न तद्भासयते सूर्यो न शशाङ्को न पावकः।यद्गत्वा न निवर्तन्ते तद्धाम परमं मम
na tad bhāsayate sūryo na śhaśhāṅko na pāvakaḥ yad gatvā na nivartante tad dhāma paramaṁ mama
neither
that
illumine
the sun
nor
the moon
nor
fire
where
having gone
never
they return
that
abode
supreme
mine
अर्थMeaning
उस-(परमपद-) को न सूर्य, न चन्द्र और न अग्नि ही प्रकाशित कर सकती है; और जिसको प्राप्त होकर जीव लौटकर (संसारमें) नहीं आते, वही मेरा परमधाम है।
अक्षरशः अनुवाद — मूल संस्कृत श्लोक के प्रत्येक पद का प्रत्यक्ष अर्थ।
That supreme light, upon reaching which they do not return any more, is Mine; neither the sun nor the moon nor the fire illuminates It.
Direct literal rendering preserving Sanskrit philosophical terminology.
व्याख्याVyakhya
जिस परमपद की खोज करने को कहा गया, भगवान अब उसका एक दिव्य वर्णन देते हैं। 'न तद्भासयते सूर्यो न शशाङ्को न पावकः', उसे न सूर्य प्रकाशित करता है, न चन्द्रमा, न अग्नि; 'यद्गत्वा न निवर्तन्ते', जहाँ जाकर जीव फिर नहीं लौटते, 'तद्धाम परमं मम', वही मेरा परमधाम है। सोचिए, संसार में प्रकाश के तीन ही मुख्य स्रोत हैं: दिन में सूर्य, रात में चन्द्रमा, और अन्धकार में अग्नि। हर वस्तु इन्हीं से प्रकाशित होती है। पर भगवान कहते हैं कि उनका धाम इनमें से किसी से प्रकाशित नहीं होता। क्यों? क्योंकि वह स्वयं प्रकाश है। उसे किसी बाहरी प्रकाश की आवश्यकता नहीं, जैसे सूर्य को देखने के लिए दीपक की आवश्यकता नहीं। यह श्लोक कठोपनिषद् और मुण्डकोपनिषद् के एक प्रसिद्ध मन्त्र की प्रतिध्वनि है, जहाँ कहा गया है कि वहाँ सूर्य नहीं चमकता, उसी के प्रकाश से यह सब चमकता है। जो प्रकाश सूर्य को प्रकाश देता है, वह परमधाम का प्रकाश है। और 'यद्गत्वा न निवर्तन्ते', जहाँ से लौटना नहीं, यह बताता है कि यह कोई स्वर्ग नहीं जिससे पुण्य क्षीण होने पर लौटना पड़े। यह अन्तिम घर है। यह श्लोक आपको एक आन्तरिक प्रकाश का संकेत देता है। आपकी चेतना, जिससे आप सूर्य को देखते हैं, वह सूर्य से भी बड़ी ज्योति है। उस ज्योति की ओर मुड़िए; वही परमधाम का द्वार है।
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- Sanskrit edition
- Gita Press Edition (गोरखपुर संवत् 2080). Gita Press, Gorakhpur / Muktabodha Digital Archive
- Translation
- Jayadayal Goyandka (Hindi), Swami Gambhirananda & Swami Sivananda (English)
- Source
- github.com/gita/gita
- Last updated
- 2026-10-23
- Licence note (as recorded)
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- पाठ-भेद · Variant readings
- Variant readings collated from Anandashram (Pune) and Bhandarkar Oriental Research Institute (BORI) critically edited texts.
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