अथ ह वाचमुद्गीथमुपासाञ्चक्रिरे तां हासुराः पाप्मना विविधुस्तस्मात्तयोभयं वदति सत्यं चानृतं च पाप्मना ह्येष विद्धा
atha ha vācamudgīthamupāsāñcakrire tāṃ hāsurāḥ pāpmanā vividhustasmāttayobhayaṃ vadati satyaṃ cānṛtaṃ ca pāpmanā hyeṣa viddhā
Speech is double-edged: capable of divine truth and deceitful malice.
अर्थMeaning
फिर उन्होंने वाणी की उपासना की; असुरों ने उसे भी पाप से बींध दिया। इसीलिये वाणी से सत्य और असत्य दोनों बोले जाते हैं। ॥ ३ ॥
अक्षरशः अनुवाद — मूल संस्कृत श्लोक के प्रत्येक पद का प्रत्यक्ष अर्थ।
Then they meditated on the udgîtha (Om) as speech, but the Asuras pierced it with evil. Therefore we speak both truth and falsehood. For speech is pierced by evil.
Direct literal rendering preserving Sanskrit philosophical terminology.
व्याख्याVyakhya
छान्दोग्य के छठे प्रपाठक में उद्दालक अपने पुत्र श्वेतकेतु को नदियों का अमर दृष्टांत देते हैं: "इमाः सोम्य नद्यः पुरस्तात् प्राच्यः स्यन्दन्ते पश्चात् प्रतीच्यस्ताः समुद्रात्समुद्रमेवापियन्ति स समुद्र एव भवति ता यथा तत्र न जानन्त्ययमहमस्मीति।" हे सोम्य! जिस प्रकार ये नदियां पूर्व की ओर बहने वाली पूर्व से और पश्चिम की ओर बहने वाली पश्चिम से निकलकर अंततः समुद्र में ही विलीन हो जाती हैं और समुद्र ही बन जाती हैं; वहाँ पहुँचकर वे यह नहीं जानतीं कि 'मैं यह नदी हूँ या वह नदी'—उसी प्रकार संपूर्ण प्राणी उस एक 'सत्' से निकलकर और अंततः उसी में लीन होकर अपनी अलग सत्ता को भूल जाते हैं।
विज्ञान एवं आधुनिक उपयोगScience & Modern Application
“क्या आप नदी की तरह सहज बहकर अपने जीवन को असीम सत्ता में समर्पित करने को तैयार हैं, अथवा किनारे के पत्थरों को जकड़कर ठहरने का व्यर्थ प्रयास कर रहे हैं?”
शोध संदर्भResearch context · not scriptureComparative Research Noteशोध टिप्पणी
जल चक्र (Hydrological Cycle) और उष्मागतिकी (Thermodynamics) का सिद्धांत यह दर्शाता है कि जल का कोई भी रूप (नदी, हिम, वाष्प, मेघ) स्थिर या स्वतंत्र नहीं है; यह एक सतत प्रवाह और रूपांतरण है जो अंततः महासागर में विश्राम पाता है। इसी प्रकार, भौतिकी में 'एन्ट्रॉपी' और ऊर्जा संरक्षण का नियम सिद्ध करता है कि रूप बदलते रहते हैं, किंतु मूल ऊर्जा सदा अक्षुण्ण रहती है। उपनिषद का नदी-समुद्र दृष्टांत व्यक्तिगत अस्मिता के इस शाश्वत प्रवाह और परम सत्य में उसकी लय को पूर्णतः स्पष्ट करता है।
A modern parallel offered for reflection. It is not part of the scripture, and it has not been checked against the original sources it may allude to.
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- 2026-10-24
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