Atharva Veda
10
अध्याय 10 / 20

Kanda 10

काण्ड 10

350 श्लोकभाग 5/7 · श्लोक 7.1–7.44

पूर्ण अध्याय पाठ44 श्लोक

अध्याय 10

श्लोक 7.1

सर्वाधारवर्णनम्।१-४४ अथर्वा।स्कम्भः आत्मा वा।त्रिष्टुप्, १ विराड् जगती, २, ८ भुरिक्, ७, १३ परोष्णिक्,१०, १४, १६, १८-१९ उपरिष्टाद् बृहती, ११-१२, १५, २०, २२, ३९ उपरिष्टाज्ज्योतिर्जगती, १७ त्र्यवसाना षट्-पदा जगती, २१ बृहतीगर्भानुष्टुप्, २३-३०, ३७, ४० अनुष्टुप् , ३१ मध्येज्योतिर्जगती, ३२, ३४, ३६ उपरिष्टाद्विराड्बृहती, ३३ पराविराडनुष्टुप्, ३५ चतुष्पदा जगती, ३८, ४२-४३ त्रिष्टुप्, ४१ आर्षी त्रिपदा गायत्री, ४४ एका॰ आर्च्यनुष्टुप्।कस्मि॒न्नङ्गे॒ तपो॑ अ॒स्याधि॑ तिष्ठति॒ कस्मि॒न्नङ्ग॑ ऋ॒तम॒स्याध्याहि॑तम्।क्वऽ व्र॒तं क्वऽ श्र॒द्धास्य॑ तिष्ठति॒ कस्मि॒न्नङ्गे॑ स॒त्यम॑स्य॒ प्रति॑ष्ठितम्

sarvādhāravarṇanam| 1-44 atharvā| skambhaḥ ātmā vā| triṣṭup, 1 virāḍ jagatī, 2, 8 bhurik, 7, 13 paroṣṇik,10, 14, 16, 18-19 upariṣṭād bṛhatī, 11-12, 15, 20, 22, 39 upariṣṭājjyotirjagatī, 17 tryavasānā ṣaṭ-padā jagatī, 21 bṛhatīgarbhānuṣṭup, 23-30, 37, 40 anuṣṭup , 31 madhyejyotirjagatī, 32, 34, 36 upariṣṭādvirāḍbṛhatī, 33 parāvirāḍanuṣṭup, 35 catuṣpadā jagatī, 38, 42-43 triṣṭup, 41 ārṣī tripadā gāyatrī, 44 ekā॰ ārcyanuṣṭup| kasminnaṅge tapo asyādhi tiṣṭhati kasminnaṅga ṛtamasyādhyāhitam| kva' vrataṃ kva' śraddhāsya tiṣṭhati kasminnaṅge satyamasya pratiṣṭhitam

हिन्दी अर्थ

बृहस्पति ! तु (द्विषतः) हमारे ढेषी शत्रुभ्रों का (जहि) देनन कर भ्रधिपति, शासक । राजा-वरणं है प्रजाभ्रों का राजा; शसक । परमेश्वर के दौनों स्वरूप शासकं है! गुण-कमं के भेद से एक ही परभेदवरके दो नाम । कां० १० सुऽ.६ अ्रथववेदभाष्य २०१ दासक भी बना । राजा वेशुण का काम है प्राणियों पर राज्य करना, उनका शासन करना, तथा उन्दँ भनुतमागे से सत्यमा्ं की भ्रौर प्रेरित करना । वादी को उन पाशं से विमुक्त करते हँ । इस उदर्य के निमित्त वरुण राजा

English

Speed to preeminence him to whom I have attached thy happy fate. Love thou, O Agni, pleased with burnt oblations, this sacred fuel that is ranged in order. In him may we find grace and loving-kindness, happiness, progeny, and sight and cattle, in

अध्याय 10

श्लोक 7.2

कस्मा॒दङ्गाद् दीप्यते अ॒ग्निर॑स्य॒ कस्मा॒दङ्गा॑त् पवते मात॒रिश्वा॑ ।कस्मा॒दङ्गा॒द् वि मि॑मी॒तेऽधि॑ च॒न्द्रमा॑ म॒ह स्क॒म्भस्य॒ मिमा॑नो॒ अङ्ग॑म्

kasmādaṅgād dīpyate agnirasya kasmādaṅgāt pavate mātariśvā | kasmādaṅgād vi mimīte'dhi candramā maha skambhasya mimāno aṅgam

हिन्दी अर्थ

यह .मभिपराय द्ोतित किया है.कि बलः भौर प्राणशक्तिः के लिये . दृष् उंतेम वस्तु है 1. दसी अकार धन साधन है शमा का ! (व्याख्यां मन्व दप्ति के ह) साय, तथा (यसा कीत). भोर की क (द) संशब्दधते सा (उणा०.४।१२०) । महापु के सत्कार्य का.कथनः+प्रा न करा कीत है । (याया मनतं २२,२३ कुरार) । . समपर्तियो या विभूतियोःके (सह) साथ । =. :

English

future? That one part which he set in thousand places,—how far did

अध्याय 10

श्लोक 7.3

कस्मि॒न्नङ्गे॑ तिष्ठति॒ भूमि॑रस्य॒ कस्मि॒न्नङ्गे॑ तिष्ठत्य॒न्तरि॑क्षम्।कस्मि॒न्नङ्गे॑ तिष्ठ॒त्याहि॑ता॒ द्यौः कस्मि॒न्नङ्गे॑ तिष्ठ॒त्युत्त॑रं दि॒वः

kasminnaṅge tiṣṭhati bhūmirasya kasminnaṅge tiṣṭhatyantarikṣam| kasminnaṅge tiṣṭhatyāhitā dyauḥ kasminnaṅge tiṣṭhatyuttaraṃ divaḥ

हिन्दी अर्थ

मात्र है, त्रिपाद् रूप भे. वहं निज चयोतंमानरूप भे विद्यमान रहता है, जिस क्ति, शयन किये रहती है, वहं श्रभावशूप नहीं होतीः+ इसी प्रकार भवो दूसरी (भनुः), सदा चलती रहती है.। -यह सूचितं करिया है । के भ्रनुसार होती , रहती है । . तथा जितनेःकोल तरक एक-सष्टि -रहती है, उतनेः ही काल तक उस की. प्रलय. मी: रहती है । स॒ष्टिकाल को “श्राह्यदिन” कां०..१०१ सूु० ७ . भ्रथवंवेद-माष्य ३१९ यत्र लोकांश्च कोशरिचापों ब्रह्म जनां बिदुः.1. ; ˆ

English

These know the loftiest Power Divine, and thence know Skam- bha thoroughly. Who out of many, tell me, is that Skambha Of whom Vaisvānara became the head, the Angirases his eye, and Yātus his corporeal parts?

अध्याय 10

श्लोक 7.4

क्व॑१ प्रेप्स॑न् दीप्यत ऊ॒र्ध्वो अ॒ग्निः क्व॑१प्रेप्स॑न् पवते मात॒रिश्वा॑ ।यत्र॒ प्रेप्स॑न्तीरभि॒यन्त्या॒वृतः॑ स्क॒म्भं तं ब्रू॑हि कत॒मः स्वि॑दे॒व सः

kva1 prepsan dīpyata ūrdhvo agniḥ kva1prepsan pavate mātariśvā | yatra prepsantīrabhiyantyāvṛtaḥ skambhaṃ taṃ brūhi katamaḥ svideva saḥ

हिन्दी अर्थ

मुख्यवेद कहा है । रङ्किरा--भङ्गानां रसः (बृहद् उप० १।३।१९) 1. को (जनाः) करई लोग (परमम्, इव) पंरम-तत्त्व कै सदृश (विदुः) जानते ह 1 (उतो) रौर (ये) जो (भ्रवरे) भवरकोटि कै जन है (ते) वे (सत्). प्रकृति की शाखाभो की (उपासते) उपासना करते ह । बीज न भ्रकरुरित होता, मौर न शाखा्भो वाला होता है । वैज्ञानिक इस प्रकृति को ही “स्वतः परिणामशीला'” मानते है, भरौर कहते ह कि प्रकृति, विषमावस्था में परिणत हई है । वे प्रकृति को ही परमतत्त्व के सदृश

English

In the beginning, in the midst of the world, Skambha poured that gold. On Skambha Fervour rests, the worlds and Holy Law repose on him.

अध्याय 10

श्लोक 7.5

क्वाऽर्धमा॒साः क्वऽ यन्ति॒ मासाः॑ संवत्स॒रेण॑ स॒ह सं॑विदा॒नाः ।यत्र॒ यन्त्यृ॒तवो॒ यत्रा॑र्त॒वाः स्क॒म्भं तं ब्रू॑हि कत॒मः स्वि॑दे॒व सः

kvā'rdhamāsāḥ kva' yanti māsāḥ saṃvatsareṇa saha saṃvidānāḥ | yatra yantyṛtavo yatrārtavāḥ skambhaṃ taṃ brūhi katamaḥ svideva saḥ

हिन्दी अर्थ

ये नाडियां शरीर मेँ सर्वत्र फली हई ईहै,जेसे कि दिराएं सवत्र फली हई है । सन भवन प्रविष्टं हृश्रा-हभरा है । १.२ क, (यः) जो (श्रमात्) परिश्रम से, (तपसः) भ्रौर तपोमय जीवन से. (जातः) प्रकटं होता है" जी . (सर्वान् लोकान्) सनं लोको मे (समानः ब्रह्म के लिये (नमः) नमस्कार हो; . 4 र केवलम् केव् सेवने. (स्वादिः) ।

English

Skambha set fast these two, the earth and heaven, Skambha maintained the ample air between them.

अध्याय 10

श्लोक 7.6

क्व॑१प्रेप्स॑न्ती युव॒ती विरू॑पे अहोरा॒त्रे द्र॑वतः संविदा॒ने।यत्र॒ प्रेप्स॑न्तीरभि॒यन्त्यापः॑ स्क॒म्भं तं ब्रू॑हि कत॒मः स्वि॑दे॒व सः

kva1prepsantī yuvatī virūpe ahorātre dravataḥ saṃvidāne| yatra prepsantīrabhiyantyāpaḥ skambhaṃ taṃ brūhi katamaḥ svideva saḥ

हिन्दी अर्थ

(कथम्) क्यो (वातः) वायु (न.इलयति) नहीं निद्वितं होती, (कथम्) क्यो (मनः) मन (न रमते) भराराम नहीं करता, संदा चञ्चल रहता है । (कंदाचन). कभी भी (न.इलयन्वि) नहीं निद्रित होते। . बात के.उन्निद्रित होने भ्रौर मन के श्रारामनकरनेकाभी है की शावाएं (स्कन्धः परितः) वृक्ष' की धड़. के चारों भोर आश्रय पाई, ूर्याद्वि देव उसं मे धाश्चय.पाए हए है. ।

English

Skambha established the six spacious regions: this whole world Skambha entered and pervaded. Homage to highest Brahma, him who, sprung from Fervour and from toil,

अध्याय 10

श्लोक 7.7

यस्मि॑न्त्स्त॒ब्ध्वा प्र॒जाप॑तिर्लो॒कान्त्सर्वाँ॒ अधा॑रयत्।स्क॒म्भं तं ब्रू॑हि कत॒मः स्वि॑दे॒व सः

yasmintstabdhvā prajāpatirlokāntsarvā~ adhārayat| skambhaṃ taṃ brūhi katamaḥ svideva saḥ

हिन्दी अर्थ

कां० १० ।सु० ७ भ्रथववेद-माध्य ३३३ देते है, (विमिते श्रमितम्) परिमित जगत् भँ भरपरिमित (तम्) उस करो सममरपित कर, उस के फल कीं भ्राकाङ्श्षां नहीं करते । ग ° या विनष्ट हरा है (सः) इसलिये. वह (पाप्मना). पपं. से (व्यावृत्तः) यो वैत हिरण्यय तिष्यन्तं सरिलि वेद 1..: -

English

Filled all the worlds completely, who made Soma for himself alone. Why doth the Wind move ceaselessly? Why doth the spirit take no rest?

अध्याय 10

श्लोक 7.8

यत् प॑र॒ममव॒मं यच्च॑ मध्य॒मं प्र॒जाप॑तिः ससृ॒जे वि॒श्वरू॑पम्।किय॑ता स्क॒म्भः प्र वि॑वेश॒ तत्र॒ यन्न प्रावि॑श॒त् किय॒त् तद् ब॑भूव

yat paramamavamaṃ yacca madhyamaṃ prajāpatiḥ sasṛje viśvarūpam| kiyatā skambhaḥ pra viveśa tatra yanna prāviśat kiyat tad babhūva

हिन्दी अर्थ

मँ (प्रजापततिः) प्रजापति है । ३३४ ' भथवेवेद-माष्य कां० १०। सुऽ ७ भी विमुक्त -है 1 इसलिये -यजु्वेद मेँ उसे भ्रपापविद्धम् कटा है (४०।८) । से रहित हो जाता है वह पापकम के करने से भी निवृत्त हो जाता है 1. : (एके) दो कोई (विल्पे) विरुढरूपों वाली. (युवती) युवदियां ;

English

Why do the Waters, seeking truth, never at any time repose? Absorbed in Fervour, is the mighty Being, in the world’s centre, on the waters’ surface. To him the Deities, one and all betake them. So stand the tree- trunk with the branches round

अध्याय 10

श्लोक 7.9

किय॑ता स्क॒म्भः प्र वि॑वेश भू॒तं कियद् भवि॒ष्यद॒न्वाश॑येऽस्य ।एकं॒ यदङ्ग॒मकृ॑णोत् सहस्र॒धा किय॑ता स्क॒म्भः प्र वि॑वेश॒ तत्र॑

kiyatā skambhaḥ pra viveśa bhūtaṃ kiyad bhaviṣyadanvāśaye'sya | ekaṃ yadaṅgamakṛṇot sahasradhā kiyatā skambhaḥ pra viveśa tatra

हिन्दी अर्थ

निज में उसे धारणः कर लतो है, (न प्रपवृञ्जाते) न तो इस कम॑ से वे श्रलग , . है4.षण्मगुखम् = ६ खूटे खू टो पर. ताना तान करं पेट बना जाता है । : -..संीदपट के. बनने भे ६ दिशाए, ६ सू टेः है । ६ दिशाएं =पूवं, दक्षिण, दुरे के अभिमुख हो कर श्राक्रमण करते हैँ । पट है संतार-पट । तंत्तिरीयं ' होता है । संघार पैदा भी होतो रहती है,-प्नौर इसका प्रलय भी हतां रहता : है--यह सनातन निम है । उत्पत्ति श्रौर प्रलय, --ये दोनों विषूम हये ::

English

it. Who out of many, tell me, is that Skambha.

अध्याय 10

श्लोक 7.10

यत्र॑ लो॒कांश्च॒ कोशां॒श्चापो॒ ब्रह्म॒ जना॑ वि॒दुः ।अस॑च्च॒ यत्र॒ सच्चा॒न्त स्क॒म्भं तं ब्रू॑हि कत॒मः स्वि॑दे॒व सः

yatra lokāṃśca kośāṃścāpo brahma janā viduḥ | asacca yatra saccānta skambhaṃ taṃ brūhi katamaḥ svideva saḥ

हिन्दी अर्थ

कोश इवाबन्धः परिकृत्यमानः' (४।१६।७) द्वारा - अनृतवादी के उदर को के नैतिक जीवनो का भ्रधिपति हो कर ब्रहस्पति के शासन में सहायक होता (निषं० १।१२) । उदक द्वारा बृहस्पति शतुभ्ों का हनन करता है । शत है पिपासा, क्षुधा, सूखापन भादि । बृहस्पति ने मणि को बान्धा । इसका परिणाम हा. “वात का निर्माण" । रसजा वरुण ने मणि को बान्धा । इस

English

Jātavedas kindled with devotion. Skambha, the Pillar or Fulcrum of all existence

अध्याय 10

श्लोक 7.11

यत्र॒ तपः॑ परा॒क्रम्य॑ व्र॒तं धा॒रय॒त्युत्त॑रम्।ऋ॒तं च॒ यत्र॑ श्र॒द्धा चापो॒ ब्रह्म॑ स॒माहि॑ताः स्क॒म्भं तं ब्रू॑हि कत॒मः स्वि॑देव सः

yatra tapaḥ parākramya vrataṃ dhārayatyuttaram| ṛtaṃ ca yatra śraddhā cāpo brahma samāhitāḥ skambhaṃ taṃ brūhi katamaḥ svideva saḥ

हिन्दी अर्थ

सीश्रगति वाली.वायु के नि्मणि के लिये (यम् मणिम्) जिस कामनारूपी (देवाः). विजिगीषुभ्रों न (बिभ्रतः) धारण करते हए (युघा) युद्ध द्वारां स्पति ने (एभ्यः) ईन विजिगीषोः के लिये या "हनं विजिगीषुभ्रों से, ३०२ भरथवेवेदे-माष्य कां० १०१०६ (जितिम् इत्) विजय को (दुहे) दोहा, (मूयोभूयः) बार-बार याः भ्रधि- कांधिक-रूप म (श्वः.दवः), ्राए दिनं प्रतिदिन (तेन) उस युद्ध.ह्यारा हे बृहस्थति ! (त्वम्) तू (द्विषतः) हमारे. दषी तुभो का (जहि) -हनन देवाः = विजिगीषु सेनाधिकारी वर्गं । . “दिवु क्रीडाविजिगीषा" भादि (दिवादिः) ।.“देव” द्वारां विजिगीषु भी भभिप्रेत 'होते है; यथा “दिवसेना- नाममिमञ्जतीनाम्” म देव कां प्रथं विजिगीषु है! उनकी सेनाभों को देवं-

English

Which of his members is the seat of Fervour: Which is the base of Ceremonial Order? Where in him standeth Faith? Where Holy Duty? Where, in what part of him is truth implanted?

अध्याय 10

श्लोक 7.12

यस्मि॒न् भूमि॑र॒न्तरि॑क्षं॒ द्यौर्यस्मि॒न्नध्याहि॑ता ।यत्रा॒ग्निश्च॒न्द्रमाः॒ सूर्यो॒ वात॒स्तिष्ठ॒न्त्यार्पि॑ताः स्क॒म्भं तं ब्रू॑हि कत॒मः स्वि॑दे॒व सः

yasmin bhūmirantarikṣaṃ dyauryasminnadhyāhitā | yatrāgniścandramāḥ sūryo vātastiṣṭhantyārpitāḥ skambhaṃ taṃ brūhi katamaḥ svideva saḥ

हिन्दी अर्थ

“सवं पाथिवर देश” 1 द्विषतः कां श्रभिघ्राय यह है किंपरमेदवरं हमारे टेहिकं तेथां पुराकृत-कभो के अनुसार हमे जय या पराजयः प्रदान करता है, प्ररमेदवर ही करभंफलप्रदाता है । जय या पराजंय मी कर्मफल हीं है 1 भ्रतः तमि देवता मणि भरत्य॑सुष्वन्त शं सुषम् । . . हीश्रगतिवाली वायुःके निर्माण के लिये (यम्, मणिम्) जिस कामनारूपीः (छंभुवम्) जो कि शान्ति पैदा करन. काली है, (हैवताः) : विजि गीषु

English

Out of which member glows the light of Agni? Form which proceeds the breath of Mātarisvan?

अध्याय 10

श्लोक 7.13

यस्य॒ त्रय॑स्त्रिंशद् दे॒वा अङ्गे॒ सर्वे॑ स॒माहि॑ताः ।स्क॒म्भं तं ब्रू॑हि कत॒मः स्वि॑दे॒व सः

yasya trayastriṃśad devā aṅge sarve samāhitāḥ | skambhaṃ taṃ brūhi katamaḥ svideva saḥ

हिन्दी अर्थ

को (दुहे) दोहा, (भूयोभूयः) बार्बार यां भधिकाधिक रूप में (तेत्त) उस रथात्. देवों की सेना ।. सेनाधिकारी तथा.-सेनाप्,. इन दोनो मेँ जनं दिषु). की .उग्रभावंना होती है, तमी-युद्ध मे विजय पाद जां सकती है 1 ५: शरजपिपिष्ष्टो मणितो मेऽषरं अके 0१६॥ ऋतवः) ऋतु न (तम्) उस कामनाह्पी मणि को मानो न्धा, (भातंवाः) ऋतु के.मवथों मसिं या ऋतुग्रोःके समूहो. भरयनकालीं ने

English

From which doth Chandra measure out his journey, travelling over Skambha’s mighty body? Which of his members is the earth’s upholder? Which gives the middle air a base to rest on? 161

अध्याय 10

श्लोक 7.14

यत्र॒ ऋष॑यः प्रथम॒जा ऋचः॒ साम॒ यजु॑र्म॒ही।ए॒क॒र्षिर्यस्मि॒न्नार्पि॑तः स्क॒म्भं तं ब्रू॑हि कत॒मः स्वि॑दे॒व सः

yatra ṛṣayaḥ prathamajā ṛcaḥ sāma yajurmahī| ekarṣiryasminnārpitaḥ skambhaṃ taṃ brūhi katamaḥ svideva saḥ

हिन्दी अर्थ

ने-शर्.चेवनका्योःकां वर्णेन वैदिक .राहित्यं मै. होतो हैः६ यथा - “तत्ः तेज ५; ९; भरन्तः: तथा अदिः का अभिप्रोयः-है परत्वे चेथो के निवे, तया दि्लाभ्रों बा प्रदेशो में निवात करने वाली. प्रजा । ग, बान्ा, (भदिषः भवान्वर दिशार्भो था भिनमत्त देशो मे निवास करते प्रजापतिसृष्ट मणि है. कामना, संकल्प, वृद़नि्चय १. प्रजापति ने. मानुषी परजाम मेँ इय - मणि की रचना की हुई है । . इस मणि दारा मनुष्य निजः

English

Where, in which member is the sky established? Where hath the space above the sky its dwelling?

अध्याय 10

श्लोक 7.15

यत्रा॒मृतं॑ च मृ॒त्युश्च॒ पुरु॒षेऽधि॑ स॒माहि॑ते ।स॒मु॒द्रो यस्य॑ ना॒ड्यः॑१ पुरु॒षेऽधि॑ स॒माहि॑ताः स्क॒म्भं तं ब्रू॑हि कत॒मः स्वि॑दे॒व सः

yatrāmṛtaṃ ca mṛtyuśca puruṣe'dhi samāhite | samudro yasya nāḍyaḥ1 puruṣe'dhi samāhitāḥ skambhaṃ taṃ brūhi katamaḥ svideva saḥ

हिन्दी अर्थ

के (पुरः) गढ़ को (बिभिदुः) तोड़्-फोड़ दिया ॥ (तेन) उस स्थिरन्नित्त- प्रतीत होते. । वे निज गुरुभं “थर्वा योगिर्यो के साथ स्नेहपूवंक उन से को५.१९ ६ सुग भथवतरेद-माष्यः इ०४ योगि श्रौरः -योगास्यासि्ो ने. जिस मभि.को बान््रा वहःदुदकामना, दृढ. ८ 0 .. ही सम्भव, है. । .मेदिनः-=निभिद्य-.. स्नेहने

English

Whitherward yearning blazeth Agni upward? Whitherward yearning bloweth Mātarisvan? Who out of many, tell me, is that Skambha to whom with long- ing go the turning pathways? Whitheward go the half-months, and, accordant with the full year, the months in their

अध्याय 10

श्लोक 7.16

यस्य॒ चत॑स्रः प्र॒दिशो॑ ना॒ड्य॑१स्तिष्ठ॑न्ति प्रथ॒माः ।य॒ज्ञो यत्र॒ परा॑क्रान्तः स्क॒म्भं तं ब्रू॑हि कत॒मः स्वि॑दे॒व सः

yasya catasraḥ pradiśo nāḍya1stiṣṭhanti prathamāḥ | yajño yatra parākrāntaḥ skambhaṃ taṃ brūhi katamaḥ svideva saḥ

हिन्दी अर्थ

हैः सत्रा ारण-पोषणः-.करता है। हसःमणि-को- धारणः करके धाता ने सृष्टि को ररा । यह सरणि. है सृष्टिरचताः मेँ तराता की कामन. इच्छा ॥ यथा ..“सौऽकामयत! - बृहदा ° उप ० ब्राह्यम र, खण्डः४-७). । धाता कौर कामना मात्र सरे ह. भत-मौतिक भृष्टि परदः होती है यह कामना ही संकल्पं: भौर दृढ़. निरचमे सूपः है । घाता खदिर काष्ठके फाल के विकारल्प मणिं “खदिरकाष्ठफालविकारं मणि शवुनालाय सवंकामाप्तये च बध्नाति" मुगिस) रिस मपिः करो वान्त, : खः); तरह (रयन्) यह (मिः) मर्ण निजस्वरूप में कामना को जागरित किया ॥ कामना यह्-कि,म-देवो को भरयेजनःहै,भोग भौर पवग 1 ““मोधापवेरगाथं दृष्यम्” (योगं ९१८ 1. कमनुसारी भोग, साघन है अपवंगं का,. मोक्ष का । भोगं दारा दुरे कमो का, फल; दुःखं प्रौर कष्टः भोग लेने पर शनैः-शरनः बुरे कमो का विनारो

English

procession? Who out of many, tell me, is that Skambha to whom go seasons and the groups of seasons?

अध्याय 10

श्लोक 7.17

ये पुरु॑षे॒ ब्रह्म॑ वि॒दुस्ते वि॑दुः परमे॒ष्ठिन॑म्।यो वेद॑ परमे॒ष्ठिनं॒ यश्च॒ वेद॑ प्र॒जाप॑तिम्।ज्ये॒ष्ठं ये ब्राह्म॑णं वि॒दुस्ते स्क॒म्भम॑नु॒संवि॑दुः

ye puruṣe brahma viduste viduḥ parameṣṭhinam| yo veda parameṣṭhinaṃ yaśca veda prajāpatim| jyeṣṭhaṃ ye brāhmaṇaṃ viduste skambhamanusaṃviduḥ

हिन्दी अर्थ

अधिकारी; बनता -जाता!है । सृष्ट प्ररमेषवरः का अनुग्ह॑ह्पं -टे नि भनुग्रह. है कि. वह सृष्टि मे शनेः. शनेः देवों को उत्त करता! हभ, मनुष्यौः दासा भोग्य पदां काः वणेन: हुभा है.।-. स्स: -रोषधिरसः है + यथा ष्यं मभि हि (गा धान्त मै प्रा है (नोः मलातिभिः नतेन, परजया सह) गौरो, बक्रिर्यो, मेड, भन्न भौर प्रजा 7 के. साथः ।,:

English

Whitherward yearning speed the two young Damsels, accordant, Day and Night, of different colour? Who out of many, tell me, is that Skambha to whom the Waters take their way with longing?

अध्याय 10

श्लोक 7.18

यस्य॒ शिरो॑ वैश्वान॒रश्चक्षु॒रङ्गि॑र॒सोऽभ॑वन्।अङ्गा॑नि॒ यस्य॑ या॒तवः॑ स्क॒म्भं तं ब्रू॑हि कत॒मः स्वि॑दे॒व सः

yasya śiro vaiśvānaraścakṣuraṅgiraso'bhavan| aṅgāni yasya yātavaḥ skambhaṃ taṃ brūhi katamaḥ svideva saḥ

हिन्दी अर्थ

भरपवरगोन्मुखी पथिक धनुमव करता है कि उन्नति के लिये, बृहस्पतिं न कं ९. १०१ सुर-६ भरथववेद्-माष्य ;:;: ३०७ मणिम्) जिस कामनामयी मभि को -(भकध्नाते) बान्वां, (सः) चंह (भयम् मणिर) यहु मणिः: (मा श्रागमत्) ,युमे आप्तः हुई है; (बरोहियवाभ्यां सह) धान रौर जौ के साय, (महां भूतया सह) महत्त भौर सम्प्ि ा विभति मणिम्) जिस कामनाभयो मणिं को (रव्यात्). बान्वा (सः) - बह (यम् मणिः) यह कामनामयी भणि (भा) मुम (भगमत्) प्राप्त ५६ है,

English

Who out of many, tell me, is that Skambha, On whom Prajāpati set up and firmly stablished all the worlds?

अध्याय 10

श्लोक 7.19

यस्य॒ ब्रह्म॒ मुख॑मा॒हुर्जि॒ह्वां म॑धुक॒शामु॒त।वि॒राज॒मूधो॒ यस्या॒हुः स्क॒म्भं तं ब्रू॑हि कत॒मः स्वि॑दे॒व सः

yasya brahma mukhamāhurjihvāṃ madhukaśāmuta| virājamūdho yasyāhuḥ skambhaṃ taṃ brūhi katamaḥ svideva saḥ

हिन्दी अर्थ

. (मषोः घृतस्य धारया) यहद रौर धृतं कीं धारा के साध, (मणिः) वंह. मणि (कीलंसेन, सह) भनौ तथा भन्न के सोरभूत भ्रंश कै साथ । कीलालेन =भन्ेन (अथव ° ६।६६1१, सायण । कीलालम् = ्रन्नस्थ भ्रार प्राण दार्विति, (पयसा दष-के. (सह) साथ, तथा (द्रविणेन) ! मन काह मपय नह कि शृत ते वो ो ममि प तेच रौर त्विषि काः परस्पर सम्बन्धं है, तशषा.यदा भौर कीति काभ,

English

That universe which Prajāpati created, wearing all forms,, the highest, midmost, lowest, How far did Skambha penetrate within it? What portion did he leave unpenetrated? How far within the past hath Skambha entered? How much of him hath reached into the

अध्याय 10

श्लोक 7.20

यस्मा॒दृचो॑ अ॒पात॑क्ष॒न् यजु॒र्यस्मा॑द॒पाक॑षन्।सामा॑नि॒ यस्य॒ लोमा॑न्यथर्वाङ्गि॒रसो॒ मुखं॑ स्क॒म्भं तं ब्रू॑हि कत॒मः स्वि॑दे॒व सः

yasmādṛco apātakṣan yajuryasmādapākaṣan| sāmāni yasya lomānyatharvāṅgiraso mukhaṃ skambhaṃ taṃ brūhi katamaḥ svideva saḥ

हिन्दी अर्थ

म्यौ मंन््र २२-२३ के अनुसार । -देवताः) देव (तं इमम्) ूवेवाधिदः इस (मणिम्) मणि को (ष्ये) , । ष्ट के लिय (मह्यम्) भुम (ददतु) देवे, जो कि (मणिम्) मणि (भरभि- कां०.१७१.सु० ६ भरथववेद-माष्य ३०९ उन काविनाश करनेवाली है 1... १, क ऊ ५ च

English

Skambha penetrate within it? Who out of many, tell me, is that Skambha in whom men recognize the Waters, Brahma, In whom they know the worlds and their enclosures, in whom are non-existence and

अध्याय 10

श्लोक 7.21

अ॒स॒च्छा॒खां प्र॒तिष्ठ॑न्तीं पर॒ममि॑व॒ जना॑ विदुः ।उ॒तो सन्म॑न्य॒न्तेऽव॑रे॒ ये ते॒ शाखा॑मु॒पास॑ते

asacchākhāṃ pratiṣṭhantīṃ paramamiva janā viduḥ | uto sanmanyante'vare ye te śākhāmupāsate

हिन्दी अर्थ

देवला दाख हा है, या इसका श्रभिप्राय है दिव्यगुणी महातपा आदि । म्र मे “मणि” क श्रभिप्रायं.है, शुभकामना, तथा शुभ संकल्प । इस दारा सुद दित्ार -भौर कमख्पी शुभो का पराभव तथा दप्न होता, तथा (्रहय्णा तेजसा" ब्रह्मः श्नौरं उस केः तेजं-के (सह) सायः्साथ. (मे). रूपी मणि को (्रति.मुञ्चोमि). व .षारण करता हं। गृह ; मणि (भरसपतनः) सपत्नो से रहित करती है, (सपत्नहा ) -संपनों का ह्न करती (१) श्रासुर' विचारयोःधरौर भासुरः करो के कषयके कारण के ब्रह्म भ्रोर उसः का बेज्॑राष्त भ्रा ह ।.“ (२) सके साथ ही मेरे जीवन -मे मेर को सपत्न काम, कोष भादि नहीं रहा 1 (३)-यदि कोई सपलन प्रविष्ट हैः तो यह मणि उस का हनन कर देगी. (४); वस्तुतः इस.मण्नि ने; मेरे सब. ौ १; ३१२ : भ्रथववेद-माष्य कां०:१० .सः ६

English

existence? Declare that. Skambha, who is he of many,

अध्याय 10

श्लोक 7.22

यत्रा॑दि॒त्याश्च॑ रु॒द्राश्च॒ वस॑वश्च स॒माहि॑ताः ।भू॒तं च॒ यत्र॒ भव्यं॑ च॒ सर्वे॑ लो॒काः प्रति॑ष्ठिताः स्क॒म्भं तं ब्रू॑हि कत॒मः स्वि॑दे॒व सः

yatrādityāśca rudrāśca vasavaśca samāhitāḥ | bhūtaṃ ca yatra bhavyaṃ ca sarve lokāḥ pratiṣṭhitāḥ skambhaṃ taṃ brūhi katamaḥ svideva saḥ

हिन्दी अर्थ

करं०-१८ ५ सु० भ्रयत्रवेद-भोष्यः ५५. भरौरः दषं का;या दोहः दुष आदि.का इमे क्षयः लोकाः) ये (व शेष्टता के लिये, ताकि गै धेष्ठः बनः जाऊ । -. .. ध (यजञवर्धन मणे) है मणि (यसै - जिसे कैने,. (शिवम् मणे) .यज्ञ वर्धकः है ; यस्मै). जि वम्, . ¦ : :.:+ कोहीःमणिकहा हैः सदृगुष, जिस भ्रभ्प्रासी.को थह शिवमणि.. पहनात्रा ह. पा.सक.। परमेदवर के. हस-उह् र्य.मे जो महानुभाव सहायता .प्रदान.करते करते या जीवित होते ह, (सः मभिः). बह परमेदबरमणि (रा) मेरे ,' ह व दिणा केत होते है इभिये परमस को "पदिण कदी है ।

English

In whom, exerting every power, Fervour maintains her loftiest vow; In whom are comprehended Law, Waters, Devotion and Belief Who out of many, tell me, is that Skambha

अध्याय 10

श्लोक 7.23

यस्य॒ त्रय॑स्त्रिंशद् दे॒वा नि॒धिं रक्ष॑न्ति सर्व॒दा।नि॒धिं तम॒द्य को वे॑द॒ यं दे॑वा अभि॒रक्ष॑थ

yasya trayastriṃśad devā nidhiṃ rakṣanti sarvadā| nidhiṃ tamadya ko veda yaṃ devā abhirakṣatha

हिन्दी अर्थ

उपजाऊ भमि मे, (बीजम्) बीजः (युथा) जसे (रोति) प्ररोह करतादहै, ।॥ ब्रह्म॑णा ॥३५॥ र प्रादभ त होता है .(एवा) इषो अकार् (मयि) मेरे निमित्त. (प्रजाः, पशवः) ( - ४४ श्तदरकषिण तदथं हमारी. सैको, स्तुतिरूप -द्षिणाभरो के. श्रधिकारीं पूवं के मन्त्र मेँ कथित कामनार्थं कै सफन हो जनि प॑र परमेरवर के ॥ जंल, मेषरूपं होकर, . जवं बंरसते दहै, तब.श्रनन की उत्पत्ति कः वणितः भ्रमिलषारएं पूं होती ह । जतिवेदाः भग्न है जो करि “जातः" . भर्थातूरः

English

On whom as their foundation earth and firmament and sky are set; In whom as their appointed place rest Fire and Moon and Sun and Wind?

अध्याय 10

श्लोक 7.24

यत्र॑ दे॒वा ब्र॑ह्म॒विदो॒ ब्रह्म॑ ज्ये॒ष्ठमु॒पास॑ते ।यो वै तान् वि॒द्यात् प्र॒त्यक्षं॒ स ब्र॒ह्मा वेदि॑ता स्यात्

yatra devā brahmavido brahma jyeṣṭhamupāsate | yo vai tān vidyāt pratyakṣaṃ sa brahmā veditā syāt

हिन्दी अर्थ

उत्व परत्यक पदां में विद्यमान है + “जातवेदाः-=जातानि व्द । जातानि जातप्रजञः” (निखक्त ७।५।१९ ) । लथां “जातवेदस दति जातमिदं सर्व सच रा प्रज्वलित होती है, चमकती है । जातवेदाः की निखुकितयां प्रमेवराण्नि मे भरधिक सुसंगत होती है, उस के समिद्ध हो जानि प्र, प्रकट ह नाने पर दारां पा्षो.की निवृत्तिं (४०) हिरण्यय वेतस (४१) । संसारपट.का

English

Who out of many, tell me, is that Skambha He in whose body are contained all three-and-thirty Deities? Who out of many, tell me, is that Skambha.

अध्याय 10

श्लोक 7.25

बृ॒हन्तो॒ नाम॒ ते दे॒वा येऽस॑तः॒ परि॑ जज्ञि॒रे।एकं॒ तदङ्गं॑ स्क॒म्भस्यास॑दाहुः प॒रो जनाः॑

bṛhanto nāma te devā ye'sataḥ pari jajñire| ekaṃ tadaṅgaṃ skambhasyāsadāhuḥ paro janāḥ

हिन्दी अर्थ

३१४ ' पमथरवेवेद-भाष्य कां० १०॥। सू० ७ -. परसेदवर् “रकाय है (यजु० ४०।८), काया 4 रदित है 4.4 भरतः इस के.मद्गं नदीं द । परन्तु - वेदो ओर. वैदिक साहित्य म परभरवर. को पुरुष यस्याः पुरुप.उच्थते.(श्रयंवं ° १९१२।१८) । “पुरुषविशेष ईश्वरः '.(पोग दोनों पुरषपद वाच्य है । इस साधम्यं के कारण़ मानुषे-पुरुष कर भज्ञोका नारोप परमेदवर-पुरष मे हमा है. सातूष-पुरष के भिन्न-भिन्न भङ्गा का भूषय से मूतः लिङ्क से बीर प्रवाहित होता है । इसी भकार मस्तिष्कं भं :

English

In whom the Sages earliest born, the Richas, Sāman, Yajus, Earth, and the one highest Sage abide?

अध्याय 10

श्लोक 7.26

यत्र॑ स्क॒म्भः प्र॑ज॒नयन् पुरा॒णं व्यव॑र्तयत्।एकं॒ तदङ्गं॑ स्क॒म्भस्य॑ पुरा॒णम॑नु॒संवि॑दुः

yatra skambhaḥ prajanayan purāṇaṃ vyavartayat| ekaṃ tadaṅgaṃ skambhasya purāṇamanusaṃviduḥ

हिन्दी अर्थ

कं केथन शन मन्त म नहीं हमा जिनसे कि ये कायं हो. रहे ह । परमेरवंर् के ्रङ्ख है नदी, भरतः उन का कथने. मी नहीं हृभरा। भयवा भन्ञेका . भिन्न-भिन्न सामथ्ये । यजुकेद (४५१ १०-१३ ) में परमदवर पुष कां१, १०:।्९.७ -अथवववेव-माष्य ३१५ सामथ्यं को मोपतादहृभा! , र करी भ्रोर करमशः बुढृता जाता है, : मानोः वह क्रमशः श्रागे-भ्रागे बढ़ता हृ 7

English

Who out of many, tell me, is the Skambha. Who comprehendeth, for mankind, both immortality and death, He who containeth for mankind the gathered waters as his veins?

अध्याय 10

श्लोक 7.27

यस्य॒ त्रय॑स्त्रिंशद् दे॒वा अङ्गे॒ गात्रा॑ विभेजि॒रे।तान् वै त्रय॑स्त्रिंशद् दे॒वानेके॑ ब्रह्म॒विदो॑ विदुः

yasya trayastriṃśad devā aṅge gātrā vibhejire| tān vai trayastriṃśad devāneke brahmavido viduḥ

हिन्दी अर्थ

मातरि भ्रार्वनितीति वा, वायुः” (निरत ७।७।२६), मातरिद्वा वायु है, १. भूमि भरादि भका मे तिराधार कैसे स्थिव है - भतः भारय" मे .भदन कर्ता, निज मन मँ प्रदनं करता, है ॥. „ , ३ १ ६ । भथ्ववेद-भाष्य कां० १०।.स्५ ७ यो भ्न्तरिक्षे रजसो विमानः, कस्मै देवाय हविषा विषम” (यजु° ३२।६ ) भ चौ, पृथिवी, स्वः, नाकः, भन्तरिक्षम्--ये ५ लोक कटे है ।. “दिवः (ेष्न्) जाना चाहती हुई (मातरिष्वा) वाग (पवते) बहती है । (यत्र)

English

Who out of many, tell me, is that Skambha, He whose chief arteries stand there, the sky’s four regions, he irk whom Sacrifice putteth

अध्याय 10

श्लोक 7.28

हि॒र॒ण्य॒ग॒र्भं प॑र॒मम॑नत्यु॒द्यं जना॑ विदुः ।स्क॒म्भस्तदग्रे॒ प्रासि॑ञ्च॒द्धिर॑ण्यं लो॒के अ॑न्त॒रा

hiraṇyagarbhaṃ paramamanatyudyaṃ janā viduḥ | skambhastadagre prāsiñcaddhiraṇyaṃ loke antarā

हिन्दी अर्थ

उसमें दुःख का लेशं मी नहीं वह भ्रानन्दख्प है । ह मातरिदवा, देखो मन्त्र (२) । कतमः स्विद् अथवा “वह कौन सा हीह! उसे स्कम्भ कटर" 4 4 षट्क" । मार्सो का वणेन मन्त के र्वा मे हो चुका है 1 (्प्सन्ती;) जाने की. इच्छा. वाले (द्रवतः) गति कर रटे ह, ८ दौड़ रहे ै। -. . दिन-रात सदा युवा है, सृष्टिः के.श्रारम्भ से गति कर रहै है. थकावट ्तुभव नहीं करते, श्रतः सदा युवा है । इन भेदिन् तो शुक्ल है मरौर रावि

English

forth its might? They who in Purusha understand Brahma know Him who is. Supreme.

अध्याय 10

श्लोक 7.29

स्क॒म्भे लो॒काः स्क॒म्भे तपः॑ स्क॒म्भेऽध्यृ॒तमाहि॑तम्।स्कम्भ॑ त्वा वेद प्र॒त्यक्ष॒मिन्द्रे॒ सर्वं॑ स॒माहि॑तम्

skambhe lokāḥ skambhe tapaḥ skambhe'dhyṛtamāhitam| skambha tvā veda pratyakṣamindre sarvaṃ samāhitam

हिन्दी अर्थ

लहसें के जल, वाष्पीभरुत. बौर मेधीय तथा वर्षा के जल । स्कम्मं ते इहि कतमः सविदेव सः॥७॥ =. . एति, (सर्वान् लोकान् ) . सब. लोकों को (अषांरयत्) धारण कर रहा हँ समृजे) प्रजा के पंति ने.सृष्टं किया है रचा है, ( तत्र) उसमे (कियता) -यञुवेद मेः कहा .है किधादोऽस्य विद्वा भूतानि, त्रिपादस्यामृतं दिवि"

English

He who knows Him who is Supreme, and he who knows the Lord of Life,

अध्याय 10

श्लोक 7.30

इन्द्रे॑ लो॒का इन्द्रे॒ तप॒ इन्द्रेऽध्यृ॒तमाहि॑तम्।इन्द्रं॑ त्वा वेद प्र॒त्यक्षं॑ स्क॒म्भे सर्वं॒ प्रति॑ष्ठितम्

indre lokā indre tapa indre'dhyṛtamāhitam| indraṃ tvā veda pratyakṣaṃ skambhe sarvaṃ pratiṣṭhitam

हिन्दी अर्थ

“श्रापः' प्रथमा विभवति मे है, भरतः “जनाः का विशेषण है। “ वेत्ता जानते हैः (श्रथुवं ० ७।२७ ३२० । श्रथववेद-भाष्य कां० १० सू० 9 जिस में (द्यौः) च लोक (भ्ाहिता) स्थित है (यत्र) ध हरा है, इस लिये उस के निर्दशे ये सब चल् रहे है ।

English

Who out of many, tell me, is that Skambha Whose mouth they say is Holy Lore, his tongue the Honey- sweetened Whip, his udder is

अध्याय 10

श्लोक 7.31

नाम॒ नाम्ना॑ जोहवीति पु॒रा सूर्या॑त् पु॒रोषसः॑ ।यद॒जः प्र॑थ॒मं सं॑ब॒भूव॒ स ह॒ तत् स्व॒राज्य॑मियाय॒ यस्मा॒न्नान्यत् पर॒मस्ति॑ भू॒तम्

nāma nāmnā johavīti purā sūryāt puroṣasaḥ | yadajaḥ prathamaṃ saṃbabhūva sa ha tat svarājyamiyāya yasmānnānyat paramasti bhūtam

हिन्दी अर्थ

शम्भं ते शरदि. कतमः स्विदेव सः ॥१२॥ = रव जिस के भ्म (सवे) सब (त्रमस्तरि्त् देवाः ) ३३ १११ ) यजुरवंद ७।१९ में कहा है कि “देवा. दिवि क्ष मे स्थितहै। “भ्रापः त (निधं० १1३) । बृहदारण्यकोपनिषद् में कटरा है कि “कतमे ते त्रयस््रिरादिति, ॑ एकाद स्थ, पुंधिव्याम् एकाद स्थ, होता है कि ३३ देवतान मे ११ तो द्युलोकस्य है, प्रकृतिजन्य कहा है (ङ्ख गात्रा - (अथव ० ७।२७ 88, क

English

Virāj, they say? Who out of many, tell me, is that Skambha From whom they hewed the lichas off, from whom they chipped the Yajus, he

अध्याय 10

श्लोक 7.32

यस्य॒ भूमिः॑ प्र॒मान्तरि॑क्षमु॒तोदर॑म्।दिवं॒ यश्च॒क्रे मू॒र्धानं॒ तस्मै॑ ज्ये॒ष्ठाय॒ ब्रह्म॑णे॒ नमः॑

yasya bhūmiḥ pramāntarikṣamutodaram| divaṃ yaścakre mūrdhānaṃ tasmai jyeṣṭhāya brahmaṇe namaḥ

हिन्दी अर्थ

एकषियैस्मिभारषितः स्कम्भं तं वहि कतमः सदेव घः ॥१४॥ ... : ऋषयः-- सम्भवतः चार ऋषि, जिन कै दारा चार वेद प्रकट हुए । ये द्वारा प्रकट हुभा हो, भ्रतः धरंथर्वाः को एकषि कहा है । सिंदेव सः ॥१५॥ =," त (यत्न पुरषे, भरधि) जिस परमेदवर-पुंरषं में (श्रमृतम्, च) मोक्ष नदियों मेत समुद्रं (यस्म). जिस का (नाडघः) नाडीसंस्थान है, जो

English

Whose hairs are Sāma-verses and his mouth the Atharvāngi- rases?

अध्याय 10

श्लोक 7.33

यस्य॒ सूर्य॒श्चक्षु॑श्च॒न्द्रमा॑श्च॒ पुन॑र्णवः ।अ॒ग्निं यश्च॒क्र आ॒स्यं॑ तस्मै॑ ज्ये॒ष्ठाय॒ ब्रह्म॑णे॒ नमः॑

yasya sūryaścakṣuścandramāśca punarṇavaḥ | agniṃ yaścakra āsyaṃ tasmai jyeṣṭhāya brahmaṇe namaḥ

हिन्दी अर्थ

पशुषे परमेरवर'पुखुष, जो कि ब्रह्मपुर रम निवास करता है, (श्रथ ०. मानुष-शरीरस्थ रक्त-वाहिनी नाडियां । वेद मे हृदय को “समुद्र” मी कहते . २. मरन््ो मेँ भ्रथर्वा-ऋषि के कथन से वेद मे एेतिहासिक वणेन नहीं जाननां ऋषि है । ये माुष-पुत्र नही, जिन का कि सम्बन्ध इतिहास के साथ होता है.। है । भरतः “समुद्रः” मे एक वचन, भौर “नाडधः” में बहुवचन के प्रयोगो दवारा

English

Men count as ‘twere a thing supreme nonentity’s conspicuous branch; And lower man who serve thy branch regard it as an entity. Who out of many, tell me, is that Skambha

अध्याय 10

श्लोक 7.34

यस्य॒ वातः॑ प्राणापा॒नौ चक्षु॒रङ्गि॑र॒सोऽभ॑वन्।दिशो॒ यश्च॒क्रे प्र॒ज्ञानी॒स्तस्मै॑ ज्ये॒ष्ठाय॒ ब्रह्म॑णे॒ नमः॑

yasya vātaḥ prāṇāpānau cakṣuraṅgiraso'bhavan| diśo yaścakre prajñānīstasmai jyeṣṭhāya brahmaṇe namaḥ

हिन्दी अर्थ

मानुष-शरीरस्थ हंदय-भ्ौर-नाडियां रूप कही है । स्कम्भ को पुरुष कहा (यस्य ) जिस की. (चतस्रः प्रदिशः) . चार दिशाएं (प्रथमाः) चार . के चार कोष्ठक होतेह, (१) 1 ॥1 श्णा०ल (र) , 2 रला. है, जिन कि. पएए़लां०ः ०02 08४8 तथा र्णिति07 रला 0त्रणव कहते हैं । शरीर के श्रधोभाग से गन्दा रक्त, रिण ४6०8 04४8४ मेँ

English

In whom Ādityas dwell, in whom Rudras and Vasus are contained, In whom the future and the past and all the worlds are firmly set;

अध्याय 10

श्लोक 7.35

स्क॒म्भो दा॑धार॒ द्यावा॑पृथि॒वी उ॒भे इ॒मे स्क॒म्भो दा॑धारो॒र्व॑१न्तरि॑क्षम्।स्क॒म्भो दा॑धार प्र॒दिशः॒ षडु॒र्वीः स्क॒म्भ इ॒दं विश्वं॒ भुव॑न॒मा वि॑वेश

skambho dādhāra dyāvāpṛthivī ubhe ime skambho dādhārorva1ntarikṣam| skambho dādhāra pradiśaḥ ṣaḍurvīḥ skambha idaṃ viśvaṃ bhuvanamā viveśa

हिन्दी अर्थ

कटु होकर 1२1800८ वण०रमे ध्रा गिरताहै। शरीरके ऊपरके भागसे भी गन्दा रक्त, ऽपफएव्यणः शाद ०३१४ में इकटुा हो करः रिशा व्ण. ०९ न्ना गिरता है। पिशा 2ण71८16 जब -गन्दे रक्त सेभरजाताहै. तब यहां से गन्दा रक्त 21801 9०70016 मे जाता है । इसके भर जाने पर समग्र शरीर मँ जाता है। इस प्रकार हदयं मे चार मुख्य नाब्ियां होती हैः रक्त को फेफडों मे भेजने वाली नाड़ी एणाण०णका लाए, (४) शुद्ध रक्त को हृदय में लाने वाली नाड़ी वणाणणा०ा ला । ये चार नाडियां मुख्य नाडियां ह ्ोकि “चतन्नः प्रदिशाः” की प्रतिरूपिणी ह ।

English

Whose secret treasure evermore the three-and thirty Gods protect? Who knoweth now the treasure which, O Deities ye watch and guard? Where the Gods, versed in Sacred Lore, worship the loftiest

अध्याय 10

श्लोक 7.36

यः श्रमा॒त् तप॑सो जा॒तो लो॒कान्त्सर्वा॑न्त्समान॒शे।सोमं॒ यश्च॒क्रे केव॑लं॒ तस्मै॑ ज्ये॒ष्ठाय॒ ब्रह्म॑णे॒ नमः॑

yaḥ śramāt tapaso jāto lokāntsarvāntsamānaśe| somaṃ yaścakre kevalaṃ tasmai jyeṣṭhāya brahmaṇe namaḥ

हिन्दी अर्थ

कां० १० सू०७ भरथरवंवेद-माष्य ३२३ हदय के चार कोष्ठटकोंका कृतिम चिच्र- ये पुरुषे ब्रह्म॑ षिदुस्ते विदुः परमेष्ठि । यो वेद परमेष्ठिने यश्च वेहै प्रजापति । (ये) जो (पुर्षे) पुरी मेँ शयन करने वाले जीवात्मा मँ (ब्रह्म विदुः) को जानता है (यःच) श्रौर जो (प्रजापतिम् वेद) उस के प्रजापति

English

Power Divine The priest who knows them face to face may be a sage who knows the truth.

अध्याय 10

श्लोक 7.37

क॒थं वातो॒ नेल॑यति क॒थं न र॑मते॒ मनः॑ ।किमापः॑ स॒त्यं प्रेप्स॑न्ती॒र्नेल॑यन्ति क॒दा च॒न

kathaṃ vāto nelayati kathaṃ na ramate manaḥ | kimāpaḥ satyaṃ prepsantīrnelayanti kadā cana

हिन्दी अर्थ

प्रकृति-श्नौरःपुरुष- जीवात्मा मे, परम है पुरुष जीवात्मा , इस परम-पुश्ष मँ स्थित परमेरवर. परमेष्टी नाम वाला है। तथा प्रकृति मेँ ३२४ भ्रथ्वेवेद-माष्य कां १० ५ सू० ७ (वेश्वानरः) सूयं (यस्य) - जिसका शिरः सिरं है, (अ्रदङ्किरसः) तथा सूयं की रदिमयां (चक्षुः) भ्रंख की रदिमयां (अभवन्) हुई है। जताने के लिये कि जैसे मानुष-पुखष के भङ्गो मे प्रेरणा जवात्मा द्वारा होती विराजमूधो यस्याह स्कम्भं तं ब्रहि कतमः सिवंदेव सः॥१९॥ कहते है, (उत), भ्रौर (मधुकम्) रेदयीरूप मधुर वेदवाणौ (जिह्वाम्)

English

Great, verily, are those Gods who sprang from non-existence into life. Further, men say that that one part of Skambha is nonentity. Where Skambha generating gave the Ancient World its shape and form,

अध्याय 10

श्लोक 7.38

म॒हद् य॒क्षं भुव॑नस्य॒ मध्ये॒ तप॑सि क्रा॒न्तं स॑लि॒लस्य॑ पृ॒ष्ठे।तस्मि॑न्छ्रयन्ते॒ य उ॒ के च॑ दे॒वा वृ॒क्षस्य॒ स्कन्धः॑ प॒रित॑ इव॒ शाखाः॑

mahad yakṣaṃ bhuvanasya madhye tapasi krāntaṃ salilasya pṛṣṭhe| tasminchrayante ya u ke ca devā vṛkṣasya skandhaḥ parita iva śākhāḥ

हिन्दी अर्थ

जिह्वा है, ठा कहते ह । (विराजम्) प्रकृति को (यस्य) जिस का (ऊधः) . त । "वहति यत् इति ऊघः, गवादेदुंगस्थानं वा” (उणा ° ४११९४, महषि दयानन्द ), यह. ऊधः दुर्ध का वहन करता है । शन्दोच्चा- (१४) मे. “यत्र ऋषयः प्मथजाः' इस बहुवचन हारा तीन ऋषियों का,. ऋषियों के साथ ही इन द्वारा भ्राविभरुत चार वेदोका भी कथन हृप्ना है). प्रकृति है विराञ्-रूपी-गौः ! इस से परमेइवर ने जगत् रूपी दध्र दोहा है ।

English

They recognized that single part of Skambha as the Ancient World,

अध्याय 10

श्लोक 7.39

यस्मै॒ हस्ता॑भ्यां॒ पादा॑भ्यां वा॒चा श्रोत्रे॑ण॒ चक्षु॑षा ।यस्मै॑ दे॒वाः सदा॑ ब॒लिं प्र॒यच्छ॑न्ति॒ विमि॒तेऽमि॑तं स्क॒म्भं तं ब्रू॑हि कत॒मः स्वि॑दे॒व सः

yasmai hastābhyāṃ pādābhyāṃ vācā śrotreṇa cakṣuṣā | yasmai devāḥ sadā baliṃ prayacchanti vimite'mitaṃ skambhaṃ taṃ brūhi katamaḥ svideva saḥ

हिन्दी अर्थ

कां०.१० । सू० ७ भ्रथ्वेवेद-माष्य ३२५ (यस्मात्) जिस परमेश्वर से ऋषियों ने (ऋचः) ऋवाश्रों ऋर- (यस्य) .जिस परमेरवर के (लोमानि). लोम सदृश है । (्रथर्वाङ्कखिरसः) भरङ्खों के तथा भरोषधि्यो के रसो का वर्णेन करने वाला भ्रथवंवेद (मुखम्) भ्रषाकषन् = इस क्रियापद मे “कष” धातु है जिस का श्रथं है “हिसा (स्वादि) । ऋषि या तपस्व, निज एषणा का क्षय करके, यजुर्वेद को करते है! सामवेद भविततगानों का वर्णेन करता है, जिन गानो द्वारा प्रायः नोमहृषेण हो जाता है । भ्रतः सामों को लोमानि कहां है । प्रथववेद मे नाना

English

The three-and-thirty Gods within his body were disposed as limbs: Some, deeply versed in Holy Lore, some know those three-and- thirty Gods. Men know Hiranyagarbha as supreme and inexpressible:

अध्याय 10

श्लोक 7.40

अप॒ तस्य॑ ह॒तं तमो॒ व्यावृ॑त्तः॒ स पा॒प्मना॑ ।सर्वा॑णि॒ तस्मि॒न् ज्योतीं॑षि॒ यानि॒ त्रीणि॑ प्र॒जाप॑तौ

apa tasya hataṃ tamo vyāvṛttaḥ sa pāpmanā | sarvāṇi tasmin jyotīṃṣi yāni trīṇi prajāpatau

हिन्दी अर्थ

उपासना करते रहते है। चान्द, सू्य,मूति भादि भभिव्यक्त पदाथं शाखारूप है, वे इन शाखाभ्रों की उपासना मँ मस्त रहते है । व्याख्या के लिये देखो (मन्त्र १३) । निषि तम॒थकोवेद यं द्वा मभिरक्षय ॥२३॥ (भ्र्य) भाज तक, -(कः वेद). कोन जानता है (यम्) जिस. निधिकी देवाः) है देवो ! (श्रभिरक्षथ) तुम रक्षा करते हो । , 8

English

Skambha, I clearly know that all of thee on Indra is imposed. On Indra Fervour rests, on him the worlds and Holy Law recline. Indra, I clearly know that all of thee on Skambha findeth rest.

अध्याय 10

श्लोक 7.41

यो वे॑त॒सं हि॑र॒ण्ययं॒ तिष्ठ॑न्तं सलि॒ले वेद॑ ।स वै गुह्यः॑ प्र॒जाप॑तिः

yo vetasaṃ hiraṇyayaṃ tiṣṭhantaṃ salile veda | sa vai guhyaḥ prajāpatiḥ

हिन्दी अर्थ

निधि जगत् 4 इस के रहस्य को कोई नहीं जानता । भ्रथवा निधि वेद । इस के भी रदस्य को भ्राज ठक किसी ने नहीं जाना । यथा “निधि- कां० १० सु० ७ म्रथरवेवेद-भाष्य । ३२७ हो जाता है, भरौर (वेदिता) ब्रह्मवेत्ता हो जाता है । बनता है। वेदोँमें ब्रह्मकी ही उपासना विहित है, यथा न न वेदं - ज्येष्ठन्रह्य के उपासक कटे है । ।

English

Ere sun and dawn man calls and calls one Deity by the other’s name. When the Unborn first sprang into existence he reached that independent sovran lordship;

अध्याय 10

श्लोक 7.42

त॒न्त्रमेके॑ युव॒ती विरू॑पे अभ्या॒क्रामं॑ वयतः॒ षण्म॑यूखम्।प्रान्या तन्तूं॑स्ति॒रते॑ ध॒त्ते अ॒न्या नाप॑ वृञ्जाते॒ न ग॑मातो॒ अन्त॑म्

tantrameke yuvatī virūpe abhyākrāmaṃ vayataḥ ṣaṇmayūkham| prānyā tantūṃstirate dhatte anyā nāpa vṛñjāte na gamāto antam

हिन्दी अर्थ

, बृहन्तो नाम् ते देवा येऽस॑तः परिं जह्रे । (ते देवाः) वे देव (बृहन्तः) परिमाण में बड़ होतेह (ये) जोकि प्रकृति से जो दिव्यपदाथं पैदा होते ह वे परिमाणो में बड़ होतेह कूल्येन परस्पर सहमत हो कर जानते है । पराण =पुराकाल से वतमान प्रकृति । मन्त्र २५ म प्रकृति को

English

than which aught higher never hath arisen. Be reverence paid to him, that highest Brahma, whose base is Earth, his belly Air, who made the sky to be his head.

अध्याय 10

श्लोक 7.43

तयो॑र॒हं प॑रि॒नृत्य॑न्त्योरिव॒ न वि जा॑नामि यत॒रा प॒रस्ता॑त्।पुमा॑नेनद् वय॒त्युद्गृ॑णन्ति॒ पुमा॑नेन॒द् वि ज॑भा॒राधि॒ नाके॑

tayorahaṃ parinṛtyantyoriva na vi jānāmi yatarā parastāt| pumānenad vayatyudgṛṇanti pumānenad vi jabhārādhi nāke

हिन्दी अर्थ

३३ देवों के लिये देलो मन्त्र (१३) । ॑ यदय है; भ्रनतिवंदनीय है, इसंके सम्बन्ध में भ्रधिक कहा नहीं जा सकता । कां१.१० । सू० ७ भरथरवेवेद-माष्य ३२९ लोकाः तीनों लोक । तपः=-देशव्यं (तप एेदवये, दिवादिः)! ऋतम् = सांसारिक नियम । मन्व मे स्कम्भ को इन्र कहाहै1 इं कोकां हृदे तप इनरेष्येतमाहतम् । २३३० भ्रथवववेद-माष्य -कांर १०॥सु० 3

English

Homage to highest Brahma, him whose eye is Sūrya and the Moon who groweth young and new again, him who made

अध्याय 10

श्लोक 7.44

इ॒मे म॒यूखा॒ उप॑ तस्तभु॒र्दिवं॒ सामा॑नि चक्रु॒स्तस॑राणि॒ वात॑वे

ime mayūkhā upa tastabhurdivaṃ sāmāni cakrustasarāṇi vātave

हिन्दी अर्थ

दय से पहिले, (पुरा एषसः) तथा उषा के काल से पहिले, (जोहवीति) - दय भ्रौर उषा से पूवं (सम्बभूव ) उपासना में उपस्थित होता है (सः). वह, भोज्य पदाथं को चवित्त कर के उसे सूषक्षमलूप कर देता है । कार-१०।-सु०७ भ्रथवंवेद"माष्य . ˆ ३३१ (वातः) वायु (यतस्य) जिसके (प्राणपानौ) प्राण भौर भ्रपानरहै

English

Agni for his mouth. Homage to highest Brahma, him whose two life-breathings were the Wind, The Angirases his sight: who made the regions be his means of sense.

स्रोत: bhavykhatri/DharmicData · प्राप्त 3/6/2026

शास्त्रीय प्रामाणिकता एवं पारदर्शकताSources & Interpretation

स्रोत, संस्करण एवं व्याख्या वर्गीकरण

धर्म ग्रंथ पर मूल शास्त्र, पारंपरिक भाष्य और आधुनिक व्याख्या को पूर्णतः पृथक रखा जाता है ताकि पाठक को किसी भी व्याख्या के शास्त्र होने का भ्रम न हो।

सामग्री वर्गीकरण संकेत (Epistemic Content Labels)

6 स्तरिय प्रमाण व्यवस्था
मूल पाठOriginal text

अपौरुषेय / प्रामाणिक शास्त्र (Primary Canonical Scripture)

मूल संस्कृत, प्राकृत अथवा अवधी श्लोक/मंत्र। यह सर्वोच्च प्रमाण (प्रस्थान) है। इस पाठ में किसी भी आधुनिक व्याख्याकार का हस्तक्षेप नहीं है।

शाब्दिक अनुवादLiteral translation

पदार्थ व अन्वय (Direct Grammatical & Word-for-Word Meaning)

व्याकरणसम्मत प्रत्यक्ष शब्दार्थ (अन्वय)। बिना किसी दार्शनिक संप्रदाय के पूर्वाग्रह के, संस्कृत शब्दों का सटीक भाषांतर।

पारंपरिक भाष्यTraditional commentary

आचार्य परंपरा व टीका (Classical Lineage Commentary)

प्राचीन आचार्य परंपरा (यथा शंकराचार्य, रामानुजाचार्य, मध्वाचार्य, श्रीधर स्वामी) द्वारा विरचित शास्त्रीय भाष्य व टीकाएं।

सरल व्याख्याSimple explanation

भावार्थ व सुबोध प्रबोधन (Accessible Pedagogical Exposition)

आधुनिक जिज्ञासुओं के लिए सरल भाषा में भावार्थ। यह मूल मंत्र नहीं, बल्कि पाठ को सुगम बनाने हेतु संपादकीय व्याख्या है।

आधुनिक चिंतनModern reflection

समसामयिक विमर्श व अनुप्रयोग (Contemporary Application & Analysis)

दार्शनिक, मनोवैज्ञानिक व वैज्ञानिक समरूपताओं पर आधुनिक चिंतन। यह मूल शास्त्र का अंग नहीं है और इसे शास्त्रोक्त सिद्धांत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

शोध टिप्पणीResearch note

पांडुलिपि एवं ऐतिहासिक शोध (Critical Apparatus & Manuscript Research)

पांडुलिपि विविधताएं, पाठ-भेद (variant readings), छंद रचना, और ऐतिहासिक व तुलनात्मक भाषावैज्ञानिक शोध। यह शास्त्र का मूल संदेश बदलने हेतु नहीं, बल्कि पाठ की प्रामाणिकता परखने के लिए है।