Chandogya Upanishad
63
अध्याय 63 / 154

Adhyāya 63

प्रपाठक खण्ड 63

4 श्लोक

पूर्ण अध्याय पाठ4 श्लोक

अध्याय 63

श्लोक 4.7.1

॥ हँसस्ते पादं वक्तेति स ह श्वोभूते गा अभिप्रस्थापयांचकार ता यत्राभि सायं बभूवुस्तत्राग्निमुपसमाधाय गा उपरुध्य समिधमाधाय पश्चादग्नेः प्राङुपोपविवेश

|| ham̐saste pādaṃ vakteti sa ha śvobhūte gā abhiprasthāpayāṃcakāra tā yatrābhi sāyaṃ babhūvustatrāgnimupasamādhāya gā uparudhya samidhamādhāya paścādagneḥ prāṅupopaviveśa

हिन्दी अर्थ

इसे संयद्राम' ेसा कहते रै, क्योंकि सम्पूरणं सेवनीय वसतु सब भोरसे इसे ही प्राप्त होती है; जो इस प्रकार जानता है उसे घम्पणं सेवनीय वहतुं सव ओरसे प्र होती र इध पूर्वोक्त पुरुषको (संयद्वाम पसा कहते है । क्यो १ क्योंकि अर्थात्‌ शोभन पदां सव भरसे यही वामनी है, क्योंकि यदी सम्पूण वामा वहन करता है । जो एेसा जानता है वह सम्पूणं वामोको वहन करता ष

English

'A Hamsa (flamingo, meant for the sun) will declare to you another foot of Brahman.' (After these words of Agni), Satyakâma, on the morrow, drove the cows onward. And when they came towards the evening, he lighted a fire, penned the cows, laid wood on the fire, and sat down behind the fire, looking toward the east.

अध्याय 63

श्लोक 4.7.2

तँहँस उपनिपत्याभ्युवाद सत्यकाम३ इति भगव इति ह प्रतिशुश्राव

tam̐ham̐sa upanipatyābhyuvāda satyakāma3 iti bhagava iti ha pratiśuśrāva

हिन्दी अर्थ

हि सर्वाणि वामानि पुण्यकर्म नयति प्रापयति वहति चात्म यही वामनी है, क्योंकि यही एष उ एव भामनीरेष हि सर्वषु खोकेषु भाति सर्वेषु रोकेषु भाति य पवं वेद्‌

English

Then a Hamsa flew near and said to him 'Satyakâma.' He replied: 'Sir.'

अध्याय 63

श्लोक 4.7.3

ब्रह्मणः सोम्य ते पादं ब्रवाणीति ब्रवीतु मे भगवानिति तस्मै होवाचाग्निः कला सूर्यः कला चन्द्रः कला विद्युत्कलैष वै सोम्य चतुष्कलः पादो ब्रह्मणो ज्योतिष्मान्नाम

brahmaṇaḥ somya te pādaṃ bravāṇīti bravītu me bhagavāniti tasmai hovācāgniḥ kalā sūryaḥ kalā candraḥ kalā vidyutkalaiṣa vai somya catuṣkalaḥ pādo brahmaṇo jyotiṣmānnāma

हिन्दी अर्थ

यही भामनी है, क्योंकि यष्ठी सम्पूणं लोको भासमान होता द। नो रसा जानता ह वह सम्पूणं छोकोमिं भासमान होता रै एव उ एव भामनीरेष हि यही भामनी है, क्योंकि समप यस्मात्सर्वेषु लोकेष्वादित्यचन्द्रा- रोम आदित्य, चन्द्र छलौर अगि दिह लादिके रूपमे यदौ मासमान- अथ यद चैवारिमञ्छव्यं कर्वन्ति यदि च नाचि माणपक्षायान्षड़ दङ्डेति मासारस्तान्मासेभ्यः संव

English

The Hamsa said: 'Friend, I will declare unto you one foot of Brahman.' 'Declare it, Sir,' he replied. He said to him: 'Fire is one quarter, the sun is one quarter, the moon is one quarter, lightning is one quarter. This is a foot of Brahman, consisting of four quarters, and called Gyotishmat (full of light).

अध्याय 63

श्लोक 4.7.4

स य एतमेवं विद्वाँश्चतुष्कलं पादं ब्रह्मणो ज्योतिष्मानित्युपास्ते ज्योतिष्मानस्मिँल्लोके भवति ज्योतिष्मतो ह लोकाञ्जयति य एतमेवं विद्वाँश्चतुष्कलं पादं ब्रह्मणो ज्योतिष्मानित्युपास्ते

sa ya etamevaṃ vidvām̐ścatuṣkalaṃ pādaṃ brahmaṇo jyotiṣmānityupāste jyotiṣmānasmim̐lloke bhavati jyotiṣmato ha lokāñjayati ya etamevaṃ vidvām̐ścatuṣkalaṃ pādaṃ brahmaṇo jyotiṣmānityupāste

हिन्दी अर्थ

अव ति पूर्वोक्त हवेत गति बतलाती है-- इसमे छथि शवकषमं करे धथवा न ढरे, वह अवचिरभिमानी देदताको ही प्राप्त होता है। पिर भर्चिरभिमानी देवतासे दिवसाभिमानी देवताको, दिवकषाभि- अथेदानीं यथोक्त ब्रह्मविदो न ब्रह्म प्रामोति नच ढृतेन रवकर्मणास्य कशनास्यधिको

English

'He who knows this and meditates on the foot of Brahman, consisting of four quarters, by the name of Gyotishmat, becomes full of light in this world. He conquers the worlds which are full of light, whoever knows this and meditates on the foot of Brahman, consisting of four quarters, by the name of Gyotishmat. Next: IV, 8 Sacred Texts | Hinduism

स्रोत: https://sanskritdocuments.org/doc_upanishhat/chhandogya.itx · प्राप्त 3/6/2026

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शास्त्रीय प्रामाणिकता एवं पारदर्शकताSources & Interpretation

स्रोत, संस्करण एवं व्याख्या वर्गीकरण

धर्म ग्रंथ पर मूल शास्त्र, पारंपरिक भाष्य और आधुनिक व्याख्या को पूर्णतः पृथक रखा जाता है ताकि पाठक को किसी भी व्याख्या के शास्त्र होने का भ्रम न हो।

सामग्री वर्गीकरण संकेत (Epistemic Content Labels)

6 स्तरिय प्रमाण व्यवस्था
मूल पाठOriginal text

अपौरुषेय / प्रामाणिक शास्त्र (Primary Canonical Scripture)

मूल संस्कृत, प्राकृत अथवा अवधी श्लोक/मंत्र। यह सर्वोच्च प्रमाण (प्रस्थान) है। इस पाठ में किसी भी आधुनिक व्याख्याकार का हस्तक्षेप नहीं है।

शाब्दिक अनुवादLiteral translation

पदार्थ व अन्वय (Direct Grammatical & Word-for-Word Meaning)

व्याकरणसम्मत प्रत्यक्ष शब्दार्थ (अन्वय)। बिना किसी दार्शनिक संप्रदाय के पूर्वाग्रह के, संस्कृत शब्दों का सटीक भाषांतर।

पारंपरिक भाष्यTraditional commentary

आचार्य परंपरा व टीका (Classical Lineage Commentary)

प्राचीन आचार्य परंपरा (यथा शंकराचार्य, रामानुजाचार्य, मध्वाचार्य, श्रीधर स्वामी) द्वारा विरचित शास्त्रीय भाष्य व टीकाएं।

सरल व्याख्याSimple explanation

भावार्थ व सुबोध प्रबोधन (Accessible Pedagogical Exposition)

आधुनिक जिज्ञासुओं के लिए सरल भाषा में भावार्थ। यह मूल मंत्र नहीं, बल्कि पाठ को सुगम बनाने हेतु संपादकीय व्याख्या है।

आधुनिक चिंतनModern reflection

समसामयिक विमर्श व अनुप्रयोग (Contemporary Application & Analysis)

दार्शनिक, मनोवैज्ञानिक व वैज्ञानिक समरूपताओं पर आधुनिक चिंतन। यह मूल शास्त्र का अंग नहीं है और इसे शास्त्रोक्त सिद्धांत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

शोध टिप्पणीResearch note

पांडुलिपि एवं ऐतिहासिक शोध (Critical Apparatus & Manuscript Research)

पांडुलिपि विविधताएं, पाठ-भेद (variant readings), छंद रचना, और ऐतिहासिक व तुलनात्मक भाषावैज्ञानिक शोध। यह शास्त्र का मूल संदेश बदलने हेतु नहीं, बल्कि पाठ की प्रामाणिकता परखने के लिए है।