कठोपनिषद्

Vallī 2श्लोक 3/2512%

Katha Upanishad 2.3

मूल पाठSource scriptureOriginal Sanskritमूल संस्कृत

स त्वं प्रियान् प्रियरूपांश्च कामानभिध्यायन् नचिकेतोऽत्यस्राक्षीः ।नैतां सृङ्कां वित्तमयीमवाप्तो यस्यां मज्जन्ति बहवो मनुष्याः

अर्थMeaning
अनुवादTranslationLiteral Hindi Translationमूल हिन्दी अनुवाद (अक्षरशः)मूलानुवाद · Literal

हे नचिकेता! तूने प्रिय और प्रिय-रूप कामनाओं पर विचार करके उन्हें त्याग दिया। तूने उस धन-माला को नहीं स्वीकार किया जिसमें बहुत-से मनुष्य डूब जाते हैं।

अक्षरशः अनुवाद — मूल संस्कृत श्लोक के प्रत्येक पद का प्रत्यक्ष अर्थ।

अनुवादTranslationLiteral English TranslationLiteral Text

You, Naciketas, examining the desirable and the seemingly-desirable, have rejected them. You did not accept that wealth-garland in which many men drown.

Direct literal rendering preserving Sanskrit philosophical terminology.

व्याख्याVyakhya
संपादकीय व्याख्याEditorial explanationVyakhya (व्याख्या)व्याख्या

यम नचिकेता की भूरि-भूरि प्रशंसा करता है: "हे नचिकेता! तूने प्रिय और मनभावन लगने वाली समस्त कामनाओं का सूक्ष्म विचार करके परित्याग कर दिया। तूने उस धन-रूपी सांकल (शृङ्खला) को स्वीकार नहीं किया जिसमें अधिकांश मनुष्य डूबकर नष्ट हो जाते हैं।"

विज्ञान एवं आधुनिक उपयोगScience & Modern Application
आधुनिक चिंतनModern reflection · not scriptureContemplative Reflection & Actionआधुनिक चिंतन
आधुनिक संदर्भ · Modern Context
यमराज नचिकेता के आत्म-नियंत्रण पर विस्मित होकर कहते हैं: "हे नचिकेता! मैंने तुम्हें पुत्र, पौत्र, अप्सराएं, साम्राज्य और अकूत संपदा के जो लुभावने प्रलोभन दिए थे, तुमने उन सभी पर गहन विचार करके उन्हें तिनके की तरह त्याग दिया! तुमने उस 'वित्तीय सांकल' (नैतां सृङ्कां वित्तमयीमवाप्तो) को स्वीकार नहीं किया जिसके बंधनों में बंधकर आज अधिकांश मानव जाति तड़प रही है।" 'सृङ्का' शब्द एक ऐसी जंजीर का प्रतीक है जो बाहर से आभूषण जैसी दिखती है किन्तु वस्तुतः मनुष्य की स्वतंत्रता को जकड़ लेती है। आज की ईएमआई, क्रेडिट कार्ड और स्टेटस-सिंबल वाली संस्कृति में मनुष्य इसी 'वित्तमयी सांकल' में स्वेच्छा से बंध चुका है। लोग ऐसी चीजें खरीदने के लिए वह समय और ऊर्जा बेच रहे हैं जो उनका वास्तविक अस्तित्व है। नचिकेता का यह त्याग हमें याद दिलाता है कि सबसे बड़ा धनी वह नहीं है जिसके पास सबसे अधिक वस्तुएं हैं, बल्कि वह है जो वस्तुओं के प्रलोभन को लात मारने का आत्मिक बल रखता है।
आज के जीवन में प्रयोग · Practical Application
- **वित्तीय जंजीरों से मुक्ति**: ऋण लेकर या दिखावे के लिए अनावश्यक विलासिता की वस्तुएं न खरीदें; सादगीपूर्ण जीवन अपनाकर अपनी मानसिक और आर्थिक स्वतंत्रता सुरक्षित रखें। - **प्रलोभनों पर विजय**: जब कोई ऐसा अवसर आए जो आपको बहुत धन दे किन्तु आपके आत्म-सम्मान और समय को छीन ले, तो नचिकेता की तरह निर्भीकता से उसे अस्वीकार करें। - **आंतरिक संप्रभुता का उत्सव**: अपनी पहचान को अपने पद, कार या बैंक बैलेंस से अलग करके अपनी अंतरात्मा की शुद्धि और ज्ञान में प्रतिष्ठित करें।
चिंतन प्रश्न · Self-Reflection

“क्या मैं समाज के द्वारा निर्मित 'वित्तमयी सांकल' में बंधकर अपने जीवन के अमूल्य समय और आत्म-सम्मान को गिरवी तो नहीं रख रहा हूँ?”

शोध संदर्भResearch context · not scriptureComparative Research Noteशोध टिप्पणी

इच्छा-निरोध और आत्म-प्रभुत्व (Willpower & Delayed Gratification): प्रलोभनों को अस्वीकार करने का सामर्थ्य ही मनुष्य के मानसिक स्वास्थ्य और सफलता का सबसे बड़ा भविष्यवक्ता है।

A modern parallel offered for reflection. It is not part of the scripture, and it has not been checked against the original sources it may allude to.

स्रोतSources and editionSources and editionस्रोत एवं संस्करण

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Sanskrit edition
Krishna Yajurveda Kathaka Shakha Recension. Adyar Library / SanskritDocuments
Translation
Swami Gambhirananda, Prof. S. Radhakrishnan
Last updated
2026-10-24
Licence note (as recorded)
Sanskrit mūla — public domain (2500+ years old). sanskritdocuments.org publishes digitized text under permissive terms.
पाठ-भेद · Variant readings
Slight verbal variations noted between Anandashram Sanskrit Series no. 7 and BORI manuscripts.

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आगे क्या · What next