Atharva Veda
10
अध्याय 10 / 20

Kanda 10

काण्ड 10

350 श्लोकभाग 3/7 · श्लोक 5.1–5.50

पूर्ण अध्याय पाठ50 श्लोक

अध्याय 10

श्लोक 5.1

विजयप्राप्तिः।१-२४ सिन्धुद्वीपः।आपः, चन्द्रमाः।अनुष्टुप्, १-५ त्रिपदा पुरोऽभिकृतिककुम्मतीगर्भा पङ्क्तिः, ६ चतुष्पदा जगतीगर्भा जगती, ७-१४ त्र्यवसाना पञ्चपदा विपरीतपादलक्ष्मा बृहती (११,१४ पथ्यापङ्क्तिः), १५-२१ चतुरवसाना दशपदा त्रैष्टुब्गर्भातिधृतिः, (१९-२० कृतिः, २४ त्रिपदा विराड् गायत्री) (१) इन्द्र॒स्यौज॒ स्थेन्द्र॑स्य॒ सह॒ स्थेन्द्र॑स्य॒ बलं॒ स्थेन्द्र॑स्य वी॒र्यं॑१ स्थेन्द्र॑स्य नृ॒म्णं स्थ॑ ।जि॒ष्णवे॒ योगा॑य ब्रह्मयो॒गैर्वो॑ युनज्मि

vijayaprāptiḥ| 1-24 sindhudvīpaḥ| āpaḥ, candramāḥ| anuṣṭup, 1-5 tripadā puro'bhikṛtikakummatīgarbhā paṅktiḥ, 6 catuṣpadā jagatīgarbhā jagatī, 7-14 tryavasānā pañcapadā viparītapādalakṣmā bṛhatī (11,14 pathyāpaṅktiḥ), 15-21 caturavasānā daśapadā traiṣṭubgarbhātidhṛtiḥ, (19-20 kṛtiḥ, 24 tripadā virāḍ gāyatrī) (1) indrasyauja sthendrasya saha sthendrasya balaṃ sthendrasya vīryaṃ1 sthendrasya nṛmṇaṃ stha | jiṣṇave yogāya brahmayogairvo yunajmi

हिन्दी अर्थ

दूर करना चाये .प्वाह मेँ इसलिए कि जल में. जो विष मिल गया है वह् नदी के प्रवाह मे बह. जाय. ताकि; उसका शरोर्.के साथ पूनः सम्पकं न दौ, कर्मनाम" (निष २।१).। “कवंसणि यज्ञादिकर्माणि” (सायण, भ्रथवं० पुञ्ज मेःरहने वाला । . ्रा्रमवारसियो , के समूह भें रटने वाला वानप्रस्थी । वह जैसे धेष्ठकरमो यज्ञादि का दढृतापूवैक रहण करता है, वैसे वुढतापूवंकं सपंके सिर को पकड़े रहना. चाहम 4 -व्यनिजम् = वि +-भट् -णिंजिर् . (तिरदिचराजयः) टेढ़ी धारिय वलि सपं (हताः) मार दिये है, (पृगकवः)

English

Strike out, white courser! with thy foot, strike both with fore and hinder foot, Stay the dire poison of the Snakes, and make it weak as soaking wood.

अध्याय 10

श्लोक 5.2

इन्द्र॒स्यौज॒ स्थेन्द्र॑स्य॒ सह॒ स्थेन्द्र॑स्य॒ बलं॒ स्थेन्द्र॑स्य वी॒र्यं॑१ स्थेन्द्र॑स्य नृ॒म्णं स्थ॑ ।जि॒ष्णवे॒ योगा॑य क्षत्रयो॒गैर्वो॑ युनज्मि

indrasyauja sthendrasya saha sthendrasya balaṃ sthendrasya vīryaṃ1 sthendrasya nṛmṇaṃ stha | jiṣṇave yogāya kṣatrayogairvo yunajmi

हिन्दी अर्थ

भन्र ४ मरं सोमाधिकृरी काही कथन हुभा है । वारस्परिक सहयोग.के लिये, ( विचवानि) संब (भृतानि) सृत॑-भ्रौर भौतिकं २५२ भथंववेद-माष्य कांऽ.१०१ ५५ से, भर्थात् एकमत हुए, (स्ध) होः जाभ्रो ।. :. ;. सा प्राज्य की संमी भूत-मोतिक्र शक्तियों पर निजाचिकार चाहता है, भौर भरजाभ्रों का एकमत्य चाहता है ।

English

Tiraschirājis have been slain, and vipers crushed and brayed to bits. Slay Darvi in the Darbha-grass, Karikrata, and White and

अध्याय 10

श्लोक 5.3

इन्द्र॒स्यौज॒ स्थेन्द्र॑स्य॒ सह॒ स्थेन्द्र॑स्य॒ बलं॒ स्थेन्द्र॑स्य वी॒र्यं॑१ स्थेन्द्र॑स्य नृ॒म्णं स्थ॑ ।जि॒ष्णवे॒ योगा॑येन्द्रयो॒गैर्वो॑ युनज्मि

indrasyauja sthendrasya saha sthendrasya balaṃ sthendrasya vīryaṃ1 sthendrasya nṛmṇaṃ stha | jiṣṇave yogāyendrayogairvo yunajmi

हिन्दी अर्थ

लहर समुद्र मे उठा करती है 1; इस से. हृदय को समुद्र. कहा है । इस हृदयः समुद्र मै परमेश्वर की स्तुतिरूप भे. स्तुति-लहरं उठती इन हंसो मं परमेदवर स्तवनीयसूप में प्रकटं हो रहा होता है । भतः वह् “ऊरभि" है । इस सम्बनव से,यजुवेव का म्र विशेष महत्व कै है । यथा-- .. कांर-१०। सुऽ भ्रथरवेवेद-भाष्य २५९ (एताः) यँ स्तुतिवाभिवी. (वको) सैको बे वानी हई, (वृतस्य) प्रकादा की (धाराः) घारार्भरोंको. (अभिचाकशीमि) मै संमुख हैल रहा हं, (भासाम्). इन धाराग्नो के (मघ्ये) बीच में, (हिरण्ययः) दिरण्यवर्णी, (वेतसः) संसारमंट का बुनने वाला परमेरवर प्रकट हो रहा हैः

English

Whose mighty broods are found in many places, these serpents we will reverently worship. Thou art a maid called Taudi, or Ghritāchi is thy name. Thy place;

अध्याय 10

श्लोक 5.4

इन्द्र॒स्यौज॒ स्थेन्द्र॑स्य॒ सह॒ स्थेन्द्र॑स्य॒ बलं॒ स्थेन्द्र॑स्य वी॒र्यं॑१ स्थेन्द्र॑स्य नृ॒म्णं स्थ॑ ।जि॒ष्णवे॒ योगा॑य सोमयो॒गैर्वो॑ युनज्मि

indrasyauja sthendrasya saha sthendrasya balaṃ sthendrasya vīryaṃ1 sthendrasya nṛmṇaṃ stha | jiṣṇave yogāya somayogairvo yunajmi

हिन्दी अर्थ

(५) भरापः पदनाम (निषं०. ५।३), इत्यादि । भरतः इन मन्तो की व्यास्या शुचिता, पवित्रता का, “द्र ष्टि" दवारा राजसिक . भरौर तामसिक मनरूपी सेवनीय, भजनीय , ऊभिः, वत्सः, वृषभः, दिरण्यगमेः, पृदिनिः तथा दिव्य षण न करना, दुरित अंहस्, रिभका श्रपगमन”--भ्रादि का वर्णन भी पराध्यात्मिक.भावनाग्रों का सूचक है । राजसिक-तामसिक-मन भी शारी- रिक जीवन भें राजा है, परन्तु है - शात्रुरूप राजाः। दसं का विनाश करना ,

English

Him would I fain o’erthrow and slay with this our ceremonial act, with this our prayer, our thunder-bolt.

अध्याय 10

श्लोक 5.5

इन्द्र॒स्यौज॒ स्थेन्द्र॑स्य॒ सह॒ स्थेन्द्र॑स्य॒ बलं॒ स्थेन्द्र॑स्य वी॒र्यं॑१ स्थेन्द्र॑स्य नृ॒म्णं स्थ॑ ।जि॒ष्णवे॒ योगा॑याप्सुयो॒गैर्वो युनज्मि

indrasyauja sthendrasya saha sthendrasya balaṃ sthendrasya vīryaṃ1 sthendrasya nṛmṇaṃ stha | jiṣṇave yogāyāpsuyogairvo yunajmi

हिन्दी अर्थ

काह, वह यज्ञका सिरहै। सिरके कट जाने परशरीर निःसार हो जाता है, सिररूप परमेदवर की भावना के विना यज्ञ भी निःसारहै। यज्ञदारा रोग भ्रौर रोगोत्पादक जीवाणुरभों का-विनार होता है; यह उग्रता है, भौर सूचित किया है, सावंमौमशासक मे ये दोनों गुण चाहिए 4 साय ही यज्ञपद विेष-३०,३१ भन््ं दवारा, वैदिक-सं्कृति से सपत्न के निर्जन , भर्थात् बहिष्कार का कथन हुभरा है । .

English

All food of thine, O Lord of Life, that lies, upon the face of earth, Thereof bestow thou upon us. O Lord of Life, Prajāpati!

अध्याय 10

श्लोक 5.6

इन्द्र॒स्यौज॒ स्थेन्द्र॑स्य॒ सह॒ स्थेन्द्र॑स्य॒ बलं॒ स्थेन्द्र॑स्य वी॒र्यं॑१ स्थेन्द्र॑स्य नृ॒म्णं स्थ॑ ।जि॒ष्णवे॒ योगा॑य॒ विश्वा॑नि मा भू॒तान्युप॑ तिष्ठन्तु यु॒क्ता म॑ आप स्थ

indrasyauja sthendrasya saha sthendrasya balaṃ sthendrasya vīryaṃ1 sthendrasya nṛmṇaṃ stha | jiṣṇave yogāya viśvāni mā bhūtānyupa tiṣṭhantu yuktā ma āpa stha

हिन्दी अर्थ

कां०.१ 9 1 सु०.४ भथरवंवेद-मीष्य २५३ जोकि भ्रोषधिर्यो. भे. मुख्य भ्रोषधिं है । भरतः सोम को भोषधि्यौ का ४५।२४1७) 1 वीरष् भोषधि है-। सावंमौमशासक सोमसदश तेज वाला है, भागंरहितं “ कर संकतो है । सपत्न के रोगी हो जाने पर, श्रोषधि.के न मिलने से,-वहे' प्राणविहीन हो जाता है । शेषं अभिप्राय (मन्व २५) के .. विष्णोः. करभोऽसिः सपत्नषटाऽषुसशिती वरंणतेजाः । , , (विष्णोः) .विषणु के (क्रमः) पराक्रम वाला (भसि) तु है,(सपलहा)

English

May the Gods know this prayer of mine, may Indra with the Rishis know.

अध्याय 10

श्लोक 5.7

(२) अ॒ग्नेर्भा॒ग स्थ॑ ।अ॒पां शु॒क्रमा॑पो देवी॒र्वर्चो॑ अ॒स्मासु॑ धत्त ।प्र॒जाप॑तेर्वो॒ धाम्ना॒स्मै लो॒काय॑ सादये

(2) agnerbhāga stha | apāṃ śukramāpo devīrvarco asmāsu dhatta | prajāpatervo dhāmnāsmai lokāya sādaye

हिन्दी अर्थ

करते है, वञ्चित करते हँ (यः) -जोः किं (्रस्मान् दष्ट) हमारे साथ वश्ण को जलो का भ्रधिपति .कहा.है 1 यथा . “वद्णोऽपामधिपतिः (अथव ० ५।२४।४) .1 वर्ण है मेष, ' जोकि सूरं पर. -भ्रावरण डालता है। यह् जलो का भ्रषिपति है, स्वामी है ! यह . ही पृथिवी पर जलो की वर्षा करता है । सावैभौमशासक श्रपने-भ्राप को वख्णसदुश तेज वाला कहं कर करता है,. वञ्चित करतां है, भ्रौर सपत्न जलविहीन होकर -प्राणो से विहीन हो जाता है । शेष भ्रमिप्राय. मन्त्रं (५); के सदृश । - हा) सपत्न का हनन करने वालो है, (कृषिसृंशितः ) कृषिकमं कराने भें (ष्याः) कृषिकमं से (तम्) उसे (निजामः) हम भागरदित करते है

English

What curse soever couples launch against us, whatever bitter speech the chatterers utter, With Manyu’s arrow, offspring of the spirit, transfix thou to the heart the Yātudhānas, Destroy the Yātudhānas with thy fervour, consume the demons with thy wrath, O Agni.

अध्याय 10

श्लोक 5.8

इन्द्र॑स्य भा॒ग स्थ॑ ।अ॒पां शु॒क्रमा॑पो देवी॒र्वर्चो॑ अ॒स्मासु॑ धत्त ।प्र॒जाप॑तेर्वो॒ धाम्ना॒स्मै लो॒काय॑ सादये

indrasya bhāga stha | apāṃ śukramāpo devīrvarco asmāsu dhatta | prajāpatervo dhāmnāsmai lokāya sādaye

हिन्दी अर्थ

सथ (वयम्) हम (ष्मः) देष करते ह, (सः) वह् (मा) न (जीवीत्) जीवित रहे (तम्) “उसे (प्राणः) प्राण ( जहातु) छोड जाय । 1४ ावंभौमशासकं पृथिवी में कृषिकर्म कराने मँ उप्रभावना वाला है । कारण उस का तेजः बढ़ता है, वह तेजस्वी हो नाता. है । जिस राष्ट के पास भन्न नहीं श्रौरः उसेःभरन्य राषटरौ.सेः अन्न मांगना पड़ता. है वह भिंखमंभा र्ट निस्तेज होता है । इसं लिये" सावँभौमशासक कृषिक मे श्रपने परा- कम.को दर्शाता है । वह सपत्न को कृषिकर्म करने से वञ्चित कैर देता है, भौर उस के पास श्रन्नाभाव हो जाने पर क्षुषा से तड़्पता हृभा वह मृत्यु भ्रा है। इन म से परत्येक तथाः सब से वञ्चित हो जाने के कारण-सपलन विष्णोः क्रमोऽपि ¦ सपत्नहा भाणसंधषितुः पुरुषतेनाः । 1 क (विष्णोः) विष्णु के (क्रमः) पराक्रम वाला (भसि) तु है, (सपलहा )

English

Destroy the fool’s gods with thy fiery splendour, destroy the blazing ones, the insatiable. Well-skilled, against this man I hurl the Water’s bolt with four spikes, to cleave his head

अध्याय 10

श्लोक 5.9

सोम॑स्य भा॒ग स्थ।अ॒पां शु॒क्रमा॑पो देवी॒र्वर्चो॑ अ॒स्मासु॑ धत्त ।प्र॒जाप॑तेर्वो॒ धाम्ना॒स्मै लो॒काय॑ सादये

somasya bhāga stha| apāṃ śukramāpo devīrvarco asmāsu dhatta | prajāpatervo dhāmnāsmai lokāya sādaye

हिन्दी अर्थ

कां० १० । सु०-५ भरथववेद-माष्यः २७५ मे उग्रभावना वाला है, (पुरषतेजाः+) सावभौम के पुरषो के तेज वाला तु उसे (निंमंजामंः) हम भाग रहित करते है, वञ्चित करते हैँ (यः) जो किं (वयम् द्विष्मः) हम देष करते है । (सः) वह (मा) न (जीवीत्) जीवित रहै, (तम्). उसे (प्राणः) प्राण (जहातु) छोड़ जाय + पुरुषतेजाः-सावंभौमदशासक निज प्रशस्तशासन के श्राधार परः कहता है कि.शासनः में सब पुष मेरे साथ हैः इस लिये म पुरुषतेज वाला हूः

English

asunder. May it destroy all members of his body. Let the whole host of Gods approve my purpose.

अध्याय 10

श्लोक 5.10

वरु॑णस्य भा॒ग स्थ॑।अ॒पां शु॒क्रमा॑पो देवी॒र्वर्चो॑ अ॒स्मासु॑ धत्त ।प्र॒जाप॑तेर्वो॒ धाम्ना॒स्मै लो॒काय॑ सादये

varuṇasya bhāga stha| apāṃ śukramāpo devīrvarco asmāsu dhatta | prajāpatervo dhāmnāsmai lokāya sādaye

हिन्दी अर्थ

भ्रहाकायं सप (निपिष्टासः) पीसविमर्है। „3 सिन्धु की प्रवाहित धारा म जल चिकित्सा (१९) की मावना की, “परा वहन्तु द्वारा स्पष्टं किया है । (भरहम्) ओ (साधुया) ठीक ठंग ' से (भरोषधीनाम्) भरोषधियों भें से (उवंरोः) उवरो भोषधि्यो का (वृणे) चुनाव करता हूं" भ्रौरं (अरवंतौः) भेन मँ “दव? पद पादपूरणारथेक है । यथा “इवोऽपि दुदयते, सुवि- रि, सधिजञायेते इव" (निरत .१।३।११) । ्ोषधियां दो भृकतार की हत है (१) "उत" भत् उतारा संन ला. (२) का

English

Loud neighing he hath dived below, and rising up again replied, Stayed the dire poison of the Snakes, and made it weak as soaking wood.

अध्याय 10

श्लोक 5.11

मि॒त्रावरु॑णयोर्भा॒ग स्थ॑।अ॒पां शु॒क्रमा॑पो देवी॒र्वर्चो॑ अ॒स्मासु॑ धत्त ।प्र॒जाप॑तेर्वो॒ धाम्ना॒स्मै लो॒काय॑ सादये

mitrāvaruṇayorbhāga stha| apāṃ śukramāpo devīrvarco asmāsu dhatta | prajāpatervo dhāmnāsmai lokāya sādaye

हिन्दी अर्थ

वाली, बढ़ाने वाली । तथा “रवती का अ्रभिध्राय है रोगनाशिका, जो. (पृथिव्याम् प्रोषघीषु) पृथिवी मँ रौर विषली भोषधिर्यो में है। । (ते) तेरा (विषम्) विष है, वह .. (निर् पेतुः) तेरे शरीर से बाहर भ्रग्नि में विष है “जलाना । सू मे विष है “ऽ 87016” भ्रादि । पुथिवी मे विष है संखिंया, पारद भ्रादि । इसी प्रकार - कई ्रोषधचियां भ्रौर म जो मी विष प्रविष्ट हु ह वहं बाहर निकल भ्ाएगा, -अवस्य निकल . ¶

English

Paidva kills Kasarnila, kills both the white Serpent and the black, Paidva hath struck and cleft in twain Ratharvi’s and the Viper’s head.

अध्याय 10

श्लोक 5.12

य॒मस्य॑ भा॒ग स्थ॑।अ॒पां शु॒क्रमा॑पो देवी॒र्वर्चो॑ अ॒स्मासु॑ धत्त ।प्र॒जाप॑तेर्वो॒ धाम्ना॒स्मै लो॒काय॑ सादये

yamasya bhāga stha| apāṃ śukramāpo devīrvarco asmāsu dhatta | prajāpatervo dhāmnāsmai lokāya sādaye

हिन्दी अर्थ

येषाँ जातानि बहुधा महान्ति तेर््यः सर्पेभ्यो नम॑सा विधेम ॥२३॥ (जातानि) जातियां. (बहधा ) बहुत प्रकार की (महान्ति) भौर बड़ी ह, का०-१०॥.सु० ४ पथवेवद्मा्य =. र (लौदी) दु व्यथाकारिणी (नाम.भ्रसि). भ्सिद है, , (कन्या; वू) भूमि के नीचे पहूचे हए पद भर्थात्. जड से (तै) तेरी ५ जड ५ (आ ददे) श लेता हृ, जो कि (विषदूषणम्) विष को दूषित करी, है

English

Go onward, horse of Pedu! go thou first: we follow after thee. Cast thou aside the Serpents from the pathway whereupon we tread.

अध्याय 10

श्लोक 5.13

पि॒तॄ॒णां भा॒ग स्थ॑।अ॒पां शु॒क्रमा॑पो देवी॒र्वर्चो॑ अ॒स्मासु॑ धत्त ।प्र॒जाप॑तेर्वो॒ धाम्ना॒स्मै लो॒काय॑ सादये

pitṝṇāṃ bhāga stha| apāṃ śukramāpo devīrvarco asmāsu dhatta | prajāpatervo dhāmnāsmai lokāya sādaye

हिन्दी अर्थ

तौदी=तुद व्यथने (तुदादिः), सपं को व्यथा देन वाली .षीकु वार को कर द, ४०.०८ को (परिवजंय) विष के प्रभाव से सवथा उग्रपन है (ते) है विषाक्त ! तेस (तत्) वह॒ विष (्रवाचीनम्, एतु) भ्रधात्) शरीर से निकाल दिया है, (सोमः) सोम (निर् ्रनयीत्) इसे निकाल लाया है । (विषम्) विष ने (दंष्टारम्) काटने वाले का (भ्रु भ्रगात्) अनुगमन किया है, (भ्रहिः) सापि (श्रमृत) मर गया है । (सम्पक, प्रदादिः) । “विष में विष सम्पृक्त हो गया है" सपं के विषमे उसका विनाच्चक विष मिला दिया ह । विनाशक = 71006 त्णप्ल-

English

Here was the horse of Pedu born: this is the way that takes him hence. These are the tracks the courser left, the mighty slayer of the

अध्याय 10

श्लोक 5.14

दे॒वस्य॑ सवि॒तुर्भा॒ग स्थ॑।अ॒पां शु॒क्रमा॑पो देवी॒र्वर्चो॑ अ॒स्मासु॑ धत्त ।प्र॒जाप॑तेर्वो॒ धाम्ना॒स्मै लो॒काय॑ सादये

devasya saviturbhāga stha| apāṃ śukramāpo devīrvarco asmāsu dhatta | prajāpatervo dhāmnāsmai lokāya sādaye

हिन्दी अर्थ

0018011. होम्योपेयिकं-चिक्रित्सा मे विष के विनाशक नाना विषो क वर्णन हभ है । लोकोक्ति मी है “विषस्य विषमौषवम्” 1! .. . . . . स्थे भदेहसेकादि (विषाधिकारः, रलोक. १२४ चक्रदत्त) । सोमः सोमरस । रलं स सब भेषन है, भोर जलो भि है जो कि सव रोगों को शानत करदियादहै, मानो सापःका .भनुममंमन, उसंके विंषनेकिंयाहै4 काण्ड १० । सूक्त. ४ । सम्पूणं . सक्तो को, “धर्यायसूक्त" कत ह 1. इहं ५ (१), ५ (२), ५।३, तथा

English

157 Snakes.

अध्याय 10

श्लोक 5.15

(३) यो व॑ आपो॒ऽपां भा॒गो॒३प्स्व॑न्तर्य॑जु॒ष्योऽदेव॒यज॑नः ।इ॒दं तमति॑ सृजामि॒ तं माभ्यव॑निक्षि ।तेन॒ तम॒भ्यति॑सृजामो॒ यो॒३स्मान् द्वेष्टि॒ यं व॒यं द्वि॒ष्मः ।तं व॑धेयं॒ तं स्तृ॑षीया॒नेन॒ ब्रह्म॑णा॒नेन॒ कर्म॑णा॒नया॑ मे॒न्या

(3) yo va āpo'pāṃ bhāgo3psvantaryajuṣyo'devayajanaḥ | idaṃ tamati sṛjāmi taṃ mābhyavanikṣi | tena tamabhyatisṛjāmo yo3smān dveṣṭi yaṃ vayaṃ dviṣmaḥ | taṃ vadheyaṃ taṃ stṛṣīyānena brahmaṇānena karmaṇānayā menyā

हिन्दी अर्थ

रयो (६), का जल तथा श्रोषि विभागं के भ्रधिकारीः सोमं . (५४) का तथां संब भूत-मौतिकदावितय कौ उपस्थिति (६). कर वणेन. हभ है । „ , (२); भन्तः चे.९४ परनाजरनो को समोषित्ः कर जनह कह है कि 'त्यादकं परमेैर्वरं शरोर संम पृथिवी के परस्कं सरवैमौम -शासरक के म्रागरूप हो. श्य हो! इस पकारं शासनं परजा क पू .सदोने क निवस -शासक-्धिकारी;्रमगवर केति मपित कट । अभृवा राज्याधिकारी दव दंभो का विना कर, वथा राज्पधिकारी निज द्विष्ट भासुरी भावो = विभ कतो पवा रै भना री दत है । २४७ । भरथवेवेद-माष्य कां० १० । सु ( कां ०-१९ 1-सु०9 भथरवेवेद-माष्य , २४९ कर्मो का विनारा करता हृभा शासन करता है, तो वह् भरनुमव करने लगता ९ ५ (१) है कि मैने लगातार कई वषो तक कोई भ्नृतसाषण नहीं किया 1 मन्व २ क 1 4 मँ इसे “श्रैहायण” त्रत के रूप मेँ वणित किया है । वेदानुसार संख्या तीन ( १८ ४ ६ व । ८

English

Let him not close the opened mouth, nor open that which now is closed. Two snakes are in this field, and both, female and male, are powerless.

अध्याय 10

श्लोक 5.16

यो व॑ आपो॒ऽपामू॒र्मिर॒प्स्व॑१न्तर्य॑जु॒ष्योऽदेव॒यज॑नः ।इ॒दं तमति॑ सृजामि॒ तं माभ्यव॑निक्षि ।तेन॒ तम॒भ्यति॑सृजामो॒ यो॒३स्मान् द्वेष्टि॒ यं व॒यं द्वि॒ष्मः ।तं व॑धेयं॒ तं स्तृ॑षीया॒नेन॒ ब्रह्म॑णा॒नेन॒ कर्म॑णा॒नया॑ मे॒न्या

yo va āpo'pāmūrmirapsva1ntaryajuṣyo'devayajanaḥ | idaṃ tamati sṛjāmi taṃ mābhyavanikṣi | tena tamabhyatisṛjāmo yo3smān dveṣṭi yaṃ vayaṃ dviṣmaḥ | taṃ vadheyaṃ taṃ stṛṣīyānena brahmaṇānena karmaṇānayā menyā

हिन्दी अर्थ

.... (५) भनृत-त्याग.के “व्ैहायण-त्रत" क्रा परिणाम होता है परमेदवर की सहायता द्वारा शारीरिक रस-रक्त भादि जलो का पवित्र हो जाना श्रौर जीवनो से “रिप्र” भर्थात् पापका भपगत हौ जानाः (मन्व २४), तथा का; सम्भवतः दत्र ेनाधिपति का बहिष्कार. (मन्व २५-२९) . : (८). शत्रं को भोषंधिग्रहण, जल सेवन, तथा कृषिकर्म. से. वच्नचित कर - . . (£) शत्रुसेनां पर विजय पा कर भां राजा को राज्यच्युत कर रूप प्रजा का शासन करना (मन्त्रं ३७-४१) । -

English

Powerless are the serpents here, those that are near and those afar. I kill the scorpion with a club, and with a staff the new-come snake.

अध्याय 10

श्लोक 5.17

यो व॑ आ॒पोऽपां व॒त्त्सो॒ऽप्स्व॑१न्तर्य॑जु॒ष्योऽदेव॒यज॑नः ।इ॒दं तमति॑ सृजामि॒ तं माभ्यव॑निक्षि ।तेन॒ तम॒भ्यति॑सृजामो॒ यो॒३स्मान् द्वेष्टि॒ यं व॒यं द्वि॒ष्मः ।तं व॑धेयं॒ तं स्तृ॑षीया॒नेन॒ ब्रह्म॑णा॒नेन॒ कर्म॑णा॒नया॑ मे॒न्या

yo va āpo'pāṃ vattso'psva1ntaryajuṣyo'devayajanaḥ | idaṃ tamati sṛjāmi taṃ mābhyavanikṣi | tena tamabhyatisṛjāmo yo3smān dveṣṭi yaṃ vayaṃ dviṣmaḥ | taṃ vadheyaṃ taṃ stṛṣīyānena brahmaṇānena karmaṇānayā menyā

हिन्दी अर्थ

(३) ; (३). पंचज्ञानेन्द््यो, मन नौर विचा. को. ऋषिकोटि का . बनाना भरनुसार प्रजाशासन नहीं करते; उन कीं खौज कर, उरः सं वंमौमशासके के .: -॥ ..खमक्ष उपस्थित कर, उचित दण्ड दिलाने का वणेन मंतर४२-५०) (सहः) सहनरत तथा . शत्रुपराभव करने वाली शक्ति (स्थ)-हो, सहयोग के साथ (युनज्मि) भै युक्त करत। हूं, सम्बद्ध करत हूं । माण्डलिक राजा, निजं-निज राष्टरके राजी, शासक

English

This is the remedy against Aghāsva and the adder, both: Indra and Paidva have subdued and tamed the vicious snake for me.

अध्याय 10

श्लोक 5.18

यो व॑ आपो॒ऽपां वृ॑ष॒भो॒ऽ३प्स्व॑न्तर्य॑जु॒ष्योऽदेव॒यज॑नः ॥ इ॒दं तमति॑ सृजामि॒ तं माभ्यव॑निक्षि ।तेन॒ तम॒भ्यति॑सृजामो॒ यो॒३स्मान् द्वेष्टि॒ यं व॒यं द्वि॒ष्मः ।तं व॑धेयं॒ तं स्तृ॑षीया॒नेन॒ ब्रह्म॑णा॒नेन॒ कर्म॑णा॒नया॑ मे॒न्या

yo va āpo'pāṃ vṛṣabho'3psvantaryajuṣyo'devayajanaḥ || idaṃ tamati sṛjāmi taṃ mābhyavanikṣi | tena tamabhyatisṛjāmo yo3smān dveṣṭi yaṃ vayaṃ dviṣmaḥ | taṃ vadheyaṃ taṃ stṛṣīyānena brahmaṇānena karmaṇānayā menyā

हिन्दी अर्थ

(उणा० ४।१९३, म० वयानन्द) । भ्रोजःराष्ट्िय-भोज; जिस के होते सिह है । बलम् = “बलं मरं भवति,. बिभर्ते” (निख्क्त २।२।१०), जोकरि हरीर का भरण-पोषण करतां है । बल करा प्रतिनिधि है हाथी ।.तथा बलम् नृम्णम् = नृम्णं धननाम (निषंर २।१०), जिस के -लिये नरौँका मने योगैः). तो-से-ऋण करने वाले-क्षात्रनल भर्थात्. सेना के.सहयोगो.के साथ (युनज्मि) नै युक्त करता हं, सम्बद्ध करतांहुं । ( नागरिक सुखीजीवन के लिये, भ्रौर नागरिक कष्टों पर विजय के

English

We fix our thoughts on Pedu’s horse, strong, off-spring of a stedfast line. Behind our backs the vipers here crouch down and lie in wait for us.

अध्याय 10

श्लोक 5.19

यो व॑ आपो॒ऽपां हि॑रण्यग॒र्भो॒३प्स्व॑न्तर्य॑जु॒ष्योऽदेव॒यज॑नः ।इ॒दं तमति॑ सृजामि॒ तं माभ्यव॑निक्षि ।तेन॒ तम॒भ्यति॑सृजामो॒ यो॒३स्मान् द्वेष्टि॒ यं व॒यं द्वि॒ष्मः ।तं व॑धेयं॒ तं स्तृ॑षीया॒नेन॒ ब्रह्म॑णा॒नेन॒ कर्म॑णा॒नया॑ मे॒न्या

yo va āpo'pāṃ hiraṇyagarbho3psvantaryajuṣyo'devayajanaḥ | idaṃ tamati sṛjāmi taṃ mābhyavanikṣi | tena tamabhyatisṛjāmo yo3smān dveṣṭi yaṃ vayaṃ dviṣmaḥ | taṃ vadheyaṃ taṃ stṛṣīyānena brahmaṇānena karmaṇānayā menyā

हिन्दी अर्थ

करता हूं, सम्बद्ध करताह।. . .. कां०.१०। सु९१५ भरथववेदृ-मष्यं २५१ पारस्परिक सहयोग के लिये, (सोमयोगैः) ओषंषियों (मन्त्र ३२), भ्रौरं वीरुधो (“सोमो वीरुषामधिपतिः” अथवं०५।२४।७) के नियन्ता सोमा- धिकारी के सहयोगं के साथ (वः) है भरजाभों ! तुम्रं (युनज्मि) मँ युक्तं भा भ्रोषधियो केः्रषिष्ठाता -अधिकारी- को मन्त्र भे. “सोमं सम्बन्धी नियन्ता के भधिकारी के सहयोगो के साथ (वः) है प्रजाभो ! तुम्हें युनज्मि ) मैं युक्त करता हं, ' सम्बदे करत हूं 1

English

Bereft of life and poison they lie slain by bolt-armed Indra’s hand. Indra and we have slaughtered them.

अध्याय 10

श्लोक 5.20

यो व॑ आपो॒ऽपामश्मा॒ पृश्नि॑र्दि॒व्यो॒३प्स्व॑१न्तर्य॑जु॒ष्योऽदेव॒यज॑नः ।इ॒दं तमति॑ सृजामि॒ तं माभ्यव॑निक्षि ।तेन॒ तम॒भ्यति॑सृजामो॒ यो॒३स्मान् द्वेष्टि॒ यं व॒यं द्वि॒ष्मः ।तं व॑धेयं॒ तं स्तृ॑षीया॒नेन॒ ब्रह्म॑णा॒नेन॒ कर्म॑णा॒नया॑ मे॒न्या

yo va āpo'pāmaśmā pṛśnirdivyo3psva1ntaryajuṣyo'devayajanaḥ | idaṃ tamati sṛjāmi taṃ mābhyavanikṣi | tena tamabhyatisṛjāmo yo3smān dveṣṭi yaṃ vayaṃ dviṣmaḥ | taṃ vadheyaṃ taṃ stṛṣīyānena brahmaṇānena karmaṇānayā menyā

हिन्दी अर्थ

भरजाप॑तेवां धाम्नाऽस्मे छोकायं सादये . ॥७॥ . ..:. पित करो, हमें प्रदनि करो । (प्रजापतेः धाम्ना) प्रजापति के नाम तथा. ,: स्थान दवारा (वः) है प्रजाग्नो ! तुमह (भस्मैःलोकायः) इस पृथिवी. लोक के का, हितचिन्तक है, रौर वह् ज्ञानौग्निमथ है । „4 ५२ तुम्हारे सहयोग द्वारा रग्नि, शासनः में सफलं होगा, भन्यथा तहं । “भर „

English

Black. The young maid of Kirāta race, a little damsel, digs the drug,

अध्याय 10

श्लोक 5.21

यो व॑ आपो॒ऽपाम॒ग्नयो॒प्स्व॑१न्तर्य॑जु॒ष्योऽ देव॒यज॑नः ।इ॒दं तानति॑ सृजामि॒ तान् माभ्यव॑निक्षि ।तैस्तम॒भ्यति॑सृजामो॒ यो॒३स्मान् द्वेष्टि॒ यं व॒यं द्वि॒ष्मः ।तं व॑धेयं॒ तं स्तृ॑षीया॒नेन॒ ब्रह्म॑णा॒नेन॒ कर्म॑णा॒नया॑ मे॒न्या

yo va āpo'pāmagnayopsva1ntaryajuṣyo' devayajanaḥ | idaṃ tānati sṛjāmi tān mābhyavanikṣi | taistamabhyatisṛjāmo yo3smān dveṣṭi yaṃ vayaṃ dviṣmaḥ | taṃ vadheyaṃ taṃ stṛṣīyānena brahmaṇānena karmaṇānayā menyā

हिन्दी अर्थ

कहता है करि प्रजाभ्रों का पालक परमेश्वर जैसे प्रजापतिः नाम वाला है, भरौर लोक मे वहै सुद्हृरूप में स्थापितं कररता हुं । इसी . प्रकार की मावंनाए' . ( भरजपतेवो पाम्नाऽस्मे शोकाय सादये ॥८॥ . :. अजाते षाम्नाऽक्मे लोकायं सादये ॥॥ कारियों मेँ (चत्त) स्थापित कंरो, हमे पदान करो । (प्रजापतेः धाम्ना

English

Digs it with shovels wrought of gold on the high ridges of the hills. Hither the young uuconquered leech who slays the speckled snake hath come.

अध्याय 10

श्लोक 5.22

(४) यद॑र्वा॒चीनं॑ त्रैहाय॒णादनृ॑तं॒ किं चो॑दि॒म।आपो॑ मा॒ तस्मा॒त् सर्व॑स्माद् दुरि॒तात् पा॒न्त्वंह॑सः

(4) yadarvācīnaṃ traihāyaṇādanṛtaṃ kiṃ codima| āpo mā tasmāt sarvasmād duritāt pāntvaṃhasaḥ

हिन्दी अर्थ

भजापतरवो घाम्नाऽस्ये छोकाय॑. सादये ॥ १०॥ शुवित भौर सामथ्यं, (वचः) तथा दीप्ति. : (भ्रस्मासु) हम अधिकारियों मे २४४ : भर्वंवेद-भाष्य -: कां०. १०१ सु०.४ राजा” (यजु° ८।३७).† यह वरुण, निज -साण्डलिक प्रजा द्वारां “वरा . ‰। तुम वख्ण के शासनं के भी मागर्प हो; भङ्खरूप हो । -म॑न्ःमावना के लिये

English

He verily demolishes adder and scorpion; both of them. Indra, Mitra and Varuna, and Vāta and Parjanya both have given the serpent up to me.

अध्याय 10

श्लोक 5.23

स॒मु॒द्रं वः॒ प्र हि॑णोमि॒ स्वां योनि॒मपी॑तन ।अरि॑ष्टाः॒ सर्व॑हायसो॒ मा च॑ नः॒ किं च॒नाम॑मत्

samudraṃ vaḥ pra hiṇomi svāṃ yonimapītana | ariṣṭāḥ sarvahāyaso mā ca naḥ kiṃ canāmamat

हिन्दी अर्थ

ग्रनाप॑तेवों धाम्नाश्स्मे छोकायं सादये ॥११॥ ¢ ५२ भित्रावरुणयोः- मित्र है. वह भ्रधिक्रारी जो कि विदेदानीति के साथ यतन करता रह । इसी प्रकार एतदथं राजा कों भी कहा है “मित्रवर्धनः” ! (अथव ० ४।८।२) "तथा “मिंत्रवधेनः?' (अथर्वं ०.४।८६) । दस से प्रतीत होता है कि ““मित्रराष्टरौः" . को बढ़ाते रहना, . यह वेदिक. विदेशनीति है, जिसका कि भधिकारी विदेशमन्त्री “मित्र” नामक ह । वरुणः-मित्र कायं कायो से रोके रलना, निवारितं करते रहना । इस क भधिकार मेः राष्ट्रिय मे वरण द्वारा परमेश्वर का; भौर उसके नियमों का, “स्पद्चः" दारां वणेन हृभा है, - तो भी सूक्त. मेः राष्टिप्रबन्ध कीं . मीं सुचना वरणं भौर

English

Indra hath given him up to me, the female viper and the male, The adder, him with stripes athwart. Kasarnila, Dasonasi.

अध्याय 10

श्लोक 5.24

अ॒रि॒प्रा आपो॒ अप॑ रि॒प्रम॒स्मत्।प्रास्मदेनो॑ दुरि॒तं सु॒प्रती॑काः॒ प्र दु॒ष्वप्न्यं॒ प्र मलं॑ वहन्तु

ariprā āpo apa ripramasmat| prāsmadeno duritaṃ supratīkāḥ pra duṣvapnyaṃ pra malaṃ vahantu

हिन्दी अर्थ

कां: १० । चु« ५ शरथवेवेद-माष्य २६५ अ्नापतेर्गाः षाम्नाऽस्मे छोकाय॑ सादये ।॥१२॥ रनारपतेवों धाभ्नाऽस्तमै .छोकाय॑. सादये ॥१२॥ । (भाषः देवीः) है दिव्यं प्रजाभ्रो । तुम (पितृणाम्) समा भौर समितिं :.“ . + . शतेष ।।. (भरथवं ० .७। १२।१) मेँ समा श्रौर समिति के सदस्यो को “पितरः” कहा है । : :.

English

O Serpent, Indra hath destroyed the sire who first engendered thee: And when these snakes are pierced and bored what sap and vigour will be theirs?

अध्याय 10

श्लोक 5.25

(५) ५-३५ (१-११) कौशिकः।विष्णुक्रमः, मन्त्रोक्ताः।२५-३५ त्र्यवसाना षट्-पदा यथाक्षरं शक्वर्यतिशक्वरी।विष्णोः॒ क्रमो॑ऽसि सपत्न॒हा पृ॑थि॒वीसं॑शितो॒ऽग्निते॑जाः ।पृ॒थि॒वीमनु॒ वि क्र॑मे॒ऽहं पृ॑थि॒व्यास्तं निर्भ॑जामो॒ यो॒३स्मा॑न् द्वेष्टि॒ यं व॒यं द्वि॒ष्मः ।स मा जी॑वी॒त् तं प्रा॒णो ज॑हातु

(5) 5-35 (1-11) kauśikaḥ| viṣṇukramaḥ, mantroktāḥ| 25-35 tryavasānā ṣaṭ-padā yathākṣaraṃ śakvaryatiśakvarī| viṣṇoḥ kramo'si sapatnahā pṛthivīsaṃśito'gnitejāḥ | pṛthivīmanu vi krame'haṃ pṛthivyāstaṃ nirbhajāmo yo3smān dveṣṭi yaṃ vayaṃ dviṣmaḥ | sa mā jīvīt taṃ prāṇo jahātu

हिन्दी अर्थ

अजारप॑तेर्बो धाम्नाऽस्मै छोकायं सादये ॥१४॥ परमेदवर देव के (मागः) भागरूप, भङ्खूप (स्थ) ही । (रपां शुक्रम्) २५६ . भ्रथर्ववेद-भाष्य कां १०) .सु 4 परमेच्वर ब्रह्माण्ड.कौ ्ासक होता हां पृथिवी का मीः.दासक है। मँ पारमेद्वरीय दासन कै. भागरूप या भ्रङ्खरूप होती है ।

English

Their heads have I seized firmly as a fisher grasps the spotted prey, Waded half through the stream and washed the poison of the serpents off.

अध्याय 10

श्लोक 5.26

१॥ विष्णोः॒ क्रमो॑ऽसि सपत्न॒हान्तरि॑क्षसंशितो वा॒युते॑जाः ।अ॒न्तरि॑क्ष॒मनु॒ वि क्र॑मे॒ऽहम॒न्तरि॑क्षा॒त् तं निर्भ॑जामो॒ यो॒३स्मान् द्वेष्टि॒ यं व॒यं द्वि॒ष्मः ।स मा जी॑वी॒त् तं प्रा॒णो ज॑हातु

1|| viṣṇoḥ kramo'si sapatnahāntarikṣasaṃśito vāyutejāḥ | antarikṣamanu vi krame'hamantarikṣāt taṃ nirbhajāmo yo3smān dveṣṭi yaṃ vayaṃ dviṣmaḥ | sa mā jīvīt taṃ prāṇo jahātu

हिन्दी अर्थ

राज्याधिकारियों को. पारमेष्वरीय शासन मे भरङ्गरूप बनाती. है। राज्याः धिकारियों मे मुख्याधिकारी राजा होता है ॥- समग्र पृथिवी के शासन 1 निजगही मे साथ बैठने के लिथे तेरा प्राह्वान कियाहै, तु परमेदवंर के साथ राजगदी पर बैठ कर, परमेश्वर का प्रतिनिधि बन कर पृथिवी का शासन कर, श्नौरं विरवास कर. कि पसे -तेरे शासन. मे परमेश्वर, राज्यदासन 1 तरे सहायक दिव्य राजवगे क्रो शासन-यज्ञ के योग्य . बना देगा, भरौरतेरी परजाभ्नौं को सामथ्यं सम्पन्न कर देगा । =" = 4 रजा लोग यदि यह सममः लँ किः शासन. कौ गही पर परमख्वर भी साथ बैरे हए ह तो पृथिवी. का शासन स्वर्गीयकासन, हो . जाय। मन्व मे “वरुगैः" से बहुवचन है, रतः ये मनुष्य है, मानां गया वरुण-देवता नहीं ।

English

Let the floods hurry on and bear the poison of all snakes afar. Tiraschirājis have been slain and vipers crushed and brayed to bits.

अध्याय 10

श्लोक 5.27

२॥ विष्णोः॒ क्रमो॑ऽसि सपत्न॒हा द्यौसं॑शितः॒ सूर्य॑तेजाः ।दिव॒मनु॒ वि क्र॑मे॒ऽहं दि॒वस्तं निर्भ॑जामो॒ यो॒३स्मान् द्वेष्टि॒ यं व॒यं द्वि॒ष्मः।स मा जी॑वी॒त् तं प्रा॒णो ज॑हातु

2|| viṣṇoḥ kramo'si sapatnahā dyausaṃśitaḥ sūryatejāḥ | divamanu vi krame'haṃ divastaṃ nirbhajāmo yo3smān dveṣṭi yaṃ vayaṃ dviṣmaḥ| sa mā jīvīt taṃ prāṇo jahātu

हिन्दी अर्थ

ˆ ˆ यो. व॑ आपोऽपां मागो ह्वशन्तयैजुष्यो देवयजन । . . उस कै प्रति (इदम्). इस शरीर या मन कों (भरतिसुजामिं) मै संम्नोद् मेंट - करता हं, समपित करता हु, है परमेवर् (तम्, भा) उसं भुर सभरा भर्मिं होकर, (भ्रतिसजामः) हम सैनिकं विनष्ट करते है (यः) जोकि सम्राट् निज,. शरीर मा मन को सेवनीयं या भजनीयं परमेदवर कै की भज्ञा.द्मारां सैनिक, शतुराजा का विनाश करते ह। भरथवेा स्री

English

As from the salutary plants I deftly pick the fibres out, And guide them skilfully like mares, so let thy venom, Snake! depart,

अध्याय 10

श्लोक 5.28

३॥ विष्णोः॒ क्रमो॑ऽसि सपत्न॒हा दिक्सं॑शितो॒ मन॑स्तेजाः ।दिशोऽनु॒ वि क्र॑मे॒ऽहं दि॒ग्भ्यस्तं निर्भ॑जामो॒ यो॒३स्मान् द्वेष्टि॒ यं व॒यं द्वि॒ष्मः ।स मा जी॑वी॒त् तं प्रा॒णो ज॑हातु

3|| viṣṇoḥ kramo'si sapatnahā diksaṃśito manastejāḥ | diśo'nu vi krame'haṃ digbhyastaṃ nirbhajāmo yo3smān dveṣṭi yaṃ vayaṃ dviṣmaḥ | sa mā jīvīt taṃ prāṇo jahātu

हिन्दी अर्थ

देवयजनः=देवाः साध्या ऋषयश्च गरे (यचुर ३१।९) २५ भ्रतिसूर्जमि स्तृषीय=स्तृणातिं -धकर्मां (निषं० २१९) । मेन्य = मनिः वखनाम २५२ भरथववेवेद-माष्य कां१५। सु०ः५ . , यो व॑ आपोऽ पामूमिरप्डन्तर्लुष्यो देवयजंनः । - . तं धेयं तं स्वषीयानेन बह्मणाऽनेनं कर्मणाऽनयां मेन्या॥ १६॥

English

All poison that the sun and fire, all that the earth and plants contain, Poison of most effectual power—let all thy venom pass away.

अध्याय 10

श्लोक 5.29

४॥ विष्णोः॒ क्रमो॑ऽसि सपत्न॒हाशा॑संशितो॒ वात॑तेजाः ।आशा॒ अनु॒ वि क्र॑मे॒ऽहमाशा॑भ्य॒स्तं निर्भ॑जामो॒ यो॒३स्मान् द्वेष्टि॒ यं व॒यं द्वि॒ष्मः ।स मा जी॑वी॒त् तं प्रा॒णो ज॑हातु

4|| viṣṇoḥ kramo'si sapatnahāśāsaṃśito vātatejāḥ | āśā anu vi krame'hamāśābhyastaṃ nirbhajāmo yo3smān dveṣṭi yaṃ vayaṃ dviṣmaḥ | sa mā jīvīt taṃ prāṇo jahātu

हिन्दी अर्थ

ह, ह परमेषवर (तम् मां). उस मु को, (अभि अवनिषि) भमियुलं - दारा. (तम्) उस श्तरुराजा"का, (भ्रभि) भ्रभिमुल होकर, (अतिसूना्मः) हम सैनिक विनाश करते है, वघ करते है, (यः ) जो-कि (भरस्मात् ष्टि) हमारे साथ द्वेष करता है, भरौर (यम्) जिस के साथ -परतिक्रिया , दनयुडधस्यी , कर दारा, या-(अनया मेन्या) इस वज दवारा ॥ .

English

Serpents which fire or plants have generated, those which have sprung from waters or the lightning,

अध्याय 10

श्लोक 5.30

५॥ विष्णोः॒ क्रमो॑ऽसि सपत्न॒हा ऋक्सं॑शितः॒ साम॑तेजाः ।ऋचोऽनु॒ वि क्र॑मे॒ऽहमृ॒ग्भ्यस्तं निर्भ॑जामो॒ यो॒३स्मान् द्वेष्टि॒ यं व॒यं द्वि॒ष्मः ।स मा जी॑वी॒त् तं प्रा॒णो ज॑हातु

5|| viṣṇoḥ kramo'si sapatnahā ṛksaṃśitaḥ sāmatejāḥ | ṛco'nu vi krame'hamṛgbhyastaṃ nirbhajāmo yo3smān dveṣṭi yaṃ vayaṃ dviṣmaḥ | sa mā jīvīt taṃ prāṇo jahātu

हिन्दी अर्थ

धाराए मिः जो.किं स्तुति मन्त्रो के जप मे प्रकट बो वं.भापोऽ परातमोप्ल!नवनुषय देवयन॑नः । : . दं कातिल ःतं . माम्वृव॑निक्षि.। के प्रति (इदम्) इस शरीर या मनको (तिदृजामि ) मै सम्राट् भेट करता हू, समर्पित करता हुं, है प्ररभेदवर (तम्, मा) उस मुक को, (रभि) -भरमिमुख . होकर, (भ्रवनिक्षि) शुचि, पवित्र कर । (तेन) उस अभिमुख हो करं, (भरतिसृजामः) हम सेनिक विनष्ट करते ह, (यः). जोकि “ऋषीणा पु्ः"-कहा है । ! यथा “श्रग्नावग्निचरति. विष्ट ऋषीणां पवो

English

Is underneath my foot. I take the poison-killing remedy. From every member drive away the venom, and avoid the heart.

अध्याय 10

श्लोक 5.31

६॥ विष्णोः॒ क्रमो॑ऽसि सपत्न॒हा य॒ज्ञसं॑शितो॒ ब्रह्म॑तेजाः ।य॒ज्ञमनु॒ वि क्र॑मे॒ऽहं य॒ज्ञात् तं निर्भ॑जामो॒ यो॒३स्मान् द्वेष्टि॒ यं व॒यं द्वि॒ष्मः ।स मा जी॑वी॒त् तं प्रा॒णो ज॑हातु

6|| viṣṇoḥ kramo'si sapatnahā yajñasaṃśito brahmatejāḥ | yajñamanu vi krame'haṃ yajñāt taṃ nirbhajāmo yo3smān dveṣṭi yaṃ vayaṃ dviṣmaḥ | sa mā jīvīt taṃ prāṇo jahātu

हिन्दी अर्थ

विचरता है, वह ऋषियों क्रा पत्र है, श्रौर हिसा कृरयें वाले प्राप सेरा करता, है ।, प्रमेरुवर. ऋषिरयो का धुव है, ऋषि जनोग योगसमाति ढा इते पदा कर्ते है,रकट करते है तया इस से पुत्रवत् सेहं कसे हैर आती+पिता उत्यत्तःपुतर "सै स्नेह करते ह (क „क । +: ग्रो षं आपोऽ हीमो पवनतनय देवयर 1 5: › । ४५ अन्तः) .हवयान्तवंतीं जलो भें विद्यमान है,, (यजुष्यः) ,यजनीय (तम्) उखके -पति (इवम्); इस शर गरा मतन को ..(अतिषटुजामि) साद् करता हृ, सरमपित करता हं, है परमेदवर .(तम्ः त् षु सु को, (रभि) शरमिृख-होकर, (वनि). शुचि, पतिन करः (तेन्) न श्वि, भविन -सम्नादं की भाजा, द्वारा (तम्) उत शुराः को जौ कि (अस्मान् दष्ट) टमि पराय १ करता है, भौर (मू 1. जिस् के साथ ध मे, (बयम्. विषमः) ;हस रष करे है । यवाः (तम्). उस

English

Then let the poison’s burning heat pass downward and away- from thee. The bane hath fled afar. It wept, and asked the poison how it fared.

अध्याय 10

श्लोक 5.32

७॥ विष्णोः॒ क्रमो॑ऽसि सपत्न॒हौष॑धीसंशितः॒ सोम॑तेजाः ।ओष॑धी॒रनु॒ वि क्र॑मे॒ऽहमोष॑धीभ्य॒स्तं निर्भ॑जामो॒ यो॒३स्मान् द्वेष्टि॒ यं व॒यं द्वि॒ष्मः ।स मा जी॑वी॒त् तं प्रा॒णो ज॑हातु

7|| viṣṇoḥ kramo'si sapatnahauṣadhīsaṃśitaḥ somatejāḥ | oṣadhīranu vi krame'hamoṣadhībhyastaṃ nirbhajāmo yo3smān dveṣṭi yaṃ vayaṃ dviṣmaḥ | sa mā jīvīt taṃ prāṇo jahātu

हिन्दी अर्थ

ुदधरूपीं कमं द्वारा, या (अनयः न्या) इस वख द्रा „;;“ -.. - तं व॑येयं तं स्वषीयानेन भर्षणाऽनेन कर्मणाऽनयां मेन्या ।१९॥ कां०२१० १० ; -भ्रथर्ववेद-माष्य - २६१ (भमु शन्तः) हृवयान्तवती जलों मेँ विद्यमान; है (जुष्यः). यजनीयं , तथा के.भरति (इदम्). इस. शरीर य़ मन.को (म्रभि) अभिमुख होकर, (भव्-

English

Agni hath found the venom of the serpent, Soma drawn it out. Back to the biter hath returned the poison, and the snake hath died.

अध्याय 10

श्लोक 5.33

८॥ विष्णोः॒ क्रमो॑ऽसि सपत्न॒हाप्सुसं॑शितो॒ वरु॑णतेजाः ।अ॒पोऽनु॒ वि क्र॑मे॒ऽहम॒द्भ्यस्तं निर्भ॑जामो॒ यो॒३स्मान् द्वेष्टि॒ यं व॒यं द्वि॒ष्मः ।स मा जी॑वी॒त् तं प्रा॒णो ज॑हातु

8|| viṣṇoḥ kramo'si sapatnahāpsusaṃśito varuṇatejāḥ | apo'nu vi krame'hamadbhyastaṃ nirbhajāmo yo3smān dveṣṭi yaṃ vayaṃ dviṣmaḥ | sa mā jīvīt taṃ prāṇo jahātu

हिन्दी अर्थ

दवारा (तम्) उष शत्रुराजा को,.(भसि) श्रभिमुख , होकर, (भ्रतिसूजाभः) हम सैतिक विनष्ट करते हँ (यः). जो कि (अस्मान् ्रेष्टि) हमारे साथ दषं (अनया मेन्या इस वज द्वारा † - 6 है यथा “हिरण्यैः समवत्तेताग्रः” (यजु.१३।४) 7 भरत प्रतरीततःहीता है. बहम पच्त् है कमी रमेखवर के हो गणको सुजन ह 1. , केन. तमम्प्तिनामो. यो समात् द रिः 1. (वं द साने बऽ करणान्मा ९१

English

A charm to overthrow a rival and gain strength, dignity, long life, children, and general prosperity

अध्याय 10

श्लोक 5.34

९॥ विष्णोः॒ क्रमो॑ऽसि सपत्न॒हा कृ॒षिसं॑शि॒तोऽन्न॑तेजाः ।कृ॒षिमनु॒ वि क्र॑मे॒ऽहं कृ॒ष्यास्तं निर्भ॑जामो॒ यो॒३स्मान् द्वेष्टि॒ यं व॒यं द्वि॒ष्मः ।स मा जी॑वी॒त् तं प्रा॒णो ज॑हातु

9|| viṣṇoḥ kramo'si sapatnahā kṛṣisaṃśito'nnatejāḥ | kṛṣimanu vi krame'haṃ kṛṣyāstaṃ nirbhajāmo yo3smān dveṣṭi yaṃ vayaṃ dviṣmaḥ | sa mā jīvīt taṃ prāṇo jahātu

हिन्दी अर्थ

(दनुः). दिव्य परमेरवर है,जो क -तमहारे (भु न्तः). हदथान्तर्वती सार्य रोद षयो, द्वारा यजवीयं है, “(तम् ) उक, परभवर क प्रति (इदम्)-इस -शरीरःया..मन को (भरतिष्नामि) पै संराद् भेट करता हं पमरमित-करता हुः: द-प रस्हवर 18 (म्, भ॑ - उस मु. को; (अमि) अभिमुख हौ कदु (तनि). लिः पवनर.कर । (तन); शुचिः विन्र हमारे साथ द्वेषः करता है।.. भौर (यम्) जिस के.साथ, प्रतिक्रिया भें (वयम्, द्विष्मः) हम. दवष करते ह। रथव (तमं) उस श्रु-राजाः क रूपी कमं द्वारा यां .(श्रनया मेन्या) इस वंच द्गः . - ,: !

English

Ye are the power of Indra, ye the force and strength of Indra, ye his hero might and manliness.

अध्याय 10

श्लोक 5.35

१०॥ विष्णोः॒ क्रमो॑ऽसि सपत्न॒हा प्रा॒णसं॑शितः॒ पुरु॑षतेजाः ।प्रा॒णमनु॒ वि क्र॑मे॒ऽहं प्रा॒णात् तं निर्भ॑जामो॒ यो॒३स्मान् द्वेष्टि॒ यं व॒यं द्वि॒ष्मः ।स मा जी॑वी॒त् तं प्रा॒णो ज॑हातु

10|| viṣṇoḥ kramo'si sapatnahā prāṇasaṃśitaḥ puruṣatejāḥ | prāṇamanu vi krame'haṃ prāṇāt taṃ nirbhajāmo yo3smān dveṣṭi yaṃ vayaṃ dviṣmaḥ | sa mā jīvīt taṃ prāṇo jahātu

हिन्दी अर्थ

(जल) -तर्था अशा :(मेष) के . वर्णनं दोरावच्र वैदुतास््रं परतीत ये वं आपोऽ पारमेनयोऽप्ठशन्तयैलष्या देवय्॑नाः । हृदयान्तव॑ती जलो मै विद्यमान है; (यजुष्याः) जोकिं यजन भ्रति संगम योग्य है, प्रापणीय है, (- देवजनाः ) देवो के संगम. द्वारा प्रापणीयं (ताम्) उन भौर (इदम्) इस शारीर या मन करो हे.परमेदवर ! (भ्रति सुजाभि) .मै.सम्नाट् "तेरे प्रति . ट. करता ह, समपि करता हं, तान् खस के -अभिमूख होकर (भ्रति सुजामः) हम प्रजाए विनष्ट करती हँ (यः) कांऽ-१5 1 सुरभ्र रथव वेद-भाष्य २६१३

English

I join you with the bonds of Prayer to the victorious enterprise. For the victorious enterprise let all creation stand by me. For me ye, Waters, are prepared.

अध्याय 10

श्लोक 5.36

११॥ (६) ३६-४१ (१-६) ब्रह्मा।मन्त्रोक्ताः।३६ मार्त्वी पञ्चपदातिशाक्वरातिजागतगर्भाष्टिः, ३७ विराट् पुरस्ताद्बृहती, ३८ पुर उष्णिक्, ३९, ४० आर्षी गायत्री, ४० विराड् विषमा गायत्री।जि॒तम॒स्माक॒मुद्भि॑न्नम॒स्माक॑म॒भ्यऽष्ठां॒ विश्वाः॒ पृत॑ना॒ अरा॑तीः ।इ॒दम॒हमा॑मुष्याय॒णस्या॒मुष्याः॑ पु॒त्रस्य॒ वर्च॒स्तेजः॑ प्रा॒णमायु॒र्नि वे॑ष्टयामी॒दमे॑नमध॒राञ्चं॑ पादयामि

11|| (6) 36-41 (1-6) brahmā| mantroktāḥ| 36 mārtvī pañcapadātiśākvarātijāgatagarbhāṣṭiḥ, 37 virāṭ purastādbṛhatī, 38 pura uṣṇik, 39, 40 ārṣī gāyatrī, 40 virāḍ viṣamā gāyatrī| jitamasmākamudbhinnamasmākamabhya'ṣṭhāṃ viśvāḥ pṛtanā arātīḥ | idamahamāmuṣyāyaṇasyāmuṣyāḥ putrasya varcastejaḥ prāṇamāyurni veṣṭayāmīdamenamadharāñcaṃ pādayāmi

हिन्दी अर्थ

प्रकार कीः है; भररिव (चोर), -तथां शिव अथव ° १६।१।१-१३) । उन चिव अग्नियों को तथा शरीर यामन. को प्ररभरवर के प्रति समर्पित कर, ताकि हुम प्रिव धोर श्रग्तिवलेद्रषी मनंका वघ कर सकं काम, मलों को घो डाल । चोरता मल है । निक्षि = णिजिर् श्नौच पोषणयोः । कोई (भनुतम्, ऊदिम) -भनुत.भाषणः हम ने किया है, (तस्मात्, दूरितात्) उस दृष्पररिणामी, तथा (सवंस्मात्) सब. दुष्परिणामी (भरंहसः) पापो से (मा) मुभे (भ्रापः१) -ग्यापक-परमेदवर (परन्तु) सुरक्षितं करे। . : कौ प्रजाएं यह कहती ईँ कि "तीन वर्षो के समय मेँ हम मे से किसी ने अनृतः भाषण नहीं किया । यदि कोई भ्रनृतभाषषण हो गया हो,.जिस का किहममें से किसी को स्मरण नही. तो उस, दुष्मरिणामी सव प्रकार क भनुतभाषण-

English

Ye are the share of Agni. Grant, O heavenly Waters unto us the 158

अध्याय 10

श्लोक 5.37

१॥ सूर्य॑स्या॒वृत॑म॒न्वाव॑र्ते॒ दक्षि॑णा॒मन्वा॒वृत॑म्।सा मे॒ द्रवि॑णं यच्छतु॒ सा मे॑ ब्राह्मणवर्च॒सम्

1|| sūryasyāvṛtamanvāvarte dakṣiṇāmanvāvṛtam| sā me draviṇaṃ yacchatu sā me brāhmaṇavarcasam

हिन्दी अर्थ

न तो प्रजाभों का. .वाचक है, न जल .का, न दारीरिक रस-रक्त-वीयं का, वाचक.) रापः शब्दं परमेहवरराथं व्चिकं भीं है 1 यंथा-- - - १. -हा्यन (हत) == सायन (स --भ्रयन्) सकार की विकृति हकारे 5 जापः (वः) ऊनहत (समुम्). हद नतथद्र.की भोर (प्रहिणोमि) जारो, (सवंहायसः) सब.्रकार से गवय . वाले. सप्तमा प्ररिष्टाः)

English

Waters’ brilliant energy. By statute of Prajāpati I set you down for this our world.

अध्याय 10

श्लोक 5.38

२॥ दिशो॒ ज्योति॑ष्मतीर॒भ्याव॑र्ते ।ता मे॒ द्रवि॑णं यच्छन्तु॒ ता मे॑ ब्राह्मणवर्च॒सम्

2|| diśo jyotiṣmatīrabhyāvarte | tā me draviṇaṃ yacchantu tā me brāhmaṇavarcasam

हिन्दी अर्थ

हायन अनृषि यगि के मन्व (९२); प्वा् मनव (२३) गठित है 1 इन दीं म्नो के मवे कयकारथ् माव है" = ०८०११ मौर मत्व पे कथितः भावना" कायस्पं हं .1 मन्त (९३ न सौति प्रणो को “योगाभ्यास से हदथःे विलीन करना होत है ! यथा द चात प्राण "सवाध ह, शारीरिक तथा मानसिकं सव भरकर + ॥, गत्ति्यो के कारण 1 न की गतियो के निरोध से मनुष्यं हिसित, नहीं हाते,

English

Waters, your ceremonial share of Waters which the waters hold, which aids our sacrifice to Gods,

अध्याय 10

श्लोक 5.39

३॥ स॒प्त॒ऋ॒षीन॒भ्याव॑र्ते ।ते मे॒ द्रवि॑णं यच्छन्तु॒ ते मे॑ ब्राह्मणवर्च॒सम्

3|| saptaṛṣīnabhyāvarte | te me draviṇaṃ yacchantu te me brāhmaṇavarcasam

हिन्दी अर्थ

रजा होती है. इसीलियै मन्त्र २२ के भनुसार प्रजा मी संत्यपरायण है 1. कां०. १०।-यु० ५ भथर्वेवेद-भाष्यः . २६५ अरिं आपो अप॑ रिर्भमस्मव् । की भस्मदेनौं दुरितं सुपरतीकाः भ दुः्वध्यं र मर वन्दं ॥२४॥ तथा . स॒प्त. प्राण. ( मन्व २३) (भरिप्राः) पापरहित हो, गए है, भतः रिग्रकाभ्रथंहै पप । “रपो रिभरमिति पापनामनी” (निक्त ४।३। निष्पाप श्रौर पवित्र हो जाने पर मनुष्य पवित हो जाता है, भौर उसका

English

This as a remnant here I leave. Do not thou wash it clean away. With this we let the man go by who hates us and whom we abhor.

अध्याय 10

श्लोक 5.40

४॥ ब्रह्मा॒भ्याव॑र्ते ।तन्मे॒ द्रवि॑णं यच्छतु तन्मे॑ ब्राह्मणवर्च॒सम्

4|| brahmābhyāvarte | tanme draviṇaṃ yacchatu tanme brāhmaṇavarcasam

हिन्दी अर्थ

चाहिए, भौर . सात्त्विक मन का उपार्जन करना - चाहिए । तमी प्रजाप भ्ररिपराः“लो सकतीं है 1 यथा--“मन एवं मनुष्याणां कारणं बन्धमोक्षयोः । मोक्ष के कारण है, भतः मित्र है। विष्णोः करमोंऽपि सपत्नहा पथिवीसैितोऽग्नतेनाः षा ¦ : (विष्णोः) विष्णु के (कमः) पराक्रम. वाला (असि) तु है, (सपत्न ह ) सपत्न का हनत करने वाला है, (पृथिवीसंदितः) , पृथवो मे तेज ष वर दष्ट) हमारे साथर कैरताः है, (म्) जिसके ¦

English

Whatever evil I have done within this last triennium, From all that woe and misery let the waters shield and guard me well.

अध्याय 10

श्लोक 5.41

५॥ ब्रा॒ह्म॒णाँ अ॒भ्याव॑र्ते ।ते मे॒ द्रवि॑णं यच्छन्तु॒ ते मे॑ ब्राह्मणवर्च॒सम्

5|| brāhmaṇā~ abhyāvarte | te me draviṇaṃ yacchantu te me brāhmaṇavarcasam

हिन्दी अर्थ

यथाक्षरं दाक्वयेतिशक्करी ; २६ पञ्चपवाति- कं १० ।सू०५. ्रथववेद-माष्य २६७ साथ (वयम् द्विष्मः) हम देष करते है! (सः) वह (मा) न (जीवत्) जीवित रहे, (तम्) उसे (प्राणः) प्राण ( जहातु) छीड जायं । 1 सुं का. वणन मन्व (३७) में हृभा है । मन्त्र मँ ,सावंभौम-शासंक स्वयं वाला है, भर्थात् जैसे परमेदवर का पराक्रम पृथिवी पर दहै, वह निज पराक्रमं दारा समप्र पृथिवी का शासन न्यायपूरव॑क करता है,वेसे तु भी सम्पुथिवीः के प्रजाजरनों पर न्यायपूवंक रासन कर श्रौर जो सावंभौम निंथमों के

English

Onward I urge your gathered floods: enter your own abiding- place, Uninjured and with all your strength. Let nothing bend or bow us down. May the pure Waters cleanse us from defilement,

अध्याय 10

श्लोक 5.42

६॥ (७) ४२-५० (१-९) विहव्यः।प्राजापत्या अनुष्टुप्, ४४ त्रिपदा गायत्रीगर्भानुष्टुप्, ५० त्रिष्टुप्।यं व॒यं मृ॒गया॑महे॒ तं व॒धै स्तृ॑णवामहै ।व्यात्ते॑ परमे॒ष्ठिनो॒ ब्रह्म॒णापी॑पदाम॒ तम्

6|| (7) 42-50 (1-9) vihavyaḥ| prājāpatyā anuṣṭup, 44 tripadā gāyatrīgarbhānuṣṭup, 50 triṣṭup| yaṃ vayaṃ mṛgayāmahe taṃ vadhai stṛṇavāmahai | vyātte parameṣṭhino brahmaṇāpīpadāma tam

हिन्दी अर्थ

जो कि पृथिवी प्रर मलिनाचरण वलेहै। गि इस “श्रात्मसंबोधन” के परचात् सावंभौमदशासक कहता है कि जँ समं शासक मिल कर, पृथिवी के भोगो से उसे भाग -रहित कर देते हँ जक्षि भजा भ्रौर हम शासको के साय द्वेष करता है, भ्रौर परिणामर्प मँ जिषकँ प्रति हम सब काभी द्वषहोजातादहै। उसे हम जीवित नहीं रहने देते, विरुद्ध चलता है, जिन नियमों का -निर्माण, प्रजा भ्रौर शासको को बहु- का निदेश मनवम हृभ्रा है । संशित तेज या उग्र । यथा “सत्यं बृहदृत- (विष्णोः) विष्णु के (कमः) पराक्रम वाला (भसि) तु है, (सपलहा)

English

Fair to behold remove our sin and trouble, and bear away ill- dream and all pollution. Thou art the step of Vishnu, rival-slayer, sharpened by earth, aglow with fire of Agni,

अध्याय 10

श्लोक 5.43

वै॒श्वा॒न॒रस्य॒ दंष्ट्रा॑भ्यां हे॒तिस्तं सम॑धाद॒भि।इ॒यं तं प्सा॒त्वाहु॑तिः स॒मिद् दे॒वी सही॑यसी

vaiśvānarasya daṃṣṭrābhyāṃ hetistaṃ samadhādabhi| iyaṃ taṃ psātvāhutiḥ samid devī sahīyasī

हिन्दी अर्थ

उग्र. (वायुतेजाः) तथा वायुस तेजस्वी तु है ।- हम् ) चै ( ्रन्तरि्नः (मा) न (जीवीत्) जीवित रहे, (तम्) -उसे (प्राणः) प्राण. (जहातु) .. भन्तरिक्ष की देवता वायु है । शतरुभों की वह हिसा करता, भौर उरे अन्तरिक्ष मेँ संचार करने सेः भाग रूप (सूयतेजाः) तथा सूं के सदुश तेजस्वी तु है । (ब्रहम्) म. (दिवम्

English

Earth have I ranged: from earth we bar him who hates us and whom we hate. Ours is superior place and ours is conquest: may I in all fights tread down spite and malice. Let him not live, let vital breath desert him.

अध्याय 10

श्लोक 5.44

राज्ञो॒ वरु॑णस्य ब॒न्धोऽसि ।सो॒३मुमा॑मुष्याय॒णम॒मुष्याः॑ पु॒त्रमन्ने॑ प्रा॒णे ब॑धान

rājño varuṇasya bandho'si | so3mumāmuṣyāyaṇamamuṣyāḥ putramanne prāṇe badhāna

हिन्दी अर्थ

हम देष करते है ।. (सः) वह -(मा) न (जीवीत्) जीवित रहे" (तम्) उसे (प्राणः) प्राण (जहातु) छोड़ जाय 1 । - सावभौम शासक अपने-भराप को सूयंसदुश तेजस्वी कहता है । सूर्यं . ; भिन्न करता है, वैसे साव॑मौम शासक भी लोकस्थ रात्रो को विनष्टं मनुष्य रादि सदृ प्राणी रहते ह --यह वैदिक मान्यता है । जेस वतंमानं वैज्ञानिक युग मे उत्कषेपक-विमान, सूयंलोक का भी अतिक्रमण कंर के, उसं से भी परे तक पहुचे ह, वसे सावंभौमशासक भी वहां पहुच कर शुभो.

English

With this I here invest the power and splendour, the life of that man and his vital breathing, the son of such a sire and such a woman, here do I overthrow and cast him downward.

अध्याय 10

श्लोक 5.45

यत् ते॒ अन्नं॑ भुवस्पत आक्षि॒यति॑ पृथि॒वीमनु॑ ।तस्य॑ न॒स्त्वं भु॑वस्पते सं॒प्रय॑च्छ प्रजापते

yat te annaṃ bhuvaspata ākṣiyati pṛthivīmanu | tasya nastvaṃ bhuvaspate saṃprayaccha prajāpate

हिन्दी अर्थ

सार्वभौम शासक, जोकि शरन्तरिध में भी उग्र होकर शासने करता है भपने-भ्रापं को वायु के सदृदा तेजस्वी कहता: है।वायुकेदो कामहै, गति भ्रौर गन्धन (हिसा). । वा गतिगन्धनयोः. कार. १०५ सू 9 . भरथवेवेद-माष्य २६६९ रूप (मनस्तेजाः) तथा मन के सवृ तेजस्वो तु है । (श्रम्) मै (दिः. दिशो से (तम्) उसे (निभंजामः) हम भाग रहित करते है (यः) .जोकिं ्रतीकार रूप मे (वयम् द्विष्मः) हम देष करते ह । (सः) वह (मा) न (जीवीत् ) भवित रहे (तम्) उसे (प्राणः) प्राण ( जहातु) छोड़ जाय ।

English

I follow Sūrya’s course in heaven, the course that takes him to the South. May that bestow upon me wealth and glory of a Brāhman’s rank. I turn me to the regions bright with splendour.

अध्याय 10

श्लोक 5.46

अ॒पो दि॒व्या अ॑चायिषं॒ रसे॑न॒ सम॑पृक्ष्महि ।पय॑स्वानग्न॒ आग॑मं॒ तं मा॒ सं सृ॑ज॒ वर्च॑सा

apo divyā acāyiṣaṃ rasena samapṛkṣmahi | payasvānagna āgamaṃ taṃ mā saṃ sṛja varcasā

हिन्दी अर्थ

मँ होता है तब की पूवं, परिचम, उत्तर, दक्षिण दिन्ाभों को.दिगभ्यः. कहा है इन दो कालो में न भ्रधिक. सर्दी होती है भ्रौरन. भधिक गर्मी । भरतः कार्यो के निमित्त मन भ्रधिक स्फ़ृति वालाहो जाता है। मन के सदु स्पूलि ख वेग वाला प्रौर कोई पदायं नहीं । क्षण में यह द्युलोक तथा ऽस से परे पहुंच जाता है । मन्त्र (२७) में चुलोक तक विक्रम करने का निदेश. . (विष्णोः) विष्णु के (क्रमः) पराक्रम वाला (रसि) तु है, (सपलनहा) . न (जीवीत्) जीवित रहे, (तम्) उसे (प्राणः) प्राण (जहातु) छोड़ दिशाभों का । भूमष्यरेखा से सूर्यं, ज॑ उत्तरायण की शरोर गति करता है बनती. है. वे अवान्तर" दिशाणं हँ । इसी प्रकार भमध्यरेखा से दक्षिणायन

English

May they bestow upon me wealth and glory of a Brāhman’s rank. I turn me to the Rishis Seven. May they, etc.

अध्याय 10

श्लोक 5.47

सं मा॑ग्ने॒ वर्च॑सा सृज॒ सं प्र॒जया॒ समायु॑षा ।वि॒द्युर्मे॑ अ॒स्य दे॒वा इन्द्रो॑ विद्यात् स॒ह ऋषि॑भिः

saṃ māgne varcasā sṛja saṃ prajayā samāyuṣā | vidyurme asya devā indro vidyāt saha ṛṣibhiḥ

हिन्दी अर्थ

से भ्रगले मासो मेँ गर्मी बढती जाती है; भ्रौर वायु कमारूप' मं तीत्र गतिः ली होती जाती है । इसे. बात कहते हँ । इंसः बात के कारण कई वृक्षं भी विशेष--२०-२९ मन्तं म सानंमौमदासन के सर्पत का भथिकः हा) सपल का हनन करने वाला है, (ऋक्संदितः) 'ऋवाश्रो द्वारां उग्र / ¦ ॥ हश्ा. है. (सामतेजाः) तथा साम के तेज.वाला तु है। (रह्). यै. (ऋच

English

I turn me unto Prayer. May that, etc. I turn me unto Brāhmans. May they etc. We hunt that man, we beat him down and slay him with our murderous blows.

अध्याय 10

श्लोक 5.48

यद॑ग्ने अ॒द्य मि॑थु॒ना शपा॑तो॒ यद् वा॒चस्तृ॒ष्टं ज॒नय॑न्त रे॒भाः ।म॒न्योर्मन॑सः शर॒व्या॒३ जाय॑ते॒ या तया॑ विध्य॒ हृद॑ये यातु॒धाना॑न्

yadagne adya mithunā śapāto yad vācastṛṣṭaṃ janayanta rebhāḥ | manyormanasaḥ śaravyā3 jāyate yā tayā vidhya hṛdaye yātudhānān

हिन्दी अर्थ

(तस्). उस. (निभेजाम्ः) हम भाग. रहित करते ह (यः) जोकि (अस्मान् १. भ्रवान्तर दिशाए' सूयं कौ हैनिक गति के साथ-साथ पर्तिदित- बदलती कां० १०५ सु०;५ भ्रथववेद-पाष्य २७१ दरेष्टि) हमारेसाथः द्वेष -करता है, भौर , (यम्) -जिस. -के साथ (वयम् ष्मः) हम द्वेष करते. है । (संः) वह (मा) नं (जीवीत्) . जीवित रहे, (तम्) उसे (प्राणः) प्राणं (जहातु) छोड जाय। सावभौम शासक कहता है कि मै. ऋचां. के राजनेतिक उपदेशों वाला-भी हूं 1 शासन मे समयानुसार उग्रता तथा शन्ति कै प्रयोग-करना होता है । यथा “साम, दानं, दण्ड, भेद इन चार उपायो का भवलम्बन शासको को करना. होता है। इन उपायो में साम शौर दण्डका भो कथनं

English

We with the spell have hurried him to Parameshthin’s opened jaws. Let the shot missile catch him with Vaisvānara’s two mighty fangs.

अध्याय 10

श्लोक 5.49

परा॑ शृणीहि॒ तप॑सा यातु॒धाना॒न् परा॑ग्ने॒ रक्षो॒ हर॑सा शृणीहि ।परा॒र्चिषा॒ मूर॑देवां छृणीहि॒ परा॑सु॒तृपः॒ शोशु॑चतः शृणीहि

parā śṛṇīhi tapasā yātudhānān parāgne rakṣo harasā śṛṇīhi | parārciṣā mūradevāṃ chṛṇīhi parāsutṛpaḥ śośucataḥ śṛṇīhi

हिन्दी अर्थ

भरभिप्राय यह सपलल को वैदिक-संस्ृति से वल्चित्त कर देना चाहिए, वंदिक रोर “साम द्वारां सामवेद को मी सूचिते किया है । शेष भिप्रायः (म॒न््र सपत्न का : हनन करने वाला है, (यज्ञसंशितः) यज्ञ दारा.उग्र हरा शामिल होने से व्रञ्चित कर देना चाहिए जहां ऋचा्रो कँ भ्राषार पर सामगान हो रहा हो । यह सपत्न का सामाजिक बहिष्कार है । (सः) वह (मा) न (जीवीत्) जीवित रदे, (तम्) उसे (प्राणः). प्राण

English

This offering, and the mightiest Goddess, the Fuel, eat him up! Thou art the bound of Varuna the King. Bind, such an one, the son of such a woman, in vital breath and in the food that feeds him.

अध्याय 10

श्लोक 5.50

अ॒पाम॑स्मै॒ वज्रं॒ प्र ह॑रामि॒ चतु॑र्भृष्टिं शीर्ष॒भिद्या॑य वि॒द्वान्।सो अ॒स्याङ्गा॑नि॒ प्र शृ॑णातु॒ सर्वा॒ तन्मे॑ दे॒वा अनु॑ जानन्तु॒ विश्वे॑

apāmasmai vajraṃ pra harāmi caturbhṛṣṭiṃ śīrṣabhidyāya vidvān| so asyāṅgāni pra śṛṇātu sarvā tanme devā anu jānantu viśve

हिन्दी अर्थ

... (विष्णोः). विष्णु के (क्रमः) पराक्रम वाला (भसि) तु है, ( सपलनहा ) सपत्न का -हनन करने वाला है, (भोषधीसंदितः) उग्र स्वभव वाली . भ्नोषधियों मे उग्र, (सोमतेजाः) भौर सोमसदुश तेज.वाला तु है । (श्रहम्) करते है (यः). जो किं (भ्रस्मान् इष्टि) हमारे साथ दषकरतादहै, भौर. न. (जीवीत्) जीवितः रहे, भौर (तम्) उसे (प्राणः) प्राण (जहातु). ॥

English

Celestial Waters have I sought: with juice have I besprinkled them. With milk, O Agni, have I come; bestow upon me splendid strength. Give me the boon of splendid strength; give, Agni! progeny and life.

स्रोत: bhavykhatri/DharmicData · प्राप्त 3/6/2026

शास्त्रीय प्रामाणिकता एवं पारदर्शकताSources & Interpretation

स्रोत, संस्करण एवं व्याख्या वर्गीकरण

धर्म ग्रंथ पर मूल शास्त्र, पारंपरिक भाष्य और आधुनिक व्याख्या को पूर्णतः पृथक रखा जाता है ताकि पाठक को किसी भी व्याख्या के शास्त्र होने का भ्रम न हो।

सामग्री वर्गीकरण संकेत (Epistemic Content Labels)

6 स्तरिय प्रमाण व्यवस्था
मूल पाठOriginal text

अपौरुषेय / प्रामाणिक शास्त्र (Primary Canonical Scripture)

मूल संस्कृत, प्राकृत अथवा अवधी श्लोक/मंत्र। यह सर्वोच्च प्रमाण (प्रस्थान) है। इस पाठ में किसी भी आधुनिक व्याख्याकार का हस्तक्षेप नहीं है।

शाब्दिक अनुवादLiteral translation

पदार्थ व अन्वय (Direct Grammatical & Word-for-Word Meaning)

व्याकरणसम्मत प्रत्यक्ष शब्दार्थ (अन्वय)। बिना किसी दार्शनिक संप्रदाय के पूर्वाग्रह के, संस्कृत शब्दों का सटीक भाषांतर।

पारंपरिक भाष्यTraditional commentary

आचार्य परंपरा व टीका (Classical Lineage Commentary)

प्राचीन आचार्य परंपरा (यथा शंकराचार्य, रामानुजाचार्य, मध्वाचार्य, श्रीधर स्वामी) द्वारा विरचित शास्त्रीय भाष्य व टीकाएं।

सरल व्याख्याSimple explanation

भावार्थ व सुबोध प्रबोधन (Accessible Pedagogical Exposition)

आधुनिक जिज्ञासुओं के लिए सरल भाषा में भावार्थ। यह मूल मंत्र नहीं, बल्कि पाठ को सुगम बनाने हेतु संपादकीय व्याख्या है।

आधुनिक चिंतनModern reflection

समसामयिक विमर्श व अनुप्रयोग (Contemporary Application & Analysis)

दार्शनिक, मनोवैज्ञानिक व वैज्ञानिक समरूपताओं पर आधुनिक चिंतन। यह मूल शास्त्र का अंग नहीं है और इसे शास्त्रोक्त सिद्धांत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

शोध टिप्पणीResearch note

पांडुलिपि एवं ऐतिहासिक शोध (Critical Apparatus & Manuscript Research)

पांडुलिपि विविधताएं, पाठ-भेद (variant readings), छंद रचना, और ऐतिहासिक व तुलनात्मक भाषावैज्ञानिक शोध। यह शास्त्र का मूल संदेश बदलने हेतु नहीं, बल्कि पाठ की प्रामाणिकता परखने के लिए है।