Atharva Veda
10
अध्याय 10 / 20

Kanda 10

काण्ड 10

350 श्लोकभाग 4/7 · श्लोक 6.1–6.35

पूर्ण अध्याय पाठ35 श्लोक

अध्याय 10

श्लोक 6.1

मणिबन्धनम्।१-३५ बृहस्पतिः।फालमणिः, वनस्पतिः, ३ आपः।अनुष्टुप्, १,४,२१ गायत्री, ५ षट्-पदा जगती, ६ सप्तपदा विराट् शक्वरी, ७-१० त्र्यवसाना अष्टपदाऽष्टिः (१० नवपदा धृतिः), ११, २०, २३-२७ पथ्यापङ्क्तिः १२-१७ त्र्यवसाना षट्-पदा शक्वरी, ३१ त्र्यवसाना षट्-पदा जगती, ३५ पञ्चपदा त्र्यनुष्टुब्गर्भा जगती।अ॒रा॒ती॒योर्भ्रातृ॑व्यस्य दु॒र्हार्दो॑ द्विष॒तः शिरः॑ ।अपि॑ वृश्चा॒म्योज॑सा

maṇibandhanam| 1-35 bṛhaspatiḥ| phālamaṇiḥ, vanaspatiḥ, 3 āpaḥ| anuṣṭup, 1,4,21 gāyatrī, 5 ṣaṭ-padā jagatī, 6 saptapadā virāṭ śakvarī, 7-10 tryavasānā aṣṭapadā'ṣṭiḥ (10 navapadā dhṛtiḥ), 11, 20, 23-27 pathyāpaṅktiḥ 12-17 tryavasānā ṣaṭ-padā śakvarī, 31 tryavasānā ṣaṭ-padā jagatī, 35 pañcapadā tryanuṣṭubgarbhā jagatī| arātīyorbhrātṛvyasya durhārdo dviṣataḥ śiraḥ | api vṛścāmyojasā

हिन्दी अर्थ

फो करते भ्रादि. (अस्माकम्) हमारे हो गणु है, (विवः) सब (श्रयतीः) -दातरुरूप (पृतनाः) सेनाग्रं के (रभि); पभिमुख, संमुख (श्रस्थाम्). मँ खड़ा उ माता के (पवस्य) धूल की (वर्ष). वीष्ठिको (तेजः) तेल को. १. भअ्रथवा शासन की 'पुरुष-सेनार्म्रो" के तेज वाला'है।. . ˆ . ३. पुत्र काः परिचय मासौ कै नाम द्वारा भी वेकाभिमतः है । ्गुष्यायंण इरा पूत केःगो्नोम.का कंथनःहृभ्रा है + . .:. '; + (गणम्) भाणः कौ, (भः) भयु को (नवेष्टयाभिः) वरां , जयेत प्राणम् / -पराण-को,:(प्राुः) भायुः को . (निवेष्टयामि+) षेरतां हु" लपेटता " जितम् - भरथात् “जो हम ने जीता है वह हमारा हो गा है, जो ६३ जो हम ने हमारा हो गया दहै, जो का क हमारा हो गयाः हैः । विद्वा. ना ९. नी की विरोधिनी सब सेनाएुं । वेदों के -भ्रतुसार माण्डलिकः ४.० ८५ चुनाव प्रजाएं करती है, मण्डलिक राजा.सम्ना्ो" का चुनाव्

English

The glorification of an all-powerful amulet With power I cut away the head of my malignant rival, of mine evil-hearted enemy.

अध्याय 10

श्लोक 6.2

वर्म॒ मह्य॑म॒यं म॒णिः फाला॑ज्जा॒तः क॑रिष्यति ।पू॒र्णो म॒न्थेन॒ माग॑म॒द् रसे॑न स॒ह वर्च॑सा

varma mahyamayaṃ maṇiḥ phālājjātaḥ kariṣyati | pūrṇo manthena māgamad rasena saha varcasā

हिन्दी अर्थ

को पीडित करने वालों को (बृणीहि) तु विरीणं कर, विनष्ट कर्, (परा) तेज दवारा (शृणीहि) तू विणे कर, विनष्ट कर । (परा) पराङ्मुख हृएं निज दीप्ति द्वारा (बुणीहि) तु विचीणे कर, विनष्ट कर, (परा) पराङ्मुख भ्रपने को तृप्त करने बालों को (शृणीहि) विश्चीणं कर, विनष्ट कर । वर्ण ' , अयवेवेद्र-माष्य कां० १० सुभ

English

This Charm did Chandra wear, with this conquered the forts of Asuras, the golden forts of Dānavas. This yields him glory and renown, again, etc.

अध्याय 10

श्लोक 6.3

यत् त्वा॑ शि॒क्वः प॒राव॑धी॒त् तक्षा॒ हस्ते॑न॒ वास्या॑ ।आप॑स्त्वा॒ तस्म॑ज्जीव॒लाः पु॒नन्तु॒ शुच॑यः॒ शुचि॑म्

yat tvā śikvaḥ parāvadhīt takṣā hastena vāsyā | āpastvā tasmajjīvalāḥ punantu śucayaḥ śucim

हिन्दी अर्थ

निज हरीर में धारणः किये “ रहता है । सर्वोच्च दो भ्रधिकारियों के निये काऽ-१५ सु०६ भ्रथववेद-भाष्य २९१ वीरता: के कमं के लिये । (सः) बह सम्नाट् (मस्मे ) इस बृहस्पति के लिये (भूयोभूयः) वार-वार या भ्रधिकाधिक . खूप मे, (इवः इवः) भ्राएःदिन- प्रति-दिनं (बलमिद्) सेन्यबल ही (दुहे) दोहता है, - प्रदान .करता है+ कृ्णंन-हुभा है ।-बलस् सैन्य (गीता भष्याय. १, दलोक ४) । . . यमव॑ध्नाद् बहस्पातिभेणि फार इतश्चुत॑युगरं खदिरमोजसे ।

English

foes. The Amulet Brihaspati formed for the Gods, that slew the fiends.

अध्याय 10

श्लोक 6.4

हिर॑ण्यस्रग॒यं म॒णिः श्र॒द्धां य॒ज्ञं महो॒ दध॑त्।गृ॒हे व॑सतु॒ नोऽति॑थिः

hiraṇyasragayaṃ maṇiḥ śraddhāṃ yajñaṃ maho dadhat| gṛhe vasatu no'tithiḥ

हिन्दी अर्थ

इसलिये भूवमोतिकः जगत् भे सूवाःकारण . वागु या.वात्है । इसलिये वाषु.याः ¦ व्रात मानां गया प्रतीत होत्ना है । सम्भवतः भकार पारचात्य -वशञानिरकौ का एलः है । करों०.१०.। सु०६ भरथवंवेद-माष्य २९५७ महत्त्व .(दुे) दोहा है, (सूयोभूयः) बार-बार या प्रधिकाधिकः रूप मे, ठवर ! तु (द्विषतः) रोग-रतरप्रों का (जहि). हनन कर ।

English

illustrious fame. The Amulet Brihaspati made for the Gods, that slew the fiends, That Amulet here hath come to me combined with all prosperities.

अध्याय 10

श्लोक 6.5

तस्मै॑ घृ॒तं सुरां॒ मध्वन्न॑मन्नं क्षदामहे ।स नः॑ पि॒तेव॑ पु॒त्रेभ्यः॒ श्रेयः॑श्रेयश्चिकित्सतु॒ भूयो॑भूयः॒ श्वःश्वो॑ दे॒वेभ्यो॒ म॒णिरेत्य॑

tasmai ghṛtaṃ surāṃ madhvannamannaṃ kṣadāmahe | sa naḥ piteva putrebhyaḥ śreyaḥśreyaścikitsatu bhūyobhūyaḥ śvaḥśvo devebhyo maṇiretya

हिन्दी अर्थ

„ मन्त्र ११,१२ का विषय एक है । कृषि द्वारा, शरीरस्यी कतर भ, कर्मरूप कृषि का वर्णेन हृभा है, जिस का परिपाक है सुल भौर दुःख । है। इस कृषि की रक्षा प्राणापान करते हैँ । जिन श्र्विनौ कहा है । ये दोनो व तल्प है, वायुरूप हैँ । यह वायु ही प्राणं रौर श्रपानरूप म परि. (स्यति) -बृहैत्-बरहयाण्डः के पर्ति परमेदवंर ने, (भारवे,वाताय)) शीघ्रगति काली वायु के निर्माणः के लिये (यम्, मणिम्). जिसं मणि की (त्वे; को उसने - (्रजयत्) शीता, (सः) उसं सपिता न यात

English

That Amulet may the Deities bestow on me to win success, The conquering, strength-increasing Charm, the damager of enemies.

अध्याय 10

श्लोक 6.6

यमब॑ध्ना॒द् बृह॒स्पति॑र्म॒णिं फालं॑ घृत॒श्चुत॑मु॒ग्रं ख॑दि॒रमोज॑से ।तम॒ग्निः प्रत्य॑मुञ्चत॒ सो अ॑स्मै दुह॒ आज्यं॒ भूयो॑भूयः॒ श्वःश्व॒स्तेन॒ त्वं द्वि॑ष॒तो ज॑हि

yamabadhnād bṛhaspatirmaṇiṃ phālaṃ ghṛtaścutamugraṃ khadiramojase | tamagniḥ pratyamuñcata so asmai duha ājyaṃ bhūyobhūyaḥ śvaḥśvastena tvaṃ dviṣato jahi

हिन्दी अर्थ

तथा सत्थस्तुतिं वाणीं कां ( इ दोहन.किया, बृहस्पतिं को प्रदानं किया, . (भूयोभूयः) बार-बार याँ शकाधिंकंरप (इवः इवः) .प्राए' दिनः परमेश्वर 1. तुः (द्वतः). लारीरिक-मानुसिक-भाव्यासमिक ःरोगूपी! शनुभों (मणिम्) :यहःमणि; है -पररमेद्वरीय-कामना, . वातःके निर्माणाय +-इसं निर्भाण कायंरूपी-ःमणि को भानो सविता ने भी बन्धा; धारण किया, जिस द्वारा सविता दिन क निर्माणं करतां है, । सवितु-काल के पर्दचात् ही दिनं रामः, भधस्तात् कृष्णं .: १२।२।१४) + सविता केः कालः मे मूमि -प्र

English

I bind on me my happy fate with holy prayer and energy. Foeless destroyer of the foe, it hath subdued mine enemies. May this Chaim, offspring of the Gods, make me superior to my foe.

अध्याय 10

श्लोक 6.7

यमब॑ध्ना॒द् बृह॒स्पति॑र्म॒णिं फालं॑ घृत॒श्चुत॑मु॒ग्रं ख॑दि॒रमोज॑से ।तमिन्द्रः॒ प्रत्य॑मुञ्च॒तौज॑से वी॒र्याऽय॒ कम्।सो अ॑स्मै॒ बल॒मिद् दु॑हे॒ भूयो॑भूयः॒ श्वःश्व॒स्तेन॒ त्वं द्वि॑ष॒तो ज॑हि

yamabadhnād bṛhaspatirmaṇiṃ phālaṃ ghṛtaścutamugraṃ khadiramojase | tamindraḥ pratyamuñcataujase vīryā'ya kam| so asmai balamid duhe bhūyobhūyaḥ śvaḥśvastena tvaṃ dviṣato jahi

हिन्दी अर्थ

प्रकाशः होता है; मानो संविताने स्वः” पर निजसत्ता से विजगर पाली है । त्मिक है, जिसे कि उपनिषदों मे “कामद प्राय कामनाः. कट ह.1..;कामन है २. “सविता” प्रातःकाल का सूयं .है, जबकि धुलोक में तो प्रकाश होता है, भौर कां९-१५। सू९ . भ्रथरववेद-माष्य .. २६६ मन्तो द्वारा परमेद्वर की स्तुतियां उपासक करते है, मानो. सविता ने एन स्तुतिवाणियों का दोहन बहस्पति-परमेदवर के लिये किया है । ये स्तुतियां बार-बार बहुमात्रा मं प्रतिदिनं होती दहै ।. परमेदरवर् सच्चे उपासक के शारीरिक रादि रोगो, मलों (इन रोगो, चात्रभ्रो) का, इन स्तुत्यो के वारा

English

So may this charm whose milk expressed these three worlds longingly await, Be fastened on me here, that it may crown me with surpassing power.

अध्याय 10

श्लोक 6.8

यमब॑ध्ना॒द् बृह॒स्पति॑र्म॒णिं फालं॑ घृत॒श्चुत॑मु॒ग्रं ख॑दि॒रमोज॑से ।तं सोमः॒ प्रत्य॑मुञ्चत म॒हे श्रोत्रा॑य॒ चक्ष॑से ।सो अ॑स्मै॒ वर्च॒ इद् दु॑हे॒ भूयो॑भूयः॒ श्वःश्व॒स्तेन॒ त्वं द्वि॑ष॒तो ज॑हि

yamabadhnād bṛhaspatirmaṇiṃ phālaṃ ghṛtaścutamugraṃ khadiramojase | taṃ somaḥ pratyamuñcata mahe śrotrāya cakṣase | so asmai varca id duhe bhūyobhūyaḥ śvaḥśvastena tvaṃ dviṣato jahi

हिन्दी अर्थ

शीघ्रगतिवालीः वायु के निर्माण के लिये; : (यम्, मणिम्) जिस -कामनी; को (श्रापः) जल भी (बिभ्रतीः) मानो धारण करते हुए भ्रौर (भक्षिताः; न क्षीण होते हृए (सदा) सदा (घावन्ति). .गति करते है दौड़ते रहे) (सः) उस बहस्पति ने (राभ्यः) इन जलो कै लिये या इन जलो से (श्रमु- इतः मरो. वायु के निर्मोणका ;व्रार-बार वणेन भ्राताहै कारणे यह है कि वैदिक वर्णेनों मँ.परमेक्वर द्वारा . भाकाश, भाकाश से वायु, प्रौरं ने वात के उत्मादन; मेँ कामनारूपीः त्र्त-का धारण किया । परमेदवरने (भाभ्यः) इन “जलो . कै. लिये” श्रमृतत्त्व को. दोहा । तमी. सानो जल “सदा गतिˆकर रहे है, विना क्षीण हृए । नदियों से समुद्र की भ्रोर, रौर

English

The Charm to which men, Fathers, Gods look ever for their maintenance, May this be fastened on me here, to crown me with surpassing power As, when the plough hath tilled the soil, the seed springs up in. fertile land,

अध्याय 10

श्लोक 6.9

यमब॑ध्ना॒द् बृह॒स्पति॑र्म॒णिं फालं॑ घृत॒श्चुत॑मु॒ग्रं ख॑दि॒रमोज॑से ।तं सूर्यः॒ प्रत्य॑मुञ्चत॒ तेने॒मा अ॑जय॒द् दिशः॑ ।सो अ॑स्मै॒ भूति॒मिद् दु॑हे॒ भूयो॑भूयः॒ श्वःश्व॒स्तेन॒ त्वं द्वि॑ष॒तो ज॑हि

yamabadhnād bṛhaspatirmaṇiṃ phālaṃ ghṛtaścutamugraṃ khadiramojase | taṃ sūryaḥ pratyamuñcata tenemā ajayad diśaḥ | so asmai bhūtimid duhe bhūyobhūyaḥ śvaḥśvastena tvaṃ dviṣato jahi

हिन्दी अर्थ

्नोर गति कर रहे द । भतः मानों जल भ्रमृत है । या “श्राम्यः-=इन जलो से” षरमेषवर ने हमारे लिये भ्रमृतत्व दोहा । जलचिकित्सा द्वारा हमारी “्रमृत भो कटहूते हैँ । यथा “भ्रमृतम् उदकनाम” (निषं० १११२) । जलो मँ भैषज्यगुण है धिन के सेवन से मनुष्य भी भ्रमत हो जाते ह, पूणं निवास है । “भ्रापः पृणोत भेषजं वर्यं तन्वे -ममं" (अथव ० १।६।३)» भर्थात् है जलो तुम मेरी ततु के लिये रोगनिवारक भ्रौषध प्रदान करोः; दीघ्रगतिवाली वायु के निर्माण के लिये (यम् मणिम्) जिस मणिकों को पदां करती. है 1 (सः) उस राजा वरुण ने (श्रस्मं) इस -बृहस्पति कै लिये (सत्यमिद्). सत्य को (दुहे) दोहा, (भूयोभूयः) बार-बार या -भधिकाधिक

English

Let cattle, progeny, and food of every kind spring up with me. Charm, forwarder of sacrifice, who hast a hundred priestly fees.

अध्याय 10

श्लोक 6.10

यमब॑ध्ना॒द् बृह॒स्पति॑र्म॒णिं फालं॑ घृत॒श्चुत॑मु॒ग्रं ख॑दि॒रमोज॑से ।तं बिभ्र॑च्च॒न्द्रमा॑ म॒णिमसु॑राणां॒ पुरो॑ऽजयद् दान॒वानां॑ हिर॒ण्ययीः॑ ।सो अ॑स्मै॒ श्रिय॒मिद् दु॑हे॒ भूयो॑भूयः॒ श्वः॒श्व॒स्तेन॒ त्वं द्वि॑ष॒तो ज॑हि

yamabadhnād bṛhaspatirmaṇiṃ phālaṃ ghṛtaścutamugraṃ khadiramojase | taṃ bibhraccandramā maṇimasurāṇāṃ puro'jayad dānavānāṃ hiraṇyayīḥ | so asmai śriyamid duhe bhūyobhūyaḥ śvaḥśvastena tvaṃ dviṣato jahi

हिन्दी अर्थ

ता है, श्रौर विजेतार्प मँ परास्त सेना के ्रभिमूल विन किसी भय कै -खडा होकर भ्रपनी विजय प्रदशित करता है ।. २४.३५ मन्तो, में “सपत्न” ३ मा्डिकराा को बर्ण क है (गडु ९७, पियत इति शरणः, कां० .१८॥ ०.४. भथरवैवेद-माष्य २७७ (सूरस्य) सूय की (भ्रावृतम्, भनु) गति के भ्रनुूप :.भवतं) मै दिवो. की-भर(भावुतम् रनु, रावत) .सूरै की गति.के भ्रनुरूप गति करता हः चलता हूं ।, (सा). वह भावत् (मे) मुभे -(ब्रविणम्) ब॑ल या.घन

English

This Amulet of citron-wood shall make for me a trusty shield Filled with the mingled beverage, with sap and vigour hath it come. What though the strong-armed carpenter have cleft thee with his hand and axe.

अध्याय 10

श्लोक 6.11

यमब॑ध्ना॒द् बृह॒स्पति॒र्वाता॑य म॒णिमा॒शवे॑ ।सो अ॑स्मै वा॒जिन॑ दुहे॒ भूयो॑भूयः॒ श्वःश्व॒स्तेन॒ त्वं द्वि॑ष॒तो ज॑हि

yamabadhnād bṛhaspatirvātāya maṇimāśave | so asmai vājina duhe bhūyobhūyaḥ śvaḥśvastena tvaṃ dviṣato jahi

हिन्दी अर्थ

की दीप्ति देवे। । । व 3 ५ ध “ सै दक्षिणायन की श्नोर -जांता हषा दक्षिण दिशा कीं भ्रोर गति शान्तप्रकृतिकहो जाता-है † सा्वैमौमशासक भी चासन. शान्ति चाहता हीः मत्लरमें द्रविणं कहा है,- वास्तविक बल या धन कहा-है । शासन -का हो: उन्नतिं कर सेकंती. है! दक्षिण, दिशा कीः श्रोर जाता हृ. सूर्यं मकरः +) (तवोती) ज्यति वाली. (दिः परमि). दिभको; भोर भरावर्ते) मै सावभौम सक भावतं्-करता हं, भति हुं = (ताः) वे (मे) के (इतम्) बल. या प्न (यच्छन्त). वेव, (ताः). वे. (१), भूमे

English

Pure animating waters shall cleanse thee and make thee bright again. This Amulet, decked with chain of gold, shall give faith, sacrifice, and might, and dwell as

अध्याय 10

श्लोक 6.12

यमब॑ध्ना॒द् बृह॒स्पति॒र्वाता॑य म॒णिमा॒शवे॑ ।तेने॒मां म॒णिना॑ कृ॒षिम॒श्विना॑व॒भि र॑क्षतः ।स भि॒षग्भ्यां॒ महो॑ दुहे॒ भूयो॑भूयः॒ श्वःश्व॒स्तेन॒ त्वं द्वि॑ष॒तो ज॑हि

yamabadhnād bṛhaspatirvātāya maṇimāśave | tenemāṃ maṇinā kṛṣimaśvināvabhi rakṣataḥ | sa bhiṣagbhyāṃ maho duhe bhūyobhūyaḥ śvaḥśvastena tvaṃ dviṣato jahi

हिन्दी अर्थ

२७८ अथवेवेद-माष्य कां०.१० ! प्रु ५ भौर जाति हृए उस की.ज्योति, उत्तर की रोर, दिन भरततिदिन ष्रटती जाती है । सावंभौमः शासक भी . शासन कायं मेँ ज्योतिः क्रा श्रभिलाषी है । यह (सप्त ऋषीन् ्रभि). सात ऋषियों की श्रोर . (भावत) मै सवंमौम- शासक भ्ावतन करता ह, भ्राता हं । (ते) वे (मे). मु (द्रविणम्) बल यां है । यथा “सप्त ऋषयः प्रतिहिताः शरीरे” (यजु ३४५५५) । चाहता है, जोकि क्षि रूप हौः कर उसे सन्मार्गे का दर्शन कसु । सवंसाघारण'भानुष शरीर मे येः सात् ऋषिरूप. नहो कर, ग्रषुररूपः.मेःरहते है, जिसं से मनुष्य श्रायः सन्माद्ीं नहीं होते । इन सात ऋषियों से सा्ै- भौमलासक सात्तविकद्रविण चाहता है, भौर श्राह्मणवचंस चाहताहै ।.

English

guest within our house. To this we give apportioned food, clarified butter, wine, and meath. May it provide each boon for us as doth a father for his sons.

अध्याय 10

श्लोक 6.13

यमब॑ध्ना॒द् बृह॒स्पति॒र्वाता॑य म॒णिमा॒शवे॑ ।तं बिभ्र॑त् सवि॒ता म॒णिं तेने॒दम॑जय॒त् स्वः ।सो अ॑स्मै सू॒नृतां॑ दुहे॒ भूयो॑भूयः॒ श्वःश्व॒स्तेन॒ त्वं द्वि॑ष॒तो ज॑हि

yamabadhnād bṛhaspatirvātāya maṇimāśave | taṃ bibhrat savitā maṇiṃ tenedamajayat svaḥ | so asmai sūnṛtāṃ duhe bhūyobhūyaḥ śvaḥśvastena tvaṃ dviṣato jahi

हिन्दी अर्थ

रे (बहणनर्वसम्) बरह्िण की दौप्तिदे।, „ सावंमौम्चासक, निजं साते को ऋषिकोटि . का बनाने कै तिये, ब्रह्म की ्रोर भ्राव्तेन करता है, उस की भोरभ्राताहै। “ कां०-१०)1 सुर ४ भरथर्वेवेद-भाष्य २७९ (अरथवं वेद), तथा जगत् का स्वामी परमेद्वर । ३७-४१ के मन्तो मे शास- को के लिये भवंश उपस्थित ःकिया है । ६. अ, यं व॒यं मृगयामहे तं वधे स्दंणवामहै। . - दारां (तम्) उसे -(अरंपीपदाभि हैमने भेज दिया है, सकपित्रःकरः दतरा है ।

English

Again, again, from morn to morn, having approached the deities. The Charm Brihaspati hath bound, the fatness-dropping citron- wood, the potent Khadira for

अध्याय 10

श्लोक 6.14

यमब॑ध्ना॒द् बृह॒स्पति॒र्वाता॑य म॒णिमा॒शवे॑ ।तमापो॒ बिभ्र॑तीर्म॒णिं सदा॑ धाव॒न्त्यक्षि॑ताः ।स आ॑भ्यो॒ऽमृत॒मिद् दु॑हे॒ भूयो॑भूयः॒ श्वःश्व॒स्तेन॒ त्वं द्वि॑ष॒तो ज॑हि

yamabadhnād bṛhaspatirvātāya maṇimāśave | tamāpo bibhratīrmaṇiṃ sadā dhāvantyakṣitāḥ | sa ābhyo'mṛtamid duhe bhūyobhūyaḥ śvaḥśvastena tvaṃ dviṣato jahi

हिन्दी अर्थ

जौ शासक ब्राह्यंणवक्र॑स" को ्रप्तेः नही, उस कीं खीज' कर के, उसे विनष्ट करने की मावनत मस्त में प्रतीतं होती -है । उसे. सौवंभौमशासक क ९८? भ्रथववेद-भाष्य कां०-१७.।-स्०५ करना चाहिए । “वधः वच्ननाम (निधं. २।२०).। स्तृणवामहै “‰तूणाति" वधकर्मा (निषं° २।१९);। .. वैश्ानरस्य हैषरौभ्यां हेतिसतं सम॑धादुभि । नि, ्य॑ तं प्सात्वाहुतिः समिद् . देवी सदीवपी..॥४३॥; . :. : . दिविध नियमों के साथ; (तम्) उस -शासक को. (म्रभि) साक्षात् (सम- " धात्) सम्बद्ध कर दिया है । -(इयम्) यह (सदहीयसी). बलशालिनी (देवी)

English

strength, This Agni hath put on: it yields clarified butter for this man. Again, again, from morn to morn. With this subdue thine enemies.

अध्याय 10

श्लोक 6.15

यमब॑ध्ना॒द् बृह॒स्पति॒र्वाता॑य म॒णिमा॒शवे॑ ।तं राजा॒ वरु॑णो म॒णिं प्रत्य॑मुञ्चत शं॒भुव॑म्।सो अ॑स्मै स॒त्यमिद् दु॑हे॒ भूयो॑भूयः॒ श्वःश्व॒स्तेन॒ त्वं द्वि॑ष॒तो ज॑हि

yamabadhnād bṛhaspatirvātāya maṇimāśave |taṃ rājā varuṇo maṇiṃ pratyamuñcata śaṃbhuvam| so asmai satyamid duhe bhūyobhūyaḥ śvaḥśvastena tvaṃ dviṣato jahi

हिन्दी अर्थ

हेतिः वज्नाम (निधं ° २।२०) । यह् हेति दण्डसंविधान.है। दष्टरा- = ॥ भी कहा है, जिस के प्रति समिदाधान लूपी भराहूति देनी है । यह भाहूति देवी है,दिव्यरूपा है । सामान्य काष्ठसूपी नहीं । यह शासंकलूपी भ्राहति है । शासको को भी सचेत करने वाली है । संहः बलनाम (निकषं २।९) । मत्त्र (सः). बहःतु.: (आसूष्यायणम्) .उस् : .गो्र के, (अमुष्याः). उस मातरा के

English

The Charm Brihaspati hath bound, the fatness-dropping citron- wood, the potent Khadira, for strength,

अध्याय 10

श्लोक 6.16

यमब॑ध्ना॒द् बृह॒स्पति॒र्वाता॑य म॒णिमा॒शवे॑ ।तं दे॒वा बिभ्र॑तो म॒णिं सर्वां॑ल्लो॒कान् यु॒धाज॑यन्।स ए॑भ्यो॒ जिति॒मिद् दु॑हे॒ भूयो॑भूयः॒ श्वःश्व॒स्तेन॒ त्वं द्वि॑ष॒तो ज॑हि

yamabadhnād bṛhaspatirvātāya maṇimāśave | taṃ devā bibhrato maṇiṃ sarvāṃllokān yudhājayan| sa ebhyo jitimid duhe bhūyobhūyaḥ śvaḥśvastena tvaṃ dviṣato jahi

हिन्दी अर्थ

बरान्धै,. बन्दीकृतः कर ८.१. प "2 राजा” (यजु ८।३७) :। जो शासक संवंभौमशासन यां सम्राट् शासनः के करा अभिप्रायं है “दण्डसंविषान" । परमेइवररूपी वरुण-रसजा शरीर उंस के (भूवस्पते) है भूपति ! भूमि के पति ! (ते) तेस (यत् भ्रन्नमू्) जो है, (तस्य) उस कां (यथोचित विभागं (नः). - हमे श्रजांभरों को

English

This Charm hath Indra put on him for power and manly puissance. It yieldeth strength to strengthen him, again, again, from morn to morn, having approached the deities.

अध्याय 10

श्लोक 6.17

यमब॑ध्ना॒द् बृह॒स्पति॒र्वाता॑य म॒णिमा॒शवे॑ ।तमि॒मं दे॒वता॑ म॒णिं प्रत्य॑मुञ्चन्त शं॒भुव॑म्।स आ॑भ्यो॒ विश्व॒मिद् दु॑हे॒ भूयो॑भूयः॒ श्वःश्व॒स्तेन॒ त्वं द्वि॑ष॒तो ज॑हि

yamabadhnād bṛhaspatirvātāya maṇimāśave | tamimaṃ devatā maṇiṃ pratyamuñcanta śaṃbhuvam| sa ābhyo viśvamid duhe bhūyobhūyaḥ śvaḥśvastena tvaṃ dviṣato jahi

हिन्दी अर्थ

या समग्र पंथिवी का क्षासकं है। संमंग्र पृथिवी में जोभ्रनं पैदा होती है उसं का स्वामी साबेभौमदोांसक है, यह् वेदि भावना प्रतीत. होतीं ई यथोचितः विमागःक्ररता है । . . . , करता है । देस से प्नोषधियां रसवती: . होती है । गौएं इन्दं खा कर. प्रभूत वेद मे हुई है । यथा “पयः पशूनां रसमोषधीनां बृहस्पतिः सविता, मे निय- £ विमं अस्यं देवा इन्र विधात खष् ऋषिमिः ॥४७॥ ˆ

English

The Charin Brihaspati, etc. This Charm hath Soma put on him for might, for hearing, and for sight.

अध्याय 10

श्लोक 6.18

ऋ॒तव॒स्तम॑बध्नतार्त॒वास्तम॑बध्नत ।सं॒व॒त्स॒रस्तं ब॒द्ध्वा सर्वं॑ भू॒तं वि र॑क्षति

ṛtavastamabadhnatārtavāstamabadhnata | saṃvatsarastaṃ baddhvā sarvaṃ bhūtaṃ vi rakṣati

हिन्दी अर्थ

साथ (सं सृज) संसग करं, (प्रजया ) सन्तान के साथ (सम्) संसगं कर, (भायुषा).स्वस्थ श्रौर दीष . रायु के साथ (सम्) संसगे कर । (मे) मेरे चषिकोटि के भमात्यो सहित, मेरे इस काम.को (विद्यात्) जाने । समृद्धि । दुष भौर कृषिकमं की समदि शोने पर सन्तार्नो कौ पालन-पोषण होता है, तथा इन के सेवन से' भ्ायु मीबदतीहै1 -' १, के देवापि भरौर शन्तनु के पआस्यानसम्बन््ी. ऋषा. (ऋ १०।९०।५) रं कृषिकमं के लिये होला है, इस का जल पृथिवी सँ ही विलीन हो जाता है, समुद्रः

English

This yields him energy indeed, again, again, etc. The Charm Brihaspati, etc. This Sūrya put on him, with this conquered the regions of the sky.

अध्याय 10

श्लोक 6.19

अ॒न्त॒र्दे॒शा अ॑बध्नत प्र॒दिश॒स्तम॑बध्नत ।प्र॒जाप॑तिसृष्टो म॒णिर्द्वि॑ष॒तो मेऽध॑राँ अकः

antardeśā abadhnata pradiśastamabadhnata | prajāpatisṛṣṭo maṇirdviṣato me'dharā~ akaḥ

हिन्दी अर्थ

तक नहीं पहंबता । (“कौ पूथिव्यां लीयते इति कुल्या" । कां० १० । सुऽ ४ - भ्रथर्वेवेव-भाष्य २५३ पति-पत्नी" (यद्) जो (चपातः). .एकदुसरे. को चाप देते है, तथा (सभाः) होती (तया) उस दरार . (यावुधानान्) यातनाश्रौः र्यात् पीड़ारभों के निषा, प्रनापीड़कों को; (हदगरे). उनके हृदयं म (विष्य) -बीषं 4. . -; भादि. करने पर नः परमेश्वर के स्तावकः होते हए भी-कटु वाणी बोलने

English

This yieldeth him ability, again, etc. The Charm Brihaspati, etc.

अध्याय 10

श्लोक 6.20

अथ॑र्वाणो अबध्नताथर्व॒णा अ॑बध्नत ।तौर्मे॒दिनो॒ अङ्गि॑रसो॒ दस्यू॑नां बिभिदुः॒ पुर॒स्तेन॒ त्वं द्वि॑ष॒तो ज॑हि

atharvāṇo abadhnatātharvaṇā abadhnata | taurmedino aṅgiraso dasyūnāṃ bibhiduḥ purastena tvaṃ dviṣato jahi

हिन्दी अर्थ

(प्रहरामि) प्रहार करता हुं । (सः) वह वच (भस्य) इस रक्षः के (पिष देवाः) -पुथिवी के. सब दिव्य-सज्जन. - (मे) मेरे (तत्) उस संदीकृकिः चाहिए । “स्मै” सर्वनामं पद एकः वंचन महै जो कि पूरवे कथितं ५५ भ शिरोभेदन को व्यवस्थां संमफ-कर, हिन्दुभरो ने सम्भवतः जलते.दव के शिरोभेदन की प्रथा चलगई हो ह ॥ + = ५

English

The Amulet Brihaspati bound on the swiftly-moving Wind. This yieldeth him a vigorous steed, again, etc.

अध्याय 10

श्लोक 6.21

तं धा॒ता प्रत्य॑मुञ्चत॒ स भू॒तं व्यऽकल्पयत्।तेन॒ त्वं द्वि॑ष॒तो ज॑हि

taṃ dhātā pratyamuñcata sa bhūtaṃ vya'kalpayat| tena tvaṃ dviṣato jahi

हिन्दी अर्थ

(१) राषट् केः शानु माई के पुत्र को भी. शिरः छं का. दण्ड. (६). । (३). फाल “खदिर' काष्ठ! काः होता है जिसे.क्रि तर्वान घडा हैँ “सोम” सेना का मागं दशक (८) भी धारणः करता है. २ (७), मन्व १२ मः कृषि है, शरीरकषेतर, मे . कम-वीजो क) नोना ।. यहं दवर (१५), देवताः. (१६), ऋतुएं, मास माससमह, संबरत्सर (१८); . श्रापः.( १४). भी. धारण करते है इससे ज्ञात होताः है किः यह मणि खदिर या खदिर फाल से उत्पत स्थूल मणि नहीं, जिसे रिं सूयं प्रादि भी प्रारण

English

The Asvins with this Amulet protect this culture of our fields. This yields the two Physicians might, again, etc. Savitar wore this Amulet: herewith he won this lucid heaven.

अध्याय 10

श्लोक 6.22

यमब॑ध्ना॒द् बृह॒स्पति॑र्दे॒वेभ्यो॒ असु॑रक्षितिम्।स मा॒यं म॒णिराग॑म॒द् रसे॑न स॒ह वर्च॑सा

yamabadhnād bṛhaspatirdevebhyo asurakṣitim| sa māyaṃ maṇirāgamad rasena saha varcasā

हिन्दी अर्थ

यह-यणि सृष्ट त्यादरचँ परमेदवरीय कामतरारूप है, न कि को प्राकृतिक । १० -अणिः. ॐ पाताः. रथात् : सन् कः.ारण-पोष्रथ, करने -त्ाला, २८६ + भयववेद-भाष्य कां० १०॥। सू०६ परमेदवर भी भूत-मौतिकं विविध पदार्थो की रचना के लिये बान्धता है (२१) । क्या परमेश्वर का कोई शरीर है जिस के भरवयव पर स्थूल मणि (११) यह मणि भ्रसुरों का क्षय करती है (२२-२०८) ।

English

This yields him glory and delight, again, etc. Wearing this Charm the Waters flow eternally inviolate. This yieldeth them ambrosia, again

अध्याय 10

श्लोक 6.23

यमब॑ध्ना॒द् बृह॒स्पति॑र्दे॒वेभ्यो॒ असु॑रक्षितिम्।स मा॒यं म॒णिराग॑मत् स॒ह गोभि॑रजा॒विभि॒रन्ने॑न प्र॒जया॑ स॒ह

yamabadhnād bṛhaspatirdevebhyo asurakṣitim| sa māyaṃ maṇirāgamat saha gobhirajāvibhirannena prajayā saha

हिन्दी अर्थ

(१२) परभेदवर रूपी मणि, जब सिर पर भ्राखूढृ हो जातीटहै, तब भनुष्यः सिर से पैरो तक श्वेष्ठ बर्न जाता है (३.१.३२) । . (भरातीयतः) भराति अर्थात् शतुसवृश व्यवहार करते हए, (दृव) बुरी हादिक भावना वले; (द्विषतः) हष करते हुए, (जातृव्यस्य ) सपलनंरूपं भतीजे भाई के पुत्र -के (शिरः)-सिंर को(भपि) भी (भोजसा) बल के साथः (वश्चामिं) मै राज्याधिकारी काटता हूं । शतु । जोकि मनुष्य समाज कीः उन्नति भ्रादि के लिये दान नहीं देता, तथा पत्र जो.कि वहम वही" (भ्रुव ४।९।९४४).। (२) नाई का. पुत्र

English

etc. King Varuna assumed and wore this salutary Amulet. This yieldeth him his truthfulness, again, etc.

अध्याय 10

श्लोक 6.24

यमब॑ध्ना॒द् बृह॒स्पति॑र्दे॒वेभ्यो॒ असु॑रक्षितिम्।स मा॒यं म॒णिराग॑मत् स॒ह व्री॑हिय॒वाभ्यां॒ मह॑सा॒ भूत्या॑ स॒ह

yamabadhnād bṛhaspatirdevebhyo asurakṣitim| sa māyaṃ maṇirāgamat saha vrīhiyavābhyāṃ mahasā bhūtyā saha

हिन्दी अर्थ

का परिचायक है 1 मन्त मे कंहा है कि राजा निज भाई के पुत्रकौ नजो किः भर्यात् उग्र-नियम .कौ पुंथिवी के धारण-पोषंण मे. सहायक कहा है। : :वम् महम॒यं मणि, फालांज्जातः करिष्यति । . षणो मन्थेन मार्गपद् रसेन सह वच॑सो ॥२॥ करेगा † (मन्येन) ड दारां भौर (रसेन) रस दाराः पू्ंः) पथिपरणं हंभां

English

Wearing this Amulet the Gods conquered in battle all the worlds. This yieldeth victory for them, again, etc.

अध्याय 10

श्लोक 6.25

यमब॑ध्ना॒द् बृह॒स्पति॑र्दे॒वेभ्यो॒ असु॑रक्षितिम्।स मा॒यं म॒णिराग॑म॒न्मधो॑र्घृ॒तस्य॒ धार॑या की॒लाले॑न म॒णिः स॒ह

yamabadhnād bṛhaspatirdevebhyo asurakṣitim| sa māyaṃ maṇirāgamanmadhorghṛtasya dhārayā kīlālena maṇiḥ saha

हिन्दी अर्थ

मुक (भ्रगमत्) प्राप्त हृभा है । . जब.कि.मठे 1 सं तथाः भोषधिरसो.का इस के-साथः. सहयोग् हो, गौरो से दष प्रौर दृष से द॑धि भ्रौर मठा (मन्थ) भिलता-है.। यथा “पयः हे फाल ! (दिक्वः) रिकषितं भरशत बद की बिद्या के. जानने. बाले जो (त्वा). तु (परा भरवष्ीत्) छेदा हैः छील करः तयार, किया हैः (तस्मात्) उससे (जीवलाः) जीवन्रदः (शुचयः) ° शुतचिः -(श्रापः) जल

English

The Amulet Brihaspati formed for the swiftly-moving Wind, This salutary Amulet the Deities assumed and wore. This yieldeth them the universe, again, again, from morn to morn. With this subdue thine

अध्याय 10

श्लोक 6.26

यमब॑ध्ना॒द् बृह॒स्पति॑र्दे॒वेभ्यो॑ असु॑रक्षितिम्।स मा॒यं म॒णिराग॑मदू॒र्जया॒ पय॑सा स॒ह द्रवि॑णेन श्रि॒या स॒ह

yamabadhnād bṛhaspatirdevebhyo asurakṣitim| sa māyaṃ maṇirāgamadūrjayā payasā saha draviṇena śriyā saha

हिन्दी अर्थ

(त्वा) -तुमे (पुनुन्तु) पवित्र कर रौर (शुचिम्) णुचि.करे ॥ . . हले के फाल का.स्रोषन कविता म है। यथा “थापि वौरषविषि- कैः कर्मभिः स्तूयन्ते” ।. यथाः “ोतुरिचत्यवे हविरदयमादत'' (ऋ ४ ॥९४। स्तुतियां पुषषविषकमों स हती है; जेसेःकि.पत्यरौ को कद्रा हैः कि तम॒. शमर तरार किया. जाता है 1. शिक्वः; . धि = सिरकषं 1-वः = चिक्वः । घकारस्य विलौपः भव यथां पवः =पच्ः+-वः, । वास्याः. वासी = 025 (भाप), वसूनां कल्दाडी; "10861 (भरष्ट) » छेनी काष्ठनिमितं "फाल तय्यारं हो जाने पर इसे जल -ढास धोकरं साफं । करल का विधाने मन्तं

English

enemies. The seasons formed that Amulet, the Groups of Seasons fashion- ed it.

अध्याय 10

श्लोक 6.27

यमब॑ध्ना॒द् बृह॒स्पति॑र्दे॒वेभ्यो॑ असु॑रक्षितिम्।स मा॒यं म॒णिराग॑म॒त् तेज॑सा॒ त्विष्या॑ स॒ह यश॑सा की॒र्त्याऽ स॒ह

yamabadhnād bṛhaspatirdevebhyo asurakṣitim| sa māyaṃ maṇirāgamat tejasā tviṣyā saha yaśasā kīrtyā' saha

हिन्दी अर्थ

स्थापित करती है वहं (नः गृहे) हमारे . धर मे. वसतु) सदाः.वास करे. तधा महव कमे (दधत्) स्थापित करता हुभाः (नः. गृहे वसतुहमारेः घुर ६ तथा उत्सवो का होना सम्भव हौ सकता है 1 (कम्य) दौ. से' (मधिः) चूर्नं (एत्य); भाक पर्य: , २८८ , श्रयंववेद-माष्य कां०.१०१सु४६ :

English

The Year having constructed it preserveth everything that is. The regions of the heaven, the points that lie between them fashioned it. Created by Prajāpati, may the Charm cast my foemen down.

अध्याय 10

श्लोक 6.28

यमब॑ध्ना॒द् बृह॒स्पति॑र्दे॒वेभ्यो॒ असु॑रक्षितिम्।स मा॒यं म॒णिराग॑मत् सर्वा॑भि॒र्भूति॑भिः स॒ह

yamabadhnād bṛhaspatirdevebhyo asurakṣitim| sa māyaṃ maṇirāgamat sarvābhirbhūtibhiḥ saha

हिन्दी अर्थ

कं०१०। सुरद भथरवेवेद-माष्य - २५६ (क्षदामहे) हम ध्रदनिः करते है । (सः) वहु घरमे बसना अरतिथि, (दवः देतान्हैः न ५ ५. ध 9 त । “. चिक्रित्सतु--किंत् निवासे रोगापनयने च (्वादिः) । क्षदामहे, कदं वैदिक. धातु है 1. देवेभ्यः देवयज्ञो के करने से वायु, सूरय, जल श्रादि देवो 786 फर्भंनः वाष्पीकूत जल द, जोकि आरो नदीं होता ॥ =. यमवौलाद् हासतिपरेणि फालं परतश्च संदिरमोजसे।

English

Atharvan made the Amulet, Atharvan’s children fashioned it.

अध्याय 10

श्लोक 6.29

तमि॒मं दे॒वता॑ म॒णिं मह्यं॑ ददतु॒ पुष्ट॑ये ।अ॒भि॒भुं क्ष॑त्र॒वर्ध॑नं सपत्न॒दम्भ॑नं म॒णिम्

tamimaṃ devatā maṇiṃ mahyaṃ dadatu puṣṭaye | abhibhuṃ kṣatravardhanaṃ sapatnadambhanaṃ maṇim

हिन्दी अर्थ

रक , भ्रथर्वेवेद-भाष्य कां १०३ सु-£ इधी प्रकार फाल को खदिर कहा है । मणि है; रत्न है । कृष्यन्न से गौरो -का चारा. मिलता है, रौर गौरम से दूर्ध के सेवन द्वारा दरीर भ्रौर मन में बल भौर उग्रता पैदा होतेह । बृहस्पति जब ङष्यन्न के परिणाम "वीर्य" को -निज शंरीर में बान्धे रखता है,.भौरं विषयलस्पट होकर उसका विनाश नहीं .कृरताः तो - वह भ्रोज को. -भाप्त् मे नान्नं का वणेन हृभा .है। ध्येय के साथ चित्त को सूत्र दारा रहीं बांधा

English

With them the sage Angirases broke through the Dasyus’ fortresses. With this subdue thine enemies. Dhātar bound on this Amulet: he ranged and ordered all that is. With this do thou subdue thy

अध्याय 10

श्लोक 6.30

ब्रह्म॑णा॒ तेज॑सा स॒ह प्रति॑ मुञ्चामि मे शि॒वम्।अ॒स॒प॒त्नः स॑पत्न॒हा स॒पत्ना॒न् मेऽध॑रां अकः

brahmaṇā tejasā saha prati muñcāmi me śivam| asapatnaḥ sapatnahā sapatnān me'dharāṃ akaḥ

हिन्दी अर्थ

या कन्ति .(इद् ) ही (दुहे) दोहता है, अद्रा करता है, (मूयोभूय-) ब्रार- वार या प्रधिकाचिक खूप मे, श्वः इवः) प्राएं -दिन-परति-दिन (तेन) उस सोमः सेना का प्रेरक; ' सेनानायक; जों- कि सेना के प्रश्रभागमेहो कौर, सेतां को,.मागं दशति है सोमः षृ प्रेरणे (तुढादिः) । यह महती १ ; श्रेवेद- सू: ए ० १०। सुग भ्रथवैवेद-भाष्य २९३ संगम करान वाला, भिडानै ११५४. दनक व १ तं (हि. रब ९ ने (अस्मै) .इसः-पदमेकवर् के लिये मृतिम् इत् ) तिच के भ्रागे मारने मे कुशल सेनिक हों 1 द्य) हमार रो

English

That Amulet here hath come to me combined with sap and energy. The Amulet, etc. That Amulet here hath come to me, hath come with cows, and goats, and sheep, hath come

अध्याय 10

श्लोक 6.31

उत्त॑रं द्विष॒तो माम॒यं म॒णिः कृ॑णोतु देव॒जाः ।यस्य॑ लो॒का इ॒मे त्रयः॒ पयो॑ दु॒ग्धमु॒पास॑ते ।स मा॒यमधि॑ रोहतु म॒णिः श्रैष्ठ्या॑य मूर्ध॒तः

uttaraṃ dviṣato māmayaṃ maṇiḥ kṛṇotu devajāḥ | yasya lokā ime trayaḥ payo dugdhamupāsate | sa māyamadhi rohatu maṇiḥ śraiṣṭhyāya mūrdhataḥ

हिन्दी अर्थ

.“' यज्ञः यज देवपूजा, संगतिंकरणः, - ॥ षतः) हमारे -रोग-नुभक हनन क र १.८; बृहस्पति युद्ध के लियेः भरंयाण' करे, (३, सैनिकं विजिगीषु होने नोर्िे ॥ जनः सूयं के .-उदयः तथा भस्तगृत हने इरा. होता हैः मानो सूयं नै ,:(४0; न॒ „: दासा-सू्यःलननं हमः! भतः कार्मल सूर्य, निज.कर्ता की विभूति का सेना की स्थिति को ठीक तरह दें सक । सोमं सहायकं है बृहस्पति. का (नुक । स्रं रोग॑निवारकःहै ! यथाः “सं ते शीषणैः;.कपालानि हृदयस्य; च रो

English

with food and progeny. The Amulet, etc.

अध्याय 10

श्लोक 6.32

यं दे॒वाः पि॒तरो॑ मनु॒ष्याऽ उप॒जीव॑न्ति सर्व॒दा।स मा॒यमधि॑ रोहतु म॒णिः श्रैष्ठ्या॑य मूर्ध॒तः

yaṃ devāḥ pitaro manuṣyā' upajīvanti sarvadā| sa māyamadhi rohatu maṇiḥ śraiṣṭhyāya mūrdhataḥ

हिन्दी अर्थ

उदिता रस्तं क्ते हुए रादित्य की रषिम , लल हौती रै, दन"लाल दिम मेसोगर्विनाश'.करने वेधे भरधिक दक्तिं सम्भवःश्रतीतःहीतीः है । जियः विवि प्रकारः के शध ा8 (रीग कीटाणु ).-ˆ गैविं पृथिवी तथा वं हिशतोतहि॥ ९ विरे भणितो बार्धने कां वणेन है।, यथा "खंदिरकष्ठपफीर्विकारं २९४ करा भथववेद-माष्य मणि .शत्रुनादाय सवेकामावा"तथे च बघ्नाति” (भरयर्व० १० ।६के विनि- गोग मे सायण) । पारचात्मःभरादि वैदिक विद्वान् इस मणि को 10161 दस बृहस्पति के लिये (धियम्, इत्) शोभा को ही : (दुहे) दोहा है, रोगरूपी शावुभ्रो का (जहि) हनन कर ५ + चन्द्रमा द्वाराः . ओोषधिरवौ मे रसो का संवार होता है, भतः चन्या

English

That Amulet here hath come to me with store of barley and of rice, with greatness and prosperity. The Amulet, etc.

अध्याय 10

श्लोक 6.33

यथा॒ बीज॑मु॒र्वरा॑यां कृ॒ष्टे फाले॑न॒ रोह॑ति ।ए॒वा मयि॑ प्र॒जा प॒शवोऽन्न॑मन्नं॒ वि रो॑हतु

yathā bījamurvarāyāṃ kṛṣṭe phālena rohati | evā mayi prajā paśavo'nnamannaṃ vi rohatu

हिन्दी अर्थ

को० १९ । सू०६, भथवेवेद-माष्यं २६५ विहीन से.हो जाते है । मानो चन्रमा ने सुरो शरीर दानवं की हिरण्ययी शोभा कां अनि होता है । बृहस्पति "ने शोभराधमान चन्द्रमा की रचना कौ है; निवासंहै वह हीं शोभायमान .चित्र चित्रित कर सकत क है। भु द्वारा “तन” पुलिङ्ग पद है । “जहि = बृहस्पति परमेदवर, चन्रमा दारा रोग- दाचओ का हननं करता है । यथां-- र अपचितः का श्रथ ह गण्डमालाएं । गण्डमाला की गिल्टियां एक-दूसरे सेः" अर्थात् भ्लगं-भंलग हुई", -गले मे. माला. के एूलो को तरह चुनी हई होती है । सूर्यं तथा चन्द्रमा इनकी मेषज है, ्रौषध हि । 'भपोच्छतु = भप उष्टी विकसे प्र॑पवासयतु, भ्रपवर्जयतु.। : ! .: ˆ

English

That Amulet here hath come to me with streams of butter and of mead, with sweet delicious beverage.

अध्याय 10

श्लोक 6.34

यस्मै॑ त्वा यज्ञवर्धन॒ मणे॑ प्र॒त्यमु॑चं शि॒वम्।तं त्वं श॑तदक्षिण॒ मणे॒ श्रैष्ठ्या॑य जिन्वतात्

yasmai tvā yajñavardhana maṇe pratyamucaṃ śivam| taṃ tvaṃ śatadakṣiṇa maṇe śraiṣṭhyāya jinvatāt

हिन्दी अर्थ

चन्द्रमा भी रोग-शधुर्भो का हनन् करता है: : - शौध्रगतिः वाली वायु के निर्माण के लिये,. (यम्, सणिम्) जिस.मणि को (वाजिनम्) बल को (दहे) - दोहा, : (भूयोभूयः) बार-बार या अधिकाधिक हं परमेश्वरे त (द्विषतः) रोग-शवुभो काः (जहि) हनन कर+ । ,. ... . , मनत ६ मे शफातेत कष्टे" शवो का प्रयोग इभा ह । धसे तीत होता है कि इन रवर. एरी घ्रकायंकर्ु त्व , को सूचित.कियाः1.. इसं शीध्रता को यजुवद मे "मनसो.जवीयः? (-३१।४) -ढारा प्रदक्षितं किया है वाजिनम् = बलम् ।

English

The Amulet, etc. That Amulet here hath come to me with power and abundant strength, hath come with glory and with wealth.

अध्याय 10

श्लोक 6.35

ए॒तमि॒ध्मं स॒माहि॑तं जुषा॒णो अग्ने॒ प्रति॑ हर्य॒ होमैः॑ ।तस्मि॑न् विदेम सुम॒तिं स्व॒स्ति प्र॒जां चक्षुः॑ प॒शून्त्समि॑द्धे जा॒तवे॑दसि॒ ब्रह्म॑णा

etamidhmaṃ samāhitaṃ juṣāṇo agne prati harya homaiḥ | tasmin videma sumatiṃ svasti prajāṃ cakṣuḥ paśūntsamiddhe jātavedasi brahmaṇā

हिन्दी अर्थ

(सायण) । परमेश्वर, वात द्वारा, रोगरूपी श्वरो, कां हनन करता 1; :, - . त्वं हि-विदवभेषज. देवानां दूत ईय॑से ॥। ˆ वातं को भेषज श्रौरःविदवभेषज कहा है ।.यह “रपः” पाप्पी रोगो को दूर करत; भौर. हनदरिय-देवों के रोग-शवुभरों काः दूत हैः उपतापी है 1: = टुदु उपतापे (स्वादः) 1 भ्रथवा इूद.परि्तपि' (दिवादिः); . प्राणापान. की; मननं भं “मणि” दारा इष्यन्न अरभित्ेत नहीं, भरणिनतु-मुमपि-दा रा.त कारण यह किं “तस्माद एतस्मांदादेमनः भौकादाः सूतः, : भ्राकीशाद् वायुः, वायो- .

English

The Amulet, etc.. That Amulet here hath come to me with splendour and a blaze of light, with honour and

स्रोत: bhavykhatri/DharmicData · प्राप्त 3/6/2026

शास्त्रीय प्रामाणिकता एवं पारदर्शकताSources & Interpretation

स्रोत, संस्करण एवं व्याख्या वर्गीकरण

धर्म ग्रंथ पर मूल शास्त्र, पारंपरिक भाष्य और आधुनिक व्याख्या को पूर्णतः पृथक रखा जाता है ताकि पाठक को किसी भी व्याख्या के शास्त्र होने का भ्रम न हो।

सामग्री वर्गीकरण संकेत (Epistemic Content Labels)

6 स्तरिय प्रमाण व्यवस्था
मूल पाठOriginal text

अपौरुषेय / प्रामाणिक शास्त्र (Primary Canonical Scripture)

मूल संस्कृत, प्राकृत अथवा अवधी श्लोक/मंत्र। यह सर्वोच्च प्रमाण (प्रस्थान) है। इस पाठ में किसी भी आधुनिक व्याख्याकार का हस्तक्षेप नहीं है।

शाब्दिक अनुवादLiteral translation

पदार्थ व अन्वय (Direct Grammatical & Word-for-Word Meaning)

व्याकरणसम्मत प्रत्यक्ष शब्दार्थ (अन्वय)। बिना किसी दार्शनिक संप्रदाय के पूर्वाग्रह के, संस्कृत शब्दों का सटीक भाषांतर।

पारंपरिक भाष्यTraditional commentary

आचार्य परंपरा व टीका (Classical Lineage Commentary)

प्राचीन आचार्य परंपरा (यथा शंकराचार्य, रामानुजाचार्य, मध्वाचार्य, श्रीधर स्वामी) द्वारा विरचित शास्त्रीय भाष्य व टीकाएं।

सरल व्याख्याSimple explanation

भावार्थ व सुबोध प्रबोधन (Accessible Pedagogical Exposition)

आधुनिक जिज्ञासुओं के लिए सरल भाषा में भावार्थ। यह मूल मंत्र नहीं, बल्कि पाठ को सुगम बनाने हेतु संपादकीय व्याख्या है।

आधुनिक चिंतनModern reflection

समसामयिक विमर्श व अनुप्रयोग (Contemporary Application & Analysis)

दार्शनिक, मनोवैज्ञानिक व वैज्ञानिक समरूपताओं पर आधुनिक चिंतन। यह मूल शास्त्र का अंग नहीं है और इसे शास्त्रोक्त सिद्धांत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

शोध टिप्पणीResearch note

पांडुलिपि एवं ऐतिहासिक शोध (Critical Apparatus & Manuscript Research)

पांडुलिपि विविधताएं, पाठ-भेद (variant readings), छंद रचना, और ऐतिहासिक व तुलनात्मक भाषावैज्ञानिक शोध। यह शास्त्र का मूल संदेश बदलने हेतु नहीं, बल्कि पाठ की प्रामाणिकता परखने के लिए है।