कठोपनिषद्

Vallī 1श्लोक 11/2938%

Katha Upanishad 1.11

मूल पाठSource scriptureOriginal Sanskritमूल संस्कृत

यथा पुरस्ताद् भविता प्रतीत औद्दालकिरारुणिर्मत्प्रसृष्टः ।सुखं रात्रीः शयिता वीतमन्युस्त्वां ददृशिवान्मृत्युमुखात् प्रमुक्तम्

अर्थMeaning
अनुवादTranslationLiteral Hindi Translationमूल हिन्दी अनुवाद (अक्षरशः)मूलानुवाद · Literal

"वैसा ही होगा जैसा पहले था — औद्दालकि आरुणि तुझे पहचानेगा, मेरे द्वारा भेजे जाने पर। वह क्रोध-रहित होकर रात्रियाँ सुख से सोयेगा — मृत्यु के मुख से छूटा हुआ तुझे देखकर।"

अक्षरशः अनुवाद — मूल संस्कृत श्लोक के प्रत्येक पद का प्रत्यक्ष अर्थ।

अनुवादTranslationLiteral English TranslationLiteral Text

(Yama:) 'As before, will Auddālaki Āruṇi (your father) be — recognizing you, sent back by me. He will sleep peacefully at nights, free of anger, seeing you released from Death's mouth.'

Direct literal rendering preserving Sanskrit philosophical terminology.

व्याख्याVyakhya
संपादकीय व्याख्याEditorial explanationVyakhya (व्याख्या)व्याख्या

यम का आश्वासन: पिता पूर्ववत् स्नेह करेंगे, सुखपूर्वक सोएंगे और क्रोध-मुक्त होकर नचिकेता का स्वागत करेंगे।

विज्ञान एवं आधुनिक उपयोगScience & Modern Application
आधुनिक चिंतनModern reflection · not scriptureContemplative Reflection & Actionआधुनिक चिंतन
आधुनिक संदर्भ · Modern Context
यमराज नचिकेता को आश्वस्त करते हैं कि जब वह वापस जाएगा, तो उसके पिता औद्दालकि आरुणि उसे पूर्ववत् पहचानेंगे, उनका क्रोध शांत हो जाएगा और वे रात्रियों में सुखपूर्वक निद्रा ले सकेंगे। 'सुखं रात्रीः शयिता' (सुखपूर्वक रातों को सोना) केवल एक भौतिक क्रिया नहीं, बल्कि अपराध-बोध और अशांति से मुक्ति का सर्वोच्च मनोवैज्ञानिक लक्षण है। जब मनुष्य अपने भीतर किसी प्रियजन के प्रति अपराध-बोध, क्रोध या द्वेष पाले रहता है, तो सबसे पहले उसकी निद्रा और मानसिक शांति छिन जाती है। मनोदैहिक चिकित्सा विज्ञान (Psychosomatic Medicine) यह प्रमाणित करता है कि अनिद्रा, उच्च रक्तचाप और हृदय रोगों की जड़ें प्रायः अनसुलझे पारिवारिक तनावों और मानसिक अंतर्द्वंद्वों में होती हैं। क्षमा और संबंधों का पुनर्मिलन न केवल मानसिक पीड़ा को समाप्त करता है, बल्कि व्यक्ति को गहन शारीरिक विश्राम और नया जीवन प्रदान करता है।
आज के जीवन में प्रयोग · Practical Application
- **अपराध-बोध से मुक्ति (Resolution of Guilt)**: यदि आपसे किसी परिजन का दिल दुखा हो, तो खुलकर बात करके मामले को सुलझाएं ताकि आपका मन रात को चैन से सो सके। - **रिश्तों में पुनर्मिलन की पहल**: किसी टूटे हुए संबंध को जोड़ने के लिए पहले कदम उठाने में संकोच न करें; सुलह से मिलने वाली शांति किसी भी अहंकार से बड़ी है। - **मानसिक शांति हेतु स्वाध्याय**: सोने से पूर्व मन को सभी चिंताओं, विवादों और नकारात्मक विचारों से रिक्त करने का अभ्यास करें।
चिंतन प्रश्न · Self-Reflection

“क्या मेरे मन में कोई ऐसा अनसुलझा तनाव या गिल्ट है जो मेरी रातों की नींद छीन रहा है, और मैं उसे सुलझाने के लिए क्या ठोस कदम उठा सकता हूँ?”

शोध संदर्भResearch context · not scriptureComparative Research Noteशोध टिप्पणी

भावनात्मक समाधान और स्वास्थ्य: मन की शांति और क्षमा-भाव अनिद्रा और तनाव-जनित विकारों को दूर कर व्यक्ति को गहरा शारीरिक व मानसिक स्वास्थ्य प्रदान करते हैं।

A modern parallel offered for reflection. It is not part of the scripture, and it has not been checked against the original sources it may allude to.

स्रोतSources and editionSources and editionस्रोत एवं संस्करण

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Sanskrit edition
Krishna Yajurveda Kathaka Shakha Recension. Adyar Library / SanskritDocuments
Translation
Swami Gambhirananda, Prof. S. Radhakrishnan
Last updated
2026-10-24
Licence note (as recorded)
Sanskrit mūla — public domain (2500+ years old). sanskritdocuments.org publishes digitized text under permissive terms.
पाठ-भेद · Variant readings
Slight verbal variations noted between Anandashram Sanskrit Series no. 7 and BORI manuscripts.

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