कठोपनिषद्

Vallī 1श्लोक 23/2979%

Katha Upanishad 1.23

मूल पाठSource scriptureOriginal Sanskritमूल संस्कृत

शतायुषः पुत्रपौत्रान् वृणीष्व बहून् पशून् हस्तिहिरण्यमश्वान् ।भूमेर्महदायतनं वृणीष्व स्वयं च जीव शरदो यावदिच्छसि

अर्थMeaning
अनुवादTranslationLiteral Hindi Translationमूल हिन्दी अनुवाद (अक्षरशः)मूलानुवाद · Literal

"सौ वर्ष की आयु वाले पुत्र-पौत्र माँग; बहुत-से पशु, हाथी, सोना, और घोड़े। पृथ्वी का विशाल साम्राज्य माँग। और तू स्वयं भी जितने वर्ष जीना चाहे, जी।"

अक्षरशः अनुवाद — मूल संस्कृत श्लोक के प्रत्येक पद का प्रत्यक्ष अर्थ।

अनुवादTranslationLiteral English TranslationLiteral Text

(Yama:) 'Ask for sons and grandsons of a hundred years; many cattle, elephants, gold, and horses. Ask for a great expanse of earth. Live yourself as many years as you wish.'

Direct literal rendering preserving Sanskrit philosophical terminology.

व्याख्याVyakhya
संपादकीय व्याख्याEditorial explanationVyakhya (व्याख्या)व्याख्या

यम का पहला प्रलोभन: सौ वर्ष जीने वाले पुत्र-पौत्र, विपुल पशु, हाथी, सोना, घोड़े और पृथ्वी का विशाल साम्राज्य मांग लो; तुम स्वयं जितने वर्ष चाहो उतने वर्ष जियो!

विज्ञान एवं आधुनिक उपयोगScience & Modern Application
आधुनिक चिंतनModern reflection · not scriptureContemplative Reflection & Actionआधुनिक चिंतन
आधुनिक संदर्भ · Modern Context
यमराज अब नचिकेता की निष्ठा को डिगाने के लिए सांसारिक प्रलोभनों का सबसे विशाल जाल बिछाते हैं: "हे नचिकेता! तुम सौ वर्ष जीने वाले पुत्र और पौत्र मांग लो, अनगिनत गायें, हाथी, सोना और अरबी घोड़े मांग लो; पृथ्वी का एक विशाल साम्राज्य ले लो, और तुम स्वयं जितने वर्ष जीना चाहो उतने वर्ष जीओ!" यह प्रलोभन मनुष्य के तीन सबसे गहरे जैविक और मनोवैज्ञानिक प्रेरकों — संतति (procreation), संपत्ति (wealth) और सत्ता (power/longevity) — पर सीधा प्रहार था। आज की आधुनिक सभ्यता भी मनुष्य को इन्हीं तीन आकर्षणों में उलझाए रखती है — बैंक बैलेंस, रियल एस्टेट, विलासिता के साधन और लंबी उम्र। बाजार और मीडिया हर क्षण हमें यह विश्वास दिलाने का प्रयास करते हैं कि यदि हमारे पास यह सब है, तो जीवन सफल है। यमराज यह देखना चाहते हैं कि क्या नचिकेता की सत्य की प्यास केवल एक बौद्धिक कौतूहल है जो भौतिक ऐश्वर्य को देखकर पिघल जाएगी, अथवा वह एक सच्चा मुमुक्षु है जो इन मायावी सुखों से परे देख सकता है।
आज के जीवन में प्रयोग · Practical Application
- **प्रलोभनों के पीछे के सत्य को पहचानें**: जब जीवन में पद, प्रतिष्ठा और भौतिक सुखों के बड़े प्रस्ताव आएं, तो स्वयं से पूछें — "क्या यह मुझे मेरे आत्मिक सत्य और स्वतंत्रता की ओर ले जाएगा या मुझे बांध देगा?" - **जैविक प्रेरणाओं पर नियंत्रण**: संपत्ति, काम और सत्ता के आवेगों को जीवन का अंतिम लक्ष्य न बनने दें; वे जीवन निर्वाह के साधन हैं, साध्य नहीं। - **आंतरिक स्वतंत्रता की रक्षा**: बाह्य ऐश्वर्य के बदले कभी भी अपने विवेक, सत्य और आत्म-सम्मान का सौदा न करें।
चिंतन प्रश्न · Self-Reflection

“यदि आज मुझे असीम धन, सत्ता और लंबी आयु का वरदान मिले, तो क्या मैं आत्म-ज्ञान और सत्य के मार्ग को त्याग कर उस ऐश्वर्य में डूब जाऊँगा?”

शोध संदर्भResearch context · not scriptureComparative Research Noteशोध टिप्पणी

भौतिक सुखों का प्रलोभन और डोपामाइन जाल: धन, संतान, सत्ता और दीर्घायु की अभिलाषा मानव मन के सबसे आदिम और शक्तिशाली जैविक प्रेरक (biological drives) हैं।

A modern parallel offered for reflection. It is not part of the scripture, and it has not been checked against the original sources it may allude to.

स्रोतSources and editionSources and editionस्रोत एवं संस्करण

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Sanskrit edition
Krishna Yajurveda Kathaka Shakha Recension. Adyar Library / SanskritDocuments
Translation
Swami Gambhirananda, Prof. S. Radhakrishnan
Last updated
2026-10-24
Licence note (as recorded)
Sanskrit mūla — public domain (2500+ years old). sanskritdocuments.org publishes digitized text under permissive terms.
पाठ-भेद · Variant readings
Slight verbal variations noted between Anandashram Sanskrit Series no. 7 and BORI manuscripts.

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आगे क्या · What next