श्रीरामचरितमानस

Kishkindha Kanda — The Allianceश्लोक 10/3033%

Shri Ramcharitmanas 4.10

मूल पाठSource scriptureOriginal Sanskritमूल संस्कृत

इहाँ हरी निसिचर बैदेही।बिप्र फिरहिं हम खोजत तेही॥ आपन चरित कहा हम गाई।कहहु बिप्र निज कथा बुझाई

व्याख्याVyakhya
संपादकीय व्याख्याEditorial explanationVyakhya (व्याख्या)व्याख्या

श्रीराम आगे कहते हैं: "यहाँ वन में किसी राक्षस ने वैदेही का हरण कर लिया है। हे विप्र! हम उसी की खोज करते हुए फिर रहे हैं। हमने अपना चरित्र आपको सुना दिया, अब आप भी समझाकर कहिए कि आप कौन हैं?" भगवान होते हुए भी श्रीराम एक साधारण मनुष्य की भांति अपनी पीड़ा साझा करते हैं और सामने वाले से उसका परिचय पूछते हैं।

विज्ञान एवं आधुनिक उपयोगScience & Modern Application
आधुनिक चिंतनModern reflection · not scriptureContemplative Reflection & Actionआधुनिक चिंतन
आधुनिक संदर्भ · Modern Context
नेतृत्व और संबंधों में लोग अक्सर अपनी समस्याओं को छुपाकर 'सब कुछ ठीक है' का झूठा नाटक करते हैं। श्रीराम हमें सिखाते हैं कि अपनी वास्तविक चुनौती को स्वीकार करना और सहयोगियों के साथ साझा करना ही संकट के समाधान और नए सहयोगियों (सुग्रीव व हनुमान) से जुड़ने का पहला कदम है।
आज के जीवन में प्रयोग · Practical Application
- **ईमानदार संवाद (Vulnerable Openness)**: जब आप किसी संकट में हों, तो अपने विश्वासपात्र मित्रों और सहयोगियों के सामने अपनी स्थिति स्पष्ट रूप से रखें। - **सहानुभूतिपूर्ण साझेदारी (Mutual Understanding)**: अपनी बात कहने के बाद सामने वाले की पृष्ठभूमि और विचारों को भी पूरा समय देकर सुनें। - **लक्ष्य-केंद्रित प्रयास (Unwavering Focus)**: विपत्ति में शोक मनाने के बजाय संकट के समाधान की खोज में निरंतर सक्रिय रहें।
चिंतन प्रश्न · Self-Reflection

“क्या मैं अपनी कमजोरियों या संकट को छुपाने के झूठे अहंकार में जी रहा हूँ, जिससे मुझे सही सहायता नहीं मिल पा रही?”

शोध संदर्भResearch context · not scriptureComparative Research Noteशोध टिप्पणी

एम्पेथिक लिसनिंग और 'वल्नरेबिलिटी एज स्ट्रेंथ' (ब्रेने ब्राउन) पर शोध सिद्ध करते हैं कि जब कोई सबल व्यक्ति अपने संघर्ष और पीड़ा को प्रामाणिकता से स्वीकार करता है, तो यह दुर्बलता नहीं बल्कि पारस्परिक जुड़ाव और विश्वास की सबसे मजबूत नींव बन जाती है।

A modern parallel offered for reflection. It is not part of the scripture, and it has not been checked against the original sources it may allude to.

स्रोतSources and editionSources and editionस्रोत एवं संस्करण

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Sanskrit edition
Gita Press Illustrated Edition (Book Code 0080). Gita Press Gorakhpur (Official Publication)
Translation
Gita Press Editorial Board (Hindi)
Last updated
2026-10-24
Licence note (as recorded)
Public Domain Awadhi text and Hindi translation
पाठ-भेद · Variant readings
Collated with Kashi Nagari Pracharini Sabha recension.

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आगे क्या · What next