कठोपनिषद्

Vallī 5श्लोक 15/15100%

Katha Upanishad 5.15

मूल पाठSource scriptureOriginal Sanskritमूल संस्कृत

न तत्र सूर्यो भाति न चन्द्रतारकं नेमा विद्युतो भान्ति कुतोऽयमग्निः ।तमेव भान्तमनुभाति सर्वं तस्य भासा सर्वमिदं विभाति

अर्थMeaning
अनुवादTranslationLiteral Hindi Translationमूल हिन्दी अनुवाद (अक्षरशः)मूलानुवाद · Literal

वहाँ न सूर्य चमकता है, न चन्द्र-तारे, न ये बिजली — फिर यह अग्नि कहाँ? वह चमकता है, और उसी के बाद सब चमकते हैं; उसी की प्रभा से यह सब प्रकाशित होता है।

अक्षरशः अनुवाद — मूल संस्कृत श्लोक के प्रत्येक पद का प्रत्यक्ष अर्थ।

अनुवादTranslationLiteral English TranslationLiteral Text

There the sun does not shine, nor the moon and stars; nor these lightnings — much less this fire. He shining, all shine after him; by his light all this is illumined.

Direct literal rendering preserving Sanskrit philosophical terminology.

व्याख्याVyakhya
संपादकीय व्याख्याEditorial explanationVyakhya (व्याख्या)व्याख्या

सर्वोच्च प्रकाश का अमर शंखनाद: वहाँ उस परम पद में न सूर्य चमकता है, न चन्द्रमा और तारे चमकते हैं, और न ही ये बिजलियाँ चमकती हैं — फिर इस क्षुद्र लौकिक अग्नि की तो बात ही क्या! वह परमात्मा जब चमकता है, तभी उसके पीछे यह समस्त ब्रह्मांड चमकता है; उसी के एक प्रकाश से यह संपूर्ण जगत विविध रूपों में प्रकाशित हो रहा है!

विज्ञान एवं आधुनिक उपयोगScience & Modern Application
आधुनिक चिंतनModern reflection · not scriptureContemplative Reflection & Actionआधुनिक चिंतन
आधुनिक संदर्भ · Modern Context
यह संपूर्ण उपनिषद् वांग्मय का सबसे तेजस्वी, विस्मयकारी और कालजयी मंत्र है जिसे मुण्डकोपनिषद् (2:2:10) और श्वेताश्वतरोपनिषद् (6:14) में भी उसी भव्यता के साथ गाया गया है: 'न तत्र सूर्यो भाति न चन्द्रतारकं नेमा विद्युतो भान्ति कुतोऽयमग्निः। तमेव भान्तमनुभाति सर्वं तस्य भासा सर्वमिदं विभाति॥' — उस परम ब्रह्म-धाम में न इस प्रतापी सूर्य का कोई प्रकाश है, न चन्द्रमा और तारों की कोई चमक है, और न ही कड़कड़ाती हुई बिजलियों का कोई प्रकाश है; फिर इस मनुष्य द्वारा जलाई गई छोटी सी अग्नि की तो बिसात ही क्या! वह परमात्मा स्वयं प्रकाशमान है; और जब वह चमकता है, तभी उसके पीछे-पीछे यह सूर्य, चन्द्र, तारे और पूरी सृष्टि प्रकाशित होती है! उसी एक परम चेतना के प्रकाश से यह संपूर्ण ब्रह्मांड जगमगा रहा है! यह भौतिक विज्ञान के अहंकार को एक ही क्षण में शांत कर देने वाला सत्य है। हम सोचते हैं कि सूर्य के प्रकाश से संसार दिखता है। किन्तु विचार करो — यदि देखने वाली 'चेतना' ही न हो, तो क्या सूर्य का कोई अस्तित्व सिद्ध हो सकता है? यदि इस पूरे ब्रह्मांड में कोई आँख और कोई मन न हो, तो सूर्य का चमकना या न चमकना किसके लिए होगा? सूर्य, तारे और बिजलियाँ केवल जड़ ऊर्जा हैं। जो सत्ता इन सबको प्रकाशित करती है, जो सूर्य को उसका तेज देती है और तुम्हारी आँख को देखने की शक्ति देती है — वह तुम्हारी अपनी अंतरात्मा की चेतना है! तुम उस परम प्रकाश के अंश हो जिसके बिना यह संपूर्ण ब्रह्मांड घोर अंधकार में डूब जाएगा।
आज के जीवन में प्रयोग · Practical Application
- **परम प्रकाश के साथ तादात्म्य**: जब भी सूर्य, चन्द्रमा या तारों को देखें, तो गर्व और कृतज्ञता से अनुभव करें — "मेरी अंतरात्मा का प्रकाश ही इन सबको प्रकाशित कर रहा है; मैं इस विश्व का सच्चा प्रकाशक हूँ।" - **अंधकार और अवसाद से मुक्ति**: अपने जीवन में कभी भी निराशा या अवसाद के अंधकार को टिकने न दें; आपके भीतर वह परम सूर्य चमक रहा है जिसे कोई बादल कभी बुझा नहीं सकता। - **दिव्य आरती का भाव**: भारतीय परंपरा में संध्या समय की जाने वाली आरती का वास्तविक अर्थ यही है — उस परम प्रकाशक को पहचानना जिसकी ज्योति से यह पूरी सृष्टि जगमगा रही है।
चिंतन प्रश्न · Self-Reflection

“क्या मैं स्वयं को केवल एक छोटा सा नश्वर जीव मानकर अंधकार में भटक रहा हूँ, अथवा मैंने अपनी उस परम आत्म-ज्योति को पहचाना है जिसके प्रकाश से यह सूर्य, चन्द्र और समस्त ब्रह्मांड प्रकाशित हो रहा है?”

शोध संदर्भResearch context · not scriptureComparative Research Noteशोध टिप्पणी

चेतना — ब्रह्मांड का परम प्रकाशक (Consciousness as the Primary Illuminator): सूर्य, तारे और भौतिक प्रकाश केवल फोटॉन्स हैं; किन्तु इन फोटॉन्स और ब्रह्मांड के अस्तित्व को जो मूल चेतना जानती और प्रकाशित करती है, वही वास्तविक और स्वतंत्र प्रकाश है।

A modern parallel offered for reflection. It is not part of the scripture, and it has not been checked against the original sources it may allude to.

स्रोतSources and editionSources and editionस्रोत एवं संस्करण

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Sanskrit edition
Krishna Yajurveda Kathaka Shakha Recension. Adyar Library / SanskritDocuments
Translation
Swami Gambhirananda, Prof. S. Radhakrishnan
Last updated
2026-10-24
Licence note (as recorded)
Sanskrit mūla — public domain (2500+ years old). sanskritdocuments.org publishes digitized text under permissive terms.
पाठ-भेद · Variant readings
Slight verbal variations noted between Anandashram Sanskrit Series no. 7 and BORI manuscripts.

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श्लोक सम्बन्ध एवं पार-ग्रंथ संदर्भ

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🟣Cross-Scriptural Linkपार-ग्रंथ सम्बन्ध (गीता ↔ उपनिषद् ↔ रामायण)

Bhagavad Gita 10.12

Bhagavad Gita (श्रीमद्भगवद्गीता)

Sanskrit Text (मूल श्लोक / मंत्र)

परमं ब्रह्म परमं धाम पवित्रं परमं भवान्

Translation / Meaning (भावार्थ)

You are the Supreme Brahman, the supreme abode, the supreme purifier.

Why This is Connected (सम्बन्ध का आधार)

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आगे क्या · What next