श्रीमद्भगवद्गीता

Vibhooti Yogaश्लोक 27/4264%

Bhagavad Gita 10.27

मूल पाठSource scriptureOriginal Sanskritमूल संस्कृत

उच्चैःश्रवसमश्वानां विद्धि माममृतोद्भवम्।ऐरावतं गजेन्द्राणां नराणां च नराधिपम्

अर्थMeaning
अनुवादTranslationLiteral Hindi Translationमूल हिन्दी अनुवाद (अक्षरशः)मूलानुवाद · Literal

घोड़ोंमें अमृतके साथ समुद्रसे प्रकट होनेवाले उच्चैःश्रवा नामक घोड़ेको, श्रेष्ठ हाथियोंमें ऐरावत नामक हाथीको और मनुष्योंमें राजाको मेरी विभूति मानो।

अक्षरशः अनुवाद — मूल संस्कृत श्लोक के प्रत्येक पद का प्रत्यक्ष अर्थ।

अनुवादTranslationLiteral English TranslationLiteral Text

Of horses, know Me to be Uccaihsravas, the nectar-born. Of lordly elephants, I am Airavata, and of men, I am the monarch.

Direct literal rendering preserving Sanskrit philosophical terminology.

व्याख्याVyakhya
संपादकीय व्याख्याEditorial explanationVyakhya (व्याख्या)व्याख्याAI-drafted · editor-approved

भगवान अब पशुओं और मनुष्यों में अपनी विभूति बताते हैं। 'उच्चैःश्रवसमश्वानां विद्धि माममृतोद्भवम्', घोड़ों में अमृत के साथ समुद्र-मन्थन से प्रकट हुए उच्चैःश्रवा को मेरा रूप जानो; 'ऐरावतं गजेन्द्राणाम्', श्रेष्ठ हाथियों में ऐरावत को; 'नराणां च नराधिपम्', और मनुष्यों में राजा को। उच्चैःश्रवा और ऐरावत, दोनों समुद्र-मन्थन से प्रकट हुए थे। वह मन्थन एक महान प्रयत्न था, जिसमें देवता और असुर दोनों लगे, और उसी से अमृत निकला। 'अमृतोद्भवम्', अमृत के साथ उत्पन्न, यह शब्द बताता है कि ये विभूतियाँ एक दिव्य प्रयत्न का फल हैं। जो श्रेष्ठ है, वह प्रायः किसी गहरे मन्थन से ही प्रकट होता है। फिर 'नराधिपम्', मनुष्यों में राजा। यहाँ राजा को भगवान की विभूति कहा गया है, पर इसका अर्थ यह नहीं कि हर शासक दिव्य है। विभूति राजा के उस धर्म में है जिससे वह प्रजा की रक्षा करता है, न्याय करता है, दुर्बल का सहारा बनता है। जब शासक इस धर्म से हट जाता है, तो वह केवल पद रह जाता है, विभूति नहीं। अर्जुन, जो स्वयं क्षत्रिय और भावी शासक वंश का है, इस वचन में अपना दायित्व सुन सकता है। यह श्लोक आपको सिखाता है कि आपको जहाँ भी कोई अधिकार मिले, परिवार में, कार्यक्षेत्र में या समाज में, उसे भगवान का दिया हुआ मानकर दूसरों की सेवा में लगाइए। तभी वह अधिकार विभूति बनता है।

स्रोतSources and editionSources and editionस्रोत एवं संस्करण

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Sanskrit edition
Gita Press Edition (गोरखपुर संवत् 2080). Gita Press, Gorakhpur / Muktabodha Digital Archive
Translation
Jayadayal Goyandka (Hindi), Swami Gambhirananda & Swami Sivananda (English)
Last updated
2026-10-24
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पाठ-भेद · Variant readings
Variant readings collated from Anandashram (Pune) and Bhandarkar Oriental Research Institute (BORI) critically edited texts.

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