स तया श्रद्धया युक्तस्तस्याराधनमीहते।लभते च ततः कामान्मयैव विहितान् हि तान्
sa tayā śhraddhayā yuktas tasyārādhanam īhate labhate cha tataḥ kāmān mayaiva vihitān hi tān
he
with that
faith
endowed with
of that
worship
tries to engange in
obtains
and
from that
desires
by me
alone
granted
certainly
those
अर्थMeaning
उस (मेरे द्वारा दृढ़ की हुई) श्रद्धासे युक्त होकर वह मनुष्य (सकामभावपूर्वक) उस देवताकी उपासना करता है और उसकी वह कामना पूरी भी होती है; परन्तु वह कामना-पूर्ति मेरे द्वारा विहित की हुई होती है।
अक्षरशः अनुवाद — मूल संस्कृत श्लोक के प्रत्येक पद का प्रत्यक्ष अर्थ।
Endowed with that faith, he worships that form and thereby gets the objects of his desire, granted in reality by Me alone.
Direct literal rendering preserving Sanskrit philosophical terminology.
व्याख्याVyakhya
पिछले श्लोक के भाव को भगवान यहाँ आगे बढ़ाते हैं, और एक ऐसा रहस्य खोलते हैं जो हर पूजा के पीछे छिपा है। 'स तया श्रद्धया युक्तस्तस्याराधनमीहते', उस श्रद्धा से युक्त होकर वह व्यक्ति उस देवता की आराधना करता है, 'लभते च ततः कामान्मयैव विहितान्हि तान्', और उससे अपनी कामनाएँ प्राप्त करता है, जो वास्तव में मेरे द्वारा ही विहित होती हैं। 'मयैव विहितान्', मेरे द्वारा ही विहित, यह वाक्यांश इस श्लोक की कुंजी है। जब कोई भक्त किसी देवता से कुछ माँगता है और वह इच्छा पूरी होती है, तो वह मानता है कि उस देवता ने दिया। भगवान कहते हैं कि वास्तव में वह फल उन्हीं के विधान से आता है; देवता तो उनकी शक्ति के माध्यम हैं। जैसे किसी राज्य में अनेक अधिकारी होते हैं, पर उनके सारे अधिकार राजा से ही आते हैं। यह समझ एक गहरी विनम्रता और एक गहरी एकता लाती है। सारी पूजाएँ, सारी आराधनाएँ, अंततः एक ही स्रोत तक पहुँचती हैं। कोई भी सच्ची प्रार्थना व्यर्थ नहीं जाती, क्योंकि उसका उत्तर देने वाला एक ही है। इस श्लोक को पढ़कर अपनी किसी पूरी हुई इच्छा को स्मरण कीजिए, और उसके लिए उस परम स्रोत के प्रति कृतज्ञता व्यक्त कीजिए जिसने वह संभव किया। कृतज्ञता वह द्वार है जो छोटी इच्छाओं से बड़े प्रेम तक ले जाता है।
स्रोतSources and editionSources and editionस्रोत एवं संस्करण
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- Sanskrit edition
- Gita Press Edition (गोरखपुर संवत् 2080). Gita Press, Gorakhpur / Muktabodha Digital Archive
- Translation
- Jayadayal Goyandka (Hindi), Swami Gambhirananda & Swami Sivananda (English)
- Source
- github.com/gita/gita
- Last updated
- 2026-10-23
- Licence note (as recorded)
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- पाठ-भेद · Variant readings
- Variant readings collated from Anandashram (Pune) and Bhandarkar Oriental Research Institute (BORI) critically edited texts.
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