श्रीरामचरितमानस

Uttar Kanda — The Golden Ageश्लोक 10/3033%

Shri Ramcharitmanas 7.10

मूल पाठSource scriptureOriginal Sanskritमूल संस्कृत

रिपु रन जीति सुजस सुर गावत।सीता सहित अनुज प्रभु आवत॥ सुनत बचन बिसरे सब दूखा।तृषावंत जिमि पाइ पियूषा

व्याख्याVyakhya
संपादकीय व्याख्याEditorial explanationVyakhya (व्याख्या)व्याख्या

शत्रु को रण में जीतकर, देवता जिनका सुयश गा रहे हैं, वे प्रभु श्रीराम सीता जी और लक्ष्मण जी के साथ पधार रहे हैं। हनुमान जी के ये अमृतमय वचन सुनते ही भरत जी अपने सारे दुखों को ऐसे भूल गए जैसे कोई प्यासा व्यक्ति अमृत पीकर तृप्त हो जाता है। यह समस्त तपस्या का परमानंद में विसर्जन है।

विज्ञान एवं आधुनिक उपयोगScience & Modern Application
आधुनिक चिंतनModern reflection · not scriptureContemplative Reflection & Actionआधुनिक चिंतन
आधुनिक संदर्भ · Modern Context
सांसारिक दुखों, संघर्षों और वियोग की तपिश में झुलसते मन के लिए सत्य और ईश्वर के मिलन का विचार ही अमृत के घूंट जैसा है। जब जीवन में सत्य की विजय होती है और हम अपनी साधना के अंतिम लक्ष्य तक पहुंचते हैं, तो पिछले सभी संघर्ष और कष्ट एक क्षण में तिरोहित हो जाते हैं।
आज के जीवन में प्रयोग · Practical Application
- **कष्टों का विस्मरण (Transcending Past Hardships)**: वर्तमान की उपलब्धि और परमात्मा की कृपा का अनुभव करते हुए अतीत के दुखों और शिकायतों को भूल जाएं। - **अमृतमय वचनों का प्रयोग (Speaking Nectarine Words)**: दूसरों से बात करते समय ऐसे उत्साहवर्धक और मधुर वचनों का प्रयोग करें जो उनकी थकान मिटा दें। - **पूर्णता का उत्सव (Celebrating Fulfillment)**: जब जीवन में कोई पावन कार्य पूर्ण हो, तो पूरे परिवार और समाज के साथ मिलकर कृतज्ञता का उत्सव मनाएं।
चिंतन प्रश्न · Self-Reflection

“क्या मैं अभी भी अपने पुराने दुखों और संघर्षों की कड़वाहट को पकड़े बैठा हूँ, या वर्तमान के अमृत का पान कर परम तृप्ति का अनुभव कर रहा हूँ?”

शोध संदर्भResearch context · not scriptureComparative Research Noteशोध टिप्पणी

कैटालिटिक ट्रांसफॉर्मेशन ऑफ इमोशंस (भावनाओं का रूपांतरण) पर न्यूरोबायोलॉजिकल अध्ययन दर्शाते हैं कि सकारात्मक अर्थ और लक्ष्य की पूर्ति का एक शक्तिशाली अनुभव वर्षों के संचित अवसाद, तनाव और ट्रॉमा को तुरंत निष्प्रभावी कर मस्तिष्क के तंत्रिका-तंत्र को पुनर्जीवित कर सकता है।

A modern parallel offered for reflection. It is not part of the scripture, and it has not been checked against the original sources it may allude to.

स्रोतSources and editionSources and editionस्रोत एवं संस्करण

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Sanskrit edition
Gita Press Illustrated Edition (Book Code 0080). Gita Press Gorakhpur (Official Publication)
Translation
Gita Press Editorial Board (Hindi)
Last updated
2026-10-24
Licence note (as recorded)
Public Domain Awadhi text and Hindi translation
पाठ-भेद · Variant readings
Collated with Kashi Nagari Pracharini Sabha recension.

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