Atharva Veda
19
अध्याय 19 / 20

Kanda 19

काण्ड 19

453 श्लोकभाग 5/7 · श्लोक 39.1–48.6

पूर्ण अध्याय पाठ69 श्लोक

अध्याय 19

श्लोक 39.1

कुष्ठनाशनम्।१-१० भृग्वङ्गिराः।कुष्ठः।अनुष्टुप्, २, ३ त्र्यवसाना पथ्यापङ्क्तिः, ४ षट्-पदा जगती, ५ सप्तपदा शक्वरी, ६-८ अष्टिः (५-८ चतुरवसाना)।ऐतु॑ दे॒वस्त्राय॑माणः॒ कुष्ठो॑ हि॒मव॑त॒स्परि॑ ।त॒क्मानं॒ सर्वं॑ नाशय॒ सर्वा॑श्च यातुधा॒न्यः

kuṣṭhanāśanam| 1-10 bhṛgvaṅgirāḥ| kuṣṭhaḥ| anuṣṭup, 2, 3 tryavasānā pathyāpaṅktiḥ, 4 ṣaṭ-padā jagatī, 5 saptapadā śakvarī, 6-8 aṣṭiḥ (5-8 caturavasānā)| aitu devastrāyamāṇaḥ kuṣṭho himavataspari | takmānaṃ sarvaṃ nāśaya sarvāśca yātudhānyaḥ

हिन्दी अर्थ

का०१९. । सुर ४४ भरयववेद-माष्य १११ प्रकाश का स्थान है” (योग० १।३६) पर वाचस्पति टीका ॥. भ्रमीवाः= (निद० ६।३।१२) 1 मन्त्र ऋ० १०।१६२।२ मे अमीवा क्रिमि को योनि का क्रिमि कहा हैभरौर इसके नाशके दो साधन कहे है,पगिनि (प्रग्निहोत्र ?)

English

Disturb ye not our intellect, O Waters, nor the power of prayer_ Glide on your way, strength-giving, invocated: may I be vigor- ous and wise. Mar not our consecrating rite, our intellect, or fervent zeal.

अध्याय 19

श्लोक 39.2

त्रीणि॑ ते कुष्ठ॒ नामा॑नि नद्यमा॒रो न॒द्यारि॑षः ।नद्या॒यं पुरु॑षो रिषत्।यस्मै॑ परि॒ब्रवी॑मि त्वा सा॒यंप्रा॑त॒रथो॒ दिवा॑

trīṇi te kuṣṭha nāmāni nadyamāro nadyāriṣaḥ | nadyāyaṃ puruṣo riṣat| yasmai paribravīmi tvā sāyaṃprātaratho divā

हिन्दी अर्थ

अन्त्र मे प्रार्थी पापों को छृडाने की सहायता परमेदवर से चाहता ( चर्ण ) है पापनिवारक वरणीय परमेषवर (यद) जो ३१२ प्रथववेद-भाष्य का० १६।सू० ४४

English

May through the darkness carry us. 257 A benediction on a newly elected king

अध्याय 19

श्लोक 39.3

जी॒व॒ला नाम॑ ते मा॒ता जी॑व॒न्तो नाम॑ ते पि॒ता।नद्या॒यं पुरु॑षो रिषत्।यस्मै॑ परि॒ब्रवी॑मि त्वा सा॒यंप्रा॑त॒रथो॒ दिवा॑

jīvalā nāma te mātā jīvanto nāma te pitā| nadyāyaṃ puruṣo riṣat| yasmai paribravīmi tvā sāyaṃprātaratho divā

हिन्दी अर्थ

सते ह) यथा-“मुङे दूध-पूत की सौगन्द है, यदिर्गैने. भमुक काम किया हो” । मन्त।८ के भरनुसार सोगन्द खाना अनृतकथन है, क्योंकि सौगन्दं सत्य नहीं हीतीं । एेसे अनृतकथनो से बचे रहने के लिये शक्तिमान् पर- मेदवर से सहायता की प्रार्थना की गई है 1 दुष्कमोँ का निवारण करनेवाला व्यक्ति- ये दोनो (त्वा) भाप के (भनु) अनुकूल (प्रेयतुः) प्रयाण करते है, भ्रपना आचार-व्पवहार रखते हैँ । (तौ) भ्रौर भागे चलने मे असमर्थं हो जाते ह, इसलिये पुनर्जन्म पाकर वे (भोगाय) भवकिष्ट कमो के फलमोग के लिये (पुनः) फिर (भ्रोहृतुः) दारीरों का वहून करते है । पुनः शरीर धारण कर मोग भोगने पडते हैँ । इस सूक्त मे भ्राञ्जन पदं

English

Desiring bliss, at first, light-finding Rishis began religious rite and holy fervour. Thence energy was born, and might, and kingship: so to this man let gathered Gods incline

अध्याय 19

श्लोक 39.4

उ॒त्त॒मो अ॒स्योष॑धीनामन॒ड्वान् जग॑तामिव व्या॒घ्रः श्वप॑दामिव ।नद्या॒यं पुरु॑षो रिषत्।यस्मै॑ परि॒ब्रवी॑मि त्वा सा॒यंप्रा॑त॒रथो॒ दिवा॑

uttamo asyoṣadhīnāmanaḍvān jagatāmiva vyāghraḥ śvapadāmiva | nadyāyaṃ puruṣo riṣat| yasmai paribravīmi tvā sāyaṃprātaratho divā

हिन्दी अर्थ

गौणखूप े। भ्रग्रेजी मे प्रौषधरूप भञ्जन को (10४ कहते है । रोगो का० १६ । सु° ४५ प्रथववेद-भाष्य ३१३ (ऋणात्) ऋण लेने के परनात् ऋणी (इव) जेसे (ऋणम्) छण को, ऋणदाता के (गृहम्) चर (सं नयन्) पहु चाता है, वसे (भराञ्जन) हे कान्तिकारक राजन् (कृत्याकृतः) हिल सेना तेय्यार करनेवाले की

English

them. In praise of Brahma, Prayer, or Devotion Brahma is Hotar, sacrifice: with Brahma are the stakes set up.

अध्याय 19

श्लोक 39.5

त्रिः शाम्बु॑भ्यो॒ अङ्गि॑रेभ्य॒स्त्रिरा॑दि॒त्येभ्य॒स्परि॑ ।त्रिर्जा॒तो वि॒श्वदे॑वेभ्यः ।स कुष्ठो॑ वि॒श्वभे॑षजः सा॒कं सोमे॑न तिष्ठति ।त॒क्मानं॒ सर्वं॑ नाशय॒ सर्वा॑श्च यातुधा॒न्यः

triḥ śāmbubhyo aṅgirebhyastrirādityebhyaspari | trirjāto viśvadevebhyaḥ | sa kuṣṭho viśvabheṣajaḥ sākaṃ somena tiṣṭhati | takmānaṃ sarvaṃ nāśaya sarvāśca yātudhānyaḥ

हिन्दी अर्थ

की (पृष्टीः भपि) हडडी-पक्चलियों को भी (शुण ) तोड-फोड़ दे । पद गृप्तचरों का सुचक है + राजाभ्रों को “्वारचक्षुः" कहा गया है। यथा उस सेनाको उसीके राष्ट् में वापिस चले जाने के लिये बाधितं करना ३१४ प्रथवंवेद-माष्य का० १६ ।सु०४५

English

From Brahma was the Adhvaryu born, from Brahma hidden offering. Brahma is fatness-dropping scoops: with Brahma was the altar reared.

अध्याय 19

श्लोक 39.6

अ॒श्व॒त्थो दे॑व॒सद॑नस्तृ॒तीय॑स्यामि॒तो दि॒वि।तत्रा॒मृत॑स्य॒ चक्ष॑णं॒ ततः॒ कुष्ठो॑ अजायत ।स कुष्ठो॑ वि॒श्वभे॑षजः सा॒कं सोमे॑न तिष्ठति ।त॒क्मानं॒ सर्वं॑ नाशय॒ सर्वा॑श्च यातुधा॒न्यः

aśvattho devasadanastṛtīyasyāmito divi| tatrāmṛtasya cakṣaṇaṃ tataḥ kuṣṭho ajāyata | sa kuṣṭho viśvabheṣajaḥ sākaṃ somena tiṣṭhati | takmānaṃ sarvaṃ nāśaya sarvāśca yātudhānyaḥ

हिन्दी अर्थ

कुटिल हृदयवाला कि (प्रियः) भब तुम्हारा श्रिय बनना चाहता है, वह् (भरनासगः) बदनाम होकर विचरे । ३३२. शपाम ओजसो बाडृधानमपरर्जातमधिं जातवेदसः चतुबीरं पवंदीयं यदाञ्जनं दिश॑ः प्रदिशः करदिच्छिवसत ॥६॥ चार प्रकार की सेना के वीरों वाला (यद्) जो तेरा संनिक-बल है, वह

English

Brahma is worship, lengthened rite, the Rishis who pay sacrifice, the victim’s Immolators. Hail! To him who frees from woe mine hymn I offer, to the Good

अध्याय 19

श्लोक 39.7

हि॒र॒ण्ययी॒ नौर॑चर॒द्धिर॑ण्यबन्धना दि॒वि।तत्रा॒मृत॑स्य॒ चक्ष॑णं॒ ततः॒ कुष्ठो॑ अजायत ।स कुष्ठो॑ वि॒श्वभे॑षजः सा॒कं सोमे॑न तिष्ठति ।त॒क्मानं॒ सर्वं॑ नाशय॒ सर्वा॑श्च यातुधा॒न्यः

hiraṇyayī nauracaraddhiraṇyabandhanā divi| tatrāmṛtasya cakṣaṇaṃ tataḥ kuṣṭho ajāyata | sa kuṣṭho viśvabheṣajaḥ sākaṃ somena tiṣṭhati | takmānaṃ sarvaṃ nāśaya sarvāśca yātudhānyaḥ

हिन्दी अर्थ

शिवाः) भ्रवह्य कल्याणकारिणी (करत्) कर दे । सेनाम्रो के वीर नरोवाला संनिक बल । चतुरंग =-हृस्तीःभरव, रथ, पदाति । बल के भ्रधिष्ठाता + (ते) भ्रापके लिये, इस सैनिक बलः दारा (सर्वा (आयं) है शेष्ठ (सविता इव) सूयं के सदृश (घ्रुवः) घ्व होकर, स्थिर

English

Guardian, as I seek his favour. Accept this offering of mine, O Indra. Fulfilled be all the sacri- ficer’s wishes!

अध्याय 19

श्लोक 39.8

यत्र॒ नाव॑प्र॒भ्रंश॑नं॒ यत्र॑ हि॒मव॑तः॒ शिरः॑ ।तत्रा॒मृत॑स्य॒ चक्ष॑णं॒ ततः॒ कुष्ठो॑ अजायत ।स कुष्ठो॑ वि॒श्वभे॑षजः सा॒कं सोमे॑न तिष्ठति ।त॒क्मानं॒ सर्वं॑ नाशय॒ सर्वा॑श्च यातुधा॒न्यः

yatra nāvaprabhraṃśanaṃ yatra himavataḥ śiraḥ | tatrāmṛtasya cakṣaṇaṃ tataḥ kuṣṭho ajāyata | sa kuṣṭho viśvabheṣajaḥ sākaṃ somena tiṣṭhati | takmānaṃ sarvaṃ nāśaya sarvāśca yātudhānyaḥ

हिन्दी अर्थ

का० १९। सुऽ ४५ भयर्ववेद-भाष्य ३१५ (विद्यः) प्रजाए (ते) भाप के लिये (बलिम्) राज-कर (भमि हरन्तु) सबध्रोरसे भेट करती रै ३१४. आहवेकं मणिमेकं कृुप्व स्नाषठेकेनापिवेकमेषाम् ।

English

With prayer I call on him who frees from trouble, Prince of Gods, Splendid, chief of sacrifices, I call the Waters’ Child and both the Asvins, Vigour is mine, and strength bestowed by Indra.

अध्याय 19

श्लोक 39.9

यं त्वा॒ वेद॒ पूर्व॒ इक्ष्वा॑को॒ यं वा॑ त्वा कुष्ठ का॒म्यः ।यं वा॒ वसो॑ यमात्स्य॒स्तेनासि॑ वि॒श्वभे॑षजः

yaṃ tvā veda pūrva ikṣvāko yaṃ vā tvā kuṣṭha kāmyaḥ | yaṃ vā vaso yamātsyastenāsi viśvabheṣajaḥ

हिन्दी अर्थ

कर उस मँ व्याप्त हो जानेवाला (कृणुष्व ) नियत कीजिये । (एकम्) भौर एक को (मणिम्) सवं्षिरोमणि रूप में नियत कोजिये । (एकेन) एक के दवारा (स्नाहि) सेनिक शिविरों की शुद्धि भौर सफाई कराये । (एकम्) तथा एक को (भ्रा पिब) खानपान अर्थात् रसद का भधिष्ठाता नियत कीजिये । इस प्रकार (चतुभ्यंः नेक तेभ्यः) चार दिशाभों से भ्रानेवाले ३ ३५. अधिर्माभरिनावतु प्राणा्यपानायाथषे बस ओज॑से तेज॑से लिये, (वर्चसे) दीप्ति के लिये, (भोजसे) पराक्रम कै लिये, (तेजसे) प्रताप के लिये, (स्वस्तये) कल्याण कै लिये, तथा (पुभूतये) उत्तम विभुतिके लिये (स्वाहा ) भरपने प्राप को समपित कर् । मा इस पद द्वारा राजा निज व्यक्तित्व का निदा नहीं कर रहा है, ¦ जपितु प्रजाजन भें भात्म-मावना दारा प्रजाका निदंदकररहादहै भौर

English

In praise of Brahma, Prayer, or Devotion Whither men versed in Brahma go, with fervour and the cleans- ing rite,

अध्याय 19

श्लोक 39.10

शी॒र्ष॒लो॒कं तृ॒तीय॑कं सद॒न्दिर्यश्च॑ हाय॒नः ।त॒क्मानं॑ विश्वधावीर्याध॒राञ्चं॒ परा॑ सुव

śīrṣalokaṃ tṛtīyakaṃ sadandiryaśca hāyanaḥ | takmānaṃ viśvadhāvīryādharāñcaṃ parā suva

हिन्दी अर्थ

भे जब यह भेषज “वि भसुपत्"“ विशेषतया फल जाता हैतब यह रोगो का विनाश करता ह । सब रोगों का उद्गमस्थान शरीर का मध्य स्थान ही है । पेट हृदय भौर फफ के स्वस्थ रहते रोग भाक्रमण नीं करते । (राजन् ) है ब्रह्माण्ड के राजा, (वरुणं ) पापनिवारक वरणीय पर- दरस प्रकार के बहुत से प्रसत्य (बाह) कथन करता है । (सहस्रवीयं) हे पापसे भाप (नः) हमें (परि मुञ्च) सर्वथा छड़ादइये 1

English

Gracious to us for lengthened life, propitious let the Mothers be. Vouchsafe to us, ye Asvins twain, such strength as, with atten- dant light,

अध्याय 19

श्लोक 40.1

मेधा।१-४ ब्रह्माः बृहस्पतिः, विश्वे देवाश्च।१ पराऽनुष्टुप् त्रिष्टुप्, २ पुरः ककुम्मत्युपरिष्टाद्बृहती, ३ बृहतीगर्भा, ४ त्रिपदाऽर्षी गायत्री।यन्मे॑ छि॒द्रं मन॑सो॒ यच्च॑ वा॒चः सर॑स्वती मन्यु॒मन्तं॑ ज॒गाम॑ ।विश्वै॒स्तद् दे॒वैः स॒ह सं॑विदा॒नः सं द॑धातु॒ बृह॒स्पतिः॑

medhā| 1-4 brahmāḥ bṛhaspatiḥ, viśve devāśca| 1 parā'nuṣṭup triṣṭup, 2 puraḥ kakummatyupariṣṭādbṛhatī, 3 bṛhatīgarbhā, 4 tripadā'rṣī gāyatrī| yanme chidraṃ manaso yacca vācaḥ sarasvatī manyumantaṃ jagāma | viśvaistad devaiḥ saha saṃvidānaḥ saṃ dadhātu bṛhaspatiḥ

हिन्दी अर्थ

को सभितत करने का निर्दे कर रहा । जैसे कि कहा है-“"'विक्षो ३१६ भवर्वधैद-माष्य का० १९॥। पु ४५ ३३६. दनद मेन्द्ियेणावतु श्राणायापानायाधुषे बरख ओंसे तेजसे

English

Thither let Agni lead me, let Agni give me intelligence, All hail to Agni! Whither etc. Thither let Vāyu lead me, let Vāyu vouchsafe me vital breath.

अध्याय 19

श्लोक 40.2

मा न॒ आपो॑ मे॒धां मा ब्रह्म॒ प्र म॑थिष्टन ।सु॒ष्य॒दा यू॒यं स्य॑न्दध्व॒मुप॑हूतो॒ऽहं सु॒मेधा॑ वर्च॒स्वी

mā na āpo medhāṃ mā brahma pra mathiṣṭana | suṣyadā yūyaṃ syandadhvamupahūto'haṃ sumedhā varcasvī

हिन्दी अर्थ

३३७. सोमो मा सौम्यैनावतु प्राणार्यापानायारयुे चस ओलंसे तेज॑से खस्तये सुभूतये खाहां ॥८॥ ३३८. मर्गो मा भगेनावतु प्राणायापानायारभुषे बैस ओसे तेजसे दारा (मा) मेरी ( भ्रवतु) रक्षा करे । ताकि भ (प्राणाय भ्रपानाय ") ते मन्त्र मेँ “समग्र पेश्वयं” भरथं लिया गया है ।

English

All hail to Vāyu! Whither, etc.

अध्याय 19

श्लोक 40.3

मा नो॑ मे॒धां मा नो॑ दी॒क्षां मा नो॑ हिंसिष्टं॒ यत् तपः॑ ।शि॒वा नः॒ शं स॒न्त्वायु॑षे शि॒वा भ॑वन्तु मा॒तरः॑

mā no medhāṃ mā no dīkṣāṃ mā no hiṃsiṣṭaṃ yat tapaḥ | śivā naḥ śaṃ santvāyuṣe śivā bhavantu mātaraḥ

हिन्दी अर्थ

३६९. मरतां मा गणेरबन्तु भ्राणार्यापानायायुे बसु ओज॑से तेजसे अथवा--मक्तः=शतरुभरो को मारने मेँ कशल सेनिक, ""मारयीति भरत् (उणा० १।९४) । मरुतः भर्थाति मरुत॒नामी सैनिक प्माक्रमण करने मे महावेगी होते हँ -"“मर्तः महव् प्रवन्ति वा” (निर० ११।२।१३ )। मरुत स निक है-इसके लिये देखो (भ्रथवं ० १६ । १३।६, १०) । मन्त्र में राजा मुष्ठानाथं ऋत्विक्-गणों को चाहता है । यज्ञो हारा रोगों का विनाश, वायु

English

Thither let Sūrya lead me, let Sūrya vouchsafe me power of sight. All hail to Sürya Whither, etc. Thither let Chandra lead me, let Chandra vouchsafe me intellect.

अध्याय 19

श्लोक 40.4

या नः॒ पीप॑रद॒श्विना॒ ज्योति॑ष्मती॒ तम॑स्ति॒रः ।ताम॒स्मे रा॑सता॒मिष॑म्

yā naḥ pīparadaśvinā jyotiṣmatī tamastiraḥ | tāmasme rāsatāmiṣam

हिन्दी अर्थ

राजन् ¡ ( ते) तैरी (आयुषे) दीर्घं भ्रायुकै लिये, (वचसे) तेरी दीप्ति बनाए रखने के लिये, (च) ओर (भोजसे) पराक्रम के लिये, (च) भौर (बलाय) सेनिक बल के लिये, (तत् तम्) उस अपराजित महाराज को ३१८ प्रथर्ववेद-माष्य क।० १९ । घू° ४६ जित महाराज (त्वा) तेरी (अमि रक्षतु) सब प्रकार से रक्षा करे। जौर बांघने वाले का । प्रजापति माण्डलिक राजा प्रतीत होता है । प्रजा- पति के राज्य मदो शासन संस्थाए होती है-समा गौर समिति । सभा

English

All hail to Chandra! Whither, etc.

अध्याय 19

श्लोक 41.1

राष्ट्रं बलमोजश्च।१ ब्रह्मा।तपः।त्रिष्टुप्।भ॒द्रमि॒च्छन्त॒ ऋष॑यः स्व॒र्विद॒स्तपो॑ दी॒क्षामु॑प॒निषे॑दु॒रग्रे॑ ।ततो॑ रा॒ष्ट्रं बल॒मोज॑श्च जा॒तं तद॑स्मै दे॒वा उ॑प॒संन॑मन्तु

rāṣṭraṃ balamojaśca| 1 brahmā| tapaḥ| triṣṭup| bhadramicchanta ṛṣayaḥ svarvidastapo dīkṣāmupaniṣeduragre | tato rāṣṭraṃ balamojaśca jātaṃ tadasmai devā upasaṃnamantu

हिन्दी अर्थ

व्यक्तियों की सभा । यथा--“घभां च मा समितिष्चावतां प्रजापतेदु हिषे (भथवं०७।१३।१)। समिति राज्यसभा है । यथा-“राजानः समिताविव" (यजुः १२।८०)।भ्रस्तृतम् =अपरालित; युद्ध में जिसको हिसा या जिसका परा- जोयते कदाचन” ॥ (भरयर्व० १।२०।४) में “जस्तृत” को “महान् शासः" रथात् महाशासक कहा है । तथा यह कहा है कि इसकासखा नतोमारा जाता है, न कभी पराजित होता है 1 यह अमित्रो का पराभव करता है । इसं लिये एेसे महाराजा कै साथ राजनंतिक सन्वि मे, माण्डलिक राजाजों

English

Thither let Soma lead me, let Soma vouchsafe me vital sap. All hail to Soma! Whither, etc. Thither let Indra lead me, let Indra bestow upon me power. All hail to Indra!

अध्याय 19

श्लोक 42.1

ब्रह्मयज्ञः।१-४ ब्रह्मा।ब्रह्म।१ अनुष्टुप्, २ त्र्यवसाना ककुम्मती पथ्यापङ्क्तिः, ३ त्रिष्टुप्, ४ जगती।ब्रह्म॒ होता॒ ब्रह्म॑ य॒ज्ञा ब्रह्म॑णा॒ स्वर॑वो मि॒ताः ।अ॒ध्व॒र्युर्ब्रह्म॑णो जा॒तो ब्रह्म॑णो॒ऽन्तर्हि॑तं ह॒विः

brahmayajñaḥ| 1-4 brahmā| brahma| 1 anuṣṭup, 2 tryavasānā kakummatī pathyāpaṅktiḥ, 3 triṣṭup, 4 jagatī| brahma hotā brahma yajñā brahmaṇā svaravo mitāḥ | adhvaryurbrahmaṇo jāto brahmaṇo'ntarhitaṃ haviḥ

हिन्दी अर्थ

राज्यों मे पारस्परिक राजनंतिक सन्धियां होती है । राजनेतिक सन्धि करानेवाला तीसरा व्यक्ति है, जो कि माण्डविक या महाशासक का राजा को, (च) प्रौर (त्वाम्) बाप महालासकं को (पणयः) कुव्यवहारी तथा (यातुधानाः) यातना देनेवले शत्रु (मा दमन्) दबा न सकं । है माण्ड- संनिक (न तस्तरे) भ्राप का वघ नहीं कर सकते । (च) रौर (निघ्नन्तः) हनन करनेवाने संकड़ों सैनिक (ग) आपका वघ नहीं कर सकते । (तस्मिन्) ३४३. हन्द्रख त्वा वरभैणा परं धापयामो यो देवानामविराजो बभू!

English

Whither, etc. Thither, let Waters lead me, let the Waters give me deathless life. All hail to Waters!

अध्याय 19

श्लोक 42.2

ब्रह्म॒ स्रुचो॑ घृ॒तव॑ती॒र्ब्रह्म॑णा॒ वेदि॒रुद्धि॑ता ।ब्रह्म॑ य॒ज्ञस्य॒ तत्त्वं॑ च ऋ॒त्विजो॒ ये ह॑वि॒ष्कृतः॑ ।श॒मि॒ताय॒ स्वाहा॑

brahma sruco ghṛtavatīrbrahmaṇā vediruddhitā | brahma yajñasya tattvaṃ ca ṛtvijo ye haviṣkṛtaḥ | śamitāya svāhā

हिन्दी अर्थ

(यः) जो (देवानाम्) विजिगीषु संनिकों का (मधिराजः) भ्रधिराट् (त्वा) है राजन् ! श्राप को (परि धापयामः)हम ढकते है । (पुनः) तदन- न्तर (सवं )सब (देवाः) विजिगीषु सेनिक (त्वा) आप के साथ (प्रणयन्तु) (भ्रसिमिन् मणौ ) इस शिरोमणि ( भस्तृतते ) भ्रपराजित महाशासक

English

Whither, etc. Thither let Brahma lead me, let Brahma give Brahma unto me. All hail to Brahma!

अध्याय 19

श्लोक 42.3

अं॒हो॒मुचे॒ प्र भ॑रे मनी॒षामा सु॒त्राव्णे॑ सुम॒तिमा॑वृणा॒नः ।इ॒दमि॑न्द्र॒ प्रति॑ ह॒व्यं गृ॑भाय स॒त्याः स॑न्तु॒ यज॑मानस्य॒ कामाः॑

aṃhomuce pra bhare manīṣāmā sutrāvṇe sumatimāvṛṇānaḥ | idamindra prati havyaṃ gṛbhāya satyāḥ santu yajamānasya kāmāḥ

हिन्दी अर्थ

(यः) जो शत्रु (पृतन्यात्) सेनाभों हारा प्राप का मुकाबिला करना चाहे, , (चृत्) धृत से (उल्लुप्तः) लुप्त न होनेवाली भरषितु चमकनेवाली प्रकार की जोवनीय सामभ्नर्यो वाला, (शतयोनिः) संकड़ों प्रकार के गृहं जनों के लिये शान्तिप्रद, (च) भ्रौर (मयोभूः) सुखप्रद, (च) भौर (ऊजं-

English

A curative and protective charm Thou art the lengthening of life, thy name is Universal Cure:

अध्याय 19

श्लोक 42.4

अं॒हो॒मुचं॑ वृष॒भं य॒ज्ञिया॑नां वि॒राज॑न्तं प्रथ॒मम॑ध्व॒राणा॑म्।अ॒पां नपा॑तम॒श्विना॑ हुवे॒ धिय॑ इन्द्रि॒येण॑ त इन्द्रि॒यं द॑त्त॒मोजः॑

aṃhomucaṃ vṛṣabhaṃ yajñiyānāṃ virājantaṃ prathamamadhvarāṇām| apāṃ napātamaśvinā huve dhiya indriyeṇa ta indriyaṃ dattamojaḥ

हिन्दी अर्थ

सब पोर से (रक्षतु) सुरक्षित करे । का०१९ । सुऽ ४७ भरथवेवेद-माष्य ३२९१ त्रुविनाशक, भ्रौर (सजातानाम्) समानपदवालों या सजातियों को (वरी) वश मेँ करनेवाले (श्रसद्) हो जायें, (तथा) उस प्रकार का(त्वा) भाप

English

Then, Ointment! send felicity; Waters, send happiness and peace. The yellow hue, the feverish heat, the shooting pain that rends II the limbs, All the consumptive malady let the Ointment drive from out thy frame.

अध्याय 19

श्लोक 43.1

ब्रह्मा।१-८ ब्रह्मा।ब्रह्म, बहुदैवत्यम्।त्र्यवसाना शङ्कुमती पथ्यापङ्क्तिः।यत्र॑ ब्रह्म॒विदो॒ यान्ति॑ दी॒क्षया॒ तप॑सा स॒ह।अ॒ग्निर्मा॒ तत्र॑ नयत्व॒ग्निर्मे॒धा द॑धातु मे ।अ॒ग्नये॒ स्वाहा॑

brahmā| 1-8 brahmā| brahma, bahudaivatyam| tryavasānā śaṅkumatī pathyāpaṅktiḥ| yatra brahmavido yānti dīkṣayā tapasā saha| agnirmā tatra nayatvagnirmedhā dadhātu me | agnaye svāhā

हिन्दी अर्थ

(रात्रि) है रात्रि! (पितुः) पितुभ्रुत या पालकं पजन्य के (घामरभिः) से भर दिया है । (ब्रहती ) बहुत फेलकर तू (दिवः) द्युलोक के (सदांसि) स्थानों भी ( वि तिष्ठसे ) विविध खण्डो मं स्थित होतीदहै, जबकि (त्वेषं तमः) चमकता भन्धकार (भ्रा वतंते) रत्रिमंभाजातादहै। वेदिक वणन परमेदवर कवि के काव्यख्प है । इसीलिये परमेश्वर को कवि (यजु° ४०।८), भ्रौर वेद को काव्य (भ्रथवं० १०।८।३२) कहा वर्णन कवि सम्मत शेली का है । पितुः अथर्ववेद मे पजन्य को पिता कहा है । यथा--“माता भुमिः पुत्रो अहं परथिव्याः। पर्जन्यः पितासडनः

English

Let the Salve born upon the earth, benignant, giving life to man.

अध्याय 19

श्लोक 43.2

यत्र॑ ब्रह्म॒विदो॒ यान्ति॑ दी॒क्षया॒ तप॑सा स॒ह।वा॒युर्मा॒ तत्र॑ नयतु वा॒युः प्रा॒णान् द॑धातु मे।वा॒यवे॒ स्वाहा॑

yatra brahmavido yānti dīkṣayā tapasā saha| vāyurmā tatra nayatu vāyuḥ prāṇān dadhātu me| vāyave svāhā

हिन्दी अर्थ

रालों मे नोल-नभ के खण्ड दृष्टिगोचर होते दँ ।. इन्दं “त्वेषंतमः" कटा ३२२ धवर्वेवेद-माष्य का० १९॥। सुण ४७ (यस्याः) जिस रात्री का (पारम्) पार (ददुशे न) दिखाई नहीं

English

Make the swift rider on the car sinless, exempt from sudden death. Preserve our breath, O Vital Breath, have mercy on our life, O Life.

अध्याय 19

श्लोक 43.3

यत्र॑ ब्रह्म॒विदो॒ यान्ति॑ दी॒क्षया॒ तप॑सा स॒ह।सूर्यो॑ मा॒ तत्र॑ नयतु॒ चक्षुः॒ सूर्यो॑ दधातु मे ।सूर्या॑य॒ स्वाहा॑

yatra brahmavido yānti dīkṣayā tapasā saha| sūryo mā tatra nayatu cakṣuḥ sūryo dadhātu me | sūryāya svāhā

हिन्दी अर्थ

मे (विदम् ) वह सब (नि विषते) विश्वामपाजाता दहै (यद्) जो कि (एजति) वेष्टा वाला है । (उवि) है भ्राच्छादन करनेवाली ! (तमस्वति रात्रि) है तमोमयी रात्रि! (अरिष्टासः) अहिसित हृए हम (तै) तेरे तेरे पार को (अक्ीमहि) हम प्राप्त करे । ३५१. हौ चै ते वश्यतिदच॑ ते राश्येकादशचावमाः । (रेवति) है सम्पतु-शालिनि रात्रि ! (षष्टिः चषट् च) भौर जो

English

From snares of Nirriti do thou, O Nirriti, deliver us. Thou art the babe of Sindhu, thou art lightnings’ flower, wind, breath, and Sun: thou art the

अध्याय 19

श्लोक 43.4

यत्र॑ ब्रह्म॒विदो॒ यान्ति॑ दी॒क्षया॒ तप॑सा स॒ह।च॒न्द्रो मा॒ तत्र॑ नयतु॒ मन॑श्च॒न्द्रो द॑धातु मे ।च॒न्द्राय॒ स्वाहा॑

yatra brahmavido yānti dīkṣayā tapasā saha| candro mā tatra nayatu manaścandro dadhātu me | candrāya svāhā

हिन्दी अर्थ

द्वौचतेः विशतिः च) भौर जो तेरे २२ द्रष्टारहै, (राति). ह रात्नि (ते) जो तेरे (एकादश अवमाः) कम पे कम ११ द्रष्टा हैः का० १९ । सु° ४७ प्रथवेवेद-माष्य ३२३ हमारी (पाहि) तु रक्षा कर, (दिवः दुहितः) है धुलोक की पृत्नि! (नु) भवदय (पाहि) रक्षाकर।

English

eye and milk of heaven. Gods’ Ointment from the Three Peaked Hill, preserve thou me on every side. No plants of earth surpass thee, none from mountain or from cultured ground.

अध्याय 19

श्लोक 43.5

यत्र॑ ब्रह्म॒विदो॒ यान्ति॑ दी॒क्षया॒ तप॑सा स॒ह।सोमो॑ मा॒ तत्र॑ नयतु॒ पयः॒ सोमो॑ दधातु मे ।सोमा॑य॒ स्वाहा॑

yatra brahmavido yānti dīkṣayā tapasā saha| somo mā tatra nayatu payaḥ somo dadhātu me | somāya svāhā

हिन्दी अर्थ

च्छायाम्) । रात्री मँ शयन से प्राणियों में पुनः बलसंचार हो जाता है इस- लिये रात्री “वाजिनी” है । वाजः बलनाम (निधं २1९) । रात्री के भरथवा- एकादश, भरवमाः-- रात्री मेँ सोने पर प्राणमयकोश कै १७ म्रादि, धपान के कमं हँ मलमूत्रत्याग आदि, उदरस्थ समान के कमं है परि

English

Now hath it gently crept within, fiend-slaying, chasing malady. And driving all diseases hence, and evil omens, banished them.

अध्याय 19

श्लोक 43.6

यत्र॑ ब्रह्म॒विदो॑ यान्ति॑ दी॒क्षया॒ तप॑सा स॒ह।इन्द्रो॑ मा॒ तत्र॑ नयतु॒ बल॒मिन्द्रो॑ दधातु मे ।इन्द्रा॑य॒ स्वाहा॑

yatra brahmavido yānti dīkṣayā tapasā saha| indro mā tatra nayatu balamindro dadhātu me | indrāya svāhā

हिन्दी अर्थ

है, व्यान सर्वंशषरीर व्यापी है भौर रुधिर का संचारकरतादहै, नाग उकार भौर छींक भरादिका कारण है, कूं द्वारा निमीलन. भौर संकोचन आदि भ्रथवंवेद ङे अनुसार मनुष्य पे ९ कोश है । यथा--“तस्येसे नवकोशा प्रथमतः विद्यमान रहती है । उपरिलिखित नवकोशो मे जीवात्मसत्ता तो

English

Full many a falsehood, O thou King Varuna, man hath uttered here: Do thou who hast a thousand powers preserve us from that misery. If we have cried, O Waters! Cows! if we have cried, O

अध्याय 19

श्लोक 43.7

यत्र॑ ब्रह्म॒विदो॒ यान्ति॑ दी॒क्षया॒ तप॑सा स॒ह।आपो॑ मा॒ तत्र॑ नयत्व॒मृतं॒ मोप॑ तिष्ठतु ।अ॒द्भ्यः स्वाहा॑

yatra brahmavido yānti dīkṣayā tapasā saha| āpo mā tatra nayatvamṛtaṃ mopa tiṣṭhatu | adbhyaḥ svāhā

हिन्दी अर्थ

शक्तया प्राणमय कोश मेँ भी लीन रहती है । प्राणमयकोश की निज ११ कोश मे ६६ शक्तियाँ, पांचवें कोम ५५ राक्तियां, चौथे कोश मे ४४ शक्तियां, तीसरे कोश भं ३३ चक्तियां, दूसरे कोशम २२ शक्तिर्या, भौर शन्तिम कोद अर्थात् भन्नमयकोदा शरीर मेँ “एकादका भरवमाः" कम से कम १ शक्तियां निहित ह । इसप्रकार ९ कोशो की प्रपनी-भरपनी जागरित है 1 यहां भन्नमय कोश को प्रथम कोषय मानकर, ।इससे पुर्वं के कारणरूप कोशो समेत, संख्या € जाननी चाहिए । लिखितरूप भरे बार्येमाषा में दिया जाता है । यथा--"“उदहालक आरुणि ने

English

Varuna! For this endowed with thousand powers! deliver us from misery.

अध्याय 19

श्लोक 43.8

यत्र॑ ब्रह्म॒विदो॒ यान्ति॑ दी॒क्षया॒ तप॑सा स॒ह।ब्र॒ह्मा मा॒ तत्र॑ नयतु ब्र॒ह्मा ब्रह्म॑ दधातु मे ।ब्र॒ह्मणे॒ स्वाहा॑

yatra brahmavido yānti dīkṣayā tapasā saha| brahmā mā tatra nayatu brahmā brahma dadhātu me | brahmaṇe svāhā

हिन्दी अर्थ

यह् ले भाया + इसे तोड़ ? । भगवन् ! तोड़ दिया । इसमे तु क्या देखता , है ? । भगवन् ! भ्रणुरूप ये दाने देखता हूं । इन दानो मेँ से एक दाना तोड़ ? । भगवन् ! तोड़ दिया । इसमे तु क्या देखता है ? । भगवन् दरु न्धी देखता देखता ॥१॥ उसे उदहालक भरारखुणि बोला है प्रिय जिस सूक्ष्म मय बुद्धि कोच मे लीन रहते, भौर इसी मुल. को से करदः भराविभूत मानौ अद्य गरबा सेनो माबीनां बकं रशत ॥६॥

English

Mitra and Varuna, O Salve have closely followed after thee May they, when they have followed thee afar, restore thee for our use. A curative and protective charm

अध्याय 19

श्लोक 44.1

भैषज्यम्।१-१० भृगुः।आञ्जनम्, ८-९ वरुणः।अनुष्टुप्, ४ चतुष्पदा शङ्कुमत्युष्णिक्, ५ निचृद्विषमा त्रिपदा गायत्री।आयु॑षोऽसि प्र॒तर॑णं॒ विप्रं॑ भेष॒जमु॑च्यसे ।तदा॑ञ्जन॒ त्वं शं॑ताते॒ शमापो॒ अभ॑यं कृतम्

bhaiṣajyam| 1-10 bhṛguḥ| āñjanam, 8-9 varuṇaḥ| anuṣṭup, 4 catuṣpadā śaṅkumatyuṣṇik, 5 nicṛdviṣamā tripadā gāyatrī| āyuṣo'si prataraṇaṃ vipraṃ bheṣajamucyase | tadāñjana tvaṃ śaṃtāte śamāpo abhayaṃ kṛtam

हिन्दी अर्थ

कोा० १९१ सुऽ ४७ भरथरववेद-भाष्य ३२५ (स्तेनः) चोर (नः गवाम्) हमारी गौर्भो का (ईशत मा) प्रधीदवरनहो, तथा (वृकः) भेडिया या लुटेरा (भ्रवीनाम्) मेड का (ईरात मा) अषी- ३९५३. माश्वानां भद्रे तस्करो मा मणां यातुधान्यः । प्रमेभिंः प्थिमि सेनो धाबतु तस्क॑रः । करः । (स्तेनः) चोर तथा (तस्करः) लुटेरा हम से डर कर (परमेभिः) दुर-दुर के (पथिभिः) मागो से (धावतु) भाग जाय । (दत्वती) दान्तोवाली

English

As debt from debt repay and send sorcery to the sorcerer’s house. Split, Salve! the cruel villain’s ribs whose evil eye bewitches us.

अध्याय 19

श्लोक 44.2

यो ह॑रि॒मा जा॒यान्यो॑ऽङ्गभे॒दो वि॒सल्प॑कः ।सर्वं॑ ते॒ यक्ष्म॒मङ्गे॑भ्यो ब॒हिर्नि॑र्ह॒न्त्वाञ्ज॑नम्

yo harimā jāyānyo'ṅgabhedo visalpakaḥ | sarvaṃ te yakṣmamaṅgebhyo bahirnirhantvāñjanam

हिन्दी अर्थ

(वृकस्य) भेदिये के (हन् ) दो जबर को (जम्भयाः) ठीले कर दे, तोड़. दे । (तिन) उससे (तम्) उस को (बहि) मार डान्न, जैसे फि किसी को (द्रपदे) कठ भर्थात् पैरों की बेडीं डाल कर भार दिया जाता है । ३२९ भयर्ववेद-माष्य का० १९॥ सू° ४८ तृष्टधूमम् = जहरीने सपक एकार भी धातक होते है। एसे साप के विष के प्रवेश दारा व्यक्तिकी जिह्वा भौर मुख खुदकदहोजते है जिख से प्यास लगती है । प्यास लगने पर पानी देना घातक हो जाता है 1 धूमम् (रात्रि) हि रात्रि! (त्वयि) तु में (वसामसि) हम निवास करते

English

Strong as four heroes, mountain born, this Ointment make for thee quarters and mind-points auspicious!

अध्याय 19

श्लोक 44.3

आञ्ज॑नं पृथि॒व्यां जा॒तं भ॒द्रं पु॑रुष॒जीव॑नम्।कृ॒णोत्वप्र॑मायुकं॒ रथ॑जूति॒मना॑गसम्

āñjanaṃ pṛthivyāṃ jātaṃ bhadraṃ puruṣajīvanam| kṛṇotvapramāyukaṃ rathajūtimanāgasam

हिन्दी अर्थ

हमारी (गोभ्यः) गौं को (भदवेभ्यः) भष्वों को (पृरषेम्यः) पृषो को ३।६) । गृह (निषं° ३।४) । वैदिक वर्णन प्रायः कवितामय होते है वतं- मान सूक्त का वर्णन भी कवितामय है । रात्रीं म चोर लुटेरे तथा हि्तप्राणी जाताहै। यथा रात्री कै समय भ्राक्रमणकारियों को भगा देना चाहिए, प्रौर हिलतप्राणियो के वघ में संकोच न करना चाहिए, भौर दस निमित्त रात्री मँ सावधान रहना चाहिए ।

English

On thee is laid the Chaturvira Ointment: let all the regions give thee peace and safety. Secure like precious Savitar thou standest: to thee let all these regions bring their tribute. Make one thy salve, thine amulet another, drink one, and with another bathe thy body.

अध्याय 19

श्लोक 44.4

प्राण॑ प्रा॒णं त्रा॑य॒स्वासो॒ अस॑वे मृड ।निरृ॑ते॒ निरृ॑त्या नः॒ पाशे॑भ्यो मुञ्च

prāṇa prāṇaṃ trāyasvāso asave mṛḍa | nirṛte nirṛtyā naḥ pāśebhyo muñca

हिन्दी अर्थ

सबश्रोरसे बन्धे घरके भीतर है, (तानि) उन वस्तुओं को (ते) तेरे परति (परि दद्मसि) हम सुपुदं करते है भर्थात् घर कै बाहर भौर मीतर का० १९ । सुऽ ४८ भथवंवेद-माष्य ३२७ इषा नो अदे परिं ददातवहुस्त॒भ्थं विभावरि ॥२॥ (मातः) माता के सदृश सुख प्रदायिनी (रात्रि) है राति (उषसे)

English

So let the Chaturvira keep us guarded from the four bonds of Nirriti and Grāhi.

अध्याय 19

श्लोक 44.5

सिन्धो॒र्गर्भो॑ऽसि वि॒द्युतां॒ पुष्प॑म्।वातः॑ प्रा॒णः सूर्य॒श्चक्षु॑र्दि॒वस्पयः॑

sindhorgarbho'si vidyutāṃ puṣpam| vātaḥ prāṇaḥ sūryaścakṣurdivaspayaḥ

हिन्दी अर्थ

उषा (नः) हमें (श्रह्ण) दिन कै प्रति (परि ददातु) सोपि । (विभावरि) है चमकीली रात्रि । (महः) दिन (तुभ्यम्) तेरे प्रति पूनः हमे संपि। विभावरि चान्द, तारागणों के कारण चमकीली रत्री (इदम्) यह (यत् कि च) जो कु (सरीसुपम्) सरके वाला खपं

English

May Agni protect me with fire for inspiration and expiration, for strength, for energy, for vigour, for weal and prosperity. All Hail!

अध्याय 19

श्लोक 44.6

देवा॑ञ्जन॒ त्रैक॑कुदं॒ परि॑ मा पाहि वि॒श्वतः॑ ।न त्वा॑ तर॒न्त्योष॑धयो॒ बाह्याः॑ पर्व॒तीया॑ उ॒त

devāñjana traikakudaṃ pari mā pāhi viśvataḥ | na tvā tarantyoṣadhayo bāhyāḥ parvatīyā uta

हिन्दी अर्थ

(सा) वह तु (पदचात्) पदिचम ते, (सा) वहतु (परः) सामने दक्षिण से (पाहि) हमे सुरक्षित कर । (विभावरि) है चमकीली. रात्रि (नः) हम (गोपाय) सुरक्षित कर, (इह) यहां पर् (ते) तेरे (स्तोतांरः) हम परमेश्वर के स्तवन कीर्तन करनेवाले हं । विभावरि = वि+भा रात्चि में चान्वःभ्रौर तारागण द्वारा चमकोली । ..

English

May Indra protect me with his Indra-power for inspiration, etc. May Soma protect me with Soma-power, etc.

अध्याय 19

श्लोक 44.7

वी॒३दं मध्य॒मवा॑सृपद् रक्षो॒हामी॑व॒चात॑नः ।अमी॑वाः॒ सर्वा॑श्चा॒तय॑न् ना॒शय॑दभि॒भा इ॒तः

vī3daṃ madhyamavāsṛpad rakṣohāmīvacātanaḥ | amīvāḥ sarvāścātayan nāśayadabhibhā itaḥ

हिन्दी अर्थ

३२८ प्रथर्ववेद-माष्य . का° १९ । पुग ४८. योग का प्रभ्यास करते ह, (च) भौर (ये) नो (सूतेषु) प्राणियों की (जाग्रति) जागरूक भर्थात् सावधान रहते है, ओर (तै) वे (नः) हमारे

English

May Bhaga with good fortune protect me, etc. May the Maruts protect me with their troops for inspiration and expiration, for strength, for energy, for vigour, for weal and prosperity. All Hail!

अध्याय 19

श्लोक 44.8

ब॒ह्वि॒३दं रा॑जन् वरु॒णानृ॑तमाह॒ पूरु॑षः ।तस्मा॑त् सहस्रवीर्य मु॒ञ्च नः॒ पर्यंह॑सः

bahvi3daṃ rājan varuṇānṛtamāha pūruṣaḥ | tasmāt sahasravīrya muñca naḥ paryaṃhasaḥ

हिन्दी अर्थ

वर्णेन है । योगिजन् घब प्राणियों की सदा उन्नति में लगे रहते है ।वे पशुभरों तकं की रक्षा करते भौर हिसा से खदा परे रहते है, तथा सब लोगों ३६१. वेद बे रात्रि ते नाम॑ षृताची नाम् बा जसि । तांत्वां भरद्वाजो वेदसा नो वित्तेऽधिं जाग्रति ॥६॥ (रात्रि) है रात्रि! (वै) निश्चये (ते) तेरा (नाम) नाम (वेव) मै जानता हूं (वं) निश्चय से (घृताची) ज्ञान प्रकाश्च देनेवाली, (नाम)

English

A charm accompanying investiture with an amulet that ensures safety and victory For manly strength Prajāpati bound thee on first, invincible.

अध्याय 19

श्लोक 44.9

यदापो॑ अ॒घ्न्या इति॒ वरु॒णेति॒ यदू॑चि॒म।तस्मा॑त् सहस्रवीर्य मु॒ञ्च नः॒ पर्यंह॑सः

yadāpo aghnyā iti varuṇeti yadūcima| tasmāt sahasravīrya muñca naḥ paryaṃhasaḥ

हिन्दी अर्थ

इस नामसेतु सिद्ध (भसि) है। (भरद्वाजः) ज्ञानभरा मेरा मन (तां त्वाम्) उस तुक को एेसा (वेद) जानता है, (सा) वह तु (नः) हरमे (वित्ते देने ® लिये (जाग्रति) जागरूक रहते है । घृताची =घृत (प्रकाश, घु

English

This for long life on thee I bind for splendour, strength, and energy. Invincible, let it guard thee well. Erect, invincible, be this man’s watchful keeper: let not the

अध्याय 19

श्लोक 44.10

मि॒त्रश्च॑ त्वा॒ वरु॑णश्चानु॒प्रेय॑तुराञ्जन ।तौ त्वा॑नु॒गत्य॑ दू॒रं भो॒गाय॒ पुन॒रोह॑तुः

mitraśca tvā varuṇaścānupreyaturāñjana | tau tvānugatya dūraṃ bhogāya punarohatuḥ

हिन्दी अर्थ

(भरघायुः) तथा हत्या चाहनेवाला (परेण भ्रषतु) दुर के मागं द्वारा चला तस्करः तत्करः उस पापकमं को करनेवाला (नि० ३।३।१५)। थवा उपक्षयकारी, तसु (उपक्षये) +-करः. । वत्वती रज्जुः ( रूप- (भध) तथां (रात्रि) है राति! तु (तृष्टधूमम्) पिपासाजनक

English

Whatever evil dream we have, what’er befall our kine or home, Be this that is salubrity, the evil-hearted’s foe applied. Increasing from the Waters’ strength and vigour, sprung into life from Agni Jātavedas,

अध्याय 19

श्लोक 45.1

आञ्जनम्।१-१० भृगुः।आञ्जनम्, मन्त्रोक्ताः।१-२ अनुष्टुप्, ३-४ त्रिष्टुप्, ६-१० एकावसाना महाबृहती ( ६ विराट् ७-१० निचृत्)।ऋ॒णादृ॒णमि॑व सं॒नय॑न् कृ॒त्यां कृ॑त्या॒कृतो॑ गृ॒हम्।चक्षु॑र्मन्त्रस्य दु॒र्हार्दः॑ पृ॒ष्टीरपि॑ शृणाञ्जन

āñjanam| 1-10 bhṛguḥ| āñjanam, mantroktāḥ| 1-2 anuṣṭup, 3-4 triṣṭup, 6-10 ekāvasānā mahābṛhatī ( 6 virāṭ 7-10 nicṛt)| ṛṇādṛṇamiva saṃnayan kṛtyāṃ kṛtyākṛto gṛham| cakṣurmantrasya durhārdaḥ pṛṣṭīrapi śṛṇāñjana

हिन्दी अर्थ

से भात्म रक्षा करनी चाहिए । रात्रि मेँ परमेदवर का स्तवन तथा योगा- नुष्ठान लाभप्रद है । योमानुष्ठान करनेवालों को प्राणिवगं की तेवा तथा प्रश्ुगं की रक्षा करनी चाहिए पद्यु हिसा नहीं करनी चाहिए तथा निब का० १६९ ॥ सुण ४९ धथर्ववेद-भाष्य ३२९ (दमूनाः) गृहकायों प दत्तचित्त, (युवतिः) युवावस्थावाली, (देवस्य सवितुः मगस्य) दिष्य गुणों वाले, सन्तानोत्पादन मेँ समथं तथा सेवनीय या माग्यश्चाली पति की (योषा) पत्नी के सदृश (रा्री) रात्री (इषिरा) शोभाभरी रात्री ने (महित्वा) निज महत्ता के कारण (चावापृथिवी) चू-

English

Panis or the sorcerers harm thee. 259

अध्याय 19

श्लोक 45.2

यद॒स्मासु॑ दु॒ष्वप्न्यं॒ यद् गोषु॒ यच्च॑ नो गृ॒हे।अना॑मग॒स्तं च॑ दु॒र्हार्दः॑ प्रि॒यः प्रति॑ मुञ्चताम्

yadasmāsu duṣvapnyaṃ yad goṣu yacca no gṛhe| anāmagastaṃ ca durhārdaḥ priyaḥ prati muñcatām

हिन्दी अर्थ

= भर्व (सूयं ) यथा- “एकः भ्रष्वो वहति सप्तनामा” (निर० ४।५।२७) मे “एकोऽश्वो वहति सप्तनासादित्यः (निद०४।५।२७) + (क्षय ) +-मा मता से पहुंच जातो है । संभृतश्रीः चान्द भौर नक्षत्रों तथा तारागणों की शोमावाली रात्रि। ३३० धयर्ववेद-भाष्य का० १९ ॥ सुऽ ४९ महाकाश मे (भरण्हन्त ) उदित हृए है । (भद्रा) सुखदायिनी (सा रात्री) वह रात्री (भ्रनु उदाती) मानो हमारां निरन्तर कल्याण चाहती हई,

English

Whom even a hundred combatants, striking, have failed to over- come. Invincible, let it guard thee well.

अध्याय 19

श्लोक 45.3

अ॒पामू॒र्ज ओज॑सो वावृधा॒नम॒ग्नेर्जा॒तमधि॑ जा॒तवे॑दसः ।चतु॑र्वीरं पर्व॒तीयं॒ यदाञ्ज॑नं॒ दिशः॑ प्र॒दिशः॑ कर॒दिच्छि॒वास्ते॑

apāmūrja ojaso vāvṛdhānamagnerjātamadhi jātavedasaḥ | caturvīraṃ parvatīyaṃ yadāñjanaṃ diśaḥ pradiśaḥ karadicchivāste

हिन्दी अर्थ

की सहायता के लिये, निज धारक शौर पोषक-सामभ्री के साथ, म्रा उप- भस्मांसतरायख नयणि जाता अथो यानि गव्यानि पुष्ट्या ॥द॥ (वर्य) है घेष्ठ रात्रि ! (बन्दे) ् तेरा अभिवादन करता हूं । (सुभगे)

English

Around thy limbs I place the mail of Indra who hath become the Gods’ imperial Sovran. Again let all the Deities bring thee hither. Invincible let it guard thee well. One and a hundred manly powers, a thousand lives hath this

अध्याय 19

श्लोक 45.4

चतु॑र्वीरं बध्यत॒ आञ्ज॑नं ते॒ सर्वा॒ दिशो॒ अभ॑यास्ते भवन्तु ।ध्रु॒वस्ति॑ष्ठासि सवि॒तेव॒ चार्य॑ इ॒मा विशो॑ अ॒भि ह॑रन्तु ते ब॒लिम्

caturvīraṃ badhyata āñjanaṃ te sarvā diśo abhayāste bhavantu | dhruvastiṣṭhāsi saviteva cārya imā viśo abhi harantu te balim

हिन्दी अर्थ

भन्त्रद्रारा वधू का भी निर्वेदा किथादहै। वर कहतादहैकिटिवरण की पृष्टिद्रारा हम कुलवासियो की रक्षा करती रह । का० १९ सु० ४९ प्रथर्ववेद-भाष्य ३३१ हाथी के, बाध भौर चीते के (वर्चः) तेज को (भ्राददे) हर लेतीहै।

English

Amulet, unconquered ever. Go forth a tiger, strike down all thy foemen: let him who would oppose fall low beneath thee.

अध्याय 19

श्लोक 45.5

आक्ष्वैकं॑ म॒णिमेकं॑ कृष्णुष्व स्ना॒ह्येके॒ना पि॒बैक॑मेषाम्।चतु॑र्वीरं नैरृ॒तेभ्य॑श्च॒तुर्भ्यो॒ ग्राह्या॑ ब॒न्धेभ्यः॒ परि॑ पात्व॒स्मान्

ākṣvaikaṃ maṇimekaṃ kṛṣṇuṣva snāhyekenā pibaikameṣām| caturvīraṃ nairṛtebhyaścaturbhyo grāhyā bandhebhyaḥ pari pātvasmān

हिन्दी अर्थ

(मायुम्) बोलचालको भीहरलेतीदहै। है रात्री! तु (विभाती) रात्रिकाल मे चमकती हुई (पुर रूपाणि) भरपने नानारूपों को (कृणुषे) प्रकट करती है । (बन्दे) मै भ्रमिवादन करता हूं । (हिमस्य माता) रात्री के समान शीतल दान्ति की माता, (नः) हमारे लिये (सुहवा) सुगमतया भाहानयोग्या पहचानिये । (येन) निस स्तुति द्वारा (विवासु दिक्षु) सब दिशो में

English

Invincible, let it guard thee well. Drawn forth from butter, rich in milk and sweetness, hundred- lived, thousand-homed, bestowing vigour,

अध्याय 19

श्लोक 45.6

अ॒ग्निर्मा॒ग्निना॑वतु प्रा॒णाया॑पा॒नायायु॑षे॒ वर्च॑स॒ ओज॑से॒ तेज॑से स्व॒स्तये॑ सुभू॒तये॒ स्वाहा॑

agnirmāgnināvatu prāṇāyāpānāyāyuṣe varcasa ojase tejase svastaye subhūtaye svāhā

हिन्दी अर्थ

को उपमानं भ्रौर जगन्माता को उपमेय मानकर वर्णन किया गया है। काल में निदवल-घ्यान द्वारा की गई उपासना मे, परमेदवरं सम्बन्धी भनु- “मनसा परिक्रमा” की विधि हारा स्तवनं करना चाहिए । ३९६७, सोस्य नो विभावरि रात्रि राजैव जोषसे ।

English

Kindly, delightsome, full of sap, and mighty, invincible let it guard thee well. That thou mayst be pre-eminent, slayer of rivals, rivalless,

अध्याय 19

श्लोक 45.7

इन्द्रो॑ मेन्द्रि॒येणा॑वतु प्रा॒णाया॑पा॒नायायु॑षे॒ वर्च॑स॒ ओज॑से॒ तेज॑से स्व॒स्तये॑ सुभू॒तये॒ स्वाहा॑

indro mendriyeṇāvatu prāṇāyāpānāyāyuṣe varcasa ojase tejase svastaye subhūtaye svāhā

हिन्दी अर्थ

(राति) है रात्री के. मान सुखदांयिके, (विमावरि) ज्योतति्मेयी हृद (उषसः) उषाओं को (अनु ) लक्ष्य करके, , भर्यात् उषाकाल के चमकंते शान्त कर देनेवाली, उन का वध करनेवाली है (दधिषे) इस प्रकार हमारा तू घारण-पोषण करती ह १. (ये) जो (मम) मेरे (घना-=धनानि)

English

May Savitar cause thee to be chief and controller of thy kin. Invincible, let it guard thee well. A hymn to Night for protection from fiends, robbers, snakes and wolves

अध्याय 19

श्लोक 45.8

सोमो॑ मा॒ सौम्ये॑नावतु प्रा॒णाया॑पा॒नायायु॑षे॒ वर्च॑स॒ ओज॑से॒ तेज॑से स्व॒स्तये॑ सुभू॒तये॒ स्वाहा॑

somo mā saumyenāvatu prāṇāyāpānāyāyuṣe varcasa ojase tejase svastaye subhūtaye svāhā

हिन्दी अर्थ

तपाः) उनके प्राणों को तपानेवाली होकर, (ददि) प्राप्त हो ! ताकि (यः) जो कोई भी (स्तेनः) चोर हो, बह (न विद्यते) हमारे मध्यमे न रहे। (यत्) यदि ( पनः ) फिर, भर्थात् दोबारा चोर बने, तो वह (न विद्यते) मिलता है किं चोरोंको अपनी बस्ती भँ रहने न देना चाहिए । यदिवे दोबारा चोरी करे, तो उन्हे मृत्युदण्ड देना चाहिए । भ्रथवा-हे रात्रि तु "शम्या" नाम धारण करती है, चूंकितू स्वयं शान्तस्वरूपा है, भौर सब को शान्ति पहूवाती है । जोमेरेषनों को दम्म देकिरात्री मेको चोरभी न रहे, को चोरी न करे । यदि एक बार चोरी करे भी, तो वह बार-बार चोरी न करे, चान्त सोया रहे । शम्या =

English

Night! the terrestrial realm hath been filled with the Father’s power and might. Thou spreadest forth on high unto the seats of Heaven: dark- ness that strikes with awe comes

अध्याय 19

श्लोक 45.9

भगो॑ मा॒ भगे॑नावतु प्रा॒णाया॑पा॒नायायु॑षे॒ वर्च॑स॒ ओज॑से॒ तेज॑से स्व॒स्तये॑ सुभू॒तये॒ स्वाहा॑

bhago mā bhagenāvatu prāṇāyāpānāyāyuṣe varcasa ojase tejase svastaye subhūtaye svāhā

हिन्दी अर्थ

का०१९ 1 सुऽ ४९ प्रथववेद-भाष्य ३३३ (विष्टः) परोसे हृए (चमसः न) रन्नपात्र के सदुश (रात्रि) हि राधि! तु (मद्रा) सुखप्रदा (प्रसि) है। (युवतिः) युवावस्थावाली. हुई तु करती है । (चक्षुष्मती) सू्यंरूपी प्रशस्त आंखवाली होकर, (उती) कामना करती हुई (त्वम्) तूने, (ये) मेरे लिये (दिव्या == दिव्यानि, न) मानो दिम्य (वपूषि) देहो को (प्रति भमुक्थाः) धारण किया है । जब कि

English

near. Each moving thing finds rest in her whose yonder boundary is not seen, nor that which keeps her separate.

अध्याय 19

श्लोक 45.10

म॒रुतो॑ मा ग॒णैर॑वन्तु प्रा॒णाया॑पा॒नायु॑षे॒ वर्च॑स॒ ओज॑से॒ तेज॑से स्व॒स्तये॑ सुभू॒तये॒ स्वाहा॑

maruto mā gaṇairavantu prāṇāyāpānāyuṣe varcasa ojase tejase svastaye subhūtaye svāhā

हिन्दी अर्थ

लोक भौर पृथिवीलोक को (भ्रापप्रौ) पूणंतया भरदियाहै, व्याप्त कर लिया है । इषिरा इष गतौ +-किरवच्(उणा० १।५१),घदा गतिद्ील । रात्री विश्राम नहीं करती । दमूनाः “भ्रपि वा दम इति गृहनाम, तन्मनाः”

English

Shake off thy foes as Indra scattered Dasyus: quell all enemies. Invincible, let it guard thee well. Indra hath lent the power of sight, and vital breath and strength to this.

अध्याय 19

श्लोक 46.1

अस्तृतमणिः।१-७ प्रजापतिः।अस्तृतमणिः।त्रिष्टुप्, १ पञ्चपदा ज्योतिष्मती त्रिष्टुप्, २ षट्-पदा भुरिक्शक्वरी, ३, ७ पञ्चरदा पथ्यापङ्क्तिः, ४, ५ अतिजगती ( ४ चतुष्पदा, पञ्चपदा), ६ पञ्चपदोष्णिग्गर्भा विराड् जगती पङ्क्तिः।प्र॒जाप॑तिष्ट्वा बध्नात् प्रथ॒ममस्तृ॑तं वी॒र्याय॒ कम्।तत् ते॑ बध्ना॒म्यायु॑षे॒ वर्च॑स॒ ओज॑से च॒ बला॑य॒ चास्तृ॑तस्त्वा॒भि र॑क्षतु

astṛtamaṇiḥ| 1-7 prajāpatiḥ| astṛtamaṇiḥ| triṣṭup, 1 pañcapadā jyotiṣmatī triṣṭup, 2 ṣaṭ-padā bhurikśakvarī, 3, 7 pañcaradā pathyāpaṅktiḥ, 4, 5 atijagatī ( 4 catuṣpadā, pañcapadā), 6 pañcapadoṣṇiggarbhā virāḍ jagatī paṅktiḥ| prajāpatiṣṭvā badhnāt prathamamastṛtaṃ vīryāya kam| tat te badhnāmyāyuṣe varcasa ojase ca balāya cāstṛtastvābhi rakṣatu

हिन्दी अर्थ

११७) । युवतिः मध्यरात्रिकाल भं । गोकूपम् गौ जैसे पालती है, वैसे (रघुवंश ३।४६) । दिव्या वपु षि दिन मँ दिव्यर्पो को । ये रूपया देह है गोचर होते हैँ ! यह् कल्पना की गई है कि भानो रात्री ने रात्रीरूप को छोड़ कर दिनिकारूपधारण कर लिया है । यहां यह निदेश दिया दहै कि युवतीः स््रीमी रात्रीके वस्नं को त्यागकर, दिन म विविध वेशभूषा हारा भ्लंकृत होकर नानारूपो को धारण करे । (भरषायुः) हत्या चाहने वाला, यः जो (रिपुः मत्यः) कषतर मनुष्य, (स्तेनः) चोर बन कर, (भरद) प्राज (भायति) भरावा, (रात्री) रात्री ( प्रतीत्य ) उपे पूरी तरह से जान-पहिचान कर ( तस्य ) उस की ( ग्रीवाः ) गर्दन-नादि्यो को ( प्र हनत् ) तोड़ दे, ( चिरः) गौर सिरको

English

O spacious, darksome Night, may we uninjured reach the end of thee, reach, O thou blessed One, thine end.

अध्याय 19

श्लोक 46.2

ऊ॒र्ध्वस्ति॑ष्ठतु॒ रक्ष॒न्नप्र॑माद॒मस्तृ॑ते॒मं मा त्वा॑ दभन् प॒णयो॑ यातु॒धानाः॑ ।इन्द्र॑ इव॒ दस्यू॒नव॑ धूनुष्व पृतन्य॒तः सर्वां॒छत्रू॒न् वि ष॑ह॒स्वास्तृ॑तस्त्वा॒भि र॑क्षतु

ūrdhvastiṣṭhatu rakṣannapramādamastṛtemaṃ mā tvā dabhan paṇayo yātudhānāḥ | indra iva dasyūnava dhūnuṣva pṛtanyataḥ sarvāṃchatrūn vi ṣahasvāstṛtastvābhi rakṣatu

हिन्दी अर्थ

पिले ठीक प्रकारसे जांच कर सेनी चाहिए कि भमुक भाषत उसके सिर तक को च्तार देना मी वेदानुभोदित है । वेद कठोर दण्डकी ध्रान्ञा देता है, ताकि पापकमों की पुनरावृत्ति न होती रहे । ३३४ भयववेद-माष्य का० १९1 सु ५०

English

Thy ninety-nine examiners, O Night, who look upon mankind, Eighty-and-eight in number, or seven-and-seventy are they. Sixty-and-six, O opulent, fifty-and-five, O happy One,

अध्याय 19

श्लोक 46.3

श॒तं च॒ न प्र॒हर॑न्तो नि॒घ्नन्तो॒ न त॑स्ति॒रे।तस्मि॒न्निन्द्रः॒ पर्य॑दत्त॒ चक्षुः॑ प्रा॒णमथो॒ बल॒मस्तृ॑तस्त्वा॒भि र॑क्षतु

śataṃ ca na praharanto nighnanto na tastire| tasminnindraḥ paryadatta cakṣuḥ prāṇamatho balamastṛtastvābhi rakṣatu

हिन्दी अर्थ

अपौयति ख्पायति शष्के स्थाणाव्पौयति ॥१०॥ रात्रीं चोरके (पादौ) दोनों पैर (प्र हनत्) काट दे, (यथा) जिस से कि बह (न भयत्ति) न चल सके । (हस्तौ ) दोनों हाथ (प्रहनत् ) काट दे, (यथा) लिस से फि वह (न आशिषत्)खा न सके 1 (यः) जो ( मलिम्लुः (सः) वेह (संपिष्टः) मारपीट खाकर (अपायति) दुर चला जाय! (भ्रपायति) दूर चला जाय (सु श्रपायति) बहुत दुर चला जाय । (शुष्के ) सूखे तथा किसी सुद्र एकान्त भौर सूखे जङ्गल मे कंदी के कप भँ उसके अवरुद्ध

English

Forty-and-four and thirty-three are they, O thou enriched with spoil. Twenty-and-two hast thou, O Night, eleven, yea, and fewer still.

अध्याय 19

श्लोक 46.4

इन्द्र॑स्य त्वा॒ वर्म॑णा॒ परि॑ धापयामो॒ यो दे॒वाना॑मधिरा॒जो ब॒भूव॑ ।पुन॑स्त्वा दे॒वाः प्र ण॑यन्तु॒ सर्वेऽस्तृ॑तस्त्वा॒भि र॑क्षतु

indrasya tvā varmaṇā pari dhāpayāmo yo devānāmadhirājo babhūva | punastvā devāḥ pra ṇayantu sarve'stṛtastvābhi rakṣatu

हिन्दी अर्थ

(प्र) नौर (रात्रि) है राति! (तृष्टधूमम्) पिपासाजनक पुकार लुटेरे की -( भक्षौ ) दोनों आंखों को ( नि्जंह्याः ) निकाल फक (तेन) इस प्रकार ( त् ) उसे (द्रुपदे) काठ की बेदी में डालकर को दण्डका विधान किया है। पैप्पलाद संहिता ( थरवंवेद ) मे "रुप जलहि" के स्थान में “नृपते जहि" पाठ. है 1 इससे प्रतीत होता है कि दण्ड. विधान राजनियमों हारा होना चाहिए ।

English

With these protectors guard us well. O Daughter of the Sky, to- day. Let not a fiends or spiteful man, let no ill-wisher master us. Let not the robber seize our cows, nor the wolf take our sheep today.

अध्याय 19

श्लोक 46.5

अ॒स्मिन् म॒णावेक॑शतं वी॒र्याणि स॒हस्रं॑ प्रा॒णा अ॑स्मि॒न्नस्तृ॑ते ।व्या॒घ्रः शत्रू॑न॒भि ति॑ष्ठ॒ सर्वा॒न् यस्त्वा॑ पृत॒न्यादध॑रः॒ सो अ॒स्त्वस्तृ॑तस्त्वा॒भि र॑क्षतु

asmin maṇāvekaśataṃ vīryāṇi sahasraṃ prāṇā asminnastṛte | vyāghraḥ śatrūnabhi tiṣṭha sarvān yastvā pṛtanyādadharaḥ so astvastṛtastvābhi rakṣatu

हिन्दी अर्थ

का० १९।सूु० ४५० भ्रथर्ववेद-माष्य ३३१ ठेभिनों अच पारयाति दुर्गाणिं विश्वह ॥२।। शीघ्रगामी, ( अनड्वाहः ) रथ का वहन करने मँ समथं बेल है, (तेभिः) हे राधि ॥ (नः) हमे (दुर्गाणि) दुर्गम मागो को (भ्रति) लंघा कर (पारय)

English

Let not the thief, O Blessed, seize our horses, nor she-fiends our men. Let thief and robber run away on pathways most remote from us.

अध्याय 19

श्लोक 46.6

घृ॒तादुल्लु॑प्तो॒ मधु॑मा॒न् पय॑स्वान्त्स॒हस्र॑प्राणः श॒तयो॑निर्वयो॒धाः ।श॒म्भूश्च॑ मयो॒भूश्चोर्ज॑स्वांश्च॒ पय॑स्वां॒श्चास्तृ॑तस्त्वा॒भि र॑क्षतु

ghṛtādullupto madhumān payasvāntsahasraprāṇaḥ śatayonirvayodhāḥ | śambhūśca mayobhūścorjasvāṃśca payasvāṃścāstṛtastvābhi rakṣatu

हिन्दी अर्थ

रात्री में यात्रा करने पर यह निदेश दिया है कि रथ कै बेल प्रौढा- वस्था के तेज संगोवाल, हीघ्यगामी, तथा रथ को ले चलने मं समथं होने करे, तो उन से रक्षां, बेन तीक्ष्णशुङ्खोवाले होने चाहिए । भरातयःअ+रा (दने) ¬+-ति। वैदिक सभ्यतामें दान की बडी महिमा है । अराति चन्द शत्रु अथं मे प्रयुक्त होता है । अदानी समाज बौर

English

Far from us let Rope with Fangs, far from us let the wicked flee. Do thou make blind and headless. Night, the serpent with his pungent breath. Crush the wolf’s jaws in pieces, strike the robber dead against a post.

अध्याय 19

श्लोक 46.7

यथा॒ त्वमु॑त्त॒रोऽसो॑ असप॒त्नः स॑पत्न॒हा।स॒जा॒ताना॑मसद् व॒शी तथा॑ त्वा सवि॒ता क॑र॒दस्तृ॑तस्त्वा॒भि र॑क्षतु

yathā tvamuttaro'so asapatnaḥ sapatnahā| sajātānāmasad vaśī tathā tvā savitā karadastṛtastvābhi rakṣatu

हिन्दी अर्थ

म्रतिथियों की सेवा, पितृयज्ञ मँ जीवित माता-पिता, भाचायं तथा भन्य दान मावना पर निर्भर है । हसीलिये “श्राति” को समाज गौर राष्ट्का शत्रु कहा ह 1 यह् दान घार्भिक दान है, राजनेतिक दुष्टि से दिया गयाया (यथा) जंघे (इयाम्याकः) सामा अन्त का दानां (प्रपतन्) भूमि पर गिरता हृभरा, या (प्रपवान्) वायु द्वारा परे फंका हषा (भरनुविद्यते न) पनः

English

In thee, O Night, do we abide: we here will sleep. Be watchful thou. Give thou protection to our kine; and to our horses, and our men.

अध्याय 19

श्लोक 47.1

रात्रिः।१-९ गोपथः।रात्रिः।अनुष्टुप्, १ पथ्याबृहती, २ पञ्चपदाऽनुष्टुब्गर्भा पराऽतिजगती, ६ पुरस्ताद्बृहती, ७ त्र्यवसाना षट्पदा जगती।आ रा॑त्रि॒ पार्थि॑वं॒ रजः॑ पि॒तुर॑प्रायि॒ धाम॑भिः ।दि॒वः सदां॑सि बृह॒ती वि ति॑ष्ठस॒ आ त्वे॒षं व॑र्तते॒ तमः॑

rātriḥ| 1-9 gopathaḥ| rātriḥ| anuṣṭup, 1 pathyābṛhatī, 2 pañcapadā'nuṣṭubgarbhā parā'tijagatī, 6 purastādbṛhatī, 7 tryavasānā ṣaṭpadā jagatī| ā rātri pārthivaṃ rajaḥ pituraprāyi dhāmabhiḥ | divaḥ sadāṃsi bṛhatī vi tiṣṭhasa ā tveṣaṃ vartate tamaḥ

हिन्दी अर्थ

गिरा दे, (या) जो कि (घस्मान्) हरमे (प्रभ्यघायति) मारना चाहता है, या हमारे प्रति पापकं करना चाहता है, ताकि वह पृनःप्राप्त न हो सके । प्रतः गिरेहृए को, या वायु द्वारा परे फके गएको फिरपाना नहीं

English

A hymn to Night for protection Then all that we accumulate, all that the treasure-chest contains,. All this do we entrust to thee.

अध्याय 19

श्लोक 47.2

न यस्याः॑ पा॒रं ददृ॑शे॒ न योयु॑व॒द् विश्व॑म॒स्यां नि वि॑शते॒ यदेज॑ति ।अरि॑ष्टासस्त उर्वि तमस्वति॒ रात्रि॑ पा॒रम॑शीमहि॒ भद्रे॑ पा॒रम॑शीमहि

na yasyāḥ pāraṃ dadṛśe na yoyuvad viśvamasyāṃ ni viśate yadejati | ariṣṭāsasta urvi tamasvati rātri pāramaśīmahi bhadre pāramaśīmahi

हिन्दी अर्थ

३७६. अप॑ लेनं बासों गोञजमुत तस्करम् । (गो भ्रजम्) गौको हाक कर ले जाने वाले (स्तेनम्) चोर को; (उत) भौर (तस्करम्) उपक्षयकारी लुटेरे को; (अथो) तथा (यः) जो (भवंतः) पर्व के (शिरः) सिर को (अभिधाय) रस्सीसे बान्ध कर. (विनीषति) ले जाना चाहता है, स को (प्रप वासरः) अलग बसा ।

English

Entrust thou us to Dawn, O Mother Night. May Dawn entrust us to the Day, and Day to thee, O splendid.

अध्याय 19

श्लोक 47.3

ये ते॑ रात्रि नृ॒चक्ष॑सो द्र॒ष्टारो॑ नव॒तीर्नव॑ ।अ॒शी॒तिः सन्त्य॒ष्टा उ॒तो ते॑ स॒प्त स॑प्त॒तिः

ye te rātri nṛcakṣaso draṣṭāro navatīrnava | aśītiḥ santyaṣṭā uto te sapta saptatiḥ

हिन्दी अर्थ

(घुभगे रारि) है उत्तमशोमावाली राच्रि ! (द्) जिस (धयः) आपस भे बाट ते है, यत् एतत्) शो यह् उत्तराधिकार गं व ष धन है इसे, वथा (यथा) चिस पभरकार (इत्) ही तु (भन्यान् ) धन्य धनिको का० १९। सुऽ ५१ भयवधेद-माष्य ३३७

English

One. Whatever flying thing be here, whatever thing that creeps and. crawls.

अध्याय 19

श्लोक 47.4

ष॒ष्टिश्च॒ षट् च॒ रेवति पञ्चा॒शत् पञ्च॑ सुम्नयि ।च॒त्वार॑श्चत्वारिं॒शच्च॒ त्रय॑स्त्रिं॒शच्च॑ वाजिनि

ṣaṣṭiśca ṣaṭ ca revati pañcāśat pañca sumnayi | catvāraścatvāriṃśacca trayastriṃśacca vājini

हिन्दी अर्थ

( १) । खं ३२ (१९) । सुवणं प्रौर धन दो प्रकार का है-उत्तराधि- सौप दे, (विभावरि) है चमकीली रात्रिं . नागसःन्=निष्पापियों का जीवन दींकाल का होता है। विभा वटि == चान्द भौर तारागणों द्वारा चमकीली ज भ्रथवा भरनागसः==विना हो गई है, (अयुत) होषरहित (मे) मेरा प्राणः) प्रणि हो ग्या है, (श्युतः) दोषरहित (मे) मेरा (अपानः) पान हो गया है, (पतः) १. रात्री हमे जीवित रखे, ताकि हम इन - दोनों प्रकार के धनो का, ठपमोग्

English

Whatever fastens on a joint, therefrom do thou protect us, Night.

अध्याय 19

श्लोक 47.5

द्वौ च॑ ते विंश॒तिश्च॑ ते॒ रात्र्येका॑दशाव॒माः ।तेभि॑र्नो अ॒द्य पा॒युभि॒र्नु पा॑हि दुहितर्दिवः

dvau ca te viṃśatiśca te rātryekādaśāvamāḥ | tebhirno adya pāyubhirnu pāhi duhitardivaḥ

हिन्दी अर्थ

दोषरहित (मे) मेरा (व्यानः) व्यान हो गया है । (भहम्) मै (सर्वेः) सब दवास । भपानः-= बाहिर निकलनेवाला प्रष्वास, या पेट की पपानवायु । मानो हो गया हूं । जँ मानो विभक्त होकर हजारों रूप धारण कयि हुए हं । हजारों धां, कान, प्राण, अपान, व्यान मानो मेरे हीरूपरहै) गही सर्वं-

English

So guard thou us from west and east, protect us from the north and south. O splendid One, preserve us: we, the singers of thy praise, are here. They who are followers of Night, and they who watch o’er living things.

अध्याय 19

श्लोक 47.6

रक्षा॒ माकि॑र्नो अ॒धशं॑स ईशत॒ मा नो॑ दुः॒शंस॑ ईशत ।मा नो॑ अ॒द्य गवां॑ स्ते॒नो मावी॑नां॒ वृक॑ ईशत

rakṣā mākirno adhaśaṃsa īśata mā no duḥśaṃsa īśata | mā no adya gavāṃ steno māvīnāṃ vṛka īśata

हिन्दी अर्थ

भ्नौर प्रात्मीयतता की भावना करके यह समभे कि वह मानो भरन्यो की सेवा मं अपनी, तथा अपनो की ही सेवा कर रहा है! इस प्रकार प्रेम धौर सहानुभूति हारा भूमण्डल के समी मनुष्य परस्पर एकं संगठन मे संगसित को सुदृढ बनाए रखने क लिये वेदो तथा सच्छास्त्रौ ये सरवेमूतमंत्री, पितुः यज्ञ, प्रतिथियज्ञ तथा बलिवै्वयज्ञ मादि का विधान किया गया है । बलि- वैदवदेवयज्ञ पिं समथ्र प्राणियों की रक्षा की भावना ओत-्रोत है । यथा- खानेवालों, पापकमं के कारण हुए रोगियों, कौभो, कृमियों तक को भोजन (प्रसूतः) परमेषवर द्वारा भ्र रित हुमा म ( परदिवनोः ) भषिवदेवता्ों कौ

English

They who protect all cattle, they keep watch and ward over our lives, over our herds keep watch and ward.

अध्याय 19

श्लोक 47.7

माश्वा॑नां भद्रे॒ तस्क॑रो॒ मा नृ॒णां या॑तुधा॒न्यः ।प॒र॒मेभिः॑ प॒थिभिः॑ स्ते॒नो धा॑वतु॒ तस्क॑रः ।परे॑ण द॒त्वती॒ रज्जुः॒ परे॑णाघा॒युर॑र्षतु

māśvānāṃ bhadre taskaro mā nṛṇāṃ yātudhānyaḥ | paramebhiḥ pathibhiḥ steno dhāvatu taskaraḥ | pareṇa datvatī rajjuḥ pareṇāghāyurarṣatu

हिन्दी अर्थ

का०१९ । सु° ५२ भरयववेद-माष्य ३३९ चाये किं सूयं भौर चन्द्रमा जैसे निज किरर्णोरूपी बाहुभो वारा सव का उपकार करते है, वैसे म मी सब के उपकार के लिये निज बाहुभों दारा तथा वर्षा-प्रदान हाया सबका पालन-पोषण कररहीहै । मनुष्य भ्रपने हाथो मे वायुके हाथों की भावना करता हृभ्रा सर्वोपकार के कार्यों का

English

Verily, Night, I know thy name, Dropper of Fatness art thou called. Thee Bharadvāja knew as such: as such be watchful o’er our wealth. A hymn of Praise and prayer to Night

अध्याय 19

श्लोक 47.8

अध॑ रात्रि तृ॒ष्टधू॑ममशी॒र्षाण॒महिं॑ कृणु ।हनू॒ वृक॑स्य ज॒म्भया॒स्तेन॒ तं द्रु॑प॒दे ज॑हि

adha rātri tṛṣṭadhūmamaśīrṣāṇamahiṃ kṛṇu | hanū vṛkasya jambhayāstena taṃ drupade jahi

हिन्दी अर्थ

कि यै परमेदवर दवारा प्ररणा पाकर कार्यारम्म करता, न कि निज रागः जीवनमागं का प्रदर्शन कराती है । पूषा का भथं पृथिवी भी है । पृथिवो सन को समग्र पोषक पदार्थो का प्रदान करती है । मनुष्य धपते हथो को पुथिवी के हाथ समकर इन हार्थोःके दारा सभी प्राणियों कै पोषण के निमित्त कायो का भारम्म करे । पृथिवी को माता कहा है--“भूनिः माता पुतो भ्रहं पुथिव्याः” (अथर्व ° १२।१।१२) । जेषे पृथिवी भ माताकी १-५ ब्रह्मा । कामः । ३८१. कामलदग्रे सम॑बत॑त् मन॑सो रेतः प्रथमं यदासीत् । स कम कामेन बृहता सयोनी रायस्पोषं यज॑मानाय बेहि ।॥।१॥ (भरम) सृष्टि के भारम्मकाल मँ ( कामः) ईदवरीयं काम कामना मेरे काम कामना वा इच्छाः (षः) बह तु (बृहता कामेन) बृहत्-कास

English

Friend of the home, the strong and youthful maiden, Night, dear to Savitar the God, and Bhaga,

अध्याय 19

श्लोक 47.9

त्वयि॑ रात्रि वसामसि स्वपि॒ष्याम॑सि जागृ॒हि।गोभ्यो॑ नः॒ शर्म॑ य॒च्छाश्वे॑भ्यः॒ पुरु॑षेभ्यः

tvayi rātri vasāmasi svapiṣyāmasi jāgṛhi| gobhyo naḥ śarma yacchāśvebhyaḥ puruṣebhyaḥ

हिन्दी अर्थ

३४० भथर्ववेद-माष्य क(० १६ । पू० ४२ कामना या इच्छा प्रकट होती दहै । यथा--“सोऽकामयत्" (बृह° उप० मनसः--इसका भथं “ऋग्वेदादिभाष्यभुमिका” के “ृष्टिविद्याविषय" मे, तथा युवद ३१।१२ में “मनसः” शब्द के किये भथं के ्ननुसार किया है । परमेदवर मन द्वारा कायं नहीं करता, जंसे कि मनुष्य मन द्वारा कां

English

All-compassing, all-glorious, prompt to listen, hath with her greatness filled the earth and heaven. Over all depths hath she gone up, and mounted, most mighty

अध्याय 19

श्लोक 48.1

रात्रिः।१-६ गोपथः।रात्रिः।अनुष्टुप्, १ त्रिपदाऽर्षी गायत्री, २ त्रिपदा विराडनुष्टुप्, ३ बृहतीगर्भाऽनुष्टुप्, ५ पथ्यापङ्क्तिः।अथो॒ यानि॑ च॒ यस्मा॑ ह॒ यानि॑ चा॒न्तः प॑री॒णहि॑ ।तानि॑ ते॒ परि॑ दद्मसि

rātriḥ| 1-6 gopathaḥ| rātriḥ| anuṣṭup, 1 tripadā'rṣī gāyatrī, 2 tripadā virāḍanuṣṭup, 3 bṛhatīgarbhā'nuṣṭup, 5 pathyāpaṅktiḥ| atho yāni ca yasmā ha yāni cāntaḥ parīṇahi | tāni te pari dadmasi

हिन्दी अर्थ

था । कामेन बृहता यजमान भी यजन करता है, यज्ञस्वरूप कर्मो को करत है । इन यज्ञिय कमो का कारण भी ““कामह ॥ यज्ञिय कर्मो के करने के लिये “काम” मी यज्ञिय मावना््रों वाला होना चाहिए 1 देवपूजा, सत्- संगति तथा दानमावना श्रादि से भ्रोत-प्रोत होना चाहिए, जसे कि पर मेदवरीय काम परोपकारं न्याय दानभावना श्रादि से ओोतप्रोत्त है। पर. ३८२. तं काम सहसा प्रतिष्ठितो विशुर्विभावां सख आ (काम) है सात्विक काम ! कामना वा इच्छा (त्वम्) तू (सहसा) मानसिक बल द्वारा (प्रतिष्ठितः) दुदृस्थित होता है, (विभूः) विभूतिरूप तथा (विभावा) तेजःसम्पन्न (असि) होता है (सले) है मित्र सात्विक काम (सखीयते) तेरे साथ सख्यमाव चाहनेवाले के लिये (त्वम्) तू का० १९। सु° ४२ पथववेद-माष्य ३४१

English

One, the sky’s exalted summit. Over me now the loving Night is spreading with her auspicious.

अध्याय 19

श्लोक 48.2

रात्रि॒ मात॑रु॒षसे॑ नः॒ परि॑ देहि ।उ॒षा नो॒ अह्ने॒ परि॑ ददा॒त्वह॒स्तुभ्यं॑ विभावरि

rātri mātaruṣase naḥ pari dehi | uṣā no ahne pari dadātvahastubhyaṃ vibhāvari

हिन्दी अर्थ

उपस्थित होने पर उन का (सासहिः) पराभव करता है। (यजमानाय) (मोजः) पराक्रम (श्राधेहि) स्थापिव कर । सहः बलनाम (निषं०२।९)। सात्त्विक कामनाभों की दृढ स्थिति बनी रहे, इसके लिये मनोबल, होती, तथा पापों के पराभव करने का पराक्रम प्राप्त होता है ।

English

Godlike ways like Mitra. Excellent, high-born, blissful, meet for worship, Night, thou hast come: stay here with friendly spirit.

अध्याय 19

श्लोक 48.3

यत् किं चे॒दं प॒तय॑ति यत् किं चे॒दं स॑रीसृ॒पम्।यत् किं च॒ पर्व॑ताया॒सत्वं॒ तस्मा॒त् त्वं रा॑त्रि पाहि नः

yat kiṃ cedaṃ patayati yat kiṃ cedaṃ sarīsṛpam| yat kiṃ ca parvatāyāsatvaṃ tasmāt tvaṃ rātri pāhi naḥ

हिन्दी अर्थ

पालन. करनेवाले (भस्म) इस पुरुष के लिये (भ्राशाः) इसकी भाशापो ने (भ्रा भवुण्वन् ) इसकी कामना को पूर्णंतया सुन लिया है, भौर (कामेन) काम है- सात्विक इच्छा.्रौर सात्विक कामना । भौर भ्राशा है फल- प्राप्ति की सम्भावना == उमेद, या फलाकांक्षा । पाशा के विना कामें ३८४. कामेन मा काम् आगन् हृदयाद् हृद॑यं पारि । (कामेन) मेरी सात्विकं कामना द्वारा (मा) मुके (कामः) काम्य

English

Guard us, the food for men that we have gotten, and all pro- sperity that comes of cattle. With eager haste hath Night assumed the vigour of leopard,. tiger, or of tawny lion,

अध्याय 19

श्लोक 48.4

सा प॒श्चात् पा॑हि॒ सा पु॒रः सोत्त॒राद॑ध॒रादु॒त।गो॒पाय॑ नो विभावरि स्तो॒तार॑स्त इ॒ह स्म॑सि

sā paścāt pāhi sā puraḥ sottarādadharāduta| gopāya no vibhāvari stotārasta iha smasi

हिन्दी अर्थ

( मनः ) सात्विक मन है; (तत्) वसा मन (इह) इस जीवन में (माम्) ३४२ भयवेवेद-भाष्य काऽ १९ सूु० ५३ २।१५) । काम = 00961 06७ (श्राप) । तथा “कामस्थाप्ति जगतः

English

The horse’s neighing and the wild-man’s bellow, Thou takest many a form when thou appearest. Kind through the Night be absence of the sunshine: Mother of

अध्याय 19

श्लोक 48.5

ये रात्रि॑मनु॒तिष्ठ॑न्ति॒ ये च॑ भू॒तेषु॒ जाग्र॑ति ।प॒शून् ये सर्वा॒न् रक्ष॑न्ति॒ ते न॑ आ॒त्मसु॑ जाग्रति॒ ते नः॑ प॒शुषु॑ जाग्रति

ye rātrimanutiṣṭhanti ye ca bhūteṣu jāgrati | paśūn ye sarvān rakṣanti te na ātmasu jāgrati te naḥ paśuṣu jāgrati

हिन्दी अर्थ

३८५. यद् कौम कामयमाना शं कुष्मतिं ते हविः । (काम) है सास्विक काम कामना वा इच्छा (यत्) जिस फल की (कामयमानाः ) कामना करते हृए हम (ते) तेरे प्रति (इदम्) यह् लिये (एतस्य) इस (हविषः) हवि को ( वीहि) है काम! तु प्राप्त कर, स्वीकार कर । (स्वाहा) हमारी यह हवि तेरे प्रति भराहुत हो । “बहता कामेन सयोनिः (सन्तर १ ) है। स्वाहा=इस शब्द वारा यह दर्शाया है कि जै उदेश्य गौर इच्छा सात्विक होने चाहिए, वसे साधन

English

Frost, may she be swift to hear us. Take notice of the hymn, thou highly favoured, wherewith I worship thee in all the regions.

अध्याय 19

श्लोक 48.6

वेद॒ वै रा॑त्रि ते॒ नाम॑ घृ॒ताची॒ नाम॒ वा अ॑सि ।तां त्वां भ॒रद्वा॑जो वेद॒ सा नो॑ वि॒त्तेऽधि॑ जाग्रति

veda vai rātri te nāma ghṛtācī nāma vā asi | tāṃ tvāṃ bharadvājo veda sā no vitte'dhi jāgrati

हिन्दी अर्थ

१८६. कालो अश्वौ बहति सप्तरमः सदघरा्षो भजरो भूरिरेताः । (सप्तरषमिः) सात प्रकारकी किरणो वाला (बदवः) भादित्य जंसे (वहति) सौरमण्डल का वहन करता है, वैसे (सहस्राक्षः) हजारो का क्षय

English

Even as a King, O splendid Night, thou takest pleasure in our hymn. May we through Mornings as they flush have all our good men, round us, and become possessors of all wealth.

स्रोत: bhavykhatri/DharmicData · प्राप्त 3/6/2026

शास्त्रीय प्रामाणिकता एवं पारदर्शकताSources & Interpretation

स्रोत, संस्करण एवं व्याख्या वर्गीकरण

धर्म ग्रंथ पर मूल शास्त्र, पारंपरिक भाष्य और आधुनिक व्याख्या को पूर्णतः पृथक रखा जाता है ताकि पाठक को किसी भी व्याख्या के शास्त्र होने का भ्रम न हो।

सामग्री वर्गीकरण संकेत (Epistemic Content Labels)

6 स्तरिय प्रमाण व्यवस्था
मूल पाठOriginal text

अपौरुषेय / प्रामाणिक शास्त्र (Primary Canonical Scripture)

मूल संस्कृत, प्राकृत अथवा अवधी श्लोक/मंत्र। यह सर्वोच्च प्रमाण (प्रस्थान) है। इस पाठ में किसी भी आधुनिक व्याख्याकार का हस्तक्षेप नहीं है।

शाब्दिक अनुवादLiteral translation

पदार्थ व अन्वय (Direct Grammatical & Word-for-Word Meaning)

व्याकरणसम्मत प्रत्यक्ष शब्दार्थ (अन्वय)। बिना किसी दार्शनिक संप्रदाय के पूर्वाग्रह के, संस्कृत शब्दों का सटीक भाषांतर।

पारंपरिक भाष्यTraditional commentary

आचार्य परंपरा व टीका (Classical Lineage Commentary)

प्राचीन आचार्य परंपरा (यथा शंकराचार्य, रामानुजाचार्य, मध्वाचार्य, श्रीधर स्वामी) द्वारा विरचित शास्त्रीय भाष्य व टीकाएं।

सरल व्याख्याSimple explanation

भावार्थ व सुबोध प्रबोधन (Accessible Pedagogical Exposition)

आधुनिक जिज्ञासुओं के लिए सरल भाषा में भावार्थ। यह मूल मंत्र नहीं, बल्कि पाठ को सुगम बनाने हेतु संपादकीय व्याख्या है।

आधुनिक चिंतनModern reflection

समसामयिक विमर्श व अनुप्रयोग (Contemporary Application & Analysis)

दार्शनिक, मनोवैज्ञानिक व वैज्ञानिक समरूपताओं पर आधुनिक चिंतन। यह मूल शास्त्र का अंग नहीं है और इसे शास्त्रोक्त सिद्धांत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

शोध टिप्पणीResearch note

पांडुलिपि एवं ऐतिहासिक शोध (Critical Apparatus & Manuscript Research)

पांडुलिपि विविधताएं, पाठ-भेद (variant readings), छंद रचना, और ऐतिहासिक व तुलनात्मक भाषावैज्ञानिक शोध। यह शास्त्र का मूल संदेश बदलने हेतु नहीं, बल्कि पाठ की प्रामाणिकता परखने के लिए है।