Atharva Veda
20
अध्याय 20 / 20

Kanda 20

काण्ड 20

975 श्लोकभाग 5/13 · श्लोक 53.1–66.3

पूर्ण अध्याय पाठ82 श्लोक

अध्याय 20

श्लोक 53.1

क ईं॑ वेद सु॒ते सचा॒ पिब॑न्तं॒ कद् वयो॑ दधे ।अ॒यं यः पुरो॑ विभि॒नत्त्योज॑सा मन्दा॒नः शि॒प्र्यन्ध॑सः

ka īṃ veda sute sacā pibantaṃ kad vayo dadhe | ayaṃ yaḥ puro vibhinattyojasā mandānaḥ śipryandhasaḥ

हिन्दी अर्थ

अहंकार । इन नौ मे जब तक रजस् ओौर . तमस् का बाहुल्य होता है, तब तक ये नौँ वृ्रूप होते है, आध्यात्मिक सच्चाई का आवरण किये रहते तब ध्यानी की वृ्ररूप ये £ शक्तियां देवकोटि की हो जाती है । परमेश्वर कीकृपासे ध्यानी की नौं रक्तियां, जो कि पहिले नास्तिकेता धारण किये देव बन जाती है, -मानो कि परमेष्वरः ने इनके -वृत्ररूपों का हनन कर

English

Deliver us with true and faithful succour: dear may we be to thee among the princes. May we men, Bounteous Lord, the friends thou lovest, near i thee be joyful under thy

अध्याय 20

श्लोक 53.2

दा॒ना मृ॒गो न वा॑र॒णः पु॑रु॒त्रा च॒रथं॑ दधे ।नकि॑ष्ट्वा॒ नि य॑म॒दा सु॒ते ग॑मो म॒हाश्च॑र॒स्योज॑सा

dānā mṛgo na vāraṇaḥ purutrā carathaṃ dadhe | nakiṣṭvā ni yamadā sute gamo mahāścarasyojasā

हिन्दी अर्थ

अश्वस्य --भरव से अभिप्राय यहां “मन” का है । मन शक्तिशाली है, इसलिये मन को अरव" का है । इ्वेतादवतरोपनिषद् मे मन को श्रदव (भ० २, मं० ६) ॥ करई विद्वानों ने इवेतादवतर शब्द के “उवेताइव” का से मिलती है, भरौर मनमें प्रेरणा बुद्धि से मिलती है । इसलिये बुद्धि को .

English

protection. Fain to fulfil the wish of Atithigva, bow Turvasa, bow down,. the son of Yadu.

अध्याय 20

श्लोक 53.3

य उ॒ग्रः सन्ननि॑ष्टृत स्थि॒रो रणा॑य॒ संस्कृ॑तः ।यदि॑ स्तो॒तुर्म॒घवा॑ शृ॒णव॒द्धवं॒ नेन्द्रो॑ योष॒त्या ग॑मत्

ya ugraḥ sannaniṣṭṛta sthiro raṇāya saṃskṛtaḥ | yadi stoturmaghavā śṛṇavaddhavaṃ nendro yoṣatyā gamat

हिन्दी अर्थ

मन कासिर कहा हं । उपनिषदों मे मन को प्रग्रह भर्थात् लगाम, भौर बुद्धिकोसारथि भी.कहा है । सारथि के हाथ मेँ जते-वोडों की लगाम होती है । बुद्धि के हाथ .मन की लगाम होती ह । यथा- जुं तु सारथि विद्धि

English

Swiftly, in truth, O Bounteous Lord, about thee men skilled im hymning sing their songs and praises.

अध्याय 20

श्लोक 54.1

विश्वाः॒ पृत॑ना अभि॒भूत॑रं॒ नरं॑ स॒जूस्त॑तक्षु॒रिन्द्रं॑ जज॒नुश्च॑ रा॒जसे॑ ।क्रत्वा॒ वरि॑ष्ठं॒ वर॑ आ॒मुरि॑मु॒तोग्रमोजि॑ष्ठं त॒वसं॑ तर॒स्विन॑म्

viśvāḥ pṛtanā abhibhūtaraṃ naraṃ sajūstatakṣurindraṃ jajanuśca rājase | kratvā variṣṭhaṃ vara āmurimutogramojiṣṭhaṃ tavasaṃ tarasvinam

हिन्दी अर्थ

११४ अथर्वेवेद-माष्य का० २० । सूर ४१ इन शब्दों दवारा किया हौ । “भपश्चितम्” मे “श्रप” का अथं है- “हटकर होती है । भ्रप+धितम्,- का यही भ्रभिप्राय है।

English

Elect us shares of their love and friendship who by their calls on, thee despoiled the niggards. Thine are these Lauds, O manliest of heroes, Lauds which revert to us and give us riches.

अध्याय 20

श्लोक 54.2

समीं॑ रे॒भासो॑ अस्वर॒न्निन्द्रं॒ सोम॑स्य पी॒तये॑ ।स्वर्पतिं॒ यदीं॑ वृ॒धे धृ॒तव्र॑तो॒ ह्योज॑सा॒ समू॒तिभिः॑

samīṃ rebhāso asvarannindraṃ somasya pītaye | svarpatiṃ yadīṃ vṛdhe dhṛtavrato hyojasā samūtibhiḥ

हिन्दी अर्थ

को “सरः” कहा है,.भर्थात् बहत हभ सोत । यथाः-“श्यंणावच्च वे नाम का स्रोत", जिनमे रक्तरूपी जल सदा प्रवाहित हो रहा ह । यहु “हृदय-सर शग्र॑णावत् है, विशीर्णं हो जानेवाला स्रोत है । हृदय भँ जब परमेदवर का

English

Favour these, Indra, when they strike the foemen, as Friend and 282

अध्याय 20

श्लोक 54.3

ने॒मिं न॑मन्ति॒ चक्ष॑सा मे॒षं विप्रा॑ अभि॒स्वरा॑ ।सु॒दी॒तयो॑ वो अ॒द्रुहोऽपि॒ कर्णे॑ तर॒स्विनः॒ समृक्व॑भिः

nemiṃ namanti cakṣasā meṣaṃ viprā abhisvarā | sudītayo vo adruho'pi karṇe tarasvinaḥ samṛkvabhiḥ

हिन्दी अर्थ

साथ ही संशय, तकं-वितकं, कमं भ्रौर कमशिय भी विक्षीणं हो जतिर्है। इस सम्बन्ध मे कहा है कि-- योगिजनों ने (भत्र अह) इस ही (चन्द्रमसः गृहे ) चच्दर॑मा के षर मै, चन््रमसो गृहे-यजवंद मेमन को चन्द्रमासे रूपित कियाह।

English

Hero and the heroes’ helper. Now, lauded for thine aid, heroic Indra, sped by our prayer,, wax mighty in thy body.

अध्याय 20

श्लोक 55.1

तमिन्द्रं॑ जोहवीमि म॒घवा॑नमु॒ग्रं स॒त्रा दधा॑न॒मप्र॑तिष्कुतं॒ शवांसि ।मंहि॑ष्ठो गी॒र्भिरा च॑ य॒ज्ञियो॑ व॒वर्त॑द् रा॒ये नो॒ विश्वा॑ सु॒पथा॑ कृणोतु व॒ज्री

tamindraṃ johavīmi maghavānamugraṃ satrā dadhānamapratiṣkutaṃ śavāṃsi | maṃhiṣṭho gīrbhirā ca yajñiyo vavartad rāye no viśvā supathā kṛṇotu vajrī

हिन्दी अर्थ

को० २०1 सु० ४२ , अथर्ववेद-माष्य ११५ इस मन का धर हं हृदय । यथा--'हृद्ये चित्तसंवित्" ( योग ३।३४ ) का “नमन भर्थात् प्रवे करने का उपदेश देते है, भौर इसी धरम मानसिक ध्यान का भी" निदे करते हँ । यथा--“हूदि इद्धियाणि

English

To us apportion wealth and habitations. Ye Gods, protect us- evermore with blessings. Come, we have pressed the juice for thee. O Indra, drink the

अध्याय 20

श्लोक 55.2

या इ॑न्द्र॒ भुज॒ आभ॑रः॒ स्वर्वां॒ असु॑रेभ्यः ।स्तो॒तार॒मिन्म॑घवन्नस्य वर्धय॒ ये च॒ त्वे वृ॒क्तब॑र्हिषः

yā indra bhuja ābharaḥ svarvāṃ asurebhyaḥ | stotāraminmaghavannasya vardhaya ye ca tve vṛktabarhiṣaḥ

हिन्दी अर्थ

( दवेता० उप० २।८ । भर्थात् हृदय में “मनःसमेत इन्द्रियो” का भवे को हदय में स्थित. करके, हृदय मेँ चपि परमेदवर को, भरोम् के जाप द्वारा कोष २।६७ ), वेदिकः पुस्तकालय, अजमेर । यथा- गच्छति यो -यत्र यया

English

Soma here. Sit thou on this my sacred grass.

अध्याय 20

श्लोक 55.3

यमि॑न्द्र दधि॒षे त्वमश्वं॒ गां भा॒गमव्य॑यम्।यज॑माने सुन्व॒ति दक्षि॑णावति॒ तस्मि॒न् तं धे॑हि॒ मा प॒णौ

yamindra dadhiṣe tvamaśvaṃ gāṃ bhāgamavyayam| yajamāne sunvati dakṣiṇāvati tasmin taṃ dhehi mā paṇau

हिन्दी अर्थ

जलं वा 1 इस्था--सत्यम् (निव ० ३।१०) ।. २७१. वाचमष्टापदीमहं नव॑सछितसहैम् ॥ परमेदवर से ( परिममे) प्राप्त किया है, ओर उसके रहस्यं को जाना है.।

English

O Indra, let thy long-maned Bays, yoked by prayer, bring thee hitherward. Give ear and listen to our prayers.

अध्याय 20

श्लोक 56.1

इन्द्रो॒ मदा॑य वावृधे॒ शव॑से वृत्र॒हा नृभिः॑ ।तमिन्म॒हत्स्वा॒जिषू॒तेमर्भे॑ हवामहे॒ स वाजे॑षु॒ प्र नो॑ऽविषत्

indro madāya vāvṛdhe śavase vṛtrahā nṛbhiḥ | taminmahatsvājiṣūtemarbhe havāmahe sa vājeṣu pra no'viṣat

हिन्दी अर्थ

उपसग, निपात ये चार मुख्य विभाग पदों के। नाम दो प्रकारके है . है” । यथा पदप्रकृतीनि सर्वंचरणानां पार्षदानि" (निरक्त १।६।१७। ११६ भरथर्ववेद-माष्य 9 का० २०। सू० ४२

English

We, Soma-bearing Brāhmans, call thee, Soma-drinker, with thy friend, We, Indra, bringing juice expressed.

अध्याय 20

श्लोक 56.2

असि॒ हि वी॑र॒ सेन्योऽसि॒ भूरि॑ पराद॒दिः ।असि॑ द॒भ्रस्य॑ चिद् वृ॒धो यज॑मानाय शिक्षसि सुन्व॒ते भूरि॑ ते॒ वसु॑

asi hi vīra senyo'si bhūri parādadiḥ | asi dabhrasya cid vṛdho yajamānāya śikṣasi sunvate bhūri te vasu

हिन्दी अर्थ

दो प्रकार कै ह परस्मैपद तथा गात्मनेपद । उपसगं एक प्रकार के तथा निपात तीन प्रकार के हँ । यथा- उपमां, कर्मोपसंप्रहा्थं, तथा पदपूरण (इन्दर ) है परमेदवर ! आपने (यद् ) चूंकि (दस्युहा अभवः) हम उपासको के उपक्षयकारी काम भादि का. हनन -कर दिया है, इसलिये (क्रक्षमाणं त्वा ) हनन करते हये भापके ( भनु ) अनुकल होकर, ( उभे) . दोनों प्रकार के (रोदसी ) भर्थात् उपासंक नारियां भौर नर ( भकृपेताम्)

English

Indra the singers with high praise, Indra reciters with their lauds, Indra the choirs have glorified.

अध्याय 20

श्लोक 56.3

यदु॒दीर॑त आ॒जयो॑ धृ॒ष्णवे॑ धीयते॒ धना॑ ।यु॒क्ष्वा म॑द॒च्युता॒ हरी॒ कं हनः॒ कं वसौ॑ दधो॒ऽस्मां इ॑न्द्र॒ वसौ॑ दधः

yadudīrata ājayo dhṛṣṇave dhīyate dhanā | yukṣvā madacyutā harī kaṃ hanaḥ kaṃ vasau dadho'smāṃ indra vasau dadhaḥ

हिन्दी अर्थ

होता है । बक्पेताम् = षष साम्ये । . .. सिरस लेकर -पैरों तक भें प्रकटं हये । (सोमम् ) मक्तिरस को (षीत्वी ) के चेहर को (अवेपयः) कम्पित करर दिया है ।

English

Indra hath ever close to him his two bay steeds and word-yoked: car, Indra, the golden, Thunder-armed.

अध्याय 20

श्लोक 56.4

मदे॑मदे॒ हि नो॑ द॒दिर्यू॒था गवा॑मृजु॒क्रतुः॑ ।सं गृ॑भाय पु॒रु श॒तोभ॑याह॒स्त्या वसु॑ शिशी॒हि रा॒य आ भ॑र

mademade hi no dadiryūthā gavāmṛjukratuḥ | saṃ gṛbhāya puru śatobhayāhastyā vasu śiśīhi rāya ā bhara

हिन्दी अर्थ

का० २० । सू० ४३ अथववेद -भाष्य . ११७ -नवल्तक्तिम्- नौ या नये-नये भलंकारोवाली । यथा--उपमा, हे परमेश्वर ! (विदवाः) सब प्रकार की (द्विषः) हमारी देष

English

Indra hath raised the Sun aloft in heaven that he may see afar. He burst the mountain for the kine.

अध्याय 20

श्लोक 56.5

मा॒दय॑स्व सु॒ते सचा॒ शव॑से शूर॒ राध॑से ।वि॒द्मा हि त्वा॑ पुरू॒वसु॒मुप॒ कामा॑न्त्ससृ॒ज्महेऽथा॑ नोऽवि॒ता भ॑व

mādayasva sute sacā śavase śūra rādhase | vidmā hi tvā purūvasumupa kāmāntsasṛjmahe'thā no'vitā bhava

हिन्दी अर्थ

हम से भ्रलग कर दीजिये । (बाधः) सब वि््न-बाघाभों को (परि). पूर्ण- रूप सरे (श्रप) हमसे भ्रलग कर दीजिये । देवासुर-संग्राम मे (मृधः) संग्राम- कारी कामादि शंतरुों का (जहि) हनन कर दीजिये । (स्पा तत् वसु) स्पृहणीय वह मोक्ष-घन (आ भर) हमें प्राप्तं कंरादये । भारीपन), संशाय, प्रमाद (समाधि के साधनों का अनुष्ठान न करना); (चित्त की चञ्चलता), (यौग० १।३०-३२) .. .

English

For you, from every side, we call Indra away from other men: Ours, and none others,’ let him be.

अध्याय 20

श्लोक 56.6

ए॒ते त॑ इन्द्र ज॒न्तवो॒ विश्वं॑ पुष्यन्ति॒ वार्य॑म्।अ॒न्तर्हि ख्यो जना॑नाम॒र्यो वेदो॒ अदा॑शुषां॒ तेषां॑ नो॒ वेद॒ आ भ॑र

ete ta indra jantavo viśvaṃ puṣyanti vāryam| antarhi khyo janānāmaryo vedo adāśuṣāṃ teṣāṃ no veda ā bhara

हिन्दी अर्थ

. वसु) भ्रापने जो वीरता-घन (पराभृतम्) उत्कषंूप मे भरा है, (स्थिरे) भर दी है, (पक्लनि) मेष में. (यत्) भापने जो वषंणरूपी चन भरा है, पर्वानः मेघः (निघ० १।१०) । उपासक, परमेदवर से भ्रपने जीवन म वीरस्तव, स्थिरचित्तता, ओर परोपकार भावनाभों की प्राना

English

In Soma’s ecstasy Indra spread the firmament and realms of light. When he cleft Vala limb from limb.

अध्याय 20

श्लोक 57.1

सु॒रू॒प॒कृ॒त्नुमू॒तये॑ सु॒दुघा॑मिव गो॒दुहे॑ ।जु॒हूमसि॒ द्यवि॑द्यवि

surūpakṛtnumūtaye sudughāmiva goduhe |juhūmasi dyavidyavi

हिन्दी अर्थ

२७६. यस्यं ते विश्वमानुषो भूरंहैतस्य वेद॑ति । , (विइवमानुषः) सभी मनुष्य, (ते) भ्रापके (यस्य) जिस (भ्रुरेः. . भरूरिदान अर्थात् महादान हमे (भरा भर) प्राप्त करादये ।

English

Showing the hidden cows he draye them forth for the Angirases, And Vala he cast headlong down.

अध्याय 20

श्लोक 57.2

उप॑ नः॒ सव॒ना ग॑हि॒ सोम॑स्य सोमपाः पिब ।गो॒दा इद् रे॒वतो॒ मदः॑

upa naḥ savanā gahi somasya somapāḥ piba | godā id revato madaḥ

हिन्दी अर्थ

हम उपासको ने प्रपनी भ्रोर प्रेरित कर लिया है, भथवा वशा में कर. लिंया है, जसे कि कोई (दामने) रस्सी में बन्धा जाकर वहा म कर लिया हमारी आत्मतुप्ति के लिये, (हितः) हितकर है, (सः) वह (युम्नी) (वजः न) जसे वच शत्रुओं का विना करता. है, वसे परमेश्वर

English

Then verily they recognized the essential form of Tvashtar’s Bull. Here in the mansion of the Moon.

अध्याय 20

श्लोक 57.3

अथा॑ ते॒ अन्त॑मानां वि॒द्याम॑ सुमती॒नाम्।मा नो॒ अति॑ ख्य॒ आ ग॑हि

athā te antamānāṃ vidyāma sumatīnām| mā no ati khya ā gahi

हिन्दी अर्थ

हमारे पाप-शतरुो का विनादा करता है; वह॒ (गिरा) स्तुति-प्ाथंना की वाणियों दारा (संमृतः) प्राप्त किया जाता है, (सबलः भ्रनपच्युतः) अविनाशी है, (ववक्षे) संसार भार का वहन कर रहा है । २८९. इन्दरमिद् गाथिनो बृहदिनद्रमरकेभिररकिणः ।

English

From Indra have I measured an eight-footed and nine-cornered. song, Delicate, faithful to the Law.

अध्याय 20

श्लोक 57.4

शु॒ष्मिन्त॑मं न ऊ॒तये॑ द्यु॒म्निनं॑ पाहि॒ जागृ॑विम्।इन्द्र॒ सोमं॑ शतक्रतो

śuṣmintamaṃ na ūtaye dyumninaṃ pāhi jāgṛvim| indra somaṃ śatakrato

हिन्दी अर्थ

(गाधिनः) सामगान करनेवाले सामगानां द्वारा, (श्रकिणः) ऋग्वेदी अनूषत) भहागान करते है, गौर (वाणीः)यचुर्वेद तथा भ्रथवेवेद की वाणियां . भी (इन्द्रम् इत् ) परमेदवर का ही महागान करती हैँ । भानो समवाय सम्बन्ध से मिधित हृमा-हुभा है, चू कि (वचोयुजा) ऋग्- वेद भौर सामवेद का जोड़ा, परमेश्वर का ही प्रवचन करता: है । (इन्द्रः)

English

Indra, both worlds complained to thee when uttering thy fearful roar, 283

अध्याय 20

श्लोक 57.5

इ॒न्द्रि॒याणि॑ शतक्रतो॒ या ते॒ जने॑षु प॒ञ्चसु॑ ।इन्द्र॒ तानि॑ त॒ आ वृ॑णे

indriyāṇi śatakrato yā te janeṣu pañcasu | indra tāni ta ā vṛṇe

हिन्दी अर्थ

परमेदवर (वची) न्यायवचधारी है, (हिरण्ययः) तथा हिरण्य सदृश ,. (इन्द्रः). परमेदवर ने (दीर्घाय) दूर-दूर तक (चक्षसे) देखने के लिये, (दिवि) चुलोक मे (सूयम्) सूयं का (भरा रोहयत्) आरोहण किया है ।

English

What time thou smotest Dasyus dead. Arising in thy might thy jaws thou shookest, Indra, having quaffed

अध्याय 20

श्लोक 57.6

अग॑न्निन्द्र॒ श्रवो॑ बृ॒हद् द्यु॒म्नं द॑धिष्व दु॒ष्टर॑म्।उत् ते॒ शुष्मं॑ तिरामसि

agannindra śravo bṛhad dyumnaṃ dadhiṣva duṣṭaram| ut te śuṣmaṃ tirāmasi

हिन्दी अर्थ

्रापके लिये ही हम उपासको ने (सुषुम) भक्तिरस का निष्पादन किया है । भ्राप (इमम्) इस भक्तिरस को (पिव) स्वीकार कीजिये। (मम) मेरे (इदं बहिः). इस हृदयासन पर (भ्रा सदः) भ्रा विराजिये । २९३. आ त्वा बह्मयुजा हरी बहतामिन्द्र केशिना ।

English

The Soma poured into the bowls. Drive all our enemies away, smite down the foes who press around,

अध्याय 20

श्लोक 57.7

अ॒र्वा॒वतो॑ न॒ आ ग॒ह्यथो॑ शक्र परा॒वतः॑ ।उ॒ लो॒को यस्ते॑ अद्रिव॒ इन्द्रे॒ह तत॒ आ ग॑हि

arvāvato na ā gahyatho śakra parāvataḥ | u loko yaste adriva indreha tata ā gahi

हिन्दी अर्थ

देनेवाले, (केदिना) ज्ञान का प्रकाच्च करनेवाले (हरी ) विषयों से चित्त आपको (आ वहतामृ ) हमे प्राप्त कराएं । है परमेदवर ! (उप) समीप (सोमिनः) भक्तिरस की भट लिये हये, (सुतावन्तः) सन्तानो समेत,

English

And bring the wealth for which we long; O Indra, that which is concealed in firm strong place precipitous:

अध्याय 20

श्लोक 57.8

इन्द्रो॑ अ॒ङ्ग म॒हद् भ॒यम॒भी षदप॑ चुच्यवत्।स हि स्थि॒रो विच॑र्षणिः

indro aṅga mahad bhayamabhī ṣadapa cucyavat| sa hi sthiro vicarṣaṇiḥ

हिन्दी अर्थ

(सोमपं त्वा भक्तिरस के रसिक भ्राप को (हवामहे) पुकार रहे है । परमेदवर के प्रकार से (दिवि) बुलोक मेँ (रोचना) चमकते हये नक्षत्र- तारागण (रोचन्ते) . चमक रहे है तथा इसी परमेदवर की (रोचना) रुचिकर दीप्तियां तब (दिवि) मस्तिष्क मै (रोचन्ते) चमकने १२४ भयवेवेद-माष्य । का० २०1 सुऽ ४७

English

Bring us the wealth for which we long: Great riches which the world of men shall recognize as sent by thee:

अध्याय 20

श्लोक 57.9

इन्द्र॑श्च मृ॒लया॑ति नो॒ न नः॑ प॒श्चाद॒घं न॑शत्।भ॒द्रं भ॑वाति नः पु॒रः

indraśca mṛlayāti no na naḥ paścādaghaṃ naśat| bhadraṃ bhavāti naḥ puraḥ

हिन्दी अर्थ

(कौम्या-काम्यौ ) योगसाघना कै लिये चाही गई, (हरी) चित्तं को . विषयों से हरनेवाली, (विपक्षसा) सुषुम्णा नाड़ी के अलग-मलग दो पावो मे लगी हुई, (शोणा) भूरे भौर पीले से रं्गोवाली, (धृष्णु) मजबूत (नृवाहसा) योगिजनों को उनके उदे श्य तक पहुंचानेवाली,-इडा भौर पिङ्गला नाडियों को, (अस्य) इस परमेदवर के (रथे) रमणीय स्वरूप मेः २९७. ऊेतं कृ्वन्नकेते पेष म्या ओपेषसै ।

English

Bring us the wealth for which we long, Praise Indra whom our songs must laud, great Sovran of man- kind, the Chief

अध्याय 20

श्लोक 57.10

इन्द्र॒ आशा॑भ्य॒स्परि॒ सर्वा॑भ्यो॒ अभ॑यं करत्।जेता॒ शत्रू॒न् विच॑र्षणिः

indra āśābhyaspari sarvābhyo abhayaṃ karat| jetā śatrūn vicarṣaṇiḥ

हिन्दी अर्थ

। भूरिदान = वेदज्ञानरूपी महादान 1 यथा--“सवेषामेव दानानां ब्रह्मदानं. (वेदज्ञान का दान) विरिष्यते" । बैदिक-वाणियों द्वाराः (प्र स्तत) भूरि-भूरि स्तुतियां किया करो । २७९. वं दुषटुला वरबासे न्यप्ठराजजं मरं क्ष् ।

English

By Indra were the luminous realms of heaven established and secured, Firm and immovable from their place.

अध्याय 20

श्लोक 57.11

क ईं॑ वेद सु॒ते सचा॒ पिब॑न्तं॒ कद् वयो॑ दधे ।अ॒यं यः पुरो॑ विभि॒नत्त्योज॑सा मन्दा॒नः शि॒प्र्यन्ध॑सः

ka īṃ veda sute sacā pibantaṃ kad vayo dadhe | ayaṃ yaḥ puro vibhinattyojasā mandānaḥ śipryandhasaḥ

हिन्दी अर्थ

वँदिक सूक्त (रण्यन्ति) रमण करते हैँ ।।२॥ (तम्). उस (ज्यष्ठराजम्) महाराजाधिराज, (भरे). देवासुर शिक्षा पाकर ।३।। सनिभ्यः = षणु दाने

English

Indra, thy laud moves quickly like a joyous wave of waters: bright. Have shone the drops that gladden thee.

अध्याय 20

श्लोक 57.12

दा॒ना मृ॒गो न वा॑र॒णः पु॑रु॒त्रा च॒रथं॑ दधे ।नकि॑ष्ट्वा॒ नि य॑म॒दा सु॒ते ग॑मो म॒हांश्च॑र॒स्योज॑सा

dānā mṛgo na vāraṇaḥ purutrā carathaṃ dadhe | nakiṣṭvā ni yamadā sute gamo mahāṃścarasyojasā

हिन्दी अर्थ

है परमेदवर ! (श्रयम्) यह उपासकः (उ) निच्वय से (ते) भाप का है । (समतसि) इसके साथ संगत हृजिये, (इव) जैसे कि (कपोतः) होता है । (नः) हमारे (तत् चित्) इन वचः प्राथंना-बचनों को (ओहसे) । जपे “गम धिम्" कबूतरी जब गभं धारणा की उग्र कामनावाली हो जाती है, तब कबूतर उसके साथ संगत होःजाता है; तो है परमेचवर हम भी तौ भरापके संगम की उग्र कामनावले.हँः भौर आपकेहीर्है, तो श्राप हमारे साथ संगत क्यो नहीं हो रहै 7 कृपया संगत .हजिये, दशन दीजिये, हमारी उग्र कामना को सफल कीजिये । यह हमारी प्राथना है )।

English

Mayest thou verily be seen coming by fearless Indra’s side: Both joyous: equal in your sheen.

अध्याय 20

श्लोक 57.13

य उ॒ग्रः सन्ननि॑ष्टृत स्थि॒रो रणा॑य॒ संस्कृ॑तः ।यदि॑ स्तो॒तुर्म॒घवा॑ शृ॒णव॒द्धवं॒ नेन्द्रो॑ योष॒त्या ग॑मत्

ya ugraḥ sannaniṣṭṛta sthiro raṇāya saṃskṛtaḥ | yadi stoturmaghavā śṛṇavaddhavaṃ nendro yoṣatyā gamat

हिन्दी अर्थ

(रावानां पते). है भाराधनारूपौ धनो के रक्षक !, (गिर्वाह) हे वेदवाणियों का वहन करनेवाने !; (वीर) है विचिष्ट प्रेरणाभ्रोंके विभूति है । वीर्=वि¬+ईर् 1. । २८२. ऊध्वैसतिष्टा न उतयेऽसिन् बाजे श्षतकरतो । (शतक्रतो ) है सैकड़ों भद् मुत . करमोवाले परमेदवर ! (भरिमन् )

English

With Indra’s well-beloved hosts, the blameless, hastening to heaven, The sacrificer cries aloud.

अध्याय 20

श्लोक 57.14

व॒यं घ॑ त्वा सु॒ताव॑न्त॒ आपो॒ न वृ॒क्तब॑र्हिषः ।प॒वित्र॑स्य प्र॒स्रव॑णेषु वृत्रह॒न् परि॑ स्तो॒तार॑ आसते

vayaṃ gha tvā sutāvanta āpo na vṛktabarhiṣaḥ | pavitrasya prasravaṇeṣu vṛtrahan pari stotāra āsate

हिन्दी अर्थ

(निर० ७।४। १७). । ब्रवावहै =-आत्मिक बातचीत, न कि वाचिक । . (पुरतः) भक्तिूवक' बार-बार पुकारा गया (सः पप्रिः. इन्रः) म (पारयाति) भवसागर से पार. कर देता है, (नावा) जैसे कि नाविक

English

Thereafter they, as is their wont, threw off the state of babes unborn, Assuming sacrificial name.

अध्याय 20

श्लोक 57.15

स्वर॑न्ति त्वा सु॒ते नरो॒ वसो॑ निरे॒क उ॒क्थिनः॑ ।क॒दा सु॒तं तृ॑षा॒ण ओक॒ आ ग॑म॒ इन्द्र॑ स्व॒ब्दीव॒ वंस॑गः

svaranti tvā sute naro vaso nireka ukthinaḥ | kadā sutaṃ tṛṣāṇa oka ā gama indra svabdīva vaṃsagaḥ

हिन्दी अर्थ

की (द्विषः) द्ेषभावनाभ्ो से हमे (भरति पारयाति) ्डादेताहै। पप्रिः (नः इन्दर है हमारे परमेद्वर ! (सः त्वम्) वे आप, (बजिभिः ). (च) ओौर (गातुया) सदाचारो के निदंशों दारा (नः). हमे (अच्छ) साक्षात्.

English

With bones of Dadhyach for his arms, Indra, resistless in attack, Struck nine-and-ninety Vritras dead,

अध्याय 20

श्लोक 57.16

कण्वे॑भिर्धृष्ण॒वा धृ॒षद् वाजं॑ दर्षि सह॒स्रिण॑म्।पि॒शङ्ग॑रूपं मघवन् विचर्षणे म॒क्षू गोम॑न्तमीमहे

kaṇvebhirdhṛṣṇavā dhṛṣad vājaṃ darṣi sahasriṇam| piśaṅgarūpaṃ maghavan vicarṣaṇe makṣū gomantamīmahe

हिन्दी अर्थ

का० २५ सुऽ ४७ अथववेवेद-माष्य १२१ ह हम (वाजयामसि) भचंनाएं करते हँ । (सः) वह् (वषा) भ्रानन्दरसवर्षी -(ृषमः) हम पर सुखो की वर्षा -कंरनेवाला (भुवत्) हो । वाजयामसि, वाजति--अर्चंतिकर्भां (निष०.३।१४)

English

He, searching for the horse’s head, removed among the moun- tains, found At Saryanāvān what he sought.

अध्याय 20

श्लोक 58.1

श्राय॑न्त इव॒ सूर्यं॒ विश्वेदिन्द्र॑स्य भक्षत ।वसू॑नि जा॒ते जन॑मान॒ ओज॑सा॒ प्रति॑ भा॒गं न दी॑धिम

śrāyanta iva sūryaṃ viśvedindrasya bhakṣata | vasūni jāte janamāna ojasā prati bhāgaṃ na dīdhima

हिन्दी अर्थ

(मर्याः) - है उपासक जनो ! योगविधि द्वारा युक्त किया गया परमेरवर मन्त्र २९६ से, (उषद्डिः) उषा कालों के साथ-साथ (सम् जिस पर आध्यात्मिक रूपरंग नहीं चढ़ा, उस पर (धिः) नया भअरध्यात्मिक रूपरग चदा देता है । ९९८. इदु स्यं जातवेदसं देवं वन्ति केतव॑ः ।

English

Most liberal who controlleth men. In whom the hymns of praise delight, and all the glory-giving songs,

अध्याय 20

श्लोक 58.2

अन॑र्शरातिं वसु॒दामुप॑ स्तुहि भ॒द्रा इन्द्र॑स्य रा॒तयः॑ ।सो अ॑स्य॒ कामं॑ विध॒तो न रो॑षति॒ मनो॑ दा॒नाय॑ चो॒दय॑न्

anarśarātiṃ vasudāmupa stuhi bhadrā indrasya rātayaḥ | so asya kāmaṃ vidhato na roṣati mano dānāya codayan

हिन्दी अर्थ

. (उत्) उत्कष॑रूप भें, (वहन्ति) ज्ञापित+कर रहै है, ताकि (विदवाय दे) समग्र प्रजाजन उसे जान सर्के, गौर समय पर उसका दन कर सकं । नातवेदसम् जाते जति सित दति षा, जातानि वेद, जातविल्लो का० २०। सू० ४७ ब्रथवेवेद-माष्य . १२५

English

Like the flood’s longing for the sea. Him I invite with eulogy, best King, effective in the fight,

अध्याय 20

श्लोक 58.3

बण्म॒हाँ अ॑सि सूर्य॒ बडा॑दित्य म॒हाँ अ॑सि ।म॒हस्ते॑ स॒तो म॑हि॒मा प॑नस्यते॒ऽद्धा दे॑व म॒हाँ अ॑सि

baṇmahā~ asi sūrya baḍāditya mahā~ asi | mahaste sato mahimā panasyate'ddhā deva mahā~ asi

हिन्दी अर्थ

गण, सूयं के प्रकाश मेँ (अप यन्ति) हट जातेर्है, वसे (तायवः) चोरी प्रभुके प्रकाहामें (भ्रप यन्ति) हट जाते है, उस उपासक के लिये जौ कि ३००. अर्ैशरन्नख केतवो नि रक्मयो जनां अलु ।

English

Strong for the gain of mighty spoil. This is thine own. Thou drawest near, as the dove turneth to his mate.

अध्याय 20

श्लोक 58.4

बट् सू॑र्य॒ श्रव॑सा म॒हाँ अ॑सि स॒त्रा दे॑व म॒हाँ अ॑सि ।म॒ह्ना दे॒वाना॑मसु॒र्यः पु॒रोहि॑तो वि॒भु ज्योति॒रदा॑भ्यम्

baṭ sūrya śravasā mahā~ asi satrā deva mahā~ asi | mahnā devānāmasuryaḥ purohito vibhu jyotiradābhyam

हिन्दी अर्थ

उपासक कहता है कि (रस्य) इस परमेदवर के (केतवः) प्रकाश, (विं अरदुश्वन्) मुभे विचेषरूप मेँ दीखं पड़ है (यथा) जसे कि (जनान् भ्रनु) सवं साघारण जनों को, (रक््मयः) सूयं की रदिमयां दीखं पड़ती है, ६०१. तरणिंविशवद॑शैतो ज्योपिष्ृहैसि श्वय । हे परमेदवर ! भ्राप भवसागर से (तरणिः). तैरानेवाली नौका है,

English

Thou carest too for this our prayer. O Hero, Lord of Bounties, praised in hymns, may power and pleasantness

अध्याय 20

श्लोक 59.1

उदु॒ त्ये मधु॑मत्तमा॒ गिर॒ स्तोमा॑स ईरते ।स॒त्रा॒जितो॑ धन॒सा अक्षि॑तोतयो वाज॒यन्तो॒ रथा॑ इव

udu tye madhumattamā gira stomāsa īrate | satrājito dhanasā akṣitotayo vājayanto rathā iva

हिन्दी अर्थ

(देवानां विद्यः) दिन्यकोटि के उपासकीं के हृदयो मे (उदेषि) उदित १२६ भरथरववेद-माष्य . काण २०। सुर ४७ मनन निदिष्यासनाभ्यासी जनों. के हदो मँ मी. (उदेषि) उदित होते

English

Be his who signs the laud to thee. Lord of a Hundred Powers, stand up to lend us succour in this fight:

अध्याय 20

श्लोक 59.2

कण्वा॑ इव॒ भृग॑वः॒ सूर्या॑ इव॒ विश्व॒मिद्धी॒तमा॑नशुः ।इन्द्रं॒ स्तोमे॑भिर्म॒हय॑न्त आ॒यवः॑ प्रि॒यमे॑धासो अस्वरन्

kaṇvā iva bhṛgavaḥ sūryā iva viśvamiddhītamānaśuḥ | indraṃ stomebhirmahayanta āyavaḥ priyamedhāso asvaran

हिन्दी अर्थ

(पावक) हि पवित्र करनेवाले -परमेदवर ! (येन चक्षसा ) जिस योगमा पर तीव्रवेग से चलनेवाले उपासक को (पश्यसि) देखते हँ, उस पर श्रनुग्रह करते हु, (वरुण) हि पापनिवारक प्रभो ! मेरे पपौ का निवारण करके (त्वम् ) श्राप मुफ उपासक को भी कृपा दृष्टि से देखिये, मुक पर भी अनुग्रह कीजिये । भुरण्युः कषिप्रम (निघ० २ -१५)। . ६०४. नि मेषि रजस्पथ्वहुमिमानो -यक्तुभिः ।

English

In others too let us agree. Him who advances men to wealth, sends light to lead them in their wars,

अध्याय 20

श्लोक 59.3

उदिन्न्व॑स्य रिच्य॒तेंऽशो धनं॒ न जि॒ग्युषः॑ ।य इन्द्रो॒ हरि॑वा॒न्न द॑भन्ति॒ तं रिपो॒ दक्षं॑ दधाति सो॒मिनि॑

udinnvasya ricyateṃ'śo dhanaṃ na jigyuṣaḥ | ya indro harivānna dabhanti taṃ ripo dakṣaṃ dadhāti somini

हिन्दी अर्थ

(सूयं) है सूर्यँ के . सूयं ! आप (जन्मानि) जन्म-मरण की : (भ्रहः) दिनो का (मिमानः) निर्माण करते हुये पृथिवीलोकर्मे, (वि) इन विविध लोकों मे (एषि) व्याप्त हो रहे है । ४०५. स्च त्वा रितो रथे बन्ति देव वरये । शषोचिष्के्चं मिचक्षणम् ॥२०॥ ि (सूयं) है सूर्यो के सूयं ! (देव). प्रकाशमान परमेश्वर ! (गोचि-

English

And quells their foemen in the fray: May he, the saviour much-invoked, may Indra bear us in a ship

अध्याय 20

श्लोक 59.4

मन्त्र॒मख॑र्वं॒ सुधि॑तं सु॒पेश॑सं॒ दधा॑त य॒ज्ञिये॒ष्वा।पू॒र्वीश्च॒न प्रसि॑तयस्तरन्ति तं य इन्द्रे॒ कर्म॑णा॒ भुव॑त्

mantramakharvaṃ sudhitaṃ supeśasaṃ dadhāta yajñiyeṣvā| pūrvīścana prasitayastaranti taṃ ya indre karmaṇā bhuvat

हिन्दी अर्थ

दृष्टिवले (त्वा) भ्रापको, (सप्त हरितः) विषयों का परिहार की हई भेरी सात क्क्तियां, (रथे) मेरे शरीररथ मे (वहन्ति) वहन करने लग का० २० सु° लः भ्रथर्वेवेद-माष्य . १२७

English

Safely beyond all enemies. As such, O Indra, honour us with wealth and treasure: further us,

अध्याय 20

श्लोक 60.1

ए॒वा ह्यसि॑ वीर॒युरे॒वा शूर॑ उ॒त स्थि॒रः ।ए॒वा ते॒ राध्यं॒ मनः॑

evā hyasi vīrayurevā śūra uta sthiraḥ | evā te rādhyaṃ manaḥ

हिन्दी अर्थ

कर, विषयों का परिहार कर, परमेश्वरोन्मुख होकर, परमेश्वर को शरीर . रथः का रथी. बनाकर, शरीर-रथ मेँ उसका वहन करते लगतो है । (सप्त). सात शक्तयो को; (भ्रयुक्त) जब योगसाधनां दारा, हो जाती ह । तदनन्तर परमेश्वर ध्यानी के शरीर-रथ का (सूरः) प्रेरक हो जाता है, . (नप्त्यः) भौर सात शक्तियां विषयों . मे पतित नहीं होने

English

And lead us to felicity. We make this Indra show his strength, to strike the mighty

अध्याय 20

श्लोक 60.2

ए॒वा रा॒तिस्तु॑वीमघ॒ विश्वे॑भिर्धायि धा॒तृभिः॑ ।अघा॑ चिदिन्द्र मे॒ सचा॑

evā rātistuvīmagha viśvebhirdhāyi dhātṛbhiḥ | aghā cidindra me sacā

हिन्दी अर्थ

करके, इनके द्वारा (याति) योगी के कार्यो को निभाने लगता है । (न) जसे (सिञ्चन्तीः) दुध की धाराएं सीचती ह, वसे है परमेदवर । (वच॑सा) ज्योति के साथ वतमान (त्वा अभि) भ्रापके प्रति (गिरः) (यथा) जसे (जात्रीः) जन्म देनेवाली जननियां, (हृदा) भ्रपनी

English

Vritra dead: A vigorous Hero shall he be.

अध्याय 20

श्लोक 60.3

मो षु ब्र॒ह्मेव॑ तन्द्र॒युर्भुवो॑ वाजानां पते ।मत्स्वा॑ सु॒तस्य॑ गोम॑तः

mo ṣu brahmeva tandrayurbhuvo vājānāṃ pate | matsvā sutasya gomataḥ

हिन्दी अर्थ

प्रिय (ताः) वे स्तुतिवाणियां, (वच॑सा) ज्योति के साथ वतमान अषप. भ्रापके प्रति प्रवाहितहौतीर्है। १२०८ . . भ्रथवंवेद-भाष्य का० २० । सु० ४८

English

Indra was made for giving, most powerful, friendly in carouse, Bright, meet for Soma, famed in song.

अध्याय 20

श्लोक 60.4

ए॒वा ह्य॑स्य सू॒नृता॑ विर॒प्शी गोम॑ती म॒ही।प॒क्वा शाखा॒ न दा॒शुषे॑

evā hyasya sūnṛtā virapśī gomatī mahī| pakvā śākhā na dāśuṣe

हिन्दी अर्थ

३०९. वज्र।पवसाष्य॑; कीरतिरभियमांणमावैहन् । (कीतिः) प्रभु का कीतंन, (आयुः) पवित्र भ्रयु, (धृतम्) धृतसमभान वीये, (पयः) तथा वेदमाता का ज्ञान दुग्ध, इनमे सेः प्रत्येक, जोकि विषयविषों द्वारा मरे जाते हये मुक को, है परमेद्वर ! भ्रापके.प्रति (भरावहन्) ले भये्हैँ।

English

By song, as ‘twere, the mighty bolt, which none may parry, was prepared: Lofty, invincible he grew.

अध्याय 20

श्लोक 60.5

ए॒वा हि ते॑ विभू॑तय ऊ॒तय॑ इन्द्र॒ माव॑ते ।स॒द्यश्चि॒त् सन्ति॑ दा॒शुषे॑

evā hi te vibhūtaya ūtaya indra māvate | sadyaścit santi dāśuṣe

हिन्दी अर्थ

(भथवं ११।८।२९) । कीति गौर भ्रायु का सान वेदवाणी, यथा- (पुदिनः) नाना रूपरंगोवाला (भ्यम्) यह (गौः) पृथिवीलोक का पिता है सूयं । चूंकि पुथिवीलोक सूयं से अलग हुभा है । भौर यह भन्त- रिक्षरूपी माता की गोद्र मेँ स्थित है, तथा पूवं की भोर चलता हुभ्रा सूयं की परिक्रमा कर रहा है ।

English

They who stand round him as he moves harness the bright, the ruddy Steed: The lights are shining in the sky.

अध्याय 20

श्लोक 60.6

ए॒वा ह्य॑स्य॒ काम्या॒ स्तोम॑ उ॒क्थं च॒ शंस्या॑ ।इन्द्रा॑य॒ सोम॑पीतये

evā hyasya kāmyā stoma ukthaṃ ca śaṃsyā | indrāya somapītaye

हिन्दी अर्थ

(अस्य) हस परमेदवर की (रोचना) ज्योति (अन्तः चरति) हमारे भीतर विचर रही है । (महिषः) यह महान् परमेचवर ही हमारे. जीवनो मे रात कं ३० मुहृत्त मे, देह में (भरशिध्रियत्) परमेदवर कें नियमा- राजति) शरीर में विराजमान रहती ह । .

English

They yoke on both sides to the car the two bay coursers dear to him, Bold, tawny, bearers of the Chief.

अध्याय 20

श्लोक 61.1

तं ते॒ मदं॑ गृणीमसि॒ वृष॑णं पृ॒त्सु सा॑स॒हिम्।उ॒ लो॒क॒कृ॒त्नुम॑द्रिवो हरि॒श्रिय॑म्

taṃ te madaṃ gṛṇīmasi vṛṣaṇaṃ pṛtsu sāsahim| u lokakṛtnumadrivo hariśriyam

हिन्दी अर्थ

तक काम करती है,जब तक कि शरीर में जीवात्मा की सत्ता ६1 परस्पर मिलकर, (अमदन्) परमेदवर की स्तुतियां करतेर्हैः तब ये मक्ति के भावेश मे, (वाचम् ) सामगान के स्वरो का (आरोहन्) भारोहण करते हैःभर्थात् उच्च स्वरों मे सामगान गाते है .।॥ तब है उपासक नरवगं । ३१४. श्करो बाचमधृष्टायोरवाचो अरुष्णुहि ।

English

Thou, making light where no light was, and form, O Men r where no form was, Wast born together with the Dawns,

अध्याय 20

श्लोक 61.2

येन॒ ज्योतीं॑ष्या॒यवे॒ मन॑वे च वि॒वेदि॑थ ।म॒न्दा॒नो अ॒स्य ब॒र्हिषो॒ वि रा॑जसि

yena jyotīṃṣyāyave manave ca viveditha | mandāno asya barhiṣo vi rājasi

हिन्दी अर्थ

का ्रारोहण कर मन्त्र ३१३ से, (उरखुवाचः) जंसे कि उच्चस्वरो मे सामगानों के गानेवाले सामगानों कं स्वरों का आरोहण करते है! भौर प्रधुष्णुहि = भराधुष्णुहि ) अपने पापो का पूर्णेतया . पराभव कर । तथां (मंहिष्ठः) परमेदवर के प्रति भक्तिरस प्रदान करता हृषरा तू (दिवि) परमे- दवरीय प्रकाश मे (भरामदः) मस्तहोजा+ वाणियों का भारोहंण किया कर, गौर (अधृष्णुहि = आधुृष्णुहि) भ्रपने पापों का पूरणंतया पराभव कर । (धामधर्मन् ) तेरे ज्योतिमंय हृदय-वाम मे, हृदय-

English

His bright rays bear him up aloft, the God who knoweth all that= is, 284

अध्याय 20

श्लोक 61.3

तद॒द्या चि॑त्त उ॒क्थिनोऽनु॑ ष्टुवन्ति पू॒र्वथा॑ ।वृष॑पत्नीर॒पो ज॑या दि॒वेदि॑वे

tadadyā citta ukthino'nu ṣṭuvanti pūrvathā | vṛṣapatnīrapo jayā divedive

हिन्दी अर्थ

गृहे मे, (विराजति) परमेदवर विराजमान है । ( मदन् ) परमेदवर तुक ्रानन्दित करता हृ्रा (बहि) तेरे हृदयासन की भोर (वि भ्रासरन् ) विदेष- - रूप मेँ सरक रहा टै, दनैः-शनैः प्रकट हो रहा है 1 मगन हो जाता है, तो. उसे हृदय मे विविव प्रकार की ज्योतियां दृष्टि- . एेसी भवस्था उपस्थित हो जने पर योगी परमेदवर के . दर्न का लाभ

English

Sūrya, that every one may see. The constellations pass away, like thieves, together with their- beams,

अध्याय 20

श्लोक 61.4

तम्व॒भि प्र गा॑यत पुरुहू॒तं पु॑रुष्टु॒तम् ।इन्द्रं॑ गी॒र्भिस्त॑वि॒षमा वि॑वासत

tamvabhi pra gāyata puruhūtaṃ puruṣṭutam | indraṃ gīrbhistaviṣamā vivāsata

हिन्दी अर्थ

उपासको ! (वः) तुम्हारे (दस्मंम्) दुःखो -को क्षय करनेवाने ५ (ऋतीषहम् ) भाति भर्थात् पीड़ाभों गौर क्तेो का पराभवं कृरनेवाते; का० २०1 सु° ४९ प्रथवेवेद-माष्य . १३१

English

Before the all-beholding Sun. His herald rays are seen afar refulgent o’er the world of men,

अध्याय 20

श्लोक 61.5

यस्य॑ द्वि॒बर्ह॑सो बृ॒हत् सहो॑ दा॒धार॒ रोद॑सी ।गि॒रींरज्राँ॑ अ॒पः स्वर्वृषत्व॒ना

yasya dvibarhaso bṛhat saho dādhāra rodasī | girīṃrajrā~ apaḥ svarvṛṣatvanā

हिन्दी अर्थ

की स्तुतियां करते है, (न) जसे किं (वत्सम् भरमि) अपने भरपने बड के का 8 प्रतिदिन, (धेनवः) दूष भरी गौएं प्रीतिपूर्वकं हम्भारव (य॒क्षम्) चयुलोक में मी निवास करनेवाले, (सुदानुम्) . उत्तमदानी से सम्पन्न, (गिरि न) पवत के सदु अचल, (पुरुभोजसम्). सब के पालक,

English

Like fiery flames that burn and blaze. Swift and all-beautiful art thou, O Sūrya, maker of the light.

अध्याय 20

श्लोक 61.6

स रा॑जसि पुरुष्टुतँ एको॑ वृ॒त्राणि॑ जिघ्नसे ।इन्द्र॒ जैत्रा॑ श्रव॒स्यैऽ च॒ यन्त॑वे

sa rājasi puruṣṭuta~ eko vṛtrāṇi jighnase | indra jaitrā śravasyai' ca yantave

हिन्दी अर्थ

होते है, ओर इस निमित्त उसते प्रा्थनाएं करते हैँ । ईमहे ईं गतौ । तथा ईमहे याञ्चाकर्मां (निष० ३।१६ । गिरि न= . भ्रंथवा मेच के सदुश पालक तथा भमोजनदाता । मेच वर्षा हारा पालन करता तथा मोजन-सामग्री देता है । गिरि=मेघ (निघ० १।१०)। (पूवेचित्तये) घटना के . पुरवंज्ञान के लिये, है परमेरवर ! ओ.

English

Illuming all the radiant realm. Thou guest to the troops of Gods, thou comest hither to man- kind,

अध्याय 20

श्लोक 62.1

व॒यमु॒ त्वाम॑पूर्व्य स्थू॒रं न कच्चि॒द् भर॑न्तोऽव॒स्यवः॑ ।वाजे॑ चि॒त्रं ह॑वामहे

vayamu tvāmapūrvya sthūraṃ na kaccid bharanto'vasyavaḥ | vāje citraṃ havāmahe

हिन्दी अर्थ

ग्रौर कष्टो.के होते भी उपात्त योगमागे पर सुदृढ रहना, भौर (तत्) की (त्वा यामि) मै आपसे याचना करता हूं, (येन). जिस घर्मवीरता' को दग किये व्यक्ति के लिये, उनके (हिते धने). हितकर धन भर्थात्

English

Hither, all light for us to see. Thou with that eye of thine wherewith thou seest, brilliant.

अध्याय 20

श्लोक 62.2

उप॑ त्वा॒ कर्म॑न्नू॒तये॑ स नो॒ युवो॒ग्रश्च॑क्राम॒ यो धृ॒षत्।त्वामिद्ध्य॑वि॒तारं॑ ववृ॒महे॒ सखा॑य इन्द्र सान॒सिम्

upa tvā karmannūtaye sa no yuvograścakrāma yo dhṛṣat| tvāmiddhyavitāraṃ vavṛmahe sakhāya indra sānasim

हिन्दी अर्थ

चाहता है, ताकि बह इष्ट भ्रौर भ्रनिष्ट काः उपादान. तथा परिहार पहिले उसकी (महीः भपः) महाजलराशि का (भसूजः) सर्जन किया है, (इन्द्र) का ही है। तथा. (यम् ) जिसे क्षोणी ) धुलोक' गौर पृथिवीलोकमानो

English

Pervadest heaven and wide mid-air, melting the days out with. thy beams, Sun, seeing all things that have birth.

अध्याय 20

श्लोक 62.3

यो न॑ इ॒दमि॑दं पु॒रा प्र वस्य॑ आनि॒नाय॒ तमु॑ व स्तुषे ।सखा॑य॒ इन्द्र॑मू॒तये॑

yo na idamidaṃ purā pra vasya ānināya tamu va stuṣe | sakhāya indramūtaye

हिन्दी अर्थ

की (सः महिमा ) बह महिमा (सद्यः ) भ्राजतकं किसी ने (न संन). व पी मे इन्हे “खिल” नहीं माना । कारण .यह है कि हन सूक्त. मँ ही (गृणीत) परमेश्वर कै गुणगान करने लगता है । (गृणन्तः) परमेश्वर के गुणगान करते हये भी, (नू) निरुचयं से, (भस्य) हसं -परमेदवर की

English

Seven bay steeds, harnessed to thy car, bear thee, O.thou far- seeing One, God, Sūrya, thee with radiant hair.

अध्याय 20

श्लोक 62.4

हर्य॑श्वं॒ सत्प॑तिं चर्षणी॒सहं॒ स हि ष्मा॒ यो अम॑न्दत ।आ तु नः॒ स व॑यति॒ गव्य॒मश्व्यं॑ स्तो॒तृभ्यो॑ म॒घवा॑ श॒तम्

haryaśvaṃ satpatiṃ carṣaṇīsahaṃ sa hi ṣmā yo amandata | ā tu naḥ sa vayati gavyamaśvyaṃ stotṛbhyo maghavā śatam

हिन्दी अर्थ

का २० । सु० ५१ भ्रथवेवेद-माष्य १३३ ३२१. कुं स्तुवन्तं ऋतयन्त देवत षिः फो निप ओहते । , चाहनेवाले, गौर भरापकी (स्तुवन्तः) स्तुतियां करनेवाले (कत् उ) कितने

English

Sūrya hath yoked the seven bright mares, the daughters of the car: With these, His own dear team, he travelleth.

अध्याय 20

श्लोक 62.5

इन्द्रा॑य॒ साम॑ गायत॒ विप्रा॑य बृह॒ते बृ॒हत्।ध॒र्म॒कृते॑ विप॒श्चिते॑ पन॒स्यवे॑

indrāya sāma gāyata viprāya bṛhate bṛhat| dharmakṛte vipaścite panasyave

हिन्दी अर्थ

ही है, परन्तु (कः) -कोर्द (विप्रः) मेधावी (ऋषिः) ऋषि ही, अपने जीवन परमेदवर ! (कदां) कब (सुन्वतः) भक्तिरसवाले उपासक की (हवम्) स्तोता की (हवम्) पुकार की गोर (भरागमः) भ्रापभ्राते है. इसे कोई

English

The swiftly-moving songs of praise pour on thee streams of vital strength As mother cows refresh the calf.

अध्याय 20

श्लोक 62.6

त्वमि॑न्द्राभि॒भूर॑सि॒ त्वं सूर्य॑मरोचयः ।वि॒श्वक॑र्मा वि॒श्वदे॑वो म॒हाँ अ॑सि

tvamindrābhibhūrasi tvaṃ sūryamarocayaḥ | viśvakarmā viśvadevo mahā~ asi

हिन्दी अर्थ

यो जरित्म्यों मघवां पुरूवसुः सदेव शिक्त ॥१॥ . है उपासक ! (यथा विदे) परमेश्वर कीः यथाथ प्राप्ति के लिये, कर, जों परमेश्वर कि (वः) तुम सब उपासकों की साघनाभो. को (सुराधसम्) उत्तम प्रकार से सिद्ध करता है, सफल करता है) तथा

English

Swift move the bright ones while they blend the Milk with vital vigour, as A dame her infant with her heart.

अध्याय 20

श्लोक 62.7

वि॒भ्राजं॒ ज्योति॑षा॒ स्व॑१रग॑च्छो रोच॒नं दि॒वः ।दे॒वास्त॑ इन्द्र स॒ख्याय॑ येमिरे

vibhrājaṃ jyotiṣā sva1ragaccho rocanaṃ divaḥ | devāsta indra sakhyāya yemire

हिन्दी अर्थ

परमेश्वर, (जरितृभ्यः) -स्तोतागों के लिये, (इवः) मानो (सहस्रेण). हजारों रकार से (चिक्षति) दिक्षाएंदेरहाहै।ःः ..- . सब भोर से तथा सवं घटनां द्वारा उपदेश दे रहा.है, शिक्षां दे -रहा है “मुख ' शब्द दारा उपदेश देने की भावना को सूचित्र क्रिया है । १३४ प्रथवेवेद-माष्यः का० २०।सु० ५ ३२३. शतानीकेव प्र जिगाति पष्ण॒या इन्ति वृत्राणि दायै!

English

Fair hymns bring glory to the Strong, and Indra-vigour; unto, me Fatness and milk and length of days.

अध्याय 20

श्लोक 62.8

तम्व॒भि प्र गा॑यत पुरुहू॒तं पु॑रुष्टु॒तम्।इन्द्रं॑ गी॒र्भिस्त॑वि॒षमा वि॑वासत

tamvabhi pra gāyata puruhūtaṃ puruṣṭutam| indraṃ gīrbhistaviṣamā vivāsata

हिन्दी अर्थ

. (शतानीका इव) सेको सेनाभों के सदृश परमेदवर (धृष्णुया) भ्रपनीःपराभवकारिणी शक्ति दवारा (प्र जिगाति) . सब पर विजय पाये हये है 1 (दाशुषे) आत्मसमपंक के लिये परमेश्वर उसके (वृत्राणि) अविद्या

English

This brindled Bull hath come and sat before the Mother in the east, Advancing to the Father Heaven.

अध्याय 20

श्लोक 62.9

यस्य॑ द्वि॒बर्ह॑सो बृ॒हत् सहो॑ दा॒धार॒ रोद॑सी ।गि॒रींरज्रां॑ अ॒पः स्वऽर्वृषत्व॒ना

yasya dvibarhaso bṛhat saho dādhāra rodasī | girīṃrajrāṃ apaḥ sva'rvṛṣatvanā

हिन्दी अर्थ

तथा तज्जन्य ्रावरणों को (हन्ति) दुर कर देता है 1. (गिरेः पृर्मोनसः) श्रभूतं मोगसामग्री देनेवाजे मेघ के (इव ) सदु (भ्रस्य). इस परमेदधर के (रसाः) जनन्दरस (पिन्विरे) उपासको को. सीते है,भौर इसके (दत्राणि) भ॑न्य दान (पिन्विरे) संब की सेवाएं कर रहे है । क : . पिन्विरे पवि सेचने; सेव॑ने । .

English

As expiration from breath she moves along the lucid spheres: The Bull shines forth through all the sky.

अध्याय 20

श्लोक 62.10

स रा॑जसि पुरुष्टुतं॒ एको॑ वृ॒त्राणि॑ जिघ्नसे ।इन्द्र॒ जैत्रा॑ श्रव॒स्याऽ च॒ यन्त॑वे

sa rājasi puruṣṭutaṃ eko vṛtrāṇi jighnase | indra jaitrā śravasyā' ca yantave

हिन्दी अर्थ

मोक्ष.की भाप्ति के निभित्त,. उनकी (भ्राविथ) भोपने रका कींहै, तथा , १३२ भरथववेद-भाष्य - का० २०। सु० ५० वान् की (आविथ) रक्षा की है। कष्वः-मेधावी (निघ ३।१५) ।

English

Varuna, The active one throughout mankind.

अध्याय 20

श्लोक 63.1

इ॒मा नु कं॒ भुव॑ना सीषधा॒मेन्द्र॑श्च॒ विश्वे॑ च दे॒वाः ।य॒ज्ञं च॑ नस्त॒न्वं च प्र॒जां चा॑दि॒त्यैरिन्द्रः॑ स॒ह ची॑क्लृपाति

imā nu kaṃ bhuvanā sīṣadhāmendraśca viśve ca devāḥ | yajñaṃ ca nastanvaṃ ca prajāṃ cādityairindraḥ saha cīklṛpāti

हिन्दी अर्थ

यः घ॑न्बते स्तवते काम्यं वहं सदेव महते ।३॥' क्रियां कर, (यः) जो ; परमेव र "कि (सुन्वते) मक्तिरसवाले (स्तुवते). स्तीता को, (सहल ण इव) मानो हजारों प्रकार से . (काम्यं वसु) अभीष्ट- ६, (तानीका =-शतानीकानि ) जसे कि संक सेना्भो के धेर दुलंङ्व्य हति है । भौर (भरस्य इन्द्रस्य ). इस परमेदवर की (महीः दषः) महती . इन्छाएं (सम् तराः) -सम्यकू तंरानेवालीः हँ. परमेश्वर . (भिरिः.न ) .

English

Song is bestowed upon the Bird. It reigns supreme throughout thirty realms Throughout the days at break of morn.

अध्याय 20

श्लोक 63.2

आ॒दि॒त्यैरिन्द्रः॒ सग॑णो म॒रुद्भि॑र॒स्माकं॑ भूत्ववि॒ता त॒नूना॑म्।ह॒त्वाय॑ दे॒वा असु॑रा॒न् यदाय॑न् दे॒वा दे॑व॒त्वम॑भि॒रक्ष॑माणाः

ādityairindraḥ sagaṇo marudbhirasmākaṃ bhūtvavitā tanūnām| hatvāya devā asurān yadāyan devā devatvamabhirakṣamāṇāḥ

हिन्दी अर्थ

का०.२०। सु०५ अथवेवेद-माष्य १३४ ३२६. व॒यं षं ता मुतावैन्त॒ अपो न वृक्तवहिवः । ( सुतावन्तः) भक्तिरस कां निष्पादित कयि हूये हँ, ओर भक्तिरस (भाषः. भासन लगाये (परि) सब भोर (आसत) बे हये है ।

English

When voices, fain to win mid-air, ascended to the Mighty One, The vigorous God was filled with joy.

अध्याय 20

श्लोक 63.3

प्र॒त्यञ्च॑म॒र्कम॑नयं॒ छची॑भि॒रादित् स्व॒धामि॑षि॒रां पर्य॑पश्यन्।अ॒या वाजं॑ दे॒वहि॑तं सनेम॒ मदे॑म श॒तहि॑माः सु॒वीराः॑

pratyañcamarkamanayaṃ chacībhirādit svadhāmiṣirāṃ paryapaśyan| ayā vājaṃ devahitaṃ sanema madema śatahimāḥ suvīrāḥ

हिन्दी अर्थ

- (वसो) है विदववासी. ! (सुते) भक्तिरस के उत्पन्न हो जाने पर, रौर सांसारिक वृत्तियौं की दृष्टि से (निरेके) चित्तके रिक्त हो जने स्तुतियां करते ह, भौर कहते है कि “(इन्द्र ) है परमेदवर !. आप (सुतम्). उपासक के हृदय-गृह मे (भ्रा गमत्) भाएगे, (इव). जंसे कि (वंसगः).

English

Praise with the voice the Mighty, praise the awful with the voice: in heaven He, the most bounteous, hath been glad.

अध्याय 20

श्लोक 63.4

य एक॒ इद् वि॒दय॑ते॒ वसु॒ मर्ता॑य दा॒शुषे॑ ।ईशा॑नो॒ अप्र॑तिष्कुत॒ इन्द्रो॑ अ॒ङ्ग

ya eka id vidayate vasu martāya dāśuṣe | īśāno apratiṣkuta indro aṅga

हिन्दी अर्थ

३९८. कर्मिण पृषद् बा दरिं सदुतिण॑म् 1 = (चुष्णो ) पापों का पराभव . करनेवाले है परमेश्वर! (कण्वेभिः) का निमीलन करनेवलि ध्यानावस्थित उपासक द्वारा चाहां गया (घृषद् बल कि (सहस्निगम्) हजारो का उपकार करनेवाला : हो 1 (मधवन् ).हे

English

Praise with the voice the Mighty: he rules in each realm. In transport he Hath set upon the sacred grass.

अध्याय 20

श्लोक 63.5

क॒दा मर्त॑मरा॒धसं॑ प॒दा क्षुम्प॑मिव स्फुरत्।क॒दा नः॑ शुश्रव॒द् गिर॒ इन्द्रो॑ अ॒ङ्ग

kadā martamarādhasaṃ padā kṣumpamiva sphurat| kadā naḥ śuśravad gira indro aṅga

हिन्दी अर्थ

बलरूपी,चन के स्वामी ! (विचर्षणे) है सवंद्रष्टा ! (ईमहे) हम भाष कण्वेभिः =मेधाव्रिनः (सायण) 1. कण्व = केण +-व . (वाला), ३६९. इ ई वेद सते घचा पिबन्तं कवु वरयो दषे ,

English

As cows low to their calf in stalls, so with our songs we glorify This Indra, even your wondrous God who checks attack, who joys in the delightful juice.

अध्याय 20

श्लोक 63.6

यश्चि॒द्धि त्वा॑ ब॒हुभ्य॒ आ सु॒तावां॑ आ॒विवा॑सति ।उ॒ग्रं तत् प॑त्यते॒ शव॒ इन्द्रो॑ अ॒ङ्ग

yaściddhi tvā bahubhya ā sutāvāṃ āvivāsati | ugraṃ tat patyate śava indro aṅga

हिन्दी अर्थ

(सुते ). उपासक मेँ मक्तिरस के उत्पन्न हो जाने पर, है परमेरहैवर ! (सचा) साथ-साथ, भर्थात् उपासक जब आपके भ्रानन्दरस का पान करता . 8, तो उसके भक्तिरस को (पिबन्तम्) पीते हुये भ्रापको (कः) कौन उपासनारहित व्यक्ति (वेद) जान सकता है ? उस भरापक्रो तो उपासक -ही" उस भ्रवस्था में जान सकता है; उपासक (कत्) किंस प्रकार के वयः) भानन्दरसरूपी भन्न को (दषे) निज भ्ात्मा भे धारण-क॑र रहा -होत है, -.( ईम्) इसे. भी उपासनार हित -कौन व्यक्ति.जान सकता. ? की (चिभिनत्ति) तोड-फोड़ देते है, जसे किं (युधिग्री). तेजस्विं-मुखवाना "सेनापति, (अन्धसः). भर्म से भरे शत्रु के पुरः) किलो भौर नगौ कौं का० २० ॥सू० भ अथर्वंवेद-माष्य १२३७

English

Celestial, bounteous Giver, God, with power and might, rich, mountain-like, in precious things.

अध्याय 20

श्लोक 63.7

य इ॑न्द्र सोम॒पात॑मो॒ मदः॑ शविष्ठ॒ चेत॑ति ।येना॒ हंसि॒ न्य॑१त्त्रिणं॒ तमी॑महे

ya indra somapātamo madaḥ śaviṣṭha cetati | yenā haṃsi nya1ttriṇaṃ tamīmahe

हिन्दी अर्थ

(न) जसे (मृगः वारणः) जङ्खली हाथी, जङ्गल में (दाना दानानि) तोड़-फोड़ . (दधे) करता है, भौर (पुरुत्रा) बहुत स्थानों में विचरने मे (नकिः) कोई नहीं (त्वा) तुं (नियमत्) नियन्वित कर सकता है । (सुते) इस उत्पन्न जगत् मँ (श्रा गमः). तु फिर लौट कर

English

Him soon we see for foodful booty rich in kine, brought hundredfold and thousandfold. I crave of thee that hero strength—that thou mayst first regard this prayer

अध्याय 20

श्लोक 63.8

येना॒ दश॑ग्व॒मध्रि॑गुं वे॒पय॑न्तं॒ स्वर्णरम्।येना॑ समु॒द्रमावि॑था॒ तमी॑महे

yenā daśagvamadhriguṃ vepayantaṃ svarṇaram| yenā samudramāvithā tamīmahe

हिन्दी अर्थ

. होकर (भोजसा) निज शक्ति द्वारा (चरसि) विचरता है । भन्वर ३२९ मे उपासक के आनन्दरसपान का वर्णन हा है । भ्रानन्दरसपान कर जब जीवात्मा मुक्तं हो जातादहै, उसका वणन ३३ दवारा भच्छादित नहीं हो पाता । तब (यदि) भ्रगर (मघवा इन्द्रः) एेदवयं- को (शुणवत्) सुन लेता है, तब. वह स्तुतिकर्ता (योषति न ) जन्म-मरण के बन्धन मे भराकर हिसित नहीं होता, अपितु (श्रा गमत्) परमेदवर कीशरणमे ही भ्रा जाता है। अनिष्टृतः=अ+नि-+स्तु (आच्छा-

English

Wherewith thou helpest Bhrigu and the Yatis and Praskanva when the prize was staked. Wherewith thou sentest mighty waters to the sea—Indra, that manly strength of thine.

अध्याय 20

श्लोक 63.9

येन॒ सिन्धुं॑ म॒हीर॒पो रथां॑ इव प्रचो॒दयः॑ ।पन्था॑मृ॒तस्य॒ यात॑वे॒ तमी॑महे

yena sindhuṃ mahīrapo rathāṃ iva pracodayaḥ | panthāmṛtasya yātave tamīmahe

हिन्दी अर्थ

३३२. विश्वाः पृत॑ना अभिभूतरं नर सजस्ततथुरिन्द्र जज राजसे । १३८ ' अरथर्ववेद-माष्य का०२०५। सुं ५४ (विदवाः पृतनाः) काम क्रोध श्रादि की सबं सेनां का.(भ्रभि-

English

For ever unattainable is this power of him to whom the worlds have cried aloud. What newest of imploring hymns shall, then, the zealous mortal sing?

अध्याय 20

श्लोक 64.1

एन्द्र॑ नो गधि प्रि॒यः स॑त्रा॒जिदगो॑ह्यः ।गि॒रिर्न वि॒श्वत॑स्पृ॒थुः पति॑र्दि॒वः

endra no gadhi priyaḥ satrājidagohyaḥ | girirna viśvataspṛthuḥ patirdivaḥ

हिन्दी अर्थ

को वर लेने पर (भरामुरिम्) उसकी भरविद्या का पणंतया विना करनेवाले करं लेते है, (राजसे) ताकि परमेदवर उन पर राज्य करे, भ्रौर उनके (रेभासः) भर्चनाएं करनेवाले उपासक, (सोमस्य पीतये) परभेदवर है कि परमेदवंर (हि) निद्वय से, (भरोजसा) निजं. : भोजं दारा, तथा

English

For have not they who laud his might and Indra-power won for themselves the light of heaven?

अध्याय 20

श्लोक 64.2

अ॒भि हि स॑त्य सोमपा उ॒भे ब॒भूथ॒ रोद॑सी ।इन्द्रासि॑ सुन्व॒तो वृ॒धः पति॑र्दि॒वः

abhi hi satya somapā ubhe babhūtha rodasī | indrāsi sunvato vṛdhaḥ patirdivaḥ

हिन्दी अर्थ

धुतब्रतः) मानो ब्रतघारण क्ये हुये है । रेमः= स्तोता (निघ० ३।१६) । भूका लेते हं । तथा है अभिनव उपासको ! -- (सुदीतयः) प्रपने भविद्यादि . का० २० । सू9 ५१५ अथवेवेद-भोष्य वि १३९.

English

When shall they keep the Law and praise thee mid the Gods? Who counts as Rishi and as sage?

अध्याय 20

श्लोक 64.3

त्वं हि शश्व॑तीना॒मिन्द्र॑ द॒र्ता पु॒रामसि॑ ।ह॒न्ता दस्यो॒र्मनो॑र्वृ॒धः पति॑र्दि॒वः

tvaṃ hi śaśvatīnāmindra dartā purāmasi | hantā dasyormanorvṛdhaḥ patirdivaḥ

हिन्दी अर्थ

आदि से रहित उच्च कोटि के उपासक,- (तरस्विनः) उत्साहपूर्वंक,- (वः) भ्रौर बार-बार आत्मोहुतियां प्रदान करता हु, जो कि. (मघवानम्) .ेरवयोँ नाना बलों को (दधानम्) घारण कंरता, (प्रतिष्कुतम्) जौ विरोधी राक्तियों द्वारा भुकायां . नहीं जा सकता । (मंहिष्ठः) जो पूजनीय भ्रौर महादानी है, (यज्ञियः) यज्ञो में एकमात्र पुजनीय वह परमेरवर, (गीर्भिः)

English

When wilt thou ever, Indra, Bounteous Lord, come nigh to presser’s or to praiser’s call? For you will I sing Indra’s praise who gives good gifts as well we know;

अध्याय 20

श्लोक 64.4

एदु॒ मध्वो॑ म॒दिन्त॑रं सि॒ञ्च वा॑ध्वर्यो॒ अन्ध॑सः ।एवा हि वी॒र स्तव॑ते स॒दावृ॑धः

edu madhvo madintaraṃ siñca vādhvaryo andhasaḥ | evā hi vīra stavate sadāvṛdhaḥ

हिन्दी अर्थ

लिये (- विष्वा सुपथा) सब मार्गोःको सुमागं ओर सुगम (कृणोतु) करे 1 सामग्री के भण्डारी ह । भाप (असुरेभ्यः) असुरो से, अपने प्राणपोषण- मात्र मे जो रत ह .उनसे, (याः) जो उनकी ( सृजः) भोग-सामभ्रियां हं १४० भथर्वेवेद-माष्य का० २०. सु० ५६

English

Praise of the Bounteous Lord who, rich in treasure, aids his singers with wealth thousandfold. As with a hundred hosts he rushes boldly on, and for the offerer slays his foes.

अध्याय 20

श्लोक 64.5

इन्द्र॑ स्थातर्हरीणां॒ नकि॑ष्टे पू॒र्व्यस्तु॑तिम्।उदा॑नंश॒ शव॑सा॒ न भ॒न्दना॑

indra sthātarharīṇāṃ nakiṣṭe pūrvyastutim| udānaṃśa śavasā na bhandanā

हिन्दी अर्थ

निम्नलिखित . किया है,“ तस्मादष्यचयेहाददानमधद्दधानमयंजमानमाहुर- वालेशश्द्धाहीन,भ्रौर यज्ञो को न करनेवाले को"असुर' कहते हें । ये मृत के मी विचारसे कि इन करमो दारा प्रेत परलोक पर विजय पालेगा” । श्रत सांसारिक भोग ही ्रसुरों के लिये जीवन का ध्येय होता है! एसे विचारोवाले है,:वै परोपकार परसेवा की भावनावाले होते हँ । एेसों के पास आई सम्पत्ति परसेवारथं होती है ।

English

As from a mountain flow the water-brooks, thus flow his gifts who feedeth many a one. Sakra I praise, for victory, far-famed, exceeding bountiful.

अध्याय 20

श्लोक 64.6

तं वो॒ वाजा॑नां॒ पति॒महू॑महि श्रव॒स्यवः॑ ।अप्रा॑युभिर्य॒ज्ञेभि॑र्वावृ॒धेन्य॑म्

taṃ vo vājānāṃ patimahūmahi śravasyavaḥ | aprāyubhiryajñebhirvāvṛdhenyam

हिन्दी अर्थ

भरदव तथा गौ भादि, भौर (अव्ययम्) अविना (भागम्) सेवनीय मोक्ष- रूपी सम्पत्ति को (दधिषे) धारण करते है, इनके स्वामी है, (तम्) उस -भ्रगति चाहनेवाले मँ (षेहि) स्थापित तथा पोषित कीजिये, (पणौ मा) कजूस व्यापारी में उस सम्पत्ति को स्थापित न कीजिये । उपासको के पापौ का हनन करता है, भौर (ववृषे) उनकी वृद्धि करता,

English

Who gives, as ‘twere in thousands, precious wealth to him who sheds the juice and worships him.

अध्याय 20

श्लोक 65.1

ए॒तो न्विन्द्रं॒ स्तवा॑म॒ सखा॑य॒ स्तोम्यं॒ नर॑म्।कु॒ष्टीर्यो विश्वा॑ अ॒भ्यस्त्येक॒ इत्

eto nvindraṃ stavāma sakhāya stomyaṃ naram| kuṣṭīryo viśvā abhyastyeka it

हिन्दी अर्थ

मे, ( उत ) भौर (अभ) छोटे देवासुर-संग्रामों मे (तम् इत् इम्) उसी .. परमेरवर का (हवामहे) . हम भाह्वान करते ह । (सः). वह परमेश्वर बड़ संग्राम वे जब किकाम, क्रोघ, लोभ, मोह भ्रादि इकट्ठे होकर संग्राम में उपस्थित होतेर्है, तथा छोटे संग्राम वे जबकि इनमेसे किसी एक के साथ संग्राम लड़ना होता है । ३३९. असि हि बीर सेन्योऽसि भूरिं पराददिः (वीर) है प्रेरणा के देनेवाले परमेदवर ! भ्राप (हि) ही (सेन्यः) सद्गुणो की सेना के नायकः (भसि). । भ्ापटही (भूरि) बहुमात्रामें (पराददिः) भरासुरी-भावनाभ्रों को परास्तं कर हैवी-मावना्भो के दाता है । (दन्नस्य) छोटे या भरभिनव उपासक को. (चित्) भी (वृधः रसि) भ्राप बढ़ते ह । (यजमानाय) उपासना-यज्ञ के रयिता, तथा (सुन्वते)

English

Arrows with hundred points, unconquerable, are this Indra’s mighty arms in war. He streams on liberal worshippers like a hill with springs, when juices poured have

अध्याय 20

श्लोक 65.2

अगो॑रुधाय ग॒विषे॑ द्यु॒क्षाय॒ दस्म्यं॒ वचः॑ ।घृ॒तात् स्वादी॑यो॒ मधु॑नश्च वोचत

agorudhāya gaviṣe dyukṣāya dasmyaṃ vacaḥ | ghṛtāt svādīyo madhunaśca vocata

हिन्दी अर्थ

. (यद्) जब जीवन मे (राजयः) देवासुर-संग्राम (उदीरते) उठते बन (धीयते) स्थापित किया जाता है। .(मदच्युता) जिनसे मदमस्ती १४२ शथवववेद-मष्य - का० २०1 सु० ५६ का० २० । सू० ५७ अ 1 5. नववद्जाश्च अथवेवेद-माष्य १४३

English

gladdened him. We compass thee like waters, we whose grass is trimmed and

अध्याय 20

श्लोक 65.3

यस्यामि॑तानि वी॒र्या॒ न राधः॒ पर्ये॑तवे ।ज्योति॒र्न विश्व॑म॒भ्यस्ति॒ दक्षि॑णा

yasyāmitāni vīryā na rādhaḥ paryetave | jyotirna viśvamabhyasti dakṣiṇā

हिन्दी अर्थ

, है परमेदवर ! (मदेमदे) जब-जब भ्राप प्रसन्न हों तब तब भ्राप (नः) हम उपासको को (गवाम्) सुखसामभ्री के . (गथा) समूहं (ददिः) उभया हस्त्या) दोनों हाथ (संगुमाय) भरकर (पुरुवसु ) प्रभूत धन ५ है, वैसे ही राप भी है (दता वसु) सेकंड प्रकार के घन (शिशीहि) प्रदान कीजिये, भौर हमें घनो से (आ भर) भर दीजिये । गवाम् गौः ३४९, मादथख सुते सचा श्व्रसे श्चर राधसे ।

English

Soma pressed. Here where the filter pours its stream thy worshipper round thee, O Vritra-slayer, sit.

अध्याय 20

श्लोक 66.1

स्तु॒हीन्द्रं॑ व्यश्व॒वदनू॑र्मिं वा॒जिनं॒ यम॑म्।अ॒र्यो गयं॒ मंह॑मानं॒ वि दा॒शुषे॑

stuhīndraṃ vyaśvavadanūrmiṃ vājinaṃ yamam| aryo gayaṃ maṃhamānaṃ vi dāśuṣe

हिन्दी अर्थ

सरके, नौर , (रात्रसे) सिद्धां प्राप्त कर सकं । (हि) निदचयपूरवेक -पृरमेदवर क्री कामना है--भक्तिरस, उपासकदवारा समपंण, भौर उपासक को जल्मं-मरण -की शृङ्खला से छुडाना । इन दोन की कामना का संसं यहां भरभीष्ट है । . "छनि स्थो बनौनामयो वेदो अदां तेवा नो ेदः भा भ२।।६

English

Men, Vasu! by the Soma, with lauds call thee to the foremost place. When comest thou athirst unto the juice as home, O Indra, like a bellowing bull?

अध्याय 20

श्लोक 66.2

ए॒वा नू॒नमुप॑ स्तुहि॒ वैय॑श्व दश॒मं नव॑म्।सुवि॑द्वांसं च॒र्कृत्यं॑ च॒रणी॑नाम्

evā nūnamupa stuhi vaiyaśva daśamaṃ navam| suvidvāṃsaṃ carkṛtyaṃ caraṇīnām

हिन्दी अर्थ

ससृज्महे) संसग करते हं । (अथा) तदनन्तर श्राप (नः) हमारे ( भविता) पोषण करते हूं । (जनानाम्) इन जन्मधारी उपासको के (भरन्तः) हृदयो अदानियों कीः (वेदः) सम्पत्तिषां (नः) हम उपासको को (भ्रामर) प्रदान संसार मे विषमतां ह, इनका अपलाप नहीं किया जां सकता । शारीरिक विषमताएं हँ-कोई लम्बा कोई नाटा, कोई सुरूप, कोई कुरूप,

English

Who knows what vital power he wins, drinking beside the flowing juice? This is the fair-cheeked God who, joying in the draught, breaks down the castles in his

अध्याय 20

श्लोक 66.3

वेत्था॒ हि निरृ॑तीनां॒ वज्र॑हस्त परि॒वृज॑म्।अह॑रहः शु॒न्ध्युः प॑रि॒पदा॑मिव

vetthā hi nirṛtīnāṃ vajrahasta parivṛjam| aharahaḥ śundhyuḥ paripadāmiva

हिन्दी अर्थ

भ्राथिक विषमतां सामालिक-जीवन मे भ्रधिक दुष्परिणामी होती है।' इन भायिक विषमताभ्रों को दुर करना वेदानुमोदित है । वेदों मेँ इसका. (यजु° ४०।१), भरौरधनको जमाकरनेकी गर्धाका त्याग। इसीलिये न होना चाहिए ; भ्रौर परोपकारी, परमेदवर के उपासको को सम्पत् का स्वामी होना चाहिए, ताकि वे समग्र प्रजोजन का परिपोषण कर

English

strength. As a wild elephant rushes on, this way and that way, mad with heat.

स्रोत: bhavykhatri/DharmicData · प्राप्त 3/6/2026

शास्त्रीय प्रामाणिकता एवं पारदर्शकताSources & Interpretation

स्रोत, संस्करण एवं व्याख्या वर्गीकरण

धर्म ग्रंथ पर मूल शास्त्र, पारंपरिक भाष्य और आधुनिक व्याख्या को पूर्णतः पृथक रखा जाता है ताकि पाठक को किसी भी व्याख्या के शास्त्र होने का भ्रम न हो।

सामग्री वर्गीकरण संकेत (Epistemic Content Labels)

6 स्तरिय प्रमाण व्यवस्था
मूल पाठOriginal text

अपौरुषेय / प्रामाणिक शास्त्र (Primary Canonical Scripture)

मूल संस्कृत, प्राकृत अथवा अवधी श्लोक/मंत्र। यह सर्वोच्च प्रमाण (प्रस्थान) है। इस पाठ में किसी भी आधुनिक व्याख्याकार का हस्तक्षेप नहीं है।

शाब्दिक अनुवादLiteral translation

पदार्थ व अन्वय (Direct Grammatical & Word-for-Word Meaning)

व्याकरणसम्मत प्रत्यक्ष शब्दार्थ (अन्वय)। बिना किसी दार्शनिक संप्रदाय के पूर्वाग्रह के, संस्कृत शब्दों का सटीक भाषांतर।

पारंपरिक भाष्यTraditional commentary

आचार्य परंपरा व टीका (Classical Lineage Commentary)

प्राचीन आचार्य परंपरा (यथा शंकराचार्य, रामानुजाचार्य, मध्वाचार्य, श्रीधर स्वामी) द्वारा विरचित शास्त्रीय भाष्य व टीकाएं।

सरल व्याख्याSimple explanation

भावार्थ व सुबोध प्रबोधन (Accessible Pedagogical Exposition)

आधुनिक जिज्ञासुओं के लिए सरल भाषा में भावार्थ। यह मूल मंत्र नहीं, बल्कि पाठ को सुगम बनाने हेतु संपादकीय व्याख्या है।

आधुनिक चिंतनModern reflection

समसामयिक विमर्श व अनुप्रयोग (Contemporary Application & Analysis)

दार्शनिक, मनोवैज्ञानिक व वैज्ञानिक समरूपताओं पर आधुनिक चिंतन। यह मूल शास्त्र का अंग नहीं है और इसे शास्त्रोक्त सिद्धांत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

शोध टिप्पणीResearch note

पांडुलिपि एवं ऐतिहासिक शोध (Critical Apparatus & Manuscript Research)

पांडुलिपि विविधताएं, पाठ-भेद (variant readings), छंद रचना, और ऐतिहासिक व तुलनात्मक भाषावैज्ञानिक शोध। यह शास्त्र का मूल संदेश बदलने हेतु नहीं, बल्कि पाठ की प्रामाणिकता परखने के लिए है।