न मे विदुः सुरगणाः प्रभवं न महर्षयः।अहमादिर्हि देवानां महर्षीणां च सर्वशः
na me viduḥ sura-gaṇāḥ prabhavaṁ na maharṣhayaḥ aham ādir hi devānāṁ maharṣhīṇāṁ cha sarvaśhaḥ
neither
my
know
the celestial gods
origin
nor
the great sages
I
the source
certainly
of the celestial gods
of the great seers
also
in every way
अर्थMeaning
मेरे प्रकट होनेको न देवता जानते हैं और न महर्षि; क्योंकि मैं सब प्रकारसे देवताओं और महर्षियोंका आदि हूँ।
अक्षरशः अनुवाद — मूल संस्कृत श्लोक के प्रत्येक पद का प्रत्यक्ष अर्थ।
Neither the host of gods nor the great sages know My power; for I am indeed the source of the gods and the great sages.
Direct literal rendering preserving Sanskrit philosophical terminology.
व्याख्याVyakhya
भगवान अपनी विभूतियों का वर्णन आरम्भ करने से पहले एक ऐसा सत्य कहते हैं जो मनुष्य की सारे बौद्धिक गर्व को शान्त कर देता है। 'न मे विदुः सुरगणाः प्रभवं न महर्षयः', मेरे प्रकट होने के रहस्य को न देवता जानते हैं, न महर्षि, 'अहमादिर्हि देवानां महर्षीणां च सर्वशः', क्योंकि मैं सब प्रकार से देवताओं और महर्षियों का भी आदि हूँ। इस श्लोक में एक सुन्दर तर्क छिपा है। कोई भी अपने उत्पन्न होने से पहले की बात नहीं जान सकता। पुत्र अपने पिता का बचपन नहीं देख सकता, क्योंकि वह तब था ही नहीं। देवता और महर्षि, जो ज्ञान और शक्ति में सबसे ऊँचे हैं, वे भी भगवान से ही उत्पन्न हुए हैं। इसलिए वे उनके मूल को कैसे जानें? जैसे लहर समुद्र को पूरा नहीं जान सकती, क्योंकि वह स्वयं समुद्र से उठी है। 'प्रभवम्', उत्पत्ति या प्रकट होना, यह शब्द बताता है कि भगवान का अवतरण, उनका सृष्टि में प्रकट होना, एक ऐसा रहस्य है जिसे केवल वे ही जानते हैं। पर इसमें निराशा नहीं, विनम्रता का एक पाठ है। यदि देवता और महर्षि भी उन्हें पूरा नहीं जानते, तो हमें अपनी समझ पर गर्व करने का कोई कारण नहीं। यह श्लोक आपको सिखाता है कि भगवान को बुद्धि से पकड़ने का प्रयत्न छोड़कर, उन्हें प्रेम से अनुभव करने का प्रयत्न कीजिए। जो जाना नहीं जा सकता, उसे पाया अवश्य जा सकता है।
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- Sanskrit edition
- Gita Press Edition (गोरखपुर संवत् 2080). Gita Press, Gorakhpur / Muktabodha Digital Archive
- Translation
- Jayadayal Goyandka (Hindi), Swami Gambhirananda & Swami Sivananda (English)
- Source
- github.com/gita/gita
- Last updated
- 2026-10-24
- Licence note (as recorded)
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- पाठ-भेद · Variant readings
- Variant readings collated from Anandashram (Pune) and Bhandarkar Oriental Research Institute (BORI) critically edited texts.
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