Atharva Veda
20
अध्याय 20 / 20

Kanda 20

काण्ड 20

975 श्लोकभाग 9/13 · श्लोक 96.1–109.3

पूर्ण अध्याय पाठ77 श्लोक

अध्याय 20

श्लोक 96.1

ती॒व्रस्या॒भिव॑यसो अ॒स्य पा॑हि सर्वर॒था वि हरी॑ इ॒ह मु॑ञ्च ।इन्द्र॒ मा त्वा॒ यज॑मानासो अ॒न्ये नि री॑रम॒न् तुभ्य॑मि॒मे सु॒तासः॑

tīvrasyābhivayaso asya pāhi sarvarathā vi harī iha muñca | indra mā tvā yajamānāso anye ni rīraman tubhyamime sutāsaḥ

हिन्दी अर्थ

( इन्द्र ) है प्रमेदवर ! . प्रापने. ( भोजसा ) निजं भरोजं के कारण २४० भ्रथ्ववेद-भाष्य का० २० । सु° ९४ है। (सः) वे आप ( विद्वाः भुवः ) सब भुवनो में (आभवः) पूणंतया

English

Maghavan hath accomplished. When he had conquered godless wiles and magic, Soma became his own entire possession.

अध्याय 20

श्लोक 96.2

तुभ्यं॑ सु॒तास्तुभ्य॑मु॒ सोत्वा॑स॒स्त्वां गिरः॒ श्वात्र्या॒ आ ह्व॑यन्ति ।इन्द्रे॒दम॒द्य सव॑नं जुषा॒णो विश्व॑स्य वि॒द्वां इ॒ह पा॑हि॒ सोम॑म्

tubhyaṃ sutāstubhyamu sotvāsastvāṃ giraḥ śvātryā ā hvayanti | indredamadya savanaṃ juṣāṇo viśvasya vidvāṃ iha pāhi somam

हिन्दी अर्थ

दलदली लहर पवतो के रूप भे भूपुष्ठ पर स्थिर होः गई । लहरो की . दलदली ्रवस्था में वाग के प्रबल वेगो के कारण चलायमान तथा अपना- शब्दों दवारा सूचित किया है । इसी भाव कौ "येन द्यौरग्रा पुथिवी च दढा" (यजु ३२।६) दारा भी सूत्रित किया है । (२) पृथिवी प्रर भ्रभीजलनथा। पृथिवी के त्रायुमण्डल में दूर

English

Vala. Brihaspati thundering drave forth the cattle, the lowing cows who make oblations ready.

अध्याय 20

श्लोक 96.3

य उ॑श॒ता मन॑सा॒ सोम॑मस्मै सर्वहृ॒दा दे॒वका॑मः सु॒नोति॑ ।न गा इन्द्र॒स्तस्य॒ परा॑ ददाति प्रश॒स्तमिच्चारु॑मस्मै कृणोति

ya uśatā manasā somamasmai sarvahṛdā devakāmaḥ sunoti | na gā indrastasya parā dadāti praśastamiccārumasmai kṛṇoti

हिन्दी अर्थ

अभीके चिदु जोकुङ़व संगे खमस्य वुत्रहास्मा् बोधि चोदिता , संमपित करदो) क्योंकि परमेदवर ( भभीके चित् हृदय के समीपवतीं होकर (उ) गव्य लोककृत्) भालोक पेदा कर देता ह 1 (संगे) भौर खसके मेल हो जाने पर (समत्सु) देवासुर-संग्रामों मे वह (वृत्रहा) हमारे वाप-वुत्रो का हूनन कर देता है, भरौर ( चोदित। हमे भ्ररणाए देता है, प्रौर (भरस्माकम्) हमारी कामना को (बोधि) भववगत कर लेता है, ये .

English

Standing, in battle for their rights, together, the people, Indra, in the fray invoke thee. Him who brings gifts the Hero makes his comrade: with him who pours no juice he seeks not

अध्याय 20

श्लोक 96.4

अनु॑स्पष्टो भवत्ये॒षो अ॑स्य॒ यो अ॑स्मै रे॒वान् न सु॒नोति॒ सोम॑म्।निर॑र॒त्नौ म॒घवा॒ तं द॑धाति ब्रह्म॒द्विषो॑ ह॒न्त्यना॑नुदिष्टः

anuspaṣṭo bhavatyeṣo asya yo asmai revān na sunoti somam| niraratnau maghavā taṃ dadhāti brahmadviṣo hantyanānudiṣṭaḥ

हिन्दी अर्थ

(धन्वसु) धनुषो पर चदी ज्याकाः) डोरियां (नमन्ताम्) दूट-फूट जाय । का० २०।सू० ९५ अथवंवंद-भ्।ष्य २४७ का (भ्रवासुजः) नीचे को भ्रोर संन किया है, भौर उन्दँ (भ्रधराचः) नीचे

English

friendship. Whoso with plenteous juice for him expresses strong Somas as much quickly-coming

अध्याय 20

श्लोक 96.5

अ॒श्वा॒यन्तो॑ ग॒व्यन्तो॑ वा॒जय॑न्तो॒ हवा॑महे॒ त्वोप॑गन्त॒वा उ॑ ।आ॒भूष॑न्तस्ते सुम॒तौ नवा॑यां व॒यमि॑न्द्र त्वा शु॒नं हु॑वेम

aśvāyanto gavyanto vājayanto havāmahe tvopagantavā u | ābhūṣantaste sumatau navāyāṃ vayamindra tvā śunaṃ huvema

हिन्दी अर्थ

करते रहते है । इसलिये -( तं त्वा ) उसं भ्रापका ( परिष्वजामहे ) हम उपासक समाधि मे, शरीर की सुघनबुध से. रहित होकर जब निज भरात्मरूप से परमेइवर में लीन हो जाताह, तब यह लीन. होना ही भ्रादि कौ परिपोषषण परमेदवर करता ह 1 हे परमेश्वर! (विद्वा भररातयः) शब प्रकार की भ्रदान-भावनाए

English

treasure, For him he everthrows in early morning his swift well-weapon- ed foes and slays the tyrant.

अध्याय 20

श्लोक 96.6

मु॒ञ्चामि॑ त्वा ह॒विषा॒ जीव॑नाय॒ कम॑ज्ञातय॒क्ष्मादु॒त रा॑जय॒क्ष्मात्।ग्राहि॑र्ज॒ग्राह॒ यद्ये॒तदे॑नं तस्या॑ इन्द्राग्नी॒ प्र मु॑मुक्तमेनम्

muñcāmi tvā haviṣā jīvanāya kamajñātayakṣmāduta rājayakṣmāt| grāhirjagrāha yadyetadenaṃ tasyā indrāgnī pra mumuktamenam

हिन्दी अर्थ

( वि नष्न्त.) हंम से विगत हो जाय, दुरः हट जाय, भौर ( नः ) हमारी (नः). हमारी (जिघांसति) हिसा करने मे उन्मुखं होता हं, उस (शत्रवे) हं । है परमेदवर । (ते) आपका (या) जो .( रातिः) दान है. वह (वसु)

English

He unto whom we offer praises, Indra, Maghavan, who hath joined to ours his wishes Before him even afar the foe must tremble: low before him must bow all human glories.

अध्याय 20

श्लोक 96.7

यदि॑ क्षि॒तायु॒र्यदि॑ वा॒ परे॑तो॒ यदि॑ मृ॒त्योर॑न्ति॒कं नीऽत ए॒व।तमा ह॑रामि॒ निरृ॑तेरु॒पस्था॒दस्पा॑र्शमेनं श॒तशा॑रदाय

yadi kṣitāyuryadi vā pareto yadi mṛtyorantikaṃ nī'ta eva| tamā harāmi nirṛterupasthādaspārśamenaṃ śataśāradāya

हिन्दी अर्थ

रय अयर्ववेद-माष्य का० २० । सू० ६९६ श्राप रक्षा कीजिये, ओर ( सवरथा ) सब के रशरीर-रथोमेंजुते हुए (हरी) विषयों मे" हरण करनेवलि द्विविध इन्द्रियादवों को, (इह) मेरे इस जीवन मे, (वि मुञ्च) विषयों मे हरण करने से वियुक्त कर दीजिये, डा दीजिये 1 है परमेदवर ! (भन्ये) मूक से भिन्न, ( यजमानासः ) उपासना- यज्ञो के यजन करनेवाले उपासक भी, (त्वौ = त्वां क. आपका त्याग विदववेतता है, (दह) इस. जीवन में (घोमम्) हमारे भक्तिरस की (वीहि) का (जुषाणः) प्रीतिपूर्वेक सेवन कीजिये ।

English

With thy fierce bolt, O God invoked of many, drive to a distance from afar the foeman. O Indra, give us wealth in corn and cattle, and make the singer’s prayer gain strength and

अध्याय 20

श्लोक 96.8

स॒ह॒स्रा॒क्षेण॑ श॒तवी॑र्येण श॒तायु॑षा ह॒विषाहा॑र्षमेनम्।इन्द्रो॒ यथै॑नं श॒रदो॒ नया॒त्यति॒ विश्व॑स्य दुरि॒तस्य॑ पा॒रम्

sahasrākṣeṇa śatavīryeṇa śatāyuṣā haviṣāhārṣamenam| indro yathainaṃ śarado nayātyati viśvasya duritasya pāram

हिन्दी अर्थ

का० २०1 सू० ९५ अथववंवेद-माष्य २४६ ६१९. यं ठद्चता मन॑सा सोम॑मस्मे सवेहृदा देवकामः सुनोति । (देवकामः) परमेदवर-देव की प्राप्ति की कामनावाला ( यः.) जो न्धक्ति, (उदता मनसा) उत्कट-अभिलाषावाले मन से, तथा ( सत्रहृदा )

English

riches. Indra the swallower of strong libations with their thick residue, the potent Somas,

अध्याय 20

श्लोक 96.9

श॒तं जी॑व श॒रदो॒ वर्ध॑मानः श॒तं हे॑म॒न्तान्छ॒तमु॑ वस॒न्तान्।श॒तं त॒ इन्द्रो॑ अ॒ग्निः स॑वि॒ता बृह॒स्पतिः॑ श॒तायु॑षा ह॒विषाहा॑र्षमेनम्

śataṃ jīva śarado vardhamānaḥ śataṃ hemantānchatamu vasantān| śataṃ ta indro agniḥ savitā bṛhaspatiḥ śatāyuṣā haviṣāhārṣamenam

हिन्दी अर्थ

(गाः) प्राथंना-वाणियों का ( न.पराददाति ) तिरस्कार नहीं करता, भ्रपि नीय फन, (कृणोति) प्रदान करता है । - (यः) जो (रेवान्) धनिक व्यक्ति, (रस्मै ). इस परभेरवर के लिये, नहीं ( भवति ) होता; ( मघवा ) रेदवयंशाली परमेदवर ( तम् ) उसे

English

He, Maghavan, will not restrict his bounty: he brings much wealth unto the Soma-presser. Yea, by superior play he wins advantage when he, a gambler, piles his gains in season.

अध्याय 20

श्लोक 96.10

आहा॑र्ष॒मवि॑दं त्वा॒ पुन॒रागाः॒ पुन॑र्णवः ।सर्वा॑ङ्ग॒ सर्वं॑ ते॒ चक्षुः॒ सर्व॒मायु॑श्च तेऽविदम्

āhārṣamavidaṃ tvā punarāgāḥ punarṇavaḥ | sarvāṅga sarvaṃ te cakṣuḥ sarvamāyuśca te'vidam

हिन्दी अर्थ

(स्वपतिः) समग्॑श्वयो का पति परमेदत्रर ( मदाय ) उपासको की . श्रसन्नता गौर तृप्ति के लिये (गा यातु) हम उपासको मेँ प्रकट हो । (यः) वेदिक घमं के द्वारा (तूतुजानः) हमारा पालन कर रहा है 1 वह (अपरारेण) तूतुजानः == तुजि पालने + कानच् । तत्वक्ष् = तनूकरणे ।

English

Thine is this world of flocks and herds around thee, which with the eye of Surya thou beholdest.

अध्याय 20

श्लोक 96.11

ब्रह्म॑णा॒ग्निः स॑म्विदा॒नो र॑क्षो॒हा बा॑धतामि॒तः ।अमी॑वा॒ यस्ते॒ गर्भं॑ दु॒र्णामा॒ योनि॑मा॒शये॑

brahmaṇāgniḥ samvidāno rakṣohā bādhatāmitaḥ | amīvā yaste garbhaṃ durṇāmā yonimāśaye

हिन्दी अर्थ

हे परमेदवर ! (रथः) मेरा यह शरीर रथ ( सुष्ठामां ) चञ्चलता सै रहित होकर भरवःउत्तम स्थिरता को प्राप्त हो गयादहै, भौर .( हरी) भ्रज्ञानान्धकार-निवारक किरणों मे.( वचनः ) मानो एक वच्रदहै, जो किं आदये, प्रकट हृजिये, (पधुषः) पुष्टि करनेवाले (ते) आपके ( वृष्ण्यानि

English

Thou, Indra, art alone the Lord of cattle: may we enjoy the treasure which thou givest. Ye twain are Lords of wealth in earth and heaven, thou, O

अध्याय 20

श्लोक 96.12

यस्ते॒ गर्भ॒ममी॑वा दु॒र्णामा॒ योनि॑मा॒शये॑ ।अ॒ग्निष्टं ब्रह्म॑णा स॒ह निष्क्र॒व्याद॑मनीनशत्

yaste garbhamamīvā durṇāmā yonimāśaye | agniṣṭaṃ brahmaṇā saha niṣkravyādamanīnaśat

हिन्दी अर्थ

।१५८०) वैदिक पुस्तकालय, भ्रजमेर । .का० २० । सुग.€४. श्रथवेवेद-माष्य २४१ . ( इन्द्रवाहः ) परमेदवर को अपने शरीर -रथों मे वहन करनेवाले (उग्रासः) कतंव्यों में सुदृढ, (सधमादः) परमेदवर के साथ रहं कर भ्रानन्द मोगनेवाले, (तविषासः) महान् भ्रात्माए"-( नृपतिम् ) नर-नासियो के कराए; उस का प्रत्यक्ष दशन कराए ।

English

Brihaspati, and thou, O Indra . Mean though he be, give wealth to him who lauds you. Preserve us evermore, ye Gods, with

अध्याय 20

श्लोक 96.13

यस्ते॒ हन्ति॑ प॒तय॑न्तं निष॒त्स्नुं यः स॑रीसृ॒पम्।जा॒तं यस्ते॒ जिघां॑सति॒ तमि॒तो ना॑शयामसि

yaste hanti patayantaṃ niṣatsnuṃ yaḥ sarīsṛpam| jātaṃ yaste jighāṃsati tamito nāśayāmasi

हिन्दी अर्थ

बाहुः=-बाध्यन्ते विलोडघन्ते पदार्था येन सः ( उणादि कोष, १।२७ ६०९. एवा परति द्रोणसाचं सचैतसमूजे स्कम्भे धरुण आ वृषायसे । ओज॑ः कृषवु सं शमाय त्वे अप्यसो यथां केनिपानामिनो वृषे॥४॥

English

blessings. Him who with might hath propped earth’s ends, who sitteth in threefold seat, Brihaspati, with

अध्याय 20

श्लोक 96.14

यस्त॑ ऊ॒रू वि॒हर॑त्यन्त॒रा दम्प॑ती॒ शये॑ ।योनिं॒ यो अ॒न्तरा॒रेल्हि॒ तमि॒तो ना॑शयामसि

yasta ūrū viharatyantarā dampatī śaye | yoniṃ yo antarārelhi tamito nāśayāmasi

हिन्दी अर्थ

साथी, या हदय-गृह के साथी, (सचेतसम्) सदा-चेतन, (उजंः) श्राध्यात्मिक- परमेदवर को धारण करने के स्थान हृदय मे (आ वृषायसे) अपने भक्ति- रस से सीचता' है । (ओजः कृष्व) है उपासक ! तू प्रपना गोज प्रकट कर, धनौर ( संगृभाय ) भरोज का अधिक संग्रह कर, ( त्वे=त्वयि ) तुभे (इनः). स्वामी परमेदवर (कंनिपानाम्). मेघावी-उपासकों का (वृष) बरद्धि को लिये हं । ब्रोण=प्रणाति वघकर्मा (निच० २।१६९).भरथवा द्रोण =दुरीण ८ गृहः निघ° ३।४ ) । केनिपाः = मेधाविनः ( निघ० ३।१५ ) । के साषारिकं सुखो मे रहते हए भी जो, निपाः= भक्तिरस का निरन्तर पान प्रकट करदीहै किह परमेदवर ! (सोमिनः) भक्तिरस की मेँटवाले मुक

English

thunder, Him of the pleasant tongue have ancient sages, deep thinking,. holy singers, set before them.

अध्याय 20

श्लोक 96.15

यस्त्वा॒ भ्राता॒ पति॑र्भू॒त्वा जा॒रो भू॒त्वा नि॒पद्य॑ते ।प्र॒जां यस्ते॒ जिघां॑सति॒ तमि॒तो ना॑शयामसि

yastvā bhrātā patirbhūtvā jāro bhūtvā nipadyate | prajāṃ yaste jighāṃsati tamito nāśayāmasi

हिन्दी अर्थ

याभ्रापको धारण कर लेने के कारण (अनाधृष्या) भरब पापों द्वारा पराभव न ये शेकुयंियां नाव॑माद॑मीमव ते न्य॑बि्न्त॒ केय॑यः ।६।। - (प्रथमाः. देवहूतयः) दिव्य-उपासकों की शष्ठ पुकारे, ( पृथक् )

English

Wild in their course, in well-marked wise rejoicing were they,. Brihaspati, who pressed around us

अध्याय 20

श्लोक 96.16

यस्त्वा॒ स्वप्ने॑न॒ तम॑सा मोहयि॒त्वा नि॒पद्य॑ते ।प्र॒जां यस्ते॒ जिघां॑सति॒ तमि॒तो ना॑शयामसि

yastvā svapnena tamasā mohayitvā nipadyate | prajāṃ yaste jighāṃsati tamito nāśayāmasi

हिन्दी अर्थ

बार-बार प्रविष्ट होते रहते है । लोग (पाक्) पिषठढ़ रहते (सन्ति) है (येषाम्) जिनके करि (भवाः) इन्द्रयाइव उन के साय (प्रायं). सदा चते रहे है, भौर (दयु; ) दुःखदायीरूप मे जुते रहते. है । (इत्था) इसी प्रकार (ये) जो (परे) इन से

English

Preserve, Brihaspati, the stall uninjured,r,this company’s raining. ever-moving birth-place. Brihaspati, from thy remotest distance have they sat down who love the law eternal.

अध्याय 20

श्लोक 96.17

अ॒क्षीभ्यां॑ ते॒ नासि॑काभ्यां॒ कर्णा॑भ्यां॒ छुबु॑का॒दधि॑ ।यक्ष्मं॑ शीर्ष॒ण्यं म॒स्तिष्का॑ज्जि॒ह्वाया॒ वि वृ॑हामि ते

akṣībhyāṃ te nāsikābhyāṃ karṇābhyāṃ chubukādadhi | yakṣmaṃ śīrṣaṇyaṃ mastiṣkājjihvāyā vi vṛhāmi te

हिन्दी अर्थ

शूपी ( भोजना ) भोजन ( पुरूणि ) बहुमाघा मे होता है, वे ( दावने ) भरमेवर के भरति सवंस्व-दान भे, (प्राक् सन्ति) भागे बढ़े हए होते है । - (कोपयत्) प्रकुपित किया । परमेदवर (धिषणे) च लोक भ्रौर भूलोक को

English

For thee were dug wells springing from the mountain, which murmuring round about pour streams of sweetness.

अध्याय 20

श्लोक 96.18

ग्री॒वाभ्य॑स्त उ॒ष्णिहा॑भ्यः॒ कीक॑साभ्यो अनू॒क्याऽत्।यक्ष्मं॑ दोष॒ण्य॑१मंसा॑भ्यां बा॒हुभ्यां॒ वि वृ॑हामि ते

grīvābhyasta uṣṇihābhyaḥ kīkasābhyo anūkyā't| yakṣmaṃ doṣaṇya1maṃsābhyāṃ bāhubhyāṃ vi vṛhāmi te

हिन्दी अर्थ

(विष्कभायति) थाम रहा है, (समीचीने ) भरतः ये दोनों समीचीन अवस्था के प्रति (उक्थानि) वं दिक-सूक्तों का (शंसति) कथन परमेदवर करता है । रौर. जगत् के समीचीन अवस्था मेँ भा जाने पर भादि-ऋषिर्यो को वेदज्ञान भ्रभिप्राय है कि-(१) पृथिवी सूयं से पदा हू । तब पृथिवी भ्ग्निमय थी,

English

Brihaspati, when first he had his being from mighty splendour in supremest heaven. Strong, with his sevenfold mouth, with noise of thunder, with his seven rays blew and

अध्याय 20

श्लोक 96.19

हृद॑यात् ते॒ परि॑ क्लो॒म्नो हली॑क्ष्णात् पा॒र्श्वाभ्या॑म्।यक्ष्मं॒ मत॑स्नाभ्यां प्ली॒ह्नो य॒क्नस्ते॒ वि वृ॑हामसि

hṛdayāt te pari klomno halīkṣṇāt pārśvābhyām| yakṣmaṃ matasnābhyāṃ plīhno yaknaste vi vṛhāmasi

हिन्दी अर्थ

जैसे कि सूर्यं भ्रमी तक प्रायः भग्निमय है । सूयं के भाकषंणः आर पृथिवी के भम्निमयं होने 4 के कारण पृथिवी पर ऊंची-ऊ "ची भरागेग्र लहर उठती थीं । पृथिवी शनः-शनैः ठण्ड होती गई भौर द्रवावस्था में राई, तब पृथिवी स दवावस्था के पायितत्त्वों की लहर उठती रही, जसे कि जलीय-समुद्र से जलीय-लहरं उठा करती है । पृथिवी भौर टण्डी हई भौर दलदल की भ्रवस्था में भाई । तब ससे दलदल की -सी घनी लहर उठती रहीं । ये गई, भरर भूपुष्ठ भी अधिकाधिक ठण्डा होता गया, भौर . समयानुसार

English

dispersed the darkness. With the loud-shouting band who sang his praises, with thunder, he destroyed malignant

अध्याय 20

श्लोक 96.20

आ॒न्त्रेभ्य॑स्ते॒ गुदा॑भ्यो वनि॒ष्ठोरु॒दरा॒दधि॑ ।यक्ष्मं॑ कु॒क्षिभ्यां॑ प्ला॒शेर्नाभ्या॒ वि वृ॑हामि ते

āntrebhyaste gudābhyo vaniṣṭhorudarādadhi | yakṣmaṃ kukṣibhyāṃ plāśernābhyā vi vṛhāmi te

हिन्दी अर्थ

चमकती थीं । इस् कारण भ्राक्सीजन तथा हादइडोजन का परस्पर रासायनिक मेल होता रहा, ओर वायुमण्डल में जल-संग्रह होता रहा । रन्दो हारा मन्त्र मे हुमा है 1 । (३) पुथिवी के वायुमण्डल मेँ जब जल की भाप घनी होती गई, तौ प्रभूत मात्रा में मेष बने गौर इनसे सत॒त-धारार्भो के रूप मँ वर्षा होती

English

Serve we with sacrifices, gifts, and homage even thus the Steer of all the Gods, the Father.

अध्याय 20

श्लोक 96.21

ऊ॒रुभ्यां॑ ते अष्ठी॒वद्भ्यां॒ पार्ष्णिभ्यां॒ प्रप॑दाभ्याम्।यक्ष्मं॑ भस॒द्यं॑१ श्रोणि॑भ्यां॒ भास॑दं॒ भंस॑सो॒ वि वृ॑हामि ते

ūrubhyāṃ te aṣṭhīvadbhyāṃ pārṣṇibhyāṃ prapadābhyām| yakṣmaṃ bhasadyaṃ1 śroṇibhyāṃ bhāsadaṃ bhaṃsaso vi vṛhāmi te

हिन्दी अर्थ

. (४)- उग्र वर्षा के कारण पुथिवी ठण्डी होती गह । पृथिवी पर मे “समीचीने धिषणे” शब्दों द्वारा सूचित किया है । (५) कालान्तर में जब मनुष्य-सृष्टि हुई, तब परमेदवर ने मानसिक पुत्रों को पदा किया, जो कि आदि के कर ऋषि थेऽ्रौर इनके हारा वैदिकं

English

Brihaspati, may we be lords of riches, with noble progeny and, store of heroes. Quell with your voice the wicked’s voice, O sages, Singer, make

अध्याय 20

श्लोक 96.22

अ॒स्थिभ्य॑स्ते म॒ज्जभ्यः॒ स्नाव॑भ्यो ध॒मनि॑भ्यः यक्ष्मं॑ पा॒णिभ्या॑म॒ङ्गुलि॑भ्यो न॒खेभ्यो॒ वि वृ॑हामि ते

asthibhyaste majjabhyaḥ snāvabhyo dhamanibhyaḥ yakṣmaṃ pāṇibhyāmaṅgulibhyo nakhebhyo vi vṛhāmi te

हिन्दी अर्थ

हे परमेदवरर ! (सुकृतम्) प्रजा कोः सुकर्मी करनेवाले, (ते) भापके १२३. त्रिकुकेषु महियो वारं ठविशस्तृपत् सोममिव सद देषो व स्वमिन सत्य शृन्दुः ।1१॥.

English

Indra rest beside the Soma. Draw thy Friend to thee like a cow at milking: O singer, wake up Indra as a lover.

अध्याय 20

श्लोक 96.23

अङ्गे॑अङ्गे॒ लोम्नि॑लोम्नि॒ यस्ते॒ पर्व॑णिपर्वणि ।यक्षं॑ त्वच॒स्यं ते व॒यं क॒श्यप॑स्य वीब॒र्हेण॒ विष्व॑ञ्चं॒ वि वृ॑हामसि

aṅgeaṅge lomnilomni yaste parvaṇiparvaṇi | yakṣaṃ tvacasyaṃ te vayaṃ kaśyapasya vībarheṇa viṣvañcaṃ vi vṛhāmasi

हिन्दी अर्थ

साव (चिकद्र.केषु) पृथिवी के तीन स्थानो--जलं, स्थल, पवेत मे, भपय धिष शरीर के शरीर-मन-गात्मा मे ( विष्णुना ) व्यापक परमेश्वर की कि. रागद्वेष की भावनाभ्रो से रहित होकर वुढ़भ्थास गौर वैराग्य की भावनां द्वारा परिपक्व किया गया है -उस भक्तिरस कों ( महिषः). व्यापक परमेदवर को-‡ ममाद ) प्रसन्न करे दिया है ( मदि "कमं कतंवे ) ताकि परमेरवर पाप-वूत्र के वध का. महाक्मँ वा मोक्षप्रदानरूपी कमं करे ।

English

Make thou the Hero haste to give us riches even as a vessel filled brimful with treasure. Why, Maghavan, do they call thee bounteous Giver? Quicken me: thou, I hear, art he who

अध्याय 20

श्लोक 96.24

अपे॑हि मनसस्प॒तेऽप॑ क्राम प॒रश्च॑र ।प॒रो निरृ॑त्या॒ आ च॑क्ष्व बहु॒धा जीव॑तो॒ मनः॑

apehi manasaspate'pa krāma paraścara | paro nirṛtyā ā cakṣva bahudhā jīvato manaḥ

हिन्दी अर्थ

२४६ भथववंवेद-भाष्य का०.२० 1 सु° ९५ क्रमा कर रही है सूयं की । इस परिक्रमा की अनुभूति हमे नहीं हो रही । भारिर श्रा पाके । सस्यः=सत्सु तायते ( निर० ३।३। १३) ।

English

quickens. Sakra, let my intelligence be active, and bring us luck that finds great wealth, O Indra.

अध्याय 20

श्लोक 97.1

व॒यमे॑नमि॒दा ह्योपी॑पेमे॒ह व॒ज्रिण॑म्।तस्मा॑ उ अ॒द्य स॑म॒ना सु॒तं भ॒रा नू॒नं भू॑षत श्रु॒ते

vayamenamidā hyopīpemeha vajriṇam| tasmā u adya samanā sutaṃ bharā nūnaṃ bhūṣata śrute

हिन्दी अर्थ

किये (हन्ति) स्वयं हनन करता है । न्यक्ति, जो कि आजीविका के लिये दिनभर लगा रहता है,भौ र थकामान्दा जिसे कि भ्राजीविकार्जंन की चिन्ता नही, वह मी.यदि भक्तिके लिये तत्पर नहीं होता, तो परमेदवर उस के प्रति प्रकट नहीं होता, उसे पने से

English

Celestial-natured, he o’erwhelms with riches the devotee who keeps not back his money. O much-invoked, may we subdue all famine and evil want with store of grain and cattle.

अध्याय 20

श्लोक 97.2

वृक॑श्चिदस्य वार॒ण उ॑रा॒मथि॒रा व॒युने॑षु भूषति ।सेमं नः॒ स्तोमं॑ जुजुषा॒ण आ ग॒हीन्द्र॒ प्र चि॒त्रया॑ धि॒या

vṛkaścidasya vāraṇa urāmathirā vayuneṣu bhūṣati | semaṃ naḥ stomaṃ jujuṣāṇa ā gahīndra pra citrayā dhiyā

हिन्दी अर्थ

कृ दरुर ही रखता है । परन्तु जो मन्दरेषी हैःभौर भनाचारमें लिप्त, ड+ स्पष्ट! निररत्नौ =भररलिन पमाना है,-कोहनी से लेकर खुले हाथ . कीछोटी भ्रगुली तक अ्भित्राय है “कुछ दर नकि . बहुत दूर । देसे , २५० थववेद-माष्य का० २० । सु० ९६ ( अदवायन्तः ) अश्व चाहते हए, ( गव्यन्तः ) गौए. चाहते हुए,

English

May we allied, as first in rank, with princes,:obtain possessions by our own exertion Brihaspati protect us from the rearward, and from above and from below, from sinners.

अध्याय 20

श्लोक 97.3

कदू॒ न्व॑१स्याकृ॑त॒मिन्द्र॑स्यास्ति॒ पौंस्य॑म्।केनो॒ नु कं॒ श्रोम॑तेन॒ न शु॑श्रुवे ज॒नुषः॒ परि॑ वृत्र॒हा

kadū nva1syākṛtamindrasyāsti pauṃsyam| keno nu kaṃ śromatena na śuśruve januṣaḥ pari vṛtrahā

हिन्दी अर्थ

का (हवामहे) आह्वान करते ई, ताकि हम ( उप गन्तवे ) जाप के समीप पटु सके । ( ते) आप कौ ( नवायाम् ) सदाः नवीन ( सुमतौ ) वैदिक सुमति मे (आभषन्तः) पने भ्राप को विभ्रुषित करते हए हम ( इन्र ) हे भी हई है । शुनम् सुखम् (निष ३।६)1

English

May Indra from the front and from the centre, as friend to friends, vouchsafe us room and freedom.

अध्याय 20

श्लोक 98.1

व॒यमे॑नमि॒दा ह्योपी॑पेमे॒ह व॒ज्रिण॑म्।तस्मा॑ उ अ॒द्य स॑म॒ना सु॒तं भ॒रा नू॒नं भू॑षत श्रु॒ते

vayamenamidā hyopīpemeha vajriṇam| tasmā u adya samanā sutaṃ bharā nūnaṃ bhūṣata śrute

हिन्दी अर्थ

है रोगी ! (जीवनाय ) तेरे जीने के लिये, ( त्वा ) तुफं ( भन्ञात्- हवि द्वारा, ( मुञ्चामि ) छडाता हूं । है सम्बन्धी-जनो ! ( यदि ) , नै (जग्राह ) पकड लिया है, जकड लिया है,. तोभी (एतत्) इस हवि द्वारा, ५ यक्ष्मा-रोग-निवारक भ्रोषधियों की हवि भगिनि मेँ देते रहने से

English

Served with oblations, first-born, mountain-render, Angiras’ Son, Brihaspati the holy.

अध्याय 20

श्लोक 98.2

वृक॑श्चिदस्य वार॒ण उ॑रा॒मथि॒रा व॒युने॑षु भूषति ।सेमं नः॒ स्तोमं॑ जुजुषा॒ण आ ग॒हीन्द्र॒ प्र चि॒त्रया॑ धि॒या

vṛkaścidasya vāraṇa urāmathirā vayuneṣu bhūṣati | semaṃ naḥ stomaṃ jujuṣāṇa ā gahīndra pra citrayā dhiyā

हिन्दी अर्थ

प्रार्थनाए' भी परमेदवर से करनी चंिये 1 ( यदि क्ितायुः ) यदि रोगी समक्ता है किं उस की भरायु भर्थात् जीवन-काल समाप्त हो गया है, ( यदि वा भ्रथवा ( परेतः ) जीवन से रोगी यदि पराडःमूख हो गया है, .भ्रौर (यदि) भ्रगर (- मृत्योः ) मृत्यु के (अन्तिकम् ) समीप वह (नीत एव) पहुंच ही गयां है, तब भी मै चिकित्सक (्राहरामि) छीन लाता हं; मैने (एनम्) इस रोगी को, (शतशारदाय) सौ वषोँ तक जीने के लिये, (भरस्पा्म् ) हस्तरपद्रं कर दिया है ।

English

With twice-firm path, dwelling in light, our Father, roars loudly, as a bull, to earth and heaven.

अध्याय 20

श्लोक 98.3

कदू॒ न्व॑१स्याकृ॑त॒मिन्द्र॑स्यास्ति॒ पौंस्य॑म्।केनो॒ नु कं॒ श्रोम॑तेन॒ न शु॑श्रुवे ज॒नुषः॒ परि॑ वृत्र॒हा

kadū nva1syākṛtamindrasyāsti pauṃsyam| keno nu kaṃ śromatena na śuśruve januṣaḥ pari vṛtrahā

हिन्दी अर्थ

, (१) उचित भोषधि्यों को भग्न मे डाल कर, निकने धूम्र कां पान । इसके शीघ्लः विना करता है। साथ ही गृहशुद्धि भी हौ जाती है।. (२) परमे- “अयं से हस्तो भगवानयं मे भगवसतरः । रोगी कौ रोगोन्मक्ति के भादवासन भो वेते चाये । मन्त्र ६२३ मे.यह भी

English

Brihaspati who made for such a people wide room and verge when Gods were invocated— Slaying his foe he breaketh down their cattles, quelling his enemies and those who hate him.

अध्याय 20

श्लोक 99.1

अ॒भि त्वा॑ पू॒र्वपी॑तय॒ इन्द्र॒ स्तोमे॑भिरा॒यवः॑ ।स॒मी॒ची॒नास॑ ऋ॒भवः॒ सम॑स्वरन् रु॒द्रा गृ॑णन्त॒ पूर्व्य॑म्

abhi tvā pūrvapītaya indra stomebhirāyavaḥ | samīcīnāsa ṛbhavaḥ samasvaran rudrā gṛṇanta pūrvyam

हिन्दी अर्थ

दर्शाया है किं जीवन की कोई नियत अवधि नहीं होती । स्वास्थ्य के - नियमों के पालनं से तथा यथोचित उपचार दारा भायु १०० -वर्षोकी २५२ भ्रथवंवेद-माष्य का० २०। सू० ९६

English

Brihaspati in war hath won rich treasures, hath won, this God, the great stalls filled with cattle. Striving to win waters and light, resistless, Brihaspati with light- ning smites the foeman.

अध्याय 20

श्लोक 99.2

अ॒स्येदिन्द्रो॑ वावृधे॒ वृष्ण्यं॒ शवो॒ मदे॑ सु॒तस्य॒ विष्ण॑वि ।अ॒द्या तम॑स्य महि॒मान॑मा॒यवोऽनु॑ ष्टुवन्ति पू॒र्वथा॑

asyedindro vāvṛdhe vṛṣṇyaṃ śavo made sutasya viṣṇavi | adyā tamasya mahimānamāyavo'nu ṣṭuvanti pūrvathā

हिन्दी अर्थ

( सहन्नाक्षेण ) हजारों रोगो का क्षयं करनेवाली, ( चतायुषा .) करनेवाली (हविषा) हवि ढारा, (एनम्) इस रोगी को ( गाहाषंम् ) मै मृत्यु के फ़ंदे से छीन लाया हु । ( यथा ताकि (इन्द्रः) परमेदवर (एनम्) . इसे (शरदः) सौ वषोँ तक (नयाति) पहुंचा दे, भौर इसे (विइवस्य. दुरितस्य) सब कष्टो के (पारम् अति) पारकेरदे। . भति=भ्रति नयाति । “सह्नाक्षेण” द्वारा यह भी सूचित किया है कि हवि-चिकित्सा हारा एक साथ हजारों रोगियों के समान-रोग की रोगियों के समीप एक साथ पहुंच सकते टै ।

English

This holy hymn sublime and seven-headed, sprung from eternal Law, our sire discovered.

अध्याय 20

श्लोक 100.1

अधा॒ ही॑न्द्र गिर्वण॒ उप॑ त्वा॒ कामा॑न् म॒हः स॑सृ॒ज्महे॑ ।उ॒देव॒ यन्त॑ उ॒दभिः॑

adhā hīndra girvaṇa upa tvā kāmān mahaḥ sasṛjmahe | udeva yanta udabhiḥ

हिन्दी अर्थ

छीन लाया हु, (त्वा) तुफं (भ्रविदम्) मैने पुनः पा लिया है; (पुनरागाः) षु फिरसंसारर्मेभ्रा गयादहै, (पुनर्णवः) तू फिरनयाहोगयाहै; (ते) का० २०1 सु० €६ भअथवेवेद-भाष्य २५३

English

Ayāsya, friend of all men, hath engendered the fourth hymn as he sang his laud to Indra. Thinking aright, praising eternal Order, the sons of Dyaus the Asura, those heroes,

अध्याय 20

श्लोक 100.2

वार्ण त्वा॑ य॒व्याभि॒र्वर्ध॑न्ति शूर॒ ब्रह्मा॑णि ।वा॒वृ॒ध्वांसं॑ चिदद्रिवो दि॒वेदि॑वे

vārṇa tvā yavyābhirvardhanti śūra brahmāṇi | vāvṛdhvāṃsaṃ cidadrivo divedive

हिन्दी अर्थ

(योनिम्) योनि मे (आदये) गुप्तखूप में रायन कर रहा रै, प्रविष्ट हृभा- हृभा है उसे, ( इतः ) इस स्थान से, (रक्षोहा) कृमिरूप राक्षस का हनन उदुम्बर के साथ (संविदानः) मिल कर, (बाघताम् ) हटाए, नष्ट करे । चित्रकः भ्रनलनामा ( भावप्रकाश) । भ्रमीवा भरम (रोगे) 1 बदा करनेवाला कृमि, ( ते ) तेरे ( गमम् ) गर्भस्थ बच्चे, तथातेरी ( योनिम् ) योनिम (भाशये ) गुप्तरूप मँ शयन कर रहा है, प्रविष्ट

English

Angirases, holding the rank of sages, first honoured sacrifice’s holy statute.

अध्याय 20

श्लोक 100.3

यु॒ञ्जन्ति॒ हरी॑ इषि॒रस्य॒ गाथ॑यो॒रौ रथ॑ उ॒रुयु॑गे ।इ॒न्द्रवाहा॑ वचो॒युजा॑

yuñjanti harī iṣirasya gāthayorau ratha uruyuge |indravāhā vacoyujā

हिन्दी अर्थ

कर (निः भरनीनदत्) पुर्णंतया नष्ट कर निकाल दियाहै। मष्ट करता है, भौर (यः) जो कृमि (सरीसृपम्). ग्मादाय मे सरकते हए २५४ प्रय्ववेद-भाष्य का०.२०॥ सु० ९६

English

Girt by his friends who cried with swanlike voices, bursting the stoney barriers of the prison, Brihaspati spake in thunder to the cattle, and uttered praise and. song when he had found them.

अध्याय 20

श्लोक 101.1

अ॒ग्निं दू॒तं वृ॑णीमहे॒ होता॑रं वि॒श्ववे॑दसम्।अ॒स्य य॒ज्ञस्य॑ सु॒क्रतु॑म्

agniṃ dūtaṃ vṛṇīmahe hotāraṃ viśvavedasam| asya yajñasya sukratum

हिन्दी अर्थ

ग को नष्ट करता है, भ्ीर(गः) यो छृमि (तै) हेर(नातम्) उलन्न हृ अच्वे की (जिघांसति) हिसा करता है, उसे (इतः) यहां से (नाश्चयामसि) हम नष्ट करतेह। . र न में (भराक्षये ) भाकर मानो कुकाल तक सोया सा रहता, श्रौर देता है,.(तम्) उस कृमि को (इतः) इन उपय क्त ओषधियों द्वारा (नाश्या- मसि) हम चिकित्सक विनष्ट करते है । =

English

Apart from one, away from two above him, he draye the kine that stood in bonds of falsehood.

अध्याय 20

श्लोक 101.2

अ॒ग्निम॑ग्निं॒ हवी॑मभिः॒ सदा॑ हवन्त वि॒श्पति॑म्।ह॒व्य॒वाहं॑ पुरुप्रि॒यम्

agnimagniṃ havīmabhiḥ sadā havanta viśpatim| havyavāhaṃ purupriyam

हिन्दी अर्थ

हस्ती. (यः) जो (जारः) व्यभिचारी पुरुष, ( भ्राता भूत्वां ) धोखे का भाई बन कर, भौर ( प्रतिः भत्वा ) धोखे का पति बेन कर, (त्वा निपद्यते) तुक पर बलात्कार करता है, ओर इस प्रकार ( यः) -जो हनन करता है,(तम्) उसे. (इतः) इख जीवन से (नाशयामसि) हम राज्याधि- कारीं विनष्ट.कर देते है ।

English

Brihaspati, seeking light amid the darkness, draye forth the bright cows: three he made apparent. When he had cleft the lairs and western castle, he cut off three from him who held the waters.

अध्याय 20

श्लोक 101.3

अग्ने॑ दे॒वां इ॒हा व॑ह जज्ञा॒नो वृ॒क्तब॑र्हिषे ।असि॒ होता॑ न॒ ईड्यः॑

agne devāṃ ihā vaha jajñāno vṛktabarhiṣe | asi hotā na īḍyaḥ

हिन्दी अर्थ

करके (निपद्यते) तु -पर बलात्कार करता है, भ्रौर इस प्रकार ( यः ) हनन करना चाहता है, या हनन करता है, (तम्) -उसे (इतः) इस जीवन से (नाशयामसि) हम राज्याःघकारी विनष्ट कर देते है। ६३३. अश्ीम्य ते नासिकाभ्यां कणीम्यां हुषुंकादधिं । हे रोगी ! (ते) तेरी ( भक्षीभ्याम् ) दोनो भांखो से, ( नासिका-

English

Brihaspati discovered, while he thundered like Dyaus, the dawn,. the sun, the cow, the lightning.

अध्याय 20

श्लोक 102.1

ई॒लेन्यो॑ नम॒स्यऽस्ति॒रस्तमां॑सि दर्श॒तः ।सम॒ग्निरि॑ध्यते॒ वृषा॑

īlenyo namasya'stirastamāṃsi darśataḥ | samagniridhyate vṛṣā

हिन्दी अर्थ

(वि वृहामि) म चिकित्सक निकालता हं । छुबुक = चिबुक । चिवृक-यक्ष्मा = निचले जबादडे का गल जाना, हे रोगी ! (ते) तेरे (परीवाभ्यः) गते के भार्गो से; (उष्मिहाभ्यः)

English

As with a hand, so with his roaring Indra cleft Vala through,. the guardian of the cattle. Seeking the milk-draught with sweat-shining comrades he stole: the Pani’s kine and left him weeping.

अध्याय 20

श्लोक 102.2

वृषो॑ अ॒ग्निः समि॑ध्य॒तेऽश्वो॒ न दे॑व॒वाह॑नः ।तं ह॒विष्म॑न्तः ईलते

vṛṣo agniḥ samidhyate'śvo na devavāhanaḥ | taṃ haviṣmantaḥ īlate

हिन्दी अर्थ

२५६ प्रथववेद-माष्य का०२०। सु० ६९६ हे रोमी ! (ते) तेरे ( हृदयात् ) हृदय से, (क्लोम्नः परि ) दाहिने ( सुश्रुत शरीर० ४।३७ ) । मतस्नाभ्याम् =मद से शोधन करनेवाले, दोनों कोखों से, ( प्लाशषेः ) प्लाशि से, ( नाभ्याः ) नाभिसे (ते) तेरे

English

He with bright faithful friends, winners of booty, hath rent the milker of the cows asunder. Brihaspati with wild boars strong and mighty sweating with heat hath gained a rich

अध्याय 20

श्लोक 102.3

वृष॑णं त्वा व॒यं वृ॑ष॒न् वृष॑णः॒ समि॑धीमहि ।अग्ने॒ दीद्य॑तं बृ॒हत्

vṛṣaṇaṃ tvā vayaṃ vṛṣan vṛṣaṇaḥ samidhīmahi | agne dīdyataṃ bṛhat

हिन्दी अर्थ

- प्लाशि-- 981, या मूत्राराय । (भथरवंवेदीय चिकित्सादास्व, 9 उमबनध (ते) तेरे रोगों को (वि वृहामि) मँ चिकरित्पक दूर करता हं । .. का०२० । सू ९६ अथर्वेवेद-माष्य २५७

English

possession. They, longing for the kine, with faithful spirit incited with their hymns the Lord of cattle. Brihaspati freed the radiant cows with comrades self-yoked,. averting shame from one

अध्याय 20

श्लोक 103.1

अ॒ग्निमी॑लि॒ष्वाव॑से॒ गाथा॑भिः शी॒रशो॑चिषम्।अ॒ग्निं रा॒ये पु॑रुमील्ह श्रु॒तं नरो॒ऽग्निं सु॑दी॒तये॑ छ॒र्दिः

agnimīliṣvāvase gāthābhiḥ śīraśociṣam| agniṃ rāye purumīlha śrutaṃ naro'gniṃ sudītaye chardiḥ

हिन्दी अर्थ

(स्नावभ्यः) मांस-बन्धनियों से, (धमनिभ्यः) धमनि-नाडियों से, (पाणि- . स्नाव =वे मांस-तन्तु जिनके द्वारा मांसपेशियाँ हडिढयों के साथ के ( वीबर्हेण ) जड़ काट देनेवाले साधन द्वारा ( वि वृहामसि ) दूर . .. “कद्यप का वीबर्हे” क्या है, यह विचारणीय ह । अथर्ववेदीय

English

another. In our assembly with auspicious praises exalting him who roareth. like a lion.

अध्याय 20

श्लोक 103.2

अग्न॒ आ या॑ह्य॒ग्निभि॒र्होता॑रं त्वा वृणीमहे ।आ त्वाम॑नक्तु॒ प्रय॑ता ह॒विष्म॑ती॒ यजि॑ष्ठं ब॒र्हिरा॒सदे॑

agna ā yāhyagnibhirhotāraṃ tvā vṛṇīmahe | ā tvāmanaktu prayatā haviṣmatī yajiṣṭhaṃ barhirāsade

हिन्दी अर्थ

चन्द्रमा रौर सूयं को ““कदयप” कहा है, भ्रौर उनक किरणों को “वीवरह" मनके स्वामी बने हृष् पाभ ! तू ( भपेहि ) जुदा हो जा, ( भ्रप क्रामः) चक्ष्व) . तु दृद़-संकल्प से कह कि (परः) तर भी परे हो जां; यद्यपि (जीवतः) जीवित् मनुष्य का (मनः) मन (बहधा) बहुत प्रकार का होता है ।

English

May we in every fight where heroes conquer rejoice in strong. Brihaspati the victor. When he had won him strength of every nature and gone to heaven and its most lofty

अध्याय 20

श्लोक 103.3

अच्छा॒ हि त्वा॑ सहसः सूनो अङ्गिरः॒ स्रुच॒श्चर॑न्त्यध्व॒रे।ऊ॒र्जो नपा॑तं घृ॒तके॑शमीमहे॒ऽग्निं य॒ज्ञेषु॑ पू॒र्व्यम्

acchā hi tvā sahasaḥ sūno aṅgiraḥ srucaścarantyadhvare| ūrjo napātaṃ ghṛtakeśamīmahe'gniṃ yajñeṣu pūrvyam

हिन्दी अर्थ

२९ . भथर्वेवेद-भाष्य का० २० 1 सू० ६७ चिकित्सक रोगी से कहता है कि यद्यपि जीवित मनुष्य कामन बहुत प्रकार का होता है, वहःकमी पापकी भोर मूकता है भौरकंभी पुष्यकीभ्रोर, तबमभी है रोगी! तु मनोनिष्ठ पापके साय.लङ्, इस आसुरी प्रवृत्ति को हटाने के लिये दृढ़ संकल्प का भराश्रय ले, मानसिक.पाप की जड़ उचखेडने कै लिये पाप को मानसिक भूमिसे उलाड् फक । दसी प्रकार पापजन्य कष्टो भौर रोगों को दूर करने के लिये.भी तु कटिबद हो जा । उनके प्रति भी तू उपयु क्त दढ भावना को भ्रषने मं जागरित कर । परेहि न त्वा कामये" ॥। (अथवं ० ६।४५।१) । ।

English

mansions, Men praised Brihaspati the mighty, bringing the light within their mouths from sundry places.

अध्याय 20

श्लोक 104.1

इ॒मा उ॑ त्वा पुरूवसो॒ गिरो॑ वर्धन्तु॒ या मम॑ ।पा॒व॒कव॑र्णाः॒ शुच॑यो विप॒श्चितो॒ऽभि स्तोमै॑रनूषत

imā u tvā purūvaso giro vardhantu yā mama | pāvakavarṇāḥ śucayo vipaścito'bhi stomairanūṣata

हिन्दी अर्थ

होम्योपेथिक- चिकित्सा मेँ रोगो की चिकित्सा के लिये,. रोगी की मानसिक अवस्थ्रो-पर भी विशेषः बल दिया है' क्योंकि मानसिक-भवस्था, भिन्न-भिन्न रोगों के उत्पादन मे, एक विंदेष कारण है । का वणन किया है, भौर उसे भ्रौर उस से प्रकट होनेवाले कष्टों भ्रौर रोगों के हटाने में जो “दुढ-संकल्प" का वर्णेन किया है, इस से स्वभावतः यह सूचित किया है किं “कदयप का वीबहं" दढ़्-संकल्प है, जो कि कश्यप (वयम्) हम उपासको ने (इह) इस उपासना-यज्ञ मे, (वच्िणम्)

English

Fulfil the prayer that begs for vital vigor: aid in your wonted manner e’en the humble. Let all our foes be turned and driven backward. Hear this, O Heaven and Earth, ye all-producers.

अध्याय 20

श्लोक 104.2

अ॒यं स॒हस्र॒मृषि॑भिः॒ सह॑स्कृतः समु॒द्र इ॑व पप्रथे ।स॒त्यः सो अ॑स्य महि॒मा गृ॑णे॒ शवो॑ य॒ज्ञेषु॑ विप्र॒राज्ये॑

ayaṃ sahasramṛṣibhiḥ sahaskṛtaḥ samudra iva paprathe | satyaḥ so asya mahimā gṛṇe śavo yajñeṣu viprarājye

हिन्दी अर्थ

भक्तिरस पिलायाहै) है उपासक ! तू ( समनाः मनोभावनाभ्रों के स्तुतियों द्वारा इस की शोभा को बढ्ाभ्नो । केनो. च कं भोम॑तेन न शुवे जलुष; परि शत्रहा ॥६॥ (कद् उनुन ) कब नहीं ( भराशयुश्रुवे ) सववेत्र सुने गए ? ( श्रोमतेन )

English

Indra with mighty strength hath cleft asunder the head of Arbuda the watery monster, Slain Ahi, and set free the Seven Rivers. O Heaven and Earth, with all the Gods, protect us.

अध्याय 20

श्लोक 104.3

आ नो॒ विश्वा॑सु॒ हव्य॒ इन्द्रः॑ स॒मत्सु॑ भूषतु ।उप॒ ब्रह्मा॑णि॒ सव॑नानि वृत्र॒हा प॑रम॒ज्या ऋची॑षमः

ā no viśvāsu havya indraḥ samatsu bhūṣatu | upa brahmāṇi savanāni vṛtrahā paramajyā ṛcīṣamaḥ

हिन्दी अर्थ

. परमेश्वर ने नहीं सुना ?. (जनुषः) किस जन्मधारी उपासक के (वृच्रहा). पाप-वुत्रों का हनन, (परि) पूर्णरूप से, परमेहवर ने (न कृतम्) नहीं किया? उपासको के पापों का हनन परमेश्वर पृणतथा कर देता है

English

Praise, even as he is known, with song Indra the guardian of the kine, The Son of Truth, Lord of the brave. Hither his bay steeds have been sent, red steeds are on the sacred grass.

अध्याय 20

श्लोक 104.4

त्वं दा॒ता प्र॑थ॒मो राध॑साम॒स्यसि॑ स॒त्य ई॑शान॒कृत्।तु॒वि॒द्यु॒म्नस्य॒ युज्या वृ॑णीमहे पु॒त्रस्य॒ शव॑सो म॒हः

tvaṃ dātā prathamo rādhasāmasyasi satya īśānakṛt| tuvidyumnasya yujyā vṛṇīmahe putrasya śavaso mahaḥ

हिन्दी अर्थ

६४४. त्वामिद्धि हवामहे. साता वाज॑स्य कारवः । ( कारवः ) हमः कमंयोगी उपासक, ( वाजस्य ) राक्ति भौर. परमेदवर ! श्राप का ही (हवामहे) आह्वान करते हैँ । (इन्द्र) है परमेदवर! पतिकाही हम आह्वान करते हँ । ( प्रवतः नरः) दुःखी नर-नारियां.

English

Where we in concert sing our songs. For Indra thunder-armed the kine have yielded mingled milk and meath.

अध्याय 20

श्लोक 105.1

त्वमि॑न्द्र॒ प्रतू॑र्तिष्व॒भि विश्वा॑ असि॒ स्पृधः॑ ।अ॒शस्ति॒हा ज॑नि॒ता वि॑श्व॒तूर॑सि॒ त्वं तू॑र्य तरुष्य॒तः

tvamindra pratūrtiṣvabhi viśvā asi spṛdhaḥ | aśastihā janitā viśvatūrasi tvaṃ tūrya taruṣyataḥ

हिन्दी अर्थ

(रथ्यम् ) शरींर-रथ के वहन करने योभ्य अदवम् ) भदवसदुक बलिष्ठ मन, ह्मे (सं किर) प्रदान कोजिये, ( न ) जैसे कि ( जिग्युषे ) प्राथमिक पान के लिये, (भायवः) उपासक-जन-(स्तोमेभिः) सामगानां दारा (समीचीनासः) सम्यक्रूप से दिल्प-कायोँ का सम्पादन करनेवाले (ऋभवः)

English

What time he found them in the vault. When I and Indra amount on high up to the bright One’s place and home, We, having drunk of meath, will reach his seat whose Friends are three-times-seven.

अध्याय 20

श्लोक 105.2

अनु॑ ते॒ शुष्मं॑ तु॒रय॑न्तमीयतुः क्षो॒णी शिशुं॒ न मा॒तरा॑ ।विश्वा॑स्ते॒ स्पृधः॑ श्नथयन्त म॒न्यवे॑ वृत्रं यदि॑न्द्र॒ तूर्व॑सि

anu te śuṣmaṃ turayantamīyatuḥ kṣoṇī śiśuṃ na mātarā | viśvāste spṛdhaḥ śnathayanta manyave vṛtraṃ yadindra tūrvasi

हिन्दी अर्थ

का० ६० । सू० १०० अथ्ववेद-माष्य २६१. भ्रापका स्वरपूर्वंक गान करते है। पूवंपीतये = उपासनामा्गं का भ्रवलम्बन करने पर, अन्य किसी भक्ति करनी चाहिए, भौर इस के प्रति ही अपने भक्तिरस की .मेट देनी

English

Sing, sing ye forth your songs of praise, ye Priyamedhas, sing your songs: Yea, let young children sing their lauds: as a strong castle praise ye him.

अध्याय 20

श्लोक 105.3

इ॒त ऊ॒ती वो॑ अ॒जरं॑ प्रहे॒तार॒मप्र॑हितम्।आ॒शुं जेता॑रं॒ हेता॑रं रथीत॑म॒मतू॑र्तं तुग्र्या॒वृध॑म्

ita ūtī vo ajaraṃ prahetāramaprahitam| āśuṃ jetāraṃ hetāraṃ rathītamamatūrtaṃ tugryāvṛdham

हिन्दी अर्थ

निष्पादित भक्तिरस की (मदे) मस्ती चढ़ जाती है, ( अस्य ) इस उपासक (भ्रायवः) उपासक-जन, ( प्रस्य ) इस परमेदवर की . ( तं महिमानम् ) उस द४८. अघा हीन्र शिण उप॑ त्वा कामान् महः संसृल्हं । उदेव यन्त॑ उदभिः ॥१॥

English

Now loudly let the viol sound, the lute send out its voice with might, Shrill be the music of the string. To Indra is the hymn upraised. When hither speed the dappled cows, unflinching, easy to be milked,

अध्याय 20

श्लोक 105.4

यो राजा॑ चर्षणी॒नां याता॒ रथे॑भि॒रध्रि॑गुः ।विश्वा॑सां तरु॒ता पृत॑नानां॒ ज्येष्ठो॒ यो वृ॑त्र॒हा गृ॒णे

yo rājā carṣaṇīnāṃ yātā rathebhiradhriguḥ | viśvāsāṃ tarutā pṛtanānāṃ jyeṣṭho yo vṛtrahā gṛṇe

हिन्दी अर्थ

( गि्व॑ण ) हे. वेदवाणियों हारा भजनीय ( इन्द्र ) परमेदवर । (भ्रधा) भवं (हि) निद्चय से . (महः कामान् ) हम अपनी महा-कामना््ों का (उप ससृज्महे त्वा) संसग, भाप के साथ, कर देते है, ( इव )-जसे कि (उदभिः) जलो के साथ (उदा उदान उदकानि) जल (यन्त) मिल जाते भ्रौर.एकरस हो जते्है। भर्थातु हम भ्रपनी कामना का संसगं संसार के साथन कर, श्राप के साथ करते्है। बादृध्वांसं चिदद्विवो विनेदिके ॥२॥

English

Seize quickly, as it bursts away, the Soma juice for Indra’s drink. Indra hath drunk; Agni hath drunk all Deities have drunk their fill.

अध्याय 20

श्लोक 105.5

इन्द्रं॒ तं शु॑म्भ पुरुहन्म॒न्नव॑से॒ यस्य॑ द्वि॒ता वि॑ध॒र्तरि॑ ।हस्ता॑य॒ वज्रः॒ प्रति॑ धायि दर्श॒तो म॒हो दि॒वे न सूर्यः॑

indraṃ taṃ śumbha puruhanmannavase yasya dvitā vidhartari | hastāya vajraḥ prati dhāyi darśato maho dive na sūryaḥ

हिन्दी अर्थ

२६२ त भरथववेद-भाष्य का० २०। सू° १०१ (वाः) जल (न) जैसे ( यव्याभिः) नदियों दारा ( वर्धन्ति ) हमें बढ़त है, वैसे (शूर). है पराक्रमरील ! तथा है भ्रद्रिवः ) पापविनाश्क

English

Here Varuna shall have his home, to whom the floods have sung aloud as mother-kine unto their calves. 299

अध्याय 20

श्लोक 106.1

तव॒ त्यदि॑न्द्रि॒यं बृ॒हत् तव॒ शुष्म॑मु॒त क्रतु॑म्।वज्रं॑ शिशाति धि॒षणा॒ वरे॑ण्यम्

tava tyadindriyaṃ bṛhat tava śuṣmamuta kratum| vajraṃ śiśāti dhiṣaṇā vareṇyam

हिन्दी अर्थ

दायक श्रापकी महिमा को, (दिवेदिवे) प्रतिदिन (वर्षन्ति) बढ़ाते है इषिरस्य ) अभीरष्टो को सिद्ध करनेवाले परमेदवर् के ( गाथया ) करने लगते है, भौर ( वचोयुजा. ) वेदवचनों को विधियो द्वारा योगयुक्त गोलोकों को शरीर-रथ कै युग" कहा है ।

English

Thou, Varuna, to whom belong the Seven Streams, art a glorious God.

अध्याय 20

श्लोक 106.2

तव॒ द्यौरि॑न्द्र॒ पौंस्यं॑ पृथि॒वी व॑र्धति॒ श्रवः॑ ।त्वामापः॒ पर्व॑तासश्च हिन्विरे

tava dyaurindra pauṃsyaṃ pṛthivī vardhati śravaḥ | tvāmāpaḥ parvatāsaśca hinvire

हिन्दी अर्थ

(दूतम्) कामादि दुर्वासनाभों को मस्म कर देनेवाले, ( होतारम् ) परमेदवर का (वृणीमहे) हम बरण करते रहै का० २०। सू० १०२ अ्रथरववेद-भाष्य २६३

English

The waters flow into thy throat as’twere a pipe with ample mouth. He who hath made the fleet steeds spring, well-harnessed, to the worshipper, He, the swift guide, is that fair form thot loosed the horses near at hand.

अध्याय 20

श्लोक 106.3

त्वां विष्णु॑र्बृ॒हन् क्षयो॑ मि॒त्रो गृ॑णाति॒ वरु॑णः ।त्वां शर्धो॑ मद॒त्यनु॒ मारु॑तम्

tvāṃ viṣṇurbṛhan kṣayo mitro gṛṇāti varuṇaḥ | tvāṃ śardho madatyanu mārutam

हिन्दी अर्थ

रथ का भगला डण्डा, जिसके साथ बलो को बान्धा जाता है। इन्द्रिय सवग्रिणी का, (हवीमभिः) ्राह्वान-मन्तों दवारा, उपासक ( सदा हवन्त ) सदा श्राह्वान करते है । कराइये । (होता) राक्तिप्रदातंा श्राप ही ( नः ) हमारे अब (ईडः प्रसि) स्तुत्य भ्रौर उपास्य है । अनज्ञानान्धकार तथा तज्जन्य कामादि. भौर तमोगुण के परिणामों को (तिरः) तिरस्कृत करनेवाला, (दशतः) द्ंनीय, भौर ( वृषा ) सुखो की

English

Indra, the very mighty, holds his enemies in utter scorn. He, far away, and yet a child, cleft the cloud smitten by his voice.

अध्याय 20

श्लोक 107.1

सम॑स्य म॒न्यवे॒ विशो॒ विश्वा॑ नमन्त कु॒ष्टयः॑ ।स॒मु॒द्राये॑व॒ सिन्ध॑वः

samasya manyave viśo viśvā namanta kuṣṭayaḥ | samudrāyeva sindhavaḥ

हिन्दी अर्थ

है५७१. वषो अधिः समिध्यतेऽश्वो न देववाहनः । (वृषा उ सुखो की वर्षा करनेवाला ( मग्नः) जगन्नेता ( समिध्यते ) हदय मेँ सम्यक् प्रदीप्त किया जाता है । (अवः न) जसे ररव वहन-कायं करता है वैसे जगन्नेता दिव्यंगुणों का वहन करता है । ( हवित्मन्तः)

English

He, yet a boy exceeding small, mounted his newly-fashioned car. He for his Mother and his Sire cooked the wild mighty buffalo. Lord of the Home, with beauteous cheeks, ascend thy chariot wrought of gold.

अध्याय 20

श्लोक 107.2

ओज॒स्तद॑स्य तित्विष उ॒भे यत् स॒मव॑र्तयत्।इन्द्र॒श्चर्मे॑व॒ रोद॑सी

ojastadasya titviṣa ubhe yat samavartayat| indraścarmeva rodasī

हिन्दी अर्थ

महाधनिक (पुत्रस्य) पुत्र के घन का (वृणीमहे) हम वरण करते है" उपयोग करते है वैसे (महः शवसः) भ्रापके महाबलं तथाः महा-भराध्यात्मिक घन का कर देते हँ; (अशस्तिहा) इन भ्रप्रशस्त भावनागों का हनन कर देते ह; सवंविघ पापों के विनाशक हँ । है परमेदवर ! ( तरुष्यतः ) इन हिसिक- वृत्तियों कों राप (तूयं) विनष्ट कीजिये॥: हे परमेदवर (ते) आपके (तुरयन्तम् ) संहारकारी (शुष्मम् अनु)

English

O Indra, if a hundred heavens and if a hundred earths were thine No, not a thousand suns could match thee at thy birth, not both the worlds, O Thunderer.

अध्याय 20

श्लोक 107.3

वि चिद् वृ॒त्रस्य॒ दोध॑तो॒ वज्रे॑ण श॒तप॑र्वणा ।शिरो॑ बिभेद् वृ॒ष्णिना॑

vi cid vṛtrasya dodhato vajreṇa śataparvaṇā | śiro bibhed vṛṣṇinā

हिन्दी अर्थ

बल का मानो भ्रनुचिन्तन करके .(क्षोणी) चुलोक भ्रौर भूलोक. (अनु ईयतुः) भ्रापके अनुगामीहो रहे है, (न) जैसे किं (मातरा) माता-पिता ( शिशु भनु ईयतुः) रि्यु की सुरक्षा का भनुचिन्तन करके उसं के अनुगामी होते.

English

Thou, Hero, hast performed thy hero deeds with might, yea, all with strength, O Strongest One. Maghavan, help us to a stable full of kine, O Thunderer, with wondrous aids.

अध्याय 20

श्लोक 107.4

तदिदा॑स॒ भुव॑नेषु॒ ज्येष्ठं॒ यतो॑ ज॒ज्ञ उ॒ग्रस्त्वे॒षनृ॑म्णः ।स॒द्यो ज॑ज्ञा॒नो नि रि॑णाति॒ शत्रू॒ननु॒ यदे॑नं॒ मद॑न्ति॒ विश्व॒ ऊमाः॑

tadidāsa bhuvaneṣu jyeṣṭhaṃ yato jajña ugrastveṣanṛmṇaḥ | sadyo jajñāno ni riṇāti śatrūnanu yadenaṃ madanti viśva ūmāḥ

हिन्दी अर्थ

है, उसके पीचे-पीचे चलते है । ( स्पृषः † स्पर्धा आदि ( विदवाः ) सबं विनादा करनेवले हँ । कषोणी == चावापुथिवी नाम (निष० ३।३०)। , है उपासको ! (इतः). इन लेशो से ( वः ) तुम्हारी रक्षा के लिये रक्तो के वधंक परमेदवर कं (गृणे) गुण वर्णन करता हं

English

May our hymns give thee great delight. Display thy bounty, Thunderer.

अध्याय 20

श्लोक 107.5

वा॒वृ॒धा॒नः शव॑सा॒ भूर्यो॑जाः॒ शत्रु॑र्दा॒साय॑ भि॒यसं॑ दधाति ।अव्य॑नच्च व्य॒नच्च॒ सस्नि॒ सं ते॑ नवन्त॒ प्रभृ॑ता॒ मदे॑षु

vāvṛdhānaḥ śavasā bhūryojāḥ śatrurdāsāya bhiyasaṃ dadhāti | avyanacca vyanacca sasni saṃ te navanta prabhṛtā madeṣu

हिन्दी अर्थ

वुप्र या उदकम् (निष० १।१२) । मन्व मेँ शारौरिक जल का (यः) जो परमेश्वर (चर्षणीनाम् ) सब मनूष्यों का ( राजा ) राजा . है, ( भध्धिगुः ) जो अप्रतिबद्ध गतिवाला, ( रथेभिः ) उपासको कं शारीर- , रथँ का प्रेरक बनकर मानो उन र्थो द्वारा ( याता ) गतिमान् होता हैः उपासको कं व्यवहारो को सिद्ध करता है ! जो (विदवासाम्) सब (पृतना-

English

Drive off the enemies of prayer. Crush with thy foot the niggard churls who bring no gifts. Might art thou:

अध्याय 20

श्लोक 107.6

त्वे क्रतु॒मपि॑ पृञ्चन्ति॒ भूरि॒ द्विर्यदे॒ते त्रिर्भव॒न्त्यूमाः॑ ।स्वा॒दोः स्वादी॑यः स्वा॒दुना॑ सृजा॒ सम॒दः सु मधु॒ मधु॑ना॒भि यो॑धीः

tve kratumapi pṛñcanti bhūri dviryadete trirbhavantyūmāḥ | svādoḥ svādīyaḥ svādunā sṛjā samadaḥ su madhu madhunābhi yodhīḥ

हिन्दी अर्थ

नाम्) काम, क्रोष, लोभ, मोहादि की सेना का (तरुता) विनाशं करता. पर भरावंरण डलं देनेवाले पोप का हनन करता है, उस परमेरवर का (गृणे) मै वर्णेन करता हूं । ड. ९६८. इनदरं व धम्म पुरहन्मलवैसे यस्यं द्विता विंषतेरिं ।

English

There is not one to equal thee. Thou art the Lord of Soma pressed, Soma unpressed is also thine,

अध्याय 20

श्लोक 107.7

यदि॑ चि॒न्नु त्वा॒ धना॒ जय॑न्तं॒ रणे॑रणे अनु॒मद॑न्ति॒ विप्राः॑ ।ओजी॑यः शुष्मिन्त्स्थि॒रमा त॑नुष्व॒ मा त्वा॑ दभन् दु॒रेवा॑सः क॒शोकाः॑

yadi cinnu tvā dhanā jayantaṃ raṇeraṇe anumadanti viprāḥ | ojīyaḥ śuṣmintsthiramā tanuṣva mā tvā dabhan durevāsaḥ kaśokāḥ

हिन्दी अर्थ

. . (पुद्हन्मन्) पापो का स्वयं हनन करनेवले है उपासक तूं (भरवसे) सतुतय द्वारा, (विधतंरि) जगत् के धारण करने मे यस्य ) जिस के कि , (निता) वो हप ह । उसः परमेदवर ने ( हस्ताय ) पापों के हनन के लिये

English

Thou art the Sovran of the folk. Swaying about the active Ones came nigh to Indra at his birth, And shared his great heroic might.

अध्याय 20

श्लोक 107.8

त्वया॑ व॒यं शा॑शद्महे॒ रणे॑षु प्र॒पश्य॑न्तो यु॒धेन्या॑नि॒ भूरि॑ ।चो॒दया॑मि त॒ आयु॑धा॒ वचो॑भिः॒ सं ते॑ शिशामि॒ ब्रह्म॑णा॒ वयां॑सि

tvayā vayaṃ śāśadmahe raṇeṣu prapaśyanto yudhenyāni bhūri | codayāmi ta āyudhā vacobhiḥ saṃ te śiśāmi brahmaṇā vayāṃsi

हिन्दी अर्थ

है, (न) जैसे कि (दिवे) भकार के लिये (महः सूरयः) तेजस्वी सूये को, उसने दविता परमभेख्वर के दो रूप है--शनुगरह करनेवाला रूप, बौर . -कुकमियों पर निरहं रुपवाला है । हस्ताय =हन् हिसायाम् । भर्थात् सुखा देनेवाला बल.पापियों का शोषण करनेवाला बल । कतुः = परज्ञा

English

Based upon strength and victory and power, O Indra is thy birth. Thou, Mighty One, art strong indeed.

अध्याय 20

श्लोक 107.9

नितद् द॑धि॒षेऽव॑रे॒ परे॑ च॒ यस्मि॒न्नावि॒थाव॑सा दुरो॒णे।आ स्था॑पयत मा॒तरं॑ जिग॒त्नुमत॑ इन्वत॒ कर्व॑राणि॒ भूरि॑

nitad dadhiṣe'vare pare ca yasminnāvithāvasā duroṇe| ā sthāpayata mātaraṃ jigatnumata invata karvarāṇi bhūri

हिन्दी अर्थ

(निघ० ३।९) ; कर्मं (निघ० २।१) । धिषणा = वाक् (निघ ० १।११) ; बल की महिमा (वर्धति) बढ़ता है, भौर (पृथिवी श्वरः वंति) पृथिवी श्रापकी कीति बढ़ती है। (भ्रापः) सामुद्रिक जल, वर्षा के तथा नदी-नालों

English

Thou art the Vritra-slayer, thou, Indra, hast spread the firmament: Thou hast with might upheld the heavens. Thou, Indra, bearest in thine arms the lightning that accords with thee,

अध्याय 20

श्लोक 107.10

स्तु॒ष्व व॑र्ष्मन् पुरु॒वर्त्मा॑नं॒ समृभ्वा॑णमि॒नत॑ममा॒प्तमा॒प्त्याना॑म्।आ द॑र्शति॒ शव॑सा॒ भूर्यो॑जाः॒ प्र स॑क्षति प्रति॒मानं॑ पृथि॒व्याः

stuṣva varṣman puruvartmānaṃ samṛbhvāṇaminatamamāptamāptyānām| ā darśati śavasā bhūryojāḥ pra sakṣati pratimānaṃ pṛthivyāḥ

हिन्दी अर्थ

समर्णों की हविवाले उपासक (तम्) उसकी (ईलते) स्तुत्तियां करते है । . (समिधीमहि) हदयों भं सम्यक् प्रदीप्त करते है । ६५७. अग्निमीलिष्वावैसे गाथाभिः शीरशोचिषम् । हे उपासक ! तु (शीरसोचिषम्) सोई हुई ज्योति के रूपमे सब में

English

We will attend the heavenly One; the thousand-footed, red of hue, matchless, who blesses where he goes.

अध्याय 20

श्लोक 107.11

इ॒मा ब्रह्म॑ बृ॒हद्दि॑वः कृणव॒दिन्द्रा॑य शू॒षम॑ग्नि॒यः स्व॒र्षाः ।म॒हो गो॒त्रस्य॑ क्षयति स्व॒राजा॒ तुर॑श्चि॒द् विश्व॑मर्णव॒त् तप॑स्वान्

imā brahma bṛhaddivaḥ kṛṇavadindrāya śūṣamagniyaḥ svarṣāḥ | maho gotrasya kṣayati svarājā turaścid viśvamarṇavat tapasvān

हिन्दी अर्थ

सतुतियां कियाः कर † (पुरुभील्ह) है पालक रौर परिपुणं प्रमु के स्तोता . की स्तुतियां किया कर, (श्रुतम्) जो किं वेदों मे विश्रुत है! ( नरः) हे किया करो, जो किः (सुदीतये) क्लेों क क्षय. करने के लिये (छदिः) छत- बाले घर के सदृश है . छदिः गृहनाम (निंष० ३।४)1

English

With reverence they come hitherward to him as to a sovran lord, That they may bring him near for this man’s good success, to prosper and bestow his gifts. The Priyamedhas have observed the offering of the men of old,

अध्याय 20

श्लोक 107.12

ए॒वा म॒हान् बृ॒हद्दि॑वो॒ अथ॒र्वावो॑च॒त् स्वां त॒न्व॑१मिन्द्र॑मे॒व।स्वसा॑रौ मात॒रिभ्व॑री अरि॒प्रे हि॒न्वन्ति॑ चैने॒ शव॑सा व॒र्धय॑न्ति च

evā mahān bṛhaddivo atharvāvocat svāṃ tanva1mindrameva| svasārau mātaribhvarī aripre hinvanti caine śavasā vardhayanti ca

हिन्दी अर्थ

का० २०। सु० १०४ भरथवंवेद-माष्य २६५ दानी का (वृणीमहे) हम वरण करते हँ । (प्रयता) संयम-सम्प॑न्न हमारी है, विचरते हँ 1. . (ऊर्जः) बल भौर प्राण को न पातम् ) न गिरने देने- तथा पूवंकाल से विद्यमान अनादि परमेश्वर से ईमहे ) हंम याचनाए करते है, या उसे हम प्राप्त होते है ।

English

Of ancient custom, while they strewed the sacred grass and spread their sacrificial food. He who as sovran Lord of men moves with his chariots unrestrained,

अध्याय 20

श्लोक 107.13

चि॒त्रं दे॒वानां॑ के॒तुरनी॑कं॒ ज्योति॑ष्मान् प्र॒दिशः॒ सूर्य॑ उ॒द्यन्।दि॒वा॒क॒रोऽति॑ द्यु॒म्नैस्तमां॑सि॒ विश्वा॑तारीद् दुरि॒तानि॑ शु॒क्रः

citraṃ devānāṃ keturanīkaṃ jyotiṣmān pradiśaḥ sūrya udyan| divākaro'ti dyumnaistamāṃsi viśvātārīd duritāni śukraḥ

हिन्दी अर्थ

सुनो =सु प्रेरणे । अजिरः अङ्गो के रसरूप प्राण । ईमहे याञ्चाकर्मा (निष० ३।१९) ; थवा "ई" गतौ । . . ( पृख्वसो ) ह महासम्पतृशालिन्, या पालन करनेवाले,. तथा

English

The Vritra-slayer, queller of all fighting hosts, preeminent, is praised in song. Honour that Indra, Puruhanman! for his aid, in whose sustain- ing hand of old. The splendid bolt of thunder was deposited, as the great Sun was set in heaven.

अध्याय 20

श्लोक 107.14

चि॒त्रं दे॒वाना॒मुद॑गा॒दनी॑कं॒ चक्षु॑र्मि॒त्रस्य॒ वरु॑णस्या॒ग्नेः ।आप्रा॒द् द्यावा॑पृथि॒वी अ॒न्तरि॑क्षं॒ सूर्य॑ आ॒त्मा जग॑तस्त॒स्थुष॑श्च

citraṃ devānāmudagādanīkaṃ cakṣurmitrasya varuṇasyāgneḥ | āprād dyāvāpṛthivī antarikṣaṃ sūrya ātmā jagatastasthuṣaśca

हिन्दी अर्थ

सम्पत्तियां से परिपूर्णं संसार में बसे हृए परमेदवर ! (इमाः) ये ( याः ) जो (मम) भेरी (भरः) वाणियां है, वे (त्वा उ). आपकी ही महिमा कौ ( बरषन्तु ) बढ़ाया करे । ( पावकवर्णाः ) पवित्र करनेवाले आपका. दा . सत्यः सो अस्य महिमा शृणे शवो येषं निप्राज्ये ॥२॥ ( सहस्कृतः ) साहस भौर धयेपर्वक साक्षात् किया जाता है । यह (समूद इव) जलीय-समूद्र या आकारा के सदृश (पप्रथे) फला हभ है 1 ( भस्य )

English

No one by deed attains to him who works and strengthens evermore: No, not by sacrifice, to Indra praised of all, resistless, daring, bold in might;

अध्याय 20

श्लोक 107.15

सूर्यो॑ दे॒वीमु॒षसं॒ रोच॑मानां॒ मर्यो॒ न योषा॑म॒भ्येति प॒श्चात्।यत्रा॒ नरो॑ देव॒यन्तो॑ यु॒गानि॑ वितन्व॒ते प्रति॑ भ॒द्राय॑ भ॒द्रम्

sūryo devīmuṣasaṃ rocamānāṃ maryo na yoṣāmabhyeti paścāt| yatrā naro devayanto yugāni vitanvate prati bhadrāya bhadram

हिन्दी अर्थ

इस परमेदवर की (सः) वह (महिमा) महिमा (सत्यः) यंथाथं है,- (गृणे) - (नः) हम .उपासकों के (विच्वासु समत्सु) सव देवासुर-संग्रामो मे (हव्यः) सहायताथं पुकारा गया (इन्रः) परमेदवर, (भ्रा भूषतु) भसुर- भावनाओं के पराभव द्वारा हमे विभूषित करे । (- वृत्रहा ) पाप-वुत्रोंका (ऋऋबीषमः) उसका ऋचाभ्रों मे समरूप से वर्णेन हुश्रा है ।

English

The potent Conqueror, invincible in war, him at whose birth the mighty ones, The kine who spread afar, sent their loud voices out, heavens, earths sent their loud voices out.

अध्याय 20

श्लोक 108.1

त्वं न॑ इ॒न्द्रा भ॑रं॒ ओजो॑ नृ॒म्णं श॑तक्रतो विचर्षणे ।आ वी॒रं पृ॑तना॒षह॑म्

tvaṃ na indrā bharaṃ ojo nṛmṇaṃ śatakrato vicarṣaṇe | ā vīraṃ pṛtanāṣaham

हिन्दी अर्थ

६७१. लर नेप्णुवहन् क्षयो मित्रो पाति बरंणः । (गृणाति) भरवंनाए कर रहे है । (मारतं शर्ध॑ः) मानसून तथा ्रन्तरिकस्थ वायु, -का बल (त्वाम्) भाप की (भनु) निरन्तर (मदति) स्तुतियां कर रहा है । (अस्य) इस परमेरवर के (मन्यवे) मन्यु के प्रति, (विवाः विशः)

English

Whetting thy thunderbolt with might. Thou, Indra, art pre-eminent over all creatures in thy strength:

अध्याय 20

श्लोक 108.2

त्वं हि नः॑ पि॒ता व॑सो॒ त्वं मा॒ता श॑तक्रतो ब॒भूवि॑थ ।अधा॑ ते सु॒म्नमी॑महे

tvaṃ hi naḥ pitā vaso tvaṃ mātā śatakrato babhūvitha | adhā te sumnamīmahe

हिन्दी अर्थ

स्वभावतः नत हो रही है, मुक रहीं है, (इव). जसे कि ( सिन्धवः ) बहती नदियां (समूद्राय) समुद्र के प्रति मुकी रहती है (तित्विषे) चमकता है, (यत्) जब कि ( इन्द्रः ) परमेदवर रोदसी ) द्यलोके भर भ्रूलोक,- (उभे) इन दोनों को, प्रलय कालं में, (सम् भरवतं- यत्) भ्रासानी.से लपेट लेता है, (इव) जैसे कि कई (चमं ) मृगछाला को

English

Thou hast pervaded every place. 300 Firm-seated is thy car, thy steeds are docile: thy hand, O King, holds, firmly grasped, the

अध्याय 20

श्लोक 108.3

त्वां शु॑ष्मिन् पुरुहूत वाज॒यन्त॒मुप॑ ब्रुवे शतक्रतो ।स नो॑ रास्व सु॒वीर्य॑म्

tvāṃ śuṣmin puruhūta vājayantamupa bruve śatakrato | sa no rāsva suvīryam

हिन्दी अर्थ

पापवृत्र के (शिरः) मानो शिर को, (वृष्णिना) शक्तिशाली .तथा(शतपवंणा) मनुष्य की सौ वषं की आयु तकं उस का पालन कर संकनेवाले (वसखरोण) ज्ञान-वच्र वारा, (बिभेद) काट दिया है । पाप का विनाश ज्ञानरूपी वचर द्वारा होता है । परमेश्वर ने वेद- . ज्ञान दिया है, जो किं मनुष्य के १०५. वषो के जीवन-काल मे, उस की पापों .

English

thunder. On thy fair path, O Lord of men, come quickly: we will increase thy power when thou hast

अध्याय 20

श्लोक 109.1

स्वा॒दोरि॒त्था वि॑षू॒वतो॒ मध्वः॑ पिबन्ति गौ॒र्यः ।या इन्द्रे॑ण स॒याव॑री॒र्वृष्णा॒ मद॑न्ति शो॒भसे॒ वस्वी॒रनु॑ स्व॒राज्य॑म्

svādoritthā viṣūvato madhvaḥ pibanti gauryaḥ | yā indreṇa sayāvarīrvṛṣṇā madanti śobhase vasvīranu svarājyam

हिन्दी अर्थ

. का० २०॥ सु० १०७ यववेद-माष्य २७१ सवमे बड़ी चक्तिरूप में ( रास ) सदा रहा है, ( यतः ) जिस ब्रह्मसे कि पाप-शत्रभ्रो की (नि रिणाति) नितरां हविसा कर देता है, ( विवे ऊमाः )

English

drunken. Let strong and mighty steeds who bear this mighty Indra, the Lord of men, whose arm wields thunder,

अध्याय 20

श्लोक 109.2

ता अ॑स्य पृशना॒युवः॒ सोमं॑ श्रीणन्ति॒ पृश्न॑यः ।प्रि॒या इन्द्र॑स्य धे॒नवो॒ वज्रं॑ हिन्वन्ति॒ साय॑कं॒ वस्वी॒रनु॑ स्व॒राज्य॑म्

tā asya pṛśanāyuvaḥ somaṃ śrīṇanti pṛśnayaḥ | priyā indrasya dhenavo vajraṃ hinvanti sāyakaṃ vasvīranu svarājyam

हिन्दी अर्थ

( शवसा ) ्रपने बल के कारण ( वावृधानः सबसे बढ़ा हुभ्रा, हे परमेदवर ! मनुष्य विवाह करके ( यद् जब द्विः मवन्ति ) दो होः जति है, भौर सन्तानोत्पन्न हो जाने पर जब (त्रिः) तीन दहो जाते ओर (ऊमाः) सब प्राणियों को रक्ना का ब्रत धारण करते है, तब (एते) स्वादु स्वरूप कं साथ ( सं सृज ) हमारा संसं कीजिये । ( अ्रदः मघु जीवात्मा कं उस मधुर स्वरूप को -(मधूना) .भ्रपने, मधुर स्वरूप कं, साथ २७२ भयर्ववेद-माष्य का० २०.॥ सू० १०७

English

Bring unto us, as shares of our banquet, the Bull of conquering might, of real vigour. So like a bull thou rushest to the Lord who loves the trough, the Sage, the prop of vigour, in

अध्याय 20

श्लोक 109.3

ता अ॑स्य॒ नम॑सा॒ सहः॑ सप॒र्यन्ति॒ प्रचे॑तसः ।व्र॒तान्य॑स्य सश्चिरे पु॒रूणि॑ पू॒र्वचि॑त्तये॒ वस्वी॒रनु॑ स्व॒राज्य॑म्

tā asya namasā sahaḥ saparyanti pracetasaḥ | vratānyasya saścire purūṇi pūrvacittaye vasvīranu svarājyam

हिन्दी अर्थ

स्वाद्रीयः--उपासक सांसारिक रसास्वादन की शअरेक्षा, परभेदवरीय हे उपासक (रणे-रणे) प्रत्येकं देवासुर-संग्राम मे (घना) ाघ्या- चित् नु) यदि (विप्राः) मेधावी उपासक, (भ्रनुमदन्ति) अनुमोदन करते हैः

English

the vat. Prepare thine energies, collect them in thyself: be for our profit as the Master of the wise. May precious treasures come to us,— so will I pray. Come to the votary’s gift offered with

स्रोत: bhavykhatri/DharmicData · प्राप्त 3/6/2026

शास्त्रीय प्रामाणिकता एवं पारदर्शकताSources & Interpretation

स्रोत, संस्करण एवं व्याख्या वर्गीकरण

धर्म ग्रंथ पर मूल शास्त्र, पारंपरिक भाष्य और आधुनिक व्याख्या को पूर्णतः पृथक रखा जाता है ताकि पाठक को किसी भी व्याख्या के शास्त्र होने का भ्रम न हो।

सामग्री वर्गीकरण संकेत (Epistemic Content Labels)

6 स्तरिय प्रमाण व्यवस्था
मूल पाठOriginal text

अपौरुषेय / प्रामाणिक शास्त्र (Primary Canonical Scripture)

मूल संस्कृत, प्राकृत अथवा अवधी श्लोक/मंत्र। यह सर्वोच्च प्रमाण (प्रस्थान) है। इस पाठ में किसी भी आधुनिक व्याख्याकार का हस्तक्षेप नहीं है।

शाब्दिक अनुवादLiteral translation

पदार्थ व अन्वय (Direct Grammatical & Word-for-Word Meaning)

व्याकरणसम्मत प्रत्यक्ष शब्दार्थ (अन्वय)। बिना किसी दार्शनिक संप्रदाय के पूर्वाग्रह के, संस्कृत शब्दों का सटीक भाषांतर।

पारंपरिक भाष्यTraditional commentary

आचार्य परंपरा व टीका (Classical Lineage Commentary)

प्राचीन आचार्य परंपरा (यथा शंकराचार्य, रामानुजाचार्य, मध्वाचार्य, श्रीधर स्वामी) द्वारा विरचित शास्त्रीय भाष्य व टीकाएं।

सरल व्याख्याSimple explanation

भावार्थ व सुबोध प्रबोधन (Accessible Pedagogical Exposition)

आधुनिक जिज्ञासुओं के लिए सरल भाषा में भावार्थ। यह मूल मंत्र नहीं, बल्कि पाठ को सुगम बनाने हेतु संपादकीय व्याख्या है।

आधुनिक चिंतनModern reflection

समसामयिक विमर्श व अनुप्रयोग (Contemporary Application & Analysis)

दार्शनिक, मनोवैज्ञानिक व वैज्ञानिक समरूपताओं पर आधुनिक चिंतन। यह मूल शास्त्र का अंग नहीं है और इसे शास्त्रोक्त सिद्धांत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

शोध टिप्पणीResearch note

पांडुलिपि एवं ऐतिहासिक शोध (Critical Apparatus & Manuscript Research)

पांडुलिपि विविधताएं, पाठ-भेद (variant readings), छंद रचना, और ऐतिहासिक व तुलनात्मक भाषावैज्ञानिक शोध। यह शास्त्र का मूल संदेश बदलने हेतु नहीं, बल्कि पाठ की प्रामाणिकता परखने के लिए है।