Atharva Veda
11
अध्याय 11 / 20

Kanda 11

काण्ड 11

420 श्लोकभाग 5/7 · श्लोक 4.1–6.23

पूर्ण अध्याय पाठ75 श्लोक

अध्याय 11

श्लोक 4.1

प्राणः।१-२६ भार्गवो वैदर्भिः।प्राणः।अनुष्टुप्, १ शङ्कुमती, ८ पथ्यापङ्क्तिः, १४ निचृत्, १५ भुरिक्, २० अनुष्टुगर्भा त्रिष्टुप्, २१ मध्येज्योतिर्जगती, २२ त्रिष्टुप्, २६ बृहतीगर्भा।प्रा॒णाय॒ नमो॒ यस्य॒ सर्व॑मि॒दं वशे॑ ।यो भू॒तः सर्व॑स्येश्व॒रो यस्मि॒न्त्सर्वं॒ प्रति॑ष्ठितम्

prāṇaḥ| 1-26 bhārgavo vaidarbhiḥ| prāṇaḥ| anuṣṭup, 1 śaṅkumatī, 8 pathyāpaṅktiḥ, 14 nicṛt, 15 bhurik, 20 anuṣṭugarbhā triṣṭup, 21 madhyejyotirjagatī, 22 triṣṭup, 26 bṛhatīgarbhā| prāṇāya namo yasya sarvamidaṃ vaśe | yo bhūtaḥ sarvasyeśvaro yasmintsarvaṃ pratiṣṭhitam

हिन्दी अर्थ

उपनयमानः- उपनयन -संस्कार हारा निज सामप्यमे लाता हृश्रा । वतंमान काल में पुरोहित बच्चो का उपनयन तो करा देते है, परन्तु उन के साथ समीपता में नहीं रहते । ब्रह्मचारिणम् = उपनयन के परचात् चारी को निज सामीप्य म लेकर उसकी रक्षा तथा पालन-पोषण इस प्रकार करे जते कि माता गभभेस्थ बच्चे की रक्षा. तथा पालन-पोषण करती है । यह काल रात्रीरूप है । इस कालं को ब्रह्मचारी निज. के लिये अन्धकाररूप कां० ११। सू० ५ भरथर्वेवेद-माष्य १२५

English

Together let all spirits meet: may these deliver us from woe. The five Sky regions, Goddesses, and the twelve Seasons which are Gods.

अध्याय 11

श्लोक 4.2

नम॑स्ते प्राण॒ क्रन्दा॑य॒ नम॑स्ते स्तनयि॒त्नवे॑ ।नम॑स्ते प्राण वि॒द्युते॒ नम॑स्ते प्राण॒ वर्ष॑ते

namaste prāṇa krandāya namaste stanayitnave | namaste prāṇa vidyute namaste prāṇa varṣate

हिन्दी अर्थ

कहीं से न रुकने वाली गति से अ्रभीष्ट स्थानो पर जा सकता है, भरन्यथा नही" । १३२ भ्रथववेद-भाष्य कां० ११ । सू9 ५, षवेतों पर (रेतः) जल (सिञ्चति) सचता है, (तेन) उस ढारा (पृथि- चारी) ब्रह्मचारी, (भूमौ) भूमिम (सानौ) मरौर पवंतों में (रेतः) निज सदुपदेशो का जल (सिञ्चति) सींचता है; (तेन) भ्रौर उस दारा (पृथि-

English

Verse, Song, and Sacrificial Text, chanting, the prelude, and the laud,

अध्याय 11

श्लोक 4.3

यत् प्रा॒ण स्त॑नयि॒त्नुना॑भि॒क्रन्द॒त्योष॑धीः ।प्र वी॑यन्ते॒ गर्भा॑न् दध॒तेऽथो॑ ब॒ह्वीर्वि जा॑यन्ते

yat prāṇa stanayitnunābhikrandatyoṣadhīḥ | pra vīyante garbhān dadhate'tho bahvīrvi jāyante

हिन्दी अर्थ

पक्षाः पक्षिणैश्च ये ते जाता ब्रह चारिणः ॥२१॥ का०११। सु०भ . श्रथरववेद-माष्य । १३७ . भौर जो ग्रामवासी (भ्रपक्षाः पशवः) पंलों से रहित पशुरहै, तथा (ये) (ब्रह्मचारिणः जाताः) ब्रह्मचारी हृए है 1 = २8

English

Call, deep-toned summons are therein, fine parts, through lore, of sacrifice,

अध्याय 11

श्लोक 4.4

यत् प्रा॒ण ऋ॒तावाग॑तेऽभि॒क्रन्द॒त्योष॑धीः ।सर्वं॑ त॒दा प्र मो॑दते॒ यत् किं च॒ भूम्या॒मधि॑

yat prāṇa ṛtāvāgate'bhikrandatyoṣadhīḥ | sarvaṃ tadā pra modate yat kiṃ ca bhūmyāmadhi

हिन्दी अर्थ

को पेदा करते हैँ । भ्रतः वे.भी नियत कालों के ब्रह्मचारी हए है । भ्राणि्यो के पालन कौ विधियो का भी ज्ञान विद्यमान है । उस ज्ञान के प्मौर प्राणियों की रक्षा करता है । देवानामेत् धरिषतमन॑भ्यारूढं चरति रोचमानम् ।

English

Sacrifice of four nights, of five, of six nights, day and night conjoined, Shodai, seven-night sacrifice, all these sprang from the Residue, these which the Immortal

अध्याय 11

श्लोक 4.5

य॒दा प्रा॒णो अ॒भ्यव॑र्षीद् व॒र्षेण॑ पृथि॒वीं म॒हीम्।प॒शव॒स्तत् प्र मो॑दन्ते॒ महो॒ वै नो॑ भविष्यति

yadā prāṇo abhyavarṣīd varṣeṇa pṛthivīṃ mahīm| paśavastat pra modante maho vai no bhaviṣyati

हिन्दी अर्थ

शक्तियां (्रमतेन साकम्) प्रजर-प्रमर परमेदवर के साथ मिल जाती है, परमेदवरीय कार्यो के भ्रचुल्प हो जतोदहैँ। १३८ भ्रथवेवेद-माष्य कां० ११ । सु०भ् भी एतद्नुरूप हो जाते है (मन्त्र ५) ।

English

One contains.

अध्याय 11

श्लोक 4.6

अ॒भिवृ॑ष्टा॒ ओष॑धयः प्रा॒णेन॒ सम॑वादिरन्।आयु॒र्वै नः॒ प्राती॑तरः॒ सर्वा॑ नः सुर॒भीर॑कः

abhivṛṣṭā oṣadhayaḥ prāṇena samavādiran| āyurvai naḥ prātītaraḥ sarvā naḥ surabhīrakaḥ

हिन्दी अर्थ

रथात् वेद का धारण तथा पोषण करता. है, (तस्मिन् भ्रधि) . उस वेद! में देवाः समोताः वेद मेँ सब दिव्य त॑त्व समवेत है, भोत-पोत है । अतिरिक्त वेद की सत्ता नहीं, वेद देवतामय ही है । इसलिये जिस ब्रह्म का० ११। सु०१ भथदेवेद-माष्य १३ ९

English

Pratihāra and Nidhanam, the Visvajit, the Abhijit, The two Sāhnātirātrās and Twelve-day rite are stored therein.

अध्याय 11

श्लोक 4.7

नम॑स्ते अस्त्वाय॒ते नमो॑ अस्तु पराय॒ते।नम॑स्ते प्राण॒ तिष्ठ॑त॒ आसी॑नायो॒त ते॒ नमः॑

namaste astvāyate namo astu parāyate| namaste prāṇa tiṣṭhata āsīnāyota te namaḥ

हिन्दी अर्थ

पर (श्रतिष्ठत्) जब स्थित होने भँ समथं हो जाता है, तब (तानि) उन वान् कर देता है । (सः) वह (स्नातः) स्नातकं होकर, (बभ्र) सवका में (बहु रोचते) बहुत रुचिकर भर्थात् प्रिय होता या चमक्ता है । - मादि सिद्धि के कारण योगी जल पर स्थित हो सकता है । मन्त्र में “सलि-

English

Pleasantness, reverence, peace, and power, strength, vigour, immortality

अध्याय 11

श्लोक 4.8

नम॑स्ते प्राण प्राण॒ते नमो॑ अस्त्वपान॒ते।प॒रा॒चीना॑य ते॒ नमः॑ प्रती॒चीना॑य ते॒ नमः॑ सर्व॑स्मै त इ॒दं नमः॑

namaste prāṇa prāṇate namo astvapānate| parācīnāya te namaḥ pratīcīnāya te namaḥ sarvasmai ta idaṃ namaḥ

हिन्दी अर्थ

दारा विहरण करने कां कथन किथा है । तथा “उदाननयानज्जलपंककण्ट- भे.संयम द्वारा जल भादि मेंयोगी काप्रतिरोष नहीं होता! उदान वायु भथरवैः ११।५।११ की व्याख्या देखो । "प्ाक्षेतिके दो भरं है, (१) भा.-निवासं करता है, (२) तथा वहं तक गति. करता है । “क्षिं निवासमत्योः” । “निवास करे का १४० अथववेद-माष्य. का०-११। सु०६

English

All forward wishes are with love satisfied in the Residue. Nine several oceans, earths, and skies are set within, the Residue,

अध्याय 11

श्लोक 4.9

या ते॑ प्राण प्रि॒या त॒नूर्यो ते॑ प्राण॒ प्रेय॑सी ।अथो॒ यद् भे॑ष॒जं तव॒ तस्य॑ नो धेहि जी॒वसे॑

yā te prāṇa priyā tanūryo te prāṇa preyasī | atho yad bheṣajaṃ tava tasya no dhehi jīvase

हिन्दी अर्थ

करते है" एसा किया है । सरायणाचायं ने इन मन्त्रौ मे .पटित श्रमः के दो भ्रथं दिये है, “स्तुमः यहा इष्टफलं याचामहे" । मन्त मे भरोषधियों, जड़ (६) मन्व ( १४) में “ऋचः, , सामानि, भेषजा यजं षि" मं “भेषजा” पद भौषध प्रघान श्रथंववेद काः निर्देशक है । ऋचः भरौरः सामानि का प्रायः का ११। सु०६. अथरववेवेद-माष्य १४१ इकटा वर्णन वेदो मे हृश्रा है । क्योंकि इन दोनों का परस्पर भआधाराषेय का सम्बन्ध है । ऋचाभ्रों के भ्राधाएर परसाम.गाया जातादहै, जसे किं गेय रचना पर राग या गान । इन दोनों भ्रौर यज् षि के मध्य में “भेषजा पद प्टितं है" यह दशानि के लिये कि “भेषजा पद भी वेद को सूचित करता है केवल प्रौषधों को नहीं । ।

English

Bright shines the Sun therein, in me, the Residue, are Day and

अध्याय 11

श्लोक 4.10

प्रा॒णः प्र॒जा अनु॑ वस्ते पि॒ता पु॒त्रमि॑व प्रि॒यम्।प्रा॒णो ह॒ सर्व॑स्येश्व॒रो यच्च॑ प्रा॒णति॒ यच्च॒ न

prāṇaḥ prajā anu vaste pitā putramiva priyam| prāṇo ha sarvasyeśvaro yacca prāṇati yacca na

हिन्दी अर्थ

बरह्मचारी समिधा मेख॑ख्यां ्रम्ण लोकास्तप॑सा पिपतिं ॥४॥ (इयं पृथिवी) यह् -पृथिव्री (समित्) पहली समिधा है, (चौः) दयुलोक वीस्थं लोकों को (पिपर्ति) पररिपालित्त तथा सुखो से प्ररिपूरिते करता है । को प्रथम पाथिव तत्वौ-तथा-किषयों का धरिज्ञान देना चाहिए, तदनन्तर

English

The teeth of the completed year, may these deliver us from woe.

अध्याय 11

श्लोक 4.11

प्रा॒णो मृ॒त्युः प्रा॒णस्त॒क्मा प्रा॒णं दे॒वा उपा॑सते ।प्रा॒णो ह॒ सत्यवा॒दिन॑मुत्त॒मे लो॒क आ द॑धत्

prāṇo mṛtyuḥ prāṇastakmā prāṇaṃ devā upāsate | prāṇo ha satyavādinamuttame loka ā dadhat

हिन्दी अर्थ

कटिबद्ध होकर, त्रिलोकी रूपी तीन समीघाभ्रो को; मन तथां -आत्मरूपी, ओर परिश्रम तथा तपोमय जीवन व्यतीत करता हभ, पृथिवीस्थ -लोगो को ज्ञानभ्रदान द्वारा परिपालित तथा सुखो से पूरित करता ह॑ । लोकाः लाग । पदा. होता है, जन्म लेता है, (चमम्) शरीर पर उष्णता का (वसानः) .. कार्यो के भ्रचुरूप. हो जाती दँ (मत्वं २३)

English

The deathless balm that Mātalī knows, purchased at a chariot’s price, Indra effused into the floods. Waters, give us that healing balm!

अध्याय 11

श्लोक 4.12

प्रा॒णो वि॒राट् प्रा॒णो देष्ट्री॑ प्रा॒णं सर्व॒ उपा॑सते ।प्रा॒णो ह॒ सूर्य॑श्च॒न्द्रमाः॑ प्रा॒णमा॑हुः प्र॒जाप॑तिम्

prāṇo virāṭ prāṇo deṣṭrī prāṇaṃ sarva upāsate | prāṇo ha sūryaścandramāḥ prāṇamāhuḥ prajāpatim

हिन्दी अर्थ

१२६ -भरथवंवेद-भाष्य का० ११।सु०भ् “विलियम डिवटद्भिटनी” भवं ° ११।१।५५ कौ टिप्पणी मे लिखते है कि का० ११।सु०५ भ्रय्वेवेद-माष्य १२७ (जनयन्) प्रकट करता हुभ्रा, इनके यथाथ स्वरूपो का कथन करता हा,

English

A glorification of the Uchchhishta or Residue of Sacrifice

अध्याय 11

श्लोक 4.13

प्रा॒णा॒पा॒नौ व्री॑हिय॒वाव॑न॒ड्वान् प्रा॒ण उ॑च्यते ।यवे॑ ह प्रा॒ण आहि॑तोऽपा॒नो व्री॒हिरु॑च्यते

prāṇāpānau vrīhiyavāvanaḍvān prāṇa ucyate | yave ha prāṇa āhito'pāno vrīhirucyate

हिन्दी अर्थ

कर्मो का (ततहे) विनाश करता है । (मनु०) ।म्रपःन्=कमं (निघं० २।१) गीतां मेँ कहा है कि “कि. कम्रं किमक. वेद को माता भी कहा है। यथा “स्तुता मया वरवा वेवमाता' (भ्रथव° १६।७१।१) । वेदमाता के गर्भम गस करश्रौर उस.केज्ञान दुग्धका पृथिवीं. दिवं च) नभो अर्थात् पृथिवी भ्रौर लोक को. (भराचायेः) भ्राचायं (ततक्ष) घड़ता है इन. के 00618, प्रतिरूप, नमूने बनाता है (ते)उन दो

English

The Residue of Sacrifice containeth name, and from, and world:

अध्याय 11

श्लोक 4.14

अपा॑नति॒ प्राण॑ति॒ पुरु॑षो॒ गर्भे॑ अन्त॒रा।य॒दा त्वं प्रा॑ण॒ जिन्व॒स्यथ॒ स जा॑यते॒ पुनः॑

apānati prāṇati puruṣo garbhe antarā| yadā tvaṃ prāṇa jinvasyatha sa jāyate punaḥ

हिन्दी अर्थ

रौर द्यूलोक के देव (संमनसः) सांमनस्यरूप में (भवन्ति) -हो जाते ह । -सग्राम मं भसुरयो भौर भरासुरी वृत्तयो पर.बिजय पा सकता है। किस-किस प्रकार के तारां ईहै--इन का ज्ञानं ब्रह्मचारी को देने के लिये ्राचा्यं, इन के 1100०18 बनाता है, प्रतिरूप, नमूने तथा चित्रपट बनाता खूप मे, परस्पर श्रविरोधरूप में रहता है, इस का कारण ब्रह्मचारी का तपोमय जीवन है, वह भोग विलास में न पड़ता हृश्रा सदा प्राप्त ज्ञान के

English

Indra and Agni and the whole universe are comprised therein.

अध्याय 11

श्लोक 4.15

प्रा॒णमा॑हुर्मात॒रिश्वा॑नं॒ वातो॑ ह प्रा॒ण उ॑च्यते ।प्रा॒णे ह॑ भू॒तं भव्यं॑ च प्रा॒णे सर्वं॑ प्रति॑ष्ठितम्

prāṇamāhurmātariśvānaṃ vāto ha prāṇa ucyate | prāṇe ha bhūtaṃ bhavyaṃ ca prāṇe sarvaṃ pratiṣṭhitam

हिन्दी अर्थ

भ्राहूत करता ह, प्राप्त करता है ! (ते) उन दो लोकों को (समिधौ त्वा) करता है । (तयोः) उन दोमें (विद्वा भुवनानि) सब सत्पदाथं सब है वह भूलोक श्रौर दयुलोक को समिधा बना कर, निजं ज्ञानाग्नि को, है । इसलिये इनः दोः नोकों के परिज्ञान के भ्रन्तगंत सभो सत्पदा्थोका

English

The Residue of Sacrifice holdeth Earth, Heaven, and all that is: The Residue of Sacrifice holdeth sea, waters, Moon, and Wind.

अध्याय 11

श्लोक 4.16

आ॒थ॒र्व॒णीरा॑ङ्गिर॒सीर्दैवी॑र्मनुष्य॒जा उ॒त।ओष॑धयः॒ प्र जा॑यन्ते य॒दा त्वं प्रा॑ण॒ जिन्व॑सि

ātharvaṇīrāṅgirasīrdaivīrmanuṣyajā uta| oṣadhayaḥ pra jāyante yadā tvaṃ prāṇa jinvasi

हिन्दी अर्थ

विशेषण है, जोकि इन दोनों के विस्तार का चोतक “हैः । “पृथिवीम्” पद -मन्त्र = मेँ परित “उर्वी” पद का, समानार्थक है । कां ११।सु०५ भरथवंवेद-माष्य १२६ तो र॑ तप॑सा बरह्मचारी तद् केव॑लं छृणुत ब्रह विदान् ॥१०।

English

Real, non-real, both are there, Prajāpati, and Death, and strength:

अध्याय 11

श्लोक 4.17

य॒दा प्रा॒णो अ॒भ्यव॑र्षीद् व॒र्षेण॑ पृथि॒वीं म॒हीम्।ओष॑धयः॒ प्र जा॑य॒न्तेऽथो॒ याः काश्च॑ वी॒रुधः॑

yadā prāṇo abhyavarṣīd varṣeṇa pṛthivīṃ mahīm| oṣadhayaḥ pra jāyante'tho yāḥ kāśca vīrudhaḥ

हिन्दी अर्थ

इर निधि है पृथिवी, भ्रौर द्युलोक की पीठ से परे.निधि है. हृभा भौर पूथिवी की परिक्रमा कर्ता है । १३० अथवेवेद-माष्य कां० ११।सु०५ भाग में ( समेतः+ ) परस्पर मिलती ै। (तयोः) उनदो भ्रग्नियो में

English

Thereon depend the worldly ones: in me are glory Dra and Vra. The firm, the fast, the strong, the hard, Brahma, the All-creating

अध्याय 11

श्लोक 4.18

यस्ते॑ प्राणे॒दं वेद॒ यस्मिं॒श्चासि॒ प्रति॑ष्ठितः ।सर्वे॒ तस्मै॑ ब॒लिं ह॑रान॒मुष्मिंल्लो॒क उ॑त्त॒मे

yaste prāṇedaṃ veda yasmiṃścāsi pratiṣṭhitaḥ | sarve tasmai baliṃ harānamuṣmiṃlloka uttame

हिन्दी अर्थ

मे संयमसे, भ्रौर हलकी कपास में चित्त को तल्लीन करनेसे, योगी . भाकारगमन करता है । इस सूत्र के भाष्य में व्यासमूनि नेकहाहै कि “योगी के शरीरके लधु हो जाने पर, योगी पैरों द्वारा जल के पुष्ट पर, तथा रदिमयों मे विहार करता, भ्रौर भ्राकाश्च में यथेष्ट गमन करता दहै" । सिद्धि । वतमान में बड़े-बड़े भारी विमान भ्राकाशविहारी हो रहै है, पक्षी रषिम हारा संगम होता है । भौर संगम के कारण योगी निचली भ्रौर उपर की , .रिमर्यो मे जा-भ्रा सकता दवै । विना संगम, भ्राश्चरय न मिलने के कारण, जाना-भाना २. रदिगर्यो के दृढ होने से ही, दृढ़ सीढ़ी के सदृक्ष, नीचे-ऊपर जाना-्राना

English

Ten.

अध्याय 11

श्लोक 4.19

यथा॑ प्राण बलि॒हृत॒स्तुभ्यं॒ सर्वाः॑ प्र॒जा इ॒माः ।ए॒वा तस्मै॑ ब॒लिं ह॑रा॒न् यस्त्वा॑ शृ॒णव॑त् सुश्रवः

yathā prāṇa balihṛtastubhyaṃ sarvāḥ prajā imāḥ | evā tasmai baliṃ harān yastvā śṛṇavat suśravaḥ

हिन्दी अर्थ

का० ११।सु० ५ भथरवेवेद-माष्य १३१ तो विना विमानो के भ्राकारविहारी है । योगी का योगाभ्यास भी एक भागो का श्राङ्खल भाषा में ्रनूवाद दिया जाता. है ताकि सीचातानी का करता, तो भी भ्रनुव्ाद से यह प्रकट हो जातादहैकिवायु मे विहरण भ्रौर

English

Gods, as a wheel about the nave, are fixed all round the Residue.

अध्याय 11

श्लोक 4.20

अ॒न्तर्गर्भ॑श्चरति दे॒वता॒स्वाभू॑तो भू॒तः स उ॑ जायते॒ पुनः॑ ।स भू॒तो भव्यं॑ भवि॒ष्यत् पि॒ता पु॒त्रं प्र वि॑वेशा॒ शची॑भिः

antargarbhaścarati devatāsvābhūto bhūtaḥ sa u jāyate punaḥ | sa bhūto bhavyaṃ bhaviṣyat pitā putraṃ pra viveśā śacībhiḥ

हिन्दी अर्थ

को सूचित क्रिया है । पुणेयुवा को उपदेल्च देने का भ्रधिकार है । “वृहुच्छेपः" ब्रह्मचारी है। रेतः उदकनाम (निघं० १।१२) । भ्ररुणः = श्रारोचमान तासांमचीषि पृथग च॑रन्ति ताखामाज्यं पुरुषो व्षमाप॑ः । १३॥ धम्) समिधा का (भ्रा दधाति) आघान करता है। (तासाम्) उन समि-

English

The hum is in the Residue, the tone, the murmur of the psalm. Within the Residue, like babes unborn, the parts of sacrifice,

अध्याय 11

श्लोक 4.21

एकं॒ पादं॒ नोत्खि॑दति सलि॒लाद्धंस उ॒च्चर॑न्।यद॒ङ्ग स तमु॑त्खि॒देन्नैवाद्य न श्वः स्या॒न्न रात्री॒ नाहः॑ स्या॒न्न व्युऽछेत् क॒दा च॒न

ekaṃ pādaṃ notkhidati salilāddhaṃsa uccaran| yadaṅga sa tamutkhidennaivādya na śvaḥ syānna rātrī nāhaḥ syānna vyu'chet kadā cana

हिन्दी अर्थ

परिणाम है;-- (राज्यम्) घृतादि. पदार्थे, - (पुरुषः) पुरुषादि प्राणी (वषंम्) वर्षा, (भ्रापः) तथा नदी भादि के जल । का ११। सु०५ भरयवबेद-माष्य, १२२ इन साधनों मे मिल कर वर्षा का कारण बनता है" । वेदानुसार सब बालकों भ्रावदयक है । पृथिवी के सब बालक बालिकाएं करोड़ों की संख्या मे है ।

English

Aindrāgne Pāvamāna lie. Mahānāmnī, Mahavrata.

अध्याय 11

श्लोक 4.22

अ॒ष्टाच॑क्रं वर्तत॒ एक॑नेमि स॒हस्रा॑क्षरं॒ प्र पु॒रो नि प॒श्चा।अ॒र्धेन॒ विश्वं॒ भुव॑नं ज॒जान॒ यद॑स्या॒र्धं क॑त॒मः स के॒तुः

aṣṭācakraṃ vartata ekanemi sahasrākṣaraṃ pra puro ni paścā| ardhena viśvaṃ bhuvanaṃ jajāna yadasyārdhaṃ katamaḥ sa ketuḥ

हिन्दी अर्थ

(्राचा्येः मृत्यु ) भराचायं मृत्यु रूपदहै, (वरुणः) वरुणरूप है, (सोमः भरोषधयः पयः) सोम, श्रोषधि तथा जल भ्रथवा दुगधरूप है । मरतः भ्राचायं मृत्युरूप है । वह उन्हें पापकम से निवारित करता है, भरतः रोगोपचार करता है, प्रतः भ्रोषधिरूप है । सुल तथा सदपदेश की वर्षा करता है, भरतः मेधरूप है । स्वभाव से जलसमान शीतल, तथा दुग्धादि भ्रन्न प्रदान दारा भातुषूप' है । चाहता है, (वरणो भूत्वा) पापनिवारकरूपं धारण कर भ्राचायं उस-उस

English

The Vājapeya, Royal Rite, the Agnishoma and its forms, Hymns, joyfullest with living grass the Asvamedha, are therein,

अध्याय 11

श्लोक 4.23

यो अ॒स्य वि॒श्वज॑न्मन॒ ईशे॒ विश्व॑स्य॒ चेष्ट॑तः ।अन्ये॑षु क्षि॒प्रध॑न्वने॒ तस्मै॑ प्राण॒ नमो॑ऽस्तु ते

yo asya viśvajanmana īśe viśvasya ceṣṭataḥ | anyeṣu kṣipradhanvane tasmai prāṇa namo'stu te

हिन्दी अर्थ

धारण कर सन्तानो का रक्षक- होता है । (प्रजापतिः) प्रजापति होकर को पातां है, परम एेदव्यवान् संन्यासी या चतु्थश्विमी होता है । का० ११।सु०५ भ्रथरववेद-माष्य १३५ इच्छते) शिष्य को श्रभिलाषा करता है।

English

Dikshā and Agnyādheya rite that sates the wish, with magic- hymn,

अध्याय 11

श्लोक 4.24

यो अ॒स्य स॒र्वज॑न्मन॒ ईशे॒ सर्व॑स्य॒ चेष्ट॑तः ।अत॑न्द्रो॒ ब्रह्म॑णा॒ धीरः॑ प्रा॒णो मानु॑ तिष्ठातु

yo asya sarvajanmana īśe sarvasya ceṣṭataḥ | atandro brahmaṇā dhīraḥ prāṇo mānu tiṣṭhātu

हिन्दी अर्थ

साथ ही अनुभवी होने के कारण ब्रह्मचारियों का पालन मातृवत् कर सकता है (मन्व ३,१४) । इस भाव को सूचित करने के लिये मन्त्र १६ में घासम्) घास को (जिगीषति) निगलना चाहता है । रह सकती । पाचनदाक्ति के बिना पशु खाना भी नहीं चाहता ।

English

Suspended rites, long sessions, are contained within the Residue. Faith fire-oblation, fervent zeal, service, and sacrificial cry,

अध्याय 11

श्लोक 4.25

ऊ॒र्ध्वः सु॒प्तेषु॑ जागार न॒नु ति॒र्यङ् नि प॑द्यते ।न सु॒प्तम॑स्य सु॒प्तेष्वनु॑ शुश्राव॒ कश्च॒न

ūrdhvaḥ supteṣu jāgāra nanu tiryaṅ ni padyate | na suptamasya supteṣvanu śuśrāva kaścana

हिन्दी अर्थ

ब्रहमचर्येण. तप॑सा देवा मूत्युमपांध्नत । १३६ भ्थ्वेवैद-माष्य काण ११। सु० ५ कथित देवो के लिये (स्वः भ्राभरत्) मूत के पुख का मागं दर्शाता है । तथा ऋतुरभरो सहित बं, (ते) वे सब (ब्रह्मचारिणः) ब्रह्मचारी (जाताः)

English

Guerdon, good works and their reward, are stored within the

अध्याय 11

श्लोक 4.26

प्राण॒ मा म॑त् प॒र्यावृ॑तो॒ न मद॒न्यो भ॑विष्यसि ।अ॒पां गर्भ॑मिव जी॒वसे॒ प्राण॑ ब॒ध्नामि॑ त्वा॒ मयि॑

prāṇa mā mat paryāvṛto na madanyo bhaviṣyasi | apāṃ garbhamiva jīvase prāṇa badhnāmi tvā mayi

हिन्दी अर्थ

यव रादि पौषे, प्नौर बड़े-बड़े वृक्ष भी पूणं यौवन पर -पर्ुच कर् पूरा यौवन-काल बिताकर ही श्रगले काल के मानो उत्पादक होते है । ग्रतः मानो ये भी निज ब्रहमावयं कालके नियमको णं करते । दिनके के नियत काल के पदचात् ही दिन का जन्म होता है । इनका भ्रपना श्रपना नियतकाल ही इन का कालिक-्रह्यवथे है । इसी प्रकार प्रत्येक ऋतु नियत जगत, तथा काल, सभी श्रपने अपने नियतकालों के ब्रह्मचय. का पालन

English

Residue. Sacrifice of one night, or two, Sadya1 kri, Ukthya, and Prakri,

अध्याय 11

श्लोक 5.1

ब्रह्मचर्यम्।१-२६ ब्रह्मा।ब्रह्मचारी।त्रिष्टुप्, १ पुरोऽतिजागता विराड् गर्भा, २ पञ्चपदा बृहतीगर्भा विराट् शक्वरी, ३ उरोबृहती, ६ शाक्वरगर्भा चतुष्पदा जगती, ७ विराड् गर्भा, ८ पुरोऽतिजागता विराड् जगती, ९ बृहतीगर्भा, १० भुरिक्, ११, १३ जगती, १२ शाक्वरगर्भा चतुष्पदा विराडतिजगती, १५ पुरस्ताज्ज्योतिः, १४, १६-२२ अनुष्टुप्, २३ पुरोबार्हतातिजागतगर्भा, २५ एकावसानार्च्युष्णिक्, २६ मध्येज्योतिर ष्णिग्गर्भा।ब्र॒ह्म॒चा॒रीष्णंश्च॑रति॒ रोद॑सी उ॒भे तस्मि॑न् दे॒वाः संम॑नसो भवन्ति ।स दा॑धार पृथि॒वीं दिवं॑ च॒ स आ॑चा॒र्यं१ तप॑सा पिपर्ति

brahmacaryam| 1-26 brahmā|brahmacārī| triṣṭup, 1 puro'tijāgatā virāḍ garbhā, 2 pañcapadā bṛhatīgarbhā virāṭ śakvarī, 3 urobṛhatī, 6 śākvaragarbhā catuṣpadā jagatī, 7 virāḍ garbhā, 8 puro'tijāgatā virāḍ jagatī, 9 bṛhatīgarbhā, 10 bhurik, 11, 13 jagatī, 12 śākvaragarbhā catuṣpadā virāḍatijagatī, 15 purastājjyotiḥ, 14, 16-22 anuṣṭup, 23 purobārhatātijāgatagarbhā, 25 ekāvasānārcyuṣṇik, 26 madhyejyotira ṣṇiggarbhā| brahmacārīṣṇaṃścarati rodasī ubhe tasmin devāḥ saṃmanaso bhavanti | sa dādhāra pṛthivīṃ divaṃ ca sa ācāryaṃ1 tapasā piparti

हिन्दी अर्थ

करते है, वणेन करते ह, (ते) वे है परमेष्वर ! (नः) हमे (रंहसः) हनन से (मुञ्चन्तु) मुक्त करे, हमारा हनन न करर । मन्त्र मे जिन कारणों से हनन की सम्भावना है, उन का केन किया हैँ । तथा उनके हारा हनन न होने की याचना की गई है । यह् याचना हनन के कारण रूपं मे, वणित क्रिया है । यदि ए््थना इनसे की होती तो , यह कहा जाता कि “ते दरुयं हसः नो मुञ्चत,” न कि “भुञ्चन्तु" । देखो

English

Night. The Residue the Father’s sire, who bears this universe, supports

अध्याय 11

श्लोक 5.2

ब्र॒ह्म॒चा॒रिणं॑ पि॒तरो॑ देवज॒नाः पृथ॑ग् दे॒वा अ॑नु॒संय॑न्ति॒ सर्वे॑ ।ग॒न्ध॒र्वा ए॑न॒मन्वा॑य॒न् त्रय॑स्त्रिंशत् त्रिश॒ताः ष॑ट्सह॒स्राः सर्वा॒न्त्स दे॒वांस्तप॑सा पिपर्ति

brahmacāriṇaṃ pitaro devajanāḥ pṛthag devā anusaṃyanti sarve | gandharvā enamanvāyan trayastriṃśat triśatāḥ ṣaṭsahasrāḥ sarvāntsa devāṃstapasā piparti

हिन्दी अर्थ

रकार पिण्ड हरीर मे भी ऋषियों की सत्ता दई है! यथा “तप्त ऋषयः शरीरे, रह्मयं धादित्ये"" (निर० १२।४।३७) । इसी प्रकार राष्ट शरीरम २, भ्रादित्य की ७ रदिमियों को निरुक्त मे ७ चऋषिकहा है। वर्षकराल मँ म भ्रादित्य की ७ रदिमरयों काही प्रेष ही र्हा होता है ।

English

Great gain and wealth, are laid, concealed and treasured, in the

अध्याय 11

श्लोक 5.3

आ॒चा॒र्यऽ उप॒नय॑मानो ब्रह्मचा॒रिणं॑ कृणुते॒ गर्भ॑म॒न्तः ।तं रात्री॑स्ति॒स्र उ॒दरे॑ बिभर्ति॒ तं जा॒तं द्रष्टु॑मभि॒संय॑न्ति दे॒वाः

ācārya' upanayamāno brahmacāriṇaṃ kṛṇute garbhamantaḥ | taṃ rātrīstisra udare bibharti taṃ jātaṃ draṣṭumabhisaṃyanti devāḥ

हिन्दी अर्थ

वाते चन्द्र तथा सू । भरतंवान् =ऋतुश्रो से बने छः छः मासौ के अयन, (भथवं० ६।३६।२) में चन्द्रमा को मी तुकतष्टा कहा है । तथा “ऋतुरन्यो शयं भौर चन्दर दोनों ऋतुपति है । कां० ११।सु० ६. भथरववेद-भाष्य १५९

English

All pleasures and enjoyments, all delights and rapturous ecsta- sies,

अध्याय 11

श्लोक 5.4

इ॒यं स॒मित् पृ॑थि॒वी द्यौर्द्वितीयो॒तान्तरि॑क्षं स॒मिधा॑ पृणाति ।ब्र॒ह्म॒चा॒री स॒मिधा॒ मेख॑लया॒ श्रमे॑ण लो॒कांस्तप॑सा पिपर्ति

iyaṃ samit pṛthivī dyaurdvitīyotāntarikṣaṃ samidhā pṛṇāti | brahmacārī samidhā mekhalayā śrameṇa lokāṃstapasā piparti

हिन्दी अर्थ

एतं देवा दक्षिणतः पथात् भाश्च उदेतं । उदित होभ्रो । (ते विदे देवाः) वे तुम सब देव (समेत्य) मिल कर नः हमे (श्र हसः) हनन से (मुञ्चत) मुक्त करो । 1 कर्ेन्तीति, जो सदा -गतिवाली हैँ ।. सूयं रदिमयां सदा गतिशोल है । ये का विना विश्वाम किये सदा चलता रहता है । शक्राः = सूं रदिमयां शक्ति-

English

All the celestial Gods whose home is heaven sprang from the Residue.

अध्याय 11

श्लोक 5.5

पूर्वो॑ जा॒तो ब्रह्म॑णो ब्रह्मचा॒री घ॒र्मं वसा॑न॒स्तप॒सोद॑तिष्ठत्।तस्मा॑ज्जा॒तं ब्राह्म॑णं॒ ब्रह्म॑ ज्ये॒ष्ठं दे॒वाश्च॒ सर्वे॑ अ॒मृते॑न सा॒कम्

pūrvo jāto brahmaṇo brahmacārī gharmaṃ vasānastapasodatiṣṭhat| tasmājjātaṃ brāhmaṇaṃ brahma jyeṣṭhaṃ devāśca sarve amṛtena sākam

हिन्दी अर्थ

रहता है, श्रौर सूयंरदिमियां इस का पीछा करती रहती हँ । सूर्य रदिमयां करतीं तथा नाना प्रकार से शक्ति प्रदान करती हँ 1 सूये रदिमर्यो के सेवन से श्राय बढ़ती है । इस प्रकार से हम हनन से मुक्त करती है । सायणाचायं विश्वान देवानिदं ब्रुमः सत्यसंधानूृराटषः । विश्वाभिः पत्नीभिः सह ते नो सुजन्त्वहसः ॥ १६॥

English

The Deities, the Fathers, men, Gandharvas, and Apsarases.

अध्याय 11

श्लोक 5.6

ब्र॒ह्म॒चा॒र्येऽति स॒मिधा॒ समि॑द्धः कार्ष्णं॒ वसा॑नो दीक्षि॒तो दी॒र्घश्म॑श्रुः ।स स॒द्य ए॑ति॒ पूर्व॑स्मा॒दुत्त॑रं समु॒द्रं लो॒कान्त्सं॒गृभ्य॒ मुहु॑रा॒चरि॑क्रत्

brahmacārye'ti samidhā samiddhaḥ kārṣṇaṃ vasāno dīkṣito dīrghaśmaśruḥ | sa sadya eti pūrvasmāduttaraṃ samudraṃ lokāntsaṃgṛbhya muhurācarikrat

हिन्दी अर्थ

बृद्धि करने वाले पुरुषों का (त्र मः) हम कथन करते है कि (विर्वाभिः पत्नीभिः सह) श्रपनी-अपनी पत्नियों सहित (ते) वे है परमेच्वर ! (नः) हमे (अहसः) हनन से (मुञ्चन्तु) मुक्त कर, हमें हनन से बचाएं । १५२ . भ्रथववेद-भाष्य कां ११। सु०६ दिव्यगुणी पुरुष तथा उन की पत्नियां, कृपापूर्वंक, सदुपदेशो द्वारा हमें हनन से बचाने की क्षमता रखते हैँ । परमेदवर से यह प्रार्थना की गई है कि भ्रष

English

All the celestial Gods whose home is heaven sprang from the Residue.

अध्याय 11

श्लोक 5.7

ब्र॒ह्म॒चा॒री ज॒नय॒न् ब्रह्मा॒पो लो॒कं प्र॒जाप॑तिं परमे॒ष्ठिनं॑ वि॒राज॑म्।गर्भो॑ भू॒त्वामृत॑स्य॒ योना॒विन्द्रो॑ ह भू॒त्वासु॑रांस्ततर्ह

brahmacārī janayan brahmāpo lokaṃ prajāpatiṃ parameṣṭhinaṃ virājam| garbho bhūtvāmṛtasya yonāvindro ha bhūtvāsurāṃstatarha

हिन्दी अर्थ

इन्द इस निमित्त प्रेरणा भदान करते रहिये +वेद मे पलिनियोँ का भी मान है, यहु भी मन्त्र द्वारा प्रकट होता है । सर्वीन् देवानिदं वर॑मः सत्यसंधानृताृषंः । से (सर्वा भूतानि) सब पञ्वभूत (संगत्य ) मिल कर, एकमत से हो करु, (नः) हम (अंहसः) हनन से (मूञ्चन्तु) मुक्त कर" हमारा. हनन न करे ।

English

On the origin of some Gods and the creation of man

अध्याय 11

श्लोक 5.8

आ॒चा॒र्यऽ स्ततक्ष॒ नभ॑सी उ॒भे इ॒मे उ॒र्वी ग॑म्भी॒रे पृ॑थि॒वीं दिवं॑ च ।ते र॑क्षति॒ तप॑सा ब्रह्मचा॒री तस्मि॑न् देवाः संम॑नसो भवन्ति

ācārya' statakṣa nabhasī ubhe ime urvī gambhīre pṛthivīṃ divaṃ ca | te rakṣati tapasā brahmacārī tasmin devāḥ saṃmanaso bhavanti

हिन्दी अर्थ

भूतम् = मवतीति, त्र॑कालिक सत्ता वाला, सदा सद्र पं से वतंमान, श्रपने उग्ररूप में हमारा हनन भी करते रहते है; पृथिवी भूचाल दवारा, भ्रप् प्रवाह दारा; भौर पराकाश ककश, कठोर ध्वनियों तथा .शन्दों द्वारा । केवशमें है, श्रतः इनमें प्रेरगाए दीजिये किये इस ढंगसे वते, जिससे हमारा हनन न हो । वे परस्पर मिल कर हमें हनन से मुक्त करते रहु, इन ंसेएकभी श्रपनेमे उग्रह्मनहो। . -

English

When Manyu brought his consort home forth from Sankalpa’s dwelling-place, Who were the wooers of the bride, who was the chief who courted her?

अध्याय 11

श्लोक 5.9

इ॒मां भूमिं॑ पृथि॒वीं ब्र॑ह्मचा॒री भि॒क्षामा ज॑भार प्रथ॒मो दिवं॑ च ।ते कृ॒त्वा स॒मिधा॒वुपा॑स्ते॒ तयो॒रार्पि॑ता॒ भुव॑नानि॒ विश्वा॑

imāṃ bhūmiṃ pṛthivīṃ brahmacārī bhikṣāmā jabhāra prathamo divaṃ ca | te kṛtvā samidhāvupāste tayorārpitā bhuvanāni viśvā

हिन्दी अर्थ

का० ११।सू० ६ अथर्ववेद-माष्य १५३ या देवीः पञ्च॑ परदिशो ये देषा दवारशवः । (या ) जो (देवीः) दिग्य (पञ्चदिडाः) विस्तृत दिश्ाए है, (ये सौरवषं की (ये) जो दाढ़ृ है, (ते) वे (हे परमेश्वर ! ) (नः) हमे (सदा शिवाः सन्तु) सवा कल्याणकारी हों । .

English

Fervour and Action were the two, in depths of the great billowy sea?

अध्याय 11

श्लोक 5.10

अ॒र्वाग॒न्यः प॒रो अ॒न्यो दि॒वस्पृ॒ष्ठाद् गुहा॑ नि॒धी निहि॑तौ॒ ब्राह्म॑णस्य ।तौ र॑क्षति॒ तप॑सा ब्रह्मचा॒री तत् केव॑लं कृणुते॒ ब्रह्म॑ वि॒द्वान्

arvāganyaḥ paro anyo divaspṛṣṭhād guhā nidhī nihitau brāhmaṇasya | tau rakṣati tapasā brahmacārī tat kevalaṃ kṛṇute brahma vidvān

हिन्दी अर्थ

१४२ भरथरवेवेद-भाष्य काऽ ११1 सु०६ धीन ह । वह इन का नियन्ता है । भ्रतः नियन्ता से भराथेना उचित प्रतीत बृहस्पति, गजना द्वारा मेष को काट कर, वर्षा प्रदान करता है । जैसे किं बडहर वृक्ष से चमस को काट निकालता है । तथाः “बृहस्पति्िरवेण दाब्देन तथा (भगम्) मग का (ब्रूमः) -हम कथन करते है; (अंशम्) शरंश, (विव

English

Vishūvān, Upahavya, and all worship offered secretly.

अध्याय 11

श्लोक 5.11

अ॒र्वाग॒न्य इ॒तो अ॒न्यः पृ॑थि॒व्या अ॒ग्नी स॒मेतो॒ नभ॑सी अन्त॒रमे।तयोः॑ श्रयन्ते र॒श्मयोऽधि॑ दृ॒ढास्ताना ति॑ष्ठति॒ तप॑सा ब्रह्मचा॒री

arvāganya ito anyaḥ pṛthivyā agnī sameto nabhasī antarame| tayoḥ śrayante raśmayo'dhi dṛḍhāstānā tiṣṭhati tapasā brahmacārī

हिन्दी अर्थ

मेदवर ! (नः) हमे (रहस) हनन से (शुञ्चन्तु) मुक्त कर" हमारा हनन के सूचक है । वर्ण = सूय जोकि ररिम्ों दवारा. मेष "पदा कर, उस द्वारा शमो देवं सवितारं भातार॑युत पूष्ण । कां० ११। सुऽ ६. म्रथवेवेद-माष्य. १४३

English

The Father’s sire, the Residue, grandson of Spirit, primal Sire, Lord of the universe, the Bull, dwells on the earth victorious.

अध्याय 11

श्लोक 5.12

अ॒भि॒क्रन्द॑न् स्त॒नय॑न्नरु॒णः शि॑ति॒ङ्गो बृ॒हच्छेपोऽनु॒ भूमौ॑ जभार ।ब्र॒ह्म॒चा॒री सि॑ञ्चति॒ सानौ॒ रेतः॑ पृथि॒व्यां तेन॑ जीवन्ति प्र॒दिश॒श्चत॑स्रः

abhikrandan stanayannaruṇaḥ śitiṅgo bṛhacchepo'nu bhūmau jabhāra | brahmacārī siñcati sānau retaḥ pṛthivyāṃ tena jīvanti pradiśaścatasraḥ

हिन्दी अर्थ

पोषण करने वाले, (उत) -तथा (पूषणम्) ररिमयों द्वारा परिपुष्ट का त्वष्टा का (भ्रमः) हम कथन करते रहँ (ते) वे है परमेरवर। (नः) हमे (रंहसः) हनन से (मुञ्चन्तु) मुक्त करे हमारा हनन न करे । भवति, भ्रधस्तात् तद्वेलायां तमो भवति (निकट १२।२।१२) । यह काल उषा के प्रयाण करने के परदचात्ः का है । यथा “सवितो वरेण्योऽनु भ्रयाणमुषसो विभाति (ऋ० ५।८१।२) । धाता मध्यस्थानी देवता + मन गन्ववे है, ऋक् भ्रौर साम भरप्सराएं है (यजु १८१३८४३) ;

English

Right, truth, dominion, fervent zeal, toil, duty, action, future, past,

अध्याय 11

श्लोक 5.13

अ॒ग्नौ सूर्ये॑ च॒न्द्रम॑सि मात॒रिश्व॑न् ब्रह्मचा॒र्य॑१प्सु स॒मिध॒मा द॑धाति ।तासा॑म॒र्चींषि॒ पृथ॑ग॒भ्रे च॑रन्ति॒ तासा॒माज्यं॒ पुरु॑षो व॒र्षमापः॑

agnau sūrye candramasi mātariśvan brahmacārya1psu samidhamā dadhāti | tāsāmarcīṃṣi pṛthagabhre caranti tāsāmājyaṃ puruṣo varṣamāpaḥ

हिन्दी अर्थ

(यः अयमा नाम देवः) जो ्रयेमा नाम देवर है, (ब्रमः) इन का हम कथन करते है, (ते) वे है परभेदवरः (नः) हमे (रंहसः) हनन से (गुज्चन्तु) मुक्त करे" हमारा हनन न करे । , १४४ भ्रथवेवेद-माष्य कां० ११। सु०६. द्वारा हमारा हनन न करे -यह प्राना परमेदनरसे को है । चन्दर दोनों का (इदं ब्रूमः) हम यह कथन करते.है, तथा (विद्वान्) सभी

English

Valour; prosperity, and strength dwell in the Residue in strength. Welfare, resolve and energy, the six expanses, kingship, sway,

अध्याय 11

श्लोक 5.14

आ॒चा॒र्योऽ मृ॒त्युर्वरु॑णः॒ सोम॒ ओष॑धयः॒ पयः॑ ।जी॒भूता॑ आस॒न्त्सत्वा॑न॒स्तैरि॒दं स्व॑१राभृ॑तम्

ācāryo' mṛtyurvaruṇaḥ soma oṣadhayaḥ payaḥ | jībhūtā āsantsatvānastairidaṃ sva1rābhṛtam

हिन्दी अर्थ

हम कथन करतेर्हैकि (ते) वे (हे परमेश्वर !) (नः) हमे (प्रहसः) हनन से (मुञ्चन्तु) मुक्त करे, हमारा हनन न करे । मात कष्टों तथा मृत्युभ्रों से बचे रहने की प्रा्थनाए परमेदवर से इन विनष्ट न होने वाली प्रकृति । तदनन्तर (दिशः) दिंशाभों का (ब्रूमः) हम कथन करते है; (च सर्वाः

English

Prayer, and direction, and the year, oblation, planets, are there- in;

अध्याय 11

श्लोक 5.15

अ॒मा घृ॒तं कृ॑णुते॒ केव॑लमाचा॒र्यो भू॒त्वा वरु॑णो॒ यद्य॒दैच्छत् प्र॒जाप॑तौ ।तद् ब्र॑ह्मचा॒री प्राय॑च्छत् स्वन् मि॒त्रो अध्या॒त्मनः॑

amā ghṛtaṃ kṛṇute kevalamācāryo bhūtvā varuṇo yadyadaicchat prajāpatau | tad brahmacārī prāyacchat svan mitro adhyātmanaḥ

हिन्दी अर्थ

नियच्छति" के; रावारः पर न्यायावीरे प्रथं क्याहै कां» ११।बु० ६. भ्रथववेद-माष्य १४१५ कारी वृप्तिदायक मेष । तप् (तृप्तौ) +-जन्यः (जनहितकारी । दिशः = सोमो मा देवो भुंञ्चतु यमाहुश्चन्दरमा इतिं ॥७॥

English

And the four Hotars, Apri hymns, the Nivids, and Four- monthly rites, Oblations, sacrifices, and animal offerings, and their forms.

अध्याय 11

श्लोक 5.16

आ॒चा॒र्योऽ ब्रह्मचा॒री ब्र॑ह्मच॒री प्र॒जाप॑तिः ।प्र॒जाप॑ति॒र्वि रा॑जति वि॒राडिन्द्रो॑ऽभवद् व॒शी

ācāryo' brahmacārī brahmacarī prajāpatiḥ | prajāpatirvi rājati virāḍindro'bhavad vaśī

हिन्दी अर्थ

. (रहो रात्रे) दिन भ्रौर रात, (रथो) तथा (उषाः) उषः काल, इस नाम से (आहुः) कहते है वह भी (मा) ममे (मुञ्चतु) उन दुष्परि.. के लिपे शपर्थे लते है, जो कि भूटी होती है, सत्य॑रूप नहीं होतीं । इन शग्थो के कारण चित्वृत्तियां दूषित हौ जाती ह यंह दुष्परिणाम है । भ्रापे को मुक्त करना चाहता है ! दिन-रात तथा उषः काल में मनुष्य सटी रपय लाता रहता है । वह इन्ह त्यागने का भ्रभिलाषी है । रतः इन्हे

English

Months, half-months, sections of the year, seasons are in the

अध्याय 11

श्लोक 5.17

ब्र॒ह्म॒चर्ये॑ण॒ तप॑सा॒ राजा॑ रा॒ष्ट्रं वि र॑क्षति ।आ॒चा॒र्योऽ ब्रह्म॒चर्ये॑ण ब्रह्मचा॒रिण॑मिच्छते

brahmacaryeṇa tapasā rājā rāṣṭraṃ vi rakṣati | ācāryo' brahmacaryeṇa brahmacāriṇamicchate

हिन्दी अर्थ

भौर उषाः शब्द द्वारा दिन का काल । “शपथ्य” परिणाम है, रौर “शपथ उस का कारण है । परिणाम से छृटकारा चाहने वाला व्यक्ति, सुतरां कारण से भी छटकारे का भरभिलाषी है । । (पाथिवा-) पृथिवी के (दिव्याः) तथा द्युलोक के (पावः) पशु, के (मृगाः) मृग है, तथा १४६ श्रथर्ववेद-माष्य कां० ११। सुर द केरते है, (ते) वे है परमेश्वर! (नः) हमे (ग्रहसः) हनन से (मुञ्चन्तु) मुक्त करर, हमारा हनत न कर, हमे कष्ट नं पडटुचाए । दिव्याः परावः मेष, सिह, वृहिचक, मकर भादि नक्षत्रगण । .

English

Residue, The waters resonant afar, the thunder, and the mighty noise.

अध्याय 11

श्लोक 5.18

ब्र॒ह्म॒चर्ये॑ण क॒न्या॒३ युवा॑नं विन्दते॒ पति॑म्।अ॒न॒ड्वान् ब्र॑ह्म॒चर्ये॒णाश्वो॑ घा॒सं जि॑गीर्षति

brahmacaryeṇa kanyā3 yuvānaṃ vindate patim| anaḍvān brahmacaryeṇāśvo ghāsaṃ jigīrṣati

हिन्दी अर्थ

रूप चवं सेनापतिं है--इन दोनो का (ब्रणः) हम कथन करते है, (एषां या वे इषु भ्र्थात् बाण, है परमेदवर ! (नः) हमारे लिये (सदा शिवाः) प्राणि वं का पालक, रक्षक अधिकारी भव । पशुः “तवेमे पञ्च पावो विभवता गाव भ्मदवाः पुरुषा प्रंजावयः" (अथवं० ११।२।९), पशुप्रों के (नः) हमे. (श्रंहसः) हनन से (मुञ्चन्तु) मक्त कर, हमारा हनन न करर

English

Pebbles, sand, stones, and herbs, and plants, and grass are in the Residue,

अध्याय 11

श्लोक 5.19

ब्र॒ह्म॒चर्ये॑ण॒ तप॑सा दे॒वा मृ॒त्युमपा॑घ्नत ।इन्द्रो॑ ह ब्र॒ह्मचर्ये॑ण दे॒वेभ्यः॒ स्व॑१राभ॑रत्

brahmacaryeṇa tapasā devā mṛtyumapāghnata | indro ha brahmacaryeṇa devebhyaḥ sva1rābharat

हिन्दी अर्थ

श्रभिभ्राय यह कि हम इन स्थानो मे कहीं भी जाय या विमानो दारा यलोक तथा नक्ष्नरों की भोर जाये, तो हमारा. न हनन हो, भ्रौरन जोकि इन सब स्थानो का शासक है, उस सेस्वरक्षा कीप्राथेना की दहै। कंज ११1 सू०६ भरथववेवेद-माष्व । १४७. सप्तर्षीन् वा इदं बर॑मोऽपो देवीः प॒जायंतिप ।

English

Closely embraced and laid therein are lightnings and the clouds and rain. Gain, acquisition, and success, fulness, complete prosperity.

अध्याय 11

श्लोक 5.20

ओष॑धयो भूतभ॒व्यम॑होरा॒त्रे वन॒स्पतिः॑ ।सं॒व॒त्स॒रः स॒हर्तुभि॒स्ते जा॒ता ब्र॑ह्मचा॒रिणः॑

oṣadhayo bhūtabhavyamahorātre vanaspatiḥ | saṃvatsaraḥ sahartubhiste jātā brahmacāriṇaḥ

हिन्दी अर्थ

१४८ भ्रथरवंवेद-भाष्य कां९ ११।सु०६ ये देवा विषदां अन्तरि्रसद्श्च ये । (ये) जो (देवाः) देव (दिविषदः) दूलोक में स्थित है, (चये शक्तिशाली देव (पृथिव्याम्) पृथिवी मे (शिताः) आश्रय पाए हृएहै

English

179 Residue.

अध्याय 11

श्लोक 5.21

पार्थि॑वा दि॒व्याः प॒शव॑ आर॒ण्या ग्रा॒म्याश्च॒ ये।अ॒प॒क्षाः प॒क्षिण॑श्च॒ ये ते जा॒ता ब्र॑ह्मचा॒रिणः॑

pārthivā divyāḥ paśava āraṇyā grāmyāśca ye| apakṣāḥ pakṣiṇaśca ye te jātā brahmacāriṇaḥ

हिन्दी अर्थ

(ते) वे सब है परमेश्वर ! (नः) हमें (श्रंहसः) मरण या कष्टोँसे (मुञ्चन्तु) मुक्त करे, हमारा हनन न करे । भ्रदशित है । पृथिवी के देव हैँ शासक तथा प्रबन्वक राज्याधिकारी, तथा आदित्या शद्रा वसो दिवि देवा अथर्वाणः मेद्वर ! (नः) हमे (रहसः) मरण से (मृञ्चन्तु) मक्त करे ।

English

All things that breathe the breath of life, all creatures that have eyes to see,

अध्याय 11

श्लोक 5.22

पृथ॒क् सर्वे॑ प्राजाप॒त्याः प्रा॒णाना॒त्मसु॑ बिभ्रति ।तान्त्सर्वा॒न् ब्रह्म॑ रक्षति ब्रह्मचा॒रिण्याभृ॑तम्

pṛthak sarve prājāpatyāḥ prāṇānātmasu bibhrati | tāntsarvān brahma rakṣati brahmacāriṇyābhṛtam

हिन्दी अर्थ

रस म्रथवेवेद वेद के ऋषियों का. ग्रहण कियाहै । “श्रथर्वाणः" को रूप से भ्रपने-भ्रपने स्थानों म स्थित है । कां० ११।सु०६ श्रयवंवेद-माष्य १४९ . सामवेद के गानो, (भेषजा) विविध भ्रोषधियों का वणेन करने वाले भ्रथवं- वेद का (ब्रमः) हम कथन करते रहते हँ । (यजुषि) यजुर्वेद के मन्तो

English

All the celestial Gods whose home is heaven sprang from the Residue.

अध्याय 11

श्लोक 5.23

दे॒वाना॑मे॒तत् प॑रिषू॒तमन॑भ्यारूढं चरति॒ रोच॑मानम्।तस्मा॑ज्जा॒तं ब्राह्म॑णं॒ ब्रह्म॑ ज्ये॒ष्ठं दे॒वाश्च॒ सर्वे॑ अ॒मते॑न सा॒कम्

devānāmetat pariṣūtamanabhyārūḍhaṃ carati rocamānam| tasmājjātaṃ brāhmaṇaṃ brahma jyeṣṭhaṃ devāśca sarve amatena sākam

हिन्दी अर्थ

(ते) वे सब है परमेहवर ! ) (नः) हमे (श्रंहसः) मरण से (मूञ्चन्तु) मुरूत करे । भेषजा = श्रथवा “भेषज” रूपी सामभ्री की भरोषधियां । प्रत्यवाय के हो जाने पर भ्राशंकित मृत्यु से बचाव के लिये परमेदवरसे भ्रनुकूल है । “भेषजा” पद वारा ब्रथवैवेद भ्रभिमत है । नानाविच. श्रोष- धियो को वर्णेन श्रथवैवेदे मे है, श्रत: अथर्ववेद को “भेषजा” कहा ह + इस प्रकार मन्त्रम चारों वेदों के नाम पठितर्है। जौ, तथा सह, (ते) वे (नः) हमे (अहसः) मृत्युकारक रोगोसे हे परमेदवर (मुञ्चन्तु) . मुक्त करं ।

English

Verses, and Songs, and magic hymns, Purāna, sacrificial text.

अध्याय 11

श्लोक 5.24

ब्र॒ह्म॒चा॒री ब्रह्म॒ भ्राज॑द् बिभर्ति॒ तस्मि॑न् दे॒वा अधि॒ विश्वे॑ स॒मोताः॑ ।प्रा॒णा॒पा॒नौ ज॒नय॒न्नाद् व्या॒नं वाचं॒ मनो॒ हृद॑यं॒ ब्रह्म॑ मे॒धाम्

brahmacārī brahma bhrājad bibharti tasmin devā adhi viśve samotāḥ | prāṇāpānau janayannād vyānaṃ vācaṃ mano hṛdayaṃ brahma medhām

हिन्दी अर्थ

दः = कुला, जिसे कि पदटृभ्रा कहते है, क्गिस से रस्सियां बनाई अन्तरगत है । अ्रभिपायःयह है.कि कोई भी श्रोषि फल प्रदात्री. नहीं होती यदि प्रमेदवरीय कषा न हो । यथा “विषमप्यमुतं क्वचिद् भवेदमृतं वा भो विष हो जाता है, रईस्वर को इच्छा से । पञ्च राज्यानि=सोम

English

All the celestial Gods whose home is heaven sprang from the Residue.

अध्याय 11

श्लोक 5.25

चक्षुः॒ श्रोत्रं॒ यशो॑ अ॒स्मासु॑ धे॒ह्यन्नं॒ रेतो॒ लोहि॑तमु॒दर॑म्

cakṣuḥ śrotraṃ yaśo asmāsu dhehyannaṃ reto lohitamudaram

हिन्दी अर्थ

ृतयुनेकञते व्रमस्ते नो युशन्त्वहसः ॥१६॥ ११० अथवंवेद-माष्य कां० ११1 भु० ६ पुण्यात्मा जताने वाले दुरात्मा, (पितृन्) तथा पितरो का (्र.मः) हम कथन करते है, तथा (एकशतं .भुत्यून्) एक सौ एक मृत्युम का (ब्रमः) हम

English

Inbreath and outbreath, eye and ear, decay and freedom from decay,

अध्याय 11

श्लोक 5.26

तानि॒ कल्प॑द् ब्रह्मचा॒री स॑लि॒लस्य॑ पृ॒ष्ठे तपो॑ऽतिष्ठत् त॒प्यमा॑नः समु॒द्रे।स स्ना॒तो ब॒भ्रुः पि॑ङ्ग॒लः पृ॑थि॒व्यां ब॒हु रो॑चते

tāni kalpad brahmacārī salilasya pṛṣṭhe tapo'tiṣṭhat tapyamānaḥ samudre| sa snāto babhruḥ piṅgalaḥ pṛthivyāṃ bahu rocate

हिन्दी अर्थ

कथन करते है (ते)वे है परमेश्वर ! (नः) हमे (श्रहसः) मरणसे (मुञ्चन्तु) मुक्त करर, हमारा हनन न करे । सर्पो के से व्यवहार वाले विष द्वारां मार देने वाले । पितृन जननी जनक. ये पितृनामधारी, जब पितरों के संमान व्यनहार न करते हृए, भ्रपिततर रूप से बरताव करते है, ५-111678 श्रादि । एकशतं मृत्यून् = १०० वर्षों कथन करते है,-- (ते) वे सब है परमेदवर ! (नः) हमे (ग्रहंसः) हनन से (मुञ्चन्तु) मुक्त करे, हमारा हनन न करं ।

English

All the celestial Gods whose home is heaven sprang from the Residue.

अध्याय 11

श्लोक 6.1

पापमोचनम्।१-२३ शन्तातिः।चन्द्रमाः, मन्त्रोक्ताः।अनुष्टुप्, २३ बृहतीगर्भा।अ॒ग्निं ब्रू॑मो॒ वन॒स्पती॒नोष॑धीरु॒त वी॒रुधः॑ ।इन्द्रं॒ बृह॒स्पतिं॒ सूर्यं॒ ते नो॑ मुञ्च॒न्त्वंह॑सः

pāpamocanam| 1-23 śantātiḥ| candramāḥ, mantroktāḥ| anuṣṭup, 23 bṛhatīgarbhā| agniṃ brūmo vanaspatīnoṣadhīruta vīrudhaḥ | indraṃ bṛhaspatiṃ sūryaṃ te no muñcantvaṃhasaḥ

हिन्दी अर्थ

मुखवाला शेर । दिशाए श्रौर १२ मास तो देवीः श्नौर देव है, भरतः कल्याण- कारो है । परमेश्वरसेप्राथंनाकी गई हैकिये सदा दिव्य रूप रहकर हमारे लिये कल्याणकारी हों । तथा संवत्सरकाल मेँ जो ददानकारी सपं मासाः, यथा मधुरुच माववश्च वासन्तिकावृतू" (यजु० १३-२५) मे ऋतु- यन्मातंटी रथक्री तमत वेद् भेषजम् । (मात्तली) निर्माणकायं की भ्राषारभूत पारमेरुवरी माता, (रयक्री-

English

These were the wooers of the bride; Brahma the chief who courted her. Ten Gods before the Gods were born together in the ancient time.

अध्याय 11

श्लोक 6.2

ब्रू॒मो राजा॑नं॒ वरु॑णं मि॒त्रं विष्णु॒मथो॒ भग॑म्।अंशं॒ विव॑स्वन्तं ब्रूम॒स्ते नो॑ मुञ्च॒न्त्वंह॑सः

brūmo rājānaṃ varuṇaṃ mitraṃ viṣṇumatho bhagam| aṃśaṃ vivasvantaṃ brūmaste no muñcantvaṃhasaḥ

हिन्दी अर्थ

कि को गई कामना वेदानुकूल हैया नहीं । सुरापान, मांसमक्षण, पशुहिसा, कमं किये .जाते हैँ । इन के निषेघ के लिये “छन्दा सह“ यह कथन हृश्रा की दृष्टि मेँ वेदाविर्भाव से पूवं उन यज्ञो की सत्ता माननी पड़ेगी, जो कि ही लुप्त हो चुके थे । वेदों को नित्य मानने वाले सायणाचायं . की दृष्टि से यह व्याख्या उस के मन्तव्य की विरोधिनी है।

English

What world do they inhabit since they gave the world unto their sons?

अध्याय 11

श्लोक 6.3

ब्रू॒मो दे॒वं स॑वि॒तारं॑ धा॒तार॑मु॒त पू॒षण॑म्।त्वष्टा॑रमग्रि॒यं ब्रू॑म॒स्ते नो॑ मुञ्च॒न्त्वंह॑सः

brūmo devaṃ savitāraṃ dhātāramuta pūṣaṇam| tvaṣṭāramagriyaṃ brūmaste no muñcantvaṃhasaḥ

हिन्दी अर्थ

निहित ह (विंद्वस्य भर्ता) विद्व का भरण-पोषण करने वाला (जनि- तुः पिता) पिता का भी पिता, (उच्छिष्टः) प्रलय मे भी अ्रवशिष्ट रहने वाला परमेदवर. उन सव का (बिभत्ति) भरण-पोषण करताहै। का योग हृदय गुहा के लिये भी होता है । खर भी यज्ञशाला है, देखो उत्पादक पिता का (पिता) पिता है, (भरसोः) प्राण का (पौवः) पौत्रहैः तो भी (पितामहः) हमारा पितामह है, हमारे पिताभरों का भी पिता है।. (भूम्याम्) भूमि में (क्षियति) निवास करताहै।

English

The thighs, the knee-bones, and the feet, the head, the face, Land both the hands,

अध्याय 11

श्लोक 6.4

ग॒न्ध॒र्वा॒प्स॒रसो॑ ब्रूमो अ॒श्विना॒ ब्रह्म॑ण॒स्पति॑म्।अ॒र्य॒मा नाम॒ यो दे॒वस्ते नो॑ मुञ्च॒न्त्वंह॑सः

gandharvāpsaraso brūmo aśvinā brahmaṇaspatim| aryamā nāma yo devaste no muñcantvaṃhasaḥ

हिन्दी अर्थ

„ भ्रसोः पौत्रः=प्राणायाम से संयम का परिपोषण होता है । संयम होते ह-बारणः ध्यान भ्रौर समाधि । ये तीनों जब एक ध्येय मे एकत्र होते हैतोइनकानाम हो जाता ह “संयम । यथा “त्रयमेकत्र संयमः” (योग विस्तृत है । पृथिवी प्रथ विस्तारे । . ध कां० ११ सू० ७ भ्रथववेदे-भाष्यं १६७

English

The ribs, the nipples, and the sides—what I ishi hath constructed that?

अध्याय 11

श्लोक 6.5

अ॒हो॒रा॒त्रे इ॒दं ब्रू॑मः सूर्याचन्द्र॒मसा॑वु॒भा।विश्वा॑नादि॒त्यान् ब्रू॑म॒स्ते नो॑ मुञ्च॒न्त्वंह॑सः

ahorātre idaṃ brūmaḥ sūryācandramasāvubhā| viśvānādityān brūmaste no muñcantvaṃhasaḥ

हिन्दी अर्थ

मबत्सरः = सूं के चारो श्रोर पृथिवी की एक प्रदक्षिणा का काल । याज्ञिक पक्ष मेः--इडा =देवता के लिये यज्ञशेष र्मेसे भाग दिया को ग्रहण करने के ऊर्घ्वाकार पात्र । । वेदन करने वाले मन्त्र, नथा (यज्ञाः) यागं, (होराः) होता के समेत ७

English

Head, both the hands, and face, and tongue, and neck, and inter- coastal parts, 180

अध्याय 11

श्लोक 6.6

वातं॑ ब्रूमः प॒र्जन्य॑म॒न्तरि॑क्ष॒मथो॒ दिशः॑ ।आशा॑श्च॒ सर्वा॑ ब्रूम॒स्ते नो॑ मुञ्च॒न्त्वंह॑सः

vātaṃ brūmaḥ parjanyamantarikṣamatho diśaḥ | āśāśca sarvā brūmaste no muñcantvaṃhasaḥ

हिन्दी अर्थ

जाने वाले यज्ञ, भर्थात् वंदवदेव, वरुणप्रधास, साकमेव शुनासीरीय । .. सह्, भततंवाः) ऋतुधो के-साथ ऋतुसमूह, (घोषिणीः श्रापः) शब्द करने वाले जल सम्भवतः नदियों मे बहने वाले वर्षा के जल , (स्तनयित्नुः) १६० . भ्रथर्वतेद-भाष्य कां० ११। सु° ७ श्रुतिः = वेदवाणी गुरमुख से सुनी जाती है, अतः घोषमयी दहै ।

English

All this, investing it with skins, Mahi conjoined with bond and tie.

अध्याय 11

श्लोक 6.7

मु॒ञ्चन्तु॑ मा शप॒थ्याऽदहोरा॒त्रे अथो॑ उ॒षाः ।सोमो॑ मा दे॒वो मु॑ञ्चतु॒ यमा॒हुश्च॒न्द्रमा॒ इति॑

muñcantu mā śapathyā'dahorātre atho uṣāḥ | somo mā devo muñcatu yamāhuścandramā iti

हिन्दी अर्थ

शकराः सिफ़ता अदमान ओषंषयो वीरुषस्तृणां । माण कमं का पूरा होना, (व्याप्तिः) विविध कर्मो मे व्यापृत रहना, (महः) है, (निहिता) निधिवत् सुरक्षित है" (हिता) स्थि रतया स्थित है । “भ्राहिता, निहिता, हिता” इन सब मे विद्य लोप छान्दस है ।. हिता =हिताः==भ्रथवा थे सब हमारे हितकर है । ता है, तथा (सवं देवाः) सब देव (दिवि) जो कि द्युलोक मेँ है, (दिवि-

English

What time the might body lay firmly compact with tie and bond, Who gave its colour to the form, the hue wherewith it shines to-day?

अध्याय 11

श्लोक 6.8

पार्थि॑वा दि॒व्यः प॒शव॑ आर॒ण्या उ॒त ये मृ॒गाः ।श॒कुन्ता॑न् प॒क्षिणो॑ ब्रूम॒स्ते नो॑ मुञ्च॒न्त्वंह॑सः

pārthivā divyaḥ paśava āraṇyā uta ye mṛgāḥ | śakuntān pakṣiṇo brūmaste no muñcantvaṃhasaḥ

हिन्दी अर्थ

भ्वरिष्ट परमेदवर से (जज्ञिरे) पैदा हुए है । काऽ ११। सुर ७ अथवेवेद-माष्यं १६९ तथा (सवे देवाः) सब देव (दिवि) जोकि लोक मँ है, (दिविश्रितः) भ्रौर परमेदवर से (जज्ञिरे) पैदा हए ई ।

English

All Deities had lent their aid: of this a noble Dame took note,

अध्याय 11

श्लोक 6.9

भ॒वा॒श॒र्वावि॒दं ब्रू॑मो रु॒द्रं प॑शु॒पति॑श्च॒ यः ।इषू॒र्या ए॑षां संवि॒द्म ता नः॑ सन्तु॒ सदा॑ शि॒वाः

bhavāśarvāvidaṃ brūmo rudraṃ paśupatiśca yaḥ | iṣūryā eṣāṃ saṃvidma tā naḥ santu sadā śivāḥ

हिन्दी अर्थ

८॥७) । तथा पुराण = प्रकृति (अथवं० १०।७।२३) । देवाः = ोतमानाः तथा (सरवे देवाः) सब देव (दिवि) जोकि दयूलोक मे टै, (दिव्रिध्रितः) श्रौर मेश्वर से (जज्ञिरे) पैदा हृए है । उत्पन्न-मन तब तक स्थिर रहता है, विनष्ट नहीं होता, जब तक

English

Tsā, the Consort of Command. She gave its colour to the form. When Tvashtar, Tvashtar’s loftier Sire, had bored it out and hollowed it.

अध्याय 11

श्लोक 6.10

दिवं॑ ब्रूमो॒ नक्ष॑त्राणि॒ भूमिं॑ य॒क्षाणि॒ पर्व॑तान्।स॒मु॒द्रा न॒द्योऽ वेश॒न्तास्ते नो॑ मुञ्च॒न्त्वंह॑सः

divaṃ brūmo nakṣatrāṇi bhūmiṃ yakṣāṇi parvatān| samudrā nadyo' veśantāste no muñcantvaṃhasaḥ

हिन्दी अर्थ

(१) कथानक के भ्रनुसार मातलि (मातली) इन्ध का रथवाहक है । मन्त (मातली) करने लगती है,--यह योगशास्त्र का सिद्धान्त है, तथां गीता दाया १५४ भ्रथरवेवेद-माष्य कां० ११। सू०६ जगत् के निर्माण में पारमेश्वरी माता भराधाररूप, नींवरूप है, जैसे कि मानु- षी माता शिशु के निर्माण में श्राधारलूप होती है, वह पारंमेरवरी माता

English

Whoso may know them face to face may now pronounce the mighty word.

अध्याय 11

श्लोक 6.11

स॒प्त॒र्षीन् वा इ॒दं ब्रू॑मो॒ऽपो दे॒वीः प्र॒जाप॑तिम्।पि॒तॄन् य॒मश्रे॑ष्ठान् ब्रूम॒स्ते नो॑ मुञ्च॒न्त्वंह॑सः

saptarṣīn vā idaṃ brūmo'po devīḥ prajāpatim| pitṝn yamaśreṣṭhān brūmaste no muñcantvaṃhasaḥ

हिन्दी अर्थ

दना होगा । उस का मूल्य है “शरीररथ” । इसे मोक्ष प्राप्ति के साधनों तथा पारमेश्वरीमाता के प्रति स्मित करना होगा । जब वस्तु खरीदी जाती है, तो उस के निमित्त दिया घन वस्तु के स्वामी कोदे. देना होता है, उस धन पर फिर खरीद करने वाले का स्वत्व नहीं रहता ॥ यही भव- स्थाशरीरकी हौ जाती “श्रमुत-भौषव के खरीदने पर । रथक्रीतम् भी तक शरीर रथ का स्वामी बना हृभा दहै (कटठोप० १।३।३)› उसे भी इस निमित्त परिश्षम कसना होगा । वह परिभरम है निज शरीर के रस- भ्रमृत-मेषज दे सके गे । इन रस-रक्तों का मूल स्नोत है हदय । ईस हृदय मे परमेदवर के प्रवेश पूर्वक, योगाङ्ग का सेवन करना होगा । भाषः मरने (अमृत न मृत होने) की भेषज =. भ्रापः जल । यथा भ्रपो याचामि भेषजम्” (भ्रथववं ° १।५।४); “मै जलो से भेषज की याचना करता हु" । “रपु मे सोमो भ्रब्रवीदन्तविदवानि भेषजा” (अथवं० १।६।२) “सोम ने मु कहा है कि जलो के भीतर सब भेषजं है । “श्रप्स्वन्तरमृत- मप्तु भेषजम्” (श्रथरवे० १।४।४), “जलो मे भ्रमत हं, जलो में भेषज है ।

English

Inbreath and outbreath, eye and ear, decay and freedom from. decay, Spiration upward and diffused, voice, mind have brought us wish and plan.

अध्याय 11

श्लोक 6.12

ये दे॒वा दि॑वि॒षदो॑ अन्तरिक्ष॒सद॑श्च॒ ये।पृ॒थि॒व्यां श॒क्रा ये श्रि॒तास्ते नो॑ मुञ्च॒न्त्वंह॑सः

ye devā diviṣado antarikṣasadaśca ye| pṛthivyāṃ śakrā ye śritāste no muñcantvaṃhasaḥ

हिन्दी अर्थ

कां० ११। सु० ७ भ्रथववंवेद-माष्य १५५ मे ही उपपन्न हो सकता है (१-६.२४) ।. । ४-- मन्त्र ७ से १६ तक में नानाविध यज्ञोकेनाम दिये है, जिन ४--ये यज्ञ मुख्य रूप मे निम्न लिखित है--राजभूय, वाजपेय, ्रग्नि- १५६ भथवेवेद-भाष्य कां० १ १। सू० ७

English

As yet the Seasons were unborn, and Dilator and Prajāpati,

अध्याय 11

श्लोक 6.13

आ॒दि॒त्या रु॒द्रा वस॑वो दि॒वि दे॒वा अथ॑र्वाणः।अङ्गि॑रसो मनी॒षिण॒स्ते नो॑ मुञ्च॒न्त्वंह॑सः

ādityā rudrā vasavo divi devā atharvāṇaḥ| aṅgiraso manīṣiṇaste no muñcantvaṃhasaḥ

हिन्दी अर्थ

लाप ही वेदाभिमत समभे जाने चाहिए, यह प्रदन भ्रति. गम्भीर है । रहस्यार्थो का भी निदेश प्रतीत होता है । परन्तु भरथवेवेदमे न तो इन मुख्यरूप मे शतपथ ब्राह्मण मेँ ही वणित हुए है । ७-मन्व ११ भौर १५के भ्रनुसार सब यज्ञो भ्रौर गुहा.हितोः यज्ञो को उच्छिष्टः ही पेदा करता, तथा उन को धारण करता है । “गृहा-

English

Both Asvins, Indra, Agni. Whom then did they worship as supreme? Fervour and Action were the two, in depths of the great billowy sea;

अध्याय 11

श्लोक 6.14

य॒ज्ञं ब्रू॑मो॒ यज॑मान॒मृचः॒ सामा॑नि भेष॒जा।यजूं॑षि॒ होत्रा॑ ब्रूम॒स्ते नो॑ मुञ्च॒न्त्वंह॑सः

yajñaṃ brūmo yajamānamṛcaḥ sāmāni bheṣajā| yajūṃṣi hotrā brūmaste no muñcantvaṃhasaḥ

हिन्दी अर्थ

. गया था । इस रथ मं क्या भथववेद की नित्यता उपपन्न हो सकती है ? ९- मन्व १४ मे, “नव भ्रमी" द्वारा ९ भ्रुमियों का कथन. हाः पुथिवी (निघं० १।१) । इन के प्रभिप्रायों पर प्रका डाला है । का कथन हूभा है । पुराण का भ्रं विचारणीय है ।

English

Fervour sprang up from Action: this they served and worship- ped as supreme.

अध्याय 11

श्लोक 6.15

पञ्च॑ रा॒ज्यानि॑ वी॒रुधां॒ सोम॑श्रेष्ठानि ब्रूमः ।द॒र्भो भङ्गो यवः॒ सह॒स्ते नो॑ मुञ्च॒न्त्वंह॑सः

pañca rājyāni vīrudhāṃ somaśreṣṭhāni brūmaḥ | darbho bhaṅgo yavaḥ sahaste no muñcantvaṃhasaḥ

हिन्दी अर्थ

(मनुस्मृति) । वेद यतः. गुरमुख से श्रवण किये जाते है, इसलिये वेद.को कां० ११। सु० ७ भ्रथववेद-माष्य १५७. १२- मनर २७ “गन्धर्वाप्सरसः” का कथन हूभ्रा है । यजुवंदाि- मत इन कै यथार्थं स्वरूपो का निदंदा किया है । ग्रन्थो मे अग्निष्टोम में हिसा,का विधान है । इसलिये वेदविद होने से

English

He may account himself well versed in ancient time who knows by name. The earth that was before this earth, which only wisest Sages know.

अध्याय 11

श्लोक 6.16

अ॒राया॑न् ब्रूमो॒ रक्षां॑सि स॒र्पान् पु॑ण्यज॒नान् पि॒तृन्।मृ॒त्यूनेक॑शतं ब्रूम॒स्ते नो॑ मुञ्च॒न्त्वंह॑सः

arāyān brūmo rakṣāṃsi sarpān puṇyajanān pitṛn| mṛtyūnekaśataṃ brūmaste no muñcantvaṃhasaḥ

हिन्दी अर्थ

परमेदवर मे (नाम रूपम्) सृष्ट जगत् के. नाम भौर रूप स्थित रह, (च) भौर कत्वरूप मे नहीं होती, जीवात्मा भी निंशचेष्ट रहते है । परमेद्वर उस शन अंथर्ववेद-माष्य कां० ११ सु० ७. माना है । इसलिये इन्द्र का भरथं “विद्युत् ˆ किया है

English

From whom did Indra spring? from whom sprang Soma? whence was Agni born?

अध्याय 11

श्लोक 6.17

ऋ॒तून् ब्रू॑म ऋतु॒पती॑नार्त॒वानु॒त हा॑य॒नान्।समाः॑ संवत्स॒रान् मासां॒स्ते नो॑ मुञ्च॒न्त्वंह॑सः

ṛtūn brūma ṛtupatīnārtavānuta hāyanān| samāḥ saṃvatsarān māsāṃste no muñcantvaṃhasaḥ

हिन्दी अर्थ

नाभिमिव सर्पतक्रमुचछिष्टे देवताः भिताः ॥४॥ कां० ११।सू०७ भ्रथर्वेवेद-माष्य । १४९ (ऋक्) ऋग्वेद, (साम) सामवेद, (यजुः) यजुर्वेद, (उद्गीथः) सामगान के ५ भाग होते है-हिकार, प्रस्ताव, उद् गीथ, प्रतिहार

English

From whom did Tvashtar spring to life? and whence is Dilator’s origin? Indra from Indra, Soma from Soma, Agni from Agni sprang

अध्याय 11

श्लोक 6.18

एत॑ देवा दक्षिण॒तः प॒श्चात् प्राञ्च॑ उ॒देत॑ ।पु॒रस्ता॑दुत्त॒राच्छ॒क्रा विश्वे॑ दे॒वाः स॒मेत्य॒ ते नो॑ मुञ्च॒न्त्वंह॑सः

eta devā dakṣiṇataḥ paścāt prāñca udeta | purastāduttarācchakrā viśve devāḥ sametya te no muñcantvaṃhasaḥ

हिन्दी अर्थ

का उच्चार करते ै,यह हिङ्कार है हिकार हि" शब्द करना। सामगान १६० भ्रथवेवेदमाष्य कां० ११ । सु०७ गान, (पावमानम्) सोमदेवता सम्बन्धी पवित्र करने वाला सोमगानः कावप धावुच्छष्टे जीववंहिमेदिन्त॑मः ।।७॥

English

Tvashtar from Tvashtar was produced, Dilator was Dhātar’s origin.

अध्याय 11

श्लोक 6.19

विश्वा॑न् दे॒वानि॒दं ब्रू॑मः स॒त्यसं॑धानृता॒वृधः॑ ।विश्वा॑भिः॒ पत्नी॑भिः स॒ह ते नो॑ मुञ्च॒न्त्वंह॑सः

viśvān devānidaṃ brūmaḥ satyasaṃdhānṛtāvṛdhaḥ | viśvābhiḥ patnībhiḥ saha te no muñcantvaṃhasaḥ

हिन्दी अर्थ

ञगन्याधेयमयों दीक्षा कामभग्न्दसा सह । म श्रग्निष्टोम में हिसा का विधानं है) - ५ कार ११। सू० ७ भ्रथ्ववेद-माष्य = । कामप्रः=काम+प्रा (पूरणे) । कामनाभ्रों को पूणं करने वाला यज्ञ । कामनाए वेदानुकूल भी होती हं, प्रतिकूल भौ । - “कामप्रद-यज्ञ"" छन्दों

English

Those Gods who were of old, the Ten begotten earlier than the Gods,

अध्याय 11

श्लोक 6.20

सर्वा॑न् दे॒वानि॒दं ब्रू॑मः स॒त्यसं॑धानृता॒वृधः॑ ।सर्वा॑भिः॒ पत्नी॑भिः स॒ह ते नो॑ मुञ्च॒न्त्वंह॑सः

sarvān devānidaṃ brūmaḥ satyasaṃdhānṛtāvṛdhaḥ | sarvābhiḥ patnībhiḥ saha te no muñcantvaṃhasaḥ

हिन्दी अर्थ

१६२ श्रथर्वेवेद-माष्य कां० ११। सु° ७ हिताः) समाधि है 1 भ्र्थात् ये सव कृत्य परमेदवरा्पित करः करने एकरातो द्विराघ्रः संचयः कीः प्रकीर्य : । कां° ११। सु ७ -भ्रथवेवेद-माष्य १६३

English

When he had brought together hair, sinew and bone, marrow and flesh. And to the body added feet, then to what world did he depart?

अध्याय 11

श्लोक 6.21

भू॒तं ब्रू॑मो भूत॒पतिं॑ भू॒ताना॑मु॒त यो व॒शी।भू॒तानि॒ सर्वा॑ सं॒गत्य॒ ते नो॑ मुञ्च॒न्त्वंह॑सः

bhūtaṃ brūmo bhūtapatiṃ bhūtānāmuta yo vaśī| bhūtāni sarvā saṃgatya te no muñcantvaṃhasaḥ

हिन्दी अर्थ

जाता है, (निधनम्) सामगान का पंचमं भाग जिस मे सामगान समाप्त होता है भौर जिसे सब उद्गाता मिलकर गाते है, (विदवजित्, भभिजित् त्र) इन नामों वाले दो सोमयाम, (साह्खातिरार््रौ) एकं दिन में समाप्य होने वाला सोमथाग भी उस परमेदवर मे भाश्रित है। (तत्) वहं यतः सब कामनाए (कामेन) परमेदवर की कामना भ्र्थात् इच्छा दरार १६४ अथववेद-माष्य कां° ११। सुऽ ७

English

Whence, from what region did he bring the hair, the sinews, and the bones,

अध्याय 11

श्लोक 6.22

या दे॒वीः पञ्च॑ प्र॒दिशो॒ ये दे॒वा द्वाद॑श॒र्तवः॑ ।सं॒व॒त्स॒रस्य॒ ये दंष्ट्रा॒स्ते नः॑ सन्तु॒ सदा॑ शि॒वाः

yā devīḥ pañca pradiśo ye devā dvādaśartavaḥ | saṃvatsarasya ye daṃṣṭrāste naḥ santu sadā śivāḥ

हिन्दी अर्थ

नव भूमीः इस के दो अभिप्राय हैँ । एक यह किं पृथिवी एक है, रौर भ्रपने स्थान बदलते रहते है, एसा वर्तमान वज्ञानिके मानते है । सायणने भी नवभूमीः का भ्रथं किया है । “नवखण्डात्मिकाः पृथिव्य, नेपचून, चन्द्रमा । दिवः तीन चौः, ्रथंवा द्यौः के तीन भ'ग (देखो मक्कृत- भ्रथवेवेद-माश्यं १९।१।१०; १३।३।२१; १६।२७।३) । १९०८२ मं प्रकाशित एक लेख में से. निम्नलिखित उद्धरण विशेष प्रका

English

Marrow and limbs, and joints, and flesh? Who was the bringer, and from whence? Casters, those Gods were called who brought together all the elements:

अध्याय 11

श्लोक 6.23

यन्मात॑ली रथक्री॒तम॒मृतं॒ वेद॑ भेष॒जम्।तदिन्द्रो॑ अ॒प्सु प्रावे॑शय॒त् तदापो॑ दत्त भेष॒जम्

yanmātalī rathakrītamamṛtaṃ veda bheṣajam| tadindro apsu prāveśayat tadāpo datta bheṣajam

हिन्दी अर्थ

रहा है, भौर बर्मा के नीचे घुस रहा है । गत ७५ वषो भे जो इस भाग में कां० ११।सु०७ भरथवेवेद-माष्य . १४ भूचाल श्राए है, उन के भ्राधार पर यह परिणाम निकलता है । वैज्ञानिकों ने इस भू-भाग म एेसा भाग पाया है जहां कि भारत भू-माग, ३५ से ६९. डिग्री पर, २०० किलो मीटर, शनैः-रनैः, बर्मा के भूमाग में चुसता जा रहा है । पृथिवी के स्तरों की रचनानुसार, पृथिवी के भिन्न भिन्न महाखण्ड वैज्ञानिकों की इस खोज के भ्रनुसार -मन्त्रगत “नव भूमीः” का भरं नवखण्डात्मिकाः पृथिव्यः” ठीक प्रतीत होता है ।

English

When they had fused the mortal man complete, they entered into him.

स्रोत: bhavykhatri/DharmicData · प्राप्त 3/6/2026

शास्त्रीय प्रामाणिकता एवं पारदर्शकताSources & Interpretation

स्रोत, संस्करण एवं व्याख्या वर्गीकरण

धर्म ग्रंथ पर मूल शास्त्र, पारंपरिक भाष्य और आधुनिक व्याख्या को पूर्णतः पृथक रखा जाता है ताकि पाठक को किसी भी व्याख्या के शास्त्र होने का भ्रम न हो।

सामग्री वर्गीकरण संकेत (Epistemic Content Labels)

6 स्तरिय प्रमाण व्यवस्था
मूल पाठOriginal text

अपौरुषेय / प्रामाणिक शास्त्र (Primary Canonical Scripture)

मूल संस्कृत, प्राकृत अथवा अवधी श्लोक/मंत्र। यह सर्वोच्च प्रमाण (प्रस्थान) है। इस पाठ में किसी भी आधुनिक व्याख्याकार का हस्तक्षेप नहीं है।

शाब्दिक अनुवादLiteral translation

पदार्थ व अन्वय (Direct Grammatical & Word-for-Word Meaning)

व्याकरणसम्मत प्रत्यक्ष शब्दार्थ (अन्वय)। बिना किसी दार्शनिक संप्रदाय के पूर्वाग्रह के, संस्कृत शब्दों का सटीक भाषांतर।

पारंपरिक भाष्यTraditional commentary

आचार्य परंपरा व टीका (Classical Lineage Commentary)

प्राचीन आचार्य परंपरा (यथा शंकराचार्य, रामानुजाचार्य, मध्वाचार्य, श्रीधर स्वामी) द्वारा विरचित शास्त्रीय भाष्य व टीकाएं।

सरल व्याख्याSimple explanation

भावार्थ व सुबोध प्रबोधन (Accessible Pedagogical Exposition)

आधुनिक जिज्ञासुओं के लिए सरल भाषा में भावार्थ। यह मूल मंत्र नहीं, बल्कि पाठ को सुगम बनाने हेतु संपादकीय व्याख्या है।

आधुनिक चिंतनModern reflection

समसामयिक विमर्श व अनुप्रयोग (Contemporary Application & Analysis)

दार्शनिक, मनोवैज्ञानिक व वैज्ञानिक समरूपताओं पर आधुनिक चिंतन। यह मूल शास्त्र का अंग नहीं है और इसे शास्त्रोक्त सिद्धांत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

शोध टिप्पणीResearch note

पांडुलिपि एवं ऐतिहासिक शोध (Critical Apparatus & Manuscript Research)

पांडुलिपि विविधताएं, पाठ-भेद (variant readings), छंद रचना, और ऐतिहासिक व तुलनात्मक भाषावैज्ञानिक शोध। यह शास्त्र का मूल संदेश बदलने हेतु नहीं, बल्कि पाठ की प्रामाणिकता परखने के लिए है।