कठोपनिषद्

Vallī 5श्लोक 8/1553%

Katha Upanishad 5.8

मूल पाठSource scriptureOriginal Sanskritमूल संस्कृत

य एष सुप्तेषु जागर्ति कामं कामं पुरुषो निर्मिमाणः ।तदेव शुक्रं तद् ब्रह्म तदेवामृतमुच्यते ।तस्मिँल्लोकाः श्रिताः सर्वे तदु नात्येति कश्चन ।एतद्वै तत्

अर्थMeaning
अनुवादTranslationLiteral Hindi Translationमूल हिन्दी अनुवाद (अक्षरशः)मूलानुवाद · Literal

जो सोते हुओं के बीच भी जागता है — कामना-दर-कामना रचता हुआ — वही शुक्र (तेजोमय) है, वही ब्रह्म है, वही अमर कहा जाता है। उसी में सब लोक प्रतिष्ठित हैं; उसको कोई अतिक्रम नहीं करता। यही वह है।

अक्षरशः अनुवाद — मूल संस्कृत श्लोक के प्रत्येक पद का प्रत्यक्ष अर्थ।

अनुवादTranslationLiteral English TranslationLiteral Text

The Person who is awake while others sleep, fashioning desire after desire — that is the bright, that is Brahman, that is called the immortal. In him all worlds are established; no one transcends him. This indeed is That.

Direct literal rendering preserving Sanskrit philosophical terminology.

व्याख्याVyakhya
संपादकीय व्याख्याEditorial explanationVyakhya (व्याख्या)व्याख्या

स्वप्न-द्रष्टा अमर पुरुष: जब सब प्राणी सो रहे होते हैं, तब जो पुरुष जागता रहता है और मनचाहे भोगों और कामनाओं का निर्माण करता रहता है — वही विशुद्ध (शुक्र) है, वही साक्षात् ब्रह्म है, और उसी को अमर कहा जाता है! समस्त लोक उसी में आश्रित हैं, उसका कोई भी कभी उल्लंघन नहीं कर सकता। यही वह परम तत्त्व है (एतद्वै तत्)!

विज्ञान एवं आधुनिक उपयोगScience & Modern Application
आधुनिक चिंतनModern reflection · not scriptureContemplative Reflection & Actionआधुनिक चिंतन
आधुनिक संदर्भ · Modern Context
यमराज चेतना की परम स्वतंत्रता और उसके अविनाशी स्वरूप का प्रमाण देते हैं: 'य एष सुप्तेषु जागर्ति कामं कामं पुरुषो निर्मिमाणः। तदेव शुक्रं तद्ब्रह्म तदेवामृतमुच्यते। तस्मिंल्लोकाः श्रिताः सर्वे तदु नात्येति कश्चन। एतद्वै तत्॥' — जब पूरा संसार, तुम्हारा शरीर, तुम्हारी आँखें और ज्ञानेन्द्रियां गहरी नींद में सो जाती हैं, तब भी तुम्हारे भीतर वह कौन है जो जागता रहता है? वह पुरुष उस निद्रा में भी नाना प्रकार के स्वप्न-दृश्यों और कामनाओं की रचना करता है और उन्हें देखता है। वही विशुद्ध ज्योतिर्मय तत्त्व है, वही साक्षात् ब्रह्म है, और वही एकमात्र अमर सत्ता है! समस्त ब्रह्मांड उसी के आधार पर टिका है। यही वह परब्रह्म है। यह श्लोक भौतिकवाद के इस दावे को ध्वस्त कर देता है कि "चेतना केवल भौतिक मस्तिष्क का उप-उत्पाद है।" यदि ऐसा होता, तो जब मस्तिष्क की बाह्य इन्द्रियां सो जाती हैं, तब चेतना भी मिट जानी चाहिए थी। किन्तु स्वप्न में आप एक पूरा नया ब्रह्मांड बना लेते हैं — सूर्य, पहाड़, नदियां, लोग और भावनाएं — और उन्हें बिना किसी भौतिक आँख के देख रहे होते हैं। वह जो अंधेरे में भी देख रहा है, जो निद्रा में भी कभी सोता नहीं, वही तुम्हारा वास्तविक अमर 'मैं' है। वह जाग्रत, स्वप्न और सुषुप्ति तीनों का अखंड प्रकाशक है।
आज के जीवन में प्रयोग · Practical Application
- **नित्य जाग्रत साक्षी की पहचान**: जब रात को सोने जाएं, तो कुछ क्षण यह अनुभव करें कि "मेरा शरीर सो रहा है, किन्तु मेरे भीतर की चेतना कभी नहीं सोती; वह नित्य जाग्रत है।" - **स्वप्नों से अनासक्ति**: जैसे सुबह जागते ही रात के स्वप्नों का सुख-दुख समाप्त हो जाता है, वैसे ही जाग्रत संसार के उतार-चढ़ाव को भी साक्षी भाव से देखना सीखें। - **अमरता में विश्वास**: अपने आप को कभी असहाय या नश्वर न मानें; आपके भीतर वह परम ब्रह्म विराजमान है जो कभी नष्ट नहीं हो सकता।
चिंतन प्रश्न · Self-Reflection

“क्या मैं केवल उसी को सत्य मान रहा हूँ जो मेरी स्थूल आँखों को दिखता है, अथवा मैं अपने भीतर बैठे उस नित्य जाग्रत अमर पुरुष को पहचानता हूँ जो निद्रा में भी प्रकाशित रहता है?”

शोध संदर्भResearch context · not scriptureComparative Research Noteशोध टिप्पणी

स्वप्न-अवस्था में शुद्ध चेतना की स्वायत्तता (Lucid Consciousness in REM State): जब भौतिक इन्द्रियां और शरीर सुप्त होते हैं, तब भी चेतना आंतरिक जगत का निर्माण और प्रकाशन करती है; यह चेतना की स्वतंत्रता का अकाट्य प्रमाण है।

A modern parallel offered for reflection. It is not part of the scripture, and it has not been checked against the original sources it may allude to.

स्रोतSources and editionSources and editionस्रोत एवं संस्करण

Content status

  • Original text
  • Translation · from the source archive

No independent human review is recorded for this verse yet. How this site is made.

Sanskrit edition
Krishna Yajurveda Kathaka Shakha Recension. Adyar Library / SanskritDocuments
Translation
Swami Gambhirananda, Prof. S. Radhakrishnan
Last updated
2026-10-24
Licence note (as recorded)
Sanskrit mūla — public domain (2500+ years old). sanskritdocuments.org publishes digitized text under permissive terms.
पाठ-भेद · Variant readings
Slight verbal variations noted between Anandashram Sanskrit Series no. 7 and BORI manuscripts.

Found a mistake?

Interactive Verse Knowledge Graph · ज्ञान जाल

श्लोक सम्बन्ध एवं पार-ग्रंथ संदर्भ

Reviewed links only. A line here is a stored connection, not a guess from the neighboring verse.

Katha Upanishad 5.8Current VerseBhagavadBhagavad Gita Bh…ChandogyChandogya Upanis…
🟣Cross-Scriptural Linkपार-ग्रंथ सम्बन्ध (गीता ↔ उपनिषद् ↔ रामायण)

Bhagavad Gita 10.12

Bhagavad Gita (श्रीमद्भगवद्गीता)

Sanskrit Text (मूल श्लोक / मंत्र)

परमं ब्रह्म परमं धाम पवित्रं परमं भवान्

Translation / Meaning (भावार्थ)

You are the Supreme Brahman, the supreme abode, the supreme purifier.

Why This is Connected (सम्बन्ध का आधार)

Listed beside Brahman in this library. The link does not say the passages teach the same thing.

आगे क्या · What next