ईशावास्योपनिषद्

Isha Upanishadश्लोक 17/1894%

Isha Upanishad 1.17

मूल पाठSource scriptureOriginal Sanskritमूल संस्कृत

वायुरनिलममृतमथेदं भस्मान्तं शरीरम् ।ॐ क्रतो स्मर कृतं स्मर क्रतो स्मर कृतं स्मर

अर्थMeaning
अनुवादTranslationLiteral Hindi Translationमूल हिन्दी अनुवाद (अक्षरशः)मूलानुवाद · Literal

मेरी प्राण-वायु अमर वायु (कौस्मिक वायु) में मिल जाए; यह शरीर राख हो जाए। ॐ — हे मन (क्रतो)! किए हुए कर्मों को स्मरण कर; स्मरण कर, हे मन, स्मरण कर!

अक्षरशः अनुवाद — मूल संस्कृत श्लोक के प्रत्येक पद का प्रत्यक्ष अर्थ।

अनुवादTranslationLiteral English TranslationLiteral Text

Let this breath go to the immortal breath; let this body be reduced to ashes. AUM. O mind (krato), remember what has been done; remember, O mind, remember!

Direct literal rendering preserving Sanskrit philosophical terminology.

व्याख्याVyakhya
संपादकीय व्याख्याEditorial explanationVyakhya (व्याख्या)व्याख्या

मृत्यु के क्षण में — या जीवन में, त्याग के हर क्षण में — जपने का मन्त्र। व्यक्तिगत प्राण ब्रह्माण्डीय प्राण में मिलता है; शरीर राख में लौटता है। मन को अपने कर्मों का स्मरण करने का आग्रह किया जाता है — क्योंकि वह अवशेष ही आगे जाता है।

विज्ञान एवं आधुनिक उपयोगScience & Modern Application
आधुनिक चिंतनModern reflection · not scriptureContemplative Reflection & Actionआधुनिक चिंतन
आधुनिक संदर्भ · Modern Context
आधुनिक समाज मृत्यु के विषय से भागता है। हम ऐसे जीते हैं मानो हमें कभी मरना ही नहीं है; और जब अचानक कोई गंभीर बीमारी या वृद्धावस्था द्वार खटखटाती है, तो मनुष्य भयंकर भय और पछतावे से भर जाता है। लोग जीवन भर उन तुच्छ लड़ाइयों, संपत्तियों और ईर्ष्याओं में समय गंवा देते हैं जिनका मृत्यु के क्षण में कोई मूल्य नहीं रह जाता। जब अंतिम समय आता है, तब याद आता है कि असली उद्देश्य तो पीछे छूट गया। ईशावास्य उपनिषद् यहाँ मृत्यु के क्षण का सामना करने का सर्वोच्च साहस और विवेक प्रदान करता है: "वायुरनिलममृतमथेदं भस्मान्तं शरीरम्। ॐ क्रतो स्मर कृतं स्मर क्रतो स्मर कृतं स्मर॥" (मेरा यह प्राण उस अमर समष्टि वायु में विलीन हो जाए, और यह नश्वर शरीर भस्म में समाप्त हो जाए! हे मेरे संकल्पवान मन (क्रतो)! तू अपने किए हुए कर्मों का स्मरण कर, अपने वास्तविक स्वरूप का स्मरण कर!)। उपनिषद् सिखाता है कि शरीर का अंत भस्म होना तय है; अंत समय में आपके साथ न आपका पद जाएगा, न आपका बैंक बैलेंस। केवल आपके द्वारा किए गए धर्म-कर्म और आपकी चेतना की पवित्रता ही आपके साथ जाएगी।
आज के जीवन में प्रयोग · Practical Application
- **नश्वरता की सजग स्मृति (Living with Memento Mori)**: यह स्मरण रखें कि यह शरीर एक दिन भस्म में मिल जाने वाला है; इस यथार्थ को याद रखने से व्यर्थ का घमंड, कटुता और तुच्छ विवाद तुरंत समाप्त हो जाते हैं। - **दैनिक आत्म-समीक्षा (Daily Purposeful Review)**: रात को सोने से पहले दिन भर के कर्मों की निष्पक्ष समीक्षा करें — "क्रतो स्मर कृतं स्मर" — क्या आज का दिन किसी सार्थक, कल्याणकारी और उद्देश्यपूर्ण कार्य में लगा या केवल समय व्यर्थ हुआ? - **अमर विरासत का निर्माण (Building a Meaningful Legacy)**: ऐसे कर्म कीजिए और ऐसा आचरण रखिए जिसे जीवन के अंतिम क्षणों में याद करके आप संतुष्टि, गर्व और शांति का अनुभव कर सकें।
चिंतन प्रश्न · Self-Reflection

“यदि आज आपके जीवन का अंतिम दिन हो, तो क्या आप अपने किए हुए कर्मों को शांति और संतुष्टि से स्मरण कर पाएंगे, अथवा आपका हृदय पछतावे और व्यर्थ की चिंताओं से भर जाएगा?”

शोध संदर्भResearch context · not scriptureComparative Research Noteशोध टिप्पणी

शरीर वस्तुतः पुनर्चक्रित होता है: लगभग 60% जल जल-चक्र में लौटता है; कार्बन, नाइट्रोजन, कैल्शियम पारिस्थितिकी-तन्त्र में लौटते हैं; अन्तिम श्वास उस वायुमण्डल में मिलती है जिसे तुम्हारे वंशज साँस लेंगे। जो शेष रहता है वह स्मृति है — व्यक्तिगत (उनमें जो तुम्हें जानते थे) और सामूहिक (तुमने जो बनाया उसमें)।

A modern parallel offered for reflection. It is not part of the scripture, and it has not been checked against the original sources it may allude to.

स्रोतSources and editionSources and editionस्रोत एवं संस्करण

Content status

  • Original text
  • Translation · from the source archive

No independent human review is recorded for this verse yet. How this site is made.

Sanskrit edition
Kanva Recension, Shukla Yajurveda Samhita Ch. 40. Göttingen Register of Electronic Texts in Indian Languages (GRETIL)
Translation
Gita Press Gorakhpur & Swami Nikhilananda
Last updated
2026-10-23
Licence note (as recorded)
Sanskrit mūla — public domain (2500+ years old). sanskritdocuments.org publishes digitized text under permissive terms.
पाठ-भेद · Variant readings
Madhyandina recension transposes mantras 5 and 6 and alters initial phrasing in mantra 16.

Found a mistake?

Interactive Verse Knowledge Graph · ज्ञान जाल

श्लोक सम्बन्ध एवं पार-ग्रंथ संदर्भ

Reviewed links only. A line here is a stored connection, not a guess from the neighboring verse.

Isha Upanishad 1.17Current VerseBhagavadBhagavad Gita Bh…ChandogyChandogya Upanis…
🟣Cross-Scriptural Linkपार-ग्रंथ सम्बन्ध (गीता ↔ उपनिषद् ↔ रामायण)

Bhagavad Gita 10.12

Bhagavad Gita (श्रीमद्भगवद्गीता)

Sanskrit Text (मूल श्लोक / मंत्र)

परमं ब्रह्म परमं धाम पवित्रं परमं भवान्

Translation / Meaning (भावार्थ)

You are the Supreme Brahman, the supreme abode, the supreme purifier.

Why This is Connected (सम्बन्ध का आधार)

Listed beside Brahman in this library. The link does not say the passages teach the same thing.

आगे क्या · What next