कठोपनिषद्

Vallī 4श्लोक 10/1567%

Katha Upanishad 4.10

मूल पाठSource scriptureOriginal Sanskritमूल संस्कृत

यदेवेह तदमुत्र यदमुत्र तदन्विह ।मृत्योः स मृत्युमाप्नोति य इह नानेव पश्यति

अर्थMeaning
अनुवादTranslationLiteral Hindi Translationमूल हिन्दी अनुवाद (अक्षरशः)मूलानुवाद · Literal

जो यहाँ है, वही वहाँ है; जो वहाँ है, वही यहाँ है। जो यहाँ बहुलता देखता है, वह मृत्यु से मृत्यु को प्राप्त करता है।

अक्षरशः अनुवाद — मूल संस्कृत श्लोक के प्रत्येक पद का प्रत्यक्ष अर्थ।

अनुवादTranslationLiteral English TranslationLiteral Text

What is here is there; what is there is here. He who sees many here goes from death to death.

Direct literal rendering preserving Sanskrit philosophical terminology.

व्याख्याVyakhya
संपादकीय व्याख्याEditorial explanationVyakhya (व्याख्या)व्याख्या

अद्वैत का महा-सिद्धांत: जो यहाँ (इस पिण्ड/शरीर में) है, वही वहाँ (उस ब्रह्मांड/परब्रह्म में) है; और जो वहाँ है, वही यहाँ है। जो मनुष्य यहाँ नानात्व (भेद, पृथकता) देखता है — वह मृत्यु से मृत्यु को (बार-बार जन्म और मरण के घोर अंधकार को) प्राप्त होता है!

विज्ञान एवं आधुनिक उपयोगScience & Modern Application
आधुनिक चिंतनModern reflection · not scriptureContemplative Reflection & Actionआधुनिक चिंतन
आधुनिक संदर्भ · Modern Context
यह उपनिषदों का सबसे प्रसिद्ध और क्रांतिकारी अद्वैत महावाक्य है: 'यदेवेह तदमुत्र यदमुत्र तदन्विह। मृत्योः स मृत्युमाप्नोति य इह नानेव पश्यति॥' — जो चेतना यहाँ इस छोटे से शरीर के भीतर स्थित है, वही चेतना सुदूर ब्रह्मांडों और संपूर्ण चराचर में व्याप्त है; और जो वहाँ अनंत में है, वही अक्षरशः यहाँ तुम्हारे हृदय में विराजमान है! जो अज्ञानी व्यक्ति यहाँ 'नाना' (भेद, अनेकता, परायापन) देखता है — जो सोचता है कि मैं अलग हूँ, दूसरा अलग है, ईश्वर कहीं दूर है — वह बार-बार मृत्यु के जबड़ों में गिरता है और कभी दुखों से मुक्त नहीं हो पाता। आधुनिक समाज में सभी संघर्षों, युद्धों, नस्लवाद, जातिवाद और मानसिक तनावों की एकमात्र जड़ यह 'नानात्व' (भेद-दृष्टि) ही है। जब हम दूसरों को अपने से अलग, प्रतिस्पर्धी या शत्रु मान लेते हैं, तो भय और घृणा का जन्म होता है। अल्बर्ट आइंस्टीन ने भी कहा था कि स्वयं को शेष ब्रह्मांड से अलग मानना मानव चेतना का एक 'ऑप्टिकल इल्यूजन' (optical delusion) है। जब आप यह जान लेते हैं कि जो मेरे भीतर है वही सामने वाले के भीतर भी धड़क रहा है, तो सारा परायापन समाप्त हो जाता है और केवल असीम प्रेम व करुणा शेष रह जाती है।
आज के जीवन में प्रयोग · Practical Application
- **भेद-दृष्टि का विसर्जन**: दूसरों के साथ व्यवहार करते समय उनके पद, जाति या चेहरे के पार जाकर उनके भीतर उसी एक चेतना को देखने का अभ्यास करें जो आपके भीतर है। - **पिण्ड और ब्रह्मांड की एकात्मता**: अपने एकाकीपन को तोड़ें; अनुभव करें कि संपूर्ण ब्रह्मांड और आप एक ही अद्वैत चेतना के ताने-बाने से बुने हुए हैं। - **सहानुभूति और करुणा**: जब किसी को कष्ट में देखें, तो समझें कि वह कष्ट आपसे अलग नहीं है; यथाशक्ति सहयोग और प्रेम का विस्तार करें।
चिंतन प्रश्न · Self-Reflection

“क्या मैं लोगों और परिस्थितियों को 'अपने' और 'पराए' के संकीर्ण भेद से देख रहा हूँ, अथवा मेरी दृष्टि उस अद्वैत सत्य में स्थित है जहाँ 'जो यहाँ है, वही वहाँ है'?”

शोध संदर्भResearch context · not scriptureComparative Research Noteशोध टिप्पणी

होलोग्राफिक ब्रह्मांड और क्वांटम गैर-द्वैतवाद (Holographic Principle & Non-duality): होलोग्राफिक सिद्धांत के अनुसार ब्रह्मांड के प्रत्येक सूक्ष्म अंश में संपूर्ण ब्रह्मांड की संपूर्ण सूचना समाहित होती है।

A modern parallel offered for reflection. It is not part of the scripture, and it has not been checked against the original sources it may allude to.

स्रोतSources and editionSources and editionस्रोत एवं संस्करण

Content status

  • Original text
  • Translation · from the source archive

No independent human review is recorded for this verse yet. How this site is made.

Sanskrit edition
Krishna Yajurveda Kathaka Shakha Recension. Adyar Library / SanskritDocuments
Translation
Swami Gambhirananda, Prof. S. Radhakrishnan
Last updated
2026-10-24
Licence note (as recorded)
Sanskrit mūla — public domain (2500+ years old). sanskritdocuments.org publishes digitized text under permissive terms.
पाठ-भेद · Variant readings
Slight verbal variations noted between Anandashram Sanskrit Series no. 7 and BORI manuscripts.

Found a mistake?

Interactive Verse Knowledge Graph · ज्ञान जाल

श्लोक सम्बन्ध एवं पार-ग्रंथ संदर्भ

Reviewed links only. A line here is a stored connection, not a guess from the neighboring verse.

Katha Upanishad 4.10Current VerseBhagavadBhagavad Gita Bh…ChandogyChandogya Upanis…
🟣Cross-Scriptural Linkपार-ग्रंथ सम्बन्ध (गीता ↔ उपनिषद् ↔ रामायण)

Bhagavad Gita 10.12

Bhagavad Gita (श्रीमद्भगवद्गीता)

Sanskrit Text (मूल श्लोक / मंत्र)

परमं ब्रह्म परमं धाम पवित्रं परमं भवान्

Translation / Meaning (भावार्थ)

You are the Supreme Brahman, the supreme abode, the supreme purifier.

Why This is Connected (सम्बन्ध का आधार)

Listed beside Brahman in this library. The link does not say the passages teach the same thing.

आगे क्या · What next