सर्वभूतस्थमात्मानं सर्वभूतानि चात्मनि।ईक्षते योगयुक्तात्मा सर्वत्र समदर्शनः
sarva-bhūta-stham ātmānaṁ sarva-bhūtāni chātmani īkṣhate yoga-yuktātmā sarvatra sama-darśhanaḥ
situated in all living beings
Supreme Soul
all
living beings
and
in God
sees
one united in consciousness with God
everywhere
equal vision
अर्थMeaning
सब जगह अपने स्वरूपको देखनेवाला और ध्यानयोगसे युक्त अन्तःकरणवाला योगा अपने स्वरूपको सम्पूर्ण प्राणियोंमें स्थित देखता है और सम्पूर्ण प्राणियोंको अपने स्वरूपमें देखता है।
अक्षरशः अनुवाद — मूल संस्कृत श्लोक के प्रत्येक पद का प्रत्यक्ष अर्थ।
He whose mind is fixed in Yoga sees reality everywhere; he sees his Self as abiding in all beings and all beings in his Self.
Direct literal rendering preserving Sanskrit philosophical terminology.
व्याख्याVyakhya
ध्यान की परिपक्वता में साधक की दृष्टि का सबसे बड़ा परिवर्तन होता है, और भगवान यहाँ उस नई दृष्टि का वर्णन करते हैं। 'सर्वभूतस्थमात्मानं सर्वभूतानि चात्मनि', वह अपने आप को सब प्राणियों में स्थित देखता है, और सब प्राणियों को अपने आप में, 'ईक्षते योगयुक्तात्मा सर्वत्र समदर्शनः', योगयुक्त अन्तःकरण वाला वह व्यक्ति सर्वत्र समान दृष्टि से देखता है। इस श्लोक में दो दिशाओं में देखना है, और दोनों मिलकर एक पूर्ण दृष्टि बनाते हैं। पहली दिशा: 'सर्वभूतस्थमात्मानम्', अपने को सबमें देखना। जब वह किसी पेड़ को देखता है, किसी पशु को, किसी अपरिचित मनुष्य को, तो उसमें अपनी ही चेतना को झलकते पाता है। दूसरी दिशा: 'सर्वभूतानि चात्मनि', सबको अपने में देखना। उसके भीतर इतना विस्तार हो गया है कि सारी सृष्टि उसमें समा जाती है, जैसे आकाश सब कुछ अपने में समेटे हुए है। यह दृष्टि ध्यान का केवल व्यक्तिगत फल नहीं; यह संसार के प्रति व्यवहार को बदल देती है। जो हर प्राणी में स्वयं को देखता है, वह किसी को कष्ट कैसे दे सकता है? उसकी करुणा स्वाभाविक हो जाती है, किसी नियम से नहीं, उस अनुभूति से। ध्यान का सच्चा फल केवल भीतर की शांति नहीं, बाहर के प्रति प्रेम भी है। आज किसी प्राणी को इस भाव से देखिए कि उसमें भी वही जीवन है जो आपमें है; उस क्षण की आत्मीयता को अनुभव कीजिए।
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- Sanskrit edition
- Gita Press Edition (गोरखपुर संवत् 2080). Gita Press, Gorakhpur / Muktabodha Digital Archive
- Translation
- Jayadayal Goyandka (Hindi), Swami Gambhirananda & Swami Sivananda (English)
- Source
- github.com/gita/gita
- Last updated
- 2026-10-22
- Licence note (as recorded)
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- पाठ-भेद · Variant readings
- Variant readings collated from Anandashram (Pune) and Bhandarkar Oriental Research Institute (BORI) critically edited texts.
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