Atharva Veda
20
अध्याय 20 / 20

Kanda 20

काण्ड 20

975 श्लोकभाग 7/13 · श्लोक 75.1–91.12

पूर्ण अध्याय पाठ79 श्लोक

अध्याय 20

श्लोक 75.1

वि त्वा॑ ततस्रे मिथु॒ना अ॑व॒स्यवो॑ व्र॒जस्य॑ सा॒ता गव्य॑स्य निः॒सृजः॒ सक्ष॑न्त इन्द्र निः॒सृजः॑ ।यद् ग॒व्यन्त॒ द्वा जना॒ स्व॑१र्यन्ता॑ स॒मूह॑सि ।आ॒विष्करि॑क्र॒द् वृषणं सचा॒भुवं॒ वज्र॑मिन्द्र सचा॒भुव॑म्

vi tvā tatasre mithunā avasyavo vrajasya sātā gavyasya niḥsṛjaḥ sakṣanta indra niḥsṛjaḥ | yad gavyanta dvā janā sva1ryantā samūhasi | āviṣkarikrad vṛṣaṇaṃ sacābhuvaṃ vajramindra sacābhuvam

हिन्दी अर्थ

सब पर सुशासन कर रहा है, (भप्रतिष्कुतः) इस सम्बन्ध मँ उसका .कहीं से भी प्रतिरोध नहीं होता । "क = वंसगः--वननीयगतिः । कृष्टीः = मनुष्याः (निष०.२।३) (यः) जो (एकः) एक (चषंणीनाम्) सब मनुष्यों का, (वसूनाम्) सब वसुं का, तथां (पञ्च ) पांच या विस्तृत (क्षितीनाम्) पृथिविरयो यां ग्रहों का (इरज्यति) अधीदवर है, . (इन्द्रः) वंह पररमेदवर है । .

English

Busied with sacrifice, with spotted deer and spears, gleaming. upon your way with ornaments, yea, our friends,

अध्याय 20

श्लोक 75.2

वि॒दुष्टे॑ अ॒स्य वी॒र्यऽस्य पू॒रवः॒ पुरो॒ यदि॑न्द्र॒ शार॑दीर॒वाति॑रः सासहा॒नो अ॒वाति॑रः ।शास॒स्तमि॑न्द्र॒ मर्त्य॒मय॑जुं शवसस्पते ।म॒हीम॑मुष्णाः पृथि॒वीमि॒मा अ॒पो म॑न्दसा॒न इ॒मा अ॒पः

viduṣṭe asya vīrya'sya pūravaḥ puro yadindra śāradīravātiraḥ sāsahāno avātiraḥ | śāsastamindra martyamayajuṃ śavasaspate | mahīmamuṣṇāḥ pṛthivīmimā apo mandasāna imā apaḥ

हिन्दी अर्थ

है,- दसिये इन दो का ग्रहण नहीं किया । (0 अस्माकमस्तु केक; ॥१६॥ वि , (बः) है उपासको ! तुम्हारे लिये, तथा (जनेभ्यः) सभी भरन्य महे) हम आह्वान करते है । वह परभेदवरः (भ्रस्माकम्) हम सब का सब का सेवनीय हो.। केवलः केवृ सेवने । . -

English

Sitting on sacred grass, ye sons of Bharata, drink Soma from the Potar’s bowl, O Men of heaven.

अध्याय 20

श्लोक 75.3

आदित् ते॑ अ॒स्य वी॒र्यऽस्य चर्किर॒न् मदे॑षु वृषन्नु॒शिजो॒ यदावि॑थ सखीय॒तो यदावि॑थ ।च॒कर्थ॑ का॒रमे॑भ्यः॒ पृत॑नासु॒ प्रव॑न्तवे ।ते अ॒न्याम॑न्यां न॒द्यं सनिष्णत श्रव॒स्यन्तः॑ सनिष्णत

ādit te asya vīrya'sya carkiran madeṣu vṛṣannuśijo yadāvitha sakhīyato yadāvitha | cakartha kāramebhyaḥ pṛtanāsu pravantave | te anyāmanyāṃ nadyaṃ saniṣṇata śravasyantaḥ saniṣṇata

हिन्दी अर्थ

(दन््र) है परमेदवर ! (अतये) हमारी स्के तिये हभ (रयिम्) का० २०। सु° ७० अथवेवेद-भ।घ्य ४ ८१ . विजय प्राप्त कराये, (सदासहम्) सदा काम, भविचा तथा राग-ढेष भ्रादि

English

Bring the Gods hither, Sage, and offer sacrifice. At the three altars seat thee willingly .O Priest.

अध्याय 20

श्लोक 76.1

वने॒ न वा॒ यो न्य॑धायि चा॒क्रं छुचि॑र्वां॒ स्तोमो॑ भुरणावजीगः ।यस्येदिन्द्रः॑ पुरु॒दिने॑षु॒ होता॑ नृ॒णां नर्यो॒ नृत॑मः क्ष॒पावा॑न्

vane na vā yo nyadhāyi cākraṃ chucirvāṃ stomo bhuraṇāvajīgaḥ | yasyedindraḥ purudineṣu hotā nṛṇāṃ naryo nṛtamaḥ kṣapāvān

हिन्दी अर्थ

.(नि अर्व॑ता) पाप-वुत्रों का नितरां हनन करनेवाले (येन ) जिस श्रापकी सहायता द्वारा, -- (वृत्रा) पाप-वृर्रों का (निरुणधामहै) हम निरोध करते है, तथा उनका (नि) नितरां हनन करते है, जैसे कि (मुष्टिहत्यया) मुट्टी हेम, (धना = धनानि) पापःवृत्रों के हनन के साधनों का (भ्रा ददीमहि) जादान करते है, भौर (वचम्) पाप-ुर््रो के लिये वच््ररूप भ्राप का आदि भ्रासुरी भावनां को (सं जयेम) हम सम्यक् जीतंलेतेर्है। .

English

Accept for thy delight the proffered Soma mead: drink from the Kindler’s bowl and sate thee with thy share.

अध्याय 20

श्लोक 76.2

प्र ते॑ अ॒स्या उ॒षसः॒ प्राप॑रस्या नृ॒तौ स्या॑म॒ नृत॑मस्य नृ॒णाम्।अनु॑ त्रि॒शोकः॑ श॒तमाव॑ह॒न्नॄन् कुत्से॑न॒ रथो॒ यो अस॑त् सस॒वान्

pra te asyā uṣasaḥ prāparasyā nṛtau syāma nṛtamasya nṛṇām| anu triśokaḥ śatamāvahannṝn kutsena ratho yo asat sasavān

हिन्दी अर्थ

(इन्दर) है परमेदवर ! (अस्तृभिः). पापों को परास्त करनेवाले, (शरेभिः) धमंशुर उपासक नेतार्गौ, रौर (त्वया) भ्राषके (युजा) सहयोग दवारा (वयम्) हम उपासक, (पृतन्यतः). कामादि की सेनार्भो को (सास- ह्याम) पूर्णतया पराभव करते है । : न्वरे “वयम्” दो बार पठित है । (इन्द्रः) परमेरवर (महान्) महान् है, (नु) निदचय से वह (परः) परमेश्वर की (स्तु) है । उसका (शवः) बल विस्तार कौ दृष्टि से (चौ; न) दुलोक के सदृश फलां हुभा है । - ह

English

This is the strengthener of thy body’s manly might: strength,. victory for all time are laid within thine arms.

अध्याय 20

श्लोक 76.3

कस्ते॒ मद॑ इन्द्र॒ रन्त्यो॑ भू॒द् दुरो॒ गिरो॑ अ॒भ्यु॑१ग्रो वि धा॑व ।कद् वाहो॑ अ॒र्वागुप॑ मा मनी॒षा आ त्वा॑ शक्यामुप॒मं राधो॒ अन्नैः॑

kaste mada indra rantyo bhūd duro giro abhyu1gro vi dhāva | kad vāho arvāgupa mā manīṣā ā tvā śakyāmupamaṃ rādho annaiḥ

हिन्दी अर्थ

(तोकस्य). सृन्तान की (सनितौ) प्राप्ति हो जाने पर, (नरः) साधारण नरनारिपं, (समोहे) मोहमय गृहस्थ मे (भारत) पड़ , रहते है । परन्तु (ये) जो (विप्राः) मेघावी नर-नारियां है, वे . (धियायवः) रज्ञा जते रहते है धियायवः == धिया--अय् (गतौ) । वा = समुच्चयाथः। का० २० सु० ७१. अथरववेद-माष्य १८३ रवर की वेदवाणी है, जो कि (हि) निर्चय से (सूनृता).प्रिय भौर सत्य

English

Pressed for thee, Maghavan, it is offered unto thee: drink from the chalice of this Brāhman, 290

अध्याय 20

श्लोक 76.4

कदु॑ द्यु॒म्नमि॑न्द्र॒ त्वाव॑तो॒ नॄन् कया॑ धि॒या क॑रसे॒ कन्न॒ आग॑न्।मि॒त्रो न स॒त्य उ॑रुगाय भृ॒त्या अन्ने॑ समस्य॒ यदस॑न् मनी॒षाः

kadu dyumnamindra tvāvato nṝn kayā dhiyā karase kanna āgan| mitro na satya urugāya bhṛtyā anne samasya yadasan manīṣāḥ

हिन्दी अर्थ

. रूपा है, (विरप्डी) जो विवि पदाथ का व्यक्त वर्णन करती है, (गोमती) ज्ञानमयी किरणों से सम्पन्न, गौर (मही) महावाणी है। वह वेदवाणी ( दाशुषे) ब्रह्मदान करनेवाले के लिये (पक्वा शाखा न) पके-फलोवाली विस्तृत मन्त्र ४६४ (ते) आप की (विभतयः). विभूतियां ई, .जोकि

English

drink thy fill. Him whom of old I called on, him I call on now. He is to be invoked: his name is He who

अध्याय 20

श्लोक 76.5

प्रेर॑य॒ सूरो॒ अर्थं॒ न पा॒रं ये अ॑स्य॒ कामं॑ जनि॒धा इ॑व॒ ग्मन्।गिर॑श्च॒ ये ते॑ तुविजात पू॒र्वीर्नर॑ इन्द्र प्रति॒शिक्ष॒न्त्यन्नैः॑

preraya sūro arthaṃ na pāraṃ ye asya kāmaṃ janidhā iva gman| giraśca ye te tuvijāta pūrvīrnara indra pratiśikṣantyannaiḥ

हिन्दी अर्थ

(मावते). भेरे जैसे उपासक के लिये (ऊतये) रक्षारूप है, भौर (दाशुषे) - इन विभूतियो के दानं करनेवाले के लिये ये विभूतियां (सद्यः चित्) शीघध. ही . पुनः उपस्थित हो जातीर्है। न (सोमपातमः) भभिषुत.जल का श्रत्यधिक पान करता है, जौर जी (समुद्र इव ) समुद्र के सदृश सदा प्रीणित, -रहता है, वे गाप (काकुदः) विस्तृत वेदवाणी के भी प्रदाता है (उर्वीः 'गापः न) जैसे कि गापने समुद्रस्य महां- जल प्रदान किया है । सोमन्=जलः; ४०19 (भरापटे) । कुक्षिः उदर =

English

Gives. Here brought by priests in Soma mead. Granter of Wealth, drink Soma with the Seasons from

अध्याय 20

श्लोक 76.6

मात्रे॒ नु ते॒ सुमि॑ते इन्द्र पू॒र्वी द्यौर्म॒ज्मना॑ पृथि॒वी काव्ये॑न ।वरा॑य ते घृ॒तव॑न्तः सु॒तासः॒ स्वाद्न॑न् भवन्तु पी॒तये॒ मधू॑नि

mātre nu te sumite indra pūrvī dyaurmajmanā pṛthivī kāvyena | varāya te ghṛtavantaḥ sutāsaḥ svādnan bhavantu pītaye madhūni

हिन्दी अर्थ

काकूत् + दः 1. काषुत् = वाक् (निव ० १।११).। छान्दस ्” का लोप । जीवात्मा कीं कामना के योग्य है, भरौर (शंस्या) प्रशंसनीय ह । तथा (हृन्राय) जीवात्मा के लिये (सोमपीतये). ज्ञानदृग्व धने के लिये ह ।.

English

the Hotar’s Cup. Go to the wise unconquered One, ask thou of Indra, skilled in song,

अध्याय 20

श्लोक 76.7

आ मध्वो॑ अस्मा असिच॒न्नम॑त्र॒मिन्द्रा॑य पू॒र्णं स हि स॒त्यरा॑धाः ।स वा॑वृधे॒ वरि॑म॒न्ना पृ॑थि॒व्या अ॒भि क्रत्वा॒ नर्यः॒ पौंस्यै॑श्च

ā madhvo asmā asicannamatramindrāya pūrṇaṃ sa hi satyarādhāḥ | sa vāvṛdhe varimannā pṛthivyā abhi kratvā naryaḥ pauṃsyaiśca

हिन्दी अर्थ

भर्थात् दुही गई गोगो से सोम ( दुग्ध) क्षरित हा है। - (इनदर) है परमेदवरः। (एहि) कट हृणियेः सोमपवंभिः -निदेभिः) ०४ भयवेवेद-माष्य , का० २०। सू० ७१ ह, मौर (भ्रभिष्टिः). भाप हमारे प्रभीष्टदहै। ि

English

Him who is better than thy friends. Whether the men who mock us say, Depart unto another place,

अध्याय 20

श्लोक 76.8

व्या॑न॒लिन्द्रः॒ पृत॑नाः॒ स्वोजा॒ आस्मै॑ यतन्ते स॒ख्याय॑ पू॒र्वीः ।आ स्मा॒ रथं॒ न पृत॑नासु तिष्ठ॒ यं भ॒द्रया॑ सुम॒त्या चो॒दया॑से

vyānalindraḥ pṛtanāḥ svojā āsmai yatante sakhyāya pūrvīḥ | ā smā rathaṃ na pṛtanāsu tiṣṭha yaṃ bhadrayā sumatyā codayāse

हिन्दी अर्थ

वसन्त ऋतु भक्तियज्ञ के पव है । र लिये (श्रा सुंजत) पूणंतया समपित कर दो । , (इन्द्र) है परमेश्वर !. ति) आपकी (गिरः) वेदवाणियों का, भ्राप.

English

Ye who serve Indra and none else; Or whether, God of wondrous deeds, all our true people call us blest,

अध्याय 20

श्लोक 77.1

आ स॒त्यो या॑तु म॒घवां॑ ऋजी॒षी द्रव॑न्त्वस्य॒ हर॑य॒ उप॑ नः ।तस्मा॒ इदन्धः॑ सुषुमा सु॒दक्ष॑मि॒हाभि॑पि॒त्वं क॑रते गृणा॒नः

ā satyo yātu maghavāṃ ṛjīṣī dravantvasya haraya upa naḥ | tasmā idandhaḥ suṣumā sudakṣamihābhipitvaṃ karate gṛṇānaḥ

हिन्दी अर्थ

रूप मे पहूंची ह, जैसे किं (भ्रजोषा ) गमुक्ता नव-विवाहिता पत्नी (वृषभं का० २० .॥.सु° ७१ अथ्वेवेद-माष्य = अ . १८१५ ४७२. सं चोदय चि्रमवाग् रषं शर करण्यम् । षन (विभु) विभरुतिरूप है (असु) भौर भमाव्ाली (भसत् इत्) है ।

English

Still may we dwell in Indra’s care. Unto the swift One bring the swift, man-cheering, grace of sacrifice.

अध्याय 20

श्लोक 77.2

अव॑ स्य शू॒राध्व॑नो॒ नान्ते॒ऽस्मिन् नो॑ अ॒द्य सव॑ने म॒न्दध्यै॑ ।शंसा॑त्यु॒क्थमु॒शने॑व वे॒धाश्चि॑कि॒तुषे॑ असु॒र्याऽय मन्म॑

ava sya śūrādhvano nānte'smin no adya savane mandadhyai | śaṃsātyukthamuśaneva vedhāścikituṣe asuryā'ya manma

हिन्दी अर्थ

. (इन्र) है परमेदवर ! (राये) भाष्यात्मिक-घन (मन्व ४७२ की प्राप्ति द्वारा हमे यशस्वी कीजिये । . . स 4 ५ । (बृहत् श्रवः) महाधन को, भराष्यात्मिक महाधन को, (विदवायुः) हमारी

English

That to the Friend gives wings and joy. Thou, Satakratu, drankest this and wast the Vritras’ slayer; thou.

अध्याय 20

श्लोक 77.3

क॒विर्न नि॒ण्यं वि॒दथा॑नि॒ साध॒न् वृषा॒ यत् सेकं॑ विपिपा॒नो अर्चा॑त्।दि॒व इ॒त्था जी॑जनत् स॒प्त का॒रूनह्ना॑ चिच्चक्रुर्व॒युना॑ गृ॒णन्तः॑

kavirna niṇyaṃ vidathāni sādhan vṛṣā yat sekaṃ vipipāno arcāt| diva itthā jījanat sapta kārūnahnā ciccakrurvayunā gṛṇantaḥ

हिन्दी अर्थ

है । (रथिषीः) भौर शरीर-रथ कं रथी जीवात्मा की (ताः) "उनः भरसिद्ध. भ्ाध्यात्मिक (दषः). भ्रभिलाषाों को सफल कीजिये । .. - सर्वगत परमेदवर को ( गीभिः गृणन्तः) वेदवाणियो द्वाराः स्तुतियां करते : हये, (ऊतये) म्रात्मरक्ना्थं (होम) उसका आह्वान करते हँ । ४७७. सृतेडते न्योकसे बद् बहत ण्द्रिः । . (सते-सुते) समय-समय पर भक्तिरस के उत्पन्न होने पर, (न्योकसे)

English

Helpest the warrior in the fray. We strengthen, Satakratu, thee, yea, thee the powerfull in fight,

अध्याय 20

श्लोक 77.4

स्व॑१र्यद् वेदि॑ सु॒दृशी॑कम॒र्कैर्महि॒ ज्योती॑ रुरुचु॒र्यद्ध॒ वस्तोः॑ ।अ॒न्धा तमां॑सि॒ दुधि॑ता वि॒चक्षे॒ नृभ्य॑श्चकार॒ नृत॑मो अ॒भिष्टौ॑

sva1ryad vedi sudṛśīkamarkairmahi jyotī rurucuryaddha vastoḥ | andhā tamāṃsi dudhitā vicakṣe nṛbhyaścakāra nṛtamo abhiṣṭau

हिन्दी अर्थ

, नितरां सब कं निवासभूत, (बृहते) सब से महान् (इन्द्राय ) परमेदवरः कं अर्चैनारूप मे पूर्णतया भेट करता है, बोकर यह परमेदवर ( इत् ) दी. (अरिः) सबकास्वामीहै। न्योकसे नि + ओकस् निवासनाम + चसु्येकवचन (निर० ३।१।२) ।

English

That, Indra, we may win us wealth. To him the mighty stream of wealth, prompt Friend of him who pours the juice,

अध्याय 20

श्लोक 77.5

व॒व॒क्ष इन्द्रो॒ अमि॑तमृजि॒ष्यु॑१भे आ प॑प्रौ॒ रोद॑सी महि॒त्वा।अत॑श्चिदस्य महि॒मा वि रे॑च्य॒भि यो विश्वा॒ भुव॑ना ब॒भूव॑

vavakṣa indro amitamṛjiṣyu1bhe ā paprau rodasī mahitvā| ataścidasya mahimā vi recyabhi yo viśvā bhuvanā babhūva

हिन्दी अर्थ

, है परभेदवर ! (वुषमंण्यवः) सुखवर्षी पापका भनन निदिध्यासन करनेवाले उपासक, (विष्वेषु हि) सब ही (सवनेषु) भक्तिरस के यज्ञो का० २० । सु ७२ भरथवेवेद-भाष्य .. १५७. भे (समानम्) समानलूप मेँ प्रकट होनेवाले, (त्वा एकम्) टक भाप को ज्योतिर्मय आप की (सनिष्यवः) भक्ति चाहनेवाले उपासक, -( १

English

Yea, to this Indra sing your song. O come ye hither, sit ye down: to Indra sing ye forth your song,

अध्याय 20

श्लोक 77.6

विश्वा॑नि श॒क्रो नर्या॑णि वि॒द्वान॒पो रि॑रेच॒ सखि॑भि॒र्निका॑मैः ।अश्मा॑नं चि॒द् ये बि॑भि॒दुर्वचो॑भिर्व्र॒जं गोम॑न्तमु॒शिजो॒ वि व॑व्रुः

viśvāni śakro naryāṇi vidvānapo rireca sakhibhirnikāmaiḥ | aśmānaṃ cid ye bibhidurvacobhirvrajaṃ gomantamuśijo vi vavruḥ

हिन्दी अर्थ

है है परमेश्वर ! (नावं न) नौकाः के समान, (पषंणिम्) भवसागर से पार न . (8 त्वा) उस भ्रापको ही, हम उपासक, (शूषस्य घुरि की धुरामें (धीमहि) स्थापित करते है, भर्थात् आपको ही ५.५4 सुखप्रदाता समते ईह, भरौर दस रूपमे भरापका ध्यान करते. है। तथा का व ; (च है, इसी प्रकार (आयवः) उपासनारत ..

English

Companions, bringing hymns of praise. To him the richest of the rich, the Lord of treasures excellent,

अध्याय 20

श्लोक 77.7

अ॒पो वृ॒त्रं व॑व्रि॒वांसं॒ परा॑ह॒न् प्राव॑त् ते॒ वज्रं॑ पृथि॒वी सचे॑ताः ।प्रार्णां॑सि समु॒द्रिया॑ण्यैनोः॒ पति॒र्भवं॒ छव॑सा शूर धृष्णो

apo vṛtraṃ vavrivāṃsaṃ parāhan prāvat te vajraṃ pṛthivī sacetāḥ | prārṇāṃsi samudriyāṇyainoḥ patirbhavaṃ chavasā śūra dhṛṣṇo

हिन्दी अर्थ

परमेक्वर कां चिन्तनं करते है । ५). "1 . - तुङ्नति = दानकर्मा (निष० २।२०)। स्वः स्वुतः भासा (निर० परभेदवर का मनन करनेवाले ; वृष+-मन्-+-क्यच्-1-उ+ जस् । करनेवाले (मिथुना ) गृहस्थजन, (त्वा) भाप को (वि तस्र ) सतुतियों सुख की प्राप्ति चाहते ह, तब्र॒ आप उन दोनों का (समूहसि) संहार कर त है । भौर न) है भरमेरवर (षणम्). धा तिश

English

Indra, with Soma juice outpoured. May he stand by us in our need and in abundance for our wealth:

अध्याय 20

श्लोक 77.8

अ॒पो यदद्रिं॑ पुरुहूत॒ दर्द॑रा॒विर्भु॑वत् स॒रमा॑ पू॒र्व्यं ते॑ ।स नो॑ ने॒ता वाज॒मा द॑र्षि॒ भूरिं॑ गो॒त्रा रु॒जन्नङ्गि॑रोभिर्गृणा॒नः

apo yadadriṃ puruhūta dardarāvirbhuvat saramā pūrvyaṃ te | sa no netā vājamā darṣi bhūriṃ gotrā rujannaṅgirobhirgṛṇānaḥ

हिन्दी अर्थ

की वर्षा करनेवाले, (वच्जम्) वश्रङप होकर भने पापों का संहार करने- 1. , भरथर्वेवेद-मष्य का० २०।-सूु० ७२ . वाले, तथा ( स॒चामूवम्) अप केसाथ संग करनेवाले, (सवागुवम्)

English

With riches may he come to us; Whose pair of tawny horses yoked in battles foemen challenge not:

अध्याय 20

श्लोक 78.1

तद् वो॑ गाय सु॒ते सचा॑ पुरुहू॒ताय॒ सत्व॑ने ।शं यद् गवे॒ न शा॒किने॑

tad vo gāya sute sacā puruhūtāya satvane | śaṃ yad gave na śākine

हिन्दी अर्थ

च्च; तथा सक्षति गतिकर्मा (निल ० २।१४)। । ‡ भाता इमौमभिः। यदिन इन्त षो इषा षि चिकेतति । (उत उ) तथा परमेहवर (नः) हमारे ( अस्या उषसः) जीवनो के इन उषाकालों को ( जुषेत ) प्रीतिपूरव॑क स्वीकार करता है, मरौर (हवीमभिः)

English

To him, to Indra, sing your song. Nigh to the Soma-drinker come, for his enjoyment, these bright drops,

अध्याय 20

श्लोक 78.2

न घा॒ वसु॒र्नि य॑मते दा॒नं वाज॑स्य॒ गोम॑तः ।यत् सी॒मुप॒ श्रव॒द् गिरः॑

na ghā vasurni yamate dānaṃ vājasya gomataḥ | yat sīmupa śravad giraḥ

हिन्दी अर्थ

हमारी पुकारो के कारण, (हि) निद्चय से, (अकंस्य ) हमारी स्तुतिरयो भौर दर ! भ्राप (मृषः) संग्रामकारी कामादि के (हन्तवे) हनन के लिये, समुचित साधनों को, (चिकेतसि) सम्यक् प्रकार से जानते है (वृषा) (मे भरस्य) मु इस (नवीयसः) नवीन (वेषसः) मेषोवी उपासक की (मन्भ) मननीय-स्तुतियों को (भ्राश्रुषि) पूणंतया सुनिये, (नवीयसः). मुक

English

The Somas mingled with the curd. Thou, grown at once to perfect strength, wast born to drink the

अध्याय 20

श्लोक 78.3

कु॒वित्स॑स्य॒ प्र हि व्र॒जं गोम॑न्तं दस्यु॒हा गम॑त्।शची॑भि॒रप॑ नो वरत्

kuvitsasya pra hi vrajaṃ gomantaṃ dasyuhā gamat| śacībhirapa no varat

हिन्दी अर्थ

. नवीन उपासक की स्तुतियों को भ्रव सुनिये । . (निर० ५।१।४) ! उषसः जीवनः का उषाकाल, जबकि उपासक प्रथम बार उपासनामागं पर पदापंण कर भान्तर-प्रकाश्च पाता है । . का० २० । सु० ७३ भथर्ववेद-माष्य - १९९ (शुर. है पराक्रमी परमेष्र ॥ (दमा). ये (विष्वा सदशी) सब

English

Soma juice, strong Indra, for preeminence. O Indra, lover of the song, may these quick Somas enter thee:

अध्याय 20

श्लोक 79.1

इन्द्र॒ क्रतुं॑ न॒ आ भ॑र पि॒ता पु॒त्रेभ्यो॒ यथा॑ ।शिक्षा॑ णो अ॒स्मिन् पु॑रुहूत॒ याम॑नि जी॒वा ज्योति॑रशीमहि

indra kratuṃ na ā bhara pitā putrebhyo yathā | śikṣā ṇo asmin puruhūta yāmani jīvā jyotiraśīmahi

हिन्दी अर्थ

विद्व के विधाता, धर्ता, तथा पुष्टिदाता है । तिकयीश्रूत (ते) भ्रापकी (महिमानम्) . महिमा को, (नूचित् नु) पुराण. -परमेदवर ! (न) न (ते) आपके -(वीयंम्) सामथ्यं को, भ्रौर (न). न

English

May they bring bliss to thee the Sage. 06. O Lord of Hundred Powers, our chants of praise and lauds have strengthened thee:

अध्याय 20

श्लोक 79.2

मा नो अज्ञा॑ता वृ॒जना॑ दुरा॒ध्यो॒३माशि॑वासो॒ अव॑ क्रमुः ।त्वया॑ व॒यं प्र॒वतः॒ शश्व॑तीर॒पोऽति॑ शूर तरामसि

mā no ajñātā vṛjanā durādhyo3māśivāso ava kramuḥ | tvayā vayaṃ pravataḥ śaśvatīrapo'ti śūra tarāmasi

हिन्दी अर्थ

(राः) एवं भौर सम्पत्ति को ही व्याप सकते है । प म, भ्रौर भरतीत सुष्टर्यो तथा नवीन सुष्टयों में। 1 .. है मनुष्यो ! (वः) तुम्हारी. (मदिवृषे) महावृदध करनेवाले, (मै) १९० = - भयर्ववेद-माष्य का० २०॥। सु०७३

English

So strengthen thee the songs we sing! Indra, whose succour never fails, accept this treasure thousand- fold,

अध्याय 20

श्लोक 80.1

इन्द्र॒ ज्येष्ठं॑ न आ भ॑रं॒ ओजि॑ष्ठं॒ पपु॑रि॒ श्रवः॑ ।येने॒मे चि॑त्र वज्रहस्त॒ रोद॑सी॒ ओभे सु॑शिप्र॒ प्राः

indra jyeṣṭhaṃ na ā bharaṃ ojiṣṭhaṃ papuri śravaḥ | yeneme citra vajrahasta rodasī obhe suśipra prāḥ

हिन्दी अर्थ

योगाभ्यास मेँ परिपूर्णं (विशः) उपासकजनों गै (प्रचर) विन्नरिये, उनके हृदयो मे विचरिये। भ्राप (चर्षणिप्राः) सब मनुष्यो को सुखो से भरपुर दारा इन्दि को विषयों से हरना, हटाना । पूर्वौ =पूवं पूरणे. । (यदो ) जब ( यमस्य ) यमन्नियमों का पालन करनेवाले उपासक

English

Wherein all manly powers abide. O Indra, thou who lovest song, let no man hurt our bodies, keep.

अध्याय 20

श्लोक 80.2

त्वामु॒ग्रमव॑से चर्षणी॒सहं॒ राज॑न् दे॒वेषु॑ हूमहे ।विश्वा॒ सु नो॑ विथु॒रा पि॑ब्द॒ना व॑सो॒ऽमित्रा॑न् सु॒षहा॑न् कृधि

tvāmugramavase carṣaṇīsahaṃ rājan deveṣu hūmahe | viśvā su no vithurā pibdanā vaso'mitrān suṣahān kṛdhi

हिन्दी अर्थ

-स्तोतार्भ्रो की प्रेरणां के अनुसार, (रथं वहतः) उपासक के गरीर-रथ का वहन करने लगते है, (रथ ) तदनन्तर (दत्) ही यह शरीर-रथ (वचनः शक्तियो रौरं (दीघं श्रवसः) दीघंकाल से चली भ्रा महाकीत्ति का (पतिः) होता है । दीघं = भ्नांदिकाल । पवर, (हरिता) हरा-भरा करनेवाली (श्मश्रूणि) सूर्य की किरणों को

English

Slaughter far from us, for thou canst. Thereafter they, as is their wont, threw off the state of babes urborn,

अध्याय 20

श्लोक 81.1

यद् द्याव॑ इन्द्र ते श॒तं श॒तं भूमि॑रु॒त स्युः ।न त्वा॑ वज्रिन्त्स॒हस्रं॒ सूर्या॒ अनु॒ न जा॒तम॑ष्ट॒ रोद॑सी

yad dyāva indra te śataṃ śataṃ bhūmiruta syuḥ | na tvā vajrintsahasraṃ sūryā anu na jātamaṣṭa rodasī

हिन्दी अर्थ

, (भववेति) वर्षा करता है । ओौर भक्तिहीन पापि्यो को (धूनोति) एेसे कम्पा देता ह (यथा) जसे कि (वातः) फंफावात (र्नम् ) समग्रवन को. कम्पा देतीः . "का० २ ह । सु9 ७४ सथवेवेद-भाष्य १९१ ,.

English

Taking their sacrificial name. Thou, Indra, with the Tempest-Gods, the breakers down of what is firm,

अध्याय 20

श्लोक 81.2

आ प॑प्राथ महि॒ना वृष्ण्या॑ वृष॒न् विश्वा॑ शविष्ठ॒ शव॑सा ।अ॒स्मां अ॑व मघव॒न् गोम॑ति व्र॒जे वज्रिं चि॒त्राभि॑रू॒तिभिः॑

ā paprātha mahinā vṛṣṇyā vṛṣan viśvā śaviṣṭha śavasā | asmāṃ ava maghavan gomati vraje vajriṃ citrābhirūtibhiḥ

हिन्दी अर्थ

४८६. यो काचा विवाचो मृध्रवाचः पुरू सदलाधचिवा जषान॑ । (यः) जो परमेदवर, ( वाचा ) निज. वेदवाणी के उपदेशों हारा, सहसरा) हजारों प्रकार की -नानाचिध ( अशिवा ) भररिव-मावनाभों का शक्तिशाली कमं की (गृणीमसि ) हम स्तुतियां करते है, जो परमेश्वर कि (पिता इव ) सांसारिकं पितां के सद्

English

Foundest the kine even in the cave. Worshipping even as they list, singers laud him who findeth wealth,

अध्याय 20

श्लोक 82.1

यदि॑न्द्र॒ याव॑त॒स्त्वमे॒ताव॑द॒हमीशी॑य ।स्तो॒तार॒मिद् दि॑धिषेय रदावसो॒ न पा॑प॒त्वाय॑ रासीय

yadindra yāvatastvametāvadahamīśīya | stotāramid didhiṣeya radāvaso na pāpatvāya rāsīya

हिन्दी अर्थ

सामर्थ्यो को (वाव) बढ़ाता' रहता है । . (सोपाः) भक्तिरसः का पान करते ह, इसलिये हम उपासक ( भ्रनादस्ताः इव.) संसारिक भ्राचंसाभों भ्र्थात् अभिलाषा से रहित-से ( स्मसि हो -चुकरे है श्रौर भ्रापको भक्तिरस समपित कर रहे । (सहलं षु) हनारों (गोपु) इनदरो, गौर हवारो (भचवेषु) मनो के (श्प

English

The far-renowned, the mighty One.

अध्याय 20

श्लोक 82.2

शिक्षे॑य॒मिन्म॑हय॒ते दि॒वेदि॑वे रा॒य आ कु॑हचि॒द्विदे॑ ।न॒हि त्वद॒न्यन्म॑घवन् न॒ आप्यं॒ वस्यो॒ अस्ति॑ पि॒ता च॒न

śikṣeyaminmahayate divedive rāya ā kuhacidvide | nahi tvadanyanmaghavan na āpyaṃ vasyo asti pitā cana

हिन्दी अर्थ

शरधिभितं- बे. । हमारा जीवन सात्विक है, इसलिये हमे पाप उपासना-मागं का आ त् न॑श्र क॑सय गोष्वश्वेषु पुभिषुं सहसेषु तुवीमघ ॥॥ परमेदवर नही, जीवात्मा नहीं, इत्यादि विचाररोवाले नास्तिक, ४९१. खमिन गहैभं यण नुबन्ते पापयामुया ।

English

Then, faring on by Indra’s side, the fearless, let thyself be seen,. Both gracious and in splendour peers.

अध्याय 20

श्लोक 83.1

इन्द्र॑ त्रि॒धातु॑ शर॒णं त्रि॒वरू॑थं स्वस्ति॒मत्।छ॒र्दिर्य॑च्छ म॒घव॑द्भ्यश्च॒ मह्यं॑ च या॒वया॑ दि॒द्युमे॑भ्यः

indra tridhātu śaraṇaṃ trivarūthaṃ svastimat| chardiryaccha maghavadbhyaśca mahyaṃ ca yāvayā didyumebhyaḥ

हिन्दी अर्थ

(इन्द्र) है परमेदवर ! (अमुया) उस ( पापया ) पापमथी मिथ्या- (पापया) पापमयी वृत्ति के साथ, (नुवन्तम्) सांसारिकं भोगों के गीत गाने- बालि (गदंभम्) गदंभ-मनुष्य को (संमूण) विनष्ट कीजिये । (जातू नः०)

English

With Indra’s well-beloved hosts, the blameless, tending heaven- ward, The sacrificer cries aloud.

अध्याय 20

श्लोक 83.2

ये ग॑व्य॒ता मन॑सा॒ शत्रु॑माद॒भुर॑भिप्र॒घ्नन्ति॑ धृष्णु॒या।अघ॑ स्मा नो मघवन्निन्द्र गिर्वणस्तनू॒पा अन्त॑मो भव

ye gavyatā manasā śatrumādabhurabhipraghnanti dhṛṣṇuyā| agha smā no maghavannindra girvaṇastanūpā antamo bhava

हिन्दी अर्थ

भिरो देता है, जसे. कि (वनात् भरधि) जलते हुए वेन से भाती हई (वातः) . जलती-वायु (दरुरम्) दुरस्थ पदार्थो को जला कर (पताति) गिरा देती है । कुण्डणाची = कुडि दाहे +-भञ्च् (गति, व्यवहार)। ४९३. सवै परिकरो ज॑हि जम्भया ककदाशच् 1

English

Come from this place, O wanderer, or downward from the light of heaven! Our songs of praise all yearn for this.

अध्याय 20

श्लोक 84.1

इन्द्रा या॑हि चित्रभानो सु॒ता इ॒मे त्वा॒यवः॑ ।अण्वी॑भि॒स्तना॑ पू॒तासः॑

indrā yāhi citrabhāno sutā ime tvāyavaḥ | aṇvībhistanā pūtāsaḥ

हिन्दी अर्थ

तथा हभारे आन्तरिक (करोंशम्) शोरगुल को ( जहि ) हम से षरे कीजिये । (इन्दर) है परदवर ! (पूरवः) मनुष्यं (पुरः) अपने सामने ही, भर्थात् (विदुः) जान लेते है--(१) (यत्) जब किं जीवनो की (शारदीः) शरत्का-

English

Or Indra we implore for help from here, from heaven above the earth, Or from the spacious firmament.

अध्याय 20

श्लोक 84.2

इन्द्रा या॑हि धि॒येषि॒तो विप्र॑जूतः सु॒ताव॑तः ।उप॒ ब्रह्मा॑णि वा॒घतः॑

indrā yāhi dhiyeṣito viprajūtaḥ sutāvataḥ | upa brahmāṇi vāghataḥ

हिन्दी अर्थ

जीवनो का (भवातिरः) संहार कर. देते है, (सासहानः) सहसा (भरवातिरः) संहार कर देते है; (२) तथा (शवसस्पते इन्द्र) है बलो के पति परमेदवर ! . मनुष्य-समूदाय का ( शासः ) शासन करते ह, उस षर दण्डविषान करते है; .(३) तथा जब ( मन्दसानः ) निज प्रसन्नता मेही भाप ( महीं की इस महा.जलराशि को, तथा . इन क्रियमाण नानाविध कर्म॑कलापों को (भमृष्णाः) प्रलय मेँ मानो चुरा-से लेते है, प्रपने मे लीनं कर लेते है, (दमाः भ्रपः) इन जलो को भ्रपने मे लीन करलेतेहै। जाती है । इसी प्रकार जीवन की शरद्-ऋतु जरावस्था है,जिस की समाप्ति परे जीवन की समाप्ति हो जाती है) भ्रः जलः; कर्म ( निघं० २।१)।

English

Indra the singers with high praise, Indra reciters with their lauds, Indra the choirs have glorified.

अध्याय 20

श्लोक 84.3

इन्द्रा या॑हि॒ तूतु॑जान॒ उप॒ ब्रह्मा॑णि हरिवः ।सु॒ते द॑धिष्व न॒श्चनः॑

indrā yāhi tūtujāna upa brahmāṇi harivaḥ | sute dadhiṣva naścanaḥ

हिन्दी अर्थ

लीयतो यदाविथ । चकं कारमेभ्यः भ एत॑नासु प्रनत । (वृषन्) है आनन्दरसंवर्षी परमेदवर ! (यद्) जब शःप, (उषिजः) है (यद् सखीयतः) भौर जब सखिभरत इन उपासकों कीः ( प्रावि ) रक्षा ..

English

Indra hath ever close to him his two bay steeds and word-yoked car, Indra the golden, Thunder-armed.

अध्याय 20

श्लोक 85.1

मा चि॑द॒न्यद् वि शं॑सत॒ सखा॑यो॒ मा रि॑षण्यत ।इन्द्र॒मित् स्तो॑ता॒ वृष॑णं॒ सचा॑ सु॒ते मुहु॑रु॒क्था च॑ शंसत

mā cidanyad vi śaṃsata sakhāyo mā riṣaṇyata | indramit stotā vṛṣaṇaṃ sacā sute muhurukthā ca śaṃsata

हिन्दी अर्थ

सवत्र चर्चा करते है । (पृतनासु) देवासुर-संग्रामो के उपस्थित हो जने पर का० २० सु9 ७६ प्रथर्ेवेद-भाष्य च. शामा , १९५ (यःवा) जौ नरया नारी उपासक, (न ) मानो ( वने) वनमें (चाकन्) वनी को देखता हृभरा, ( न्यधायि ईदवर-पणिधान करता है, हे नर-नारी उपासको (वाम्) तुम् दोनों का (शुचिः) पवित्र ( स्तोमः) . सामगान, -तन (मुरणौ) भरण-पोषण करनेवलि परमेदवर मे ( अजीगः )

English

Indra hath raisedjthe Sun on high in heaven, that he may see afar: He burst the mountain for the kine.

अध्याय 20

श्लोक 85.2

अ॒व॒क्र॒क्षिणं॑ वृष॒भं य॑था॒जुरं॒ गां न च॑र्षणी॒सह॑म्।वि॒द्वेष॑णं सं॒वन॑नोभयंक॒रं मंहि॑ष्ठमुभया॒विन॑म्

avakrakṣiṇaṃ vṛṣabhaṃ yathājuraṃ gāṃ na carṣaṇīsaham| vidveṣaṇaṃ saṃvananobhayaṃkaraṃ maṃhiṣṭhamubhayāvinam

हिन्दी अर्थ

इत्) जिस ही उपासक का (होता) शक्तिप्रदाता हो जाता है, वह उपासक है, (क्षपावान्) गौर क्षमाशील बन जाता है । हे परमेश्वर ! (अस्याः) भाज की इस ( उषसः ) उषवेलार्मे,या

English

Help us, O Indra, in the frays, yea, frays where thousand spoils are gained, With awful aids, O awful One.

अध्याय 20

श्लोक 85.3

यच्चि॒द्धि त्वा॒ जना॑ इ॒मे नाना॒ हव॑न्त ऊ॒तये॑ ।अ॒स्माकं॒ ब्रह्मे॒दमि॑न्द्र भूतु॒ तेहा॒ विश्वा॑ च॒ वर्ध॑नम्

yacciddhi tvā janā ime nānā havanta ūtaye | asmākaṃ brahmedamindra bhūtu tehā viśvā ca vardhanam

हिन्दी अर्थ

हम सदा वतमान रहें । (भनु ) भाप कै नेतृत्व मेँ रहने के परचात् (त्रिद्योकः) (रतम्) संकड़ों (नृन्) नरनारियों को (श्रा वहतू) सन्मां पर जे चलता है, जैसे कि (कृत्सेन) विद्युत् फी सहायता द्वारा ( रथः ) रथ, संकडों नर- नारियों का वहन करता है । ( यः जो मनुष्य ( ससवान् ) सोया पड़ा (असत्) होता है, उसे भी त्रिरोक सन्मां पर ले चलता है । ससवान् सस्ति स्वपितिकर्मा (नि्ं० ३।२२)। . १९६ प्रथर्वनेद-माष्य का१२०॥। सू० ७६

English

In mighty battle we invoke, Indra, Indra in lesser fight, The friend who bends his bolt at fiends.

अध्याय 20

श्लोक 85.4

वि त॑र्तूर्यन्ते मघवन् विप॒श्चितो॒ऽर्यो विपो॒ जना॑नाम्।उप॑ क्रमस्व पुरु॒रूप॒मा भ॑र॒ वाजं॒ नेदि॑ष्ठमू॒तये॑

vi tartūryante maghavan vipaścito'ryo vipo janānām| upa kramasva pururūpamā bhara vājaṃ nediṣṭhamūtaye

हिन्दी अर्थ

कद् वाहे। अर्वायुषं मा मनीषा आ त्वा ्क्यापुपमं राधो अके; ॥६॥ (इन्द्र) है परमेदवंर ! (ते) राप का( कः) कौनसा ( मदः ) वाणि कै.घर भ्राप.मे (विधाव) विशेषतया प्रकट हो रहा है? बथा

English

Unclose, our manly Hero, thou for ever bounteous, yonder cloud, For us, thou irresistible.

अध्याय 20

श्लोक 86.1

ब्रह्म॑णा ते ब्रह्म॒युजा॑ युनज्मि॒ हरी॒ सखा॑या सध॒माद॑ आ॒शू।स्थि॒रं रथं॑ सु॒खमि॑न्द्राधि॒तिष्ठ॑न् प्रजा॒नन् वि॒द्वां॑ उप॑ याहि॒ सोम॑म्

brahmaṇā te brahmayujā yunajmi harī sakhāyā sadhamāda āśū| sthiraṃ rathaṃ sukhamindrādhitiṣṭhan prajānan vidvāṃ upa yāhi somam

हिन्दी अर्थ

५ पाकी ध्रोर, भौर ( उप ) भ्राप कै समीप, (भ्रमि वाहः) ले जायगी 7 (द्र) है परमेदवर ! ( त्वावतः ) भ्राप को चाहनेवाले ( नृन् ) . होगी ? तथा (कया धिया) किस विचार से आप (चुम्नं करसे) निज उपा- . कमे द्युति प्रकट करते है? (कत् नः). कंन हम नवीन उपासको करै यह भ्राप की युति (भागने) प्राप्त होगी ? ।.( उरुगाय ) ह महाकीत्तिवाले !

English

Still higher, at each strain of mine, thunder-armed Indra’s, praises rise: I find no laud worthy of him.

अध्याय 20

श्लोक 87.1

अध्व॑र्यवोऽरु॒णं दु॒ग्धमं॒शुं जु॒होत॑न वृष॒भाय॑ क्षिती॒नाम्।गौ॒राद् वेदी॑यां अव॒पान॒मिन्द्रो॑ वि॒श्वाहेद् या॑ति सु॒तसो॑ममि॒च्छन्

adhvaryavo'ruṇaṃ dugdhamaṃśuṃ juhotana vṛṣabhāya kṣitīnām| gaurād vedīyāṃ avapānamindro viśvāhed yāti sutasomamicchan

हिन्दी अर्थ

के भीतर निज द्युति प्रकट करेगे, भौर सब के सच्चे मित्र हो जांयगे । ५०१. प्रेर॑य॒ ठरो अथे न पारं ये अस्य का जनिषा इव रमन् । (ये) जो उपासक (अस्य) इस परमेदवर की (कासम्) कामना को ¦ (ग्मन्). पूरा करते है. (इव) नसे कि (जनिषाः) जन्मदाता पिता-पूव कीः

English

Even as the bull drives on the herds, he drives the people with his might, The ruler irresistible:

अध्याय 20

श्लोक 87.2

यद् द॑धि॒षे प्र॒दिवि॒ चार्वन्नं॑ दि॒वेदि॑वे पी॒तिमिद॑स्य वक्षि ।उ॒त हृ॒दोत मन॑सा जुषा॒ण उ॒शन्नि॑न्द्र॒ प्रस्थि॑तान् पाहि॒ सोमा॑न्

yad dadhiṣe pradivi cārvannaṃ divedive pītimidasya vakṣi | uta hṛdota manasā juṣāṇa uśannindra prasthitān pāhi somān

हिन्दी अर्थ

देकर करते है, उन की अभ्य्थंनामौं को भ्राप पूणं करदेतेहै। १ भरं न पारम् जैसे सांसारिकः-धन सांसारिक कष्टो से पार करता . ५०२. मतरे चते घुमित द्रप बौभन्मना। एथिवी काव्येन । प्वंकाल से प्रकट हृभ्रा ( चयौः ) चयुलोक, तथा भ्रापके बल से पूरवंकाल से

English

Indra who rules with single sway men, riches, and the fivefold race. Of those who dwell upon the earth.

अध्याय 20

श्लोक 87.3

ज॒ज्ञा॒नः सोमं॒ सह॑से पपाथ॒ प्र ते॑ मा॒ता म॑हि॒मान॑मुवाच ।एन्द्र॑ पप्राथो॒र्व॑१न्तरि॑क्षं यु॒धा दे॒वेभ्यो॒ वरि॑वश्चकर्थ

jajñānaḥ somaṃ sahase papātha pra te mātā mahimānamuvāca | endra paprāthorva1ntarikṣaṃ yudhā devebhyo varivaścakartha

हिन्दी अर्थ

(ते) भ्राप.ारा.(वराय) -वरण कंरने.योग्यं हौ जांय, तथा भ्राप के (मधूनि) मधुर मानन्दरसों के (.पीतये ) पीने के योग्य ( भवन्तु ) हो -नांय,-- यहं हमारी प्रार्थनाहै। ५०१. आ मध्वो अस्मा असिचमरमतरमिनद्राय पृणेस हि सत्यराधाः । उपासको ने (अस्मै इन्द्राय ) इस परभेदवर के परति, (मध्वः) मधुर

English

For your sake from each side we call Indra away from other men: Ours, and none others’, may he be.

अध्याय 20

श्लोक 87.4

यद् यो॒धया॑ मह॒तो मन्य॑माना॒न् साक्षा॑म॒ तान् बा॒हुभिः॒ शाश॑दानान्।यद् वा॒ नृभि॒र्वृत॑ इन्द्राभि॒युध्या॒स्तं त्वया॒जिं सौ॑श्रव॒सं ज॑येम

yad yodhayā mahato manyamānān sākṣāma tān bāhubhiḥ śāśadānān| yad vā nṛbhirvṛta indrābhiyudhyāstaṃ tvayājiṃ sauśravasaṃ jayema

हिन्दी अर्थ

रूप मेँ सीच दिया है । (हि) क्योंकि (सः) वह् परमेदवर (-सत्यराधाः ). १९८ दन भका कार ११।१ १ अथवेवेद-मास्य का० २० सं° ७७. आसा रथे न पुत॑नाघु तिष्ठ यं भद्रया सुमत्या चोदयासे ॥८॥ , परमेदवर के साथ इसके सखिभाव की प्राप्ति कै लिये, (भरा यतन्ते) पूर्णतया

English

Indra, bring wealth that gives delight, the victor’s ever-conquer- ing wealth, Most excellent, to be our aid;

अध्याय 20

श्लोक 87.5

प्रेन्द्र॑स्य वोचं प्रथ॒मा कृ॒तानि॒ प्र नूत॑ना म॒घवा॒ या च॒कार॑ ।य॒देददे॑वी॒रस॑हिष्ट मा॒या अथा॑भव॒त् केव॑लः॒ सोमो॑ अस्य

prendrasya vocaṃ prathamā kṛtāni pra nūtanā maghavā yā cakāra | yadedadevīrasahiṣṭa māyā athābhavat kevalaḥ somo asya

हिन्दी अर्थ

( भद्रया ). सुखदायिनी गौर कल्याणकारिणी ( सुमत्यां ) कुमति द्वारा, (चोदयासे) प्रेरित करते रहते है, उस १ ( पृतनासु ) देवायुर-संग्रामो मै, भ्राप उसकी सहायतार्थं, ( आ तिष्ठ ) दुढतापूवंक स्थित हूजिये, ( न ) जसे किं रथ-योद्धा यु्धोमे ( रथम् ) भ्रषने.रथको वुढृतापृ्वंक स्थित .. ५०५. आ सत्यो यातु मघव ऋजीषी ्व॑न्त्रस्य इरंय उप॑ नः ॥

English

By means of which we may repel our foes in battle hand to hand. By thee assisted with the car.

अध्याय 20

श्लोक 87.6

तवे॒दं विश्व॑म॒भितः॑ पश॒व्यं॑१ यत् पश्य॑सि॒ चक्ष॑सा॒ सूर्य॑स्य ।गवा॑मसि॒ गोप॑ति॒रेक॑ इन्द्र भक्षी॒महि॑ ते॒ प्रय॑तस्य॒ वस्वः॑

tavedaṃ viśvamabhitaḥ paśavyaṃ1 yat paśyasi cakṣasā sūryasya | gavāmasi gopatireka indra bhakṣīmahi te prayatasya vasvaḥ

हिन्दी अर्थ

भिलाषी, (मघवा) रेदवयंशाली परमेश्वर ( आ यातु.) हमारे हृदयो मेँ , प्रकट हो । ( भरस्य ) इस परमेदवर की ( हरयः ) कामादि की भ्रपहारी- भक्तिरसरूपी भरन्त ( सुषुभ ) हम ने त्यार किया है । ( गृणानः ) गुरुवत् भबितिरस का पान (करते) करताहै। का २०। सू ७७ अथववेवेद-माष्य द १९९

English

Aided by thee, the Thunder-armed, Indra; may we lit up the bolt, And conquer all our foes in fight.

अध्याय 20

श्लोक 87.7

बृह॑स्पते यु॒वमिन्द्र॑श्च॒ वस्वो॑ दि॒व्यस्ये॑शाथे उ॒त पार्थि॑वस्य ।ध॒त्तं र॒यिं स्तु॑व॒ते की॒रये॑ चिद् यू॒यं पा॑त स्व॒स्तिभिः॒ सदा॑ नः

bṛhaspate yuvamindraśca vasvo divyasyeśāthe uta pārthivasya | dhattaṃ rayiṃ stuvate kīraye cid yūyaṃ pāta svastibhiḥ sadā naḥ

हिन्दी अर्थ

डाला है एेसा उपासक, इवः) मानो, ( उशना ) श्रापकी प्राप्ति की उग्र भरभिलाषावाला है, वह ( चिकितुषे ) संज्ञ भौर ( असुर्याय प्रांणिरयो के (शंसति) कथन कर रहा है । उशना = वष्टेः कान्तिकर्मणः । ५०७. कवि निण्यं विदथानि साघन् वृषा यत सेक विपिपानो अची!

English

With thee, O Indra, for ally, with missile-darting heroes may We conquer our embattled foes.

अध्याय 20

श्लोक 88.1

यस्त॒स्तम्भ॒ सह॑सा॒ वि ज्मो अन्ता॒न् बृह॒स्पति॑स्त्रिषध॒स्थो रवे॑ण ।तं प्र॒त्नास॒ ऋष॑यो॒ दीध्या॑नाः पु॒रो विप्रा॑ दधिरे म॒न्द्रजि॑ह्वम्

yastastambha sahasā vi jmo antān bṛhaspatistriṣadhastho raveṇa | taṃ pratnāsa ṛṣayo dīdhyānāḥ puro viprā dadhire mandrajihvam

हिन्दी अर्थ

(विदथानि) वेदों के गुप्त रहस्यो का परिजान (साधन्) देता हरा उपासक, (वृषा) भक्तिरस की वर्षा-करता हुभरा, (यत्) जब, सेकम्) परमेऽवरीय ग्रानन्दरस की वर्षा का ( विपिपानः ) तृष्णापूवंक पान करता है, तब वहं रदिमयों को (जीजनत्) जन्म दिया है, जो सौर-रदिमयां कि ( मह्ना) दिनों को (चक्रुः) पैदा करती है, (चित्) भ्रौर जो मानो ( वयुना ) ज्ञानो का भी (गृणन्तः) उपदेश दे रही होती है । £. (परमेश्वर ने वैदिकज्ञान भी दियाहै, भौर सौरप्रकारा भी, सौर-प्रकाशसे दिनोंका निर्माणहोताहै, भ्रौर वह हमारेज्ञानों काभी हा कि उसी के सामथ्यं हारा, (वस्तोः) दिन की (यद् ह महि ज्योतिः) जो महाज्योति भर्थात् सुयं है वह तथा रात्रि के तारागण (रुरुचुः चमक

English

Mighty is Indra, yea, supreme; greatness becomes the Thunderer!

अध्याय 20

श्लोक 88.2

धु॒नेत॑यः सुप्रके॒तं मद॑न्तो॒ बृह॑स्पते अ॒भि ये न॑स्तत॒स्रे।पृष॑न्तं सृ॒प्रमद॑ब्धमू॒र्वं बृह॑स्पते॒ रक्ष॑तादस्य॒ योनि॑म्

dhunetayaḥ supraketaṃ madanto bṛhaspate abhi ye nastatasre| pṛṣantaṃ sṛpramadabdhamūrvaṃ bṛhaspate rakṣatādasya yonim

हिन्दी अर्थ

। रहे है । भ्रौर ( विचक्षे ) मै विेषरूप मेँ कहता हः भौर देख रहा हुं कि. ५१०. विश्वानि शक्रो नर्याणि बिदवानपो रिरिच सलिभिनिकामिः ॥ (चकार) जगत् की रचना की है ।

English

Wide as the heaven extends his power; Which aideth those to win them sons who come as heroes to the fight,

अध्याय 20

श्लोक 88.3

बृह॑स्पते॒ या प॑र॒मा प॑रा॒वदत॒ आ त॑ ऋत॒स्पृशो॒ नि षे॑दुः ।तुभ्यं॑ खा॒ता अ॑व॒ता अद्रि॑दुग्धा॒ मध्व॑ श्चोतन्त्य॒भितो॑ विर॒प्शम्

bṛhaspate yā paramā parāvadata ā ta ṛtaspṛśo ni ṣeduḥ | tubhyaṃ khātā avatā adridugdhā madhva ścotantyabhito virapśam

हिन्दी अर्थ

रहा है । (मरहित्वां ) निज महिमा से परमेश्वर (उभे रोदसी) चयुलोक भौर भूलोक दोनों मँ - (श्रा पप्रौ) भरपूर हृभरा-हृभा है । (रतः चित्) इस संसार से (अस्य महिमा) इस ईइवर की महिमा (वि रेचि) प्रवाहित हो रही है, (यः) जो परमेश्वर कि (विद्वा भुवना ) सब भुवनो पर ( भरमि बभुव ). विजय पाए हुए हं । १, य" = करती है 1 परमेदवर (निकामैः) भाध्यात्मिकं कामनावाले (सखिभिः) उपासक-सखाों के साथ सदा रहता है, (ये ) जो सखा कि (-वचोभिः ) भ्मपने कथनमात्र से (अदमानं चित्) भविद्या के किलो को मी .( बिभिदुः ). छिन्न-भिन्न कर देते है; भौर जो ( उशिजः.) प्रभु को चाहनैवाले प्रभुके. का० २०। सू ७८ अथर्ववेद-भाष्य. २०१ ।

English

Or singers loving holy thoughts. His belly drinking deepest draughts of Soma like an ocean swells,

अध्याय 20

श्लोक 88.4

बृह॒स्पतिः॑ प्रथ॒मं जाय॑मानो म॒हो ज्योति॑षः पर॒मे व्योऽमन्।स॒प्तास्य॑स्तुविजा॒तो रवे॑ण॒ वि स॒प्तर॑श्मिरधम॒त् तमां॑सि

bṛhaspatiḥ prathamaṃ jāyamāno maho jyotiṣaḥ parame vyo'man| saptāsyastuvijāto raveṇa vi saptaraśmiradhamat tamāṃsi

हिन्दी अर्थ

वाले (वृत्रम्) पापवृत्र का (पराहन् ) हननं किय है । अतः ( पृथिवी समग्र पृथिवीवासी (सचेताः) सचेत होकर ( ते ) भाप के (वच्रम्) दिये रहे है ।. (शूर) है पराक्रमी ! (धृष्णो) है पाप-धषंक ! ( शवसा ) निजं स्वाभाविक शक्ति के कारण आप (पतिः. भवन्) जगत् के पति हृए है । धुख्त) ह बहतो ढारा या बहुत नामं द्वारा पुकारे गए परमेश्वर!

English

Like wide streams from the cope of heaven. Come, Indra, and delight thee with the juice at all the Soma feasts,

अध्याय 20

श्लोक 88.5

स सु॒ष्टुभा॒ स ऋक्व॑ता ग॒णेन॑ व॒लं रु॑रोज फलि॒गं रवे॑ण ।बृह॒स्पति॑रु॒स्रिया॑ हव्य॒सूदः॒ कनि॑क्रद॒द् वाव॑शती॒रुदा॑जत्

sa suṣṭubhā sa ṛkvatā gaṇena valaṃ ruroja phaligaṃ raveṇa | bṛhaspatirusriyā havyasūdaḥ kanikradad vāvaśatīrudājat

हिन्दी अर्थ

कमो के (शरद्रिम्) न विदी्णं होनेवाले पवत को (ददः) विदीणं कर देते, . प्रकट होतीः है । तदनन्तर (सः) वे राप (नः) हमारे ( नेताः ) मागंदर्बी नेता बनते है, भौर (भरि) प्ररत ( वाजम् ) शक्ति ( भ्रा दधि ) समादरं पूवकदेतेै। भौर. ( भरङ्कगिरोभिः ) प्राणाभ्यासिर्यो के हारा ( गृणानः उपदेश देते हृए आपं (गोत्रा) हमारे पापों के गढ़ को (रजन् ) -तोड़-फोड देते है सरमा - वाक (गऽ सं° ४।६।४)। गोतः 1710698)) (भराषटे)। , (सुते) भक्तिरस के उत्पन्न हो जाने पर, है उपासको ! (वः) तुम सब्र (सचा) मिलकर, (पुख्टूताय) बहू द्वारा या बहूत नामों हारा पुकारे.

English

Protector, mighty in thy strength. To Indra pour ye forth the juice, the active gladdening juice, to him

अध्याय 20

श्लोक 88.6

ए॒वा पि॒त्रे वि॒श्वदे॑वाय॒ वृष्णे॑ य॒ज्ञैर्विधेम॒ नम॑सा ह॒विर्भिः॑ ।बृह॑स्पते सुप्र॒जा वी॒रव॑न्तो व॒यं स्या॑म॒ पत॑यो रयी॒णाम्

evā pitre viśvadevāya vṛṣṇe yajñairvidhema namasā havirbhiḥ | bṛhaspate suprajā vīravanto vayaṃ syāma patayo rayīṇām

हिन्दी अर्थ

गाए, ( सत्वने ॥ बलशाली परमेदवर .के लिये, ( तत् ) उस सामानः क्री (गाय) गाया करो, जो सामगान कि (गवे न) गानेवाले के सदश्च (शाकिने) शक्तिशाली परमेदवर को भी प्रसन्न करे । २०२ , भर्ववेद-भाष्य का० २० । सु०७६

English

The gladdening omnific God. 292

अध्याय 20

श्लोक 89.1

अस्ते॑व॒ सु प्र॑त॒रं लाय॒मस्य॒न् भूष॑न्निव॒ प्र भ॑रा॒ स्तोम॑मस्मै ।वा॒चा वि॑प्रास्तरत॒ वाच॑म॒र्यो नि रा॑मय जरितः॒ सोम॒ इन्द्र॑म्

asteva su prataraṃ lāyamasyan bhūṣanniva pra bharā stomamasmai | vācā viprāstarata vācamaryo ni rāmaya jaritaḥ soma indram

हिन्दी अर्थ

( न नियमते ) नियमित नंहीं करता, अर्थात् इन का दान प्रभरूतमात्रामे . बाणियों को (उप) हमारे हृदयो के समीप होकर (वत्) सुन नेता है ।. . शरीर के प्रति, (दस्युहा) क्षयरकारी-पापों का हनन करनेवाला परमेदवर, ॥ । .(शचीभिः) अपने स्वाभाविक कमो दारा ( नः ). हम उपासको के ( भप.

English

O Lord of all men, fair of cheek, rejoice thee in the gladdening buds, Present at these drink-offerings.

अध्याय 20

श्लोक 89.2

दोहे॑न॒ गामुप॑ शिक्षा॒ सखा॑यं॒ प्र बो॑धय जरितर्जा॒रमिन्द्र॑म्।कोशं॒ न पू॒र्णं वसु॑ना॒ न्यृ॑ष्ट॒मा च्या॑वय मघ॒देया॑य॒ शूर॑म्

dohena gāmupa śikṣā sakhāyaṃ pra bodhaya jaritarjāramindram| kośaṃ na pūrṇaṃ vasunā nyṛṣṭamā cyāvaya maghadeyāya śūram

हिन्दी अर्थ

. हि परमेश्वर ! (भरज्ञाता वृजना) भज्ञात-पाप ( नः) हम पर (मा सहायता वारा, वयम् ) हम, ( शश्वतीः ) ला्वत काल से ( प्रवतः ) भ्वाहरूप मं बहते हुए (अपः) कमंगतिरूप. नद को (भ्रति तरामसि) पुणंतया

English

O Indra, stimulate thereto us emulously fain for wealth. And glorious, O most splendid One.

अध्याय 20

श्लोक 89.3

किम॒ङ्ग त्वा॑ मघवन् भो॒जमा॑हुः शिशी॒हि मा॑ शिश॒यं त्वा॑ शृणोमि ।अप्न॑स्वती॒ मम॒ धीर॑स्तु शक्र वसु॒विदं॒ भग॑मि॒न्द्रा भ॑रा नः

kimaṅga tvā maghavan bhojamāhuḥ śiśīhi mā śiśayaṃ tvā śṛṇomi | apnasvatī mama dhīrastu śakra vasuvidaṃ bhagamindrā bharā naḥ

हिन्दी अर्थ

५१८. श्द्रज्यहेन आ भरं ओन्रिषटं पपुरि भवैः । जिस बेद-धवण द्वारा. ज्ञत होता है किभरापनेही ( इमे उभे रोदसी ) किया हमा है -। पपुरि पुर भग्रगमने । सुशिप्र =सु+िपि (रष्मि) +र ५१९. स्वमसे वेषीद राजय दे एने , , =.

English

Give, Indra, wide and lofty fame, wealthy in cattle and in strength, Lasting our life-time, failing not.

अध्याय 20

श्लोक 89.4

त्वां जना॑ ममस॒त्येष्वि॑न्द्र संतस्था॒ना वि ह्व॑यन्ते समी॒के।अत्रा॒ युजं॑ कृणुते॒ यो ह॒विष्मा॒न्नासु॑न्वता स॒ख्यं व॑ष्टि॒ शूरः॑

tvāṃ janā mamasatyeṣvindra saṃtasthānā vi hvayante samīke| atrā yujaṃ kṛṇute yo haviṣmānnāsunvatā sakhyaṃ vaṣṭi śūraḥ

हिन्दी अर्थ

, भ्रथर्वेवेद-माष्य का०२० । सू ८१ जाति पर आपकाही प्रभाव छाया हूभ्राहै। ( वसो ) हि विदववासिन् ! ( नः) हमारे लिये भ्राप ( सुकृधि ) यह सुगमता कर दीजिये किं हम (विथ॒राः) व्यथादायी, (पिन्दनाः) हमारी शक्तयो को पी जाने में दानव- भाप के सेको चुलोक हो, (उत) गौर (शतं भमः) संकटों भरभियां (स्युः)

English

Grant us high fame, O Indra, grant riches bestowing thousands, those Fair fruits of earth borne home in wains.

अध्याय 20

श्लोक 89.5

धनं॒ न स्प॒न्द्रं ब॑हु॒लं यो अ॑स्मै ती॒व्रान्त्सोमां॑ आसु॒नोति॒ प्रय॑स्वान्।तस्मै॒ शत्रू॑न्त्सु॒तुका॑न् प्रा॒तरह्नो॒ नि स्वष्ट्रा॑न् यु॒वति॒ हन्ति॑ वृ॒त्रम्

dhanaṃ na spandraṃ bahulaṃ yo asmai tīvrāntsomāṃ āsunoti prayasvān| tasmai śatrūntsutukān prātarahno ni svaṣṭrān yuvati hanti vṛtram

हिन्दी अर्थ

भूलोक हो, ये सब मिल .करमभी, (त्वा) भ्रापकी विमूताका (भ्रनु भ्रष्ट) भुकाबिला (न) नहीं कर सकते, (न) नहीं कर सक्ते, जवं कि भ्राप (जातम्) विभुरूप मे प्रकट होते है। (महिना ) निज महिमा के कारण, तथा (शवसा) निज स्वाभाविक दाक्ति

English

Praising with songs the praise-worthy who cometh to our aid, we call Indra, the Treasure-Lord of wealth.

अध्याय 20

श्लोक 89.6

यस्मि॑न् व॒यं द॑धि॒मा शंस॒मिन्द्रे॒ यः शि॒श्राय॑ म॒घवा॒ काम॑म॒स्मे।आ॒राच्चि॒त् सन् भ॑यतामस्य॒ शत्रु॒र्न्यऽस्मै द्यु॒म्ना जन्या॑ नमन्ताम्

yasmin vayaṃ dadhimā śaṃsamindre yaḥ śiśrāya maghavā kāmamasme| ārāccit san bhayatāmasya śatrurnya'smai dyumnā janyā namantām

हिन्दी अर्थ

(इन्द्र) है परमेदवर ! (यावतः) जितने एेषवयं के -( त्वम् ) आप भ्र॑धीदवर है, (एतावत्) इतने एेदवयं का (यद्) यदि (ईशीय) मै मधीष्वर . . षेय) धारण-पोषण -करू- । (रदावसो ) है संम्पत्तियो के दाता ! यै म्रापकीः , दी हई सम्पत्ति को ( पापत्वाय पापी को पापकर्मकरनेके लिये .

English

To lofty Indra, dweller by each libation, the pious man Sings forth aloud a strengthening hymn.

अध्याय 20

श्लोक 89.7

आ॒राच्छत्रु॒मप॑ बाधस्व दू॒रमु॒ग्रो यः शम्बः॑ पुरुहूत॒ तेन॑ ।अ॒स्मे धे॑हि॒ यव॑म॒द् गोमदिन्द्र कृ॒धी धियं॑ जरि॒त्रे वाज॑रत्नाम्

ārācchatrumapa bādhasva dūramugro yaḥ śambaḥ puruhūta tena | asme dhehi yavamad gomadindra kṛdhī dhiyaṃ jaritre vājaratnām

हिन्दी अर्थ

इन्द्र ) है परमेहवर ! (त्रिधातु) तीनों लोर्को का धारण करनेवाला, २५६ भयववेद-माष्य का०२० सण कण उपासक को (छदिः) एेसा शरीर-गृह (यच्छ). प्रदान कीजिये, ( त्रिधातु ) धारण-पोषण करनेवाले हों तथा ( त्रिवरूथम् ) जिस केः तीन-षेरे भर्थात् स्थूल शरी र,सूक्ष्म शरीर, कारण शरीर रूपी तीन प्रकार के संतापो से रदित

English

In all libations men with hero spirit urge thee, Universal, One, each seeking several light, each fain to win the light apart.

अध्याय 20

श्लोक 89.8

प्र यम॒न्तर्वृ॑षस॒वासो॒ अग्म॑न् ती॒व्राः सोमा॑ बहु॒लान्ता॑स॒ इन्द्र॑म्।नाह॑ दा॒मानं॑ म॒घवा॒ नि यं॑स॒न् नि सु॑न्व॒ते व॑हति॒ भूरि॑ वा॒मम्

pra yamantarvṛṣasavāso agman tīvrāḥ somā bahulāntāsa indram| nāha dāmānaṃ maghavā ni yaṃsan ni sunvate vahati bhūri vāmam

हिन्दी अर्थ

(दिद्य म्) सब प्रकार के संतापं को (यावय) पृथक् कीजिये। है, (अघ) तदनन्तर ( मघवन् गिर्व॑णः इन्दर ) है देदवयंशाली, तथा वेद- .. वांणियों हारा भजनीय परमेदवर ! श्राप, ( नः ). एेसे हम उपासको के

English

Thee, furthering like a ship, will we set to the chariot pole of strength, As men who win with sacrifices Indra’s thought, men who win

अध्याय 20

श्लोक 89.9

उ॒त प्र॒हामति॑दीवा जयति कृ॒तमि॑व श्व॒घ्नी वि चि॑नोति काले।यो दे॒वका॑मो॒ न धनं॑ रु॒णद्धि॒ समित् तं रा॒यः सृ॑जति स्व॒धाभिः॑

uta prahāmatidīvā jayati kṛtamiva śvaghnī vi cinoti kāle| yo devakāmo na dhanaṃ ruṇaddhi samit taṃ rāyaḥ sṛjati svadhābhiḥ

हिन्दी अर्थ

(तनूपाः) शरीरो के रक्षक हो जाते है भौर (अन्तमः) अधिक समीप तथा प्रकट हूजिये । (दमे ) ये (सुताः) गाप के उपासक पुत्र ( त्वायवः ) भाप . कीः-ही कामनावाले है.1 ये.(तकाः) आप की सन्ताने, (अण्वीमिः उपासनाः धम .की सूक्ष्म दष्टियों दवारा, (पूतासः) पवित्र हो चुकी 1 . का०२० सु० ८५ , भथववेद-माष्य , २०७

English

Indra with their lauds. Couples desirous of thine aid are storming thee, pouring their presents forth to win a stall of

अध्याय 20

श्लोक 89.10

गोभि॑ष्टरे॒माम॑तिं दु॒रेवां॒ यवे॑न वा॒ क्षुधं॑ पुरुहूत॒ विश्वे॑ ।व॒यं राज॑सु प्रथ॒मा धना॒न्यरि॑ष्टासो वृज॒नीभि॑र्जयेम

gobhiṣṭaremāmatiṃ durevāṃ yavena vā kṣudhaṃ puruhūta viśve | vayaṃ rājasu prathamā dhanānyariṣṭāso vṛjanībhirjayema

हिन्दी अर्थ

वरत्) भ्र्ञानमय परदे कोहटादेताहै। १९६. श्र करदः. आ भैर पितो पु्यो वा । प्रर ह = + प्रदान कीजिये, (यथा) जसे (पिता). पिता (पुत्रम्यः)

English

Songs have outpoured themselves to thee, Indra, the strong, the guardian Lord. And raised themselves unsatisfied.

अध्याय 20

श्लोक 89.11

बृह॒स्पति॑र्नः॒ परि॑ पातु प॒श्चादु॒तोत्त॑रस्मा॒दध॑रादघा॒योः ।इन्द्रः॑ पु॒रस्ता॑दु॒त म॑ध्य॒तो नः॒ सखा॒ सखि॑भ्यो॒ वरी॑यः कृणोतु

bṛhaspatirnaḥ pari pātu paścādutottarasmādadharādaghāyoḥ | indraḥ purastāduta madhyato naḥ sakhā sakhibhyo varīyaḥ kṛṇotu

हिन्दी अर्थ

। तो को उपयुक्त शक्ति देता है । ( पुचृत ) है बहत नामो द्वारा स्मरण ॥ -का० २०। सू9 ८6 परथवेमेद-ाम्य ह ९११ किये गए पंरमे्वर ! ( अस्मिन् यामनि ) जीवन की इस घड़ी मेँ ( नः . शिक्ष ) आप हरमे रिक्षा दरीलिये । ताकि (जीवाः) इस वत्तंमान जीवन में

English

Send to us bounty manifold, O Indra, worthy of our wish, For power supreme is only thine.

अध्याय 20

श्लोक 90.1

यो अ॑द्रि॒भित् प्र॑थम॒जा ऋ॒तावा॒ बृह॒स्पति॑राङ्गिर॒सो ह॒विष्मा॑न्।द्वि॒बर्ह॑ज्मा प्राघर्म॒सत् पि॒ता न॒ आ रोद॑सी वृष॒भो रो॑रवीति

yo adribhit prathamajā ṛtāvā bṛhaspatirāṅgiraso haviṣmān| dvibarhajmā prāgharmasat pitā na ā rodasī vṛṣabho roravīti

हिन्दी अर्थ

है । इस लिये (सुतावतः) भक्तिरस से सम्पन्त (वाघतः) उपासना-यज्ञ के ५२८. इन्द्रा यहि तृठंजानः उप॒ व्रह्माणि हरिवः (इन्द्र) है परमेदवर ! भाप (भ्रा याहि) प्रकट हृजिये । . (तूतुजानः)

English

kine, pouring gifts, Indra, seeking thee. When two men seeking spoil or heaven thou bringest face to face in war,

अध्याय 20

श्लोक 90.2

जना॑य चि॒द् य ईव॑ते उ लो॒कं बृह॒स्पति॑र्दे॒वहू॑तौ च॒कार॑ ।घ्नन् वृ॒त्राणि॒ वि पुरो॑ दर्दरीति॒ जयं॒ छत्रूं॑र॒मित्रा॑न् पृ॒त्सु साह॑न्

janāya cid ya īvate u lokaṃ bṛhaspatirdevahūtau cakāra | ghnan vṛtrāṇi vi puro dardarīti jayaṃ chatrūṃramitrān pṛtsu sāhan

हिन्दी अर्थ

स्तुत्ियों के (उप) समीप प्रकट हृजिये । ओर (नः) हमारी (सुते) -सन्तानों किसी को .(विशंसत मा). विशिष्टु-स्तुतियांःन करो, ( मा रिषण्यत ओौर इस प्रकार विनष्ट न होभ्रो ।. ( सुते ) भक्तिरस के आवेश मे, (. सचा ) ही (स्तोत)स्तुतियां करो 1 (च) भौर (भृहुः) बार-बार (उक्था) बदिक-सूक्तौ का (शंसत) प्रलंसारूप मेंउच्चारंण किया करोः।

English

Thou showest Indra, then the bolt thy constant friend, the bull that ever waits on thee, Also this morn may he be well inclined to us, mark at our call our offerings and our song of

अध्याय 20

श्लोक 90.3

बृह॒स्पतिः॒ सम॑जय॒द् वसू॑नि म॒हो व्र॒जान् गोम॑तो दे॒व ए॒षः ।अ॒पः सिषा॑स॒न्त्स्व॑१रप्र॑तीतो॒ बृह॒स्पति॒र्हन्त्य॒मित्र॑म॒र्कैः

bṛhaspatiḥ samajayad vasūni maho vrajān gomato deva eṣaḥ | apaḥ siṣāsantsva1rapratīto bṛhaspatirhantyamitramarkaiḥ

हिन्दी अर्थ

२०८ भ्रथववैद-माष्य का० २० सु० ८५ ५६३०. अवक्रधिणं इषुं यथाजुरं गां न शरषणीसहैम् । . विदरेषणं संबर्ननोष्यकरं म॑दहिष्टपुभया विनम् ॥२॥ बैल जंसे कृषि करते समय मूमि को हल दवारा उखाड देता हैवैसेःदुष्कभियों

English

praise, our call that we may win the light. As thou, O Indra Thunder-armed, wilt, as the Strong One, slay the foe,

अध्याय 20

श्लोक 91.1

इ॒मां धियं॑ स॒प्तशी॑र्ष्णीं पि॒ता न॑ ऋ॒तप्र॑जातां बृह॒तीम॑विन्दत्।तु॒रीयं॑ स्विज्जनयद् वि॒श्वज॑न्यो॒ऽयास्य॑ उ॒क्थमिन्द्रा॑य॒ शं॑सन्

imāṃ dhiyaṃ saptaśīrṣṇīṃ pitā na ṛtaprajātāṃ bṛhatīmavindat| turīyaṃ svijjanayad viśvajanyo'yāsya ukthamindrāya śaṃsan

हिन्दी अर्थ

षणम्) देषभावना्ओं से रहित, ( संवनना ) अनुग्रह्, तथा ( उभयंकरम् ५२९) बार-बार प्रशंसा किया करो । का विनाश करनेवाले,क्षय करनेवाले (क्षिण् हिसायाम्) । तथा “वृषमं यथा जरम्” = गाड़ी मे जुते बेल के सदुश प्रगति देनेवाले .। बढ़ोतरी का (भूतु) वर्णन करनेवाला होता है । ६१३१. बिं व॑हैरयन्ते मधवन्. विपुरचिताऽथो विपो जनानाम् ।

English

Listen, thou to the prayer of me a later sage, hear thou a later sage’s prayer. Never do men attain, O Wonder-worker, thy greatness, Mighty

अध्याय 20

श्लोक 91.2

ऋ॒तं शंस॑न्त ऋ॒जु दीध्या॑ना दि॒वस्पु॒त्रासो॒ असु॑रस्य वी॒राः ।विप्रं॑ प॒दमङ्गि॑रसो॒ दधा॑ना य॒ज्ञस्य॒ धाम॑ प्रथ॒मं म॑नन्त

ṛtaṃ śaṃsanta ṛju dīdhyānā divasputrāso asurasya vīrāḥ | vipraṃ padamaṅgiraso dadhānā yajñasya dhāma prathamaṃ mananta

हिन्दी अर्थ

(दधिषे) तू धारण करता है, (दिवे दिवे) प्रतिदिन (इत्) ही तू(भ्रस्य ) इस , हृदा) मानो भ्रपनी हादिक भावना से, (उत) ओर (मनसा) इच्छापुवक, भव्रितरसों की (पाहि) रक्षा किया कीजिये, अर्थात् आपं की कृपा से हमारे है, जिसे (तारक-विवेकज-ज्ञानः कहते है । यह तारक-विवेकज-ज्ञान योगी

English

Controller’s car Which his two tawny coursers draw, then Indra is the Sovran

अध्याय 20

श्लोक 91.3

हं॒सैरि॑व॒ सखि॑भि॒र्वाव॑दद्भिरश्म॒न्मया॑नि॒ नह॑ना॒ व्यस्य॑न्।बृह॒स्पति॑रभि॒कनि॑क्रद॒द् गा उ॒त प्रास्तौ॒दुच्च॑ वि॒द्वां अ॑गायत्

haṃsairiva sakhibhirvāvadadbhiraśmanmayāni nahanā vyasyan| bṛhaspatirabhikanikradad gā uta prāstauducca vidvāṃ agāyat

हिन्दी अर्थ

को भवसागरसेतरादेताहै। इस तारक-विवेकज-जञान मे सब विषयों का, सब प्रकार से युगपत् ज्ञान हौ जाता.ह। (योगदशंन ३।४९, ५२, ५४; ५३६. जन्नानः सोमं सहसे पपाथ प्र तं माता महिमानमुवाच ।

English

Lord of power whose fame spreads far and wide. With him too is this rain of his that comes like herds: Indra throws drops of moisture on his

अध्याय 20

श्लोक 91.4

अ॒वो द्वाभ्यां॑ प॒र एक॑या॒ गा गुहा॒ तिष्ठ॑न्ती॒रनृ॑तस्य॒ सेतौ॑ ।बृह॒स्पति॒स्तम॑सि॒ ज्योति॑रि॒च्छन्नुदु॒स्रा आक॒र्वि हि ति॒स्र आवः॑

avo dvābhyāṃ para ekayā gā guhā tiṣṭhantīranṛtasya setau | bṛhaspatistamasi jyotiricchannudusrā ākarvi hi tisra āvaḥ

हिन्दी अर्थ

एनद्र॑पप्रा्ोषैशन्तरिंं युधा देवेभ्यो बरिवथकयं ॥३॥ हे परमेश्वरः ! (जज्ञानः) प्रकट हए भाप, जब. ( सहसे ) उपासक के बल तथा साहस की वुद्धि के निमित्त, उस के ( सोमम्. ) भित्तरस कीः माता, (ते) भाप की (महिमानम्) महिमा का (प्र उवाच) कथन, उपासक

English

yellow beard. When the sweet juice is shed he seeks the pleasant place, and stirs the worshipper as the wind

अध्याय 20

श्लोक 91.5

वि॒भिद्या॒ पुरं॑ श॒यथे॒मपा॑चीं॒ निस्त्रीणि॑ सा॒कमु॑द॒धेर॑कृन्तत्।बृह॒स्पति॑रु॒षसं॒ सूर्यं॒ गाम॒र्कं वि॑वेद स्त॒नय॑न्निव॒ द्यौः

vibhidyā puraṃ śayathemapācīṃ nistrīṇi sākamudadherakṛntat| bṛhaspatiruṣasaṃ sūryaṃ gāmarkaṃ viveda stanayanniva dyauḥ

हिन्दी अर्थ

अन्तरिक्ष मेँ (प्राथ) भरपुर हृए-हुए है । भौर भ्राप ही देवासुर-तंगरामों भे, (यषा) असुरो कं साथं भानो युद्ध करके, ( देवेभ्यः ) दिव्य-उपासकों के लिये, (वरिवः) मोक्षघन (चकथं ) प्रकट करते हैँ ।

English

disturbs the wood. We laud and praise his several deeds of valour who, fatherlike,. with power hath made us

अध्याय 20

श्लोक 91.6

इन्द्रो॑ व॒लं र॑क्षि॒तारं॒ दुघा॑नां क॒रेणे॑व॒ वि च॑कर्ता॒ रवे॑ण ।स्वेदा॑ञ्जिभिरा॒शिर॑मि॒च्छमा॒नोऽरो॑दयत् प॒णिमा गा अ॑मुष्णात्

indro valaṃ rakṣitāraṃ dughānāṃ kareṇeva vi cakartā raveṇa | svedāñjibhirāśiramicchamāno'rodayat paṇimā gā amuṣṇāt

हिन्दी अर्थ

चित्तवृत्तिं ने परमेकश्वरीय महिमा का कथन किया है । ॑ (मन्थमानान् ) भ्रपनी शक्तियों के भरभिमानवाले, ( महतः ) महा- शक्तिशाली कामादि के साथ यद् योधय) युद्ध मे, जब भ्रापने हमे भिडा दिया है, तब, बाहुभिः) मानो निज बाहों क दवारा, बलों दारा; (शाशदानान्) हमारा विनाश करते हुए (तान्) उन कामादि का (साक्षाम) हम पराभव कर देते है (यद् वा) अथवा (नुभिः) उपासक-नेताश्रों द्वारा (वृतः) वरण किये गए ( इन्द्र ) है परमेदवर ! जब भ्राप, ( अभियुध्याः ) कामादि पद

English

293 stronger;

अध्याय 20

श्लोक 91.7

स ईं॑ स॒त्येभिः॒ सखि॑भिः शु॒चद्भि॒र्गोधा॑यसं॒ वि ध॑न॒सैर॑दर्दः ।ब्रह्म॑ण॒स्पति॒र्वृष॑भिर्व॒राहै॑र्घ॒र्मस्वे॑देभि॒र्द्रवि॑णं॒ व्याऽनट्

sa īṃ satyebhiḥ sakhibhiḥ śucadbhirgodhāyasaṃ vi dhanasairadardaḥ | brahmaṇaspatirvṛṣabhirvarāhairgharmasvedebhirdraviṇaṃ vyā'naṭ

हिन्दी अर्थ

भ्राजिम् ) उस देवासुर-संप्राम पर ( जयेम ) हम विजय पा लेते है । रौर यदेददेीरसंदिष्ट माया अर्थाभबत् केवलः सोमो अस्य ॥९॥ (मघवा) देदवयंशाली परमेश्वर ने (चकार) किया है । ( यदा इत् ) जब

English

Who with his voice slew many thousand wicked ones who spake in varied manner with contemptuous cries.

अध्याय 20

श्लोक 91.8

ते स॒त्येन॒ मन॑सा॒ गो॑पतिं॒ गा इ॑या॒नास॑ इषणयन्त धी॒भिः ।बृह॒स्पति॑र्मि॒थोअ॑वद्यपेभि॒रुदु॒स्रिया॑ असृजत स्व॒युग्भिः॑

te satyena manasā gopatiṃ gā iyānāsa iṣaṇayanta dhībhiḥ | bṛhaspatirmithoavadyapebhirudusriyā asṛjata svayugbhiḥ

हिन्दी अर्थ

ही परमेवर ने (श्रदेवीः माया) भदिव्य-मायां-नाल का (भ्रसदिष्ट) परा- २१२. भ्रथववेद-माष्य का० २० ।सू० व . भव कर दिया, (भथ) तभी से (सोमः) हमारा भक्तिरस, ( केवलः.) केवल हे परमेकवर ! ( भरभितः) सब भ्रोर, ( इदं विदवम् ) यह सब, जो

English

O Soma-drinker, ever true, utterly hopeless though we be, Do thou, O Indra, give us hope of beauteous horses and of kine,

अध्याय 20

श्लोक 91.9

तं व॒र्धय॑न्तो म॒तिभिः॑ शि॒वाभिः॑ सिं॒हमि॑व॒ नान॑दतं स॒धस्थे॑ ।बृह॒स्पतिं॒ वृष॑णं॒ शूर॑सातौ॒ भरे॑भरे॒ अनु॑ मदेम जि॒ष्णुम्

taṃ vardhayanto matibhiḥ śivābhiḥ siṃhamiva nānadataṃ sadhasthe | bṛhaspatiṃ vṛṣaṇaṃ śūrasātau bharebhare anu madema jiṣṇum

हिन्दी अर्थ

आप ही (पर्यसि) निरीक्षण कर रहे है, गौर जिसे हम उपासक भी, भाप परमेदवर (एकः) भाप भ्रकेले ही (गवाम् ) समग्र भूवनों के ( गोपतिः.) भूवनपति (भसि) ह । है परमेदवर ! (प्रयतस्य) भाप द्वारा दी गई पवित्र

English

In thousands, O most wealthy One. O Lord of strength, whose jaws are strong, great deeds are thine, the powerful:

अध्याय 20

श्लोक 91.10

य॒दा वाज॒मस॑नद् वि॒श्वरू॑प॒मा द्यामरु॑क्ष॒दुत्त॑राणि॒ सद्म॑ ।बृह॒स्पतिं॒ वृष॑णं व॒र्धय॑न्तो॒ नाना॒ सन्तो॒ बिभ्र॑तो॒ ज्योति॑रा॒सा

yadā vājamasanad viśvarūpamā dyāmarukṣaduttarāṇi sadma | bṛhaspatiṃ vṛṣaṇaṃ vardhayanto nānā santo bibhrato jyotirāsā

हिन्दी अर्थ

( मंचवन्-) है ेष्वय॑शालिन् ( विपदिचतः ) मेधावी उपासक, प्रापणीय है, श्रौर श्राप हो ( जनानाम् ) सब जनों भँ ( विपः) . (ऊतये) . हमारी रक्षा के लिये, (पूरुरूपम्) नानारूप (वाजम्) शारीरिक,

English

One who must be lauded, Nor, Indra, thine heroic power and bounty.

अध्याय 20

श्लोक 91.11

स॒त्यमा॒शिषं॑ कृणुता वयो॒धै की॒रिं चि॒द्ध्यव॑थ॒ स्वेभि॒रेवैः॑ ।प॒श्चा मृधो॒ अप॑ भवन्तु॒ विश्वा॒स्तद् रो॑दसी शृणुतं विश्वमि॒न्वे

satyamāśiṣaṃ kṛṇutā vayodhai kīriṃ ciddhyavatha svebhirevaiḥ | paścā mṛdho apa bhavantu viśvāstad rodasī śṛṇutaṃ viśvaminve

हिन्दी अर्थ

करादये । विपः मेधावी (निघ ० ३।१५). । जनानां विपः न्=अर्थात् मनुष्यो . म गाप जसा कोर्द मेघावी नहीं है । लग गई हैँ ।. वे मानो भरव सखा वन कर ( सधमादे ) मेरे भौर भापके इए, (सोमम्) मेरे भक्तिरस के (उपर) समीप (याहि) प्राप्त हृजिये ।

English

Bring to the Wise, the Great who waxeth mighty your offerings and make ready your devotion:

अध्याय 20

श्लोक 91.12

इन्द्रो॑ म॒ह्ना म॑ह॒तो अ॑र्ण॒वस्य॒ वि मू॒र्धान॑मभिनदर्बु॒दस्य॑ ।अह॒न्नहि॒मरि॑णात् सप्त सिन्धू॑न् दे॒वैर्द्या॑वापृथिवी॒ प्राव॑तं नः

indro mahnā mahato arṇavasya vi mūrdhānamabhinadarbudasya | ahannahimariṇāt sapta sindhūn devairdyāvāpṛthivī prāvataṃ naḥ

हिन्दी अर्थ

के प्रति (बषमाय). सुखो की वर्षा करनेवाले परमेश्वर कै परति, (जुहोतन ) २१० भ्रय्ववेद-माष्य का० २० । सु०८७ व्यक्ति से अवपानम् ) उसके हृदय में ्रवतरण कर मक्तिरसपःनको

English

To many clans he goeth, man’s Controller. When, with the Princes, Maghavan, famed of old, comes nigh the thunderbolt of gold and the

स्रोत: bhavykhatri/DharmicData · प्राप्त 3/6/2026

शास्त्रीय प्रामाणिकता एवं पारदर्शकताSources & Interpretation

स्रोत, संस्करण एवं व्याख्या वर्गीकरण

धर्म ग्रंथ पर मूल शास्त्र, पारंपरिक भाष्य और आधुनिक व्याख्या को पूर्णतः पृथक रखा जाता है ताकि पाठक को किसी भी व्याख्या के शास्त्र होने का भ्रम न हो।

सामग्री वर्गीकरण संकेत (Epistemic Content Labels)

6 स्तरिय प्रमाण व्यवस्था
मूल पाठOriginal text

अपौरुषेय / प्रामाणिक शास्त्र (Primary Canonical Scripture)

मूल संस्कृत, प्राकृत अथवा अवधी श्लोक/मंत्र। यह सर्वोच्च प्रमाण (प्रस्थान) है। इस पाठ में किसी भी आधुनिक व्याख्याकार का हस्तक्षेप नहीं है।

शाब्दिक अनुवादLiteral translation

पदार्थ व अन्वय (Direct Grammatical & Word-for-Word Meaning)

व्याकरणसम्मत प्रत्यक्ष शब्दार्थ (अन्वय)। बिना किसी दार्शनिक संप्रदाय के पूर्वाग्रह के, संस्कृत शब्दों का सटीक भाषांतर।

पारंपरिक भाष्यTraditional commentary

आचार्य परंपरा व टीका (Classical Lineage Commentary)

प्राचीन आचार्य परंपरा (यथा शंकराचार्य, रामानुजाचार्य, मध्वाचार्य, श्रीधर स्वामी) द्वारा विरचित शास्त्रीय भाष्य व टीकाएं।

सरल व्याख्याSimple explanation

भावार्थ व सुबोध प्रबोधन (Accessible Pedagogical Exposition)

आधुनिक जिज्ञासुओं के लिए सरल भाषा में भावार्थ। यह मूल मंत्र नहीं, बल्कि पाठ को सुगम बनाने हेतु संपादकीय व्याख्या है।

आधुनिक चिंतनModern reflection

समसामयिक विमर्श व अनुप्रयोग (Contemporary Application & Analysis)

दार्शनिक, मनोवैज्ञानिक व वैज्ञानिक समरूपताओं पर आधुनिक चिंतन। यह मूल शास्त्र का अंग नहीं है और इसे शास्त्रोक्त सिद्धांत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

शोध टिप्पणीResearch note

पांडुलिपि एवं ऐतिहासिक शोध (Critical Apparatus & Manuscript Research)

पांडुलिपि विविधताएं, पाठ-भेद (variant readings), छंद रचना, और ऐतिहासिक व तुलनात्मक भाषावैज्ञानिक शोध। यह शास्त्र का मूल संदेश बदलने हेतु नहीं, बल्कि पाठ की प्रामाणिकता परखने के लिए है।