Atharva Veda
20
अध्याय 20 / 20

Kanda 20

काण्ड 20

975 श्लोकभाग 11/13 · श्लोक 127.1–131.20

पूर्ण अध्याय पाठ90 श्लोक

अध्याय 20

श्लोक 127.1

॥ अथ कुन्तापसूक्तानि ॥ खिलानि ।इ॒दं जना॒ उप॑ श्रुत॒ नरा॒शंस॒ स्तवि॑ष्यते ।ष॒ष्टिं स॒हस्रा॑ नव॒तिं च॑ कौरम॒ आ रु॒शमे॑षु दद्महे

|| atha kuntāpasūktāni || khilāni | idaṃ janā upa śruta narāśaṃsa staviṣyate | ṣaṣṭiṃ sahasrā navatiṃ ca kaurama ā ruśameṣu dadmahe

हिन्दी अर्थ

स्त्री उत्तर देती है किं (भयं शरारुः) यह शरारती वृषाकपि (माम्) मु (अ्रवीराम् इव भ्रमि मन्यते) एेसा समता है कि मानो मै भरवीरा हुः स्वर॑ण-स्वभाव के कारण वृषाकपि को फिर भी शरार कहती है । मत््रमे स््रेण-स्वभाव दर्शाया गया है 1 मलों मे ( गच्छति स्म ) नाती हं । वह (- ऋतस्य ) सच्चाई के जीवन की

English

Who for the sake of splendour close to mighty Indra’s side rejoice, good in their own supremacy.

अध्याय 20

श्लोक 127.2

उष्ट्रा॒ यस्य॑ प्रवा॒हणो॑ व॒धूम॑न्तो द्वि॒र्दश॑ ।व॒र्ष्मा रथ॑स्य॒ नि जि॑हीडते दि॒व ई॒षमा॑णा उप॒स्पृशः॑

uṣṭrā yasya pravāhaṇo vadhūmanto dvirdaśa | varṣmā rathasya ni jihīḍate diva īṣamāṇā upaspṛśaḥ

हिन्दी अर्थ

यस्म देवाः सदा बलि प्रयच्छन्ति विमितेऽमितं स्कम्भं तं ब्रूहि कतमः स्विदेव सः” ॥ (अथं ° १०।७।३९ ॥ तब चित्त कं भक्तिरस का प्रभाव समग्र रारीरपर होजाताह। पां मिलकर, जब परमेदवर पर भक्तिरस सीचतेर्है, तोये १५ उक्षारू्पहा

English

If, Indra, thou drink Soma by Vishnu’s or Trita Āptya’s side, Or with the Maruts take delight in flowing drops;

अध्याय 20

श्लोक 127.3

ए॒ष इ॒षाय॑ मामहे श॒तं नि॒ष्कान् दश॒ स्रजः॑ ।त्रीणि॑ श॒तान्यर्व॑तां स॒हस्रा॒ दश॒ गोना॑म्

eṣa iṣāya māmahe śataṃ niṣkān daśa srajaḥ | trīṇi śatānyarvatāṃ sahasrā daśa gonām

हिन्दी अर्थ

जाते है, -भक्तिरस के सिञ्चन में समथं हो जाग है, उक्ला=उक्षति सिञ्चतीति, ( उणादि कोष १।१५९ ) । जदं इन १५मे'दरीरकेर्पाच भक्तिरस हारा भ्रापूरित हो जाती है तब धममकायोँ मे-जो कि परमेदवर क प्रसाद क निमित्त किये जाते है,- भक्त शीतोष्ण तथा सुखदुःख की होति है । पिले एक भ्रामाशयकोवे भरले, पीछे .जुगाली. करते हृष्ट दूसरे भ्रामारशय को वे भरते है

English

Or, Sakra, if thou gladden thee afar or in the sea of air, Rejoice thee in this juice of ours, in flowing drops. Or, Lord of Heroes, if thou aid the worshipper who sheds the juice,

अध्याय 20

श्लोक 127.4

वच्य॑स्व रेभ॑ वच्यस्व वृ॒क्षे न प॒क्वे श॒कुनः॑ ।नष्टे॑ जि॒ह्वा च॑र्चरीति क्षु॒रो न भु॒रिजो॑रिव

vacyasva rebha vacyasva vṛkṣe na pakve śakunaḥ | naṣṭe jihvā carcarīti kṣuro na bhurijoriva

हिन्दी अर्थ

(न ) जैसे ( तिग्मण्णृङ्गः ) तेज सींगोवाला (वृषभः) व्ष॑क-बेल, काऽ २५ 1 सूऽ १२६. प्रथरवैवेद-भाष्य ३०७ हा, (रोरुवत्) गजंनाएं करता है, वसे ही है परमेश्वर ! भ्राप (वृषभः) दश इन्द्रियो, तथा पञ्चभूतों के समुहरूप शरीर म ( रोरुवत् ) बार-बार .

English

Or him whose laud delights thee, and his flowing drops. Whatever, Vritra-slayer! thou Sūrya, hast risen upon to-day,

अध्याय 20

श्लोक 127.5

प्र रे॒भासो॑ मनी॒षा वृषा॒ गाव॑ इवेरते ।अ॒मो॒त॒पुत्र॑का ए॒षाम॒मोत॑ गा॒ इवा॑सते

pra rebhāso manīṣā vṛṣā gāva iverate | amotaputrakā eṣāmamota gā ivāsate

हिन्दी अर्थ

मेरे हृदय के लिये (शम्) शान्तिदायक होता है, वैसे भक्तिरस (यम् ) जिसे कि बह भी (शम्) मेरे लिये शान्तिप्रद.होताहै। (भावयुः) माव्क-उपासक (ते ) आपके लिये (सुनोति) निष्पन्न करता है, विचरता है, अर्थात् सूं का ररिमसमुह । रदिमयों की गर्मोके कारण बादल

English

That, Indra, all is in thy power. When, Mighty One, Lord of the Brave, thou thinkest, I shall never die, That thought of thine is true indeed.

अध्याय 20

श्लोक 127.6

प्र रे॑भ॒ धीं भ॑रस्व गो॒विदं॑ वसु॒विद॑म्।दे॒व॒त्रेमां वाचं॑ स्रीणी॒हीषु॒र्नावी॑र॒स्तार॑म्

pra rebha dhīṃ bharasva govidaṃ vasuvidam| devatremāṃ vācaṃ srīṇīhīṣurnāvīrastāram

हिन्दी अर्थ

- ३। १५४) । कपृत् =क (जल) + पृत् (पु पूरणे) ; जल के अभावं कीं पुत्ति जिसे कि उपनिषदों मे हिरण्यकेश गौर हिरभ्यदमश्रू कहा है । सूर्यं की किरणे चलता नही, भयितु वह सौर-मण्डल में सापेक्ष स्थिति की दुष्टि से सदा एक 11. , मथरवेवेद-माष्य का०२०। सुर १२६

English

Thou, Indra, goest unto all Soma libations shed for thee, Both far away and near at hand.

अध्याय 20

श्लोक 127.7

राज्ञो॑ विश्व॒जनी॑नस्य॒ यो दे॒वोऽमर्त्यां॒ अति॑ ।वै॒श्वा॒न॒रस्य॒ सुष्टु॑ति॒मा सु॒नोता॑ परि॒क्षितः॑

rājño viśvajanīnasya yo devo'martyāṃ ati | vaiśvānarasya suṣṭutimā sunotā parikṣitaḥ

हिन्दी अर्थ

. “वृषाकपि दाब्द मे “वृषा पद स्पष्ट दा रहा है कि सुरथं वर्षाकाकारण है। वतमान मन्त्रे मे भी इसकी पुष्टि की गईहै। मेषमें गजंनाका. कारण विंदयत् है । यह प्रसिद्ध उक्ति है कि-- “जो गजंते है वे बरसते नही" . ७५८. न सेञचे यस्य. रोमृशं निषेदुषो विजम्भते ।

English

Both boons—may Indra hitherward turned, listen to this, prayer of ours, And, mightiest Maghavan with thought inclined to us come nigh to drink the Soma juice. For him, strong independent Ruler, Heaven and Earth have fashioned forth for power and

अध्याय 20

श्लोक 127.8

प॒रि॒च्छिन्नः॒ क्षेम॑मकरो॒त् तम॒ आस॑नमा॒चर॑न्।कुला॑यन् कृ॒ण्वन् कौर॑व्यः॒ पति॒र्वद॑ति जा॒यया॑

paricchinnaḥ kṣemamakarot tama āsanamācaran| kulāyan kṛṇvan kauravyaḥ patirvadati jāyayā

हिन्दी अर्थ

(सः) वहं वृषाकपि ( न ईशे ) वर्षा का भ्रधीदवर नहीं, ( निषेदुषः यस्य ) एक स्थान में स्थित जिस वृषाकपि का (रोमकाम्) लोमसमूह-सदृक रदिमसमूह, (विजृम्भते) विेषरूप म . स्वं त्र विचरता है, भ्रपितु ( सः ) वेह यह वज्ञानिक तथ्य है किं भन्तरिक्षमे वतंमान . मृदादि-कण जब जल-कण घनीभूत हो जाते ्है, तबभारी होजाने के कारण वर्षारूपमें पुथिवी पर गिरते है । सूयं की गर्मी द्वारा तो पृथिवीस्थ.जल वाष्पीभरूत होकर विद्यूत् के कारण उन पर वाष्पीय जलकण घनीभूत होकर बरसते है ¦

English

might. Thou seatest thee as first among thy peers in place, for thy soul longs for Soma juice.

अध्याय 20

श्लोक 127.9

क॒त॒रत् त॒ आ ह॑राणि॒ दधि॒ मन्थां॑ परि॒ श्रुत॑म्।जा॒याः पतिं॒ वि पृ॑च्छति रा॒ष्ट्रे राज्ञः॑ परि॒क्षितः॑

katarat ta ā harāṇi dadhi manthāṃ pari śrutam| jāyāḥ patiṃ vi pṛcchati rāṣṭre rājñaḥ parikṣitaḥ

हिन्दी अर्थ

मेव की (एधस्वानः) वृद्धि करता हृभा गौर इसे गजंवाता हरा (भ्रसिम्) खसे भूमि पर फंकना, ( सनाम् नई उत्पत्ति करना, तथा ( नवं चरम् ) का० २०। सु० १२६ अथवेवेद-भाष्य . ३०९ (पिबामि)पान करता हूंउसे स्वीकार करता हुंउसे मानो तुषित हृद्रा ग्रहण

English

O Indra, from all ancient time rivalless ever and companionless art thou: In war thou seekest comradeship. Thou findest not the wealthy man to be thy friend: those scorn thee who are flown with wine.

अध्याय 20

श्लोक 127.10

अ॒भीवस्वः॒ प्र जि॑हीते॒ यवः॑ प॒क्वः प॒थो बिल॑म्।जनः॒ स भ॒द्रमेध॑ति रा॒ष्ट्रे राज्ञः॑ परि॒क्षितः॑

abhīvasvaḥ pra jihīte yavaḥ pakvaḥ patho bilam| janaḥ sa bhadramedhati rāṣṭre rājñaḥ parikṣitaḥ

हिन्दी अर्थ

करती है । (विदवस्मात्०) पूववत् 1 ( नारियां प्रायः भावनाप्रधान होती ईै। इसलिये धा्मिक-कृत्यो तथा ३०४ भ्रयवंवेद-माष्य का०-२० । सु०° १२६

English

Craving his touch the dappled Kine mingle the Soma with their milk. The milch-kine dear to Indra send forth his death-dealing thun- derbolt, good in their own supremacy.

अध्याय 20

श्लोक 127.11

इन्द्रः॑ का॒रुम॑बूबुध॒दुत्ति॑ष्ठ॒ वि च॑रा॒ जन॑म्।ममेदु॒ग्रस्य॒ चर्कृ॑धि॒ सर्व॒ इत् ते॑ पृणाद॒रिः

indraḥ kārumabūbudhaduttiṣṭha vi carā janam| mamedugrasya carkṛdhi sarva it te pṛṇādariḥ

हिन्दी अर्थ

करती है । सामाजिक-जीवना म उन की विशेष श्रभिरुचि होती है--यह सव इस का (पति) क्षत्रिय पति, (जरसा) बुढपि से (नहि मरते). नहीं मरता वृषाकपि-सखा कं (ऋते) विना (न रारण) सुख-चैन नहीं पाता । यह वह हविः) -भपरने प्राणों की श्राहति, (देवेषु) देवकोटि के व्यक्तियों की सेवा के

English

With veneration, passing wise, honouring his victorious might, They follow close his many laws to win them due preeminence, good in their own

अध्याय 20

श्लोक 127.12

इ॒ह गावः॒ प्रजा॑यध्वमि॒हाश्वा इ॒ह पूरु॑षाः ।इ॒हो स॒हस्र॑दक्षि॒णोऽपि॑ पू॒षा नि षी॑दति

iha gāvaḥ prajāyadhvamihāśvā iha pūruṣāḥ | iho sahasradakṣiṇo'pi pūṣā ni ṣīdati

हिन्दी अर्थ

सखा कहता ह, ओर उसकी धामिक प्रवृत्तियों का कथन करता हँ । पति के वाली !, (भरात् उ) तदनन्तर (सुस्नुषे) है उत्तमपु्रवधूवाली, (वृषाकपायि) उक्षा को (चसत्) खाता है, जो कि परमेदवर को (श्रियं हविः) प्रिय हवि रूप ह, भौर जो हवि कि (काचित्करम्) जीवात्मा के सुखो को चयन करती

English

supremacy. For Indra, lover of carouse, loud be our songs about the juice: Let poets sing the hymn of praise.

अध्याय 20

श्लोक 127.13

नेमा इ॑न्द्र॒ गावो॑ रिष॒न् मो आ॒सां गोप॑ रीरिषत्।मासा॑म॒मित्र॒युर्जन॒ इन्द्र॒ मा स्ते॒न ई॑शत

nemā indra gāvo riṣan mo āsāṃ gopa rīriṣat| māsāmamitrayurjana indra mā stena īśata

हिन्दी अर्थ

वृषाकपायी =वृषाकपि,जिसका वणेन मन्त्र ७४२ से ७४४ मे हुमा ह, इस वृषाकपि की माता है, श्रद्धा । योगदरेन १।२० सूत्र के भष्यमे श्रद्धा, माता कं सदृश. कल्याणकारिणी होकर, योगी की रक्षा करती ह । द्वारा परमेदवर को सींचते रहते है; उक्ष= सेचने । घसत् == परमेरवर इन भक्तिरसो को खाना है, इनका भ्रास्वाद.लेता है । परमेदवर को “भत्ता खाजाताहै, मानो श्रपने पेटर्मेलौनकरलेताहं। उस का पेटहं-

English

We summon Indra to the draught, in whom all glories rest, in whom The seven communities rejoice.

अध्याय 20

श्लोक 127.14

उप॑ नो न रमसि॒ सूक्ते॑न॒ वच॑सा व॒यं भ॒द्रेण॒ वच॑सा व॒यम्।वना॑दधिध्व॒नो गि॒रो न रि॑ष्येम क॒दा च॒न

upa no na ramasi sūktena vacasā vayaṃ bhadreṇa vacasā vayam| vanādadhidhvano giro na riṣyema kadā cana

हिन्दी अर्थ

उपासक, या मन, बुद्धि, चित्त गौर 'भहंकार, (मे) मुक परमेदवर (साकम्) एक साथ (पचन्ति) परिपाक करते है । (उत) भ्रौर ( भरहम् ) मै (भ्रदिमि) उखा लेता हुं; (इत्) जंसे कि (पीवः) .मोटा या बलवान् पुष, (उभौ कुक्षी) मोजन द्वारा, भपने वोन पेटो को मर लेता हं, वैसे ३०६ भ्रथवेवेद-माष्य अन्तःकरण चतुष्टय जब भक्तिरस से भरा हमा हो, तो उस का प्रमाव

English

By the three Soma jars the Gods span sacrifice that stirs the mind: Let our songs aid and prosper it. 305

अध्याय 20

श्लोक 128.1

खिलानि ।यः स॒भेयो॑ विद॒थ्यः सु॒त्वा य॒ज्वाथ॒ पूरु॑षः ।सूर्यं॒ चामू॑ रि॒शादस॒स्तद् दे॒वाः प्राग॑कल्पयन्

khilāni | yaḥ sabheyo vidathyaḥ sutvā yajvātha pūruṣaḥ | sūryaṃ cāmū riśādasastad devāḥ prāgakalpayan

हिन्दी अर्थ

करता हूं । मरौर (धीरम्) मेधातव्री उपासक को (अचाकराम् ) पटिचानता हं । केभेदकोही सुचित करते रहँ । यदि यह भेद जातिपरक हो तो “कृण्वन्तो एक जाति को दूसरी जाति में बदला नहीं-जा सकता । गौ भेक नहीं बन सकती,गौर न भसं गौ बन सकती है । समग्र मनुष्य एक ही मनुष्य जाति के है । दासं है वे जोकिं उपक्षयकारी हैसमाज को हानि पहुचे ह । भौर भाय हवे.

English

What time thou thunderest and gatherest, then thou, even as a father, art invoked. I from my Father have received deep knowledge of the holy

अध्याय 20

श्लोक 128.2

यो जा॒म्या अप्र॑थय॒स्तद् यत् सखा॑यं॒ दुधू॑र्षति ।ज्येष्ठो॒ यद॑प्रचेता॒स्तदा॑हु॒रध॑रा॒गिति॑

yo jāmyā aprathayastad yat sakhāyaṃ dudhūrṣati | jyeṣṭho yadapracetāstadāhuradharāgiti

हिन्दी अर्थ

तथा पाप-शत्ररभो को कम्पां देनेवाने उपासक की माता के रूप मे; उत्तम- भ्रन्तर्नाद का व्णंन हुमा है । का श्राधिहैविक वर्णेन हभा है + . ६- भरन्त में ' १९-२३ मन्तो मे.उपसंहाररूपः मे, परमेश्वर भ्रौ

English

Increaser of our steeds and multiplying kine, a golden well, O God, art thou;

अध्याय 20

श्लोक 128.3

यद् भ॒द्रस्य॒ पुरु॑षस्य पु॒त्रो भ॑वति दाधृ॒षिः ।तद् वि॒प्रो अब्र॑वीदु॒ तद् ग॑न्ध॒र्वः काम्यं॒ वचः॑

yad bhadrasya puruṣasya putro bhavati dādhṛṣiḥ | tad vipro abravīdu tad gandharvaḥ kāmyaṃ vacaḥ

हिन्दी अर्थ

मौतिक--तीनों भथं संमंव है । ये तीनों अ्रथं गौण-मुख्यभाव से प्रायः भन्य सक्त केभी किये जा सकते है । अथवंवेद-भाष्य (कुन्ताप-सूक्त ३१३ भिलावट माना है । “चतु्वेद-विषय-सुची"(वैदिक यन्त्रालय अजमेर) मँ उन का केथन निम्नलिखित हैः-- . ।

English

For no one may impair the gifts laid up in thee, Bring me what- ever thing I ask. Indra for worship of the Gods, Indra while sacrifice proceeds, Indra as warriors in the battle-shock we call, Indra that we may win the spoil.

अध्याय 20

श्लोक 128.4

यश्च॑ प॒णि रघु॑जि॒ष्ठ्यो यश्च॑ दे॒वां अदा॑शुरिः ।धीरा॑णां॒ शश्व॑ताम॒हं तद॑पा॒गिति॑ शुश्रुम

yaśca paṇi raghujiṣṭhyo yaśca devāṃ adāśuriḥ | dhīrāṇāṃ śaśvatāmahaṃ tadapāgiti śuśruma

हिन्दी अर्थ

का वर्णन है । “श्रथवंवेद मे २० वां काण्ड समाप्त" । “यह भ्रथवंवेद का सूचीपत्र समाप्त हुभ्रा" । इत्यादि; “इदं राधो विभु प्रभु" ( भयं ° १३५।९ ) इत्यादि; - इति (३) तथा“अथरववेदीय वृहदनुक्रमणी"" मे भी “इदं जनासुक्त १२७) , दिप्पणी--( १) “भद्रं ण वचसा वयम्” से पूवं “इदं जना उप भुत" (भ्रथवं० १२७।१) यह पाठ भी चादिये था जो किसी कारण छूट गया है,

English

With might hath Indra spread out heaven and earth, with power hath Indra lighted up the Sun. In Indra are all creatures closely held; in him meet the distilling

अध्याय 20

श्लोक 128.5

ये च॑ दे॒वा अय॑ज॒न्ताथो॒ ये च॑ पराद॒दिः ।सूर्यो॒ दिव॑मिव ग॒त्वाय॑ म॒घवा॑ नो॒ वि र॑प्शते

ye ca devā ayajantātho ye ca parādadiḥ | sūryo divamiva gatvāya maghavā no vi rapśate

हिन्दी अर्थ

जनाः उप भुत” से होता है, न कि ““भग्रेण वचसा वयम्'" से 1 ३१४ अयेवेद-भाष्य (कुन्ताप-सूक्त) का० २० ।.सू° १२७ मन्व तकं का विषय निदेश कर दिया है परन्तु इन सक्तो के मध्य में

English

Soma drops. Though, Indra, thou art called by men eastward and westward, north and south, Thou chiefly art with Anava and Turvasa, brave Champion! urged by men to come.

अध्याय 20

श्लोक 128.6

योना॒क्ताक्षो॑ अनभ्य॒क्तो अम॑णि॒वो अहि॑र॒ण्यवः॑ ।अब्र॑ह्मा॒ ब्रह्म॑णः पु॒त्रस्तो॒ता कल्पे॑षु सं॒मिता॑

yonāktākṣo anabhyakto amaṇivo ahiraṇyavaḥ | abrahmā brahmaṇaḥ putrastotā kalpeṣu saṃmitā

हिन्दी अर्थ

सूची" मँ ्रौर मिलता है । यथा-“यद्वा वाणीत्यादि (सूक्त १४२्गन् ४); (जनाः ) है परजाजनो ! (ईदम्) यह (उप श्रुत) ध्यानपूवैक सुनो, - हम श्रादान करते है, ग्रहणं करते है । लंगभग ६० हजार हों । इस महासंख्या केदारा महात्मानो के -महासद्गुणों का कथन अभिप्रेत हो । थवा “षष्टि” पौर “सहसा"शब्दों को यौगिकाथं मान लिया जाय । षष्टिम् सांसारिक भोगो की दृष्टि से मानो सोए हृए रहना; गौर “सहला” अर्थात् योगाभ्ासं भे बलोपा्जन करते हए साहृस-

English

Or, Indra, when with Ruma, Rusama, Syāvaka, and Kripa thou rejoicest thee, Still do the Kanvas bring praises, with their prayers, O Indra, draw thee hither: come.

अध्याय 20

श्लोक 128.7

य आ॒क्ताक्षः॑ सुभ्य॒क्तः सुम॑णिः॒ सुहि॑र॒ण्यवः॑ ।सुब्र॑ह्मा॒ ब्रह्म॑णः पु॒त्रस्तो॒ता कल्पे॑षु सं॒मिता॑

ya āktākṣaḥ subhyaktaḥ sumaṇiḥ suhiraṇyavaḥ | subrahmā brahmaṇaḥ putrastotā kalpeṣu saṃmitā

हिन्दी अर्थ

का० २०। सू० १२७ -अथेवेद-माष्य (कुन्ताप-सुक्त) ७हैद. उष्टा यस्व ्बाहणें बुधुष॑न्तो दिहैषं । वहन करते, श्रौर उसे ( नि जिहीडते ) नितरां सक्रिय रखते है, जेसे कि (उपस्पृशः) सूर्य॑स्पर्शीं (दिवः) चयोतमान किरणे ( ईषमाणाः ) गति करती .

English

Over the three great distances, past the Five Peoples go thy way, O Indra, noticing our voice. Send forth thy ray like Sūrya: let my songs attract thee hither- ward.

अध्याय 20

श्लोक 128.8

अप्र॑पा॒णा च॑ वेश॒न्ता रे॒वां अप्रति॑दिश्ययः ।अय॑भ्या क॒न्या कल्या॒णी तो॒ता कल्पे॑षु सं॒मिता॑

aprapāṇā ca veśantā revāṃ apratidiśyayaḥ | ayabhyā kanyā kalyāṇī totā kalpeṣu saṃmitā

हिन्दी अर्थ

- हई, सूखूपी (रथस्य वर्मे) रथ के ढांचे को, (निजिहीडते) नितरां सक्रियः रखती रहै - (गले मन्व से सम्बन्ध) । (एषः) यहं वह महात्मा है जिखकी कि ( इषाय ) इच्छापूर्तिं के लिये (मामहे) हम प्रजाजन पूजासरूपःमे मटं देते है--( शतं निष्कान् (दाहे) + ताराः व संतरणे) । बधूमन्तः--वध् वहति सुखानि प्रापयति

English

Like waters gathering to the vale. With Indra splendid feasts be ours enriched with ample spoil, wherewith,

अध्याय 20

श्लोक 128.9

सुप्र॑पा॒णा च॑ वेश॒न्ता रे॒वान्त्सुप्रति॑दिश्ययः ।सुय॑भ्या क॒न्या कल्या॒णी तो॒ता कल्पे॑षु सं॒मिता॑

suprapāṇā ca veśantā revāntsupratidiśyayaḥ | suyabhyā kanyā kalyāṇī totā kalpeṣu saṃmitā

हिन्दी अर्थ

की शक्तियां । वष्मं = 80०५, 017) भ्ापटे ) । जिहीदते--हिडि गतौ । इषाय यदि प्रजाजनों के भले के लिये महात्मा लोग, उपयु क्त प्रकार की सुवणं, रजत, मोतियों त्रा भन्य रत्नो के हार । ७६८. वच्य॑सं रेभं वच्यख बके न पक्वे शकुनैः

English

Wealthy in food, we may rejoice. Like thee, thyself, the singers’ friend, thou movest as it were, besought, Bold One, the axle of the car.

अध्याय 20

श्लोक 128.10

परि॑वृ॒क्ता च॒ महि॑षी स्व॒स्त्या च यु॒धिंग॒मः ।अना॑शुर॑श्चाया॒मी तो॒ता कल्पे॑षु सं॒मिता॑

parivṛktā ca mahiṣī svastyā ca yudhiṃgamaḥ | anāśuraścāyāmī totā kalpeṣu saṃmitā

हिन्दी अर्थ

ईहवर सदृश सर्वोपकार करते हैँ । आयं: = ईंहवरपुत्रः (निर० .६।५।२६) । वासः = वस्यतेखय दासयति कर्माणि ( निर० २।५।१७ ) । भतः दास ओौर भ्रायं का भेद जन्ममूलक नहीं; अपितु गुणकर्ममूलक हं । वृषाकपिं भ्र्थात् उपासंक जीवात्मा कहता है कि है परमेदवर !

English

Law: I was born like unto the Sun. After the lore of ancient time I make, like Kanva, beauteous songs,

अध्याय 20

श्लोक 128.11

वा॒वा॒ता च॒ महि॑षी स्व॒स्त्या च यु॒धिंग॒मः ।श्वा॒शुर॑श्चाया॒मी तो॒ता कल्पे॑षु सं॒मिता॑

vāvātā ca mahiṣī svastyā ca yudhiṃgamaḥ | śvāśuraścāyāmī totā kalpeṣu saṃmitā

हिन्दी अर्थ

(वि योजना) वियोग (कति रिवत्). कितने युगो तक रहेगे ? । परमेश्वर ३१०. भरथवेवेद-माष्य का०.२०। सु० १२६ उत्तर देता है कि (वृषाकपे) है वृषाकपि ! तू (नेदीयसः गृहान्) नजदीकी . रि्तेदारो, भौर (भस्तम्). गृहकृत्यो मे ही (उप एहि) रहता ह इसलिये

English

And Indra’s self gains strength thereby. Whatever Rishis have not praised thee, Indra, or have lauded thee,

अध्याय 20

श्लोक 128.12

यदि॑न्द्रा॒दो दा॑शरा॒ज्ञे मानु॑षं॒ वि गा॑हथाः ।विरू॑पः॒ सर्व॑स्मा आसीत् सह य॒क्षाय॒ कल्प॑ते

yadindrādo dāśarājñe mānuṣaṃ vi gāhathāḥ | virūpaḥ sarvasmā āsīt saha yakṣāya kalpate

हिन्दी अर्थ

भ्रघूरा उपासक उपासना तो करता रहता है, परन्तु गृहबन्धुओों भौर गृह्यकृत्यों मे प्रायः ममन रहता है । इसलिये अधूरा उपासक चिरकाल से मरुभूमि बना पड़ा है, उस पर ब्राह्मी भानन्दरस को वर्षा नहीं होने पाई । वह परमेदवर मे पता है कि मेरा भ्रौर आपका पारस्परिक वियोग कबः .. तक रहेगा: । परमेदवर उसे उत्तर देता है कि जब तक तेरा मन गृहबन्धुभ्रों

English

By me exalted wax thou strong. O Vritra slayer, we were thought slow and unready for the fray: Yet once in thy great bounty may we have delight, O Hero, after praising thee.

अध्याय 20

श्लोक 128.13

त्वं वृ॑षा॒क्षुं म॑घव॒न्नम्रं॑ म॒र्याकरो॒ रविः॑ ।त्वं रौ॑हि॒णं व्यास्यो॒ वि वृ॒त्रस्याभि॑न॒च्छिरः॑

tvaṃ vṛṣākṣuṃ maghavannamraṃ maryākaro raviḥ | tvaṃ rauhiṇaṃ vyāsyo vi vṛtrasyābhinacchiraḥ

हिन्दी अर्थ

मरौर गृह्यकृत्यो मे मग्न रहेगा, गौर जब तक तूमेरी प्रोरमनको नहीं ७६२. पुनरेहि षुषाकपे सुविता कंरपयाबहै । (वृषाकपे) है वृषाक्रपि ! (पुनः) तू बार-बार (एहि). मुक परमे- ¦ इव्ररं की भ्रोर भ्रा, ताकि हम दोनों एक-दूसरे के ( सुविता सुवितानि ) सांसारिक-मोगो के स्वप्नो को विष्ट कर देगा, तत्र तू (पथा) -इस योग-

English

Drink Soma, Lord of Bays, and let it cheer thee: Indra, the stone, like a well-guided courser, Directed by the presser’s arms hath pressed it.

अध्याय 20

श्लोक 128.14

यः पर्व॑ता॒न् व्य॑दधा॒द् यो अ॒पो व्य॑गाहथाः ।इन्द्रो॒ यो वृ॑त्र॒हान्म॒हं तस्मा॑दिन्द्र॒ नमो॑ऽस्तु ते

yaḥ parvatān vyadadhād yo apo vyagāhathāḥ | indro yo vṛtrahānmahaṃ tasmādindra namo'stu te

हिन्दी अर्थ

का०२०। सू० १२६ भयर्ववेद-भाष्य , ३ ११ के चक्र । इन्दः ऊपर के घर कंहा गया है एक साथ, (विदतिम्) शारीरिक २० धटकों को ( ससूव ) जन्म देती है ।

English

So let the draught of joy, thy dear companion, by which, O Lord of Bays, thou slayest foemen, Delight thee, Indra, Lord of princely treasures.

अध्याय 20

श्लोक 128.15

पृ॒ष्ठं धाव॑न्तं ह॒र्योरौच्चैः॑ श्रव॒सम॑ब्रुवन्।स्व॒स्त्यश्व॒ जैत्रा॒येन्द्र॒मा व॑ह सु॒स्र॑म्

pṛṣṭhaṃ dhāvantaṃ haryorauccaiḥ śravasamabruvan| svastyaśva jaitrāyendramā vaha susram

हिन्दी अर्थ

जब तक कि जीवात्मा मुक्ति नहीं पा लेता । इसके द्वारा वृषाकपि को यह् - उपदेश दिया हं कि परमेकश्वरोय-देन को तू परमेदवरापितं करदे, तभी सकेगा । वंहिक भोग भ्रौर देह विनाशी है, इस लिये इनका भोग भौर अग्रसर होने मे सहायक हों ' तथा साथ ही है वृषाकपिं ! तु उस मातृश्क्ति का सदा कल्याण चाहा करः जिसने दुःख-कष्ट सहकर तुभ शारीरिक-जन्म दिया हं, ताकि तु कमो के फलों को भोगता हृभा मोक्ष पा सके । मन्त्र १

English

Mark closely, Maghavan; the words I utter, this eulogy recited by Vasishtha:

अध्याय 20

श्लोक 128.16

ये त्वा॑ श्वे॒ता अजै॑श्रव॒सो हार्यो॑ युञ्जन्ति॒ दक्षि॑णम्।पूर्वा॒ नम॑स्य दे॒वानां॒ बिभ्र॑दिन्द्र महीयते

ye tvā śvetā ajaiśravaso hāryo yuñjanti dakṣiṇam| pūrvā namasya devānāṃ bibhradindra mahīyate

हिन्दी अर्थ

निभालय=देख.।॥ तथा “मल्” परिभाषणे । पद्यु : पशुं का == 119 110 (भ्रापटे) । परशुका स्वायं कन्.)। .. कम्पा देनेवाला, तथा इन्दियो का स्वामी कहकर उस का वं्णेनं मोक्षाधि- . वह ह “वृषा” भर्थात् कामुकता के कारण वीयं की वर्षा करनेवाला, “कपि

English

Accept the prayers I offer at thy banquet. Indra with all thy saving helps give us assistance, Lord of Power For after thee we follow even as glorious bliss, thee, Hero, finder-out of wealth.

अध्याय 20

श्लोक 129.1

खिलानि ।ए॒ता अश्वा॒ आ प्ल॑वन्ते

khilāni | etā aśvā ā plavante

हिन्दी अर्थ

गान गा, (वच्यस्व) बार-बार गा; (न) जसे कि (शकुनः) पक्षी (पक्वे चहचहार्तीं बोली द्वारा मानो परमेरवर कैं गीत गाताहै। ( नष्टे) विनाशकालं के उपस्थित हो जाने पर तो (जिह्वा) जबान ( चर्चरीति ) लडखड़ा जाती है, (न) जसे कि (भुरिजोः) भरूरिवेगवाले रष्व के (क्षुरः) पर ( इव ) मानो लडखड़ा जाते है । भ्रभिप्राय यह है कि जब-तक मृत्युकाल उपस्थित नहीं होता, तब तकं जिह्वा से तु परमेरवर कै स्तुतिगान गा ले, विनादा-काल के उपस्थित हो जाने पर चाहते हृए मी जिह्वा स्तुत्तिगान में असमथं होती है । भुरिजोः = भूरि =भररि+जु गतौ, षष्ठ कवंचन 1 क्षुरः=खुर, अदव के अमोतुपुत्रका एषाम॒मोतं गाहसे ॥५॥

English

That, Satakratu, thou to grace and please thy praisers, as it were, Stirrest the axle with thy strength.

अध्याय 20

श्लोक 129.2

प्र॒ती॒पं प्राति॑ सु॒त्वन॑म्

pratīpaṃ prāti sutvanam

हिन्दी अर्थ

महाभारत के समकाल के है, तो भी वेदों पर कोई एतिहासिक आक्षेप नहीं परमेश्वर की वेदवाणियां हमे प्रप्त रहें । (यः पृर्षः) जो पुरुष (सभयः) समायो मे जाने योग्य तथा सभ्य

English

What then? As men whose fields are full of barley reap the ripe corn removing it in order, So bring the food of those men, bring it hither, who come not to prepare the grass for worship.

अध्याय 20

श्लोक 129.3

तासा॒मेका॒ हरि॑क्निका

tāsāmekā hariknikā

हिन्दी अर्थ

विदवासंघात रादि द्वारा हिसा करता है उसे, (यत् ज्येष्ठः) तथा जो बडा (अधराक् इति) नीच (राहुः) कहते है । पुरुष का (पुत्रः) पुत्र; ( दाधुषिः ) पापों का घर्षण करनेवाला ( भवति )

English

Indra for his friendship. Ye, Asvins, Lords of Splendour, drank full draughts of grateful Soma juice,

अध्याय 20

श्लोक 129.4

हरि॑क्नि॒के किमि॑च्छासि

hariknike kimicchāsi

हिन्दी अर्थ

होता हं-( यत् ) जो यह ( काम्यं वचः ) 'सुन्दर कथन है, ( तत् ) उसे ( विप्रः ) मेधावी पुरुष भी, ( भव्रवीत् उ ) निश्चयपूवंक कहते है, गौर (तत्) उसे, (गन्धवंः) वेदवाणी के विद्धान् भी कहते है । ७८२. यं पणि रषुंजिषठयो यथं देवा अद्रिः । (यःच) रौर जो (पणिः) व्यापारी है, परन्तु ( रधुजिष्ठयः ) हे

English

And aided Indra in his work with Namuchi of Asura birth. As parents aid a son, both Asvins, Indra, aided thee with their wondrous powers and wisdom

अध्याय 20

श्लोक 129.5

सा॒धुं पु॒त्रं हि॑र॒ण्यय॑म्

sādhuṃ putraṃ hiraṇyayam

हिन्दी अर्थ

श्नौर जो (देवान्) देवकोटि के महात्मा को ( श्रदादुरिः) दान नहीं देता, काल के बुद्धिमान के इस कथन को (भ्रहम्) ने तथा हमने ( शश्र म ) (ये च) भ्रौर जो (देवाः) देवकोटि के व्यापारी ( भरयजन्त ) यज्ञ-

English

When thou, with might, hadst drunk the draught that glad- dens, Sarasvati, O Maghavan refreshed thee. Indra is strong to save, rich in assistance: may he, possessing all, be kind and gracious.

अध्याय 20

श्लोक 129.6

क्वाह॑तं॒ परा॑स्यः

kvāhataṃ parāsyaḥ

हिन्दी अर्थ

यागक्रतेहै (येच) भरौरजो ( पराददिः) दूसरोंको दानदेतेहै, वे . ३२२ मरथरवेवेद-भाष्य(कुन्ताप-सूक्त) का० २ ०। सूु० रम ष (मघवानः) धनिकं पुरूष (वि रप्शते) कीतिमान् हो जाते है, (इव जेते .. (यः) जिसने (भनाक्ताक्षः) अपनी भांखो में पवित्रता का अञ्जन हृदयवाला नहीं, ( ब्रह्मणः ) तथा चारों वेदों के ज्ञाता का ( पृचरः ) पुत्र

English

May he disperse our foes and give us safety, and may we be the lords of hero vigour. May we enjoy his favour, his the holy: may we enjoy his blessed loving-kindness.

अध्याय 20

श्लोक 129.7

यत्रा॒मूस्तिस्रः॑ शिंश॒पाः

yatrāmūstisraḥ śiṃśapāḥ

हिन्दी अर्थ

ये सब (संमिता) एक समान माते गए है। माने गये है । सुभ्यक्तः = सु+ पभ्यक्तः । अभ्या ङन्या कटयाणी तोता कर्वेषु संमिता ॥८॥

English

May this rich Indra, as our good protector, drive off and keep afar all those who hate us. Men have abstained from pouring juice; nor counted Indra as a God.

अध्याय 20

श्लोक 129.8

परि॑ त्रयः

pari trayaḥ

हिन्दी अर्थ

ये सामाजिक उपयोगो के भ्रयोग्य है । कार. ९० । सू० १२८ अथववेद-साष्य (कुन्ताप-सूक्त) - ३२३ सुव॑स्वा कन्या. करथाणी तोता कलेषु संमिता ॥९॥ खन (कल्पेषु) कल्प-कल्पान्तरो मे ( संमिता ) एक समान माने गए है भर्थात् सामाजिकं उपयोग के भनुकूल है । ।

English

Where at the votary’s store my friend Vrishākapi hath drunk his fill. Supreme is Indra over all.

अध्याय 20

श्लोक 129.9

पृदा॑कवः

pṛdākavaḥ

हिन्दी अर्थ

(गुधिगमः) योद्धा, (च) भीर (भ्रनाशुरः) का्यो.को शीघ्र न करनेवाला श्ाद्धरंभायामी होता रपेष संमिर्ता ।॥११॥ (च) गौर (वावाता) वायु की सरह् सक्रिय (महिषो) महागण- महिषी = मन्त्र ७तठ मे दुराचारिणी 1 ‰0 पाका 8 ४८०)

English

Thou, Indra, heedless passest by the ill Vrishākapi hath wrought; Yet nowhere else thou findest place wherein to drink the Soma juice. Supreme is Indra over all.

अध्याय 20

श्लोक 129.10

शृङ्गं॑ ध॒मन्त॑ आसते

śṛṅgaṃ dhamanta āsate

हिन्दी अर्थ

(रेभासः) है स्तुति करनेवालो ! विनादकालं के उपस्थित हो जाने पर. (मनीषा) बुद्धि भी कभ्पित हो जाती है, (इव) जसे कि (वृषा) वर्षा दवारा (गावः) गौए' (प्र ईरते) कम्पित हो जाती है। तथा (एषाम्) इन सहाय होकर भरासते) बेठे रहते है, ( इव ) जैसे कि इन की ( गावः) . गौए, सेवाद्युश्रूषा के अभाव हो जाने के कारण, निःसहाय बैठी रहती है ।

English

This is the Godhead, this the might of Sūrya: he hath with- drawn what spread o’er work unfinished. When he hath loosed his horses from their station, straight over all night spreadeth out her

अध्याय 20

श्लोक 129.11

अ॒यन्म॒हा ते॑ अर्वा॒हः

ayanmahā te arvāhaḥ

हिन्दी अर्थ

देवत्रमां बाच भीणीदीषु्नां भीरस्तारम् ॥६॥ का० २० । सूु° १२७ भ्रथवेवेद-भाष्य (कुन्ताप-सूक्त) ३१७ प्रदान केर । तथा ( देवत्रा ) देवकोटि . के महात्माभो मे रहृत। हुभा तु (श्रीणीहि) परिपक्व करले, ( इषुः ) भ्रौर वाण जसे रात्रो का विना करतादहै, वसतू कामादि का विनाश करके, (वीरः ना) ओर धमंवीर नेता बन कर, (तारम्) मावसागर से तै रानेवाले परमेश्वर को प्राप्त कर ।

English

garment. In the sky’s lap the Sun this form assumeth for Mitra and for

अध्याय 20

श्लोक 129.12

स इच्छकं॒ सघा॑घते

sa icchakaṃ saghāghate

हिन्दी अर्थ

सवंजनहितकारी, (वैदवानरस्य) सब नर-नारियों मेँ वतमान, (परिक्षितः) भक्तिरस से भीनी स्तुतियां किया करो । (परिच्छिन्न) सांसारिक-भावनाभ्रों से पूणंतया कटा होकर उपासक

English

Vāruna to look on. His bay steeds well maintain his power eternal, at one time bright and darksome at another. With what help will he come to us, wonderful, ever-waxing

अध्याय 20

श्लोक 129.13

सघा॑घते॒ गोमी॒द्या गोग॑ती॒रिति

saghāghate gomīdyā gogatīriti

हिन्दी अर्थ

कृण्वेन्-) समग्र पृथिवी को भ्रपना धर बनाकर रहताहै। उसके ३१८ प्रथवंवेद-भाष्य (कुन्ताप-सूक्त) का० २०॥ सु° १२७ . अपने पति से (वि पृच्छति) विशेतया पूछती हँ कि है पति ! ( कतरत् ) कौनसी वस्तु मँ सेवाथं (तरे) भ्रापके लिये (भ्रा हराणि) लाऊ, (परिशुतम्) मानुष शासित राष्ट न होता हुभां परमेदवर द्वारा शासित राष्ट बन जाता है, जिसमे किं पति-पत्नी"ःका पारस्परिक व्यवहार प्रेममय रहता है । परमेदवर के नियमों द्वारां . चासित राष्ट की एकांकी महाभारते इस प्रकार मिलती है 1 यथा- ।

English

Friend, With what most mighty company?

अध्याय 20

श्लोक 129.14

पुमां॑ कु॒स्ते निमि॑च्छसि

pumāṃ kuste nimicchasi

हिन्दी अर्थ

पत्नी पत्तिं को कहती है कि है पति ! (वस्वः). घर की सब निवास- ७७५. इन्रः कारुम॑बूबुधदुतिष्ड वि च॑रा जनम् । ( इनदरः ) परमेदवर ( कारम् ) भपने स्तोता को ( भरबृबधत्ः

English

What genuine and most liberal draught will spirit thee with juice to burst. Open e’en strongly-guarded wealth? Do thou who art protector us thy friends who praise thee

अध्याय 20

श्लोक 129.15

पल्प॑ बद्ध॒ वयो॒ इति॑

palpa baddha vayo iti

हिन्दी अर्थ

भ्रथवेवेद-भाष्य ( कुन्ताप-सूक्त) ३१६ कायं को करता रह । (स्व॑ः इत्) सभी प्रजाजन (ते) तु (पृणात्) पालेगि, . भररिः = ईदवरः(निरु° ५।२।७)। काः स्तोता (निघ ० ३।१६)। ( पुरुषाः ) पौरुष-सम्पत् पुरुष पैदा हों । ( इह उ ) तथा इस रणष्टर मे

English

With hundred aids approach us. We will, with Indra and all Gods to help us, bring these existing worlds into subjection.

अध्याय 20

श्लोक 129.16

बद्ध॑ वो॒ अघा॒ इति॑

baddha vo aghā iti

हिन्दी अर्थ

परिपुष्ट वैश्य (अपि) भी (नि षीदति) रहँ, निवास करे । (इन्द्र) है परमेदवर !. आप द्वारा शासित राष्ट मे ( इमा गावः ) गौए (न रिषन् ) हिसित न हों, (उ) श्नौर ( भ्रासाम् ) इन गौभो का

English

Our sacrifice, our bodies, and our offspring shall Indra form together with the Ādityas. With the Ādityas, with the band of Maruts, may Indra be pro- tector of our bodies. As when the Gods came after they had slaughtered the Asuras, keeping safe their Godlike

अध्याय 20

श्लोक 129.17

अजा॑गार॒ केवि॒का

ajāgāra kevikā

हिन्दी अर्थ

के साथ (अ्रमित्रयुः) भ्रमित्ता चाहनेवाला (जनः)-जन ( मा ईदात ) इन हे परमेदवर ! ( नः ) हमसे श्राप ( न उप रमसि ) उपरत नहीं हम (सूक्त न) सत्य भौर प्रिय ( वचसा ) वचनोवाले हों । ( वयम् ) हम ३२० मथववेद-भाष्य (कृन्ताप-सूक्तं) का० २० । सू० १२०

English

nature, Brought the Sun hitherward with mighty powers, and looked about them on their vigorous

अध्याय 20

श्लोक 129.18

अश्व॑स्य॒ वारो॑ गोशपद्य॒के

aśvasya vāro gośapadyake

हिन्दी अर्थ

डालनेवासी (गिरः) वेदवाणियां (वनात्) हमे प्राप्त रह. ताकि हम (कदा . चन) कमी भी (न रिष्येम) दुःखों के भागी न बनें । महाभारत कालीन परीक्षित राजा कां वणन मानते है। यह उन की भूल

English

Godhead. With this may we obtain strength God-appointed, and joy with brave sons through a hundred winters.

अध्याय 20

श्लोक 129.19

श्येनी॒पती॑ सा

śyenīpatī sā

हिन्दी अर्थ

द्वारा, रेतिहासिक व्यक्ति,““कुरु के वंशजं कौरव" का वणंन मानते है, जो किं . पदं का बहुवचन है । “कुरवः का भ्रथं है 'ऋतिवजः'' (निच० ३।१८) । उणादि कोष १।२४ मे “कुर“की व्युत्पत्ति की है - "यः करोतिर्येन वासः -परीक्षित राजा के राज्य के सम्बन्ध मेहूुभामीदहै,यानहीं? फिरमी.

English

Drive all our enemies away, O Indra, the western, mighty Con- queror, and the eastern, Hero, drive off our northern foes and southern, that we in thy wide shelter may be joyful.

अध्याय 20

श्लोक 129.20

अ॒ना॒म॒योप॑जि॒ह्विका॑

anāmayopajihvikā

हिन्दी अर्थ

भक्तिरसवाला, (अथ) जीर (यज्वा) देव-कोटि के लोगों की पुजा-सत्कार करता, सत्संगी भौर दानी टै (तत्) उसे (च) भौर (सूर्यम्) सूयं को, (भमु रिलादसः ) दिस्रभावनाभ्रौं से रहित उन ( देवाः ) दिव्य पुरुषों ने धाक्) प्रथम कोटि का (गकल्पयन्) माना है । का० २० । सु° १२८ भ्रथवेवेद-माष्य (कुन्ताप-सूक्त) ३२१

English

Men come not with one horse at sacred seasons; thus they obtain no honour in assemblies. Sages desiring herds of kine and horses strengthen the mighty

अध्याय 20

श्लोक 130.1

खिलानि ।को अ॑र्य बहु॒लिमा॒ इषू॑नि

khilāni | ko arya bahulimā iṣūni

हिन्दी अर्थ

नाल (दीघर) +र; वर्थात् भतिकीच्र कायं करनेवाला । अयामी अ अम् (उपरमे) ।. उपरम = भराराम, का्वं-विमूखता । ॑ निरमुः सता जासीद् सह याय कर्पते ॥११॥ कर्मो के अनुसार, (वि गाहथाः) विविध ॒योनियो मे विलोड़ा हे, वह प्ले “मह् अकारान्त नपुसके; यथा-“अहानि"" अथवं° २०।११।६)। . जो वह भ्रव (सहं) आप का संगी बन कर, (यक्षाय ) आप-पूजनोय की प्राप्ति भ . ¦ ¦

English

What hath he done to injure thee, this tawny beast Vrishākapi, With whom thou art so angry now? What is the votary’s food- ful store? Supreme is Indra

अध्याय 20

श्लोक 130.2

को असि॒द्याः पयः॑

ko asidyāḥ payaḥ

हिन्दी अर्थ

का० २०।सु० १२९ भरषववेद-माष्य (कुन्ताप-ूक्त) ३१९ ू बद्ध) है शरीर में बन्धे हए ! ( वः ) तुम सन इसलिये ररीरोभें बन्धे हए हो, चूँकि तुम (अघा इति) पापको के करनेवाले हो । ८११. अजागर केषिका ॥१७॥ = (्रजागार)हि प्रकृति के बने घरवाले जीवात्मन् ! (केविका) प्रकृति तो तुम्हारी सेविका है, परन्तु तुम्हारी स्वामिनी बनी दई है । उप° ४।५) कविका = केव सेवने । ८१२. अश्व॑स्य वारो गोश्चपद्यके ॥१८॥ .

English

Never, Indrāni have I joyed without my friend Vrishākapi, Whose welcome offering here, made pure with water, goeth to the Gods. Supreme is Indra over all.

अध्याय 20

श्लोक 130.3

को अर्जु॑न्याः॒ पयः॑

ko arjunyāḥ payaḥ

हिन्दी अर्थ

रूपी रोगों से रदित व्यक्तयो को भी जिह्वा से चाट जनेवाली सर्पिणी है। ३३० भरथवेवेद-भाष्य (कृन्ताप-मूक्त) का० २० । सु० १३४ उपज्ञिह्धिका सम्भवतः ““उपजीकाः' बीमक , अथव ०.२।३१४

English

Supreme is Indra over all. Fifteen in number, then, for me a score of bullocks they prepare. And I devour the fat thereof: they fill my belly full with food.

अध्याय 20

श्लोक 130.4

कः का॒र्ष्ण्याः पयः॑

kaḥ kārṣṇyāḥ payaḥ

हिन्दी अर्थ

८१५. को अय॒ बहुकिम्" इषूनि ॥१।। कौन क्लेशो-कष्टो के ( बहुलिमा ) नानाविध ( इषूनि ) वाण तुक पर भञ्जनः शुक्लः (उणादि कोषं ३।५८, वेदिकं .यन्त्रालय, अजमेर) भरथवेवेदे-माष्य (कुन्ताप-सूक्त) ३३१

English

Supreme is Indra over all. Like as a bull with pointed horn, loud bellowing amid the herds,

अध्याय 20

श्लोक 130.5

ए॒तं पृ॑च्छ॒ कुहं॑ पृच्छ

etaṃ pṛccha kuhaṃ pṛccha

हिन्दी अर्थ

भरौर.उसं (कुहाकम्) विस्मय मे डाल देनेवाले सदगुरु से ( पृच्छ ) पुछ, जो किं (पक्वकम् परिपक्व बुदधिवाला है । कूहाकम् = कुहां विस्मापनं करोतीति । कृहथति विस्मयं कारथः तीति “कुहकः” (उणादि कोष २।३८), रामलाल कपूर टस्ट । भ्रौर एसे सद्गु से प्राथना करो कि है सदगुरो ! (कुभिः) पाधिव

English

Sweet to thine heart, O Indra, is the brew which she who tends thee pours. Supreme is Indra over all. Indrāni speaks. Non ille fortis (ad Venerem) est cujus mentula laxe inter femora dependet;

अध्याय 20

श्लोक 130.6

कुहा॑कं पक्व॒कं पृ॑च्छ

kuhākaṃ pakvakaṃ pṛccha

हिन्दी अर्थ

(यतिस्वभिः) जितने प्रकार के घन है, उन से (नः) हमे (यवा न= यव, यवय) दहि सदंगुरो ! राप (कूपायकुः) कुत्सित करमो से रक्षा करनेवाले है, सलिये (भ्रकुप्यन्तः) हम कोप-करोष भ्रादि से रहित हो गये है । कुपायकुः == कु (कुत्सित-कमं) + चाय (पा रक्षणे) कुः (करनेवाला

English

fortis vero estille cujus, quum sederit, membrum pilosum se extendit. Super omnia est Indra.

अध्याय 20

श्लोक 130.7

यवा॑नो यति॒ष्वभिः॑ कुभिः

yavāno yatiṣvabhiḥ kubhiḥ

हिन्दी अर्थ

- कायुः पाति रक्षति स पायुः रक्षकः (उणादि कोष ११), रामलाल कपर हे सदुगुरो ! श्राप (आमणकः) सवत्र सुपदे करते है, (मणत्सकः) (देव) है गुरुदेव ! (तु भ्रप्रतिसूर्यं) भप का मुकाबिला तो यं मोः

English

Indra speaks. Non fortis est ille cujus, quum sederit, membrum pilosum se extendit: fortis vero est ille cujus mentula laxe inter femora dependet. Super omnia est Indra. O Indra, this Vrishākapi hath found a slain wild animal,

अध्याय 20

श्लोक 130.8

अकु॑प्यन्तः॒ कुपा॑यकुः

akupyantaḥ kupāyakuḥ

हिन्दी अर्थ

सुवं तो प्राकृतिक-भकराश देकर भ्राखों का उपकार करता है, ओौर ८२५. एनंथिपक्तिका. इवि; ॥ ११।। हे गुख्देव ! भ्रापके सदुपदेशो द्वारा, हमारे (एनः-चि-पंक्तिका ) पाषों गई है.। हमारे संचित-पाप-विनष्ट हो गए हं) (नः) हम उपासको के ( सखा ) मित्रगण भी, (त्वा भरि) तेरे

English

Dresser, and new-made pan, and knife, and wagon with a load of wood. Supreme is Indra over all.

अध्याय 20

श्लोक 130.9

आम॑णको॒ मण॑त्सकः

āmaṇako maṇatsakaḥ

हिन्दी अर्थ

हमारे सखा (वशायाः) संसार को वद भे रखनेवाली जगन्माता के , श्रते है । वशा = परमात्म-माता ।(ञ्रथवं० . भ्रथं है - “सब संसार को वश मेँ रखनेवालाः पिता-परमे्व रः । मन्त्र ८२९ में “वशा” द्वारा परमेदवर को मातुरूप मे दर्शाया है 1 हे कामवासनागो ! (दरावेदुमयम्) सांसारिक भोगल्पी मदिरा की

English

Distinguishing the Dāsa and the Arya, viewing all, I go. I look upon the wise, and drink the simple votary’s Soma juice. Supreme is Indra over all.

अध्याय 20

श्लोक 130.10

देव॑ त्वप्रतिसूर्य

deva tvapratisūrya

हिन्दी अर्थ

के लिये (कल्पते) समर्थं हो गयादहै। । परमेदवर को हृदय में घारण कर, जंसे.कि विजयी व्यक्ति गले में (सुसजम्) दाशराज्ये-एक-एक इन्द्रिय का भी राज्य यदि जीवनमें जाता है, तो जीवन सुखी रौर पवित्र नहीं रहता । यदि १० इन्द्रियों का

English

over all. Soon may the hound who hunts the boar seize him and bite him in the ear, O Indra, that Vrishākapi whom thou protectest as a friend.

अध्याय 20

श्लोक 130.11

एन॑श्चिपङ्क्ति॒का ह॒विः

enaścipaṅktikā haviḥ

हिन्दी अर्थ

तब वहु .नामा जन्मों मे पूरवंकृत-कमो के फल भोग तेने के पदचात् शुद्ध-पवित्र ) है भुयो केस वृत्तिरयोवाले, तथा (भजैश्रवसः) रजोगुण भ्रौर तमोगुण दारा अजित कीति (वुक्स्य ) उपासक के पाप-वृत्र का (शिरः) सिर ( भरभिनत् )-भ महीयते) पू । । रौर दृन्दरियो को शरीररथ के “हय” भरात् भदवर कहा है । इसलिये मन या

English

Supreme is Indra over all.

अध्याय 20

श्लोक 130.12

प्रदुद्रु॑दो॒ मघा॑प्रति

pradudrudo maghāprati

हिन्दी अर्थ

। चित्त भी अदव है, भौर मन या चित्त की विविध-वृत्तियां “भदवाः” हें । न्निय जलो को ( व्यगाहथाः ) विलोदितं अर्थात् तरंगित किया भौर गर्जवाया 1 (यः) जिस परमेष्वर ने (वृत्रहा) पापवृत्ो का हनन किया,

English

Kapi hath marred the beauteous things, all deftly wrought, that were my joy. In pieces will I rend his head; the sinner’s portion shall be woe. Supreme is Indra over all.

अध्याय 20

श्लोक 130.13

शृङ्ग॑ उत्पन्न

śṛṅga utpanna

हिन्दी अर्थ

३२६ भयवंवेद-भाष्य (कुन्तोप-सूक्त) कार २० । सुऽ. १२९ ये चित्तवृत्तियां शरीर-रथोँ का वंहन करती हैँ । मनुस्मृति मेँ कहा है कि आवना मे (प्राति भर देती हैः प्रातिनन्त्रा पुरणे। हेरि किनका = हरि(मन को हर लेनेवाला परमेदवर) + कनी (दीप्ति

English

No dame hath ampler charms than I, or greater wealth of love’s delights. None with more ardour offers all her beauty to her lord’s embrace. Supreme is Indra over all.

अध्याय 20

श्लोक 130.14

मा त्वा॑भि॒ सखा॑ नो विदन्

mā tvābhi sakhā no vidan

हिन्दी अर्थ

सौन्दर्यं मे मनं या चित्ते भुरव हो जाता है। ७९२८, -इरिक्निके कि्निच्छापि ॥४।॥ ( हरिषिनिके ) हरि की कामनावाली सात्विक-चित्तवृत्ति !. त् भरजमेर) नि के व्यासभाष्य मे शद्धा को,--जो कि सात्विक चितवुं्ि ह,-- जननी. कषा है, जो कि भाता के सदुश .योगी की रक्षा कसती

English

Mother whose love is quickly won,I say what verily will be, My breast, O mother, and my head and both my hips seem quivering Supreme is Indra over all.

अध्याय 20

श्लोक 130.15

व॒शायाः॑ पु॒त्रमा य॑न्ति

vaśāyāḥ putramā yanti

हिन्दी अर्थ

पाति" (योग १।२०)। इसलिये जीवात्मा को था भरभ्यासी को सात्विक ६ चित्तवृत्ति का पुत्र कहा है । , (षरास्यः) जीवात्मा को पराङ्मुख .कर उसे विषयों मे फकनेवाली राजसिक भ्रौर तामसिक चिं्तवृत्तियो ! तुमने ( कद ) -कहां ( भ्राहतम् ) भ्राषात किया है, प्रहार किया दहै? हमने व॑हां आधात भर्थात् प्रहार किया है (य॑त्र) जहां कि अभूः

English

Dame with the lovely hands and arms, with broad hair-plaits and ample hips, Why, O thou hero’s wife, art thou angry with our Vrishākapi?

अध्याय 20

श्लोक 130.16

इरा॑वेदु॒मयं॑ दत

irāvedumayaṃ data

हिन्दी अर्थ

जो किं. (परि) जीवात्मा को घेरे हृए-है, भौर त्रयः.) संख्याम तीन है ।॥८॥ भौर जो ( पृदाकवः.) भ्रजंगर सांप. के सदं जीवात्मा को .मिन्र ८०१ मेके “तिल्लः शिया” को "पृदाकवः काःहै + भवेनाश्रो, काम-वासनामों को उहीप्त कर॑ते हुए. सते ) भासन जमाए

English

Supreme is Indra over all. This noxious creature looks on me as one bereft of hero’s love. Yet heroes for my sons have I, the Maruts’ friend and Indra’s

अध्याय 20

श्लोक 130.17

अथो॑ इ॒यन्निय॒न्निति॑

atho iyanniyanniti

हिन्दी अर्थ

उन्हे विषयो कीश्रोरलेजा रहेहै। - (सः) वह परमेदवर ( इच्छकम् ) सांसारिक इच्छां के वकावर्ती मनुष्य की ( सघाघते ) हिसा करता है, या उसकी उद् मूत द्ये-सकनेवाली आध्यात्मिक शक्तियों पर भरावरण डाल देता है । . . बअन्धनसूप ह, जिनके ारा संसार में फसा व्यक्ति दुःखों को मोगता है,-- शृङ्खला में जकड़ा हृश्रा हिसित होता रहता .है । साथ. ही मसिारिक-

English

Queen Supreme is Indra over all. From olden time the matron goes to feast and general sacrifice.

अध्याय 20

श्लोक 130.18

अथो॑ इ॒यन्निति॑

atho iyanniti

हिन्दी अर्थ

परमेदवर ( गोमीत् इन्द्रियों की चञ्वलताभों का विनाशक है, गोमीत् गो = इन्द्रियां (उणादि कोष २।६७, वैदिक प्रेख.्रजमेर) (पुमान्) है मनुष्य ! तु तो वृद्धिश्षील है, फिर भी (कत) हृति.

English

Mother of heroes, Indra’s Queen, the rite’s ordainer is extolled. Supreme is Indra over all. So have I heard Indrāni called most fortunate among these dames,

अध्याय 20

श्लोक 130.19

अथो॒ श्वा अस्थि॑रो भवन्

atho śvā asthiro bhavan

हिन्दी अर्थ

. है मासि के पुतले को पालनेवाले 1 ( बद् ) है भांसि के पिञ्जर 1 बन्वे हृए ! ( वय इति ) तू तो इस पिञ्जरे मं से उड़ जानेवाले पक्षी के सदृश्च है । पल्प==पललं मांसं पाति पालयतीति । . भवा पल्प ५/० ; ऽी 165॥ एा†. “पल्य पद द्वारा उसका वर्णन है जो किरीर को ही “भ्ात्मस्वरूप'" समता है । उसे चेतावनी.दी गई है कितु इस शरीर से पृथक् है, जो किं वांसनाओं के कारण इस .दारीर मे बन्धा हरां है, प्रौर

English

For never shall her Consort die in future time through length of days. Supreme is Indra over all.

अध्याय 20

श्लोक 130.20

उ॒यं य॒कांश॑लोक॒का

uyaṃ yakāṃśalokakā

हिन्दी अर्थ

वाला घुड़-सवार है, परन्तु (पोरपद्के) गौ के खुर से पिसा.जा रहा है । वारः रोकनेवाला, निवारण करनेवाला । गोापद्यके गो +-शफ है जीवात्मन् (सा) वहं प्रकृति तो (इ्येनीपती = ष्येनीपतिः) नाना- विघरूप-रंगोवाली वेद्या के समान है, जो तुं विमोहित कर रही है ।

English

Wealthy Vrishākapāyi, blest with sons and consorts of thy sons, Indra will eat thy bulls, thy dear oblation that effecteth much.

अध्याय 20

श्लोक 131.1

खिलानि ।आमि॑नोनि॒ति भ॑द्यते

khilāni | āminoniti bhadyate

हिन्दी अर्थ

१।८। १७) मन्त्रं मे “वच्च” का . का० २०.। सू० १३१ अथववेद-माष्य (कुन्ताप-सुक्त) ३३१ रा मद्य (उणादि कोष २।२९ ; +-बेदं विदल लाभे(विद् +-उ उणादि कोषं १।७; बाहुलकात्) +-मयद् =प्रचु राथं ।. दत == दो भवखण्डने; . , (भथ) भौर यह सांपारिकं भोगों की. मदिरा.मे स्थितिवालौ

English

The desert plains and steep descents, how many leagues in length they spread! Go to the nearest houses, go unto thine home, Vrishākapi.

अध्याय 20

श्लोक 131.2

तस्य॑ अनु॒ निभ॑ञ्जनम्

tasya anu nibhañjanam

हिन्दी अर्थ

को जड़ खोद देता ह् । निखातकम् खन् भरवदारणे । (ककंरिकः) जगत् की बार-बार रचना करनेवाला, या जन्म-मरण का बार-बार विधान करनेवाला परमेदवर ही (निखातकः) नितरां भविष्य की जड़-उच्ञेड देता है ।

English

List to Parikshit’s eulogy, the sovran whom all people love, The King who ruleth over all, excelling mortals as a God. 8’Mounting his throne, Parikshit, best of all, hath given us peace and rest,’

अध्याय 20

श्लोक 131.3

वरु॑णो॒ याति॒ वस्व॑भिः

varuṇo yāti vasvabhiḥ

हिन्दी अर्थ

मि) वन वम् ) ह कोई देवीशनित है, जो कि.( हवत् ). कतव्य कमोकी डं है, तो किस प्रकार का० २०। सू° १३२. प्रयवंवेद-भा्य (कुन्ताप-सूक्त) ३३४ (देवी हनत् ) कोई दिव्यशवित डौढी पीटती है, तो ( कृहनत् ) वह कहां पीटती है ? कुहनत् = कुह + हनत् । -

English

Thus the wife asks her husband in the realm which King Parikshit rules. Up as it were to heavenly light springs the ripe corn above the cleft.

अध्याय 20

श्लोक 131.4

श॒तं वा॒ भार॑ती॒ शवः॑

śataṃ vā bhāratī śavaḥ

हिन्दी अर्थ

बीटती रहती हे, भ्रौर बार-बार पीटती रहती हं । वह ईडी हैम अका भ्रौर लज्जाल्पी डौँडी; या सुखदुःख के तारतम्यकी डी बचनेवाने परमेदवर के (च्रीणि) तीन (नामानि) नामदहै। रि ( एके.) करई एक अर्थात् सास्विक-अ्ङति के उपासक कहते ह कि १७ । भर्थात् परमेहवर सब का “हित करता ह, “रमणीय” है, भौर “हृदयो मे रमता हं" वेद मे भी कटा हं किं “हिरण्यरूपः स हिरण्यसंवुक.”

English

Happily thrive the people in the land where King Parikshit reigns. Indra hath waked the bard and said, Rise, wander singing here and there.

अध्याय 20

श्लोक 131.5

श॒तमा॒श्वा हि॑र॒ण्ययाः॑ ।श॒तं र॒थ्या हि॑र॒ण्ययाः॑ ।श॒तं कु॒था हि॑र॒ण्ययाः॑ ।श॒तं नि॒ष्का हि॑र॒ण्ययाः॑

śatamāśvā hiraṇyayāḥ | śataṃ rathyā hiraṇyayāḥ | śataṃ kuthā hiraṇyayāḥ | śataṃ niṣkā hiraṇyayāḥ

हिन्दी अर्थ

. (वा) तथा (ये) जो (दवः) सिशुबुद्धि के लोग 8, वे कते ह किं (द्रौ) उसकेदो नाम ४ ३४० भ्रयवंवेद-माष्य ( कुन्ताप-सूक्त) भथ हं--“न उत्पन्न होनेवाली प्रकृति" लोहित = रजोगुण । शुक्ल

English

Praise me, the strong: each pious man will give thee riches in return, Here, cows! increase and multiply, here ye, O horses, here, O men. Here, with a thousand rich rewards, doth Pūshan also seat him- self.

अध्याय 20

श्लोक 131.6

अह॑ल कुश वर्त्तक

ahala kuśa varttaka

हिन्दी अर्थ

रजोगण का निदेश “शिखण्ड” . पद द्वारा किया गयां है। शिखण्ड का अर्थं है-मोरकी पुछ, जोकि रगनिरंगी होती है! रजोगुणी .ग्यक्ति संसारके -नानाविष रंग-बिरंगो को चाहता है। शिशुबुद्धिवले लोग कहते है कि परमे- र्व्र “नीलवाहन” है. तमोगुणवाले जगत् का वहन करता है; भौर वह “िखण्डवाहन” है, रजोगुणी जंगत् का वहन करता है । तमोगुणी व्यक्ति नेवं ढुमारि तत् तथा यथा मारि मन्य॑से ॥१॥ ( किरणौ ) विकोषक ( दरौ ) दो तत्त्व ( विततौ ) विदोषरूपं मे फले हए है' (तौ) उन दोनों कौ (पूदषः) परम पुरुष परमेदवर (भ्रा पिनष्टि) पृणतया पीसता है, विनष्ट करता है,-- (कुमारि) है कुमारी ! (वै) निश्चय हैकि( तत् ) वह तेराकथन.( न तथा ) तथ्य नहीं ( यथा) जसे किं

English

O Indra, let these cows be safe, their master free from injury. Let not the hostile-hearted or the robber have control of them.

अध्याय 20

श्लोक 131.7

श॒फेन॑ इ॒व ओ॑हते

śaphena iva ohate

हिन्दी अर्थ

(कुमारि मन्यसे) हि कुमारी !. तु मानती है । , किरणो = विक्षेपे बभुः (उणादि कोष २।८२ । रजस् गौरं कर देते है, इस से चित्त योगोपयोगी नहीं रहता । कुमारी मानती हैकिं ईन दोनों विक्षोपक तरवो को परभ पुरुष परमेश्वर ही पीस सकता है, -इन को पीसने के लिये भ्रस्मदादि पुरषो का प्रयत्न सफल नहं हो सकता । इस विचार का परतिषेच मन्त मँ किया है । पूरुषः, देखो--(मन्व्र ८५१) । इसन

English

Oft and again we glorify the hero with our hymn of praise, with prayer, with our auspicious prayer. Take pleasure in the songs we sing: let evil never fall on us.

अध्याय 20

श्लोक 131.8

आय॑ व॒नेन॑ती॒ जनी॑

āya vanenatī janī

हिन्दी अर्थ

“नील पद तंमोगुण का द्योतक है, ्नौर “रिखण्ड पद रजोगुण श्रथववेद-माष्य (कुन्ताप-सूक्त) ३४१ कन्यां को प्रोत्साहित करना चाहिए । यदि कंन्याभों की भभिरुचि ८७२. मातु किरणौ दौ निदः पराके । "न व भारि तत् तथा यथां कुमारि मन्यसे ॥॥२॥

English

Sacrificial formulas The worshipper who pours the juice, for gathering and assembly fit,

अध्याय 20

श्लोक 131.9

वनि॑ष्ठा॒ नाव॑ गृ॒ह्यन्ति॑

vaniṣṭhā nāva gṛhyanti

हिन्दी अर्थ

ये दोनों विक्षेपकं निवृत्त हो जाते है (कुमारि) है कुमारी ! (वं) निद्चय . ६ है कि (तत्) वह तेरा कथनं ( न तथा ) तथ्य नहीं है, ( यथा.) जंसेकि (करुभारि मन्यसे) है कुमारि ! तु मानती है।

English

And yonder foe-destroying Sun,—these have the Gods designed of old. He who defiles a sister, he who willingly would harm a friend, The fool who slights his elder, these, they say, must suffer down. below.

अध्याय 20

श्लोक 131.10

इ॒दं मह्यं॒ मदू॒रिति॑

idaṃ mahyaṃ madūriti

हिन्दी अर्थ

भ्रकृतिवाला हो जाता है.। ८३४. उयं यकांशचलेकका ॥२०॥ . शरौर जो ( भ्रामिनोनिति ). सांसारिक मोगो को त्याग देता है, कहं (भद्यते) कल्याणमय भ्रौर सुखी हो जाता है । सुखे च. ) । भ्रामिनोतिभ्रथवा. “मि” हिसायाम् । षांसारिकं मोमो का

English

Supreme is Indra over all. Turn thee again Vrishākapi; we twain will bring thee happiness. Thou goest homeward on thy way along this path which leads to sleep. Supreme is Indra over

अध्याय 20

श्लोक 131.11

ते वृ॒क्षाः स॒ह ति॑ष्ठति

te vṛkṣāḥ saha tiṣṭhati

हिन्दी अर्थ

३ ३४ भथरववंवेद-माष्य (कून्ताप्-सृक्त) का०. २० । बऽ १३१ (वा) तथा (शतं भारती शवः) भरण-पोषण करनेवाली जगन्भतिा . की सैकड़ों चक्तियां तस्य भनु.यान्ति उसके पीद्ये-पीले चलती है । शत कुथा हिरण्ययाः । श॒ते निप्का हिरण्ययाः ।९॥ रोही; (हिरण्ययाः) सुवणं-विभरुषितं (संतम्) सेकर्डो ( रथ्याः रथवाही

English

all. 309

अध्याय 20

श्लोक 131.12

पाक॑ ब॒लिः

pāka baliḥ

हिन्दी अर्थ

हाथी; (हिरण्ययाः) सुतैणं-निमितं (दतम्) सैकड़ों सि्वके तथा मालाए उन के नामो पर भौर उन की ्मृतियों मेँ उन के भ्रनुयायी .सम्पत्तियां . वारते, भौर शानदार जलूस निकालते हैः। मन्त्र में एेसी ही भावनाभों का

English

When, Indra and Vrishākapi, ye travelled upward to your home, Where was that noisome beast, to whom went it, the beast that troubles man? Supreme is Indra over all.

अध्याय 20

श्लोक 131.13

शक॑ ब॒लिः

śaka baliḥ

हिन्दी अर्थ

(शं तथा पांथिवे मोग मः शयन कयि हृए है व्यक्ति ! : (वत्तंक) भौर तेरे जैसा व्यक्ति तो 7से उखेड दिया जाता है (इव) जैसे कि (शफेन) गौ के खुर के स्पशंमात्र से.खुम्ब उचेड दी जाती है । हे संसारी मनुष्य ! (श्राय ) उपासना मागं की भोर भ्रा, (जनी) अयवेवेद-माष्य (कन्ताप-सूक्त) २३३

English

Daughter of Manu, Parsu bare a score of children at a birth. Her portion verily was bliss although her burthen caused her grief.

अध्याय 20

श्लोक 131.14

अश्व॑त्थ॒ खदि॑रो ध॒वः

aśvattha khadiro dhavaḥ

हिन्दी अर्थ

जगज्जननी ( वनेनती ) श्रद्धापुवंक भक्ति मे नत -हो जाती है, क जातीः है, जसे कि माता चिशु को भपना दूध पिलाने के लि रिदुकी भोर शुक जाती है । वने= वन संभक्तौ 1 यहं धारणा नहीं रखते कि- वनिष्ठाः = वन संभक्तौ । ¦

English

A hymn in praise of the good Government of King Kaurama Listen to this, ye men, a laud of glorious bounty shall be sung. Thousands sixty, and ninety we, O Kaurama, among the

अध्याय 20

श्लोक 131.15

अर॑दुपरम

araduparama

हिन्दी अर्थ

त्पादके तथां भ्रानेन्ददायक है । होकर समाधिस्थ हो जाते है, तब सदगुरु परमेश्वर ( सह ) उन के साथ (तिष्ठति) सदा रहता.है । गओौर वे सद्गुरु परमेदवर के प्रति, कहते हैँ कि (पाक) है परिपाकट्प , ३३६ भथवंवेदभाष्य (कुन्ताप-सूक्त) का० २०। सु १३१

English

Rusamas have received. Camels twice-ten that draw the car, with females by their side, he gave.

अध्याय 20

श्लोक 131.16

शयो॑ ह॒त इ॑व

śayo hata iva

हिन्दी अर्थ

भाप्के प्रति बलिरूप मेँ भेट कर दिया 8 । तदनन्तर सवृगुरुःमानो कहता है उपासक को, किं ( भद्वत्थ ). हे का विना कर लिया है, (धवः) तु धवल भर्थात् परिशदधं सात्विक चित्त- बुत्तिर्योवाला हो चुकां है । भरतः- खदिरः खदति हिनस्त्मीति उणादि कोष १। ५३) ।

English

Fain would the chariot’s top bow down escaping from the stroke of heaven. A hundred chains of gold, ten wreaths, upon thee Rishi he bestowed, And thrice-a-hundred mettled steeds, ten-times-a-thousand cows he gave.

अध्याय 20

श्लोक 131.17

व्याप॒ पूरु॑षः

vyāpa pūruṣaḥ

हिन्दी अर्थ

(अरन्) है समाधि को प्राप्त हृए उपासक ! तु (उपरम) सांसारिक एेसा हो जा. (इव ) जसे कि कोई (शयः) सोया दभ्रा होता है, भौर समाधि का निदश्च किया है । हतः = व्यक्ति जब मर जाता है तब न तो.वह् . है शिष्य ! तु एसा प्रतीत हो रहा ह कि. मानो (पूरुषः) परम पुर्व परमेश्वर, तेरे जीवन मे (व्याप) व्याप्त हो गया है ।

English

Glut thee, O Singer, glut thee like a bird on a ripe-fruited tree. Thy lips and tongue move swiftly like the sharp blades of a pair of shears.

अध्याय 20

श्लोक 131.18

अदू॑हमि॒त्यां पूष॑कम्

adūhamityāṃ pūṣakam

हिन्दी अर्थ

है शिष्य ! -मने (पूषकम्) पुष्टिदायक परमपुरुष परमेदवर ते तुभे का? २०॥ सु० १३२ थ्ववेद-माप्य (मुन्ताप.सूक्त ) - - ३३७ हे शिष्य ! (परस्वतः) परे से भी परे भ्रथति दुर से दुर वस्तुओं का

English

Quickly and willingly like kine forth come the singers and their hymns: Their little maidens are at home, at home they wait upon the cows. O Singer, bring thou forth the hymn that findeth cattle, findeth: wealth.

अध्याय 20

श्लोक 131.19

अत्य॑र्ध॒र्च प॑र॒स्वतः॑

atyardharca parasvataḥ

हिन्दी अर्थ

भर्चंना किया कर, स्तुतियां किया कर । (हस्तिनः) हा्थोवाने मनुष्य के (दौव) दो साधन, जोकि उस जन्म-मरण के बन्धनो को .(दुती) काट देते है । भवसागर से तैरानेवाला .(एककम्) एक ब्रह्म ही है ।

English

Even as an archer aims his shaft address this prayer unto the Gods.

अध्याय 20

श्लोक 131.20

दौव॑ ह॒स्तिनो॑ दृ॒ती

dauva hastino dṛtī

हिन्दी अर्थ

३८ भथवेद-भाष्य (ङनताप-सू्त) का० २० सुऽ १३२ (तव्) बह ब्रह्म (वातः) मानो कंफावात के. सदुश हीकर (उन्मथा- मति) प्रलयकाल के उपस्थिन होने परर-जगत् को मथ डालता ह । करे । वनिषत् = वन् संभक्तौ । ॥ + ६२. क एषां ककरी रिखत् ॥८॥ (कः ) कौन है वह् ( ककं री .) पुनः-यूनः जगत् का कर्ता, जो कि (एषाम्) इन जीवत्माभो के कमो का. (लिखत्) लेखा लिलता है? , (कः) कौन है जो कि (एषाम्) इन जीवात्मा के करतण्याकतं कीं (दुन्दुभिम्) डी (हनत्) पीता ह ? । द ८8४, यदीयं ईनत्. कर्थं इनव्.॥१०॥

English

Saith a Kauravya to his wife as he is ordering his house. 9’Which shall I set before thee, curds, gruel of milk, or barley- brew?’

स्रोत: bhavykhatri/DharmicData · प्राप्त 3/6/2026

शास्त्रीय प्रामाणिकता एवं पारदर्शकताSources & Interpretation

स्रोत, संस्करण एवं व्याख्या वर्गीकरण

धर्म ग्रंथ पर मूल शास्त्र, पारंपरिक भाष्य और आधुनिक व्याख्या को पूर्णतः पृथक रखा जाता है ताकि पाठक को किसी भी व्याख्या के शास्त्र होने का भ्रम न हो।

सामग्री वर्गीकरण संकेत (Epistemic Content Labels)

6 स्तरिय प्रमाण व्यवस्था
मूल पाठOriginal text

अपौरुषेय / प्रामाणिक शास्त्र (Primary Canonical Scripture)

मूल संस्कृत, प्राकृत अथवा अवधी श्लोक/मंत्र। यह सर्वोच्च प्रमाण (प्रस्थान) है। इस पाठ में किसी भी आधुनिक व्याख्याकार का हस्तक्षेप नहीं है।

शाब्दिक अनुवादLiteral translation

पदार्थ व अन्वय (Direct Grammatical & Word-for-Word Meaning)

व्याकरणसम्मत प्रत्यक्ष शब्दार्थ (अन्वय)। बिना किसी दार्शनिक संप्रदाय के पूर्वाग्रह के, संस्कृत शब्दों का सटीक भाषांतर।

पारंपरिक भाष्यTraditional commentary

आचार्य परंपरा व टीका (Classical Lineage Commentary)

प्राचीन आचार्य परंपरा (यथा शंकराचार्य, रामानुजाचार्य, मध्वाचार्य, श्रीधर स्वामी) द्वारा विरचित शास्त्रीय भाष्य व टीकाएं।

सरल व्याख्याSimple explanation

भावार्थ व सुबोध प्रबोधन (Accessible Pedagogical Exposition)

आधुनिक जिज्ञासुओं के लिए सरल भाषा में भावार्थ। यह मूल मंत्र नहीं, बल्कि पाठ को सुगम बनाने हेतु संपादकीय व्याख्या है।

आधुनिक चिंतनModern reflection

समसामयिक विमर्श व अनुप्रयोग (Contemporary Application & Analysis)

दार्शनिक, मनोवैज्ञानिक व वैज्ञानिक समरूपताओं पर आधुनिक चिंतन। यह मूल शास्त्र का अंग नहीं है और इसे शास्त्रोक्त सिद्धांत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

शोध टिप्पणीResearch note

पांडुलिपि एवं ऐतिहासिक शोध (Critical Apparatus & Manuscript Research)

पांडुलिपि विविधताएं, पाठ-भेद (variant readings), छंद रचना, और ऐतिहासिक व तुलनात्मक भाषावैज्ञानिक शोध। यह शास्त्र का मूल संदेश बदलने हेतु नहीं, बल्कि पाठ की प्रामाणिकता परखने के लिए है।