Atharva Veda
19
अध्याय 19 / 20

Kanda 19

काण्ड 19

453 श्लोकभाग 7/7 · श्लोक 67.1–72.1

पूर्ण अध्याय पाठ16 श्लोक

अध्याय 19

श्लोक 67.1

दीर्घायुत्वम्।१-८ ब्रह्मा।सूर्यः।प्राजापत्या गायत्री।पश्ये॑म श॒रदः॑ श॒तम्

dīrghāyutvam| 1-8 brahmā| sūryaḥ| prājāpatyā gāyatrī| paśyema śaradaḥ śatam

हिन्दी अर्थ

करते हूए (त्वा) तेरे साथ (ये) जो राजसी-तामसी शक्तियां (दिप्सन्ति). नाड़ी मे गाठ चक्र होतेह, जोकि प्रकाश के कनदररह। मूलाधार चक्रसे राजसी भ्रौर तामसी प्रलोभन योगी कों पथश्नष्ट मी करं सकते है, जिनकी का० १९1 सु° ६६ परयववेद-माष्य ३७७

English

Agni, these logs are thine: with these be, fain to burn! a flaming brand. Vouchsafe us length of life and give us hope of immortality.

अध्याय 19

श्लोक 67.2

जीवे॑म श॒रदः॑ श॒तम्

jīvema śaradaḥ śatam

हिन्दी अर्थ

चाहिए । आधिहैविक दृष्टि मेँ च्युलोकरस्थ सूयं का भी वर्णेन है। सूयं क्षितिज से उठकर युलोक की भोर भरारोहण करता है। कमी-कमी बादलों कोहरे धूल तथा सूर्यग्रहण भादि के कारण उदित हुभा-हुभरा सूर्यं ॒दुष्टि- गोचर नहीं भी होता । ये मानो सूर्योदय के दशन मे बाधक होते है । सूर्यं की उभ्र किरर्णे जब बादल भ्रादि का प्रपृहरण कर देती, तो सूयं दुलोक त्मिक है । सुपर्णाः रदिमनाम (निषं° १।५)। १ ब्रह्मा । जातवेदाः, सुर्यो वचश्च ।

English

A hymn to Agni identified with the Sun A Golden Eagle thou hast soared with light to heaven. Those who would harm thee as thou fliest skyward.

अध्याय 19

श्लोक 67.3

बुध्ये॑म श॒रदः॑ श॒तम्

budhyema śaradaḥ śatam

हिन्दी अर्थ

(भयोजालाः) सुवणेरूपी जार्लोवाने, (मायिनः) छल-कपट से युक्त, चिद्धित (ये) जो. (असुराः) भासुर विचार (चरन्ति) तेरे मन में विचरते है, (जातवेदः) है जातप्रज्ञ ! (ते) तेरे (तान्) उन आसुर विचारोंको (हरसा) निज हरण करने के सामथ्यं द्वारा (रन्धयाभि) मै परमेदवर तेरे वरा मेँ करता हूं । तु (सहस्रऋषिः) हजार धाराभ्रों वाला (वचः) वच् हो कर (सपत्नान्) भासुर विचारलरूपी शतरुभोंका (प्रमृणन्) हनन करता . भयः भ्यस् = हिरण्यनाम (निघं° १।२) । योगाम्यासी को घन- आसुर विचार र्द । योग में सफलता कै लिये पणं वैराग्य की भ्रावद्यकता होती हि । धन-सम्पत् को जाल भौर पार कहा है । घन के जालमे बन्धा, भौर घन के फंदो मे फंसा “मन योग मे उन्नति नहीं कर सकता । पर

English

Beat down, O Jātavedas, with thy fury. The strong hath feared: to heaven mount up with light, O Sūrya.

अध्याय 19

श्लोक 67.4

रोहे॑म श॒रदः॑ श॒तम्

rohema śaradaḥ śatam

हिन्दी अर्थ

हम बोध प्राप्त करते रहँ ॥३॥ (शतं शरदः) सौ वषं (रोहेम) हम समू- न्नत होते रहँ ।॥४॥ (दातं शरदः) सौ वषं (पषेम) हम पृष्ट रहें (५५ (भरुयेम) है परमेश्वर ! भप के भ्राशीर्वाद से हम बने रहें ॥॥७॥ (शतात्) सौ से (भुयसीः) भधिक (शरदः) वषं हम देखते, जीवित रहते, बोध मेँ परमेदव रीय शक्ति कायं कर रही होती है । इसीलिये कहा है कि--““ो

English

A hymn to Agni as the Sun The Asuras with iron nets, magicians, who roam about with hooks and bonds of iron, With wrath I make thy thralls, O Jātavedas. Come as a bolt foe- quelling, thousand pointed.

अध्याय 19

श्लोक 67.5

पूषे॑म श॒रदः॑ श॒तम्

pūṣema śaradaḥ śatam

हिन्दी अर्थ

ता््यमुदत्य॒वेदमथ कर्माणि कृण्महे । १।। (बिलम्) भेद को (मायया) वेदिक प्रज्ञा ढारा (विष्याभि) म खोलता का० १६ । सु० ६९ प्रथवेवेद-माष्य २७९ लिये (वेदम् उद्धृत्य) वेद का उद्धरण करया उदाहरण देकर (भथ) तदनन्तर (कर्माणि) कर्मो को (कृण्महे) हम करते ह ।

English

A prayer for long life A hundred autumns may we see.

अध्याय 19

श्लोक 67.6

भवे॑म श॒रदः॑ श॒तम्

bhavema śaradaḥ śatam

हिन्दी अर्थ

ज्ञान वेद हारा होता है । निज उन्नति भौर मोक्ष के लिये जो भी कमं किये जाय, वे वेदोक्त होने चाहिए, उनके लिये वेदिक प्रमाण होने चाहिए । ग्राप (संजीवाः) सामाजिक जीवनो वाले (स्थ) है । (सं जीव्यासम्) मै मी सामाजिक जीवनवाला होकर जीऊ । (सर्वम् भ्रायुः) सम्पूणं आयु ४५०. जीवला स्थं जीव्यासे सपैमायुजीन्यासम् ॥४॥

English

A hundred autumns may we live. A hundred autumns may we know. A hundred autumns may we grow.

अध्याय 19

श्लोक 67.7

भूये॑म श॒रदः॑ श॒तम्

bhūyema śaradaḥ śatam

हिन्दी अर्थ

३८० भयववेद-माष्य का० १९। सु० ७१ लीऊ । सूक्त का देवता “आपः” कहा है । “भाषः” वारा जलसदृश शान्त, तथा जीवनोपदेशों द्वारा जीवन प्रदान करनेवाले “आप्तजनः'' भरभिपरेत है । ४५१. इन्दर जीव् सये जब देवा. जीवां जीव्यासम् । भ्राप (जीव) पूणं भायु तक जीवित रहँ; देवाः) है माता-पिता तथा भाचा्यं देवो ! (जीवाः, भवत) प्राप पूणं भरायु तक जीवित्त रहै; (भम्) (मया) मैने (वरदा) दृष्टफल देनेवाली (वेदमाता) वैदरूपी माता

English

A hundred autumns may we thrive. A hundred autumns may we be.

अध्याय 19

श्लोक 67.8

भूय॑सीः श॒रदः॑ श॒तात्

bhūyasīḥ śaradaḥ śatāt

हिन्दी अर्थ

गुरुजनो 1 इस का मुभे भौर प्रवचन कीजिये । (द्विजानाम् पावमानी) का० १९ । सुर ७१ प्रथववेद-माष्य ३८१ गाता ही उपयुक्त प्रतीत होता है । सूक्त ६८ मेँ "वेदमथ" द्वारा वेदका

English

A hundred autumns may we bide. A hundred, yea, and even more. A preliminary sacrificial formula

अध्याय 19

श्लोक 68.1

वेदोक्तं कर्म।१ ब्रह्मा।कर्म।अनुष्टुप्।अव्य॑सश्च॒ व्यच॑सश्च॒ बिलं॒ वि ष्या॑मि मा॒यया॑ ।ताभ्या॑मु॒द्धृत्य॒ वेद॒मथ॒ कर्मा॑णि कृण्महे

vedoktaṃ karma| 1 brahmā| karma| anuṣṭup| avyasaśca vyacasaśca bilaṃ vi ṣyāmi māyayā | tābhyāmuddhṛtya vedamatha karmāṇi kṛṇmahe

हिन्दी अर्थ

ही अमिप्रेत है । वेदवाणी मातृसदुक्च उपकारिणी है । इस वेदमाता काही होता है, जिस कौ भर कि निरदंच “स्तुता मया वरदा वेदमाता"द्वारा किया यथा--“सवेलोकं म इषाण” (यजु ०३ १।२२) में सर्वलोकम् = "सब के द्शंन लोक तक ॒पहुचना चाहता हुमा, काण्ड २० वेके उपदेश या प्रवचन की

English

Both of broad and narrow I with magic power unclose the mouth. With these when we have raised the bunch of grass we pay the holy rites.

अध्याय 19

श्लोक 69.1

आपः।१-४ ब्रह्मा।आपः।१ आसुर्यनुष्टुप्, २ साम्न्यनुष्टुप्, ३ आसुरी गायत्री, ४ साम्न्युष्णिक् ( १-४ एकावसाना)।जी॒वा स्थ॑ जी॒व्यासं॒ सर्व॒मायु॑र्जीव्यासम्

āpaḥ| 1-4 brahmā| āpaḥ| 1 āsuryanuṣṭup, 2 sāmnyanuṣṭup, 3 āsurī gāyatrī, 4 sāmnyuṣṇik ( 1-4 ekāvasānā)| jīvā stha jīvyāsaṃ sarvamāyurjīvyāsam

हिन्दी अर्थ

का वह् मुख्यरूप से प्रवचन श्रभी तक नहीं सुन पाया, जिसका कि वणन जीवन में (मा भ्रवत) मेरी रक्षा कीजिये। वेद का वर्णन है, जिसमें किं अपराविद्या का प्रधानरूप से, रौर पराविद्या

English

A prayer or charm for long life Ye are alive. I fain would live. I fain would live my complete term of life. Ye live dependent. I fain would live dependent. I fain would live my complete term of life.

अध्याय 19

श्लोक 69.2

उ॒प॒जी॒वा स्थोप॑ जीव्यासं॒ सर्व॒मायु॑र्जीव्यासम्

upajīvā sthopa jīvyāsaṃ sarvamāyurjīvyāsam

हिन्दी अर्थ

रादि ६ कमै, भ्रौर “ज्रह्मवचंस" एक कमं । इसलिये १ से १६ काण्डों के सिद्ध हो जाने पर, इनका साधक से १९ काण्ड तक केवेद को परमे का० १९। सु० ७२ भथर्वेवेद-माष्य ३८३ भ्रथवंवेद के उन्नीसवं काण्ड का

English

Ye remain alive. I fain would remain alive. I fain would live my complete term of life. Ye are life-givers. I fain would live. I fain would live my com- plete term of life.

अध्याय 19

श्लोक 69.3

सं॒जी॒वा स्थ॒ सं जी॑व्यासं॒ सर्व॒मायु॑र्जीव्यासम्

saṃjīvā stha saṃ jīvyāsaṃ sarvamāyurjīvyāsam

हिन्दी अर्थ

उदभराम वेदम्" ( सुक्त ७२।१) भर्थात् पेटी से वेद को हमने उपर उठाया, याः वेद को हम नीचे रखते इन वर्णन के द्वारा वेद के लिखित हो सकने की भी सूचना, वी गईैहै। कोरा का भ्रथं पेटी होता ही है। भथवं°७।५२।५) मे ““संलिखितम्" शब्द परित है । इसका अथं है--लिखा गया या जि्ा हृश्रा ।-“लिख्" का अथं होता है--“भरक्षरों का विन्यास" । इसके द्वारा भी वेदने लिखने का निदेश दिया है । इस भी नदीं देखता, -भ्रौर एक वाणी को सुनता हृभ्रा भी नहीं सुनता” । वाणी को

English

A charm for long life 266 Live, Indra. Live Sūrya. Live, ye Gods. I fain would live. Fain would I live my complete term

अध्याय 19

श्लोक 69.4

जी॒व॒ला स्थ॑ जी॒व्यासं॒ सर्व॒मायु॑र्जीव्यासम्

jīvalā stha jīvyāsaṃ sarvamāyurjīvyāsam

हिन्दी अर्थ

भौर सुनना कने का! वाणी तमी देखी जा सक्त्ती है,.जब किं वाणी लिखित प्रकाशित ओर प्रसारित ग्रन्थ १. ऋग्वेदादिभाष्यभूमिका-सं-युन्मीः ५. ऋग्वेद की ऋक्संख्या- युधिष्ठिर मीमांसक ११. अथर्ववेदीया बृहत्सर्वानुक्रमणिका- भूमिका तथा

English

of life. A hymn, accompanying libations, for wealth and prosperity

अध्याय 19

श्लोक 70.1

पूर्णायुः।१ ब्रह्मा।इन्द्रसूर्यादयः।त्रिपदा गायत्री।इन्द्र॒ जीव॒ सूर्य॒ जीव॒ देवा॒ जीवा॑ जी॒व्यास॑म॒हम्।सर्व॒मायु॑र्जीव्यासम्

pūrṇāyuḥ| 1 brahmā| indrasūryādayaḥ| tripadā gāyatrī| indra jīva sūrya jīva devā jīvā jīvyāsamaham| sarvamāyurjīvyāsam

हिन्दी अर्थ

१३. वैदिक-निषण्टु-संग्रह- डो धर्मवीर १६. वेद-श्रुति-आम्नाय-संज्ञामीमांसा- युधिष्ठिर मीमांसक २९. वेदार्थभूमिका- (हिन्दी-संस्कृत)- " “ “

English

Let my libations, giving boons, adoring, further the Twice-born’s song that honours Soma. Go ye to Brahma’s world having enriched me with life and breath, with children and with cattle, with fame and wealth, and with a Brāhman’s lustre.

अध्याय 19

श्लोक 71.1

वेदमाता।१ ब्रह्मा।गायत्री।त्र्यवसाना पञ्चपदाऽतिजगती।स्तु॒ता मया॑ वर॒दा वे॑दमा॒ता प्र चो॑दयन्तां पावमा॒नी द्वि॒जाना॑म्।आयुः॑ प्रा॒णं प्र॒जां प॒शुं की॒र्तिं द्रवि॑णं ब्रह्मवर्च॒सम्।मह्यं॑ द॒त्त्वा व्र॑जत ब्रह्मलो॒कम्

vedamātā| 1 brahmā| gāyatrī| tryavasānā pañcapadā'tijagatī| stutā mayā varadā vedamātā pra codayantāṃ pāvamānī dvijānām| āyuḥ prāṇaṃ prajāṃ paśuṃ kīrtiṃ draviṇaṃ brahmavarcasam| mahyaṃ dattvā vrajata brahmalokam

हिन्दी अर्थ

३. ऋण्वेदानुक्रमणी-वेडूकटमाधवकृत- व्याख्याकार- पं विजयपाल १४. वैदिक-सिद्धान्त-मीमांसा- युधिष्ठिर मीमांसक- वेदविषयक सत्रह निबन्धो का संग्रह प्रथमभाग ७५.०० द्वितीयभाग १००.०० गुजरांवाला मेँ तथा बाद में स्नातक (सन् १९१४) तक गुरुकुल कांगड़ी मे। पद पर नियुक्त तथा सन् १९४२ में वह से सेवामुक्त हुए।

English

A sacrificial formula Within the chest whence we before extracted the bunch of grass, this do we now deposit.

अध्याय 19

श्लोक 72.1

परमात्मा।१ भृग्वङ्गिराः ब्रह्मा।परमात्मा देवाश्च।त्रिष्टुप्।यस्मा॒त् कोशा॑दु॒दभ॑राम॒ वेदं॒ तस्मि॑न्न॒न्तरव॑ दध्म एनम्।कृ॒तमि॒ष्टं ब्रह्म॑णो वी॒र्येण॑ तेन॑ मा देवा॒स्तप॑सावते॒ह

paramātmā| 1 bhṛgvaṅgirāḥ brahmā| paramātmā devāśca| triṣṭup| yasmāt kośādudabharāma vedaṃ tasminnantarava dadhma enam| kṛtamiṣṭaṃ brahmaṇo vīryeṇa tena mā devāstapasāvateha

हिन्दी अर्थ

अनुसन्धान- सन् १९२३-२४ मेँ परोपकारिणी सभा अजमेर में। सन् १९५६-५७ आर्य सार्वदेशिक वाटिका मेँ साथ ही " वैदिक अनुसन्धान ' त्रैमासिक ५ रहने के कारण आपको ४ स्वर्णपदक ओर एक रजतपदक प्राप्त हुआ। निधन- १०२ वर्ष की आयु मेँ ११ मार्च सन् १९९१।

English

Wrought is the sacrifice by power of Brahma. Through this assist me here, ye God, with Fervour. 267

स्रोत: bhavykhatri/DharmicData · प्राप्त 3/6/2026

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शास्त्रीय प्रामाणिकता एवं पारदर्शकताSources & Interpretation

स्रोत, संस्करण एवं व्याख्या वर्गीकरण

धर्म ग्रंथ पर मूल शास्त्र, पारंपरिक भाष्य और आधुनिक व्याख्या को पूर्णतः पृथक रखा जाता है ताकि पाठक को किसी भी व्याख्या के शास्त्र होने का भ्रम न हो।

सामग्री वर्गीकरण संकेत (Epistemic Content Labels)

6 स्तरिय प्रमाण व्यवस्था
मूल पाठOriginal text

अपौरुषेय / प्रामाणिक शास्त्र (Primary Canonical Scripture)

मूल संस्कृत, प्राकृत अथवा अवधी श्लोक/मंत्र। यह सर्वोच्च प्रमाण (प्रस्थान) है। इस पाठ में किसी भी आधुनिक व्याख्याकार का हस्तक्षेप नहीं है।

शाब्दिक अनुवादLiteral translation

पदार्थ व अन्वय (Direct Grammatical & Word-for-Word Meaning)

व्याकरणसम्मत प्रत्यक्ष शब्दार्थ (अन्वय)। बिना किसी दार्शनिक संप्रदाय के पूर्वाग्रह के, संस्कृत शब्दों का सटीक भाषांतर।

पारंपरिक भाष्यTraditional commentary

आचार्य परंपरा व टीका (Classical Lineage Commentary)

प्राचीन आचार्य परंपरा (यथा शंकराचार्य, रामानुजाचार्य, मध्वाचार्य, श्रीधर स्वामी) द्वारा विरचित शास्त्रीय भाष्य व टीकाएं।

सरल व्याख्याSimple explanation

भावार्थ व सुबोध प्रबोधन (Accessible Pedagogical Exposition)

आधुनिक जिज्ञासुओं के लिए सरल भाषा में भावार्थ। यह मूल मंत्र नहीं, बल्कि पाठ को सुगम बनाने हेतु संपादकीय व्याख्या है।

आधुनिक चिंतनModern reflection

समसामयिक विमर्श व अनुप्रयोग (Contemporary Application & Analysis)

दार्शनिक, मनोवैज्ञानिक व वैज्ञानिक समरूपताओं पर आधुनिक चिंतन। यह मूल शास्त्र का अंग नहीं है और इसे शास्त्रोक्त सिद्धांत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

शोध टिप्पणीResearch note

पांडुलिपि एवं ऐतिहासिक शोध (Critical Apparatus & Manuscript Research)

पांडुलिपि विविधताएं, पाठ-भेद (variant readings), छंद रचना, और ऐतिहासिक व तुलनात्मक भाषावैज्ञानिक शोध। यह शास्त्र का मूल संदेश बदलने हेतु नहीं, बल्कि पाठ की प्रामाणिकता परखने के लिए है।