अध्याय 19
श्लोक 29.1
दर्भमणिः।१-९ ब्रह्मा।दर्भमाणिः।अनुष्टुप्।निक्ष॑ दर्भ स॒पत्ना॑न् मे॒ निक्ष॑ मे पृतनाय॒तः ।निक्ष॑ मे॒ सर्वा॑न् दु॒र्हार्दो॑ निक्ष॑ मे द्विष॒तो म॑णे
darbhamaṇiḥ| 1-9 brahmā| darbhamāṇiḥ| anuṣṭup| nikṣa darbha sapatnān me nikṣa me pṛtanāyataḥ | nikṣa me sarvān durhārdo nikṣa me dviṣato maṇe
हिन्दी अर्थ
को प्धिक्रार सौपते समय उसका श्रभिषेक होना चाहिए । वच॑सा = भरन्नेन है । प्रामाधिपति होने से वनाधिपति “गार्हुपत्य“मी हैगृहपतियों का शासक २७४ छथर्ववेद-माष्य का० १९ । सुर ३२ पालक (कृणु) केर दे । (त्वम्) तु (भरौदुम्बरः) वनाधिपति है (सः) वह तू
English
Darbha, thou hast a hundred shields, thou hast a thousand. manly powers. All Gods have given thee to him to bear thee till extreme old age.