Atharva Veda
20
अध्याय 20 / 20

Kanda 20

काण्ड 20

975 श्लोकभाग 2/13 · श्लोक 17.1–27.6

पूर्ण अध्याय पाठ86 श्लोक

अध्याय 20

श्लोक 17.1

(१-१२) १-११ कृष्णः, १२ वसिष्ठः।इन्द्रः।१-१० जगती, ११-१२ त्रिष्टुप्।अच्छा॑ म॒ इन्द्रं॑ म॒तयः॑ स्व॒र्विदः॑ स॒ध्रीची॒र्विश्वा॑ उश॒तीर॑नूषत ।परि॑ ष्वजन्ते॒ जन॑यो॒ यथा॒ पतिं॒ मर्यं॒ न शु॒न्ध्युं म॒घवा॑नमू॒तये॑

(1-12) 1-11 kṛṣṇaḥ, 12 vasiṣṭhaḥ| indraḥ| 1-10 jagatī, 11-12 triṣṭup| acchā ma indraṃ matayaḥ svarvidaḥ sadhrīcīrviśvā uśatīranūṣata | pari ṣvajante janayo yathā patiṃ maryaṃ na śundhyuṃ maghavānamūtaye

हिन्दी अर्थ

करते है, तथा (वावदतः) कड्कते हए (. अशियस्प्र ) . मेषस्थ-विचयुदूवख, के (घोषाः) घोष. (इव ) जसे मानोः बृहस्पति की स्तुत्तियां करते है, गौर (गिरिभ्रजः) पतों से गिरती हई (ऊ्मथः) नदिय की लर (न) जब करते है । अभिप्राय यह है कि प्रङ़ृतिक संसार मी मानी भ्रमे प्रभु.कीः , ३२ भ्रथववेद-माष्य का०.२० ।सू० १६ । ७६. -द भोभिराज्गिरसो न॑माणो भग॑शवेदर्मणं निनाय ।

English

Great is thy power, O Indra, we are thine. Fulfil, O Maghavan, the wish of this thy worshipper.

अध्याय 20

श्लोक 17.2

न घा॑ त्व॒द्रिगप॑ वेति मे॒ मन॒स्त्वे इत् कामं॑ पुरुहूत शिश्रय ।राजे॑व दस्म॒ नि ष॒दोऽधि॑ ब॒र्हिष्य॒स्मिन्त्सु सोमे॑व॒पान॑मस्तु ते

na ghā tvadrigapa veti me manastve it kāmaṃ puruhūta śiśraya | rājeva dasma ni ṣado'dhi barhiṣyasmintsu somevapānamastu te

हिन्दी अर्थ

दधकते पत्थर को फकता है । तथा ( अद्मनः ) भाकाश में फले मेध से , (त्वचम्) मेष की त्वचा को (बिभेद) काट दिया । (इव) जैसे ( उल्लः ) त्वचा को, ऊपर के स्तर को (वि बिभेद) काट देता है । . ॑

English

Like birds who keep their watch, plashing in water, like the loud voices of the thundering rain-cloud,

अध्याय 20

श्लोक 17.3

वि॒षू॒वृदिन्द्रो॒ अमु॑तेरु॒त क्षु॒धः स इद् रा॒यो म॒घवा॒ वस्व॑ ईशते ।तस्येदि॒मे प्र॑व॒णे स॒प्त सिन्ध॑वो॒ वयो॑ वर्धन्ति वृष॒भस्य॑ शु॒ष्मिणः॑

viṣūvṛdindro amuteruta kṣudhaḥ sa id rāyo maghavā vasva īśate | tasyedime pravaṇe sapta sindhavo vayo vardhanti vṛṣabhasya śuṣmiṇaḥ

हिन्दी अर्थ

(बृहस्पतिः) .बृहती-पृथिवी के भ्रधिपति (वातः) वायु ने (वलस्य) तमोभूत-मेव को देसे हटाया है, (इव ) जसे कि (उद्वः) जलक्रीडा करता हुमा बेल, जल से ( शीपालम् ) हवाल भर्थात् सेवार को हटा देता है ।. (वातः) वायु ने (इव) जैसे (अश्रम्) मेष को ( भाचक्रं ) पेदाक्िया था, वैसे ही उसने (गाः) मेष से जलो को भी प्रकट कर दिया है 1

English

Like merry streamlets bursting from the mountain thus to Brihaspati our hymns have sounded.

अध्याय 20

श्लोक 17.4

वयो॒ न वृ॒क्षं सु॑पला॒शमास॑द॒न्त्सोमा॑स॒ इन्द्रं॑ म॒न्दिन॑श्चमू॒षदः॑ ।प्रैषा॒मनी॑कं॒ शव॑सा॒ दवि॑द्युतद् वि॒दत् स्व॑१र्मन॑वे॒ ज्योति॒रार्य॑म्

vayo na vṛkṣaṃ supalāśamāsadantsomāsa indraṃ mandinaścamūṣadaḥ | praiṣāmanīkaṃ śavasā davidyutad vidat sva1rmanave jyotirāryam

हिन्दी अर्थ

-(यदा) जब (बृहस्पतिः) वायु . (म्रगनितपोभिः) श्रग्नि के समान परितप्त (भकः) सूरय-किरणों दवारा ( पीयंतः ) मानो जल को पी जने- के निषीन्) निषिस्वरूप जल को (आविः शरङृणोत्) प्रकट कर देती है । २।११ । मन्त्र मेँ बृहस्पति पद द्वारा सेनापति का भी वणेन हुमा है, जो

English

The son of Angiras, meeting the cattle, as Bhaga, brought in Aryaman among us.

अध्याय 20

श्लोक 17.5

कृ॒तं न श्व॒घ्नी वि चि॑नोति॒ देव॑ने सं॒वर्गं॒ यन्म॒घवा॒ सूर्यं॒ जय॑त्।न तत् ते॑ अ॒न्यो अनु॑ वी॒र्यं शक॒न्न पु॑रा॒णो म॑घव॒न् नोत नूत॑नः

kṛtaṃ na śvaghnī vi cinoti devane saṃvargaṃ yanmaghavā sūryaṃ jayat| na tat te anyo anu vīryaṃ śakanna purāṇo maghavan nota nūtanaḥ

हिन्दी अर्थ

डले शुके षेरे को तोड़ देता है । . भौर धिरे राष्ट कोशत्रुसे छृडाकर किरणो के सदृश शुढ-पवित्र प्रजाजन । = - का (नाम) जल (गृहा) छिपा पड़ा था, उसे (भ्रमत) जान निया । भौर

English

As Friend of men he decks the wife and husband. As for the race, Brihaspati, nerve our coursers.

अध्याय 20

श्लोक 17.6

विशं॑विशं म॒घवा॒ पर्य॑शायत॒ जना॑नां॒ धेना॑ अव॒चाक॑श॒द् वृषा॑ ।यस्याह॑ श॒क्रः सव॑नेषु॒ रण्य॑ति॒ स ती॒व्रैः सोमैः॑ सहते पृतन्य॒तः

viśaṃviśaṃ maghavā paryaśāyata janānāṃ dhenā avacākaśad vṛṣā | yasyāha śakraḥ savaneṣu raṇyati sa tīvraiḥ somaiḥ sahate pṛtanyataḥ

हिन्दी अर्थ

वृहस्पतिः का अथं बृहती-सेना का भ्रधिपति भी है। इस भाधि- का० २०1 सुर १६ भथवंवेद-भाष्य ३५ भौतिक दृष्टि में सेनानी ने घोष करती हूर, तथा तापकं अस्वररास्त्रौ से

English

Brihaspati, having won them from the mountains, strewed down, like barley out of winnowing-baskets,

अध्याय 20

श्लोक 17.7

आपो॒ न सिन्धु॑म॒भि यत् स॒मक्ष॑र॒न्त्सोमा॑स॒ इन्द्रं॑ कु॒ल्या इ॑व ह्र॒दम्।वर्ध॑न्ति॒ विप्रा॒ महो॑ अस्य॒ साद॑ने॒ यवं॒ न वृ॒ष्टिर्दि॒व्येन॒ दानु॑ना

āpo na sindhumabhi yat samakṣarantsomāsa indraṃ kulyā iva hradam| vardhanti viprā maho asya sādane yavaṃ na vṛṣṭirdivyena dānunā

हिन्दी अर्थ

सम्पन्न इन शत्रु सेनाओं को, . जो कि अपने सदनं छिप गई थीं, उनके “नामः भर्थात् नमन को भरात्मसमपंण को अमत" = मान लिया,स्वीकार कर . शस्वरीणाम्"= स्वर करती हू, भाघोष या निनाद करती हुईं बहती नदियां । (बहस्पतिः) बृहती-पथिवी के भधिपति वायु नें (भरना पिनद्धम्)

English

The vigorous, wandering cows who aid the pious, desired of all, of blameless form, well coloured. As the Sun dews with meath the seat of Order, and casts a flam- ing meteor down from

अध्याय 20

श्लोक 17.8

वृषा॒ न क्रु॒द्धः प॑तय॒द् रजः॒स्वा यो अ॒र्यप॑त्नी॒रकृ॑णोदि॒मा अ॒पः ।स सु॑न्व॒ते म॒घवा॑ जी॒रदा॑न॒वेऽवि॑न्द॒ज्ज्योति॒र्मन॑वे ह॒विष्म॑ते

vṛṣā na kruddhaḥ patayad rajaḥsvā yo aryapatnīrakṛṇodimā apaḥ | sa sunvate maghavā jīradānave'vindajjyotirmanave haviṣmate

हिन्दी अर्थ

मेष से. बन्वे पड़ (मधु) -मधुर-जल को (प्यंपदयत्) जान लिया । ( न ) को जान लिया जाता है । वायु ने (विरवेण) विशेष गरजनावाले विद्युद्- वचर के द्वारा ( विकृत्य ) मेष को काट कर ( तत् ) उस मधुर-जल को (निर् जभार). निकाल लिया। (न) जसे किं बठृई (वृक्षात्) वृक्ष को काट कर उस से (चमसम्). खान-पान के बतंन निकाल लेता है, बना लेता है । वायु यद्यपि जडहै'तोभी वायुका वणेन एसा हृभा है मानो वह् है। वेदों म परमेदवर कोकवि कहा है। यथा--' कविर्मनीषी परिभूः स्वयंभूः" (यजुः ४०।८) । तथा वेद को काव्य कहां है, यथा देवस्य षदय

English

heaven, So from the rock Brihaspati forced the cattle, and cleft the earth’s skin as it were with water.

अध्याय 20

श्लोक 17.9

उज्जा॑यतां पर॒शुज्योति॑षा स॒ह भू॒या ऋ॒तस्य॑ सु॒दुघा॑ पुराण॒वत्।वि रो॑चतामरु॒षो भा॒नुना॒ शुचिः॒ स्व॑१र्ण शु॒क्रं शु॑शुचीत॒ सत्प॑तिः

ujjāyatāṃ paraśujyotiṣā saha bhūyā ṛtasya sudughā purāṇavat| vi rocatāmaruṣo bhānunā śuciḥ sva1rṇa śukraṃ śuśucīta satpatiḥ

हिन्दी अर्थ

इत्यादि । भाधिभौतिक वृष्टि में सेनापति ने.फंली हुई पवंतश्रेणी मेँ बन्धे कर नदीखूप में या. नहर के रूप मे उस बन्धे जल को भ्रपने राष्ट ८३. सोषाम॑विन्दुत् स ख: सो अधिं सो अर्केण वि ष॑बाधे तमसि।

English

Forth from mid-air with light he draye the darkness, as the gale blows a lily from the river. Like the wind grasping at the cloud of Vala, Brihaspati gathered to himself the cattle.

अध्याय 20

श्लोक 17.10

गोभि॑ष्टरे॒माम॑तिं दु॒रेवां॒ यवे॑न॒ क्षुधं॑ पुरुहूत॒ विश्वा॑म्।व॒यं राज॑भिः प्रथ॒मा धना॑न्य॒स्माके॑न वृ॒जने॑ना जयेम

gobhiṣṭaremāmatiṃ durevāṃ yavena kṣudhaṃ puruhūta viśvām| vayaṃ rājabhiḥ prathamā dhanānyasmākena vṛjanenā jayema

हिन्दी अर्थ

(भद्जखिरसः) प्राणायामाम्यासी उपासक, ( गोभिः ) वेदवाणियों .. से शुका लेता है, (इव) जैसे कि (भगः) भगवान् ने (अर्यमणम्) भन्ध- काररूपी-भ्ररि को नियमन करनेवाले भ्रादित्य को ( सं निनाय ) हमारी भ्नोर काया हुआ है । (जने) जन-समुदाय मे (न) जैसे (मित्रः) मित्र .

English

After thee lofty heaven hath measured out its strength to thee and to thy power this earth hath bowed itself.

अध्याय 20

श्लोक 17.11

बृह॒स्पति॑र्नः॒ परि॑ पातु प॒श्चादु॒तोत्त॑रस्मा॒दध॑रादघा॒योः ।इन्द्रः॑ पु॒रस्ता॑दु॒त म॑ध्य॒तो नः॒ सखा॒ सखि॑भ्यो॒ वरि॑वः कृणोतु

bṛhaspatirnaḥ pari pātu paścādutottarasmādadharādaghāyoḥ | indraḥ purastāduta madhyato naḥ sakhā sakhibhyo varivaḥ kṛṇotu

हिन्दी अर्थ

क्ररता है, वेसे ही प्राणायामाभ्यासी योगी, परभेदवर के गुणों को जन समू- दाय म भरसिन्यक्त करता रहता है । भौर प्राथेना करता है कि (बृहस्पते) हे महाब्रह्याण्ड के पति ! वाजय ) हमः सब को बल प्रदान कीजिये, भौर प्रगतिशील कीजिये । (इव) जंसे कि बृहती सेना का पति (भराजौ) युद्ध में परमेद्वर ने (निर् ऊपे) पृथिवी पर उपजाऊ रूप मे भेजा है । (इव) जसे कि ( स्थिविभ्यः ) कषत्र-स्थलो से काट कर किसान ( यवम.) जौ आदि

English

Thou, who hast thunder for thy weapon, with thy bolt hast shattered into pieces this broad massive cloud.

अध्याय 20

श्लोक 17.12

बृह॑स्पते यु॒वमिन्द्र॑श्च॒ वस्वो॑ दि॒व्यस्ये॑शाथे उ॒त पार्थि॑वस्य ।ध॒त्तं र॒यिं स्तु॑व॒ते की॒रये॑ चिद् यू॒यं पा॑त स्व॒स्तिभिः॒ सदा॑ नः

bṛhaspate yuvamindraśca vasvo divyasyeśāthe uta pārthivasya | dhattaṃ rayiṃ stuvate kīraye cid yūyaṃ pāta svastibhiḥ sadā naḥ

हिन्दी अर्थ

दषिराः-= इषु इच्छायाम् । गाः गमनशील जल ( उणा० कोशा, पादं २, का० २०। सु०.१६ भ्रथर्वेवेद-माष्य ३३ हृए ( 4 बृहस्पति ने (मधुनः) मधुर (ऋतस्य) जल के (योनिम्) उत्पादक मेष को (शभ्रवक्षिपन्) नीचे पृथिवी पर ेसे फेंका, (इव ) जसे कि

English

Thou hast sent down obstructed floods that they may flow: thou hast, thine own for ever, all victorious might.

अध्याय 20

श्लोक 18.1

(१-६) १-३ मेधातिथिः प्रियमेधाश्च, ४-६ वसिष्ठः।इन्द्रः।गायत्री।व॒यमु॑ त्वा त॒दित॑र्था॒ इन्द्र॑ त्वा॒यन्तः॒ सखा॑यः ।कण्वा॑ उ॒क्थेभि॑र्जरन्ते

(1-6) 1-3 medhātithiḥ priyamedhāśca, 4-6 vasiṣṭhaḥ| indraḥ| gāyatrī| vayamu tvā taditarthā indra tvāyantaḥ sakhāyaḥ | kaṇvā ukthebhirjarante

हिन्दी अर्थ

३६ भ्रथवेवेद-माष्य का० २० सु° १६. (सः) उसने मेष के कारण उत्पन्न हए (तमांसि) भन्धकारों का (भ्रकंण) सूयं के. वारा (विबबाधे) वघ किया.। (बहस्पतिः) वायु ने गोवपुषः .

English

Brihaspati, when he with fiery lightnings cleft through the weapon of reviling Vala, Consumed him as tongues eat what teeth have compassed: he threw the prisons of the red

अध्याय 20

श्लोक 18.2

न घे॑म॒न्यदा प॑पन॒ वज्रि॑न्न॒पसो॒ नवि॑ष्टौ ।तवेदु॒ स्तोमं॑ चिकेत

na ghemanyadā papana vajrinnapaso naviṣṭau | tavedu stomaṃ ciketa

हिन्दी अर्थ

(मज्जानं न) जलरूपी मज्जा को (निर् जभार) निकाल. लिया । भराधिभौतिक अथं मेँ सेनापति ने राष्ट पर भरावरण घेरा वलय उलि शत्रु के भङ्खों को.काटकर उसका मज्जा निकाल दिया, जो दात्रुकि .. राक्तियों को चमका दिया । भोवपुषः = गौः(- जल, उणादिकोषः २।६८) +

English

cows open. That secret name borne by the lowing cattle within the cave

अध्याय 20

श्लोक 18.3

इ॒च्छन्ति॑ दे॒वाः सु॒न्वन्तं॒ न स्वप्ना॑य स्पृहयन्ति ।यन्ति॑ प्र॒माद॒मत॑न्द्राः

icchanti devāḥ sunvantaṃ na svapnāya spṛhayanti | yanti pramādamatandrāḥ

हिन्दी अर्थ

(दमा इव ) हेमन्त ऋतु द्वारा जैसे ( वनानि ) वनो. के (पर्णा पर्णानि ) पत्ते ( मुषिता = मुषितानि ) मानो. लूट लिये जति है, वैसे जलो को ( अकृपयत् ) लूटकर उनपर मानो कृपा की । मेष की वायुने (अनानुङकृत्यम्) घेरा डालने के क्म को न करं सकने योग्य, भौर (अपुनः).

English

Brihaspati discovered, And draye, himself, the bright kine from the mountain, like a bird’s young after the eggs’

अध्याय 20

श्लोक 18.4

व॒यमि॑न्द्र त्वा॒यवो॒ऽभि प्र णो॑नुमो वृषन्।वि॒द्धि त्व॑१स्य नो॑ वसो

vayamindra tvāyavo'bhi pra ṇonumo vṛṣan| viddhi tva1sya no vaso

हिन्दी अर्थ

पुनः घेरा डालने के.्रयोग्य ( चकार ) कर दिया । ( यात् ) तबंसे भ्राकार मों फिर उदित होने लगते है। (= चन्द्रमसू) । आधिभौतिक मे सेनापति जब घेरा डालनेवालि शत्रुओं की

English

disclosure. He looked around on rock-imprisoned sweetness as one who eyes a fish in scanty water.

अध्याय 20

श्लोक 18.5

मा नो॑ नि॒दे च॒ वक्त॑वे॒ऽर्यो र॑न्धी॒ररा॑व्णे ।त्वे अपि॒ क्रतु॒र्मम॑

mā no nide ca vaktave'ryo randhīrarāvṇe | tve api kraturmama

हिन्दी अर्थ

भूमियां जीत लेता हँ, तब वहु उन्हँ कठोर दण्डः न देकर -उन परकृपा मन्त मेँ वर्षाकाल की समाप्ति का वणन हषा है । का०२०। सू० १६ . अथववैवेद-माष्य ३७

English

Brihaspati, cleaving through with varied clamour, brought it forth like a bowl from out the timber.

अध्याय 20

श्लोक 18.6

त्वं वर्मा॑सि स॒प्रथः॑ पुरोयो॒धश्च॑ वृत्रहन्।त्वया॒ प्रति॑ ब्रुवे यु॒जा

tvaṃ varmāsi saprathaḥ puroyodhaśca vṛtrahan| tvayā prati bruve yujā

हिन्दी अर्थ

(न) जसे (यावम्) स्याम वर्ण॑वाले (अरवम् ) भरव को (पितरः) उसके पालक स्वामी, (कृदानेभिः) भरग्नि-खदृदा चमकीली मणिर्यो के हारों . द्वारा ( अर्षिदान् ) सुशोभित करते है, वैसे ( पितरः ). पालक-ऋतुभों ने द्युलोक .को (भपिदन ) सुशोभित कर दिया है । पालक-ऋतुभ्रों ने (राध्याम्)

English

He found the light of heaven, and fire, and Morning: with lucid rays he forced apart the darkness.

अध्याय 20

श्लोक 19.1

१-७ विश्वामित्रः।इन्द्रः।गायत्री।वार्त्र॑हत्याय॒ शव॑से पृतना॒षाह्या॑य च ।इन्द्र॒ त्वा व॑र्तयामसि

1-7 viśvāmitraḥ| indraḥ| gāyatrī| vārtrahatyāya śavase pṛtanāṣāhyāya ca | indra tvā vartayāmasi

हिन्दी अर्थ

म (ज्योतिः) ज्योति को स्थापित किंया है, जबकि ( बृहस्पतिः ) वायुने करान = कृशानु ( भग्न) । मन्त्र में पालक-ऋतुभों के. नुसार, लिया, तब भ्राकाच स्वच्छ हौ गया । ओौर दिन में सूर्यँ चभकने लगा, भौर

English

As from a joint, Brihaspati took the marrow of Vala as he gloried in his cattle. As trees for foliage robbed by winter, Vala mourned for the cows Brihaspati had taken.

अध्याय 20

श्लोक 19.2

अ॒र्वा॒चीनं॒ सु ते॒ मन॑ उ॒त चक्षुः॑ शतक्रतो ।इन्द्र॑ कृ॒ण्वन्तु॑ वा॒घतः॑

arvācīnaṃ su te mana uta cakṣuḥ śatakrato | indra kṛṇvantu vāghataḥ

हिन्दी अर्थ

१०. ओर ११ में वर्षा्छतु की समाप्ति पर द्यो का वर्णेन हुभा है पितरः ऋतवः (रात ० त्रा ०. २।६।१।३२) में सायण । तथा 'पितुमते' की हैम उपासको ने (इदं नमः) यह नमस्कार ( प्रन्ियाय ) मेघो के (अकम) किया है । ( यः ) जो परमे्वर कि (पूर्वीः) पूव॑कालों से चली

English

He did a deed ne’er done, ne’er to be equalled, whereby the sun and moon ascend alternate. Like a dark steed adorned with pearl, the Fathers have decorat- ed heaven with constellations.

अध्याय 20

श्लोक 19.3

नामा॑नि ते शतक्रतो॒ विश्वा॑भिर्गी॒र्भिरी॑महे ।इन्द्रा॑भिमाति॒षाह्ये॑

nāmāni te śatakrato viśvābhirgīrbhirīmahe | indrābhimātiṣāhye

हिन्दी अर्थ

( नोनवीति ) बार-बार स्तवन करता है, उपदेश करता है । ( सः ) वह (बृहस्पतिः हि) ब्रहस्पति ही (गोभिः) गौभों दवारा, ( सः भरद्व॑ः ) वह ही अवो द्वारा, (सः वीरेभिः) वह ही वीर सन्तानो द्वारा, ( सः नभिः ) बह ही नेतारो दारा (नः) हमें (यः) जीवन, दीर्घायु तथा अन्न (धात्) प्रदान करता है । वयः श्न्नम् (निघ० २।७)1 + वर्णन भा है । भरौर मध्य के मरो में -बृहस्पति' पद द्वारा सेनापति तथा . वायुकाभी वर्णन हमा है । . ४. ५ जो कि ( स्वविदः ) सुख प्राप्त कराती, ( सध्रीचीः ).जो कि परमेदवर के साथ विचरतीं, (उशतीः) ओौर परमेदवर की ही कामना करती है। मेरी

English

They set the light in day, in night the darkness, Brihaspati cleft the rock and found the cattle. 272

अध्याय 20

श्लोक 19.4

पु॒रु॒ष्टु॒तस्य॒ धाम॑भिः श॒तेन॑ महयामसि ।इन्द्र॑स्य चर्षणी॒धृतः॑

puruṣṭutasya dhāmabhiḥ śatena mahayāmasi | indrasya carṣaṇīdhṛtaḥ

हिन्दी अर्थ

मतियां (परिष्वजन्ते ) परमेदवर का भ्रालिङ्गन करती हैँ 1 (यथा) जेसेकि .. वैसे ही मेरी मतियां(मचवानभ) एेच्वयंद्याली परमेश्वर का आलिङ्गन करती है, (ऊतये) ताकि मेरी रक्षा हो सके । (पुरुहूत). है बार-बार पुकारे गये परमेदवर ! (मे) मेरा (मनः)

English

This homage have we offered to the Cloud-God who thunders out to many in succession. May this Brihaspati vouchsafe us fulness of life with kine and horses, men, and heroes.

अध्याय 20

श्लोक 19.5

इन्द्रं॑ वृ॒त्राय॒ हन्त॑वे पुरुहू॒तमुप॑ ब्रुवे ।भरे॑षु॒ वाज॑सातये

indraṃ vṛtrāya hantave puruhūtamupa bruve | bhareṣu vājasātaye

हिन्दी अर्थ

दर्ंनीय परमे्वर ! भ्राप (राजा इव) राजा के समान (बहिषि भधि) मेरे हृदयासन पर (निषदः) नितरां विराजिये । भरौर (अस्मिन्) इस मेरे (सोमे) भक्तिरस में (ते) भ्राप का (अवपानम् ) रस-पान (अस्तु) हो । क्षुधा का, (वि ५१४० भिन्न-भिन्न प्रकार से निवारण करता है। (सः) का०२० । सु० १७ भ्रथर्ववेद-माष्य - ३९

English

I. In perfect unison all yearning hymns of mine that find the light of heaven have sung forth Indra’s praise.

अध्याय 20

श्लोक 19.6

वाजे॑षु सास॒हिर्भ॑व॒ त्वामी॑महे शतक्रतो ।इन्द्र॑ वृ॒त्राय॒ हन्त॑वे

vājeṣu sāsahirbhava tvāmīmahe śatakrato | indra vṛtrāya hantave

हिन्दी अर्थ

की वर्षा करनेवाले, भरौर (शुष्मिणः) बलशाली (तस्य इत्) उस ही परमे- सप्त सिन्धवः सात प्रकार की जलमय नदियां पृथिवी पर सुदेवो श्रसि वरुण यस्य ते सप्तसिन्धवः।

English

As wives embrace their lord, the comely bridegroom, so they compass Maghavan about that he may help.

अध्याय 20

श्लोक 19.7

द्यु॒म्नेषु॑ पृत॒नाज्ये॑ पृ॒त्सु॒तूर्षु॒ श्रवः॑सु च ।इन्द्र॒ साक्ष्वा॒भिमा॑तिषु

dyumneṣu pṛtanājye pṛtsutūrṣu śravaḥsu ca | indra sākṣvābhimātiṣu

हिन्दी अर्थ

भनु भरन्ति काकुदं पुम्यं सुषिरामिव । ऋ० ६।६।१२ ॥ कोकूयतेर्वा स्याच्छन्दकमंणः' ( निर० ५।४।२७) । (आसदन्). भा. बेठते हैः वसे ( मन्दिनः ) हर्षदायक् ( चमुषदः ) भूलोक

English

Directed unto thee my spirit never strays, for I have set my hopes on thee, O much-invoked! Sit, wonderful! as King upon the sacred grass, and let thy drinking-place be by the Soma

अध्याय 20

श्लोक 20.1

(१-७) १-४ विश्वामित्रः, ५-७ गृत्समदः।इन्द्रः।गायत्री।शु॒ष्मिन्त॑मं न ऊ॒तये॑ द्यु॒म्निनं॑ पाहि॒ जागृ॑विम्।इन्द्र॒ सोमं॑ शतक्रतो

(1-7) 1-4 viśvāmitraḥ, 5-7 gṛtsamadaḥ| indraḥ| gāyatrī| śuṣmintamaṃ na ūtaye dyumninaṃ pāhi jāgṛvim| indra somaṃ śatakrato

हिन्दी अर्थ

्रद्योतित हो रही है, चमक रही है 1 भ्रौर इस प्राणदायिनी शक्ति ने (मनवे) भर्थात् संसार के सब पदार्थं जिस परमेषवर के : उत्तम-शासन की उपासना मेँ लगे हृए है । उपासना पद द्वारा समग्र विदव.में भक्तिरस की सत्ता का ४० भरथर्वेवेद-माष्य का० २० । सु° १७

English

juice. From indigence and hunger Indra turns away: Maghavan hath dominion over precious

अध्याय 20

श्लोक 20.2

इ॒न्द्रि॒याणि॑ शतक्रतो॒ या ते॒ जने॑षु प॒ञ्चसु॑ ।इन्द्र॒ तानि॑ त॒ आ वृ॑णे

indriyāṇi śatakrato yā te janeṣu pañcasu | indra tāni ta ā vṛṇe

हिन्दी अर्थ

की उपासना कर रै हैँ "उपासनाः पद द्वारा इन गतिमान् पदार्थो गें भवतिस की सत्ता काः कथन किया ह । चमू =चछावापूथिष्यौ ( निर्० (वि चिनोति) विनिर्वय करता हें, या विदेष चयन करता है, सीं प्रकार को साघनरूप मे विनिरिचतं करता है, है परमेदवर ! (तत्) उस ( ते )

English

wealth. These the Seven Rivers flowing on their downward path increase the vital vigour of the

अध्याय 20

श्लोक 20.3

अग॑न्निन्द्र॒ श्रवो॑ बृ॒हद् द्यु॒म्नं द॑धिष्व दु॒ष्टर॑म्।उत् ते॒ शुष्मं॑ तिरामसि

agannindra śravo bṛhad dyumnaṃ dadhiṣva duṣṭaram| ut te śuṣmaṃ tirāmasi

हिन्दी अर्थ

(न्यः न शकत्) अन्य को नहीं कर सकता (मघवन्) है एेदवयंशाली . परमेश्वरं ! (न पुराणः) न कोई पुराना व्यक्ति, भौर (न उत नूतनः) न नाम्) प्रजाजनों की (धेनाः) बोलियों भौर बातचीत को (भवचाककत्) जान रहा होता है । (शक्रः) रक्तिराली परमेदवर, (यस्य अह) जिस किसी उपासंक के (. सवनेषु ) भक्तिरसो मे ( रण्यति ) रमणं करता है, उन भक्तिरसो दवारा (पृतन्यतः) कामादि की सेना को (सहते) पराभूत कर देतां है । .

English

Mighty Steer. As on the fair-leafed tree rest birds, to Indra flow the gladden- ing Soma juices that the bowls

अध्याय 20

श्लोक 20.4

अ॒र्वा॒वतो॑ न॒ आ ग॒ह्यथो॑ शक्र परा॒वतः॑ ।उ॒ लो॒को यस्ते॑ अद्रिव॒ इन्द्रे॒ह तत॒ आ ग॑हि

arvāvato na ā gahyatho śakra parāvataḥ | u loko yaste adriva indreha tata ā gahi

हिन्दी अर्थ

काऽ २०।सु० १८ प्रथववेद-माष्य ४१ (यत्) जब (समक्षरन् ) मिलकर बहते ह, तथा (कुल्याः) नालियां (इव) जसे (हदम्) तालाब की ओर बहती है, वसे ही (सोमासः) सब भक्तिरस (इन्द्रम्) परमेरवर कीं भोर बहते हँ । (सादने) हृदय-सदन मेँ परमेश्वर के स्थित हो जने पर (विप्राः) मेधावी उपासक (भरस्य) इस परमेष्वर की (महः) महिमा को (वर्ष॑न्ति) बढाते ह । (न) जैसे किं (दिव्येन दानुना) .

English

contain. Their face that glows with splendour through their mighty power hath found the shine of

अध्याय 20

श्लोक 20.5

इन्द्रो॑ अ॒ङ्गं म॒हद् भ॒यम॒भी षदप॑ चुच्यवत्।स हि स्थि॒रो विच॑र्षणिः

indro aṅgaṃ mahad bhayamabhī ṣadapa cucyavat| sa hi sthiro vicarṣaṇiḥ

हिन्दी अर्थ

९४. शषा करद प॑तयत् रजः खा यो अयप॑त्नीरङ्णोदिमा अपः । ही भव (रजः) इन प्राणो के रजोगुणों को (पतयत्) गिरा दिया है, हटा . दिया है। (न) जैसे कि (क्रुः) क्रुद्ध हा (वृषा) बैल ( रजः ) मिद्टी . ..

English

heaven for man, the Aryas’ light. As in the game a gambler piles his winnings, so Maghavan, sweeping all together, gained the

अध्याय 20

श्लोक 20.6

इन्द्र॑श्च मृ॒लया॑ति नो॒ न नः॑ प॒श्चाद॒घं न॑शत्।भ॒द्रं भ॑वाति नः पु॒रः

indraśca mṛlayāti no na naḥ paścādaghaṃ naśat| bhadraṃ bhavāti naḥ puraḥ

हिन्दी अर्थ

को हविरूप मे लिये हुए, (जीरदानवे ) भौर रीघ्रता से इस हवि को समपित केर देनेवाले ( मनवे ): मननरील उपासक के लिये सः मघवा ) वह् हे उपासकृ ! (ज्योतिषा सह) परमेदवरीय ज्योतिं के साथ-साथ (सुदघा) सुगमता से दोहनेवाला ( भूयाः ) हो जा । ताकि ( भानुना )

English

Sun. This mighty deed of thine none other could achieve, none,

अध्याय 20

श्लोक 20.7

इन्द्र॒ आशा॑भ्य॒स्परि॒ सर्वा॑भ्यो॒ अभ॑यं करत्।जेता॒ शत्रू॑न् विच॑र्षणिः

indra āśābhyaspari sarvābhyo abhayaṃ karat|jetā śatrūn vicarṣaṇiḥ

हिन्दी अर्थ

. के सुमान (शुचिः) पवित्र तथा! शुक्र शुदुचीत ज्योतिर्मयं रूप मे चमका दे । (गोभिः) वेदवाणियों द्वारा हम (दुरेवाभ् ) दुष्परिणामी (भमतिम्) कुमति को ( तरेम ) दर कररे। तथा गौग्नों के सात्विक दूष द्वारा मति की हीनता को दर करे । भ्रौर (यवेन) जौ आदि सात्विक भन्न दारा विदवां (राजभिः) योगिराजों की सहायता दारा, तथा (भस्माकेन वृजनेन निज'

English

Maghavan, before thee, none in recent time. Maghavan came by turns to all the tribes of men: the Steer took notice of the people’s songs

अध्याय 20

श्लोक 21.1

१-११ सव्यः।इन्द्रः।जगती, १०-११ त्रिष्टुप्।न्यू॒३षु वाचं॒ प्र म॒हे भ॑रामहे॒ गिर॒ इन्द्रा॑य॒ सद॑ने वि॒वस्व॑तः ।नू चि॒द्धि रत्नं॑ सस॒तामि॒वावि॑द॒न्न दु॑ष्टु॒तिर्द्र॑विणो॒देषु॑ शस्यते

1-11 savyaḥ| indraḥ| jagatī, 10-11 triṣṭup| nyū3ṣu vācaṃ pra mahe bharāmahe gira indrāya sadane vivasvataḥ | nū ciddhi ratnaṃ sasatāmivāvidanna duṣṭutirdraviṇodeṣu śasyate

हिन्दी अर्थ

(बृहस्पतिः) बृहती-वेदवाणी का भ्राचार्यं, तथा (इनदरः) परमेदवरं पर आक्रमण करनेवाले भौर (अघायोः) हमारी इत्या चाहनेवाले पापों से इनमे .से प्रत्येक (सखा) हमारा सखा वनकर (नः सखिम्यः) हम सखा

English

of praise. The man in whose libations Sakra hath delight by means of potent Somas vanquisheth his

अध्याय 20

श्लोक 21.2

दु॒रो अश्व॑स्य दु॒र इ॑न्द्र॒ गोर॑सि दु॒रो यव॑स्य॒ वसु॑न इ॒नस्पतिः॑ ।शि॒क्षा॒न॒रः प्र॒दिवो॒ अका॑मकर्शनः॒ सखा॒ सखि॑भ्य॒स्तमि॒दं गृ॑णीमसि

duro aśvasya dura indra gorasi duro yavasya vasuna inaspatiḥ | śikṣānaraḥ pradivo akāmakarśanaḥ sakhā sakhibhyastamidaṃ gṛṇīmasi

हिन्दी अर्थ

1, भ्रधर्ववेद-माष्य कौ० २०। सु° १८ (यन्ति) सदा प्राप्त होते है । . (इन्द्र) है परमेदवर ! (वयम ) हम उपासक (त्वायवः) केवल

English

He rushes through the region like a furious bull, he who hath made these floods the dames of worthy lords.

अध्याय 20

श्लोक 21.3

शची॑व इन्द्र पुरुकृद् द्युमत्तम॒ तवेदि॒दम॒भित॑श्चेकिते॒ वसु॑ ।अतः॑ सं॒गृभ्या॑भिभूत॒ आ भ॑र॒ मा त्वा॑य॒तो ज॑रि॒तुः काम॑मूनयीः

śacīva indra purukṛd dyumattama tavedidamabhitaścekite vasu | ataḥ saṃgṛbhyābhibhūta ā bhara mā tvāyato jarituḥ kāmamūnayīḥ

हिन्दी अर्थ

सरव॑त्र वसंनेवाले ! (अस्य) इस मेरी, भौर (नः) हम सब की स्तुतियो.को (भ्रयः) है परमेदवर ! आप सर्वाधीश हैँ । (निदे) भ्रापकी निन्दा करनेवाले, (च) भौर (वक्तवे) बकवासी, तथा ( भरराव्प़रे ) भ्रदानी के

English

This Maghavan hath found light for the man who brings oblation, sheds the juice, and promptly pours his gifts.

अध्याय 20

श्लोक 21.4

ए॒भिर्द्युभिः॑ सु॒मना॑ ए॒भिरिन्दु॑भिर्निरुन्धा॒नो अम॑तिं॒ गोभि॑र॒श्विना॑ ।इन्द्रे॑ण॒ दस्युं॑ द॒रय॑न्त॒ इन्दु॑भिर्यु॒तद्वे॑षसः॒ समि॒षा र॑भेमहि

ebhirdyubhiḥ sumanā ebhirindubhirnirundhāno amatiṃ gobhiraśvinā | indreṇa dasyuṃ darayanta indubhiryutadveṣasaḥ samiṣā rabhemahi

हिन्दी अर्थ

(रन्धीः मा नः) वश मेँ हमे न कीजिये । (मम) मुभ उपासक के (क्रतुः) ( त्वम. ) हैँ परमेषवर ! अप ( वर्म भ्रसि ) हमारी कवच है, हनन करनेवाले ! (च) भौर ( पुरोयोधः ) हमारे सामने उपस्थित पापों

English

Let the keen axe come forth together with the light: here be, as erst, the teeming cow of sacrifice.

अध्याय 20

श्लोक 21.5

समि॑न्द्र रा॒या समि॒षा र॑भेमहि॒ सं वाजे॑भिः पुरुश्च॒न्द्रैर॒भिद्यु॑भिः ।सं दे॒व्या प्रम॑त्या वी॒रशु॑ष्मया॒ गोअ॑ग्र॒याश्वा॑वत्या रभेमहि

samindra rāyā samiṣā rabhemahi saṃ vājebhiḥ puruścandrairabhidyubhiḥ | saṃ devyā pramatyā vīraśuṣmayā goagrayāśvāvatyā rabhemahi

हिन्दी अर्थ

(प्रतिब्रुवे) पापों को फटकार देता हूं । का० २० भु° १९६ . अथर्ववेद-माष्य ४५ १०५. बर्रहत्याय छसे एतनाषाद्माय च ।

English

Let the Red God shine pure with his refulgent ray, and let the Lord of heroes glow like heaven’s clear sheen.

अध्याय 20

श्लोक 21.6

ते त्वा॒ मदा॑ अमद॒न् तानि॒ वृष्ण्या॒ ते सोमा॑सो वृत्र॒हत्ये॑षु सत्पते ।यत् का॒रवे॒ दश॑ वृ॒त्राण्य॑प्र॒ति ब॒र्हिष्म॑ते॒ नि स॒हस्रा॑णि ब॒र्हयः॑

te tvā madā amadan tāni vṛṣṇyā te somāso vṛtrahatyeṣu satpate | yat kārave daśa vṛtrāṇyaprati barhiṣmate ni sahasrāṇi barhayaḥ

हिन्दी अर्थ

(वार््रहत्याय) पाप-वृत्रों के हनन के लिये, ( शवसे ) दस निमित्त (वतंयामसि ) भ्रपनी भोर वृत्त करते है । भन को (उत) भौर (चक्षुः) आप की कृपादृष्टि को (अर्वाचीनम्) हमारी

English

O much-invoked, may we subdue all famine and evil want with store of grain and cattle. May we allied, as first in rank, with princes, obtain possessions by our own exertion.

अध्याय 20

श्लोक 21.7

यु॒धा युध॒मुप॒ घेदे॑षि धृष्णु॒या पु॒रा पुरं॒ समि॒दं हं॒स्योज॑सा ।नम्या॒ यदि॑न्द्र॒ सख्या॑ परा॒वति॑ निब॒र्हयो॒ नमु॑चिं॒ नाम॑ मा॒यिन॑म्

yudhā yudhamupa ghedeṣi dhṛṣṇuyā purā puraṃ samidaṃ haṃsyojasā | namyā yadindra sakhyā parāvati nibarhayo namuciṃ nāma māyinam

हिन्दी अर्थ

. की कुपादष्टि हुम नव-उपासकों की ओर भी हो सके। (शतक्रतो) है विरवकमन् थाः सैकड़ों भदूमृत क्मावाले ! (विदवाभिः) सब (गीर्भिः) वैदिक-स्तुतिवाणियों द्वारा ( ते ) भ्रापके ही ( नामानि)

English

Brihaspati protect us from the rearward, and from above, and from below, from sinners. May Indra from the front, and from the centre, as friend to friends, vouchsafe us room and

अध्याय 20

श्लोक 21.8

त्वं कर॑ञ्जमु॒त प॒र्णयं॑ वधी॒स्तेजि॑ष्ठयातिथि॒ग्वस्य॑ वर्त॒नी।त्वं श॒ता वङ्गृ॑दस्याभिन॒त् पुरो॑ऽनानु॒दः परि॑षूता ऋ॒जिश्व॑ना

tvaṃ karañjamuta parṇayaṃ vadhīstejiṣṭhayātithigvasya vartanī| tvaṃ śatā vaṅgṛdasyābhinat puro'nānudaḥ pariṣūtā ṛjiśvanā

हिन्दी अर्थ

नाना नामों का (ईमहे) हंय"कीत्तंन करते हँ । (इन्द्र) है परमेश्वर ! ताकि हम (भभिंमातिषाह्ये) स्वाभिमानं को पराभव कर सकं । गुण-कमं निरतिशशयी है । उपासक उन नामों कां स्तवन करता हृश्ा, प्रत्येक करता है । इस प्रकार उसका स्वामिमान टूट जाता है । “शतक्रतो दरार

English

freedom. Ye twain are Lords of wealth in earth and heaven, thou, O

अध्याय 20

श्लोक 21.9

त्वमे॒तां ज॑न॒राज्ञो॒ द्विर्दशा॑ब॒न्धुना॑ सु॒श्रव॑सोपज॒ग्मुषः॑ ।ष॒ष्टिं स॒हस्रा॑ नव॒तिं नव॑ श्रु॒तो नि च॒क्रेण॒ रथ्या॑ दु॒ष्पदा॑वृणक्

tvametāṃ janarājño dvirdaśābandhunā suśravasopajagmuṣaḥ | ṣaṣṭiṃ sahasrā navatiṃ nava śruto ni cakreṇa rathyā duṣpadāvṛṇak

हिन्दी अर्थ

४६ . भध्वेवेद-माष्य का० २० । सु० १९ यह दर्चाया है किं परमेदवर के.गुणकमं संकडं प्रकार के हैँ । इसलिये प्रत्येक गुण-कमं की वृष्टि से उसके नाम भी सेकडों ्ह। ऋगेदमे कहा हैकि

English

Brihaspati, and thou, O Indra. Mean though he be, give wealth to him who lauds you. Preserve us evermore, ye Gods, with

अध्याय 20

श्लोक 21.10

त्वमा॑विथ सु॒श्रव॑सं॒ तवो॒तिभि॒स्तव॒ त्राम॑भिरिन्द्र॒ तूर्व॑याणम्।त्वम॑स्मै॒ कुत्स॑मतिथि॒ग्वमा॒युं म॒हे राज्ञे॒ यूने॑ अरन्धनायः

tvamāvitha suśravasaṃ tavotibhistava trāmabhirindra tūrvayāṇam| tvamasmai kutsamatithigvamāyuṃ mahe rājñe yūne arandhanāyaḥ

हिन्दी अर्थ

घतत रयिं सतुवते कीर चिव् युयं प॑त खत्तिभि; सदा नः ॥ १९॥ , अहस्पते) है बृहती-वेदवाणी के श्राचायं ! (च इन्रः) गौर परमेश्वर। शक्तियो ! तुम सब मिलकर .(नः) हम उपासको की ( सदा पात ).सदा रक्षा करते रहो, (स्वस्तिभिः) कल्याणमयी विधियो हारा ।

English

foes. As waters flow together to the river, thus Somas to Indra flow, as rivulets to the lake.

अध्याय 20

श्लोक 21.11

य उ॒दृची॑न्द्र दे॒वगो॑पाः॒ सखा॑यस्ते शि॒वत॑मा॒ असा॑म ।त्वां स्तो॑षाम॒ त्वया॑ सु॒वीरा॒ द्राघी॑य॒ आयुः॑ प्रत॒रं दधा॑नाः

ya udṛcīndra devagopāḥ sakhāyaste śivatamā asāma | tvāṃ stoṣāma tvayā suvīrā drāghīya āyuḥ prataraṃ dadhānāḥ

हिन्दी अर्थ

कीरिः-=स्तोता (निव ० ३।१६); कीर्तन करनेवाला । (इन्द्र) है परभेदवर ! ( कण्वाः ) समाधि में निमीलितनेत्र योगी ही चाहते है, ओौर (सखायः) भ्रपनी स्नुतियों के दारा भ्रापके मित्र बनना .

English

In place of sacrifice sages exalt his might, as the rain swells the corn by moisture sent from heaven.

अध्याय 20

श्लोक 22.1

(१-६) १-३ त्रिशोकः, ४-६ प्रियमेधः।इन्द्रः।गायत्री।अ॒भि त्वा॑ वृषभा सु॒ते सु॒तं सृ॑जामि पी॒तये॑ ।तृ॒म्पा व्यऽश्नुही॒ मद॑म्

(1-6) 1-3 triśokaḥ, 4-6 priyamedhaḥ| indraḥ| gāyatrī| abhi tvā vṛṣabhā sute sutaṃ sṛjāmi pītaye | tṛmpā vya'śnuhī madam

हिन्दी अर्थ

एक ही है, परन्तु मेधावी. ऋषि उसके नाम नाना कहते हैँ । १०८. पुरुष्टुतस्य धामभिः शतेन महयामसि । भ्रजा का धारण-पोषण करनेवाले, (इन्द्रस्य ) परमेदवर कं (शतेन) सैकड़ों ( धामभिः ) नामों दवारा ( महयामसि ). उस की महिमा का हम स्तवन करते है। घांमभिः-नासभिः। यथा “धामानि ज्रयाणि भवन्ति स्थानानि

English

blessings. This, even this, O Indra, we implore: as thy devoted friends,

अध्याय 20

श्लोक 22.2

मा त्वा॑ मू॒रा अ॑वि॒ष्यवो॒ मोप॒हस्वा॑न॒ आ द॑भन्।माकीं॑ ब्रह्म॒द्विषो॑ वनः

mā tvā mūrā aviṣyavo mopahasvāna ā dabhan| mākīṃ brahmadviṣo vanaḥ

हिन्दी अर्थ

( भरेषु ) देवासुर-संभ्रामों मे ( वाजसातये ) बल-प्राप्ति के लिये (वृत्राय हन्तवे) तथा पाप-वृत्रों है हनन कं लिये (पुरूतम् ) नाना नामों देवासुर-संग्रामो मे भासुरभावों भरौर आसुरकर्मों का भाप (सासहिः भव) पू्णंतया पराभव कीजिये । (वृत्राय हन्तवे) भ्रासुरी पापों के हनन केलिये . (त्वाम्) आप से (ईमहे) याचना करते हैँ । ईमहे याच्थ्नाकर्मा (निघं० ३।१९)।

English

The Kanvas praise thee with their hymns. Naught else, O Thunderer, have I praised in the skilled singer’s eulogy:

अध्याय 20

श्लोक 22.3

इ॒ह त्वा॒ गोप॑रीणसा म॒हे म॑न्दन्तु॒ राध॑से ।सरो॑ गौ॒रो यथा॑ पिब

iha tvā goparīṇasā mahe mandantu rādhase | saro gauro yathā piba

हिन्दी अर्थ

( इन ) है परमेश्वर । ( दयुम्नेषु ) योगज विभुतिरूपी धनो की का० २०. सू०२० भरर्वैवेद-माष्य ४७ हृए जा रहै है, एेसे देवासुर संग्राम के निमित्त, (पृत्सुतृषुं ) देवासुर-संम्रामों मे असुरो की हिसा के. निमित्त, (च श्ववःसु) भौर देवासुर-संग्रामों मे विजय यशो की प्राप्ति के निमित्त, तथा ( भरभिमातिषु ) भरभिमान को भावनाभों कं जागरित हो जाने पर (साक्ष्व ) भाप हमे सहायकरूप में प्राप्त हुजिये 1 पतनाश्ये पृतना मनुष्यनाम (निच०.२।३) +भाज्य. (= घी) ..

English

On thy laud only have I thought. The Gods seek him who presses out the Soma; they desire not sleep:

अध्याय 20

श्लोक 22.4

अ॒भि प्र गोप॑तिं गि॒रेन्द्र॑मर्च॒ यथा॑ वि॒दे।सू॒नुं स॒त्यस्य॒ सत्प॑तिम्

abhi pra gopatiṃ girendramarca yathā vide| sūnuṃ satyasya satpatim

हिन्दी अर्थ

नाम (निषं० २।१७) +-तृषु (तुवि हिसायाम्) ।. साक््व = सक्षतिः गतिकर्मा जागरूक (सोमम्) हमारे भक्तिरस की (पाहि) प्राप रक्षा कीजिये । (न ऊतये ) ताकि हमारी रक्षा हो सके । (शतक्रतो इन्दर ) है सैकड़ों भदत कमोँवाले परमेद्वरं ! (पञ्चसु)

English

Incessantly they punish sloth. Faithful to thee we loudly sing, heroic Indra, songs to thee.

अध्याय 20

श्लोक 22.5

आ हर॑यः ससृज्रि॒रेऽरु॑षी॒रधि॑ ब॒र्हिषि॑ ।यत्रा॒भि सं॒नवा॑महे

ā harayaḥ sasṛjrire'ruṣīradhi barhiṣi | yatrābhi saṃnavāmahe

हिन्दी अर्थ

प्रदान की हर्द, (तानि) वे बनी रह । (ते) भ्रपसे यह वर(भ्रा वृणे) ररह । यह वर्म भ्रापसे मांगेता हूं । य भ्रथववेद-माष्य का० २०।सु० २०

English

Mark, gracious Lord, this act of ours. Give us not up to man’s reproach, to foeman’s hateful calumny:

अध्याय 20

श्लोक 22.6

इन्द्रा॑य॒ गाव॑ आ॒शिरं॑ दुदु॒ह्रे व॒ज्रिणे॒ मधु॑ ।यत् सी॑मुपह्व॒रे वि॒दत्

indrāya gāva āśiraṃ duduhre vajriṇe madhu | yat sīmupahvare vidat

हिन्दी अर्थ

(इन्द्र) ह परमेदवर !. भराय की कृपा से ( बृहद् श्रवः ) महायदः जो कि उन के लिये दुलंङ्घ्य हो । ( उत ) तदनन्तर ( ते.) प्रापके दिय (दयुष्मम्) बल को (तिरामसि) हम भ्रौर भ्रधिक बढ़ाते हैँ ।

English

In thee alone is all my strength. Thou art mine ample coat of mail, my champion, Vritra-slayes, thou.

अध्याय 20

श्लोक 23.1

१-९ विश्वामित्रः।इन्द्रः।गायत्री।आ तू न॑ इन्द्र म॒द्र्यऽग्घुवा॒नः सोम॑पीतये ।हरि॑भ्यां याह्यद्रिवः

1-9 viśvāmitraḥ| indraḥ| gāyatrī| ā tū na indra madrya'gghuvānaḥ somapītaye | haribhyāṃ yāhyadrivaḥ

हिन्दी अर्थ

उ कोको यत्तं अद्रिव इन्द्रेह तत॒ आ ग॑हि ॥४॥ वह भ्रज्ञातरूप (लोकः) तुरीयावस्था का लोकं है, (ततः) वहां से इह - इस मेरे हृदय में (आ गहि) भ्रा विराजिये। .

English

With thee for Friend I brave the foe. O Indra, for the strength that slays the foe and conquers in the fight

अध्याय 20

श्लोक 23.2

स॒त्तो होता॑ न ऋ॒त्विय॑स्तिस्ति॒रे ब॒र्हिरा॑नु॒षक्।अयु॑ज्रन् प्रा॒तरद्र॑यः

satto hotā na ṛtviyastistire barhirānuṣak| ayujran prātaradrayaḥ

हिन्दी अर्थ

पराविद्यावाले किसी भी उपासक को प्राप्त हो सकता है । परमेदवर की यदि वह निष्पापः है, तो परमेशवर-प्राप्ति का भ्रधिकारी है। परभेदवर सर्व॑व्यापक है, - प्रतः किसी भाधिदेविकया हैरिक दृष्टि क किसी लोकसे

English

We turn thee hitherward to us. O Indra, Lord of Hundred Powers, may those who praise thee hitherward.

अध्याय 20

श्लोक 23.3

इ॒मा ब्रह्म॑ ब्रह्मवाहः क्रि॒यन्त॒ आ ब॒र्हिः सी॑द ।वी॒हि शू॑र पुरो॒लाश॑म्

imā brahma brahmavāhaḥ kriyanta ā barhiḥ sīda | vīhi śūra purolāśam

हिन्दी अर्थ

रहते भी परमेश्वर की तुरीयावस्था कायम रहती है । जसे जीवात्मा की का०.२० । सु°० २१ भथववेद-भाष्य ४९ (इन्द्रः) परमेश्वर (नः) हमे जब (मृलयाति). .सुखी कर देता है,

English

Direct thy spirit and thine eye. O Indra, Lord of Hundred Powers, with all our songs we invocate.

अध्याय 20

श्लोक 23.4

रा॒र॒न्धि सव॑नेषु ण ए॒षु स्तोमे॑षु वृत्रहन्।उ॒क्थेष्वि॑न्द्र गिर्वणः

rārandhi savaneṣu ṇa eṣu stomeṣu vṛtrahan| uktheṣvindra girvaṇaḥ

हिन्दी अर्थ

सामने वह परमेदवर (मद्रं मवति) सदा सुखदायी भौर कल्याणकारी रूप सब शत्रु पर (जेता) विजय पाए हृए है। -विचषेणिः ) वह् विविघ उत्तम-विधि से (भ्र भरामहे) भेट करते हँ । (चु चित् हि) निद्चवयसेही

English

Thy names for triumph over foes. We strive for glory through the powers immense of him whom many praise,

अध्याय 20

श्लोक 23.5

म॒तयः॑ सोम॒पामु॒रुं रि॒हन्ति॒ शव॑स॒स्पति॑म्।इन्द्रं॑ व॒त्सं न मा॒तरः॑

matayaḥ somapāmuruṃ rihanti śavasaspatim| indraṃ vatsaṃ na mātaraḥ

हिन्दी अर्थ

सम्पत्तियों को (भविदत् ) हर लेता है । (इव) जसे कि वह. ( ससताम् ) . . शिञानरः परदिवो अकामक्ेनः सखा सदिभ्यतमिदं गूणीमसि ॥२॥ (दुरः) दार (असि) है, साधन ह! भाप (गोः) गौगों या इन्द्रियो की

English

Of Indra who supports mankind. For the foe’s slaughter I address Indra whom many invocate,

अध्याय 20

श्लोक 23.6

स म॑न्दस्वा॒ ह्यन्ध॑सो॒ राध॑से त॒न्वा म॒हे।न स्तो॒तारं॑ नि॒दे क॑रः

sa mandasvā hyandhaso rādhase tanvā mahe| na stotāraṃ nide karaḥ

हिन्दी अर्थ

सब के स्वामी तथा पालक हैँ । है परमेदवर ! भ्राप ( शिक्षानरः ) वैदिक शिक्षान्नो के नेता है ( प्रदिवः ) भाप पुराण पुरुषैः ( अकोमकर्टनः ) कामना के वशवर्ती नहीं है ! भ्राप (सखिभ्यः) उपासक सखाभ्रो के लिये (सखा) सखा हँ । (तम्) उस भ्रापके प्रति इदम् ) इस सब कुछ को . गृणीमसि) हम भ्चंनारूपम भेट करते है । प्रदिवः पुराण नामं ( निध० ३ २७ ).। गृणाति भर्चतिकर्मा

English

To win us booty in the wars. In battles be victorious. We seek thee, Lord of Hundred Powers,

अध्याय 20

श्लोक 23.7

व॒यमि॑न्द्र त्वा॒यवो॑ ह॒विष्म॑न्तो जरामहे ।उ॒त त्वम॑स्म॒युर्व॑सो

vayamindra tvāyavo haviṣmanto jarāmahe | uta tvamasmayurvaso

हिन्दी अर्थ

१९१. शीव सद्र रद् मदग तवेदिदमसितयकति षं । अवः संगम्याभिपूत॒ आ भ॑र॒ मा त्वायतो जरितुः; काम॑मूनवौः॥ ३॥ , विभूतियां जो (चेकिते) दृष्टिगोचर हो रही है, वे ( तवे ) . भ्रापकी है। (भ्रभिभूते) है सर्वत्र सत्तावाले ! ( भरतः ) इन विभरूतियों में से कतिपय विभरुतिर्थो. का ( संगुभ्य ) संग्रह करके ( भराभर ) मू प्रदान कीजिये । (त्वायतः) भापको चाहनेवाले (जरितुः) भाप के स्तोता की (कामम्) कामना को (मा ऊनयीः) न्युन न कीजिये, असफल न कीजिये । ।

English

O Indra, that the foe may fall. In splendid combats of the hosts, in glories where the fight is won,

अध्याय 20

श्लोक 23.8

मारे अ॒स्मद् वि मु॑मुचो॒ हरि॑प्रिया॒र्वाङ् या॑हि ।इन्द्र॑ स्वधावो॒ मत्स्वे॒ह

māre asmad vi mumuco haripriyārvāṅ yāhi | indra svadhāvo matsveha

हिन्दी अर्थ

का०२०। सु०२१. भथर्वंवेद-माष्य । ५१ श्ण दस्यु दरयन्त शन्दुभियतहैषसः खभिषा मेमदि ॥४।। हे उपासक ! (एभिः) इन (दयुभिः) ज्ञान से द्योतमान ( गोभिः ) वेदवाणियों द्वारा तु (सुमनाः) भपने मन को स्वच्छ कर । भ्रौर (एभिः) इन ( इन्दुभिः ) सरस ( गोभिः ) वेदवाणियो द्वारा तु (भमतिम् ) अंपने भज्ञान को (निरन्धानः) निरढ.कर, हटा । हम सब उपासक (भदिवना)

English

Indra, be victor over foes. Drink thou the Soma for our help, bright, vigilant, exceeding strong,

अध्याय 20

श्लोक 23.9

अ॒र्वाञ्चं॑ त्वा सु॒खे रथे॒ वह॑तामिन्द्र के॒शिना॑ ।घृ॒तस्नू॑ ब॒र्हिरा॒सदे॑

arvāñcaṃ tvā sukhe rathe vahatāmindra keśinā | ghṛtasnū barhirāsade

हिन्दी अर्थ

को ( दरयन्त; ) . विदीणं करते हुए, ( युतद्रेषसः ) तथा द्वेष भावनार्भो ते पथक् रहते हए; (सम्) सब भिलकर (इषा ) परमेश्व रीयेच्छा के भनुकूल (रमेमहि) सत्कायों मे प्रयत करते रहे । "कालो भ्रद्वो बहति सप्तरदिमिः'.( भयव ° १९।५३।१) में काल को प्रव. कहा है । भवा मन्व के पूर्वां का प्रथं निम्न भकार कादहै। यथा-

English

O Indra, Lord of Hundred Powers. O Satakratu, powers which thou mid the Five Races hast dis- played

अध्याय 20

श्लोक 24.1

१-९ विश्वामित्रः।इन्द्रः।गायत्री।उप॑ नः सु॒तमा ग॑हि॒ सोम॑मिन्द्र॒ गवा॑शिरम्।हरि॑भ्यां॒ यस्ते॑ अस्म॒युः

1-9 viśvāmitraḥ| indraḥ| gāyatrī| upa naḥ sutamā gahi somamindra gavāśiram| haribhyāṃ yaste asmayuḥ

हिन्दी अर्थ

(इन्र) है परमेदवर ! ( राया ) योगजं-विभूति को भ्राप्त करके (सम् रभेमहि) हम दइकटूठे होकर सत्क मे प्रवृत्त हों ।. ( इषा ) भरापवी सन्मति.से प्रेरित होकर ( सम् ) हम मिलकर ( रभेमहि ) सत्कमोँ को

English

These, Indra, do I claim of thee. Indra, great glory hast thou gained. Win splendid fame which none may mar:

अध्याय 20

श्लोक 24.2

तमि॑न्द्र॒ मद॒मा ग॑हि बर्हि॒ष्ठां ग्राव॑भिः सु॒तम्।क॒विन्न्वऽस्य तृ॒प्णवः॑

tamindra madamā gahi barhiṣṭhāṃ grāvabhiḥ sutam| kavinnva'sya tṛpṇavaḥ

हिन्दी अर्थ

५२ ४ , , - (नतत्रदवाष्य कार भे । ४ समथववेद-भाष्य का० २०) सू० २१ (सत्पते) है सच्चे पत्ति ! (ते) उन हमारी भक्तिकी ( मदाः) ,. क्योंकि पापों की जड़ काटने में लगे हए (कारवे) स्तुतिकर्ता उपासक कै,

English

We make thy might perpetual. Come to us either from anear, or, Sakra, come from far away.

अध्याय 20

श्लोक 24.3

इन्द्रमि॒त्था गिरो॒ ममाच्छा॑गुरिषि॒ता इ॒तः ।आ॒वृते॒ सोम॑पीतये

indramitthā giro mamācchāguriṣitā itaḥ | āvṛte somapītaye

हिन्दी अर्थ

विरोध के, भर्थात् आसानी से (यत्) जो भापने (नि बहंयः) काट दिया है 1 बुषण्या वृष्ण्यानि वषकर्माणि (निरु० १०।१।१०)। कारवे. १२५. युषायुघमुप् बेहैषि ष्णुया पुरा पुरं समिदं हंखोजंसा । (धृष्णुया) हटीले कामादि के साय (युघम्) युद्ध करना, आप (उप एषि) स्वीकार कर लेते है ।(च इत्) गव्य ही स्वीकार कर लेते हैँ । शौर (पुरा)

English

Indra, wherever be thy home, come to us thence, O Thunder- armed. Verily Indra, conquering all, driveth even mighty fear away;

अध्याय 20

श्लोक 24.4

इन्द्रं॒ सोम॑स्य पी॒तये॒ स्तोमै॑रि॒ह ह॑वामहे ।उ॒क्थेभिः॑ कु॒विदा॒गम॑त्

indraṃ somasya pītaye stomairiha havāmahe | ukthebhiḥ kuvidāgamat

हिन्दी अर्थ

अनादिकाल से (इदं पुरम्) कामादि की इस पुरी को (भ्रोजसा) निज भोज म्राप (नेम्या) रात्रिकाल में (सख्या) निज सखिमाव कं कारणः (परावति) पुरम् = कामादि की पुरी है रजोगुण भ्रौर तमोगुण, जो कि चित्त पर राज्य कर रहे होते है । नम्याः रात्रि के १२ बजे के उपरान्त, भदिव-

English

For firm is he and swift to act. Indra be gracious unto us: sin shall not reach us afterward .

अध्याय 20

श्लोक 24.5

इन्द्र॒ सोमाः॑ सु॒ता इ॒मे तान् द॑धिष्व शतक्रतो ।ज॒ठरे॑ वाजिनीवसो

indra somāḥ sutā ime tān dadhiṣva śatakrato | jaṭhare vājinīvaso

हिन्दी अर्थ

कालं म उपासना के परिपक्व हो जाने पर परमेदवर सखा बन् कर उपासक का उपकार करता है । नस्या = रात्रि (निष १।७)। का० २०। सू०.२१ भरथवंवेद-भाष्य द.

English

And good shall be before us still, From all the regions of the world let Indra send security.

अध्याय 20

श्लोक 24.6

वि॒द्मा हि त्वा॑ धनंज॒यं वाजे॑षु दधृ॒षं क॑वे ।अधा॑ ते सु॒म्नमी॑महे

vidmā hi tvā dhanaṃjayaṃ vājeṣu dadhṛṣaṃ kave | adhā te sumnamīmahe

हिन्दी अर्थ

१२६. . त्वं करंञ्जगृत पणेयं वधीसिचषठयातिथिग्वर्यं बतुनी । (अतिथिग्वस्य) जिनके भ्रागमन की कोद. नियत तिथि नही, एसे योगी राजो -की सेवा के लिये उनके प्रति गमन करनेवाले. उपासक की दवारा, ह परमेरवर । आपने उसके (करञ्जम्) वंषयिक-सुखो में मनोरञ्जेन का, तथा (पर्णयम्) पतते के सदुदा चञ्चलं चेष्टा का (वधीः) वध कर दिया है, विनाश कर दिया है । ( ऋजिदवना ). ऋजु अर्थात् सत्यमाग पर

English

The foe-subduer, swift to act. We will present fair praise unto the Mighty One, our hymns to

अध्याय 20

श्लोक 24.7

इ॒ममि॑न्द्र॒ गवा॑शिरं॒ यवा॑शिरं च नः पिब ।आ॒गत्या॒ वृष॑भिः सु॒तम्

imamindra gavāśiraṃ yavāśiraṃ ca naḥ piba | āgatyā vṛṣabhiḥ sutam

हिन्दी अर्थ

कुटिल गतियो = वक्र गतियो के प्रदाता कामादि के (कला पुरः) सेकड़ों गढ़ को (त्वम्) है परमेदवर ! भापने (अभिनत्) तोड़-फोड़् दिया है ! . करञ्जम् कं = वेषयिक सुखभोग-+-रञ्जन पणयम् पणं , ( भवन्धुना .) सांसारिक तथा बन्घु-बान्धवों के बन्धन से रदित,

English

Indra in Vivasvān’s dwelling-place; For he hath ne’er found wealth in those who seem to sleep; those who give wealth to men

अध्याय 20

श्लोक 24.8

तुभ्येदि॑न्द्र॒ स्व ओ॒क्ये॒३ सोमं॑ चोदामि पी॒तये॑ ।ए॒ष रा॑रन्तु ते हृ॒दि

tubhyedindra sva okye3 somaṃ codāmi pītaye | eṣa rārantu te hṛdi

हिन्दी अर्थ

सहस्रा) -सोए पड़े हजारो संस्कारो को, म्नौर ( नवति नव ) एक वषं मातूु- म संचित हए (एतान्) -इन संस्कारों को, ( त्वम् ) हैं परमे्वर । भापने करानेवाले (रथ्या चक्रंण) रथ के चक्र द्वारां वतु कुचल दी जाती है । भरभिप्राय यह है कि इन्दं कुचल करः जीवात्मा को मुक्त कर

English

accept no paltry praise. 274

अध्याय 20

श्लोक 24.9

त्वां सु॒तस्य॑ पी॒तये॑ प्र॒त्नमि॑न्द्र हवामहे ।कु॒शि॒कासो॑ अव॒स्यवः॑

tvāṃ sutasya pītaye pratnamindra havāmahe | kuśikāso avasyavaḥ

हिन्दी अर्थ

रथ को योगमार्गं पर शीघ्र चलानेवाले उपासक की (आविथ) 4 रक्ला- राजा, (गुने ) सदा युवा (भस्म) इस जीवात्मा कं लिये ( त्वम् ) भापने तथां (अतिथिग्वम्) अतिथिरूप में प्राप्त होनेवाले सदुगुर कं सेवक को (अरन्धनायः) उसके वरीभ्रूत करदियाहै। .

English

Giver of horses, Indra, giver, thou, of kine, giver of barley, thou art Lord and guard of wealth: Man’s helper from of old, not disappointing hope, Friend of our friends, to thee as such we

अध्याय 20

श्लोक 25.1

(१-७) १-५ गोतमः, ७ अष्टकः।इन्द्रः।जगती, ७ त्रिष्टुप्।अश्वा॑वति प्रथ॒मो गोषु॑ गच्छति सुप्रा॒वीरि॑न्द्र॒ मर्त्य॒स्तवो॒तिभिः॑ ।तमित् पृ॑णक्षि॒ वसु॑ना॒ भवी॑यसा॒ सिन्धु॒मापो॒ यथा॒भितो॒ विचे॑तसः

(1-7) 1-5 gotamaḥ, 7 aṣṭakaḥ| indraḥ| jagatī, 7 triṣṭup| aśvāvati prathamo goṣu gacchati suprāvīrindra martyastavotibhiḥ | tamit pṛṇakṣi vasunā bhavīyasā sindhumāpo yathābhito vicetasaḥ

हिन्दी अर्थ

९); भ्रतिथि गाङ् गतौ +-उ भ्रागु-=मनुष्य (निघ०.२।२)1 १२९. य उुख्चीनद् देवगोपाः सखौयलते शिवतमा अर्साम । जो हम (ते) भ्राप के ( सखायः ) सखा उपासक, ( देवगोपाः ) भाप देव

English

sing this praise. Indra, most splendid, powerful, rich in mighty deeds, this treasure spread around is known to

अध्याय 20

श्लोक 25.2

आपो॒ न दे॒वीरुप॑ यन्ति हो॒त्रिय॑म॒वः प॑श्यन्ति॒ वित॑तं॒ यथा॒ रजः॑ ।प्रा॒चैर्दे॒वासः॒ प्र ण॑यन्ति देव॒युं ब्र॑ह्म॒प्रियं॑ जोषयन्ते व॒रा इ॑व

āpo na devīrupa yanti hotriyamavaḥ paśyanti vitataṃ yathā rajaḥ | prācairdevāsaḥ pra ṇayanti devayuṃ brahmapriyaṃ joṣayante varā iva

हिन्दी अर्थ

प्रापकी कृपा से (सुवीराः) उपासना मागं मेँ उत्तम वीर बन कर (प्रतरं राधीयः प्रायः) बहुत लम्बी भ्रायु (दधानाः ) धारण करे ॥ - बुप्रम ) है आनन्द रसवर्षी ! ( भरा युते) भक्तिरस फे पु्णतयां , का०२०। सुर २ अथवेवेद-माष्य ५५ तय्यार हो जाने पर, सँ उपासक (सुतम्) तय्यार किये भक्तिरस को (पीतये)

English

be thine own. Gather therefrom. O Conqueror, and bring to us: fail not the hope of him who loves and sings

अध्याय 20

श्लोक 25.3

अधि॒ द्वयो॑रदधा उ॒क्थ्यं॑१ वचो॑ य॒तस्रु॑चा मिथु॒ना या स॑प॒र्यतः॑ ।असं॑यत्तो व्र॒ते ते॑ क्षेति॒ पुष्य॑ति भ॒द्रा श॒क्तिर्यज॑मानाय सुन्व॒ते

adhi dvayoradadhā ukthyaṃ1 vaco yatasrucā mithunā yā saparyataḥ | asaṃyatto vrate te kṣeti puṣyati bhadrā śaktiryajamānāya sunvate

हिन्दी अर्थ

. . है उपासक ! (अविष्यवः) चापलूख लो" (श्वा) तुभे, तेरे उपासना मागे से ( मा जा दमन्). च्युत न करे । (मा) भौर न (उपहंस्वानः). तेरे उपासनामाग का उपहास करनेवाले (मूद्यः) मूखं लोग तु तेरे उपासना १३२. इह त्वा गोपरीणसा मेहे मदन्तु रासे । . 1 ¶,रगत भ्रथ।त् चरे हए गुरुजन, (त्वा) तुके (महे राधसे) महाधन

English

to thee. Well-pleased with these bright flames and with these Soma drops, take thou away our

अध्याय 20

श्लोक 25.4

आदङ्गि॑राः प्रथ॒मं द॑धिरे॒ वय॑ इ॒द्धाग्न॑यः॒ शम्या॒ ये सु॑कृ॒त्यया॑ ।सर्वं॑ प॒णेः सम॑विन्दन्त॒ भोज॑न॒मश्वा॑वन्तं॒ गोम॑न्त॒मा प॒शुं नरः॑

ādaṅgirāḥ prathamaṃ dadhire vaya iddhāgnayaḥ śamyā ye sukṛtyayā | sarvaṃ paṇeḥ samavindanta bhojanamaśvāvantaṃ gomantamā paśuṃ naraḥ

हिन्दी अर्थ

का पान कर. श जैसे कि ( ५ ) तुषित मृग (सरः) तालाब के जल का पान करता है मदन्तु =मद् गतौ । परीणस-=परि+नस्( गतौ ) ˆ है उपासकं ! (यथा विदे) यथार्थं ज्ञान की प्राप्ति के लिये (गिरा) भ्रचना किया कर । जो परमेदवर किं ( गोपतिम् ) वेदवाणि्यो का पति है,

English

poverty with steeds and kine. With Indra scattering the Dasyu through these drops, freed from their hate may we obtain

अध्याय 20

श्लोक 25.5

य॒ज्ञैरथ॑र्वा प्रथ॒मः प॒थस्त॑ते॒ ततः॒ सूर्यो॑ व्रत॒पा वे॒न आज॑नि ।आ गा आ॑जदु॒शना॑ का॒व्यः सचा॑ य॒मस्य॑ जा॒तम॒मृतं॑ यजामहे

yajñairatharvā prathamaḥ pathastate tataḥ sūryo vratapā vena ājani | ā gā ājaduśanā kāvyaḥ sacā yamasya jātamamṛtaṃ yajāmahe

हिन्दी अर्थ

वाणिर्यो वारा सत्यज्ञान का भ्रेरक है । ४५६ . , भरथवंवेद-माष्य का० २०।सू० २३ है परमेश्वर ! (बद्िषि भधि) हृदयाकार मे भापकी ( भ्ररुषीः )

English

abundant food. Let us obtain, O Indra, plenteous wealth and food, with strength exceeding glorious, shining

अध्याय 20

श्लोक 25.6

ब॒र्हिर्वा॒ यत् स्व॑प॒त्याय॑ वृ॒ज्यते॒ऽर्को वा॒ श्लोक॑मा॒घोष॑ते दि॒वि।ग्रावा॒ यत्र॒ वद॑ति का॒रुरु॒क्थ्य॑१स्तस्येदिन्द्रो॑ अभिपि॒त्वेषु॑ रण्यति

barhirvā yat svapatyāya vṛjyate'rko vā ślokamāghoṣate divi| grāvā yatra vadati kārurukthya1stasyedindro abhipitveṣu raṇyati

हिन्दी अर्थ

(नवामहे) हम आपकी -सतुतियां करते ह । स्तुतियां करनेवाले उपासको ने .(मघु) मधुर, (भ्राशिरम्) तथा परिपक्व ,. भक्तिरसरूपी-दुग्ध को (दहे) दोहन किया है । (यत्) जिस भक्तिरस को

English

to the sky. May we obtain the Goddess Providence, the strength of heroes, special source of cattle, rich

अध्याय 20

श्लोक 25.7

प्रोग्रां पी॒तिं वृष्ण॑ इयर्मि स॒त्यां प्र॒यै सु॒तस्य॑ हर्यश्व॒ तुभ्य॑म्।इन्द्र॒ धेना॑भिरि॒ह मा॑दयस्व धी॒भिर्विश्वा॑भिः॒ शच्या॑ गृणा॒नः

progrāṃ pītiṃ vṛṣṇa iyarmi satyāṃ prayai sutasya haryaśva tubhyam| indra dhenābhiriha mādayasva dhībhirviśvābhiḥ śacyā gṛṇānaḥ

हिन्दी अर्थ

है । (सीम्) श्रौर जो भक्तिरस उपासको के जीवन में फल गयां है 1: उपासक की भोर भ्राद्ये, -( सोमपीतये ) मेरे मक्तिक्तरस के पान के ४ । याहि) प्रवृत्त हृजिये । द्विः भ्रः (निरद० काशा )1 १३७; घो. होता न ऋत्विय त्तिसिरे बहिरानुषक् ।

English

in steeds. These our libations, strength inspiring Soma draughts, gladdened thee in the fight with Vritra,

अध्याय 20

श्लोक 26.1

योगे॑योगे त॒वस्त॑रं॒ वाजे॑वाजे हवामहे ।सखा॑य॒ इन्द्र॑मू॒तये॑

yogeyoge tavastaraṃ vājevāje havāmahe | sakhāya indramūtaye

हिन्दी अर्थ

का० २० सु० २३ अथ्ववेद-माष्य ५ नेः (भ्रातः) प्रातःकाल की उपासना मे (भयुखन्) योगविधि द्वारा भापको भरपने साथ योगयुक्त कर लिया है । रौर उन्होने ( बर्हिः ) हृदयासनों को -. -मुके मी यह उपासनाकाल प्राप्त हृभ्रा है, भौर मै. ( सत्तः ) उपासना में स्थित होकर ( होता न ) होता-ऋत्विकं के सदुश आपका आह्वान कर भ्रापकं समक्न है, इसे भ्राप (वीहि) स्वीकार कोजिये ।

English

Hero-Lord, What time thou slewest for the singer with trimmed grass ten thousand Vritras, thou resistless

अध्याय 20

श्लोक 26.2

आ घा॑ गम॒द् यदि॒ श्रव॑त् सह॒स्रिणी॑भिरू॒तिभिः॑ ।वाजे॑भि॒रुप॑ नो॒ हव॑म्

ā ghā gamad yadi śravat sahasriṇībhirūtibhiḥ | vājebhirupa no havam

हिन्दी अर्थ

या भाप प्रसन्न हजिये, या हमे योग-साधना मे सिद्ध कोजिये । ( मातरः ) माताए' ( सोमपाम् वत्सं न ) जसे दुग्धपायी बच्चे के साथ (रिहन्ति) स्नेह करती है. वसे (मतयः) भननरील उपासक (उरम्) भर्थात् दोही गई गौमों सेसोमक्षरितहृभाहं।

English

in thy might. Thou goest on from fight to fight intrepidly, destroying castle after castle here with strength;

अध्याय 20

श्लोक 26.3

अनु॑ प्र॒त्नस्यौक॑सो हु॒वे तु॑विप्र॒तिं नर॑म्।यं ते॒ पूर्वं॑ पि॒ता हु॒वे

anu pratnasyaukaso huve tuvipratiṃ naram| yaṃ te pūrvaṃ pitā huve

हिन्दी अर्थ

१४१. स मन्द॑खा बन्स राध॑से तन्वा रद। न स्तोतारं निदे करः ॥६॥ हे परमेदवर ! (सः) वे भाप (अन्धसः)-मक्तिरसरूपी भन्न रस को .. (इन्दर) है परमेदवर ! (वयम्) हम उपासक (त्वायवः) आपको चाहते है, इसलिये (हविष्मन्तः) भक्तिरस की हवियां लिये हम (जरामहे)

English

Thou Indra, with thy friend who makes the foe bow down, slewest from far away the guileful Namuchi.

अध्याय 20

श्लोक 26.4

यु॒ञ्जन्ति॑ ब्र॒ध्नम॑रु॒षं चर॑न्तं॒ परि॑ त॒स्थुषः॑ ।रोच॑न्ते रोच॒ना दि॒वि

yuñjanti bradhnamaruṣaṃ carantaṃ pari tasthuṣaḥ | rocante rocanā divi

हिन्दी अर्थ

न हमे (वि मूमुचः). छोड़ दीजिये । (हरिगप्रिय) हि भनोहारी भक्तिरस के (घृतस्नू) तथा. जल के सदृश्च प्रवाहरूप में बहते हुए हमारे भक्तिरसो को को० २८। सुर २४ . प्रथववेद-माष्य ५६

English

Thou hast stuck down in death Karanja, Parnaya, in Atithigva’s very glorious going forth: Unyielding, when Rijisvan compassed them with siege, thou hast destroyed the hundred

अध्याय 20

श्लोक 26.5

यु॒ञ्जन्त्य॑स्य॒ काम्या॒ हरी॒ विप॑क्षसा॒ रथे॑ ।शोणा॑ धृ॒ष्णू नृ॒वाह॑सा

yuñjantyasya kāmyā harī vipakṣasā rathe | śoṇā dhṛṣṇū nṛvāhasā

हिन्दी अर्थ

.-भोर ( वहताम्) प्रेरित करं । ताकि भ्राप ( बहिः ) हमारे. हृदयासनों पर . के (उप) समीप (रा गहि) भ्राद्ये । (यः) जो भक्तिरस कि ते केवल भ्रापके भरषनुौ लं । गवाशिरस्तू्गौः वाक् (निव ०१।११) बु पके धुं

English

towns of Vangrida. With all-outstripping chariot wheel, O Indra, thou far-famed, hast overthrown the twice ten

अध्याय 20

श्लोक 26.6

के॒तुं कृ॒ण्वन्न॑के॒तवे॒ पेशो॑ मर्या अपे॒शसे॑ ।समु॒षद्भि॑रजायथाः

ketuṃ kṛṇvannaketave peśo maryā apeśase | samuṣadbhirajāyathāḥ

हिन्दी अर्थ

भ्रा गहि-=गम् घ्रातु का भयं “गति"।. भौर. गति के तीन भरथं पद द्वारा "रक्त का वणन हरां ह । यथा,- किसने इस पुरुष में शरीरव्यापी (रापः) जल स्थापित क्ये,

English

kings of men, With sixty thousand nine-and-ninety followers, who came in arms to fight with friendless

अध्याय 20

श्लोक 27.1

यदि॑न्द्रा॒हं यथा॒ त्वमीशी॑य॒ वस्व॒ एक॒ इत्।स्तो॒ता मे॒ गोष॑खा स्यात्

yadindrāhaṃ yathā tvamīśīya vasva eka it| stotā me goṣakhā syāt

हिन्दी अर्थ

कि विविध रूपोवाले, राशि मेँ प्रभूत है भौर हदंय-सिन्धु भे सरण करते है, ६० भथवेवेद-माष्य का०२० । सु० २४ जो स्वाद मेँ नमकीनः; तथा रंग मे धूसर लाल । तथा ताम्बे के धूए जसे नीले । जो पुरुष में ऊपर-नीचे तथा आर-पार की नाडयो में प्रवाहित हो

English

Susravas. Thou hast protected Susravas with succour, and Tūrvayāna with thine aid, O Indra:

अध्याय 20

श्लोक 27.2

शिक्षे॑यमस्मै॒ दित्से॑यं॒ शची॑पते मनी॒षिणे॑ ।यद॒हं गोप॑तिः॒ स्याम्

śikṣeyamasmai ditseyaṃ śacīpate manīṣiṇe | yadahaṃ gopatiḥ syām

हिन्दी अर्थ

रहे है । भ्रावभिं ग्रावाणः गृणातेर्वा (निर० ९।१।६)। भ्रयवा बहिषि = . । (इत्था) वस्तुतः (इतः) इस मेरे हृदय से इषिताः ) निकली हई, भक्तिरस के पान के लिये (भ्रावृते) परमेदवर का मेरी भोर भ्रावतंन करर

English

Thou madest Kutsa, Atithigva, Ayu subject unto this king, the young, the mighty. May we protected by the Gods hereafter remain thy very pro- sperous friends, O Indra.

अध्याय 20

श्लोक 27.3

धे॒नुष्ट॑ इन्द्र सू॒नृता॒ यज॑मानाय सुन्व॒ते।गामश्वं॑ पि॒प्युषी॑ दुहे

dhenuṣṭa indra sūnṛtā yajamānāya sunvate| gāmaśvaṃ pipyuṣī duhe

हिन्दी अर्थ

भूकाव कर । इत्था सत्यम् (निघ ० ३।१०)। (सोमस्य) भक्तिरस के (पीतये) स्वीकार करने के लिये (स्तोमैः) सामगानों द्वारा, तथा (उक्थेभिः) वं दिक सूक्तं की स्तुतियों दारा (इह) इस ।

English

Thee we extol, enjoying through thy favour life-long and joyful and with store of heroes. Hero, the Soma being pressed I pour the juice for thee to drink

अध्याय 20

श्लोक 27.4

न ते॑ व॒र्तास्ति॒ राध॑स॒ इन्द्र॑ दे॒वो न मर्त्यः॑ ।यद् दित्स॑सि स्तु॒तो म॒घम्

na te vartāsti rādhasa indra devo na martyaḥ |yad ditsasi stuto magham

हिन्दी अर्थ

हदय मे (इन्द्र हवामहे) हम परमेदवर का ्राह्वुन करते र्हं । इस विधि से परमेवर (कुविद्) बार-बार (भ्रागमत्) -हमे द्ंन देता है । (इन्द्र) है परमेरवर ! (इमे) ये ( सोमाः ) भक्तिरस ( सुताः ) (दधिष्व ) आप अपने मेँ वारण कीजिये, जे कि बुंमु्षितं व्यक्ति अन्न को (जठरे) अपने पेट मं धारण करता है ।

English

Sate thee and finish thy carouse. Let not the fools, or those who mock, beguile thee when they seek thine aid:

अध्याय 20

श्लोक 27.5

य॒ज्ञ इन्द्र॑मवर्धय॒द् यद् भूमिं॒ व्यव॑र्तयत्।च॒क्रा॒ण ओ॑प॒शं दि॒वि

yajña indramavardhayad yad bhūmiṃ vyavartayat| cakrāṇa opaśaṃ divi

हिन्दी अर्थ

(कवे)हे वेदकारो के कवि ! (हि विसमा तवा) हः्ञापको निद्बय- : का० २० । सूु०.२४ . भ्रथर्ववेद-माष्य ६१. पर विजय पाई हुई ह. ओरं (वाजेषु ) देवासुर-संग्रामों मे (दघुषम्) भाप आसुरी भावनाभ्रों का धषंण करनेवाले हैँ (भधा ) इसलिये (सुम्नम्) राप से सुख की, तथां आपकी प्रसन्नता की (ईमहे) हम प्राथनाए करते है ।

English

Love not the enemies of prayer. Here let them with rich milky draught cheer thee to great munificence:

अध्याय 20

श्लोक 27.6

वा॒वृ॒धा॒नस्य॑ ते व॒यं विश्वा॒ धना॑नि जि॒ग्युषः॑ ।ऊ॒तिमि॒न्द्रा वृ॑णीमहे

vāvṛdhānasya te vayaṃ viśvā dhanāni jigyuṣaḥ | ūtimindrā vṛṇīmahe

हिन्दी अर्थ

१९१. . इमर्िनद्र गकारं यवां्िरं .च नः पिब । (इन्द्र) है परमेदवर 1 .( वृषभिः ) भक्तिरसो की वर्षा करनेवाले ्राकर हमारे तय्यार किये ( गवारिरम् ) पकाए हए गोदुग्ध का, तथा (यवाशिरम्) पकारई जौ की.लप्सी का पान करता ह

English

Drink as the wild bull drinks the lake. Praise, even as he is known, with song Indra, the guardian of the kine,

स्रोत: bhavykhatri/DharmicData · प्राप्त 3/6/2026

शास्त्रीय प्रामाणिकता एवं पारदर्शकताSources & Interpretation

स्रोत, संस्करण एवं व्याख्या वर्गीकरण

धर्म ग्रंथ पर मूल शास्त्र, पारंपरिक भाष्य और आधुनिक व्याख्या को पूर्णतः पृथक रखा जाता है ताकि पाठक को किसी भी व्याख्या के शास्त्र होने का भ्रम न हो।

सामग्री वर्गीकरण संकेत (Epistemic Content Labels)

6 स्तरिय प्रमाण व्यवस्था
मूल पाठOriginal text

अपौरुषेय / प्रामाणिक शास्त्र (Primary Canonical Scripture)

मूल संस्कृत, प्राकृत अथवा अवधी श्लोक/मंत्र। यह सर्वोच्च प्रमाण (प्रस्थान) है। इस पाठ में किसी भी आधुनिक व्याख्याकार का हस्तक्षेप नहीं है।

शाब्दिक अनुवादLiteral translation

पदार्थ व अन्वय (Direct Grammatical & Word-for-Word Meaning)

व्याकरणसम्मत प्रत्यक्ष शब्दार्थ (अन्वय)। बिना किसी दार्शनिक संप्रदाय के पूर्वाग्रह के, संस्कृत शब्दों का सटीक भाषांतर।

पारंपरिक भाष्यTraditional commentary

आचार्य परंपरा व टीका (Classical Lineage Commentary)

प्राचीन आचार्य परंपरा (यथा शंकराचार्य, रामानुजाचार्य, मध्वाचार्य, श्रीधर स्वामी) द्वारा विरचित शास्त्रीय भाष्य व टीकाएं।

सरल व्याख्याSimple explanation

भावार्थ व सुबोध प्रबोधन (Accessible Pedagogical Exposition)

आधुनिक जिज्ञासुओं के लिए सरल भाषा में भावार्थ। यह मूल मंत्र नहीं, बल्कि पाठ को सुगम बनाने हेतु संपादकीय व्याख्या है।

आधुनिक चिंतनModern reflection

समसामयिक विमर्श व अनुप्रयोग (Contemporary Application & Analysis)

दार्शनिक, मनोवैज्ञानिक व वैज्ञानिक समरूपताओं पर आधुनिक चिंतन। यह मूल शास्त्र का अंग नहीं है और इसे शास्त्रोक्त सिद्धांत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

शोध टिप्पणीResearch note

पांडुलिपि एवं ऐतिहासिक शोध (Critical Apparatus & Manuscript Research)

पांडुलिपि विविधताएं, पाठ-भेद (variant readings), छंद रचना, और ऐतिहासिक व तुलनात्मक भाषावैज्ञानिक शोध। यह शास्त्र का मूल संदेश बदलने हेतु नहीं, बल्कि पाठ की प्रामाणिकता परखने के लिए है।