Narada Purana
54
अध्याय 54 / 167

Book 1 - Adhyaya 55

367 श्लोकभाग 5/5 · श्लोक 365–213-2

पूर्ण अध्याय पाठ3 श्लोक

अध्याय 54

श्लोक 365

गर्ते सर्पावृतो नग्नो रुदंश्चौरानलार्दितः ।एतादृशाङ्क्रियांशाः स्तु षत्रिंशदुदीताः क्रमात्

garte sarpāvṛto nagno rudaṃścaurānalārditaḥ / etādṛśāṅkriyāṃśāḥ stu ṣatriṃśadudītāḥ kramāt

हिन्दी अर्थ

और धनाढ्य होता है। पाशयोगमें उत्पन्न धनवान् और सुशील होता है। केदार ((क्षेत्र)-योगमें पैदा हुआ खेतीसे जीविका चलानेवाला होता है तथा शूलयोगमें उत्पन्न पुरुष शूरवीर, शस्त्रसे आघात न

English

a naked man in a pit, wrapped in serpents, weeping, afflicted by thieves and fire. Such are the thirty-six parts of the signs, declared in order.

अध्याय 54

श्लोक 366

एतत्संक्षेपतः प्रोक्तं जातकं मुनिसत्तम ।निबोध संहितास्कन्धं लोककृत्युपयोगिनम्

etatsaṃkṣepataḥ proktaṃ jātakaṃ munisattama / nibodha saṃhitāskandhaṃ lokakṛtyupayoginam

हिन्दी अर्थ

पानेवाला और अधन (धनहीन) होता है। युगयोगमें जन्म लेनेवाला पाखण्डी तथा गोलयोगमें उत्पन्न मनुष्य मलिन और निर्धन होता है॥ १९५-१९६॥

English

Thus the science of births has been told in brief, O best of sages. Now hear the Samhita section, useful for worldly affairs.

अध्याय 54

श्लोक 213-2

शुक्रज्ञयोस्तु शुभगा कलाज्ञा रुचिराङ्गना ।अनेकसौख्यार्थगुणालग्ने सौम्यत्रये स्थिते

śukrajñayostu śubhagā kalājñā rucirāṅganā / anekasaukhyārthaguṇālagne saumyatraye sthite

हिन्दी अर्थ

सूर्य यदि पापग्रहसे युक्त हो तथा बली पापग्रह अष्टम भावमें स्थित हो तो माता और शिशुका शस्त्रसे मरण होता है॥ १०४--१०९ ॥

English

I'he printed text gives T'Idl:' which can mean only 'defeated*. It may be some other word standing for some number. It must be fiRT. which would give the number 24. The word may yield the number 27 which is the number of stars, or 12 which is the number of Rais.

स्रोत: https://gretil.sub.uni-goettingen.de/gretil/corpustei/transformations/plaintext/sa_nAradapurANa.txt · प्राप्त 3/6/2026

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शास्त्रीय प्रामाणिकता एवं पारदर्शकताSources & Interpretation

स्रोत, संस्करण एवं व्याख्या वर्गीकरण

धर्म ग्रंथ पर मूल शास्त्र, पारंपरिक भाष्य और आधुनिक व्याख्या को पूर्णतः पृथक रखा जाता है ताकि पाठक को किसी भी व्याख्या के शास्त्र होने का भ्रम न हो।

सामग्री वर्गीकरण संकेत (Epistemic Content Labels)

6 स्तरिय प्रमाण व्यवस्था
मूल पाठOriginal text

अपौरुषेय / प्रामाणिक शास्त्र (Primary Canonical Scripture)

मूल संस्कृत, प्राकृत अथवा अवधी श्लोक/मंत्र। यह सर्वोच्च प्रमाण (प्रस्थान) है। इस पाठ में किसी भी आधुनिक व्याख्याकार का हस्तक्षेप नहीं है।

शाब्दिक अनुवादLiteral translation

पदार्थ व अन्वय (Direct Grammatical & Word-for-Word Meaning)

व्याकरणसम्मत प्रत्यक्ष शब्दार्थ (अन्वय)। बिना किसी दार्शनिक संप्रदाय के पूर्वाग्रह के, संस्कृत शब्दों का सटीक भाषांतर।

पारंपरिक भाष्यTraditional commentary

आचार्य परंपरा व टीका (Classical Lineage Commentary)

प्राचीन आचार्य परंपरा (यथा शंकराचार्य, रामानुजाचार्य, मध्वाचार्य, श्रीधर स्वामी) द्वारा विरचित शास्त्रीय भाष्य व टीकाएं।

सरल व्याख्याSimple explanation

भावार्थ व सुबोध प्रबोधन (Accessible Pedagogical Exposition)

आधुनिक जिज्ञासुओं के लिए सरल भाषा में भावार्थ। यह मूल मंत्र नहीं, बल्कि पाठ को सुगम बनाने हेतु संपादकीय व्याख्या है।

आधुनिक चिंतनModern reflection

समसामयिक विमर्श व अनुप्रयोग (Contemporary Application & Analysis)

दार्शनिक, मनोवैज्ञानिक व वैज्ञानिक समरूपताओं पर आधुनिक चिंतन। यह मूल शास्त्र का अंग नहीं है और इसे शास्त्रोक्त सिद्धांत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

शोध टिप्पणीResearch note

पांडुलिपि एवं ऐतिहासिक शोध (Critical Apparatus & Manuscript Research)

पांडुलिपि विविधताएं, पाठ-भेद (variant readings), छंद रचना, और ऐतिहासिक व तुलनात्मक भाषावैज्ञानिक शोध। यह शास्त्र का मूल संदेश बदलने हेतु नहीं, बल्कि पाठ की प्रामाणिकता परखने के लिए है।