कठोपनिषद्

Vallī 6श्लोक 2/1811%

Katha Upanishad 6.2

मूल पाठSource scriptureOriginal Sanskritमूल संस्कृत

यदिदं किञ्च जगत् सर्वं प्राण एजति निःसृतम् ।महद्भयं वज्रमुद्यतं य एतद्विदुरमृतास्ते भवन्ति

अर्थMeaning
अनुवादTranslationLiteral Hindi Translationमूल हिन्दी अनुवाद (अक्षरशः)मूलानुवाद · Literal

यह जो कुछ भी जगत् है — सब प्राण (ब्रह्म) से उत्पन्न होकर उसी में स्पन्दित होता है। वह महान् भय है, उठा हुआ वज्र है — जो इसे जानते हैं, वे अमर हो जाते हैं।

अक्षरशः अनुवाद — मूल संस्कृत श्लोक के प्रत्येक पद का प्रत्यक्ष अर्थ।

अनुवादTranslationLiteral English TranslationLiteral Text

All this universe, whatever exists, moves having come forth in the prāṇa (Brahman). It is a great terror, a raised thunderbolt. Those who know this become immortal.

Direct literal rendering preserving Sanskrit philosophical terminology.

व्याख्याVyakhya
संपादकीय व्याख्याEditorial explanationVyakhya (व्याख्या)व्याख्या

प्राण में स्पंदित ब्रह्मांड: यह जो कुछ भी दृश्यमान ब्रह्मांड है — वह सब उस मूल प्राण (परब्रह्म) से ही निःसृत होकर उसी में निरंतर स्पंदित (गतिमान) हो रहा है। वह परमात्मा उठाए हुए वज्र के समान अत्यंत भयानक और अनुशासनकारी है। जो उसे जान लेते हैं, वे अमर हो जाते हैं!

विज्ञान एवं आधुनिक उपयोगScience & Modern Application
आधुनिक चिंतनModern reflection · not scriptureContemplative Reflection & Actionआधुनिक चिंतन
आधुनिक संदर्भ · Modern Context
यमराज ब्रह्मांड की महा-गतिशीलता का अनावरण करते हैं: 'यदिदं किंच जगत्सर्वं प्राण एजति निःसृतम्। महद्भयं वज्रमुद्यतं य एतद्विदुरमृतास्ते भवन्ति॥' — यह संपूर्ण ब्रह्मांड — सभी आकाशगंगाएं, तारे, ग्रह और परमाणु — उस एक ही मूल 'प्राण' (परम चेतना) से प्रकट हुए हैं और उसी की ऊर्जा में निरंतर 'एजति' (कांप रहे हैं, स्पंदित हो रहे हैं, गतिमान हैं)! और वह नियम कैसा है? 'महद्भयं वज्रमुद्यतम्' — जैसे किसी राजा का उठाया हुआ वज्र हो जिसके भय से कोई कानून तोड़ने का साहस नहीं कर सकता, वैसे ही परमात्मा का नियम अत्यंत कठोर, अनुशासित और अचूक है। जो इस सत्य को जानते हैं, वे अमर हो जाते हैं। आधुनिक भौतिकी का भी यही निष्कर्ष है कि कोई भी कण स्थिर नहीं है; संपूर्ण ब्रह्मांड 10 की घात -35 मीटर के स्तर पर निरंतर ऊर्जा का एक महा-स्पंदन है। और यह स्पंदन किसी अराजकता में नहीं है; गुरुत्वाकर्षण, विद्युत-चुंबकत्व और क्वांटम नियम इतने अचूक हैं कि यदि इनमें बाल बराबर भी विचलन हो जाए तो पूरा ब्रह्मांड नष्ट हो जाए। यह 'उठाया हुआ वज्र' हमें सिखाता है कि जीवन में अनुशासन, मर्यादा और धर्म का पालन अनिवार्य है। प्रकृति के नियमों का सम्मान करके ही मनुष्य भयमुक्त और अमर हो सकता है।
आज के जीवन में प्रयोग · Practical Application
- **कॉस्मिक अनुशासन का सम्मान**: अपने दैनिक जीवन में अनुशासन, समयबद्धता और नियमों का पालन करें; याद रखें कि पूरा ब्रह्मांड एक अचूक व्यवस्था से चल रहा है। - **ऊर्जा के स्पंदन का अनुभव**: ध्यान में अपने शरीर और श्वास के भीतर चल रहे सूक्ष्म कंपन (प्राण-स्पंदन) को महसूस करें; स्वयं को ब्रह्मांडीय ऊर्जा से जुड़ा जानें। - **परम नियम के सम्मुख समर्पण**: प्रकृति और ईश्वर के नियमों से लड़ने का व्यर्थ प्रयास न करें; उनके साथ सामंजस्य स्थापित करके शांति पाएं।
चिंतन प्रश्न · Self-Reflection

“क्या मेरा जीवन अनुशासनहीनता और अराजकता में भटक रहा है, अथवा मैं उस ब्रह्मांडीय प्राण के पावन स्पंदन और मर्यादा के साथ एकीकार होकर जी रहा हूँ?”

शोध संदर्भResearch context · not scriptureComparative Research Noteशोध टिप्पणी

क्वांटम स्पंदन और अपरिवर्तनीय कॉस्मिक नियम (Quantum Vibrations & Cosmic Order): संपूर्ण ब्रह्मांड ऊर्जा का एक सतत कंपन (स्पंदन) है जो अत्यंत कठोर और अचूक प्राकृतिक नियमों (उठाए हुए वज्र के समान) से संचालित होता है।

A modern parallel offered for reflection. It is not part of the scripture, and it has not been checked against the original sources it may allude to.

स्रोतSources and editionSources and editionस्रोत एवं संस्करण

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Sanskrit edition
Krishna Yajurveda Kathaka Shakha Recension. Adyar Library / SanskritDocuments
Translation
Swami Gambhirananda, Prof. S. Radhakrishnan
Last updated
2026-10-24
Licence note (as recorded)
Sanskrit mūla — public domain (2500+ years old). sanskritdocuments.org publishes digitized text under permissive terms.
पाठ-भेद · Variant readings
Slight verbal variations noted between Anandashram Sanskrit Series no. 7 and BORI manuscripts.

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श्लोक सम्बन्ध एवं पार-ग्रंथ संदर्भ

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Bhagavad Gita 10.12

Bhagavad Gita (श्रीमद्भगवद्गीता)

Sanskrit Text (मूल श्लोक / मंत्र)

परमं ब्रह्म परमं धाम पवित्रं परमं भवान्

Translation / Meaning (भावार्थ)

You are the Supreme Brahman, the supreme abode, the supreme purifier.

Why This is Connected (सम्बन्ध का आधार)

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आगे क्या · What next