कठोपनिषद्

Vallī 1श्लोक 24/2983%

Katha Upanishad 1.24

मूल पाठSource scriptureOriginal Sanskritमूल संस्कृत

एतत्तुल्यं यदि मन्यसे वरं वृणीष्व वित्तं चिरजीविकां च ।महाभूमौ नचिकेतस्त्वमेधि कामानां त्वा कामभाजं करोमि

अर्थMeaning
अनुवादTranslationLiteral Hindi Translationमूल हिन्दी अनुवाद (अक्षरशः)मूलानुवाद · Literal

"यदि तू इसके समान कोई वर मानता है, तो उसे माँग — धन और दीर्घ जीवन। हे नचिकेता! बड़ी भूमि पर निवास कर — मैं तुझे सब कामनाओं का स्वामी बना दूँगा।"

अक्षरशः अनुवाद — मूल संस्कृत श्लोक के प्रत्येक पद का प्रत्यक्ष अर्थ।

अनुवादTranslationLiteral English TranslationLiteral Text

'If you think any boon is equal to (your question), ask it — wealth and long life. Be on the great earth, Naciketas; I will make you a master of all desires.'

Direct literal rendering preserving Sanskrit philosophical terminology.

व्याख्याVyakhya
संपादकीय व्याख्याEditorial explanationVyakhya (व्याख्या)व्याख्या

यम का दूसरा प्रलोभन: यदि इसके समान कोई और वरदान समझते हो तो मांग लो — अकूत धन और दीर्घ जीवन। हे नचिकेता! इस विशाल पृथ्वी पर तुम समस्त कामनाओं के स्वामी बन जाओ!

विज्ञान एवं आधुनिक उपयोगScience & Modern Application
आधुनिक चिंतनModern reflection · not scriptureContemplative Reflection & Actionआधुनिक चिंतन
आधुनिक संदर्भ · Modern Context
यमराज अपने प्रलोभन को और विस्तृत करते हुए कहते हैं: "यदि तुम इसके समान कोई अन्य वरदान भी सोचते हो, तो वह भी मांग लो — विपुल धन-दौलत और चिरंजीवी जीवन। इस पृथ्वी पर तुम समस्त कामनाओं के उपभोगकर्ता बन जाओ, मैं तुम्हारी हर एक इच्छा को सिद्ध कर दूँगा!" यह आधुनिक उपभोक्तावादी स्वप्न (consumerist paradise) की पराकाष्ठा है — जहाँ असीमित क्रय-शक्ति हो, जो चाहो वह तुरंत उपलब्ध हो, और उपभोग करने के लिए लंबा जीवन भी हो। किन्तु आधुनिक मनोविज्ञान का 'हेडोनिक ट्रेडमिल' (Hedonic Treadmill) सिद्धांत यह सिद्ध करता है कि मनुष्य भौतिक वस्तुओं से चाहे जितना सुख प्राप्त कर ले, उसका मस्तिष्क बहुत शीघ्र उसका अभ्यस्त हो जाता है और पुनः उसी असंतोष व शून्यता की स्थिति में लौट आता है। यमराज का यह प्रस्ताव वस्तुतः उस सोने के पिंजरे के समान है जो देखने में अत्यंत आकर्षक है किन्तु जिसके भीतर चेतना सदा के लिए बंदी बनकर रह जाती है।
आज के जीवन में प्रयोग · Practical Application
- **हेडोनिक चक्रव्यूह से मुक्ति**: यह समझें कि नई वस्तुएं, कार, गैजेट्स या संपत्तियां कुछ दिनों का रोमांच दे सकती हैं, स्थायी आनंद नहीं; अपनी प्राथमिकताओं को आंतरिक शांति पर केंद्रित करें। - **इच्छाओं की सीमा तय करना**: अपनी अनिवार्य आवश्यकताओं और अंधी तृष्णा के बीच भेद करें; 'अति-उपभोग' (overconsumption) से अपने जीवन और पर्यावरण को बचाएं। - **सच्ची संप्रभुता का अनुभव**: संसार की वस्तुओं का उपभोग करने में नहीं, बल्कि उन वस्तुओं की पराधीनता से मुक्त होने में ही वास्तविक स्वतंत्रता निहित है।
चिंतन प्रश्न · Self-Reflection

“क्या मैं अपनी इच्छाओं और भौतिक कामनाओं का स्वामी हूँ, अथवा मेरी अनियंत्रित कामनाएँ मुझे अपनी उंगलियों पर नचा रही हैं?”

शोध संदर्भResearch context · not scriptureComparative Research Noteशोध टिप्पणी

उपभोक्तावाद और इच्छाओं का असीमित विस्तार: भौतिक कामनाओं की पूर्ति कभी भी मन को शांत नहीं करती, बल्कि वह तृष्णा की ज्वाला को और अधिक भड़का देती है।

A modern parallel offered for reflection. It is not part of the scripture, and it has not been checked against the original sources it may allude to.

स्रोतSources and editionSources and editionस्रोत एवं संस्करण

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Sanskrit edition
Krishna Yajurveda Kathaka Shakha Recension. Adyar Library / SanskritDocuments
Translation
Swami Gambhirananda, Prof. S. Radhakrishnan
Last updated
2026-10-24
Licence note (as recorded)
Sanskrit mūla — public domain (2500+ years old). sanskritdocuments.org publishes digitized text under permissive terms.
पाठ-भेद · Variant readings
Slight verbal variations noted between Anandashram Sanskrit Series no. 7 and BORI manuscripts.

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आगे क्या · What next