Atharva Veda
10
अध्याय 10 / 20

Kanda 10

काण्ड 10

350 श्लोकभाग 2/7 · श्लोक 3.1–4.26

पूर्ण अध्याय पाठ51 श्लोक

अध्याय 10

श्लोक 3.1

सपत्नत्क्षयणो वरणमणिः।१-२५ अथर्वा।वरणमणिः, वनस्पतिः चन्द्रमाः।अनुष्टुप्, २-३, ६ भुरिक् त्रिष्टुप्, ८, १३-१४ पथ्यापङ्क्तिः, ११, १६ भुरिक्, १५, १७-२५ षट्-पदा जगती।अ॒यं मे॑ वर॒णो म॒णिः स॑पत्न॒क्षय॑णो॒ वृषा॑ ।तेना र॑भस्व॒ त्वं शत्रू॒न् प्र मृ॑णीहि दुरस्य॒तः

sapatnatkṣayaṇo varaṇamaṇiḥ| 1-25 atharvā| varaṇamaṇiḥ, vanaspatiḥ candramāḥ| anuṣṭup, 2-3, 6 bhurik triṣṭup, 8, 13-14 pathyāpaṅktiḥ, 11, 16 bhurik, 15, 17-25 ṣaṭ-padā jagatī| ayaṃ me varaṇo maṇiḥ sapatnakṣayaṇo vṛṣā | tenā rabhasva tvaṃ śatrūn pra mṛṇīhi durasyataḥ

हिन्दी अर्थ

भरतिथियों भादि की.. पालना करने वांला सदगृहस्थीः इन्दर ब्रह्मरूप जान कर इन की. सेवा तथा पालना करता है (्रथवं ० .६।६८१)। १), भ्रतः इसे भरतः वह् सन्वा' क्षत्र है । न त का पालन करे! दद्र सेवाः कमम शीघ्रकारी हो, निरालस हों । कषत्रिय क्षतोंसे २१५ भ्रयरववेद-भाष्य १, बह दु्षां अुकषियति बरह्म. हैवजनीर्विशः ! . (केन) किस ने (भूमिः) भूमि को (विहितां) श्रलगं कैर नीचे कीभ्रोर रखा है, (केन) किस ने (द्यौः) चलोक को (उत्तरा हित्रा) उपर की भोर

English

Through whom seeks he Parjanya out, and Soma of the piercing sight? Through whom belief and sacrifice? Through whom was spirit laid in him?

अध्याय 10

श्लोक 3.2

प्रैणा॑न्छृणीहि॒ प्र मृ॒णा र॑भस्व म॒णिस्ते॑ अस्तु पुरए॒ता पु॒रस्ता॑त्।अवा॑रयन्त वर॒णेन॑ दे॒वा अ॑भ्याचा॒रमसु॑राणां॒ श्वःश्वः॑

praiṇānchṛṇīhi pra mṛṇā rabhasva maṇiste astu puraetā purastāt| avārayanta varaṇena devā abhyācāramasurāṇāṃ śvaḥśvaḥ

हिन्दी अर्थ

शचुसैनिक, तथा प्रबल रोग या रोगोत्पादकं कारण । इवः इवः = दस दारा रोग निवारण मेँ परीक्षित है । रवः सवः ह्यः ह्यः गतेषु दिवसेषु । व= .. श्रथवा “श्रवारयन्त", भूतकाल मेँ निवारित करते. रहे ह, था “रवः दवः” भविष्यत् काल मेँ भी निवारित करते रर्हेगे .। ऋ २, (विश्वभेषजः) सब रोगों के लिये श्रौषधरूप है, तथा ५५४ दातुभों के वाली है, तथा हजारो योद्धा्रों का क्षय करने वाला है, (हरितः) रोगहारी है, तथा शत्रसंहा री है, (हिरण्ययः) हितकर भौर रमणीय है, तथा राष्ट के लिये हितकर श्रतः रमणीय है। (सः) वह (ते) है रोगिन् ! तेरे (रत्रन्) दचररूप रोगों को (अधरान् पादयाति) नीचे गिरा देगा, तथा राष्टरके रात्रो को नीचे गिरा देगा, (पूरवः) है रोगिन् ! तु प्रथम ही (तान्) उन

English

That is indeed Atharvan’s head, the well-closed casket of the Gods.

अध्याय 10

श्लोक 3.3

अ॒यं म॒णिर्व॑र॒णो वि॒श्वभे॑षजः सहस्रा॒क्षो हरि॑तो हिर॒ण्ययः॑ ।स ते॒ शत्रू॒नध॑रान् पादयाति॒ पूर्व॒स्तान् द॑भ्नुहि॒ ये त्वा॑ द्वि॒षन्ति॑

ayaṃ maṇirvaraṇo viśvabheṣajaḥ sahasrākṣo harito hiraṇyayaḥ | sa te śatrūnadharān pādayāti pūrvastān dabhnuhi ye tvā dviṣanti

हिन्दी अर्थ

कां० १० । सु०३ भरथववेद-माष्य २२३ व्यथाभों मे डाले, एेसा वैदिकविधान मन्त्र द्वारा चतित होता है! तथा , (भ्रम्) नै राजा (भरिष्टः) हिसा से बच गया हुं, (भरिष्टगूः) मेरी .राष्टभरमि हिसारहित हो गई है, (सर्वेपूखषः) मँ सब पुरषो समेत (परिपातु) सब प्रकार से सुरक्षित करे । होने से मेरे राष्ट्र की गोसम्पत् वच गई है । ञ्य म वरण उरंसि राजां देवो वनस्पतिः । ऋ

English

Bright with excessive brilliancy, compassed with glory round about. Purusha, Primeval Man or humanity personified

अध्याय 10

श्लोक 3.4

अ॒यं ते॑ कृ॒त्यां वित॑तां॒ पौरु॑षेयाद॒यं भ॒यात्।अ॒यं त्वा॒ सर्व॑स्मात् पा॒पाद् व॑र॒णो वा॑रयिष्यते

ayaṃ te kṛtyāṃ vitatāṃ pauruṣeyādayaṃ bhayāt| ayaṃ tvā sarvasmāt pāpād varaṇo vārayiṣyate

हिन्दी अर्थ

हृदय भें बसं गया है , ( वनस्पतिः देवः). वर्नो की रक्षा करने वाला यह् को (वि बाधताम्) विशेषरूप मेँ विलोडित. करे (इव) जसे कि इन्द्रः .' £. भ्रपुराधियों की भनुपस्थिति मे मी यह दण्ड है । करता हरभरा ओ राजा (श्रायुष्मान् ) दीषं रायु बाला, (शतशारदः) सौ वषो . भ्नोजः च) मेरे पशुश्रो भरौर भ्रोज का (दवत्) धारण-पोषण करता है

English

Here is my charm the Varana, slayer of rivals, strong in act. With this grasp thou thine enemies, crush those who fain would injure thee.

अध्याय 10

श्लोक 3.5

व॒र॒णो वा॑रयाता अ॒यं दे॒वो वन॒स्पतिः॑ ।यक्ष्मो॒ यो अ॒स्मिन्नावि॑ष्ट॒स्तमु॑ दे॒वा अ॑वीवरन्

varaṇo vārayātā ayaṃ devo vanaspatiḥ | yakṣmo yo asminnāviṣṭastamu devā avīvaran

हिन्दी अर्थ

वन के बड़े-बड़े (वक्षान्) वृक्षो .को (भनक्ति ).मगत करती है, तोड़ देती राष्ट के शत्रु जब बहुसस्या भें हो जांय, तन उनं के पूणं संहार के : बलवा न करदे, इसलिये सर्वोच्वाधिकारी .सुपरीक्षित वरण को राजा. भौर . राजधानी की सुरक्षा के लिये नियुक्त करता है, भ्रौर राजा को श्रादवासन देता, है कि चरण तुम्हारी रक्षा सब भोरसे करेगा। कां १० । सुऽ: . -भयवेवेद-माष्य २२५

English

Break them in pieces; grasp them and destroy them. This Amu- let shall go before and lead thee.

अध्याय 10

श्लोक 3.6

स्वप्नं॑ सु॒प्त्वा यदि॒ पश्या॑सि पा॒पं मृ॒गः सृ॒तिं यति॒ धावा॒दजु॑ष्टाम्।प॒रिक्ष॒वाच्छ॒कुनेः॑ पापवा॒दाद॒यं म॒णिर्व॑र॒णो वा॑रयिष्यते

svapnaṃ suptvā yadi paśyāsi pāpaṃ mṛgaḥ sṛtiṃ yati dhāvādajuṣṭām| parikṣavācchakuneḥ pāpavādādayaṃ maṇirvaraṇo vārayiṣyate

हिन्दी अर्थ

(भ्रमि रक्षतु) सबःश्नोर से सुरक्षित करे । उन्हें नितरां भपित कर । है राजन् ! (त्वां) तु . (वरणः) शत्रनिवारक पुरा राज दवाराःनिदश पाने से पिले ही (भच्छिन्दि) छिन्न-भित्न करदे (पया भरागरुषः). चाहे वे भ्रल्प -भ्रायुकेही हो" .-(ये) जोकि (एनम्) इस है, या इसके साथ दम्भ भ्र्थात् छल-कपट करना चाहते ह, (ये च) भौर जों चाहते हैँ या उसके साथ दम्भ भ्र्थात् छल-कपट करना चाहते है ।

English

With Varana the Gods, from morn to morning, have warded off the Asuras’ enchantment. This charm, this Varana healeth all diseases, bright with a thou- sand eyes and golden glister.

अध्याय 10

श्लोक 3.7

अरा॑त्यास्त्वा॒ निरृ॑त्या अभिचा॒रादथो॑ भ॒यात्।मृ॒त्योरोजी॑यसो व॒धाद् व॑र॒णो वा॑रयिष्यते

arātyāstvā nirṛtyā abhicārādatho bhayāt| mṛtyorojīyaso vadhād varaṇo vārayiṣyate

हिन्दी अर्थ

पुरायुषः “छोटी भ्रायु का दात्रुदहै, इसका त्चारनः करते हए, दिष्सु के वधे करने का निदशहृश्रा है । ५... एवा घं रणो मणिः कीति भूतिं नि य॑च्छतु (यथा) जसे (सूयः अतिभाति) सूर्यं खूब ॒ चमकताः तथां दुर-दुर. तक . चमकत है, (यथा) जैसे. (भ्रस्मिन्) इस - सूरं मे (तेजः) तेज (भादहितम्) (भूतिम्) वैभव को (नियच्छतु) नियत करे, स्थापित करे, (तेजसा) तेज. एवा भे वरणो मणिः -- कीतिं भूति नि य॑च्छतु

English

This charm shall conquer and cast down thy foemen. Be thou the first to slay the men who hate thee.

अध्याय 10

श्लोक 3.8

यन्मे॑ मा॒ता यन्मे॑ पि॒ता भ्रात॑रो॒ यच्च॑ मे स्वा यदेन॑श्चकृ॒मा व॒यम्।ततो॑ नो वारयिष्यते॒ऽयं दे॒वो वन॒स्पतिः॑

yanme mātā yanme pitā bhrātaro yacca me svā yadenaścakṛmā vayam| tato no vārayiṣyate'yaṃ devo vanaspatiḥ

हिन्दी अर्थ

कां१ १०1 सऽ ६ भरथरववेद-माष्य २२७ नियत करे, स्थापित करे, (तेजसा) तेज से (मा);. मुभे ( समुक्षतु) सम्यक् . है किं प्रजाजनों परर उस की संदा वष्टि रहे, , प्रजाजनों के -सुख-दुःख तथा समुन्नति उस "कीं दृष्टि मेँ सदा रहै । 8 यथा. यर; पृथिव्यां. यथाऽस्मि जातवेदसि । एवा परं वरणो मणिः कीति भूति नि य॑च्छतु

English

This will stay witchcraft wrought for thee, will guard thee from the fear of man: From all distress and misery this Varana will shield thee well.

अध्याय 10

श्लोक 3.9

व॒र॒णेन॒ प्रव्य॑थिता॒ भ्रातृ॑व्या मे॒ सब॑न्धवः ।अ॒सूर्तं॒ रजो॒ अप्य॑गु॒स्ते य॑न्त्वध॒मं तमः॑

varaṇena pravyathitā bhrātṛvyā me sabandhavaḥ | asūrtaṃ rajo apyaguste yantvadhamaṃ tamaḥ

हिन्दी अर्थ

(यथा). जिसं प्रकार (पृथिव्यां यद्यः)-पुथिवी मे यद है, (यथा) जिख अकार (श्रस्मिन् जातवेदसि) इस यज्ञिय-जातवेदा-भगिन मँ यश है । (एवा) (मे) मुके (कीतिम् भूतिम्) कीति भ्रौर वभव को (नियच्छतु) नियत करे, स्थापित करे, (तेजा) तेज से (मा) मुभ (समृक्षतु) सम्यक सी (यदसा) यश से (मा) (समनक्तु) -सम्यक्-कौतिमान् करे। . राजा “पृथिवीं के श्रौर जातवेदाः के यश के सवुदय, ग्र प्राप्त करना से होती है, परन्तु शसं निमित्त जातवेदाः श्रग्नि कां भी सहयोग चाहिए

English

Guard against ill of varied kind is Varana this heavenly Plant. The Gods have stayed and driven off Consumption which had seized this man.

अध्याय 10

श्लोक 3.10

अरि॑ष्टोऽहमरि॑ष्टगु॒रायु॑ष्मा॒न्त्सर्व॑पूरुषः ।तं मा॒यं व॑र॒णो म॒णिः परि॑ पातु दि॒शोदि॑शः

ariṣṭo'hamariṣṭagurāyuṣmāntsarvapūruṣaḥ | taṃ māyaṃ varaṇo maṇiḥ pari pātu diśodiśaḥ

हिन्दी अर्थ

विहिताअ्थँ (न्तर २४) के .भ्रनुसार । ब्रह्म = यह. नियत नपु सक लिङ्ग मे विशरेषणरूप पद है। भूमि कीं अपे्ञा चुलोक- तया भन्तरिखा बरहा गीता १४३) मेँ ब्रह्म वारा महृती-अकृति का ग्रहण किया है 1. तथा निषण्ट म र्म उदक ( १।१५) ; भन्ने (२।७) ; घन (२।१०).4 इस मस्िष्कादूष्वैः मेयत् पवमानोषिं सीषेतेः ॥२६॥ , . - जो (हृद्यम्) हदय है उसे (संसीष्य) परस्पर भ सीकर, जोड़. कर, (पवमानः) पवित्र करने वाले, (ऊर्वः) सांसारिक लेपो से उपर उठे हए, (भथर्वा) भरचल,. कूटस्थः परमिदवर' ने (शीरष॑तः भि) सिर में स्थित तव् षा अ्थवेणः धिरो देकोक्ंः ससुम्नितं; । .: - ;.. ': -

English

What leads him to the learned priest? What leads him to this Lord Supreme?

अध्याय 10

श्लोक 3.11

अ॒यं मे॑ वर॒ण उर॑सि॒ राजा॑ दे॒वो वन॒स्पतिः॑ ।स मे॒ शत्रू॒न् वि बा॑धता॒मिन्द्रो॒ दस्यू॑नि॒वासु॑रान्

ayaṃ me varaṇa urasi rājā devo vanaspatiḥ | sa me śatrūn vi bādhatāmindro dasyūnivāsurān

हिन्दी अर्थ

२, मन्त्र मे “्थर्वा" पद परमवंराथेक तीत -होता है । अथववेद में जितना निस्त भ्र सट जमन पम म-उतना नय की बद भ हं भिवता । भल, कूटस्थ परमेदवरः कां है, (देवको) ! इन्द्रियो का -खभनि है, (समुन्नितः) सिर की खोप. मे तहां है । (तत्) उस (शिर) भीतर यह देवको रहता है, इसलिये इसे समुन्नितः कहा है, यथा “कोशे रत्नो को कोरःशर्थात् पेटी भँ र कर, पेटी-को कमरे रूपौ कोद. रला

English

How doth he gain this Agni? By whom hath he measured out the year? He, Brahma gains the learned priest, he Brahma, gains this Lord

अध्याय 10

श्लोक 3.12

इ॒मं बि॑भर्मि वर॒णमायु॑ष्मान्छ॒तशा॑रदः ।स मे॑ रा॒ष्ट्रं च॑ क्ष॒त्रं च॑ प॒शूनोज॑श्च मे दधत्

imaṃ bibharmi varaṇamāyuṣmānchataśāradaḥ | sa me rāṣṭraṃ ca kṣatraṃ ca paśūnojaśca me dadhat

हिन्दी अर्थ

परं यो ब्रह्म॑णो वैद यस्थाः पुरुष उच्यत ॥२८॥ ; २. ब्रह्माण्ड को भी रह्म की पुरी सममा जो संकतांह। इ पुरी मेः निवासि करने से भी ब्रह्म॑"“पुरेष कहलाता है । । १. कूां९.१९।.सु०२. भ्रथवेवेद-माष्य २१३ है: :शरीर, ब्रह्म.की पुरी है, .इस पुरी मे शयनं या वास करने से..ब्रहयको यो वैः तों ह्मणो वेदुामतेनाैतां पर॑ष् ।

English

Supreme. As Brahma, Man wins Agni here Brahma hath measured out the year.

अध्याय 10

श्लोक 3.13

यथा॒ वातो॒ वन॒स्पती॑न् वृ॒क्षान् भ॒नक्त्योज॑सा ।ए॒वा स॒पत्ना॑न् मे भङ्ग्धि॒ पूर्वा॑न् जा॒तां उ॒ताप॑रान् वर॒णस्त्वा॒भि र॑क्षतु

yathā vāto vanaspatīn vṛkṣān bhanaktyojasā | evā sapatnān me bhaṅgdhi pūrvān jātāṃ utāparān varaṇastvābhi rakṣatu

हिन्दी अर्थ

पापकम में प्रवुत्त नहीं होता भ्रौर स्वयं भी भमूत होने की भोर पग बढ़ता नया भ्राघ्यात्मिक जीवन प्रदान करतीदहैँ . (वै) निदचय से (तम्) ...उसे, (जरसः परा) जरावंस्था सें पूर्व॑, (नं (1. ज निज शरीर को. ब्रह्मकी-पुरी । जानता. है . भर्थात् यह-जानता हि किस पुरी का राजा ब्रहम है बह निज राजा द्वारा प्रदशित मागे पर चलने लगता है, जिससे कि उस की शारीरिक भ्रादि शक्तियो का भरपर्व्यया नियत काल से पुवं, नहीं होने प्राता । पुरुषःन=पुरिशेते वसति वा इति, जोकि शरीरं परी भै.शयन करता या वसता है . . , शष्टाचक्रा नवद्रास देवानां पूरयोध्या

English

Through whom doth he abide with Gods? Through whom with the Celestial Tribes? Why is this other called a star? Why is this called the Real

अध्याय 10

श्लोक 3.14

यथा॒ वात॑श्चा॒ग्निश्च॑ वृ॒क्षान् प्सा॒तो वन॒स्पती॑न्।ए॒वा स॒पत्ना॑न् मे प्साहि॒ पूर्वान् जा॒तां उ॒ताप॑रान् वर॒णस्त्वा॒भि र॑क्षतु

yathā vātaścāgniśca vṛkṣān psāto vanaspatīn| evā sapatnān me psāhi pūrvān jātāṃ utāparān varaṇastvābhi rakṣatu

हिन्दी अर्थ

(अष्टा्चक्रा) भराठ चको वाली, (नवद्वारा) नौ दारो वाली, (देवा- ुरी भरं (हिरं्यथः) सुव सदृशच.चमेकीला (कोशः) कोडा द, (स्वगैः) जिसे लिनी?' है ।. इन का. विस्तृत विवरण “पातञ्जल थोग प्रदीप" . (प्रायं :: '.नवद्रारा=दो भांखों के छिद्र, दो नासिकारन्ध्र,दो कणेखदर,-१ लिग मागो पर चलने से रोग, तथा काम क्रोव . श्रादि.शवुभ्रौं द्वारा शरीर पुरी पराजित नहीं होत्री, प्रौर न रोगे भादि इस पुरी क . साय युद्ध करने की , शकत ही रखते है । हंदय कों हिरण्ययः . कोशं कहा द जोकि ब्राह्मीज्योति

English

Power? Brahma inhabits with the Gods, Brahma among the Heavenly

अध्याय 10

श्लोक 3.15

यथा॒ वाते॑न॒ प्रक्षी॑णा वृ॒क्षाः शेरे॒ न्यऽर्पिताः ।ए॒वा स॒पत्नां॒स्त्वं मम॒ प्र क्षि॑णीहि॒ न्यऽर्पय॒ पूर्वा॑न्जा॒तां उ॒ताप॑रान् वर॒णस्त्वा॒भि र॑क्षतु

yathā vātena prakṣīṇā vṛkṣāḥ śere nya'rpitāḥ | evā sapatnāṃstvaṃ mama pra kṣiṇīhi nya'rpaya pūrvānjātāṃ utāparān varaṇastvābhi rakṣatu

हिन्दी अर्थ

विपेषको श्रम्तिहोतीहै , ,; ... री "इ "हिर्यया ष्का यौ हनं से मनोहारिणी 1 - स को ०.१० .।.्१२ भयर्वेद-माप्य २१४ विदः) ज्ह्वेत्ता (विदः) जानते है र (क के घटकावयव होतेह जो कि चक्रकी नाभि तथा परिधिके बीच लगे

English

Tribes. Brahma this other star is called. Brahma is called the Real

अध्याय 10

श्लोक 3.16

तांस्त्वं प्र च्छि॑न्द्धि वरण पु॒रा दि॒ष्टात् पु॒रायु॑षः ।य ए॑नं प॒शुषु॒ दिप्स॑न्ति॒ ये चा॑स्य राष्ट्रदि॒प्सवः॑

tāṃstvaṃ pra cchinddhi varaṇa purā diṣṭāt purāyuṣaḥ | ya enaṃ paśuṣu dipsanti ye cāsya rāṣṭradipsavaḥ

हिन्दी अर्थ

तथा तमोगुण, तीन भरो द्वारां भरभिग्रेत अतीत होते है । हदय भावनां का स्थानं माना जाता है (मन्व २६) । भावनाएं मी तीन प्रकार की होती है, सात्विक, राजसिक तथा तामसिक । सुप्रतिष्ठिते हदय, शयरमें सुदृढरूप में स्थित है। इस के तीन प्रकार के बन्धन है । एक प्रकार का बन्धन हृदय को फेफड़ं के साथ जोडता हैः फफड़ों मे गन्दा-रक्त शुद्ध , होता है । दरसरे प्रकार के बन्धन मेँ वे -नाद्वियां है जो कि शरीर के गन्दे- रक्त को हृदय मं लाती है । तथा तीसरे प्रकार के बन्धन मे वे नाडियां ह काया काला होता है, भ्रौर शुद्ध-रक्त लाल वणं का होता है। इस (चुरादिः) ब्रह्म पूजनीय है, तभी इन्दे “सुयजा सखायौ" कहा है (भ्रथवं० के दो प्रकोष्ठकों मे । हृदय के चार प्रकोष्ठक होत ह ।

English

155 Power.

अध्याय 10

श्लोक 3.17

यथा॒ सूर्यो॑ अति॒भाति॒ यथा॑स्मि॒न् तेज॒ आहि॑तम्।ए॒वा मे॑ वर॒णो म॒णिः की॒र्तिं भूतिं॒ नि य॑च्छतु॒ तेज॑सा मा॒ समु॑क्षतु॒ यश॑सा॒ सम॑नक्तु मा

yathā sūryo atibhāti yathāsmin teja āhitam| evā me varaṇo maṇiḥ kīrtiṃ bhūtiṃ ni yacchatu tejasā mā samukṣatu yaśasā samanaktu mā

हिन्दी अर्थ

(१) सूक्त भें “वरण” का व्णंन हृभरा है । इस के दो अथं सक्त में सङ्गत होते है। (१) शत्रुनिवारक सेनाध्यक्ष, (२) रोगनिवारक वरण- ष्यते" (४,६,८) द्वारा “वरण” का भ्रं “निवारक” ही प्रतीत होता है । इभा है (१,२,३१६). । “जातौ जातौ यदुत्कृष्टं तद् . रत्नमभिधीयते" है । मणि श्रौरं रल समानार्थंक है । “वरण” भौषध भी वनस्पतियो में शष्ठ है, भतः मणि है, रत्न है । „ (३) मन्व १-७ मँ “वरण द्वारा सेनाध्यक्ष .तथा वरण-भौषध का (५) प्रजापति श्रौर परमेष्टी में स्वरूप भेद (२४) । (६) वरण-राजा का उरस् छाती में निवेश (११) ।

English

By whom was this our earth disposed? By whom was heaven placed over it? By whom was this expanse of air raised up on high and stre- tched across?

अध्याय 10

श्लोक 3.18

यथा॒ यश॑श्च॒न्द्रम॑स्यादि॒त्ये च॑ नृ॒चक्ष॑सि ।ए॒वा मे॑ वर॒णो म॒णिः की॒र्तिं भूतिं॒ नि य॑च्छतु तेज॑सा मा॒ समु॑क्षतु॒ यश॑सा॒ सम॑नक्तु मा

yathā yaśaścandramasyāditye ca nṛcakṣasi | evā me varaṇo maṇiḥ kīrtiṃ bhūtiṃ ni yacchatu tejasā mā samukṣatu yaśasā samanaktu mā

हिन्दी अर्थ

रोगरूपी शवरुश्ो" के निवारण का वर्णेन हुभा है । (मे) मेरा (भ्यम्, वरणः) . यह शतरुनिवारक सेनाप्यक्ष (मणिः) भारभस्व ) शतरुभों - को पकड़ भौर (दुरस्यतः) दुःखदायी भ्रस्तो के. फौवने वालों को (प्र मृणीहि) पू्णंतया मार। 1 राजा, युद्ध की उपस्थिति मेँ सेना के सर्वोच्वाधिकारी .को भावेश देता है ) तथा वैद्य रुणावस्था म रोभी के प्रति कटता-है कि यह् मुभ कारणोंकातु हनन कर, जो रोग या रोग-कारण तुर पर प्रहार करते है अवरयन्त वरणेनं देवा अभ्याचारमसुराणां श्वः शव॑ः ।॥२॥ .

English

By Brahma was this earth disposed: Brahma is sky arranged above. Brahma is this expanse of air lifted on high and stretched across.

अध्याय 10

श्लोक 3.19

यथा॒ यशः॑ पृथि॒व्यां यथा॒स्मिन् जा॒तवे॑दसि ।ए॒वा मे॑ वर॒णो म॒णिः की॒र्तिं भूतिं॒ नि य॑च्छतु॒ तेज॑सा मा॒ समु॑क्षतु॒ यश॑सा॒ सम॑नक्तु मा

yathā yaśaḥ pṛthivyāṃ yathāsmin jātavedasi | evā me varaṇo maṇiḥ kīrtiṃ bhūtiṃ ni yacchatu tejasā mā samukṣatu yaśasā samanaktu mā

हिन्दी अर्थ

(एनान्) इन शतु की (पर शुणीहिं) तु पूणंतया हिसा कर, (प्र मृण) भरागे-भ्ागे (भरस्तु) चले । (देवाः) विजिगीषु-सैनिक (वरणेन) शत्रुनिवारकः ,राजा की उक्ति, सेना के सर्वोच्चाधिकारी के प्रति है, तथा वैच की उक्ति रोगी के प्रति है । छृणीहि शृणीहि, च हिसायाम् (क्रयादिः) मणि- कां० १० सु०३ प्रथवेवेद-माष्य २१९ जिस का भ्रथं है निवारण करना । देवाः दिवु क्रीडा, विजिगीषा प्रादि

English

Together, with his needle hath Atharvan sewn his head and heart. And Pavamāna hovered from his head on high above his brain.

अध्याय 10

श्लोक 3.20

यथा॒ यशः॑ क॒न्याऽयां॒ यथा॒स्मिन्त्संभृ॑ते॒ रथे॑ ।ए॒वा मे॑ वर॒णो म॒णिः की॒र्तिं भूतिं॒ नि य॑च्छतु॒ तेज॑सा मा॒ समु॑क्षतु॒ यश॑सा॒ सम॑नक्तु मा

yathā yaśaḥ kanyā'yāṃ yathāsmintsaṃbhṛte rathe | evā me varaṇo maṇiḥ kīrtiṃ bhūtiṃ ni yacchatu tejasā mā samukṣatu yaśasā samanaktu mā

हिन्दी अर्थ

हो. कर, उर दबा दे या विनष्ट कर .दे, जोकि तेरे भर्थात् तेरे राष्ट के साथ (द्विषन्ति) द्रे षभावना रखते हैँ । हृदयरभणं मवतीति वा (निक्त २।३।१०) । रोग भौर भवर की, उसके उग्ररूप होने से पिले ही कुचल. देना चाहिए । कः + सकता है । भवारयन्त मेँ भूतकाल प्रतीत होता है, भौर श्वः श्वः मे भविषः ए भ्रयम्) यह (वरणः). शतरनिवारक-सेनाष्यक्ष (ते) तेरे विरोधं (वितताम्) विस्तृतं कृत्याम्) विनाशिनी सेना भ ०६५ ) ता रित करेगा, (भ्रयम्); यह (पौरुषेयात्, -भयात् ) सेनिक पुरुषों से होने वाले.

English

Spirit and Food and Vital Air protect that head from injury. Stationed on high, Purusha hath pervaded all regions spread aloft and stretched transversely.

अध्याय 10

श्लोक 3.21

यथा॒ यशः॑ सोमपी॒थे म॑धुप॒र्के यथा॒ यशः॑ ।ए॒वा मे॑ वर॒णो म॒णिः की॒र्तिं भूतिं॒ नि य॑च्छतु॒ तेज॑सा मा॒ समु॑क्षतु॒ यश॑सा॒ सम॑नक्तु मा

yathā yaśaḥ somapīthe madhuparke yathā yaśaḥ | evā me varaṇo maṇiḥ kīrtiṃ bhūtiṃ ni yacchatu tejasā mā samukṣatu yaśasā samanaktu mā

हिन्दी अर्थ

किये. जाने वाले सब. पापकृ्त्यो से (त्वा तुभे (वारयिष्यते ह रि कैः तुभे सुरक्षित करेगा । क । ॥ । = + रोगरूपी कृत्या का भी वणेन श्रभिप्रेत है ।. रोगरूपी त्या का वणन पूवं व किया ह 44 । भौर ौरुषेयाद् वधात्” दवारा माता-पिता से प्ाष्त होने वाले रोगों को निदिष्ट किया है.(८ ): । “पापात्” द्वास दर्चाया है कि.रोग मँ युद्ध को भी. पापकमं कटा है। . वरुणो वारयाता श्यं देवो वनस्पतिः ।. , (भयम्) यह (देवः) दिव्यगुणों वाला (वरणः वनस्पतिः) वरण. नामके वनस्पति, (व्रारयातं) : तुभे यक्ष्म .रोग से निवारित ०५ (यः)

English

He who knows Brahma’s cattle, yea, the fort whence Purusha is named, Yea, knows that fort of Brahma girt about with immortality,

अध्याय 10

श्लोक 3.22

यथा॒ यशो॑ऽग्निहो॒त्रे व॑षट्का॒रे यथा॒ यशः॑ ।ए॒वा मे॑ वर॒णो म॒णिः की॒र्तिं भूतिं॒ नि य॑च्छतु॒ तेज॑सा मा॒ समु॑क्षतु॒ यश॑सा॒ सम॑नक्तु मा

yathā yaśo'gnihotre vaṣaṭkāre yathā yaśaḥ | evā me varaṇo maṇiḥ kīrtiṃ bhūtiṃ ni yacchatu tejasā mā samukṣatu yaśasā samanaktu mā

हिन्दी अर्थ

गयाः था (तम्) उसे. देवाः) दिव्यगुणी वै ने.( भ्रवीवरन्) .निवारिते.कंरः मन्व में मृस्यरूप से यक्ष्मरोग तथा वरण-भोषधि का - वणन है। वरण क स्वकीय -राष्टर मे । देवः = विजिगीषुसेनाध्यक्ष 4 : देवाः विजियीष कां» १७५ सू० ३ ग्रथववेद-माध्य २२१ (घावात्).. दौड़-धूप कर रहा है, या मुगरूपी शार दौड़-घूप कर रहा है, तो उस दुर्य से; (परिक्षवात्) यदि संब भ्रौर शोर-शंराबा हो रहा है, उससे (शकुनेः) या शक्तिशाली शत्रु के (पापवादात्)' पापमय कथनो ते (श्रयं;

English

Brahma and Brāhmas have bestowed sight, progeny, and life on him. Sight leaves him not, breath quits not him before life’s natural decay,

अध्याय 10

श्लोक 3.23

यथा॒ यशो॒ यज॑माने॒ यथा॒स्मिन् य॒ज्ञ आहि॑तम्।ए॒वा मे॑ वर॒णो म॒णिः की॒र्तिं भूतिं॒ नि य॑च्छतु॒ तेज॑सा मा॒ समु॑क्षतु॒ यश॑सा॒ सम॑नक्तु मा

yathā yaśo yajamāne yathāsmin yajña āhitam| evā me varaṇo maṇiḥ kīrtiṃ bhūtiṃ ni yacchatu tejasā mā samukṣatu yaśasā samanaktu mā

हिन्दी अर्थ

जागने पर. यदि मन्वोक्त दुर्यं को देखता है.तो उन क निवारण के लिये (२) उन द्वारो राष्ट या राजघानी में सब भोर शोर मचाना । परिक्षेब- पापकथन, भर्थात् राजा या. सेनाधिकारी की. ्निच्दाः भरौर भ्रपमानजनक . करिया है । "परिव" क रथ है “उब भरर हो ही छक", तथा “ाप- मेहो जातीः है. वरंण-भ्मोषधि के सेवन से ये श्रवस्थाएं निवारित हो सकती

English

Who knows the fort of Brahma, yea, the fort whence Purusha is named. The fort of Gods, impregnable, with circles eight and portals nine,

अध्याय 10

श्लोक 3.24

यथा॒ यशः॑ प्र॒जाप॑तौ॒ यथा॒स्मिन् प॑र॒मेष्ठिनि॑ ।ए॒वा मे॑ वर॒णो म॒णिः की॒र्तिं भूतिं॒ नि य॑च्छतु॒ तेज॑सा मा॒ समु॑क्षतु॒ यश॑सा॒ सम॑नक्तु मा

yathā yaśaḥ prajāpatau yathāsmin parameṣṭhini | evā me varaṇo maṇiḥ kīrtiṃ bhūtiṃ ni yacchatu tejasā mā samukṣatu yaśasā samanaktu mā

हिन्दी अर्थ

, है । पैप्यलाद शाखा भं “यति” के स्थाने मे “दि” पाठं है । म्रोषधि (वारयिष्यते) तुभे सुरक्षित करेगी । ततो नो वारयिष्यतेऽय॒देवो वनस्पतिः ॥८॥ ने, (यद्) जो (वयम्) हम सब ने मिल कर पाप (चकृम) किये है (तता) वरण-वनस्पति (वारयिष्यते) निवारित कर देगी ।

English

Contains a golden treasure-chest, celestial, begirt with light. Men deep in lore of Brahma know that Animated Being which

अध्याय 10

श्लोक 3.25

यथा॑ दे॒वेष्व॒मृतं॒ यथै॑षु स॒त्यमाहि॑तम्।ए॒वा मे॑ वर॒णो म॒णिः की॒र्तिं भूतिं॒ नि य॑च्छतु॒ तेज॑सा मा॒ समु॑क्षतु॒ यश॑सा॒ सम॑नक्तु मा

yathā deveṣvamṛtaṃ yathaiṣu satyamāhitam| evā me varaṇo maṇiḥ kīrtiṃ bhūtiṃ ni yacchatu tejasā mā samukṣatu yaśasā samanaktu mā

हिन्दी अर्थ

भ्रौर मानसिक हमारे रोगों को निवारित करे । वनस्पति का भ्रथं “वनो राष्ट्ियि-पापकर्मो के करने से भविष्य मे, निवारित करता रहे । भ्रगुः) चली गरहैः छिपि गर्है) (ते) वे. (अधमम् तमः) भरषम तम ह॒ प्राजापत्या देवादचासुरादच (वृहदा० उप० .१।३।१) । भ्रसुर निज भोग ८ भरवृत्ति के कारण दुषित हो गए । परिणामतः उन कीं सन्तानं भी दुष्पर-

English

Dwells in the golden treasure-chest that hath three spokes and three supports. Brahma hath passed within the fort, the golden castle; ne’er subdued,

अध्याय 10

श्लोक 4.1

सर्पविषदूरीकरणम्।१-२६ गरुत्मान्।तक्षकः।अनुष्टुप्, १ पथ्यापङ्क्तिः, २ त्रिपदा यवमध्या गायत्री, ३-४ पथ्याबृहती, ८ उष्णिग्गर्भा परा त्रिष्टुप्, १२ भुरिग्गायत्री, १६ त्रिपदा प्रतिष्ठागायत्री, २१ ककुम्मती, २३ त्रिष्टुप्, २६ त्र्यवसाना षट्-पदा बृहतीगर्भा ककुम्मती भुरिक् त्रिष्टुप्।इन्द्र॑स्य प्रथ॒मो रथो॑ दे॒वाना॒मप॑रो॒ रथो॒ वरु॑णस्य तृ॒तीय॒ इत्।अही॑नामप॒मा रथ॑ स्था॒णुमा॑र॒दथा॑र्षत्

sarpaviṣadūrīkaraṇam| 1-26 garutmān| takṣakaḥ| anuṣṭup, 1 pathyāpaṅktiḥ, 2 tripadā yavamadhyā gāyatrī, 3-4 pathyābṛhatī, 8 uṣṇiggarbhā parā triṣṭup, 12 bhuriggāyatrī, 16 tripadā pratiṣṭhāgāyatrī, 21 kakummatī, 23 triṣṭup, 26 tryavasānā ṣaṭ-padā bṛhatīgarbhā kakummatī bhurik triṣṭup| indrasya prathamo ratho devānāmaparo ratho varuṇasya tṛtīya it| ahīnāmapamā ratha sthāṇumāradathārṣat

हिन्दी अर्थ

२२४ श्रथररवेद-माष्य कां० १९ :सू०:.३ . एवा मे वरणो मरणिः.कीतिं .मूठि नि य॑च्छत॒ (यथा) -जेसा (यः) (कन्यायाम्) - कन्या मे है, . (यथा) -जैसायष्ठ १ रथ॒ द्या षति की भ्रोर जाना है .उसः की सजावट का वर्णेन हुभां हैः। कन्या -¶: करना चाहता है । वह चाहता है किः सब प्रजाएं मुम चहँ, यथा “विशस्त्वा ;

English

If in thy sleep thou see an evil vision, oft as the beast repeats his loathed approaches, This Amulet, this Varana will guard thee from sneeze, and from the bird’s ill-omened

अध्याय 10

श्लोक 4.2

द॒र्भः शो॒चिस्त॒रूण॑क॒मश्व॑स्य॒ वारः॑ परु॒षस्य॒ वारः॑ ।रथ॑स्य॒ बन्धु॑रम्

darbhaḥ śocistarūṇakamaśvasya vāraḥ paruṣasya vāraḥ | rathasya bandhuram

हिन्दी अर्थ

(११) घृतकुमारी की जड विषनाद्चक, तथा सपं को व्यथादायिनी . विष-डारा सपंविषः का विनाश (२५) 1 लेप, दष्टस्थान का जलाना श्रादि की (रथः) गंति (रपरः) द्वितीय कोटि की है, (वरुणस्य) जल की रथः गति (तृतीयः इत्) तीसरी कोटि की है, (अहीनाम्) सापो की (रथः) शेति (भ्रपमा) भ्रंपमानित+ सी है । विष १०, पाद १), “इन्द्र” है विद्यत् जो कि मेध मेँ चमकता है । सपं के विष.के “वरुण” है जल का देवता । यथा “वरुणोऽपामधिपतिः” (भ्रथवं० ५२४४),

English

As, shattered by the tempest, trees lie withering ruined on the ground. Thus over throw my rivals thou, so crush them down and ruin. them, those born before and

अध्याय 10

श्लोक 4.3

अव॑ श्वेत प॒दा ज॑हि॒ पूर्वे॑ण॒ चा प॑रेण च ।उ॒द॒प्लु॒तमि॑व॒ दार्वही॑नामर॒सं वि॒षं वारु॒ग्रम्

ava śveta padā jahi pūrveṇa cā pareṇa ca | udaplutamiva dārvahīnāmarasaṃ viṣaṃ vārugram

हिन्दी अर्थ

अररसास॑ दादयो ये अन्ति ये च॑ दूरके। . (इह) इष निवास स्थान में (ये) जो (भ्रहयः) सांप (भरन्ति) समीप महै (येच) 6४ जो (इूरके) दुर भ हँ (भ्रसासः) वे बिषरस से रहित (बृदवरक्म्) ओद विच्छ कोः (वनेनः). हथौडे दारा, (हन्मि) ओ मार सांप चाहेः हमारे निवास स्थानः के समीप म हो, या दुर मे, बाहे विष रहित मी. तो भी ऊदे मार डालना त्राहि, तथा विच्छ को. भो मार

English

As glory dwells in sacrifice to Agni, and the hallowing word, So may the Charm, etc.

अध्याय 10

श्लोक 4.4

अ॒रं॒घु॒षो नि॒मज्यो॒न्मज्य॒ पुन॑रब्रवीत्।उ॒द॒प्लु॒तमि॑व॒ दार्वही॑नामर॒सं वि॒षं वारु॒ग्रम्

araṃghuṣo nimajyonmajya punarabravīt| udaplutamiva dārvahīnāmarasaṃ viṣaṃ vārugram

हिन्दी अर्थ

काँ , १०५ सू०४ : भथववेद-माष्य ३६ (अहिम्) साप को. (भररन्वयत्) रोष डालादहै।.. . त वाले (वं्स्य) पेद के बल .को . (वयम्. मन्महे) हम. मानते ह (इमे . दि करिक्रतं खित. दुभष्वंसितंः ज॑हि ॥१३॥ कवः) यृदाकु-सषं (निपिष्टासः) पीस दियं है ! (दविम्) .कईडीसदृो फण (करिकरतम्) फलानि वंलेःकौ; (रिवत्) सुफेदकुष्ठं सरश वण, वालैः को; (दमेषु) द्म-वासां भँ रहने वाले (प्रसितम्) काले सापि को (जि) तू.मार

English

As glory is bestowed upon the patron and this sacrifice, So may the Charm, etc.

अध्याय 10

श्लोक 4.5

पै॒द्वो ह॑न्ति कस॒र्णीलं॑ पै॒द्वः श्वि॒त्रमु॒तासि॒तम्।पै॒द्वो र॑थ॒र्व्याः शिरः॒ सं बि॑भेद पृदा॒क्वाः

paidvo hanti kasarṇīlaṃ paidvaḥ śvitramutāsitam| paidvo ratharvyāḥ śiraḥ saṃ bibheda pṛdākvāḥ

हिन्दी अर्थ

जहि वची इन्द्र को या दर को कहा हैकि तु मारं डान । . छ्रातिका मारिका सका सनंतिं मेषम् । : „¡ ,. (सकरा कुमारिका) वह कुभारावेस्था की (कैरातिकाः) कैरात जाति यीभिः). हिरण्यसदृश दान्तस्पी भलिभिः) कालियो दवारा, (गिरी- णाम्). कौ (वात) नो भं । पवतो की जाया व श्रभिग्राये यह है किकरात ५५८ की चोवियों मे पैदा हने वाली शरोषधियों कों भरने 'छोटे-छोटे"दान्तौं द्वारा सोद 1 निकलती ह । वह् भौषध सम्भुवतः. सपेविष के विनार.के लिये उपयुक्तं ह । कैरात = इस के लिये हितंकर ई, शरोर दौखने भँ रमंणीय ह पशुपक्षी निजं स्वाः के लिये देखो. (भ्रथवं° २।२७।२; ५।१४।१; नअ २३.२५) :.

English

As glory dwelleth in the Lord of Life and in this God Supreme,. So may the Charm, etc.

अध्याय 10

श्लोक 4.6

पैद्व॒ प्रेहि॑ प्रथ॒मोऽनु॑ त्वा व॒यमेम॑सि ।अही॒न् व्यऽस्यतात् प॒थो येन॑ स्मा व॒यमे॒मसि॑

paidva prehi prathamo'nu tvā vayamemasi | ahīn vya'syatāt patho yena smā vayamemasi

हिन्दी अर्थ

: (मम्); यह (भ भर्ग) भा गयां है (युवौ-भिषक) . नौजवान वैच, न) पुनि सांप कां हननं करने वला, (श्रपरराजितः) लो कि सपं युद मे पराजित नही.होता । (खः वै). वहं निक्चय से स्वजनस्य दोनों कां जम्मनेः). दंबानेः वाला है; विनादकःतथा मशक है . ५“ 1. : कां° १०। सुभ भयवेद-भाष्य २४१ मन्व मे षद न्योले को कविताः मे “युका भिषक्” कहा है । जम्मनः

English

As immortality and truth have been established in the Gods, So may the Charm, the Varana, give me prosperity and fame.

अध्याय 10

श्लोक 4.7

इ॒दं पै॒द्वो अ॑जायते॒दम॑स्य प॒राय॑णम्।इ॒मान्यर्व॑तः प॒दाहि॒घ्न्यो वा॒जिनी॑वतः

idaṃ paidvo ajāyatedamasya parāyaṇam| imānyarvataḥ padāhighnyo vājinīvataḥ

हिन्दी अर्थ

का भ्रधिक संचार होताः है। ्रतः इस काल मेप्रकट हुए सापोको दण्ड श्रादि द्वारा मार देना सुलभ होता है । : वातापजन्य पजन्य सहयोगी. वात, (दन्रः) इन्र ने (भे) मेरे निवास स्थान खे या भेरी सुरक्षा के लि २४२ . भथर्वेवेद-भाष्य कौं १५ । सुऽ ; नर को (चं पृदाववम्) .ौरं पृवाकू-मादा को, (स्वैजम्).स्वजको, (तिर- ,दिचिराजिम्) तिरंदिच्सजिं को, (दशोनसिम्) तथाः द्॑चोनंसि की.रोध शाखी ने “इन्द्रः” के स्थान मः “पहः” न्योला पाठं है ।.॥.: :. -“ ..

English

With lustre let it sprinkle me, and balm me with magnificence. A charm to destroy venomous serpents

अध्याय 10

श्लोक 4.8

संय॑तं॒ न वि ष्प॑र॒द् व्यात्तं॒ न सं य॑मत्।अ॒स्मिन् क्षेत्रे॒ द्वावही॒ स्त्री च॒ पुमां॑श्च॒ तावु॒भाव॑र॒सा

saṃyataṃ na vi ṣparad vyāttaṃ na saṃ yamat| asmin kṣetre dvāvahī strī ca pumāṃśca tāvubhāvarasā

हिन्दी अर्थ

. , ; (अहे). है क्प! (तुव जनितारम्) तेरे जन्म. दाता , माता-पिता को (दनद: इन्दर ने (प्रथमम्). पहिले ही (जघानः)-मार दिया है, (तेषाम्;उ “ " शदे मे एंकवच्नन जातिकी दुष्टिसे हैः जात्थिकवचन है. -क्यों सर्वंथा रभाव किया जा सकता है ! जब सांपन ररह तो उन का विषरस -के लि है 1 “घान” मे,लिदट् लकारःवतंमा्ाथंक है । यथा ““छन्दसिःलुड्- '

English

The first of all is Indra’s car, next is the chariot of the Gods the third is Varuna’s alone. The last, the Serpents’ chariot, struck the pillar and then sped away.

अध्याय 10

श्लोक 4.9

अ॒र॒सास॑ इ॒हाह॑यो॒ ये अन्ति॒ ये च॑ दूर॒के।घ॒नेन॑ हन्मि॒ वृश्चि॑क॒महिं॑ द॒ण्डेनाग॑तम्

arasāsa ihāhayo ye anti ye ca dūrake| ghanena hanmi vṛścikamahiṃ daṇḍenāgatam

हिन्दी अर्थ

विकल्पेन सत्र कालों में अयुक्त होतेह 1 ; ८; . -- 7 तया रथात् दुढतापरवंक मैने. पकड़ लिया है, (व से किं , (पौञ्जिष्ठ) (अरेः) सांप के (विषम्) विष को (व्यनिजम्) मैने धो डाला है । ६ पौच्जिष्ठ (कवैरम्)' कवर को दृदेतापूवेक' शरहेणं करता है:।. भौर क़०.१० 1 सु१.४ , भ्रधवेवेद-माष्य २४३ ; - संप को पकंड्ना हो त्रो उस के सिर को दुढ्तापूरव॑क पकड्नाः चाये, पूछ से पकड़ने .पर . वह् पीछे, की भोर : उचछल कृर काट सकता है। सांपके काटने. पर नदी कै भ्रवाह मँ जा कर .जलचिकित्सा विवि द्वारा विष को

English

Their lustre is the Darbha-grass, its young shoots are their horse’s tail: the reed’s plume is their chariot seat.

अध्याय 10

श्लोक 4.10

अ॒घा॒श्वस्ये॒दं भे॑ष॒जमु॒भयो॑ स्व॒जस्य॑ च ।इन्द्रो॒ मेऽहि॑मघा॒यन्त॒महिं॑ पै॒द्वो अ॑रन्धयत्

aghāśvasyedaṃ bheṣajamubhayo svajasya ca | indro me'himaghāyantamahiṃ paidvo arandhayat

हिन्दी अर्थ

तथा राजा एसे रथ+ के सदुश राज्यश्ची दवाय सुशोभितं भी होना यथा य्चः सोमपीथ मुके यथा यशं! । ... .. एवा मरं वरणो. मणि; कीतिः भूतिं नि य॑च्छतु (यथा) जैसा (यशः). यद (सोमपीथ) सोम के पानः है, (यथा) जैसा (यद्चः) यकः (मधुपक) मधुपक. मे है । (एवा) इसीःप्रकार (मे) मुक

English

message. From Mischief, from Malignity, from incantation, from alarm,

अध्याय 10

श्लोक 4.11

पै॒द्वस्य॑ मन्महे व॒यं स्थि॒रस्य॑ स्थि॒रधा॑म्नः।इ॒मे प॒श्चा पृदा॑कवः प्र॒दीध्य॑त आसते

paidvasya manmahe vayaṃ sthirasya sthiradhāmnaḥ| ime paścā pṛdākavaḥ pradīdhyata āsate

हिन्दी अर्थ

१, कन्या का रथ, (भयवं० १४।१।६१; २।१०,१२.द१); +... का०- १०५. सुऽ इ - भरथरवैवेद-भाष्य २२९ कीर्तः भौर वैभवः (नियच्छतु) निमतः करे, स्थापित करे.। -(तेजसा). तेज हारा (मा) मुम (सथूक्षतु) सम्यक्-सीचे, (यं्सा) . यद.सेः (मा) मुं सोमः भरोषधि के रस के पानके. भार्चंयेयुक्त -गु्णो का वर्णनं वेदों में मन की मननचवित को बढ़ता है ।-मघ॒पकं मे ३ पदाथ .होते है मधु, द्धि

English

From death, from stronger foeman’s stroke the Varana will guard thee well. Each sinful act that we have done,—my mother, father, and my friends,

अध्याय 10

श्लोक 4.12

न॒ष्टास॑वो न॒ष्टवि॑षा ह॒ता इन्द्रे॑ण व॒ज्रिणा॑ ।ज॒घानेन्द्रो॑ जघ्नि॒मा व॒यम्

naṣṭāsavo naṣṭaviṣā hatā indreṇa vajriṇā | jaghānendro jaghnimā vayam

हिन्दी अर्थ

विवाह के समय वर को दिया जाता है 1 सन्त्र २०-मे कन्या -भौर उस के कर, भविष्य मँ होने वाली सन्वानों.की सात्विक पुष्टि केःलिये,.“सरेमपीये'" दवारा एक निदेश. मी किया है ( “सोमपीये" दवारा मंतुदुग्ब को सोम . सदृश पुष्टिकारक सूचित किया है 1 बंदिक. . साहित्य मे सोम पदं दुग्धं केः लिये यथा यो ऽग्निहो्र वषट्कार यथा यशः एषा म वरणो मणिः कोतिं भूति नि यच्छतु

English

From all the guilt this heavenly Plant will be our guard and sure defence. Affrighted by the Varana let my rivals near akin to me

अध्याय 10

श्लोक 4.13

ह॒तास्तिर॑श्चिराजयो॒ निपि॑ष्टासः॒ पृदा॑कवः ।दर्विं॒ करि॑क्रतं श्वि॒त्रं द॒र्भेष्व॑सि॒तं ज॑हि

hatāstiraścirājayo nipiṣṭāsaḥ pṛdākavaḥ | darviṃ karikrataṃ śvitraṃ darbheṣvasitaṃ jahi

हिन्दी अर्थ

(यथा). जैसा (यशः) -य्रश-(भग्निहोके). भग्निहोक् - मे. है; (यथा) करे, (तेजसा) तेज - द्वारा (मा) भुभं (समुक्षतु) सम्यक् सींचे, (यशसा) १ ने गोमान् सौनिरकाः-योभोः दाभिः (० '९।१०७।६ 1... , को भथ “वह (प्रापणे) के सदु ही है । काप्रचार्-विस्तार बाहता हुभा, ईसं यद का भी भागी होना चाहता है

English

Pass to the region void of light: to deepest darkness let them go. Safe are my cattle, safe am I, long-lived with all my men around.

अध्याय 10

श्लोक 4.14

कै॒रा॒ति॒का कु॑मारि॒का स॒का ख॑नति भेष॒जम्।हि॒र॒ण्ययी॑भि॒रभ्रि॑भिर्गिरी॒णामुप॒ सानु॑षु

kairātikā kumārikā sakā khanati bheṣajam| hiraṇyayībhirabhribhirgirīṇāmupa sānuṣu

हिन्दी अर्थ

एवा घँ व्रणो मणिः -कीति भृति नि व॑च्छतु (एवा) इसी प्रकार (मे) मुफमे (वरणः मणिः) श्रेष्ठ तथा रत्नरूप नियत करे, स्थापित करे, (तेजसा) तेज से (मा) मुभ (समृक्षतु) सम्यक्- - . दान करने वाला । यज्ञ का भी श्रं है वहं कमं, जिसमेंकि देवों की पूजा हो, सत्संगति हो, तथा दात्र दिया जाय । राना .भी यजमान बन कर, राष्ट यज्ञ कौ रचाने का संकल्प कर के, राष्ट के देवँ की पूजा, उनके सत्संश, तथा ॥

English

This Varana, mine Amulet, shall guard me well on every side. This Varana is on my breast, the sovran, the celestial Plant.

अध्याय 10

श्लोक 4.15

आयम॑ग॒न् युवा॑ भि॒षक् पृ॑श्नि॒हाप॑राजितः ।स वै स्व॒जस्य॒ जम्भ॑न उ॒भयो॒र्वृश्चि॑कस्य च

āyamagan yuvā bhiṣak pṛśnihāparājitaḥ | sa vai svajasya jambhana ubhayorvṛścikasya ca

हिन्दी अर्थ

उन दान देने का भ्रभिलाषीः है 1 एवाप श्ररणो. पणिः. कीति. भूति नि य॑च्छतु (यथा) जेता (यंशः) यक (प्रजापतौ) प्रजापति में, त्था (युथा) जैसा कां० १९ ।सू०-३ भरथरवेवेद-भाष्य २३१ कीति को भ्रौर (मतिम्). वैभव. को (नियच्छतु) नियत करे, स्थापित करे (तेजसा) तेज से (मा) मुभे (समुक्षतु) सम्येक्-सीचे, (यशसा) यंश द्वारा

English

Let it afflict my foemen as Indra quelled fiends and Asuras. 156

अध्याय 10

श्लोक 4.16

इन्द्रो॒ मेऽहि॑मरन्धयन्मि॒त्रश्च॒ वरु॑णश्च ।वा॒ता॒प॒र्ज॒न्यो॒३भा

indro me'himarandhayanmitraśca varuṇaśca | vātāparjanyo3bhā

हिन्दी अर्थ

परमेदवर का । इसीलिये “परमेष्ठिनि” का निदेश . “स्मिन् " . पदं पद द्वारा निदिष्ट किया है । तथा “परमेष्ठी” के. लियेः देखो (अथर्व 9 १०।२।२०।२१) । वहां प्रकरणानुखूप “परमेष्टी” का: भर्थं जीवात्मा किया ग्रहण सुसंगत प्रतीत होताहै ॥ . .;..; “प्रजापति का यश है किं वह॒ सब प्रजो का पति होता हुभ्रा, प्रलय- काल में निलिप्त हृभा, शयन सा कर रहा होता है, भ्रोर वही सर्जन काल मे प्रबुद्ध सा हुभा परमेष्ठीरूप हो जाता है । जसे कि शयन कर रहा धन- पति, कयनावस्था मे भी .निजधन का पति होता है, भ्रौर प्रबद्ध हो जाने पर का यका चाहता है । भ्रप्रबुद्धावस्था में भी वहु शासक होने का यरा चाहता

English

Through hundred autumn seasons, long to live, I wear this Varana.

अध्याय 10

श्लोक 4.17

इन्द्रो॒ मेऽहि॑मरन्धय॒त् पृदा॑कुं च पृदा॒क्वम्।स्व॒जं तिर॑श्चिराजिं कस॒र्णीलं॒ दशो॑नसिम्

indro me'himarandhayat pṛdākuṃ ca pṛdākvam| svajaṃ tiraścirājiṃ kasarṇīlaṃ daśonasim

हिन्दी अर्थ

उपादेय है । २. देखो मन्त्र (६) । यंथा-देवेष्युमृतं यथैष सत्यमाहित् । एवां मरं वरणो मणिः कीतिं भ्रति नि य॑च्छतु (य॑था) जसे (देवेष) दिव्यगुणी व ९९ (गन (9 । कता आति, होता है । (एवा). दसी :॥ प्रकार (भि) मूक मे (वरणः.मगिः). भंष्ठरलरूपी रातुनिवारक-तेनाष्यक्ष ॥ (कीर्तिम्) कीति को, भौर (मतिम्). वैभवः को (नि य॑च्छतु) नियत करे .!4 स्थापितं करे, (तेजसा तेज से (मा) ' मुभे (समुक्षतु) सम्यक्-सीचि

English

May it bestow on me great strength, cattle, and royalty and power. As with its might the wind breaks down the trees, the sovrans of the wood,

अध्याय 10

श्लोक 4.18

इन्द्रो॑ जघान प्रथ॒मं ज॑नि॒तार॑महे॒ तव॑ ।तेषा॑मु तृ॒ह्यमा॑णानां॒ कः स्वि॒त् तेषा॑मस॒द् रसः॑

indro jaghāna prathamaṃ janitāramahe tava | teṣāmu tṛhyamāṇānāṃ kaḥ svit teṣāmasad rasaḥ

हिन्दी अर्थ

मे देवो मेः“यशः. क वर्णेन नहीं किया, जंसे कि पूवं के मरन्नो मे हुमा. हैः।: कविता वाग्विषयः । सपंविषभेषज्ये च मन्त्राः । सप॑विषहारिकारचं कादिच- भरौर उनके प्रतीकार का वणन कविता म किया है।. स्पैविषचिकित्सौ तथा +र का हरण करने वाली कतिपय भ्रोषधियों का भी वर्णन २), दवेत पुननंवा को तथा -ववेत सर्षप की जडो कौ श्रयोगे. (३) सपं के नाश के लिये न्योले" का प्रयोग (मन्त्र ४); पै न्योले काः उपयोगं श्रौर उसं की पहिवान , (मन्तं ६, ७,१०,११)। साप

English

So break and rend my rivals, born before me and born after. Let the Varana protect thee well.

अध्याय 10

श्लोक 4.19

सं हि शी॒र्षाण्यग्र॑भं पौञ्जि॒ष्ठ इ॑व॒ कर्व॑रम्।सिन्धो॒र्मध्यं॑ प॒रेत्य॒ व्यऽनिज॒महे॑र्वि॒षम्

saṃ hi śīrṣāṇyagrabhaṃ pauñjiṣṭha iva karvaram| sindhormadhyaṃ paretya vya'nijamaherviṣam

हिन्दी अर्थ

(४) कटतिका-कुमार्का. सख्रपिणी दवारा खोदी गई भेषज सम्भवत सर्पविषनारोक है. (मन्त्र १४) । न (७) : नदी के बेहते-प्रवाह् मे जी कर, जलं - चिकित्सा दवारा, स्प॑,विषं १ बढा न्योला. सरयुः मे भसमृथं हो. जाता ह । । ह ४ २३४ प्रथववेद-माष्य कां० १०॥। सुर (९) विष के नाना प्रकार (मन्व २२) ।

English

As Agni and the wind devour the trees, the sovrans of the wood, Even so devour my rivals, born before me and born after. Let the Varana protect thee well.

अध्याय 10

श्लोक 4.20

अही॑नां॒ सर्वे॑षां वि॒षं परा॑ वहन्तु॒ सिन्ध॑वः ।ह॒तास्तिर॑श्चिराजयो॒ निपि॑ष्टासः पृदा॑कवः

ahīnāṃ sarveṣāṃ viṣaṃ parā vahantu sindhavaḥ | hatāstiraścirājayo nipiṣṭāsaḥ pṛdākavaḥ

हिन्दी अर्थ

१ प्रथम वणित ३ उपायो की भ्रपेक्षया कम लाभप्रद. है । (नि०.९।२।११), तथा “रथयति गतिकर्मा” (निर० २।१४) मे भी रथ पद सर्वाधिकं गतिमान् है, इत्यादि । भ्रौर तरूणक श्रोषधि. (भदवस्य) भधादवनामक सपं के विष को (वारः) (वारः) निवारित करती है । (रथस्य) विष की गति-को (बन्धुरम्) ब्रां देती है, फलने नहीं देती । (चवेत) है -दवेत ! . (पूवण च) पूवं के (श्रपरेणच) ओरश्रपरके (पदा) पर दवारा (भ्रव जहि) विषको भार डाल। (उदप्लुतम्) .जल पर प्लुतियां करती हुई, तैरती हई (दारु इव) लकड़ी की तरह (भ्रही

English

after. Let this Varana protect thee well. Cut them in pieces, Varana! before their destined term of life,

अध्याय 10

श्लोक 4.21

ओष॑धीनाम॒हं वृ॑ण उ॒र्वरी॑रिव साधु॒या।नया॒म्यर्व॑तीरि॒वाहे॑ नि॒रैतु॑ ते वि॒षम्

oṣadhīnāmahaṃ vṛṇa urvarīriva sādhuyā| nayāmyarvatīrivāhe niraitu te viṣam

हिन्दी अर्थ

उग्न विष (वाः) साधारण उदक हो गया है । १. भरवाष्व'" नामक संपं का निदेश भ्राषे नाम द्वारा कियाद, जैसे देवदत्त वाला सपंदहै जो कि भ्रष्व का भी घातक है "“भ्राहन्ति भदवमिति, भषादवः" । त॑था किमीदिने ४४ पदों की ष्याद्या मे) । सूचित किया है । (देखोःविषा्धिकार मेँ तथा सर्पदष्ट. चिकित्सा मे.दत्रेत पूुननेवा का योग, चक्रदत्त) । पुननंवा योग मँ “श्वेत पुननेवा' की जङ् के चण को तंण्डलं जल के साथ पीने का विधान चक्रदत्तमे हुमा है; तथा

English

Those who would hurt his cattle, those who fain would harm. the realm he rules. As Sūrya shines with brightest sheen, as splendour hath been stored in him,

अध्याय 10

श्लोक 4.22

यद॒ग्नौ सूर्ये॑ वि॒षं पृ॑थि॒व्यामोष॑धीषु॒ यत्।का॒न्दा॒वि॒षं क॒नक्न॑कं नि॒रैत्वैतु॑ ते वि॒षम्

yadagnau sūrye viṣaṃ pṛthivyāmoṣadhīṣu yat| kāndāviṣaṃ kanaknakaṃ niraitvaitu te viṣam

हिन्दी अर्थ

के चूणे के पान, नस्य, तथा भ्रञ्जन का भी विषानहभाहै। सम्भावित है । “पदा” केः विशेषणं हैँ “पूवण च॑, भ्रपरेण च्” । भरतः “दवेत " भ्रोषधियों की पूवं दिशोन्मुख तथा पदिचम दिशोन्मुख जडो का ग्रहण करना चहिये । सूयं पव मे उदय होता -श्रौर पंदिचेम मे प्रस्त होता है । दोनों दिशास्थं जड़ो पर विशेष रूपं सै पड़ कर इन मे विशिष्ट गुणों का भ्राषान करती है । उदयकालीन तथा अस्तंगामी सूयं की किरणों मं रोगनाघ्यादिं की विशेष शविति होती है, देखो (भ्थंव० का० २।३२।१)। - “हवेत” का सम्बोधन कविता कीदष्टि से है! इस सूक्त मे विषयों का वर्णन बहुधा कवितारूप म हृम्राः है । इसलिये सायणाचार्य ने भी दसः सुक्त को :“कविवाग्विषयः कहा है (अथवर ° १०।४।१-२६.). सम्बन्धी: विनि-

English

So may the Charm, the Varana, give me prosperity and fame. With lustre let it sprinkle me, and balm me with magni- ficence.

अध्याय 10

श्लोक 4.23

ये अ॑ग्नि॒जा ओ॑षधि॒जा अही॑नां॒ ये अ॑प्सु॒जा वि॒द्युत॑ आबभू॒वुः ।येषां॑ जा॒तानि॑ बहु॒धा म॒हान्ति॒ तेभ्यः॑ स॒र्पेभ्यो॒ नम॑सा विधेम

ye agnijā oṣadhijā ahīnāṃ ye apsujā vidyuta ābabhūvuḥ | yeṣāṃ jātāni bahudhā mahānti tebhyaḥ sarpebhyo namasā vidhema

हिन्दी अर्थ

(भरघषः) बहूत-घोष. करने वाला. न्योला ? (निमज्य) .डबकी लगा कर, तथा (उन्मृज्य ) ऊपर उठ. कर, (पुनः). बार-बार मानौ. (्रब्र-. वौत्) कहता है कि मेरे होते ““(उदप्लुतम्) उदक पर” प्लुतियां लगते हए, तैरतें हए (दारु इव काष्ठ के सदृश, (म्रहीनाम् . विषम्). सापो का रसंयुक्त हरा“काष्ठः भारी होता है, बह जलं षरं तैर वही संकंतो + -¦ क०-१०१सु०द भरथर्ववेद-भाष्य २३५ सरापोका विषं-भी मानो रसरहित हो गया है,. :सूख गगरा है, साधारण जल

English

As glory dwelleth in the Moon and in the Sun who vieweth men, So may the Charm, etc.

अध्याय 10

श्लोक 4.24

तौदी॒ नामा॑सि क॒न्याऽघृ॒ताची॒ नाम॒ वा अ॑सि ।अ॒ध॒स्प॒देन॑ ते प॒दमा द॑दे विष॒दूष॑णम्

taudī nāmāsi kanyā'ghṛtācī nāma vā asi | adhaspadena te padamā dade viṣadūṣaṇam

हिन्दी अर्थ

वेदवे म्ति हसर्णी लं पेद: शवि्मुतासितय् । वेदो रंयर्व्याः शिरं सं विभेद पृदाक्वा: ॥५॥ (वेः) पदर (दिवत्रम्) इवेतकुष्ठ सुदृशवणं वाले साप का, तथा (उत-भसितम्) (रथर्व्याः दिर) .रथर्वी सांपिन के शिरं गे; तथा .(पृदाक्वाः) पृदाकुनी के सिर को. (सं. बिभेद) सम्यक् तौडता, है'.कुत्रलता. है । नु ) तेरे पीछे (वयम्). हंसः (एमसि). भ्रात है । ' तु (अहीन्) सांपोः-को (वयम्) दम (एमसि स्म) भरते हैव -८ : ८

English

As glory dwelleth in the Earth, and in this Jātavedas here, So may the Charm etc.

अध्याय 10

श्लोक 4.25

अङ्गा॑दङ्गा॒त् प्र च्या॑वय॒ हृद॑यं परि॑ वर्जय ।अधा॑ वि॒षस्य॒ यत् तेजो॑ऽवा॒चीनं॒ तदे॑तु ते

aṅgādaṅgāt pra cyāvaya hṛdayaṃ pari varjaya | adhā viṣasya yat tejo'vācīnaṃ tadetu te

हिन्दी अर्थ

जिन स्थानों मँ सापो का बाहूल्य हो वहां जाना पड़ तो न्योले कीः भ्रपने साथ ले जाने का विधानः हृभा है वहां न्योले को छोड़ देने पर सांप भाग जाते है, भ्रौर मां मयः रहित हो जाता है । स्म॒ वाक्यालंकारे दं वेदो अंजायतेदमस्य. -प्रार्यणघ्रः।. . (इदम् ) दसं मस्यल मेँ (पेद; श्रजायतः) पेद पदा होता है, (इदम्); है । (इमानि) ये (पदा पदानि) पैर है (भवंतः) शीघ्रगामी, (वाजिनी. इदम्" यह "तथां -उदक (ददम. उदकनाम, निषं०..१।१२).। मन्त्रम: वैद की पहचान के लक्षण -दर्शाए है, (१) वह भूस्थल ' पर् भी -रहता है

English

As glory dwelleth in a maid, and in this well-constructed car, So may the Charm, etc.

अध्याय 10

श्लोक 4.26

आ॒रे अ॑भूद् विषम॑रौद् वि॒षे वि॒षम॑प्रा॒गपि॑ ।अ॒ग्निर्वि॒षमहे॒र्निर॑धा॒त् सोमो॒ निर॑णयीत्।दं॒ष्टार॒मन्व॑गाद् विषमहि॑रमृत

āre abhūd viṣamaraud viṣe viṣamaprāgapi |agnirviṣamaherniradhāt somo niraṇayīt| daṃṣṭāramanvagād viṣamahiramṛta

हिन्दी अर्थ

२३८ भ्रयवंवेद-भाष्य कां० £ ०। सू9 ४ (२) जलाशयं विहारी भींहै, (३ ) दीघ्रगामी है, (४) शक्तिशाली है, (५) सपो को भार सकता है । “सायणाचार्य ने वित्नियोग में कषा है कि केशवाचार्य के प्रनुसार पेट कीट है, जिसे कि पीस कर् नस्यरूप में नासिका भस्मिन र दाकर स्त्री च॒ पुमांश्च तावुभावैरसा ॥८॥ दों .(अरसानभरस);यसरदहित् है, विष रहितर्है । , , = स्परत्, वणं विकरः । (१). सांप मुख लोल कर जब बन्दं करता ह तब विष का.संधार करता, है, तथा ,कन्द मुखः को जब खोलता है वह भी विष का संचार करने के लिये ¦ होता है . दोनों . ्व्रस्था््रो कोन होने देना मादा दोनों सांप होते है । (३) वेतो के सांप प्रायः धरस होते. ह, . विषैले

English

As glory dwelleth in the draught of Soma and the honeyed. drink, So may the Charm, etc.

स्रोत: bhavykhatri/DharmicData · प्राप्त 3/6/2026

शास्त्रीय प्रामाणिकता एवं पारदर्शकताSources & Interpretation

स्रोत, संस्करण एवं व्याख्या वर्गीकरण

धर्म ग्रंथ पर मूल शास्त्र, पारंपरिक भाष्य और आधुनिक व्याख्या को पूर्णतः पृथक रखा जाता है ताकि पाठक को किसी भी व्याख्या के शास्त्र होने का भ्रम न हो।

सामग्री वर्गीकरण संकेत (Epistemic Content Labels)

6 स्तरिय प्रमाण व्यवस्था
मूल पाठOriginal text

अपौरुषेय / प्रामाणिक शास्त्र (Primary Canonical Scripture)

मूल संस्कृत, प्राकृत अथवा अवधी श्लोक/मंत्र। यह सर्वोच्च प्रमाण (प्रस्थान) है। इस पाठ में किसी भी आधुनिक व्याख्याकार का हस्तक्षेप नहीं है।

शाब्दिक अनुवादLiteral translation

पदार्थ व अन्वय (Direct Grammatical & Word-for-Word Meaning)

व्याकरणसम्मत प्रत्यक्ष शब्दार्थ (अन्वय)। बिना किसी दार्शनिक संप्रदाय के पूर्वाग्रह के, संस्कृत शब्दों का सटीक भाषांतर।

पारंपरिक भाष्यTraditional commentary

आचार्य परंपरा व टीका (Classical Lineage Commentary)

प्राचीन आचार्य परंपरा (यथा शंकराचार्य, रामानुजाचार्य, मध्वाचार्य, श्रीधर स्वामी) द्वारा विरचित शास्त्रीय भाष्य व टीकाएं।

सरल व्याख्याSimple explanation

भावार्थ व सुबोध प्रबोधन (Accessible Pedagogical Exposition)

आधुनिक जिज्ञासुओं के लिए सरल भाषा में भावार्थ। यह मूल मंत्र नहीं, बल्कि पाठ को सुगम बनाने हेतु संपादकीय व्याख्या है।

आधुनिक चिंतनModern reflection

समसामयिक विमर्श व अनुप्रयोग (Contemporary Application & Analysis)

दार्शनिक, मनोवैज्ञानिक व वैज्ञानिक समरूपताओं पर आधुनिक चिंतन। यह मूल शास्त्र का अंग नहीं है और इसे शास्त्रोक्त सिद्धांत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

शोध टिप्पणीResearch note

पांडुलिपि एवं ऐतिहासिक शोध (Critical Apparatus & Manuscript Research)

पांडुलिपि विविधताएं, पाठ-भेद (variant readings), छंद रचना, और ऐतिहासिक व तुलनात्मक भाषावैज्ञानिक शोध। यह शास्त्र का मूल संदेश बदलने हेतु नहीं, बल्कि पाठ की प्रामाणिकता परखने के लिए है।