अध्याय 150
श्लोक 151
तद्बलं दानवेन्द्राणां मायया कालनेमिनः तद्दृष्ट्वा दानवानीकं लब्धसंज्ञं दिवाकरः उवाचारुणमुद्भ्रान्तः कोपाल्लोकैकलोचनः
tadbalaṃ dānavendrāṇāṃ māyayā kālaneminaḥ taddṛṣṭvā dānavānīkaṃ labdhasaṃjñaṃ divākaraḥ uvācāruṇamudbhrāntaḥ kopāllokaikalocanaḥ
हिन्दी अर्थ
कहते हैं । ऐसा वृषभ उत्सर्ग कर देना चाहिए, उसे घरमें वृष एवं स मोक्तव्यो न सन्धायों गृहे भवेत्। पालना ठीक नहीं हैं; क्योंकि ऐसे वृषभके लिये लोकमें तदर्थमेषा चरति लोके गाथा पुरातनी॥ ३९ एक ऐसी पुरानी गाथा प्रचलित है कि बहुतेरे पुत्रोंकी एष्टव्या बहवः पुत्रा यद्येकोऽपि गयां ब्रजेत्। कामना करनी चाहिए; क्योंकि उनमेंसे कोई भी तो गौरी चाप्युद्दहेत् कन्यां नीलं वा वृषमुत्सृजेत्॥ ४० गयाकी यात्रा करेगा या गौरी कन्याका दान करेगा या नीले वृषभका उत्सर्ग करेगा। राजन्! ऐसे लक्षणयुक्त वृषभका एवं वृषं kT लक्षणसम्प्रयुक्तं चाहे वह घरमें उत्पन्न हुआ हो या खरीदा गया हो, उत्सर्ग गृहोद्भवं क्रीतमथापि राजन् कर महात्मा पुरुष कभी मृत्युके भयसे शोकग्रस्त नहीं मुक्त्वा न शोचेन्मरणं महात्मा होता; उसे मोक्षकी प्राप्ति हो जाती है। इसीलिये मैं आपसे
English
'' 1 have killed TVnisma, lU<a»a. \ho niiglity Karna, llio King Duryo- dhana, our kinsmen.and ralitT king', whf> oi-ji-idered l.iiemselves hravo soldiers and lioroe. " lovinda! uliai \:< n.>w tlie gtjnd o>f my life, aiid how and why sl)Oulil 1 rnhi the eij)]>ire'.la*.