Atharva Veda
11
अध्याय 11 / 20

Kanda 11

काण्ड 11

420 श्लोकभाग 2/7 · श्लोक 3.1–3.4-17

पूर्ण अध्याय पाठ74 श्लोक

अध्याय 11

श्लोक 3.1

ओदनः।(१) १-३१ अथर्वा।ओदनः (बार्हस्पत्यौदनः।) ( त्रयः पर्याया)।१, १४ आसुरी गायत्री, २ त्रिपदा समविषमा गायत्री, ३, ६, १० आसुरी पङ्क्तिः, ४, ८ साम्न्यनुष्टुप्, ५, १३, १५, २५ साम्न्युष्णिक्, ७, १९-२२ प्राजापत्याऽनुष्टुप्, ९, १७-१८ आसुर्यनुष्टुप्, ११ भुरिगार्च्नुष्टुप्, १२ याजुषी जगती, १६ २३ आसुरी बृहती, २४ त्रिपदा प्राजापत्या बृहती, २६ आर्च्युष्णिक्, २७-२९ साम्नी बृहती, (२८-२९ भुरिक्), ३० याजुषी त्रिष्टुप्, ३१ अल्पशः पङ्क्तिरुत याजुषी।तस्यौ॑द॒नस्य॒ बृहस्पतिः॒ शिरो॒ ब्रह्म॒ मुख॑म्

odanaḥ| (1) 1-31 atharvā| odanaḥ (bārhaspatyaudanaḥ|) ( trayaḥ paryāyā)| 1, 14 āsurī gāyatrī, 2 tripadā samaviṣamā gāyatrī, 3, 6, 10 āsurī paṅktiḥ, 4, 8 sāmnyanuṣṭup, 5, 13, 15, 25 sāmnyuṣṇik, 7, 19-22 prājāpatyā'nuṣṭup, 9, 17-18 āsuryanuṣṭup, 11 bhurigārcnuṣṭup, 12 yājuṣī jagatī, 16 23 āsurī bṛhatī, 24 tripadā prājāpatyā bṛhatī, 26 ārcyuṣṇik, 27-29 sāmnī bṛhatī, (28-29 bhurik), 30 yājuṣī triṣṭup, 31 alpaśaḥ paṅktiruta yājuṣī| tasyaudanasya bṛhaspatiḥ śiro brahma mukham

हिन्दी अर्थ

खानां प्रकरणानुसार संहार करना) । स्वकीय राष्ट्र का पालन तथा कां० ११। सु० २ भरथवेवेद-माष्य . ३७ मुञ्जतीभ्यः==भथवा इकटूठे होकर भोजन करने वाली सेनाग्रं के १ क, १्मेखरकी सेनाभ्रों रौर उन के प्रति नमस्कारो का वर्णन

English

Pasupati, Lord of victims. Be gracious to the quadruped and biped of the believer in the

अध्याय 11

श्लोक 3.1-2

(२) ३२-४९ मन्त्रोक्ताः।३२, ३८, ४१ (प्रथमा), ३२-४९ (सप्तमी) साम्नी त्रिष्टुप्, ३२, ३५,४२ (द्वितीया), ३२-४९ (तृतीया) ३३-३४, ४४-४८ (पञ्चमी) एकपदाऽऽसुरी गायत्री, ३२, ४१, ४३, ४७ दैवी जगती, ३८, ४४, ४६ (द्विo), ३२, ३५-४३, ४९ (पञ्चo) एकपदाऽऽसुर्यनुष्टुप्, ३२-४९ (षष्ठी) साम्न्यनुष्टुप्, ३२-४९ (प्रo) आर्च्यनुष्टुप्, ३७ (प्रo) साम्नी पङ्क्तिः, ३३, ३६, ४०, ४७-४८ (द्विo) आसुरी जगती, ३४, ३७, ४१, ४३, ४५ (द्विo) आसुरी पङ्क्तिः, ३४ (चo) आसुरी त्रिष्टुप्, ३५, ४६, ४८ (चo) याजुषी गायत्री, ३६-३७, ४० (चo) दैवी पङ्क्तिः ३८-३९ (चo) प्राजापत्या गायत्री, ३९ (द्विo) आसुर्युष्णिक्, ४२, ४५, ४९ (चo) दैवी त्रिष्टुप्, ४९ (द्विo) एकपदा भुरिक्साम्नी बृहती।तत॑श्चैनम॒न्येन॑ शी॒र्ष्णा प्राशी॒र्येन॑ चै॒तं पूर्व॒ ऋष॑यः॒ प्राश्न॑न्

(2) 32-49 mantroktāḥ| 32, 38, 41 (prathamā), 32-49 (saptamī) sāmnī triṣṭup, 32, 35,42 (dvitīyā), 32-49 (tṛtīyā) 33-34, 44-48 (pañcamī) ekapadā''surī gāyatrī, 32, 41, 43, 47 daivī jagatī, 38, 44, 46 (dvio), 32, 35-43, 49 (pañcao) ekapadā''suryanuṣṭup, 32-49 (ṣaṣṭhī) sāmnyanuṣṭup, 32-49 (prao) ārcyanuṣṭup, 37 (prao) sāmnī paṅktiḥ, 33, 36, 40, 47-48 (dvio) āsurī jagatī, 34, 37, 41, 43, 45 (dvio) āsurī paṅktiḥ, 34 (cao) āsurī triṣṭup, 35, 46, 48 (cao) yājuṣī gāyatrī, 36-37, 40 (cao) daivī paṅktiḥ 38-39 (cao) prājāpatyā gāyatrī, 39 (dvio) āsuryuṣṇik, 42, 45, 49 (cao) daivī triṣṭup, 49 (dvio) ekapadā bhuriksāmnī bṛhatī| tataścainamanyena śīrṣṇā prāśīryena caitaṃ pūrva ṛṣayaḥ prāśnan

हिन्दी अर्थ

संहारक । ये दोनों नाम एकही परमेदवर-देव के हैँ । गुण-कर्मे भेद के कारण परमेदवर भव भी दहै, श्रौर शवं मी । (श्रभियातम् =मभियन = गाव अदवाः पुरवा भ्रजावयः” (श्रथवं° ११।२। €) 1 सूक्त २ के देवता को ३ नामों द्वारा सम्बोधित किया है, सव, दावं भ्रौर द्र । मव रौर शवं तो प्राणियौ की, उन के बुरे कमोँ दवारा, दण्डित कर खलाने वाला है, ताकिवे दुःख मोग कर सन्मे गामी हो सके 11 रि नै कोष्ठे मा शरीराणि कतैनलिक्छवेभ्यो माक्षिकास्ते पदयते वयांसि ते पिधेसे मा विदन्त ॥२॥ (शने) कृत्तौ के लिये, (कोष्ट) गीदडो क लिये, (अलिक्लवेभ्यः)

English

Pasupati, Lord of victims. Be gracious to the quadruped and biped of the believer in the

अध्याय 11

श्लोक 3.1-3

३२॥ तत॑श्चैनम॒न्याभ्यां॒ श्रोत्रा॑भ्यां॒ प्राशी॒र्याभ्यां॑ चै॒तं पूर्व॒ ऋष॑यः॒ प्राश्न॑न्

32|| tataścainamanyābhyāṃ śrotrābhyāṃ prāśīryābhyāṃ caitaṃ pūrva ṛṣayaḥ prāśnan

हिन्दी अर्थ

परौर (ये) जो (अविष्यवः) मांसभ्रिय (कृष्णाः). काले कौए ह, उन के लिये, (पशपत) है पशु क श्रधिपति ! (ति) तेरी जो (मक्षिकाः) मक्छियां द, (वते) 'तेरे जो (वयांसि) श्रन्थ पक्षी है .उन के, लिये, (शरीराणि) हमारे (मा विदन्त) हमारे शरीरो को न प्राप्त करे ।

English

Foremost we go to meet his car, the chariot of the long-haired God,

अध्याय 11

श्लोक 3.1-4

३३॥ तत॑श्चैनम॒न्याभ्या॑म॒क्षीभ्यां॒ प्राशी॒र्याभ्यां॑ चै॒तं पूर्व॒ ऋष॑यः॒ प्राश्न॑न्

33|| tataścainamanyābhyāmakṣībhyāṃ prāśīryābhyāṃ caitaṃ pūrva ṛṣayaḥ prāśnan

हिन्दी अर्थ

हमारे मृत शरीरो को युद्ध भूमि म पशुपक्षी न खाएं । बेद दुष्टिमेतो ॥ रुलाने वाले, (सहस्राक्षाय) हजारों पापि्यो का क्षय करने वाले (ते) तेरे प्रति (नमः) नमस्कार (कृण्मः) हम करते है । परमेदवरः" (सायण). रोपयः = परमेश्वर की विमोहक राक्तियां नाना दातृत्व भ्रादि,-परमेदवर की राक्तियां तथा विभूतियां नाना ई, जोकि हमे विमुग्ध करती है । इन सबके लिये हम परमेश्वर.को नमस्कारः करते

English

Drawn by brown horses, dusky, black, o’erthrowing, slaying, terrible. Let reverence be paid to him.

अध्याय 11

श्लोक 3.1-5

३४॥ तत॑श्चैनम॒न्येन॒ मुखे॑न॒ प्राशी॒र्येन॑ चै॒तं पूर्व॒ ऋष॑यः॒ प्राश्न॑न्

34|| tataścainamanyena mukhena prāśīryena caitaṃ pūrva ṛṣayaḥ prāśnan

हिन्दी अर्थ

क्षय करने बाले (ते) तेरे लिये (नमः) नमस्कार (कृष्मः) हम करते सव ्रोर शरन्धकार से वाजित (दिवः) च.लोक सि (रार); ऊपर त्रतेमान ४० भ्रथरव॑वेद-भाष्य कां० ११।सूु०२ (१ मुख के लिये (तुभे (नमः) नमस्कार हो, .(यानि चक्षू षि). जो चक्षए है तदथं (ते) तुमे नमस्कार हो । (त्वचे) त्वचा के लिये, (रूपाय) रूप के . लिये, (संदृशे) सम्यक् दरदौन के लिये (प्रतीचीनाय)

English

Cast not thy club at us, thy heavenly weapon. Lord of Beasts, be not wroth with us. Let reverence be paid to thee.

अध्याय 11

श्लोक 3.1-6

३५॥ तत॑श्चैनम॒न्यया॑ जि॒ह्वया॒ प्राशी॒र्यया॑ चै॒तं पूर्व॒ ऋष॑यः॒ प्राश्न॑न्

35|| tataścainamanyayā jihvayā prāśīryayā caitaṃ pūrva ṛṣayaḥ prāśnan

हिन्दी अर्थ

(ददभ्यः) दान्तो के लिये, (गन्धाय) गन्ध के लिये (ते नमः) तुमे नमस्कार हों ॥६॥ ॥ . के लिये = तेरी इन वस्तुभ्रौं के परिज्ान के निमित्त । “मुखाय मुखादि केःस्वरूप निम्न लिखित है-- सकम्म का पुल है बरहम भर्थातु वेद या बरहावेद, भयवंवेद ९। “चक्षुषि” = चकषुरङ्किरसो भवन्” (भ्रथववे9 १०।७।१८१३४) जिसं की चद्मुए ह सुय । की रमयां तथा.सूयं श्रौर चान्द (्रथवं० १०।७।३२) । “त्वचे "= ¦ निज ति स्वरूप सेषेरा हृभरा है, जैसे कि भ्रस्मदादि के शरीरों

English

Shake thy celestial branch above some others elsewhere, not o’er us. Do us no harm, but comfort us: avoid thou us, and be not wroth. Never let us contend with

अध्याय 11

श्लोक 3.1-7

३६॥ तत॑श्चैनम॒न्यैर्दन्तैः॒ प्राशी॒र्यैश्चै॒तं पूर्व॒ ऋष॑यः॒ प्राश्न॑न्

36|| tataścainamanyairdantaiḥ prāśīryaiścaitaṃ pūrva ṛṣayaḥ prāśnan

हिन्दी अर्थ

जगत् को सुरक्षित कररहा है । सूपाय = रूपयतीतिः सूपम् 1 परमेश्वर का० ११ सु° २ भयवंवेद-भाष्य रः क ४१ परिज्ञान के लिए परमेश्वर को नमस्कार है ।५॥ “जिह्वाये = “जिह्वां मधुक्चामुत" (अथवं० १०।८।१९) मे मधुका

English

thee. Covet not thou our kine or men, covet not thou our goats or sheep.

अध्याय 11

श्लोक 3.1-8

३७॥ तत॑श्चैनम॒न्यैः प्रा॑णापा॒नैः प्राशी॒र्यैश्चै॒तं पूर्व॒ ऋष॑यः॒ प्राश्न॑न्

37|| tataścainamanyaiḥ prāṇāpānaiḥ prāśīryaiścaitaṃ pūrva ṛṣayaḥ prāśnan

हिन्दी अर्थ

(निषं० १।११) वाणी को कशा इस लियः कहते है कि यह् भ्रं को प्रकाधित करती है । तथा जिह्वा.वाड नाम (निषंऽ १।११) =“श्रास्याय'" = “्रन्निं हिन प्राणियों का उपलक्षक हैः । गन्धाय पद भी पदमेर्वर की संहारक. मे भ्रत्यधिकंदहैँ।ये है रोगकीटाणु । येःरोग कीटाणु प्रतिवर्षं लाखो की संख्या मे प्रजा का संहार करते रहते हैँ । ॥

English

Elsewhither, strong One! turn thine aim: destroy the mockers’ family. Homage to him whose weapon, Cough or Fever, assails one like the neighing of a stallion; to

अध्याय 11

श्लोक 3.1-9

३८॥ तत॑श्चैनम॒न्येन॒ व्यच॑सा॒ प्राशी॒र्येन॑ चै॒तं पूर्व॒ ऋष॑यः॒ प्राश्न॑न्

38|| tataścainamanyena vyacasā prāśīryena caitaṃ pūrva ṛṣayaḥ prāśnan

हिन्दी अर्थ

रखना चाहिए किं मन्व भे (ते). पद परमेश्वर के भङ्गो का बण॑न नहीं करते, जिन द्वारा कि परमेरवर को शरीरधारी मानने का नरम हो सके, (अस्त्रा) वच फकने वाले, (नीलशिलण्डेन ) नीलमेषरूपी , केश संनिवेश वाजे, (सहस्राक्षेण) हजारों का क्षय करने , वाले, (वाजिना) करने वाले का हनन करने वाले, (स्द्रेण) रखुलाने वाले (तेन) उस पर-

English

him who draws one forth and then another! Homage be paid him with ten Sakvari verses who stands established in the air’s mid-region,

अध्याय 11

श्लोक 3.1-10

३९॥ तत॑श्चैनम॒न्येन॑ पृ॒ष्ठेन॒ प्राशी॒र्येन॑ चै॒तं पूर्व॒ ऋष॑यः॒ प्राश्न॑न्

39|| tataścainamanyena pṛṣṭhena prāśīryena caitaṃ pūrva ṛṣayaḥ prāśnan

हिन्दी अर्थ

मेदवर के साथ (मा समरामि) हम समरु्माकवना वालेनं हो, उस के. नियमों का उत्लंघन करने वाले न हो. नीले भ्र्थात् घने.मेष मानो उसके कंश संनिवेश है, वह हजारों का क्षय करने वाला है । वालिना वाजः बलनाम (निवं० र ९) तदुक्तेन । प्ररेच्वर भी विद्युद्-देव के सदृश महाबली है । वह उस का घात करता है जोकि सूद् द्वारा निजधन की वद्धि करता, भ्रौर निजघन को परोपकार , लिये उपस्थित किया है (निरुक्त ६।६।३२) ; यथा-- ..

English

slaying non-sacrificing God-despisers!

अध्याय 11

श्लोक 3.1-11

४०॥ तत॑श्चैनम॒न्येनोर॑सा॒ प्राशी॒र्येन॑ चै॒तं पूर्व॒ ऋष॑यः॒ प्राश्न॑न्

40|| tataścainamanyenorasā prāśīryena caitaṃ pūrva ṛṣayaḥ prāśnan

हिन्दी अर्थ

कुलीनः । एसे व्यविति को “नैचाशाख . कटा ह, भर्थात् नीघकुल वाला । पसे व्यक्ति को धनं से 1 करनेके लिये प्राथनाकी गई है श्रानो भर ॥ १, राजा दवारा मिरिष्ट नियमों का उल्लंषन करना मानो उस के सथ ॥ 1 भ्यहच्च'" इति च्लेः भ्रडः (सायण) । श ।

English

For thee were forest beasts and sylvan creatures placed in the wood, and small birds, swans, and eagles.

अध्याय 11

श्लोक 3.1-12

४१॥ तत॑श्चैनम॒न्येनो॒दरे॑ण॒ प्राशी॒र्येन॑ चै॒तं पूर्व॒ ऋष॑यः॒ प्राश्न॑न्

41|| tataścainamanyenodareṇa prāśīryena caitaṃ pūrva ṛṣayaḥ prāśnan

हिन्दी अर्थ

दुःखो मे (नः) हमें (परि वृणक्तु) छृडाए, (भ्रापः इव अ्रग्निः) जसे परमेद्वर (नः) हमे (परिवृणक्तु) दुःखो से चडाए । (नः, मा, भ्रमि- मास्त)" मव हमारी हिसा न करे । (रस्म नमः भ्स्तु) इसे हमारा नमः (पशुपते) है पशुभ्रों के पति ! (इमे) ये (गावः श्रद्वा पुरुषाः ्रजावयः) गौए, भ्रर्व, पुरुष, बकरियां, मेड (पशवः) प्रशु, (पञ्च विभक्ताः). जो कि पांच विभागों मे विभक्त है, (तव) तेरे है (ते भवाय) मष्ट त्पादक तेरे लिये (चतुः नमः) चार वार नमस्कार हो, (अष्ट कत्वः) भ्राठ वार तथा (दशकृत्वः) दस वार (नमः) नमस्कार हो । ं मे नमस्कार हो । अष्टकृत्वः चार मृख्यदिशाभरों तथा चार उप-

English

Floods, Lord of Beasts! contain thy living beings: to swell thy strength flow the celestial Waters.

अध्याय 11

श्लोक 3.1-13

४२॥ तत॑श्चैनम॒न्येन॑ व॒स्तिना॒ प्राशी॒र्येन॑ चै॒तं पूर्व॒ ऋष॑यः॒ प्राश्न॑न्

42|| tataścainamanyena vastinā prāśīryena caitaṃ pūrva ṛṣayaḥ prāśnan

हिन्दी अर्थ

न भ्रथवेवेद-माष्य का० ११ सु०र२ परिक्रमा करते हृए परमेद्वर को नमस्कार करने कां विधान हुभरा है। चतुः, ्रष्ट श्रौर द, - ये वक्रत्पिक हैँ । हई दिवाए' (तव) तेरी है, (दौः) दयलोक (तव) तेरा है, (पृथिवी तव) मे विद्यमान है, इसलिये वह सात्मक हुम्रा-हुभा है

English

Porpoises, serpents, strange aquatic monsters, fishes, and things unclean at which thou shootest.

अध्याय 11

श्लोक 3.1-14

४३॥ तत॑श्चैनम॒न्याभ्या॑मू॒रुभ्यां॒ प्राशी॒र्याभ्यां॑ चै॒तं पूर्व॒ ऋष॑यः॒ प्राश्न॑न्

43|| tataścainamanyābhyāmūrubhyāṃ prāśīryābhyāṃ caitaṃ pūrva ṛṣayaḥ prāśnan

हिन्दी अर्थ

(पशुपते) है पशु्रो के स्वामिन ! (श्रयम्) "यह (वसुषानः) सस्प- तियो का निधिभरूत (उरुः कोशः) विस्तृत खजाना (तव) तेरा है, (यस्मिन् (नः) हमे (मृड) उस कोश द्वारा सुखी कर, (ते नमः) तुे (नमः) करने वाले गीदड़ तथा कृत्तं (परः) दर हो; (परः) परे (यन्तु) हो जायं

English

Nothing is far for thee, naught checks thee, Bhava! The whole earth in a moment thou surveyest. From the east sea thou smitest in the northern.

अध्याय 11

श्लोक 3.1-15

४४॥ तत॑श्चैनम॒न्याभ्या॑मष्ठी॒वद्भ्यां॒ प्राशी॒र्याभ्यां॑ चै॒तं पूर्व॒ ऋष॑यः॒ प्राश्न॑न्

44|| tataścainamanyābhyāmaṣṭhīvadbhyāṃ prāśīryābhyāṃ caitaṃ pūrva ṛṣayaḥ prāśnan

हिन्दी अर्थ

. (अषख्दः) पापो के कारण रोने वाली (विकेश्यः) विकीणं कशो वाज्ली . ¦ ॥ २. नियमो के फलन कराने मे -उग्ररू्प । परमेष्वर ने जो नियम संस्मरके लन के लिय, वथा हमारे जीवनो के लिये, निर्मित कयि हृं ह, उन क भिपररीत /. चलने पर परमेदवर हैमे दण्डित करता है, भरतः वह उग्रहं।

English

O’erwhelm us not with Fever or with poison, nor, Rudra! with the fire that comes from heaven. Elsewhere, and not on us, cast down this lightning.

अध्याय 11

श्लोक 3.1-16

४५॥ तत॑श्चैनम॒न्याभ्यां॒ पादा॑भ्यां॒ प्राशी॒र्याभ्यां॑ चै॒तं पूर्व॒ ऋष॑यः॒ प्राश्न॑न्

45|| tataścainamanyābhyāṃ pādābhyāṃ prāśīryābhyāṃ caitaṃ pūrva ṛṣayaḥ prāśnan

हिन्दी अर्थ

कां० ११। सु०२ भ्रथवेवेद-माष्य ४५ खजाना है । इम खजाने द्वारा सुली होने की प्रार्थना की गई है, भ्रौर ्रत्युपकार मं परमेदवरं को नमस्कार भेट क्यिरह । पराभवकारी प्रौर उन्हें केवल ्राक्रो करने वाले तथा डरपोक कहा है, जैसे किं “गीदड- (शिखण्डिन् -=नीलशिखण्डिन्) है नीलेमेघरूपी केशसंनिवेा वाले.

English

Ruler of heaven and Lord of earth is Bhava: Bhava hath filled the spacious air’s mid-region. Where’er he be, to him be paid our homage!

अध्याय 11

श्लोक 3.1-17

४६॥ तत॑श्चैनम॒न्याभ्यां॒ प्रप॑दाभ्यां॒ प्राशी॒र्याभ्यां॑ चै॒तं पूर्व॒ ऋष॑यः॒ प्राश्न॑न्

46|| tataścainamanyābhyāṃ prapadābhyāṃ prāśīryābhyāṃ caitaṃ pūrva ṛṣayaḥ prāśnan

हिन्दी अर्थ

(सहस्षध्नि) हजाये का हनन करने वाले, (शतवधम्) सेकंडों प्रकार की विधियो से व करवै वाले (हिरण्यम्) परन्तु. परिणाम मे हितकर भौर रमणीय (धनुः) धनुष् को (विभर्षि) तू शरणं. करता है । (द्रस्य) तु खुलाने वाले की, (देवहेतिः) दिव्यास्त्र रूपी . (इषुः) इषु, (इतः) इस पर चलती है (तस्य) उस के निराकरणार्थं (नमः) तुभे नमस्कार है। है, भ्रौर जो महासंहारी. वज्रूपी-दषु का . प्रहार करता है । इस -दृष्टि से परमेइवर भौर विद्य द्-देव परस्पर सदश है, भौर दोनो ही खल्प है, धानुष्क के हाथमेंदही रहता है। चलाई जाती है इषु । . प्रतः इसी इषु के वजंनाथ, निराकरणाथं खर को नमस्कार किया हैः ताकि वह् भ्रनुकल होकर,

English

King Bhava, favour him who offers worship, for thou art Pasupati, Lord of victims.

अध्याय 11

श्लोक 3.1-18

४७॥ तत॑श्चैनम॒न्याभ्यां॒ हस्ता॑भ्यां॒ प्राशी॒र्याभ्यां॑ चै॒तं पूर्व॒ ऋष॑यः॒ प्राश्न॑न्

47|| tataścainamanyābhyāṃ hastābhyāṃ prāśīryābhyāṃ caitaṃ pūrva ṛṣayaḥ prāśnan

हिन्दी अर्थ

योभियांतो निलयते तां खद निचिकींषेति । किया है, (निलयते) भ्रौर यदि वह्ज्छिप जातादहै, (ख) है रुनाने वाले परमेदवर ! जो इस प्रकार (त्वां निचिकीषंति) तेरा श्रपमानं करना चाहता (पदनीः) पद खोजी श्षिकारी, (विद्धस्य) बीन्वे गए शिकार का पीछा भ्रभिप्राय यह किं श््र-परमेरवर जिसे दण्डित करता है वह उस के.

English

Be gracious to the quadruped and biped of the believer in the Gods’ existence.

अध्याय 11

श्लोक 3.1-19

४८॥ तत॑श्चैनम॒न्यया॑ प्रति॒ष्ठया॒ प्राशी॒र्यया॑ चै॒तं पूर्व॒ ऋष॑यः॒ प्राश्न॑न्

48|| tataścainamanyayā pratiṣṭhayā prāśīryayā caitaṃ pūrva ṛṣayaḥ prāśnan

हिन्दी अर्थ

धंसारोत्फादकं तथा पापियों को रुलाने वाले परमेदवर के दोनों स्वरूप, (वीर्याय). श्रपनी-भषनी . शवित कै प्रद्ेन के लिये, (चरतः) विचरते है । . उन दोर्नौ स्वद््पो के लिये (नमः) नमस्कार हों । दतः सावं विभव्त्तिकः तसिः । परमेश्वर के दोनो स्वरूपो के गुण-

English

Harm thou among us neither great nor little, not one who bears us, not our future bearers. Injure no sire among us, harm no mother. Forbear to injure our own bodies, Rudra.

अध्याय 11

श्लोक 3.2

द्यावा॑पृथि॒वी श्रोत्रे॑ सूर्याचन्द्र॒मसा॒वक्षि॑णी सप्तऋ॒षयः॑ प्राणापा॒नाः

dyāvāpṛthivī śrotre sūryācandramasāvakṣiṇī saptaṛṣayaḥ prāṇāpānāḥ

हिन्दी अर्थ

ज्वरप्रौर कधसिका-कासिका “कुक्करूवांसी" प्रतीत 'होती है, । , जिसे कि “शप६६१8, तथा ११०७ 98-0०४४ करते ह. यह हः की तरह खांसते समय, ऊचा शब्द करती. है । -यह् परिल किसी एक व्यक्ति कमजोर व्यविति को मानो स्वयं चूनने का नि्णेय करतीदहै। हषा कै नथनों का शब्द, हिनहिनाना ॥8

English

Agni. 37. And thence, etc. . . With other teeth . . . Thy teeth will fall out . . . With the

अध्याय 11

श्लोक 3.2-2

ज्ये॒ष्ठ॒तस्ते॑ प्र॒जा म॑रिष्य॒तीत्ये॑नमाह

jyeṣṭhataste prajā mariṣyatītyenamāha

हिन्दी अर्थ

भी प्रतीत हो रहा है,.जिस तेरी-सत्ता के कारण जलीय प्राणी जीवित ै॥ की. वृद्धि.कर.रहे द ।.. जलप्रवाहः पररभेदवर के निमित्त .हो रहा है, देखो तेरे लिये, (न दूरम्) कोई दूर नही, (ते) तेरे लिये (न परिष्ठा अस्ति) भ (परि पर्यसि). पू्णेतया तु देखता है, (भूमिम्) बरौर समग्र भूमि को

English

Agni. 37. And thence, etc. . . With other teeth . . . Thy teeth will fall out . . . With the

अध्याय 11

श्लोक 3.2-3

ब॒धि॒रो भ॑विष्य॒सीत्ये॑नमाह

badhiro bhaviṣyasītyenamāha

हिन्दी अर्थ

. शिश्ुमाराःशिष्युमार आदि पाथिव प्राणी प्रतीत नहीं .होते, भ्रपितु ये च लोकस्थ तारामण्डल है । जसे कि मेष, वृष, ककं, सिह, वृरिचक मकर, मीन, ये राशियां पशुनाम वाली ह, इसी प्रकार शिशुमार भादि ऋक्षः तथा घुवभध्य कहते है । इस मे ७ चमकते तारे है । देखो प° १८९. - . एणणक्ष प्रातण 4 ऽप्रकाशार (कालिनाथ मुकर जी) तथा नक्शा ; ं . एम्म राकिके पूवं मे भ्रौर मेष राधिके समीपह। “तिमि"को चित्रनं०् में , शवंव्यापक है । श्रथवा तेरे मागे मे कोई -बाधास्प मे स्थितं नहीं ।

English

20. Whereon in order rest the three, the ocean, and the heaven, and earth. 21. Within the residue whereof the Gods arranged six eightieth parts—

अध्याय 11

श्लोक 3.2-4

अ॒न्धो भ॑वि॒ष्य॒सीत्ये॑नमाह

andho bhaviṣyasītyenamāha

हिन्दी अर्थ

म है, दसे चित्र नं०.१ मे शिशुमार शब्द दारा दर्दाया हं ॥ दिग्री १९० से हिगृरी बहा रिशुमार तारामण्डल की स्थिति ( कां० ११।सूु०२ भरथववेद-माष्य , ४३ क अजगराः == महाकाय सपं ।ये ्लोकमेंनानार्ह। ये स्वाकृतियोौं मेभीनानार्ै, रौर निज ताराभ्रों की-भी-दृष्टिसे नाना रहै। यथा (१) तक्षक-तारामण्डल (200) जो किं शिशुमार-मण्डल के समीप

English

22. I ask thee, of this Odana what is the mighty magnitude. 23. He who may know the magnitude of the Odana. 24. Would say,

अध्याय 11

श्लोक 3.2-5

मु॒ख॒तस्ते॑ प्र॒जा म॑रिष्य॒तीत्ये॑नमाह

mukhataste prajā mariṣyatītyenamāha

हिन्दी अर्थ

(00५) 668) । (३) हद सपेमण्डल जो किं १४० डिग्री से २२९ दश्री. तक फलाहम्रारहै, भौर. जिसकी. पुछ लुलाराि को छ्ृतीदहै (11९ भरथल 72166, या त+८।8) । इस का मुखं मिथुनराशि के समीप है, श्रौर पूछ तुलाराकषि के समीप तक गर्हहै। पुरीकयाः"= इस तारामण्डल का स्वरूप भनुसन्धेय -है । जषा: मषाः । ये बृहदाकार मछली है जिसे मीन रा्चि- कहते है, इस्र मे रेवती-नक्षत्रहै। १, एक महाकाय सपं “तक्षक” है, जो कि दिषयुमार तारामण्डल के दक्षिण मर , कुण्डलि मारे लेटा पडा है, रौर २१० डिगरी भ्रौर ३०० डिगरी तक की रेखां

English

Not small, nor devoid of moistening sauce; not this, nor any- thing whatever. 25. He would not declare it to be greater than the giver imagines it to be. 26. The theologians say, Thou hast

अध्याय 11

श्लोक 3.2-6

जि॒ह्वा ते॑ मरिष्य॒तीत्ये॑नमाह

jihvā te mariṣyatītyenamāha

हिन्दी अर्थ

दूसरा मह्य काय सपं है ““हृदस्पं मण्डल” जो कि चित्र नं ० २ में १४० डिमरी से २२० डिगरी के मध्य र्मे तुलारादितक फलाहृभराहै। तीसरा महाकाय सपं है ““सरपंघारिमण्डल” जोकि चित्र नं ० २ में डिग्री २४० से डिगरी २७५ के लगमग तक फला हृभा हं . ३. यह मीन-राि ह । मीन = मच्छलीं । तथा “तिमि” तारामण्डल । तिमि -=मशली । लेटिन भाषा मे इसे 0618, तथा भप्रेजी मे इते 86871008 शून्य हडिगरी से ३५. डिगरी के भीतर दशयि हं ।

English

eaten the averted Odana and the Odana turned hither- ward. 27. Thou hast eaten the Odana and the Odana will eat thee. 28. Thou hast eaten this averted; thy inward breath will leave

अध्याय 11

श्लोक 3.2-7

दन्ता॑स्ते शत्स्य॒न्तीत्ये॑नमाह

dantāste śatsyantītyenamāha

हिन्दी अर्थ

मीन मण्डल) चित्र नं०२ मे डिगरी ३३० भौर डिगरी ई३४०.के मध्य मे, कुम्भ राशि एाश१९ 080) । इन सबःके चित्र “70 णभ प्राय ऽ्फाश्रा म दिये ह । इन काः चित्रपट.संलगन है । = विभाति (मृुण्ड० उप० २।२।१०) । वैर्दिक' सिद्धान्तानुसार इन संब कीं

English

thee; so he said to this one. 29. Thou hast eaten this turned hitherward; thy downward breath will leave thee; so he said to this one. 30. I indeed have not eaten the Odana, nor has the

अध्याय 11

श्लोक 3.2-8

प्रा॒णा॒पा॒नास्त्वा॑ हास्य॒न्तीत्ये॑नमाह

prāṇāpānāstvā hāsyantītyenamāha

हिन्दी अर्थ

हंसि = हन् हिसागत्योः 1 हंसि मे हन् घातु तयर्थक है । ह, न कि उत्तर दिशावरती समुद्र । इस वणेन पर धरनुसंघान भक्त है : (रुद्र) है पापियों को खलाने व्राले ! (नः ) हम, सुक्ियों को; (तवमंना) जीवन को कष्टमय करने वाले ज्वर के साथ (मासाः) न

English

Odana eaten me. 31. The Odana has just eaten the Odana. 32. And thence he said to this one, Thou hast eaten this with a different head from that with

अध्याय 11

श्लोक 3.2-9

रा॒ज॒य॒क्ष्मस्त्वा॑ हनिष्य॒तीत्ये॑नमाह

rājayakṣmastvā haniṣyatītyenamāha

हिन्दी अर्थ

संबद्ध कर, (मां विषेण) न विष के साथ (मा) न -(नः ) -हमे (दिग्येन संल्राः=संसुज (लुङ. लकार) +“ तक्मनान्=तकिं कृच्छर जीवने + का०..११ भूर र् भरथवेवेद-माष्यः ९. स्याम्) जिस किंसी भी. (दिक्षा) दिका मे वह॒ है, - (इतः) -यहां से' . (तस्म) उसे नभः) नभस्कारहों।. श परमेद्वर वभौ लोकों मे भौर सव दिशा म व्याप्त है । जिस ं दिशा की भ्रौरं भीं तम मुखं करके उसे नमस्कार कर सकते हो" वह

English

which the ancient Rishis ate: thy offspring, reckoning from the eldest, will die. I have eaten it neither turned downward, nor turned away, nor turned hitherward. With Brihaspati as head:

अध्याय 11

श्लोक 3.2-10

वि॒द्युत् त्वा॑ हनिष्य॒तीत्ये॑नमाह

vidyut tvā haniṣyatītyenamāha

हिन्दी अर्थ

यः -भदूदधातिं सन्ति देवा इति चतुष्पदं द्िपदेऽस्य गड ॥२८॥ कर्मं करने वाले को (मृड) सुखी कर, (हि). यतः; (पशूनाम्) प्राणि का के (चतुष्पदे ) चौपायों को (द्विपदे) प्रौर दुपायो को (मृड) सुखी कर । (मा) न, (नः) हमारे (महान्वम्). बुध पुरषः की, उत) भ्ौर (मा नः. श्रमकृम्) न हमारे शिशु की, (मा नः. वहन्तम्) न हमःरे गृह-मार का वहन करने वाली कौ, (उत् मानः वक्षयत्रः)- भौर न. जो .कि हमारे गृह-मार का वहन करेगा उस की, (मा नः पितरम् मातरम् च ) न हमारे पिता श्रौर माता की (हिसीः) हिंसा कर, ख है पाधियों को खुलने

English

with him I have eaten, with him have I come to it. Now this Odana is complete with all members, joints, and body. Complete, verily, with all his members, joints, and body is he

अध्याय 11

श्लोक 3.2-11

कृ॒ष्या न रा॑त्स्य॒सीत्ये॑नमाह

kṛṣyā na rātsyasītyenamāha

हिन्दी अर्थ

हे! मुकेजोतनेत्रुनेदी है वहतोतैरी.दी तन् है उस भरपनी तन -दरसयैखवकारेभ्योऽसंसुक्तगिरष्य॑ः । (रेलवकारेम्यः) विलासी-क्मो के करने वालो के लिये, (म्रसंसुक्त- पापियों को खलाने वाले परमेरवर का (नमः) वच्पात हो, रेस के लिये

English

who possess this knowledge. 33. And thence he said to him, Thou hast eaten this with other ears than those with which the

अध्याय 11

श्लोक 3.2-12

उ॒द॒र॒दा॒रस्त्वा॑ हनिष्य॒तीत्ये॑नमाह

udaradārastvā haniṣyatītyenamāha

हिन्दी अर्थ

(श्रकरम्, नमः) ने भी दरतः नमस्कार कियाद, यथा “ूरतो इजना रिलवकारेभ्यः = एलां विलासे +-स्वाथं भण् + मतुबथक “व ¬+ व्यक्तयो का निर्देश किया है, जोकि कुपथ द्वारा, या लूट-मार कर, दूसरों महामुखी या महाखाऊ कृत्तं कहा है । ये व्यक्ति पापी है, हसलियेये ख के .

English

ancient Rishis ate it. Thou wilt be deaf. I have eaten it neither, etc. (as in verse 32).

अध्याय 11

श्लोक 3.2-13

अ॒प्सु म॑रिष्य॒सीत्ये॑नमाह

apsu mariṣyasītyenamāha

हिन्दी अर्थ

कार । परमेदवरसे प्रा्थनाकीदहै किं वहु इन परर निज वचर प्रहार इन्दे दूरतः नमस्क्रार करदे इन का सामाजिकं वायकाटं करे, क्योंकि एसे भाषण मी मीठे भ्रौर प्रेम संसिक्त विधि से करना चाहिए, जसे कि मनुने से न कहे, उन्हें भी प्रिय वचनो क-कंहे ।

English

With Heaven and Earth as ears, with these I have eaten it, with these I have come to it. Now this Odana, etc. (as in 32).

अध्याय 11

श्लोक 3.2-14

ऊ॒रू ते॑ मरिष्यत॒ इत्ये॑नमाह

ūrū te mariṣyata ityenamāha

हिन्दी अर्थ

नम॑स्ते घोषिणौभ्यो नम॑स्ते केशिनीभ्यः 1 हे खर ! (ते) तेरी (घोषिणीम्यः+) नगारे तथा दुन्दुभि ।का घोष -करने वाली सेनार््रो को (नमः) हमारा नमस्कार हो,. (ते) तेरी (केशिनी- हमारा नमस्कार हो । (नमस्कृताभ्यः) पूवंकाल से चलती भाई" जं कि १. भथवा विजय के घोर्षो को कृरने वाली सेनाधों के लिये ।

English

34. And thence he said to him. Thou hast eaten this with other eyes . . . thou wilt be blind. With Sun and Moon, etc.

अध्याय 11

श्लोक 3.2-15

स्रा॒मो भ॑विष्य॒सीत्ये॑नमाह

srāmo bhaviṣyasītyenamāha

हिन्दी अर्थ

का० ११। सू०२ भ्रथवंवेद-माष्य ५७ (नमः) हमारा नमस्कार हो, (देव) है देव ! (ते) तेरी (सेनाभ्यः) उक्त सव प्रकार की सेनाश्रों को (नमः) हमारा नमस्कार हो, जिस से (नः)हमारी राष्टरिय-सेनाभ्नौं को खदररूप-सेनापति के प्रबन्ध में रखना चाहिए प्रौर इन्द समना चाहिए कि ये रद्र परमेदवर की सेना ह, भौर इन का धर्मात्माभ्रों के पालन के लिये करना है ।

English

35. And thence, etc. . . with other month. Thy offspring will die, reckoning from the head . . . With Brahma as mouth.

अध्याय 11

श्लोक 3.2-16

ब॒हुचा॒री भ॑विष्य॒सीत्ये॑नमाह

bahucārī bhaviṣyasītyenamāha

हिन्दी अर्थ

पाथिवाग्नि तथा विचत् (१२।३।२५१२६) । नमस्कार इन सेनार््रौ के परति भँ शेष बचे श्रोदन मे ६२८८० देव निज साम्यं वाले होते ह । करता है, विनष्ट नहीं होता उस श्रोदन द्वारा म भृत्यु-नदः से तैर जाऊ । नुव । यस्मिन् वेदा निहिता .बिरवस्ासतेनोदतेनाति तराधि . मृत्युम

English

36. And thence, etc. . . . with other tongue . . . Thy tongue will die . . . With the tongue of Agni. 37. And thence, etc. . .

अध्याय 11

श्लोक 3.2-17

स॒र्पस्त्वा॑ हनिष्य॒तीत्ये॑नमाह

sarpastvā haniṣyatītyenamāha

हिन्दी अर्थ

कां० ११।सु०३ भ्रथवंवेद-भाष्य ४९ गायत्री का भ्रधिपति हरा है, जिस में विद्व का निरूपण करने वाले वेदं निदित.है, उस श्रोदन द्वारा मै मृत्युं को तैर जाऊ । तथा इस भ्रोदन को निज .जीवन मे उस कीं स्थिति परिपक्व करता हूं । इस प्रकार सूक्त ३३ रवे

English

With other teeth . . . Thy teeth will fall out . . . With the Seasons as teeth. 38. And thence, etc. . . . with other vital airs. . . . Thy vital airs will leave

अध्याय 11

श्लोक 3.2-18

ब्रा॒ह्म॒णं ह॑निष्य॒सीत्ये॑नमाह

brāhmaṇaṃ haniṣyasītyenamāha

हिन्दी अर्थ

१६ श्यामम् श्रयः (काला लोहा) मांसानि मन्व ७ ६० भ्रथवंवेद-माष्य का० ११।सूु०३ (ग) उपरि लिखित प्रतिरूपो के भमिप्राय तथा प्रथंः- (१) बृहस्पतिः = बृहती वाक् तस्याः पतिः, वेदवाणीज्ञः । बृहती में भ्रग्रभूत वेदवाणी के साथ दर्शाया है। भ प

English

thee . . . With the Seven Rishis as the vital airs. 39. And thence, etc. . . . with other expanse . . . Consumption will

अध्याय 11

श्लोक 3.2-19

अ॒प्र॒ति॒ष्ठा॒नोऽनायत॒नो म॑रिष्य॒सीत्ये॑नमाह

apratiṣṭhāno'nāyatano mariṣyasītyenamāha

हिन्दी अर्थ

जोकि वाक् के साधनैः सिरर्मेहीर्है। कां०.११।सु०६ भ्रथर्वैवेद-भाष्य । ६१ (तेत्ति० उप० भृगुवल्ली, अनु ° १० । इन दोनों प्रकार के भ्रोदनों के रारन कर्त्रा को “वृहस्यतिः” तथा िरः” कहा है । वेदो .का पति वेदिक तथा उहा कर लेनी चाहिए । शेष प्रतिरूपो के यथा सम्भव भिप्रायः

English

destroy thee . . . With the firmament as expanse. 40 And thence, etc. . . . with other back. . . . Lightning will slay thee. . . With the heaven as back. 41. And thence, etc. . . . with other

अध्याय 11

श्लोक 3.3

चक्षु॒र्मुस॑लं॒ काम॑ उ॒लूख॑लम्

cakṣurmusalaṃ kāma ulūkhalam

हिन्दी अर्थ

६६ अथवंवेद-माष्य का० ११।सू०३ (योग १।१६) । ये कार्येजगत् विरक्त होते है" भरतः हैत्य नहीं होते । इति. तकार लोपे, “चोः कुः” इति कृत्वम् । अश्वा; कणा गाव॑स्तण्डुला मशकास्तुषांः ॥४॥

English

The plants are wakened into life, and every herd that grows on ground. The man who knows this truth of thee, O Prāna, and what bears thee up

अध्याय 11

श्लोक 3.3-2

तं वा अ॒हं नार्वाञ्चं॑ न परा॑ञ्चं॒ न प्र॒त्यञ्च॑म्

taṃ vā ahaṃ nārvāñcaṃ na parāñcaṃ na pratyañcam

हिन्दी अर्थ

तुष ह ब्रीहि के छिलके । तुष हाथ में चुबते है, मच्छर भी काते है। भतः इन का सम्बन्ध परमेइ्वरोदन के साथ है 1 भ्रतः इन में प्रतिरूपता है । क्र फडीकरंणाः शरोऽ्रम् ॥६॥ (शरभम्) मेष है (शरः) उबलते तण्डुलो की सरग के स्थानी । कब्रके स्थानम सायणने “कश्रु" पाठ मान करः “कं शिर एव

English

The plants are wakened into life, and every herd that grows on ground. The man who knows this truth of thee, O Prāna, and what bears thee up

अध्याय 11

श्लोक 3.3-3

तं वा अ॒हं नार्वाञ्चं॒ न परा॑ञ्चं॒ न प्र॒त्यञ्च॑म्

taṃ vā ahaṃ nārvāñcaṃ na parāñcaṃ na pratyañcam

हिन्दी अर्थ

मौर अर्थं किया है (८४० ए०प8) । “कन” -पद का स्यान्तर “कंवर” तथां “कब्” शब्द प्रतीत होते है, जिन के भ्रथं है “४1९8160 00107; (वेता० उप ४।५) हारा. भरङृति-पदाथं को विविधरगी दर्शाया है । भ्रवहत ब्रीहि मी, समूहरूप मे, विविधरंगी होते है, तण्डुल तुष, तिनके--इन का मिधित खूप विविधरगी ही होता है, इसे फलीकरणावस्था कह -सकते कां०११। सुर ३ भ्रथववेद-भाष्य ६७ ह । “शरः” का भरं मलाई भी होता है जोकि उबलते तण्डुलो की फाग की

English

Cattle and beasts rejoice thereat: Now great will he our strength, they cry. Watered by Prāna’s rain the plants have raised their voices in accord:

अध्याय 11

श्लोक 3.3-4

तं वा अ॒हं नार्वाञ्चं॒ न परा॑ञ्चं॒ न प्र॒त्यञ्च॑म्

taṃ vā ahaṃ nārvāñcaṃ na parāñcaṃ na pratyañcam

हिन्दी अर्थ

तरह सुफद होती है । इस सादृर्य से फाग को “शर कहा हो । कद्रु, भ्रमु का सम्बन्ध परमेदवरोदन के साथै, नौर फलीकरणो भ्रौर फाग (शर) का कृष्योदन के साथ । इस प्रकार परस्पर प्रतिरूपता है । “अदिति” भी लाल भ्रोदन सम्बन्धी लालिमा स्थानी है ।

English

Thou hast prolonged our life, they say, and given fragrance to us all. Homage to thee when coming nigh, homage to thee departing hence!

अध्याय 11

श्लोक 3.3-5

तं वा अ॒हं नार्वाञ्चं॒ न परा॑ञ्चं॒ न प्र॒त्यञ्च॑म्

taṃ vā ahaṃ nārvāñcaṃ na parāñcaṃ na pratyañcam

हिन्दी अर्थ

साठीकेषघानका कौनसा भाग मांसस्थानीदहै, श्रौर उस की प्रतिरूपता, काले-लोहे के साथ किस प्रकार सम्भव है-यह विचारणीय है । मज्जा मज्जोपमा कृता ॥ (बृहदा ० उप ० ३।९।२८) मे, पुरुष के सवृ, रपुं भसम हरितं वणेः पुष्करस्य गन्धः ॥८॥ त्रपु काला सा होता है, भोदन पाकानन्तर बची भस्म भी काली सी होती है। केसर का. पुट देकर भ्रोदन का निखरा पीत वणं सुवणं के पीतवणं के सदृश होता है । तथा इसे इसप्रकार पकाना त्राहिये कि कमल

English

Homage, O Prāna, be to thee when standing and when sitting still. Homage to thee at every breath thou drawest in and sendest forth!

अध्याय 11

श्लोक 3.3-6

तं वा अ॒हं नार्वाञ्चं॒ न परा॑ञ्चं॒ न प्र॒त्यञ्च॑म्

taṃ vā ahaṃ nārvāñcaṃ na parāñcaṃ na pratyañcam

हिन्दी अर्थ

, ६८ भरथर्वेवेद-भाष्य का० ११।सु०३ भ्रोदन-त्रह्म तथा रोदन कृषि मे दर्शाई है । .. कन्वो के साथ सम्बद्ध वो बाहुए (ईषे) शकट के भगले मागमे. लगे दौ. खलः व्रीहि के कटे-पौ्धो के पीडन का स्थान । पात्रम् शकट का

English

Homage to thee when turned away, homage to thee seen face to face! This reverence be to all of thee!

अध्याय 11

श्लोक 3.3-7

तं वा अ॒हं नार्वाञ्चं॒ न परा॑ञ्चं॒ न प्र॒त्यञ्च॑म्

taṃ vā ahaṃ nārvāñcaṃ na parāñcaṃ na pratyañcam

हिन्दी अर्थ

वह् भाग जिस मे कटे-त्रीहि-पौघौ को डालकर खलियान तक लाया जाता जाता है । जसे कि रथोपस्थ “रथोपस्थ उपाविशत्” (गीता) । तथा उपस्थः (सायण) ,उच समवाये । ईषे शकट के दो पावो से भ्रागे बढ़ हुए दो दण्डे, . जिन के मध्य मे जोतने क लिए ब॑ल खड़ा किया-जाता है 1 “श्रनुक्या' के

English

Prāna, communicate to us thy dear, thy very dearest form. Whatever healing balm thou hast, give us thereof that we may live.

अध्याय 11

श्लोक 3.3-8

तं वा अ॒हं नार्वाञ्चं॒ न परा॑ञ्चं॒ न प्र॒त्यञ्च॑म्

taṃ vā ahaṃ nārvāñcaṃ na parāñcaṃ na pratyañcam

हिन्दी अर्थ

स्थानी है, जिन द्वारा कि बैल को शकट के साथ जुभ्रा के साथ जोता जाती है, (गदाः) गुदा की नाडियां (वरत्राः) चम की पेटीरूप रज्बु स्थानी हं । ¦ का० -११। सू० ३ अरथर्ववेद-भाष्य ६६ (कृषि) के साथ है, ये मानुष रचनाएं ह । इन दोनों प्रकार के धटकीं मे प्रतिरूपता दयाई है । .

English

Prāna robes living creatures as a father his beloved son. Prāna is sovran Lord of all, of all that breathes not, all that breathes

अध्याय 11

श्लोक 3.3-9

तं वा अ॒हं नार्वाञ्चं॒ न परा॑ञ्चं॒ न प्र॒त्यञ्च॑म्

taṃ vā ahaṃ nārvāñcaṃ na parāñcaṃ na pratyañcam

हिन्दी अर्थ

जात हृए ओदन की (कुम्भी ) देगचीस्थानी (भवति) होती है भ्रौर (चौः) द लोक (भ्रपिधानम्) ढकना स्थानी होता है । रीनषे भर्थात् पकाए जाते हए कृष्योदन की एक तो होती ह कुम्भी रथात् देगची श्रौर दूसरा होता है उस पर कना । इसी प्रकार रीन्वे -जाते रथात् पृथिवी रौर च लोक की रचनार््रो- को दृष्टिगोचर करके, रचयिता काभानया ध्यान किया जाता है, यह है इस की श्राराधना। त्था. पृथिवी (पक्वः) छाती की पसलियां (सीताः) इल चलाने की. रेखाभ्रो भर्थात्

English

Prāna is Fever, he is Death. Prāna is worshipped by the Gods. Prāna sets in the loftiest sphere the man who speaks the words of truth.

अध्याय 11

श्लोक 3.3-10

तं वा अ॒हं नार्वाञ्चं॒ न परा॑ञ्चं॒ न प्र॒त्यञ्च॑म्

taṃ vā ahaṃ nārvāñcaṃ na parāñcaṃ na pratyañcam

हिन्दी अर्थ

खेत मँ हल चलाने पर जो गहरी खार्यां . पड़ जाती है, भ्रौर खार्ईयों के दो भ्रोर उन्नत ढेर हो जाते है, वे पसलि्यो की भ्राृति के सदुश है । पस- लियो के मध्य खाली स्थान खादइयां सी होती है, उन क दोनों म्रोर पसलियां उमरी हई होती है । पर्शवः भरर सिकताः परमेखवरीय रचनाए है । भ्रौर ७० अथर्ववेद-माष्य .का० ११। सु° ३ ऋतं हस्तावनेजनं कस्य पसेच॑नग् ॥२२॥

English

Prāna is Deshtri, and Virāj Prāna is reverenced by all. He is the Sun, he is the Moon. Prāna is called Prajāpati.

अध्याय 11

श्लोक 3.3-11

तं वा अ॒हं नार्वाञ्चं॒ न परा॑ञ्चं॒ न प्र॒त्यञ्च॑म्

taṃ vā ahaṃ nārvāñcaṃ na parāñcaṃ na pratyañcam

हिन्दी अर्थ

की कतियां है, हस्तावनेजन भ्रौर उपसेचन मानुष कतियां है । इस प्रकार परमेरवरीय भौर मानुष कृतियों मे प्रतिरूपता है । (परिगृहीता) श्रग्नि से उतार कर ग्रहण कर लौ गई है, (साम्ना) सामवेद का उच्चारण कर . परिपाक करे का विधान मन्व - १४, १५ मेंह्भ्रादहै। सम्बन्धे हृ्रा है । ५4 परमेदवरोदन के सम्बन्ध ये, ज्ञानाग्नि पर परमेरवरीय भावना

English

Both breaths are rice and barley, and Prāna is called the toiling ox:

अध्याय 11

श्लोक 3.3-12

तं वा अ॒हं नार्वाञ्चं॒ न परा॑ञ्चं॒ न प्र॒त्यञ्च॑म्

taṃ vā ahaṃ nārvāñcaṃ na parāñcaṃ na pratyañcam

हिन्दी अर्थ

का परिपाक करना चादिये, भ्रौर वह परिपाक वेदों के प्रतिपादन के भ्रनुसार विज्ञान पूरवंक होना चाहिए.। परमेर्वरोदंन के परिपक्व करने के लिए कुम्भी का० ११। सु० ३ भय्ववेद-माष्य ७१ (बृहत्) बृहत् नामक सामगान है (आयवनम्). उदक भं डाले गणए

English

In barley is the inbreath laid, and rice is named the outward breath. The human infant in the womb draws vital breath and sends it

अध्याय 11

श्लोक 3.3-13

तं वा अ॒हं नार्वाञ्चं॒ न परा॑ञ्चं॒ न प्र॒त्यञ्च॑म्

taṃ vā ahaṃ nārvāñcaṃ na parāñcaṃ na pratyañcam

हिन्दी अर्थ

गान है (दविः) श्रोदन के उद्धरण का उपकरण । परमेश्वर रूपी भ्रोदन को बृहत् सामगाने दवारा निज जीवनीय रस- (ऋतवः) ऋतुएं हँ (षक्तारः) भरोदन के उपादान भूत ब्रीहिको परमेदवर पक्ष मे भिन्न-भिन्न ऋतु काल तथा ऋतु कालों मँ प्रतीय मान परमेदवरीय भिन्न-भिन्न कृतियां परमेदवर सम्बन्धी भावनाभो को ्रदीप्त करती है, भौर खेतों म ब्रीहि को ऋतु काल पकाते ह ।

English

Lout:

अध्याय 11

श्लोक 3.3-14

तं वा अ॒हं नार्वाञ्चं॒ न परा॑ञ्चं॒ न प्र॒त्यञ्च॑म्

taṃ vā ahaṃ nārvāñcaṃ na parāñcaṃ na pratyañcam

हिन्दी अर्थ

चुर. पञ्बिलमुखं धर्मो मीन्धि ॥१८॥ भ्रभितप्त करती है । तथा भरुतपञ्चकरूपी पांच बिलों वाली पुथिवीको पृथिवी = कुर्मी (मन्व ११) । हृष्योदन -के परिपाक के लिये कुम्भी भर्थात् देगची परं के ठकने मे ५ छ? होने चाहिए, एेसी विधि प्रतीत हेतौ है । इ विधि द्वार मी की माप का नियन होता सहता है ।

English

When thou, O Prāna, quickenest the babe it springs anew to life. The name of Prāna is bestowed on Mātarisvan and on Wind.

अध्याय 11

श्लोक 3.3-15

तं वा अ॒हं नार्वाञ्चं॒ न परा॑ञ्चं॒ न प्र॒त्यञ्च॑म्

taṃ vā ahaṃ nārvāñcaṃ na parāñcaṃ na pratyañcam

हिन्दी अर्थ

शचोदुनेनं यहवचः सवै लोकाः संमाप्या; ॥१९॥ सब लोक प्राप्त हो जतेर्है। ४२ ७२ भरथरवेवेद-भाष्य का० ११. सु० ३ श्रोदन-बरह्य जब जीवन में परिपक्व हो जातादहै, ्रउसदढारा

English

On Prāna, past and future, yea, on Prāna everything depends.

अध्याय 11

श्लोक 3.3-16

तं वा अ॒हं नार्वाञ्चं॒ न परा॑ञ्चं॒ न प्र॒त्यञ्च॑म्

taṃ vā ahaṃ nārvāñcaṃ na parāñcaṃ na pratyañcam

हिन्दी अर्थ

देखो श्रथवं ० (९।६। पर्याय ४), इस में केवल प्रतिथि यज्ञ दारा सब तरकार के यज्ञो के फलो.की प्राप्ति कही है । भर्थात् परस्पर नीचे-ऊपर रूप मे, (भिताः) आधित है। जोकि शारीरिक भोजन है। श्रमिप्रायः यहं पाकलालीय भ्रोदन दारा है कृष्योदन को नहीं । षडकरीतयः ६ ८० देवतां पर सम्भवतः निम्न- लिखित मन्त्र कुछ प्रकाच डाल.सके । यथा--

English

All herbs and plants spring forth and grow when thou, O Prāna quickenest, Plants of Atharvan, Angiras, plants of the deities and men.

अध्याय 11

श्लोक 3.3-17

तं वा अ॒हं नार्वाञ्चं॒ न परा॑ञ्चं॒ न प्र॒त्यञ्च॑म्

taṃ vā ahaṃ nārvāñcaṃ na parāñcaṃ na pratyañcam

हिन्दी अर्थ

्ष्टापूतंमवतु नः पितृणामामु ददे हरसा हैव्येन ।। भयव ०२।१२।४॥ कां० ११। सु० ३ भ्रथरवैवेद-माष्य ७३ कंही हैँ । इस कै द्वितीय पाद मँ “भ्रादित्येभिः+, वसुभिः + 1 केदेवोंकांवर्णन हूभादहै। यदि इन धा 1 का भ्रन्वय किया जाय तो इन की समुदित संख्या भी तीन वा (३ ना ८०) हो जातीरहै। ३ गुना ८० सामग, तथा भादि- मग भादि सब मिल कर “षडशीतयः” संख्या उपपन्न हो सकती है । (त्वा) तुम से (रोदनस्य) भरोदन की (पृच्छामि) पूता : (यः (तम् ) उस महिमा को महिमा) महामहिमा 8 । ॥। ) जो कि ( भस्य) इस भ्रोदन की ( महान

English

When Prāna hath poured down his flood of rain upon the mighty earth,

अध्याय 11

श्लोक 3.3-18

तं वा अ॒हं नार्वाञ्चं॒ न परा॑ञ्चं॒ न प्र॒त्यञ्च॑म्

taṃ vā ahaṃ nārvāñcaṃ na parāñcaṃ na pratyañcam

हिन्दी अर्थ

नाय इतिं श्रयान्नालुंपसेचन इति नेदं च कि चेति ॥२४। दोप्रकारसेकी जा सकती है । सृष्टि की रचना ् 1 नाको देखं कर “सुष्टिकर्ता । करना होता है 1. यह उपासना “उच्छिष्ट ज्रह्मोपासना"" है । ६८८ वाना भ्रभिप्राय भरनुसन्धेय है 1 1 चाहिए “"भज्ञीतिभिस्तिभुभिः » मसीतिमिस्तवृनिरादितेभिवुभिरङ्खोमिः

English

The plants are wakened into life, and every herd that grows on ground. The man who knows this truth of thee, O Prāna, and what bears thee up

अध्याय 11

श्लोक 3.3-19

तं वा अ॒हं नार्वाञ्चं॒ न परा॑ञ्चं॒ न प्र॒त्यञ्च॑म्

taṃ vā ahaṃ nārvāñcaṃ na parāñcaṃ na pratyañcam

हिन्दी अर्थ

श्रादित्येभिः, वसुभिः दवाय ४८ वषं भ्रौर २४ वषो के पोषि क १. ब्रह्मचारियों का 3 तत्त्वो का नहीं । “अङ्किरोभिः” तथा “सामगेभिः" के व । : प च अभु भाषिमौतिक ही प्रतीत होते है । जड़ भ्ादित्य भौर वसु सामगान नहीं कर सकते । गौण अथं भे सामगान की कल्पना व्यथं है । ७४ ्रथर्वेवेद-भाष्य कां ११।सू०३

English

To him will all present their gift of tribute in that loftiest will all present their gift of tribute in

अध्याय 11

श्लोक 3.4

दितिः॒ शूर्प॒मदि॑तिः शूर्पग्रा॒ही वातोऽपा॑विनक्

ditiḥ śūrpamaditiḥ śūrpagrāhī vāto'pāvinak

हिन्दी अर्थ

से चाहता है कि इस ““उपसेचन"" की विधि का भो उपदेक्ष दिया जाय । उपदे का श्रवणमात्र ही होता है, इस से भ्रधिक का नहीं । भ्रधिकं उपदेश के लिये उपदेष्टा जब श्रोता को ्रधिकारी जान लेगा तो वह॒ निज कपा से (दाता) दाता (यावत्) जितना (श्रभिमनस्थेत) देने का मन करे, (तत् न भरति बेत्) उस से भषिक के लिये नं कहे ।

English

Lighted by fuel goes the Brahmachāri, clad in black-buck skin, consecrate, long-bearded. Swiftly he goes from east to northern ocean, grasping the worlds, oft bringing them anear

अध्याय 11

श्लोक 3.4-2

बृह॒स्पति॑ना शी॒र्ष्णा

bṛhaspatinā śīrṣṇā

हिन्दी अर्थ

है कि दाता जितना देना चाहे उस से श्रधिक न मागि । यदि भ्रोदन, . विना . दाल-सब्जी के, दाता ने दिये है, तो उस से इन उपसेधनो की माग न करे। यह उपदेश धनादि के दान के सम्बन्व म भी समना चाहिए 11 (वादिनः बदति) बहा प्रवचन करते बाले क भत् का० ११।सु०३ ग्रथवेवेद-माष्य ७१.

English

Filled with a babe, mid deities he wanders: grown; near at hand, he springs again to being. That Father, grown the present and the future, hath past into the son with mighty powers.

अध्याय 11

श्लोक 3.4-3

द्यावा॑पृथि॒वीभ्यां॒ श्रोत्रा॑भ्याम्

dyāvāpṛthivībhyāṃ śrotrābhyām

हिन्दी अर्थ

परमेदवर के शरीररूप मेँ वणित किया है, भरोर 4४ के श्रवयवों र जसे भस्मदादि -दारीर ्रौर शरीरावयव जीवात्मा के ज्ञान, इच्छा तथा प्र० २ खण्ड ३).द्वारा प्रकट किया.है। करता है, या केवल चिदानन्द स्वरूप ४ मे ही लीन रहता + ४

English

Hansa, what time he rises up, leaves in the flood one foot un- moved.

अध्याय 11

श्लोक 3.4-4

सू॒र्या॒च॒न्द्र॒म॒साभ्या॑म॒क्षीभ्या॑म्

sūryācandramasābhyāmakṣībhyām

हिन्दी अर्थ

(त्वाभ्) तेरा (ग्रोदनः इति) भरोदन ने प्रादान कियाहै! जगत् का मोग करने वाला जगृत् का भोग. नहीं करता जगत् ह्वी उस मोक्ता. कां भोग कर रहा होता है। “मोगा न भुक्ता भ्राह) इस प्रकार इस जगद् भोक्ता को कहे । ।

English

If he withdrew it there would be no more tomorrow or to-day, Never would there be night, no more would daylight shine or morning flush.

अध्याय 11

श्लोक 3.4-5

ब्रह्म॑णा॒ मुखे॑न

brahmaṇā mukhena

हिन्दी अर्थ

परमेदवर सम्बन्धी कथन है, परमेदवर कहता है कि “यै श्रत हूं"श्रौर जीवन में जीवनीय शक्ति का हास होता ही है। जीवनीयद्यक्ति है, प्राण । “भोगे रोगभयम्", भोगो हारा रोगों का भय होता है, श्रौर रोगोंके विरत रहने का निर्देश किया है ।

English

It rolleth on, eight-wheeled and single-fellied, and with a thousand eyes, forward and

अध्याय 11

श्लोक 3.4-6

अ॒ग्नेर्जि॒ह्वया॑

agnerjihvayā

हिन्दी अर्थ

भ्रल्लाद भी है । परमेरवर के भजन श्रौर उपासना में अ्जरधिक लीन रहने, भौर खान-पान तथा शारीरिक स्वास्थ्य से लापरवाह हो जानं पर श्रपान वायु विक्त हो जाती है, भ्रपान वायु का यथोचितलू्प में भ्रपसरण नहीं होतां । यह् भरपान का त्यागा जाना है । । का० ११। सू०३ भथ्वंवेद-माष्य ७७ किया है। तो- किस्त ने किसर का प्राशन किया, इसका उत्तर ३१

English

backward. With one half it engendered all creation. What sign is there to tell us of the other?

अध्याय 11

श्लोक 3.4-7

ऋ॒तुभि॒र्दन्तैः॑

ṛtubhirdantaiḥ

हिन्दी अर्थ

रेतसः पुरुषः, स वा एष पुरुषः भ्रननरसमयः' (तेत्तिरीयोपनिषद्) । भोदन पुरुष शरीर , इसलिये पुरुष शरीर श्रननरसमय है । इस भ्रन या म्रोदन रूपी शरीर ते निज - भ्रावद्यकतानुसान्, न कि. भोग॒ भावना से। ग्रोदन का प्रादान किया है: भरतः इसु प्राशन मे कोई दोष नही. । रौर भरात्म- (२) ष्योदन का प्राशन किस विधि से करना चाये, भौर इस

English

Homage, O Prāna unto thee armed with swift bow among the rest,

अध्याय 11

श्लोक 3.4-8

स॒प्त॒ऋषिभिः॑ प्राणापा॒नैः

saptaṛṣibhiḥ prāṇāpānaiḥ

हिन्दी अर्थ

कां०११॥ सु० ३. ग्रथवेवेद-माष्य ७९ देकर रोदन प्राशन करेगा तो भ्रोदन प्राशन उस के लिये सुफल होगा, ३२-४९ मन्त्रोक्त देवताः । प्रथम चरण ३२, ३८, ४१, स० चण ३२-४९ भन्त्रो को अनुक्मणौ में “दण्डक कहा है ।

English

In whose dominion is this All of varied sort that stirs and works! May he who rules this Universe of varied sort, that stirs and works,

अध्याय 11

श्लोक 3.4-9

अ॒न्तरि॑क्षेण॒ व्यच॑सा

antarikṣeṇa vyacasā

हिन्दी अर्थ

सर्व॑तन्ः सं मवति य एवं वेदं ॥३२॥ ८9 । . भ्रथवेवेद-माष्य कां० ११1 सूु०३ (पुवं ऋषयः) पूवं काल के या सदगर्णो से पूरित ऋषियों ने (येन इस प्राशन करने वाले को कटे 1. (तम्) उस भ्रोदन को (वं) निद्चय से,

English

Prāna, alert and resolute, assist me through the prayer I pray.

अध्याय 11

श्लोक 3.4-10

दि॒वा पृ॒ष्ठेन॑

divā pṛṣṭhena

हिन्दी अर्थ

बृहस्पति रूप सिर से मै ने उस श्रोदन का प्रादान किया है। (तेने) उस पूवं ऋषयः = पुवं पूरणे, सदगणों से सम्पूणं । प्रजा ज्येष्ठतः = वि ग्रास बनी रहेगी । शरीर है जीवात्मा की पुरी भ्रौर इस पुरी मे रहने वाले भनोदन केः प्रान का निषेव किया है । इस प्राशन को विचार पूर्वक करना चाहिए

English

Erect among the sleepers he wakes, and is never laid at length, No one hath ever heard that he hath been asleep while others slept.

अध्याय 11

श्लोक 3.4-11

पृ॒थि॒व्योर॑सा

pṛthivyorasā

हिन्दी अर्थ

का० ११। सू०३ भ्रथवंवेद-भाष्य । ८१ उसे सर्वानुग्रहकारीरूप मेँ जान कर उसका रैनि प्राशन किया है । का प्रवेश कटा है । प्रादनकर्ता कहता है कि मैने सिर को बृहस्पति जान सम्पूणं हो जाता है । यह फल निर्देश. किया है । भरथवं० ११।३।१ मे “शिरः”

English

Thou, Prāna, never shalt be hid, never shalt be estranged from me.

अध्याय 11

श्लोक 3.4-12

स॒त्येनो॒दरे॑ण

satyenodareṇa

हिन्दी अर्थ

कृष्योदन में प्रतिरूपता दर्गाई है । जीवनम दो प्रकार के श्रोदर्नो की भावद्यकताह। एक कीतो सवीज्ञ एव सर्वपरः सर्व॑तनूः स मवति य एवं वेदं ॥३३॥ (पूर्वं ऋषयः) पूवं काल के यां सद्गुणं से पूरित ऋषियों ने ।

English

I bind thee on myself for life, O Prāna, like the Waters’ germ. A glorification of the Brahmachgri or religious student

अध्याय 11

श्लोक 3.4-13

स॒मु॒द्रेण॑ व॒स्तिना॑

samudreṇa vastinā

हिन्दी अर्थ

किया है तो. (वधिरो भविष्यति) तु बहरा हो जायेगा (इति) यहं (एनम्) (यः) जो श्रोता (एवम्) ईस प्रकार से (वेद) ब्रहूीदनं को जनता है, वह . ¦: युक्त, (सवेतनूः) सम्पूणं शरीर वाला (सं भवति) हो जाता है +. श्रवण से ब्रह्मौदन का प्राशन करना है। इस के लिये शनो को च.लोकं भनौर परथिवी का रूप देना होगा । च् लोक भ्रौरं पृथिवी क भीतर नाना-

English

Stirring both worlds the Brahmachāri moveth: in him the deities are all one-minded.

अध्याय 11

श्लोक 3.4-14

मि॒त्राव॑रुणयोरू॒रुभ्या॑म्

mitrāvaruṇayorūrubhyām

हिन्दी अर्थ

का० ११। मु० ३ भ्रथवंवेद-माष्य प न 8 निविकार रूप मे वतंमान रहते है । इसी प्रकार निज शरोत्रं श्रवण के उन्मुख करना होगा । बधिरो भविष्यसि यदि तूने चावाप्रृथिवी ्रौर णसा ही रहेगा । जैसे कि वेदवाणी के सम्बन्ध मे कहा है कि “उत त्वः

English

He hath established firmly earth and heaven: he satisfies his Master with his Fervour.

अध्याय 11

श्लोक 3.4-15

त्वष्टु॑रष्ठी॒वद्भ्या॑म्

tvaṣṭuraṣṭhīvadbhyām

हिन्दी अर्थ

सर्वाङ्गः एव सर्वपरुः सर्वतनूः सं भ॑वति य एवं वेद ॥३४॥ इधर गति करते हुए को, (न पराञ्चम्) न दूरके लोकों में गति करते युक्त, (सवंतनूः) सम्पूणं शरीरं वाला (सं भवति) हो जाता है । क्४ भ्रथंवंवेद-माष्य को० ११।सूु०३

English

After the Brahmachārī go the Fathers, the heavenly hosts, all

अध्याय 11

श्लोक 3.4-16

अ॒श्विनोः॒ पादा॑भ्याम्

aśvinoḥ pādābhyām

हिन्दी अर्थ

सूयं श्रौ र चन्द्ररूपी ्रंखे सव को समरूप से देखती हँ । इसी भाव कों गीता मे (१२।१६) कहा है “समः शत्रौ च मित्र च । तथा “समः सर्वेषु भूतेषु” (पूवं ऋषयः) पूवं काल कै या सद्गुणो से पूरित ऋषियों ने(येन मुखेन) दवारा दो स्थानों मे प्राषयों मे भेद दर्शय है । कां०११। सु०द' न्रथर्ववेद-भाव्य क ॥ छथ

English

Gods in separate order. After him too have the Gandharvas followed, thirty and three, three hundred, and six

अध्याय 11

श्लोक 3.4-17

स॒वि॒तुः प्रप॑दाभ्याम्

savituḥ prapadābhyām

हिन्दी अर्थ

मे पहुचाया है । (एष वा श्रोदनः सर्वाङ्खः सवंपरः सवतनूः) यह. भ्रोदनं प्रकार भरोदन को जानता है वह॒ (सर्वाङ्गं एव सवेपरः सर्व॑तनूः सं भवति) सर्वाङ्गं सम्पुष्ट हो जाता है। नियम से बद्ध हो कर भक्षण करता है, स्वाद, लोम श्रौर लालच से नहीं। लालच से नहीं, ्रौर नियत समय मे प्रारानः करना चाहिए । यतः ३५ वं

English

thousand. He satisfies all Gods with his devotion.

स्रोत: bhavykhatri/DharmicData · प्राप्त 3/6/2026

शास्त्रीय प्रामाणिकता एवं पारदर्शकताSources & Interpretation

स्रोत, संस्करण एवं व्याख्या वर्गीकरण

धर्म ग्रंथ पर मूल शास्त्र, पारंपरिक भाष्य और आधुनिक व्याख्या को पूर्णतः पृथक रखा जाता है ताकि पाठक को किसी भी व्याख्या के शास्त्र होने का भ्रम न हो।

सामग्री वर्गीकरण संकेत (Epistemic Content Labels)

6 स्तरिय प्रमाण व्यवस्था
मूल पाठOriginal text

अपौरुषेय / प्रामाणिक शास्त्र (Primary Canonical Scripture)

मूल संस्कृत, प्राकृत अथवा अवधी श्लोक/मंत्र। यह सर्वोच्च प्रमाण (प्रस्थान) है। इस पाठ में किसी भी आधुनिक व्याख्याकार का हस्तक्षेप नहीं है।

शाब्दिक अनुवादLiteral translation

पदार्थ व अन्वय (Direct Grammatical & Word-for-Word Meaning)

व्याकरणसम्मत प्रत्यक्ष शब्दार्थ (अन्वय)। बिना किसी दार्शनिक संप्रदाय के पूर्वाग्रह के, संस्कृत शब्दों का सटीक भाषांतर।

पारंपरिक भाष्यTraditional commentary

आचार्य परंपरा व टीका (Classical Lineage Commentary)

प्राचीन आचार्य परंपरा (यथा शंकराचार्य, रामानुजाचार्य, मध्वाचार्य, श्रीधर स्वामी) द्वारा विरचित शास्त्रीय भाष्य व टीकाएं।

सरल व्याख्याSimple explanation

भावार्थ व सुबोध प्रबोधन (Accessible Pedagogical Exposition)

आधुनिक जिज्ञासुओं के लिए सरल भाषा में भावार्थ। यह मूल मंत्र नहीं, बल्कि पाठ को सुगम बनाने हेतु संपादकीय व्याख्या है।

आधुनिक चिंतनModern reflection

समसामयिक विमर्श व अनुप्रयोग (Contemporary Application & Analysis)

दार्शनिक, मनोवैज्ञानिक व वैज्ञानिक समरूपताओं पर आधुनिक चिंतन। यह मूल शास्त्र का अंग नहीं है और इसे शास्त्रोक्त सिद्धांत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

शोध टिप्पणीResearch note

पांडुलिपि एवं ऐतिहासिक शोध (Critical Apparatus & Manuscript Research)

पांडुलिपि विविधताएं, पाठ-भेद (variant readings), छंद रचना, और ऐतिहासिक व तुलनात्मक भाषावैज्ञानिक शोध। यह शास्त्र का मूल संदेश बदलने हेतु नहीं, बल्कि पाठ की प्रामाणिकता परखने के लिए है।