कठोपनिषद्

Vallī 1श्लोक 26/2990%

Katha Upanishad 1.26

मूल पाठSource scriptureOriginal Sanskritमूल संस्कृत

श्वोभावा मर्त्यस्य यदन्तकैतत् सर्वेन्द्रियाणां जरयन्ति तेजः ।अपि सर्वं जीवितमल्पमेव तवैव वाहास्तव नृत्यगीते

अर्थMeaning
अनुवादTranslationLiteral Hindi Translationमूल हिन्दी अनुवाद (अक्षरशः)मूलानुवाद · Literal

"हे अन्तक! ये कल तक रहने वाली हैं — इन्द्रियों के तेज को क्षीण करती हैं। पूरा जीवन ही अल्प है। तेरे रथ तेरे रहें, तेरे नृत्य-गीत भी।"

अक्षरशः अनुवाद — मूल संस्कृत श्लोक के प्रत्येक पद का प्रत्यक्ष अर्थ।

अनुवादTranslationLiteral English TranslationLiteral Text

(Naciketas:) 'O Death, these things last only until tomorrow — they wear out the splendor of all senses. Even the longest life is short. Keep your chariots, your dance and song.'

Direct literal rendering preserving Sanskrit philosophical terminology.

व्याख्याVyakhya
संपादकीय व्याख्याEditorial explanationVyakhya (व्याख्या)व्याख्या

नचिकेता का ऐतिहासिक उत्तर: "हे अंतक! ये सारे भोग कल तक रहने वाले (क्षणिक) हैं, और ये मनुष्य की समस्त इन्द्रियों के तेज को क्षीण कर देते हैं। पूरा जीवन ही अत्यंत अल्प है! तुम्हारे ये रथ, नृत्य और गीत तुम्हारे पास ही रहें!"

विज्ञान एवं आधुनिक उपयोगScience & Modern Application
आधुनिक चिंतनModern reflection · not scriptureContemplative Reflection & Actionआधुनिक चिंतन
आधुनिक संदर्भ · Modern Context
नचिकेता का यह उत्तर विश्व के दार्शनिक और आध्यात्मिक इतिहास के सबसे तेजस्वी और निर्भीक उद्घोषों में से एक है: "श्वोभावा मर्त्यस्य यदन्तकैतत् सर्वेंद्रियाणां जरयंति तेजः। अपि सर्वं जीवितमल्पमेव तवैव वाहास्तव नृत्यगीते॥" — हे यमराज! आपके द्वारा दिए जाने वाले ये सारे भोग केवल 'श्वोभावा' (कल तक रहने वाले, अत्यंत क्षणभंगुर) हैं! और इससे भी भयंकर बात यह है कि ये भोग मनुष्य की समस्त इन्द्रियों के तेज और ओज को घिसकर नष्ट कर देते हैं। यहाँ तक कि यदि पूरा जीवन भी मिल जाए, तो वह काल के महाप्रवाह में अत्यंत अल्प है! अतः आपके ये रथ, ये नर्तकियाँ और ये संगीत आपके पास ही रहें, मुझे इनकी तनिक भी आवश्यकता नहीं है! आधुनिक न्यूरोबायोलॉजी नचिकेता के इस कथन की शत-प्रतिशत पुष्टि करती है। जब कोई व्यक्ति लगातार संवेदी सुखों और उत्तेजनाओं में डूबा रहता है, तो उसके डोपामाइन रिसेप्टर्स 'डाउनरेग्युलेट' (downregulate) हो जाते हैं, जिससे अवसाद, थकान, चिड़चिड़ापन और संवेदी शिथिलता (hedonic burnout) उत्पन्न होती है। भोग इन्द्रियों को तृप्त नहीं करते, बल्कि उन्हें जीर्ण-शीर्ण और पंगु बना देते हैं। नचिकेता का यह विवेक आधुनिक मनुष्य को वासनाओं के दलदल से बाहर खींचने वाली संजीवनी बूटी है।
आज के जीवन में प्रयोग · Practical Application
- **भोगों की क्षणभंगुरता का बोध**: जब भी कोई विलासिता आपको आकर्षित करे, तो याद रखें कि इसका सुख 'श्वोभावा' (कल समाप्त होने वाला) है; इसके पीछे भागकर अपना आत्म-तेज न गंवाएं। - **इन्द्रिय-ऊर्जा का संरक्षण**: अपनी दृष्टि, श्रवण और जननेंद्रियों की ऊर्जा को व्यर्थ के उत्तेजक उपभोग में क्षय होने से बचाएं; इस ऊर्जा को मेधा और संकल्प में रूपांतरित करें। - **स्पष्ट 'ना' कहने का साहस**: अपने जीवन के मूल ध्येय से भटकाने वाले हर प्रस्ताव और प्रलोभन को नचिकेता की निर्भीकता के साथ अस्वीकार करना सीखें।
चिंतन प्रश्न · Self-Reflection

“क्या मैं क्षणिक इन्द्रिय-सुखों की वेदी पर अपनी चेतना, ऊर्जा और अमूल्य समय की आहुति तो नहीं दे रहा हूँ?”

शोध संदर्भResearch context · not scriptureComparative Research Noteशोध टिप्पणी

न्यूरोबायोलॉजिकल क्षरण: अत्यधिक और अनियंत्रित संवेदी उपभोग तंत्रिका तंत्र को क्लांत (burnout) कर देता है और डोपामाइन रिसेप्टर्स को कुंद बना देता है।

A modern parallel offered for reflection. It is not part of the scripture, and it has not been checked against the original sources it may allude to.

स्रोतSources and editionSources and editionस्रोत एवं संस्करण

Content status

  • Original text
  • Translation · from the source archive

No independent human review is recorded for this verse yet. How this site is made.

Sanskrit edition
Krishna Yajurveda Kathaka Shakha Recension. Adyar Library / SanskritDocuments
Translation
Swami Gambhirananda, Prof. S. Radhakrishnan
Last updated
2026-10-24
Licence note (as recorded)
Sanskrit mūla — public domain (2500+ years old). sanskritdocuments.org publishes digitized text under permissive terms.
पाठ-भेद · Variant readings
Slight verbal variations noted between Anandashram Sanskrit Series no. 7 and BORI manuscripts.

Found a mistake?

आगे क्या · What next