अध्याय 154
श्लोक 397
जयत्यसौ धन्यतरो हिमाचलस् तदाश्रयं यस्य सुता तपस्यति स दैत्यराजो ऽपि महाफलोदयो विमूलिताशेषसुरो हि तारकः
jayatyasau dhanyataro himācalas tadāśrayaṃ yasya sutā tapasyati sa daityarājo 'pi mahāphalodayo vimūlitāśeṣasuro hi tārakaḥ
हिन्दी अर्थ
अजित, अमेय और अव्यक्त स्थितिवाले हैं, आपकी जय हो, जय हो, जय हो । आप परमार्थके प्रयोजनस्वरूप, सर्वज्ञ, ज्ञानद्वारा जानने योग्य और अपनी महिमासे प्रकट होनेवाले हैं, आपकी जय हो। आप सम्पूर्ण जगतूके साक्षी, जगत्के कर्ता और. जगतूके गुरु हैं, आपकी जय हो। देव! आप जगतूकी स्थिति, पालन और अन्त करनेवाले हैं, आपकी जय हो। आप शेषरूप, अशेषरूप तथा सम्पूर्ण प्राणियोंके हृदयमें स्थित रहनेवाले हैं, आपकी जय हो, जय हो, जय
English
Here ends the one hundred and fifty-fourth chapter on the birth of Kumdra Kdrtikeya.