कठोपनिषद्

Vallī 1श्लोक 13/2945%

Katha Upanishad 1.13

मूल पाठSource scriptureOriginal Sanskritमूल संस्कृत

स त्वमग्निं स्वर्ग्यमध्येषि मृत्यो प्रब्रूहि त्वं श्रद्दधानाय मह्यम् ।स्वर्गलोका अमृतत्वं भजन्त एतद् द्वितीयेन वृणे वरेण

अर्थMeaning
अनुवादTranslationLiteral Hindi Translationमूल हिन्दी अनुवाद (अक्षरशः)मूलानुवाद · Literal

"हे मृत्यो! तू उस स्वर्ग्य अग्नि को जानता है। मुझे — श्रद्धावान् को — उसकी विधि सिखा। स्वर्ग-वासी अमरत्व प्राप्त करते हैं। यह मैं दूसरा वर माँगता हूँ।"

अक्षरशः अनुवाद — मूल संस्कृत श्लोक के प्रत्येक पद का प्रत्यक्ष अर्थ।

अनुवादTranslationLiteral English TranslationLiteral Text

'O Death, you know the fire that leads to heaven. Teach it to me — I am faithful. The heaven-dwellers attain immortality. This I ask as the second boon.'

Direct literal rendering preserving Sanskrit philosophical terminology.

व्याख्याVyakhya
संपादकीय व्याख्याEditorial explanationVyakhya (व्याख्या)व्याख्या

दूसरा वरदान: नचिकेता स्वर्ग्य अग्नि के रहस्य को जानने की प्रार्थना करता है जो मनुष्य को अमरत्व और उच्च लोकों की प्राप्ति कराती है।

विज्ञान एवं आधुनिक उपयोगScience & Modern Application
आधुनिक चिंतनModern reflection · not scriptureContemplative Reflection & Actionआधुनिक चिंतन
आधुनिक संदर्भ · Modern Context
नचिकेता का दूसरा वरदान 'नाचिकेत अग्नि' का विज्ञान सीखना है: "हे मृत्यो! आप उस अग्नि विद्या को भलीभाँति जानते हैं जो मनुष्य को उच्चतर लोकों में प्रतिष्ठित करती है। मुझ श्रद्धालु को उस विद्या का उपदेश दीजिए।" वैदिक दर्शन में 'अग्नि' केवल भौतिक ज्वाला नहीं है, बल्कि वह ब्रह्मांडीय रूपांतरण की ऊर्जा (entropy reversal & transformation) का प्रतीक है। नचिकेता कोई व्यक्तिगत भोग या स्वर्ग की विलासिता नहीं मांग रहा, बल्कि वह उस वैज्ञानिक प्रक्रिया और विद्या (technology of consciousness) को जानना चाहता है जो स्थूल पदार्थ को उच्चतर चेतना में रूपांतरित कर सके। यह वैज्ञानिक दृष्टिकोण आज के शोधकर्ताओं और विचारकों के लिए अत्यंत प्रासंगिक है। जब भी आप किसी उच्चतर लक्ष्य या सफलता की आकांक्षा रखें, तो केवल फल की भीख न मांगें; बल्कि उस विद्या, प्रक्रिया और कार्यप्रणाली को सीखने का पुरुषार्थ करें जिससे वह परिणाम स्वाभाविक रूप से घटित होता है। प्रक्रिया की प्रामाणिकता ही फल की सिद्धि है।
आज के जीवन में प्रयोग · Practical Application
- **प्रक्रिया पर ध्यान (Master the Process)**: जीवन में किसी भी सफलता की कामना करते समय उसके पीछे के विज्ञान, कौशल और अनुशासन को गहराई से सीखें; शार्टकट से बचें। - **श्रद्धावान शिक्षार्थी बनें**: ज्ञान प्राप्ति के लिए नचिकेता जैसी विनम्रता, एकाग्रता और लगन धारण करें; योग्य गुरु और विशेषज्ञ के मार्गदर्शन का सम्मान करें। - **ऊर्जा का ऊर्ध्वगमन**: अपनी प्राण-ऊर्जा और समय को व्यर्थ की गपशप और वासनाओं में नष्ट करने के बजाय रचनात्मक, बौद्धिक और आध्यात्मिक उन्नयन में रूपांतरित करें।
चिंतन प्रश्न · Self-Reflection

“क्या मैं केवल सफलताओं और सुखद परिणामों के सपने देख रहा हूँ, अथवा मैं उस कठोर विद्या, अनुशासन और आंतरिक अग्नि को आत्मसात करने को तत्पर हूँ जो उस फल को जन्म देती है?”

शोध संदर्भResearch context · not scriptureComparative Research Noteशोध टिप्पणी

ऊर्जा और रूपान्तरण का विज्ञान: अग्नि रूपांतरण का प्रतीक है; स्थूल ऊर्जा को सूक्ष्म चेतना और उच्चतर व्यवस्था में बदलना ही यज्ञीय अग्नि का मूल तत्त्व है।

A modern parallel offered for reflection. It is not part of the scripture, and it has not been checked against the original sources it may allude to.

स्रोतSources and editionSources and editionस्रोत एवं संस्करण

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Sanskrit edition
Krishna Yajurveda Kathaka Shakha Recension. Adyar Library / SanskritDocuments
Translation
Swami Gambhirananda, Prof. S. Radhakrishnan
Last updated
2026-10-24
Licence note (as recorded)
Sanskrit mūla — public domain (2500+ years old). sanskritdocuments.org publishes digitized text under permissive terms.
पाठ-भेद · Variant readings
Slight verbal variations noted between Anandashram Sanskrit Series no. 7 and BORI manuscripts.

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आगे क्या · What next