Atharva Veda
10
अध्याय 10 / 20

Kanda 10

काण्ड 10

350 श्लोकभाग 1/7 · श्लोक 1.1–2.33

पूर्ण अध्याय पाठ65 श्लोक

अध्याय 10

श्लोक 1.1

कृत्यादूषणम्।१-३२ प्रत्यङ्गिरसः।कृत्यादूषणम्।अनुष्टुप्, १ महाबृहती, २ विराण्नाम गायत्री, ९ पथ्यापङ्क्तिः, १२ पङ्क्तिः, १३ उरोबृहती, १५ चतुष्पदा विराड्-जगती, १७, २०, २४ प्रस्तारपङ्क्तिः (२० विराट्), १६, १८ त्रिष्टुप्, १९ चतुष्पदा जगती, २२ एकावसाना द्विपदार्ची उष्णिक्, २३ त्रिपदा भुरिग्विषमा गायत्री,२८ त्रिपदा गायत्री २९ मध्ये ज्योतिष्मती जगती, ३२ द्व्यनुष्टुब्गर्भा पञ्चपदातिजगती।यां क॒ल्पय॑न्ति वह॒तौ व॒धूमि॑व वि॒श्वरू॑पां॒ हस्त॑कृतां चिकि॒त्सवः॑ ।सारादे॒त्वप॑ नुदाम एनाम्

kṛtyādūṣaṇam| 1-32 pratyaṅgirasaḥ| kṛtyādūṣaṇam| anuṣṭup, 1 mahābṛhatī, 2 virāṇnāma gāyatrī, 9 pathyāpaṅktiḥ, 12 paṅktiḥ, 13 urobṛhatī, 15 catuṣpadā virāḍ-jagatī, 17, 20, 24 prastārapaṅktiḥ (20 virāṭ), 16, 18 triṣṭup, 19 catuṣpadā jagatī, 22 ekāvasānā dvipadārcī uṣṇik, 23 tripadā bhurigviṣamā gāyatrī,28 tripadā gāyatrī 29 madhye jyotiṣmatī jagatī, 32 dvyanuṣṭubgarbhā pañcapadātijagatī| yāṃ kalpayanti vahatau vadhūmiva viśvarūpāṃ hastakṛtāṃ cikitsavaḥ | sārādetvapa nudāma enām

हिन्दी अर्थ

काः : । सुर १० ( भ्रथरवेवेद-भाष्य १७.१ सलिलानि बहुनाम (निष ३।१) । “बहु” शब्द विशेषण ह, इसका ¦ : (हरयः) जल का हरण करने वाली, (सुपर्णाः) श्रता से, पक्षियों के सद, उड़ने वाली सूय रदिमयां, (कृष्णम्) काले (नियानम्) निचले मागं दलोक की भ्रोर (उत्पतन्ति) उड़ जोती हँ । (ते ) वे ररिभियां,-जो कि लौटती है, (भात् इत्) तदनन्तर ही (पृथिवीम्) पृथिवी को (वृतेन) वृत द्वारा (ब्यूदुः) गीली करती है, सींचती ह । घृतेन = घी द्वारी तथा उदक

English

A charm against witchcraft Afar let her depart: away we drive her whom, made with hands, all-beautiful,

अध्याय 10

श्लोक 1.2

शी॒र्ष॒ण्वती॑ न॒स्वती॑ क॒र्णिनी॑ कृत्या॒कृता॒ संभृ॑ता वि॒श्वरू॑पा ।सारादे॒त्वप॑ नुदाम एनाम्

śīrṣaṇvatī nasvatī karṇinī kṛtyākṛtā saṃbhṛtā viśvarūpā | sārādetvapa nudāma enām

हिन्दी अर्थ

(१) शम्मु; यह वारुणास्त्र परतरीत होता है, जिस वारा वषा करा कर ; ( भीली हो जाती है, भौर उस के युद्धोपकरण गीले ह्रो कर आक्रमण करे ; सहायक नहीं रहते, भौर खाद्य सामभ्री भी खराब हो जाती है । शम्भु “शम् भावयतीति", जो युद्ध. को. शान्त कर देता है । 4३) . उत्तम लोहि की बनौ तलवार “ स्वायसा श्रसयः” (२०) । ध ..(४) इनदर (विचत्) तथा जगनि के भस्व (२१) । र (६) तामसासत्र, जिस द्वारा शवुभों मे भरन्धकार या, वृर फलाय (७) जाल द्वारा शत्रुसेना को वेर लेना (३०) ।

English

If, as they gave thy parents aught, they named thee, or at sacri- fice, From all their purposed evil let these healing herbs deliver thee.

अध्याय 10

श्लोक 1.3

शू॒द्रकृ॑ता॒ राज॑कृता॒ स्त्रीकृ॑ता ब्र॒ह्मभिः॑ कृ॒ता।जा॒या पत्या॑ नु॒त्तेव॑ क॒र्तारं॒ बन्ध्वृ॑च्छतु

śūdrakṛtā rājakṛtā strīkṛtā brahmabhiḥ kṛtā| jāyā patyā nutteva kartāraṃ bandhvṛcchatu

हिन्दी अर्थ

म न्क योः =» "ऋ काका गगः -जन "यकः क शः क क ग भ = कां? १० सु° १ ग्रथवेवेद-भाष्य । १८५ “पापकम” है क्योंकि जीवन मिला है कमफल मोग कर मोक्ष प्राप्त करने केलिये, नकि युद्ध में जीवन की बलि प्रदान करने के लिये। इस प्रदान में श्रधिकारी पितुवगं तेरे नाम को तो उद्घोषित करेगे ही, ताकि तु यशस्वौ राज्याधिकारी नानाविध .भ्रोषधिर्यो दवारा तेरे शोकसन्ताप को कम करने

English

Or spell in household fire which men more cunning have wrought against thee innocent and

अध्याय 10

श्लोक 1.4

अ॒नया॒हमोष॑ध्या॒ सर्वाः॑ कृ॒त्या अ॑दूदुषम्।यां क्षेत्रे॑ च॒क्रुर्यां गोषु॒ यां वा॑ ते॒ पुरु॑षेषु

anayāhamoṣadhyā sarvāḥ kṛtyā adūduṣam| yāṃ kṣetre cakruryāṃ goṣu yāṃ vā te puruṣeṣu

हिन्दी अर्थ

दे कि उनके म्रधिकारी शासक प्रजा से रहित कर दिये जायेगे, भर्थात् डन +. २. स्वकीय सेना, परकीय सेना को धकेलती हुई, उसे निज राष्ट तक पटुना दे, ३. वाहिनी यद्यपि महाकाया भौर शक्तिमती होती है; तो भी उसे निज तीति ( चाहिए । भ्रौर उसे लूट भी लेना चाये । १८४ अंथवेवेद-भाष्य जाने के श्रादे्ा दिया है, परन्तु उसके न जाने परं, निज सेना को भ्रदेश

English

O Krityā, I will cut thy throat and hew thy feet off. Run, be- gone! Indra and Agni, Guardian Lords of living creatures, shield us well!

अध्याय 10

श्लोक 1.5

अघम॑स्त्वघ॒कृते॑ श॒पथः॑ शपथीय॒ते।प्र॒त्यक् प्र॑ति॒प्रहि॑ण्मो॒ यथा॑ कृत्या॒कृतं॒ हन॑त्

aghamastvaghakṛte śapathaḥ śapathīyate| pratyak pratiprahiṇmo yathā kṛtyākṛtaṃ hanat

हिन्दी अर्थ

दिया है, उसके सर्वोच्छेद का । (ते) तेरे (बहिषि) जलो मँ (याम्) जिस (कृत्याम्) हिछ्कमं को हि्रकमं को शत्रूजनों ने किया है, (वा) अथवा (वर्लगम्) वलय में गति करने वाले विस्फोटकों को (नि चख्नुः) तेरी भूमि में नीचे गाड़ाहैः जनो ने, (पाकम, अनागसम्) धभाचार-विचार में पवित्र तथा पापरहित (त्वा) तुक को (भ्रमि चेरुः) लक्षय कर के दिल्कमं किया है, उस सब को .

English

May Soma, gracious friend, imperial Sovran, and the world’s Masters look on us with favour.

अध्याय 10

श्लोक 1.6

प्र॒ती॒चीन॑ आङ्गिर॒सोऽध्य॑क्षो नः पु॒रोहि॑तः ।प्र॒तीचीः॑ कृ॒त्या आ॒कृत्या॒मून् कृ॑त्या॒कृतो॑ जहि

pratīcīna āṅgiraso'dhyakṣo naḥ purohitaḥ | pratīcīḥ kṛtyā ākṛtyāmūn kṛtyākṛto jahi

हिन्दी अर्थ

लिया गया; या (वैरम्) वैर भावना से (त्सारि) गुप्तरूप में (निलातम्) जिसे कि हम ने जान"पहचान लिया है, (तत्) वह (एतु) चला जाए, -१. उपहार के, तथा निरेवात के, स्वल्पो को हम ने जान लियादहै। - कां० १०। सुऽ. १ भ्रथववेद-माष्य १८६ यह् निखात विस्फोटक “वलग है (मन्त्र १८), जो किं वलय गति मे चक्कर काटता हुभ्रा घूमता ह, जैसे कि श्रव करवट बदलता है ।

English

Bhava and Sarva cast the flash of lightning, the weapon of the Gods, against the sinner who made the evil thing, who deals in witchcraft!

अध्याय 10

श्लोक 1.7

यस्त्वो॒वाच॒ परे॒हीति॑ प्रति॒कूल॑मुदा॒य्यऽम्।तं कृ॑त्येऽभि॒निव॑र्तस्व॒ मास्मानि॑च्छो अना॒गसः॑

yastvovāca parehīti pratikūlamudāyya'm| taṃ kṛtye'bhinivartasva māsmāniccho anāgasaḥ

हिन्दी अर्थ

(स्वायसाः) उत्तम लोहे से बनी (्रसयः) तलवार (नः) हमर्मेसे जानते हैँ (यतिघा) जितने कि (ते) तेरे (परंषि). जोड हैँ । (उतिष्ठ एव इत) तु यहां से उत्थान ही कर, (परा इहि) परे चली जा, (अज्ञाते) तेरी शक्ति को हम तुण समान भी नहीं जानते, एेसी है परकीय सेना (इह) यहां (किम्) क्या (इच्छसि) तु चाहतीहै। परुषि-=जोड़ सेना के चार जोड़ होते दहै, जिनके मेल से चतुरङ्किणी सेना बनती है, हाथी, घोडे, रथ ॒श्रौर पदाति । मन्तरं कहाहै कितेरे जोड़ों को हम जानते है कि वे जितने, उन के लियेः तोः हमारी तलवार ही प्यप्ति ै। तु यहां छावनी डाले हृए है, यहां से उठ जा, यही तेरे लिमे उचित है । तेरी शक्ति इतनी भ्रल्य है कि उसे हम तृण समान भी नहीं (कृत्ये) है हिच सेना ! (ते) तेरी (ग्रीवाः) गहैनो को, (च) श्रौर सत्ता को भी सूचित किया .है.। प्रजावती = प्रजापति (पौपलाद्. शाखा ) ।

English

If thou hast come two-footed or four-footed, made by the sorcerer, wrought in perfect beauty, Become eight-footed and go hence. Speed back again, thou evil one.

अध्याय 10

श्लोक 1.8

यस्ते॒ परूं॑षि संद॒धौ रथ॑स्येव॒र्भुर्धि॒या।तं ग॑च्छ॒ तत्र॒ तेऽय॑न॒मज्ञा॑तस्ते॒ऽयं जनः॑

yaste parūṃṣi saṃdadhau rathasyevarbhurdhiyā| taṃ gaccha tatra te'yanamajñātaste'yaṃ janaḥ

हिन्दी अर्थ

राजा) हमारा राजा है, जोकि (अधिपाः) हमारा रक्षकं है, (च मृदिता) भ्रौर सुख प्रदाता है, तथा (भूतस्य) पंचभूतो पृथिवी, रप्, तेज, वायु, वदाम कर लिया है वे (नः) हम (मृडयन्तु) सुल कररे। ्रभिप्राय यह हैक्ति हमारा राजा शन्ति वज्ञानिक, हमारी. र॑क्षा कर के इमे सुखी करी । न हम युदधप्रियरहैःन किसी राष्ट पर भ्रमण करे के अभिलाषी है । प अवाशु्वाविश्यतां पापकृतं यान्ते । दुष्त विदुरं देवहेतिम् ॥२२॥

English

Anointed, balmed, and well adorned, bearing all trouble with thee, go. Even as a daughter knows her sire, so know thy marker, Krityā, thou.

अध्याय 10

श्लोक 1.9

ये त्वा॑ कृ॒त्वाले॑भि॒रे वि॑द्व॒ला अ॑भिचा॒रिणः॑ ।शं॒भ्वि॒३दं कृ॑त्या॒दूष॑णं प्रतिव॒र्त्म पु॑नःस॒रं तेन॑ त्वा स्नपयामसि

ye tvā kṛtvālebhire vidvalā abhicāriṇaḥ | śaṃbhvi3daṃ kṛtyādūṣaṇaṃ prativartma punaḥsaraṃ tena tvā snapayāmasi

हिन्दी अर्थ

के साथ युद्ध उपरिथत ं पर वैद्यतास्तर प्रहार करर ।. सेना की रचना युद्धाथं, पापकम । देवेति; देवाः विजिगीषवः सैनिकाः दिवु ऋडाविजिगीषा सेतो डष्टापदी भूत्वा पुज; परंहि दुच्छुने ॥२४॥ . है ्रकोय सेना (यदि यथं) चेदि तू म (व ) रोज 1 व्यद) वार भङ्गी वाली चतुरङ्गिणी सना के ल्पे भराई है; (सा) वह.तु. 8: ॥. ज्जिणी सेना । चार भ्रङ्ख .॥ ङ्ख है पदाति, रथी,. ह प्रिय है्नौर हम उसं के राज्य भरवारोही तथा हाथी । यह ही कोई परकीयं शक्ति हम पर . भ्राक्रमण करेगी तो हमारे .

English

Krityā, begone, stay not. Pursue as ‘twere the wounded crea- ture’s track. He is the chase, the hunter thou he may not slight or humble thee.

अध्याय 10

श्लोक 1.10

यद् दु॒र्भगां॒ प्रस्न॑पितां मृ॒तव॑त्सामुपेयि॒म।अपै॑तु॒ सर्वं॒ मत् पा॒पं द्रवि॑णं॒ मोप॑ तिष्ठतु

yad durbhagāṃ prasnapitāṃ mṛtavatsāmupeyima| apaitu sarvaṃ mat pāpaṃ draviṇaṃ mopa tiṣṭhatu

हिन्दी अर्थ

दूलोक की भ्रोर उड़ जाती है । ग्रीष्मकाल मे जलाह्रण करती रहती दभर वर्षा ऋतु मे पृथिवी पर जल बरंसाती है । कविता मं वर्णन हुमा है । सुपर्णाः वरयदुः=-वि +-उन्दी क्लेदने (रुधादिः) । घुतेन का श्रमिप्राय घी . भी है। रदिमियां जल सींचती हृ मानो धृत सींचती है । जल द्वारा घास्रोषधियां, दुग श्रौर धृत प्रदान करती ह । ॥ पहले (एति) श्राती है, (मित्रावरमा) है सूरय-गौरःचन्दमा ! . (वाम्) तुम दोनों मँ से (कः) कौन (तद्) उस वटना को (भरा चिकेत) जानता है

English

Skilled men prepare and fashion like a bride amid her nuptial train. Complete, with head and nose and ears, all-beauteous, wrought with magic skill

अध्याय 10

श्लोक 1.11

यत् ते॑ पि॒तृभ्यो॒ दद॑तो य॒ज्ञे वा॒ नाम॑ जगृ॒हुः ।सं॒दे॒श्या॒३त् सर्व॑स्मात् पा॒पादि॒मा मु॑ञ्चन्तु॒ त्वौष॑धीः

yat te pitṛbhyo dadato yajñe vā nāma jagṛhuḥ | saṃdeśyā3t sarvasmāt pāpādimā muñcantu tvauṣadhīḥ

हिन्दी अर्थ

भार को (भरति) धारणं करता है, या (भरति हरति) ढो रहा है । वहं गभं ऋतम् ) ऋतः को (पिपति) पालित करतां है, ्रौरः (ग्रनृतम्) भ्रनृतं को (निपाति) पू्णेतया पी जाता है, निगल जाता है । निज कायं में व्याप्तहो जाती दहै जबकि पादयो वाले मनुष्य भमी भ्रपने परन्तु प्रदनं यह है कि उषा का संचालन कौन करता है ? वेद ने उत्तरं सौरथि रथं भं स्थित हृश्रा रथ का संचालन करता है, या ङारईवर मौटरं पिपत्ति= पृ पलनपुरणयोः (जुहोत्यादिः) । निपाति पा को पिब भरादेश नहीं हरा । भ्रतः निपाति== नितरां पिबति, निगिरति ।

English

Afar let her depart: away we drive her. Made by a Sidra or a Prince, by priests or women let her go.

अध्याय 10

श्लोक 1.12

दे॒वै॒न॒सात् पित्र्या॑न्नामग्रा॒हात् सं॑दे॒श्याऽदभि॒निष्कृ॑तात्।मु॒ञ्चन्तु॑ त्वा वी॒रुधो॑ वी॒र्येऽण॒ ब्रह्म॑ण ऋ॒ग्भिः पय॑स॒ ऋषी॑णाम्

devainasāt pitryānnāmagrāhāt saṃdeśyā'dabhiniṣkṛtāt| muñcantu tvā vīrudho vīrye'ṇa brahmaṇa ṛgbhiḥ payasa ṛṣīṇām

हिन्दी अर्थ

(विराट्) “विविध जगत् का राजा””परमेरवर (वाक्) वाक् (बभूव) (साध्यानाम्) साधना करने वालों का (भरधिराजः) भ्रधिराज हृभ्रा है, १. भरथवा निपाति = नि-+-पः (शोषणे, स्वाविः) नितरां सुला देता . है । की०.९। सुऽ-१5 भरथववेवेद-भाष्य १७१ णम्) मुक में शक्ति सीचने वाले, (पृदिनम्) संसार को स्पदं कयि हए

English

Back to her maker as her kin, like a dame banished by her lord. I with this salutary herb have ruined all their magic arts,

अध्याय 10

श्लोक 1.13

यथा॒ वात॑श्च्या॒वय॑ति॒ भूम्या॑ रे॒णुम॒न्तरि॑क्षाच्चा॒भ्रम्।ए॒वा मत् सर्वं॑ दुर्भू॒तं ब्रह्म॑नुत्त॒मपा॑यति

yathā vātaścyāvayati bhūmyā reṇumantarikṣāccābhram| evā mat sarvaṃ durbhūtaṃ brahmanuttamapāyati

हिन्दी अर्थ

मल््रमे दो प्रकारके धूम का वर्णेन हमा है, भ्रवर-धूम- कौ भोर परः” धूम को । भ्रवर धूम विषुवत् है, अन्तरिक्ष में फंलने वाला है 1 धूम का वर्णन इवेतादवतर उपनिषद् मे हूत्रा है + यथा- घम काःव्णंन हृश्रा है जिसे कि “परः कहा है" शष्ठ कहा. है 4 १७४ । भ्रथववेद-माष्य कां०.९ । सू०.१०

English

The spell which they have cast upon thy field, thy cattle, or thy men. Ill fall on him who doeth ill, on him who curseth fall the curse!

अध्याय 10

श्लोक 1.14

अप॑ क्राम॒ नान॑दती॒ विन॑द्धा गर्द॒भीव॑ ।क॒र्तृन् न॑क्षस्वे॒तो नु॒त्ता ब्रह्म॑णा वी॒र्याऽवता

apa krāma nānadatī vinaddhā gardabhīva | kartṛn nakṣasveto nuttā brahmaṇā vīryā'vatā

हिन्दी अर्थ

है, साथ ही “उक्षा” पद भी पठित है जिस का प्रसिद्ध भ्रथंदहै बैलः। इन दो ते भरथे किया है “116 ०९8. ००००८०त ४" ०४९८ ०४५. भयात् “रीरों ने चितकबरे वैल को पकाया" । भ्रपचन्त मे पच धातु है । भ्वादिगण मे “पवि व्यक्तीकरणे” मी पठित है, जिस का भथं है “भमिव्यक्त करना जाता है । . इसलिये ्रष्टाध्यायी भँ “बहुलं छन्दसि" .कहा है । साथ दही मपचन्त वीराः मे यदि यह भावना हो कि “वीर परमेदवर का परिपाक

English

We drive her back that she may slay the man who wrought the witchery. Against her comes the Angirasa, the Priest whose eye is over us.

अध्याय 10

श्लोक 1.15

अ॒यं पन्थाः॑ कृ॒त्येति॑ त्वा नयामोऽभि॒प्रहि॑तां॒ प्रति॑ त्वा॒ प्र हि॑ण्मः ।तेना॒भि या॑हि भञ्ज॒त्यन॑स्वतीव वा॒हिनी॑ वि॒श्वरू॑पा कुरू॒टिनी॑

ayaṃ panthāḥ kṛtyeti tvā nayāmo'bhiprahitāṃ prati tvā pra hiṇmaḥ | tenābhi yāhi bhañjatyanasvatīva vāhinī viśvarūpā kurūṭinī

हिन्दी अर्थ

धातु परिपाक र्थ म भी संगत प्रतीत. होती है । . 7 । रयं; केशिनं कुथा षि च॑क्षते संवत्स॒रे व॑पत॒ एक एषा 1 6 (जयः ) तीन †केरिनः) रदिमयों वासे, (ऋतुथा) प्मपने-भपने काल १ ग वषं भे. (वपते) बीजावाप मँ सहायक होता है। ॥ (ददृशे) देखी जाती है, नभूत होती है (न सपम्) परन्तु रूप नहीं ।

English

Turn back all witcheries and slay those practisers of magic arts. Whoever said to thee, Go forth against the foeman up the stream,

अध्याय 10

श्लोक 1.16

परा॑क् ते॒ ज्योति॒रप॑थं ते अ॒र्वाग॒न्यत्रा॒स्मदय॑ना कृणुष्व ।परे॑णेहि नव॒तिं ना॒व्या॒३ अति॑ दु॒र्गाः स्रो॒त्या मा क्ष॑णिष्ठाः॒ परे॑हि

parāk te jyotirapathaṃ te arvāganyatrāsmadayanā kṛṇuṣva | pareṇehi navatiṃ nāvyā3 ati durgāḥ srotyā mā kṣaṇiṣṭhāḥ parehi

हिन्दी अर्थ

-:केषिनः =“ केशा . दमयः, तैः तदन्तः । काशनाद्वा . अ्काचानाद्रा" चो कर्मनाम. (निं .२।१);1 “वपते” भें “वप् के दो अथं हेते है स पाथिवार्नि । ष्म ऋतु भे पांधिवांम्नि वनो को जला देती ; है, उन उच्छिन्नं करदेतीदहै। : - . : ॐ ३. ; (वाक्) बाणी है. (चत्वारि) चार (परिमिता) मापि हृएः (पदानि) वंद यावा कै ह वारं स्थानं (तानि) उन्हें (मनीषिणः). मन का संयम करने वाले ( ब्राह्मणाः ) वेदज्ञ ( विदुः ) जानते हैः (त्रीणि ) तीन पद (गहा निहिता) गृहा बुद्धि में रखे हए (न इङ्गयन्ति) गति नहीं करते मनुष्य (वदन्ति) -बोलतेर्है।. -: . 4

English

To him, O Krityā, go thou back. Pursue not us, the sinless ones. He who composed thy limbs with thought as a deft joiner builds a car,

अध्याय 10

श्लोक 1.17

वात॑ इव वृ॒क्षान् नि मृ॑णीहि पा॒दय॒ मा गामश्वं॒ पुरु॑ष॒मुच्छि॑ष एषाम्।क॒र्तॄन् नि॒वृत्ये॒तः कृ॑त्योऽप्रजा॒स्त्वाय॑ बोधय

vāta iva vṛkṣān ni mṛṇīhi pādaya mā gāmaśvaṃ puruṣamucchiṣa eṣām| kartṝn nivṛtyetaḥ kṛtyo'prajāstvāya bodhaya

हिन्दी अर्थ

मनीषी जानते ह । तीन पद तो बुद्धि मेया गुफामें मानो छि रहते है । सब मनुष्य केवल वाणीं के चतुर्थांश वैखरी कों बोलते हैँ । परा=बुद्धि (भ्रथो) तथा (सः) वह (दिव्यः) दिव्य गु्णो.वाला ( सुपण: ) सुपालक १७६ प्रथववेद-माष्य करां० ९। सू०-१० हृए को. (बहुधा ) बहुत प्रकार से भर्थात् बहुत नामों से (वदन्ति) कहते परमात्मा के रग्नि प्रादि सदसो नामे व॑तंमान है 1 जितंने परमेश्वर के गण मं स्वभाव है, उतने ही इस परमात्मा के नाम है" । ..

English

Go to him: thither lies thy way. This man is all unknown to thee. The cunning men, the sorcerers who fashioned thee and held thee fast,—

अध्याय 10

श्लोक 1.18

यां ते॑ ब॒र्हिषि॒ यां श्म॑शा॒ने क्षेत्रे॑ कृ॒त्यां व॑ल॒गं वा॑ निच॒ख्नुः ।अ॒ग्नौ वा॑ त्वा॒ गार्ह॑पत्येऽभिचे॒रुः पाकं॒ सन्तं॒ धीर॑तरा अना॒गस॑म्

yāṃ te barhiṣi yāṃ śmaśāne kṣetre kṛtyāṃ valagaṃ vā nicakhnuḥ | agnau vā tvā gārhapatye'bhiceruḥ pākaṃ santaṃ dhīratarā anāgasam

हिन्दी अर्थ

-'.. -काण्ड ९1 सूक्त १०। समूणे , - न् है, भादित्य उंविरत होति सितारौ; काद्रभा पौरं रत्री कोतिं कैर है । - सूक्त भे छ्त्या रौर उस के निवारण का वणेन है। कृत्या का भथं है छेदन", भरात् विनाश्ष करने के साधन, “कृती छेदने" (तुदादिः, रुधादिः) कृत्या ४ प्रकारकीहै। ... . : क (१) विषकन्या, जोकि सर्वाङ्ग सन्दर हो, वषर की तरह सजाई गई हो; पहिचान कर दते प्रेषक राजा के प्रति वापिस कर देते हँ (नुदामः).।

English

This cures and mars their witchery, this, repellent, drives it back the way it came. With this we make thee swim.

अध्याय 10

श्लोक 1.19

उ॒पाहृ॑त॒मनु॑बुद्धं॒ निखा॑तं॒ वैरं॑ त्सा॒र्यन्व॑विदाम॒ कर्त्र॑म्।तदे॑तु॒ यत॒ आभृ॑तं॒ तत्राश्व॑ इव॒ वि व॑र्ततां॒ हन्तु॑ कृत्या॒कृतः॑ प्र॒जाम्

upāhṛtamanubuddhaṃ nikhātaṃ vairaṃ tsāryanvavidāma kartram| tadetu yata ābhṛtaṃ tatrāśva iva vi vartatāṃ hantu kṛtyākṛtaḥ prajām

हिन्दी अर्थ

(२) दूसरी कृत्या है सेनाखूप (मस्त्र २, ३, १५) । (३) तीसरी कृस्या मेँ कृष्यन्न, गौ रावि पशुभो, पुरुषों के व को विषाक्त कर देना । ++. ॑ पदार्थो जिसके निराकरण का वर्णेन मन्व (४) में हृभ्रा है। (४). चौथी कृत्या है विद्विष्टं राजा की भूमि मे विस्फोटक पदां र =: ष “निलातम्" तथा ““निचनुः” द्वारा निष्ठ किया है (मन्व १८,१९) । अनागस है, भर्थात् -भ्रक्रमण करने वाला नहीं (११) । शतुसेना यदि भाक्रमण भी करे तो सौम्यभरकृति का राजा, शाम्तिपूवंक उसे वापिस चले यदि शत्रुसेना हटीली ही हो भ्रौरं वापिस जाने को तय्यारन हो तो, सेनाध्यक्ष शचरुसेना का भञ्जन्; करे (१५), उघ का पूणं विनाश करे .“मा

English

When we have found her ducked and drenched, a hapless cow whose calf hath died, Let all my woe depart and let abundant riches come to me.

अध्याय 10

श्लोक 1.20

स्वा॒य॒सा अ॒सयः॑ सन्ति नो गृ॒हे वि॒द्मा ते॑ कृत्ये यति॒धा परूं॑षि ।उत्ति॑ष्ठै॒व परे॑ही॒तोऽज्ञा॑ते॒ किमि॒हेच्छ॑सि

svāyasā asayaḥ santi no gṛhe vidmā te kṛtye yatidhā parūṃṣi | uttiṣṭhaiva parehīto'jñāte kimihecchasi

हिन्दी अर्थ

कां० १०। सु° १ भथववेवेद-माष्य १७९ (१ सम ४४. जै है, शपते" (२३), तया, पापम् ०) । वैदिक राजा युद्ध के दुष्परिणाम की दृष्टि से युद्धो के सरथं परित्याग का संकल्प करता है (३२) । - द द्ध के सवथा ४ ष "र को भ्रादवासन देने ओौर सहानुभति प्रकट ऋ के लिय १८० भ्रथवेवेव-माष्य कां० १०। भू० १

English

From mention of thy name, from sin against the Fathers or the Gods,

अध्याय 10

श्लोक 1.21

ग्री॒वास्ते॑ कृत्ये॒ पादौ॒ चापि॑ कर्त्स्यामि॒ निर्द्र॑व ।इ॒न्द्रा॒ग्नी अ॒स्मान् र॑क्षतां॒ यौ प्र॒जानां॑ प्र॒जाव॑ती

grīvāste kṛtye pādau cāpi kartsyāmi nirdrava | indrāgnī asmān rakṣatāṃ yau prajānāṃ prajāvatī

हिन्दी अर्थ

यां कल्पयन्ति बहुतौ वधूमिव विद्रा इसत॑छृतां चिङधिरसवः । (चिकित्सवः) चिकित्सक, (वहतौ) विवाह में (वधूम् हवै) वधू के सदृ, (याम्) जिसने (विदवरूपाम्) सब. भोर से सजी-सजा्ई या विष्व मे - करते है, (सा) वह (श्रारात्) यदि समीप (एतु) भ्राए तो (एनाम्) इसे (श्रप नुदामः) हम परे धकेल देते है । द्वारा विषवैद्यो का । परराष्टर के राजा के मारने हेतु, शनुराज्याधिकारी, निज विष्वं दारा निमित की गई .विषकन्या को प्रेषित करते है, ताकि

English

These herbs of healing shall by prayer release thee, by power, by holy texts, the milk of Rishis.

अध्याय 10

श्लोक 1.22

सोमो॒ राजा॑धि॒पा मृ॑डि॒ता च॑ भू॒तस्य॑ नः॒ पत॑यो मृडयन्तु

somo rājādhipā mṛḍitā ca bhūtasya naḥ patayo mṛḍayantu

हिन्दी अर्थ

्आारात् का भरथं है समीप । भ्रारात् दुरसमीपयोः । (चीरषण्वती ) समदार, (नस्वती, कणिनी) नाक, कान प्रादि भङ्गी ॑ बाली, (कृत्याकृता) हिसा तथा मारने-काटने मे कुशल, (संभूता) सेनिक- शातुसेना (भ्रारात्) यदि हमारे समीप (एतु) भ्राए तो (एनाम्) इसे (रप नुदामः) हम परे घकेल देते है । होना चाहिए । कोई भी सैनिक विकलार्ङगं तथा विकृताङ्खं न होना चाहिए ।

English

As the wind stirs the dust from earth and drives the rain cloud from the sky, So, chased and banished by the spell, all misery departs from me.

अध्याय 10

श्लोक 1.23

भ॒वा॒श॒र्वाव॑स्यतां पाप॒कृते॑ कृत्या॒कृते॑ ।दु॒ष्कृते॑ वि॒द्युतं॑ देवहे॒तिम्

bhavāśarvāvasyatāṃ pāpakṛte kṛtyākṛte | duṣkṛte vidyutaṃ devahetim

हिन्दी अर्थ

कार १० । सू° १ नि भ्ंथववेद-भाष्य १८१ वापिस पहुचे, (इव ) जंसे कि (पत्या )-पति द्वारा (नुत्ता) धकेली गई सेना मेँ-शद्र भी होते हँ जो कि सड़कें बनाते, भार डोते है । स्त्रियां खानपान को तय्यार करतीं, विजय के लिये ब्राह्मण पूजा पाठ कंरते, राजा लोग सेनिक व्यय करते भरौरं सैनिकों की भरतीं करते हँ . यां कषेत्रं चक्रुर्यां गोधु यां षां ते पुरुषे ॥॥४॥ (याम्) जिसे (गोषु) गौभ्रों मे, (याम् वा) -या जिसे ते ) तेरे (पुर्षेषु) पुरषो मे किया है। ४

English

Go with a resonant cry, depart, like a she-ass whose cords are loosed. Go to thy makers: hence! away! Go driven by the potent spell.

अध्याय 10

श्लोक 1.24

यद्ये॒यथ॑ द्वि॒पदी॒ चतु॑ष्पदी कृत्या॒कृता॒ संभृ॑ता वि॒श्वरू॑पा ।सेतो॒ष्टाप॑दी भू॒त्वा पुनः॒ परे॑हि दुच्छुने

yadyeyatha dvipadī catuṣpadī kṛtyākṛtā saṃbhṛtā viśvarūpā | setoṣṭāpadī bhūtvā punaḥ parehi ducchune

हिन्दी अर्थ

लैसे कि (शपथः शपथीयते ) शपथ, .रापथ करने वाले के प्रति होती है । करने वाते का (हनत्) हनन करे। . “ दसरे के लिये पापकम का विचार, . विचारकर्ता के चित्त को दुषित कर उसके लिये ही परिणामरूप भे दुःखदायक होतां है । शपथ सदा कटी होती है, जैसे कि निख्क्त में उदाहरण दिया है किं “श्रद्या मुरीय यदि यातु घानोऽस्मि” (७।१।३) कि “पै भ्राज ही मर जाऊं यदि म किंसीको यातना भर्थात् कष्ट देने वाला ह" । परन्तु देखा जाता है कि शपथ लेने वाला उसी दिन मरता नदीं । यह कूटी शपथ उस के चित्त में बुरे परिणाम

English

This, Krityā, is thy path, we say, and guide thee. We drive thee back who hast been sent against us.

अध्याय 10

श्लोक 1.25

अ॒भ्य॑क्ताक्ता॒ स्वऽरंकृता॒ सर्वं॒ भर॑न्ती दुरि॒तं परे॑हि ।जा॒नी॒हि कृ॑त्ये क॒र्तारं॑ दुहि॒तेव॑ पि॒तरं॒ स्वम्

abhyaktāktā sva'raṃkṛtā sarvaṃ bharantī duritaṃ parehi | jānīhi kṛtye kartāraṃ duhiteva pitaraṃ svam

हिन्दी अर्थ

भेज देने चाद्ये, ताकि वह दोबारा वैसे प्रयत्न न कर पाए तुफ को है हमारे सेनाष्यक्ष ! (यः) जो परकीय सेनाध्यक्ष (उवाच) कहता है कि (परेहि इति) परे हट जा, है (कृत्ये) हमारी सेना 1 (तम् म्रभि) उस के संमुख (निवततंस्व) तु नितरां प्रवृत्त हो, भौर चतरु केः सेना- लिये सेनापति भ्रादि श्रधिकारी ही भपराधी होते ह, इस लिये उन्दीकोमारेका ,1' कथन हभ है 1 -लंसे कि प्रथषेवेद मे. अन्यत्र भी भ्रदेश मिलता है। यथा-- . को मार डाल, इनमे से कोद भी श्रेष्ठ भ्रधिकारी बवन पाए” । इस प्रकार वेदाः

English

Go by this pathway, breaking loose for onslaught even as a host complete with cars and horses.

अध्याय 10

श्लोक 1.26

परे॑हि कृत्ये॒ मा ति॑ष्ठो वि॒द्धस्ये॑व प॒दं न॑य ।मृगः समृ॑ग॒युस्त्वं न त्वा॑ निक॑र्तुमर्हति

parehi kṛtye mā tiṣṭho viddhasyeva padaṃ naya | mṛgaḥ samṛgayustvaṃ na tvā nikartumarhati

हिन्दी अर्थ

्ानुखार, विजयानन्तर, सैनिकों का यथा सम्मव हनन न करते हए, सेना के मख्य . ४ । मुख्य भ्रधिकारिर्यो का हनन करना चद्धिये । (यः) जिस ने . है परकीय सेना (ते) तेरे (पर्षि) जोड़ों को (संदधौ). जोड़ा है, (इव) जसे कि ऋभुः) तरवीन (धिया) बुदधिपुवंक (रथस्य) रथ के जोड़ो को जोडता है, (तम्) उस के प्रति (गच्छ) तु सेना की करई टुकड़ियां होती है, उन को इकट्वा . कर के सेना. तय्यार होती है; तथा सेना चतुरंगिणी -होती है । प्रत्येक भङ्ग, सेना का एकः जोड़ निज बुद्ध्नुसार इन्दं परस्पर जोडता है । .

English

No path leads hitherward for thee to travel. Turn thee from us: far off, thy light is yonder. Fly hence across the ninety floods, the rivers most hard to pass.

अध्याय 10

श्लोक 1.27

उ॒त ह॑न्ति पूर्वा॒सिनं॑ प्रत्या॒दायाप॑र॒ इष्वा॑ ।उ॒त पूर्व॑स्य निघ्न॒तो नि ह॒न्त्यप॑रः॒ प्रति॑

uta hanti pūrvāsinaṃ pratyādāyāpara iṣvā | uta pūrvasya nighnato ni hantyaparaḥ prati

हिन्दी अर्थ

रचना करके ( भ्रलेभिरे ) स्वाधंलाभ वाले. हृएर्है, वे (श्रभिचारिणः) करने वाला वादणास्त्र . है, (कृत्यादूषणंम् ) हिससेना को दूषित करं देता है; भरं उसे (प्रतिषत्मं वापिसी के मागं पर (पुनः सरम् फिर चला देता है, (तेन) उस द्वारा हे. हिलसेना ! (त्वा) तुभे (स्तपयामसि) हम जलस्नान करातेर्है।. द्वारा न मारं कर, उन पर वारणास्व. हारा जल वर्षा करने का निदं हृभ्रा है; जिस कै प्रभावं से सेना वापिस चली जाती है । युद्ध मे जिस का पुत्र मारा गया है वह मानो दुर्मागिन हई है । पुत्रके मृत होने परं णुद्धि-स्नान उसे करा दिया है। तदनन्तर विजयी सेनाधिकारी

English

Begone, and be not wounded. As wind the trees, so smite and overthrow them: leave not cow, horse, or man of them

अध्याय 10

श्लोक 1.28

ए॒तद्धि शृ॒णु मे॒ वचोऽथे॑हि॒ यत॑ ए॒यथ॑ ।यस्त्वा॑ च॒कार॒ तं प्रति॑

etaddhi śṛṇu me vaco'thehi yata eyatha | yastvā cakāra taṃ prati

हिन्दी अर्थ

उसे मिले ह 1. वह कहती है कि युद्धकमं पापकम है । एसे सब कमं भर्थात् त्र को सेना म भरतीं कराना, उसे गुद्धविद्या सिखा कर युद्ध के लिये मेजना नादि पापकं है, इन से चै भविष्य मेँ पृथक् रहं । पुत्र के प्रभावं म घन हीन भी हो गरहः भौर भ्रकेली होकर म भरपने श्राप को निबंल हुई मी किसी पते पतर को मै संनिक न बनाऊ'गी, ताकि उन की सत्ता मं धन ॥

English

surviving Return, O Krityā, unto those who made thee. Wake them from sleep to find that they are

अध्याय 10

श्लोक 1.29

अ॒ना॒गो॒ह॒त्या वै भी॒मा कृ॑त्ये॒ मा नो॒ गामश्वं॒ पुरु॑षं वधीः ।यत्र॑य॒त्रासि॒ निहि॑ता॒ तत॒स्त्वोत्था॑पयामसि प॒र्णाल्लघी॑यसी भव

anāgohatyā vai bhīmā kṛtye mā no gāmaśvaṃ puruṣaṃ vadhīḥ | yatrayatrāsi nihitā tatastvotthāpayāmasi parṇāllaghīyasī bhava

हिन्दी अर्थ

भनौर बल भु उपस्थित होते रहै । विजयी, सान्त्वना्थ, जिस भौ मृतपुत्रा यत् तं पिद्भ्यो ददतो यहे वा नाग्रं जगृहुः । .. (पितुम्यः) पितरों के. भरति (यद्) जो (ददतः) दान देते हए, (वा) सामूहिक-देशरदित से हृए. (पापात्) दुःखमय या शोकमय् पाप से (दमाः ( प्रकरण युद्धकाहै, म पितर हँ रक्षा करने वाले राज्याधिकारी । इन ।

English

childless. The charm or secret power which they have buried for thee in sacred grass, field, cemetery,

अध्याय 10

श्लोक 1.30

यदि॒ स्थ तम॒सावृ॑ता॒ जाले॑ना॒भिहि॑ता इव ।सर्वाः॑ सं॒लुप्ये॒तः कृ॒त्याः पुनः॑ क॒र्त्रे प्र हि॑ण्मसि

yadi stha tamasāvṛtā jālenābhihitā iva | sarvāḥ saṃlupyetaḥ kṛtyāḥ punaḥ kartre pra hiṇmasi

हिन्दी अर्थ

निमित्त पशु को मारं कर तस्निमित्त यज्ञ मे मांसाहुति देना भी पापकमं है । इस के लिये भी प्रायरिचत्त का विधान होता है, चाहे हैवत-कृपा से पशुयज्ञ करने वाले को फल मिल भी जाय । इसलिये राष्टूनिमित्त किये गए युद्ध में हिसा भी पापकम ही है । - च नाम लेकर उस पर दोषारोपणजन्य पाप से, (संदेदयात्) देशदहित की दृष्टि तनकेरूपमंक्रिये गए पापसे (त्वा) तुभं (वोरुधः) ग्रोषधियां (वीयेण) ब्रह्मण=ब्रह्मणा पदपाठे, पयस पयसा पदपाठे । देव

English

simple,— That tool of hatred, understood, made ready, stealthy and buried deep, have we discovered, p

अध्याय 10

श्लोक 1.31

कृ॒त्या॒कृतो॑ वल॒गिनो॑ऽभिनिष्का॒रिणः॑ प्र॒जाम्।मृ॒णी॒हि कृ॑त्ये॒ मोच्छि॑षो॒ऽमून् कृ॑त्या॒कृतो॑ जहि

kṛtyākṛto valagino'bhiniṣkāriṇaḥ prajām| mṛṇīhi kṛtye mocchiṣo'mūn kṛtyākṛto jahi

हिन्दी अर्थ

(यथा) जसे (वातः) का वायु (भरुम्याः रेणुम्) भभि से धूल को, ४ त . . -.. 1 कां०.१०.। सु० १ म्रथवेवेद-भाष्य १८७ १८६ “ अथववेद-माष्य कौ० १५ ।सु०१ ! वाहिनी सेना जिस मे कि ८१ हाथी हो, ८१ रथ,.२४३ भ्रव, तथा चुराती नही, अपितु लूट लिया करती है । १ केन् न॑क्षस्वेतो नुचा बरह्मणा वीया वता ॥१४॥ क

English

Let that go back to whence it came, turn thither like a horse and kill the children of the sorcerer.

अध्याय 10

श्लोक 1.32

यथा॒ सूर्यो॑ मु॒च्यते॒ तम॑स॒स्परि॒ रात्रिं॒ जहा॑त्यु॒षस॑श्च के॒तून्।ए॒वाहं सर्वं॑ दुर्भू॒तं कर्त्रं॑ कृत्या॒कृता॑ कृ॒तं ह॒स्तीव॒ रजो॑ दुरि॒तं ज॑हामि

yathā sūryo mucyate tamasaspari rātriṃ jahātyuṣasaśca ketūn| evāhaṃ sarvaṃ durbhūtaṃ kartraṃ kṛtyākṛtā kṛtaṃ hastīva rajo duritaṃ jahāmi

हिन्दी अर्थ

हई (गर्दभी इव) गदही कौ तरह (नानदती) वार-बार चिल्लाती हुई तु , है परकीय सेना ! (पराक्) परे चले जाना (ते) तेरे लिये . इस दवारा (त्वा) तुे (नयामः) हम ले वलते है, (श्रमि प्रहिताम्) हमारी (कृत्ये) छेदन-भेदन मे कृदल है हमारी सेना ! (वातः इव ) प्रचण्ड वायु जैसे (वृक्षान्) वृक्षो को वैसे तुं परकीय सेना की (निमृंणीहि) तोड- - तरह । फोड़ श्रौर (पादय) गिरादे, भरलायी करदे; (एषाम्) इनः की (गाम् कृत्या = कृती छेदने, छेदन-भेदन में -कुगल सेना 1. मृणीहि =

English

Within our house are swords of goodly iron. Krityā, we know thy joints and all their places. Arise this instant and begone! What, stranger! art thou seek- ing here?

अध्याय 10

श्लोक 2.1

ब्रह्मप्रकाशनम्।१-३३ नारायणः।पार्ष्णिसूक्तम्, पुरुषः, ब्रह्मप्रकाशनम्।अनुष्टुप्, १-४,७-८ त्रिष्टुप्, ६, ११ जगती, २८ भुरिग्बृहती।केन॒ पार्ष्णी॒ आभृ॑ते॒ पूरु॑षस्य॒ केन॑ मां॒सं संभृ॑तं॒ केन॑ गु॒ल्फौ।केना॒ङ्गुलीः॒ पेश॑नीः॒ केन॒ खानि॒ केनो॑च्छ्ल॒ङ्खौ म॑ध्य॒तः कः प्र॑ति॒ष्ठाम्

brahmaprakāśanam| 1-33 nārāyaṇaḥ| pārṣṇisūktam, puruṣaḥ, brahmaprakāśanam| anuṣṭup, 1-4,7-8 triṣṭup, 6, 11 jagatī, 28 bhurigbṛhatī| kena pārṣṇī ābhṛte pūruṣasya kena māṃsaṃ saṃbhṛtaṃ kena gulphau| kenāṅgulīḥ peśanīḥ kena khāni kenocchlaṅkhau madhyataḥ kaḥ pratiṣṭhām

हिन्दी अर्थ

) । जब आक्रमण करने वाली सेना ॥ हो जायं तब भव श्रौर लाव परस्पर सहमति से उस ,¶ मं है रौर. ृष्कमं : (¢. फिर, (परा इहि) परे ए वाली होकर (पुनः) तू चतुरङ्गिणी सेना का. विरवसूपं है । स्वराष्ट् : षष्ट रक्षक सेनाष्यक्ष, पररा 9 सेना के भरति कहत. है कि तु जो हमारे राष्टरमें भ्राईहै द ५५ ५५ सेना को खदेड़ कर उस का पीछा करता हरा निज (0) काल देता है । इस निकालने मेँ दोनों सेनां के रूपमे यं

English

He waits, and aiming with his shaft smites him who first would shoot at him, And, when the foeman deals a blow before him, following strikes him down.

अध्याय 10

श्लोक 2.2

कस्मा॒न्नु गु॒ल्फावध॑रावकृण्वन्नष्ठी॒वन्ता॒वुत्त॑रौ॒ पुरु॑षस्य ।जङ्घे॑ नि॒रऋत्य॒ न्यऽदधुः॒ क्वऽस्वि॒ज्जानु॑नोः सं॒धी क उ॒ तच्चि॑केत

kasmānnu gulphāvadharāvakṛṇvannaṣṭhīvantāvuttarau puruṣasya | jaṅghe niraṛtya nya'dadhuḥ kva'svijjānunoḥ saṃdhī ka u tacciketa

हिन्दी अर्थ

द कड १०।२ भयववेद का केन सूक्त है, जसे कि केन० उपनिषद्” । . जो जि उंछलने मे सहायक होता है । भरतिष्ठा गरदन, दो : बाहुमूलों तथा कठिभागो कौ. स्थिति का भराषार, धड़ । + 9 किया है ।. (जक्खं ) जक्खा्रीं को (निक्त) ्रलग-परलग करके (न्यदघरः) दो चुटनों के (सन्धी) दौ जो स्थापितं करिये है, (कः उ) कौन वस्तुतः (तत्. चिकेत) उसे सम्यक् रूप मेँ जानता है ? तथा (तत् कः चिकेत). उसे प्रजापति ही सम्यक् रूप में जानता है यह उत्तर भी चित कर विया है ।

English

A fourfold frame is fixt with ends connected, and up above the knees a yielding belly. The hips and thighs, who was their generator, those props where- by the trunk grew firmly

अध्याय 10

श्लोक 2.3

चतु॑ष्टयं युज्यते॒ संहि॑तान्तं॒ जानु॑भ्यामू॒र्ध्वं शि॑थि॒रं कब॑न्धम्।श्रोणी॒ यदू॒रू क उ॒ तज्ज॑जान याभ्यां॒ कुसि॑न्धं॒ सुदृ॑ढं ब॒भूव॑

catuṣṭayaṃ yujyate saṃhitāntaṃ jānubhyāmūrdhvaṃ śithiraṃ kabandham| śroṇī yadūrū ka u tajjajāna yābhyāṃ kusindhaṃ sudṛḍhaṃ babhūva

हिन्दी अर्थ

परन्तु भाग पर रखने से इससे जो धूम्र निकलता है वह नीला होता है करता है । कः अदनार्थंक तथा प्रजापत्यथंक ।. प्रन --“कः किस ने भाप स्थापित किये है, उत्तर-“कः” प्रजापति नेःस्थापित कयि है. । को अंस्मिच् खूपम॑दधात् को पञ्चान च नाभ च ॥ । = ००५ = ०८०१५ ॐ को ७७२५५. इः ह

English

Whence bringeth mighty Pūrusha both pleasant and unpleasant things, Of varied sort, sleep, and alarm, fatigue, enjoyments and de- lights?

अध्याय 10

श्लोक 2.4

कति॑ दे॒वाः क॑त॒मे त आ॑स॒न् य उरो॑ ग्री॒वाश्चि॒क्युः पुरु॑षस्य ।कति॒ स्तनौ॒ व्यऽदधुः॒ कः क॑फो॒डौ कति॑ स्क॒न्धान् कति॑ पृ॒ष्टीर॑चिन्वन्

kati devāḥ katame ta āsan ya uro grīvāścikyuḥ puruṣasya | kati stanau vya'dadhuḥ kaḥ kaphoḍau kati skandhān kati pṛṣṭīracinvan

हिन्दी अर्थ

उत्तरा्ेक वाणम् = “नृतः” के सन्निषान के कारण “वाणम्” याने की बहववचन ।. ५ ० र ४. है।: कि .केनमां भूिमो्णोत् केन प्यमवद् दिषम् ) केनासि महा परतान् केन कर्माणि पूष; ॥१८॥: - - केन महवा) किंस महिमा हारा (भूमिम्) मूमि को (शर्णोत) ॥ भाच्छादित किया है, (केन) किस महिमा द्वारा (दिवम्) चुलोक को (परि भ्रमत्). सब भोर स परे हए हं। (केन) कसि महिमा ;4 दारा (पूद्षः) उस पुरुष नेः (पवंतान्) पवतो, - मेधो पर (भ्रभि- 1.

English

Who wove the vital air in him, who filled him with the down- ward breath? What God bestowed on Pūrusha the general pervading air?

अध्याय 10

श्लोक 2.5

को अ॑स्य बा॒हू सम॑भरद् वी॒र्यं करवा॒दिति॑ ।अंसौ॒ को अ॑स्य॒ तद् दे॒वः कुसि॑न्धे॒ अध्या द॑धौ

ko asya bāhū samabharad vīryaṃ karavāditi | aṃsau ko asya tad devaḥ kusindhe adhyā dadhau

हिन्दी अर्थ

(परि अभवत्) विजय पाई हुई है ।. दृष्टि से भी परमेदवर- पुरुष का ही ग्रहण उचित है। 1 भरध्याय ३१ को रुष सूक्त” कहते हैः। इस भे पुरुष पद द्वारा परमेदवरः पुरुष का ही वर्णेन है । योग भें भी परमेदवर को “पुरुष - विशेषः” कहा है (योग १।२४) । तथा (अथर्व ० १०।२।२८) मे भी “पुरुष द्वारा ब्रह्म पुरुष का ही कथन हृभा है। “ुखष" शब्द का. भरथं है “धुरि शेते" । जीवा- शयने करता है इस लिये वह् भी पुरुष है । मन्त्र मेँ परमेदवर पुरुष की . ¦ द्युलोक को घेरा हृभा है, उस ने ही -निज सर्ंशक्तिमत्ताःसे मेषो, पव॑त पर सृष्टि की रचना भादि कर्मो, तथा जगत् के कर्मों पर विजय पाए हृए है 4

English

What God, what only Deity placed sacrifice in Pūrusha? Who gave him truth and falsehood? Whence came Death and immortality?

अध्याय 10

श्लोक 2.6

कः स॒प्त खानि॒ वि त॑तर्द शी॒र्षाणि॒ कर्णा॑वि॒मौ नासि॑के॒ चक्ष॑णी॒ मुख॑म्।येषां॑ पुरु॒त्रा वि॑ज॒यस्य॑ म॒ह्ननि॒ चतु॑ष्पादो द्वि॒पदो॒ यन्ति॒ याम॑म्

kaḥ sapta khāni vi tatarda śīrṣāṇi karṇāvimau nāsike cakṣaṇī mukham| yeṣāṃ purutrā vijayasya mahnani catuṣpādo dvipado yanti yāmam

हिन्दी अर्थ

९ रीता वर को उतमदुरष तथा पूचवोत्तम कहा है ॥ . कां०. १० । सू०.२ भरथवंवेद-माष्य ; ० २०७ केन पजेन्यमन्वेति केन सोमं िच्रणम् । र. केनं यहं च॑ श्रद्धां च केनास्मिन् नितं मन॑ः ॥१९॥ . कृषिकाये हो सके 1 चन्द्रमा में वह इसलिये श्रन्वित है ताकि उसे.मासित.कर, सके, रात्रिकाल को भ्रकाधित करने के. लिये । उपासना यज्ञं तथा पासके प्रणिधान नामक भक्तिविंशेष दवारा भ्रभिमुंली करिया गया ईश्वर

English

Who wrapped a garment round him? Who arranged the life he hath to live? Who granted him the boon of speech? Who gave this fleetness to his feet?

अध्याय 10

श्लोक 2.7

हन्वो॒र्हि जि॒ह्वामद॑धात् पुरू॒चीमधा॑ म॒हीमधि॑ शिश्राय॒ वाच॑म्।स आ व॑रीवर्ति॒ भुव॑नेष्व॒न्तर॒पो वसा॑नः॒ क उ॒ तच्चि॑केत

hanvorhi jihvāmadadhāt purūcīmadhā mahīmadhi śiśrāya vācam| sa ā varīvarti bhuvaneṣvantarapo vasānaḥ ka u tacciketa

हिन्दी अर्थ

सेभीयोगी को शीघ्र समाधिलाम तंथा उसका फल प्राप्त हो जाता है) . पुरष मं मन इस लिये स्थापित किया है कि वह निज कायं मनन पूर्वक करे, पशुवत् विना सोचे-विचरे.काम न॑ करे, तथा श्रवण मनन, निदिध्या- सन द्वारा परमेदवरोपासना. कर मोक्ष प्राप्त कर सके 1 . . , केम भोत्रियमाप्नोति केतेण परमेष्ठिनम् । . केतेपमग्नि पुरषः केन॑ सेवत्सुरं म॑मे ॥२०॥ . २०८ भ्रथरवैवेद-भाष्यंः कां०-१० १ सू०ए

English

Through whom did he spread waters out, through whom did he make Day to shine? Through whom did he enkindle Dawn and give the gift of even- tide?

अध्याय 10

श्लोक 2.8

म॒स्तिष्क॑मस्य यत॒मो ल॒लाटं॑ क॒काटि॑कां प्रथ॒मो यः क॒पाल॑म्।चि॒त्वा चित्यं॒ हन्वोः॒ पूरु॑षस्य॒ दिवं॑ रुरोह कत॒मः स दे॒वः

mastiṣkamasya yatamo lalāṭaṃ kakāṭikāṃ prathamo yaḥ kapālam| citvā cityaṃ hanvoḥ pūruṣasya divaṃ ruroha katamaḥ sa devaḥ

हिन्दी अर्थ

कारण वह (संवत्सरम्) संवत्सर को (ममे). मापता याउसका निर्माण श्रोत्रिय वेदाध्ययन करता है, इसलिए वह पविर््राचरण वाला.है, भौर व्यवहारो का सम्पादन होता है, भरतः उपकार भावना से परमेष्वर संवत्सरः केन देवाँ भरंक्षियति.केन् दव॑ननीविचः। ;. केनेदमन्यमकषतरं केन सत्. घत्रयु्यते ॥२२॥ . रथात् सदौ निवास करता है, (केनः) किसं कारण (देवजनीः).देवों; यारा ;

English

Who set the seed in him and said, Still be the thread of life spun out? Who gave him intellect besides? Who gave him voice and gestic power?

अध्याय 10

श्लोक 2.9

प्रि॒या॒प्रि॒याणि॑ बहु॒ला स्वप्नं॑ संबाधत॒न्द्यः॑ ।आ॒न॒न्दानु॒ग्रो नन्दां॑श्च॒ कस्मा॑द् वहति॒ पूरु॑षः

priyāpriyāṇi bahulā svapnaṃ saṃbādhatandyaḥ | ānandānugro nandāṃśca kasmād vahati pūruṣaḥ

हिन्दी अर्थ

का०ः.१९० 4 -सु०२ भथचवेद-माष्य २०९. क्षतो से त्राता (उच्यते) कहा जाता है । हेतु तिदित है 1 परमेदवर देवो मेः निरन्तर निवास करता.है, चूकिवेदेव .. (यजु० ४०।१५) के:भनुसारः परमेखर का सदा स्मरणः करते ह, इसलिये परमेर्वर.उन के हृदयो. मेँ सदा निवास.करता है । सन्तानो म भी सदा निवास करता है । दिव्य गुणकमों वाले माता-पिता

English

Through whom did he bedeck the earth, through whom did he encompass heaven? Whose might made Pūrusha surpass the mountains and created things?

अध्याय 10

श्लोक 2.10

आर्ति॒रव॑र्ति॒र्निरृ॑तिः॒ कुतो॒ नु पुरु॒षेऽम॑तिः ।राद्धिः॒ समृ॑द्धि॒रव्यृ॑द्धिर्म॒तिरुदि॑तयः॒ कुतः॑

ārtiravartirnirṛtiḥ kuto nu puruṣe'matiḥ | rāddhiḥ samṛddhiravyṛddhirmatiruditayaḥ kutaḥ

हिन्दी अर्थ

ना हो जाती है। दुच्छुने ! - “दु+शुनी"" (सम्बुद्धौ ), रं म्रभिप्रायहै भ्रंग। (स्वरंकृता) उत्तमः प्रकार से भ्रलंकत रकृत ः त हई भी है परकीया. चतुरङ्किणी धारण करती हृई (परा इहि) हमारे राष्ट से परे न नः नीहि) तु निजकर्ता को प्राश्चथ. जान, (स परकीय चतुरङ्गिणी सेना के दो तरीके है, लौट जानेमें) एक यह कि

English

Hearken to this my word; then go thither away whence thou hast come; to him who made thee go thou back.

अध्याय 10

श्लोक 2.11

को अ॑स्मि॒न्नापो॒ व्यऽदधाद् विषू॒वृतः॑ पुरू॒वृतः॑ सिन्धु॒सृत्या॑य जा॒ताः ।ती॒व्रा अ॑रु॒णा लोहि॑नीस्ताम्रधू॒म्रा ऊ॒र्ध्वा अवा॑चीः॒ पुरु॑षे ति॒रश्चीः॑

ko asminnāpo vya'dadhād viṣūvṛtaḥ purūvṛtaḥ sindhusṛtyāya jātāḥ | tīvrā aruṇā lohinīstāmradhūmrā ūrdhvā avācīḥ puruṣe tiraścīḥ

हिन्दी अर्थ

लौट जाय । दसरा यह किं वह युद्ध में घायल हो कर् पराजित हई भ्रपने राष्ट मे चली जाय.।. पहिले तरीके का वणंन मन्त्र २४में हरा है, भौर । क्मथवेवेद-भाष्य कां० १०1 सू०१ तू हमारा सेनापति (मृगयुः) मूग का ९ (त्वा) तुभे (निकतुंम्) नीचा करने कं हति) निकतुंम्; निकारः -- 1111108, प्रपणं हनन करना, भ्रपमान करना !

English

The slaughter of an innocent, O Krityā, is an awful deed. Slay not cow, horse, or man of ours. In whatsoever place thou art concealed we rouse thee up there- from: become thou lighter

अध्याय 10

श्लोक 2.12

को अ॑स्मिन् रू॒पम॑दधात् को म॒ह्मानं॑ च॒ नाम॑ च ।गा॒तुं को अ॑स्मि॒न् कः के॒तुं कश्च॒रित्रा॑णि॒ पूरु॑षे

ko asmin rūpamadadhāt ko mahmānaṃ ca nāma ca | gātuṃ ko asmin kaḥ ketuṃ kaścaritrāṇi pūruṣe

हिन्दी अर्थ

वह् न करे; (२) तथा यदि वह पूवे हनन कव श न पूव प्रहारे यद्यपि कोई व्यक्ति मारा ५. ध शरभो ्रहारकर्ता की भावना म तो किये जाने वाला प्रहार, मा (एमथ) तु प्राई है, (तम् प्रति) उख (त्वा) तेरी (चकार) रचना फी है 1 इस (भे) मेरे. (वचः) वचन को (हि) :) दूसरा स्वराष्ट्र रक्षक सेनापति त है । (उत) तथा (पूवस्य निघ्नतः) को, (रति) प्रतीकार स्प मे, (ब्रपरः)

English

than a leaf. If ye be girt about with clouds of darkness, bound as with a net.

अध्याय 10

श्लोक 2.13

को अ॑स्मिन् प्रा॒णम॑वयत् को अ॑पा॒नं व्या॒नमु॑ ।स॒मा॒नम॑स्मि॒न् को दे॒वोऽधि॑ शिश्राय॒ पुरु॑षे

ko asmin prāṇamavayat ko apānaṃ vyānamu | samānamasmin ko devo'dhi śiśrāya puruṣe

हिन्दी अर्थ

महा-श्रपराध है । दोनों स्थितियों (अनागोहत्या ) निरपराषो की हत्या (वै) निर्नय से (भीमां) भय- भ्वों भौर पूरुषो का (वधीः मा) वव न केर । (यत्र यत्रै) हमारे राष्ट मे जहा-जहां (निहिता भ्रसि) तु स्थित है (ततः) वहा-वहीं से (त्वा) तुभे (उत्थापयामसि). हम उवा देते है, (पर्णात्) प्ते से. भी (लघीयसी ) लघु भ्रमिप्राय यह कि हम ने, है परफीय सेनां तेरे राष्ट के प्रति कोई भरपरांषं नहीं किया, तो भी तुः निरपराधि्यो की हिसा के लिये हमारे रष्टर मे श्रा बेटी है, घर यहां से उठ जा, नहीं तो हम् बल प्रयोग द्वारा यहां से तुभे उठा देगे । हमारी शक्ति के शुकानले भे तु पत्ते से.भी हल्की है, तुच्छ है । इस की उक्तिकेसदृशमीहै। . . स "3, ज

English

We rend and tear all witcheries hence and to their maker send them back. The brood of wizard, sorcerer, the purposer of evil deed.

अध्याय 10

श्लोक 2.14

को अ॑स्मिन् य॒ज्ञम॑दधा॒देको॑ दे॒वोऽधि॒ पुरु॑षे ।को अ॑स्मिन्त्स॒त्यं कोऽनृ॑तं॒ कुतो॑ मृ॒त्यृः कुतो॒ऽमृत॑म्

ko asmin yajñamadadhādeko devo'dhi puruṣe | ko asmintsatyaṃ ko'nṛtaṃ kuto mṛtyṛḥ kuto'mṛtam

हिन्दी अर्थ

(यदि स्थ) यदि तुम हो (तमसा) तामसिकः मनोवृत्तियों से (भाव- सदुश, तो (कृत्याः) है हन्न सेनां (सर्वाः) तो तुम सब का (संसुप्य) सम्यक् विलोप कर के य तुम सब को लूट करके, (पनः ) फिर (५ वुम्हारे रचयिता के भ्रति . (ष्मसि) हम प्रेषितं करते ह भेज सिक मनोवृक्तियों के कारण कंतंव्याकतंव्य. विवैकं से शून्य हो । इस लिये १९४ भरथवेवेद-प्रष्य को० १९. सु९ १ भरथवा निज राष्टरोधिकारियों के भ्राज्ञारूपी -जाल मेँ बन्धे सेहो कर तुम

English

Crush thou, O Krityā spare not, kill those practisers of magic arts. As Sūrya frees himself from depth of darkness, and casts away the night and rays of morning,

अध्याय 10

श्लोक 2.15

को अ॑स्मै॒ वासः॒ पर्य॑दधा॒त् को अ॒स्यायु॑रकल्पयत्।बलं॒ को अ॑स्मै॒ प्राय॑च्छ॒त् को अ॑स्याकल्पयज्ज॒वम्

ko asmai vāsaḥ paryadadhāt ko asyāyurakalpayat| balaṃ ko asmai prāyacchat ko asyākalpayajjavam

हिन्दी अर्थ

द्वारा घेर लेता है । भ्रप्वा=भ्रप+-वा (गतौ) यावी (गतौ) । कृत्था्ृतों गिन ऽभिनिष्कारिणः मनाग् . . (कृत्ये) है हमारी. हिल सेना (कृत्याकृतः) परकीयं . हिल सेनार्भो के रञ्नयिता की, (वलगिनः) वलवं. भे गति करने वाले विस्फोटकं के स्वामी की, (अभिनिष्कारिणः) हमे नष्ट करने वाले या श्रपमानित करने वाले कृतः) हिख्रसेनाग्रो-के-रचयिताग्रों का (जहि) हनन कर (मा उच्छिषः) उन मेसेकिसीकोशेषनरहनेदे - चन्र सेनाभ्रो को बार-बार हट जने को प्रेरित करने. पर भी जबवे हृस्तगत स्थानों को छोड जाने म सहमत नहीं हुई» तब निज सेनाध्रो को प्रजा का, भौर रचयिताभ्रो का वह हनन करे ॥ से मुक्त हो जारवा है, छट जातां: है भौर (रात्रिम्, च उषसः) रत्री को, . ¦ तथा उषा के (केतून् लाल अष्टो का. (जहाति) परित्याग क॑रता है, तया

English

So I repel each baleful charm which an enchanter hath pre- pared; And, as an elephant shakes off the dust, I cast the plague aside.

अध्याय 10

श्लोक 2.16

केनापो॒ अन्व॑तनुत॒ केनाह॑रकरोद् रु॒चे।उ॒षसं॒ केनान्वै॑न्द्ध॒ केन॑ सायंभ॒वं द॑दे

kenāpo anvatanuta kenāharakarod ruce| uṣasaṃ kenānvainddha kena sāyaṃbhavaṃ dade

हिन्दी अर्थ

(व) जैसे (हस्ती) हाथी. (रजः जहाति) देहलग्न मृत्कणों को (जहाति) का० १०। सू० १ भ्रथवेवेद-भाष्य १६५ दारा रचे गए, (दु.तम्) दुःस्थितिकारक तथा (ईरितम्) दुष्परिणामी (जहामि) परित्याग कर देता हूं ॥ +. केतुन्- मण्डो को । उषा लालिमा लिये होती है । यह ल(लिमा उसके

English

Purusha, Primeval Man or humanity personified Who framed the heels of Pūrusha? Who fashioned the flesh of him? Who formed and fixed

अध्याय 10

श्लोक 2.17

को अ॑स्मि॒न् रेतो॒ न्यऽदधा॒त् तन्तु॒रा ता॑यता॒मिति॑ ।मे॒धां को अ॑स्मि॒न्नध्यौ॑ह॒त् को बा॒णं को नृतो॑ दधौ

ko asmin reto nya'dadhāt tanturā tāyatāmiti | medhāṃ ko asminnadhyauhat ko bāṇaṃ ko nṛto dadhau

हिन्दी अर्थ

कैचीः। केची वस्तं ५५५५ के लिये होती है । भरतः युद्ध.को ““कत्रंम्”" कहा है, मन्व मे सुला देने वाली दींकालीन कालीरातरि द्वारा युद्ध. को, तथां भल्पकालस्थायी . विजय लाभ का रूपित करिया है! तथा जैसे सूयं रात्रि कामी परित्यागं कर, .दिन् के, निर्मल श्रकादा,मे परका्ित हो जाता द, वैसे विजयी राजाः भी भप्त हए युद्ध पर. विजय पा कर. युधं से मुक्त. हो कर, जब भअल्पकालिक युद्ध के लोभ कौ भी परित्याग कर देता है, तोवह् रचना खे हने बाले दुष्परिणामोः तथा दुःस्थितिसेम्पादंकः युद्धो कों इस भकार त्याग देतां है, जैसे कि, हाथी निजेदेहलग्न मृत्कणों कोः फाड़ फकतां है, येःमावनाएं मन्व्रीन्ततनिहित प्रतीत होती है . ।. .::. " :

English

his ankles? Who made the openings and well-moulded fingers? Who gave him foot-soles and a central

अध्याय 10

श्लोक 2.18

केने॒मां भूमि॑मौर्णो॒त् केन॒ पर्य॑भव॒द् दिव॑म्।केना॒भि म॒ह्ना पर्व॑ता॒न् केन॒ कर्मा॑णि॒ पुरु॑षः

kenemāṃ bhūmimaurṇot kena paryabhavad divam| kenābhi mahnā parvatān kena karmāṇi puruṣaḥ

हिन्दी अर्थ

रूपेण चे” (सायण) । भरथात् पृष के भित्न-भिन्न भवयवों.को किंस देव नेः याज्ञिक साप्रदायिक इस सुक्त का विनियोग पुरुषमेषमें करते है, भौर. , लोभी तथा कुकर्मी । इस से ज्ञात होता है किं यज्ञकमोँ के विषयों मे या्ञिय (५) जल के विस्तार, दिन, उषा तथा सायंकाल सम्बन्धी; भ्रमि के हैवजनीः विदः, नक्षत्र तथा क्षत्र का वणेन है ।

English

station? Whence did they make the ankles that are under, and the knee- bones of Pūrusha above them?

अध्याय 10

श्लोक 2.19

केन॑ प॒र्जन्य॒मन्वे॑ति॒ केन॒ सोमं॑ विचक्ष॒णम्।केन॑ य॒ज्ञं च श्र॒द्धां च॒ केना॑स्मि॒न् निहि॑तं॒ मनः॑

kena parjanyamanveti kena somaṃ vicakṣaṇam| kena yajñaṃ ca śraddhāṃ ca kenāsmin nihitaṃ manaḥ

हिन्दी अर्थ

तथा देव कोश का वणेन. है । न = 0. कोद का वर्णेन हा है । 1 भा (१२) .मन्त्र ३२ में तीन श्ररो वाले तथा तीन अन्वनों वाले हृदय कोर केन पाणी आते पूरंषस्य केन॑ मांसं संतं केन॑ गुरफो । : - - केनाङ्गलीः पेशनीः केन खानि केनोँच्छलङ्खो म॑ध्य॒तः कः (केन ) किस ने (पुरुषस्य ) पुरुष की (पार्ष्णी) दो एडियां (भ्रामृते) पष्ट की ह, या जोडी रहै; (केन). किसने (मांसम्, संमृतम्) मांस मढ़ा हैः या संगृहीत किया है; (केन) किस ने (गल्फौ) दो गिट्दे या पैरो भौर टांगो के मध्यवर्ती जोड़ 4101168 जोड़े है । (केन) किस ने (पेशनीः) इन्दियों के गढ़; (केन) किस ने (उच्छलङ्खौ) - उछलने के लिये दो तलुवे;

English

What led them onward to the legs’ construction? Who planned and formed the knees’ articulations?

अध्याय 10

श्लोक 2.20

केन॒ श्रोत्रि॑यमाप्नोति॒ केने॒मं प॑रमे॒ष्ठिन॑म्।केने॒मम॒ग्निं पूरु॑षः॒ केन॑ संवत्स॒रं म॑मे

kena śrotriyamāpnoti kenemaṃ parameṣṭhinam| kenemamagniṃ pūruṣaḥ kena saṃvatsaraṃ mame

हिन्दी अर्थ

चतुष्टय अन्यते, संिवान्ं जातुषं शिधिरं करन् । ‰ शरीर (युज्यते) जोड़ों दारा जड़ा हरा है। (श्रोणी) दो-कव्ां श्रौ; कां० १०१ सुऽ २ भरथवेवेद-माष्य १९९ बाहुं के दे मूल जृडे हुए है" भौर दीं वे जहां दो शरोणियां जुडी हुई है । मे इस का भ्रथं है “सिर सहित धड़" । क “सिर” के साथ बन्धा हृश्ा, .

English

stablished? Who and how many were those Gods who fastened the chest of

अध्याय 10

श्लोक 2.21

ब्रह्म॒ श्रोत्रि॑यमाप्नोति॒ ब्रह्मे॒मं प॑रमे॒ष्ठिन॑म्।ब्रह्मे॒मम॒ग्निं पूरु॑षो॒ ब्रह्म॑ संवत्स॒रं म॑मे

brahma śrotriyamāpnoti brahmemaṃ parameṣṭhinam| brahmemamagniṃ pūruṣo brahma saṃvatsaraṃ mame

हिन्दी अर्थ

लगा हा, धड़ । यथा “कन्धरा” .ह प्रीवा, कं शिरः वारयतीति । इसी भथ है “पृथिवी प्रर गति करने वाला,. चलने वाला शरीर” । कु कुत्सित, तथाःपूथिवी । “ॐ” शाब्दः का प्रथं है धड़ के निचले. भाग मैः लगे. पारदो यवो सहित शरीरं का वर्णेन हुभा है । ८९ कृतिं देवाः तमे त आसन् य उसं ्रीवारिचक्युः पूरुषस्य । प ८ . (कति) कितने रौर (कतमे) कौन से (ते) वे (देवाः-प्रासन्) देव थे

English

Pūrusha and neck together? How many fixed his breasts? Who formed his elbows? How many joined together ribs and

अध्याय 10

श्लोक 2.22

केन॑ दे॒वाँ अनु॑ क्षियति॒ केन॒ दैव॑जनी॒र्विशः॑ ।केने॒दम॒न्यन्नक्ष॑त्रं॒ केन॒ सत्क् क्ष॒त्रमु॑च्यते

kena devā~ anu kṣiyati kena daivajanīrviśaḥ | kenedamanyannakṣatraṃ kena satk kṣatramucyate

हिन्दी अर्थ

के भ्रवयवों को (चिक्युः) चिना था । (कति) कितनों ने (स्तनौ व्यदघुः) दो स्तनो का. विधान यातिर्माण किया, (कः). किस ने (कफोडौ) दो .कति.प्नौर कतमे, - मे बहुवचन है ।-सम्भवतः. मन्म मेँ “देवाः” पद बोषक है ।कः=कौन, तथा कः--जगत् का कर्ता परमेदवर1 करोतीति कः; कः डः. (भणादि. “डः” प्रत्ययः, बाहुलकात् † । चिक्युः, अचि- १. सिर के विना षड़् किसी काम का नहीं । ६." स्वन्- द्वारा, मकान को . चिनने वालों के सदृश, ' परमेदवर को कारीगर

English

shoulders? 154

अध्याय 10

श्लोक 2.23

ब्रह्म॑ दे॒वाँ अनु॑ क्षियति॒ ब्रह्म॒ दैवजनी॒र्विशः॑ ।ब्रह्मे॒दम॒न्यन्नक्ष॑त्रं॒ ब्रह्म॒ सत् क्ष॒त्रमु॑च्यते

brahma devā~ anu kṣiyati brahma daivajanīrviśaḥ | brahmedamanyannakṣatraṃ brahma sat kṣatramucyate

हिन्दी अर्थ

को अस्य बाहू घम॑मरद् वीर् करवादितिं । अंसौ को अस्य तद् देवः कुिन्धे अध्यां दषो ॥५॥ (कः) किस ने (भस्य) इस पुरुषः की (बाहू) बाहुं को (समभरत्) बनाया याःउन के लिये संमारों को एकत्रित किया. (वीर्यम्, करवात्, इति) ताकि वीरता के कम किये जाय । (कः) किस (तत् देवः प्रसिद्ध हैवं ने (श्रस्य) इस पुरुष के (कुसिन्धे धि) शरीर पर (भसौ) दो कन्ध का (भ्नादधौ) प्राघनक्रिया। ="

English

Who put together both his arms and said, Let him show manly strength? Who and what God was he who set the shoulderblades upon the trunk?

अध्याय 10

श्लोक 2.24

केने॒यं भूमि॒र्विहि॑ता॒ केन॒ द्यौरुत्त॑रा हि॒ता।केने॒दमू॒र्ध्वं ति॒र्यक् चा॒न्तरि॑क्षं॒ व्यचो॑ हि॒तम्

keneyaṃ bhūmirvihitā kena dyauruttarā hitā| kenedamūrdhvaṃ tiryak cāntarikṣaṃ vyaco hitam

हिन्दी अर्थ

किया है शतः यह परमेरवर है । गीता के भरनुसार “भो३म्, तत्, सत् क्रः सप्त खानि वि त॑तदं शीषेणि कणौविमौ नासिके. चक्षणी सुखम् । " . (कः) किसने (शीदणि) पिर मे (सप्त) सात (कानि) गढ़ इन्दिां :(विततदं) काटे ह, (कणौ इमौ) ये दो कान, (नासिके) दो = (प पो दवस दर्शा १. इन्द्रियो द्रोरा वयिः मागौं पर चौपाए तथा दोपाए चलते ह जैसे किं रा की० १० । सूऽं भ्रथववेद-माष्य २०१

English

Who pierced the seven openings in the head? Who made these ears, these nostrils, eyes, and mouth,

अध्याय 10

श्लोक 2.25

ब्रह्म॑णा॒ भूमि॒र्विहि॑ता॒ ब्रह्म॒ द्यौरुत्त॑रा हि॒ता।ब्रह्मे॒दमू॒र्ध्वं ति॒र्यक् चा॒न्तरि॑क्षं॒ व्यचो॑ हि॒तम्

brahmaṇā bhūmirvihitā brahma dyauruttarā hitā| brahmedamūrdhvaṃ tiryak cāntarikṣaṃ vyaco hitam

हिन्दी अर्थ

स आ व॑रीवत्रि सुवनेष्वन्तरपो वसानः क अ तञ्चिकेतं ॥७॥ ˆ (हन्वोः) किस ने दो जबाडों रें (पृरूचीम्) लम्बी या बहुगतिका किया है । (सः). वहे (श्रपः. वसनः) प्रकृति की - भदन, श्रोढे हृद्या तत् चिकेत) कौन उसे सम्यक्तया जानता है । . .. हभ वह भुवनो मे विचरता है । “श्रपः” का श्रं “कर्म भमी होता है।

English

Through whose surpassing might in all directions bipeds and quadrupeds have power of motion?

अध्याय 10

श्लोक 2.26

मू॒र्धान॑मस्य सं॒सीव्याथ॑र्वा॒ हृद॑यं च॒ यत्।म॒स्तिष्का॑दू॒र्ध्वः प्रैर॑य॒त् पव॑मा॒नोऽधि॑ शीर्ष॒तः

mūrdhānamasya saṃsīvyātharvā hṛdayaṃ ca yat| mastiṣkādūrdhvaḥ prairayat pavamāno'dhi śīrṣataḥ

हिन्दी अर्थ

भ्रोदृनी श्रोढ़े हुए परमेदवर भुवनो मँ विचरता है । मस्तिष्फपस्य यतमो छलं ककारं पथमो यः कृपाठम् । चित्वा चित्यं हन्वोः पूरंषस्य दिपै रुरोह कतमः स देवः ॥८॥ (यतमः) जिन देवों मे (यः प्रथमः देवः) घो प्रथम देव, (श्रस्य पूरुष- द्युलोक पर भ्रारोहण किये हुए है (सः) वहु (कतमः) कौन है ? यतमः, कतमः-मं “तमप्” प्रत्यय है, जोकि “बहतो मे से एक" का

English

He set within the jaws the tongue that reaches far, and thereon placed Speech the mighty Goddess.

अध्याय 10

श्लोक 2.27

तद् वा अथ॑र्वणः॒ शिरो॑ देवको॒शः समु॑ब्जितः ।तत् प्रा॒णो अ॒भि र॑क्षति॒ शिरो॒ अन्न॒मथो॒ मनः॑

tad vā atharvaṇaḥ śiro devakośaḥ samubjitaḥ | tat prāṇo abhi rakṣati śiro annamatho manaḥ

हिन्दी अर्थ

भ्रादिं म्र (यजुऽ १४।२०) मे १२ देवताभ्रों का कथन हभ्रा है । इन सबं २०२ भथर्वेवेदनमाष्य कां १० । सु०२ सांसारिक सुखो को, (उग्रः पुखषः) शक्तिशाली पुरुष ) (कस्मात्) किस हेतु से. (वहति) प्राप्त करता या होता है । वहंति ढोना, जैसे.किं पशु भार को ढोता है । प्रापणे, प्राप्त करता

English

He wanders to and fro mid living creatures, robed in the waters. Who hath understood it?

अध्याय 10

श्लोक 2.28

ऊ॒र्ध्वो नु सृ॒ष्टा३स्ति॒र्यङ् नु सृ॒ष्टाः३ सर्वा॒ दिशः॒ पुरु॑ष॒ आ ब॑भूवाँ३ ।पुरं॒ यो ब्रह्म॑णो॒ वेद॒ यस्याः॒ पुरु॑ष उ॒च्यते॑

ūrdhvo nu sṛṣṭā3stiryaṅ nu sṛṣṭāḥ3 sarvā diśaḥ puruṣa ā babhūvā~3 | puraṃ yo brahmaṇo veda yasyāḥ puruṣa ucyate

हिन्दी अर्थ

स्मात्” के योग मँ “कः” किमू्-स्वंनाम प्रतीत होता है,. तो भरी वैदिक हवि विषेमः" (यजु° २४।१२) मेँ “कस्मै का भ्रथं प्रजापतये किया जाता है । (यजु० २५।१२, महीधर) भ्रभिप्राय यह है कि पुरुष उग्र होता हृभा भी, निजकर्म फल के कारणः; कमफल दाता प्रमेरवर सें इन्दं भोग रहा है। दोनों जानने चाहिए । इसी भाव को दशानि के लिये मन्त्र (२०-२५) मे . ,. प्ररनीं के उत्तर में ब्रह्य का कथन हृ्राःहै। . आतिरवंतिनिक्रैतिः ङतो चु पुरुषेऽमंति

English

Who was he, first, of all the Gods who fashioned his skull and brain and occiput and forehead,

अध्याय 10

श्लोक 2.29

यो वै तां ब्रह्म॑णो॒ वेदा॒मृते॒नावृ॑तां॒ पुर॑म्।तस्मै॒ ब्रह्म॑ च ब्रा॒ह्माश्च॒ चक्षुः॑ प्रा॒णं प्र॒जां द॑दुः

yo vai tāṃ brahmaṇo vedāmṛtenāvṛtāṃ puram| tasmai brahma ca brāhmāśca cakṣuḥ prāṇaṃ prajāṃ daduḥ

हिन्दी अर्थ

मुता (पुरषे) पुरुष मे (कुतः नु). कहां से होते है । (राद्धिः) सिद्धि, जाना, कमी इस का भी रभाव हो जाना, (मतिः) ज्ञान, मनन, (उदि- तयः) उक्नतियां (कुतः) कहां से तथा किस कारण सेहोतीदँ। ;; दरीर मेँ व्याप्त है, तथा. परिमाण मेँ बहत है, जौ (सिन्धुसृत्याय) हृदयः शूपी समद्र से तथा उसमे सरण करने के लिये (जाताः) उत्पन्न हुए है । (ऊर्ध्वाः) जो ऊध्व की भोर गति करते, (भ्रवचिीः) नीचे कीं भोर. गति करते, (तिरदचीः) पावो की प्रोर गति करतेर्हु। भ्रनीमिक भवस्था मे रक्त कम लाल होता दहै, कम भाभा वालाःहोता दहै, भ्ररुणाः = भरारोचनाः निरुक्त ५।४।२१) । लोहिनीः -भ्रधिक -लाल. जिस में

English

The pile that Pūrusha’s two jaws supported? Who was that God who mounted up to heaven?

अध्याय 10

श्लोक 2.30

न वै तं चक्षु॑र्जहाति॒ न प्रा॒णो ज॒रसः॑ पु॒रा।पुरं॒ यो ब्रह्म॑णो॒ वेद॒ यस्याः॒ पुरु॑ष उ॒च्यते॑

na vai taṃ cakṣurjahāti na prāṇo jarasaḥ purā| puraṃ yo brahmaṇo veda yasyāḥ puruṣa ucyate

हिन्दी अर्थ

९५४ । . अथववेद -माष्य काऽ १०.।-्१ २ च) श्रौरनाम कौ। (कः) किसने (भस्मन्) इस में ५॥ ४ प को यागानको, (कः) किसने (केतुम् को (चरि भागि) भ्रच्छे ५ बुरे सरी से इ भु वा स्म समानमस्मिर् को देवोऽधि रिशा पुर्षे ॥१३॥. ८ ,

English

Whence is there found in Pūrusha want, evil, suffering, dis- tress? Whence come success, prosperity opulence, thought, and utte- rance?

अध्याय 10

श्लोक 2.31

अ॒ष्टाच॑क्रा॒ नव॑द्वारा दे॒वानां॒ पूर॑यो॒ध्या।तस्यां॑ हिर॒ण्ययः॒ कोशः॑ स्व॒र्गो ज्योति॒षावृ॑तः

aṣṭācakrā navadvārā devānāṃ pūrayodhyā| tasyāṃ hiraṇyayaḥ kośaḥ svargo jyotiṣāvṛtaḥ

हिन्दी अर्थ

. “ किसने इस पुरषः मे प्राण, अपान, व्यान का तान्त ताना है । किस देवं नें इस मे समान को भराभित किया है । 7 मन भे प्राणो. का वणं हभ है, उदानं का वर्णन नही दुभा . (कः एकः देवः) क्रिस एक देव ने (भस्मन् पुरुषे) इस पुरुष मे ( यलम् परिजञान है । वही एक देव यज्ञ भ्रादि को पुरुष मे, उस के. कर्मानुसार, स्थापित करता है । यज्ञ = देवपूजा, संगशतिकरण तथा ःदान की . भाव्रना ।

English

Who stored in him floods turned in all directions, moving diverse and formed to flow in rivers,

अध्याय 10

श्लोक 2.32

तस्मि॑न् हिर॒ण्यये॒ कोशे॒ त्र्यऽरे॒ त्रिप्र॑तिष्ठिते ।तस्मि॒न् यद् य॒क्षमा॑त्म॒न्वत् तद् वै ब्र॑ह्म॒विदो॑ विदुः

tasmin hiraṇyaye kośe trya're tripratiṣṭhite | tasmin yad yakṣamātmanvat tad vai brahmavido viduḥ

हिन्दी अर्थ

को भ॑य वासुः पथदषात् को श्स्यायुरकदपयत् । (कः) किसने (भस्म) इस जीवात्मा केः लिये; (वासः) श्वरीरखूपी वस्त्र (परि भदवा्) दप के-चारो श्रोर स्थापित. किया है, (कः) किसने (शरस्य). की (भरायुः) रायु (भंकल्पयत्) र्वी. है। "(कः) किंस ने कः=परहनार्थक तथा उत्तराथेक् है । मनुष्यं के शरीर :कां वेण भी निर्धारित है । मनुष्य प्रव के, मोटर के, यां रेलगाड़ी. के बेगं वाला नहीं

English

Hasty, red, copper-hued, and purple, running all ways in Purusha, upward and downward?

अध्याय 10

श्लोक 2.33

प्र॒भ्राज॑मानां॒ हरि॑णीं॒ यश॑सा सं॒परी॑वृताम्।पुरं॑ हिर॒ण्ययीं॒ ब्रह्मा वि॑वे॒शाप॑राजिताम्

prabhrājamānāṃ hariṇīṃ yaśasā saṃparīvṛtām| puraṃ hiraṇyayīṃ brahmā viveśāparājitām

हिन्दी अर्थ

. उषं :केनान्हैन्ड केन्. साय॑मव द॑दे .॥१६॥ ... - (केन) किस कारण (श्रापः) सामुद्रिकं जलो को भनु ्रतनुत्त) लगा- तार फौलायाः है, (केन ) किसं कारण र्ञे) दीप्ति के लिथे, (ग्रहः) दिनं को (श्रकरोत्) रचा है। (केन) किस कारण. (उषसम्) उषा को. (भनु दन्द) लगातार प्रदीप्त किमा है, (केन) किस. कारण (सायंवम्) . सायं काल का होना (ददे) प्रदनि कियादहै।.. =... . , उहापोह स्वयं करना; चाहिए । सम्भवतः सामुद्रिक जलो को फलाया है सामुद्रिकः जीवों के. जीवनाशं तथा वर्षा के लिये । उषा तथा. सायंकाल ह दोनो कालीं मे घ्यानःया सध्या के लिये ।. केन केन हेतुना, कारणेन । श्रेथवा "दीप्ति के. लिये.दिन को रचा है". ताकि प्राणी काम कर सकं , को अस्मिन रेतो न्यदधात् तन्तुर तौयताभिति ।: " . . मेषां को अंस्मि्ध्यौंहत् को बाणं को सृतौ दधो ॥१७॥ - किस ने (नृतः) नाचना" (दर्षौ) वारण - कराया है । कः प्रदनार्थक तथा

English

Who gave him visible form and shape? Who gave him magni- tude and name? Who gave him motion, consciousness? Who furnished Pūrusha with feet?

स्रोत: bhavykhatri/DharmicData · प्राप्त 3/6/2026

शास्त्रीय प्रामाणिकता एवं पारदर्शकताSources & Interpretation

स्रोत, संस्करण एवं व्याख्या वर्गीकरण

धर्म ग्रंथ पर मूल शास्त्र, पारंपरिक भाष्य और आधुनिक व्याख्या को पूर्णतः पृथक रखा जाता है ताकि पाठक को किसी भी व्याख्या के शास्त्र होने का भ्रम न हो।

सामग्री वर्गीकरण संकेत (Epistemic Content Labels)

6 स्तरिय प्रमाण व्यवस्था
मूल पाठOriginal text

अपौरुषेय / प्रामाणिक शास्त्र (Primary Canonical Scripture)

मूल संस्कृत, प्राकृत अथवा अवधी श्लोक/मंत्र। यह सर्वोच्च प्रमाण (प्रस्थान) है। इस पाठ में किसी भी आधुनिक व्याख्याकार का हस्तक्षेप नहीं है।

शाब्दिक अनुवादLiteral translation

पदार्थ व अन्वय (Direct Grammatical & Word-for-Word Meaning)

व्याकरणसम्मत प्रत्यक्ष शब्दार्थ (अन्वय)। बिना किसी दार्शनिक संप्रदाय के पूर्वाग्रह के, संस्कृत शब्दों का सटीक भाषांतर।

पारंपरिक भाष्यTraditional commentary

आचार्य परंपरा व टीका (Classical Lineage Commentary)

प्राचीन आचार्य परंपरा (यथा शंकराचार्य, रामानुजाचार्य, मध्वाचार्य, श्रीधर स्वामी) द्वारा विरचित शास्त्रीय भाष्य व टीकाएं।

सरल व्याख्याSimple explanation

भावार्थ व सुबोध प्रबोधन (Accessible Pedagogical Exposition)

आधुनिक जिज्ञासुओं के लिए सरल भाषा में भावार्थ। यह मूल मंत्र नहीं, बल्कि पाठ को सुगम बनाने हेतु संपादकीय व्याख्या है।

आधुनिक चिंतनModern reflection

समसामयिक विमर्श व अनुप्रयोग (Contemporary Application & Analysis)

दार्शनिक, मनोवैज्ञानिक व वैज्ञानिक समरूपताओं पर आधुनिक चिंतन। यह मूल शास्त्र का अंग नहीं है और इसे शास्त्रोक्त सिद्धांत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

शोध टिप्पणीResearch note

पांडुलिपि एवं ऐतिहासिक शोध (Critical Apparatus & Manuscript Research)

पांडुलिपि विविधताएं, पाठ-भेद (variant readings), छंद रचना, और ऐतिहासिक व तुलनात्मक भाषावैज्ञानिक शोध। यह शास्त्र का मूल संदेश बदलने हेतु नहीं, बल्कि पाठ की प्रामाणिकता परखने के लिए है।