श्रीरामचरितमानस

Ayodhya Kanda — The Forest Exileश्लोक 1/303%

Shri Ramcharitmanas 2.1

मूल पाठSource scriptureOriginal Sanskritमूल संस्कृत

यस्याङ्के च विभाति भूधरसुता देवापगा मस्तके भाले बालविधुर्गले च गरलं यस्योरसि व्यालराट्।सोऽयं भूतिविभूषण: सुरवर: सर्वाधिप: सर्वदा शर्व: सर्वगत: शिव: शशिनिभ: श्रीशङ्कर: पातु माम्

व्याख्याVyakhya
संपादकीय व्याख्याEditorial explanationVyakhya (व्याख्या)व्याख्या

अयोध्याकाण्ड के मंगलाचरण में देवाधिदेव महादेव शिव का भव्य स्तवन है, जिनकी गोद में पार्वती जी सुशोभित हैं, मस्तक पर गंगा और बालचंद्रमा हैं, कंठ में गरल और वक्ष पर सर्पराज हैं। विष और अमृत, संहार और कल्याण, शीतलता और भस्म का यह अद्भुत समन्वय शिव के उस स्वरूप को दर्शाता है जो हर द्वंद्व के परे परम समत्व में स्थित है।

विज्ञान एवं आधुनिक उपयोगScience & Modern Application
आधुनिक चिंतनModern reflection · not scriptureContemplative Reflection & Actionआधुनिक चिंतन
आधुनिक संदर्भ · Modern Context
जीवन में अनुकूल और प्रतिकूल दोनों प्रकार के अनुभव एक साथ आते हैं। हम केवल सुख चाहते हैं और विष (कठिनाइयों) से भागते हैं। शिव का यह दर्शन सिखाता है कि संसार के अपमान और कष्टों के विष को कंठ में धारण करके भी मस्तक पर शांति और करुणा की गंगा बहाई जा सकती है।
आज के जीवन में प्रयोग · Practical Application
- **द्वंद्वों की सहज स्वीकृति (Radical Acceptance)**: जीवन की कटु वास्तविकताओं से घबराने के बजाय उन्हें धैर्यपूर्वक स्वीकार करें। - **कल्याणकारी समत्व (Equanimity under Stress)**: आलोचना या निंदा के विष को अपने भीतर जहर न बनने दें, उसे अपने विवेक से निष्प्रभावी कर दें। - **सौंदर्य और वैराग्य का संतुलन (Balanced Living)**: पारिवारिक और सामाजिक उत्तरदायित्वों को निभाते हुए भी भीतर से निर्लिप्त और शांत रहें।
चिंतन प्रश्न · Self-Reflection

“जब परिस्थितियां मेरे विरुद्ध होती हैं, तो क्या मैं दूसरों पर विष उगलता हूँ या शिव की भांति उसे पचाकर जगत को शांति प्रदान करता हूँ?”

शोध संदर्भResearch context · not scriptureComparative Research Noteशोध टिप्पणी

मनोवैज्ञानिक एकीकरण (इंटीग्रेशन ऑफ शैडो - कार्ल युंग) का सिद्धांत बताता है कि एक परिपक्व और सबल व्यक्तित्व वही है जो जीवन के सकारात्मक और नकारात्मक, सुखद और कष्टप्रद दोनों पक्षों को बिना विचलित हुए स्वीकार कर सके। शिव का यह रूप द्वंद्वात्मक तनाव के शांतिपूर्ण समाधान का उत्कृष्ट न्यूरोलॉजिकल मॉडल है।

A modern parallel offered for reflection. It is not part of the scripture, and it has not been checked against the original sources it may allude to.

स्रोतSources and editionSources and editionस्रोत एवं संस्करण

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Sanskrit edition
Gita Press Illustrated Edition (Book Code 0080). Gita Press Gorakhpur (Official Publication)
Translation
Gita Press Editorial Board (Hindi)
Last updated
2026-10-23
Licence note (as recorded)
Public Domain Awadhi text and Hindi translation
पाठ-भेद · Variant readings
Collated with Kashi Nagari Pracharini Sabha recension.

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