अध्याय 20
श्लोक 53.1
क ईं॑ वेद सु॒ते सचा॒ पिब॑न्तं॒ कद् वयो॑ दधे ।अ॒यं यः पुरो॑ विभि॒नत्त्योज॑सा मन्दा॒नः शि॒प्र्यन्ध॑सः
ka īṃ veda sute sacā pibantaṃ kad vayo dadhe | ayaṃ yaḥ puro vibhinattyojasā mandānaḥ śipryandhasaḥ
हिन्दी अर्थ
अहंकार । इन नौ मे जब तक रजस् ओौर . तमस् का बाहुल्य होता है, तब तक ये नौँ वृ्रूप होते है, आध्यात्मिक सच्चाई का आवरण किये रहते तब ध्यानी की वृ्ररूप ये £ शक्तियां देवकोटि की हो जाती है । परमेश्वर कीकृपासे ध्यानी की नौं रक्तियां, जो कि पहिले नास्तिकेता धारण किये देव बन जाती है, -मानो कि परमेष्वरः ने इनके -वृत्ररूपों का हनन कर
English
Deliver us with true and faithful succour: dear may we be to thee among the princes. May we men, Bounteous Lord, the friends thou lovest, near i thee be joyful under thy