Atharva Veda
19
अध्याय 19 / 20

Kanda 19

काण्ड 19

453 श्लोकभाग 3/7 · श्लोक 22.1–28.10

पूर्ण अध्याय पाठ89 श्लोक

अध्याय 19

श्लोक 22.1

ब्रह्मा।१-२१ अङ्गिराः।मन्त्रोक्ताः।१ साम्नी उष्णिक्, ३, १९ प्राजापत्या गायत्री, ४, ११, १७ दैवी जगती, ५, १२-१३ दैवी त्रिष्टुप्, २, ६, १४- १६, २० दैवी पङ्क्तिः, ८-१० आसुरी जगती, १८ आसुर्यनुष्टुप्, २१ चतुष्पदा त्रिष्टुप् (१-२० एकावसानाः)।आ॒ङ्गि॒र॒साना॑मा॒द्यैः पञ्चा॑नुवा॒कैः स्वाहा॑

brahmā| 1-21 aṅgirāḥ| mantroktāḥ| 1 sāmnī uṣṇik, 3, 19 prājāpatyā gāyatrī, 4, 11, 17 daivī jagatī, 5, 12-13 daivī triṣṭup, 2, 6, 14- 16, 20 daivī paṅktiḥ, 8-10 āsurī jagatī, 18 āsuryanuṣṭup, 21 catuṣpadā triṣṭup (1-20 ekāvasānāḥ)| āṅgirasānāmādyaiḥ pañcānuvākaiḥ svāhā

हिन्दी अर्थ

का०.१९। सुऽ २२ भरयववेद-भाष्य २३१ के स्वास्थ्य के लिये प्राहूतियां हो मन्त्र २ में मनं को षष्ठ कहा दहै । मनकी प्रकृति अहंकार है, दस- मरौर ३ तर भन्तःकरण के स्वास्थ्य के लिये आहूतियों का विधन किया है।

English

Sūrya with Earth and Heaven from the western region guard me well. To him, etc. May Waters joined with Plants protect me from this region. To them I go, in them I rest: this

अध्याय 19

श्लोक 22.2

ष॒ष्ठाय॒ स्वाहा॑

ṣaṣṭhāya svāhā

हिन्दी अर्थ

१--३० भरथर्वा । मम्वोक्ता देवताः । ऋचार्भरोवाले सूक्त से होता है। इसलिये १९।२३।१ का मन्त्र "चतु एक ऋचा की वृद्धिवाले कतिपय सक्तो का कथन किया गया है । ५ ऋचवाभों वाले सूक्तं के लिये प्रशंसायुक्त वाणी हो ।

English

Sūrya linked with Earth and Heaven. Let those who vex me from this quarter, sinners give praise to plants’ associates the Waters.

अध्याय 19

श्लोक 22.3

स॒प्त॒मा॒ष्ट॒माभ्यां॒ स्वाहा॑

saptamāṣṭamābhyāṃ svāhā

हिन्दी अर्थ

१५ ऋचा वाले सूक्तं के लिये प्रंसायुक्त वाणी हो । १६ ऋचाभों वाले सूक्तं के लिथे प्रचंसायुक्त वाणी हो। १७ चाभ वाले सूक्तं के लिये प्रदंसायुक्त बाणी हो ।

English

A hymn recommending the protection of various Gods Mitra arose with Earth. To that fort I lead you: enter it, occupy it. Let it give you protection and defence.

अध्याय 19

श्लोक 22.4

नी॒ल॒न॒खेभ्यः॒ स्वाहा॑

nīlanakhebhyaḥ svāhā

हिन्दी अर्थ

१६९. एकोनविश्चतिः स्वाह ॥१६॥ १६ काण्डों के लिये प्रशंसायुक्त वाणी हो । या १६ वें काण्ड कै लिये का० १९ । सू २३ मरथवेवेद-माष्य २३९ २० काण्डों के लिये प्रंसायुक्त वाणी हो।या२०वेंकाण्ड के लिये १ ऋचा वाले सूक्तों के लिये भरशंसायुक्त वाणी हो!

English

Vāyu arose with Air. To that fort, etc. Sūrya arose with Heaven. To that fort, etc.

अध्याय 19

श्लोक 22.5

ह॒रि॒तेभ्यः॒ स्वाहा॑

haritebhyaḥ svāhā

हिन्दी अर्थ

ऋचाभों वाले सुक्तो कै लिये भरमिप्रेत नहीं । अतः इन पदों के प्रथं कमः १ से १६ काण्ड तथा १ से २० कण्डही प्रतीत होतेह । भथवंवेद मे २० तथा एकानृचेभ्यः का कथन लेष है, जिर कि मन्त्र १९,२०,२१, २२ हारा २४० भयर्ववेद-भाष्य का० १९ । सु° २३

English

Chandramās arose with the Constellation. To that fort, etc. Sacrifice arose with Priestly Fees. To that fort, etc. Ocean arose with the Rivers. To that fort, etc.

अध्याय 19

श्लोक 22.6

क्षु॒द्रेभ्यः॒ स्वाहा॑

kṣudrebhyaḥ svāhā

हिन्दी अर्थ

४६, “एकं ' सुक्तं ७५, तथा “एंकानृच सुक्त १ है। दस संख्या के क्रम रखा प्रतीत होता £ । वर्तमान २३ बवे सक्त मे “्रध.चेस्यः” का वणन के लिये प्रश्ंसायुक्त वाणी हो । . एकानृचेभ्यःन्=देखो प्रथवं° ( १६।२१।१) । इव भुक्त मे जो ऋचा है, वह् पूरी ऋचा नहीं, भाधी ऋचा है । रोहितसुक्तो के लिये प्रशंसाधुक्त वाणी हो ।

English

Brahma arose with the Brahmachārīs. To that fort, etc. Indra arose with Might. To that fort, etc.

अध्याय 19

श्लोक 22.7

प॒र्या॒यि॒केभ्यः॒ स्वाहा॑

paryāyikebhyaḥ svāhā

हिन्दी अर्थ

वाले सूयं भौर परमेदवरपरक ई, यथा काण्ड १३ के सुक्त + इन सूरक्तो में हमा है । कौशिक सूत्रों (६९।४) में इम सुक्तो का तिदृश “रोहितः” शब्द सूर्या के दो षुक्तो के लिये प्रचयं सायुक्त वाणी हो ।

English

The Gods arose with Immortality. To that fort, etc. Prajāpati arose with Creatures. To that fort I lead you: enter it, occupy it give you protection and defence.

अध्याय 19

श्लोक 22.8

प्र॒थ॒मेभ्यः॑ श॒ङ्खेभ्यः॒ स्वाहा॑

prathamebhyaḥ śaṅkhebhyaḥ svāhā

हिन्दी अर्थ

भथर्ववेद के १५बे काण्ड मे दो नुवा है, लिने “व्रात्य कां का० १९1 सू० २३ भथर्ववेद-माष्य २४१ परजापति-सम्बन्धी दो भनुवाकों के लिये प्रहंसायुक्त वाणी हो । १६ काण्ड के प्रथम पर्याय का देवता प्रजापति है ।

English

A prayer for protection from death and misfortune May Soma, Varuna the King, both Asvins, Yama and Pūshan guard us well from Mrityu—

अध्याय 19

श्लोक 22.9

द्वि॒ती॒येभ्यः॑ श॒ङ्खेभ्यः॒ स्वाहा॑

dvitīyebhyaḥ śaṅkhebhyaḥ svāhā

हिन्दी अर्थ

ते” (भरथवं० २।२३।५) 1 हसे प्राजापत्य का अथं है--“प्रजापति बनने य उपहरति" ( भ्रथवं ° कां ९ । सु० ६ । पर्याय २। मन्व ११) । प्रजा- पतेर्वा एष विक्षमाननु विक्रमते य उपहरति" (श्रथवं० कां० ९ । सु° ६। जिन्हे कि--“परामव करने वाला, तथा सहनरील कटा है । ।

English

Death caused by men, which Indra-Agni, Dhātar, Brihaspati and Savitar appointed. All that the World’s Lord made, all that for creatures Prajāpati and Mātarisvan fashioned,

अध्याय 19

श्लोक 22.10

तृ॒ती॒येभ्यः॑ श॒ङ्खेभ्यः॒ स्वाहा॑

tṛtīyebhyaḥ śaṅkhebhyaḥ svāhā

हिन्दी अर्थ

(नीलनचेभ्यः) नखों के नीलेपन के निवारणाथं (स्वाहा) भाहु- च कमणि स्थानिनः" (अष्टा ० २।३।१४) द्वारा, मथवा वारणाथं को बुद्ध- विभक्ति का प्रयोग हृभा है । यथा “जह्लकाय धुमः" ==महाकनिवारणार्थो (हस्िभ्यः) हरित रोगो के निवारण के लिथे (स्वाहा) श्ाहृतियां

English

fort I seek for refuge. May they protect me, may they be my guardians. I give my soul—All hail! —into their

अध्याय 19

श्लोक 22.11

उ॒पो॒त्त॒मेभ्यः॒ स्वाहा॑

upottamebhyaḥ svāhā

हिन्दी अर्थ

एक ही रोग है । करद इसे 18010108 अर्थात् पाण्डु कामला या पीलिया रोग कहते है । भथर्वेवेद मे “हरितभमेषनम्” हारा “भान्जन का निदेश २३२ सयर्थभेद-भाष्य काऽ १९६1 सु० २२

English

keeping. May Visvakarman with the Seven Rishis be my protector from the northern region. To him,

अध्याय 19

श्लोक 22.12

उ॒त्त॒मेभ्यः॒ स्वाहा॑

uttamebhyaḥ svāhā

हिन्दी अर्थ

भेषजम्” (४।९।३) । “जीव भोजनम्" पद द्वारा जीवन के लिये भोजन- रूप में भ्राञ्जन के प्रयोग का विधान प्रतीत होता है । यहं जाटरानिि मे निम्नलिखित उपचार कहे है- यथा ( १ ) सूर्योदय के पश्चात् सूयं ररिमिययो का सेवन या स्नान, “भ्रचु पुर्थमुदयतां हदच्ोतो हरिमा चते" १।२२।१), भर्थात् लाल गौ यालाल बल की गोरोचना द्वारा लेप । ( = रदिमर्या ) ह, ठन द्वारा तुभे घेर देते है 1 "देव्याः गावः” हारा भ्राधि- देविक गौप्रों का वर्णेन हभ है । गावः =रदिमनांम (निघं° १।५) ।

English

etc. May Indra, Marut-girt, protect me from this region. To him, etc.

अध्याय 19

श्लोक 22.13

उ॒त्त॒रेभ्यः॒ स्वाहा॑

uttarebhyaḥ svāhā

हिन्दी अर्थ

ते उत्पन्न यज्ञिय घूम इन का विनाच्च करता दहै। १३९. पर्यायिकेभ्यः स्वाहां ।।७॥ लिये, तदुचितं भौषधों की (स्वाहा) प्राहूतियां हों ।

English

Prajāpati, of generative power, with the Pratishlhā save me from the nadir! To him, etc. Brihaspati, joined by the Visvedevas, protect me from the region of the zenith! To him, I go,

अध्याय 19

श्लोक 22.14

ऋ॒षिभ्यः॒ स्वाहा॑

ṛṣibhyaḥ svāhā

हिन्दी अर्थ

==सुक्त के अवान्तरं विमाग । यथा-प्रयवंवेद (१६।१।१.३२)का एकी विषय है-"“दुःखमोचनत" । भौर इसके अवंन्तर विभाग था पर्याय हँ (४)। का० १९1 घु° २ भ्रथर्ववेद-भाष्य २३३ साध्य रोगों कै.निवारण के लिये (स्वाहा) जाठराग्नि मे आहृतियां क निवारण के लिये (स्वाहा) जौठराग्नि मे भ्राहुतियां हो ॥९॥

English

in him I rest; this fort I seek for refuge. May he protect me, may he be my guardian. I give my soul—

अध्याय 19

श्लोक 22.15

शि॒खिभ्यः॒ स्वाहा॑

śikhibhyaḥ svāhā

हिन्दी अर्थ

के निवारण के सिये (स्वाहा) नाठराग्नि भं भराहूतियां हो ॥१०॥. कहा है । यह पीतवणं प्नं है, जसे कि पीतवर्ण. की कौडियां होती है । पीत-. वणे के कारण ही कविता - पीतवर्णं शंख को “विद्युत . की ज्योति घे श्रेष्ठ है । द्वितीय कोटि के शंसं को “समुद्रजः” कहा है (भरथरवं ° ४।१०।४

English

All hail!—into his keeping. A prayer for security and peace on all sides

अध्याय 19

श्लोक 22.16

ग॒णेभ्यः॒ स्वाहा॑

gaṇebhyaḥ svāhā

हिन्दी अर्थ

तृतीय कोटि के शंखं को “सिन्धुतः पर्याृतः”” ( भ्रथरवं ° ४।१०।४) कहा वै, ये छोटे धाकार के होते है । “हिरण्यजाः; कुशषनः” को “विष्वभेषजः'" कहा है (अथर्व० ४११०।३) । “समुद्रन शंख" दवारा राक्षसरूप भौर खा जने. २३४ प्रथर्ववेद-माष्य क।० १९ । पु° २२ वचसे, बलाय, दीघायुत्वाय, तथा दतगारदाय--रक्षाथं बान्धने का वणेन हुमा है (भ्रथवं ० ४। १०।७) । बान्धन का भमिप्राय है-शंखभस्म का सेवन कर उसके प्रभाव को शरीर मँ स्थिर रखना, उस का भ्रपव्ययन

English

Let those who vex me from the eastern region, sinners, praise Agni followed by the Vasus.

अध्याय 19

श्लोक 22.17

म॒हा॒ग॒णेभ्यः॒ स्वाहा॑

mahāgaṇebhyaḥ svāhā

हिन्दी अर्थ

को शिथिल करने के लिये (स्वाहा) समर्पण हो ॥११॥ (उत्तमेभ्यः) उत्तम पाशो को शिथिल करने के लिये (स्वाहा) समर्पण हो ॥१२॥ (उत्तरेभ्यः) भ्रगले पाशो को रिथिलं करने के लिये (स्वाहा) समपंण मौर भरधम पाशो का वर्णन प्रतीत होता 8 1 यथा “उदुत्तमं वरुण पाश्म- का० १९। सुण २२ प्रथववेद-माष्य २३१५

English

Let those who vex me from this quarter, sinners, praise Vāyu compassed by the Air’s mid region.

अध्याय 19

श्लोक 22.18

सर्वे॒भ्योऽङ्गि॑रोभ्यो विदग॒णेभ्यः॒ स्वाहा॑

sarvebhyo'ṅgirobhyo vidagaṇebhyaḥ svāhā

हिन्दी अर्थ

ग्राहुतियां टं । सूक्त मेँ प्रायः. रोगनिवारण का वणेन है इस लिये “यण महागणों के स्वास्थ्य के लिये, तदुचित हवियो हारा (स्वाहा) जिक गण संख्या में महान् ह । इस वैयक्तिक भौर सामाजिक भावना को २३६ शयर्वेवेद-माष्य का० १९॥ सुऽ २२

English

Let those who vex me from the southern quarter, sinners, sing praise to Soma with the Rudras.

अध्याय 19

श्लोक 22.19

पृ॒थ॒क्स॒ह॒स्राभ्यां॒ स्वाहा॑

pṛthaksahasrābhyāṃ svāhā

हिन्दी अर्थ

के प्रसादन कै लिये प्राहुतियां तथा समपंण हो ॥ संसार मै जो (वीर्याणि )-शक्तियां (समृता संभृतानि) एकत्र हुई है, ततान) तानां था । (उत) तथा (भूतानाम्) भूतमौतिक जगत् की (प्रथमा)

English

Let those who vex me from this quarter, sinners, praise Varuna connected with Ādityas. Let those who vex me from the western quarter, sinners, praise

अध्याय 19

श्लोक 22.20

ब्र॒ह्मणे॑ स्वाहा॑

brahmaṇe svāhā

हिन्दी अर्थ

६ चागो वाले सूक्ता के लिये प्रशंसायुक्त वाणी हो । ७ ऋचां वलि पूर्तो के लिये प्रशंसागूक्त वाणी हो । २३८ भ्रयर्व॑वेद-भाष्य का० १६९।सु०२३

English

Let those who from the north side vex me, sinners, praise Visvakarman with the Seven Rishis. Let those who vex me from this quarter, sinners, praise Indra with the Marut host about him.

अध्याय 19

श्लोक 22.21

ब्रह्म॑ज्येष्ठा॒ संभृ॑ता वि॒र्याऽणि॒ ब्रह्माग्रे॒ ज्येष्ठं॒ दिव॒मा त॑तान ।भूतानां॑ ब्र॒ह्मा प्र॑थ॒मोत॑ जज्ञे॒ तेना॑र्हति॒ ब्रह्म॑णा॒ स्पर्धि॑तुं॒ कः

brahmajyeṣṭhā saṃbhṛtā viryā'ṇi brahmāgre jyeṣṭhaṃ divamā tatāna | bhūtānāṃ brahmā prathamota jajñe tenārhati brahmaṇā spardhituṃ kaḥ

हिन्दी अर्थ

ऋचां वाले सूक्तं के लिये प्रशंसायुक्त वाणी हो । ऋषा वाले सुक्तों के लिये प्रशंसायुक्त वाणी हो । १० वाभो वाले सूक्तं के लिये प्रशं सायुक्तं वाणी हो । १६१. एकादशचर्चम्यः स्वाहा ॥८॥ ११ ऋवाप्नों वाले सूक्तों के लिये प्रशंखायुक्त वाणी हो 1 १६ ऋचाध्रों वाले सूक्तं के लिये प्रांसायुक्त वाणी हो । १६४. चतुहैशर्चेभ्यः स्वाह ॥११।। १४ चछवाभरों वाले सूक्त के लिथे प्रशंसायुक्त वाणी हो ।

English

Let those who vex me from the nadir, sinners, extol Prajāpati of genial power. Let those who vex me from the zenith, sinners, extol Brihaspati with the Visve Devas.

अध्याय 19

श्लोक 23.1

अथर्वाणः।१-३० अथर्वा।चन्द्रमाः, मन्त्रोक्ताश्च।१ आसरी गायत्री, २-७, २०, २३, २७ दैवी त्रिष्टुप्, ८, १०-१२, १४-१६ प्राजापत्या गायत्री, १७, १९, २१, २४-२५, २९ दैवी पङ्क्तिः, ९, १३, १८, २२, २६, २८ दैवी जगती, (१-२९ एकावसानाः)।आ॒थ॒र्व॒णानां चतुरृ॒चेभ्यः॒ स्वाहा॑

atharvāṇaḥ| 1-30 atharvā| candramāḥ, mantroktāśca| 1 āsarī gāyatrī, 2-7, 20, 23, 27 daivī triṣṭup, 8, 10-12, 14-16 prājāpatyā gāyatrī, 17, 19, 21, 24-25, 29 daivī paṅktiḥ, 9, 13, 18, 22, 26, 28 daivī jagatī, (1-29 ekāvasānāḥ)| ātharvaṇānāṃ caturṛcebhyaḥ svāhā

हिन्दी अर्थ

१८१. मङ्गलिकेभ्यः स्वाहां ॥२८॥ भङ्लकारी सूक्त के लिये प्ररंसायुक्त वाणी हो वेद के सब सूक्त मंगलकारी ह। वैदिक दण्डविधान भी मङ्गलः २४२ ध्र्ववेद"भाष्य का० १९ । सु° २४ हैकि परमेदवर के भयसे वायु . बहती, भय ते सूयं तपता, विद्युत् तथा

English

All things within the quarters and their spaces, let all these be my manifold defences. That which the Gods bound on them when they battled for their royal sway.

अध्याय 19

श्लोक 23.2

प॒ञ्च॒र्चेभ्यः॒ स्वाहा॑

pañcarcebhyaḥ svāhā

हिन्दी अर्थ

तु, (वचसे) व्स् (च) भौर (भोजसे) भोजस् ( च ) भौर (बलाय) करता हूं, (यथा) जिससे कितु ( हिरण्यतेजसा ) वीयं-तत्तवत के तेज से संयुक्त हंग -(जनान् अनु) प्रजाजनों मँ (विमासासि)चभके । एकवचन यह् वचन पुरोहितं या गुरं द्वारा कथित है । बल दारीरिक

English

To those two with separate thousands, Hail! To Brahma, Hail! Collected manly powers are topped by Brahma. Brahma at first spread out the loftiest heaven.

अध्याय 19

श्लोक 23.3

ष॒ळृ॒चेभ्यः॒ स्वाहा॑

ṣal̤ṛcebhyaḥ svāhā

हिन्दी अर्थ

घृत द्वारा (वधंयन् ) बढ़ता हमा , (चतेन+) धृत द्वारा (त्वा) तुके हो जाने वले रोगं कीटाणु (मा दभन्) दबानरदे। बढ़ती है । प्रतः शरीर को घुत द्वारा सिचित करना चाहिए । यज्ञान्न में हो जाती ह । चान्द मी भोषधियो मे रस सेचन द्वारा प्राणध्रद है । सू्यंभी

English

Hail to the single non-Rich-versed ones! Hail to the Rohitas!

अध्याय 19

श्लोक 23.4

स॒प्त॒र्चेभ्यः॒ स्वाहा॑

saptarcebhyaḥ svāhā

हिन्दी अर्थ

प्राण = नासिका संचारी वायु । प्रपान = प्रान्तो मे रहै वाली, मल- मूत्र को बाहिर फंकने वाली वायु । घषावतन= धावु शुद्धौ । २५४ भयववेद-माष्य का० १९ ॥ सु° २७ प्राणिनं विशवतेंमुखं सू देवा अजनयम् ॥ ७ ॥

English

Hail to the hymn of victory! Hail to the hymns for happiness!

अध्याय 19

श्लोक 23.5

अ॒ष्ट॒र्चेभ्यः॒ स्वाहा॑

aṣṭarcebhyaḥ svāhā

हिन्दी अर्थ

संसग करता है । परमेदवर ने (ध्राणेन) प्राण के साथ (वातः) वायु को मनुष्यों को जीवनो भे प्राणदाक्ति का संचय करना चाहिए । किया है उन की (आयुषा) भायुप्रों अर्थात् जीवनो के धनुष्ार, तु (जीव)

English

Hail to Brahma! Collected manly powers are topped by Brahma. Brahma at first spread out the loftiest heaven. Brahma was born first of all things existing. Who then is fit to be this Brahma’s rival?

अध्याय 19

श्लोक 23.6

न॒व॒र्चेभ्यः॒ स्वाहा॑

navarcebhyaḥ svāhā

हिन्दी अर्थ

(जीव ) जीवन यापन कर, (मा मृथाः) भोरन शीघ्र मृत्युकोभ्राप्तदहो। अनुसार (जीवं) तु जीवित रह । भ्रौर (उद्) भायु से समुल्नत होकर, (देवानाम्) देवयानमा्गीं विद्वानों. की (यम्) जिस, (निदितम्) का० १९१ सूर २७ प्रयवंवेद-माध्य २५१

English

A benediction on a newly elected King Do ye, O Brāhmanaspati, invest for the royal sway this man.

अध्याय 19

श्लोक 23.7

द॒श॒र्चेभ्यः॒ स्वाहा॑

daśarcebhyaḥ svāhā

हिन्दी अर्थ

(अथवं० १०।२।११) । पर्थात् किसने इस पुरुष म धप्-ततत्वर विधि बह्ने के लिये पदा हुए है, स्वाद मँ तीखे; लाल, लोह षरित, वथा ताम्बे के धूए सदुश है, प्रौर ऊपर की प्रोर, नीचे की भोर, तथा चिरछे प्रवाहित हो रहे ह । अरुणाः = घमनियो का लाल रक्त । तान्नवूघ्राः=िराभ्रों ५615 देवयनः पथिभि!=जो भरण्य मँ श्रद्धा ्ौर तप का भ्राचरण करते हँ ठन का मागं "देवयानः पन्थाः” कहुलाता है (छान्दो ° उप० छ ° ५, सं० १०)।

English

With that wherewith the Deities invested Savitar the God. Invest this Indra for long life, invest him for great princely power, That I may lead him on to eld, that the man watch his princedom long.

अध्याय 19

श्लोक 23.8

ए॒का॒द॒श॒र्चेभ्यः॒ स्वाहा॑

ekādaśarcebhyaḥ svāhā

हिन्दी अर्थ

से पुरुष की रक्षा करते है, भन्यथा विना होता है । (प्रियायमाणा=प्रियायमाणा देवा तथा प्रियायमाणानि वीर्याणि) वीर्याणि) तीन वीर्यो ने, (भसु भन्तः) शरीरिक जलो के भीतर, इस ई है, जो कि उपयु क्त ३१ देवतार्भो करी दुष्ट से उपपन्न नहीं हो सकती 1

English

Invest this Soma for long life, invest him for great hearing power. That I may lead him on to eld, that he may watch o’er hearing long.

अध्याय 19

श्लोक 23.9

द्वा॒द॒श॒र्चेभ्यः॒ स्वाहा॑

dvādaśarcebhyaḥ svāhā

हिन्दी अर्थ

शनुसन्धान की आावद्यकता पतीन होती है । इस निमित्त भयवं० १०७। को विभक्त कर् प्राप्त किया है, निदचय.ह कि उन ३३ देवो को कतिपय होता ह कि ३३ द्वो के स्द्पो पर भरधिक भनुसन्धान की भआवदयकता

English

For us, surround him, cover him with splendour, give him long life, and death when age removes him. This garment hath Brihaspati presented to Soma, to the King, to wrap about him.

अध्याय 19

श्लोक 23.10

त्र॒यो॒द॒श॒र्चेभ्यः॒ स्वाहा॑

trayodaśarcebhyaḥ svāhā

हिन्दी अर्थ

मृत्यु मी इस कै भय से निजकर्म भें भ्यापृत है । इसलिये दण्ड-विघान भी है । इसी दृष्टि ते संहारकारी श्दर्देवता को शिव तथा शंकर भी वर्तमान करई सक्तो कां निर्देश न्हीदहै। नसे १२का्डो मे २१ वाभो वाले सूक्त से लेकर ७३ चावल. सूक्त है, जिनका निदेश १९।२३।१-३० मे भनुपलन्ध है । प्रतीयमान इन क्षतियों का समाधान १९।२२।१-२१ भ

English

What Indra made his shield, may that protect us well on every side, My shield is Heaven and Earth, my shield is the bright Day, my shield the Sun. The Visva Devas made my shield. Let not misfortune fall on me.

अध्याय 19

श्लोक 23.11

च॒तु॒र्द॒श॒र्चेभ्यः॒ स्वाहा॑

caturdaśarcebhyaḥ svāhā

हिन्दी अर्थ

परमेदवरा्थं “स्वाहाका भरं है-सुविधि हारा तथा पुणं्प म परमेश्वर के प्रति समपेण । सवाहा = सु + भा हा (भोहाक् त्यागे) । इस प्रकार ब्रह्मवेद मे,रहे सभी सूक्त समाविष्ट जानने चाहिए । एकोनविरतिः विशतिः (येन) जिस विधि से (देवाः) दयोतमान ग्रह भादि ने (देवम् ) योत- को (परि) सब प्रकार से (भघारयन् ) नियत स्थात में धारित किया हुभा के प्रबन्ध के लिये (परि) सब प्रकार से (घत्तन) धारित करो ।

English

A single line giving the names of the chief Vedic metres Gāyatri, Ushnih, Anushtup, Brihatī, Trishtup, Jagatī.

अध्याय 19

श्लोक 23.12

प॒ञ्च॒द॒श॒र्चेभ्यः॒ स्वाहा॑

pañcadaśarcebhyaḥ svāhā

हिन्दी अर्थ

दुसरे को धारण कयि हए ह । इसी प्रकार प्रजावगे भौर राजव मे सकता है, भौर शासन मेँ स्थिरता मा सकती है। 1 से (घत्तन) घारण-पोषण करो । (यथा) ताकि (एनम्) इस घन्नाद् को

English

A prose hymn of homage to various portions of the Atharva-veda, to the Rishis, and to Brahma With the first five chapters of the Angirases, Hail!

अध्याय 19

श्लोक 23.13

षो॒ड॒श॒र्चेभ्यः॒ स्वाहा॑

ṣoḍaśarcebhyaḥ svāhā

हिन्दी अर्थ

महाच्राण के निमित्त (जागरात्) जागरूक रदे, सावधान रहे । यनं जरसे नयां न्योद् भोत्रेऽधिं ज गरत् ॥३॥ २४४ भरथर्ववेद-भाष्य का० १९॥। सुग २४ का (परि) सब प्रकार से (धत्तन) धारण-पोषण करो । (यथा) ताकि

English

To the sixth, Hail! To the seventh and eight, Hail!

अध्याय 19

श्लोक 23.14

स॒प्त॒द॒श॒र्चेभ्यः॒ स्वाहा॑

saptadaśarcebhyaḥ svāhā

हिन्दी अर्थ

विद्या कै प्रचार के निमित्त स्वाधिकारपूवंक जागरूक रहे,सावधान रहे । १८७. परि घत्त धत्त नो वसेम जरामर्यं णुत दी्माथुः । (कृणुत) करो, (दी्म् भ्रायुः) इसलिये इसका इस प्रकार घारण-पोषण करो, ताकि इस की दीघं रायु हो । (बहस्पतिः) बृहती वेदबाणी के पति पुरोहित न (सोमाय रज्ञे) सवंप्र रक तथा सौम्यप्रकृति राजा के (परि-

English

The black-clawed ones, Hail! To the golden-hued ones, Hail! To the small ones, Hail!

अध्याय 19

श्लोक 23.15

अ॒ष्टा॒द॒श॒र्चेभ्यः॒ स्वाहा॑

aṣṭādaśarcebhyaḥ svāhā

हिन्दी अर्थ

चुन लिया जाय, तब उसे उस की पूणं भयु पर्यन्त, सुशासन का प्रधिकार (ब्रभिशस्तिपाः) हिसा से रक्षा करनेवाले (भवः). हूजिये । ( पुचीः) नाना कार्यो से व्याप्त (शतं शरदः) सौ वषं (जीव) जीवित रहिये, (च) गौर का० १९। सु० २४ धथवंतेद-भाष्य २५५ है, पहरा है । भ्राप (उ) निश्चय से (वापीनाम्) बीजवोई खेतियों, पौर वावडी आदि जलाशयो की (भ्रभिशस्तिपाः) विनाच्च से रक्षा करनेवाले (भभुः) हुए है । (चतं--- --पुरूचीः) आप नाना कार्यो से व्याप्त सौ वषं जीवित रहिये, भौर (जीवन्) जीवितं रहते हए (वसुनि) सम्पत्तियो का (विभजासि) यथोचित विभाग प्रजाजनों मे करते रहिये, (चारुः) इस

English

To those composed in strophes, Hail! To the first shells, Hail!

अध्याय 19

श्लोक 23.16

ए॒को॒न॒विं॒श॒तिः स्वाहा॑

ekonaviṃśatiḥ svāhā

हिन्दी अर्थ

जनो मेँ करना, यह राजाकाकाम है। चारुः ख्चेविपरीतस्य ( निर° २४६ भथवेवेद-माष्य का०१९।प्० २६ ने (श्राह) कटी है, (तद् उ) उसे ही (सोमः) सेना के प्रंरकने, तथा (बहस्पतिः) महतो सेना कै पति ने मी (प्राह) कहा है, (सविता) पश्वो

English

To the second shells, Hail! To the third shells, Hail! To the penultimates, Hail.

अध्याय 19

श्लोक 23.17

विं॒श॒तिः स्वाहा॑

viṃśatiḥ svāhā

हिन्दी अर्थ

ऊचे लै जानेवाला (मव) तू हो,( उदुद्य ) भ्रौर ऊचे ले जाकर (प्रति)भ्रौर प्रधिक ऊंचाई की भोर (धावतात्) तु दौड लगा । उद् = ऊंचाई । ऊंवाई की कोई निदिचत सीमा नहीं होतो । बा्थिक सामाजिक,सदाचारिक, आध्यात्मिके भादि नानाविध ऊंचारईयां है, तथा इन मे प्रत्येक की उंचाई भरसोमित है य एनद् वेद् स शदे नमति जराशस्यृमंवति यो निति ॥१॥ का० १९। पू० २६ भयवेवेद-माष्य २४७ परमेद्वर की प्राप्ति के (रहति) योग्य होता है । (यः) जो कोई ( विमति) वीयं तततव को धारण-पोषण करता 8, वह (जरामृत्युः) बुद़ापि पर परने- वाला (भवति) हो जाता है।

English

To the last ones, Hail! To the latter ones, Hail!

अध्याय 19

श्लोक 23.18

म॒ह॒त्का॒ण्डाय॒ स्वाहा॑

mahatkāṇḍāya svāhā

हिन्दी अर्थ

२।३।१०) । हिरण्यम् ==891111) 119 ( भ्रापटे) श्यति पुदष का वीयं । का सार कहा है, यथा--“वनस्पतीनामुत' वीर्याणि ¦ १९४. यद्विश्वं धयेण सुवं प्रलावैन्तो मनव; पै हैषिरे ।

English

To the Rishis, Hail! To those with hair in tufts, Hail! To the Ganas, Hail!

अध्याय 19

श्लोक 23.19

तृ॒चेभ्यः॒ स्वाहा॑

tṛcebhyaḥ svāhā

हिन्दी अर्थ

तैल भौर दीप्तिके साथ ( सं सृजति ) सम्बद्ध करता है । (यः) जो कोद २४८ अयर्ववेद-माष्य का० १९। सु०२६ मोर दीघं भ्रायु वाला (मवति) होता है। १९९. आधवे स्वा चैते स्वोजसे च बख।य च ।

English

To the great Ganas, Hail! To all the Vidagana Angirases, Hail!

अध्याय 19

श्लोक 23.20

ए॒क॒र्चेभ्यः॒ स्वाहा॑

ekarcebhyaḥ svāhā

हिन्दी अर्थ

१९६. यद् वेद् राज्ञा बरहंणो वेदं देब इस्यतिः । के गुणों को (वेद ) जानता है, (देवः) विजिगीषू (बृहस्पतिः) बृहती सेना का पति जिस वीर्य-तत्व कै गुणों को (वेद) जानता है, (वुत्रहा) पापों ( आयुष्यम् ) भायुवधंक (मृवत्) हो । (तत्) वह (ते) तेरे लिये ( वचं- ३७) .1 देवः == विवृ विजिगीषा । बृहस्पतिः, देखो (अथव ° १६।१३।९) ।.

English

Brahma was born first of all things existing. Who then is meet to be that Brahma’s rival? A prose hymn of homage to various portions of the Atharva-vada classed according to the

अध्याय 19

श्लोक 23.21

क्षु॒द्रेभ्यः॒ स्वाहा॑

kṣudrebhyaḥ svāhā

हिन्दी अर्थ

करे (दृषा) सुख-शान्ति की वर्षां करने वाला मन (वाजिभिः) शक्ति- शक्तियों द्वारा (त्वा) तुकं (पातु) सुरक्षित करे । १२३) । वृषा सच्वगुणप्रधान मन, जो कि सुखों की वर्षा करता, भ्रौर

English

number of verses which their hymns contain Hail to the four-verse strophes of the Atharvanas! Hail to the five-versed!

अध्याय 19

श्लोक 23.22

ए॒का॒नृ॒चेभ्यः॒ स्वाहा॑

ekānṛcebhyaḥ svāhā

हिन्दी अर्थ

याम का कथनक्रियाह, जोकि यम-नियम म्रासन प्राणायाम भादि आठ होता है ।“ततः क्षीयते भकाश्ावरणम् ' (योय० २।५२), तथा धारणा ध्यान समाधि कै लिये मन प योग्यता पदा हो जाती है, “धारणासु च योग्यता भर्थात् जीवात्मा की निज शक्तियां । हे मनुष्य † (ओषधीभिः) भ्रोषधिर्यां समेत (सोभः) सोम भरोषचि

English

Hail to the six-versed! Hail to the seven-versed!

अध्याय 19

श्लोक 23.23

रो॒हि॒तेभ्यः॒ स्वाहा॑

rohitebhyaḥ svāhā

हिन्दी अर्थ

२५० परथवववेद"भाष्य का० १९ । पुऽ ६७ गई है । वेदो भ्रौर भायुवेद के ग्र्थो मे इसके नाना चमत्कारी गुणो तथा ताप तथा प्रकाश का भिन्न-भिन्न प्रमाव पृथिवी पर पडता है, गौर ऋतु मे परिवतंन होता रहता है, जिख के हारा हमारी रक्षा हो रही है । मादुभ्यःन=

English

Hail to the eight-versed! 250 Hail to the nine-versed!

अध्याय 19

श्लोक 23.24

सू॒र्याभ्यां॒ स्वाहा॑

sūryābhyāṃ svāhā

हिन्दी अर्थ

भाटा पर, भोषधियोंके रर्सोके निर्माण पर भीपडताहै। इस प्रकार हमारे जीवनो की रक्षा चन्द्रमा पर मी निर्भर है। विद्वान् लोग (आहुः) कहते हँ कि (दिवः) चुलोक (तिलः) तीन है, ऋरान्तिवृत्त के १२ विभाग किये जाते है । चुलोक का एक विभाग है क्रान्ति-' मे दक्षिणीविभाग ! दस प्रकार धुलोकं के इन तीन विभागों को “तिलः

English

Hail to the ten-versed! Hail to the eleven-versed!

अध्याय 19

श्लोक 23.25

व्रा॒त्याभ्यां॒ स्वाहा॑

vrātyābhyāṃ svāhā

हिन्दी अर्थ

का० १९1 -सु° २७ पथववेद-भाष्य २५१ बो वृत्त फैला हुभा है, वह चुलोक के क्रान्तिवृत्त का भनुरूपी है । इस भनु- रूपी वुत्त के उत्तरम जो विभाग है, वह पृथिवी का उत्तरीय विमाग भ्रौर धनुरूपी-वृत्त के दक्षिणमें जो विमाग है, वह पृथिवो का दक्षिणीविमाग कहुलाता ह । इस प्रकार इन तीन विभागो को “"तिन्लः प्रृथिवीः” कहा है । इसी दुष्टि से भ्रन्तरिक्ष के मीः तीन विभाग है। हारा उन्हे भराकाच गङ्गा (९) ५४8) मे दो भौर दुलोक दृष्टिगोचर

English

Hail to the twelve-versed! Hail to the thirteen-versed Hail to the fourteen-versed!

अध्याय 19

श्लोक 23.26

प्रा॒जा॒प॒त्याभ्यां॒ स्वाहा॑

prājāpatyābhyāṃ svāhā

हिन्दी अर्थ

द्नन्तरिक्ष भी धिवि सम्भव है । दक्षिण समुद्र । एन चार समुद्रो वारा पृथिवी धिरी हृद है। स्तोमम् = संगीत के तीन पश है) चा, स्तोम, घौर साम। संहिताओं मेँ ऋचाएं या मन्त्र दिये गए है । इन ऋचा की पुन रावृत्तियां गाने के लिये की जाती है, वह हन का गेयरूप बनता है । इसे स्तोम कहते ह! जिसस्वरया रागर्मे यह स्तोम गाया जाता ठसे साम कहते है। गायत्री छन्द वाले तीन मर्त्रौ दवारा, निमित होतादहै। भापः-जल भी

English

Hail to the fifteen-versed! Hail to the sixteen-versed!

अध्याय 19

श्लोक 23.27

वि॒षा॒स॒ह्यै स्वाहा॑

viṣāsahyai svāhā

हिन्दी अर्थ

१. निदिं दिवः" भर्व ° १०।१०।६२१ प, दिव् (चौः ) को त्रिदिव् कटा है । शरिदिव् == तीन विभागो मेँ विभक्त दिव् । कोकरिमेरा रचित समग्र जगत् तेरी रक्षा भौर समृद्धिकै लियेहै। नाकः (यजु ०३२।६) मे महषि दयानन्द ने “नाकः” का प्रथं किया है “सब

English

Hail to the seventeen-versed! Hail to the eighteen-versed! Hail, nineteen!

अध्याय 19

श्लोक 23.28

म॒ङ्ग॒लि॒केभ्यः॒ स्वाहा॑

maṅgalikebhyaḥ svāhā

हिन्दी अर्थ

है। मनुनेभी उपमाद्वारा गृहाश्रम को समद्र कहाहै। “यथा नदीनदाः (मनु° ६।९०) । इस प्रकार गृहस्थ को सागरे से उपमित कर गृहस्य को होता है । पूवं के तीन भ्राश्चमों मे एषणाएं बनी रहती ह । इन एषणार्भो के तीन महाशक्तिया है परमेश्वर, जीव, भौर प्रकृति । मनुष्य जीवन इन

English

Hail, twenty! Hail to the Great Section!

अध्याय 19

श्लोक 23.29

ब्र॒ह्मणे॒ स्वाहा॑

brahmaṇe svāhā

हिन्दी अर्थ

जीवन्मुक्त थत, कर्माशय ते रहितं हो कर विचरता है । धतः वह इन त्रिविघं तापो से विमुक्त रहता है । तधिविष्टपः=सुखदिहेषभोगो वा (उणा० ३! १४५), महि दयानन्द भाष्य । मथवा भाचिदं विकाषिभौतिकाष्यात्सिक, शरद् की वायुएं । मातरिदवा-=मातृभृतं भ्रन्तरिक्ष भें गतियां करते वाली । का० १९। सुर २४ धरथर्ववेद-माष्य २५३

English

Hail to the triplets! Hail to the single-versed hymns! Hail to the little ones!

अध्याय 19

श्लोक 23.30

ब्रह्म॑ज्येष्ठा॒ संभृ॑ता वी॒र्याऽणि॒ ब्रह्माग्रे॒ ज्येष्ठं॒ दिव॒मा त॑तान ।भू॒तानां॑ ब्र॒ह्मा प्र॑थ॒मोत जज्ञे॒ तेना॑र्हति॒ ब्रह्म॑णा॒ स्पर्धि॑तुं॒ कः

brahmajyeṣṭhā saṃbhṛtā vīryā'ṇi brahmāgre jyeṣṭhaṃ divamā tatāna | bhūtānāṃ brahmā prathamota jajñe tenārhati brahmaṇā spardhituṃ kaḥ

हिन्दी अर्थ

भ्राजन्तो विश्ववैदसो देवा वै्येन धावत ।६॥ (वः) तुम्हारे (भरपानम्) प्रपानं को, (मा) न (हरः) तुम्हारे तेज को (मायिनः) छली-कपटी रोग कीटाणु (दमन्) दवा पाएं । (ज्नाजन्तः) हि वाले (देवाः) दिव्य पुरुषो ! तुम (दन्येन) परमेश्वर-देव हारा प्रदशिव विधि से, (घ्ावत) भरपने जीवनो को दुद्ध-पवित्र करते रहो ।

English

Hail to the two Sūryā hymns! Hail to the two Vrātya hymns! Hail to the two Prajāpati hymns!

अध्याय 19

श्लोक 24.1

राष्ट्रम्।१-८ अथर्वा।ब्रह्मणस्पतिः, बहुदैवत्यम्।अनुष्टुप्, ४-६, ८ त्रिष्टुप्, ७ त्रिपदाऽर्षी गायत्री।येन॑ दे॒वं स॑वि॒तारं॒ परि॑ दे॒वा अधा॑रयन्।तेने॒मं ब्र॑ह्मणस्पते॒ परि॑ रा॒ष्ट्राय॑ धत्तन

rāṣṭram| 1-8 atharvā| brahmaṇaspatiḥ, bahudaivatyam| anuṣṭup, 4-6, 8 triṣṭup, 7 tripadā'rṣī gāyatrī| yena devaṃ savitāraṃ pari devā adhārayan| tenemaṃ brahmaṇaspate pari rāṣṭrāya dhattana

हिन्दी अर्थ

त्रीणि वीर्याणि = ( १) कायिक वीयं । (२) मानंसिक वीयं, यथा हिरण्य या मानसिक-रेठसू है “संकल्पशक्ति"" या कामना । इस मानसिक ९०७. ये देवा दिम स्य ते द॑गलो रपद चनम् ॥११॥ का० १९ सुऽ २७ भयववेद-माष्य २५७

English

Advance to good old age: endue the mantle. Be thou our heifers’ guard from imprecation. Live thou a hundred full and plenteous autumns, and wrap thee in prosperity of riches.

अध्याय 19

श्लोक 24.2

परी॒ममिन्द्र॒मायु॑षे म॒हे क्ष॒त्राय॑ धत्तन ।यथै॑नं ज॒रसे॑ न॒यां ज्योक् क्ष॒त्रेऽधि॑ जागरत्

parīmamindramāyuṣe mahe kṣatrāya dhattana | yathainaṃ jarase nayāṃ jyok kṣatre'dhi jāgarat

हिन्दी अर्थ

(देवाः) है विद्रानो ! (ये) जो (दिवि) सूर्यादिलोक में (एकाद) दश प्राण भ्रौर ग्यारहूवां जीव, (स्थ) है, (ते) वे जसे है, वेते उन को जानके (देवासः) है विद्वानो ! तुम (इदम्) इस (हविः) हवि का ( जुषध्वम्

English

Thou for weal hast clothed thee in this garment: thou hast become our cows’ sure guard from curses. Live thou a hundred full and plenteous autumns: then living, fair thyself, shalt deal forth

अध्याय 19

श्लोक 24.3

परी॒मं सोम॒मायु॑षे म॒हे श्रोत्रा॑य धत्तन ।यथै॑नं ज॒रसे॒ नयां ज्योक् क्ष॒त्रेऽधि॑ जागरत्

parīmaṃ somamāyuṣe mahe śrotrāya dhattana | yathainaṃ jarase nayāṃ jyok kṣatre'dhi jāgarat

हिन्दी अर्थ

०७८ये हैवा अन्तरि एकादश स्थ ते देवासो इविरिदं जुषध्वम् ॥१२॥ करनेहारे ( एकादश) वशेन्दरिय भौर एक मन (स्थ) ह, (ति) वे जंसेहै वैसे उन को जानके (देवासः) है विद्वानो ! तुम (दम्) इस (हविः) हवि का (जुषध्वम्) प्रीतिपूर्वंक सेवन करो । भावानुसार धं दिया है । यजुवेद ७।१९, तथा ऋग्वेद १।१३९।११ में है--“भन्तरिक्ष वा जलो भे निवास करनेहारे, तथ। प्राणो मेँ ठहरनेवाले

English

treasures. In every need, in every fray we call, as friends, to succour us,

अध्याय 19

श्लोक 24.4

परि॑ धत्त ध॒त्त नो॒ वर्च॑से॒मं ज॒रामृ॑त्युं कृणुत दी॒र्घमायुः॑ ।बृह॒स्पतिः॒ प्राय॑च्छ॒द् वास॑ ए॒तत् सोमा॑य॒ राज्ञे॒ परि॑धात॒वा उ॑

pari dhatta dhatta no varcasemaṃ jarāmṛtyuṃ kṛṇuta dīrghamāyuḥ | bṛhaspatiḥ prāyacchad vāsa etat somāya rājñe paridhātavā u

हिन्दी अर्थ

गुदा, लिग भौर मन (स्थ) है" (ते) वे जसे मपने-्रपते कामों मे वतमानः , ई, वैसे (देवासः) है राजसभा के समासदो ! घाप लोग यथायोग्य भरपने- प्रपते कामों मं वर्तमान होकर -- “1

English

Indra the mightiest of all. Gold-coloured, undecaying, blest with heroes, dwell, dying in old age, with children round thee.

अध्याय 19

श्लोक 24.5

ज॒रां सु ग॑च्छ॒ परि॑ धत्स्व॒ वासो॒ भवा॑ गृष्टी॒नाम॑भिशस्ति॒पा उ॑ ।श॒तं च॒ जीव॑ श॒रदः॑ पुरू॒ची रा॒यश्च॒ पोष॑मुप॒संव्य॑यस्व

jarāṃ su gaccha pari dhatsva vāso bhavā gṛṣṭīnāmabhiśastipā u | śataṃ ca jīva śaradaḥ purūcī rāyaśca poṣamupasaṃvyayasva

हिन्दी अर्थ

“ष्ठु कितः" का “भरन्तरिक्ष. वा अलो मँ निवास करनेहारे” एेसा भथं भेत है । परन्तु यजुर्वेद के मन्त मं “परपु” का प्रथं महिने कियाहै-- २५८ । प्रथववेद-माष्य क० १९ । पु° २७ (देवाः) है विद्धानो (ये) जो (पृथिव्याम्) पृथिवी म (एकाद). उक्त एकादश गण दश प्राण मौर ग्यारहवां जीव (स्थ) है, (ते) बे वैसे है वसे उन को जानकर (देवासः) है विद्वानो! तुम (इदम्) इस (हविः) हवि को (जुषध्वम्) प्रीतिपुरवंक सेवन करो ।

English

This is the spoken word of Agni, Soma, Brihaspati and Savitar, and Indra. 251

अध्याय 19

श्लोक 24.6

परी॒दं वासो॑ अधिथाः स्व॒स्तयेऽभू॑र्वापी॒नाम॑भिशस्ति॒पा उ॑ ।श॒तं च॒ जीव॑ श॒रदः॑ पुरू॒चीर्वसू॑नि॒ चारु॒र्वि भ॑जासि॒ जीव॑न्

parīdaṃ vāso adhithāḥ svastaye'bhūrvāpīnāmabhiśastipā u | śataṃ ca jīva śaradaḥ purūcīrvasūni cārurvi bhajāsi jīvan

हिन्दी अर्थ

भावानुसार भथ दिया है । यनुवंद ७।१९ क मर्हषि-माष्यानुसार तिरिशीनघ्न्या रंषत॒ जातवेदा भृतढ़ृतों मे सवत॑; सन्तु वभ ॥१५॥ इन दोनों मन्त्रो के भं देखो-अथवं ° १३।१६।१-२ भे । काऽ १९। सुण २८ भयववेद-माष्य २५९

English

A charm to be used when a young ox is first yoked I yoke thee with the mind of one unwearied still and first of all. Be thou a bearer up the hill: run hither bearing up thy load.

अध्याय 19

श्लोक 24.7

योगे॑योगे त॒वस्त॑रं वाजे॑वाजे हवामहे ।सखा॑य॒ इन्द्र॑मू॒तये॑

yogeyoge tavastaraṃ vājevāje havāmahe | sakhāya indramūtaye

हिन्दी अर्थ

२१२. शमं बाम ते मणिं दीर्घायुत्वाय तेज॑से । हे राजन् ! (ते) तेरे"राज्य की (दीर्घायूत्वाय ) दीषं-आगु के. लिये घरान्तरिक शतरुभों को दबानेवाजे, तथा (द्विषतः) द्वेषी राजा के (हदः) हृदय को (तपनम्) तपानेवाले, (मणिम्) सेनापतयो मँ दिरोमणिर्प, (दर्मम्) शतरु्गो के विदारण द्वारा चमकनेवने, (इमम्) इस सेनापति को (बध्नामि) तेरे साय दुद् बदकरता ह. हपाता हुमा, भरौर (शत्रूणाम्) विनाशकारी दुदमनों के (मनः) मनो को या

English

A hymn accompanying investiture with an amulet of gold Gold that was born from Fire is immortal hath been deposited with mortal creatures.

अध्याय 19

श्लोक 24.8

हिर॑ण्यवर्णो अ॒जरः॑ सु॒वीरो॑ ज॒रामृ॑त्युः प्र॒जया॒ सं वि॑शस्व ।तद॒ग्निरा॑ह॒ तदु॒ सोम॑ आह॒ बृह॒स्पतिः॑ सवि॒ता तदिन्द्रः॑

hiraṇyavarṇo ajaraḥ suvīro jarāmṛtyuḥ prajayā saṃ viśasva | tadagnirāha tadu soma āha bṛhaspatiḥ savitā tadindraḥ

हिन्दी अर्थ

हदय वालों को, (अभीन् ) भौर भपने भ्रापको भय-रहित सममनेवालो को (दम) है शत्रुविदारक सेनपति ! (त्वम्) तु हो । (द्विषतः) दवेषी-शत्रुदल का (दर्भ) विदारण करनेवाले (मणे) शिरो-

English

He who knows this deserves to own this jewel, and in extreme old age dies he who wears it. The men of ancient time with children round them longed for this Gold, bright with the Sun’s own colour,

अध्याय 19

श्लोक 25.1

अश्वः।१ गोपथः।वाजी।अनुष्टुप्।अश्रा॑न्तस्य त्वा॒ मन॑सा यु॒नज्मि॑ प्रथ॒मस्य॑ च ।उत्कू॑लमुद्व॒हो भ॑वो॒दुह्य॒ प्रति॑ धावतात्

aśvaḥ| 1 gopathaḥ| vājī| anuṣṭup| aśrāntasya tvā manasā yunajmi prathamasya ca | utkūlamudvaho bhavoduhya prati dhāvatāt

हिन्दी अर्थ

मणिरूप है सेनापति ! (घमंः इव) ग्रीष्मऋतु के सूये के सदृश (अमि- २६० भधर्ववेद-माष्य का० १९ ॥ चु० २० तपन्) शनरुओं के संमुख तपता हुभ्रा, दमदमाता हृभ्रा, ( नितपन्) नितरां तपता हमरा, दमदमाता हुमा तु (बलम्) शत्रो के संनिक-बल को ( विरजं . या प्रबलरूप मेँ उमड़ हए मेष को तोडती-फोडती हई विद्युत् के सदृक्ष,

English

This shall endow thee, as it shines, with splendour, and long shall be the life of him who wears it.

अध्याय 19

श्लोक 26.1

हिरण्यधारणम्।१-४ अथर्वा।अग्निः, हिरण्यं च।त्रिष्टुप्, ३ अनुष्टुप्, ४ पथ्यापङ्क्तिः।अ॒ग्नेः प्रजा॑तं॒ परि॒ यद्धिर॑ण्यम॒मृतं॑ द॒ध्रे अधि॒ मर्त्ये॑षु ।य ए॑न॒द् वेद॒ स इदे॑नमर्हति ज॒रामृ॑त्युर्भवति॒ यो बि॒भर्ति॑

hiraṇyadhāraṇam| 1-4 atharvā| agniḥ, hiraṇyaṃ ca| triṣṭup, 3 anuṣṭup, 4 pathyāpaṅktiḥ| agneḥ prajātaṃ pari yaddhiraṇyamamṛtaṃ dadhre adhi martyeṣu | ya enad veda sa idenamarhati jarāmṛtyurbhavati yo bibharti

हिन्दी अर्थ

(भिन्दि) छिन्न-मिन्न कर दे । - (दर्भं) है शनतरुविदारक (मणे) शिरोमणि सेनापति (सपत्नानाम्) म (मिच्छ) तु विभेद डाल दे, इनमें भेदनीति को वर्त! तथा (एषाम्) इन के (शिरः) शिरोभ्रुव सेनापति या राजा को (वि पात्य) इनसे विगत करदे, भलग करदे, या मार गिरा। (इव) जेते कि (उद्यन्)

English

Long life and splendour let it bring energy and strength to thee. That thou mayst shine among the folk with all the brightness of the Gold. What Varuna the King knows well, and what the God

अध्याय 19

श्लोक 26.2

यद्धिर॑ण्यं॒ सूर्ये॑ण सु॒वर्णं प्र॒जाव॑न्तो॒ मन॑वः॒ पूर्व॑ ईषि॒रे।तत् त्वा॑ च॒न्द्रं वर्च॑सा॒ सं सृ॑ज॒त्यायु॑ष्मान् भवति॒ यो बि॒भर्ति॑

yaddhiraṇyaṃ sūryeṇa suvarṇaṃ prajāvanto manavaḥ pūrva īṣire| tat tvā candraṃ varcasā saṃ sṛjatyāyuṣmān bhavati yo bibharti

हिन्दी अर्थ

भमि को भावृत किये हए भूमि के राघ्यन्धकार को विगत कर हैतादहै, अलग कर देता है । वि पातय = वि +-षत्लू गतौ ; १त् गतौ । 1 (दमं) है शत्रुविदारक, (मणे) शिरोमणि सेनापति. (मे) मुक भिन्न-भिन्न कर । (मे) मुख राजा के राष्ट प्र (पृतनायतः) सेनां हारा भाक्रमण चाहनेवा्लो को (भिन्दि) भेदनीति दारा भिन्न-भिन्न कर । (मे) भुफ राजा के (सर्वान्) सब (दुर्हादः) दुष्ट हादिक भावनाओं वालो को का० १९। सु०.२८ भरथवंवेद-माष्य २९१

English

Brihaspati, And Indra, Slayer of the Foe, may that bestow long life on thee, may that increase thy

अध्याय 19

श्लोक 26.3

आयु॑षे त्वा॒ वर्च॑से॒ त्वौज॑से च॒ बला॑य च ।यथा॑ हिरण्य॒तेज॑सा वि॒भासा॑सि॒ जनाँ॒ अनु॑

āyuṣe tvā varcase tvaujase ca balāya ca | yathā hiraṇyatejasā vibhāsāsi janā~ anu

हिन्दी अर्थ

(द्म) है शत्रुविदारक, (मणे) शिरोमणि सेनापति.! (मे)मुफ राजा के राजा कै राष्ट पर ( पृतनायतः) सेना द्वारा आक्रमण चाहनेवार्लो (हिषतः) भरभित्रोौ को (छिन्डि) छिन्न-मिन्न कर ।

English

splendid strength. A benedictory hymn Let the Bull guard thee with the kine, the Stallien with the fleet- foot steeds.

अध्याय 19

श्लोक 26.4

यद् वेद॒ राजा॒ वरु॑णो॒ वेद॑ दे॒वो बृह॒स्पतिः॑ ।इन्द्रो॒ यद् वृ॑त्र॒हा वेद॒ तत् त॑ आयु॒ष्यं भुव॒त् तत् ते॑ वर्च॒स्यं भुवत्

yad veda rājā varuṇo veda devo bṛhaspatiḥ | indro yad vṛtrahā veda tat ta āyuṣyaṃ bhuvat tat te varcasyaṃ bhuvat

हिन्दी अर्थ

(दभ) है शत्रुविदारक, (मणे) शिरोमणि सेनापति ! (मे) मेरे पर (पृतनायतः) तेना वारा भ्ाक्रमण चाहनेवालो को (वृर) काट डाल । काट डल । (मे) मेरे (द्विषतः) परभित्रो को (वृश्च ) काट डाल ! वृद्व = (द्म) है शत्रुविदारक, (मणे) शिरोमणि सेनापति (मे) मेरे

English

Let Vāyu keep thee safe with prayer, and Indra with his mighty power. Let Soma guard thee with the plants, Sūrya protect thee with the stars;

अध्याय 19

श्लोक 27.1

सुरक्षा।१-१५ भृग्वङ्गिराः।त्रिवृत्, चन्द्रमाश्च।अनुष्टुप्, ३, ९ त्रिष्टुप्, १० जगती, ११ आर्ची उष्णिक्, १२ आर्च्यनुष्टुप्, १३ साम्नी त्रिष्टुप् (११-१३ एकावसानाः)।गोभि॑ष्ट्वा पात्वृष॒भो वृषा॑ त्वा पातु वा॒जिभिः॑ ।वा॒युष्त्वा॒ ब्रह्म॑णा पा॒त्विन्द्र॑स्त्वा पात्विन्द्रि॒यैः

surakṣā| 1-15 bhṛgvaṅgirāḥ| trivṛt, candramāśca| anuṣṭup, 3, 9 triṣṭup, 10 jagatī, 11 ārcī uṣṇik, 12 ārcyanuṣṭup, 13 sāmnī triṣṭup (11-13 ekāvasānāḥ)| gobhiṣṭvā pātvṛṣabho vṛṣā tvā pātu vājibhiḥ | vāyuṣtvā brahmaṇā pātvindrastvā pātvindriyaiḥ

हिन्दी अर्थ

(पृतनायतः) सेना द्वारा भाक्रमण चाहनेवालों को (कृन्त) कतर डाल ॥ कतर डाल । (मे) मेरे (द्विषतः) देवी =भ्रमित्रों को (कृन्त) कतर डाल । (दर्मं) है शूविदारक, (मणे) शिरोमणि सेनापति ! (मे) मेरे (सपत्नान्) भरान्तरिक-विद्रोहियों को (पिश) टुकड़-टुकडे कर डाल । (मे)

English

With breath let Wind protect thee, and the Moon, foe-slayer, with the months. Three are the earths, they say, and three the heavens, three are the atmospheres, and four the oceans.

अध्याय 19

श्लोक 27.2

सोम॑स्त्वा पा॒त्वोष॑धीभि॒र्नक्ष॑त्रैः पातु॒ सूर्यः॑ ।मा॒द्भ्यस्त्वा॑ च॒न्द्रो वृ॑त्र॒हा वातः॑ प्रा॒णेन॑ रक्षतु

somastvā pātvoṣadhībhirnakṣatraiḥ pātu sūryaḥ | mādbhyastvā candro vṛtrahā vātaḥ prāṇena rakṣatu

हिन्दी अर्थ

पर (पृतनायतः) सेना द्वारां भाक्रमण चाहनेवालो को (मृण) भाणदण्ड है । (भे) मेरे (सर्वान् ) सब (दुहा) दुष्ट-हादिक भावनाभ्रों वालो को (मृण) (दर्भं) है शतूविंदारक, (मणे) शिरोमणि सेनापति ! तु (मे) मेरे (पृतनायतः) सेना द्वारा भ्राक्रमण चाहनेवालों को (मन्थ) मथ डाल । (मे) डाल । (मे) मेरे (द्विषतः) देषी =भमित्रो को (मन्थ) मथ डाल ।

English

With friendly thoughts the Deities, three-and thirty, and three great Powers preserved it in the Waters.

अध्याय 19

श्लोक 27.3

ति॒स्रो दिव॑स्ति॒स्रः पृ॑थि॒वीस्त्रीण्य॒न्तरि॑क्षाणि च॒तुरः॑ समु॒द्रान्।त्रि॒वृतं॒ स्तोमं॑ त्रि॒वृत॒ आप॑ आहु॒स्तास्त्वा॑ रक्षन्तु त्रि॒वृता॑ त्रि॒वृद्भिः॑

tisro divastisraḥ pṛthivīstrīṇyantarikṣāṇi caturaḥ samudrān| trivṛtaṃ stomaṃ trivṛta āpa āhustāstvā rakṣantu trivṛtā trivṛdbhiḥ

हिन्दी अर्थ

पिण्डि मे सरवौन् दु्हहैः पिण्डि मे द्विषतो मणे ॥६॥ (दर्भ) है शतुविदारक, (मणे) शिरोमणि शेनापति ! तु(मे) मेरे को (पिण्ड्ढि) पीस डाल । (मे) मेरे (द्विषतः) दवेषो =भमिघों को (पिष्टि)

English

He made heroic powers with the gold that lies upon this Moon. O ye eleven Gods who are in heaven, accept this sacrifice. O ye eleven Gods who are in air, accept this sacrifice.

अध्याय 19

श्लोक 27.4

त्रीन्नाकां॒स्त्रीन्त्स॑मु॒द्रांस्त्रीन् ब्र॒ध्नांस्त्रीन् वै॑ष्ट॒पान्।त्रीन् मा॑त॒रिश्व॑न॒स्त्रीन्त्सूर्या॑न् गो॒प्तॄन् क॑ल्पयामि

trīnnākāṃstrīntsamudrāṃstrīn bradhnāṃstrīn vaiṣṭapān| trīn mātariśvanastrīntsūryān goptṝn kalpayāmi

हिन्दी अर्थ

(दभ) है दत्रुविदारकर, (मणे) हिरोमणि सेनापति तु (मे) मेरे पर (पृतनायतः) सेना द्वारा भ्राक्रमण चाहनेवालों को (प्रोष ) भूलसा दे । (मे) मेरे (सर्वान्) सब (दहदः) दुष्ट-हादिक भावनां वालों को (भोष) स्ुलसा दे ॥ (मे) मेरे (द्विषतः) षी = अमित्रो को (भोष) भुलसा दे 1 (दर्भ) ह शत्रुविदारकं, (भणे) शिरोमणि सेनापति ! तु (मे) भेरे पर (पृतनायतः) -सेना द्वारा भ्ाक्रमण चाहनेवालों को (दह) दग्ध कर दे । (मे) मेरे (सर्वान् ) सब (दुरहादंः) दुष्ट-हादिक मावनाों वालों को (दह्)

English

O ye eleven Gods who are on earth, accept this sacrifice.

अध्याय 19

श्लोक 27.5

घृ॒तेन॑ त्वा॒ समु॑क्षा॒म्यग्न॒ आज्ये॑न व॒र्धय॑न्।अ॒ग्नेश्च॒न्द्रस्य॒ सूर्य॑स्य॒ मा प्रा॒णं मा॒यिनो॑ दभन्

ghṛtena tvā samukṣāmyagna ājyena vardhayan| agneścandrasya sūryasya mā prāṇaṃ māyino dabhan

हिन्दी अर्थ

(दर्भ) है शतरुविदारक, (मणे) क्िरोमणि सेनापति ! त्रु (मे) मेरे (पृतनायतः) सेना द्वारा भ्राक्रमण चाहते वालो को (जहि) हनन कर ।( मे) भरे (सर्वान्) सब (दु्हदिः) दुष्ट-हादिक भावनां वालो को (जहि) हनन कर + (मे) मेरे (द्विषतः) षी मितो को (जहि) हनन कर । दृणाति विदारयतीति दर्भः (उणा० ३।१५१) शत्रु के विदारण के कारणं सेनापति को दभ कहा है । दर्भाङ्कुर का अग्रभाग कण्टकमय होता है, जो किपैरका विदारण करदेताहै। दस प्रकार रूपक दुष्टिसे भी सेनापति को "दर्भं" कहा जा सकता है । जपे किं बहादुर को "शेर" तथ निबुद्धिको “गदहा” कह दिया जाता है । मन्व १ ते ४ तक मँ साम-उपायों का वर्णन

English

repeated from XIX. 16. 1, 2. A charm for the destruction of enemies On thee I bind this Amulet for lengthened life and brilliancy.

अध्याय 19

श्लोक 27.6

मा वः॑ प्रा॒णं मा वो॑ऽपा॒नं मा हरो॑ मा॒यिनो॑ दभन्।भ्राज॑न्तो वि॒श्ववे॑दसो दे॒वा दैव्ये॑न धावत

mā vaḥ prāṇaṃ mā vo'pānaṃ mā haro māyino dabhan| bhrājanto viśvavedaso devā daivyena dhāvata

हिन्दी अर्थ

इंआा है, भौर मन्त्र ५ से € तक दण्ड-ढपाय कटे गए द । २६६ भ्रथर्ववेद-भाष्य क(० १९ ॥ पुण ३० १-५ ब्रह्मा । वर्भमणिः देवता । (द्भ) है शत्रुविदारक सेनापति ! (यत्) यत, (ते जरामृत्यु) तेरी मृत्यु जरावस्था मे सम्भव है, गौर (यत्) -यतः (तै) तेरे (वमंसु) कवच

English

The rival-quelling Darbha grass that burns the spirit of a foe. Burning the spirit of the foe, vexing the heart of enemies.

अध्याय 19

श्लोक 27.7

प्रा॒नेना॒ग्निं सं सृ॑जति॒ वातः॑ प्रा॒णेन॑ संहि॑तः ।प्रा॒णेन॑ वि॒श्वतो॑मुखं॒ सुर्यं॑ दे॒वा अ॑जनयन्

prānenāgniṃ saṃ sṛjati vātaḥ prāṇena saṃhitaḥ | prāṇena viśvatomukhaṃ suryaṃ devā ajanayan

हिन्दी अर्थ

है, भतः (तेन) उस कवच आदि द्वारा (इमम्) इस प्रत्येक सनिक को (सपत्नान्) राक्रृभों का (जहि) हनन कर ॥ जरामत्युः== इस पदं के दारा सेनापति को कहा दहै कितु भरभी युवा-

English

Darbha, on every side, like heat, inflame all evil-hearted men. O Darbha, burning round like heat, consuming foes, O Amulet,. Like Indra rending Vala cleave mine adversaries’ hearts in twain.

अध्याय 19

श्लोक 27.8

आयु॑षायुः॒कृतां॑ जी॒वायु॑ष्मान् जीव॒ मा मृ॑थाः ।प्रा॒णेना॑त्म॒न्वतां जीव॒ मा मृ॒त्योरुद॑गा॒ वश॑म्

āyuṣāyuḥkṛtāṃ jīvāyuṣmān jīva mā mṛthāḥ | prāṇenātmanvatāṃ jīva mā mṛtyorudagā vaśam

हिन्दी अर्थ

तमसौ निशे त्वां देवा जरसे भतेवा अदु; ॥२॥ (वर्म) है शत्रुविदारक सेनापति ! (ते) तेरे (शतं वर्माणि) संक्डों प्रकार के कवच भादि हैँ भौर (ते) तेरे (सहम्) हजारों (वीर्याणि ) वीर- २३६. तवामाहदेवमे तवां दंभ अहणस्पतिं् । का०१९ । सुऽ ३० प्रथववेद-माष्य २६७

English

Cleave through. O Darbha, Amulet, my foes’, mine adversaries’. heart. Rise thou and batter down their heads like growth that coverethl the earth.

अध्याय 19

श्लोक 27.9

दे॒वानां॒ निहि॑तं नि॒धिं यमिन्द्रो॒ऽन्ववि॑न्दत् प॒थिभि॑र्देव॒यानैः॑ ।आपो॒ हिर॑ण्यं जुगुपुस्त्रि॒वृद्भि॒स्तास्त्वा॑ रक्षन्तु त्रि॒वृता॑ त्रि॒वृद्भिः॑

devānāṃ nihitaṃ nidhiṃ yamindro'nvavindat pathibhirdevayānaiḥ | āpo hiraṇyaṃ jugupustrivṛdbhistāstvā rakṣantu trivṛtā trivṛdbhiḥ

हिन्दी अर्थ

देववमं = विदासौ वै देवाः + तथा मातृदेव,- पितृदेव, आचा्येदेव, हिरण्यसदुश चमकीला या बहुमूल्य वीर्य-विन्दु (भरजायत ) पदा हवा, २६८ भ्रथवेवेद-माष्य का० १९1 सु०३१

English

Cleave thou my rivals, Darbha, cleave the men who fain would, fight with me. Cleave all who wish me evil, cleave the men who hate me,. Amulet!

अध्याय 19

श्लोक 27.10

त्रय॑स्त्रिंशद् दे॒वता॒स्त्रीणि॑ च वी॒र्याऽणि प्रिया॒यमा॑णा जुगुपुर॒प्स्व॑१न्तः ।अ॒स्मिंश्च॒न्द्रे अधि॒ यद्धिर॑ण्यं॒ तेना॒यं कृ॑णवद् वी॒र्या॑णि

trayastriṃśad devatāstrīṇi ca vīryā'ṇi priyāyamāṇā jugupurapsva1ntaḥ | asmiṃścandre adhi yaddhiraṇyaṃ tenāyaṃ kṛṇavad vīryāṇi

हिन्दी अर्थ

२६२ प्रथवंवेद-माष्य का० १९॥। सु०२९ भरे राष्ट् पर (पृतनायतः) सेना हारा भाक्रमण चाहनेवालों को (पिष) टुकडे-टुकड़े कर डाल । (भे) मेरे (सर्वान्) सब (दुरहादः) दुष्ट-हादिक आवना्भोवालो को (पिक) दुकड़े-टुकड कर डाल । (मे) मेरे (द्विषतः) षी अमित्रो को (विश) दुकड़-ट्कड़ं कर डाल । पिश =पिच् श्रवयवे।

English

Threefold the hymn of praise, threefold the Waters. Let these with triple song and triplets guard thee.

अध्याय 19

श्लोक 27.11

ये दे॑वा दि॒व्येका॑दश॒ स्थ ते दे॑वासो ह॒विरि॒दं जु॑षध्वम्

ye devā divyekādaśa stha te devāso haviridaṃ juṣadhvam

हिन्दी अर्थ

(दर्म) है शत्रुविदारक, (मणे) शिरोमणि सेनापति ! (मे) मेरे पर (पृतनायतः) सेना द्वारा भाक्रमण चाहनेवालों को (विध्य) वेध को (विष्य) वेध डाल । (मे) मेरे (द्विषतः) दंषी =भमितरों को (विष्य)

English

Three vaults of heaven, and three seas, three bright, three stationary ones, Three Mātarisvans, and three suns, protectors, I arrange for thee. Increasing thee with butter I, Agni! with fatness sprinkle thee.

अध्याय 19

श्लोक 27.12

ये दे॑वा अ॒न्तरि॑क्ष॒ एका॑दश॒ स्थ ते दे॑वासो ह॒विरि॒दं जु॑षध्वम्

ye devā antarikṣa ekādaśa stha te devāso haviridaṃ juṣadhvam

हिन्दी अर्थ

(दर्म) है शत्रुविदारक, (मणे) शिरोमणि सेनापति ! (मे) मेरे -कर । निक्ष =-निक्ष चुम्बने । दात्र को भरपने भनुकूलं करने फे चार उपाष का० १९ । सु २९ भरथर्वेवेद-माष्य २६३ पत्थर निन शक्ति द्वारा लोहे का भराकर्षण करता है, वैसे राजा उदासीन

English

Let not magicians harm the life of Agni or of Moon or Sun. Let not magicians mar your heat, your vital or diffusive breath.

अध्याय 19

श्लोक 27.13

ये दे॑वा पृथि॒व्यामेका॑दश॒ स्थ ते दे॑वासो ह॒विरि॒दं जु॑षध्वम्

ye devā pṛthivyāmekādaśa stha te devāso haviridaṃ juṣadhvam

हिन्दी अर्थ

से पूवं- साम दान भौर भेद उपायों का भ्रवलम्ब करना श्रेयस्कर है। (दर्भं) है शशरुविदारक, (मणे) शिरोमणि सेनापति ! -(मे) यरे भ्रनादर किया कर । (मे) मेरे (सर्वान्) सब (दुहदिः) दृष्ट-हादिक भाव-

English

Brilliant and all-possessing Gods, run ye your course with God- like power. Fire they endow with vital breath, Wind is compact, with vital breath: With vital breath the Gods produced the Sun whose face turn every way.

अध्याय 19

श्लोक 27.14

अ॒स॒प॒त्नं पु॒रस्ता॑त् प॒श्चान्नो॒ अभ॑यं कृतम्।स॒वि॒ता मा॑ दक्षिण॒त उ॑त्त॒रान्मा॒ शची॒पतिः॑

asapatnaṃ purastāt paścānno abhayaṃ kṛtam| savitā mā dakṣiṇata uttarānmā śacīpatiḥ

हिन्दी अर्थ

मित्रों का (तद्दि) तू अनादर किया कर! उपाय की प्रावह्यकता भ इन की हिसा कर । (दभ) है शध्रुविदारक, (मणे) शिरोमणि सेनापति ! (मे) भरे धर घेरा डाल । ( मे) मेरे राष्ट् पर ( पृतनायतः) सेना द्वारा भाक्रमण

English

Live with the Life-Creators’ life. Die not, live on to lengthened age. Live with the breath of men with souls. Submit not to the power of Death.

अध्याय 19

श्लोक 27.15

दि॒वो मा॑दि॒त्या र॑क्षन्तु॒ भूम्या॑ रक्षन्त्व॒ग्नयः॑ ।इ॒न्द्रा॒ग्नी र॑क्षतां मा पु॒रस्ता॑द॒श्विना॑व॒भितः॒ शर्म॑ यच्छताम्।ति॒र॒श्चीन॒घ्न्या र॑क्षतु जा॒तवे॑दा भूत॒कृतो॑ मे स॒र्वतः॑ सन्तु॒ वर्म॑

divo mādityā rakṣantu bhūmyā rakṣantvagnayaḥ | indrāgnī rakṣatāṃ mā purastādaśvināvabhitaḥ śarma yacchatām| tiraścīnaghnyā rakṣatu jātavedā bhūtakṛto me sarvataḥ santu varma

हिन्दी अर्थ

२६४ भथर्वंवेद-माघ्य का० १६॥ सु° २९ को रोकदेनाहोताहै। यह् भी एक प्रकारका साम उपायै, ग्र उपाय नहीं । घेरा डालने को “भ्रवरोध तथा उपरोध” कहते है । (दभ) है शुविदारक, (मणे) शिरोमणि सेनापति ! तू (भे) मेरे

English

The secret treasure of the Gods which Indra, by pathways travelled by the Gods, discovered, That gold the Waters with the triplets guarded. May they keep thee with threebold hymn and triplets.

अध्याय 19

श्लोक 28.1

दर्भमणिः।१-१० ब्रह्मा (सपत्नक्षयकामः)।दर्भमणिः. मन्त्रोक्ताश्च।अनुष्टुप्।इ॒मं ब॑ध्नामि ते म॒णिं दी॑र्घायु॒त्वाय॒ तेज॑से ।द॒र्भं स॑पत्न॒दम्भ॑नं द्विष॒तस्तप॑नं हृ॒दः

darbhamaṇiḥ| 1-10 brahmā (sapatnakṣayakāmaḥ)| darbhamaṇiḥ. mantroktāśca| anuṣṭup| imaṃ badhnāmi te maṇiṃ dīrghāyutvāya tejase | darbhaṃ sapatnadambhanaṃ dviṣatastapanaṃ hṛdaḥ

हिन्दी अर्थ

१-१४ सविता (पुष्टिकामः) । प्रौदुम्बरमणिः । २६६. ओदम्बरेण मणिना पूुष्टिकामाय वेधसां । उदुम्बर आदि वृक्षो के अधिपति ( भणिना ) राज्यरत्नङूपी वनाधिपति स्पते” ! दवारा सम्बोधित किया है । वनस्पतिः वनस्य पाता वा पाल. यिता, भर्थात् वनो का रक्षक तथा पालक । इते टी ३१।११ भै “प्रामणीः"

English

Wound thou, my rivals, Darbha, etc. (as in 5, substituting. ‘wound’ for cleave.)

अध्याय 19

श्लोक 28.2

द्वि॒ष॒तस्ता॒पय॑न् हृ॒दः शत्रू॑णां ता॒पय॒न् मनः॑ ।दु॒र्हार्दः॒ सर्वां॒स्त्वं द॑र्भ घ॒र्म इ॑वा॒भिन्त्संता॒पय॑न्

dviṣatastāpayan hṛdaḥ śatrūṇāṃ tāpayan manaḥ | durhārdaḥ sarvāṃstvaṃ darbha gharma ivābhintsaṃtāpayan

हिन्दी अर्थ

९३८. करीषिणीं फलवतीं खधाभिरा च नो गृहे । ढारा (नः) हमारे (गृहे) घरों मे (करीषिणीम्) गोबर देनेवाली गौ को, करनेवाले भ्रन्न को, (च इराम्) भ्रौर जल को (दघातु) धारित करे करीष = गोबर 1 लेपने जलने भौर खाद मे गोबर उपयोगी है ।

English

Pierce thou my rivals, Darbha, pierce the men who fain would fight with me. Pierce those who wish me evil, pierce the men who hate me,

अध्याय 19

श्लोक 28.3

घ॒र्म इ॑वाभि॒तप॑न् दर्भ द्विष॒तो नि॒तप॑न् मणे ।हृ॒दः स॒पत्ना॑नां भि॒न्द्धीन्द्र॑ इव विरु॒जं ब॒लम्

gharma ivābhitapan darbha dviṣato nitapan maṇe | hṛdaḥ sapatnānāṃ bhinddhīndra iva virujaṃ balam

हिन्दी अर्थ

लो विविध भ्रन्न हँ (ये) जो (€ रसाः) दूष तथा दक्षुरस भादिरहै, (भौव की (भ्रमानम्) बहुतायत को (गृह्भ) ग्रहण करता हूं । जन परन्नादि द्वारा ठसका भरण-पोषण करे । बिभ्रत कर्मंविशेषण है

English

Amulet! A charm for the destruction of enemies, continued from 28 Pierce thou my rivals, Darbha, pierce the men who fain would fight with me.

अध्याय 19

श्लोक 28.4

भि॒न्द्धि द॑र्भ स॒पत्ना॑नां॒ हृद॑यः द्विष॒तां म॑णे ।उ॒द्यन्त्वच॑मिव॒ भूम्याः॒ शिर॑ ए॒षा वि पा॑तय

bhinddhi darbha sapatnānāṃ hṛdayaḥ dviṣatāṃ maṇe | udyantvacamiva bhūmyāḥ śira eṣā vi pātaya

हिन्दी अर्थ

२७ ९ भयवंवेद-भाष्य का० १९1 सुर ३१ मु परतयेक प्रजालेनं लिंथे (पशूनां पयः) पदुप्रों का दूष, भौर ( भोषधी- पयःन्=पद्यु्रों का दूध लेना चाहिए न कि मासि । रोगनिवृत्ति तथा भ्रधिपति (भरसानि) होऊ (पृष्टपतिः) पोषक वस्तु््रो का स्वाभी ( मयि)

English

Pierce all who wish me evil, pierce the men who hate me,. Amulet!

अध्याय 19

श्लोक 28.5

भि॒न्द्धि द॑र्भ स॒पत्ना॑न्मे भि॒न्द्धि मे॑ पृतनाय॒तः ।भि॒न्द्धि मे॒ सर्वान् दु॒र्हार्दो॑ भि॒न्द्धि मे॑ द्विष॒तो म॑णे

bhinddhi darbha sapatnānme bhinddhi me pṛtanāyataḥ | bhinddhi me sarvān durhārdo bhinddhi me dviṣato maṇe

हिन्दी अर्थ

(रजय) राष्ट के प्रजाजनों के साथ; (च) भौर ( घनेन) रष्टरकी का० १९।सू० ३१ भयववेद-माष्य २७१ प्रवानमन्ती की सहायतां जते वनाधिपति को नियुक्त किया दहै, वैसे राष्ट

English

Split thou my rivals, Darbha, etc. (as in 1, with ‘split’ for ‘pierce’ throughout). Check thou, etc.

अध्याय 19

श्लोक 28.6

छि॒न्द्धि द॑र्भ स॒पत्ना॑न् मे छि॒न्द्धि मे॑ पृतनाय॒तः ।छि॒न्द्धि मे॒ सर्वा॑न् दु॒र्हार्दो॑ छि॒न्द्धि मे॑ द्विष॒तो म॑णे

chinddhi darbha sapatnān me chinddhi me pṛtanāyataḥ | chinddhi me sarvān durhārdo chinddhi me dviṣato maṇe

हिन्दी अर्थ

२४३. देवो मणि! संपलदहा धनंसा धनसातये । (देवः) दिव्यगुणी (मणिः) राज्यरत्न वनाचधिपति (सपत्नहा) वन- विरोधी शक्तियों का हनन करदा है इस प्रकार (धनसातये) धन प्रदान करनेवाले प्रजाजन के लिये. (वनसाः) वह वन्यघन प्रदान् करता है । वह गाकपुणि भ्राचायं कहते ह कि वनस्पति है अग्नि (निद०८।३।१८.) । परन्तु यास्काचायं वनस्पति का भं करते है-"बनानां पाता वा पालयिता वा" के भर्थं के भनुकूल है । मंत्रायणी संहिता ४। १३७ में “वनस्पते -““ ---गयु-

English

Crush thou, etc. Shake thou, etc.

अध्याय 19

श्लोक 28.7

वृ॒श्च द॑र्भ स॒पत्ना॑न्मे वृ॒श्च मे॑ पृतनाय॒तः ।वृ॒श्च मे॒ सर्वा॑न् दु॒र्हार्दो॑ वृ॒श्च मे॑ द्विष॒तो म॑णे

vṛśca darbha sapatnānme vṛśca me pṛtanāyataḥ | vṛśca me sarvān durhārdo vṛśca me dviṣato maṇe

हिन्दी अर्थ

२७२ अथर्ववेद-माष्य का० १६९ । सु०३१ पुष्ट्या सह वनाधिपति भावि प्रधिकारी नियुक्त होते ही, यदि निल सिनीवली = सिनमभ्नं तद्वती ; वाली = वारणकरत्र । निवारणकर्षी,

English

Bruise thou, etc. Burn thou, etc. Consume, etc.

अध्याय 19

श्लोक 28.8

कृ॒न्त द॑र्भ स॒पत्ना॑न् मे कृ॒न्त मे॑ पृतनाय॒तः ।कृ॒न्त मे॒ सर्वा॑न् दु॒र्हार्दो॑ कृ॒न्त मे॑ द्विष॒तो म॑णे

kṛnta darbha sapatnān me kṛnta me pṛtanāyataḥ | kṛnta me sarvān durhārdo kṛnta me dviṣato maṇe

हिन्दी अर्थ

भरत्यय । सिनीवाली देवपत्नी (नि ९० ११।३।३१) भतः सिनीवाली = पति- देव की पत्नी, गृहपत्नी । वनों का भिपति,जौर (वृषा) वन्य सम्पत्तियों की वर्षा करनेवाला (भसि) किया है। (त्वयि) तेरे भरधिकार मे (वाजाः) परनन भौर (सर्वा) सब (्रारात्) दूर के, (हस्व) भौर विरोधी शक्तियो को पराभूत कर ।

English

Slay thou my rivals. Darbha, slay the men who fain would fight with me. Slay all who wish me evil, slay the men who hate me, Amulet.

अध्याय 19

श्लोक 28.9

पिं॒श द॑र्भ स॒पत्ना॑न्मे पिं॒श मे॑ पृतनाय॒तः ।पिं॒श मे॒ सर्वा॑न् दु॒र्हार्दो॑ पिं॒श मे॑ द्विष॒तो म॑णे

piṃśa darbha sapatnānme piṃśa me pṛtanāyataḥ | piṃśa me sarvān durhārdo piṃśa me dviṣato maṇe

हिन्दी अर्थ

का० १९. 1 सु° ३१ भ्रथववेद-माष्य २७३ जाता है । बुभुक्षितः कि न करोति पापम्! सीच दे, मूक पर अन्नो की वर्षा कर । (तेजः भसि) तु तेजस्वी है, (मयि) मूकरमे तू (तेजः) तेज (श्रधि धारय) स्थापित कर । (रयिः भसि) तू

English

A protective charm accompanying investiture with an amulet of Darbha grass Darbha, with that good shield of thine, of hundred guards tilt death in eld, Arm thou this man, and with thy might strike thou his adver- saries down.

अध्याय 19

श्लोक 28.10

विध्य॑ दर्भ स॒पत्ना॑न् मे॒ विध्य॑ मे पृतनाय॒तः ।विध्य॑ मे॒ सर्वा॑न् दु॒र्हार्दो॑ विध्य॑ मे द्विष॒तो म॑णे

vidhya darbha sapatnān me vidhya me pṛtanāyataḥ | vidhya me sarvān durhārdo vidhya me dviṣato maṇe

हिन्दी अर्थ

के सदृश रक्षक, शौर (पदूनाम्) पशुओं का (भरषिपाः ) भधिपालक (भसत्) (पुष्टा) पुष्टि के साथ (खं सुजतु) संसं करे,सम्बन्ध करे । नेता है, इसलिये इसे ग्रामणी भी कहा है ( भयं ० १।३१।१२) । अर्थात् प्रामसमार्भो का मेता, नायक ।

English

Tear thou my rivals, Darbha, etc. How thou my rivals, Darbha, etc. Carve thou my rivals, Darbha, etc.

स्रोत: bhavykhatri/DharmicData · प्राप्त 3/6/2026

शास्त्रीय प्रामाणिकता एवं पारदर्शकताSources & Interpretation

स्रोत, संस्करण एवं व्याख्या वर्गीकरण

धर्म ग्रंथ पर मूल शास्त्र, पारंपरिक भाष्य और आधुनिक व्याख्या को पूर्णतः पृथक रखा जाता है ताकि पाठक को किसी भी व्याख्या के शास्त्र होने का भ्रम न हो।

सामग्री वर्गीकरण संकेत (Epistemic Content Labels)

6 स्तरिय प्रमाण व्यवस्था
मूल पाठOriginal text

अपौरुषेय / प्रामाणिक शास्त्र (Primary Canonical Scripture)

मूल संस्कृत, प्राकृत अथवा अवधी श्लोक/मंत्र। यह सर्वोच्च प्रमाण (प्रस्थान) है। इस पाठ में किसी भी आधुनिक व्याख्याकार का हस्तक्षेप नहीं है।

शाब्दिक अनुवादLiteral translation

पदार्थ व अन्वय (Direct Grammatical & Word-for-Word Meaning)

व्याकरणसम्मत प्रत्यक्ष शब्दार्थ (अन्वय)। बिना किसी दार्शनिक संप्रदाय के पूर्वाग्रह के, संस्कृत शब्दों का सटीक भाषांतर।

पारंपरिक भाष्यTraditional commentary

आचार्य परंपरा व टीका (Classical Lineage Commentary)

प्राचीन आचार्य परंपरा (यथा शंकराचार्य, रामानुजाचार्य, मध्वाचार्य, श्रीधर स्वामी) द्वारा विरचित शास्त्रीय भाष्य व टीकाएं।

सरल व्याख्याSimple explanation

भावार्थ व सुबोध प्रबोधन (Accessible Pedagogical Exposition)

आधुनिक जिज्ञासुओं के लिए सरल भाषा में भावार्थ। यह मूल मंत्र नहीं, बल्कि पाठ को सुगम बनाने हेतु संपादकीय व्याख्या है।

आधुनिक चिंतनModern reflection

समसामयिक विमर्श व अनुप्रयोग (Contemporary Application & Analysis)

दार्शनिक, मनोवैज्ञानिक व वैज्ञानिक समरूपताओं पर आधुनिक चिंतन। यह मूल शास्त्र का अंग नहीं है और इसे शास्त्रोक्त सिद्धांत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

शोध टिप्पणीResearch note

पांडुलिपि एवं ऐतिहासिक शोध (Critical Apparatus & Manuscript Research)

पांडुलिपि विविधताएं, पाठ-भेद (variant readings), छंद रचना, और ऐतिहासिक व तुलनात्मक भाषावैज्ञानिक शोध। यह शास्त्र का मूल संदेश बदलने हेतु नहीं, बल्कि पाठ की प्रामाणिकता परखने के लिए है।