श्रीरामचरितमानस

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Shri Ramcharitmanas 6.2

मूल पाठSource scriptureOriginal Sanskritमूल संस्कृत

शङ्खेन्द्वाभमतीवसुन्दरतनुं शार्दूलचर्माम्बरं कालव्यालकरालभूषणधरं गङ्गाशशाङ्कप्रियम्।काशीशं कलिकल्मषौघशमनं कल्याणकल्पद्रुमं नौमीड्यं गिरिजापतिं गुणनिधिं कन्दर्पहं शङ्करम्

व्याख्याVyakhya
संपादकीय व्याख्याEditorial explanationVyakhya (व्याख्या)व्याख्या

आध्यात्मिक अहंकार पर तुलसीदास जी का सूक्ष्म अवलोकन है कि जो व्यक्ति अपनी भूल स्वीकार नहीं कर सकता और दूसरों से सहायता नहीं मांग सकता, उसका पतन निश्चित है। लंकाकांड में रावण इसका जीवंत उदाहरण है — उसके पास हितैषी सलाहकार थे, उसका अपना भाई विभीषण था, उसकी पत्नी मंदोदरी थी — इन सभी ने उसे सही मार्ग दिखाने का प्रयास किया। परंतु वह उनकी बात नहीं सुन सका। आध्यात्मिक परिपक्वता की शुरुआत अपनी भूलों को स्वीकार करने की तत्परता और मार्गदर्शन मांगने की विनम्रता से होती है।

विज्ञान एवं आधुनिक उपयोगScience & Modern Application
आधुनिक चिंतनModern reflection · not scriptureContemplative Reflection & Actionआधुनिक चिंतन
क्या आप बिना किसी स्पष्टीकरण या बहाने के सहजता से कह सकते हैं कि "मुझसे भूल हुई"? क्या आप बिना किसी दिखावे या रणनीति के किसी से मदद मांग सकते हैं? यदि ये दोनों बातें आपके लिए अत्यंत कठिन हैं, तो समझें कि आप अपने भीतर रावण की लंका का एक अंश पाल रहे हैं। आज एक छोटा सा अभ्यास करें: अपनी किसी एक भूल को पूरी ईमानदारी से उस व्यक्ति के सामने स्वीकार करें जो इस स्वीकृति का हकदार है।
शोध संदर्भResearch context · not scriptureComparative Research Noteशोध टिप्पणी

डनिंग-क्रूगर प्रभाव (क्रूगर और डनिंग, 1999): जिन लोगों में वास्तविक योग्यता न्यूनतम होती है, वे अत्यधिक आत्मविश्वास प्रदर्शित करते हैं, क्योंकि उनमें अपनी कमियों के मूल्यांकन की क्षमता ही नहीं होती। अत्यधिक आत्ममुग्धता (नार्सिसिज्म) पर शोध पुष्टि करता है कि अपनी भूल स्वीकार न कर पाना और रचनात्मक प्रतिक्रिया (फीडबैक) न ले पाना, भविष्य में विनाशकारी परिणामों को जन्म देता है, चाहे तात्कालिक रूप से कितनी भी सफलता क्यों न मिली हो।

A modern parallel offered for reflection. It is not part of the scripture, and it has not been checked against the original sources it may allude to.

स्रोतSources and editionSources and editionस्रोत एवं संस्करण

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Sanskrit edition
Gita Press Illustrated Edition (Book Code 0080). Gita Press Gorakhpur (Official Publication)
Translation
Gita Press Editorial Board (Hindi)
Last updated
2026-10-23
Licence note (as recorded)
Public Domain Awadhi text and Hindi translation
पाठ-भेद · Variant readings
Collated with Kashi Nagari Pracharini Sabha recension.

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