तैत्तिरीयोपनिषद्

Bhṛgu Vallīश्लोक 8/1080%

Taittiriya Upanishad 3.8

मूल पाठSource scriptureOriginal Sanskritमूल संस्कृत

अन्नं न परिचक्षीत ।तद्व्रतम् ।आपो वा अन्नम् ।ज्योतिरन्नादम् ।अप्सु ज्योतिः प्रतिष्ठितम् ।ज्योतिष्यापः प्रतिष्ठिताः ।तदेतदन्नमन्ने प्रतिष्ठितम् ।स य एतदन्नमन्ने प्रतिष्ठितं वेद प्रतितिष्ठति ।अन्नवानन्नादो भवति ।महान्भवति प्रजया पशुभिर्ब्रह्मवर्चसेन ।महान् कीर्त्या ॥ १ ॥ ॥ इति अनुवाकः

अर्थMeaning
अनुवादTranslationLiteral Hindi Translationमूल हिन्दी अनुवाद (अक्षरशः)मूलानुवाद · Literal

"अन्न की उपेक्षा मत कर" — यह व्रत है। जल ही अन्न; ज्योति अन्न-भोक्ता। जल में ज्योति प्रतिष्ठित; ज्योति में जल प्रतिष्ठित। अन्न अन्न में प्रतिष्ठित। फल पूर्ववत्।

अक्षरशः अनुवाद — मूल संस्कृत श्लोक के प्रत्येक पद का प्रत्यक्ष अर्थ।

अनुवादTranslationLiteral English TranslationLiteral Text

Do not neglect food — that is the vow. Water is food; light is the eater. Light rests in water; water rests in light. Thus food rests in food. He who knows this is established; the rewards as above.

Direct literal rendering preserving Sanskrit philosophical terminology.

व्याख्याVyakhya
संपादकीय व्याख्याEditorial explanationVyakhya (व्याख्या)व्याख्या

द्वितीय खाद्य-व्रत। अन्न की उपेक्षा मत कर। जल और ज्योति परस्पर खाने/खाए जाने के सम्बन्ध में हैं। एक ही पारस्परिकता का भिन्न स्तर।

विज्ञान एवं आधुनिक उपयोगScience & Modern Application
आधुनिक चिंतनModern reflection · not scriptureContemplative Reflection & Actionआधुनिक चिंतन
आधुनिक संदर्भ · Modern Context
21वीं सदी की जीवनशैली में लोग काम की व्यस्तता, तनाव या डाइटिंग के गलत तरीकों के कारण भोजन की घोर उपेक्षा करते हैं। भोजन का कोई निश्चित समय नहीं होता, लोग कंप्यूटर स्क्रीन के सामने बेमन से कुछ भी निगल लेते हैं या कई-कई घंटे भूखे रहकर अपने शरीर के जैविक चक्र को तहस-नहस कर देते हैं। तैत्तिरीयोपनिषद् का दूसरा महान खाद्य-व्रत कहता है: 'अन्नं न परिचक्षीत। तद् व्रतम्।'—अन्न की कभी उपेक्षा मत करो, उसका अनादर मत करो। उपनिषद् इसके पीछे एक वैज्ञानिक रहस्य उजागर करता है: 'आपो ज्योतिषि प्रतिष्ठिताः, ज्योतिरप्सु प्रतिष्ठितम्'। जल और प्रकाश परस्पर मिलकर ही पृथ्वी पर जीवन और ऊर्जा का निर्माण करते हैं, जो आधुनिक प्रकाश संश्लेषण (Photosynthesis) का मूल आधार है। जब आप अपने पोषण की उपेक्षा करते हैं, तो आप अपने भीतर जलने वाली प्राण-अग्नि को बुझा देते हैं। अपने शरीर को सही समय पर, शुद्ध और संतुलित आहार न देना वास्तव में अपने प्राणों के प्रति एक गंभीर हिंसा है।
आज के जीवन में प्रयोग · Practical Application
- **पोषण का सम्मान और समय-निष्ठा (Respecting Meal Cadence)**: अपने काम के लिए अपने भोजन के समय की बलि न चढ़ाएं; प्रतिदिन एक निश्चित समय पर बैठकर शांतिपूर्वक भोजन करें। - **शरीर रूपी मंदिर का सत्कार (Nourishing the Inner Temple)**: स्वयं को अपनी मेज पर सबसे आदरणीय अतिथि समझें; हड़बड़ी और उपेक्षा में खड़े-खड़े खाने के बजाय बैठकर, सम्मानपूर्वक भोजन करें। - **संतुलित जल और ऊर्जा प्रबंधन (Hydration and Energy Balance)**: शरीर में जल और अग्नि के संतुलन को बनाए रखने के लिए पर्याप्त पानी पिएं और अत्यधिक तीखे, बासी या तैलीय भोजन से बचें।
चिंतन प्रश्न · Self-Reflection

“क्या मैं सांसारिक व्यस्तताओं की अंधी दौड़ में अपने भोजन और पोषण की उपेक्षा करके अपने ही जीवन-ऊर्जा का क्षरण कर रहा हूं?”

शोध संदर्भResearch context · not scriptureComparative Research Noteशोध टिप्पणी

Photosynthesis — प्रकाश + जल → जैव-ऊर्जा। यह सम्बन्ध पृथ्वी पर लगभग सम्पूर्ण जीवन का आधार है। उपनिषद् का रूपक सटीक है।

A modern parallel offered for reflection. It is not part of the scripture, and it has not been checked against the original sources it may allude to.

स्रोतSources and editionSources and editionस्रोत एवं संस्करण

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Sanskrit edition
Gita Press Edition (Book Code 0071). Gita Press Gorakhpur (Official Publication)
Translation
Gita Press Editorial Board (Hindi)
Last updated
2026-10-24
Licence note (as recorded)
Sanskrit mūla — public domain. Digitized by sanskritdocuments.org.
पाठ-भेद · Variant readings
Collated with Anandashram Sanskrit Series No. 12.

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