Gandharva, putting on a lovely look, pursues a dame. Him with an efficacious charm we scare and cause to vanish hence.

अध्याय 4

श्लोक 37.6

एयम॑ग॒न्नोष॑धीनां वी॒रुधां॑ वी॒र्याऽवती ।अ॒ज॒शृ॒ङ्ग्यऽराट॒की ती॑क्ष्णशृ॒ङ्गी व्यृऽषतु

eyamagannoṣadhīnāṃ vīrudhāṃ vīryā'vatī | ajaśṛṅgya'rāṭakī tīkṣṇaśṛṅgī vyṛ'ṣatu

हिन्दी अर्थ

इस प्रथिवीसे हम परस्पर मिलकर नष्ट करते है, तो भी नर-कोटाणुके सदृ युवा-कुमार का भी प्रसद्धवश वणेन हमा है । यह कुमार है “कुत्सित कामवासनावाला, तथा मारः' = मार देनेवाले अतिकामवाला युवा कुमार । सवेकेशकः = सर्वेभ्यः केशं क्लेशं करोतीति ।

English

Your wives are the Apsarases, and ye, Gandharvas, are their lords. Run ye, immortal ones, away: forbear to interfere with men! A charm for success in gambling

अध्याय 4

श्लोक 37.7

आ॒नृत्य॑तः शिख॒ण्डिनो॑ गन्ध॒र्वस्या॑प्सराप॒तेः ।भि॒नद्मि॑ मु॒ष्कावपि॑ यामि॒ शेपः॑

ānṛtyataḥ śikhaṇḍino gandharvasyāpsarāpateḥ | bhinadmi muṣkāvapi yāmi śepaḥ

हिन्दी अर्थ

धास्यतीति (सायण; ४।३७।७) । इवा ओर कपि अतिकामी होते है । (गन्धर्वाः) है गन्ध हारा हिसनीय नर-कीटाणुओ ! (अप्सरसः) जलों मे सरण करनेवाले मात्-कीराणु (वः) तुम्हारी (जायाः इत्) जाया हीह पत्न्यां ही है, (यूयम्) तुम (पतयः) उनके पति हो। (अमर््याः ) हे (अप धावत) उनसे अपगत होकर दौड़ जाओ, भाग जाओ। नर-रोग कोटाणुओं के प्रति उपचार-कर्ता द्वारा कथन हृञा है,

English

Hither I call the Apsaras, victorious, who plays with skill, Her who comes freely fort to view, who wins the stakes in games of dice.

अध्याय 4

श्लोक 37.8

भी॒मा इन्द्र॑स्य हे॒तयः॑ श॒तमृ॒ष्टीर॑य॒स्मयीः॑ ।ताभि॑र्हविर॒दान् ग॑न्ध॒र्वान॑वका॒दान् व्यृऽषतु

bhīmā indrasya hetayaḥ śatamṛṣṭīrayasmayīḥ | tābhirhaviradān gandharvānavakādān vyṛ'ṣatu

हिन्दी अर्थ

हिसायाम् (भ्वादिः) । अमवयं हँ नर रोग-कीटाणु, ये अमनुष्य है, मनुष्य को आकृति के नहीं हैँ । मत्ये हैँ मनुष्य जाति के। धावत=दौडइ जाओ, अन्यथा उपचार-कर््ता तुम्हारा विनाश करदेगा। नर-रोगकीटाणुओं के न रहने से, मादा रोग-कीटाणुओं में वीर्याधानकेन होनेसे, रोग कीटाणु- कंश स्वयं समाप्त हौ जायेगा । सब वणेन कवितामे हा है । का वणन हुआ है, ओर इसके दो मृष्कों ओर शेप के भेदन का कथन हा आदि पौराणिक भाष्यकारो के अनुसार अप्सराएं ओर गन्धव, देवजाति

English

Hither I call that Apsaras who scatters and who gathers up. The Apsaras who plays with skill and takes her winnings in the game. Dancing around us with the dice, winning the wager by her play.

अध्याय 4

श्लोक 37.9

भी॒मा इन्द्र॑स्य हे॒तयः॑ श॒तमृ॒ष्टीर्हि॑र॒ण्ययीः॑ ।ताभि॑र्हविर॒दान् ग॑न्ध॒र्वान॑वका॒दान् व्युऽषतु

bhīmā indrasya hetayaḥ śatamṛṣṭīrhiraṇyayīḥ | tābhirhaviradān gandharvānavakādān vyu'ṣatu

हिन्दी अर्थ

तीन अङ्गो के भेदन के लिएदेव जाति का ही कोई सर्जन है? विजय प्राप्त करती हृरद, (साधुदेविनीम्) ओर साधु-व्यवहारोंवाली, (कृतानि) सुकृत क्मोँ को (कृण्वानाम्) करती हुई (ताम्) उस महिला को (इह हुवे) यहां मँ आमन्वित करता हूं । पद ४७; उ्वंशी;) साधु देविनीम् = दिवु क्रीडा-विजिगीषा-व्यवहार आदि

English

May she obtain the stake for us and gain the victory with skill. May she approach us full of strength: let them not win this wealth of ours.

अध्याय 4

श्लोक 37.10

अ॒व॒का॒दान॑भिशो॒चान॒प्सु ज्यो॑तय माम॒कान्।पि॒शा॒चान्त्सर्वा॑नोषधे॒ प्र मृ॑णीहि॒ सह॑स्व च

avakādānabhiśocānapsu jyotaya māmakān| piśācāntsarvānoṣadhe pra mṛṇīhi sahasva ca

हिन्दी अर्थ

१४६ मयरवेवेदभाष्य काण्ड ४ । अनु° ८ 1 सूक्त ३७ पर (अपि! यामि) आक्रमणकरताहूं अभिप्राय है काट देता ह" । श्णऽ अतिशय हिलते-डलते दीखते हैँ, जिनकी इस क्रिया को नाचना । कहा है । मयूर नाचता है, मोरनी को अपनी ओर कामाथ आकर्षित करन भी, मादा रोग-कौटाण् का आकषेक वणित कियाहै। नररोगकीटाणु,

English

Ye have become attentive since the Apsarases have past away. Where great trees are, Asvatthas and Nyagrodhas with their leafy crests,

अध्याय 4

श्लोक 37.11

स्वेवैकः॑ क॒पिरि॒वैकः॑ कुमा॒रः स॑र्वकेश॒कः ।प्रियो दृश इ॑व भू॒त्वा ग॑न्ध॒र्वः स॑चते॒ स्त्रिय॑स्त॑मि॒तो ना॑शयामसि॒ ब्रह्म॑णा वी॒र्याऽवता

svevaikaḥ kapirivaikaḥ kumāraḥ sarvakeśakaḥ | priyo dṛśa iva bhūtvā gandharvaḥ sacate striyastamito nāśayāmasi brahmaṇā vīryā'vatā

हिन्दी अर्थ

तरलांश का आधान करता दहै तभी रोग-कीटाणुञों को वंशपरम्परा चालू होती है । इस परम्परा का उच्छेद तभी सम्भव है जवकि नर रोग-कीटाणु के अण्डो का भेदन कर दिया जाय, भौर उसकी प्रजननेन्द्रियि को काट । दिया जाय । इसके लिए निष्णात वैज्ञानिक डाक्टर अपेक्षित रहै । भेदन

English

There where your swings are green and bright, and lutes and cymbals sound in tune, ‘Ye have become attentive since the Apsarases have past away. Hither hath come this one, the most effectual of herbs and plants.

अध्याय 4

श्लोक 37.12

जा॒या इद् वो॑ अप्स॒रसो॒ गन्ध॑र्वाः॒ पत॑यो यू॒यम्।अप धावतामर्त्या॒ मर्त्या॒न् मा स॑चध्वम्

jāyā id vo apsaraso gandharvāḥ patayo yūyam| apa dhāvatāmartyā martyān mā sacadhvam

हिन्दी अर्थ

ओषधि (मन्त्र २) हारा रोग-कीटाणुओों को मारदेनेका निर्देश भी किया है । इसमे भेदन ओर काटने की भावर्यकता नहीं होती । ओषधि के प्रयोक्ताभों का वणन (मन्रर)मेहै। ताभिैविरदान म॑न्धव।नैवकाद)न् च्य पतु ॥८॥ (शतमृष्टीः) जोकि सौ धाराओंवाले है, ओर (अयस्मयीः) लौहनिितरह, (ताभिः) उन दारा (हविः अदान्) हवि के खानेवाले, ओर (अवकादान्) गन्धव हँ नर रोग-कोटाणु, जोकि गन्ध द्रारा हिसितहोतेदहैं। ये हवियों

English

Let Ajasringi penetrate, Arāaki with sharpened horn. From the Gandharva, dancing near, the lord of the Apsarases,

स्रोत: bhavykhatri/DharmicData · प्राप्त 3/6/2026

शास्त्रीय प्रामाणिकता एवं पारदर्शकताSources & Interpretation

स्रोत, संस्करण एवं व्याख्या वर्गीकरण

धर्म ग्रंथ पर मूल शास्त्र, पारंपरिक भाष्य और आधुनिक व्याख्या को पूर्णतः पृथक रखा जाता है ताकि पाठक को किसी भी व्याख्या के शास्त्र होने का भ्रम न हो।

सामग्री वर्गीकरण संकेत (Epistemic Content Labels)

6 स्तरिय प्रमाण व्यवस्था
मूल पाठOriginal text

अपौरुषेय / प्रामाणिक शास्त्र (Primary Canonical Scripture)

मूल संस्कृत, प्राकृत अथवा अवधी श्लोक/मंत्र। यह सर्वोच्च प्रमाण (प्रस्थान) है। इस पाठ में किसी भी आधुनिक व्याख्याकार का हस्तक्षेप नहीं है।

शाब्दिक अनुवादLiteral translation

पदार्थ व अन्वय (Direct Grammatical & Word-for-Word Meaning)

व्याकरणसम्मत प्रत्यक्ष शब्दार्थ (अन्वय)। बिना किसी दार्शनिक संप्रदाय के पूर्वाग्रह के, संस्कृत शब्दों का सटीक भाषांतर।

पारंपरिक भाष्यTraditional commentary

आचार्य परंपरा व टीका (Classical Lineage Commentary)

प्राचीन आचार्य परंपरा (यथा शंकराचार्य, रामानुजाचार्य, मध्वाचार्य, श्रीधर स्वामी) द्वारा विरचित शास्त्रीय भाष्य व टीकाएं।

सरल व्याख्याSimple explanation

भावार्थ व सुबोध प्रबोधन (Accessible Pedagogical Exposition)

आधुनिक जिज्ञासुओं के लिए सरल भाषा में भावार्थ। यह मूल मंत्र नहीं, बल्कि पाठ को सुगम बनाने हेतु संपादकीय व्याख्या है।

आधुनिक चिंतनModern reflection

समसामयिक विमर्श व अनुप्रयोग (Contemporary Application & Analysis)

दार्शनिक, मनोवैज्ञानिक व वैज्ञानिक समरूपताओं पर आधुनिक चिंतन। यह मूल शास्त्र का अंग नहीं है और इसे शास्त्रोक्त सिद्धांत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

शोध टिप्पणीResearch note

पांडुलिपि एवं ऐतिहासिक शोध (Critical Apparatus & Manuscript Research)

पांडुलिपि विविधताएं, पाठ-भेद (variant readings), छंद रचना, और ऐतिहासिक व तुलनात्मक भाषावैज्ञानिक शोध। यह शास्त्र का मूल संदेश बदलने हेतु नहीं, बल्कि पाठ की प्रामाणिकता परखने के लिए है।